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  • कोहली, रोहित और धोनी की राह पर श्रेयस अय्यर, रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के साथ रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

    कोहली, रोहित और धोनी की राह पर श्रेयस अय्यर, रांची में वेस्टइंडीज के खिलाफ जीत के साथ रिकॉर्ड सुधारने उतरेगा भारत

    नई दिल्ली: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का दूसरा मुकाबला 9 अक्टूबर को रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला जाएगा। भारतीय टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर कर रहे हैं। सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने आठ विकेट से जीत दर्ज की थी। अब टीम की कोशिश दूसरे मैच में भी जीत हासिल कर सीरीज में 2-0 की बढ़त बनाने की होगी। यह मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम सात बजे शुरू होगा।

    रांची का मैदान टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए अब तक अच्छा साबित हुआ है। यहां खेले गए चार मुकाबलों में भारत ने तीन में जीत दर्ज की है, जबकि एक मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा। इस बार वेस्टइंडीज की टीम पहली बार रांची में टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेलेगी। ऐसे में मेजबान टीम अपने घरेलू मैदान के रिकॉर्ड को कायम रखने के इरादे से उतरेगी, जबकि कैरेबियाई टीम के सामने इस मैदान पर अपनी पहली चुनौती का सामना करने का मौका होगा।

    रांची में भारतीय टीम को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एकमात्र हार न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली थी। 27 जनवरी 2023 को खेले गए उस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 21 रन से हराया था। उस समय भारतीय टीम की कप्तानी हार्दिक पंड्या के हाथों में थी। इसके अलावा भारत ने इस मैदान पर श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले खेले हैं और तीन मैचों में जीत हासिल की है।

    रांची में भारत की जीतों का सिलसिला अलग-अलग कप्तानों के नेतृत्व में देखने को मिला है। यहां पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 12 फरवरी 2016 को खेला गया था। महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को 69 रन से हराया था। इसके बाद 7 अक्टूबर 2017 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम ने विराट कोहली के नेतृत्व में नौ विकेट से जीत दर्ज की। वहीं, 19 नवंबर 2021 को रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने न्यूजीलैंड को सात विकेट से मात दी थी। अब श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम के सामने इसी जीत के रिकॉर्ड को आगे बढ़ाने का अवसर है।

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के कुल रिकॉर्ड में भी भारतीय टीम आगे है। दोनों देशों के बीच अब तक 32 मैच खेले गए हैं। इनमें भारत ने 21 मुकाबले जीते हैं, जबकि वेस्टइंडीज को 10 मैचों में सफलता मिली है। एक मुकाबला बेनतीजा रहा है। इस आंकड़े के आधार पर भारत का पलड़ा भारी दिखाई देता है, लेकिन दूसरे टी20 में टीम को जीत दर्ज करने के लिए मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करना होगा।

    दूसरे मुकाबले के लिए भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नमन धीर, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव और मयंक यादव शामिल हैं। संजू सैमसन और ईशान किशन दोनों विकेटकीपर के विकल्प हैं। भारतीय टीम के घोषित स्क्वॉड में वैभव सूर्यवंशी, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव और नीतीश कुमार रेड्डी समेत 15 खिलाड़ी शामिल हैं।

    वेस्टइंडीज की संभावित प्लेइंग इलेवन में शाई होप, कामिल पूरन, शिमरॉन हेटमायर, रोवमैन पॉवेल, शेरफेन रदरफोर्ड, रोमारियो शेफर्ड, मैथ्यू फोर्ड, रोस्टन चेज, अकील हुसैन, शमर स्प्रिंगर और शमर जोसेफ के नाम हैं। टीम के घोषित स्क्वॉड में आमिर जंगू, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल और क्वेंटिन सैम्पसन भी शामिल हैं। रांची में होने वाला यह मुकाबला भारत के लिए सीरीज में बढ़त मजबूत करने और अपने घरेलू रिकॉर्ड को कायम रखने का मौका होगा।

  • नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिर चर्चा में आया मीटू विवाद, तनुश्री दत्ता ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया कवरेज पर दिया बयान

    नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिर चर्चा में आया मीटू विवाद, तनुश्री दत्ता ने तोड़ी चुप्पी, मीडिया कवरेज पर दिया बयान


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के बाद फिल्म इंडस्ट्री में शोक का माहौल है। इसी बीच अभिनेत्री तनुश्री दत्ता की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई है। दोनों कलाकारों के बीच साल 2018 में सामने आए विवाद के कारण तनुश्री की प्रतिक्रिया पर लोगों की नजरें टिक गई हैं। अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में नाना पाटेकर के निधन की खबर का जिक्र करते हुए लखनऊ में होने वाले अपने कार्यक्रम को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने संकेत दिया कि इस खबर के बाद मीडिया का ध्यान उनके कार्यक्रम से हटकर उनके बयान पर केंद्रित हो सकता है। हालांकि उनकी पोस्ट को ही इस मामले पर उनकी अंतिम प्रतिक्रिया मानना जल्दबाजी होगी।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तनुश्री दत्ता ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए नाना पाटेकर के निधन की खबर पर अपनी बात रखी। अभिनेत्री ने बताया कि उनके लिए उस दिन का कार्यक्रम काफी महत्वपूर्ण था और वह लखनऊ में एक बड़े आयोजन में हिस्सा लेने की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने अपने दिन की योजना पहले से बना रखी थी। वह कार्यक्रम पर ध्यान देने के साथ सोशल मीडिया पर लाइव आने और अपने कंटेंट को साझा करने की तैयारी में थीं। लेकिन नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद उन्हें आशंका हुई कि शाम तक मीडिया का ध्यान उनके कार्यक्रम के बजाय इस खबर और उनकी प्रतिक्रिया पर केंद्रित हो जाएगा।

    तनुश्री ने यह भी कहा कि वह इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया तभी देंगी जब उन्हें खुद समझ आएगा कि उन्हें क्या कहना चाहिए। उन्होंने नाना पाटेकर के परिवार के प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त कीं। उनकी पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्दों और पुराने विवाद की पृष्ठभूमि के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। हालांकि अभिनेत्री के बयान को संदर्भ के साथ समझना जरूरी है क्योंकि उन्होंने अपनी ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया देने की बात बाद के लिए छोड़ी थी।

    तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर के बीच विवाद साल 2018 में देशभर में चर्चा का विषय बना था। उस समय तनुश्री ने आरोप लगाया था कि साल 2008 में फिल्म हॉर्न ओके प्लीज की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया था। अभिनेत्री ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने इस मामले में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी CINTAA से शिकायत की थी। इन आरोपों के सामने आने के बाद बॉलीवुड में मीटू अभियान को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई थी। कई महिलाओं ने अपने साथ हुए कथित उत्पीड़न के अनुभव सार्वजनिक किए थे और फिल्म इंडस्ट्री में कामकाज के माहौल पर सवाल उठे थे।

    नाना पाटेकर ने तनुश्री के आरोपों को खारिज किया था। मामले में पुलिस जांच हुई और वर्ष 2019 में सबूतों की कमी के चलते पुलिस ने इसे बंद करने की रिपोर्ट दी थी। बाद में शिकायत से संबंधित आपराधिक कार्यवाही भी अदालत में खारिज कर दी गई थी। इसलिए इस विवाद का उल्लेख करते समय आरोपों और कानूनी घटनाक्रम के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

    नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के चर्चित अभिनेताओं में शामिल रहे हैं। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं और अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई। उनके निधन की खबर के बीच तनुश्री दत्ता की पोस्ट ने पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल अभिनेत्री की टिप्पणी में अपने कार्यक्रम और मीडिया कवरेज को लेकर चिंता प्रमुख रूप से दिखाई देती है। अब आगे उनकी ओर से कोई विस्तृत बयान आता है या नहीं इस पर लोगों की नजर बनी हुई है।

  • किसी के 100 तो किसी के 14 बच्चे: अरबपतियों की दुनिया में बड़े परिवारों का चलन, जानिए इसके पीछे की सोच

    किसी के 100 तो किसी के 14 बच्चे: अरबपतियों की दुनिया में बड़े परिवारों का चलन, जानिए इसके पीछे की सोच

    नई दिल्ली: दुनिया के अति-अमीर लोगों की जीवनशैली में कई ऐसी बातें देखने को मिलती हैं, जो आम लोगों की जिंदगी से काफी अलग हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करना और उनकी देखभाल के लिए सहायकों की पूरी टीम रखना भी शामिल है। जहां बहुत से परिवारों के लिए एक बच्चे की परवरिश का खर्च और जिम्मेदारी बड़ी चुनौती होती है, वहीं कुछ अरबपति दर्जनों बच्चों के माता-पिता बन रहे हैं। इस चलन ने परिवार, संपत्ति, सामाजिक प्रतिष्ठा और बच्चों के पालन-पोषण को लेकर नई चर्चा शुरू की है। कुछ मामलों में बच्चों की संख्या इतनी अधिक है कि उनकी देखभाल के लिए कई नैनी और सहायक नियुक्त किए जाते हैं। ऐसे परिवारों में बच्चों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय रहती है। इससे यह सवाल भी उठता है कि आर्थिक संपन्नता के बावजूद माता-पिता अपने बच्चों के साथ कितना समय बिता पाते हैं और उनके भावनात्मक विकास में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी कितनी रहती है।

    कारोबारी और मनोरंजन जगत की चर्चित हस्ती किम कार्दशियन का उदाहरण इस व्यवस्था को समझने में मदद करता है। उनके पूर्व पति से चार बच्चे हैं और उनकी देखभाल के लिए पांच नैनी नियुक्त होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि इन सहायकों की ड्यूटी अलग-अलग पालियों में चलती है। एक समय में एक नैनी बच्चों की देखभाल करती है, जबकि अन्य अपनी निर्धारित पाली के अनुसार जिम्मेदारी संभालती हैं। इस तरह बच्चों की दिनचर्या, उनकी जरूरतों और देखभाल के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई गई है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों में घरेलू सहायकों की मदद लेना असामान्य नहीं है। बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित लोगों की सहायता से माता-पिता अपने काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकते हैं। लेकिन जब बच्चों की संख्या अधिक हो और उनकी देखभाल का बड़ा हिस्सा सहायकों के जिम्मे हो, तो माता-पिता की व्यक्तिगत भागीदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    तकनीक क्षेत्र के कारोबारी पावेल दुरुव का मामला भी बड़ी संख्या में बच्चों को लेकर चर्चा में रहा है। रूस में जन्मे दुरुव के बारे में बताया गया है कि शुक्राणु दान के माध्यम से दुनिया के 12 देशों में उनके 100 से अधिक जैविक बच्चे हैं। इस मामले में बच्चों का जन्म पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था से अलग माध्यम के जरिए हुआ है। चीन के उद्योगपति शू बो के बारे में भी सरोगेसी के माध्यम से 100 से अधिक बच्चे होने का विवरण सामने आया है। इन उदाहरणों से पता चलता है कि प्रजनन तकनीकों और आर्थिक संसाधनों की उपलब्धता ने कुछ संपन्न लोगों के लिए परिवार बनाने के विकल्पों का दायरा बढ़ाया है। हालांकि, ऐसे मामलों में बच्चों की परवरिश, उनके साथ संबंध और पारिवारिक जिम्मेदारियों का स्वरूप व्यक्ति तथा परिवार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

    अत्यधिक संपन्नता के बीच बड़े परिवारों का चलन सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ लोगों के लिए अधिक संतान होना परिवार की निरंतरता या व्यक्तिगत पसंद का विषय हो सकता है, जबकि अन्य मामलों में इसके पीछे अलग-अलग विचार और परिस्थितियां हो सकती हैं। हालांकि, केवल बच्चों की संख्या के आधार पर किसी व्यक्ति की मंशा तय नहीं की जा सकती। बड़ी संख्या में बच्चों की परवरिश के लिए आर्थिक संसाधनों के साथ समय, भावनात्मक सहयोग और नियमित देखभाल की भी जरूरत होती है। नैनी और दूसरे सहायकों की मदद से बच्चों की दैनिक जरूरतें पूरी की जा सकती हैं, लेकिन माता-पिता के साथ उनका व्यक्तिगत संबंध भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

    बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर परिवार के माहौल, देखभाल की निरंतरता और माता-पिता के साथ संबंधों का प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों वाले परिवारों के सामने यह चुनौती रहती है कि प्रत्येक बच्चे को पर्याप्त ध्यान और व्यक्तिगत समय कैसे दिया जाए। दूसरी ओर, यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी परिवार की परिस्थितियों को समझे बिना बच्चों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का निष्कर्ष नहीं निकाला जाए। हर बच्चे की जरूरतें और पारिवारिक अनुभव अलग हो सकते हैं। अंततः संपत्ति और सुविधाएं बच्चों के जीवन को आसान बनाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन उनके पालन-पोषण में भावनात्मक जुड़ाव और जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हैं। अरबपतियों के बड़े परिवारों के उदाहरण इसी व्यापक बहस को सामने लाते हैं कि आधुनिक समाज में परिवार का आकार, आर्थिक क्षमता और बच्चों की परवरिश के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

  • विश्व डाक दिवस: दूतों और घोड़ा डाक से ईमेल तक, हजारों साल में कैसे बदल गई संदेश पहुंचाने की दुनिया?

    विश्व डाक दिवस: दूतों और घोड़ा डाक से ईमेल तक, हजारों साल में कैसे बदल गई संदेश पहुंचाने की दुनिया?

    नई दिल्ली: एक समय था जब दूर रहने वाले किसी अपने का हाल जानने के लिए चिट्ठी का इंतजार करना पड़ता था। गांव की गलियों में डाकिया दिखाई देता तो लोगों की निगाहें उसके थैले पर टिक जाती थीं। किसी को नौकरी का नियुक्ति पत्र मिलता था, तो किसी के घर परीक्षा का परिणाम, मनी ऑर्डर या रिश्तेदारों की चिट्ठी पहुंचती थी। समय के साथ टेलीफोन, फैक्स, ईमेल, मोबाइल और इंटरनेट ने संदेश भेजने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। अब तस्वीरें, वीडियो और जरूरी दस्तावेज कुछ सेकंड में दुनिया के दूसरे हिस्से तक पहुंच जाते हैं। हालांकि, संचार की इस आधुनिक व्यवस्था की शुरुआत हजारों साल पहले दूतों और संदेशवाहकों से हुई थी। विश्व डाक दिवस के अवसर पर संदेश पहुंचाने की इसी लंबी यात्रा को समझना महत्वपूर्ण है।

    प्राचीन समय में संदेश पहुंचाने के लिए आज की तरह डाकघर, डाक टिकट या नियमित डाक वितरण व्यवस्था नहीं थी। राजा-महाराजा और शासक अपने संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए पैदल दूतों और घुड़सवार संदेशवाहकों की मदद लेते थे। शासन व्यवस्था के विस्तार के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों तक सूचनाएं पहुंचाने की जरूरत भी बढ़ती गई। भारत में दिल्ली सल्तनत के दौरान प्रशासनिक संदेशों के लिए डाक व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था। अलाउद्दीन खिलजी के समय घोड़े और पैदल संदेशवाहकों के जरिए सूचनाएं पहुंचाने की व्यवस्था का उल्लेख मिलता है। बाद में शेरशाह सूरी ने सड़कों और सरायों के नेटवर्क के साथ घोड़ा डाक व्यवस्था को मजबूत किया। इन व्यवस्थाओं ने संदेश पहुंचाने के संगठित तरीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अठारहवीं सदी में भारत में डाक व्यवस्था का स्वरूप अधिक व्यवस्थित होने लगा। ब्रिटिश शासन के दौरान प्रशासनिक जरूरतों के लिए डाक सेवाओं का विस्तार किया गया। वर्ष 1774 में कलकत्ता के जनरल पोस्ट ऑफिस की स्थापना को इस विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद मद्रास और बॉम्बे में भी जनरल पोस्ट ऑफिस स्थापित किए गए। वर्ष 1854 में भारतीय डाक व्यवस्था के विकास को नई दिशा मिली और डाक शुल्क, टिकट तथा वितरण प्रणाली को अधिक व्यवस्थित किया गया। इससे विभिन्न क्षेत्रों के बीच पत्र भेजना आसान हुआ। डाक टिकटों ने भी इस व्यवस्था को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। वर्ष 1852 में सिंध क्षेत्र में ‘सिंध डाक’ टिकट जारी किया गया, जिसे भारत के शुरुआती डाक टिकटों में गिना जाता है। वर्ष 1854 में ऐसे टिकट जारी किए गए जिनका इस्तेमाल व्यापक स्तर पर किया जा सकता था। इससे पहले वर्ष 1840 में ब्रिटेन का ‘पेनी ब्लैक’ जारी हो चुका था, जिसे दुनिया का पहला चिपकने वाला डाक टिकट माना जाता है।

    डाक व्यवस्था का विस्तार होने के साथ डाकिया आम लोगों के जीवन का अहम हिस्सा बन गया। मोबाइल और इंटरनेट के दौर से पहले चिट्ठियां दूर रहने वाले रिश्तेदारों और मित्रों से संपर्क बनाए रखने का प्रमुख माध्यम थीं। नौकरी के पत्र, सरकारी सूचनाएं, परीक्षा परिणाम और व्यक्तिगत संदेश डाक के जरिए पहुंचते थे। मनी ऑर्डर की सुविधा ने भी लोगों को दूर रहकर अपने परिवारों तक पैसे भेजने में मदद की। विशेष रूप से उन इलाकों में यह सुविधा उपयोगी थी, जहां बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित थी। पोस्टकार्ड ने कम खर्च में संदेश भेजना आसान बनाया, जबकि रेलवे मेल सर्विस ने लंबी दूरी तक डाक पहुंचाने की गति बढ़ाई। इस तरह सड़क और रेल के बाद हवाई परिवहन ने भी डाक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाया।

    भारत में वर्ष 1911 में इलाहाबाद से नैनी के बीच पहली आधिकारिक हवाई डाक उड़ान हुई। यह उड़ान करीब 18 किलोमीटर की दूरी तक गई थी। उस समय डाक को हवाई मार्ग से पहुंचाना संचार व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयोग था। इसके बाद परिवहन के आधुनिक साधनों ने दूरस्थ स्थानों तक पत्र और जरूरी दस्तावेज पहुंचाने की क्षमता बढ़ाई। हर साल 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। इसी तारीख को वर्ष 1874 में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना हुई थी। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों की डाक सेवाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय डाक व्यवस्था को बेहतर बनाना था।

    भारत की आजादी के बाद डाक सेवाओं का विस्तार ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक किया गया। समय के साथ डाकघरों ने चिट्ठियों के अलावा बचत, बीमा और अन्य सेवाएं भी उपलब्ध करानी शुरू कीं। वर्ष 1986 में स्पीड पोस्ट की शुरुआत ने जरूरी पत्रों और दस्तावेजों को तेजी से पहुंचाने का विकल्प दिया। इसके बाद टेलीफोन, फैक्स और ईमेल ने संचार की गति और बढ़ा दी। इंटरनेट के विस्तार के साथ नौकरी के आवेदन, व्यावसायिक पत्राचार और दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाने लगे। मोबाइल फोन, एसएमएस और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप ने इस बदलाव को और तेज कर दिया। अब संदेशों के साथ फोटो, वीडियो, ऑडियो और दस्तावेज भी तुरंत साझा किए जा सकते हैं।

    डिजिटल संचार के विस्तार के बावजूद डाक सेवा की उपयोगिता समाप्त नहीं हुई है। आज डाक विभाग पार्सल, लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग, बीमा और कई सरकारी सेवाओं से भी जुड़ा है। भारत में 1.55 लाख से अधिक डाकघरों का नेटवर्क दूरदराज के क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चिट्ठियों की संख्या में बदलाव आया है, लेकिन डाक व्यवस्था नए समय की जरूरतों के अनुसार अपना स्वरूप बदल रही है। वहीं, हाथ से लिखी चिट्ठियों का भावनात्मक महत्व भी बरकरार है। पुरानी चिट्ठियां लोगों को रिश्तों, यादों और बीते समय से जोड़ती हैं। दूतों से शुरू हुआ संदेश पहुंचाने का सफर आज डिजिटल मैसेजिंग तक पहुंच चुका है, लेकिन अपनों तक अपनी बात पहुंचाने की मानवीय जरूरत अब भी पहले जैसी है।

  • एलन मस्क ने राहुल गांधी को कहा थैंक्यू, स्टारलिंक लाइसेंस पर उठाए सवाल; भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर बढ़ी चर्चा

    एलन मस्क ने राहुल गांधी को कहा थैंक्यू, स्टारलिंक लाइसेंस पर उठाए सवाल; भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर बढ़ी चर्चा

    नई दिल्ली: अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बीच भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को लेकर सोशल मीडिया पर बातचीत हुई है। राहुल गांधी के जवाब पर मस्क ने प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें धन्यवाद कहा और मामले को चिंताजनक बताया। मस्क ने इससे पहले सवाल उठाया था कि उनकी कंपनी स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और वह पिछले पांच वर्षों से भारत सरकार के कानूनों तथा आवश्यकताओं का पालन करने की बात कह रही है, इसके बावजूद भारत में उसे अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला है। राहुल गांधी ने जवाब में लिखा था कि एलन मस्क का भारत में स्वागत है और दूसरे व्यक्ति से मिलने पर उन्हें इस मामले के बारे में और जानकारी मिलेगी। हालांकि, राहुल गांधी ने अपने संदेश में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। इस बातचीत के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत और कंपनियों के लिए लागू नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    मस्क ने राहुल गांधी के संदेश के जवाब में कहा कि यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है। इससे पहले भी वह भारत में स्टारलिंक की सेवाओं को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली समूह भारतीय बाजार में अपनी एकाधिकार वाली स्थिति बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी को रोक रहे हैं। मस्क ने इस कथित रोक को भारतीय लोगों के हितों के खिलाफ बताया था। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि देश में दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाली नियामकीय व्यवस्था लागू है। स्टारलिंक, स्पेसएक्स की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा है, जो सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी भारतीय बाजार में सेवाएं शुरू करने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है। इस बीच लाइसेंस, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी मंजूरियों को लेकर अलग-अलग पक्षों के बयान सामने आए हैं।

    स्टारलिंक की ओर से भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारियों को लेकर भी जानकारी दी गई है। कंपनी की अधिकारी लॉरेन ड्रेयर ने कहा था कि भारत में सेवा शुरू करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की तैयारी में निवेश किया गया है। कंपनी भारत में अपनी उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के लिए तैयार होने की बात कह चुकी है। हालांकि, सेवा शुरू करने के लिए केवल लाइसेंस मिलना पर्याप्त नहीं है। संबंधित कंपनियों को स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी। भारत में उपग्रह संचार सेवाओं के क्षेत्र में स्टारलिंक के अलावा जियो सैटकॉम और यूटेलसैट वनवेब भी मौजूद हैं। इन कंपनियों को देश में सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद व्यावसायिक स्तर पर सेवा शुरू करने से पहले निर्धारित नियामकीय और सुरक्षा शर्तों का पालन करना जरूरी है। इसी वजह से लाइसेंस मिलने और सेवाओं के वास्तविक संचालन के बीच अंतर बना हुआ है।

    भारत सरकार ने मस्क के आरोपों के जवाब में कहा है कि देश में सैटेलाइट संचार समेत सभी दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष व्यवस्था लागू है। सरकार के अनुसार, नियामकीय नियमों या उन्हें लागू करने की प्रक्रिया को अनुचित बताना सही नहीं है। दूरसंचार सेवाओं के लिए निर्धारित लाइसेंस शर्तों के तहत प्रत्येक उपग्रह संचार कंपनी को सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के पालन की पुष्टि करनी होती है। इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवाएं निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हों। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम किसी एक कंपनी को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं, बल्कि सभी संबंधित कंपनियों पर लागू होते हैं।

    संचार राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि सैटेलाइट संचार सेवाओं से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद कंपनियों को सेवाएं शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग ने सैटेलाइट संचार कंपनियों को लाइसेंस देने के साथ अस्थायी स्पेक्ट्रम भी आवंटित किया है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया का संबंध किसी एक कंपनी से नहीं है। ऐसे में स्टारलिंक की भारत में शुरुआत का मामला कंपनी की तैयारियों के साथ सुरक्षा मंजूरी और अन्य नियामकीय आवश्यकताओं पर भी निर्भर करता है।

  • नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नई दिल्ली: हिंदी और मराठी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा में उनके निधन के बाद गुरुवार, 8 अक्टूबर की देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन और विदाई के लिए उनके परिवार के सदस्यों, करीबी लोगों और फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। हालांकि, देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर सवाल भी उठे। इस पर उनके बेटे मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार ने किसी विशेष वजह से अंतिम संस्कार में देरी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर के निधन की घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसी कारण परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।

    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे मल्हार से पूछा गया कि जब फिल्म जगत के कई लोग और अन्य परिचित उन्हें अंतिम विदाई देना चाहते थे, तो अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया। सवाल में यह भी कहा गया कि देर होने के कारण फिल्म उद्योग से जुड़े कई लोग अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके। इस पर मल्हार ने कहा कि ऐसी कोई विशेष बात नहीं थी कि अंतिम संस्कार देर रात ही करना जरूरी था। उन्होंने बताया कि परिवार के सामने ऐसा कोई कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार अगले दिन किया जाता। चूंकि घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि अंतिम विदाई का समय परिवार के फैसले के अनुसार तय किया गया था।

    नाना पाटेकर को अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान मौजूद लोगों ने श्रद्धांजलि दी और ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, ‘नटसम्राट’ के लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग पहुंचे। इन लोगों ने नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी। उनके लंबे फिल्मी करियर और अभिनय के कारण उन्हें जानने वाले लोगों के लिए उनका निधन एक बड़ी क्षति है। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    नाना पाटेकर का निधन गोवा स्थित उनके फ्लैट में सीने में तेज दर्द होने के बाद हुआ। जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत बिगड़ने पर घर पर मेडिकल टीम पहुंची। उस समय वह बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें बचाने के लिए चिकित्सकीय प्रयास किए गए और इसके बाद तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश जारी रखी। बताया गया कि डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नाना पाटेकर 75 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया और देर रात उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे मल्हार ने अंतिम संस्कार के समय को लेकर उठे सवालों पर परिवार का पक्ष स्पष्ट किया।

  • बिग बॉस 20 में नया ट्विस्ट लाएंगी कुमार सानू की बेटी? शेनन के के नाम ने बढ़ाई हलचल, जानिए सिंगिंग से एक्टिंग तक का सफर

    बिग बॉस 20 में नया ट्विस्ट लाएंगी कुमार सानू की बेटी? शेनन के के नाम ने बढ़ाई हलचल, जानिए सिंगिंग से एक्टिंग तक का सफर


    नई दिल्ली। बिग बॉस 20 में अब शो के पहले वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खबरों के मुताबिक इस बार शो में एक महिला सेलिब्रिटी की एंट्री हो सकती है और इसके लिए मशहूर बॉलीवुड गायक कुमार सानू की बेटी शेनन के का नाम सामने आ रहा है। हालांकि उनकी एंट्री को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अगर शेनन शो का हिस्सा बनती हैं तो दर्शकों को एक ऐसी कलाकार को करीब से जानने का मौका मिलेगा जिन्होंने भारतीय संगीत जगत से पारिवारिक संबंध होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है।

    शेनन के का जन्म नाम सना कुमार सानू बताया जाता है। वह भारतीय मूल की अमेरिकी गायिका गीतकार और अभिनेत्री हैं। उनके पिता कुमार सानू हिंदी फिल्म संगीत के चर्चित गायकों में शामिल हैं। शेनन का जन्म भारत में हुआ और उनकी परवरिश लंदन में हुई। इसके बाद वह अमेरिका के लॉस एंजिल्स चली गईं जहां उन्होंने संगीत और मनोरंजन की दुनिया में अपने करियर को आगे बढ़ाया। अपने पिता की तरह हिंदी फिल्म संगीत में करियर बनाने के बजाय उन्होंने पश्चिमी पॉप संगीत को अपना प्रमुख क्षेत्र बनाया।

    शेनन ने अपने संगीत के जरिए अलग तरह के विषयों को उठाने की कोशिश की है। उनके गानों में आत्मविश्वास रिश्तों आत्मसम्मान और बुलीइंग जैसे मुद्दों की झलक मिलती है। उनके संगीत को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि कुछ गीतों के माध्यम से उन्होंने युवाओं से जुड़े सामाजिक विषयों पर भी ध्यान खींचा है। उनके गानों में अ लॉन्ग टाइम गिव मी योर हैंड रन एंटीडोट ओटीटी और नॉट माई शेड जैसे नाम शामिल हैं।

    अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कर चुकी हैं परफॉर्म

    शेनन के ने अपने संगीत करियर में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रस्तुति दी है। उनके गीत गिव मी योर हैंड को बुलीइंग के खिलाफ जागरूकता अभियान से जोड़ा गया था। इस गाने के जरिए उन्होंने लोगों को दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने और आत्मविश्वास बनाए रखने का संदेश देने की कोशिश की। उनकी संगीत यात्रा में अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और बड़े मंचों पर प्रस्तुति देने के अवसर भी शामिल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वह लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में परफॉर्म कर चुकी हैं और साल 2025 में कोचेला में भी प्रस्तुति दी थी।

    उनका हालिया सिंगल नॉट माई शेड भी चर्चा में रहा है। इस गाने में उनके संगीत का व्यक्तिगत पक्ष देखने को मिलता है। शेनन सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहती हैं और अपने काम से जुड़ी तस्वीरें तथा वीडियो साझा करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं। वह अपने पिता कुमार सानू के साथ भी तस्वीरें साझा करती रहती हैं।

    संगीत के बाद अभिनय में भी आजमाई किस्मत

    संगीत के अलावा शेनन ने अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा है। उन्होंने साल 2020 में फिल्म द बिग फीड से अभिनय की शुरुआत की थी। इसके बाद वह भारतीय फिल्म चल जिंदगी में नजर आईं जिसमें उन्होंने एक अमेरिकी संगीत छात्रा का किरदार निभाया था। उनके अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में टोड का नाम भी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने अनुपम खेर के निर्देशन में बनी फिल्म तन्वी द ग्रेट के लिए अपनी आवाज भी दी थी।

    क्या बिग बॉस में आएगा नया ट्विस्ट

    बिग बॉस जैसे रियलिटी शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री अक्सर घर के समीकरणों को बदलने और प्रतियोगियों के बीच नई चर्चाएं शुरू करने का मौका देती है। शेनन के की संभावित एंट्री को लेकर दर्शकों में उत्सुकता हो सकती है क्योंकि उनकी पृष्ठभूमि संगीत और अभिनय दोनों से जुड़ी है। हालांकि फिलहाल यह खबर अटकलों पर आधारित है और उनकी भागीदारी की पुष्टि होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी। ऐसे में अब दर्शकों की नजर शो के निर्माताओं की आधिकारिक घोषणा पर टिकी है।

  • इमरान खान की बहनों की हिरासत पर बेटे कासिम का गंभीर आरोप, परिवार और वकीलों को नहीं मिल रही जानकारी

    इमरान खान की बहनों की हिरासत पर बेटे कासिम का गंभीर आरोप, परिवार और वकीलों को नहीं मिल रही जानकारी

    नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के बेटे कासिम खान ने अपनी तीन मौसियों की हिरासत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कासिम का कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनकी मौसियों अलीमा खान, नोरीन नियाजी और उजमा खान को अगवा कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार और वकीलों को अब तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि तीनों महिलाएं किस स्थिति में हैं, उन्हें कहां रखा गया है और उनकी हिरासत की वजह क्या है। कासिम ने अपने बयान में पिता इमरान खान की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि छह महीने से अधिक समय से उनका और उनके भाई का पिता से कोई संपर्क नहीं हुआ है। ऐसे में उन्हें इमरान खान की सेहत के बारे में भी सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।

    कासिम खान के अनुसार, उनकी मौसियों की स्थिति को लेकर परिवार अनिश्चितता का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि न तो रिश्तेदारों को उनकी हालत के बारे में बताया जा रहा है और न ही कानूनी प्रतिनिधियों को उनसे मिलने की जानकारी या अनुमति मिल रही है। कासिम ने अपने बयान में इमरान खान की हिरासत पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पाकिस्तान में हजारों लोग शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को गैरकानूनी और राजनीतिक कारणों से जेल में रखा गया है। कासिम ने कहा कि लोगों की न्याय की मांग और लोकतांत्रिक अधिकारों को किसी भी प्रकार की रुकावट, धमकी या दबाव से नहीं दबाया जा सकता। उनके मुताबिक, जब तक लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा का सम्मान नहीं होगा और उनका चुना हुआ नेता जेल में रहेगा, तब तक देश में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करना मुश्किल होगा।

    इमरान खान की तीनों बहनों को पिछले महीने 30 दिनों की निवारक हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई पीटीआई की ओर से 27 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और इस्लामाबाद तक मार्च की तैयारी के दौरान हुई। पार्टी इस प्रदर्शन के जरिए इमरान खान की सेहत के बारे में जानकारी देने और उन्हें अदियाला जेल से रिहा करने की मांग उठा रही थी। इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। पीटीआई ने अपने समर्थकों से देशभर में प्रदर्शन करने और संविधान की सर्वोच्चता के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था। पार्टी की मांगों में इमरान खान की रिहाई भी प्रमुख रही है। हिरासत की कार्रवाई के बाद से उनकी बहनों की स्थिति और परिवार से संपर्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    इस मामले में परिवार की ओर से लाहौर हाई कोर्ट में पहले से लंबित याचिका के तहत दो अलग-अलग सिविल आवेदन भी दायर किए गए हैं। इन आवेदनों में अलीमा खान के बेटे शाह रेज खान और नोरीन नियाजी की बेटी सकीना नियाजी की ओर से तीनों महिलाओं से मुलाकात पर रोक और दवाइयों तक पहुंच नहीं दिए जाने को चुनौती दी गई है। परिवार का आरोप है कि हिरासत में रखी गई महिलाओं से न रिश्तेदारों को मिलने दिया जा रहा है और न ही उनके वकीलों को संपर्क करने की अनुमति मिल रही है। आवेदनों में कहा गया है कि महिलाओं को दवाइयां केवल एक बार उपलब्ध कराई गईं और इसके बाद किसी को उनसे मिलने नहीं दिया गया। परिवार ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए अदालत से अनुरोध किया है कि वकीलों और परिजनों को मुलाकात करने तथा जरूरी दवाइयां पहुंचाने की अनुमति दी जाए।

    इससे पहले 24 सितंबर को लाहौर हाई कोर्ट ने इमरान खान की बहनों की निवारक हिरासत से संबंधित आदेश को तत्काल निलंबित करने की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद भी परिवार की ओर से मुलाकात और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर कानूनी राहत मांगी गई है। कासिम खान का ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब परिवार इमरान खान से संपर्क नहीं होने और उनकी बहनों की हिरासत को लेकर चिंता जता रहा है। फिलहाल परिवार की प्रमुख मांग तीनों महिलाओं की स्थिति की जानकारी, उनसे मुलाकात की अनुमति और जरूरी दवाइयों तक पहुंच सुनिश्चित कराने की है।

  • 'दादा' के फर्स्ट लुक पर मचा था बवाल, राजकुमार राव ने माना जल्दबाजी में हुई गलती, AI के इस्तेमाल पर भी जताई चिंता

    'दादा' के फर्स्ट लुक पर मचा था बवाल, राजकुमार राव ने माना जल्दबाजी में हुई गलती, AI के इस्तेमाल पर भी जताई चिंता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव इन दिनों भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की बायोपिक फिल्म दादा को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में राजकुमार राव सौरव गांगुली की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का पहला पोस्टर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके लुक को लेकर काफी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। कुछ दर्शकों ने पोस्टर को लेकर सवाल उठाए और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से तैयार किया गया बताया। अब राजकुमार राव ने इस आलोचना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और फिल्म निर्माण में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी राय रखी है।

    राजकुमार राव ने मैशेबल इंडिया के साथ बातचीत में स्वीकार किया कि पोस्टर को लेकर टीम को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अभिनेता के मुताबिक इस प्रतिक्रिया से टीम को यह सीख मिली कि किसी भी रचनात्मक काम को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय उसे पर्याप्त समय देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पोस्टर बनाने वाली टीम को एहसास हुआ कि काम को और सावधानी से किया जाना चाहिए था। उनके अनुसार इसमें जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं थी और बेहतर नतीजे के लिए समय लेना चाहिए था। इस प्रतिक्रिया के बाद फिल्म के शुरुआती प्रचार और उसके प्रस्तुतिकरण को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।

    राजकुमार राव ने यह भी कहा कि पोस्टर पर मिली प्रतिक्रिया से एक बात साफ हुई कि सौरव गांगुली के प्रशंसक उनसे कितना गहरा जुड़ाव रखते हैं। गांगुली भारतीय क्रिकेट के ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने टीम की सोच और खेलने के अंदाज को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि उनकी जिंदगी पर बनने वाली फिल्म से दर्शकों की उम्मीदें काफी ज्यादा हैं। ऐसे में फिल्म के लुक और प्रस्तुति को लेकर प्रशंसकों की बारीक नजर स्वाभाविक मानी जा रही है।

    AI को लेकर राजकुमार राव की दो टूक

    फिल्मों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर बात करते हुए राजकुमार राव ने कहा कि तकनीक के विकास को रोका नहीं जा सकता। हालांकि उनका मानना है कि AI का इस्तेमाल इंसानी रचनात्मकता की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उसे बेहतर बनाने में मददगार उपकरण के रूप में होना चाहिए। उन्होंने तकनीक के फायदे और नुकसान दोनों की ओर ध्यान दिलाया। अभिनेता ने चिंता जताई कि अगर फिल्म इंडस्ट्री में AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता बढ़ी तो इससे बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो सकती है।

    राजकुमार के अनुसार फिल्म निर्माण केवल तस्वीरें बनाने या दृश्यों को तैयार करने का काम नहीं है। इसके पीछे कलाकारों तकनीकी विशेषज्ञों लेखकों और कई अन्य लोगों की मेहनत होती है। एक फिल्म में इंसानी अनुभव और भावनाओं की अहम भूमिका रहती है। उनका मानना है कि AI की मदद से कुछ काम आसान किए जा सकते हैं लेकिन हर रचनात्मक प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। दर्शकों को कई बार AI से तैयार सामग्री में बनावटीपन महसूस होता है जिससे कहानी और किरदारों का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।

    सौरव गांगुली के घर और ईडन गार्डन्स में हुई शूटिंग

    राजकुमार राव ने बताया कि दादा फिल्म की टीम ने सौरव गांगुली के घर और कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में भी शूटिंग की है। अभिनेता ने कहा कि वह गांगुली से कई बार मिल चुके हैं और उनके साथ समय बिताकर उनकी जिंदगी को करीब से समझने की कोशिश की है। इन मुलाकातों के दौरान गांगुली ने अपने जीवन और अनुभवों के बारे में खुलकर बातचीत की। राजकुमार के मुताबिक किसी वास्तविक व्यक्ति का किरदार निभाने के लिए केवल उसके हावभाव और पहनावे को अपनाना पर्याप्त नहीं होता बल्कि उसके जीवन के अनुभवों और पर्दे के पीछे की परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।

    अभिनेता ने सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट का दिग्गज बताते हुए कहा कि उन्होंने टीम को मजबूत बनाने और भारतीय क्रिकेट की पहचान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विक्रमादित्य मोटवाने के निर्देशन में बन रही इस फिल्म से दर्शकों को गांगुली के क्रिकेट करियर और उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को देखने की उम्मीद है। अब फिल्म की आगे की झलकियों पर नजर रहेगी क्योंकि दर्शक चाहते हैं कि पर्दे पर गांगुली की छवि और उनकी कहानी को वास्तविकता के करीब पेश किया जाए।

  • बेजान त्वचा और पिंपल्स से हैं परेशान, अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय और रखें चेहरे की प्राकृतिक चमक बरकरार

    बेजान त्वचा और पिंपल्स से हैं परेशान, अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय और रखें चेहरे की प्राकृतिक चमक बरकरार


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई साफ निखरी और स्वस्थ त्वचा चाहता है लेकिन धूल प्रदूषण धूप तनाव खराब खानपान और अनियमित दिनचर्या का असर चेहरे पर साफ दिखाई देने लगता है। कई बार त्वचा बेजान नजर आने लगती है और पिंपल्स रूखापन ऑयली स्किन या टैनिंग जैसी समस्याएं भी परेशान करने लगती हैं। ऐसे में जरूरी नहीं कि हर बार महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का सहारा लिया जाए। रोज की कुछ आसान आदतों और घर में मौजूद सामान्य चीजों की मदद से त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है।

    रूखी त्वचा के लिए एलोवेरा जेल एक आसान विकल्प हो सकता है। एलोवेरा त्वचा को नमी देने और उसे मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसे साफ चेहरे पर थोड़ी मात्रा में लगाया जा सकता है। अगर त्वचा बहुत ज्यादा रूखी है तो नियमित मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल भी जरूरी है। नहाने के बाद या रात में सोने से पहले त्वचा को मॉइश्चराइज करने की आदत त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकती है। घरेलू मॉइश्चराइजर के तौर पर एलोवेरा जेल और नारियल तेल जैसे मिश्रण भी इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन संवेदनशील या मुंहासे वाली त्वचा पर तेल लगाने से पहले सावधानी जरूरी है।

    चेहरे की प्राकृतिक चमक बनाए रखने के लिए खानपान पर भी ध्यान देना जरूरी है। पर्याप्त पानी पीने के साथ फल सब्जियां दालें नट्स और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन को डाइट में शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। विटामिन ए विटामिन ई ओमेगा 3 फैटी एसिड और जिंक जैसे पोषक तत्व त्वचा की सामान्य सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्याप्त नींद और तनाव कम रखना भी स्किन केयर का अहम हिस्सा है।

    अगर त्वचा पर पिंपल्स हैं तो बार बार चेहरा छूने या दाने दबाने से बचना चाहिए। चेहरे को जरूरत से ज्यादा धोना भी त्वचा की प्राकृतिक नमी को नुकसान पहुंचा सकता है। बहुत गर्म पानी और हार्श स्क्रब के इस्तेमाल से भी बचना बेहतर है। इसी तरह नींबू जैसे अम्लीय पदार्थों को सीधे चेहरे पर लगाने से जलन हो सकती है इसलिए ऐसे नुस्खों से सावधानी रखना जरूरी है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि स्किन केयर को किसी एक घरेलू नुस्खे तक सीमित नहीं रखना चाहिए। चेहरे की नियमित सफाई मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल धूप से बचाव संतुलित खानपान पर्याप्त नींद और पानी पीने की अच्छी आदतें लंबे समय में त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं। अगर पिंपल्स दाग खुजली लालिमा या किसी अन्य त्वचा संबंधी समस्या लगातार बनी रहती है तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।