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  • पाकिस्तान के नक्शे में बड़े बदलाव की चर्चा, 12 से 15 प्रांत बनाने की योजना, विवाद बढ़ा

    पाकिस्तान के नक्शे में बड़े बदलाव की चर्चा, 12 से 15 प्रांत बनाने की योजना, विवाद बढ़ा


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में चार बड़े प्रांतों को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटने की चर्चा ने राजनीतिक विवाद बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्टों में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को इस विचार का समर्थक बताया गया है, जबकि पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल भी 12 से 15 नए प्रांत बनाने या 160 सशक्त जिला प्रशासनिक इकाइयां गठित करने का विकल्प सामने रख चुके हैं। हालांकि, इस दिशा में अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं है और प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक सहमति भी नहीं बनी है।

    पाकिस्तान में इस बहस के केंद्र में केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति का बंटवारा भी है। पंजाब और सिंध जैसे प्रभावशाली प्रांतों के छोटे हिस्सों में बंटने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि छोटे प्रशासनिक क्षेत्र बनने से आम लोगों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाना आसान हो सकता है।

    चार प्रांतों की जगह 12 से 15 बनाने का विचार
    पाकिस्तान फिलहाल चार प्रांतों—पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान—में बंटा है। इनकी आबादी, क्षेत्रफल और राजनीतिक प्रभाव में काफी अंतर है। द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के हवाले से आई खबरों में इन प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने की संभावना जताई गई है। एक विकल्प में 12 से 15 नए प्रांत बनाने, जबकि दूसरे में 160 छोटे प्रशासनिक क्षेत्र तैयार करने की बात है।

    योजना मंत्री अहसान इकबाल ने भी सितंबर में प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की जरूरत बताते हुए इन विकल्पों पर राष्ट्रीय और राजनीतिक चर्चा कराने की बात कही थी। उनके मुताबिक, करीब 26 करोड़ की आबादी वाले देश में मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है और प्रांतीय स्तर पर सत्ता के केंद्रीकरण से स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य सेवाओं की डिलीवरी प्रभावित हुई है।

    हालांकि, दोनों विकल्पों में बुनियादी अंतर है। नए प्रांत बनाने से देश की संघीय संरचना और प्रांतीय सीमाओं में बदलाव होगा, जबकि सशक्त जिला प्रशासन की व्यवस्था में मौजूदा प्रांतों को बनाए रखते हुए स्थानीय स्तर पर अधिकार और संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं।

    पंजाब की आबादी, बलूचिस्तान का क्षेत्रफल
    पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क प्रशासनिक असमानता का दिया जा रहा है। पंजाब देश का सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है। वहीं, बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा है, लेकिन उसकी आबादी पंजाब की तुलना में काफी कम है।

    इतने बड़े और विविध क्षेत्रों का प्रशासन चलाना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इस लिहाज से छोटे प्रांतों या सशक्त जिला प्रशासन को सेवाओं की पहुंच बेहतर करने के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

    लेकिन प्रशासनिक सीमाएं बदलना अपने आप में आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं है। नए प्रांत बनाने पर अलग प्रशासनिक ढांचा, सरकारी संस्थान और अन्य व्यवस्थाएं खड़ी करनी पड़ेंगी। इससे खर्च बढ़ सकता है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह सवाल भी अहम है कि सरकार इतने बड़े पुनर्गठन का खर्च कैसे उठाएगी।

    असीम मुनीर की बढ़ती ताकत के बीच क्यों उठे सवाल?
    पाकिस्तान में सेना लंबे समय से राजनीति और शासन व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभाती रही है। ऐसे में प्रांतों के पुनर्गठन की चर्चा को केवल प्रशासनिक सुधार के रूप में नहीं देखा जा रहा। इसके संभावित राजनीतिक नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट पर आधारित विश्लेषणों में आशंका जताई गई है कि बड़े प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने से केंद्र के सामने मौजूद क्षेत्रीय राजनीतिक शक्ति कमजोर हो सकती है। छोटे प्रांतों की सरकारें संसाधनों और प्रशासनिक फैसलों के लिए केंद्र पर अधिक निर्भर हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र और सैन्य प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, यह प्रस्ताव के संभावित राजनीतिक असर का विश्लेषण है, न कि इसके घोषित उद्देश्य का प्रमाण।

    पंजाब और सिंध का बंटवारा सबसे संवेदनशील
    पंजाब और सिंध पाकिस्तान की राजनीति में अहम स्थान रखते हैं। पंजाब को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का मजबूत आधार माना जाता है, जबकि सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का प्रभाव रहा है।

    इन प्रांतों की बड़ी आबादी और चुनावी ताकत उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बनाती है। यदि इनके क्षेत्रीय और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव होता है, तो राजनीतिक दलों के प्रभाव और चुनावी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

    सिंध में इस मुद्दे पर विरोध खुलकर सामने आ चुका है। सितंबर 2026 में सिंध विधानसभा ने प्रांत को बांटने या उसकी क्षेत्रीय सीमाएं बदलने के प्रस्तावों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने भी सिंध की भौगोलिक एकता से समझौता नहीं करने की बात कही। इससे स्पष्ट है कि नए प्रांतों का विचार केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रांतीय पहचान और राजनीतिक अधिकारों से भी जुड़ा है।

    इमरान खान की पार्टी वाले प्रांत में भी तनाव
    पाकिस्तान में प्रांतों के पुनर्गठन की बहस ऐसे समय चल रही है, जब केंद्र और खैबर पख्तूनख्वा की सरकार के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है। यह प्रांत पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के शासन में है।

    इमरान खान जेल में हैं और उनकी पार्टी के समर्थक उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं। इस बीच PTI और केंद्र के बीच टकराव ने संघीय राजनीति को और जटिल बनाया है। खैबर पख्तूनख्वा उग्रवादी हिंसा की समस्या से भी जूझ रहा है।

    ऐसे माहौल में प्रांतीय सीमाओं में बदलाव की किसी भी योजना को राजनीतिक नजरिए से देखा जाना स्वाभाविक है। यदि नए प्रांत बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह तय करना भी चुनौती होगा कि उनकी सीमाएं कैसे तय होंगी और स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा।

    बलूचिस्तान में संसाधन और स्थानीय अधिकार भी मुद्दा
    बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी हिंसा और केंद्र के साथ संसाधनों के बंटवारे को लेकर विवाद रहे हैं। ऐसे में प्रांत का पुनर्गठन जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय राजनीतिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी शासन व्यवस्था, महंगाई, करों और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर असंतोष सामने आता रहा है। इन परिस्थितियों में देश के प्रशासनिक नक्शे में बड़े बदलाव के लिए केवल सरकारी निर्णय पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया, राजनीतिक सहमति और संबंधित क्षेत्रों की चिंताओं पर विचार करना भी जरूरी होगा।

    क्या वास्तव में बदल जाएगा पाकिस्तान का नक्शा?
    फिलहाल नए प्रांतों की चर्चा को अंतिम सरकारी निर्णय मानना जल्दबाजी होगी। पाकिस्तान में इस विषय पर राजनीतिक बहस चल रही है, लेकिन सितंबर में आई रिपोर्टों के मुताबिक, अतिरिक्त प्रांतों या प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर कोई औपचारिक प्रस्ताव संघीय कैबिनेट के सामने नहीं रखा गया था।

    छोटे प्रांतों के समर्थक इसे बेहतर प्रशासन और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का रास्ता मानते हैं। विरोध करने वालों की चिंता प्रांतीय पहचान, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर है। इसलिए पाकिस्तान के सामने असली चुनौती केवल प्रांतों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि यह तय करने की है कि बदलाव से अधिकार और संसाधन आम लोगों तक पहुंचेंगे या केंद्र की शक्ति और मजबूत होगी।

  • MP के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना, 12 अक्टूबर से साफ होगा मौसम

    MP के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना, 12 अक्टूबर से साफ होगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अगले तीन दिन मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहने का अनुमान है। शुक्रवार को रीवा-शहडोल संभाग के 9 जिलों में बारिश का अलर्ट है, जबकि भोपाल-इंदौर समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, 12 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश का दौर थमने और आसमान साफ होने की संभावना है।

    साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के असर से पूर्वी मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से आंधी-बारिश हो रही है। इस बार मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश दर्ज की गई। जून से सितंबर के बीच 908.4 मिमी पानी गिरा, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी है।

    अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मौजूदा मौसम प्रणाली के सक्रिय रहने से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना बनी हुई है। शुक्रवार को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में अगले 24 घंटे के दौरान बारिश हो सकती है।

    10 और 11 अक्टूबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और धूप निकलने की संभावना है। 12 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ हो सकता है। इस दिन कहीं भी बारिश होने का अनुमान नहीं है।

    बदलते मौसम का खेती पर असर

    मौसम में हो रहे बदलाव का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में खेतों को समान रूप से नमी मिलेगी।

    दूसरी ओर, पश्चिमी मध्य प्रदेश में शुष्क मौसम रहने की संभावना को देखते हुए किसानों को बोवनी और सिंचाई से जुड़े फैसले स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लेने होंगे। खेत में मौजूद नमी, मिट्टी की स्थिति और सिंचाई के साधनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ जैसी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बारिश हो रही है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी महीने की शुरुआत में कहीं तेज धूप रही, तो कहीं रात के तापमान में ठंडक महसूस हुई। कई जिलों में बारिश भी दर्ज की गई। प्रदेश में इस बार मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।

    पूर्वी MP में 4% ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश

    इस मानसून सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 12% कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग शामिल हैं।

    हालांकि, पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश हुई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में मानसून सीजन के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    30 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    प्रदेश के बाकी 30 जिलों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    कुल मिलाकर, प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी जिलों में बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि पश्चिमी हिस्से में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने पर दिन में धूप और रात में अपेक्षाकृत ठंडक का असर देखने को मिल सकता है।

  • सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    नई दिल्ली ।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार अगले महीने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े नियमों पर एक परामर्श पत्र जारी करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य एआई के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना और तेजी से बढ़ रहे डीपफेक के खतरे से निपटना होगा। सरकार की ओर से एआई के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा को नियमन का प्रमुख आधार बनाने की बात कही गई है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि वह विभाग से एआई नियमन को लेकर एक चर्चा पत्र तैयार करने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज का प्रमुख फोकस सुरक्षा पर होना चाहिए। उनके मुताबिक, एआई के इस्तेमाल से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा है और इसे गंभीरता से संबोधित करने की जरूरत है। उन्होंने डीपफेक को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इससे समाज में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोग कई बार डीपफेक सामग्री को वास्तविक मान लेते हैं। इससे गलत धारणाएं बन सकती हैं और लोग भ्रामक जानकारी के आधार पर फैसले ले सकते हैं। प्रस्तावित परामर्श पत्र केवल एआई के नियमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कौशल विकास और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर होगा कि एआई तकनीक के विस्तार के दौरान कोई भी पीछे न छूटे।

    वैष्णव ने कहा कि एआई से जुड़े नियामक ढांचे में मानव हित सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीक और नियमन दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा। उन्होंने इसे टेक्नो-लीगल समाधान की जरूरत बताया और कहा कि इस प्रक्रिया में उद्योग, विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

    मंत्री ने एआई से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में उद्योग जगत की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। सरकार पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जिसमें सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई इस्तेमाल के लिए ढांचा दिया गया है। इन दिशा-निर्देशों में भ्रामक सूचना, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात और एआई से होने वाले संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है।

    दिशा-निर्देशों में एआई से जुड़ी कानूनी खामियों की पहचान, जवाबदेही, डेटा संरक्षण, कॉपीराइट, कंटेंट प्रमाणीकरण और जनरेटिव एआई के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की समीक्षा की सिफारिश की गई है। इसके अलावा एआई गवर्नेंस और इकोनॉमिक ग्रुप, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी तथा एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है। सरकार इंडिया एआई मिशन के तहत सेफ एंड ट्रस्टेड एआई पहल पर भी काम कर रही है, जिसमें डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई, एल्गोरिदमिक पक्षपात कम करने और एआई जोखिम मूल्यांकन से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

  • भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत फिसलकर 71,593.24 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,231.80 पर बंद हुआ। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार कमजोरी में रहे।

    कारोबार के दौरान निफ्टी ने 22,179.90 का न्यूनतम स्तर छुआ। यह उसका 52 हफ्तों का निचला स्तर रहा। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,500.10 अंक यानी 2.53 प्रतिशत गिरकर 57,882.50 पर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 456.85 अंक यानी 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,050.10 पर बंद हुआ।

    गुरुवार को लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल में 3.55 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 3.16 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी में 2.82 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी कमोडिटीज 2.81 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 2.79 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.76 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.61 प्रतिशत नीचे रहे। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस में 2.52 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 2.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी पीएसई 2.40 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख शेयरों में आईटीसी, इंडिगो, पावर ग्रिड, बीईएल, एनटीपीसी, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, इटरनल और एचयूएल प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस बढ़त के साथ बंद हुए।

    बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बताई गई। कच्चे तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल बताई गई, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के स्तर पर रहा। इन परिस्थितियों के बीच बाजार के सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। मेटल और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    हालांकि, बाजार में गिरावट के बीच कुछ शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी तिमाही के शुरुआती नतीजों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखी गई। सेन्को गोल्ड का शेयर कारोबार के दौरान 11.9 प्रतिशत तक चढ़ा, हालांकि बाद में बाजार का रुख कमजोर होने से इसकी बढ़त कम हो गई। वहीं पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वेलरी के शेयरों में लगातार चौथे दिन तेजी बनी रही। कंपनी की ओर से इस सप्ताह मजबूत नतीजे जारी किए जाने के बाद उसके शेयरों में यह तेजी देखने को मिली। कुल मिलाकर गुरुवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए तेज गिरावट वाला रहा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गया।

  • भारत के क्रेडिट बाजार का एयूएम जून में 18 प्रतिशत बढ़कर 142 लाख करोड़ रुपए पहुंचा, असुरक्षित ऋणों में भी तेज वृद्धि

    भारत के क्रेडिट बाजार का एयूएम जून में 18 प्रतिशत बढ़कर 142 लाख करोड़ रुपए पहुंचा, असुरक्षित ऋणों में भी तेज वृद्धि


    नई दिल्ली ।भारत के क्रेडिट बाजार में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। जून 2026 तक कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम बढ़कर 142 लाख करोड़ रुपए हो गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 18 प्रतिशत अधिक है। क्रेडिट बाजार की इस वृद्धि के बीच ऋण की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है और जून में नेट 30+ डिलिंक्वेंसी घटकर 3 प्रतिशत रह गई।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कुल लोन सोर्सिंग वैल्यू 20 लाख करोड़ रुपए रही। इसमें सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही की तुलना में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी रही। इसके बावजूद क्रेडिट बाजार में विभिन्न ऋण उत्पादों की मांग बनी रही और कई श्रेणियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    असुरक्षित ऋण इस वृद्धि के प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल रहे। इस श्रेणी में नए ऋण वितरण की मात्रा 26 प्रतिशत बढ़ी। पर्सनल लोन और कंज्यूमर लोन ने असुरक्षित ऋणों की वृद्धि को गति दी। क्रेडिट कार्ड सेगमेंट में भी दोबारा तेजी के संकेत मिले हैं। हालांकि, खुदरा ऋण पोर्टफोलियो के कुल मूल्य में सुरक्षित ऋणों की हिस्सेदारी अभी भी प्रमुख बनी हुई है।

    क्रेडिट गुणवत्ता के स्तर पर जून 2026 में नेट 30+ डिलिंक्वेंसी 3 प्रतिशत रही, जबकि जून 2025 में यह 4.1 प्रतिशत थी। इस गिरावट से ऋण चूक से जुड़े दबाव में कमी का संकेत मिलता है। वहीं, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी की उपभोग आधारित ऋण उत्पादों में स्थिति मजबूत हुई है। पर्सनल लोन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन और दोपहिया वाहन ऋण में उनकी हिस्सेदारी बढ़ रही है।

    बैंकों की स्थिति बड़े टिकट आकार वाले सुरक्षित ऋण उत्पादों में मजबूत बनी हुई है। होम लोन और ऑटो लोन जैसे क्षेत्रों में बैंक प्रमुख भूमिका में हैं। उत्पादवार आंकड़ों के अनुसार, पर्सनल लोन एयूएम 14 प्रतिशत बढ़कर 16.2 लाख करोड़ रुपए हो गया। नए पर्सनल लोन वितरण में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। क्रेडिट कार्ड एयूएम 3.15 लाख करोड़ रुपए रहा, जिसमें 0.1 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज हुई। हालांकि, नए कार्ड जारी होने और उनके उपयोग में सुधार के संकेत मिले हैं।

    कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन एयूएम 37 प्रतिशत बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि टू-व्हीलर लोन एयूएम बढ़कर 1.8 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया। होम लोन एयूएम में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और यह 43.6 लाख करोड़ रुपए रहा। औसत होम लोन टिकट साइज एक साल पहले के 32.2 लाख रुपए से बढ़कर 34.8 लाख रुपए हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट बाजार की वृद्धि, ऋण उत्पादों में मांग और बेहतर एसेट क्वालिटी बाजार के विस्तार की स्थिति को दर्शाती है।

  • MP में खुलेंगे निवेश और रोजगार के नए रास्ते, जबलपुर से उज्जैन तक उद्योगों की नजर, धार में ₹7500 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित

    MP में खुलेंगे निवेश और रोजगार के नए रास्ते, जबलपुर से उज्जैन तक उद्योगों की नजर, धार में ₹7500 करोड़ की परियोजना प्रस्तावित


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार बड़े औद्योगिक समूहों के साथ चर्चा कर रही है। मुंबई में आयोजित मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात कर प्रदेश में नए निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान RPG ग्रुप ने विद्युत पारेषण टायर निर्माण और आईटी क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तलाशने में रुचि दिखाई। वहीं वेलस्पन समूह ने पाइप निर्माण टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश पर चर्चा की। इसके अलावा भिलोसा इंडस्ट्रीज ने धार के पीएम मित्र पार्क में चरणबद्ध तरीके से ₹7500 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव रखा है।

    RPG ग्रुप के अध्यक्ष हर्ष गोयनका के साथ हुई चर्चा में जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश की संभावना पर विशेष रूप से बातचीत हुई। कंपनी ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक सुविधाओं कुशल कार्यबल और भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने में रुचि दिखाई। टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम सागर और जबलपुर जैसे शहरों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कंपनी इन क्षेत्रों में उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद आगे की प्रक्रिया पर निर्णय ले सकती है।

    आईटी क्षेत्र में निवेश के लिए उज्जैन को भी संभावित स्थान के तौर पर देखा जा रहा है। RPG समूह की टीम संभावित स्थलों का दौरा कर सुविधाओं और कारोबारी संभावनाओं का आकलन करेगी। इस दौरान उज्जैन के आईटी बिल्ट अप पार्क में उपलब्ध प्लग एंड प्ले सुविधाओं के इस्तेमाल की संभावना पर भी चर्चा हुई। इससे कंपनी को तैयार बुनियादी ढांचे के जरिए अपनी आईटी गतिविधियां शुरू करने में मदद मिल सकती है।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने वेलस्पन एंटरप्राइजेज के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से मुलाकात की। बैठक में पाइप निर्माण टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचना क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वेलस्पन समूह ने मिल की जमीन पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में रुचि दिखाई है। समूह की ओर से पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। कंपनी अपनी टीम भेजकर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करेगी।

    बैठक में वेलस्पन कॉर्प की एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही सिंटेक्स के करीब ₹700 करोड़ के प्रगतिरत निवेश का उल्लेख किया गया। रायसेन और देवास में समूह की मौजूदगी को देखते हुए पाइप और टेक्सटाइल गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी तलाशी गईं। सड़क निर्माण और जल एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजनाओं में समूह की भागीदारी पर भी बातचीत हुई।

    इसी निवेश संवाद में भिलोसा इंडस्ट्रीज ने धार के पीएम मित्र पार्क में बड़ी परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। कंपनी चरणबद्ध तरीके से करीब ₹7500 करोड़ का निवेश करने की योजना पर काम कर रही है। शुरुआती चरण में ₹2500 करोड़ का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। परियोजना के लिए 200 एकड़ जमीन टेक्सटाइल निर्माण और 100 एकड़ जमीन सहायक इकाइयों के लिए प्रस्तावित है। उत्पादन वर्ष 2028 से शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है।

    प्रस्तावित परियोजना में पॉलिएस्टर यार्न फाइबर निटेड फैब्रिक और मैन मेड फाइबर आधारित नॉन गारमेंट फैब्रिक का उत्पादन किया जाएगा। इससे धार और इंदौर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। प्रस्ताव के अनुसार परियोजना से करीब 3750 प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

    इन निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने और एकल खिड़की व्यवस्था के जरिए अनुमतियों को आसान बनाने की बात कही है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं तो मध्यप्रदेश में ऊर्जा टेक्सटाइल आईटी पाइप और अधोसंरचना जैसे कई क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो सकता है।

  • चंबल के बीहड़ों में शूट हुई नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म शक्ति शालिनी, ग्वालियर-दतिया-मुरैना में फिल्माए गए सीन

    चंबल के बीहड़ों में शूट हुई नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म शक्ति शालिनी, ग्वालियर-दतिया-मुरैना में फिल्माए गए सीन


    मध्य प्रदेश : बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनकी आखिरी फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ है, जिसकी शूटिंग मध्य प्रदेश के ग्वालियर, दतिया और मुरैना में की गई थी। फिल्म में नाना पाटेकर तांत्रिक की भूमिका निभाने वाले हैं। यह फिल्म वर्ष 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। नाना पाटेकर ने निधन से पहले फिल्म से जुड़े अपने हिस्से की शूटिंग पूरी कर ली थी।

    नाना पाटेकर का मध्य प्रदेश से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। अपने करीब पांच दशक के फिल्मी करियर के दौरान उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कई फिल्मों की शूटिंग की। इनमें ‘राजनीति’, ‘तरकीब’ और ‘थोड़ा सा रूमानी हो जाएं’ जैसी फिल्में शामिल हैं। अंतिम समय तक वह ‘शक्ति शालिनी’ पर काम कर रहे थे और फिल्म के लिए मध्य प्रदेश भी पहुंचे थे। मई 2026 में उन्होंने ग्वालियर और दतिया में फिल्म के कई दृश्यों की शूटिंग की थी।

    ‘शक्ति शालिनी’ मैडॉक हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा है। फिल्म में नाना पाटेकर के अलावा अभिनेत्री अनीत पड्डा और अभिनेता विनीत कुमार सिंह भी नजर आएंगे। नाना ने इन कलाकारों के साथ फिल्म के कई सीन शूट किए थे। फिल्म की कहानी में चंबल के डाकुओं और बीहड़ों से जुड़ा एंगल भी बताया जा रहा है। इसी वजह से ग्वालियर और दतिया के इलाकों को शूटिंग के लिए चुना गया था।

    फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग मुरैना में भी हुई। दतिया के करण सागर इलाके में शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों ने नाना पाटेकर को देखा था। फिल्म में उनके किरदार को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन बताया गया है कि वह तांत्रिक की भूमिका निभाएंगे। फिल्म की रिलीज की बात करें तो ‘शक्ति शालिनी’ वर्ष 2027 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।

    मध्य प्रदेश में नाना पाटेकर की फिल्मों का जुड़ाव इससे पहले भी रहा है। वर्ष 2010 में रिलीज हुई फिल्म ‘राजनीति’ की शूटिंग के लिए वह भोपाल आए थे और कुछ दिन राजधानी में बिताए थे। इस फिल्म में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उनकी फिल्म ‘थोड़ा सा रूमानी हो जाएं’ की शूटिंग भी मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में हुई थी। यह फिल्म वर्ष 1990 में रिलीज हुई थी।

    वर्ष 2000 में आई क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘तरकीब’ की शूटिंग भी पचमढ़ी में की गई थी। पचमढ़ी वर्तमान में नर्मदापुरम जिले में स्थित है, जबकि पहले इस जिले का नाम होशंगाबाद था। इस तरह नाना पाटेकर का मध्य प्रदेश से जुड़ाव भोपाल से लेकर पचमढ़ी और चंबल क्षेत्र तक रहा है। अब उनकी आखिरी बताई जा रही फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ में ग्वालियर, दतिया और मुरैना के इलाके भी बड़े पर्दे पर दिखाई दे सकते हैं।

  • Nobel Prize 2026 में Anne Carson के नाम बड़ी उपलब्धि, ग्रीक-रोमन साहित्य को आधुनिक नजरिए से पेश करने के लिए मिला नोबेल

    Nobel Prize 2026 में Anne Carson के नाम बड़ी उपलब्धि, ग्रीक-रोमन साहित्य को आधुनिक नजरिए से पेश करने के लिए मिला नोबेल


    नई दिल्ली। कनाडा की चर्चित लेखिका Anne Carson को 2026 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। साहित्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाली Carson को यह सम्मान उनकी उन रचनाओं के लिए मिला है जिनमें प्राचीन ग्रीक और रोमन साहित्यिक परंपराओं को आधुनिक दुनिया के संदर्भ में नए अंदाज से प्रस्तुत किया गया है। उनकी लेखन शैली में कविता और गद्य के साथ प्राचीन साहित्य की गहरी समझ का अनोखा मेल दिखाई देता है। उनकी रचनाओं ने पुराने साहित्यिक विचारों को समकालीन पाठकों तक नए रूप में पहुंचाने का काम किया है।

    Anne Carson की साहित्यिक पहचान केवल कविता तक सीमित नहीं है। उन्होंने कविता गद्य अनुवाद और प्राचीन साहित्य से जुड़े विषयों पर लंबे समय तक काम किया है। उनकी रचनाओं में इतिहास और मिथक के साथ आधुनिक जीवन के अनुभवों को जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है। इसी विशेष शैली ने उन्हें साहित्य की दुनिया में अलग स्थान दिलाया। उनकी चर्चित किताब The Beauty of the Husband को भी उनके महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यों में गिना जाता है।

    साहित्य का नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मानों में शामिल है। हर वर्ष Swedish Academy की ओर से साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लेखक का चयन किया जाता है। पुरस्कार के तहत विजेता को मेडल और डिप्लोमा के साथ पुरस्कार राशि दी जाती है। इस वर्ष पुरस्कार राशि करीब 1.2 करोड़ Swedish Krona बताई गई है जो भारतीय मुद्रा में लगभग 11.5 करोड़ रुपए के आसपास होती है।

    सभी नोबेल पुरस्कार विजेताओं को दिसंबर में Stockholm Sweden में आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस दौरान विजेताओं को आधिकारिक रूप से मेडल और डिप्लोमा प्रदान किया जाता है। पुरस्कार समारोह नोबेल पुरस्कार की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और दुनिया भर की नजरें इस आयोजन पर रहती हैं।

    साहित्य के नोबेल में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार चर्चा का विषय रही है। पिछले दस वर्षों में साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाले दस लेखकों में चार महिलाएं शामिल हैं। इनमें 2024 की नोबेल विजेता Han Kang का नाम भी शामिल है। दक्षिण कोरिया की Han Kang ने अपनी रचनाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय साहित्य जगत में खास पहचान बनाई है।

    साहित्य का नोबेल विजेता चुनने की प्रक्रिया भी काफी लंबी और गोपनीय होती है। Swedish Academy हर वर्ष संभावित उम्मीदवारों के नाम आमंत्रित करती है। अकादमी के सदस्य साहित्य और भाषा के प्रोफेसर पूर्व नोबेल विजेता और लेखक संगठनों से जुड़े प्रमुख लोग नामांकन भेज सकते हैं। लेखक स्वयं को नामांकित नहीं कर सकते।

    नामांकन के बाद Swedish Academy की प्रक्रिया कई चरणों में आगे बढ़ती है। शुरुआती दौर में बड़ी संख्या में नामों में से लगभग 15 से 20 नामों की सूची तैयार की जाती है। इसके बाद मई तक संभावित उम्मीदवारों की संख्या घटाकर पांच तक कर दी जाती है। अंतिम चरण में Swedish Academy के 18 सदस्य मतदान के जरिए विजेता का चयन करते हैं।

    इस पुरस्कार से जुड़े नामांकन की जानकारी लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं की जाती। नोबेल के नियमों के अनुसार नामांकन से जुड़ी जानकारी 50 वर्षों तक गोपनीय रहती है। इसका मतलब है कि 2026 के साहित्य नोबेल के लिए नामांकित लेखकों की पूरी जानकारी सार्वजनिक होने में अभी कई दशक लगेंगे।

    नोबेल के रिकॉर्ड में कई भारतीय साहित्यकारों के नाम भी नामांकन से जुड़े रहे हैं। Sarvepalli Radhakrishnan Sri Aurobindo Tarashankar Bandyopadhyay और R K Narayan जैसे भारतीय लेखकों को अलग अलग वर्षों में साहित्य के नोबेल के लिए नामांकित किया गया था। Anne Carson को मिला 2026 का सम्मान एक बार फिर यह दिखाता है कि साहित्य की सीमाएं भाषा और समय से आगे जाकर पुरानी परंपराओं को नए संदर्भों में जीवित रख सकती हैं।

  • सड़क निर्माण से ऊर्जा क्षेत्र तक पहुंचा दिलीप बिल्डकॉन, 3 साल में ₹15 हजार करोड़ निवेश की तैयारी, MP में 2 गीगावाट सोलर प्रोजेक्ट

    सड़क निर्माण से ऊर्जा क्षेत्र तक पहुंचा दिलीप बिल्डकॉन, 3 साल में ₹15 हजार करोड़ निवेश की तैयारी, MP में 2 गीगावाट सोलर प्रोजेक्ट


    भोपाल । भोपाल स्थित इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड अब सड़क निर्माण के अपने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़ते हुए ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा विस्तार करने की तैयारी में है। कंपनी ने अगले दो से तीन वर्षों के दौरान करीब ₹15 हजार करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। इस निवेश के जरिए कंपनी अक्षय ऊर्जा पावर ट्रांसमिशन और तेल एवं गैस पाइपलाइन जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करेगी। कंपनी की यह रणनीति उसके कारोबार के विस्तार के साथ देश के बढ़ते ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    दिलीप बिल्डकॉन की नई योजना में तीन प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इनमें अक्षय ऊर्जा पावर ट्रांसमिशन और तेल एवं गैस पाइपलाइन प्रमुख हैं। कंपनी अब तक सड़क निर्माण और जल सिंचाई जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सक्रिय रही है। ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश के बाद कंपनी के कारोबार का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है। कंपनी के अनुसार प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं से अनुमानित ₹68 हजार करोड़ का लाइफटाइम रेवेन्यू मिलने की संभावना है।

    इस विस्तार में मध्य प्रदेश की भूमिका भी काफी अहम रहने वाली है। कंपनी करीब ₹15 हजार करोड़ के कुल प्रस्तावित निवेश में से लगभग ₹6572 करोड़ मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर खर्च करने की तैयारी में है। राज्य में दो सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित किए जाने की योजना है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 2 गीगावाट बताई गई है। इन परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कंपनी का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। सौर ऊर्जा के विस्तार से गांवों तक बिजली की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा किसानों को दिन के समय भरोसेमंद सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने और पेयजल आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं को स्वच्छ ऊर्जा से सहयोग देने की दिशा में भी इन परियोजनाओं की भूमिका हो सकती है।

    दिलीप बिल्डकॉन की शुरुआत भोपाल से हुई थी और मध्य प्रदेश लंबे समय से कंपनी के कारोबार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। सड़क निर्माण के क्षेत्र में कंपनी ने राज्य के अलग अलग हिस्सों में कई परियोजनाओं पर काम किया है। अब कंपनी ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इससे मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    कंपनी का अगला चरण केवल सौर ऊर्जा परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क और तेल एवं गैस पाइपलाइन के क्षेत्र में भी निवेश की योजना बनाई गई है। ऊर्जा उत्पादन के साथ बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले ट्रांसमिशन नेटवर्क और ईंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में कंपनी की भागीदारी बढ़ सकती है।

    इस तरह दिलीप बिल्डकॉन अब सड़क निर्माण से आगे बढ़कर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर कदम बढ़ा रही है। अगले दो से तीन वर्षों में प्रस्तावित ₹15 हजार करोड़ का निवेश कंपनी के कारोबार के लिए नया विस्तार चरण साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रस्तावित बड़ा निवेश राज्य के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके वर्षों पुराने एक बयान की चर्चा भी हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को लेकर अपनी इच्छा के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता है कि एक दिन उन्हें दुनिया से जाना है और उनके अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पर्याप्त होगी। अभिनेता ने इसे अपनी आखिरी संपत्ति तक बताया था।

    नाना पाटेकर ने सितंबर 2023 में एक इंटरव्यू के दौरान मौत और अंतिम संस्कार को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह मौत में विश्वास रखते हैं और जानते हैं कि एक दिन उन्हें जाना ही होगा। अपने अंतिम संस्कार के बारे में उन्होंने बेहद साधारण अंदाज में कहा था कि उन्हें 12 मन लकड़ी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा था कि यही उनकी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’ है और इसके साथ ही वह दुनिया से चले जाएंगे। उनके इस बयान से यह स्पष्ट था कि वह जीवन के अंतिम पड़ाव को लेकर व्यावहारिक सोच रखते थे।

    अभिनेता ने यह भी बताया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पहले से ही जमा करके रखी है। उन्होंने खास तौर पर इच्छा जताई थी कि उनके अंतिम संस्कार में सूखी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए। उनका कहना था कि जो लकड़ी उन्होंने जमा कर रखी है, वह सूखी है और उसी से उनका अंतिम संस्कार किया जाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि गीली लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नाना पाटेकर की यह बात उनके सहज और अलग अंदाज को भी दिखाती है, जिसमें उन्होंने गंभीर विषय को भी अपने खास हास्य के साथ सामने रखा था।

    सूखी लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर नाना पाटेकर ने मजाकिया अंदाज में इसकी वजह भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर गीली लकड़ी का इस्तेमाल किया गया तो आंखों में आंसू आ सकते हैं। ऐसे में मरते समय यह गलतफहमी हो सकती है कि लोग उनके लिए रो रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कम से कम मरते समय ऐसी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान में मौत जैसे गंभीर विषय के बीच उनका चिर-परिचित हास्य नजर आया था।

    नाना पाटेकर के आखिरी समय की बात करें तो गुरुवार सुबह गोवा में उनके घर पर अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे नाना पाटेकर ने एक दोस्त से कहा था कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा है और सीने के बाईं ओर दर्द हो रहा है। इसके बाद उनका दोस्त डोना पाउला स्थित घर पहुंचा, जहां उन्हें तकलीफ में पाया गया। इसके बाद केयरटेकर को बुलाया गया और एम्बुलेंस भी बुलाई गई।

    नाना पाटेकर को सुबह करीब 4:20 बजे मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से होने की बात सामने आई है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम किया जाएगा। अभिनेता के निधन के बाद उनके पुराने बयान में कही गई अंतिम संस्कार की इच्छा भी चर्चा में आ गई है।