Blog

  • भारत ने 20 से अधिक देशों में 7 हजार टन से ज्यादा मखाना भेजा, बिहार के किसानों को मिला वैश्विक बाजार का लाभ

    भारत ने 20 से अधिक देशों में 7 हजार टन से ज्यादा मखाना भेजा, बिहार के किसानों को मिला वैश्विक बाजार का लाभ

    नई दिल्ली ।भारत का मखाना निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में नई ऊंचाई पर पहुंचा है। इस अवधि में भारत ने 20 से अधिक देशों को 7,000 मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना और उससे बने मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात किया। अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाने की मांग बढ़ने से बिहार के किसानों और इस क्षेत्र से जुड़े उद्योग को नए अवसर मिल रहे हैं।

    मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। देश के कुल मखाना उत्पादन का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा बिहार में होता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में भारतीय मखाने की बढ़ती मांग का सीधा लाभ राज्य के उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को मिल सकता है।

    मखाना निर्यात को बेहतर तरीके से दर्ज करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अलग पहचान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2025 से इसके लिए अलग एचएस कोड लागू किया है। इससे मखाने के व्यापार और निर्यात से जुड़े आंकड़ों की निगरानी अधिक स्पष्ट तरीके से की जा सकेगी।

    इसी क्रम में बिहार से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाने की पहली व्यावसायिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। इस खेप के जरिए बिहार के एक प्रमुख भौगोलिक संकेतक उत्पाद ने नए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश किया है। बिहटा स्थित औद्योगिक क्षेत्र से 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना ऑस्ट्रेलिया भेजा गया।

    इस खेप के लिए मखाना दरभंगा जिले के किसानों से खरीदा गया था। निर्यात से जुड़ी इस पहल का उद्देश्य बिहार के स्थानीय उत्पाद को वैश्विक बाजार से जोड़ना और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने वाली आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है।

    इस निर्यात प्रक्रिया से जुड़े किसानों को मौजूदा बाजार भाव की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि किसानों को सीधे निर्यात आधारित बाजारों से जोड़ने और मूल्यवर्धित आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने से उनकी आमदनी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

    मखाने की वैश्विक मांग बढ़ने के पीछे स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। ऐसे में भारतीय मखाना कृषि आधारित निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।

    बिहार सरकार भी मखाना क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसमें किसानों के साथ प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों को सहयोग देने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जरूरत के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    राज्य के कृषि मंत्री ने मखाने को बिहार की पहचान से जुड़ा उत्पाद बताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिहार आधारित निर्यातकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। उन्होंने वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गुणवत्ता मानकों के पालन को महत्वपूर्ण बताया।

    मखाना प्रसंस्करण से जुड़े फोरी समुदाय की पारंपरिक विशेषज्ञता को भी इस उद्योग की महत्वपूर्ण ताकत माना गया है। राज्य सरकार की ओर से इस समुदाय समेत मखाना क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को सहयोग जारी रखने की बात कही गई है।

    ऑस्ट्रेलिया में जीआई टैग वाले मिथिला मखाने की पहली समुद्री खेप पहुंचना बिहार के कृषि उत्पादों के लिए नए बाजारों के विस्तार का संकेत है। आने वाले समय में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों में मांग बढ़ने से मखाना उद्योग में प्रसंस्करण, निर्यात और रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। इससे बिहार के किसानों को घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला से जुड़ने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।

  • पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर कारी सईद की संदिग्ध मौत, हाफिज सईद से तीन दशक पुराना था संबंध

    पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर कारी सईद की संदिग्ध मौत, हाफिज सईद से तीन दशक पुराना था संबंध

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कमांडर कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद स्थित लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी एक मस्जिद में नमाज से पहले वह अचानक जमीन पर गिर गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभालने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। उसकी मौत के कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।

    कारी सईद को लश्कर-ए-तैयबा के पुराने और प्रभावशाली कमांडरों में गिना जाता था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह संगठन के साथ लंबे समय से जुड़ा हुआ था और आतंकी सरगना हाफिज सईद के करीबी लोगों में शामिल था। बताया जाता है कि कारी सईद वर्ष 1990 से हाफिज सईद के साथ जुड़ा हुआ था। शुरुआती वर्षों में उसने संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई और आतंकियों की भर्ती जैसे कामों में भी उसकी जिम्मेदारी रही।

    रिपोर्ट के अनुसार, कारी सईद वर्ष 2017 तक लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी गतिविधियों से जुड़े कामों में सक्रिय रहा। बाद के वर्षों में संगठन ने उसे प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंप दी थीं। वह दक्षिण पंजाब क्षेत्र में संगठन से जुड़े एक विभाग की जिम्मेदारी संभालता था। इस विभाग का काम भारत में मारे गए आतंकियों के परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने और संगठन से जुड़े लोगों का रिकॉर्ड तैयार करने से संबंधित बताया जाता है।

    कारी सईद की मौत से जुड़ी घटनाओं का क्रम भी सामने आया है। बताया गया है कि वह इस्लामाबाद की मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए पहुंचा था। वहां उसने अपना बैग एक साथी को सौंपा और वुजू किया। इसके बाद जब वह नमाज के लिए मुख्य हॉल की ओर बढ़ा और चप्पल उतारने के लिए बैठा, तभी अचानक जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लश्कर के अन्य सदस्यों ने उसे उठाया और मदद की कोशिश की। उसकी सांस रुकने के बाद कथित तौर पर सीपीआर भी दिया गया, लेकिन उसे होश नहीं आया।

    इसके बाद कारी सईद को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी अचानक हुई मौत ने उसके संगठन से जुड़े लोगों के बीच भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और मेडिकल जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

    बताया जाता है कि सक्रिय आतंकी भूमिका से हटने के बाद कारी सईद को लश्कर-ए-तैयबा के प्रशासनिक नेटवर्क में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं। दक्षिण पंजाब के मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान जैसे क्षेत्रों से जुड़े आतंकियों के बारे में जानकारी जुटाना और उनके परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना उसकी जिम्मेदारियों में शामिल था। उसकी मौत ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े कई पुराने चेहरों की गतिविधियों और उनके नेटवर्क को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। कारी सईद की संदिग्ध मौत के कारण और उससे जुड़े अन्य पहलुओं पर आगे मिलने वाली जानकारी से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे मामले में सात छात्रों को जमानत, दो पर कोर्ट की सख्ती

    उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे मामले में सात छात्रों को जमानत, दो पर कोर्ट की सख्ती


    नई दिल्ली ।
    टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस से जुड़े एक मामले में मुंबई की अदालत ने नौ आरोपी छात्रों में से सात को अग्रिम जमानत दे दी, जबकि दो छात्रों की याचिकाएं खारिज कर दी गईं। मामला पिछले वर्ष संस्थान परिसर में हुई एक सभा के दौरान कथित तौर पर उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के समर्थन में नारे लगाए जाने से जुड़ा है।

    मुंबई सेशंस कोर्ट के न्यायाधीश वीबी बोहरा ने दो छात्रों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि छात्र होने के नाते आरोपियों से देश के कानून का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। जिन दो छात्रों की याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें एक 32 वर्षीय गोवंडी निवासी और दूसरा 23 वर्षीय देवनार निवासी बताया गया है।

    मामला 12 अक्टूबर 2025 को TISS में आयोजित एक सभा से जुड़ा है। यह कार्यक्रम दिवंगत पूर्व प्रोफेसर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया था। सभा के दौरान छात्रों ने उनकी तस्वीर लगाई, मोमबत्तियां जलाईं और उनकी कविताएं पढ़ीं। कुछ प्लेकार्ड पर रेस्ट इन पावर जैसे संदेश भी लिखे थे।

    अदालत ने माना कि जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देना अपने आप में कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं है। विशेष रूप से अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि उन्हें 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी थी। हालांकि, अदालत के अनुसार सभा के दौरान कथित तौर पर लगाए गए कुछ नारे इसे केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखते।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, सभा में करीब 10 से 12 छात्र शामिल हुए थे और आरोप है कि वहां उमर खालिद तथा शरजील इमाम की रिहाई की मांग को लेकर नारे लगाए गए। पुलिस के अनुसार, इस सभा के लिए संस्थान प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। शुरुआती प्राथमिकी में नौ लोगों के नाम दर्ज किए गए थे और बाद में जांच ट्रॉम्बे पुलिस से अपराध जांच विभाग को सौंप दी गई।

    मामले की जांच के दौरान कुछ आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इन उपकरणों में माओवादी संगठनों से संबंधित किताबें और अन्य सामग्री मिली। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ डिजिटल जानकारी हटाई गई थी।

    अदालत ने जांच में मिली सामग्री के आधार पर कहा कि आरोपियों में से कुछ के माओवादी विचारधारा से प्रभावित होने के संकेत मिलते हैं। अदालत ने यह संभावना भी जताई कि सभा के जरिए संस्थान के अन्य छात्रों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि, न्यायाधीश ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की कि केवल माओवादी संगठनों का साहित्य डाउनलोड करना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने यह भी कहा कि कैंपस में बिना अनुमति रेस्ट इन पावर जैसे शब्दों का इस्तेमाल अकेले कोई अपराध नहीं है। लेकिन कथित नारे, सभा की परिस्थितियां और जांच के दौरान सामने आई सामग्री को एक साथ देखने पर आरोपियों के कथित इरादों की जांच जरूरी हो जाती है।

    जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आपराधिक कार्रवाई में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत ने कहा कि मुकदमों में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और न्यायिक कारण हो सकते हैं, जिनमें लंबित मामलों की संख्या और न्यायाधीशों की उपलब्धता शामिल है। न्यायाधीश ने कहा कि इन अर्जियों पर भी दाखिल होने के नौ महीने से अधिक समय बाद आदेश दिया जा रहा है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है। सात छात्रों को अग्रिम जमानत मिलने से उन्हें अंतरिम कानूनी राहत मिली है, जबकि दो छात्रों को अदालत से यह संरक्षण नहीं मिला। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और मामले की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

  • अमेरिकी सीनेट से रूस के तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

    अमेरिकी सीनेट से रूस के तेल खरीदारों पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । अमेरिका और रूस के बीच जारी तनाव का असर अब भारत और चीन समेत उन देशों पर पड़ सकता है, जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। अमेरिकी सीनेट ने ऐसे विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दी है, जिसके कानून बनने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की ताकत मिल सकती है।

    सीनेट में विधेयक के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 11 सांसदों ने इसका विरोध किया। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय से जुड़े आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक क्षमता को कमजोर करना बताया गया है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रूस से सबसे अधिक तेल और गैस खरीदने वाले पांच देशों को निशाने पर लिया जा सकता है। इनमें भारत और चीन के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं। हालांकि, सीनेट से विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि इन देशों पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है।

    दरअसल, विधेयक को अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति की प्रक्रिया होगी। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा। इसलिए फिलहाल भारत पर इस प्रस्ताव के तहत कोई नया 100 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं हुआ है।

    इस प्रस्ताव को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी अधिकतम टैरिफ सीमा है। पिछले वर्ष पेश किए गए शुरुआती प्रस्ताव में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। इस पहल को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था।

    बाद में प्रस्ताव में बदलाव किया गया और 500 प्रतिशत वाले प्रावधान को हटाकर रूस के पांच सबसे बड़े तेल और गैस खरीदार देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का विकल्प रखा गया। इससे यह साफ होता है कि प्रस्तावित कानून में अधिकतम सीमा तय की गई है, लेकिन हर देश पर अनिवार्य रूप से इतनी ही दर लागू करना जरूरी नहीं होगा।

    कानून बनने की स्थिति में ट्रंप को टैरिफ की दर तय करने में महत्वपूर्ण अधिकार मिल सकते हैं। राष्ट्रीय हित, कूटनीतिक परिस्थितियों और दूसरे देशों के साथ अमेरिका के संबंधों को ध्यान में रखते हुए वह शुल्क में बदलाव या कुछ मामलों में राहत देने का निर्णय कर सकते हैं।

    भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि रूस से कच्चे तेल की खरीद पिछले कुछ वर्षों में उसकी ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। रूस से मिलने वाले तेल ने भारतीय रिफाइनिंग और ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में अमेरिकी शुल्क नीति में बड़ा बदलाव भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

    प्रस्ताव में रूस के अलावा ईरान को लेकर भी सख्ती का प्रावधान है। ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही रूस के वरिष्ठ अधिकारियों, कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    अब सबकी नजर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पर है, जिसका नया सत्र 31 अगस्त से शुरू होना है। वहां विधेयक पर चर्चा और मतदान के बाद इसकी आगे की दिशा तय होगी। फिलहाल भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि सीनेट की मंजूरी अंतिम टैरिफ फैसला नहीं है। आने वाले चरणों में अमेरिकी संसद और राष्ट्रपति के निर्णय से ही स्पष्ट होगा कि भारत पर वास्तविक शुल्क कितना पड़ सकता है और इसका द्विपक्षीय व्यापार पर कितना असर होगा।

  • 'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    नई दिल्ली । अभिनेता अनुपम श्याम ओझा भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत में अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। खास तौर पर लोकप्रिय धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ में ठाकुर सज्जन सिंह के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। फिल्मों से लेकर छोटे पर्दे तक अपने अभिनय की मजबूत छाप छोड़ने वाले अनुपम श्याम ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए। हालांकि, जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें गंभीर बीमारी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मिली आर्थिक सहायता भी चर्चा में रही थी।

    अनुपम श्याम का जन्म 20 सितंबर 1957 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। बचपन से ही उनका रुझान अभिनय की ओर था। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अवध विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद लखनऊ स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी से रंगमंच और अभिनय का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद वह दिल्ली के श्रीराम सेंटर रंगमंडल से जुड़े और थिएटर के जरिए अभिनय की बारीकियों को समझा। रंगमंच पर अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने अभिनय के बड़े सपने के साथ मुंबई का रुख किया।

    मुंबई में शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्हें छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत करनी पड़ी, लेकिन उनकी प्रतिभा ने धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘लिटिल बुद्धा’ से हुई। इसके बाद शेखर कपूर की चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में भी उन्होंने अभिनय किया। आगे चलकर वह ‘लगान’, ‘नायक’, ‘शक्ति’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘वांटेड’, ‘हल्ला बोल’ और ‘रक्त चरित्र’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बने। कई फिल्मों में उन्होंने दबंग और नकारात्मक भूमिकाओं को प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा।

    हालांकि फिल्मों में लंबे समय तक काम करने के बाद भी उन्हें सबसे बड़ी लोकप्रियता वर्ष 2009 में शुरू हुए धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ से मिली। इसमें ठाकुर सज्जन सिंह की भूमिका ने उनकी पहचान को एक अलग मुकाम दिया। उनका संवाद बोलने का अंदाज और किरदार की प्रभावशाली प्रस्तुति दर्शकों को बेहद पसंद आई। इस भूमिका की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि बड़ी संख्या में दर्शक उन्हें उनके वास्तविक नाम के बजाय ठाकुर सज्जन सिंह के नाम से पहचानने लगे। बाद में उन्होंने ‘प्रतिज्ञा 2’, ‘कृष्णा चली लंदन’ और ‘डोली अरमानों की’ सहित कई धारावाहिकों में अभिनय किया।

    जीवन के अंतिम दौर में अनुपम श्याम गंभीर किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती थी और लंबे इलाज के कारण आर्थिक परेशानियां भी बढ़ गई थीं। इसी दौरान उनके परिवार की ओर से मदद की अपील की गई थी। अनुपम श्याम ने बाद में एक बातचीत में बताया था कि उनकी बीमारी की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, जिसके बाद इलाज के लिए 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अस्पताल के खाते में भेजी गई। अभिनेता ने इस मदद के लिए आभार भी जताया था और बताया था कि इससे उनके इलाज को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।

    इलाज के दौरान उनकी तबीयत में कुछ समय के लिए सुधार आया और उन्होंने दोबारा काम शुरू करने की कोशिश की। वह ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा 2’ की शूटिंग से भी जुड़े, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बनी रहीं। आखिरकार 8 अगस्त 2021 को मुंबई के एक अस्पताल में 63 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अनुपम श्याम भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ठाकुर सज्जन सिंह सहित उनके यादगार किरदार और अभिनय की विरासत दर्शकों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेगी।

  • मृणाल ठाकुर और यशस्वी जायसवाल के रिश्ते की चर्चा पर एक्ट्रेस ने किया कमेंट, कहा- बिना पुष्टि के खबरों को सच न मानें

    मृणाल ठाकुर और यशस्वी जायसवाल के रिश्ते की चर्चा पर एक्ट्रेस ने किया कमेंट, कहा- बिना पुष्टि के खबरों को सच न मानें


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड अभिनेत्री मृणाल ठाकुर और क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल के बीच डेटिंग की चर्चाएं पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर चल रही हैं। दोनों के एक ही कैफे से अलग-अलग समय पर बाहर निकलने का एक वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते को लेकर अटकलें लगाई जाने लगीं। इसके बाद मृणाल ठाकुर ने इस चर्चा पर प्रतिक्रिया दी है और लोगों से किसी वीडियो या पोस्ट के आधार पर अफवाहों को सच मानने से बचने की बात कही है।

    मृणाल ठाकुर की प्रतिक्रिया एक सोशल मीडिया पोस्ट के कमेंट सेक्शन में सामने आई। इस पोस्ट में अभिनेत्री और यशस्वी जायसवाल को लेकर डेटिंग से जुड़ी बात कही गई थी। मृणाल ने सवाल किया कि सिर्फ एक ही जगह पर दिखाई देने के आधार पर दो लोगों को एक साथ कैसे माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी बातों को तुरंत सच नहीं मानना चाहिए।

    अभिनेत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर भी दिलाया। उन्होंने कहा कि देश में कई महत्वपूर्ण विषय चल रहे हैं और लोगों को सही मुद्दों पर वीडियो बनाने पर ध्यान देना चाहिए। इस टिप्पणी के बाद उनकी प्रतिक्रिया भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।

    मृणाल ठाकुर और यशस्वी जायसवाल की उम्र में करीब 10 साल का अंतर बताया जा रहा है। मृणाल की उम्र 34 वर्ष और यशस्वी की उम्र 24 वर्ष है। इसी वजह से दोनों के कथित रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हुईं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों की ओर से किसी रिश्ते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मृणाल की प्रतिक्रिया भी डेटिंग की पुष्टि नहीं करती, बल्कि वह ऐसी अटकलों पर सवाल उठाती है।

    यह पूरा मामला एक वायरल वीडियो के बाद शुरू हुआ। वीडियो में दोनों को मुंबई के बांद्रा इलाके में स्थित एक ही कैफे से बाहर निकलते हुए देखा गया था। इसके बाद कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दोनों के बीच रिश्ते की संभावना जताई गई। इसी आधार पर डेटिंग की खबरें फैलने लगीं। मृणाल की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद अब चर्चा का केंद्र उनके कथित रिश्ते की पुष्टि के बजाय अफवाहों पर अभिनेत्री का रुख बन गया है।

    मृणाल ठाकुर इससे पहले भी अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चाओं में रही हैं। उनका नाम अभिनेता धनुष के साथ भी जोड़ा गया था। उस समय भी अभिनेत्री ने ऐसी खबरों को गलत बताया था। इस बार यशस्वी जायसवाल के साथ नाम जुड़ने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ही अपनी बात रखी है।

    मृणाल ठाकुर और यशस्वी जायसवाल दोनों अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। मृणाल फिल्मों में काम करती हैं, जबकि यशस्वी भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बना चुके हैं। दोनों के बीच किसी व्यक्तिगत रिश्ते की पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। ऐसे में एक साथ किसी स्थान पर नजर आने या सोशल मीडिया पर सामने आई पोस्ट के आधार पर उनके रिश्ते के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अभी तक इस मामले में मृणाल की प्रतिक्रिया ही सामने आई है, जिसमें उन्होंने डेटिंग की अटकलों को लेकर लोगों से सवाल किया है।

  • 104 डिग्री बुखार में भी अविका गौर करती रहीं शूटिंग, डेंगू की पुष्टि के बाद अस्पताल में भर्ती

    104 डिग्री बुखार में भी अविका गौर करती रहीं शूटिंग, डेंगू की पुष्टि के बाद अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । टीवी अभिनेत्री अविका गौर की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभिनेत्री डेंगू से संक्रमित पाई गई हैं और पिछले कई दिनों से तेज बुखार से जूझ रही थीं। उनके पति मिलिंद चंदवानी ने सोशल मीडिया के जरिए अविका की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी साझा की और बताया कि वह 103 से 104 डिग्री तक तेज बुखार के बावजूद अपने काम से पीछे नहीं हटीं। हालत खराब होने के बावजूद उन्होंने अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट को पूरा करने के लिए लगातार शूटिंग की। अब अस्पताल में इलाज के दौरान उनके पति ने फैंस से अविका के जल्द स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने की अपील की है।

    मिलिंद चंदवानी के मुताबिक, अविका गौर को करीब पांच दिनों तक तेज बुखार रहा। इस दौरान उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हें सामान्य रूप से उठने-बैठने और खाना खाने में भी परेशानी हो रही थी। इसके बावजूद एक प्रोजेक्ट की शूटिंग में उनका दो दिन का काम बाकी था। अविका ने तेज बुखार के बीच भी शूटिंग जारी रखी और अपने हिस्से की परफॉर्मेंस पूरी की। बताया गया कि उनका काम इतना प्रभावी रहा कि दो दिन का बचा हुआ शूट एक ही दिन में पूरा कर लिया गया।

    शूटिंग पूरी करने के बाद अविका को दो दिन का ब्रेक मिला। इस दौरान वह ज्यादातर समय बिस्तर पर रहीं और दवाइयां लेती रहीं। उनकी तबीयत सामान्य नहीं थी और चलने-फिरने के साथ-साथ खाना खाने में भी दिक्कत हो रही थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने दूसरे प्रोफेशनल कमिटमेंट को पूरा करने का फैसला किया। ब्रेक के बाद वह तेज बुखार की हालत में ही दिल्ली पहुंचीं, जहां उन्हें एक विज्ञापन की शूटिंग करनी थी।

    दिल्ली में एड शूट से पहले अविका का स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया था। हालांकि, मुंबई लौटने के बाद सामने आई रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हुई। इसके बाद उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके पति के अनुसार, उन्होंने अविका को आराम करने और शूटिंग आगे बढ़ाने के लिए कई बार समझाया था। उनका कहना था कि निर्माता उनकी स्थिति समझ सकते हैं और शूट को बाद में पूरा किया जा सकता है, लेकिन अविका अपने काम को लेकर प्रतिबद्ध रहीं।

    अविका की टीम से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि दिल्ली में विज्ञापन की शूटिंग के दौरान उनकी हालत काफी खराब थी। वह ठीक से खड़ी तक नहीं हो पा रही थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शूट पूरा करने की कोशिश की। इस दौरान वह मुख्य रूप से ओआरएस के सहारे खुद को संभाल रही थीं और ठीक से खाना भी नहीं खा पा रही थीं। उनकी इस प्रतिबद्धता की जानकारी सामने आने के बाद इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों और फैंस ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

    मिलिंद चंदवानी ने भी अविका की मेहनत और काम के प्रति समर्पण की तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि अविका अपने काम के साथ-साथ दूसरों के समय और संसाधनों की भी कद्र करती हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद काम को प्राथमिकता देना कितना कठिन हो सकता है। डेंगू की पुष्टि के बाद अब अविका अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनके प्रशंसक उनके जल्द स्वस्थ होकर वापस लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।

  • स्वरा भास्कर को डेंगू के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खुद दी बीमारी की जानकारी

    स्वरा भास्कर को डेंगू के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए खुद दी बीमारी की जानकारी

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभिनेत्री ने खुद सोशल मीडिया के जरिए अपनी हेल्थ अपडेट साझा करते हुए बताया कि वह डेंगू से संक्रमित हो गई हैं। अस्पताल के बेड से तस्वीर सामने आने के बाद उनके प्रशंसकों में चिंता बढ़ गई और सोशल मीडिया पर लोग उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। हालांकि अभिनेत्री ने अपनी तबीयत को लेकर अभी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    स्वरा भास्कर ने अस्पताल से अपनी एक तस्वीर इंस्टाग्राम स्टोरी पर पोस्ट की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डेंगू होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है। उनकी पोस्ट सामने आने के बाद प्रशंसकों और चाहने वालों ने सोशल मीडिया पर उनके जल्द ठीक होने की कामना की। फिलहाल वह डॉक्टरों की निगरानी में इलाज करा रही हैं।

    बारिश के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामले बढ़ने के बीच स्वरा भास्कर के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आई है। इस मौसम में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और कई इलाकों में लोग इससे प्रभावित होते हैं। स्वरा के साथ ही टीवी अभिनेत्री अविका गौर की तबीयत खराब होने की खबर भी हाल में सामने आई है, जिसके बाद उनके प्रशंसक भी चिंतित हैं।

    स्वरा भास्कर के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह हाल ही में टेलीविजन शो ‘पति पत्नी और पंगा’ में नजर आई थीं। इस कार्यक्रम में उन्होंने अपने पति फहाद अहमद के साथ हिस्सा लिया था। अभिनेत्री सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहती हैं और अपनी निजी जिंदगी के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय साझा करती रही हैं। फिलहाल उनके किसी नए फिल्म प्रोजेक्ट को लेकर आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    इसी बीच अभिनेत्री अविका गौर की तबीयत खराब होने की जानकारी भी सामने आई है। उनके पति मिलिंद चांदवानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर बताया था कि अविका को पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार था। उनका तापमान 103 से 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच गया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के मुताबिक, तबीयत खराब होने के बावजूद अविका ने अपने काम को जारी रखा और जिस प्रोजेक्ट की शूटिंग शुरू की थी, उसका बचा हुआ काम भी पूरा किया।

    स्वरा भास्कर की ओर से अस्पताल से साझा की गई तस्वीर के बाद उनके प्रशंसक उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। अभिनेत्री ने फिलहाल अपनी स्थिति से जुड़ी सीमित जानकारी ही साझा की है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर आगे की जानकारी उनके या परिवार की ओर से मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर फैंस उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।

  • गुरुद्वारे में पंजाबी रीति-रिवाज से एक-दूजे के हुए रामनदीप और चार्ली, क्रिकेटर और टीवी सितारों ने दी शुभकामनाएं

    गुरुद्वारे में पंजाबी रीति-रिवाज से एक-दूजे के हुए रामनदीप और चार्ली, क्रिकेटर और टीवी सितारों ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली ।
    भारतीय क्रिकेटर और कोलकाता नाइट राइडर्स के ऑलराउंडर रामनदीप सिंह ने टीवी एक्ट्रेस चार्ली चौहान के साथ शादी कर ली है। दोनों ने करीब आठ साल तक एक-दूसरे का साथ निभाने के बाद अपने रिश्ते को विवाह के बंधन में बदल दिया। शादी समारोह पारंपरिक पंजाबी रीति-रिवाजों के अनुसार गुरुद्वारे में हुआ, जहां परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में दोनों ने वैवाहिक रस्में पूरी कीं।

    रामनदीप और चार्ली ने अपनी शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। दोनों की ओर से शेयर की गई तस्वीरों और वीडियो में शादी की पारंपरिक रस्मों की झलक देखने को मिल रही है। तस्वीरों के साथ कपल ने अपने लंबे रिश्ते का जिक्र करते हुए बताया कि आठ साल के साथ के बाद अब दोनों ने हमेशा के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम लिया है।

    शादी के दौरान रामनदीप सिंह पारंपरिक पंजाबी परिधान में नजर आए, जबकि चार्ली चौहान भी पारंपरिक शादी के जोड़े में बेहद खूबसूरत दिखाई दीं। गुरुद्वारे में आयोजित समारोह में दोनों परिवारों और करीबी लोगों ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया। शादी की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की ओर से लगातार शुभकामनाएं दी जा रही हैं।

    रामनदीप और चार्ली लंबे समय से एक-दूसरे के साथ रिश्ते में थे। दोनों ने अपने निजी संबंध को काफी समय तक सुर्खियों से दूर रखा, लेकिन अब शादी के बाद उनके रिश्ते की आठ साल लंबी यात्रा सार्वजनिक रूप से चर्चा में है। दोनों की शादी ने क्रिकेट और टीवी इंडस्ट्री के प्रशंसकों का ध्यान आकर्षित किया है।

    शादी समारोह में क्रिकेट जगत से जुड़े कई चेहरे भी नजर आए। भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह, मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज नमन धीर, तेज गेंदबाज अश्विनी कुमार और पंजाब के क्रिकेटर जस्सिंदर सिंह सहित कई लोग समारोह में शामिल हुए। टीवी अभिनेता जय भानुशाली ने भी शादी से जुड़ी तस्वीर अपनी सोशल मीडिया स्टोरी पर साझा की।

    अर्शदीप सिंह ने भी नवविवाहित जोड़े के साथ तस्वीर साझा कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। शादी के बाद क्रिकेट जगत के कई खिलाड़ियों ने रामनदीप और चार्ली को बधाई दी। शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा और आर अश्विन समेत कई क्रिकेटरों ने कपल को नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं दीं। टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़े कलाकारों ने भी सोशल मीडिया के जरिए दोनों को बधाई संदेश भेजे।

    चार्ली चौहान टीवी इंडस्ट्री में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने ‘कैसी ये यारियां’ और ‘बेस्ट फ्रेंड्स फॉरएवर’ जैसे चर्चित टीवी शो में काम किया है। इसके अलावा वह एमटीवी रोडीज का हिस्सा रह चुकी हैं। चार्ली डांस रियलिटी शो ‘नच बलिए’ में भी नजर आई थीं। अभिनय और रियलिटी शो से जुड़ी उनकी पहचान के कारण मनोरंजन जगत में उनका अच्छा नाम है।

    रामनदीप सिंह क्रिकेट के मैदान पर अपनी ऑलराउंड क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं और आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब शादी के बाद रामनदीप और चार्ली ने अपने आठ साल पुराने रिश्ते को नई शुरुआत दी है। दोनों की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं और क्रिकेट तथा टीवी जगत से उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।

  • FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    FSSAI के शराब लेबलिंग नियमों पर कंपनियों की हाईकोर्ट में चुनौती, अचानक बिक्री रोकने से नुकसान की चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के शराब से जुड़े लेबलिंग और उत्पाद मानकों को लेकर विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। कुछ बड़ी शराब कंपनियों ने नियामक के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनके तहत कुछ प्रकार के भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा उत्पादों की बिक्री पर आपत्ति जताई गई है। मामले में अदालत में अगली सुनवाई सोमवार को होने वाली है, जिस पर कंपनियों और नियामक दोनों की नजर बनी हुई है।

    विवाद का केंद्र शराब की लेबलिंग, फ्लेवर और उत्पाद की उम्र से जुड़े दावे हैं। FSSAI का कहना है कि कुछ कंपनियां ऐसे उत्पादों को रम या व्हिस्की के रूप में बाजार में पेश कर रही हैं, जिनमें अतिरिक्त या कृत्रिम फ्लेवर का इस्तेमाल किया गया है। नियामक के अनुसार, यदि किसी स्पिरिट में अलग से फ्लेवर मिलाया गया है, तो उपभोक्ताओं को इसकी स्पष्ट जानकारी लेबल पर दी जानी चाहिए।

    नियामकीय आपत्ति के अनुसार ऐसे उत्पादों की पैकेजिंग पर रम या व्हिस्की के बजाय संबंधित उत्पाद की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना बताया गया है। इसी बिंदु को लेकर शराब कंपनियों और नियामक के बीच कानूनी विवाद गहराया है।

    विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू शराब की उम्र से संबंधित दावों का है। कुछ उत्पादों पर उन्हें कैस्क में पुरानी या परिपक्व स्पिरिट के तौर पर प्रस्तुत किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। नियामक का तर्क है कि किसी ब्लेंड में इस्तेमाल की गई सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट को ध्यान में रखकर ही उम्र संबंधी दावा किया जाना चाहिए। इससे उन उत्पादों की लेबलिंग प्रभावित हो सकती है, जिनमें अलग-अलग उम्र की स्पिरिट का मिश्रण किया गया है।

    इस मामले में United Spirits और Mohan Meakin समेत कई कंपनियों ने अदालत का रुख किया है। कंपनियों की ओर से दलील दी गई है कि अचानक बिक्री रोकने या लेबल बदलने के निर्देश से कारोबार पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इन उत्पादों का निर्माण लंबे समय से निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है और अचानक बदलाव लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।

    कंपनियों का एक प्रमुख तर्क यह भी है कि शराब की बोतलों के लेबल में बदलाव केवल प्रिंटिंग तक सीमित प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए कई मामलों में राज्य आबकारी विभागों से आवश्यक मंजूरी लेनी पड़ती है। इसलिए कंपनियों के मुताबिक यदि उन्हें तुरंत नए नियमों के अनुसार लेबल बदलने और मौजूदा स्टॉक की बिक्री रोकने के लिए कहा जाता है, तो इससे तैयार माल और वितरण व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अचानक पूरे उद्योग की गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना को लेकर चिंता जताई। अदालत ने संकेत दिया कि किसी पूरे उद्योग को रातोंरात बंद करने से व्यावहारिक और आर्थिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शराब के निर्माण, जांच और मार्केटिंग के तकनीकी मानक तय करना न्यायपालिका का काम नहीं है।

    अदालत ने केंद्र सरकार के वकील और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से FSSAI से इस मामले से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल कर अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि अदालत कंपनियों की बिक्री संबंधी मांग और नियामक के खाद्य सुरक्षा तथा लेबलिंग मानकों के बीच किस तरह संतुलन स्थापित करती है।

    इस विवाद का असर केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शराब उद्योग में उत्पादों की लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन को लेकर आगे की दिशा भी इससे तय हो सकती है। फिलहाल अंतिम स्थिति अदालत की आगामी सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही स्पष्ट होगी।