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  • Ravivar Mantra: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए अपनाएं ये आसान पूजा विधि

    Ravivar Mantra: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए अपनाएं ये आसान पूजा विधि


    नई दिल्ली। सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करने से आपके जीवन में चल रही सभी परे दिन सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करके उनकी कृपा प्राप्त कर लें। ज्योतिष शास्त्र में भी बताया गया है कि जो जातक सूर्य देव की पूजा अर्चना करेंगे उनका व्रत रहेंगे उनके घर परिवार में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहेगी। सूर्य भगवान की कृपा से रुका हुआ काम भी बनने लगता है आपकी कई परेशानियां खत्म हो जाती है। आज के दिन आपको उनके कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करना चाहिए।

    पूजा विधि
    आपको सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद तांबे के लोटे में सिंदूर अक्षत और लाल फूल डालकर आप सूर्य भगवान को जल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के चौकी में लाल रंग का कपड़ा रखकर सूर्य देव की तस्वीर स्थापित करें। भगवान को रोली, अक्षत, सुपारी, फूल आदि चढ़ाएं। फल व मिष्ठान का भोग लगाएं और फिर धूप दिखाएं।अब रविवार की व्रत कथा पढ़े या सुने। अंत में सूर्य देव की आरती जरूर करें।

    इन मंत्रों का करें जाप
    ॐ ह्रां भानवे नम:

    ॐ हृों खगाय नम:

    ॐ हृां मित्राय नम:

    ॐ हृीं रवये नम:

    ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।

    ॐ ह्रां हिरण्यगर्भाय नमः

    ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।

    ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।

    ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।

    ऊं घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:।

    इस प्रकार करें सूर्य भगवान को प्रसन्न
    सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन आपको लाल कपड़ा पहनना चाहिए ऐसा माना जाता है कि सूर्य भगवान को लाल कपड़ा अधिक प्रिय है। इससे उनकी कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। वहीं अगर आपका कोई भी काम नहीं बन रहा है तो आप सूर्य देव को अर्घ्य देते समय गुलहड़ का एक फूल लेकर सूर्य भगवान का मंत्र उच्चारण करके जल में डालकर अर्घ्य दें। इससे भगवान की कृपा पर बनी रहती है। इसके अलावा आज के दिन जरूरतमंदों को दान भी देना चाहिए।

  • 6 अप्रैल का पंचांग : बैशाख कृष्ण की चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

    6 अप्रैल का पंचांग : बैशाख कृष्ण की चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में दिन की शुरुआत हो या शुभ-अशुभ समय की जानकारी पंचांग के पांचों अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि शुभ समय में किया गया कार्य फलदायी वहीं, अशुभ समय में किए कार्य में बाधा आती है और सफलता भी नहीं मिलती।

    6 अप्रैल को सोमवार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। उदयातिथि के अनुसार, पूरे दिन चतुर्थी तिथि का ही मान होगा।

    नक्षत्र की बात करें तो अनुराधा नक्षत्र 6 अप्रैल की रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र लगेगा। सूर्योदय 6 अप्रैल को 6 बजकर 6 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 10 बजकर 55 मिनट पर और चंद्रास्त अगली सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर होगा।

    दृक पंचांग के अनुसार 6 अप्रैल को सिद्धि योग दोपहर 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। बालव करण दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद कौलव करण लगेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 6 मिनट से अगली रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से अच्छा माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।

    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 42 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक होगी। अमृत काल दोपहर 3 बजकर 19 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त 7 अप्रैल की रात 12 बजे से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस दौरान कोई महत्वपूर्ण काम शुरू न करें। यमगण्ड दोपहर 10 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक होगा। गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से 4 बजकर 11 मिनट तक होगा। गण्ड मूल 7 अप्रैल की सुबह 2 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। बाण रज सुबह 6 बजकर 9 मिनट से पूर्ण रात्रि तक रहेगा और विंछुड़ो पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

  • डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का तीखा जवाब, ‘मिडिल ईस्ट को बना देंगे नरक’

    डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का तीखा जवाब, ‘मिडिल ईस्ट को बना देंगे नरक’


    तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने कड़ा पलटवार किया है। ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान समझौता नहीं करता तो उस पर “कहर” बरसेगा। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ने की चेतावनी दी है।  खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघारी ने कहा कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरा क्षेत्र अमेरिका और इजरायल के लिए “नरक” बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को हराने का भ्रम विरोधियों को दलदल में फंसा देगा।

    ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा

    इब्राहिम जोल्फाघारी ने दावा किया कि ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइलों से इजरायल और अमेरिका से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल, ईरान पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के पास समझौते या होर्मुज खोलने के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने लिखा कि पहले 10 दिन का समय दिया गया था और अब 48 घंटे बाद कड़ी कार्रवाई हो सकती है।


    लगातार बदलते बयान, बढ़ता तनाव

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में ट्रंप के बयान लगातार बदलते रहे हैं। एक ओर वे कूटनीतिक समाधान की बात करते हैं, तो दूसरी ओर ईरान को “स्टोन एज” में भेजने जैसी कड़ी चेतावनी भी देते हैं। युद्ध को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन होर्मुज अब भी पूरी तरह नहीं खुला है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है।

    ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतें

    होर्मुज के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है। पहले जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी, अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। हालांकि, कुछ देशों के जहाजों को सीमित रूप से होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है, जिनमें भारत भी शामिल है। हाल ही में एक फ्रांसीसी कंपनी का जहाज इस मार्ग से गुजरने वाला पहला बड़ा पश्चिमी यूरोपीय जहाज बना। इसके बावजूद, क्षेत्र में लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के चलते सामान्य समुद्री आवाजाही अब भी प्रभावित बनी हुई है।

  • ईस्टर के मौके पर देश के शीर्ष नेताओं का संदेश, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई

    ईस्टर के मौके पर देश के शीर्ष नेताओं का संदेश, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई


    नई दिल्ली।ईस्टर के पावन अवसर पर देशभर में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व को साझा किया। नेताओं ने अपने संदेशों में शांति, प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ईस्टर आशा, नए जीवन और सकारात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। साथ ही उन्होंने यीशु मसीह की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन हमें दया, करुणा और एकता का मार्ग दिखाता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से इन मूल्यों को अपनाकर समाज में सद्भाव बढ़ाने की अपील की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी ईस्टर की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन यीशु मसीह के पुनरुत्थान की याद दिलाता है, जो सत्य और प्रेम की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें त्याग, क्षमा और करुणा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने देशवासियों से शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अपने संदेश में कहा कि ईस्टर का पर्व नए आरंभ, आस्था और उम्मीद का संदेश देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दिन सभी के जीवन में खुशियां, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा।

    क्या है ईस्टर का महत्व?

    ईसाई धर्म में ईस्टर सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, रोमन शासन द्वारा सूली पर चढ़ाए जाने के तीन दिन बाद यीशु मसीह मृतकों में से जीवित हो उठे थे। यह घटना पाप और मृत्यु पर विजय का प्रतीक मानी जाती है।

    ईस्टर ‘होली वीक’ का अंतिम और सबसे प्रमुख दिन होता है। इस सप्ताह में पाम संडे, मौंडी थर्सडे और गुड फ्राइडे जैसे महत्वपूर्ण दिन शामिल होते हैं, जो यीशु मसीह के जीवन की अहम घटनाओं को दर्शाते हैं।

    ईस्टर एग्स की परंपरा

    इस पर्व का एक खास आकर्षण ‘ईस्टर एग्स’ भी होते हैं। अंडों को नए जीवन और आशा का प्रतीक माना जाता है। परंपरागत रूप से इन्हें रंग-बिरंगे या लाल रंग में सजाया जाता है, जो त्याग और पुनर्जन्म का संकेत देते हैं।

  • बैंकिंग सेक्टर में नौकरियों का सुनहरा अवसर, 1000 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    बैंकिंग सेक्टर में नौकरियों का सुनहरा अवसर, 1000 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    नई दिल्ली। सरकारी बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए पंजाब एंड सिंध बैंक ने लोकल बैंक ऑफिसर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह बैंक भारत सरकार के स्वामित्व वाला संस्थान है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

    जारी अधिसूचना के अनुसार, इस भर्ती के तहत कुल 1,000 पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में वैकेंसी निर्धारित की गई है। सबसे ज्यादा 200 पद उत्तर प्रदेश में हैं, जबकि गुजरात में 125 और पंजाब में 100 पदों पर भर्ती होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 80-80, तमिलनाडु में 65, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 60-60 पद, असम में 50, तेलंगाना में 30, पश्चिम बंगाल में 30, हिमाचल प्रदेश में 20, अरुणाचल प्रदेश में 15, झारखंड और केरल में 10-10 और नागालैंड में 5 पद शामिल हैं।

    इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले लिखित परीक्षा और उसके बाद इंटरव्यू। अंतिम चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा।

    चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतन दिया जाएगा। इस पद पर नियुक्ति मिलने के बाद उम्मीदवारों को 48,480 रुपए से लेकर 85,920 रुपए तक का मासिक वेतन मिलेगा।

    आवेदन शुल्क भी निर्धारित किया गया है। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 850 रुपए के साथ लागू टैक्स और पेमेंट गेटवे शुल्क देना होगा। वहीं, एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 100 रुपए रखा गया है, जिस पर अतिरिक्त टैक्स और चार्ज लागू होंगे।

    इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 तय की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन फॉर्म भरने के बाद उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है, जो बैंकिंग सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

  • केरल में सियासी हलचल तेज! अमित शाह के रोड शो से पहले बेपोर में बढ़ी हलचल

    केरल में सियासी हलचल तेज! अमित शाह के रोड शो से पहले बेपोर में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली।केरल के बेपोर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित रोड शो से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। रविवार को होने वाले इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और स्थानीय स्तर पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सड़कें सजाई जा रही हैं, कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट रही है और जगह-जगह स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में बेपोर एक तरह से राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।

    स्थानीय लोगों में भी इस कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्सुकता है। कई लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अमित शाह के स्वागत के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि “हमारे नेता अमित शाह यहां आ रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है। बड़ी संख्या में लोग उनके रोड शो में शामिल होने के लिए तैयार हैं।” वहीं, कुछ भाजपा समर्थकों ने उम्मीद जताई कि अगर भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मौका मिलता है तो विकास की रफ्तार तेज होगी और राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा।

    दिनभर रहेंगे व्यस्त, कई कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

    अमित शाह का कार्यक्रम केवल बेपोर तक सीमित नहीं रहेगा। रोड शो के बाद वे एर्नाकुलम के कुन्नाथुनाद क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता से संवाद करेंगे। इसके बाद शाम को तिरुवनंतपुरम के कट्टकड़ा इलाके में उनकी एक और बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। दिन के अंत में वे थंपानूर में प्रवासी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। इस तरह उनका पूरा दिन राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों से भरा रहेगा।

    भाजपा का चुनावी अभियान तेज

    इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी केरल में चुनावी अभियान को धार देने पहुंचे हैं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में पिछले 11 वर्षों में शासन व्यवस्था और राजनीतिक संस्कृति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकारें जनहित, जवाबदेही और विकास के मुद्दों पर काम करती हैं, जिससे अन्य दलों को भी अपनी कार्यशैली बदलनी पड़ी है।

    नड्डा ने यह भी कहा कि पहले की राजनीति में विभाजन और तुष्टीकरण का बोलबाला था, लेकिन अब विकास-केन्द्रित राजनीति का दौर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस संदेश को आम जनता तक पहुंचाएं और राज्य में पार्टी को मजबूत करें।

    बदलाव की उम्मीद या सियासी रणनीति?

    केरल में पारंपरिक रूप से मजबूत राजनीतिक दलों के बीच भाजपा अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अमित शाह और जेपी नड्डा के दौरे को पार्टी की रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बेपोर में उमड़ा उत्साह यह संकेत जरूर देता है कि भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

  • MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी

    MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी


    भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म हो गई है। इसमें राजधानी भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। कुल मिलाकर चार प्रमुख शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित हुए हैं।

    जानकारी के अनुसार, NABH सर्टिफिकेट न मिलने के कारण इन अस्पतालों में अब मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं होगा। वहीं, फुल NABH प्रमाणित अस्पताल “डीम्ड इंपैनलमेंट” का लाभ प्राप्त करेंगे और अस्पतालों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। एंट्री लेवल NABH अस्पतालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। साथ ही मरीजों के फीडबैक से अस्पतालों की निगरानी भी की जाएगी।

    NABH सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता और सुरक्षा का प्रमाण होता है। इसमें 600 से अधिक मानकों पर अस्पतालों की जांच की जाती है। ये मानक मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाएं और सर्जरी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। सरकार का मानना है कि NABH प्रमाणपत्र मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की गारंटी देता है।

    इस फैसले के बाद प्रभावित अस्पतालों के मरीजों को अब मुफ्त इलाज के विकल्प सीमित होंगे। मरीजों को अब अपने नजदीकी फुल NABH प्रमाणित अस्पतालों में इलाज कराने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन अल्पकाल में लोग असुविधा और परेशानियों का सामना कर सकते हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि आगामी दिनों में अस्पतालों को NABH मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। वहीं, मरीजों से फीडबैक लेकर अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

    इस बदलाव से मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और मरीजों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि फिलहाल लोगों को अस्पतालों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

  • समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर

    समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर


    नई दिल्ली।समुद्र की गहराइयों में मौजूद कोरल रीफ यानी मूंगा चट्टानें प्रकृति की सबसे अद्भुत और जीवंत संरचनाओं में गिनी जाती हैं। इन्हें ‘समुद्र का वर्षावन’ भी कहा जाता है, क्योंकि ये बेहद कम क्षेत्र में फैली होने के बावजूद समुद्री जैव-विविधता का बड़ा आधार हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, दुनिया के महासागरों के सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्से में मौजूद ये रीफ करीब 25 प्रतिशत समुद्री जीवों को आश्रय, भोजन और सुरक्षा प्रदान करती हैं। छोटे-छोटे जीवों यानी पॉलिप्स द्वारा हजारों साल में बनने वाली ये संरचनाएं समुद्र की पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    कोरल रीफ केवल जैव-विविधता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। ये चट्टानें समुद्री तूफानों और चक्रवातों की तीव्रता को कम कर तटों को क्षरण से बचाती हैं। इसके अलावा, मत्स्य पालन, पर्यटन और शोध गतिविधियों के जरिए ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्थित ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया की सबसे बड़ी कोरल रीफ है, जो हजारों समुद्री प्रजातियों का घर है और लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनी हुई है।

    क्या है कोरल और रीफ में अंतर?

    वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ‘रीफ’ समुद्र तल से ऊपर उठी किसी भी संरचना को कहा जाता है, जबकि ‘कोरल’ सूक्ष्म जीव होते हैं जो कैल्शियम कार्बोनेट का ढांचा बनाते हैं। इन कोरल के समूह को ‘कोरल कॉलोनी’ कहा जाता है और जब ये बड़े पैमाने पर संरचना बनाते हैं, तो उसे कोरल रीफ कहा जाता है। कोरल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—कठोर और कोमल। कठोर कोरल ही रीफ का मजबूत ढांचा तैयार करते हैं।

    क्यों खतरनाक है ‘कोरल ब्लीचिंग’?

    आज इन खूबसूरत संरचनाओं पर सबसे बड़ा खतरा कोरल ब्लीचिंग का मंडरा रहा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र का तापमान बढ़ने पर कोरल अपने अंदर मौजूद ‘जूक्सैन्थेली’ नामक शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। यही शैवाल कोरल को रंग और पोषण देता है। इसके निकलने से कोरल का रंग सफेद हो जाता है और वह कमजोर पड़ जाता है। यदि तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहे, तो कोरल की मृत्यु भी हो सकती है।

    हाल के वर्षों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। 2023 से 2025 के बीच हुई वैश्विक ब्लीचिंग घटना ने दुनिया के लगभग 84 प्रतिशत कोरल रीफ को प्रभावित किया, जो अब तक की सबसे गंभीर स्थिति मानी जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण, समुद्री गाद और जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को और गहरा कर रहे हैं।

    क्यों जरूरी है संरक्षण?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोरल रीफ खत्म होते हैं, तो इसका असर सिर्फ समुद्री जीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तटीय आबादी, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है। समुद्र के इस ‘जीवंत खजाने’ को बचाने के लिए जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण, प्रदूषण कम करना और सतत विकास के उपाय अपनाना समय की मांग है।

  • मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य

    मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य


    नई दिल्ली।मंदिरों में घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। माना जाता है कि मंदिर का गर्भगृह एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र होता है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती रहती है।

    आध्यात्मिक कारण: ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम

    हिंदू धर्म में प्रदक्षिणा का अर्थ होता है-ईश्वर को अपने जीवन का केंद्र मानकर उनके चारों ओर घूमना। क्लॉकवाइज दिशा में चलने से देवता हमेशा आपकी दाईं ओर रहते हैं, जिसे शुभ और पवित्र माना गया है।

    इससे मन में श्रद्धा, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वह आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनता है।

    वैज्ञानिक कारण: ऊर्जा प्रवाह के साथ तालमेल

    क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे एक वैज्ञानिक सोच भी जुड़ी है। Sadhguru Jaggi Vasudev के अनुसार, उत्तरी गोलार्ध में ऊर्जा का प्रवाह घड़ी की दिशा में होता है।

    इसी कारण मंदिरों में उसी दिशा में परिक्रमा करने से शरीर उस ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाता है। इससे मानसिक शांति, शारीरिक स्फूर्ति और बेहतर एकाग्रता प्राप्त होती है।

    यह भी कहा जाता है कि इस दिशा में चलने से शरीर ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अधिक प्रभावी तरीके से अवशोषित कर पाता है।

    गीले कपड़ों में प्रदक्षिणा का महत्व

    धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि गीले कपड़ों में परिक्रमा करने से ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। पुराने समय में मंदिरों के पास कुंड या कुएं होते थे, जहां स्नान कर भक्त गीले वस्त्रों में ही प्रदक्षिणा करते थे।

    गीलापन शरीर को ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।

    अलग-अलग देवताओं की परिक्रमा संख्या

    शास्त्रों में विभिन्न देवताओं के लिए प्रदक्षिणा की संख्या भी निर्धारित है-

    भगवान गणेश: 3 बार
    भगवान विष्णु: 4 बार
    मां दुर्गा: 1 बार
    भगवान शिव: आधी परिक्रमा (जलधारी तक)
    यह नियम ऊर्जा संतुलन और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बनाए गए हैं।

    मंदिर में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है। यह हमें प्राकृतिक ऊर्जा के साथ जोड़कर मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।

  • अनूपपुर बिल्डिंग हादसा: तीन की मौत, CM डॉ मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान किया

    अनूपपुर बिल्डिंग हादसा: तीन की मौत, CM डॉ मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान किया


    भोपाल। अनूपपुर के कोतमा बस स्टैंड के पास शनिवार को अग्रवाल लॉज की तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। हादसे के समय इमारत के बगल में निर्माण कार्य भी चल रहा था, जिससे यह घटना होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का ऐलान किया। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान और संबल योजना के तहत चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, रेड क्रॉस से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से दो-दो लाख और रेड क्रॉस से पचास-पचास हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

    सीएम डॉ मोहन यादव ने लिखा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जा रही है ताकि उन्हें राहत मिले और स्थिति संभाली जा सके।

    हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम, कोतमा पुलिस, नगर पालिका और एसईसीएल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

    इस घटना ने शहर और राज्य में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों के पालन की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। सरकार ने प्रभावित परिवारों और घायलों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है और कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।