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  • भारत ने बांग्लादेश को हराकर बनाई U19 वर्ल्ड कप में जगह, पाकिस्तान का संघर्ष जारी

    भारत ने बांग्लादेश को हराकर बनाई U19 वर्ल्ड कप में जगह, पाकिस्तान का संघर्ष जारी

    नई दिल्ली।  U19 World Cup Updated Points Table- आयुष म्हात्रे की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने शनिवार, 17 जनवरी को बांग्लादेश पर रोमांचक जीत दर्ज करते हुए अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के अगले राउंड यानी सुपर-6 के लिए क्वालीफाई किया। टीम इंडिया टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहीं 16 टीमों में से सुपर-6 का टिकट हासिल करने वाली पहली टीम बनी है। भारत ने बांग्लादेश से पहले यूएसए को धूल चटाई थी। टीम इंडिया ने बांग्लादेश के खिलाफ पहले बैटिंग करते हुए वैभव सूर्यवंशी की 72 और अभिज्ञान कुंदू की 80 रनों की पारी के दम पर 238 रन बोर्ड पर लगाए थे। बारिश से बाधित इस मुकाबले में बांग्लादेश को 165 रनों का आसान सा लक्ष्य मिला था, मगर विहान मल्होत्रा की कातिलाना गेंदबाजी के दम पर भारत ने जीत दर्ज की।

    विहान मल्होत्रा ने मात्र 4 ओवर में ही मैच को पलट दिया। उन्होंने मात्र 14 रन खर्च कर बांग्लादेश के 4 विकेट हासिल कर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    इसके अलावा अंडर-19 वर्ल्ड कप में शनिवार को श्रीलंका ने जापान पर 203 रनों से धमाकेदार जीत दर्ज की और ऑस्ट्रेलिया को पछाड़ते हुए पॉइंट्स टेबल में पहला स्थान हासिल किया।

    ग्रुप-ए में भारत, ग्रुप-बी में इंग्लैंड, ग्रुप-सी में श्रीलंका और ग्रुप-डी में वेस्टइंडीज टॉप पर है।

    ICC U19 वर्ल्ड कप ग्रुप-ए पॉइंट्स टेबल

    टीम मैच जीत हार नो रिजल्ट पॉइंट्स नेट रन रेट
    भारत 2 2 0 0 4 +2.025
    न्यूजीलैंड 0 0 0 0 0 0
    बांग्लादेश 1 0 1 0 0 -0.621
    यूएसए 1 0 1 0 0 -3.144
    ICC U19 वर्ल्ड कप ग्रुप-बी पॉइंट्स टेबल
    टीम मैच जीत हार नो रिजल्ट पॉइंट्स नेट रन रेट
    इंग्लैंड 1 1 0 0 2 +0.740
    जिम्बाब्वे 1 0 0 1 1 0
    स्कॉटलैंड 1 0 0 1 1 0
    पाकिस्तान 0 0 0 0 0 -0.740
    ICC U19 वर्ल्ड कप ग्रुप-सी पॉइंट्स टेबल
    टीम मैच जीत हार नो रिजल्ट पॉइंट्स नेट रन रेट
    श्रीलंका 1 1 0 0 2 +4.060
    ऑस्ट्रेलिया 1 1 0 0 2 +1.275
    आयरलैंड 1 0 1 0 0 -1.275
    जापान 1 0 1 0 0 -4.060
    ICC U19 वर्ल्ड कप ग्रुप-डी पॉइंट्स टेबल
    टीम मैच जीत हार नो रिजल्ट पॉइंट्स नेट रन रेट
    वेस्टइंडीज 1 1 0 0 2 +3.465
    अफगानिस्तान 1 1 0 0 2 +0.560
    साउथ अफ्रीका 1 0 1 0 0 -0.560
    तंजानिया 1 0 1 0 0 -3.465

    आज यानी रविवार, 18 जनवरी को अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में तीन मुकाबले खेले जाने हैं। वेस्टइंडीज की टीम अफगानिस्तान से तो इंग्लैंड जिम्बाब्वे से और न्यूजीलैंड की टीम यूएसए से भिड़ेगी। वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के पास सुपर-6 के लिए क्वालीफाई करने का मौका होगा।

  • जबलपुर संभाग में वाहन फिटनेस का 'संकट': एक एजेंसी के भरोसे हजारों गाड़ियां, दूर-दराज के जिलों से आना पड़ेगा जबलपुर

    जबलपुर संभाग में वाहन फिटनेस का 'संकट': एक एजेंसी के भरोसे हजारों गाड़ियां, दूर-दराज के जिलों से आना पड़ेगा जबलपुर


    जबलपुर । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मोर्थ के एक नए आदेश ने जबलपुर संभाग के हजारों वाहन मालिकों और चालकों की रातों की नींद उड़ा दी है। नए निर्देशों के अनुसार, अब व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर बंद कर दी गई है। अब संभाग के सभी 8 जिलों के वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए जबलपुर स्थित एकमात्र ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर निर्भर रहना होगा। इस फैसले ने न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि दूर-दराज के जिलों से आने वाले आवेदकों के लिए यह “जी का जंजाल” बन गया है।

    8 जिलों का बोझ और महज एक टेस्टिंग स्टेशन जबलपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों के हजारों वाहनों का जिम्मा अब अकेले जबलपुर की एक निजी एजेंसी के भरोसे है। परेशानी की बात यह है कि वर्तमान में शहर में केवल एक ही एटीएस कार्यशील है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एक ही केंद्र पर संभाग भर के हजारों वाहनों की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच समय पर पूरी हो पाएगी? जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से भारी भीड़ और काम में देरी होने के कारण भ्रष्टाचार और व्यावहारिक समस्याएं बढ़ना तय है।

    1,000 की फीस और 12,000 का खर्च: वाहन चालकों का फूटा गुस्सा इस नए आदेश का सबसे ज्यादा असर वाहन संचालकों की जेब पर पड़ रहा है। बालाघाट, छिंदवाड़ा और डिंडौरी जैसे जिलों से जबलपुर की दूरी 200 से 210 किलोमीटर तक है। वाहन चालकों का कहना है कि फिटनेस सर्टिफिकेट की निर्धारित सरकारी फीस भले ही महज 1,000 रुपये के आसपास हो, लेकिन लंबी दूरी तय कर जबलपुर आने-जाने का खर्च कमर तोड़ रहा है। ईंधन डीजल , ड्राइवर-खलासी का भत्ता, रास्ते में रुकने का खर्च और एक-दो दिन का समय बर्बाद होने के कारण कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुँच रहा है।

    व्यवसाय पर संकट और सुरक्षा के दावे एक तरफ सरकार का तर्क है कि ऑटोमेटेड टेस्टिंग से वाहनों की जांच अधिक सटीक होगी और सड़क हादसों में कमी आएगी, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वाहन संचालकों का कहना है कि यदि सरकार को यह व्यवस्था लागू ही करनी थी, तो पहले प्रत्येक जिले में एटीएस केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए थे। बिना तैयारी के थोपे गए इस नियम से परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोग खासे परेशान हैं। फिलहाल, जबलपुर के एकमात्र एटीएस पर वाहनों का दबाव बढ़ना शुरू हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में आवेदकों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है।

  • CJI सूर्यकांत के सामने ही गुहार लगने लगीं ममता बनर्जी, बोली-संविधान, लोकतंत्र को बचा लीजिए

    CJI सूर्यकांत के सामने ही गुहार लगने लगीं ममता बनर्जी, बोली-संविधान, लोकतंत्र को बचा लीजिए


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने CJI सूर्यकांत से देश के संविधान, लोकतंत्र और न्यायपालिका की रक्षा करने का शनिवार को आग्रह किया। कलकत्ता हाई कोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में बनर्जी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत से देश के लोगों को ‘‘एजेंसियों’’ द्वारा गलत तरीके से निशाना बनाये जाने से बचाने का भी आह्वान किया।
    बिना विस्तृत जानकारी दिए उन्होंने कहा, ‘कृपया देश के संविधान, लोकतंत्र, न्यायपालिका, इतिहास और भूगोल को विनाश से बचाएं।’ बनर्जी ने कहा, ‘‘आप (प्रधान न्यायाधीश) हमारे संविधान के संरक्षक हैं, हम आपके कानूनी संरक्षण में हैं। कृपया जनता की रक्षा करें।’’
    न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
    मीडिया ट्रायल को रोकना होगा

    बनर्जी ने कहा, ‘आजकल मामलों के निपटारे से पहले ही ‘मीडिया ट्रायल’ का चलन है; इसे भी रोकना होगा।’ एक जनसभा के बाद अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में, श्री बनर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर को एक ऐसी भूमि के रूप में चित्रित किया जिसने औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष से लेकर 2011 के राजनीतिक उथल-पुथल तक बार-बार दमन के खिलाफ आवाज उठायी है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल के शासन को समाप्त किया था।

    उन्होंने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के लंबे राजनीतिक प्रतिरोध के इतिहास का भी इस मौके पर जिक्र किया। बनर्जी ने लिखा, “अविभाजित मेदिनीपुर की धरती ने ब्रिटिश साम्राज्य की कठोर पकड़ को चुनौती देते हुए अत्याचार, शोषण और अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध की गर्जना की थी। उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए, पश्चिम मेदिनीपुर के लोग 2011 में लोकतंत्र की बहाली के लिए अग्रणी भूमिका में खड़े हुए।”

    राणा संकल्प सभा में भारी जनसमूह की उपस्थिति का जिक्र करते हुए, तृणमूल नेता ने जोर देकर कहा कि यह भीड़ जनता के उस संकल्प को दर्शाती है जो विभाजन और भेदभाव की उन ताकतों को हराना चाहती है, जिन्हें उन्होंने ‘बंगाल-विरोधी विभाजनकारी ताकतें’ बताया।

  • MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले

    MP: हरदा में 300 स्टूडेंट्स होस्टल की दीवार फांद DM से मिलने के लिए पैदल ही निकले


    हरदा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के हरदा जिले (Harda district) में एकलव्य आवासीय विद्यालय (Eklavya Residential School) के 300 से अधिक स्टूडेंट खराब खाने और सुविधाओं से परेशान होकर शनिवार सुबह हॉस्टल की दीवार फांदकर कलेक्टर (Collector) से मिलने निकल पड़े। कड़ाके की ठंड में वे करीब 40 किलोमीटर दूर कलेक्ट्रेट की ओर पैदल ही चल दिए। जब छात्र लगभग 8 से 9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब जिला प्रशासन को इसकी खबर मिली। इसके बाद जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने हाईवे पर ही छात्रों को रोका और उनकी समस्याओं को सुलझाने का भरोसा देकर उन्हें बसों से वापस स्कूल भेजा।


    डीएम ने बीच में रोका और शिकायतें सुनीं

    अधिकारियों ने बताया कि जब छात्र लगभग 8-9 किलोमीटर पैदल चल चुके थे तब प्रशासन एक्टिव हुआ और जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने सोडलपुर के पास नेशनल हाईवे पर ही उन्हें रोक लिया। उन्होंने छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया और उन्हें बसों के जरिए वापस स्कूल भिजवाया। स्टूडेंट का आरोप है कि स्कूल में काफी समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी है खाने की क्वालिटी बहुत खराब है और वहां साफ-सफाई की हालत भी बहुत बुरी है।


    क्या की शिकायतें?

    छात्रों का आरोप है कि स्कूल में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि वहां न तो खाना अच्छा मिलता है और न ही साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। छात्रों ने यह भी कहा कि जब वे इन समस्याओं की शिकायत करते हैं तो हॉस्टल की प्रिंसिपल उन्हें मानसिक रूप से परेशान करती हैं। एक छात्र ने पत्रकारों को बताया कि बार-बार शिकायत करने पर भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तब उन्हें मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा।


    डीएम ने दिया भरोसा

    स्टूडेंट ने जिलाधिकारी से बातचीत के दौरान प्राचार्य को हटाए जाने की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने स्टूडेंट को भरोसा दिया कि खाने की गुणवत्ता जांच करने के लिए एक पालक समिति बनाई जाएगी और छात्रों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक ‘संपर्क समिति’ भी गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्राचार्य के खिलाफ भी छात्रों की शिकायतें सामने आई हैं। बच्चों की परेशानी को देखते हुए मैं स्वयं मौके पर पहुंचा।


    मामले की होगी जांच

    जिलाधिकारी सिद्धार्थ जैन ने कहा कि छात्रों को समझाकर वापस भेज दिया गया है। पूरे मामले की जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, कांग्रेस के स्थानीय विधायक अभिजीत शाह ने हास्टल में बुनियादी सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें रसोई में रखी खाद्य सामग्रियों में कई खामियां मिलीं। जब पीने के पानी की टंकी की जांच की गई तो उसके अंदर पेड़ की जड़ें मिलीं। उन्होंने इसका एक वीडियो भी साझा किया। बता दें कि मध्य प्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

  • तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    तमिलनाडु चुनाव : तमिलनाडु कांग्रेस ने आलाकमान पर छोड़ दिया फाइनल फैसला

    नई दिल्‍ली। कांग्रेस ने शनिवार देर रात चली मैराथन बैठक के बाद घोषणा करते हुए कहा कि तमिलनाडु में पार्टी की चुनावी रणनीति और संभावित सत्ता-साझाकरण गठबंधनों पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने की। इसमें तमिलनाडु और पुडुचेरी के 40 से अधिक वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया।

    चर्चा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने इन वार्ताओं को “रचनात्मक और पार्टी को मजबूत करने पर केंद्रित” बताया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व ने सामूहिक और व्यक्तिगत, दोनों तरह के सत्र आयोजित किए ताकि राज्य के नेता “स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त कर सकें।”

    हालांकि गठबंधन या सत्ता-साझाकरण की मांगों के विशिष्ट विवरण स्पष्ट नहीं किए गए, लेकिन श्री वेणुगोपाल ने पुष्टि की कि राज्य इकाई की चिंताओं को विस्तार से सुना गया है। उन्होंने कहा, “बैठक ने सर्वसम्मति से माननीय कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता को चुनावी रणनीति से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

    पार्टी हाई कमान पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के लोगों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर निर्णय लेगा।”

    पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और सार्वजनिक अटकलों को रोकने के लिए हाई कमान ने बयानों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। श्री वेणुगोपाल ने जोर देकर कहा कि सभी नेताओं को अनुशासित रहना चाहिए और सोशल मीडिया सहित किसी भी मंच पर व्यक्तिगत शिकायतों या अटकलों को साझा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “नेताओं को एक सुर में बोलने की सलाह दी गई है।”

    पुडुचेरी के संबंध में नेतृत्व ने घोषणा की कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी 21 जनवरी से एक बड़ी ‘पदयात्रा’ शुरू करेगी। यह मार्च पूरे राज्य को कवर करेगा, जिसमें वरिष्ठ राष्ट्रीय नेतृत्व के भी शामिल होने की संभावना है। यह बैठक तमिलनाडु में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच हुई है, जहां स्थानीय इकाइयां कथित तौर पर शासन और सीटों के बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही हैं।

  • असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    असम में पीएम मोदी के दौरे का उत्साह, लोग बोले-काजीरंगा कॉरिडोर से विकास को मिलेगा नया रास्ता

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को असम के नगांव जिले में 6,950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे। इस कार्यक्रम को लेकर असम में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आज के समय में ‘मोदी मतलब बिजनेस’ और ‘मोदी मतलब विकास’ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में असम में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का काम तेजी से हो रहा है, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प भी साकार होता है।”

    विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में असम को देश के टॉप-5 राज्यों में शामिल करना हमारा लक्ष्य है और प्रधानमंत्री लगातार इसमें मदद कर रहे हैं। शर्मा ने कहा, “पीएम मोदी ने अब तक करीब 36 बार असम का दौरा किया है और पूर्वोत्तर में लगभग 75 बार आए हैं। उनका दृष्टिकोण हमेशा दीर्घकालिक और विकासोन्मुखी होता है।”

    स्थानीय लोगों का कहना है कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर न केवल आने-जाने में सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। “यह प्रोजेक्ट असम के लिए एक नया युग लेकर आएगा और यातायात को बेहतर बनाएगा,” स्थानीय व्यवसायी ने कहा।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग प्रधानमंत्री का स्वागत करने पहुंचे। एक महिला ने कहा, “यह गर्व की बात है कि इतने सालों बाद पीएम मोदी असम आ रहे हैं। उनके काम और असम के प्रति उनके प्रेम के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।”

    भाजपा विधायक दिप्लू रंजन शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का विज़न असली विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार पर केंद्रित है। उनका यह कार्यक्रम न केवल असम के लोगों के लिए सुविधाजनक होगा, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी असम में 6,950 करोड़ रुपये के काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन करेंगे और दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य में विकास और रोजगार को बढ़ावा देंगे।

  • शहडोल में नेशनल हाईवे पर धू-धू कर जला कोयले से भरा ट्रक: टक्कर के बाद भड़की आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान

    शहडोल में नेशनल हाईवे पर धू-धू कर जला कोयले से भरा ट्रक: टक्कर के बाद भड़की आग, ड्राइवर ने कूदकर बचाई जान


    शहडोल । जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नेशनल हाईवे-43 पर शनिवार-रविवार की दरमियानी रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। धुरवार टोल प्लाजा के पास कोयले से लदे एक ट्रक की टक्कर आगे चल रहे वाहन से हो गई, जिसके तुरंत बाद ट्रक के इंजन में भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते ट्रक का अगला हिस्सा आग के गोले में तब्दील हो गया। गनीमत रही कि चालक ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और ट्रक से कूदकर अपनी जान बचा ली।

    टक्कर के बाद इंजन में भड़की लपटें जानकारी के अनुसार, कोयला लोड ट्रक बुढ़ार से कटनी की ओर जा रहा था। रात करीब 12 बजे धुरवार टोल प्लाजा के समीप ट्रक अपने आगे चल रहे एक ट्रैक चेसिस वाहन से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक के इंजन में शॉर्ट सर्किट हुआ और अचानक आग लग गई। टोल प्लाजा पर तैनात कर्मचारियों ने जैसे ही ट्रक से उठती आग की लपटें देखीं, उन्होंने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचित किया।

    मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू सूचना मिलते ही सोहागपुर थाना पुलिस दमकल वाहनों के साथ मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि आग ट्रक के इंजन तक ही सीमित रही और पीछे लदे कोयले तक नहीं पहुँच पाई, अन्यथा एक बड़ा धमाका या भीषण क्षति हो सकती थी। इस अग्निकांड में ट्रक का इंजन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है।

    हाइवे पर थमी रफ्तार, लगा लंबा जाम मुख्य हाईवे पर ट्रक में आग लगने और बीच सड़क पर वाहन के खड़े होने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। शहडोल-बुढ़ार हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और जाम की स्थिति निर्मित हो गई। पुलिस ने आग बुझने के बाद क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त ट्रक को सड़क किनारे करवाया और यातायात को सुचारू रूप से बहाल कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

  • उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर

    उद्धव ठाकरे का दावा : BMC में अब भी हो सकता है उलटफेर


    मुंबई। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनाव में बीजेपी और शिवसेना शिेंदे गुट की बड़ी जीत के बाद उद्धव ठाकरे को करारा झटका लगा है। हालांकि वह अब भी हार स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि मेयर उनका ही बनेगा। उनके इस बयान के बाद शिंदे गुट के पार्षदों को रिजॉर्ट भेज दिया गया।
    देश की सबसे अमीर महानगरपालिका की 89 सीटों पर अकेले बीजेपी ने ही कब्जा किया है। ऐसे में पूरी संभावना है कि मेयर बीजेपी का होगा। लेकिन उद्धव ठाकरे के दावे ने गहमा-गहमी बढ़ा दी है।

    पिछले 25 साल से बीएमसी में अविभाजित शिवसेना का कब्जा था। हालांकि शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद समीकरण बदल गए. इस बार के चुनाव में उद्धव सेना को कुल 65 सीटें मिली हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। अगर दोनों की सीटें जोड़ दी जाएं तो उनकी 94 सीटें हो जाती हैं। वहीं बीजेपी की 89 ही सीटें हैं। ऐसे में अगर शिवसेना बंटी ना होती तो बीजेपी उससे पीछे रह जाती।

    शिवसेना (UBT) नेता सुनील प्रभु ने कहा कि शिवसेना के बंटने की वजह से ही बीजेपी की जीत हो सकती है। पू्र्व कांग्रेस नेता संजय झा ने कहा कि अब भी शिवसेना की ताकत का लोहा सबको मानना चाहिए। अगर शिवसेना एक होती तो बीएमसी में बीजेपी का दांव ही ना लग पाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दोनों शिवसेना सम्मान बचाना चाहती हैं तो साथ आएं और बीजेपी को विपक्ष में बैठा दें।

    उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी पार्टी का मेयर अब भी बन सकता है। इसके बाद शिंदे ने अपने पार्षदों को रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया। बीजेपी और शिंदे सेना की कुल सीटें 118 हैं। वहीं 227 सीटों वाली महानगरपालिका में बहुमत का जादुई आंकड़ा 114 है। इस बार अजित पवार ने अकेले ही चुनाव लड़ा था।

    उन्होंने कुल तीन सीटें जीती हैं। अगर उनका समर्थन मिलता है तो यह संख्या 121 हो जाएगी।

    दूसरी ओर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की कुल सीटें 71 हैं। इसके अलावा एक सीट एनसीपी (शरद पवार) ने जीती है। कांग्रेस अगर उनके साथ आती है तो 24 सीटें और जुड़ जाएंगी। अगर बीजेपी विरोधी बाकी दल जैसे कि ऐआईएमआईएम और समाजवादी पार्टी का भी साथ मिलता है तो यह संख्या 106 हो जाएगी। अब बहुमत में केवल 8 सीटों की कमी रह जाती है।

    बतादें कि दो दशकों के बाद बाल ठाकरे के बेटे उद्धव और भतीजे राज ठाकरे साथ आए थे। इसके बाद भी उनके साथ आने का फायदा नहीं मिल पाया। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह ठाकरे परिवार की बड़ी हार है। हालांकि एकनाथ शिंदे की पार्टी से तुलना करें तो उद्धव की पार्टी काफी आगे है। उद्धव ठाकरे ने 65 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में बीएमसी में उद्धव ठाकरे मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर

    ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर


    नई दिल्ली।
    फरीदाबाद (Faridabad) के अल फलाह विश्वविद्यालय (Al Falah University) ने अन्य विशेषज्ञों के साथ तीन डॉक्टरों की नियुक्ति (Appointment Three Doctors) बिना किसी पुलिस जांच या वेरिफिकेशन के की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) की जांच में यह बात सामने आई है कि इन 3 डॉक्टरों में से दो को एनआईए ने गिरफ्तार किया है जबकी तीसरा डॉक्टर उमर उन नबी नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिला के पास हुए धमाके में कथित तौर पर आत्मघाती हमलावर के रूप में शामिल था।


    इन्हें बनाया मुख्य आरोपी

    विश्वविद्यालय के मालिक के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान ED ने कई वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों के बयानों को अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। इस मामले में अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और सभी संस्थानों को चलाने वाले अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इन दोनों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।


    जमीन और इमारत जब्त

    ईडी ने लगभग 260 पन्नों की चार्जशीट में सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट पर छात्रों की फीस से अवैध तरीके से पैसा इकट्ठा करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन पर अपने संस्थानों की मान्यता और कागजों के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में केस चलाने की मांग की गई है। ईडी ने बताया कि उसने फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है जिसकी कीमत लगभग 140 करोड़ रुपये है।


    नियमित शिक्षक दिखाकर ली एनएमसी से मंजूरी

    अदालत ने अभी तक ईडी की चार्जशीट का संज्ञान नहीं लिया है। अधिकारियों ने चार्जशीट के आधार पर जानकारी दी है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर केवल कागजों पर तैनात थे। उन्हें 22 दिन पंच या हफ्ते में दो दिन अटेंडेंस जैसी शर्तों पर नियमित शिक्षक दिखाकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से जरूरी मंजूरी ली गई थी ताकि मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधा देखभाल इकाई बिना किसी बाधा के चलती रहे।


    बिना पुलिस सत्यापन आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति

    ईडी ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार का बयान दर्ज किया है। रजिस्ट्रार ने बयान में कहा है कि मेडिकल कॉलेज के आरोपी डॉक्टरों को बिना किसी पुलिस सत्यापन के नियुक्त किया गया था। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने कहा है कि जो डॉक्टर आतंक से जुड़े मामलों में शामिल बताए जा रहे हैं वे उनके कार्यकाल में नियुक्त किए गए। इनमें अक्टूबर 2021 से डॉ. मुजम्मिल गनई, अक्टूबर 2021 से डॉ. शाहीन सईद और मई 2024 से डॉ. उमर नबी शामिल हैं।


    जवाद अहमद सिद्दीकी ने नियुक्ति को दी मंजूरी

    कुलपति और प्राचार्य ने एजेंसी को बताया कि नियुक्तियों की सिफारिश विश्वविद्यालय के मानव संसाधन प्रमुख ने की थी। इन्हें चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने मंजूरी दी थी। धमाके की साजिश के आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति के समय पुलिस वेरिफिकेशन नहीं किया गया। चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपने बयान में कहा है कि उनका किसी आतंकवादी संगठन से कोई संबंध नहीं है।


    कई डॉक्टर अस्थायी नियुक्त

    ईडी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों की नियुक्ति पर सिद्धिकी का कंट्रोल था। कुछ को फेक एक्सपीरियंस लेटर भी दिए गए। सिद्धिकी ने जून 2025 में मेडिकल कॉलेज की अंतिम एनएमसी जांच के दौरान भी धोखा देना जारी रखा। ईडी ने निष्कर्ष निकाला कि कई डॉक्टर केवल नियामक निरीक्षण की जरूरत के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए थे। डॉक्टरों के रोजगार की शर्तें भी कई तरह से फर्जी थीं।


    फेक मरीज किए भर्ती

    आरोपपत्र में संलग्न कुछ दस्तावेज और वीडियो चैट से पता चलता है कि एनएमसी निरीक्षण से लगभग 3 हफ्ते पहले अस्पताल में मरीज, स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। रिकॉर्ड से पता चला कि निरीक्षण से पहले फेक मरीज भर्ती किए गए। सिद्धिकी ने धनशोधन मामले में प्रमुख भूमिका निभायी। इस मामले में कथित अपराध से प्राप्त राशि के 493.24 करोड़ रुपये होने का पता चला है जो छात्रों से वार्षिक ट्यूशन और परीक्षा शुल्क के रूप में वसूल की गई।

  • कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने ड्रैगन की धरती से ट्रंप को दिखाई आंखें

    कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने ड्रैगन की धरती से ट्रंप को दिखाई आंखें

    वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के बीच यूरोपीय देशों के अलावा अब अमेरिका के पड़ोसी देश कनाडा ने भी आंखें दिखानी शुरू कर दी है। चीन की यात्रा पर पहुंचे कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साफ किया कि ओटावा किसी भी सूरत में ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान का समर्थन नहीं करता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कनाडा और चीन के बीच चर्चा हुई है। इस पर दोनों देशों के विचार एक जैसे हैं।

    बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के संबोधित करते हुए कार्नी ने अपने नाटो सहयोगी देश डेनमार्क को अपने पूर्ण समर्थन का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि नाटो का सामूहिक रक्षा सिद्धांत किसी अपरिवर्तनीय है। उन्होंने कहा, “हम डेनमार्क के साथ नाटो के साझेदार हैं।

    हमारी पूर्ण साझेदारी कायम है। अनुच्छेद 5 और अनुच्छेद 2 के तहत हमारे दायित्व कायम हैं और हम उनका पूरी तरह से समर्थन करते हैं।”

    कार्नी ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ग्रीनलैंड के भविष्य पर चर्चा की थी और कहा कि संप्रभुता के मुद्दे पर उनके विचार काफी हद तक एक जैसे हैं। उन्होंने कहा, “मैंने ग्रीनलैंड की स्थिति और डेनमार्क के लोगों की संप्रभुता के बारे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की है। कनाडा और चीन के विचार इस मामले पर काफी हद तक एक समान हैं।” कनाडा के रुख को दोहराते हुए, कार्नी ने कहा कि डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को बाहरी दबाव के बिना अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार होना चाहिए।

    आपको बता दें, कनाडा के प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने खुले आम अन्य देशों को धमकाते हुए कहा था कि अगर कोई देश उनके ग्रीनलैंड समझौते के खिलाफ जाता है, या उसका समर्थन नहीं करता है, तो उसके ऊपर वह टैरिफ लगा सकते हैं।

    दरअसल, ट्रंप बार-बार अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क देते हुए ग्रीन लैंड को अमेरिकी प्रभुत्व में लाने की वकालत कर रहे हैं। इस मामले में उन्होंने सैन्य शक्ति के प्रयोग का विकल्प भी खुला रखा है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और अब डेनमार्क की जमीन पर अमेरिका की नजर से यूरोपीय देश पिसते नजर आ रहे हैं।
    ग्रीनलैंड को खरीदना चाहता है अमेरिका: रुबियो

    ट्रंप के अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी खुले तौर पर ग्रीनलैंड को लेकर कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र को खरीदना चाहता है। हालांकि उनके इस प्रस्ताव को ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों प्रशासनों ने सिरे से खारिज कर दिया था। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी अधिग्रहण से नाटो का अंत हो जाएगा।

    ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि अमेरिकी नियंत्रण के बिना ग्रीनलैंड रूस या चीन के प्रभाव में आ सकता है, जिसे आर्कटिक विशेषज्ञों ने निराधार बताया है। हालांकि चीन खुद को “निकट-आर्कटिक राज्य” कहता है, विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र में बीजिंग की बढ़ती उपस्थिति में कनाडा के पास और अलास्का के आसपास रूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं।

    रूस और अमेरिका के बीच पिसते यूरोपीय देश

    दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की गोदी में बैठे यूरोपीय देशों ने अब रूस के साथ सीधी बातचीत का विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। कनाडा के पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फैड्रिक मर्त्ज ने भी रूस के साथ बातचीत करने के प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही है।
    कनाडा और ट्रंप का विवाद

    अमेरिका और कनाडा दोनों ही देश एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ संबंध साझा करते हैं। हालांकि, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार उन्होंने ऐसी बात कही है, जो कनाडाई लीडरशिप के लिए असहज करने वाली स्थिति की वजह बनी है। पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री को ट्रंप बार-बार गवर्नर कहकर संबोधित करते रहे हैं। उनका तात्पर्य कनाडा को भी अमेरिका में 51वें राज्य को रूप में समाहित करने से था।