Blog

  • उड़ान भरते ही विमान के इंजन में लगी आग… कोलकाता एयरपोर्ट पर करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग, बड़ा हादसा टला

    उड़ान भरते ही विमान के इंजन में लगी आग… कोलकाता एयरपोर्ट पर करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग, बड़ा हादसा टला


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल के कोलकाता एयरपोर्ट (Kolkata Airport) पर एक बड़ा हादसा टल गया, जब तुर्की एयरलाइंस (Turkish Airlines) की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान (International Flight) को बीच में ही इमरजेंसी लैंडिंग (Emergency Landing) करानी पड़ी। काठमांडू से इस्तांबुल जा रहे इस विमान के दाहिने इंजन में आग लगने की आशंका जताई गई थी, जिसके बाद पायलट ने कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को सूचित किया। विमान में कुल 236 लोग सवार थे।


    इमरजेंसी लैंडिंग के बाद राहत की सांस

    एजेंसी के अनुसार, विमान की इमरजेंसी लैंडिंग नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NSCBI) पर बुधवार को दोपहर 2.49 बजे कराई गई। लैंडिंग के बाद सभी यात्री सुरक्षित बताए गए हैं और अब विमान की सघन तकनीकी जांच की जा रही है। एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि विमान को एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया है और विमान की स्थिति का पता लगाने के लिए एक विस्तृत तकनीकी निरीक्षण चल रहा है।


    तकनीकी जांच से मालूम होगा, क्या था असल कारण

    NSCBI एयरपोर्ट के निदेशक ने पुष्टि की कि विमान की तकनीकी जांच जारी है, ताकि यह पता चल सके कि इंजन में वास्तव में आग लगी थी या यह केवल एक चेतावनी संकेत (warning alert) था। एविएशन सूत्रों के अनुसार, उड़ान के दौरान इंजन से जुड़ी किसी भी तरह की चेतावनी को गंभीरता से लिया जाता है और पायलट की सतर्कता की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।

    सतर्कता से बचा बड़ा खतरा
    इस घटना के बाद, अब यह तय किया जाएगा कि विमान की तकनीकी जांच के बाद इसे फिर से उड़ान भरने की अनुमति दी जाएगी या यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की जाएगी। तुर्की एयरलाइंस की ओर से इस घटना पर अभी तक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है, और इसके बारे में अधिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

  • शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर को वॉशिंगटन पोस्ट ने निकाला, सोशल मीडिया पर जताई भावुक प्रतिक्रिया

    शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर को वॉशिंगटन पोस्ट ने निकाला, सोशल मीडिया पर जताई भावुक प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर को अमेरिका के अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट से नौकरी से निकाला गया है। ईशान ने स्वयं इस खबर की पुष्टि की और सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपनी निराशा व्यक्त की। सूत्रों के अनुसार, ईशान उन पत्रकारों में शामिल हैं जिन्हें अखबार ने हाल ही में बड़े पैमाने पर छंटनी के तहत हटाया। इस कदम का असर वॉशिंगटन पोस्ट की अंतरराष्ट्रीय कवरेज और स्पोर्ट्स डेस्क पर भी पड़ा है।

    ईशान का भावुक संदेश
    ईशान ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह दिन उनके लिए बेहद कठिन और विनाशकारी था। उन्होंने बताया कि ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी भी छंटनी की चपेट में आए हैं। ईशान ने न्यूज रूम की खाली तस्वीर साझा करते हुए कहा कि इस स्थिति ने उन्हें और उनके सहयोगियों को गहरा दुख पहुंचाया। उन्होंने विशेष रूप से उन पत्रकारों का जिक्र किया, जो वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय कवरेज में योगदान देते रहे और जिनके साथ काम करना उनके लिए सम्मान की बात रहा।

    बड़ी छंटनी का असर
    रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन पोस्ट की हालिया छंटनी से संगठन का लगभग एक तिहाई कर्मचारी वर्ग प्रभावित हुआ है। मिडिल ईस्ट, यूरोप, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई वरिष्ठ संवाददाता और संपादक भी इसमें शामिल रहे। वॉशिंगटन पोस्ट गिल्ड ने इस कदम की आलोचना करते हुए मालिक जेफ बेजोस से अपील की कि वे अखबार के पत्रकारिता मिशन में निवेश जारी रखें और कर्मचारियों के भविष्य के प्रति जवाबदेही दिखाएं।

    300 से अधिक कर्मचारी प्रभावित
    अखबार ने बुधवार को लगभग 300 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया। इसके तहत स्पोर्ट्स सेक्शन बंद कर दिया गया, कई अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो को बंद किया गया और किताबों की कवरेज भी समाप्त कर दी गई। मीडिया विशेषज्ञ इसे अमेरिकी मीडिया क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी में से एक मान रहे हैं। इस कार्रवाई से नई दिल्ली और मिडिल ईस्ट के कई प्रमुख संवाददाता और संपादक भी प्रभावित हुए हैं।

    छंटनी की वजह
    वॉशिंगटन पोस्ट ने इसे अपने बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान का हिस्सा बताया है। एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने कहा कि यह कठिन लेकिन जरूरी कदम था। उन्होंने बताया कि संगठन को बदलती टेक्नोलॉजी और पाठकों की बदलती प्राथमिकताओं के अनुसार ढालना आवश्यक था। हालांकि, इस फैसले की कई आलोचनाएँ भी सामने आई हैं।

  • BJP सांसद का दावा- PM मोदी पर हमला करना चाहती थीं महिला सांसद…. संसद में घेर ली उनकी कुर्सी

    BJP सांसद का दावा- PM मोदी पर हमला करना चाहती थीं महिला सांसद…. संसद में घेर ली उनकी कुर्सी


    नई दिल्ली।
    बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का भाषण स्थगित कर दिया गया, जिसके बाद भाजपा ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा सांसद मनोज तिवारी (BJP MP Manoj Tiwari) ने दावा किया कि विपक्ष की महिला सांसदों (Women MPs.) ने पीएम मोदी की कुर्सी को घेर लिया और वे “हमला करने की नीयत” से आई थीं, जिससे पीएम मोदी भाषण नहीं दे सके। तिवारी ने कहा कि यह एक सुनियोजित प्रयास था, ताकि प्रधानमंत्री के भाषण को रोका जा सके।

    मनोज तिवारी ने कहा, “आज सदन में जो हुआ, वह देखकर देश कांग्रेस को धिक्कारेगा। पीएम मोदी का भाषण था और जब पांच बजे का समय आया, तो महिला सांसदों को आगे बढ़ाकर पीएम मोदी की कुर्सी तक घेर लिया गया। इससे भी आगे बढ़कर उन्होंने कुर्सी के चारों ओर घेरा डाला। क्या इसका उद्देश्य पीएम मोदी पर हमला करना था? वे गुस्से में आकर हमला करने के लिए आई थीं। हम सब सदन में बैठकर आश्चर्यचकित थे कि यह क्या हो रहा है, यह सब प्री-प्लान था।”

    सदन में हंगामा और विवाद
    इस घटना के बाद, सदन में हंगामा बढ़ गया। बजट सत्र की शुरुआत से ही कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी नोकझोंक चल रही है। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के उद्धरण का हवाला देने की कोशिश की थी, लेकिन इस पर उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे सदन में विवाद बढ़ा और कार्यवाही कई बार स्थगित हो गई। इसके बाद, बुधवार को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी-नेहरू परिवार पर टिप्पणी की, जिससे और भी हंगामा मच गया।

    कांग्रेस की महिला सांसदों, जिनमें वर्षा गायकवाड़ भी शामिल थीं, ने निशिकांत दुबे से जवाब मांगने के लिए पोस्टर दिखाते हुए विरोध किया और उन पर तीखा हमला किया। भाजपा का आरोप है कि इस दौरान महिला सांसदों ने पीएम मोदी की कुर्सी घेर ली, जिससे पीएम मोदी अपने भाषण के लिए सदन में नहीं आ सके।

    राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला
    वहीं, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संसद में इसलिए नहीं आए क्योंकि वह “डरे हुए” थे और “सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते थे”। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “जैसा मैंने कहा था, पीएम मोदी संसद में नहीं आएंगे क्योंकि वे डरते हैं और सच्चाई का सामना नहीं करना चाहते।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि पीएम मोदी सदन में आते, तो वह पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब उन्हें भेंट करते।

    सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने यह बयान दिया, जबकि भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी जारी रही।

  • ट्रेड डील पर नया खुलासा…. डोभाल ने US से दो टूक कहा था- ट्रंप के दबाव में नहीं आएगा भारत

    ट्रेड डील पर नया खुलासा…. डोभाल ने US से दो टूक कहा था- ट्रंप के दबाव में नहीं आएगा भारत


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच रिश्तों में फिर से सुधार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर सहमति और भारत द्वारा टैरिफ में कमी करने की जानकारी दी। अब यह खुलासा हुआ है कि सितंबर में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Advisor of India-NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रुबियो को स्पष्ट रूप से समझाते हुए कहा था कि भारत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके अधिकारियों के दबाव में नहीं आएगा।

    भारत और चीन के बीच एससीओ बैठक में पीएम मोदी की मुलाकात के बाद अजीत डोभाल ने अमेरिका यात्रा की थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, डोभाल ने इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री को एक अहम संदेश दिया – भारत अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव को पीछे छोड़ते हुए फिर से व्यापारिक बातचीत शुरू करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकेगा और ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक इंतजार करने को तैयार है, जैसा कि भारत ने पहले भी अमेरिकी विरोधी सरकारों का सामना किया था।

    डोभाल ने बैठक में यह भी कहा कि भारत चाहता है कि ट्रंप और उनके सलाहकार भारत की सार्वजनिक आलोचना कम करें, ताकि दोनों देशों के रिश्ते और भी मजबूत हो सकें।


    तनाव घटने के संकेत

    इस बैठक के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच तनाव में कमी के संकेत मिलना शुरू हो गए। 16 सितंबर को, ट्रंप ने मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन किया और उनकी सराहना की। इसके बाद, दोनों नेताओं ने फोन पर चार बार बातचीत की और व्यापारिक सौदे को लेकर सहमति बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए।

    ट्रंप ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत के सामानों पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाएगा, जो एशिया के अधिकांश देशों से कम है। इसके अलावा, रूसी तेल खरीदने पर लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को भी हटा दिया गया है। बदले में, भारत ने 500 बिलियन डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने, वेनेजुएला का तेल न खरीदने और अमेरिकी आयात पर टैरिफ को शून्य करने पर सहमति जताई है।

  • रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं

    रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं


    मास्को।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच नए व्यापार समझौते (New trade Agreements.) के बाद एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा या नहीं? हालांकि, इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस (Russia) ने अब इस पर स्पष्ट जवाब दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने हाल ही में दावा किया था कि भारत अब रूसी तेल की खरीद रोक देगा, लेकिन रूस ने इस पर प्रतिकार करते हुए कहा है कि भारत पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह किस देश से तेल खरीदे।

    रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत कोई एकमात्र देश नहीं है जो रूस से तेल खरीदता है। भारत हमेशा से विभिन्न देशों से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता रहा है, और इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ जानते हैं कि भारत रूस का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है। यह बयान ट्रंप के उस दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से तेल खरीदने पर सहमति जताई है। पेस्कोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस को इस मामले में नई दिल्ली से कोई जानकारी नहीं मिली है, और रूस अपने भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है।

    ट्रंप का दावा और भारत का रुख
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते में भारत के लिए टैरिफ में कमी शामिल है, और इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, इस पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, और न ही प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट में रूस से तेल खरीदने पर कोई उल्लेख किया गया है। रूसी तेल आयात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान में कोई प्रतिबद्धता या समझौता नहीं था, जबकि ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद यह तय हुआ कि भारत अमेरिकी तेल का आयात बढ़ाएगा और रूस से तेल खरीदने की मात्रा घटाएगा।

    भारत और रूस के ऊर्जा संबंध
    रूस के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रूस से प्रतिदिन 15 लाख से 20 लाख बैरल तेल आयात करता है, जो अमेरिका से प्राप्त शेल तेल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। शेल तेल हल्के ग्रेड का होता है, जबकि रूस का यूराल तेल भारी और सल्फर युक्त होता है। इस वजह से भारत को अमेरिकी कच्चे तेल को अन्य ग्रेड के तेल के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। इसलिए, रूस का कहना है कि ट्रंप का दावा एक तरह से दिखावा हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी तेल रूस के तेल का सीधे विकल्प नहीं बन सकता। यह स्थिति दिखाती है कि भारत और रूस के बीच तेल संबंधों में कोई तत्काल बदलाव होने की संभावना नहीं है, और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विभिन्न स्रोतों से आपूर्ति पर निर्भर रहेगा।

  • Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा

    Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu:) की सियासत में बड़ी हलचल मच गई है। भाजपा (BJP) के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई (Annamalai) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने पिता की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए तमिलनाडु के छह विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रभारी पद से इस्तीफा (Resignation Post Election In-charge) लिया। अन्नामलाई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस निर्णय की जानकारी तमिलनाडु भाजपा नेतृत्व को दे दी है और उनकी स्थिति को समझते हुए वह इस समय अपने पिता के पास रहना चाहते हैं।

    अन्नामलाई ने कहा, “मेरे पिता डायलिसिस पर हैं और उनके इलाज और देखभाल का जिम्मा लेना मेरी प्राथमिकता है। इस कारण से मैं फिलहाल यात्रा करने की स्थिति में नहीं हूं। मैंने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया है कि वे इन छह विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी किसी अन्य नेता को सौंप दें।”

    अन्नामलाई को जिन छह विधानसभा क्षेत्रों का चुनाव प्रभारी बनाया गया था, वे हैं – सिंगानल्लूर, विरुगमबाक्कम (चेन्नई), करैक्कुडी, श्रीवैकुंटम, मदुरै (दक्षिण), और पद्मनाभपुरम (कन्याकुमारी)। अन्नामलाई ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि पार्टी उनके स्थान पर किसी अन्य नेता को नियुक्त कर सकती है।

    अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद राजनीतिक सियासत भी तेज हो गई। किल्लियूर के कांग्रेस विधायक राजेश कुमार ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा, “उन्हें चुनावी बुखार चढ़ गया था, और इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। मुझे लगता है कि चुनावी हार के डर से ही उन्होंने यह कदम उठाया है।” उन्होंने कहा, “कन्याकुमारी में भाजपा का कमल नहीं खिलेगा, चाहे वे कोई भी कदम उठाएं।”

  • निशिकांत दुबे के नेहरू-गांधी परिवार पर विवादित बयान पर भड़का विपक्ष…. संसद में जमकर हुआ हंगामा

    निशिकांत दुबे के नेहरू-गांधी परिवार पर विवादित बयान पर भड़का विपक्ष…. संसद में जमकर हुआ हंगामा


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) में बुधवार को एक बार फिर हंगामा मच गया, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) ने गांधी-नेहरू परिवार (Gandhi-Nehru family) पर विवादास्पद बयान दिया। दुबे ने अपने भाषण के दौरान कुछ किताबें लहराईं और उनके हवाले से नेहरू और कांग्रेस परिवार के खिलाफ आरोप लगाए, जिससे विपक्षी सांसद आगबबूला हो गए। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने इस बयान के खिलाफ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से शिकायत की है।

    निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “यहां एक किताब पर चर्चा हो रही है, जो आज तक छपी ही नहीं। लेकिन मैं उन किताबों के बारे में बात करना चाहता हूं, जो नेहरू और कांग्रेस परिवार के भ्रष्टाचार, गद्दारी और अय्याशी से भरी पड़ी हैं।” उन्होंने “एडविना और नेहरू” और “मथई” जैसे किताबों का हवाला देते हुए गांधी-नेहरू परिवार के निजी जीवन और उनके कथित संबंधों पर सवाल उठाए। इसके अलावा, दुबे ने सोनिया गांधी पर लिखी किताबों को भी दिखाया और कांग्रेस पर आरोपों की झड़ी लगाई।

    इस दौरान पीठासीन सभापति ने उन्हें किताबों का जिक्र करने से मना किया, लेकिन दुबे ने नियमों की अनदेखी करते हुए किताबें दिखाते रहे। विपक्षी सदस्य इससे नाराज हो गए और सदन में हंगामा करने लगे। कुछ सदस्यों को आसन के सामने कागज उछालते हुए भी देखा गया। हंगामा बढ़ने पर पीठासीन सभापति ने कार्यवाही शाम पांच बजे तक स्थगित कर दी।


    **प्रियंका गांधी का पलटवार:**

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रियंका गांधी ने निशिकांत दुबे पर पलटवार किया। प्रियंका ने कहा, “जब मोदी सरकार सदन को बाधित करना चाहती है, तो निशिकांत दुबे को खड़ा कर देती है। राहुल गांधी जी को एक पब्लिश हो चुकी किताब से उद्धृत नहीं करने दिया जाता, लेकिन निशिकांत दुबे छह किताबें लेकर आकर उन्हें दिखा रहे हैं, उनका माइक बंद नहीं किया जा रहा।”

    प्रियंका ने आगे कहा, “मोदी सरकार चाहती है कि संसद में सिर्फ उन्हीं की बात चले, और जो विपक्षी सांसद हैं, उन्हें बोलने का कोई मौका नहीं दिया जाए। यह लोकतंत्र का अपमान है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार देश का ध्यान भटकाने के लिए बार-बार नेहरू-गांधी परिवार का नाम लेकर विवाद पैदा कर रही है, जबकि असल मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है। प्रियंका ने कहा, “सरकार चाहती है कि लोग नरवणे जी की किताब से संबंधित बातें न जानें, जबकि जब चीन की सेना हमारे सीमा पर थी, तो सरकार निर्णय लेने में असमर्थ थी।”

  • MP में बड़े पैमाने में चल रहा था नशे का कारोबार.. अवैध ड्रग्स फैक्ट्री से 320 Kg केमिकल जब्त, 5 गिरफ्तार

    MP में बड़े पैमाने में चल रहा था नशे का कारोबार.. अवैध ड्रग्स फैक्ट्री से 320 Kg केमिकल जब्त, 5 गिरफ्तार


    राजगढ़।
    राजस्थान (Rajasthan) की झालावाड़ पुलिस (Jhalawar Police) और जिला स्पेशल टीम ने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में चल रही एक ड्रग्स फैक्ट्री (Drugs Factory) का पर्दाफाश किया। पुलिस ने 320.72 किलोग्राम संदिग्ध केमिकल के साथ पांच तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो एमडी जैसे खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में उपयोग होने वाला था।

    झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि मंगलवार रात को झालरापाटन थानाधिकारी अल्का और डीएसटी प्रभारी मोहन लाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ग्रोथ सेंटर चौराहे पर खड़ी संदिग्ध पिकअप और महिंद्रा टीयूवी की जांच की। तलाशी के दौरान पिकअप में घरेलू सामान के नीचे छिपाए गए छह ड्रम बरामद हुए, जिनमें केमिकल भरा हुआ था।

    प्रारंभिक पूछताछ में पकड़े गए तस्करों – दीपक (30), जितेंद्र सिंह (41) और शैलेंद्र विलाला (26) ने बताया कि वे यह केमिकल ट्रांसपोर्ट के जरिए महाराष्ट्र से कोटा मंगवाते थे और फिर इसे मध्यप्रदेश के आगर में डिलीवरी देने जा रहे थे। इस सूचना पर पुलिस ने मध्यप्रदेश के सुसनेर में दबिश दी और मुख्य रिसीवर जयनारायण मामू और उसके साथी रामलाल को गिरफ्तार किया।

    पूछताछ में पता चला कि मुख्य सरगना रघुनंदन पाटीदार, जो इस ड्रग्स नेटवर्क का अहम हिस्सा था, फरार हो गया। पुलिस ने उसकी तलाश जारी रखी और उसके घर पर दबिश दी, जहां एक पूरी ड्रग्स फैक्ट्री संचालित हो रही थी। वहां से भारी मात्रा में ड्रग्स बनाने के उपकरण और केमिकल बरामद किए गए।

    इस ऑपरेशन में डीआरआई जयपुर के इनपुट ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है और अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है, कि यह केमिकल कहां से सप्लाई हो रहा था और इसका जाल राजस्थान और मध्यप्रदेश के किन हिस्सों में फैला है।

  • कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    कांग्रेस सांसद थरूर फोन पर बात करते हुए संसद की सीढ़ियों पर लड़खड़ाकर गिरे… अखिलेश यादव ने संभाला

    नई दिल्ली। संसद (Parliament) के बजट सत्र (Budget Session) में इन दिनों हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच बुधवार को एक दिलचस्प घटना घटी, जिसने सोशल मीडिया पर सुर्खियाँ बटोरीं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) संसद भवन की सीढ़ियों पर फोन पर बात करते हुए लड़खड़ा गए और गिरते हुए नजर आए। हालांकि, इस दौरान समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने तुरंत उनकी मदद की और उन्हें सहारा देकर गिरने से बचाया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि शशि थरूर जैसे ही बैलेंस खोते हैं, अखिलेश यादव पास खड़े होते हुए तेजी से उनकी ओर बढ़ते हैं और उन्हें सहारा देते हैं। साथ ही एक महिला सुरक्षा अधिकारी भी तुरंत मदद के लिए पहुंची। अखिलेश ने शशि थरूर को कुछ समय तक सहारा दिया और फिर उन्हें कुछ सीढ़ियाँ नीचे उतारा।

    https://twitter.com/ShashiTharoor/status/2019102516416479508
    इस घटना के बाद शशि थरूर ने ट्विटर (अब एक्स) पर एक शायराना अंदाज में पोस्ट किया, “जिस दिए को, तूफां में जलना होगा, उसे संभल संभल कर चलना होगा। मैं ठीक हूं।” सोशल मीडिया पर इस सजीव और संवेदनशील मदद की काफी सराहना हो रही है, और लोग अखिलेश यादव की सहज शिष्टाचार की तारीफ कर रहे हैं।

    इससे पहले, शशि थरूर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया था। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

  • अनिल अंबानी ने SC को दिया वचन, बोले- 'ED-CBI जांच के बीच देश नहीं छोड़ूंगा

    अनिल अंबानी ने SC को दिया वचन, बोले- 'ED-CBI जांच के बीच देश नहीं छोड़ूंगा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications- RCom) और अनिल धीरभाई अंबानी ग्रुप (Anil Dhirubhai Ambani Group-ADAG) से जुड़े ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में एक कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया और साथ ही उद्योगपति अनिल अंबानी ( (Anil Ambani) को एक अहम वचन देने को कहा कि वे बिना अनुमति के भारत नहीं छोड़ेंगे।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ई.ए.एस. सरमा के वकील, प्रशांत भूषण ने चिंता व्यक्त की कि धोखाधड़ी के बड़े पैमाने को देखते हुए मुख्य आरोपी, अनिल अंबानी, देश छोड़कर भाग सकते हैं। इस पर अंबानी के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को आश्वस्त किया कि “मेरे मुवक्किल का देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वे प्रतिदिन अपने कार्यालय जाते हैं और मैं वचन देता हूं कि वे बिना अदालत की अनुमति के विदेश नहीं जाएंगे।”

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अदालत को याद दिलाया कि पहले भी एक वचन दिया गया था, लेकिन वह व्यक्ति अंततः देश से भाग गया था। सरकार ने बताया कि अंबानी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर पहले से जारी है, ताकि उनके विदेश जाने के प्रयास को रोका जा सके।

    मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा की गई देरी पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट 2020 में आई थी, लेकिन CBI ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में 2025 तक का समय लिया।

    अदालत ने जांच एजेंसी से निर्देश दिया कि बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत के हर मामले के लिए अलग-अलग FIR दर्ज की जाए। इसके अलावा, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए कानूनी अनुमति की आवश्यकता नहीं है और यदि कोई अधिकारी धोखाधड़ी या साजिश में शामिल है, तो उसे तुरंत कार्रवाई का सामना करना चाहिए।


    IBC का दुरुपयोग:

    सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) का इस्तेमाल परिसंपत्तियों को कम मूल्य पर खरीदने के लिए किया जा रहा है। प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि RCom पर ₹47,000 करोड़ का बकाया था, लेकिन उसकी संपत्तियां केवल ₹430 करोड़ में (मुकेश अंबानी की कंपनी द्वारा) खरीदी गईं। अदालत ने इसे IBC का दुरुपयोग करार दिया और कहा कि नीलामी प्रक्रिया पूर्व-नियोजित लगती है।


    ईडी का बयान:

    ईडी ने अदालत को सूचित किया कि अब तक 204 संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है, जिनकी कीमत लगभग ₹12,012 करोड़ है। हाल ही में, रिलायंस ग्रुप के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया गया है, जो 7 फरवरी तक हिरासत में रहेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की खुद निगरानी करेगा और जांच एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले में कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया और जांच एजेंसियों को शीघ्रता से कार्रवाई करने की हिदायत दी है।