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  • पेंशन शिकायत पर भड़के मंत्री विश्वास सारंग, वार्ड प्रभारी को लगाई फटकार

    पेंशन शिकायत पर भड़के मंत्री विश्वास सारंग, वार्ड प्रभारी को लगाई फटकार


    मध्य प्रदेश । भोपाल में जनसमस्याओं के निराकरण के लिए आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब कुछ महिलाओं ने पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत सीधे खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के सामने रखी। शिकायत सुनते ही मंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित वार्ड प्रभारी को तत्काल तलब कर जवाब मांगा। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    मंत्री विश्वास सारंग के निवास पर प्रतिदिन आयोजित होने वाले जनदर्शन कार्यक्रम में नरेला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-59 स्थित अन्ना नगर की निवासी मंदा सोनवानी, सहला सेनवानी, सुशीला विश्वकर्मा और सोमा सुरेश पहुंचीं। महिलाओं ने मंत्री को बताया कि वे शासन की पेंशन योजनाओं के लिए पात्र हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या के समाधान के लिए पहले भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई।

    महिलाओं की शिकायत सुनने के बाद मंत्री सारंग ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। प्रारंभिक जानकारी मिलने पर उन्होंने वार्ड क्रमांक-59 के प्रभारी रमीजुद्दीन को मौके पर बुलाने के निर्देश दिए। कुछ ही देर में वार्ड प्रभारी के पहुंचने पर मंत्री ने उनसे पेंशन प्रकरणों में हुई देरी और लापरवाही के संबंध में जवाब तलब किया।

    मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक समय पर लाभ पहुंचाना है। यदि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमी मानी जाएगी। उन्होंने वार्ड प्रभारी को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों की तत्काल समीक्षा कर पात्र लोगों को पेंशन का लाभ दिलाया जाए।

    जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चेतावनी दी कि आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसलिए सभी विभागीय अधिकारियों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

    मंत्री सारंग ने यह भी कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके। ऐसे कार्यक्रमों में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं और प्रत्येक पात्र हितग्राही को समय पर योजना का लाभ मिले।

    इस घटनाक्रम के बाद संबंधित अधिकारियों ने लंबित पेंशन प्रकरणों की जांच और निराकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रभावित महिलाओं सहित अन्य पात्र हितग्राहियों को भी पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा। मंत्री की सख्ती को प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी

    ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी


    मध्य प्रदेश । भोपाल में चर्चित एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत अब 30 जून तक बढ़ा दी गई है। मंगलवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष अपनी ओर से कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि जेल में उपलब्ध कराए जा रहे हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से जुड़ी खबरों को काटकर अलग कर दिया जाता है। ऐसे में उन्हें पूरी सामग्री पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार उपलब्ध कराया जाए।

    इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने वकीलों से मिलने के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय-सीमा को समाप्त करने की मांग भी की। उनका कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए कानूनी सलाह और रणनीति पर चर्चा के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक ही समय पर अपने वकीलों से मिलने की अनुमति दी जाए, ताकि बचाव पक्ष की रणनीति बेहतर ढंग से तैयार की जा सके। हालांकि अदालत ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया।

    सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत को बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी के अनुसार कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया जाना है, परिजनों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जाने हैं तथा मोबाइल फोन और लैपटॉप की डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी प्रक्रिया में है। इसी आधार पर सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

    गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से अदालत में कुछ अन्य आवेदन भी प्रस्तुत किए गए। इनमें ट्विशा के बैंक खाते, कथित सात लाख रुपए के खर्च, मोबाइल टावर लोकेशन और कार की चाबी से संबंधित जांच की मांग शामिल थी। अदालत ने इन बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है।

    मीडिया ट्रायल का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से उठा। गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा के परिजन और रिश्तेदार मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि परिजनों को सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। साथ ही जांच के दौरान जब्त की गई दवाइयों के जब्ती पंचनामा की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। अदालत ने सीबीआई को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    दूसरी ओर, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर उठाए गए सवाल भी चर्चा में हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लीगल एड वकील आरोपी पक्ष के साथ जुड़े दिखाई दिए, जबकि उनकी नियुक्ति गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस संबंध में उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और उच्च न्यायालय को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

  • झारखंड राज्यसभा चुनाव में '61' का नया सियासी सस्पेंस, क्या एनडीए खेमे में सेंधमारी कर पाएगा सत्तारूढ़ महागठबंधन

    झारखंड राज्यसभा चुनाव में '61' का नया सियासी सस्पेंस, क्या एनडीए खेमे में सेंधमारी कर पाएगा सत्तारूढ़ महागठबंधन

    नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासत में भारी गरमाहट पैदा कर दी है। चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दोनों ही खेमों के बीच शह और मात का खेल दिलचस्प होता जा रहा है। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ महागठबंधन अपने दोनों प्रत्याशियों की जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा है, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए भी अपनी रणनीति को धार देने में जुटा हुआ है। इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक नए नारे ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है और राज्य में बड़े सियासी उलटफेर के संकेत दे दिए हैं।

    सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए ’56 नहीं, 61′ के नारे ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से रहस्यमयी बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावी संदेश के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। वर्तमान संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल छप्पन विधायक मौजूद हैं, जो दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त हैं। ऐसे में महासचिव के इस दावे के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि महागठबंधन विपक्ष के कुछ विधायकों को अपने पाले में लाने में सफल हो चुका है।

    संख्या बल के वास्तविक समीकरणों पर नजर डालें तो इक्यासी सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास वर्तमान में कुल छप्पन विधायकों का मजबूत समर्थन हासिल है। इस कुनबे में झारखंड मुक्ति मोर्चा के चौंतीस, कांग्रेस के सोलह, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआई एमएल के दो विधायक शामिल हैं। दूसरी तरफ, एनडीए गठबंधन के पाले में कुल चौबीस विधायक हैं, जबकि एक विधायक निर्दलीय चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे हैं। नियम के अनुसार, एक राज्यसभा सीट पर सीधे तौर पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी प्रत्याशी को कम से कम अट्ठाईस प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है।

    गणित के इस खेल में महागठबंधन को अपनी दोनों सीटों पर प्रणव झा और वैद्यनाथ राम को सुरक्षित रूप से राज्यसभा भेजने के लिए कुल छप्पन वोटों की जरूरत है, जो उनके पास पहले से ही उपलब्ध हैं। वहीं, एनडीए द्वारा समर्थित प्रत्याशी परिमल नथवानी की राह थोड़ी मुश्किल नजर आ रही है। एनडीए के पास अपने केवल चौबीस वोट हैं और उन्हें जीत की दहलीज पार करने के लिए चार और अतिरिक्त मतों की दरकार है। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि एनडीए विपक्षी खेमे के असंतुष्ट विधायकों में सेंध लगाकर यह जादुई आंकड़ा हासिल कर सकता है, लेकिन जेएमएम के नए नारे ने पासा पलट दिया है।

    अब चर्चा इस बात की है कि महागठबंधन खुद एनडीए के पांच विधायकों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए तैयार कर चुका है, जिससे उनका आंकड़ा छप्पन से बढ़कर इकसठ तक पहुंच सकता है। इस संभावित क्रॉस वोटिंग के डर ने दोनों ही खेमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राज्य में रिसॉर्ट और होटल पॉलिटिक्स एक बार फिर सक्रिय हो गई है, जहां विधायकों को एकजुट रखने के लिए गुप्त रणनीतियां बनाई जा रही हैं और मॉक पोल के जरिए मतदान का अभ्यास कराया जा रहा है। मतदान की प्रक्रिया सुबह से शुरू होकर शाम तक चलेगी, जिसके तुरंत बाद आने वाले परिणाम ही इस नए नारे के वास्तविक सच और झारखंड की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

  • स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी

    स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी


    मध्य प्रदेश । भरोसेमंद और तेज डिलीवरी के लिए जानी जाने वाली स्पीड पोस्ट सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भोपाल में एक पार्सल की डिलीवरी में हुई देरी ने न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।

    मामला भोपाल निवासी ज्योति शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने 12 जनवरी 2026 को अरेरा हिल्स उप डाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पार्सल भेजा था। इस पार्सल में धार्मिक महत्व की पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता, शुद्ध घी से बनी मिठाइयां और कुछ कपड़े रखे गए थे। पार्सल को सुरक्षित और शीघ्र पहुंचाने के लिए उन्होंने 1228 रुपए का शुल्क भी जमा किया था। स्पीड पोस्ट सेवा का चयन इस विश्वास के साथ किया गया था कि पार्सल तय समय सीमा के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा।

    दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन ज्योति शर्मा द्वारा भेजा गया एक अन्य स्पीड पोस्ट पार्सल मात्र तीन दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंच गया। लेकिन दूसरा पार्सल सात दिन बाद, यानी 19 जनवरी को पहुंचा। एक ही दिन और एक ही सेवा के तहत भेजे गए दो पार्सलों की डिलीवरी अवधि में इतना बड़ा अंतर उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पार्सल को किसी दूरस्थ क्षेत्र में नहीं बल्कि अपेक्षाकृत नजदीकी स्थान पर भेजा गया था, जहां सामान्य परिस्थितियों में स्पीड पोस्ट दो से तीन दिन के भीतर पहुंच जाती है। ऐसे में सात दिन की देरी को सामान्य नहीं माना जा सकता था। आयोग ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि डाक विभाग देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया।

    जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच क्रमांक-1, जिसमें अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय शामिल थे, ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब कोई उपभोक्ता अतिरिक्त शुल्क देकर प्रीमियम सेवा लेता है तो समयबद्ध सेवा प्रदान करना विभाग की जिम्मेदारी बन जाती है। केवल यह कह देना कि पार्सल अंततः डिलीवर हो गया, विभाग को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता।

    आयोग ने अपने आदेश में कहा कि समय पर डिलीवरी न होना और उसके पीछे उचित कारण न बता पाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर डाक विभाग को उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। कुल 8 हजार रुपए की यह राशि दो माह के भीतर भुगतान करनी होगी। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो विभाग को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा।

    यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो समयबद्ध सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि सेवा प्रदाताओं को अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करना होगा और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेह भी बनना पड़ेगा।

  • भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

    भोपाल फिर बनेगा निवेश का केंद्र, जनवरी में हो सकती है दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों का स्वागत करने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार अगले वर्ष जनवरी में दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) आयोजित करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। उद्योग विभाग और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) ने आयोजन की प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि यह समिट न केवल निवेश आकर्षित करने का बड़ा मंच बनेगी, बल्कि प्रदेश की औद्योगिक छवि को और मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    फरवरी 2025 में आयोजित पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को बड़ी सफलता मिली थी। दो दिवसीय इस आयोजन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और इसमें देश-विदेश के प्रमुख उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान मध्य प्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। अब सरकार को उम्मीद है कि दूसरी जीआईएस में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है तथा प्रदेश नए निवेश रिकॉर्ड बना सकता है।

    सूत्रों के अनुसार आगामी समिट के लिए कई संभावित स्थलों का निरीक्षण किया जा चुका है। इनमें लाल परेड ग्राउंड, नीलबड़-रातीबड़ क्षेत्र में ज्यूडिशियल एकेडमी के आसपास की जमीन तथा राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का परिसर शामिल है। अंतिम निर्णय इस आधार पर लिया जाएगा कि आयोजन में कितने निवेशक, उद्योगपति और विदेशी प्रतिनिधि भाग लेने वाले हैं। पिछली बार मानव संग्रहालय परिसर में हुए आयोजन को भव्य रूप दिया गया था और पूरे शहर को विशेष रूप से सजाया गया था।

    सरकार इस बार केवल भव्यता पर ही नहीं, बल्कि आयोजन की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पिछली समिट के दौरान सामने आई तकनीकी खामियों और ध्वनि संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में अधिकारियों ने इन मुद्दों की समीक्षा की और बेहतर व्यवस्थाओं के निर्देश दिए।

    निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में कोलार रोड स्थित सतगढ़ी क्षेत्र में 172 एकड़ भूमि पर मल्टी-प्रोडक्ट औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना है। सरकार का मानना है कि ऐसे औद्योगिक क्लस्टर निवेशकों को आकर्षित करने में मददगार साबित होंगे।

    हालांकि पिछली जीआईएस के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्य विवादों में भी रहे। फाउंटेन और अन्य सजावटी कार्यों पर हुए खर्च को लेकर जांच हुई और कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए। लोकायुक्त तक पहुंची शिकायतों के बाद जांच में रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई थी। ऐसे में इस बार सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही पर अधिक जोर देती दिखाई दे रही है।

    कुल मिलाकर दूसरी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट मध्य प्रदेश के लिए निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए अवसर लेकर आ सकती है। यदि सरकार पिछली कमियों को दूर कर बेहतर आयोजन करने में सफल रहती है तो भोपाल एक बार फिर देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा सकता है।

  • बांग्लादेश में राम प्रतिमा को लेकर विवाद: धमकियों के बाद मंदिर समिति ने रोका निर्माण कार्य

    बांग्लादेश में राम प्रतिमा को लेकर विवाद: धमकियों के बाद मंदिर समिति ने रोका निर्माण कार्य


    नई दिल्ली-] बांग्लादेश । बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से जुड़े एक धार्मिक स्थल पर भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। रंगपुर संभाग के पलाशबाड़ी क्षेत्र में एक मंदिर परिसर में बन रही प्रतिमा को लेकर बढ़ते विरोध और कथित धमकियों के बाद मंदिर समिति ने निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और साम्प्रदायिक सौहार्द को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

    मंदिर समिति के अनुसार, प्रतिमा निर्माण को लेकर कुछ कट्टरपंथी तत्वों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया था। स्थिति तब अधिक संवेदनशील हो गई जब एक स्थानीय उपदेशक द्वारा कथित रूप से सार्वजनिक मंच से निर्माणाधीन प्रतिमा को हटाने और उसे ध्वस्त करने संबंधी बयान दिए गए। इन बयानों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जाने लगी और स्थानीय लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया।

    स्थिति को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने विवाद को और बढ़ने से रोकने तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से निर्माण कार्य रोकने का निर्णय लिया। समिति के एक सदस्य ने कहा कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि शांति और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि परिस्थितियां अनुकूल होती हैं और स्थानीय समुदायों के बीच सहमति बनती है तो निर्माण कार्य फिर से शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।

    मंदिर समिति ने अपने बयान में कहा कि समाज और देश के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल प्रतिमा निर्माण को स्थगित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी निर्णय से पहले स्थानीय नागरिकों, धार्मिक नेताओं और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    रिपोर्टों के अनुसार, विवाद के दौरान कुछ भड़काऊ बयान भी सामने आए, जिनसे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि किसी बड़े हिंसक टकराव की सूचना नहीं मिली है, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

    बांग्लादेश में हाल के वर्षों में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े कई मुद्दे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हैं। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों और आस्था से जुड़े मामलों को संवाद और कानून के दायरे में रहकर सुलझाया जाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन की त्वरित और निष्पक्ष भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि समय रहते संवाद स्थापित किया जाए और कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ने से रोका जा सकता है। फिलहाल पलाशबाड़ी में स्थिति शांत बताई जा रही है, लेकिन प्रतिमा निर्माण को लेकर आगे क्या फैसला होगा, इस पर स्थानीय लोगों और धार्मिक समुदायों की नजर बनी हुई है।

  • क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल

    क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा 'सुपर वेडनेसडे': एक ही दिन में खेले जाएंगे 7 महामुकाबले, 16 घंटे तक मचेगा बल्लेबाजों का धमाल


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक क्रिकेट के इतिहास में आज का दिन यानी 17 जून खेल प्रेमियों के लिए किसी ऐतिहासिक उत्सव या बड़ी दावत से कम नहीं होने वाला है। आज दुनिया के अलग-अलग कोनों और मैदानों पर एक या दो नहीं, बल्कि कुल 7 बड़े क्रिकेट मुकाबले खेले जाने का एक अनोखा संयोग बना है।
    इन 7 मैचों में से 6 मुकाबले सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) स्तर के हैं, जबकि एक मैच ‘लिस्ट ए’ क्रिकेट का हिस्सा है। इस खेल महाकुंभ की सबसे खास और गौरवशाली बात यह है कि आज अकेले भारत की तीन अलग-अलग राष्ट्रीय टीमें तीन अलग-अलग देशों में अपनी चुनौती पेश करने के लिए मैदान पर उतर रही हैं। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से शुरू होने वाला यह दे-दनादन क्रिकेट का सिलसिला देर रात या यूं कहें कि अगले दिन 18 जून की भोर में 3 बजे तक लगातार जारी रहेगा, जिससे प्रशंसकों को करीब 16 घंटे तक नॉन-स्टॉप रोमांच देखने को मिलेगा।

    भारतीय टीमों के इस त्रिकोणीय अभियान की बात करें तो आज इंडिया ए, मुख्य पुरुष टीम इंडिया और भारतीय महिला क्रिकेट टीम तीनों एक्शन में दिखाई देंगी। सबसे पहले सुबह 10 बजे श्रीलंका की धरती पर खेली जा रही ट्राई-नेशन वनडे सीरीज में इंडिया ए की भिड़ंत अफगानिस्तान ए से होने जा रही है।

    इसके ठीक बाद, दोपहर 1:30 बजे मुख्य भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम लखनऊ के इकाना स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के दूसरे बेहद महत्वपूर्ण वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में जीत के इरादे से उतरेगी। वहीं, शाम के समय महिला क्रिकेट का रोमांच चरम पर होगा, जब हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम शाम 7:00 बजे आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 के एक बेहद अहम मुकाबले में नीदरलैंड की टीम का सामना करेगी।

    भारत के अलावा आज के इस महाशेड्यूल में बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की टीमों का भी जबरदस्त दबदबा देखने को मिलने वाला है। आज इन दोनों देशों की भी दो-दो टीमें मैदान पर एक-दूसरे से लोहा लेंगी। दोपहर 1:30 बजे बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा। इसके ठीक बाद, दोपहर 3:00 बजे महिला टी20 विश्व कप के अंतर्गत बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी, जो दोनों देशों के प्रशंसकों के लिए बेहद दिलचस्प होने वाला है।

    फुटबॉल जैसी गति के साथ टी20 और वनडे के इस रोमांच के बीच पारंपरिक और क्लासिक टेस्ट क्रिकेट के प्रेमियों के लिए भी आज का दिन बेहद खास है। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की मजबूत टीमों के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला भी आज दोपहर 3:30 बजे से शुरू होने जा रहा है, जो पांच दिनों तक क्रिकेट की सर्वोच्च कला का प्रदर्शन करेगा।

    दिन के अंतिम हिस्से में महिला टी20 विश्व कप का एक और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें रात 11:00 बजे साउथ अफ्रीका और पाकिस्तान की महिला टीमें एक-दूसरे के खिलाफ अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान संभालेंगी। इस प्रकार सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाला यह शेड्यूल क्रिकेट के हर प्रारूप के प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
  • सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    नई दिल्ली । वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा वार्षिक सर्वेक्षण ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज हो सकता है। इससे न केवल गोल्ड रिजर्व का महत्व बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    सर्वेक्षण में 76 केंद्रीय बैंकों ने हिस्सा लिया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इसमें शामिल 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक भंडार में सोने की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर की तुलना में काफी अधिक होगी। दिलचस्प बात यह है कि विकसित देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक भी इस मुद्दे पर लगभग एक जैसी राय रखते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हो रहे बदलावों के कारण केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित संपत्तियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं। लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित रिजर्व मुद्रा माना जाता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक व्यापार में बदलावों के चलते कई देशों ने वैकल्पिक सुरक्षित संपत्तियों की तलाश शुरू कर दी है। सोना इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। सर्वेक्षण में शामिल 74 प्रतिशत रिजर्व प्रबंधकों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी और कम हो सकती है। ऐसे में सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभा सकता है।

    बाजार विशेषज्ञ और केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का कहना है कि दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का रुख बेहद मजबूत बना हुआ है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव के कारण निकट भविष्य में सोने पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी संभावनाएं सकारात्मक हैं। उनका अनुमान है कि अगले एक वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

    सोने की बढ़ती मांग केवल निवेशकों तक सीमित नहीं है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। जब दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान अपनी संपत्तियों का बड़ा हिस्सा सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो यह निवेशकों के लिए भी एक मजबूत संकेत माना जाता है। यही कारण है कि आर्थिक संकट, युद्ध, महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन जैसी परिस्थितियों में सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और केंद्रीय बैंक इसी तरह सोना खरीदते रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड मार्केट में नई तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनता जा रहा है।

  • न्यू जर्सी में एमबाप्पे का महाधमाका: जस्ट फोंटेन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त, दिग्गजों की सूची में शीर्ष की ओर बढ़े फ्रांसीसी कप्तान

    न्यू जर्सी में एमबाप्पे का महाधमाका: जस्ट फोंटेन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड ध्वस्त, दिग्गजों की सूची में शीर्ष की ओर बढ़े फ्रांसीसी कप्तान


    नई दिल्ली ।
    पिछले संस्करण की उपविजेता रही फ्रांस की फुटबॉल टीम ने फीफा विश्व कप 2026 में अपने अभियान का शानदार और धमाकेदार आगाज किया है। अमेरिका के न्यू जर्सी में खेले गए ग्रुप ‘आई’ के एक बेहद रोमांचक और कड़े मुकाबले में फ्रांस ने अफ्रीकी महाद्वीप की मजबूत टीम सेनेगल को 3-1 से पराजित कर दिया। इस मुकाबले में फ्रांस की जीत के महानायक उनके स्टार स्ट्राइकर और कप्तान कायलियन एमबाप्पे रहे, जिन्होंने मैच के उत्तरार्ध में अपने जादुई खेल से पासा पलट दिया। एमबाप्पे ने मुकाबले में दो महत्वपूर्ण गोल दागे और इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने फुटबॉल इतिहास की एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज करा ली है।

    मैच के शुरुआती हिस्से की बात करें तो पहले हाफ में सेनेगल की टीम ने उम्मीद से कहीं बेहतर और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। मैच के 7वें मिनट में ही सेनेगल के इस्माइला सर्र ने फ्रांस के मजबूत डिफेंस को भेदते हुए गोल पोस्ट के समीप पहुंचकर पहला खतरनाक प्रयास किया। सेनेगल ने पूरे पहले हाफ में फ्रांसीसी टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। फ्रांस की ओर से 19वें मिनट में ओस्मान डेम्बेले ने जवाबी हमला किया, लेकिन वे गोल करने में असफल रहे। इसके बाद 25वें मिनट में सेनेगल के निकोलस जैक्सन गोल करने के बेहद करीब पहुंचे, परंतु उनका शॉट पोस्ट के ठीक बगल से बाहर निकल गया। खेल के 40वें मिनट में स्टार खिलाड़ी सादियो माने का एक बेहतरीन शॉट भी चूक गया, जिसके चलते पहला हाफ पूरी तरह से गोलरहित बराबरी पर समाप्त हुआ और पहले हाफ में एमबाप्पे भी अधिकांश समय गेंद से दूर ही नजर आए।

    हालांकि, दूसरे हाफ की शुरुआत होते ही फ्रांसीसी टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। मैच के 57वें मिनट में एमबाप्पे ने सेनेगल के डिफेंडरों को छकाते हुए एक बेहतरीन मौका बनाया, लेकिन सेनेगल के गोलकीपर एडौर्ड मेंडी ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे नाकाम कर दिया। फ्रांस के खिलाड़ियों ने दबाव जारी रखा और आखिरकार 66वें मिनट में गतिरोध टूट गया। माइकल ओलिसे से मिले एक सटीक पास को नियंत्रित करते हुए कप्तान कायलियन एमबाप्पे ने सेनेगल के डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया और गोलकीपर को चकमा देते हुए गेंद को जाल में पहुंचाकर फ्रांस को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी।

    एक गोल की बढ़त हासिल करने के बाद फ्रांस का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैच के 82वें मिनट में युवा फॉरवर्ड ब्रैडली बारकोला ने एक और दर्शनीय गोल दागकर फ्रांस की बढ़त को दोगुना यानी 2-0 कर दिया। निर्धारित 90 मिनट के खेल के बाद लग रहा था कि मैच इसी स्कोर पर समाप्त होगा, लेकिन रेफरी द्वारा जोड़े गए 8 मिनट के इंजरी टाइम ने मुकाबले के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। इंजरी टाइम के शुरुआती पलों में सेनेगल के इब्राहिम मबाये ने एक शानदार गोल कर अपनी टीम की वापसी की उम्मीदें जगाईं और स्कोर 2-1 कर दिया। हालांकि, सेनेगल की यह खुशी कुछ ही सेकेंड टिक सकी, क्योंकि खेल खत्म होने की अंतिम सीटी बजने से ठीक पहले एमबाप्पे ने एक और अविश्वसनीय गोल दागकर फ्रांस को 3-1 से आगे कर दिया और जीत पूरी तरह पक्की कर दी।

    इस ऐतिहासिक मुकाबले में दो गोल करने के साथ ही कायलियन एमबाप्पे के नाम अब फीफा विश्व कप के इतिहास में कुल 14 गोल दर्ज हो गए हैं। इस कीर्तिमान के साथ ही उन्होंने फ्रांस के महान पूर्व खिलाड़ी जस्ट फोंटेन के 13 गोलों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है और वे अब विश्व कप इतिहास में फ्रांस के लिए सर्वाधिक गोल करने वाले इकलौते खिलाड़ी बन गए हैं। इसके साथ ही एमबाप्पे ने विश्व कप में सर्वाधिक गोल करने के मामले में जर्मनी के दिग्गज गेर्ड मुलर के 14 गोलों के सर्वकालिक रिकॉर्ड की भी बराबरी कर ली है। अब विश्व कप के इतिहास में उनसे ज्यादा गोल केवल ब्राजील के रोनाल्डो (15 गोल) और जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोस (16 गोल) के नाम दर्ज हैं। एमबाप्पे का यह शानदार फॉर्म दर्शाता है कि वे आने वाले मैचों में फुटबॉल जगत के कई और बड़े रिकॉर्ड्स को अपने नाम करने के बेहद करीब हैं।

  • G7 में जापान का बड़ा संदेश: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, चीन की चुनौतियां और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जताई चिंता

    G7 में जापान का बड़ा संदेश: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, चीन की चुनौतियां और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जताई चिंता

    फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों, चीन से जुड़ी रणनीतिक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को प्रमुखता से उठाते हुए सदस्य देशों के बीच अधिक समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं भी दबाव का सामना कर रही हैं।

    जापानी प्रधानमंत्री ने जी-7 नेताओं के साथ हुई बैठकों और रात्रिभोज चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज विश्व राजनीति और वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना केवल एशियाई देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक और सामरिक हितों के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जापान ने चीन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर अपना दृष्टिकोण साझेदार देशों के सामने रखा है।

    ताकाइची ने कहा कि जी-7 देशों के बीच इस बात पर व्यापक सहमति बनी है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग और समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाने पर जोर दिया। आधुनिक तकनीक, रक्षा उत्पादन और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता आज दुनिया की प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं में शामिल हो चुकी है।

    पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जापानी प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समुद्री व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहे और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

    ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र रहा। जापान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ सहयोग बढ़ाने और परमाणु प्रसार को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। जापान का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों के प्रसार को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है।

    इसी सम्मेलन में भारत ने भी विकास साझेदारी और वैश्विक दक्षिण की भूमिका को मजबूती से उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी साझेदारी की वास्तविक सफलता इस बात में है कि वह सहयोगी देशों को आत्मनिर्भर बनने में कितना सक्षम बनाती है। उन्होंने अफ्रीका में भारत की विकास परियोजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत साझेदारी के माध्यम से दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उधर, चीन के बढ़ते निर्यात को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताएं भी चर्चा का विषय बनी रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी शुल्कों के बावजूद चीन का औद्योगिक उत्पादन और निर्यात क्षमता मजबूत बनी हुई है, जिससे वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा और आर्थिक संतुलन से जुड़े नए सवाल खड़े हो रहे हैं। कुल मिलाकर, जी-7 शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में सुरक्षा, व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े मुद्दे वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रहने वाले हैं।