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  • नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तारडे, बोले- नाना से बड़ा नहीं बॉलीवुड

    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड सितारों की गैरमौजूदगी पर भड़के प्रवीण तारडे, बोले- नाना से बड़ा नहीं बॉलीवुड


    नई दिल्ली:
    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई कलाकारों की गैरमौजूदगी को लेकर मराठी अभिनेता और निर्देशक प्रवीण तारडे ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जो लोग नाना पाटेकर को अपना दोस्त मानते थे, उन्हें उनके अंतिम संस्कार में जरूर पहुंचना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्मी सितारों के नहीं आने से नाना पाटेकर की महानता कम नहीं होती। उनके मुताबिक, अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में किसानों का शामिल होना इस बात का प्रमाण था कि अभिनेता का जुड़ाव केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं था।

    नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी सिनेमा जगत में शोक की लहर फैल गई। उनका अंतिम संस्कार पुणे के पास स्थित उनके पैतृक गांव डोणजे में उनके फार्महाउस पर किया गया। इस दौरान परिवार के सदस्यों, राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और मनोरंजन जगत की कुछ हस्तियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। हालांकि, बॉलीवुड के कई चर्चित कलाकारों की सीमित मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई।

    प्रवीण तारडे ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि नाना पाटेकर का कद किसी फिल्म उद्योग या सितारों की उपस्थिति से तय नहीं होता। उन्होंने अंतिम संस्कार में पहुंचे किसानों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से किसान नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने किसानों के पसीने और मिट्टी से जुड़े जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए किसानों का सम्मान फिल्मी दुनिया के बड़े नामों से भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने नाना के ग्रामीण जीवन और किसानों के साथ उनके संबंधों को उनकी पहचान का अहम हिस्सा बताया।

    तारडे ने कहा कि नाना पाटेकर ने खुद को केवल बॉलीवुड के अभिनेता के रूप में पेश नहीं किया। वह अपनी पहचान किसान के रूप में भी बताते थे। इसी वजह से उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी को तारडे ने खास महत्व दिया। उन्होंने कहा कि नाना का लोगों से जुड़ाव और उनके प्रति सम्मान उनकी वास्तविक विरासत को दर्शाता है। उनके मुताबिक, अभिनेता की लोकप्रियता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि अंतिम संस्कार में कितने फिल्मी सितारे पहुंचे।

    हालांकि, प्रवीण तारडे ने बॉलीवुड के कुछ लोगों की गैरमौजूदगी पर शिकायत भी जताई। उन्होंने कहा कि कम से कम उन लोगों को जरूर आना चाहिए था, जिन्हें नाना अपना दोस्त मानते थे। उन्होंने जैकी श्रॉफ और सुरेश वाडकर का उल्लेख करते हुए बताया कि ये दोनों नाना को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। तारडे ने मुंबई में किसी कम चर्चित कलाकार के निधन पर लोगों के बड़ी संख्या में पहुंचने और नाना के अंतिम संस्कार में सीमित बॉलीवुड मौजूदगी के बीच अंतर पर भी सवाल उठाए।

    नाना पाटेकर का अभिनय करियर हिंदी और मराठी सिनेमा में लंबे समय तक प्रभावशाली रहा। फिल्मों के अलावा वह किसानों और ग्रामीण समुदायों से जुड़े सामाजिक कार्यों के लिए भी पहचाने जाते थे। उनके अंतिम संस्कार में किसानों की बड़ी मौजूदगी ने उनके इस जुड़ाव को फिर चर्चा में ला दिया। प्रवीण तारडे की नाराजगी के बावजूद उनका कहना था कि बॉलीवुड के सितारों की गैरमौजूदगी से नाना का सम्मान कम नहीं होता। उनके लिए अभिनेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे किसान ही उनकी लोकप्रियता और लोगों के साथ उनके गहरे संबंधों की महत्वपूर्ण तस्वीर थे।

  • केतु के नक्षत्र परिवर्तन से अगले 55 दिन इन 5 राशियों के लिए रह सकते हैं खास, धन लाभ और करियर में तरक्की के योग

    केतु के नक्षत्र परिवर्तन से अगले 55 दिन इन 5 राशियों के लिए रह सकते हैं खास, धन लाभ और करियर में तरक्की के योग

    केतु गोचर 2026: वैदिक ज्योतिष में केतु के नक्षत्र परिवर्तन को महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, केतु का यह परिवर्तन कुछ राशियों के जीवन में करियर, कारोबार और आर्थिक स्थिति से जुड़े बदलावों का संकेत दे सकता है। इस अवधि में मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए विशेष संभावनाएं बताई गई हैं। इन राशियों के लोगों को नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिलने, कारोबार में नए अवसर सामने आने और आर्थिक मामलों को बेहतर तरीके से संभालने के मौके मिल सकते हैं।

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, 3 अक्टूबर 2026 को केतु ने मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश किया। बताया गया है कि केतु 5 दिसंबर 2026 तक मघा नक्षत्र में रहेगा। इस अवधि को लगभग 55 दिनों का समय माना जा रहा है। ज्योतिष में केतु को छाया ग्रह कहा जाता है और इसे आध्यात्मिकता, वैराग्य तथा अचानक होने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ग्रहों के गोचर से मिलने वाले परिणाम ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होते हैं। वास्तविक जीवन में आर्थिक लाभ या करियर की सफलता की गारंटी नहीं होती।

    मेष राशि के जातकों के लिए इस अवधि में नौकरी और कारोबार से जुड़े नए अवसर मिलने की संभावना जताई गई है। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है और उन्हें अपनी कार्यक्षमता दिखाने का अवसर मिल सकता है। कारोबारियों को पुराने संपर्कों से लाभ मिलने या नए काम शुरू करने के अवसर सामने आने की उम्मीद बताई गई है। आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए भी यह समय उपयोगी माना जा रहा है। लंबे समय से अटके कामों को पूरा करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से प्रयास करना महत्वपूर्ण रहेगा।

    सिंह राशि के लोगों के लिए केतु का यह नक्षत्र परिवर्तन कार्यक्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर ला सकता है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को नए विकल्पों पर ध्यान देने का मौका मिल सकता है। कारोबार में नई योजनाओं और परियोजनाओं पर काम करने की संभावनाएं बन सकती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस राशि के कुछ जातकों को पहले से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की उम्मीद भी रह सकती है। आर्थिक मामलों में अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण और बचत को प्राथमिकता देना उपयोगी होगा।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह अवधि नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसरों से जुड़ी मानी जा रही है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को नए विकल्पों पर विचार करने का मौका मिल सकता है। कारोबारियों को पुराने ग्राहकों से लाभ मिलने की संभावना बताई गई है। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचते हुए योजनाबद्ध तरीके से निर्णय लेना महत्वपूर्ण रहेगा। नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए मौजूदा कामकाज और भविष्य की योजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

    धनु राशि के लोगों के लिए इस दौरान पुराने भुगतान से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलने की संभावना जताई गई है। नौकरीपेशा लोगों को बेहतर प्रदर्शन करने और अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के अवसर मिल सकते हैं। कारोबारियों के लिए नए प्रोजेक्ट या काम मिलने की उम्मीद बताई गई है। वहीं, मीन राशि के जातकों के लिए करियर में नई जिम्मेदारियों और कारोबार के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं। आर्थिक मामलों में सही योजना बनाकर चलना और खर्चों पर नजर रखना उनके लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • होटल में बुलाकर कपड़े उतरवाए फिर वीडियो वायरल करने की धमकी, ग्वालियर में डेटिंग ऐप के जरिए ठगी का खुलासा

    होटल में बुलाकर कपड़े उतरवाए फिर वीडियो वायरल करने की धमकी, ग्वालियर में डेटिंग ऐप के जरिए ठगी का खुलासा


    ग्वालियर । ग्वालियर में डेटिंग ऐप के जरिए दोस्ती कर एक युवक को होटल में बुलाने और फिर अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बदमाशों ने युवक को बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की और खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद नकदी और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए उससे करीब 1.38 लाख रुपए वसूल लिए गए। आरोपी यहीं नहीं रुके और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर 70 हजार रुपए और मांगने लगे। शिकायत के बाद ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने मुरैना से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
    पुलिस के अनुसार माधौगंज की लड्डूवाली गली में रहने वाले 28 वर्षीय युवक ने बताया कि वह ग्राइंडर डेटिंग ऐप का इस्तेमाल करता है। 8 अक्टूबर को दोपहर करीब दो बजे उसकी हरियाणा नाम की प्रोफाइल से बातचीत शुरू हुई। बातचीत के दौरान सामने वाले व्यक्ति ने अपना नाम राहुल बताया और युवक को सिटी सेंटर के पटेल नगर स्थित होटल गोल्डन लीफ में मिलने के लिए बुलाया। युवक शाम करीब चार बजे होटल पहुंचा तो उसे कमरा नंबर 206 में ले जाया गया। वहां पहले से रची गई साजिश के तहत उसके साथ मारपीट की गई। कुछ ही देर में चार अन्य युवक भी कमरे में पहुंच गए। उन्होंने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए युवक को जेल भेजने की धमकी दी।
    आरोप है कि पांचों युवकों ने पीड़ित को बंधक बना लिया और बेल्ट से उसकी पिटाई की। इस दौरान उसके गाल और दाहिने पैर में चोटें आईं। इसके बाद आरोपियों ने उसके कपड़े उतरवाकर मोबाइल से अश्लील वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे पांच लाख रुपए मांगे गए। अचानक सामने आई इस स्थिति से घबराए युवक ने आरोपियों को अपनी जेब में रखे आठ हजार रुपए दे दिए। इसके बाद आरोपियों ने उसका एटीएम कार्ड और पासवर्ड अपने कब्जे में लेकर खाते से 30 हजार रुपए निकाल लिए। एक क्यूआर कोड के जरिए भी 30 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए।
    पीड़ित के मुताबिक इसके बाद आरोपी उसे सफेद क्रेटा कार में बैठाकर सिरोल की ओर ले गए। वहां युवक ने अपनी एक दोस्त से संपर्क किया और उसकी मदद से रकम ट्रांसफर कराई। आरोपियों ने संबंधित घर पहुंचकर 70 हजार रुपए नकद भी लिए। रात करीब साढ़े नौ बजे युवक को होटल के बाहर छोड़ दिया गया। हालांकि इसके बाद भी उसे राहत नहीं मिली। आरोपी लगातार संपर्क कर 70 हजार रुपए और मांगने लगे। रकम नहीं देने पर अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने और जान से मारने की धमकी दी गई। लगातार मिल रही धमकियों के कारण परेशान युवक ने आखिरकार क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह के निर्देश पर क्राइम ब्रांच की टीम गठित की गई। डीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार और डीएसपी मनीष यादव के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने रविवार रात मुरैना के अंबाह बायपास रोड से दो आरोपियों को पकड़ा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरिभान उर्फ करुआ गुर्जर निवासी ग्राम पिपरई और सोनू गुर्जर निवासी ग्राम पिपरई के रूप में हुई है। दोनों गांव पिपरई क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि हरिभान ने ही राहुल नाम से फर्जी पहचान बनाकर युवक से संपर्क किया था।
    एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि डेटिंग ऐप के जरिए युवक को होटल बुलाने और अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर रकम वसूलने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह मामला ऑनलाइन दोस्ती के दौरान पहचान की पुष्टि करने और निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को सामने लाता है। किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग या धमकी मिलने पर पीड़ित को डरकर चुप रहने के बजाय पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
  • मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती

    मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत होने वाली मुफ्त रजिस्ट्रियों पर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटने की सहमति देने वाले पटवारियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए जाते तब तक वे योजना का काम नहीं करेंगे। पटवारी संघ का कहना है कि सरकार के स्तर पर सहमति बनने और राजस्व विभाग की ओर से कानूनी संरक्षण से जुड़ा आदेश जारी होने के बावजूद जिलों में कलेक्टरों ने बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। ऐसे में पटवारी स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं।
    रविवार शाम मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 218 के तहत आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से जुड़े विवाद या न्यायालयीन प्रकरण की स्थिति में पटवारियों के खिलाफ केस चलाने से संरक्षण दिया गया है। हालांकि संघ का कहना है कि 17 सितंबर के बाद पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति बनी थी लेकिन अब तक संबंधित कलेक्टरों ने बहाली के आदेश जारी नहीं किए हैं। इसी वजह से प्रदेश के पटवारी फिलहाल योजना के काम से अलग रहेंगे।

    इससे पहले 9 अक्टूबर की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पटवारी संघ के बीच बातचीत के बाद सहमति बनने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद संघ ने 12 अक्टूबर से काम शुरू करने का ऐलान किया था। उस समय न्यायिक संरक्षण के आदेश जारी करने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को समाप्त करने पर सहमति बनने की बात कही गई थी। वेतन विसंगति के मुद्दे पर आयोग के गठन के बाद विचार करने और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा करने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन बहाली के आदेश जारी नहीं होने से सहमति के बावजूद विवाद फिर गहरा गया है।
    स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत गांवों की आबादी वाली भूमि का ड्रोन सर्वे कराकर संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर और जमीन से जुड़े अधिकारों का दस्तावेज उपलब्ध कराना है। मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक करीब 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन रजिस्ट्रियों के लिए हितग्राहियों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसका खर्च सरकार उठा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं।
    पटवारियों की मुख्य आपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और संभावित कानूनी जिम्मेदारी को लेकर है। संघ के मुताबिक दस्तावेजों में ग्रामीण को क्रेता और पटवारी को विक्रेता या निष्पादक की भूमिका दी गई है। पटवारियों का कहना है कि वे जमीन के मालिक नहीं हैं और न ही उन्हें हर मामले में मालिकाना हक तय करने का अधिकार है। ऐसे में भविष्य में जमीन की सीमा हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद होने पर उनके हस्ताक्षर के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने का डर है।
    संघ ने रिकॉर्ड में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया है। गुना में पटवारी संघ के अनुसार कुछ मामलों में मौके पर कब्जा एक भाई का है जबकि दस्तावेजों में तीन भाइयों के नाम दर्ज हैं। ऐसे मामलों में भविष्य में विवाद की आशंका बनी रहती है। पटवारी संघ का कहना है कि उसे योजना से आपत्ति नहीं है लेकिन निष्पादक की भूमिका और उससे जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। अब निगाहें सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर हैं क्योंकि बहाली के आदेश जारी नहीं हुए तो मुफ्त रजिस्ट्रियों का काम प्रभावित हो सकता है।
  • SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का दिल्ली मार्च, जीतू पटवारी-उमंग सिंघार पहुंचे दिल्ली, एमपी में नेताओं पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद

    SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का दिल्ली मार्च, जीतू पटवारी-उमंग सिंघार पहुंचे दिल्ली, एमपी में नेताओं पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली ।  राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस मार्च से पहले मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मार्च में शामिल होने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेता और विधायक दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसी बीच दिल्ली रवाना होने की तैयारी कर रहे मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया को रविवार रात पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके अलावा श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर भी पुलिस पहुंची। इन घटनाओं के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पार्टी नेताओं को दिल्ली मार्च में शामिल होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुरैना ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष मधुराज सिंह तोमर और भिंड शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र भदौरिया दिल्ली जाने के लिए मुरैना में एक ही स्थान पर ठहरे हुए थे। इसी दौरान पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे मार्च में शामिल होने की तैयारी से जोड़कर देखा है। हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत में लिए जाने के कारण और कार्रवाई की अवधि को लेकर आधिकारिक पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में इस मामले में पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
    इसी घटनाक्रम के बीच श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल के घर पुलिस पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि विधायक के घर पहुंची पुलिस से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस विधायक को हिरासत में लेने में सफल हुई या नहीं इस बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस वजह से पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है।
    दूसरी ओर मध्य प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में प्रस्तावित मार्च में शामिल होने के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ विधायक आरिफ मसूद झूमा सोलंकी सेना पटेल फुंदेलाल मार्को और केशव देसाई सहित कई नेता और पूर्व विधायक शामिल हैं। दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में भी कांग्रेस के विधायक और नेता मौजूद हैं। पार्टी की ओर से इस मार्च के जरिए अपनी मांगों को आगे रखने की तैयारी की गई है।
    कांग्रेस का यह मार्च मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। पार्टी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाती रही है। कांग्रेस की योजना मार्च के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर अपनी मांगें रखने की है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी पहले भी अपनी आपत्तियां सामने रख चुकी है।
    मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिए जाने और विधायक के घर पुलिस पहुंचने की घटनाओं ने दिल्ली मार्च से पहले राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया है। कांग्रेस इसे अपने नेताओं को रोकने की कोशिश बता रही है जबकि पुलिस की कार्रवाई के आधार पर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में मार्च के दौरान पार्टी की गतिविधियों और इस पूरे घटनाक्रम पर आगे होने वाले घटनाक्रम पर नजर रहेगी।
  • दो साल से उच्च पद का प्रभार फिर भी नियमित प्रमोशन नहीं, एमपी के 32 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी, जल्द फैसले की मांग तेज

    दो साल से उच्च पद का प्रभार फिर भी नियमित प्रमोशन नहीं, एमपी के 32 हजार शिक्षकों की पदोन्नति अटकी, जल्द फैसले की मांग तेज


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के 32 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से लंबित है। दूसरी ओर जनजातीय कार्य विभाग ने 264 उच्च श्रेणी शिक्षकों और प्रधानपाठकों को व्याख्याता के पद पर पदोन्नति देने के आदेश जारी कर दिए हैं। दोनों विभागों की इस अलग-अलग स्थिति को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों में नाराजगी सामने आई है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने सवाल उठाया है कि जब मुख्यमंत्री की ओर से निर्देश दिए जाने की बात कही जा रही है तो फिर स्कूल शिक्षा विभाग में पात्र शिक्षकों की पदोन्नति के आदेश जारी करने में देरी क्यों हो रही है।
    शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर दोनों विभागों की स्थिति अब कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में समान योग्यता और अर्हता के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को पदोन्नति के अवसर मिलने चाहिए। संगठन के मुताबिक जनजातीय कार्य विभाग में पिछले कुछ महीनों के दौरान सहायक शिक्षक से उच्च श्रेणी शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक से व्याख्याता के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग में प्राथमिक शिक्षक सहायक शिक्षक माध्यमिक शिक्षक और उच्च श्रेणी शिक्षक संवर्ग के अनेक पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति अब भी अटकी हुई है।
    शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया अलग-अलग दिखाई दे रही है। संगठन का तर्क है कि यदि दोनों विभागों में शिक्षकों की योग्यता अर्हता और सेवा शर्तें समान हैं तो पदोन्नति के अवसरों में अंतर नहीं होना चाहिए। संगठन ने शासन और संबंधित विभाग से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
    मामले का एक अहम पहलू उन शिक्षकों से भी जुड़ा है जो करीब दो साल पहले से उच्च पद का प्रभार संभाल रहे हैं। संगठन के अनुसार इन शिक्षकों को अब तक नियमित पदोन्नति के आदेश नहीं मिले हैं। उच्च पद की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद नियमित पदोन्नति नहीं मिलने से कर्मचारियों के सेवा संबंधी हित प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है। प्रभार और नियमित पदोन्नति के बीच अंतर होने के कारण शिक्षकों को अपने भविष्य और सेवा लाभों को लेकर स्पष्टता की जरूरत महसूस हो रही है।
    शिक्षक संगठन का कहना है कि लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया लंबित रहने से पात्र कर्मचारियों के करियर पर असर पड़ता है। साथ ही विभागीय व्यवस्था में भी असंतोष बढ़ सकता है। संगठन ने मांग की है कि स्कूल शिक्षा विभाग सभी लंबित मामलों की समीक्षा करे और नियमानुसार पात्र शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ देने के लिए जल्द निर्णय ले। उच्च पद का प्रभार संभाल रहे शिक्षकों के मामलों का भी प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने की मांग की गई है।
    संगठन ने शासन से पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की अपील की है। इससे शिक्षकों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उनके मामलों पर कब तक निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षक पदोन्नति आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मांग पर कब तक निर्णय लेता है और लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
  • नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट

    नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट


    भोपाल । शारदीय नवरात्र मेले के दौरान मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विंध्याचल स्टेशन पर 12 एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया गया है। यह सुविधा 26 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। निर्धारित ट्रेनों को स्टेशन पर दो-दो मिनट का ठहराव दिया जाएगा। इससे मेले के दौरान विंध्याचल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिल सकती है। रेलवे ने मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति भी 30 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है।
    पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल के अनुसार नवरात्र मेले में यात्रियों की अतिरिक्त आवाजाही को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव पाने वाली ट्रेनों में मुंबई से पाटलिपुत्र डिब्रूगढ़ गुवाहाटी भागलपुर दानापुर और बनारस सहित विभिन्न शहरों के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रा करने वाले श्रद्धालु निर्धारित समय पर विंध्याचल स्टेशन पर उतरकर आगे की यात्रा की योजना बना सकेंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का समय जरूर जांच लें।
    रेलवे की सूची के अनुसार लोकमान्य तिलक टर्मिनस से पाटलिपुत्र जाने वाली ट्रेन संख्या 12141 रात 10:30 बजे से 10:32 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर रुकेगी। पाटलिपुत्र से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12142 शाम 4:05 बजे से 4:07 बजे तक ठहरेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से डिब्रूगढ़ जाने वाली ट्रेन संख्या 15945 और गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन संख्या 15647 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक स्टेशन पर रुकेंगी। वहीं डिब्रूगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15946 और गुवाहाटी से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15648 शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक ठहरेंगी।
    भागलपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12335 भी शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक रुकेगी। इसके विपरीत दिशा में चलने वाली ट्रेन संख्या 12336 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव लेगी। सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु से दानापुर जाने वाली ट्रेन संख्या 12295 रात 1:40 बजे से 1:42 बजे तक और दानापुर से बेंगलुरु जाने वाली ट्रेन संख्या 12296 रात 12:35 बजे से 12:37 बजे तक स्टेशन पर रुकेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से बनारस जाने वाली ट्रेन संख्या 12167 रात 10:15 बजे से 10:17 बजे तक जबकि बनारस से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12168 दोपहर 12:10 बजे से 12:12 बजे तक ठहराव लेगी।
    दूसरी ओर मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। रेलवे ने नवरात्र मेले के दौरान सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। गति सीमा लागू होने से ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ सकता है इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय का ध्यान रखना चाहिए।
    नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में अस्थायी ठहराव और गति सीमा जैसी व्यवस्थाएं यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यात्रा पर निकलने से पहले रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से ट्रेन का समय ठहराव और संभावित बदलाव की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। इससे अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सकेगा।

  • शिवराज के बेटे कार्तिकेय को मिली बड़ी जिम्मेदारी, एमपी वॉलीबॉल संघ की कमान संभाली, गांव-गांव तक खेल पहुंचाने का लक्ष्य

    शिवराज के बेटे कार्तिकेय को मिली बड़ी जिम्मेदारी, एमपी वॉलीबॉल संघ की कमान संभाली, गांव-गांव तक खेल पहुंचाने का लक्ष्य


    भोपाल । मध्य प्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने खेल प्रशासन के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्हें मध्य प्रदेश वॉलीबॉल संघ का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है। रविवार को भोपाल में आयोजित चुनाव में प्रदेश के 33 जिला वॉलीबॉल संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्तिकेय को वर्ष 2026 से 2030 तक के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना गया है। इस जिम्मेदारी के साथ अब प्रदेश में वॉलीबॉल के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उनसे कई उम्मीदें जुड़ गई हैं।
    अध्यक्ष चुने जाने के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान ने प्रदेश में वॉलीबॉल को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश वॉलीबॉल खेल नीति 2026 का प्रारूप जल्द तैयार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में इस खेल के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य नई प्रतिभाओं को सामने लाना और खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ ही खेल से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने और जिला संघों को आर्थिक सहायता देने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है।
    कार्तिकेय ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने के लिए संघ के पदाधिकारियों जिला संघों के प्रतिनिधियों और सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी ने जिस भरोसे के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी दी है उस पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनका लक्ष्य वॉलीबॉल को प्रदेश के गांवों और युवाओं तक पहुंचाना है ताकि अधिक से अधिक खिलाड़ी इस खेल से जुड़ सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    चुनाव प्रक्रिया एडवोकेट दिलीप मालवीय की देखरेख में संपन्न हुई। नई कार्यकारिणी में अनवर खान को वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया है। विधायक आशीष शर्मा और राम पांडे को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। सतीश जोशी महासचिव और विशाल शर्मा कोषाध्यक्ष चुने गए हैं। वहीं डीआर सिंह और राजेश शुक्ला संयुक्त सचिव बनाए गए हैं। कार्यकारिणी में आशीष सिंह भूपेन्द्र कांत राजेन्द्र चतुर्वेदी मेरिट खिलाड़ी श्वेता शर्मा और रीवा के कृष्णानंद को भी शामिल किया गया है।
    बैठक में विभिन्न आयु वर्गों की राज्य स्तरीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप आयोजित कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इससे प्रदेश के अलग-अलग जिलों के खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने और अपनी प्रतिभा साबित करने का मंच मिल सकेगा। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं नए खिलाड़ियों को अनुभव देने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की पहचान करने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
    नई कार्यकारिणी के सामने अब प्रदेश में वॉलीबॉल के विस्तार और जिला संघों को मजबूत करने की चुनौती होगी। खेल नीति का प्रारूप तैयार करना सुविधाओं में सुधार करना और खिलाड़ियों को प्रशिक्षण तथा प्रतियोगिताओं के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। कार्तिकेय सिंह चौहान ने गांव-गांव तक वॉलीबॉल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। अब इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए संघ की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

  • एमपी में शराब तस्करी के आरोपियों का वाहन चोरी से कनेक्शन, पूछताछ में 16 बाइक और एक छोटा हाथी चुराने की बात आई सामने

    एमपी में शराब तस्करी के आरोपियों का वाहन चोरी से कनेक्शन, पूछताछ में 16 बाइक और एक छोटा हाथी चुराने की बात आई सामने


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में अवैध कच्ची शराब की तस्करी के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से वाहन चोरी की 17 वारदातों का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 5 लाख रुपये कीमत की छह चोरी की बाइक बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान 16 बाइक और एक महिंद्रा लोडिंग वाहन चोरी करने की बात स्वीकार की है। मामले में आलोट और जावरा ग्रामीण अनुभाग की संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई की। रविवार रात ताल थाने में पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी दी।
    पुलिस के मुताबिक 11 अक्टूबर को अवैध कच्ची शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हरपाल कंजर और अर्जुन कंजर को गिरफ्तार किया गया था। दोनों के पास से 10 लीटर अवैध कच्ची शराब और एक हीरो एचएफ डीलक्स बाइक जब्त की गई। इस मामले में ताल थाने में प्रकरण दर्ज किया गया। कार्रवाई के दौरान बरामद बाइक के बारे में पूछताछ की गई तो आरोपियों ने उसे ग्राम भाटखेड़ा से चोरी करना स्वीकार किया। इस चोरी के संबंध में कालूखेड़ा थाने में पहले से मामला दर्ज था।
    इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से विस्तार से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार हरपाल और अर्जुन ने अपने साथी लखन कंजर के साथ मिलकर अलग-अलग स्थानों से बाइक और एक महिंद्रा लोडिंग वाहन चोरी करने की बात बताई। इसके आधार पर पुलिस ने तीसरे आरोपी लखन कंजर को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने वाहन चोरी से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाई और छह बाइक बरामद कीं।
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरपाल कंजर उम्र 20 वर्ष पिता धारिया कंजर अर्जुन कंजर उम्र 19 वर्ष पिता लखन कंजर और लखन कंजर उम्र 22 वर्ष पिता हरीलाल कंजर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार तीनों राजस्थान के झालावाड़ जिले में उन्हेल नागेश्वर थाना क्षेत्र के टोकड़ा गांव के निवासी हैं। फिलहाल वाहन चोरी की वारदातों में उनकी कथित भूमिका और बरामद वाहनों से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है।
    पुलिस ने जिन छह बाइक को जब्त किया है उनमें दो हीरो एचएफ डीलक्स बाइक एक हीरो स्प्लेंडर एक होंडा शाइन और दो स्प्लेंडर प्लस शामिल हैं। इनमें से एक एचएफ डीलक्स बाइक का संबंध कालूखेड़ा थाने में दर्ज चोरी के मामले से बताया गया है। कुछ बाइक बिना नंबर प्लेट के मिलीं जबकि दो स्प्लेंडर प्लस के इंजन और चेसिस नंबर घिसे हुए पाए गए। पुलिस इन वाहनों की पहचान और उनके वास्तविक मालिकों से संबंधित जानकारी की जांच कर रही है।
    पूछताछ में आरोपियों ने ताल थाना क्षेत्र से होंडा शाइन और आलोट क्षेत्र से एचएफ डीलक्स बाइक चोरी करने की बात कही है। इसके अलावा नामली थाना क्षेत्र से होंडा शाइन महिंद्रा लोडिंग वाहन और बजाज प्लेटिना चोरी करने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार जावरा औद्योगिक क्षेत्र से सुपर स्प्लेंडर स्प्लेंडर प्लस और दो होंडा शाइन चोरी करने की बात भी आरोपियों ने स्वीकार की है। सैलाना थाना क्षेत्र से दो सुपर स्प्लेंडर चोरी करने का मामला भी पूछताछ में सामने आया है।
    पुलिस की इस कार्रवाई से जिले और आसपास के क्षेत्रों में हुई वाहन चोरी की कई घटनाओं की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। बरामद वाहनों और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अन्य मामलों के संबंध में भी पड़ताल कर रही है।

  • जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, तीनों पीजी वर्ष के स्टाइपेंड में इजाफा, जानिए अब किसे हर महीने कितनी रकम मिलेगी

    जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, तीनों पीजी वर्ष के स्टाइपेंड में इजाफा, जानिए अब किसे हर महीने कितनी रकम मिलेगी


    भोपाल । मध्य प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले जूनियर डॉक्टरों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के मासिक स्टाइपेंड में 4.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। वित्त विभाग की सहमति मिलने के बाद बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इस फैसले से पीजी प्रथम वर्ष से लेकर तृतीय वर्ष तक के डॉक्टरों के साथ सुपर स्पेशियलिटी के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा।
    सरकार के आदेश के अनुसार पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 77 हजार 662 रुपये से बढ़ाकर 81 हजार 126 रुपये कर दिया गया है। यानी अब उन्हें हर महीने पहले की तुलना में 3 हजार 464 रुपये अधिक मिलेंगे। इसी तरह पीजी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को अब 80 हजार 50 रुपये के बजाय 83 हजार 620 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस श्रेणी में मासिक स्टाइपेंड में 3 हजार 570 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
    पीजी तृतीय वर्ष के डॉक्टरों के स्टाइपेंड में भी इजाफा किया गया है। पहले उन्हें हर महीने 82 हजार 441 रुपये मिलते थे जबकि अब यह राशि बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दी गई है। इस तरह तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को हर महीने 3 हजार 677 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। वहीं सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम के प्रथम द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का मासिक स्टाइपेंड भी बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दिया गया है।
    विभाग के मुताबिक यह बढ़ोतरी महंगाई भत्ते के आधार पर की गई है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। पीजी और सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करने होते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके मासिक खर्चों को संभालने में मदद कर सकती है।
    इस बीच प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड का मुद्दा भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी कर इसे 21 हजार 500 रुपये प्रतिमाह किए जाने की खबर सामने आई है। दूसरी ओर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन भी जारी रहने की जानकारी दी गई है। भोपाल में कमला पार्क के पास प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
    जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का आदेश ऐसे समय आया है जब चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों की आर्थिक मांगें चर्चा में हैं। अब बढ़ी हुई राशि के भुगतान और आदेश के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।