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  • दक्षिण कोरिया ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का पहला सफल परीक्षण किया

    दक्षिण कोरिया ने 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार वाले हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन का पहला सफल परीक्षण किया

    नई दिल्ली ।दक्षिण कोरिया ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन (एचजीवी) का पहला सफल परीक्षण किया है। देश में विकसित इस मिसाइल ने परीक्षण के दौरान 6,174 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से उड़ान भरी और रास्ते में अपनी दिशा बदलते हुए समुद्र में निर्धारित लक्ष्य को सटीक निशाना बनाया। इस परीक्षण को दक्षिण कोरिया की तकनीकी प्रगति और स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, इसके साथ ही पूर्वी एशिया में मिसाइल तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।

    इस परीक्षण को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भी देखा। उन्होंने हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन को कोरियाई प्रायद्वीप में महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर अचानक और सटीक हमला करने में सक्षम रणनीतिक संपत्ति बताया। राष्ट्रपति की इस टिप्पणी से इस हथियार की रणनीतिक भूमिका का संकेत मिलता है। दक्षिण कोरिया अब इस तकनीक को और विकसित करने की तैयारी कर रहा है, ताकि अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत बनाया जा सके।

    परीक्षण के दौरान हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन ने बूस्टर से अलग होने के बाद निर्धारित उड़ान मार्ग पूरा किया। इसके बाद यह ऊंचाई से नीचे उतरा और उड़ान के दौरान क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर दिशाओं में बदलाव करते हुए लक्ष्य तक पहुंचा। इस तरह की उड़ान प्रक्रिया में तेज गति के साथ दिशा बदलने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है। मिसाइल ने निर्धारित लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाकर अपनी उड़ान और नियंत्रण प्रणालियों के प्रदर्शन को प्रदर्शित किया।

    इस परीक्षण का उद्देश्य केवल मिसाइल की गति और लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता जांचना नहीं था। इसके जरिए उच्च तापमान सहन करने वाली सामग्री, मार्गदर्शन प्रणाली और नियंत्रण तकनीक का भी परीक्षण किया गया। हाइपरसोनिक गति पर उड़ने वाले हथियारों के विकास में इन तकनीकों की अहम भूमिका होती है। दक्षिण कोरिया की ओर से स्वदेशी स्तर पर इस प्रणाली को विकसित करना उसकी रक्षा संबंधी तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

    हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों से अलग तरीके से उड़ान भरते हैं। ये उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकते हैं और अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर तेज गति से आगे बढ़ सकते हैं। इनके मार्ग में बदलाव करने की क्षमता के कारण इन्हें रोकना अधिक कठिन हो सकता है। यही विशेषताएं इन्हें आधुनिक सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण बनाती हैं। हालांकि, किसी हथियार को रोकने की वास्तविक क्षमता उसकी तकनीकी विशेषताओं और संबंधित रक्षा प्रणालियों पर भी निर्भर करती है।

    दक्षिण कोरिया इस मिसाइल परीक्षण को अपनी किल चेन और प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा मान रहा है। किल चेन उसकी ऐसी रणनीतिक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य संभावित खतरे की पहचान कर महत्वपूर्ण लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई करने की क्षमता विकसित करना है। इस दिशा में हाइपरसोनिक तकनीक का विकास देश की स्वतंत्र रक्षा क्षमता को मजबूत करने के प्रयासों से जुड़ा है।

    यह परीक्षण उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य क्षमताओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकती है। दक्षिण कोरिया का सफल परीक्षण पूर्वी एशिया में हथियारों की प्रतिस्पर्धा को और तेज करने की आशंका पैदा करता है। ऐसे में इस तकनीक का आगे होने वाला विकास और उसका रणनीतिक इस्तेमाल क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

  • फौजी पिता की बेटी नेहा बोरा कैसे बनीं Gen-Z की चर्चित आवाज, थिएटर से जेएनयू और छात्र राजनीति तक का सफर

    फौजी पिता की बेटी नेहा बोरा कैसे बनीं Gen-Z की चर्चित आवाज, थिएटर से जेएनयू और छात्र राजनीति तक का सफर

    नई दिल्ली ।नेहा बोरा इन दिनों छात्र राजनीति और युवा आंदोलनों में अपनी सक्रिय भूमिका के कारण चर्चा में हैं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में वह छात्र अधिकारों और विभिन्न मुद्दों पर होने वाले प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। हाल के दिनों में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली की सड़कों पर उनकी गतिविधियों के वीडियो सामने आए। आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन, कनॉट प्लेस और विजय चौक के आसपास पुलिस से बचते हुए आगे बढ़ने के उनके वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुए हैं। इन घटनाओं के बाद नेहा बोरा की पृष्ठभूमि और छात्र राजनीति तक पहुंचने का उनका सफर भी चर्चा का विषय बना है।

    नेहा का जन्म उत्तराखंड के खटीमा में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे और नौकरी के कारण परिवार को अलग-अलग स्थानों पर रहना पड़ता था। इस वजह से नेहा का बचपन विभिन्न सैन्य छावनियों और अलग-अलग सांस्कृतिक परिवेशों में बीता। उन्होंने दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल में पूरी की। उनके मुताबिक, स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनकी वैचारिक समझ विकसित होने लगी थी। इसी समय वह कम्युनिस्ट विचारक चारू मजूमदार, कवि पाब्लो नेरुदा और लेखिका अरुंधति रॉय के विचारों तथा रचनाओं से परिचित हुईं। इनसे उनके सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को आकार मिला।

    राजनीति में सक्रिय होने से पहले नेहा का जुड़ाव रंगमंच से रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से परफॉर्मेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में पीएचडी के लिए दाखिला लिया। वह दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर समूह संगवारी के साथ भी लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। उनके अनुसार, रंगमंच ने उन्हें अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि और विचारधारा वाले लोगों को समझने की दृष्टि दी। उनका मानना है कि किसी किरदार को निभाने से उसके सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को समझने में मदद मिलती है।

    जेएनयू में पढ़ाई के दौरान नेहा वामपंथी छात्र राजनीति से जुड़ीं और AISA में सक्रिय हुईं। वर्ष 2018 से वह विश्वविद्यालय परिसर में छात्र आंदोलनों और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भाग ले रही थीं। संगठन में अपनी सक्रियता और नेतृत्व की भूमिका के जरिए वह राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद तक पहुंचीं। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान जुलाई में नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान और व्यापक हुई। उन्होंने जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली के विरोध में आयोजित प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

    इस आंदोलन के दौरान नेहा ने अपने साथियों मनीष कुमार और अमीन अमितोज के साथ 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। प्रदर्शन में पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई जानी-मानी हस्तियां और सांसद भी शामिल हुए थे। लंबे उपवास के दौरान नेहा का वजन लगभग आठ किलोग्राम कम होने की जानकारी दी गई। आंदोलन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। इस विरोध के बाद नेहा को छात्र आंदोलनों में सक्रिय एक चर्चित युवा चेहरे के रूप में पहचान मिली।

    अगस्त में वह झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से संबंधित कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों में भी शामिल हुईं। झारखंड विधानसभा के पास प्रदर्शन के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई थी। इसके बाद भी उन्होंने छात्र मुद्दों पर अपनी सक्रियता जारी रखी।

    हाल में नेहा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों में भाग लिया। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में उनके नेतृत्व की भूमिका रही। इस दौरान “ज्ञानेश, बस हो गया, ब्रो!” जैसे नारे और पोस्टर भी सामने आए। दिल्ली में पुलिस बैरिकेड पार करने और अलग-अलग स्थानों पर पहुंचने से जुड़े उनके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि वह पेशेवर धावक नहीं हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग ने उन्हें दौड़ने के लिए प्रेरित किया। हिरासत के दौरान बस के अंदर से बनाए गए उनके वीडियो भी चर्चा में रहे। सेना में अधिकारी रहे पिता से जुड़ा पारिवारिक परिवेश, रंगमंच का अनुभव और जेएनयू में छात्र राजनीति से जुड़ाव उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख पहलू हैं।

  • जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर किए गए बदलाव के बाद जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस निर्णय पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं। दास ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और इस तरह के फैसले से शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

    सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर इस बदलाव पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का निर्णय लेने से पहले देश के लोगों से सलाह ली थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस फैसले से जुड़े किसी हितधारक या संगठन से विचार-विमर्श किया गया। दास ने अपने बयान में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह का कदम उठाने से पहले संबंधित पक्षों की राय जानना जरूरी है।

    अपने पोस्ट में दास ने केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की। उन्होंने लिखा कि जिस तरह जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाया जा रहा है, उसी तरह प्रधानमंत्री जल्द ही भारत में लोकतंत्र को भी अधिसूचित सूची से बाहर कर देंगे। उन्होंने इस कार्रवाई को उस दिशा में शुरुआत बताया। दास ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को स्वीकार नहीं करती और इसे मनमाना निर्णय मानती है। हालांकि, लोकतंत्र को लेकर की गई उनकी टिप्पणी उनके राजनीतिक विरोध और फैसले पर व्यक्त की गई प्रतिक्रिया का हिस्सा है।

    सौरव दास ने अपने बयान में विरोध करने और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाना लोगों के मौलिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने इस फैसले के विरोध में कहा कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बन रहा है। उनकी इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव होने के बावजूद विरोध की भावना समाप्त नहीं होगी।

    दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोगों को संबंधित नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा। इस तरह जंतर-मंतर को सूची से हटाए जाने के बाद राजधानी में प्रदर्शन के लिए इन तीन जगहों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।

    जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। विभिन्न मुद्दों पर अपनी मांगें रखने के लिए लोग यहां जुटते रहे हैं। ऐसे में इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर सौरव दास की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने निर्णय की प्रक्रिया, संबंधित पक्षों से परामर्श और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक स्थान के रूप में निर्धारित किया गया है, जहां नियमों और अनुमति संबंधी शर्तों के अनुसार प्रदर्शन किए जा सकेंगे।

  • बिग बॉस 20 से नकुल धुल के एविक्शन की चर्चा, गुल्लू से कथित हाथापाई के बाद आधी रात को घर से निकाले जाने का दावा

    बिग बॉस 20 से नकुल धुल के एविक्शन की चर्चा, गुल्लू से कथित हाथापाई के बाद आधी रात को घर से निकाले जाने का दावा

    नई दिल्ली: रियलिटी शो बिग बॉस 20 में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट बनकर पहुंचे नकुल धुल एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। उनके शो से बाहर होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि रविवार रात उनकी घर के दूसरे कंटेस्टेंट कुशल तंवर उर्फ गुल्लू के साथ बहस हुई, जो कथित तौर पर हाथापाई तक पहुंच गई। इसके बाद बिग बॉस ने नकुल को घर से बाहर जाने का आदेश दिया। हालांकि, शो के निर्माताओं की ओर से उनके एविक्शन को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल उनके बाहर होने की खबर को सामने आए दावों के आधार पर ही देखा जा रहा है। इस कथित विवाद ने शो के दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ा दी है।

    मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत नकुल धुल और काजी तौकीर के बीच बातचीत के दौरान हुई। बताया गया कि रविवार रात काजी स्काउट ओपी का मजाक उड़ा रहे थे। इस दौरान नकुल ने बीच में आकर स्काउट का पक्ष लिया और काजी से सवाल-जवाब करने लगे। उस समय कुशल तंवर उर्फ गुल्लू भी वहां मौजूद थे। उन्होंने दोनों के बीच बढ़ती बहस को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन स्थिति संभलने के बजाय और बिगड़ गई। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नकुल ने गुल्लू को चुनौती दी, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। कथित तौर पर नकुल ने गुल्लू को धक्का दिया और गुल्लू ने उन्हें पकड़ लिया। घर में मौजूद अन्य सदस्यों ने बीच-बचाव करते हुए दोनों को अलग किया।

    सोशल मीडिया पर सामने आए दावों के मुताबिक, कथित हाथापाई के बाद बिग बॉस ने मामले में तुरंत कार्रवाई की और नकुल को घर छोड़ने के लिए कहा। बताया गया कि यह फैसला शो के नियमों के उल्लंघन के कारण लिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और एविक्शन को लेकर निर्माताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। नकुल और गुल्लू के बीच विवाद की चर्चा शनिवार से ही सोशल मीडिया पर होने लगी थी, जबकि कथित हाथापाई रविवार रात की बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर एक अन्य दावा यह भी किया गया कि नकुल ने शो से बाहर निकलने के लिए पहले से झगड़े की योजना बनाई थी। इस दावे में उनकी टीम और समर्थकों को भी इसकी जानकारी होने की बात कही गई, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    नकुल धुल ने शो में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट के रूप में एंट्री की थी। रविवार के वीकेंड का वार एपिसोड में सलमान खान ने दो नए प्रतियोगियों को शो में शामिल कराया था। इनमें टेलीविजन अभिनेता मनीष गोयल और कंटेंट क्रिएटर नकुल धुल शामिल थे। नकुल सोशल मीडिया पर ‘मिट्ठू डॉन’ नाम से भी पहचाने जाते हैं। शो में उनकी एंट्री के कुछ ही समय बाद विवादों से जुड़ी चर्चाएं तेज हो गईं। अब गुल्लू के साथ कथित झगड़े और उनके घर से बाहर होने की खबर ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, उनके एविक्शन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के लिए आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

    बिग बॉस 20 में आने से पहले भी नकुल धुल के पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे थे। इन वीडियो में महिलाओं की सुरक्षा और पुरुषों-महिलाओं की स्थिति को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों पर लोगों ने आपत्ति जताई थी। एक वीडियो में उन्होंने महिलाओं को ‘नीचा जेंडर’ और पुरुषों को ‘ऊंचा जेंडर’ कहा था। इन बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई। शो में उनकी एंट्री की खबर सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने निर्माताओं के फैसले पर भी सवाल उठाए थे। इस तरह नकुल की एंट्री के साथ शुरू हुआ विवाद अब कथित हाथापाई और एविक्शन की खबर तक पहुंच गया है। हालांकि, इन घटनाओं से जुड़े दावों और आधिकारिक पुष्टि के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

  • सैफ अली खान ने इंस्टाग्राम पर किया डेब्यू, पहली पोस्ट में दिखाई पटौदी लाइब्रेरी, सिर्फ करीना कपूर को कर रहे फॉलो

    सैफ अली खान ने इंस्टाग्राम पर किया डेब्यू, पहली पोस्ट में दिखाई पटौदी लाइब्रेरी, सिर्फ करीना कपूर को कर रहे फॉलो

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने कई सालों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने के बाद इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट बना लिया है। उनके इस कदम के बाद प्रशंसकों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। सैफ ने अपने नए अकाउंट पर पहली पोस्ट में पटौदी लाइब्रेरी की तस्वीरें साझा की हैं। उनकी पोस्ट सामने आते ही प्रशंसकों ने कमेंट करके खुशी जाहिर की। अभिनेता की इंस्टाग्राम पर मौजूदगी को लेकर खास दिलचस्पी इसलिए भी देखने को मिल रही है, क्योंकि वह लंबे समय तक इस मंच से दूर रहे थे। उनकी पहली पोस्ट में फिल्मों या निजी जीवन से जुड़ी तस्वीरों के बजाय किताबों और लाइब्रेरी को जगह मिली है।

    सैफ अली खान ने रविवार को इंस्टाग्राम पर अपना अकाउंट बनाया था, जबकि उनकी पहली पोस्ट सोमवार को सामने आई। इस पोस्ट में उन्होंने पटौदी लाइब्रेरी की कुछ तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों के साथ अभिनेता ने लिखा, “पटौदी लाइब्रेरी… किताबों को उनके कवर से आंकना।” इस संदेश के जरिए उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम यात्रा की शुरुआत किताबों से जुड़ी तस्वीरों के साथ की। पहली पोस्ट में लाइब्रेरी को दिखाए जाने के बाद उनके अकाउंट पर लोगों का ध्यान गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में तस्वीरों के अलावा किसी अन्य विषय पर अभिनेता की ओर से कोई विस्तृत संदेश साझा किए जाने का उल्लेख नहीं है।

    सैफ का इंस्टाग्राम अकाउंट वेरिफाइड है। उनकी पत्नी और अभिनेत्री करीना कपूर खान भी उन्हें फॉलो कर रही हैं। अकाउंट से जुड़ी एक खास बात यह है कि सैफ फिलहाल इंस्टाग्राम पर केवल करीना कपूर खान को ही फॉलो कर रहे हैं। इस वजह से भी उनकी सोशल मीडिया पर शुरुआत चर्चा में है। प्रशंसकों ने अभिनेता के अकाउंट पर प्रतिक्रिया देते हुए उनका स्वागत किया। एक यूजर ने कमेंट में लिखा, “आखिरकार वह शख्स आ ही गया, जो जेन-जी के आने से पहले ही जेन-जी जैसा था।” इस टिप्पणी में सैफ के सोशल मीडिया पर देर से आने को लेकर मजाकिया अंदाज दिखाई दिया। उनकी पहली पोस्ट और फॉलोइंग को लेकर प्रशंसक अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    फिल्मों की बात करें तो सैफ अली खान पिछली बार ‘हैवान’ में नजर आए थे। इस फिल्म में अक्षय कुमार भी दिखाई दिए थे और इसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया था। ‘हैवान’ मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का रीमेक थी। हालांकि, बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को खास सफलता नहीं मिली। सैफ अपने अभिनय करियर में अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम कर चुके हैं और उनके आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा बनी हुई है। इंस्टाग्राम पर उनकी नई शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब उनके आने वाले काम को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    सैफ अली खान के आगामी प्रोजेक्ट्स में ‘हम हिंदुस्तानी’ शामिल है। राहुल ढोलकिया के निर्देशन में बन रही यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। इसके अलावा, ‘रेस 4’ को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि इस फिल्म के बारे में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सैफ इससे पहले ‘रेस’ और ‘रेस 2’ में काम कर चुके हैं। वहीं, ‘रेस 3’ में सलमान खान मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म को दर्शकों से खास प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। फिलहाल सैफ की इंस्टाग्राम पर पहली पोस्ट, पटौदी लाइब्रेरी की तस्वीरें और करीना कपूर खान को अकेले फॉलो करने का तथ्य उनके नए सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ी प्रमुख बातें हैं।

  • दीवाली से पहले चावल, चीनी और दालों की कीमतों में तेजी, खराब मौसम और महंगी ढुलाई से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित

    दीवाली से पहले चावल, चीनी और दालों की कीमतों में तेजी, खराब मौसम और महंगी ढुलाई से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित

    नई दिल्ली ।दीवाली से पहले खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव डाल रही हैं। चावल, चीनी, दाल और खाने के तेल समेत कई कृषि उत्पादों के दाम में तेजी देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके पीछे खराब मौसम, फसलों के उत्पादन में संभावित कमी, अंतरराष्ट्रीय तनाव और सामान की ढुलाई महंगी होने जैसे कारण बताए जा रहे हैं। त्योहारों के दौरान खाद्य वस्तुओं की मांग के बीच आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    चावल की कीमतों में तेजी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के दाम पिछले दो वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। इसकी प्रमुख वजह बाजार में आपूर्ति कम होना और माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की लागत बढ़ना बताई जा रही है। कंटेनर के जरिए सामान भेजने का खर्च पांच हजार डॉलर से बढ़कर करीब 55 हजार डॉलर तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार की लागत में बड़ा अंतर आया है और खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है।

    खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुमान के अनुसार, दुनिया में चावल का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 प्रतिशत घट सकता है। भारत में भी उत्पादन कम होने का अनुमान जताया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में चावल का उत्पादन 15.4 करोड़ टन से घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के वायदा भाव में 30 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की बात कही गई है। उत्पादन में संभावित गिरावट और आपूर्ति की बढ़ती लागत का असर बाजार की कीमतों पर पड़ रहा है।

    चीनी के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। अक्टूबर में कच्ची चीनी के वायदा भाव करीब 8 प्रतिशत बढ़े हैं। वहीं, जुलाई में दर्ज निचले स्तर से कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ब्राजील, भारत, थाईलैंड और यूरोपीय संघ में खराब मौसम के कारण चीनी उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आने की आशंका जताई गई है। यूरोपीय संघ में उत्पादन 19 प्रतिशत और थाईलैंड में 17 प्रतिशत तक घट सकता है। यदि उत्पादन में यह गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

    खाने के तेल की कीमतों पर भी वैश्विक ऊर्जा बाजार का असर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियों के बीच जैव ईंधन की मांग बढ़ रही है। जैव ईंधन बनाने में इस्तेमाल होने वाले वनस्पति तेल की मात्रा भी बढ़ रही है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक, दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल वनस्पति तेल का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा जैव ईंधन उत्पादन में खर्च हो रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग के अनुमान में जैव ईंधन के लिए वनस्पति तेल का इस्तेमाल 30 से 32 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना जताई गई है। इससे खाद्य तेलों की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

    दालों और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक वर्ष में चने के दाम 23 प्रतिशत, उड़द के 24 प्रतिशत और मटर के 47 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इनकी कीमतों में तेजी के पीछे आयात पर अधिक शुल्क को भी एक कारण बताया गया है। इसके अलावा, जौ की कीमतों में 44 प्रतिशत, मक्का में 9 प्रतिशत और चाय में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    खराब मौसम के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय तनाव से परिवहन तथा आपूर्ति व्यवस्था में रुकावट आने की स्थिति में महंगाई का दबाव आगे भी बना रह सकता है। चावल, चीनी, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है। हालांकि, आने वाले समय में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह उत्पादन, उपलब्धता और ढुलाई की लागत में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

  • गोल्ड ईटीएफ में सितंबर के दौरान निवेश 71.4 प्रतिशत बढ़कर 4,451 करोड़ रुपये पहुंचा, इक्विटी फंड और एसआईपी में भी निवेशकों की मजबूत भागीदारी

    गोल्ड ईटीएफ में सितंबर के दौरान निवेश 71.4 प्रतिशत बढ़कर 4,451 करोड़ रुपये पहुंचा, इक्विटी फंड और एसआईपी में भी निवेशकों की मजबूत भागीदारी

    नई दिल्ली ।सितंबर 2026 में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इस दौरान गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश अगस्त के 2,597 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,451 करोड़ रुपये हो गया। महीने-दर-महीने आधार पर इसमें 71.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान सोने से जुड़े निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। हालांकि, सोने में निवेश बढ़ने के बावजूद व्यापक म्यूचुअल फंड उद्योग को सितंबर में शुद्ध निकासी का सामना करना पड़ा।

    सितंबर के दौरान पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग से कुल 1.33 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अगस्त में उद्योग में 41,353 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। इस बड़े बदलाव की प्रमुख वजह फिक्स्ड इनकम से जुड़ी म्यूचुअल फंड योजनाओं से भारी निकासी रही। खासतौर पर डेट म्यूचुअल फंड से निवेशकों ने बड़ी रकम निकाली, जिससे उद्योग के कुल निवेश प्रवाह पर दबाव पड़ा।

    सितंबर में डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से शुद्ध निकासी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 8,127 करोड़ रुपये था। डेट फंड से इतनी बड़ी निकासी का असर म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) पर भी दिखाई दिया। अगस्त में उद्योग का कुल एयूएम 87.08 लाख करोड़ रुपये था, जो सितंबर में घटकर 82.64 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक महीने में कुल एयूएम में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

    दूसरी ओर, इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी रही। सितंबर में इक्विटी फंड में शुद्ध निवेश 30.6 प्रतिशत बढ़कर 38,307 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 29,328 करोड़ रुपये था। इक्विटी श्रेणी में स्मॉल-कैप फंड निवेशकों की पसंद बने रहे। इन योजनाओं में सितंबर के दौरान 9,039 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो अगस्त के 7,973 करोड़ रुपये से अधिक था।

    मिड-कैप फंड में भी निवेश बढ़ा। सितंबर में इन योजनाओं में 7,835 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जबकि अगस्त में यह 6,989 करोड़ रुपये था। इसी तरह फ्लेक्सी-कैप फंड में शुद्ध निवेश अगस्त के 5,059 करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर में 6,702 करोड़ रुपये हो गया। सेक्टोरल और थीमैटिक फंड में भी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी। इन योजनाओं में सितंबर में 3,640 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जबकि पिछले महीने यह 1,713 करोड़ रुपये था।

    लार्ज-कैप फंड भी सितंबर में सकारात्मक स्थिति में लौट आए। अगस्त में इन योजनाओं से 1,147 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी, लेकिन सितंबर में इनमें 859 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। वहीं, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में निवेश लगभग स्थिर रहा। सितंबर में इन योजनाओं को 3,667 करोड़ रुपये मिले, जबकि अगस्त में यह राशि 3,671 करोड़ रुपये थी।

    नियमित निवेश के मामले में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए योगदान मजबूत बना रहा। सितंबर में मासिक एसआईपी निवेश बढ़कर रिकॉर्ड 32,490 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 32,297 करोड़ रुपये था। इस तरह गोल्ड ईटीएफ और इक्विटी फंड में बढ़ते निवेश के साथ एसआईपी योगदान ने भी निवेशकों की निरंतर भागीदारी को दर्शाया। वहीं, डेट फंड से भारी निकासी सितंबर के दौरान म्यूचुअल फंड उद्योग की सबसे प्रमुख वित्तीय गतिविधियों में शामिल रही।

  • आनंद एल राय की फिल्म ‘नखरेवाली’ की रिलीज डेट घोषित, 30 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आएगी अंश दुग्गल और प्रगति श्रीवास्तव की कॉमेडी

    आनंद एल राय की फिल्म ‘नखरेवाली’ की रिलीज डेट घोषित, 30 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आएगी अंश दुग्गल और प्रगति श्रीवास्तव की कॉमेडी


    नई दिल्ली:
    रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘नखरेवाली’ की रिलीज डेट का ऐलान हो गया है। अंश दुग्गल और प्रगति श्रीवास्तव की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म 30 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का निर्माण आनंद एल राय के प्रोडक्शन हाउस के तहत किया जा रहा है। इसे प्यार, रिश्तों और लैंगिक समानता जैसे विषयों को एक अलग अंदाज में प्रस्तुत करने वाली कॉमेडी फिल्म के रूप में तैयार किया गया है। इसकी कहानी में रोमांस और हास्य के साथ रिश्तों में महिलाओं की भूमिका को भी प्रमुखता दी जाएगी। फिल्म की रिलीज डेट सामने आने के बाद अब दर्शकों की नजर इसके अगले प्रचार अभियान और ट्रेलर से जुड़ी जानकारी पर रहेगी।

    फिल्म की रिलीज की घोषणा के साथ इसका एक पोस्टर भी जारी किया गया है। पोस्टर पर लिखा है, “कभी-कभी प्यार में मजनू को भी लैला बनना पड़ता है।” इस पंक्ति के जरिए फिल्म की कहानी के अनोखे अंदाज की झलक पेश की गई है। आमतौर पर रोमांटिक फिल्मों में प्रेम पाने के लिए लड़के को लड़की को मनाते और उसके पीछे प्रयास करते हुए दिखाया जाता है। ‘नखरेवाली’ में इस पारंपरिक सोच से अलग नजरिया अपनाने की कोशिश की गई है। फिल्म के जरिए रिश्तों में पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं को नए तरीके से सामने लाने की तैयारी है। पोस्टर की टैगलाइन भी इसी बदलाव की ओर संकेत करती है।

    ‘नखरेवाली’ को ‘वुमनटिक कॉमेडी’ के रूप में पेश किया जा रहा है। यह शब्द महिला और रोमांटिक कॉमेडी की अवधारणाओं को जोड़कर बनाया गया है। फिल्म में मनोरंजन और भावनात्मक पहलुओं के साथ आज के रिश्तों की जटिलताओं को दिखाने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही महिलाओं की भूमिका और लैंगिक समानता से जुड़े सवालों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है। फिल्म में प्यार को केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रखने के बजाय रिश्तों को दूसरे नजरिए से देखने की कोशिश होगी। हालांकि, कहानी के विस्तृत घटनाक्रम और किरदारों के बारे में अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस फिल्म का निर्देशन राहुल शंकल्या कर रहे हैं। ‘नखरेवाली’ उनके निर्देशन करियर की पहली फिल्म है। फिल्म की कहानी और पटकथा दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है। मुख्य भूमिकाओं में अंश दुग्गल और प्रगति श्रीवास्तव नजर आएंगे। दोनों कलाकारों के किरदारों के माध्यम से फिल्म की रोमांटिक कहानी आगे बढ़ेगी। निर्माताओं ने फिल्म को कॉमेडी और भावनाओं के मेल के रूप में तैयार किया है। इसके जरिए दर्शकों के सामने प्रेम संबंधों को लेकर बनी पारंपरिक धारणाओं से अलग कहानी पेश करने की कोशिश की जा रही है। फिल्म के कलाकारों और निर्देशन टीम की भूमिका इसकी प्रस्तुति में महत्वपूर्ण होगी।

    ‘नखरेवाली’ का निर्माण जियो स्टूडियोज के साथ आनंद एल राय और हिमांशु शर्मा के प्रोडक्शन हाउस कलर येलो के बैनर तले किया जा रहा है। यह फिल्म 30 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। रिलीज की तारीख घोषित होने के साथ अब फिल्म के ट्रेलर को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ट्रेलर रिलीज की तारीख का ऐलान नहीं किया गया है। फिल्म की कहानी में रोमांस, हास्य और लैंगिक समानता से जुड़े विषयों को किस तरह प्रस्तुत किया जाता है, यह सिनेमाघरों में रिलीज के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल किया, पश्चिम एशिया में तनाव से तेल आपूर्ति पर दबाव

    गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल किया, पश्चिम एशिया में तनाव से तेल आपूर्ति पर दबाव


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक निवेश फर्म गोल्डमैन सैश ने दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। इससे पहले यह अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल था। नए अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल की संभावित औसत कीमत में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए निवेश फर्म ने अपने पूर्वानुमान में बदलाव किया है।

    नई रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाने की प्रमुख वजह आपूर्ति संबंधी जोखिमों के कारण कीमतों में शामिल अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम का धीरे-धीरे कम होना है। यह जोखिम प्रीमियम फिलहाल 20 डॉलर प्रति बैरल से कुछ अधिक बताया गया है। हालांकि, दिसंबर के लिए 90 डॉलर प्रति बैरल का नया अनुमान मौजूदा कीमत करीब 103 डॉलर प्रति बैरल से लगभग 13 प्रतिशत कम है। इसका अर्थ है कि निवेश फर्म को आगे चलकर कीमतों में कुछ नरमी आने की संभावना भी दिखाई दे रही है।

    गोल्डमैन सैश ने वर्ष 2027 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत का अनुमान 80 डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार रखा है। इस अनुमान में खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति में संभावित बदलाव, आपूर्ति संबंधी जोखिमों और जोखिम प्रीमियम में कमी की गति को ध्यान में रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति उम्मीद से अधिक तेजी से बढ़ती है, तो इससे कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, जोखिम प्रीमियम लंबे समय तक ऊंचा रहने पर तेल की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।

    तेल की कीमतों के आकलन में कम भंडार, आपूर्ति में संभावित बाधाओं और ब्याज दरों के प्रभाव को भी शामिल किया गया है। इन परिस्थितियों का असर तेल की भौतिक खरीद और भंडार दोबारा भरने की गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, वित्तीय जोखिम से बचाव के लिए किए जाने वाले हेजिंग सौदे भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इन सभी कारकों के आधार पर भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाया गया है।

    रिपोर्ट में अमेरिकी कच्चे तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) के लिए भी अनुमान दिया गया है। इसके मुताबिक, दिसंबर 2026 में डब्ल्यूटीआई की औसत कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल और वर्ष 2027 में 73 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई की अनुमानित कीमतों के बीच अंतर अपेक्षाकृत अधिक है। रिपोर्ट में इसकी एक वजह अमेरिका से यूरोप तक तेल की ढुलाई पर आने वाली ज्यादा लागत को बताया गया है।

    पश्चिम एशिया में फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने के समय ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी। इसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की ढुलाई में बाधाएं आने के कारण कीमत बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई। दुनिया के कुल तेल शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां शिपिंग प्रभावित होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

    गोल्डमैन सैश ने संभावित जोखिमों का आकलन करते हुए कहा है कि यदि वर्ष 2027 में खाड़ी देशों का औसत तेल उत्पादन फरवरी 2026 के स्तर से प्रतिदिन 50 लाख बैरल कम रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में तेल संबंधी बुनियादी ढांचे को नुकसान, समुद्री परिवहन पर बढ़ते हमलों और लंबे समय तक बने रहने वाले जोखिम प्रीमियम को कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।

  • अभिजीत दिपके का दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप, हिरासत का पूरा वीडियो जारी करने और कानूनी अधिकारों के हनन पर मांगा जवाब

    अभिजीत दिपके का दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप, हिरासत का पूरा वीडियो जारी करने और कानूनी अधिकारों के हनन पर मांगा जवाब


    नई दिल्ली । सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान अपने बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस से संबंधित घटनाक्रम का पूरा वीडियो सार्वजनिक करने की मांग की है। दिपके का कहना है कि हिरासत के दौरान उन्होंने कई बार अपने चचेरे भाई से बात करने, दो मिनट के लिए मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई। उनका आरोप है कि पुलिस ने घटना का केवल संपादित वीडियो जारी किया है, जबकि पूरा वीडियो सामने आने से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

    पत्रकारों से बातचीत में दिपके ने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस को अपनी कार्रवाई पर भरोसा है, तो उसे बिना किसी बदलाव के पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करनी चाहिए। उनके मुताबिक, इससे लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि हिरासत के दौरान उनके साथ क्या हुआ और क्या उन्हें अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि पूरी रिकॉर्डिंग जारी करने के बजाय संपादित वीडियो क्यों दिखाया जा रहा है।

    दिपके ने विशेष रूप से अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की स्थिति में कानूनी सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन उन्हें अपने वकील से बात करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके माता-पिता और वकीलों को यह जानकारी नहीं दी कि उन्हें कहां रखा गया है और किस पुलिस थाने में ले जाया गया है।

    दिपके के अनुसार, पुलिसकर्मी सुबह करीब 3:30 बजे गिरफ्तारी से संबंधित कागजात लेकर उनके पास पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस उनके परिवार की परिस्थितियों से परिचित थी, क्योंकि उस समय परिवार उनकी दादी के निधन के दुख से गुजर रहा था। इस स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए और कहा कि परिवार पहले ही एक बड़े सदमे का सामना कर रहा था।

    उन्होंने यह भी सवाल किया कि ऐसी परिस्थिति में अपने माता-पिता को गिरफ्तारी की सूचना देना कितना उचित होता, खासकर जब उन्हें लंबे समय तक जेल में रहने की आशंका बताई जा रही थी। दिपके ने कहा कि पुलिस उनसे माता-पिता से बात करने के लिए कह रही थी, लेकिन दूसरी ओर उनके परिवार को यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस थाने या जेल में रखा गया है। उन्होंने इस घटनाक्रम को अपने और अपने परिवार के लिए मानसिक प्रताड़ना बताया।

    दिपके ने पुलिस की कार्रवाई में महिला अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि पुरुष पुलिस अधिकारियों पर छेड़छाड़ के आरोपों की संभावना के कारण महिला अधिकारियों को आगे किया गया हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या महिला अधिकारियों की मौजूदगी पुलिस की कार्रवाई का बचाव करने के उद्देश्य से थी। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने आशंका व्यक्त की है और किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।

    उन्होंने कहा कि पुलिस को महिला अधिकारियों को आगे रखने के कारण स्पष्ट करने चाहिए। दिपके ने महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की बात करते हुए कहा कि वह और उनके सहयोगी सभ्य तथा शिक्षित लोग हैं और महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आना जानते हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस से पूरे वीडियो को सार्वजनिक करने और हिरासत से जुड़े घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग दोहराई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।