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  • कितने घंटे पुरानी रोटी खाना सुरक्षित है, जानिए बासी रोटी खाने के फायदे और किन परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए

    कितने घंटे पुरानी रोटी खाना सुरक्षित है, जानिए बासी रोटी खाने के फायदे और किन परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए


    नई दिल्ली ।
    भारतीय भोजन में रोटी का खास स्थान है। लंच से लेकर डिनर तक ज्यादातर घरों में रोटी नियमित रूप से खाई जाती है। कई बार रात के खाने में जरूरत से ज्यादा रोटियां बन जाती हैं और कुछ रोटियां अगले दिन के लिए बच जाती हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि रात की बची हुई रोटी कितनी देर तक खाने के लिए सुरक्षित रहती है और क्या बासी रोटी खाने से कोई फायदा भी हो सकता है।

    रोटी को लेकर सबसे जरूरी बात उसके सही तरीके से रखे जाने की है। अगर रोटी को बनाकर खुले में छोड़ दिया जाए, तो मौसम के अनुसार वह कुछ ही घंटों में खराब हो सकती है। खासतौर पर गर्म मौसम में भोजन के जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रात की बची रोटी को अगले दिन खाना जोखिम भरा हो सकता है।

    अगर रोटी को किसी साफ और बंद डिब्बे में रखकर फ्रिज में सुरक्षित तरीके से रखा गया है, तो इसे अगले दिन सुबह या दोपहर तक खाया जा सकता है। सामान्य तौर पर रोटी को 12 से 24 घंटे तक ही सुरक्षित माना जाता है। 24 घंटे से ज्यादा पुरानी रोटी खाने से बचने की सलाह दी जाती है। लंबे समय तक रखे गए भोजन में बैक्टीरिया या फंगस पनपने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे पेट खराब होने जैसी परेशानी हो सकती है।

    सही तरीके से रखी गई और लगभग 12 से 15 घंटे पुरानी रोटी के कुछ संभावित फायदे भी बताए जाते हैं। रोटी ठंडी होने के बाद उसमें मौजूद स्टार्च का एक हिस्सा रेजिस्टेंट स्टार्च में बदल जाता है। इसे पचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है। इसी वजह से वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ठंडी रोटी को एक विकल्प माना जाता है।

    बासी रोटी में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी हो सकता है। सुबह पेट साफ नहीं होने जैसी समस्या से परेशान लोग ठंडी रोटी को दूध के साथ खाने का विकल्प अपना सकते हैं। इसके अलावा ठंडी रोटी को सुबह ठंडे दूध में मिलाकर खाने से शरीर की गर्मी कम महसूस होने और पेट को ठंडक मिलने की बात भी कही जाती है।

    हालांकि, बासी रोटी खाने से पहले उसकी स्थिति की जांच करना जरूरी है। अगर रोटी से अजीब या खराब गंध आ रही हो, उसका रंग बदल गया हो या उस पर फंगस अथवा सफेद धब्बे दिखाई दे रहे हों, तो उसे बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। ऐसी रोटी को तुरंत फेंक देना बेहतर है।

    फ्रिज में रखी रोटी खाने से पहले उसे हल्का गर्म किया जा सकता है। इससे रोटी नरम हो जाती है और उसे खाना आसान रहता है। इस तरह रात की बची रोटी को सुरक्षित तरीके से रखने और समय सीमा का ध्यान रखने पर ही अगले दिन इस्तेमाल करना बेहतर है।

  • गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    नई दिल्ली ।AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। ओवैसी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है तो गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा कानून लागू करके दिखाए।

    ओवैसी ने अमित शाह के उस संदर्भ पर सवाल उठाया, जिसमें वह लोगों से ‘क्रोनोलॉजी समझने’ की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार UCC को लेकर अपनी बात स्पष्ट करना चाहती है तो उसे गोवा जाकर यह ऐलान करना चाहिए कि वहां भी वही कानून लागू किया जाएगा, जो उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू किया गया है।

    उन्होंने दावा किया कि सरकार ऐसा नहीं करेगी। ओवैसी ने आरोप लगाया कि गुजरात में UCC की बात करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने गोवा के मौजूदा कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

    ओवैसी के मुताबिक, गोवा में कुछ परिस्थितियों में हिंदू दंपति के बच्चों से जुड़ी स्थिति के आधार पर पति को दूसरी शादी की अनुमति देने से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कैथोलिक समुदाय को कुछ विशेष छूट मिली हुई है।

    उन्होंने कहा कि गोवा में कैथोलिक विवाहों के पंजीकरण की व्यवस्था भी अलग है। ओवैसी के अनुसार, कुछ मामलों में कैथोलिक विवाह का पंजीकरण सरकार के बजाय चर्च के पादरी कर सकते हैं। उन्होंने इस व्यवस्था का उल्लेख करते हुए गोवा में मौजूद वैवाहिक कानूनों में समुदाय आधारित अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

    ओवैसी ने यह भी कहा कि चर्च की धार्मिक संस्थाएं ईसाइयों से जुड़े वैवाहिक मामलों में कुछ फैसले ले सकती हैं। इसके विपरीत, उनके मुताबिक दूसरे समुदायों के लोगों को तलाक या वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालत का सहारा लेना पड़ता है।

    उन्होंने आगे दावा किया कि गोवा के कानून में कुछ परिस्थितियों में चर्च ट्रिब्यूनल को विवाह को अमान्य घोषित करने से जुड़े अधिकार भी हासिल हैं। ओवैसी ने इसकी तुलना गैर-ईसाइयों की व्यवस्था से करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे मामलों में अदालत जाना पड़ता है।

    AIMIM प्रमुख ने इन्हीं प्रावधानों के आधार पर गोवा को पूरी तरह समान नागरिक संहिता का मॉडल बताए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो गोवा को UCC का पूरी तरह समान मॉडल बताना उचित नहीं है।

    ओवैसी ने सरकार से गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा UCC लागू करने की चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ऐसा कर सकती है तो उसे इसे करके दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा के UCC का उदाहरण बार-बार देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

  • गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी पर अगर इस बार भोग के लिए कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो चॉकलेट मोदक एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद वाला है और घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसमें डार्क चॉकलेट के साथ नारियल, काजू, बादाम और पिस्ता का इस्तेमाल किया जाता है। चॉकलेट का स्वाद बच्चों को भी पसंद आ सकता है।

    चॉकलेट मोदक तैयार करने के लिए 250 ग्राम डार्क चॉकलेट, 100 ग्राम नारियल का बुरादा, दो चम्मच बारीक कटे काजू, दो चम्मच बारीक कटे बादाम और दो चम्मच बारीक कटा पिस्ता चाहिए। इसके अलावा 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क और एक चम्मच घी की जरूरत होगी। इन सीमित सामग्रियों से मोदक का मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले डार्क चॉकलेट को पिघलाना होगा। इसके लिए एक पैन में थोड़ा पानी गर्म करें और उसके ऊपर एक कटोरी रखें। कटोरी में डार्क चॉकलेट डालकर धीमी आंच पर धीरे-धीरे पिघलाएं। चॉकलेट को सीधे तेज आंच पर गर्म करने से बचना चाहिए। डबल बॉयलर तरीके से चॉकलेट को धीरे-धीरे पिघलाया जा सकता है।

    इसके बाद दूसरे पैन में एक चम्मच घी गर्म करें। इसमें कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ता और नारियल का बुरादा डालें। सभी चीजों को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इस दौरान ध्यान रखें कि नारियल और ड्राई फ्रूट्स ज्यादा न भुनें।

    जब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तब इसमें 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क डालें। इसे अच्छी तरह मिलाते हुए तब तक चलाएं, जब तक सभी सामग्री आपस में मिलकर थोड़ा गाढ़ा मिश्रण न बना लें। इसके बाद इसमें पहले से पिघलाई गई डार्क चॉकलेट डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।

    चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स का मिश्रण तैयार होने के बाद इसे कुछ देर ठंडा होने दें। मिश्रण इतना ठंडा हो जाए कि उसे आसानी से सांचे में भरा जा सके, तब मोदक बनाने की प्रक्रिया शुरू करें।

    मोदक के सांचे पर पहले हल्की-सी घी की परत लगा दें। इससे तैयार मोदक को सांचे से निकालने में आसानी होगी। अब चॉकलेट मिश्रण को सांचे में भरकर हल्के हाथ से दबाएं। इसके बाद सांचे को खोलकर मोदक को सावधानी से बाहर निकाल लें।

    इसी तरह पूरे मिश्रण से मोदक तैयार करें और कुछ देर के लिए इन्हें सेट होने दें। इसके बाद इन्हें ठंडा करके परोसा जा सकता है। गणेश चतुर्थी के भोग के अलावा घर आए मेहमानों और बच्चों को भी ये मोदक खिलाए जा सकते हैं।

    चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स का संयोजन इस मिठाई को पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद देता है। खासतौर पर जिन बच्चों को सामान्य मोदक पसंद नहीं आते, उनके लिए यह चॉकलेट वाला विकल्प पसंद किया जा सकता है। चॉकलेट पिघलाते समय डबल बॉयलर का इस्तेमाल और सांचे पर हल्की घी की परत लगाना इसकी तैयारी को आसान बनाता है।

  • कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी की गोली मारकर हत्या, चार अज्ञात हमलावरों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के कराची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार चार अज्ञात हमलावरों ने इस वारदात को अंजाम दिया और गोलीबारी के बाद मौके से फरार हो गए। मारे गए व्यक्ति को लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद का करीबी बताया जा रहा है।

    घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू की। एजेंसियों ने हमलावरों की तलाश के साथ-साथ हत्या के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए भी जांच शुरू कर दी है।

    अभी तक मारे गए आतंकी की पहचान को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसी तरह लश्कर-ए-तैयबा में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी, इस बारे में भी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल जांच एजेंसियां वारदात से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हैं।

    बताया गया है कि हमलावर बाइक पर सवार थे और उनकी संख्या चार थी। उन्होंने लश्कर से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाया और वारदात को अंजाम देने के बाद वहां से निकल गए। हमले के पीछे कौन लोग थे, इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इस हत्या के पीछे किसी प्रतिद्वंद्वी आतंकी गुट का हाथ था या इसके पीछे कोई अन्य कारण रहा। सुरक्षा एजेंसियां इसी दिशा में भी जानकारी जुटा रही हैं। अभी किसी संभावित गुट या व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है।

    कराची में हुई इस घटना को पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, मौजूदा मामले में हत्या की वास्तविक वजह और हमलावरों के उद्देश्य के बारे में जांच पूरी होने से पहले कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    इस घटना के बाद पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की गतिविधियों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चार अज्ञात हमलावरों द्वारा संगठन से जुड़े व्यक्ति को निशाना बनाए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने हमले की पूरी कड़ी का पता लगाने की चुनौती है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां हमलावरों की पहचान और उनकी तलाश पर काम कर रही हैं। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या की योजना किस तरह बनाई गई और इसके पीछे क्या मकसद था। मारे गए व्यक्ति की पहचान तथा लश्कर-ए-तैयबा में उसकी भूमिका से जुड़ी जानकारी भी जांच के दौरान स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    मामले में अभी तक आधिकारिक स्तर पर सीमित जानकारी ही सामने आई है। इसलिए हत्या के पीछे किसी विशेष संगठन, व्यक्ति या वजह की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच आगे बढ़ने के साथ ही वारदात से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की संभावना है।

  • गणेश चतुर्थी पर अभिजीत सावंत ने रिलीज किया ‘गण धाव रे’ भक्ति गीत, बेटियों अहाना और समीरा ने भी दी अपनी आवाज

    गणेश चतुर्थी पर अभिजीत सावंत ने रिलीज किया ‘गण धाव रे’ भक्ति गीत, बेटियों अहाना और समीरा ने भी दी अपनी आवाज


    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी के मौके पर गायक अभिजीत सावंत ने अपना नया भक्ति गीत ‘गण धाव रे’ रिलीज किया है। इस गाने की खास बात यह है कि इसमें उनकी दोनों बेटियां अहाना और समीरा भी उनके साथ जुड़ी हैं। दोनों ने गाने में बैकग्राउंड वोकल्स दिए हैं। अभिजीत के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी संगीत यात्रा में पहली बार वह अपनी दोनों बेटियों के साथ एक ही गाने के लिए आवाज देते नजर आए हैं।

    अभिजीत सावंत ने बताया कि दोनों बेटियों के साथ ‘गण धाव रे’ रिकॉर्ड करना उनके लिए भावुक पल था। उन्होंने कहा कि गाने में बेटियों का उनके साथ होना बप्पा का दिव्य संयोग है। उनके मुताबिक, तीनों का एक साथ किसी गाने के लिए अपनी आवाज देना उनकी संगीत यात्रा का अलग अनुभव है और यह प्रोजेक्ट उनके दूसरे कामों से काफी अलग है।

    गाने को साझा करते हुए अभिजीत ने गणेश चतुर्थी और बप्पा के साथ लोगों के अलग-अलग रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का बप्पा के साथ अपना एक खास रिश्ता होता है। कोई उन्हें दोस्त मानता है, कोई परिवार का हिस्सा और कोई मुश्किल समय में सहारा मानता है। अभिजीत के अनुसार, ‘गण धाव रे’ के जरिए इसी रिश्ते को महसूस करने का मौका मिलेगा।

    अभिजीत ने यह भी कहा कि बेटियों की आवाज जुड़ने के कारण यह गाना उनके लिए केवल एक भक्ति गीत नहीं रह गया, बल्कि परिवार के साथ संजोकर रखने वाली याद बन गया है। इस तरह गणेश चतुर्थी पर रिलीज हुआ यह गीत उनके लिए संगीत और परिवार, दोनों से जुड़ा खास प्रोजेक्ट बन गया है।

    अभिजीत सावंत को ‘इंडियन आइडल’ के पहले सीजन से घर-घर में पहचान मिली थी। शो के जरिए उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और इसके बाद उनकी संगीत यात्रा आगे बढ़ी। साल 2005 में उनका पहला सोलो एल्बम ‘आपका अभिजीत सावंत’ रिलीज हुआ। इसी साल उन्होंने फिल्म ‘आशिक बनाया आपने’ के लिए प्लेबैक सिंगिंग की और ‘मर जावां मिट जावां’ गाना गाया।

    इसके बाद साल 2007 में उनका दूसरा एल्बम ‘जुनून’ रिलीज हुआ। करीब छह साल बाद 2013 में उन्होंने अपना तीसरा स्टूडियो एल्बम ‘फरीदा’ पेश किया। संगीत के अलावा अभिजीत ने अभिनय में भी हाथ आजमाया। साल 2009 में उन्होंने फिल्म ‘लॉटरी’ से एक्टिंग डेब्यू किया। इसके बाद वह ‘तीस मार खान’ में भी छोटे अपीयरेंस में नजर आए।

    हाल ही में अभिजीत सावंत ‘इंडियन आइडल’ के मंच पर दोबारा दिखाई दिए थे। 4 जुलाई को शो के 75वें एपिसोड यानी डायमंड जुबली स्पेशल में पहले सीजन के कंटेस्टेंट्स का रीयूनियन हुआ था। इस दौरान अभिजीत सावंत और अमित सना करीब 22 साल बाद एक बार फिर मंच पर साथ नजर आए। गणेश चतुर्थी पर ‘गण धाव रे’ की रिलीज के साथ अभिजीत ने अब अपनी बेटियों को भी इस संगीत यात्रा का हिस्सा बनाया है।

  • सोनीपत में बनते थे नकली ₹20 के सिक्के, 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में खपाए

    सोनीपत में बनते थे नकली ₹20 के सिक्के, 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में खपाए

    सहारनपुर। सिक्के असली जैसे दिखें और खनक भी वैसी ही हो, इसके लिए हरियाणा के सोनीपत में बाकायदा फैक्टरी चला रहे गिरोह का सहारनपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह यहां तैयार किए गए नकली ₹20 के सिक्कों को पंजाब, बिहार, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचाता था। जांच में अब तक 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में खपाए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों और सिक्कों की खपत वाले ठिकानों की पड़ताल कर रही है।

    शहर कोतवाली पुलिस ने एसओजी और सर्विलांस टीम की मदद से कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में सहारनपुर, पंजाब, बिहार और संत रविदास नगर के रहने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है, जो मोहाली का रहने वाला है।

    काम बंटे थे, मोबाइल और रजिस्टर में चलता था हिसाब

    पुलिस के मुताबिक गिरोह में सात से आठ सदस्य शामिल थे और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी। कोई नकली सिक्के तैयार करने में लगा था तो कोई उन्हें अलग-अलग इलाकों में पहुंचाने और बाजार में चलाने का काम करता था। गिरोह में फाइनेंसर की भूमिका निभाने वाला सदस्य मोबाइल फोन और रजिस्टर में सिक्कों की सप्लाई का पूरा हिसाब रखता था।

    जांच में सामने आया कि सरगना ने नकली सिक्के तैयार करने की फैक्टरी सोनीपत में स्थापित कर रखी थी। यहां सिक्के बनाने से लेकर उनकी फिनिशिंग तक का इंतजाम था। इसके बाद तैयार सिक्कों को पंजाब, बिहार, दिल्ली के साथ बदायूं, संत रविदास नगर और सहारनपुर समेत उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों में भेजा जाता था।

    बाजार ही नहीं, शराब ठेके और टोल प्लाजा भी निशाने पर

    पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे ₹20 के नकली सिक्कों को सामान्य बाजार में चलाते थे। इसके अलावा सरकारी शराब के ठेकों और टोल प्लाजा पर भी इन्हें खपाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली सिक्के किन-किन लोगों के माध्यम से इन स्थानों तक पहुंचते थे और आगे इन्हें बाजार में कौन चलाता था।

    1.28 लाख के नकली सिक्के, पांच लाख के अधबने सिक्के मिले

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹20 के 6,400 नकली सिक्के बरामद किए हैं, जिनकी कीमत 1.28 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा करीब पांच लाख रुपये के अधबने सिक्के भी मिले हैं। तलाशी में ₹500-₹500 के 20 नोट, सिक्के तैयार करने वाली छह मशीनें, पांच लोहे की डाई, बिना मुहर की 39 डाई और मुहर लगी 20 डाई बरामद की गई हैं।

    इसके साथ ही डाई पॉलिश करने की मशीन, दो घिसाई पत्थर, आठ मोबाइल फोन, दो कार और नकली सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी पुलिस के हाथ लगे हैं। सात हिसाब-किताब रजिस्टर, पैड और एक चेक बुक भी बरामद की गई है।

    दो युवकों से पूछताछ के बाद खुली गिरोह की कड़ी

    एसएसपी अभिनंदन सिंह के अनुसार, पुलिस को पिछले कुछ दिनों से बाजार में नकली सिक्के चलाए जाने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद शहर कोतवाली पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम ने गिरोह तक पहुंचने के लिए निगरानी शुरू की।

    इसी मामले में कुछ दिन पहले दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पूछताछ के दौरान तीन अन्य सदस्यों के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अब बरामद मोबाइल फोन, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों के आधार पर नेटवर्क की आगे की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।

    70 करोड़ की खपत का हिसाब तलाश रही पुलिस

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में गिरोह के अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में खपाने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसियां बरामद रजिस्टर, मोबाइल फोन और मशीनों की जानकारी को खंगाल रही हैं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रकम के सिक्के किन-किन शहरों और बाजारों तक पहुंचे।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नकली सिक्कों को बाजार में चलाने के लिए गिरोह के साथ और कितने लोग जुड़े थे। सोनीपत की फैक्टरी में सिक्के बनाने से लेकर उन्हें अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने और अंतिम स्तर पर खपाने तक की पूरी चेन की जानकारी जुटाई जा रही है।

    ये पांच आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस ने जुबली पार्क से उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह निवासी टावर डी-पांच, पेंटाहोम सोसायटी, जिरखपुर, मोहाली; हिमांशु उर्फ गुल्लू निवासी बरसी, सहारनपुर; कुलदीप निवासी आवास विकास, सहारनपुर; संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन निवासी लड्डू गांव, मधुबनी, बिहार और अनुराग पाल उर्फ लंकेश निवासी पीपरीश रामेश्वरम, जिला संत रविदास नगर (भदोही) को गिरफ्तार किया है।

  • अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने मनाई गणेश चतुर्थी, बोले- बप्पा हर साल परिवार को करीब लाते हैं

    अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने मनाई गणेश चतुर्थी, बोले- बप्पा हर साल परिवार को करीब लाते हैं

    नई दिल्ली ।अभिनेता वर्धन पुरी ने गणेश चतुर्थी के अवसर पर अपने परिवार की पुरानी परंपराओं और इस त्योहार से जुड़ी बचपन की यादों को साझा किया है। वर्धन के लिए गणेश उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के एक साथ आने और रिश्तों को मजबूत करने का खास अवसर भी है। इस दौरान उन्होंने अपने दिवंगत दादा और दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ बिताए बचपन के पलों को भी याद किया।

    वर्धन ने बताया कि उनके परिवार में जब पहली बार घर पर बप्पा को लाने की परंपरा शुरू हुई थी, तब पूरा परिवार मिलकर गणपति के पसंदीदा मोदक अपने हाथों से तैयार करता था। इस परंपरा में उनके दादा-दादी, माता-पिता, बहन साची और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल होते थे। परिवार के सभी लोगों का साथ मिलकर त्योहार मनाना उनके बचपन की सबसे खास यादों में शामिल है।

    उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी परिवार की यह परंपरा उसी तरह जारी है। हर साल बप्पा के घर आने के साथ परिवार में खुशी और उत्सव का माहौल बनता है। वर्धन के मुताबिक, इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ मौजूद होना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।

    वर्धन ने अपने परिवार के गणेश उत्सव मनाने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गणपति उत्सव के दौरान परिवार के लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से एक जगह इकट्ठा होते हैं। वह मंदिर में स्थापित गणपति की उसी मूर्ति को अपने घर के बैठक वाले कमरे में लेकर आते हैं। इसके बाद दो दिनों तक बप्पा का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घर में महाराष्ट्रीयन व्यंजन और अलग-अलग तरह के मोदक तैयार किए जाते हैं।

    दो दिन के उत्सव के बाद परिवार के सभी सदस्यों की मौजूदगी में गणपति की मूर्ति को वापस मंदिर ले जाया जाता है। इसके बाद विसर्जन के लिए नारियल से बनी पर्यावरण के अनुकूल गणपति की मूर्ति लाई जाती है। वर्धन का कहना है कि बप्पा का उत्सव मनाने के साथ धरती और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    उनके मुताबिक, गणेश चतुर्थी की सबसे खास बात यह है कि हर साल यह त्योहार परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के और करीब लाता है। उनके लिए यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि साथ समय बिताने, पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी है।

    वर्धन पुरी दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के पोते हैं। अमरीश पुरी ने हिंदी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में निभाया उनका ‘मोगैम्बो’ का किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनका किरदार और उससे जुड़ा अंदाज हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों में गिना जाता है।

    अमरीश पुरी का 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। उनके निधन के वर्षों बाद भी फिल्मों में उनके निभाए किरदार दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए हैं। वर्धन के लिए गणेश चतुर्थी उनके परिवार की परंपराओं के साथ-साथ दादा अमरीश पुरी से जुड़ी पुरानी यादों को संजोने का भी अवसर है।

  • आकाश आनंद को रामदास आठवले का ऑफर, बोले- मायावती ने निकाला तो RPI में आइए

    आकाश आनंद को रामदास आठवले का ऑफर, बोले- मायावती ने निकाला तो RPI में आइए

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सहयोगी दलों ने सीट बंटवारे को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले ने मायावती के भतीजे आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया है। वहीं, आरपीआई के प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता ने साफ किया कि पार्टी भाजपा से विधानसभा चुनाव में 25 सीटें मांगेगी। सहमति नहीं बनी तो आरपीआई अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी करेगी।

    मुरादाबाद में आयोजित संविधान सम्मान रैली में पहुंचे आठवले ने मायावती और राहुल गांधी पर निशाना साधा। इसी दौरान उन्होंने कहा कि मायावती ने अपने भतीजे आनंद को पार्टी से निकाल दिया है और आरपीआई उन्हें अपने साथ लेने के लिए तैयार है।

    ‘आनंद अच्छा काम कर रहे थे, हम साथ लेने को तैयार’
    रामदास आठवले ने कहा कि मायावती ने अपने भतीजे आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया, जबकि वह अच्छा काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आरपीआई आनंद को अपने साथ लेने के लिए तैयार है। आठवले ने बसपा पर आरपीआई के चुनाव चिह्न हाथी के अतिक्रमण का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि आरपीआई का अपना राजनीतिक इतिहास और पहचान है।

    भाजपा से 25 सीटें मांगेगी आरपीआई
    मुरादाबाद में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता ने विधानसभा चुनाव को लेकर आरपीआई की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पार्टी भाजपा से 25 सीटों की मांग करेगी। गुप्ता ने कहा कि आरपीआई का संगठन भले ही छोटा हो, लेकिन पार्टी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि 19 नवंबर को लखनऊ में रैली आयोजित कर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि भाजपा के साथ सीटों को लेकर सहमति नहीं बनती है तो आरपीआई अकेले चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेगी।

    राहुल गांधी पर आठवले का हमला
    संविधान सम्मान रैली को संबोधित करते हुए रामदास आठवले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जनता को भड़काने का काम करते हैं और संसद में हंगामा करते हैं। आठवले ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें शिरडी लोकसभा सीट से चुनाव हराया था और सरकारी आवास से उनका सामान बाहर फिंकवा दिया गया था। उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें सहयोग मिला और प्रधानमंत्री ने उन्हें तीसरी बार मंत्रिमंडल में शामिल किया है।

    ब्रिक्स को लेकर बोले- बढ़ेगा व्यापार
    केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स सम्मेलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं और भारत ने सभी देशों के साथ समन्वय स्थापित किया है। आठवले ने दावा किया कि चीन भारत की सीमा तक नहीं आएगा और देशों के बीच समन्वय से व्यापार बढ़ेगा। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के पास विरोध के अलावा कोई मुद्दा नहीं है और वह केवल शोर मचा रहा है।

    उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं पहुंची
    मुरादाबाद में आयोजित कार्यक्रम में अपेक्षा के अनुरूप भीड़ नहीं जुटने पर पार्टी नेताओं में नाराजगी दिखाई दी। इसे स्थानीय संगठन की कमजोरी माना गया। प्रदेश अध्यक्ष पवन गुप्ता ने इस पर जिलाध्यक्ष से नाराजगी जताई और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की हिदायत दी। अब नजर इस बात पर है कि आरपीआई की 25 सीटों की मांग पर भाजपा क्या रुख अपनाती है और आकाश आनंद को दिया गया रामदास आठवले का राजनीतिक न्योता आगे किस रूप में सामने आता है।

  • भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि ढाका नई दिल्ली के साथ ऐसा रिश्ता बनाना चाहता है, जो आपसी हितों पर आधारित हो। उन्होंने दोनों देशों के बीच सीधे संवाद को संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बताया।

    हुमायूं कबीर के मुताबिक भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए नहीं, बल्कि सीधे द्विपक्षीय स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को नए रिश्ते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आपसी हितों को प्राथमिकता देनी होगी।

    कबीर ने शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों को असहज बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ संबंधों को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने वाली सोच से बाहर निकलना होगा। उनका कहना था कि नई दिल्ली के साथ रिश्तों को संतुलित तरीके से देखा जाना चाहिए और इसे बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंधों के व्यापक हिस्से के रूप में समझना चाहिए।

    बांग्लादेश का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में BRICS समिट अपने अंतिम दौर में है। बांग्लादेश ने कहा था कि उसके प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर निमंत्रण नहीं दिया गया था। ढाका के अनुसार, उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था। BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है।

    इससे पहले अगस्त में भी प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा टल गया था। BRICS समिट से पहले भारत ने दोनों देशों के बीच अलग द्विपक्षीय बैठक के लिए उन्हें 22 अगस्त को भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि यात्रा से पहले ही यह कार्यक्रम स्थगित हो गया।

    उस समय बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच इस विषय को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। उस दौरान हुमायूं कबीर ने कहा था कि माहौल अनुकूल होने पर द्विपक्षीय दौरे होंगे और जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ने की एक वजह शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके सार्वजनिक राजनीतिक बयानों को भी माना गया। 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह कार्यक्रम अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था।

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई थी। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के संबंध सामान्य करने की कोशिशों को प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि भारत को पहले इस संबंध में आगाह किया गया था।

    भारत ने हालांकि शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार किया था। भारत का कहना था कि कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था की ओर से आयोजित किया गया था और सरकार का उससे कोई संबंध नहीं था। अब बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री की ओर से सीधे संवाद और आपसी हितों पर आधारित नए रिश्ते की बात दोनों देशों के संबंधों को लेकर ढाका के रुख को सामने रखती है।

  • प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने परिवार के साथ मुंबई के ऐतिहासिक चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दर्शन किए। दोनों ने गणपति की पूजा-अर्चना कर उत्सव में भाग लिया।

    प्रणव अदाणी अदाणी एंटरप्राइजेज में एग्रो, ऑयल एंड गैस कारोबार के प्रबंध निदेशक और निदेशक भी हैं। उन्होंने चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध विरासत भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रही है। यह उत्सव इस वर्ष अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि को मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति उत्सव के रूप में माना जाता है। इसकी परंपरा शहर के पुराने कपड़ा मिल क्षेत्रों परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी रही है। शुरुआती दौर में कपड़ा मिलों के श्रमिकों ने इस उत्सव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    इस सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस पहल से भी जुड़ी मानी जाती है, जिसके तहत 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को घरों तक सीमित धार्मिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप दिया गया था।

    इस वर्ष चिंचपोकली चा चिंतामणि का आयोजन दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला से प्रेरित विशेष थीम पर किया गया है। गणेश प्रतिमा को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की शैली में सजाया गया है। प्रतिमा की सजावट में गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया है।

    उत्सव के लिए तैयार किए गए भव्य पंडाल की वास्तुकला हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर, स्वर्णगिरि की शैली से प्रेरित है। पंडाल में ऊंचे गोपुरम, दीप स्तंभ और याली तथा व्याल जैसे संरक्षक शिल्प बनाए गए हैं, जो इसकी विशेष थीम का हिस्सा हैं।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि की परंपरा ने मुंबई में हुए बड़े सामाजिक और औद्योगिक बदलावों के दौर को भी देखा है। वर्ष 1982 की ऐतिहासिक बॉम्बे कपड़ा मिल हड़ताल और उसके बाद शहर में हुए बदलावों के बावजूद यह उत्सव अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    करीब 5,000 योगदानकर्ताओं के सहयोग से संचालित चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल की गतिविधियां केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं हैं। मंडल की ओर से स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं।

    वर्ष 1939 से चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के पास गणेशोत्सव का आयोजन लगातार किया जा रहा है। चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल ही इन वर्षों में इस आयोजन का संचालन करता रहा है। गणेशोत्सव के अलावा मंडल रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यक्रम और बच्चों के लिए विभिन्न कल्याणकारी पहल भी आयोजित करता है।