Blog

  • एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला

    एशियाई खेलों में सैन्य खिलाड़ियों ने रचा नया रिकॉर्ड, 27 पदक जीतकर किया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, राजनाथ सिंह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला


    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एशियाई खेल 2026 में भारतीय सशस्त्र बलों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे अब तक की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि बताया है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में छह स्वर्ण, 11 रजत और 10 कांस्य पदक सहित कुल 27 पदक अपने नाम किए। सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों का एशियाई खेलों में यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। सीमित संख्या में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बावजूद खिलाड़ियों ने अनुशासन, मेहनत और सामूहिक प्रयास के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।

    सोमवार को राजनाथ सिंह ने एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले सैन्य खिलाड़ियों के दल से मुलाकात की और उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इन खेलों में भारत ने कुल 85 पदक जीते, जिनमें सैन्य खिलाड़ियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के कुल 92 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। इनमें से खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतकर देश और सशस्त्र बलों का गौरव बढ़ाया।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धि पर उन्हें गर्व है। उन्होंने इस प्रदर्शन को भारतीय सशस्त्र बलों की खेल परंपरा, अनुशासन और मजबूत तैयारी का प्रमाण बताया। उन्होंने पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ उन प्रतिभागियों का भी उत्साह बढ़ाया, जो प्रतियोगिता में पदक हासिल नहीं कर सके। उनके मुताबिक, खेलों में भाग लेना, पूरी मेहनत से मुकाबला करना और अनुभव प्राप्त करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि पदक नहीं जीत पाना हार का प्रतीक नहीं है। वास्तविक हार तब होती है, जब कोई प्रयास करना छोड़ देता है। खिलाड़ियों ने पूरी कोशिश की और देश का नाम रोशन किया।

    राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए इसी समर्पण के साथ तैयारी जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को अपनी तैयारियों में निरंतर सुधार करना चाहिए और उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।

    रक्षा मंत्री ने मिशन ओलंपिक विंग की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें आगे बढ़ाने, वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने और उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने में इस विंग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को समय पर अवसर, व्यवस्थित प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग मिलना चाहिए। मिशन ओलंपिक विंग सैन्य सेवाओं के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में शारीरिक क्षमता के साथ अनुशासन, धैर्य और नेतृत्व जैसे गुणों को भी महत्व दिया जाता है। कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना सैन्य खिलाड़ियों की विशेषता है। ये गुण खेल के मैदान में भी उनके काम आते हैं। सामूहिक प्रयास, दबाव में बेहतर प्रदर्शन और अनुशासित तैयारी उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने में मदद करते हैं।

    उन्होंने कहा कि अब खिलाड़ियों और खेल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को आगामी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। विशेष रूप से लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 और उसके बाद के ओलंपिक चक्र के लिए तैयारियां अभी से मजबूत करने की जरूरत है। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की समय पर पहचान, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाओं के जरिए उनके प्रदर्शन को अगले स्तर तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा। एशियाई खेलों में मिली सफलता को आगे बढ़ाते हुए सैन्य खिलाड़ियों को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना लक्ष्य होना चाहिए, ताकि वे भविष्य में देश के लिए और अधिक पदक जीत सकें।

  • मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए Zoho मेल अनिवार्य, 45 दिन लॉगिन नहीं करने पर बंद होगा ईमेल अकाउंट

    मध्यप्रदेश के सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए Zoho मेल अनिवार्य, 45 दिन लॉगिन नहीं करने पर बंद होगा ईमेल अकाउंट

    मध्यप्रदेश: सरकार ने सरकारी डिजिटल संचार व्यवस्था में बदलाव करते हुए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्वदेशी ईमेल प्लेटफॉर्म जोहो का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी ईमेल व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करना, साइबर हमलों और अनधिकृत पहुंच के जोखिम को कम करना तथा विदेशी क्लाउड सेवाओं पर निर्भरता घटाना है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल संचार के लिए निर्धारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करना होगा। यह कदम सरकारी डिजिटल संचार प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उठाया गया है। इसके माध्यम से सरकारी डेटा की सुरक्षा और ईमेल सेवाओं के संचालन पर नियंत्रण मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

    इस व्यवस्था को लागू करने के संबंध में राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के बीच भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इसके बाद सरकारी ईमेल सेवाओं के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए। नई व्यवस्था केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और एनआईसी से जुड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत सरकारी डिजिटल संचार को सुरक्षित बनाने के प्रयासों से संबंधित है। इसके अंतर्गत राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को आधिकारिक ईमेल के लिए निर्धारित जोहो प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। सरकार की इस पहल में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल सेवाओं को स्वदेशी तकनीकी ढांचे के माध्यम से संचालित करने पर भी ध्यान दिया गया है।

    नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अपनी आधिकारिक ईमेल आईडी का इस्तेमाल महीने में कम से कम एक बार करना होगा। यदि कोई यूजर लगातार 45 दिनों तक अपने ईमेल इनबॉक्स में लॉगिन नहीं करता है, तो सुरक्षा कारणों से उसका ईमेल खाता स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा। इस प्रावधान का उद्देश्य लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने वाले ईमेल खातों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। सरकारी ईमेल खातों का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को निर्धारित अंतराल पर लॉगिन करना होगा। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी ईमेल आईडी सक्रिय रखने के लिए इस नियम का पालन करना आवश्यक होगा।

    सरकार प्रत्येक मेलबॉक्स आधारित ईमेल आईडी के रखरखाव के लिए प्रति यूजर सालाना 2,000 रुपये का सेवा शुल्क देगी। इस बदलाव के बावजूद सरकारी ईमेल पतों के आधिकारिक डोमेन में कोई परिवर्तन नहीं होगा। यानी कर्मचारियों की ईमेल आईडी के अंत में इस्तेमाल होने वाला सरकारी डोमेन पहले की तरह ही बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से ईमेल सेवा के बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर संचालन में किया जाएगा। पहले जिन ईमेल सेवाओं का संचालन गूगल या माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से होता था, उनकी जगह अब जोहो के क्लाउड प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इससे मौजूदा ईमेल पहचान को बनाए रखते हुए तकनीकी व्यवस्था में बदलाव किया जा सकेगा।

    जोहो भारत की एक निजी आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनी है, जो विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था में सरकारी डेटा को देश के भीतर सुरक्षित रखने और डिजिटल संचार की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नई प्रणाली में एनआईसी की रणनीतिक भूमिका के साथ साइबर सुरक्षा मानकों, सुरक्षा ऑडिट और जीरो-ट्रस्ट आर्किटेक्चर जैसे प्रावधानों के पालन की बात कही गई है। हालांकि, पुराने ईमेल खातों और डेटा को नई व्यवस्था में स्थानांतरित करने तथा सभी विभागों में इसे पूरी तरह लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया के बारे में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। नए नियमों के तहत ईमेल प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग, खातों की सक्रियता और सरकारी संचार की सुरक्षा प्रमुख बिंदु होंगे।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पर्यटकों से किया कान्हा नेशनल पार्क आने का आह्वान, वन्यजीव संरक्षण और जंगली भैंसों के पुनर्वास पर दिया जोर

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पर्यटकों से किया कान्हा नेशनल पार्क आने का आह्वान, वन्यजीव संरक्षण और जंगली भैंसों के पुनर्वास पर दिया जोर

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पर्यटकों, वन्यजीव प्रेमियों और आम नागरिकों से कान्हा नेशनल पार्क का भ्रमण करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कान्हा नेशनल पार्क देश ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। घने जंगलों से घिरा यह क्षेत्र बाघ, चीता, लकड़बग्घा, हाथी और कई अन्य वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास है। मुख्यमंत्री ने लोगों से कम से कम एक बार यहां आकर वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते देखने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंडला जिले के कान्हा-किसली में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान वन्यजीव संरक्षण और प्रदेश की प्राकृतिक संपदा से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के समृद्ध जंगलों में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतुओं को अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण करने का अवसर मिल रहा है। उनके अनुसार, प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों से जैव विविधता को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।

    मुख्यमंत्री ने बारहसिंगा के संरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में इस वन्यजीव को भी नया जीवन मिला है। उन्होंने बताया कि यह प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्त होने की स्थिति की ओर बढ़ रही थी। ऐसे में इसके संरक्षण से जुड़ी पहल महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जंगलों और उनमें रहने वाले जीवों का संरक्षण प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।

    चीता पुनर्बसाहट परियोजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में यह परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। कूनो में चीतों की पुनर्बसाहट के साथ प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण और उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों के पुनर्वास की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और वहां की सरकार के सहयोग से यह पहल शुरू की गई है। रविवार को छह मादा और आठ नर जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया। इस तरह कुल 14 जंगली भैंसों को जंगल में स्वतंत्र विचरण के लिए विमुक्त किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्वास से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश के जंगलों में बाघ, चीता, तेंदुआ, मगरमच्छ, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या बढ़ रही है। उनके मुताबिक, वन्यजीव प्रदेश की पहचान और पर्यटन के महत्व को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य प्रदेश की जैव विविधता को सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास मध्य प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर को समृद्ध बना रहे हैं। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों से कान्हा नेशनल पार्क आने की अपील दोहराई। उनके अनुसार, प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखना लोगों को प्रदेश के समृद्ध वन क्षेत्र और जैव विविधता से परिचित कराने का अवसर प्रदान करता है।

  • बायोकॉन लिमिटेड को 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी नोटिस, एफडीए भी शाहरुख खान समेत अभिनेताओं को सुनवाई का देगा मौका

    बायोकॉन लिमिटेड को 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी नोटिस, एफडीए भी शाहरुख खान समेत अभिनेताओं को सुनवाई का देगा मौका

    नई दिल्ली ।बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनी बायोकॉन लिमिटेड को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नोटिस मिला है। इसमें कर की बकाया राशि के साथ ब्याज और जुर्माना भी शामिल है। कंपनी को यह नोटिस आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम-2 स्थित जीएसटी कार्यालय से जारी किया गया है। कंपनी ने इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी देते हुए बताया कि नोटिस में कुल देनदारी के रूप में 3.2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की गई है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस आदेश का उसके वित्तीय और परिचालन कामकाज पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।

    नोटिस में 1.85 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में, 1.17 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में और 18.52 लाख रुपये जुर्माने के रूप में शामिल हैं। कर विभाग की ओर से कंपनी पर कई तरह की अनियमितताओं से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इनमें विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईजेड को की गई जीरो-रेटेड आपूर्ति के संबंध में जरूरी एंडोर्समेंट दस्तावेज जमा नहीं करना शामिल है। इसके अलावा इनपुट टैक्स के गलत रिवर्सल और इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूशन क्रेडिट के दावों में अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।

    जीरो-रेटेड आपूर्ति के तहत कुछ निर्धारित परिस्थितियों में वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति पर कर का प्रभाव अलग होता है। ऐसे मामलों में संबंधित दस्तावेजों और कर संबंधी नियमों का पालन महत्वपूर्ण होता है। बायोकॉन को मिले नोटिस में इन्हीं प्रक्रियाओं से संबंधित कथित कमियों को आधार बनाया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश के खिलाफ सुधार याचिका दाखिल करने या अपील करने की तैयारी कर रही है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया है कि इस मामले का उसके वित्तीय या परिचालन प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    इसी बीच, महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष विज्ञापन से जुड़े मामले में संबंधित अभिनेताओं से जवाब प्राप्त होने की जानकारी दी है। विभाग ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ सहित कुछ अभिनेताओं से प्रतिबंधित तंबाकू संबंधी उत्पादों के प्रचार को लेकर जवाब मांगा था। इन अभिनेताओं को भेजे गए नोटिस के बाद विभाग को उनके जवाब मिल गए हैं। अब आगे की कार्रवाई से पहले सभी संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का एक और अवसर दिया जाएगा।

    महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि विभाग आगे कोई निर्णय लेने से पहले संबंधित लोगों को सुनवाई का एक और मौका देगा। उन्होंने विज्ञापन करने वाले लोगों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनके प्रचार अभियान कानून के अनुरूप हों। विभाग का रुख है कि किसी उत्पाद का विज्ञापन करते समय लागू कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना जरूरी है।

    मुंडे ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 24 तथा वर्ष 2018 के विज्ञापन नियमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विज्ञापन संबंधी नियम सभी खाद्य उत्पादों पर लागू होते हैं। यदि कोई व्यक्ति या कारोबारी इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ें और समझें।

  • कोयला आपूर्ति में तेजी से बिजलीघरों का भंडार स्थिर, अक्टूबर में दैनिक सप्लाई बढ़कर 2.49 मिलियन टन पहुंची

    कोयला आपूर्ति में तेजी से बिजलीघरों का भंडार स्थिर, अक्टूबर में दैनिक सप्लाई बढ़कर 2.49 मिलियन टन पहुंची


    नई दिल्ली । देश के कोयला आधारित बिजलीघरों में कोयले का भंडार अक्टूबर में लगातार 18 मिलियन टन से अधिक बना हुआ है। 29 सितंबर 2026 से शुरू हुई यह स्थिति 10 अक्टूबर तक कायम रही। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में कोयले की आपूर्ति मजबूत होने से बिजलीघरों के भंडार में कमी आने की रफ्तार भी धीमी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिजली की मांग के लिए कोयले की खपत और आपूर्ति के बीच अंतर पहले की तुलना में कम हुआ है।

    29 सितंबर 2026 को देश के बिजलीघरों में कोयले का कुल भंडार 18.932 मिलियन टन दर्ज किया गया था। 10 अक्टूबर को यह 18.205 मिलियन टन रहा। इस अवधि में भंडार में कुछ कमी आई, लेकिन इसका स्तर 18 मिलियन टन से ऊपर बना रहा। संबंधित आंकड़े बताते हैं कि कोयले की दैनिक आपूर्ति बिजलीघरों की खपत के करीब पहुंची है। इससे ताप बिजलीघरों के लिए ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल रही है।

    अक्टूबर के दौरान कुछ दिनों में कोयले के भंडार में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। 2 अक्टूबर को स्टॉक में 0.024 मिलियन टन की वृद्धि हुई, जबकि 10 अक्टूबर को इसमें 0.017 मिलियन टन का इजाफा हुआ। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई, जब सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में कोयले के भंडार में कमी आने की गति काफी धीमी हो गई।

    आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में पूरे महीने बिजलीघरों का कोयला भंडार लगभग 7.28 मिलियन टन घट गया था। इस दौरान औसतन प्रतिदिन 0.24 मिलियन टन कोयले की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अक्टूबर के पहले 10 दिनों में कुल भंडार में लगभग 0.56 मिलियन टन की गिरावट आई। इस अवधि में औसत दैनिक कमी घटकर 0.06 मिलियन टन रह गई। दोनों अवधियों के आंकड़ों में अंतर कोयला आपूर्ति की स्थिति में सुधार का संकेत देता है।

    कोयले की ढुलाई में तेजी को इस सुधार का प्रमुख कारण बताया गया है। 1 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच बिजली क्षेत्र के लिए प्रतिदिन औसतन 469 रेक कोयला लोड किया गया। सितंबर में यह औसत 426 रेक प्रतिदिन था। इस तरह अक्टूबर में रेक लोडिंग में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। महीने के शुरुआती 10 दिनों में प्रतिदिन लोड किए गए रेक की संख्या 447 से 482 के बीच रही।

    ढुलाई बढ़ने के साथ बिजली क्षेत्र को मिलने वाली वास्तविक कोयला आपूर्ति में भी इजाफा हुआ। अक्टूबर में यह आपूर्ति बढ़कर 2.49 मिलियन टन प्रतिदिन हो गई, जबकि सितंबर में औसत आपूर्ति 2.21 मिलियन टन प्रतिदिन थी। अक्टूबर के 10 दिनों में से नौ दिन बिजली क्षेत्र को तय योजना से अधिक कोयला मिला। इससे बिजलीघरों की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में आपूर्ति की भूमिका मजबूत हुई है।

    कम भंडार वाले बिजलीघरों की स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार विभिन्न संयंत्रों के बीच कोयले का पुनर्वितरण किया जा रहा है, ताकि बिजली उत्पादन प्रभावित न हो। कोयले की ढुलाई और आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड, एससीसीएल, रेलवे और बिजली क्षेत्र की कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं। कोयला परिवहन में भारतीय रेलवे के प्रयासों और पेशेवर प्रतिबद्धता की भी सराहना की गई है।

  • सोने की कीमतों में 1,443 रुपये की गिरावट, चांदी भी 1,552 रुपये फिसली, जानें घरेलू बाजार में भाव और आगे के अहम स्तर

    सोने की कीमतों में 1,443 रुपये की गिरावट, चांदी भी 1,552 रुपये फिसली, जानें घरेलू बाजार में भाव और आगे के अहम स्तर

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना 1,443 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में 1,552 रुपये प्रति किलोग्राम तक की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में हल्की तेजी के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें नीचे रहीं। इसके पीछे रुपये की मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली को प्रमुख कारण बताया गया।

    एमसीएक्स पर 4 दिसंबर को डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र में 1,51,499 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,51,596 रुपये पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ने से भाव गिरकर 1,50,056 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस तरह सोने में 1,443 रुपये यानी करीब 0.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1,50,000 से 1,50,700 रुपये का दायरा महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर है।

    चांदी में भी कारोबार के दौरान दबाव बना रहा। एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,25,755 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। सोमवार को यह 2,25,494 रुपये पर खुली, जो पिछले बंद भाव से करीब 0.11 प्रतिशत कम था। इसके बाद कीमत और नीचे आई तथा चांदी 2,24,203 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस दौरान इसमें 1,552 रुपये यानी लगभग 0.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक मांग चांदी को कुछ समर्थन दे सकती है, लेकिन रुपये की मजबूती निकट भविष्य में इसकी कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है।

    वैश्विक बाजार में तस्वीर कुछ अलग रही। कॉमेक्स पर सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि चांदी का भाव करीब 61.1 डॉलर प्रति औंस रहा। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह रुपये में संभावित मजबूती की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया कदमों से रुपये को समर्थन मिलने की संभावना के बीच निवेशक इस घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। रुपया मजबूत होने पर आयातित सोना और चांदी घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत सस्ते पड़ सकते हैं।

    आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति शामिल हैं। बाजार में दिसंबर के दौरान ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीद भी बनी हुई है। आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी ऐसी संपत्तियों का आकर्षण घटा सकती हैं, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसलिए आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी ने 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को भी आर्थिक जोखिमों में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितता लंबे समय में सोने की सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मांग को समर्थन दे सकती है।

    तकनीकी स्तरों के लिहाज से सोने के लिए 1.50 लाख रुपये के आसपास का भाव अहम माना जा रहा है। यह स्तर टूटने पर कीमत 1.48 लाख रुपये तक जा सकती है, जबकि ऊपर की ओर 1.52 लाख से 1.53 लाख रुपये का दायरा प्रमुख प्रतिरोध स्तर है। चांदी के लिए 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण है। कीमतों में मजबूती आने पर इसका भाव 2.28 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

  • सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 30.61 प्रतिशत बढ़कर 38,306 करोड़ रुपये पहुंचा, उद्योग का कुल एयूएम 82.64 लाख करोड़ रुपये हुआ

    सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 30.61 प्रतिशत बढ़कर 38,306 करोड़ रुपये पहुंचा, उद्योग का कुल एयूएम 82.64 लाख करोड़ रुपये हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में सितंबर 2026 के दौरान इक्विटी योजनाओं में निवेश में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 38,306.55 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो अगस्त में दर्ज 29,328.62 करोड़ रुपये के मुकाबले 30.61 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 82.64 लाख करोड़ रुपये रही। हालांकि, इक्विटी योजनाओं में निवेश बढ़ने के बावजूद डेट फंड से भारी निकासी के कारण उद्योग का कुल शुद्ध निवेश नकारात्मक रहा।

    सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, ओपन-एंडेड इक्विटी योजनाओं में कुल 74,831.96 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि 36,525.41 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। निवेश और निकासी के अंतर के आधार पर इन योजनाओं में शुद्ध निवेश 38,306.55 करोड़ रुपये रहा। इक्विटी योजनाओं का कुल शुद्ध एसेट्स अंडर मैनेजमेंट 37.54 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। वहीं, सितंबर के दौरान इन योजनाओं का औसत एयूएम 38,50,660.61 करोड़ रुपये रहा।

    इक्विटी फंड की अलग-अलग श्रेणियों में स्मॉल कैप फंड निवेश के मामले में सबसे आगे रहे। इस श्रेणी में सितंबर के दौरान 9,038.57 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। स्मॉल कैप योजनाओं में कुल 13,025.13 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि 3,986.56 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। इस श्रेणी में निवेशकों के कुल 3.03 करोड़ फोलियो दर्ज किए गए। फोलियो से आशय निवेशकों के म्यूचुअल फंड खातों से है।

    अन्य इक्विटी श्रेणियों में मिड कैप फंड में 7,834.84 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। फ्लेक्सी कैप फंड में 6,701.80 करोड़ रुपये, लार्ज एंड मिड कैप फंड में 4,271.22 करोड़ रुपये और मल्टी कैप फंड में 3,859.55 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर में स्मॉल कैप के साथ मिड कैप और फ्लेक्सी कैप योजनाओं में भी निवेशकों की अच्छी भागीदारी रही।

    थीमैटिक फंड में 1,800.07 करोड़ रुपये और सेक्टोरल फंड में 1,840.02 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसके अलावा फोकस्ड फंड में 1,390.84 करोड़ रुपये, वैल्यू फंड में 1,290.89 करोड़ रुपये और लार्ज कैप फंड में 859.47 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। दूसरी ओर, कॉन्ट्रा फंड से 97.88 करोड़ रुपये और ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड से 662.14 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई।

    पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की स्थिति देखें तो सितंबर में कुल 1,33,375.57 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण डेट फंड से 1,83,155.76 करोड़ रुपये का भारी आउटफ्लो रहा। इस तरह इक्विटी योजनाओं में मजबूत निवेश के बावजूद डेट श्रेणी से निकासी ने उद्योग के कुल आंकड़ों को प्रभावित किया। सितंबर में उद्योग का कुल एयूएम 82.64 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि अगस्त में यह 87.08 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

    एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में सितंबर के दौरान निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। इस श्रेणी में कुल 15,501.40 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इक्विटी ईटीएफ में 9,959.96 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जबकि गोल्ड ईटीएफ में 4,450.61 करोड़ रुपये और सिल्वर ईटीएफ में 1,974.32 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। अगस्त में इक्विटी फंड में 29,328.62 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ था, जो जुलाई की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक था। सितंबर में यह निवेश और बढ़कर 38,306.55 करोड़ रुपये पहुंच गया।

  • आरबीआई के सख्त विदेशी मुद्रा नियमों का असर, डॉलर के मुकाबले रुपया 95.76 पर खुला, एक प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई भारतीय मुद्रा

    आरबीआई के सख्त विदेशी मुद्रा नियमों का असर, डॉलर के मुकाबले रुपया 95.76 पर खुला, एक प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई भारतीय मुद्रा

    नई दिल्ली ।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने और कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए उठाए गए सख्त कदमों के बाद सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया एक प्रतिशत से अधिक मजबूत होकर 95.76 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ था और यह 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गई थी। ऐसे में केंद्रीय बैंक के नए उपायों के बाद रुपये में आई मजबूती को विदेशी मुद्रा बाजार के घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

    रुपये की मजबूती का असर ऑफशोर कारोबार में भी दिखाई दिया। एक महीने के नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजार में भारतीय मुद्रा एक समय 94.17 प्रति डॉलर तक पहुंच गई थी। इस स्तर पर रुपये में लगभग 2.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, बाद में इसमें कुछ नरमी आई और बढ़त घटकर करीब 0.7 प्रतिशत रह गई। इससे स्पष्ट हुआ कि शुरुआती मजबूती के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा।

    अक्टूबर की शुरुआत में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन को लेकर कई नियामकीय बदलावों की घोषणा की थी। इन उपायों के तहत बिना हेजिंग वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (एफईआरआर) नाम से एक नई व्यवस्था लागू की। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में अनियंत्रित गतिविधियों पर रोक लगाना और कारोबार को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

    नए निर्देशों के अनुसार, अधिकृत डीलर भारतीय रुपये से संबंधित ऐसे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक नहीं कर सकेंगे, जिसे पहले रद्द किया जा चुका है। हालांकि, अनुबंध की निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसके रोलओवर की अनुमति बनी रहेगी। इस व्यवस्था के जरिए पहले रद्द किए गए अनुबंधों को दोबारा बुक करने से जुड़ी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास किया गया है।

    आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करने वाले ग्राहकों के लिए भी नियम सख्त किए हैं। अब अधिकृत डीलरों को ग्राहकों से लिखित घोषणा लेनी होगी कि जिस मूल जोखिम से बचाव के लिए हेजिंग की जा रही है, उसके लिए किसी अन्य अधिकृत डीलर के साथ पहले से हेजिंग नहीं की गई है। इस शर्त का उद्देश्य एक ही जोखिम के लिए अलग-अलग जगहों पर दोहरी हेजिंग की संभावना को नियंत्रित करना है।

    एफईआरआर व्यवस्था के तहत 20 लाख डॉलर से अधिक मूल्य वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए अधिकृत डीलरों को अनुबंध मूल्य के रुपये में समतुल्य का 20 प्रतिशत नकद रिजर्व आरबीआई के पास रखना होगा। यह रिजर्व अनुबंध की समाप्ति तक प्रतिदिन बनाए रखना अनिवार्य है। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपयोगकर्ता कई लेनदेन के माध्यम से नियामकीय नियमों को दरकिनार करने का प्रयास करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

    शनिवार को आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करने समेत कई अन्य कदम उठाए थे। ये उपाय ऐसे समय में किए गए, जब रुपया 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। इससे पहले पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में भी बढ़ोतरी की थी और संकेत दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर मौद्रिक नीति को और सख्त किया जा सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की आगे की चाल पर इन उपायों का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर भविष्य की दिशा को निश्चित नहीं कहा जा सकता।

  • उत्तर प्रदेश में मौसम की दोहरी मार, लखनऊ की कॉलोनियों में भरा पानी, उफान पर नदियां, 15 जिलों में बारिश और ओले गिरने की चेतावनी

    उत्तर प्रदेश में मौसम की दोहरी मार, लखनऊ की कॉलोनियों में भरा पानी, उफान पर नदियां, 15 जिलों में बारिश और ओले गिरने की चेतावनी


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में बाढ़ और बारिश से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। राजधानी लखनऊ में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। शहर के कई इलाकों में लगातार 15वें दिन बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। कॉलोनियों में गर्दन तक पानी भरने की स्थिति बताई जा रही है। हजारों घर अब भी जलमग्न हैं और तीन लाख से अधिक लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। कई जगह लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चंद्रिका देवी मंदिर परिसर में भी घुटनों तक पानी भर गया है। शहर के प्रभावित इलाकों में जलभराव के कारण आवागमन और सामान्य जनजीवन बाधित है।
    लखनऊ के अलावा प्रदेश के दूसरे जिलों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बना हुआ है। उन्नाव में गंगा नदी उफान पर है। कई गली-मोहल्लों में पानी भरने के कारण लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। सोमवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान पर बह रही थी। तरबगंज तहसील के ब्योन्दा और माझा गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत अभियान के तहत एक हजार से अधिक लोगों तक राहत सामग्री और भोजन के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं।
    पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है। नेपाल के गोरखा जिले में भूस्खलन के बाद बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने की खबर है। पानी नारायणी नदी की ओर बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर कुशीनगर क्षेत्र के करीब 50 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। तरया सुजान इलाके में एपी तटबंध पहले से टूटा होने के कारण चिंता बढ़ गई है। प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रखने और संभावित नुकसान से बचाने की चुनौती है।
    इसी बीच सोमवार सुबह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मौसम ने करवट ली। नोएडा और गाजियाबाद के साथ बरेली और मथुरा तथा अलीगढ़ में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। इससे पहले रविवार को मेरठ और शामली में ओलावृष्टि हुई थी। बिजनौर में तेज आंधी के कारण कई जगह पेड़ उखड़ गए थे। मौसम में अचानक बदलाव से जहां गर्मी और उमस से राहत मिली है वहीं किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है।
    आगरा में सोमवार सुबह बादल छाए रहे और तेज हवाओं के कारण मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस हुआ। दिन में बूंदाबांदी की संभावना जताई गई। बरेली में नवरात्रि के दौरान गुलाबी ठंड का एहसास होने लगा है। सुबह आसमान में बादल छाए रहे और कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। अलीगढ़ में भी रात से बादल छाए रहने के बाद सुबह बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बूंदाबांदी शुरू हुई। नोएडा में रविवार देर रात से बारिश का दौर जारी रहने की जानकारी सामने आई।
    गोंडा के राजगढ़ अमीनपुर गांव में एक अलग घटना ने लोगों का ध्यान खींचा। शनिवार शाम सर्प मित्र अरुण कुमार बाबा अजगर को पकड़ने पहुंचे थे। इसी दौरान अजगर उनके दाहिने पैर से लिपट गया। करीब आधे घंटे तक चले प्रयास के बाद उन्होंने साथियों की मदद से खुद को छुड़ाया। इसके बाद अजगर को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया गया। घटना का वीडियो रविवार शाम सामने आया।
    लगातार बाढ़ और बारिश के बीच प्रभावित लोगों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ और खराब मौसम से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए नौ लाख से अधिक किसानों के खातों में 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजने की घोषणा की है। ऐसे हालात में प्रशासन की निगरानी और समय पर राहत पहुंचाना जरूरी है ताकि जलभराव और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को जल्द मदद मिल सके।
  • अखिलेश-योगी की सियासी चुनौती पर राजभर का वार, बोले- अखिलेश जी अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाइए, यूपी में बयानबाजी तेज

    अखिलेश-योगी की सियासी चुनौती पर राजभर का वार, बोले- अखिलेश जी अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाइए, यूपी में बयानबाजी तेज


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राजभर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ललकारने के बाद पीछे हटने वाले को भगोड़ा कहा जाता है। उन्होंने अखिलेश यादव से अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती से पीछे नहीं हटने की बात कही। राजभर का यह बयान योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर हुई बयानबाजी के बाद आया है।
    दरअसल अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। इसके जवाब में योगी ने पलटवार करते हुए कहा था कि अखिलेश चाहें तो दोनों चुनाव लड़कर देख सकते हैं। इसके बाद अखिलेश ने अपने बयान में कहा कि इसके लिए उनका सिपाही ही काफी है। इसी घटनाक्रम को लेकर राजभर ने अखिलेश पर तंज कसते हुए उन्हें चुनौती स्वीकार करने की नसीहत दी। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी आरोप-प्रत्यारोप चर्चा में आ गए हैं।
    दूसरी ओर लखनऊ में कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय पर हुए हंगामे का मामला भी लगातार सुर्खियों में है। रविवार को पार्टी कार्यालय में पदभार ग्रहण समारोह के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ था। इस घटना से जुड़े एक नए वीडियो में कांग्रेस की महिला नेता ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच तीखी बहस दिखाई देने की बात सामने आई है। वीडियो में ममता चौधरी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह अजय राय की शक्ल नहीं देखना चाहतीं। इसके जवाब में अजय राय नाराज होते हुए उन्हें औकात में रहने की बात कहते सुनाई देते हैं।
    इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी मतभेदों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ममता चौधरी ने आरोप लगाया है कि अजय राय ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। वहीं घटना के वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के भीतर अनुशासन और कार्यकर्ताओं के व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस कार्यालय में हुए हंगामे के दौरान धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की खबरें भी सामने आई थीं।
    इसी बीच अखिलेश यादव ने लखनऊ में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया को श्रद्धांजलि दी और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में डुप्लीकेट और ट्रिपल वोट मौजूद हैं। अखिलेश ने आजमगढ़ की सदर विधानसभा सीट का जिक्र करते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति के नाम पर दस वोट दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी।
    अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर भाजपा की कथित गड़बड़ियों को उजागर करेगी। दूसरी ओर राजभर ने दावा किया कि जनता ने इंडिया गठबंधन को नकार दिया है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनका इंडिया गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। इन बयानों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल आगामी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति और विरोधियों पर हमले तेज कर रहे हैं। अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती और कांग्रेस कार्यालय का विवाद फिलहाल प्रदेश की सियासत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।