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  • एमएसपी सुरक्षा कवच का विस्तार: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की रिकॉर्ड खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

    एमएसपी सुरक्षा कवच का विस्तार: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की रिकॉर्ड खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

    नई दिल्ली । किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और कृषि बाजार में मूल्य अस्थिरता के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को मंजूरी दी है। यह निर्णय मूल्य समर्थन योजना के तहत लिया गया है और इससे विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु तथा हरियाणा के लाखों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि कई बार बाजार में कीमतों में गिरावट आने के कारण किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में एमएसपी आधारित खरीद किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दालों और तिलहनों की सरकारी खरीद का दायरा बढ़ाया गया है, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित प्रतिफल मिल सके।

    इस निर्णय में सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है। ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए राज्य में मूंग, उड़द और मूंगफली की बड़ी मात्रा में खरीद को स्वीकृति दी गई है। राज्य में कुल स्वीकृत खरीद का मूल्य 1,490 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश के दाल एवं तिलहन उत्पादक किसानों की आय को महत्वपूर्ण समर्थन मिलेगा और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी।

    उत्तर प्रदेश में मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए यह फैसला विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ वर्षों में दालों के उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन कई बार मांग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण किसानों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती। ऐसे में सरकारी खरीद किसानों के लिए स्थिर आय का आधार प्रदान करेगी।

    गुजरात के लिए भी सरकार ने ग्रीष्मकालीन सीजन के तहत मूंग की खरीद को मंजूरी दी है। राज्य में स्वीकृत खरीद का कुल मूल्य 160 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। इससे मूंग उत्पादक किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और उन्हें खुले बाजार में कम कीमतों पर फसल बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कृषि क्षेत्र में यह कदम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ किसानों का भरोसा बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

    तमिलनाडु में सरकार ने पहले से निर्धारित खरीद सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है। राज्य में मूंग की अतिरिक्त खरीद को मंजूरी मिलने से किसानों को अधिक मात्रा में अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने का अवसर मिलेगा। इससे फसल की बिक्री प्रक्रिया अधिक सुगम होगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

    हरियाणा में भी मूंग की खरीद के लिए स्वीकृति दी गई है। राज्य के किसानों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय का मानना है कि यह निर्णय मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करेगा और किसानों को बाजार में मूल्य गिरावट से सुरक्षा प्रदान करेगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार दालों और तिलहनों की एमएसपी खरीद का विस्तार केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में खाद्य सुरक्षा और तिलहन-दाल उत्पादन को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा, उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को मजबूती मिलेगी।

  • मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद

    मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि कहीं मौसम की मार किसानों की तैयार फसलों को तबाह कर रही है। शुक्रवार को खरगोन और बड़वानी से सामने आई तस्वीरों ने किसानों की परेशानी को और उजागर कर दिया।

    खरगोन जिले में जल संकट से परेशान किसानों ने नहर का पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडवा-बड़ौदा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब 11:30 बजे 200 से अधिक किसान बैलगाड़ियां लेकर सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की वेदा, कुंदा और खारक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिससे खेतों में सिंचाई का संकट गहरा गया है।

    प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि मृग नक्षत्र शुरू हुए करीब दो सप्ताह होने को हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। अधिकांश किसानों ने खेतों की जुताई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

    दूसरी ओर बड़वानी जिले के खड़की क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने दो किसान भाइयों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज आंधी और बारिश के कारण अंबाराम और गंगाराम की करीब 9 एकड़ में लगी केले की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बाजार में बिक्री के लिए तैयार लगभग 1500 केले के पौधे जमीन पर गिर गए।

    किसानों के अनुसार इस फसल पर करीब 14 लाख रुपए की लागत आई थी, जबकि कुल नुकसान 36 लाख रुपए तक पहुंच गया है। अचानक हुए इस भारी नुकसान का सदमा किसान अंबाराम सहन नहीं कर पाए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से फसल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    प्रदेश में कम बारिश के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सफल बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी जरूरी है। इसके लिए कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को जल्दबाजी में बोवनी करने से बचना चाहिए, क्योंकि पर्याप्त नमी नहीं होने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

    मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ सीजन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

  • भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल

    भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल


    भोपाल । राजधानी भोपाल में पटवारियों के तबादलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा 15 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में जिन 46 पटवारियों का तबादला किया गया था, उनमें से 24 पटवारियों को महज 24 घंटे के भीतर राहत मिल गई। 16 जून को जारी संशोधित सूची में इन कर्मचारियों के नाम हटा दिए गए, जिससे उनके तबादले स्वतः निरस्त हो गए। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार, 15 जून को जारी सूची में ऐसे पटवारियों को शामिल किया गया था जो लंबे समय से एक ही तहसील या क्षेत्र में पदस्थ थे। इनमें अधिकांश कर्मचारी हुजूर और कोलार तहसीलों में पांच से आठ वर्षों से कार्यरत थे। कुछ पटवारी अपनी गृह तहसील में भी पदस्थ थे। स्थानांतरण नीति के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्र में भेजने का प्रावधान है, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई थी।

    हालांकि अगले ही दिन कैबिनेट बैठक के बाद स्थानांतरण की समय-सीमा बढ़ने के फैसले के बीच देर रात एक संशोधित सूची जारी की गई। इस नई सूची में 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए। सूत्रों के अनुसार संशोधित आदेश में शामिल अधिकांश कर्मचारी भी हुजूर और कोलार क्षेत्र से जुड़े हुए थे। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि प्रभावशाली संपर्कों और राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ कर्मचारियों ने अपने नाम सूची से हटवा लिए।

    विवाद को और हवा तब मिली जब उन नामों को भी राहत मिलने की जानकारी सामने आई, जो पूर्व में एक चर्चित मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में सामने आ चुके थे। इनमें निधि नेमा और किशोर सिंह दांगी के नाम प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पूरे मामले को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

    स्थानांतरण से राहत पाने वाले कर्मचारियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जो वर्ष 2015 से लेकर 2022 तक लगातार एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं। इनमें सदाशिव गौंड, नरेंद्र रैकवार, केवल सिंह कौर, रेनु पटेल, बुजकिशोर नागर, अभिषेक शर्मा, मुकुल सराठे, दीक्षा शर्मा, संदीप शर्मा, प्रियंका सिंह, सौरभ सोलंकी, प्रदीप पटेल, पूजा ठाकुर, प्रियंका दुबे और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

    इस मामले में राजनीतिक प्रभाव की चर्चा भी जोरों पर है। संशोधित सूची से बाहर हुए 24 पटवारियों में से 20 हुजूर तहसील और 4 कोलार क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र विधायक रामेश्वर शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वहीं बैरसिया क्षेत्र से केवल एक नाम हटने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से राजनीतिक हस्तक्षेप की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

    स्थानांतरण नीति के तहत जिले में कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकते। भोपाल जिले में वर्तमान में 243 पटवारी पदस्थ हैं, जिसके अनुसार अधिकतम 47 तबादले संभव हैं। पहले 46 पटवारियों के तबादले किए गए और फिर संशोधित सूची जारी होने से कुल 76 स्थानांतरण संबंधी आदेशों की स्थिति बन गई। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त किए गए आदेश भी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, इसलिए नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

    इसके अलावा आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। स्थानांतरण नीति की कंडिका-42 के अनुसार सभी आदेश ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाने चाहिए। जबकि 15 जून का आदेश हस्ताक्षरित स्वरूप में जारी हुआ था और 16 जून का संशोधित आदेश ई-ऑफिस से निकाला गया। इतना ही नहीं, संशोधित आदेश में पूर्व आदेश को स्पष्ट रूप से निरस्त करने का उल्लेख भी नहीं किया गया है।

    अब इस पूरे मामले के सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचने और उच्चस्तरीय जांच की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

  • हॉर्मुज संकट के बीच भारत को बड़ी राहत: तीन महीने बाद 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी लेकर दहेज पहुंचा टैंकर ‘दिशा’, ऊर्जा आपूर्ति को मिली नई मजबूती

    हॉर्मुज संकट के बीच भारत को बड़ी राहत: तीन महीने बाद 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी लेकर दहेज पहुंचा टैंकर ‘दिशा’, ऊर्जा आपूर्ति को मिली नई मजबूती

    नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। लगभग तीन महीने से अधिक समय तक अनिश्चित परिस्थितियों का सामना करने के बाद एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ सफलतापूर्वक हॉर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए गुजरात के दहेज एलएनजी टर्मिनल पहुंच गया। यह जहाज 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस लेकर भारत लौटा है, जिसे देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

    शुक्रवार सुबह दहेज टर्मिनल पर पहुंचे इस टैंकर का आगमन ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार मध्य-पूर्व की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। हॉर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव तेल तथा गैस की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को सीधे प्रभावित कर सकता है। ऐसे में ‘दिशा’ का सुरक्षित रूप से भारत पहुंचना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, यह एलएनजी कार्गो कतर के रास लाफान टर्मिनल से लोड किया गया था। जहाज को भारत तक पहुंचने में सामान्य समय से कहीं अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ी। क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं और समुद्री मार्गों पर बढ़ती संवेदनशीलता के कारण इसकी यात्रा लंबे समय तक प्रभावित रही। हालांकि सभी आवश्यक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जहाज ने अंततः अपनी यात्रा पूरी की और निर्धारित गंतव्य तक पहुंच गया।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफल आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में एलएनजी आपूर्ति में किसी भी प्रकार की रुकावट का असर उद्योगों, बिजली उत्पादन और अन्य गैस आधारित गतिविधियों पर पड़ सकता है। ‘दिशा’ का आगमन इस बात का संकेत है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।

    यह जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के लिए चार्टर किया गया है। भारत में एलएनजी आयात और वितरण के क्षेत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इस कार्गो की सुरक्षित डिलीवरी ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के लिए भी राहत की खबर मानी जा रही है।

    दहेज एलएनजी टर्मिनल देश का सबसे बड़ा एलएनजी आयात केंद्र माना जाता है। यहां पहुंचने वाली गैस को विभिन्न राज्यों और औद्योगिक क्षेत्रों तक पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से पहुंचाया जाता है। इसलिए इस टर्मिनल पर आने वाले प्रत्येक बड़े कार्गो का सीधा संबंध देश की गैस उपलब्धता और मांग-आपूर्ति संतुलन से जुड़ा होता है।

    हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले भारतीय एलएनजी जहाजों की गतिविधियों पर हाल के महीनों में विशेष नजर रखी जा रही थी। क्षेत्रीय तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं लगातार व्यक्त की जा रही थीं। ऐसे माहौल में ‘दिशा’ का सुरक्षित रूप से भारत पहुंचना न केवल एक सफल समुद्री अभियान माना जा रहा है, बल्कि यह देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली की स्थिरता और लचीलापन भी दर्शाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर ध्यान और बढ़ेगा। फिलहाल ‘दिशा’ का दहेज पहुंचना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जिसने ऊर्जा क्षेत्र को राहत और भरोसे का संदेश दिया है।

  • 97 साल की उम्र में भी जिंदगी को खुलकर जीती थीं जोहरा सहगल, बेबाक बयान ने बटोरी थीं सुर्खियां

    97 साल की उम्र में भी जिंदगी को खुलकर जीती थीं जोहरा सहगल, बेबाक बयान ने बटोरी थीं सुर्खियां


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जो सिर्फ अपनी अभिनय प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अपनी सोच, व्यक्तित्व और जीवन जीने के अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं। दिग्गज अभिनेत्री और नृत्यांगना जोहरा सहगल ऐसा ही एक नाम हैं। करीब आठ दशकों तक कला जगत में सक्रिय रहीं जोहरा सहगल ने अपने शानदार अभिनय, ऊर्जा और बेबाक बयानों से करोड़ों लोगों का दिल जीता।

    जोहरा सहगल का जन्म वर्ष 1912 में हुआ था और उन्होंने भारतीय रंगमंच, सिनेमा तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई। वे उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थीं जिन्होंने भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक भी जोहरा सहगल की ऊर्जा और सकारात्मक सोच लोगों को प्रेरित करती रही। 97 वर्ष की आयु में दिए गए एक चर्चित इंटरव्यू में उनसे उनकी जिंदादिली और खुशमिजाज व्यक्तित्व का राज पूछा गया था। इस दौरान उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि जीवन में हास्य और प्यार की भावना व्यक्ति को हमेशा युवा बनाए रखती है। उनके इस बेबाक जवाब ने उस समय खूब सुर्खियां बटोरी थीं और सोशल मीडिया से लेकर समाचार जगत तक चर्चा का विषय बन गया था।

    जोहरा सहगल सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने लगभग 14 वर्षों तक थिएटर की दुनिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अभिनय का सफर कई यादगार फिल्मों और टीवी धारावाहिकों से होकर गुजरा। उन्होंने ‘नीचा नगर’, ‘अफसर’, ‘दिल से’, ‘चीनी कम’ और ‘सांवरिया’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। इसके अलावा कई लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति दर्शकों को खूब पसंद आई।

    सम्मानों की बात करें तो जोहरा सहगल को भारतीय कला और संस्कृति में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। उन्हें पद्मश्री, कालिदास सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया।

    उनकी निजी जिंदगी भी किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं थी। कला के प्रति लगाव ने उन्हें प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक उदय शंकर के दल तक पहुंचाया, जहां उनकी मुलाकात कामेश्वर सहगल से हुई। उम्र के अंतर और पारिवारिक विरोध के बावजूद दोनों ने प्रेम विवाह किया और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाया।

    आज भले ही जोहरा सहगल हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनकी मुस्कान और जिंदगी को खुलकर जीने का उनका संदेश आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

  • भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने और निवेशकों का जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर झुकाव बढ़ने के कारण शुक्रवार को कीमती धातुओं के बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे, जिससे बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हुई तेज बिकवाली ने सोना-चांदी की कीमतों को महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे पहुंचा दिया है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की कीमतों में कारोबार की शुरुआत से ही कमजोरी का रुख दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में सोना दो प्रतिशत से अधिक टूट गया और दिन के दौरान इसमें और गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में मध्य पूर्व समेत कई क्षेत्रों में तनाव कम होने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला है।

    चांदी के बाजार में भी भारी दबाव बना रहा। कारोबार के दौरान चांदी में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह दिन के निचले स्तरों तक पहुंच गई। विश्लेषकों का मानना है कि चांदी पर दोहरी मार पड़ी है। एक ओर सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर हुई है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक बाजारों में बिकवाली का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में सोना और चांदी दोनों कमजोर कारोबार करते नजर आए। निवेशकों का ध्यान अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर अधिक केंद्रित हो गया है। इससे कीमती धातुओं में निवेश का आकर्षण फिलहाल कुछ कम हुआ है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को काफी हद तक मुनाफावसूली का परिणाम भी माना जा रहा है। उनका कहना है कि ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव, महंगाई को लेकर आशंकाएं, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों ने निवेशकों की रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, लीवरेज्ड ट्रेडिंग पोजीशन के कम होने से भी बाजार में बिकवाली बढ़ी है।

    हालांकि विशेषज्ञ इस गिरावट को दीर्घकालिक दृष्टि से पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानते। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितताएं अभी भी सोने के पक्ष में मजबूत आधार प्रदान करती हैं। यही कारण है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमती धातुएं अब भी आकर्षक निवेश विकल्प बनी हुई हैं।

    बाजार जानकारों का मानना है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कीमतें अपने निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं या गिरावट का दौर कुछ और समय तक जारी रहेगा। अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, जबकि लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए यह अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी पर विचार करने का उपयुक्त समय हो सकता है।

    सोना और चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम का इन धातुओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और आर्थिक संकेतकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • राजस्थान का रहस्यमयी बुलेट बाबा मंदिर: जहां भगवान नहीं, 350 CC की बुलेट को मानते हैं चमत्कारी देवता

    राजस्थान का रहस्यमयी बुलेट बाबा मंदिर: जहां भगवान नहीं, 350 CC की बुलेट को मानते हैं चमत्कारी देवता


    नई दिल्ली । भारत आस्था, परंपरा और रहस्यों का देश है। यहां ऐसे कई मंदिर हैं जो अपनी अनोखी मान्यताओं के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। राजस्थान के पाली जिले में स्थित बुलेट बाबा मंदिर भी ऐसी ही एक रहस्यमयी जगह है, जहां भगवान की मूर्ति नहीं बल्कि एक रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। हर दिन हजारों श्रद्धालु और मुसाफिर यहां पहुंचकर सुरक्षित यात्रा की कामना करते हैं।

    यह अनोखा मंदिर ओम बन्ना धाम के नाम से भी जाना जाता है। यह जोधपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर पाली जिले के चोटिला गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मंदिर की कहानी करीब तीन दशक पुरानी है और एक दर्दनाक सड़क हादसे से जुड़ी हुई है।

    कहा जाता है कि ठाकुर जोग सिंह राठौड़ के पुत्र ओम सिंह राठौड़ की इसी स्थान पर सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने उनकी रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक को जब्त कर थाने में खड़ा कर दिया। लेकिन अगले दिन बाइक रहस्यमयी तरीके से थाने से गायब मिली। खोजबीन करने पर वह बाइक उसी स्थान पर खड़ी मिली, जहां दुर्घटना हुई थी।

    पुलिस ने बाइक को दोबारा थाने लाकर इस बार जंजीरों से बांध दिया, लेकिन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अगले दिन फिर वही चमत्कार हुआ। बाइक एक बार फिर दुर्घटना स्थल पर पहुंच गई। बताया जाता है कि कई बार ऐसा होने के बाद पुलिस और स्थानीय लोग भी हैरान रह गए। इस घटना को दैवीय संकेत मानते हुए ओम सिंह राठौड़ के पिता ने दुर्घटना स्थल पर मंदिर का निर्माण करवाया।

    आज मंदिर के गर्भगृह में वही 350 CC रॉयल एनफील्ड बुलेट सुरक्षित रखी गई है। श्रद्धालु इस बाइक को फूल-मालाएं चढ़ाते हैं, नारियल अर्पित करते हैं और सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना करते हैं। खास बात यह है कि इस हाईवे से गुजरने वाले कई वाहन चालक यहां रुककर माथा टेकना शुभ मानते हैं।

    स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बुलेट बाबा का आशीर्वाद लेने से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है और यात्रा सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि यह मंदिर सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस घटना की अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान अटूट विश्वास और चमत्कार का प्रतीक है। इतिहास, रहस्य और जनआस्था का यह अनूठा संगम हर साल लाखों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

  • बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला शुक्रवार को थम गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में पहुंच गए। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। शुरुआती घंटे में गिरावट और गहरी होती गई तथा सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं निफ्टी भी लगभग एक प्रतिशत तक टूटकर कारोबार करता दिखाई दिया। हाल के दिनों में बाजार में बनी मजबूत तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने को भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली के कारण संबंधित सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे और कई दिग्गज कंपनियां टॉप लूजर्स की सूची में शामिल हो गईं। वैश्विक आईटी उद्योग से जुड़े संकेतों और भविष्य के कारोबारी अनुमानों में नरमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया।

    आईटी क्षेत्र के अलावा रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, धातु और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान बना रहा। इसके बावजूद व्यापक बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी रहा और अधिकांश सेक्टर नकारात्मक दायरे में कारोबार करते दिखाई दिए।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इनकी कमजोरी बड़े सूचकांकों की तुलना में सीमित रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूलना एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके अनुसार बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है और मौजूदा गिरावट को बड़े रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बुनियादी संकेतक अभी भी मजबूत बने हुए हैं। महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक गतिविधियों में सुधार और ऊर्जा कीमतों में नरमी जैसे कारक बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    वैश्विक स्तर पर भी मिले-जुले संकेत देखने को मिले। अधिकांश एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते रहे, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहने से भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलने की संभावना बनी हुई है। इससे भविष्य में महंगाई और लागत दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की रणनीति और सेक्टर आधारित प्रदर्शन आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • नीरज चोपड़ा की वापसी पर दुनिया की नजर, 92.62 मीटर फेंक चुके श्रीलंकाई स्टार रूमेश से आज होगी महामुकाबला

    नीरज चोपड़ा की वापसी पर दुनिया की नजर, 92.62 मीटर फेंक चुके श्रीलंकाई स्टार रूमेश से आज होगी महामुकाबला


    नई दिल्ली । भारतीय एथलेटिक्स प्रेमियों की निगाहें शुक्रवार को दोहा डायमंड लीग 2026 पर टिकी रहेंगी, जहां ओलंपिक और विश्व मंच पर देश का नाम रोशन कर चुके स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा लंबे अंतराल के बाद प्रतिस्पर्धी मैदान में वापसी करेंगे। पिछले साल सितंबर में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के बाद पीठ की चोट के कारण वह किसी बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाए थे। ऐसे में उनकी वापसी को लेकर खेल जगत में उत्साह के साथ-साथ उत्सुकता भी बनी हुई है।

    हालांकि नीरज की राह आसान नहीं होगी। इस बार उनके सामने पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम नहीं होंगे, लेकिन श्रीलंका के उभरते हुए स्टार रूमेश थरंगा पाथिराजे सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़े हैं। रूमेश ने इस सीजन रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का शानदार थ्रो कर न केवल अपना नाम 90 मीटर क्लब में दर्ज कराया, बल्कि विश्व जैवलिन इतिहास में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

    24 वर्षीय रूमेश इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों में गिने जा रहे हैं। उनका 92.62 मीटर का थ्रो एशियाई एथलेटिक्स के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उन्होंने इस सीजन कई प्रतियोगिताओं में लगातार 89 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका है और हाल ही में प्रतिष्ठित गोल्डन स्पाइक मीट का खिताब भी अपने नाम किया था।

    दूसरी ओर नीरज चोपड़ा भी दोहा के मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुके हैं। मई 2025 में उन्होंने इसी ट्रैक पर पहली बार 90 मीटर की बाधा पार करते हुए 90.23 मीटर का थ्रो किया था। हालांकि उस प्रतियोगिता में जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.06 मीटर के साथ उन्हें पीछे छोड़ दिया था। इस बार नीरज की कोशिश न केवल शानदार वापसी करने की होगी, बल्कि अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब पहुंचने की भी होगी।

    मुकाबले से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीरज ने कहा कि उन्होंने वापसी को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं की। करीब डेढ़ महीने पहले उन्होंने फिर से नियमित थ्रो करना शुरू किया और अंतिम ट्रेनिंग सत्र के बाद ही दोहा में खेलने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि वह खुद को पूरी तरह फिट महसूस कर रहे हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार हैं।

    नीरज और रूमेश के बीच अब तक दो मुकाबले हुए हैं और दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक बार एक-दूसरे को पीछे छोड़ा है। ऐसे में दोनों के बीच हेड-टू-हेड रिकॉर्ड 1-1 से बराबर है। यही वजह है कि इस भिड़ंत को इस सीजन के सबसे रोमांचक जैवलिन मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।
    दोहा डायमंड लीग में केवल नीरज और रूमेश ही नहीं, बल्कि विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स, केशोर्न वॉलकॉट, जैकब वाडलेच, कर्टिस थॉम्पसन और जूलियस येगो जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी रहने वाली है।

    भारतीय समयानुसार यह मुकाबला शुक्रवार रात 11 बजे के बाद शुरू होगा। चोट के बाद नीरज की यह वापसी केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से पहले उनकी तैयारी और फिटनेस की भी बड़ी परीक्षा होगी।

  • डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है

    डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है


    नई द‍िल्‍ली । फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की तेजी से बदलती तस्वीर और उसकी वैश्विक भूमिका को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि फ्रांस में बसे भारतीय न केवल दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं बल्कि 21वीं सदी के भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और योगदान भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है और देश ने विकास के कई नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद दोगुना हुआ है जबकि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और आज देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण केंद्र बनकर उभरा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी एक बड़ी कहानी है। उन्होंने बताया कि देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हुई है और विश्वविद्यालयों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। हाईवे निर्माण की गति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है जबकि मेट्रो नेटवर्क ने रिकॉर्ड स्तर पर विस्तार किया है। इन प्रयासों ने देश में कनेक्टिविटी को मजबूत किया है और विकास को नई रफ्तार दी है।

    डिजिटल इंडिया अभियान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक को जनसामान्य तक पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि देश में करोड़ों नागरिकों को यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई गई है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मेडिकल रिकॉर्ड अब सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हैं जिससे मरीजों और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि देश के दूरदराज गांवों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंच जाएगा लेकिन आज यह वास्तविकता बन चुकी है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की आकांक्षाओं का नया दौर है जहां लोगों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। अब लोग केवल मूलभूत सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं बल्कि बेहतर जीवन स्तर और विश्वस्तरीय सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। जहां बिजली पहुंची है वहां लोग स्मार्ट जीवनशैली चाहते हैं। जहां रेल पहुंची है वहां हाई स्पीड कनेक्टिविटी की मांग है और जहां इंटरनेट पहुंचा है वहां लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल नवाचार में नेतृत्व की आकांक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपने नागरिकों के सपनों को साकार करने के साथ साथ भविष्य का मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देशों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया के देश विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और स्थिर साझेदारी की तलाश में हैं। ऐसे समय में भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत विकास नवाचार और वैश्विक सहयोग के नए मानक स्थापित करेगा और विश्व मंच पर अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगा।