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  • आसमान से शतरंज की बिसात जैसा दिखता है बार्सिलोना, 45 डिग्री कटे कोनों ने बनाया शहर को खास

    आसमान से शतरंज की बिसात जैसा दिखता है बार्सिलोना, 45 डिग्री कटे कोनों ने बनाया शहर को खास


    नई दिल्ली। दुनिया में कई शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए मशहूर हैं, लेकिन स्पेन का बार्सिलोना अपनी अनोखी शहरी बनावट के कारण आसमान से ही अलग नजर आता है। ऊपर से देखने पर यहां की सड़कें और इमारतें किसी विशाल चेसबोर्ड या कंप्यूटर चिप की तरह दिखाई देती हैं। शहर के अधिकांश ब्लॉक एक जैसे आकार के हैं और उनकी सड़कों का पैटर्न बेहद व्यवस्थित है। खास बात यह है कि इन ब्लॉकों के कोने 90 डिग्री के बजाय 45 डिग्री पर काटे गए हैं।

    इसी डिजाइन को ऑक्टोगोनल ब्लॉक कहा जाता है। इस अनोखी शहरी योजना का श्रेय इंजीनियर इल्डेफॉन्स सेर्डा को जाता है, जिन्होंने 1850 के दशक में इसका खाका तैयार किया था। उस दौर में कारों का इस्तेमाल भी शुरू नहीं हुआ था, लेकिन सेर्डा ने भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए ऐसी योजना बनाई, जिसमें चौराहों पर पर्याप्त खुली जगह और वाहनों के लिए बेहतर दृश्यता मिल सके।

    ट्रैफिक के साथ हवा और रोशनी का भी रखा ध्यान
    45 डिग्री पर कटे कोनों ने चौराहों को अपेक्षाकृत खुला बनाया। इससे हवा के आवागमन में मदद मिली और वाहनों को मोड़ने के लिए बेहतर विजिबिलिटी मिली। यही डिजाइन आज बार्सिलोना की पहचान बन चुका है।

    हालांकि, 19वीं सदी के मध्य में बार्सिलोना की तस्वीर बिल्कुल अलग थी। शहर मध्यकालीन दीवारों के भीतर सीमित था और आबादी का घनत्व बेहद ज्यादा था। संकरी गलियों में धूप और हवा तक ठीक से नहीं पहुंचती थी। गंदगी, प्रदूषण और हैजा जैसी महामारियों ने हालात बेहद खराब कर दिए थे। उस समय आम लोगों की औसत उम्र घटकर करीब 30 से 35 साल रह गई थी।

    इसी स्थिति को देखते हुए शहर की पुरानी दीवारों को गिराने का फैसला लिया गया और नए बार्सिलोना की योजना बनाने की जिम्मेदारी इल्डेफॉन्स सेर्डा को मिली।

    हर वर्ग के लिए हवा, धूप और हरियाली का सपना
    सेर्डा केवल इंजीनियर नहीं, बल्कि समाजवादी विचारक भी थे। उनका मानना था कि शहर में रहने वाले अमीर और गरीब सभी लोगों को ताजी हवा, धूप और हरियाली का समान अधिकार मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने शहर को समान आकार के ब्लॉक्स में बांटने की योजना बनाई।

    उनकी मूल योजना में हर ब्लॉक की केवल दो या तीन दिशाओं में इमारतें बनाने और बीच के हिस्से को सार्वजनिक बगीचे या पार्क के तौर पर खाली रखने का प्रस्ताव था। उनका उद्देश्य था कि घर की खिड़की खोलने पर लोगों को कंक्रीट के बजाय हरियाली दिखाई दे। हालांकि, बाद के वर्षों में व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ इन आंतरिक हिस्सों में भी निर्माण होने लगा।

    सेर्डा ने दिया ढांचा, गौडी ने भरी कलात्मक जान
    बार्सिलोना की पहचान सिर्फ इसकी सड़कों और ब्लॉक्स से नहीं बनी। शहर की वास्तुकला को विशिष्ट बनाने में महान आर्किटेक्ट एंतोनी गौडी की भी बड़ी भूमिका रही। सेर्डा ने शहर को व्यवस्थित और गणितीय स्वरूप दिया, जबकि गौडी ने उसमें कला और प्रकृति का रंग भर दिया।

    गौडी कैटलन मॉडर्निज्म के प्रमुख वास्तुकार थे। वे प्रकृति से बेहद प्रभावित थे और उनकी इमारतों में इसका प्रभाव साफ दिखाई देता है। कासा बात्लो की छत ड्रैगन की रीढ़ जैसी नजर आती है, जबकि कासा मिला की बालकनियां समुद्र की लहरों का आभास देती हैं।

    वहीं, शहर के केंद्र में मौजूद सग्रादा फैमिलिया अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके अंदर के स्तंभ पेड़ों जैसी आकृति देते हैं, जिससे प्रकृति और आध्यात्म का अनोखा मेल दिखाई देता है।

    आज भी पुराने प्लान से तलाश रहा आधुनिक समाधान
    आज बार्सिलोना की आबादी करीब 16.5 लाख है, जबकि पूरे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 55 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। हर साल एक करोड़ से अधिक पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इतनी बड़ी आबादी और पर्यटकों के बीच प्रदूषण और ट्रैफिक शहर के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।

    इन समस्याओं से निपटने के लिए बार्सिलोना प्रशासन सेर्डा की मूल सोच को आधुनिक रूप देकर ‘सुपरब्लॉक्स’ की अवधारणा पर काम कर रहा है। इसमें कई ब्लॉक्स को मिलाकर एक बड़ा सुपरब्लॉक बनाया जाता है और अंदरूनी हिस्सों में वाहनों की आवाजाही सीमित की जाती है।

    गाड़ियों को मुख्य रूप से सुपरब्लॉक की बाहरी सड़कों तक सीमित रखा जाता है, जबकि अंदर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और बच्चों के लिए जगह विकसित की जा रही है। पार्क और कम्युनिटी सेंटर भी बढ़ाए जा रहे हैं। इस मॉडल से शहर में NO2 प्रदूषण का स्तर 25 प्रतिशत तक कम होने का दावा किया गया है।

    पुरानी विरासत के साथ आधुनिकता का मेल
    बार्सिलोना की खासियत यह भी है कि यहां पुराना और नया साथ-साथ दिखाई देता है। ऐतिहासिक गॉथिक क्वार्टर की 14वीं सदी की संकरी गलियों को संरक्षित रखा गया है, वहीं आधुनिक वित्तीय क्षेत्र में टॉरे ग्लोरीज जैसी बुलेट के आकार की कांच की गगनचुंबी इमारतें शहर के आधुनिक स्वरूप को दर्शाती हैं।

    बार्सिलोना की शहरी योजना और वास्तुकला यह संदेश देती है कि शहर केवल इमारतों और सड़कों का समूह नहीं होता। उसकी डिजाइन में इंसानी जीवन, खुली हवा, रोशनी, हरियाली और मानसिक सुकून को भी जगह मिलनी चाहिए। शायद यही वजह है कि बार्सिलोना को जमीन से देखने पर जितना खूबसूरत अनुभव होता है, आसमान से देखने पर उसकी ज्यामितीय बनावट उतनी ही हैरान करती है।

  • 10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत, जानें शिवलिंग पर किन चीजों से अभिषेक करना माना जाता है शुभ

    10 अगस्त को सावन सोमवार के साथ प्रदोष व्रत, जानें शिवलिंग पर किन चीजों से अभिषेक करना माना जाता है शुभ

    नई दिल्ली । सावन का दूसरा सोमवार इस बार 10 अगस्त को पड़ रहा है और इसी दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने से प्रदोष व्रत का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, जबकि प्रदोष काल में शिव पूजा का अपना महत्व बताया गया है। ऐसे में दोनों अवसरों के एक साथ आने से शिवभक्तों के लिए यह दिन खास माना जा रहा है।

    मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन व्रत रखने और भगवान शिव का विधिपूर्वक पूजन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता की अनुभूति हो सकती है। इस दिन शिवलिंग पर अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा भी रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ विशेष सामग्रियों को अलग-अलग ग्रहों से जोड़ा जाता है और उनके माध्यम से ग्रहों की अनुकूलता की कामना की जाती है।

    सबसे सरल और व्यापक रूप से प्रचलित उपाय शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करना है। पूजा के दौरान स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक परंपरा में जलाभिषेक को शांति और शिव आराधना का सहज माध्यम माना गया है।

    चंद्रमा से संबंधित मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन की कामना के लिए दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। सावन सोमवार पर शुद्ध दूध अर्पित करते समय भक्त भगवान शिव से मन की स्थिरता और जीवन में सौम्यता बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं। यह पूरी तरह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित उपाय है।

    गुरु और शुक्र की अनुकूलता की कामना के लिए शहद से अभिषेक करने का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में शहद को मधुरता और शुभता से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इसे वाणी में मधुरता, संबंधों में सौहार्द और पारिवारिक जीवन में सुख की कामना के साथ भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।

    शनि तथा राहु-केतु से जुड़ी बाधाओं की शांति की कामना के लिए काले तिल से अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में काले तिल का संबंध शनि से माना गया है। हालांकि किसी भी ग्रह की स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर उपाय अलग हो सकते हैं।

    सावन में गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक भी धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। इसे सुख, समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति की धार्मिक भावना से जोड़ा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस अभिषेक को पूजा का हिस्सा बना सकते हैं।

    10 अगस्त को प्रदोष काल में पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप, बिल्वपत्र अर्पित करना और दीपदान करना भी शिव आराधना का हिस्सा बनाया जा सकता है। सुबह जलाभिषेक और शाम को प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है।

    हालांकि नवग्रह शांति के लिए एक ही उपाय हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। ज्योतिषीय दृष्टि से किसी विशेष ग्रह से जुड़ी परेशानी के लिए जन्मकुंडली में ग्रह की स्थिति, भाव, राशि, दशा और गोचर को देखकर उपाय तय करने की बात कही जाती है। इसलिए धार्मिक उपायों को श्रद्धा और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार अपनाना अधिक उचित माना जाता है।

  • Aaj Ka Rashifal 9 August 2026: कामिका एकादशी पर इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के योग

    Aaj Ka Rashifal 9 August 2026: कामिका एकादशी पर इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के योग


    नई दिल्ली। रविवार 9 अगस्त 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का संयोग बन रहा है। सुबह एकादशी तिथि के बाद द्वादशी तिथि शुरू होगी। मृगशिरा नक्षत्र दोपहर तक प्रभावी रहेगा और इसके बाद आर्द्रा नक्षत्र का प्रभाव देखने को मिलेगा। चंद्रमा मिथुन राशि में रहेंगे। रविवार होने के कारण सूर्य देव की उपासना के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन कई राशियों को नौकरी कारोबार और आर्थिक मामलों में लाभ के अवसर मिल सकते हैं जबकि कुछ राशियों को खर्च और स्वास्थ्य के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

    मेष राशि के जातकों के लिए दिन मेहनत का सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता रंग लाएगी लेकिन किसी व्यक्ति पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचना होगा। परिवार में किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है इसलिए शांत रहकर बातचीत करें। खर्च बढ़ने से बजट प्रभावित हो सकता है। सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना शुभ रहेगा।

    वृषभ राशि वालों को कामकाज में कुछ अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। जल्दबाजी के बजाय धैर्य से परिस्थितियों को समझना आपके लिए बेहतर रहेगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अधिक मेहनत करनी होगी। खानपान को लेकर लापरवाही न करें। भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    मिथुन राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ेंगे। कारोबारियों को अनावश्यक खर्च से बचना चाहिए। आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सावधानी जरूरी होगी। परिवार और सामाजिक जीवन में संतुलन बनाए रखें। जरूरतमंद व्यक्ति को हरी सब्जियां या फल दान करना शुभ रहेगा।

    कर्क राशि वालों के लिए रविवार का दिन खास साबित हो सकता है। पुराने निवेश से लाभ मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि की खुशखबरी मिल सकती है। संपत्ति या कानूनी मामलों में भी राहत मिलने की संभावना है। जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर रहेंगे। कामिका एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों को काम की व्यस्तता के बीच अपने फैसलों में संतुलन बनाए रखना होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मेहनत का लाभ मिल सकता है। परिवार या रिश्तेदारों की ओर से कोई उपहार मिल सकता है। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ लाभकारी माना जाता है।

    कन्या राशि वालों के लिए काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन स्थितियों में जल्द सुधार के संकेत हैं। कारोबार में सहयोग की कमी महसूस हो सकती है। पारिवारिक जीवन अनुकूल रहेगा और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। मानसिक शांति के लिए आराम और ध्यान पर ध्यान दें। भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना शुभ रहेगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए दिन आर्थिक रूप से अच्छा रह सकता है। वरिष्ठ अधिकारी आपके काम की सराहना कर सकते हैं और कारोबार में नई योजनाएं लाभ दे सकती हैं। दोस्तों के साथ घूमने का कार्यक्रम बन सकता है। सुख सुविधाओं पर खर्च होने की संभावना है। गाय को रोटी और गुड़ खिलाना शुभ माना जाता है।

    वृश्चिक राशि वालों को रविवार को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। निजी और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। किसी भी मामले में जल्द प्रतिक्रिया देने से बचें। स्वास्थ्य और दिनचर्या पर ध्यान दें। संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ मानसिक मजबूती दे सकता है।

    धनु राशि के लिए आर्थिक स्थिति मजबूत रहने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को जिम्मेदारियों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। परिवार से जुड़ी किसी चिंता का समाधान बातचीत के जरिए हो सकता है। मन की उलझनों को दूर करने के लिए धैर्य रखें। मंदिर में पीले फल या चने की दाल का दान करना शुभ रहेगा।

    मकर राशि वालों को कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सतर्क रहने की जरूरत होगी। गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें और बजट देखकर ही खर्च करें। पारिवारिक शांति बनाए रखने का प्रयास करें। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

    कुंभ राशि के जातकों को नए प्रोजेक्ट या प्रस्ताव मिल सकते हैं। टीमवर्क से कार्यक्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल होंगे। निजी जीवन की उलझनों को धैर्य से सुलझाने की कोशिश करें। खानपान पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। पीपल के पेड़ में जल अर्पित करना शुभ रहेगा।

    मीन राशि के लिए रविवार सफलता के नए अवसर लेकर आ सकता है। करियर और कारोबार में विस्तार के संकेत हैं। निवेश से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। जीवनसाथी का सहयोग आपकी परेशानियां कम करेगा। हालांकि स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करना शुभ रहेगा।

  • Independence Day 2026: आजादी का इतिहास जानना है तो इन ऐतिहासिक संग्रहालयों और स्थलों पर जरूर जाएं

    Independence Day 2026: आजादी का इतिहास जानना है तो इन ऐतिहासिक संग्रहालयों और स्थलों पर जरूर जाएं

    नई दिल्ली । 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। देश की स्वतंत्रता के पीछे लंबे समय तक चला संघर्ष, आंदोलनों और अनगिनत लोगों का त्याग जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने परिवार, सुख-सुविधाओं और निजी जीवन की परवाह किए बिना देश के लिए संघर्ष किया। कई लोगों ने जेल की यातनाएं सहीं और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।

    आजादी के इस इतिहास को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय ऐतिहासिक स्थलों और संग्रहालयों में जाकर भी समझा जा सकता है। यहां स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज, चिट्ठियां, वस्तुएं और अन्य ऐतिहासिक सामग्री सुरक्षित रखी गई है। स्वतंत्रता दिवस के आसपास परिवार के साथ इन जगहों की यात्रा बच्चों के लिए भी इतिहास को करीब से समझने का अच्छा अवसर हो सकती है।

    दिल्ली में क्रांति मंदिर स्वतंत्रता आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस तथा आजाद हिंद फौज से जुड़े इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। यहां नेताजी से जुड़ी तस्वीरें, दस्तावेज और विभिन्न ऐतिहासिक सामग्री प्रदर्शित की गई है। कुछ घटनाओं और प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से भी प्रस्तुत किया गया है, जिससे आगंतुकों को उस दौर को समझने में मदद मिलती है।

    दिल्ली की गांधी स्मृति भी स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। महात्मा गांधी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन यहां बिताए थे। परिसर में उनसे जुड़ी तस्वीरें, पत्र और उनके इस्तेमाल की गई वस्तुएं सुरक्षित हैं। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या से जुड़ी स्मृतियों को भी यहां संरक्षित किया गया है।

    अमृतसर का जलियांवाला बाग भी भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जगह है। 13 अप्रैल 1919 को यहां एकत्रित लोगों पर गोलीबारी की गई थी। इस घटना ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन पर गहरा प्रभाव डाला। आज यहां उस घटना से संबंधित जानकारी के साथ शहीद कुआं और दीवारों पर गोलीबारी के निशान देखे जा सकते हैं। यह स्थान उस दौर की कठिन परिस्थितियों और स्वतंत्रता संघर्ष की गंभीरता को समझने का अवसर देता है।

    कोलकाता का नेताजी भवन भी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े इतिहास को जानने के लिए महत्वपूर्ण है। यहां नेताजी की कार, निजी वस्तुएं, चिट्ठियां और आजाद हिंद फौज से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। संग्रहित सामग्री के माध्यम से उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को समझा जा सकता है।

    अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की सेल्युलर जेल को भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। इसे आमतौर पर काला पानी के नाम से भी जाना जाता है। ब्रिटिश शासन के दौरान कई स्वतंत्रता सेनानियों को यहां कैद रखा गया था। जेल की पुरानी कोठरियां आज भी उस दौर की कठिन परिस्थितियों की याद दिलाती हैं।

    सेल्युलर जेल में आयोजित होने वाला लाइट एंड साउंड शो भी यहां के इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को दर्शाता है। इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर इन स्थानों की यात्रा केवल घूमने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम को करीब से समझने का अवसर भी बन सकती है।

  • MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में बूंदाबांदी की संभावना

    MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में बूंदाबांदी की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ऊपर से मानसून ट्रफ गुजर रही है, जिसके चलते रविवार को प्रदेश के तीन जिलों दतिया, रीवा और सीधी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत अन्य जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है।

    मौसम केंद्र के अनुसार, 8 अगस्त से पश्चिमी बंगाल और आसपास के राज्यों में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से लो प्रेशर एरिया बन गया है। इसके आने वाले दिनों में और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

    शनिवार को नरसिंहपुर में सबसे ज्यादा बारिश
    शनिवार को भी प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश हुई। नरसिंहपुर में 3 इंच, श्योपुर में 2.8 इंच और रीवा में 2.2 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा शिवपुरी, सीधी, नर्मदापुरम, बालाघाट, छतरपुर, सागर, गुना, रायसेन, मंडला, ग्वालियर, दतिया, टीकमगढ़, उमरिया, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सतना और शाजापुर समेत कई जिलों में बारिश हुई।

    शिवपुरी में उफान पर नदी-नाले, कई गांवों में घुसा पानी
    शिवपुरी जिले में शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए। पिछोर क्षेत्र में रात 1 से 3 बजे के बीच हुई भारी बारिश से महुअर नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसके चलते खोड़-पिछोर मार्ग बंद हो गया और गुरुकुदवाया समेत कई गांवों में पानी घुस गया। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।

    रविवार को इन जिलों में हल्की बारिश के आसार
    भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश की संभावना है। इनके अलावा दतिया, रीवा और सीधी में ही रविवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

    MP में अब तक 20% कम बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 17.2 इंच बारिश हुई है, जबकि औसत बारिश 21.5 इंच होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब तक 4.3 इंच यानी 20% कम बारिश दर्ज की गई है। क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 23% और पश्चिमी हिस्से में 18% कम बारिश हुई है।

    50 जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे
    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कई जिलों में 5% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया शामिल हैं।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में भी औसत से कम बारिश हुई है।

    सिर्फ 5 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास और खरगोन में ही अब तक औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • नासिक में फिर डोली धरती, 3 दिन में चौथी बार भूकंप के झटके; सिंगरौली में भी कांपी जमीन

    नासिक में फिर डोली धरती, 3 दिन में चौथी बार भूकंप के झटके; सिंगरौली में भी कांपी जमीन


    नासिक।
    महाराष्ट्र के नासिक में शनिवार रात एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। लगातार तीसरे दिन धरती हिलने से इलाके में दहशत का माहौल है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, शनिवार रात करीब 10 बजे आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.3 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 5 किलोमीटर नीचे बताया गया है।

    अचानक धरती हिलने के बाद कई लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक भूकंप के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    तीन दिन में चौथी बार हिली नासिक की धरती

    नासिक में पिछले कुछ दिनों से लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं। शनिवार का भूकंप तीन दिनों के भीतर चौथा झटका था।

    इससे पहले 6 अगस्त को नासिक में तीन बार भूकंप आया था। उस दिन दर्ज किए गए झटकों की तीव्रता क्रमशः 2.8, 3.6 और 2.5 थी। लगातार हो रही हलचल के कारण स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

    रिसर्चर्स के मुताबिक, किसी इलाके में लगातार छोटे भूकंपीय झटके आने के पीछे जमीन के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल एक वजह हो सकती है। हालांकि, इन झटकों से भविष्य में किसी बड़े भूकंप की संभावना का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

    सिंगरौली में भी आया भूकंप

    शनिवार को मध्य प्रदेश के सिंगरौली में भी धरती कांपी। दोपहर 2 बजकर 6 मिनट पर आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 दर्ज की गई।

    नासिक की तरह सिंगरौली में भी अभी तक किसी नुकसान की सूचना नहीं है। एक ही दिन में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस होने के बाद दोनों घटनाओं को लेकर लोगों में चर्चा है। हालांकि, दोनों भूकंपों के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह वैज्ञानिक जांच का विषय है।

    जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप ने मचाई तबाही

    भूकंप के झटकों से सिर्फ भारत ही नहीं, जापान भी प्रभावित हुआ है। 28 जुलाई को जापान के कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। इसके बाद वहां बड़े पैमाने पर नुकसान की खबर सामने आई।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 39 हो गई है, जबकि 6,500 से ज्यादा लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। करीब 205 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 23 की हालत गंभीर बताई गई है।

    भारत में नासिक और सिंगरौली में आए भूकंप अपेक्षाकृत कम तीव्रता के रहे और फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है। फिर भी नासिक में कम समय के भीतर बार-बार आ रहे झटकों ने स्थानीय लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • अमेरिका के 100% टैरिफ बिल पर केजरीवाल का हमला, मोदी सरकार पर ट्रंप के दबाव में फैसले लेने का आरोप

    अमेरिका के 100% टैरिफ बिल पर केजरीवाल का हमला, मोदी सरकार पर ट्रंप के दबाव में फैसले लेने का आरोप

    नई दिल्ली । अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रावधान वाले विधेयक को सीनेट की मंजूरी मिलने के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की विदेश और आर्थिक नीति से जुड़े कई फैसलों पर अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रभाव बढ़ गया है।

    केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने देश को अमेरिका के हाथों गिरवी रखने और ट्रंप के दबाव में काम करने की स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ट्रंप की बातों को सही या गलत की परवाह किए बिना मानते हैं और अमेरिका की ओर से भारत के खिलाफ फैसले लिए जा रहे हैं।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सीनेट ने रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों से जुड़े एक व्यापक विधेयक को भारी बहुमत से पारित किया है। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को सीनेट में 86 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 11 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया।

    विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को आर्थिक रूप से प्रभावित करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों से आने वाले सामान पर अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है।

    भारत और चीन इस प्रावधान के दायरे में आने वाले प्रमुख देश हैं। इसके अलावा रूस से ऊर्जा आयात करने वाले अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि सीनेट से पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। विधेयक को आगे की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा और इसके प्रावधानों के लागू होने की स्थिति अलग प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

    अमेरिका की ओर से इस कदम के पीछे रूस के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े व्यापार पर दबाव बनाने की रणनीति बताई गई है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूस के तेल और गैस की खरीद से मिलने वाली आय उसकी युद्ध क्षमता को बनाए रखने में मदद करती है। ऐसे में रूस के बड़े ऊर्जा खरीदार देशों पर आर्थिक दबाव डालकर मॉस्को की आय को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

    विधेयक में रूस से जुड़े प्रतिबंधों के अलावा ईरान पर लागू प्रतिबंधों की अवधि बढ़ाने का भी प्रावधान शामिल है। ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े मौजूदा प्रावधानों को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

    भारत में इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष केंद्र सरकार की विदेश नीति और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर सवाल उठा रहा है। केजरीवाल ने भी इसी राजनीतिक बहस को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर ट्रंप के प्रति अत्यधिक नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और रूस से भारत के ऊर्जा आयात को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि अमेरिकी विधेयक आगे की प्रक्रिया में किस रूप में आगे बढ़ता है और भारत समेत प्रभावित देशों के लिए संभावित टैरिफ व्यवस्था को लेकर अमेरिका क्या कदम उठाता है।

  • PM Modi पर CEO मुग्धा प्रधान की विवादित टिप्पणी से मचा बवाल, वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं

    PM Modi पर CEO मुग्धा प्रधान की विवादित टिप्पणी से मचा बवाल, वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर हेल्थ और वेलनेस क्षेत्र से जुड़ी कंपनी iThrive की फाउंडर और CEO मुग्धा प्रधान की एक कथित टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। वायरल वीडियो में मुग्धा प्रधान सरकार के कामकाज और देश से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर करती नजर आती हैं। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर उनके द्वारा की गई थप्पड़ मारने वाली टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनके बयान की आलोचना की है और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    वायरल वीडियो में मुग्धा प्रधान महिलाओं और बच्चों के गुस्से को दबाने की मानसिकता पर सवाल उठाती दिखाई देती हैं। वह देश में सार्वजनिक व्यवस्था, गंदगी और पर्यावरण जैसे मुद्दों का भी जिक्र करती हैं। इसी क्रम में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करती हैं। वीडियो के एक हिस्से में वह कहती नजर आती हैं कि यदि उनकी प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात हुई तो वह उन्हें थप्पड़ मारेंगी। इसके साथ ही वह प्रधानमंत्री पद छोड़ने और युवाओं को जिम्मेदारी देने जैसी बातें भी करती दिखाई देती हैं।

    मुग्धा प्रधान की यह टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने उनके शब्दों और प्रधानमंत्री को लेकर की गई टिप्पणी की आलोचना की। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े किसी व्यक्ति को राजनीतिक या नीतिगत असहमति व्यक्त करते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। वहीं कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे मुग्धा प्रधान के व्यक्तिगत विचारों के तौर पर देखने की बात कही। इस पूरे मामले में अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के कारण वीडियो तेजी से चर्चा में आ गया।

    मुग्धा प्रधान हेल्थ और वेलनेस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी iThrive की फाउंडर और CEO के तौर पर जानी जाती हैं। वह फंक्शनल न्यूट्रिशन के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं और स्वास्थ्य तथा पोषण से संबंधित विषयों पर काम करती हैं। कंपनी की प्रोफाइल के अनुसार, उनके पास फूड साइंस और न्यूट्रिशन में मास्टर डिग्री है। वह कॉरपोरेट क्षेत्र में भी काम कर चुकी हैं और सार्वजनिक मंचों पर स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखती रही हैं।

    विवाद बढ़ने के बाद कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में मुग्धा प्रधान की टिप्पणी को उनकी कंपनी iThrive की ब्रांड छवि से जोड़कर भी सवाल उठाए गए। हालांकि, किसी व्यक्ति के निजी राजनीतिक विचारों और उसके व्यावसायिक संस्थान की आधिकारिक स्थिति को अलग-अलग देखना जरूरी है। वायरल वीडियो में कही गई बातों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच कंपनी की व्यावसायिक गतिविधियों और मुग्धा प्रधान के व्यक्तिगत बयानों के बीच अंतर को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

    यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों के राजनीतिक बयानों को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है। किसी भी राजनीतिक नेता के कामकाज पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक विमर्श का हिस्सा हो सकता है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और हिंसा का संकेत देने वाली भाषा को लेकर विवाद की संभावना बढ़ जाती है। मुग्धा प्रधान के वायरल वीडियो ने इसी मुद्दे पर नई बहस को जन्म दिया है। फिलहाल सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है और यह मामला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लगातार चर्चा में बना हुआ है।

  • सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी से की मुलाकात, उत्तर प्रदेश के विकास और राजनीतिक स्थिति पर बातचीत

    सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी से की मुलाकात, उत्तर प्रदेश के विकास और राजनीतिक स्थिति पर बातचीत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत हुई। इस मुलाकात में प्रदेश के विकास कार्यों, प्रशासनिक विषयों और मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश में कई विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दोनों नेताओं की बातचीत में प्रदेश से जुड़े प्रमुख विकास कार्यों की प्रगति और उनसे संबंधित विषयों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बैठक में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समय-समय पर उत्तर प्रदेश से जुड़े विषयों को लेकर बैठकें होती रही हैं। राज्य में केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट, निवेश, रोजगार और विकास कार्यों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति से जुड़े विषयों पर भी बातचीत होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, दोनों नेताओं की बैठक के बाद किसी विशेष राजनीतिक फैसले या चर्चा का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए मुलाकात के राजनीतिक पहलू को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलने उनके आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच भी उत्तर प्रदेश से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात को राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और राष्ट्रीय राजनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य में केंद्र और प्रदेश सरकार के स्तर पर चल रही योजनाओं और विकास परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित समन्वय की जरूरत रहती है। मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री से मुलाकात में ऐसे विषयों पर चर्चा होना इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है।

    प्रदेश में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश, सड़क और परिवहन व्यवस्था, रोजगार तथा विभिन्न केंद्रीय योजनाओं से जुड़े कार्य लगातार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की बैठक के दौरान इन क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की स्थिति और आगे की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाना महत्वपूर्ण है।

    फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के बाद किसी नए निर्णय या घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है। बैठक में उत्तर प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई है। आने वाले दिनों में यदि सरकार या पार्टी की ओर से बैठक के संबंध में विस्तृत जानकारी जारी की जाती है, तो मुलाकात में चर्चा किए गए मुद्दों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप

    बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी जांच का बड़ा खुलासा, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड मीट मिलने से हड़कंप


    नई दिल्ली
    । बेंगलुरु के कई नामी थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा को लेकर हुई जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों की जांच के दौरान कुछ होटलों में फंगस लगी सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध और डेयरी उत्पाद, खराब हालत में रखा चिकन, मटन और मछली तथा नियमों के अनुरूप नहीं रखे गए खाद्य पदार्थ मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 7 अगस्त को चलाए गए इस विशेष निरीक्षण अभियान में शहर के सभी जोन को शामिल किया गया।

    इस अभियान के तहत 30 टीमों ने बेंगलुरु के कुल 26 थ्री-स्टार और फाइव-स्टार होटलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने होटलों की रसोई, खाद्य भंडारण व्यवस्था, लेबलिंग और साफ-सफाई समेत कई मानकों की जांच की। इस दौरान कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में भी नियमों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारियों को कई ऐसे उत्पाद मिले जिनकी निर्धारित उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी थी। कुछ किचन में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

    जांच के दौरान कुछ होटलों में वेज और नॉन-वेज खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने के नियमों का भी पालन नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि कुछ जगहों पर खाद्य पदार्थों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं थी और जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा स्टोरेज में एक्सपायर्ड दूध, डेयरी और बेकरी उत्पाद पाए गए। सब्जियों में फफूंदी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों के अनुचित भंडारण से जुड़ी खामियां भी सामने आईं।

    कार्रवाई के दौरान द ललित अशोक के एनेक्स साउथ परिसर से 76 किलो मीट और 200 किलो सब्जियां जब्त की गईं। इसके अलावा 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध भी जब्त कर नष्ट किया गया। शांग्री-ला बेंगलुरु से 15 किलो मीट और फोर सीजन्स होटल बेंगलुरु से 19 किलो मीट जब्त किया गया। विवांता बैंगलोर व्हाइटफील्ड में तीन किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए, जबकि ताज यशवंतपुर से 72 किलो मीट और मछली जब्त की गई।

    सबसे बड़ी कार्रवाई रेडिसन ब्लू के द एट्रिया परिसर में सामने आई, जहां कुल 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। इनमें 50 किलो चिकन, 23 किलो मीट, 23 किलो मछली और सात किलो सब्जियां शामिल थीं। अधिकारियों ने नियमों के उल्लंघन वाले होटलों को नोटिस भी जारी किए हैं। अब आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर की जाएगी।

    पूरे अभियान के दौरान खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल भी लिए गए हैं। इनमें चाय पाउडर, चिकन, मटन, मछली, खाद्य तेल, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, टोमैटो सॉस, नींबू का रस, चीज, पापड़, काजू, अदरक, काली मिर्च, मसाले और दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल संबंधित होटलों से लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की स्थिति और स्पष्ट होगी तथा उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।