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  • प्रेमिका से फोन पर विवाद के बाद युवक ने खाया जहरीला पदार्थ, भोपाल में 19 वर्षीय अरशद की इलाज के दौरान मौत

    प्रेमिका से फोन पर विवाद के बाद युवक ने खाया जहरीला पदार्थ, भोपाल में 19 वर्षीय अरशद की इलाज के दौरान मौत


    भोपाल । भोपाल के बरखेड़ी जहांगीराबाद में 19 वर्षीय युवक मोहम्मद अरशद की जहरीला पदार्थ खाने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। गंभीर हालत में परिजन उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। परिजनों के मुताबिक जहरीला पदार्थ खाने से पहले अरशद की अपनी प्रेमिका से फोन पर बातचीत हुई थी और इसी दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ था। परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद ही अरशद ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और युवक का मोबाइल भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है।

    मृतक की पहचान मोहम्मद अरशद पिता मोहम्मद खालिद के रूप में हुई है। वह बरखेड़ी जहांगीराबाद का रहने वाला था। अरशद अपने पिता के साथ सेंटरिंग ठेकेदारी के काम में हाथ बंटाता था। परिवार में वह दूसरे नंबर का बेटा था। उसके एक छोटा भाई और छोटी बहन भी है। अचानक हुई इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    परिजनों के अनुसार अरशद का एक युवती से प्रेम संबंध था और दोनों के बीच काफी समय से बातचीत होती थी। परिवार को भी इस रिश्ते की जानकारी थी। कुछ दिन पहले अरशद के परिजनों ने युवती के परिवार के सामने शादी का रिश्ता रखा था। परिवार का कहना है कि रिश्ता भेजने के बाद युवती के घर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद से अरशद परेशान रहने लगा था। हालांकि वह युवती से फोन पर बातचीत करता रहा।

    मृतक के पिता मोहम्मद खालिद ने बताया कि बुधवार रात अरशद की युवती से फोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान दोनों के बीच विवाद हुआ। इसके कुछ समय बाद अरशद जहरीला पदार्थ खाकर घर पहुंचा। घर आने के बाद उसने अपने पिता से तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए कहा। उसकी हालत बिगड़ती देख परिजन उसे तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलने के बाद जहांगीराबाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। गुरुवार दोपहर पोस्टमॉर्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने अरशद का मोबाइल भी अपने कब्जे में लिया है। अब मोबाइल की जांच और कॉल डिटेल के जरिए उसकी आखिरी बातचीत की जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले युवक की किन लोगों से बातचीत हुई थी और आखिरी फोन कॉल में क्या हुआ था।

    परिजनों का कहना है कि अरशद की मौत के पीछे फोन पर हुई बातचीत की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। मामले में उपलब्ध साक्ष्यों मोबाइल की जानकारी कॉल डिटेल और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के अन्य तथ्यों के सामने आने के बाद ही घटना की परिस्थितियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच जारी रखी है।

  • ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज

    ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज


    भोपाल । भोपाल के बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी में 17 करोड़ रुपए की लागत से बन रही सड़क को लेकर गुरुवार सुबह रहवासियों ने प्रदर्शन किया। कॉलोनी में सड़क निर्माण के दौरान कहीं सीमेंटेड तो कहीं डामर की सड़क बनाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है। रहवासियों का कहना है कि जब पूरी कॉलोनी के लिए सड़क निर्माण का बड़ा टेंडर हुआ है तो अलग अलग हिस्सों में सड़क की गुणवत्ता और निर्माण का तरीका अलग क्यों रखा जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि पूरी कॉलोनी में सीमेंटेड सड़क बनाई जाए ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे और बार बार उखड़ने की समस्या न हो।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में रहवासी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़क पर पहुंचे और नारेबाजी की। बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी के मुताबिक करीब 85 एकड़ में फैली इस कॉलोनी में 1206 से अधिक मकान हैं। कॉलोनी में सड़क निर्माण के लिए 29 अप्रैल 2026 को करीब 17 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था। रहवासियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि इस राशि से कॉलोनी की सड़क व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन निर्माण शुरू होने के बाद सड़क के अलग अलग हिस्सों में अलग तरीके से काम होता दिखाई दे रहा है।

    रहवासियों के अनुसार कॉलोनी के HIG और MIG आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है। लोगों का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों के सामने भी सीमेंटेड सड़क का निर्माण किया गया है। इसके बाद जब EWS और LIG आवासों वाले हिस्से में सड़क निर्माण शुरू हुआ तो वहां डामर की सड़क बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई। इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया है।

    मामले की जानकारी क्षेत्रवासियों ने मंत्री कृष्णा गौड़ और PWD अधिकारियों तक भी पहुंचाई। रहवासियों ने मांग की कि EWS और LIG क्षेत्र में भी सीमेंटेड सड़क बनाई जाए। उनका कहना है कि छोटे मकानों वाले हिस्से में रहने वाले लोगों को भी उतनी ही मजबूत और टिकाऊ सड़क मिलनी चाहिए जितनी कॉलोनी के अन्य हिस्सों में बनाई जा रही है।

    वहीं PWD अधिकारियों की ओर से रहवासियों को बताया गया कि टेंडर में सीमेंटेड और डामर दोनों तरह की सड़कों का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक EWS और LIG क्षेत्र में डामर की सड़क ही बनाई जाएगी। उनका कहना है कि यदि रहवासी सीमेंटेड सड़क की मांग पर जोर देते हैं तो इसके लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं है और ऐसी स्थिति में काम रोकना पड़ सकता है।

    रहवासियों का सवाल इसी बात को लेकर है कि यदि एक ही कॉलोनी में दोनों तरह की सड़क बनाने का प्रावधान था तो निर्माण का आधार क्या तय किया गया है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों के आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क और छोटे आवासों वाले हिस्से में डामर सड़क होने से उन्हें असमानता महसूस हो रही है। उनका यह भी कहना है कि कुछ हिस्सों में छोटे आवासों को छोड़कर करीब 300 मीटर आगे फिर अधिकारियों के आवासों के सामने सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है।

    EWS और LIG-1 तथा LIG-2 क्षेत्र में डामर सड़क का काम शुरू होने के बाद गुरुवार सुबह रहवासी मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने निर्माण कार्य को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिकारियों से सड़क निर्माण की व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की। रहवासियों ने कहा कि वे सीमेंटेड सड़क की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। इसी क्रम में शनिवार को सुंदरकांड का पाठ आयोजित करने की भी बात कही गई है। अब देखना होगा कि PWD और प्रशासन रहवासियों की मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और सड़क निर्माण की मौजूदा योजना में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

  • भोपाल में गर्भवती महिला की मौत से सनसनी, पिता बोले- नशे में पति करता था मारपीट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार

    भोपाल में गर्भवती महिला की मौत से सनसनी, पिता बोले- नशे में पति करता था मारपीट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार


    भोपाल । भोपाल के डिपो चौराहा स्थित आदिवासी हॉस्टल में गुरुवार सुबह 23 वर्षीय गर्भवती महिला प्रियंका अहिरवार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रियंका चार महीने की गर्भवती थी और अपने पति विष्णु अहिरवार के साथ हॉस्टल में रहती थी। विष्णु इसी हॉस्टल में केयरटेकर के तौर पर काम करता है। पुलिस की शुरुआती जांच में प्रियंका द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की बात सामने आई है लेकिन उसके गले और पीठ पर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। मौके से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए हमीदिया अस्पताल की मर्चुरी में रखवाया है।

    पुलिस के मुताबिक घटना गुरुवार सुबह करीब 4 बजे की है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। शुरुआती जांच में आत्महत्या की बात सामने आने के बावजूद शरीर पर मिले चोट के निशानों ने मामले को संदिग्ध बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोट के निशान किस परिस्थिति में आए और महिला की मौत से उनका कोई संबंध है या नहीं।

    प्रियंका के पिता गजराज सिंह ने अपने दामाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रियंका मूल रूप से विदिशा जिले के टेरन तहसील क्षेत्र की रहने वाली थी। करीब तीन साल पहले उसने विष्णु अहिरवार के साथ प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद से ही प्रियंका पति के साथ आदिवासी हॉस्टल में रह रही थी। पिता के अनुसार उनकी बेटी वर्तमान में चार महीने की गर्भवती थी।


    गजराज सिंह का आरोप है कि प्रियंका ने फोन पर कई बार पति के व्यवहार की शिकायत की थी। वह कथित तौर पर बताती थी कि विष्णु नशे की हालत में उसके साथ मारपीट करता था। पिता ने यह भी कहा कि बेटी की मौत की जानकारी उन्हें सीधे पति या ससुराल पक्ष की ओर से नहीं दी गई। हॉस्टल के पास रहने वाले एक परिचित ने फोन कर उन्हें प्रियंका की मौत की सूचना दी। इस बात ने भी परिवार के बीच कई सवाल खड़े किए हैं।

    पुलिस फिलहाल पिता के आरोपों और घटनास्थल से मिले तथ्यों दोनों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। एएसआई असीम साहू के मुताबिक अभी तक मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। मृतका के परिजनों के विस्तृत बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह और शरीर पर मिले चोट के निशानों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

    पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना से पहले पति और पत्नी के बीच किसी तरह का विवाद हुआ था या नहीं। हॉस्टल में मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। फिलहाल मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बयानों का इंतजार कर रही है। प्रियंका की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और अब जांच के जरिए यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि उसकी मौत आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।

  • UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क

    UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध तेज, भोपाल में आज व्यापारियों का ‘नो UPI डे’, 75 हजार के ट्रांजैक्शन पर 300 रुपए तक शुल्क


    भोपाल । भोपाल में आज 8 अक्टूबर को थोक दाल और चावल व्यापारी नो UPI डे मनाकर प्रस्तावित MDR चार्ज का विरोध करेंगे। व्यापारियों ने इसे सांकेतिक आंदोलन बताते हुए कहा है कि 2 हजार रुपए से अधिक के ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे। व्यापारियों का यह विरोध 15 अक्टूबर से प्रस्तावित UPI चार्ज को लेकर है। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान आज कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है और इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

    व्यापारियों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं 75 हजार रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए तक हो सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि थोक कारोबार में बड़ी रकम के भुगतान नियमित रूप से होते हैं। ऐसे में प्रत्येक लेनदेन पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ने की आशंका है।

    भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के मुताबिक UPI भुगतान व्यापारियों और आम लोगों के लिए तेज सरल और सुविधाजनक माध्यम बन चुका है। व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में लगातार सहयोग किया है। ऐसे में UPI पर MDR चार्ज लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सरकार को कारोबारियों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करना चाहिए।

    नो UPI डे के तहत व्यापारियों से अपील की गई है कि वे 8 अक्टूबर को 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI भुगतान स्वीकार न करें। इसे किसी तरह के टकराव के बजाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का माध्यम बताया गया है। दाल और चावल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर व्यापारियों ने हमेशा सकारात्मक सहयोग किया है और डिजिटल इंडिया अभियान में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    चावल-दाल व्यापारी संघ के अध्यक्ष महेश रामरख्यानी और सचिव सचिन संगतानी ने भी MDR से जुड़ी व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग रखी है। उनका कहना है कि व्यापारियों ने डिजिटल लेनदेन को अपनाकर भुगतान व्यवस्था को आसान बनाने में सहयोग दिया है। अब सरकार से उम्मीद है कि नए शुल्क का फैसला लेते समय व्यापारियों की लागत और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

    व्यापारियों का कहना है कि बड़े मूल्य के डिजिटल लेनदेन में मामूली प्रतिशत शुल्क भी लगातार कारोबार करने वालों के लिए महत्वपूर्ण राशि बन सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि एक कारोबारी दिन में 2 हजार रुपए से अधिक के कई UPI लेनदेन करता है तो प्रस्तावित शुल्क का कुल प्रभाव बढ़ सकता है। इसी वजह से व्यापारी संगठन सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।

    भोपाल में आज होने वाला नो UPI डे इसी विरोध का सांकेतिक रूप है। व्यापारियों की कोशिश है कि एक दिन के इस प्रदर्शन के जरिए सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाए और प्रस्तावित MDR चार्ज पर दोबारा विचार किया जाए। अब देखना होगा कि इस सांकेतिक विरोध के बाद सरकार और संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।

  • वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया

    वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो तुरंत करें आवेदन, भोपाल में 8-9 अक्टूबर को शिविर, युवाओं के लिए भी शुरू हुई प्रक्रिया


    भोपाल । भोपाल में मतदाता सूची को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान सूची से बाहर हुए नामों की दोबारा जांच की जा रही है। इसके लिए भोपाल में 8 और 9 अक्टूबर को विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO घर घर जाकर भी जानकारी जुटा रहे हैं और यह पता किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटे हैं उनमें कितने लोग वास्तव में पात्र मतदाता हैं। भोपाल में ऐसे करीब 3.88 लाख नामों की जांच की जा रही है। जिन लोगों के नाम जांच के दौरान पात्र पाए जाएंगे उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़े जा सकेंगे। नागरिक ऑनलाइन माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।

    करीब 11 महीने पहले SIR की प्रक्रिया के दौरान भोपाल की मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव हुआ था। उस समय जिले में कुल 21 लाख 25 हजार 908 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 16.87 लाख रह गई। इस सूची में करीब 1 लाख 503 मतदाता ऐसे बताए गए हैं जो अनुपस्थित पाए गए थे जबकि 2 लाख 86 हजार 661 मतदाताओं को स्थायी रूप से स्थानांतरित यानी परमानेंट शिफ्टेड श्रेणी में रखा गया था। अब इन नामों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखे जा सकें।

    भोपाल की सभी सात विधानसभा सीटों बैरसिया हुजूर भोपाल उत्तर भोपाल मध्य दक्षिण पश्चिम गोविंदपुरा और नरेला में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। 7 अक्टूबर को भी शिविरों में लोग पहुंचे और अपने नाम से जुड़ी जानकारी की जांच कराई। गुरुवार और शुक्रवार को भी नागरिक इन शिविरों में पहुंचकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही BLO की ओर से तैयार की गई सूचियों को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ भी साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।

    मतदाता सूची में ऐसे नाम भी शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए हैं। ऐसे मामलों की भी जांच की जा रही है। वहीं जो लोग स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं उनके नाम हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। दूसरी ओर ऐसे वास्तविक मतदाता जो अपने पते पर नहीं मिले थे या SIR के दौरान किसी कारण से सूची से बाहर हो गए थे उनकी पात्रता की पुष्टि होने पर नाम फिर जोड़े जा सकेंगे।

    खास बात यह है कि 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के लिए भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐसे युवा एडवांस में फॉर्म 6 भर सकते हैं। इसके लिए पहले जरूरी डिक्लेरेशन की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। प्रशासन का उद्देश्य अनुपस्थित स्थानांतरित मृत और दोहराए गए नामों की जांच के साथ यह सुनिश्चित करना है कि कोई वास्तविक और पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। इसके अलावा नाइट शेल्टर मजदूर बस्तियों और बेघर लोगों के लिए भी विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक पात्र लोगों को मतदाता सूची से जोड़ा जा सके।

  • आंध्र प्रदेश में 46.62 लाख हटाए गए वोटरों का फिर होगा सत्यापन, घर-घर पहुंचेंगे BLO

    आंध्र प्रदेश में 46.62 लाख हटाए गए वोटरों का फिर होगा सत्यापन, घर-घर पहुंचेंगे BLO


    अमरावती।
    आंध्र प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग 8 अक्टूबर से 46,62,583 हटाए गए मतदाताओं के नाम और उनकी स्थिति का दोबारा सत्यापन कराएगा। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर इन मतदाताओं की स्थिति की जांच करेंगे। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता गलती से मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

    46.62 लाख नामों की होगी दोबारा जांच

    आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विवेक यादव के मुताबिक, BLO अपने-अपने मतदान केंद्रों से संबंधित 46,62,583 हटाए गए नामों की सूची लेकर घर-घर जाएंगे। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 15 जून से 24 जुलाई तक हुई गणना में 44,89,512 मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले थे। इनमें मृत, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत और अन्य कारणों से सत्यापन में नहीं मिले मतदाता शामिल थे।

    यदि दोबारा सत्यापन में यह सामने आता है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटा दिया गया है, तो BLO उसे फॉर्म-6 भरने में मदद करेंगे। आवश्यक जांच पूरी होने के बाद उसका नाम निरंतर अपडेट प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा।

    ड्राफ्ट सूची के बाद 1.73 लाख और नाम अपात्र

    31 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद भी नामों की जांच जारी रही। नोटिस प्रक्रिया के दौरान 6 अक्टूबर तक 1,73,071 और मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल किए जाने के लिए अपात्र पाया गया। इस तरह दोबारा सत्यापन के दायरे में कुल 46,62,583 नाम आए हैं।

    SIR से पहले आंध्र प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 4.16 करोड़ से अधिक थी। 31 जुलाई को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 3,71,38,182 मतदाता दर्ज थे।

    16 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

    आंध्र प्रदेश में SIR-2026 की अंतिम मतदाता सूची 16 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने दावा और आपत्ति की प्रक्रिया की अवधि भी 10 अक्टूबर तक बढ़ाई है।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी विवेक यादव ने कहा है कि आयोग का लक्ष्य पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र नामों को बाहर रखना है। अंतिम सूची जारी होने के बाद भी जिन पात्र लोगों का नाम छूट जाता है, वे निर्धारित अर्हता तिथियों के आधार पर फॉर्म-6 के जरिए निरंतर अपडेट प्रक्रिया में नाम दर्ज करा सकते हैं।

    चुनाव आयोग ने इस पुनः सत्यापन प्रक्रिया को दस्तावेज करने के भी निर्देश दिए हैं। BLO की गतिविधियों और मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया की फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में सक्रिय नजर आए हैं। दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिरासत में भी लिए गए। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध जारी रखा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस मुहिम को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

    राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेद का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

    CJP ने भी इस विवाद को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें उठा रहा है।

    CJP और कांग्रेस के मुद्दे एक, रास्ते अलग

    कांग्रेस और CJP दोनों ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन दोनों की आंदोलन की रणनीति अलग रही है। इससे पहले जब अभिजीत दीपके ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था, तब राहुल गांधी उनके प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    अब ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लगातार सक्रियता ने इस आंदोलन को विपक्ष की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

    आकाशवाणी भवन में राहुल-प्रियंका का धरना

    7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बैरिकेड पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जारी रखा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कांग्रेस के दोनों नेताओं के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता नजर नहीं आए। इसी वजह से INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दूसरे दलों की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और सभी विपक्षी दलों की ओर से इस पर कोई एकसमान आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    CJP की फिर दिल्ली कूच की तैयारी

    इस बीच अभिजीत दीपके भी अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP का कहना है कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर होगा।

    CJP के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने की योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी वह आंदोलन जारी रखने की कोशिश करेगा।

    कौन सा मुद्दा किसके हाथ में?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की गतिविधियों में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सीधे सड़क पर उतरकर मुद्दा उठाया है, जबकि CJP अपने अलग संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

    ऐसे में 10 अक्टूबर का प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितना विस्तार दे पाती है और कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद उसके अभियान की सार्वजनिक गूंज किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

  • तीसरी शादी और 20 साल का उम्र फासला, मान्यता में संजय दत्त को क्यों दिखी मां नरगिस की झलक, खुद खोला राज

    तीसरी शादी और 20 साल का उम्र फासला, मान्यता में संजय दत्त को क्यों दिखी मां नरगिस की झलक, खुद खोला राज


    नई दिल्ली। संजय दत्त की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है। फिल्मों में शानदार करियर से लेकर निजी जिंदगी के उतार चढ़ाव तक अभिनेता ने कई मुश्किल दौर देखे हैं। रिश्तों से जुड़े विवाद रहे हों या कानूनी परेशानियां संजय दत्त की जिंदगी का शायद ही कोई ऐसा दौर रहा हो जिसने सुर्खियां न बटोरी हों। हालांकि इन तमाम मुश्किल परिस्थितियों के बीच एक रिश्ता ऐसा रहा जिसने उन्हें लगातार मजबूती दी और वह रिश्ता है उनकी पत्नी मान्यता दत्त के साथ। हाल ही में संजय दत्त ने मान्यता की जमकर तारीफ की और उन्हें अपनी जिंदगी की सबसे मजबूत महिलाओं में से एक बताया।

    शेखर सुमन के साथ बातचीत में संजय दत्त ने मान्यता को लेकर अपने दिल की बात कही। अभिनेता ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत कम ऐसी महिलाओं को देखा है जो एक मां और पत्नी के तौर पर पूरी तरह समर्पित रही हों। संजय ने मान्यता की तुलना अपनी मां और दिग्गज अभिनेत्री नरगिस दत्त से करते हुए कहा कि उनकी मां के बाद मान्यता ही ऐसी महिला हैं जो हर मुश्किल परिस्थिति में चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहीं। जेल का दौर हो या जिंदगी की दूसरी परेशानियां मान्यता ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

    संजय और मान्यता की प्रेम कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। दोनों की उम्र में करीब 20 साल का अंतर है लेकिन उम्र का यह फासला उनके रिश्ते के बीच कभी दीवार नहीं बना। संजय के मुताबिक दोनों की मुलाकात के बाद धीरे धीरे बातचीत बढ़ी और फिर दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया। रिश्ता आगे बढ़ा तो दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। फरवरी 2008 में संजय दत्त और मान्यता दत्त शादी के बंधन में बंध गए। इसके बाद अक्टूबर 2010 में दोनों जुड़वां बच्चों के माता पिता बने।

    संजय दत्त की यह तीसरी शादी थी। इससे पहले उनकी शादी अभिनेत्री ऋचा शर्मा से हुई थी। इस रिश्ते से उनकी बेटी त्रिशाला दत्त हैं। ऋचा के निधन के बाद त्रिशाला का पालन पोषण अमेरिका में उनके नाना नानी के साथ हुआ। संजय और त्रिशाला के रिश्ते में भी एक समय दूरी आई लेकिन बाद में दोनों के बीच संबंध बेहतर हुए। संजय कई मौकों पर अपनी बेटी को लेकर गर्व जाहिर कर चुके हैं।

    मान्यता के साथ संजय दत्त का रिश्ता ऐसे समय में मजबूत हुआ जब अभिनेता अपनी जिंदगी के कई उतार चढ़ाव से गुजर चुके थे। यही वजह है कि संजय के लिए मान्यता सिर्फ जीवनसाथी नहीं बल्कि भरोसेमंद साथी भी हैं। अभिनेता के मुताबिक मान्यता ने परिवार को संभालने के साथ मुश्किल समय में उनका हौसला भी बनाए रखा।

    मान्यता खुद भी फिल्मों से जुड़ी रही हैं और संजय दत्त के साथ शादी के बाद उन्होंने परिवार और बच्चों को प्राथमिकता दी। संजय का हालिया बयान यह बताता है कि उनकी ग्लैमर से भरी जिंदगी के पीछे परिवार की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है। जिस महिला ने मुश्किल वक्त में उनका साथ नहीं छोड़ा आज वही उनके लिए मां नरगिस के बाद सबसे मजबूत सहारा बन चुकी हैं।

  • वैभव सूर्यवंशी के इंतजार की कहानी, VVS ने बड़े मैच में उतारा अब GG क्यों रोक रहे हैं बेबी बॉस का बल्ला

    वैभव सूर्यवंशी के इंतजार की कहानी, VVS ने बड़े मैच में उतारा अब GG क्यों रोक रहे हैं बेबी बॉस का बल्ला


    नई दिल्ली। वैभव सूर्यवंशी का नाम इन दिनों भारतीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले युवा खिलाड़ियों में शामिल है लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने के बाद उनके फैंस का इंतजार और बढ़ गया है। लखनऊ में खेले गए मुकाबले में टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी पर भरोसा बनाए रखा। भारत ने मुकाबला आसानी से जीत लिया और ऐसे में इस संयोजन को बदलने की कोई तत्काल जरूरत भी नजर नहीं आई। इसके बावजूद अब रांची में होने वाले दूसरे टी20 से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या गौतम गंभीर वैभव सूर्यवंशी को मौका देंगे या फिर उन्हें एक और मैच बेंच पर बैठकर देखना पड़ेगा।

    वैभव की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि महज 15 साल की उम्र में उन्होंने जिस तरह क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है उसने उन्हें सामान्य युवा खिलाड़ी से कहीं आगे पहुंचा दिया है। आईपीएल में उनके आक्रामक अंदाज ने क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी की झलक दिखाई है। जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में अर्धशतक लगाने के बाद यह साफ हो गया कि वैभव सिर्फ उम्र की वजह से चर्चा में नहीं हैं बल्कि उनके बल्ले में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता भी मौजूद है।

    एशियन गेम्स के दौरान वीवीएस लक्ष्मण की कोचिंग में वैभव को पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल मुकाबले जैसे बड़े मैच में प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया था। उस समय उम्र को उनकी कमजोरी नहीं माना गया और टीम ने उनकी क्षमता पर भरोसा जताया। अब भारतीय टीम की जिम्मेदारी गौतम गंभीर के पास है और उनका नजरिया मौजूदा संयोजन को मजबूत बनाए रखने पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। लखनऊ में संजू और अभिषेक से बड़ी पारी नहीं आई लेकिन भारत ने मुकाबला आसानी से अपने नाम कर लिया। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के पास विजयी संयोजन को बरकरार रखने का मजबूत तर्क मौजूद है।

    फिर भी वैभव को लेकर सवाल इसलिए बना हुआ है क्योंकि किसी खिलाड़ी की वास्तविक क्षमता का अंदाजा उसे लगातार मौके देने के बाद ही लगाया जा सकता है। अगर टीम में जगह बनाने के लिए हर बार मौजूदा खिलाड़ियों का अच्छा प्रदर्शन ही कसौटी बनेगा तो फिर नए खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का अवसर कब मिलेगा। वैभव को टीम में शामिल करने का मतलब सिर्फ किसी खिलाड़ी को बाहर करना नहीं होगा बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य के एक बेहद रोमांचक विकल्प को आजमाना भी होगा।

    अब नजरें रांची पर टिक गई हैं। यहां वैभव को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है। बिहार से आने वाले इस युवा बल्लेबाज को देखने के लिए दर्शकों की दिलचस्पी साफ दिखाई दे रही है। रांची महेंद्र सिंह धोनी का शहर है और यहां क्रिकेट को लेकर जुनून किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में दर्शक चाहते हैं कि उन्हें इस नए युवा सितारे का बल्ला भी मैदान पर देखने को मिले।

    हालांकि टीम मैनेजमेंट को सिर्फ दर्शकों की मांग के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। क्रिकेट में संतुलन और टीम की जरूरत सबसे महत्वपूर्ण होती है। लेकिन वैभव जैसे एक्स फैक्टर को ज्यादा समय तक बाहर रखना भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल वैभव तैयार हैं फैंस तैयार हैं और रांची का माहौल भी तैयार है। अब फैसला गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट को करना है कि प्लेइंग इलेवन की पर्ची में इस बार बेबी बॉस का नाम आएगा या उनका इंतजार एक मैच और लंबा होगा।

  • हिमालय के नीचे छिपा गर्मी का बड़ा संकेत, तीन मीटर तक पिघली जमीन की परत, सैटेलाइट अध्ययन में खुलासा

    हिमालय के नीचे छिपा गर्मी का बड़ा संकेत, तीन मीटर तक पिघली जमीन की परत, सैटेलाइट अध्ययन में खुलासा


    नई दिल्ली। हिमालय में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम का असर अब केवल बर्फ और ग्लेशियरों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि जमीन के भीतर भी इसके संकेत मिलने लगे हैं। उत्तर पश्चिमी हिमालय के मटियान और बारालाचा क्षेत्र में किए गए एक अध्ययन में गर्मियों के दौरान जमीन की ऊपरी परत के तीन मीटर तक पिघलने का अनुमान सामने आया है। वैज्ञानिकों ने वर्ष 2020 से 2024 के बीच सैटेलाइट आंकड़ों की मदद से जमीन में होने वाले मौसमी बदलावों का अध्ययन किया। इसके बाद जमीन पर रडार तकनीक के जरिए इन परिणामों की जांच की गई जिसमें सैटेलाइट से मिले आंकड़ों की काफी हद तक पुष्टि हुई।

    यह अध्ययन आईआईटी मंडी से जुड़े शोधकर्ताओं की टीम ने किया है। इसमें कीर्ति कुमार महंत इप्शिता प्रधान और प्रोफेसर डेरिक्स प्रेज शुक्ला शामिल रहे। शोध का सार अगस्त 2026 में इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 46वीं कॉसपार वैज्ञानिक सभा में प्रस्तुत किया गया। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान और मौसम में बदलाव जमीन की ऊपरी परत को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं।

    वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान जमीन की ऊपरी परत पिघलती है और सर्दियों में फिर जम जाती है। इस हिस्से को सक्रिय परत कहा जाता है। इस परत की गहराई में होने वाला बदलाव वहां के तापमान और पर्यावरणीय परिस्थितियों का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। अध्ययन में सैटेलाइट आंकड़ों के आधार पर मटियान में सक्रिय परत की मोटाई करीब एक से तीन मीटर तक आंकी गई जबकि बारालाचा में यह लगभग आधे मीटर से दो मीटर तक पाई गई।

    इन आंकड़ों की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए शोधकर्ताओं ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार यानी जीपीआर तकनीक का इस्तेमाल किया। यह तकनीक जमीन के भीतर रेडियो तरंगें भेजकर अलग अलग परतों की स्थिति का पता लगाने में मदद करती है। जमीन पर हुई जांच में मटियान में पिघलने वाली परत की गहराई करीब 0.6 से 1.2 मीटर तक मिली। वहीं बारालाचा में यह गहराई लगभग 0.2 से 0.5 मीटर रही। इस अंतर के पीछे अधिक ऊंचाई और अपेक्षाकृत कम तापमान को प्रमुख कारण माना गया है।

    शोधकर्ताओं के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सक्रिय परत के नीचे लंबे समय से जमी जमीन मौजूद होती है। तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने पर इसके पिघलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर जमीन की मजबूती पानी के प्राकृतिक प्रवाह वनस्पति और कार्बन के प्राकृतिक चक्र पर पड़ सकता है। इसके अलावा हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन और अन्य भू तकनीकी जोखिमों को समझने के लिहाज से भी जमीन के भीतर हो रहे इन बदलावों की निगरानी बेहद जरूरी है।

    इस अध्ययन की एक अहम बात यह भी है कि सैटेलाइट और जमीन पर की गई जीपीआर जांच के परिणामों में मजबूत समानता देखने को मिली। इससे वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में सैटेलाइट तकनीक के जरिए उन दुर्गम हिमालयी इलाकों की भी निगरानी की जा सकेगी जहां जमीन पर जाकर लगातार अध्ययन करना बेहद मुश्किल होता है। बदलते तापमान के बीच हिमालय की जमीन में हो रहे ये बदलाव आने वाले समय के पर्यावरणीय और भूगर्भीय जोखिमों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत माने जा रहे हैं।