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  • नेटफ्लिक्स पर अजय देवगन की ‘धमाल 4’ से आगे निकली साउथ फिल्म, टॉप 10 ट्रेंडिंग फिल्मों में इनका भी जलवा

    नेटफ्लिक्स पर अजय देवगन की ‘धमाल 4’ से आगे निकली साउथ फिल्म, टॉप 10 ट्रेंडिंग फिल्मों में इनका भी जलवा

    विश्वनाथ एंड सन

    तमिल फिल्म विश्वनाथ एंड सन आज नंबर 1 पर ट्रेंड कर रही है। इस फिल्म में सूर्या ने रईस बिजनेसमैन संजय विश्वनाथ का किरदार निभाया है। वंश आगे बढ़ाने के लिए संजय की मां उस पर शादी करने का दबाव डालती है। लेकिन संजय शादी करने के बजाय एक सरोगेट बच्चे का पिता बन जाता है। आगे की कहानी मजेदार है।

    धमाल 4

    अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी की फिल्म धमाल 4 आज नंबर 2 पर ट्रेंड कर रही है। फिल्म की कहानी एक छुपे खजाने की तलाश पर टिकी है। आज ये फिल्म नंबर 2 पर ट्रेंड कर रही है।

    GDN

    GDN नाम की फिल्म खबरों में बनी हुई है। इस फिल्म में आर माधवन ने लीड किरदार निभाया है। फिल्म की कहानी आविष्कारक और उद्योगपति जीडी नायडु पर बेस्ड है। आज ये फिल्म नंबर 3 पर ट्रेंड कर रही है।

    गांधारी

    तापसी पन्नू की फिल्म गांधारी आते ही नेटफ्लिक्स पर छा गई थी। फिल्म की कहानी एक ऐसी मां की है जो अपनी लापता बच्ची की तलाश में सब कुछ भूल जाती है। ये फिल्म आज नंबर 4 पर ट्रेंड कर रही है।

    कोरियन कनकराजू

    एक तेलुगू फिल्म कोरियन कनकराजू नेटफ्लिक्स पर पसंद की जा रही है। फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स की है जिसके अंदर कोरियन डॉन की आत्मा घुस जाती है। ये फिल्म आज नंबर 5 पर ट्रेंड कर रही है।

    एल्फा

    आलिया भट्ट और शरवरी की फिल्म एल्फा बेशक बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन OTT पर छाई हुई है। ये फिल्म आज नंबर 6 पर ट्रेंड कर रही है। फिल्म की कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसे बचपन से देश विरोधी एक्टिविटी सिखाई गई।

    कॉकटेल 2

    शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और कृति सेनन की फिल्म कॉकटेल 2 बॉक्स ऑफिस के बाद लंबे समय से OTT पर कमाल कर रही है। फिल्म एक ऐसे ट्रायंगल की है जो आपस में एक दूसरे से प्यार करता है। ये फिल्म आज नंबर 7 पर ट्रेंड कर रही है।

    न्यूटन का तीसरा नियम

    एक और तेलुगू फिल्म जिसका नाम है न्यूटन का तीसरा नियम। ये फिल्म 90 के दशक के डबल मर्डर और उससे जुड़ी मिस्ट्री पर बेस्ड है। कहानी सीट से हिलने नहीं देती। आज ये फिल्म नंबर 8 पर ट्रेंड कर रही है।

    प्यार प्रेमा कल्याणम

    प्यार प्रेमा कल्याणम एक ऐसी जोड़ी की कहानी है जिनके बीच प्यार होता है, बात शादी तक जाती है, लेकिन लड़की विदाई से भाग जाती है। लड़की को शादी के बाद अपना मायका नहीं छोड़ना। इसके बाद लड़का घर जमाई बनकर रहने लगता है। फिल्म की कहानी मजेदार है। इसलिए ये फिल्म लंबे समय से नेटफ्लिक्स पर कमाल कर रही है। आज ये फिल्म नंबर 9 पर ट्रेंड कर रही है।

    गट्टा कुश्ती 2

    ऑडियंस ने गट्टा कुश्ती के पहले पार्ट को खूब प्यार दिया था। अब गट्टा कुश्ती 2 ट्रेंडिंग में है। फिल्म की कहानी एक पहलवान पत्नी और घर में रहने वाले पति की है। ये फिल्म आज टॉप 10 पर ट्रेंड कर रही है।

  • जया बच्चन की डांट से बचने के लिए अमिताभ बच्चन अपनाते हैं खास ट्रिक, KBC में बताया फैमिली ग्रुप का मजेदार राज

    जया बच्चन की डांट से बचने के लिए अमिताभ बच्चन अपनाते हैं खास ट्रिक, KBC में बताया फैमिली ग्रुप का मजेदार राज

    नई दिल्ली । ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में अमिताभ बच्चन अक्सर अपनी निजी जिंदगी और जया बच्चन से जुड़े मजेदार किस्से साझा करते रहते हैं। हाल ही में शो के एक प्रोमो में उन्होंने खुलासा किया कि जब उन्हें अपनी पत्नी के साथ किसी शादी या कार्यक्रम में जाना होता है, तो वह लेट होने से बचने के लिए एक खास ट्रिक अपनाते हैं।

    अमिताभ बच्चन की समय पर पहुंचने की खास ट्रिक

    केबीसी 18 के मंच पर जब एक महिला कंटेस्टेंट ने बिग बी से पूछा कि क्या उन्हें भी कभी जया जी का इंतजार करना पड़ता है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘मैं आपको अपनी ट्रिक बताता हूं। जब भी हमें कहीं जाना होता है, तो मैं उन्हें (जया बच्चन) असल समय से 1 घंटा पहले का टाइम बताता हूं। अगर शादी का समय शाम 6 बजे का है, तो मैं उन्हें 5 बजे का समय बताता हूं। इससे वह 3:30 से 4 बजे के बीच तैयारी शुरू कर देती हैं और हम बिल्कुल सही समय पर पहुंच जाते हैं!’

    डांट से बचने के लिए ‘फैमिली ग्रुप’ का सहारा

    कुछ दिन पहले केबीसी में ही एक कंटेस्टेंट ने बिग बी से पूछा था कि क्या उन्हें घर लेट आने पर डांट पड़ती है। इस पर अमिताभ ने कहा था, ‘मुझे पता होता है कि क्या होने वाला है इसलिए मैं जैसे ही उठता हूं, हमारे परिवार के सभी सदस्यों का एक ग्रुप बनाया हुआ है, उस ग्रुप में मैं हाथ जोड़कर ‘नमस्कार’ का मैसेज भेजता हूं। फिर मैं उन्हें बताता हूं कि मुझे कहीं शूट पर जाना है और देर हो जाएगी, इसलिए वे रात के खाने के लिए मेरा इंतजार न करें। मैं सभी को पहले ही बता देता हूं, और इस तरह मैं डांट से बच जाता हूं।’

    जब लेट होने की खबर नहीं दे पाते बिग बी तब क्या होता है?

    अमिताभ ने आगे कहा, ‘लेकिन मान लीजिए कि मैंने उन्हें (जया बच्चन को) नहीं बताया, तो मुझे डांट पड़ती है और मुझसे पूछा जाता है, ‘आप कहां थे? आपने हमें बताया नहीं। क्या यह घर आने का समय है?’ इसलिए, अगर मुझे बहुत देर हो जाती है, तो वह अपना खाना खाकर खुद सो जाती हैं।’

    अमिताभ और जया बच्चन की लव स्टोरी

    दोनों की मुलाकात 1971 में फिल्म ‘गुड्डी’ के सेट पर हुई थी। फिर 1972 में आई फिल्म ‘एक नजर’ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन, जया बच्चन के प्रति आकर्षित होने लगे। 1973 में जब उनकी फिल्म ‘जंजीर’ हिट हुई तब उन्होंने दोस्तों के साथ लंदन घूमने जाने का प्लान बनाया। लंदन जाने की परमिशन लेते जब अमिताभ अपने पिता हरिवंश राय बच्चन के पास गए तो उन्होंने साफ कहा कि अगर साथ जाना है, तो पहले शादी करनी होगी।

    हुआ था चट मंगनी पट ब्याह

    पिता की बात मानकर 3 जून 1973 को एक निजी समारोह में दोनों ने शादी की और उसी दिन लंदन के लिए रवाना हो गए। बता दें, अमिताभ और जया के दो बच्चे हैं – श्वेता बच्चन नंदा और अभिषेक बच्चन। वहीं तीन नाती नातिन/पोती हैं- नव्या नवेली नंदा, अगस्त्य नंदा और आराध्या बच्चन।

  • बिजली के तार ने छीन ली 17 साल के सौरभ की जिंदगी हादसे के बाद परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

    बिजली के तार ने छीन ली 17 साल के सौरभ की जिंदगी हादसे के बाद परिवार ने लगाए गंभीर आरोप


    शिवपुरी । शिवपुरी में कबाड़ा उठाने गए 17 वर्षीय नाबालिग की करंट लगने से मौत हो गई। गंभीर रूप से झुलसने के बाद सौरभ शाक्य का ग्वालियर में कई दिनों तक इलाज चला लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। हादसे में सौरभ का शरीर करीब 70 प्रतिशत झुलस गया था। सोमवार को ग्वालियर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब शिवपुरी कोतवाली पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी।

    जानकारी के मुताबिक यह हादसा 6 जुलाई को शिवपुरी की हनुमान कॉलोनी में हुआ था। सौरभ अपने दोस्त सुमित शाक्य के साथ हाथ ठेला लेकर कबाड़ा खरीदने निकला था। दोनों एक मकान पर पहुंचे थे। वहां मौजूद महिला ने सौरभ से पहली मंजिल की छत पर रखा कबाड़ा नीचे लाने के लिए कहा। सौरभ कबाड़ा लेने के लिए ऊपर पहुंचा तो वहां मौजूद बिजली के तार की चपेट में आ गया।

    करंट लगते ही सौरभ के शरीर में आग लग गई। बिजली का झटका इतना तेज था कि वह पहली मंजिल से नीचे गिर गया। हादसे के बाद उसका दोस्त सुमित उसे हाथ ठेले पर लेकर सिद्धि विनायक अस्पताल पहुंचा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज भेजा गया। हालत बेहद नाजुक होने के कारण उसी दिन सौरभ को ग्वालियर रेफर कर दिया गया था। ग्वालियर में कई दिनों तक उसका इलाज चला लेकिन आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

    सौरभ की बहन काजल शाक्य ने बताया कि हादसे के बाद जब परिवार के लोग संबंधित मकान पर पहुंचे तो वहां मौजूद महिला ने मदद करने के बजाय परिवार पर चोरी का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली थाने का रुख किया था। परिजनों ने पुलिस पर सुनवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया था।

    सौरभ के परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है। उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार फिजिकल थाना क्षेत्र में कोलियों के मंदिर के पास किराए के मकान में रहता है। परिवार के तीन भाई मेहनत मजदूरी करके घर का खर्च चलाते थे। सौरभ भी कबाड़ा उठाने और बेचने का काम करता था।

    अब सौरभ की मौत के बाद परिवार हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। परिजन चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और यह सामने आए कि आखिर बिजली के तार की चपेट में आने से नाबालिग की जान कैसे गई। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।

  • छह साल बाद पूरा हुआ अलेक्जेंडर ज्वेरेव का सपना, बेन शेल्टन को हराकर पहली बार जीता US Open खिताब

    छह साल बाद पूरा हुआ अलेक्जेंडर ज्वेरेव का सपना, बेन शेल्टन को हराकर पहली बार जीता US Open खिताब

    नई दिल्ली । जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने यूएस ओपन 2026 में मेन्स सिंगल्स खिताब जीत लिया. 13 सितंबर (रविवार) को न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में आयोजित खिताबी मुकाबले में ज्वेरेव ने यूएसए के बेन शेल्टन को 6-3, 7-6(2), 5-7, 6-2 से हराया. ज्वेरेव ने यह मुकाबला 3 घंटा और 33 मिनट में जीता. वर्ल्ड नंबर-2 ज्वेरेव का यह पहला यूएस ओपन खिताब है. ओवरऑल ज्वेरेव ने दूसरी बार ग्रैंड स्लैम टाइटल जीता है. इसी साल फ्रेंच ओपन में भी ज्वेरेव ने खिताबी जीत हासिल की थी.

    फाइनल जीतने के बाद 29 वर्षीय अलेक्जेंडर ज्वेरेव कुछ पल तक कोर्ट पर खड़े रहे. बेन शेल्टन की फोरहैंड गलती के साथ जैसे ही मुकाबला खत्म हुआ, उन्हें भी कुछ सेकंड के लिए यकीन नहीं हुआ कि आखिरकार वह मंजिल हासिल कर चुके हैं. आर्थर ऐश स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के शोर के बीच उन्होंने दोनों हाथ ऊपर उठाए और लंबे इंतजार के बाद इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया.

    अलेक्जेंडर ज्वेरेव के लिए इस जीत की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि छह साल पहले इसी टूर्नामेंट में उनका सपना टूट गया था. 2020 यूएस ओपन फाइनल में उन्होंने डोमिनिक थीम के खिलाफ दो सेट की बढ़त हासिल कर ली थी, लेकिन इसके बाद मुकाबला उनके हाथ से निकल गया था. इस बार भी तीसरे सेट में बेन शेल्टन की वापसी ने पुराने फाइनल की यादें ताजा कर दी थीं. ज्वेरेव शुरुआती दो सेट जीत चुके थे, लेकिन शेल्टन ने तीसरा सेट 7-5 से अपने नाम कर मुकाबले को फिर से रोमांचक बना दिया. हालांकि ज्वेरेव ने चौथे सेट में खुद को संभाला और कोई बड़ा उलटफेर नहीं होने दिया.

    दूसरी ओर आठवीं वरीयता प्राप्त बेन शेल्टन अमेरिकी टेनिस के लिए बड़ा इतिहास रचने की कोशिश में थे. वह 2003 में एंडी रोडिक के बाद ग्रैंड स्लैम सिंगल्स खिताब जीतने वाले पहले अमेरिकी पुरुष खिलाड़ी बनने से सिर्फ एक जीत दूर थे. लेकिन अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने उनका सपना पूरा नहीं होने दिया. इस जीत के साथ ज्वेरेव ने शेल्टन के खिलाफ अपना रिकॉर्ड 6-0 कर लिया.

    ज्वेरेव ने फाइनल की शुरुआत बेहद आक्रामक अंदाज में की. उनके गहरी और तेज बेसलाइन शॉट्स ने बेन शेल्टन को लगातार पीछे रखा. 23 वर्षीय अमेरिकी खिलाड़ी ने शुरुआती गेम में कुछ शानदार शॉट जरूर लगाए, लेकिन ज्वेरेव ने दबाव बनाए रखा. शेल्टन के डबल फॉल्ट ने ज्वेरेव को शुरुआती ब्रेक दिलाया और जर्मन खिलाड़ी ने 2-0 की बढ़त बना ली. इसके बाद 5-3 पर ज्वेरेव ने एक और ब्रेक हासिल किया और पहला सेट 6-3 से अपने नाम कर लिया.

    दूसरे सेट में बेन शेल्टन ने वापसी की कोशिश की. उनकी सर्विस बेहतर हुई और लंबे रैलियों में उन्होंने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को बराबरी की चुनौती दी. दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ और कोई भी आसानी से बढ़त बनाने में सफल नहीं रहा. सेट 5-5 तक पहुंचा और मुकाबला टाईब्रेक में चला गया. यहां ज्वेरेव ने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाया. उन्होंने 5-0 की बढ़त हासिल कर ली और आखिर में टाईब्रेक 7-2 से जीतकर मैच में 2-0 की बढ़त बना ली.

    तीसरे सेट में शेल्टन का जबरदस्त खेल

    दो सेट से पीछे होने के बावजूद बेन शेल्टन ने हार नहीं मानी. उन्होंने तीसरे सेट में आक्रामकता बढ़ाई और अलेक्जेंडर ज्वेरेव की लय को तोड़ने में सफल रहे. 5-5 के स्कोर पर शेल्टन ने ज्वेरेव पर दबाव बनाया. इसके बाद उन्होंने 0-40 की बढ़त हासिल कर तीन सेट पॉइंट हासिल किए. ज्वेरेव ने एक मौका बचाया, लेकिन अगली कोशिश में उनकी फोरहैंड वॉली बाहर चली गई. शेल्टन ने तीसरा सेट 7-5 से जीतकर मुकाबले में वापसी की उम्मीद जगा दी.

    चौथे सेट में ज्वेरेव ने नहीं दोहराई पुरानी गलती

    चौथे सेट में अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने बेन शेल्टन की सर्विस पर दबाव बनाया और जल्द ही ब्रेक हासिल कर लिया. इसके बाद उन्होंने अपनी सर्विस बचाते हुए 2-0 की बढ़त बना ली. शेल्टन ने संघर्ष जारी रखा, लेकिन ज्वेरेव ने उन्हें मैच में वापस आने का मौका नहीं दिया. 4-2 पर ज्वेरेव ने एक और ब्रेक हासिल किया. शेल्टन की लगातार गलतियों का फायदा उठाते हुए उन्होंने तीन ब्रेक पॉइंट बनाए और बैकहैंड की एक और गलती के बाद बढ़त 5-2 कर ली.

    5-2 पर अलेक्जेंडर ज्वेरेव खिताब के लिए सर्व करने उतरे. शुरुआत में डबल फॉल्ट के कारण थोड़ी परेशानी जरूर आई, लेकिन उन्होंने तुरंत जोरदार ऐस और दमदार फोरहैंड विनर के साथ वापसी की. इसके बाद उन्हें चैम्पियनशिप पॉइंट मिला. शेल्टन का फोरहैंड बाहर चला गया और ज्वेरेव ने 6-2 से चौथा सेट जीतकर यूएस ओपन ट्रॉफी अपने नाम कर ली.

  • शिवपुरी में शराब दुकान बंद कराने निकले ग्रामीण पुलिस ने रोका तो सड़क पर बैठकर किया चक्काजाम

    शिवपुरी में शराब दुकान बंद कराने निकले ग्रामीण पुलिस ने रोका तो सड़क पर बैठकर किया चक्काजाम


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के नावली गांव में सरकारी शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन रविवार शाम उस समय सड़क पर पहुंच गया जब पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। शराब दुकान बंद कराने के लिए गांव से निकले पुरुषों और महिलाओं को पुलिस ने नावली मोड़ के पास रोक दिया। इससे नाराज ग्रामीण सड़क पर ही बैठ गए और खोड़ सिरसौद मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब एक घंटे तक सड़क पर आवागमन प्रभावित रहा। बाद में पुलिस की समझाइश के बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त किया और वापस गांव लौट गए।

    जानकारी के मुताबिक नावली गांव के कुछ ग्रामीण गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर सिरसौद थाना क्षेत्र में संचालित सरकारी शराब दुकान को बंद कराने की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर रविवार शाम ग्रामीण प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। ग्रामीणों के प्रदर्शन की जानकारी पुलिस को मिली तो खोड़ चौकी प्रभारी संजय लोधी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए।

    पुलिस ने ग्रामीणों को नावली मोड़ के पास मंदिर के सामने रोक लिया। ग्रामीण शराब दुकान बंद कराने की मांग को लेकर आगे जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें वहीं रोक दिया। इससे ग्रामीण नाराज हो गए और उन्होंने सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते खोड़ सिरसौद मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रुक गई और चक्काजाम की स्थिति बन गई।

    पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि गांव के पास संचालित शराब दुकान को बंद किया जाना चाहिए। ग्रामीणों के सड़क पर बैठने से करीब एक घंटे तक मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान पुलिस मौके पर मौजूद रही और स्थिति को नियंत्रित करने के साथ ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करती रही।

    करीब एक घंटे बाद खोड़ चौकी प्रभारी संजय लोधी ने ग्रामीणों को शराब दुकान से जुड़े नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संबंधित शराब दुकान सरकारी है और नियमों के तहत उसका स्थान बदला जा सकता है। पुलिस ने ग्रामीणों को इस प्रक्रिया और संबंधित प्रावधानों के बारे में समझाया। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस की बात मान ली और सड़क से हट गए।

    ग्रामीणों के सड़क से हटने के बाद खोड़ सिरसौद मार्ग पर यातायात सामान्य हो गया। इसके बाद प्रदर्शन में शामिल ग्रामीण अपने गांव वापस लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम में किसी बड़े विवाद या अप्रिय स्थिति की जानकारी सामने नहीं आई। पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हो गया।

    शराब दुकान के खिलाफ ग्रामीणों का यह विरोध स्थानीय स्तर पर शराब बिक्री को लेकर लोगों की नाराजगी को भी सामने लाता है। ग्रामीणों ने दुकान बंद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था लेकिन पुलिस ने उन्हें नियमों की जानकारी देकर शांत कराया। फिलहाल दुकान को बंद करने के बजाय उसके स्थानांतरण की संभावना को लेकर नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया की बात सामने आई है।

  • विराट कोहली के टैटू सिर्फ डिजाइन नहीं, जिंदगी के अहम पड़ावों की कहानी हैं; परिवार, आस्था और क्रिकेट से जुड़ी खास यादें

    विराट कोहली के टैटू सिर्फ डिजाइन नहीं, जिंदगी के अहम पड़ावों की कहानी हैं; परिवार, आस्था और क्रिकेट से जुड़ी खास यादें

    नई दिल्ली । क्रिकेट के मैदान पर विराट कोहली को याद करते ही सबसे पहले उनके शॉट्स, आक्रामक अंदाज, जोशीले जश्न और खेल के प्रति जुनून की तस्वीर सामने आती है। इसके बाद उनके रिकॉर्ड और रन याद आते हैं, लेकिन कोहली ने सिर्फ बल्लेबाजी से ही एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित नहीं किया। उनकी दाढ़ी, हेयरस्टाइल, पहनावा और अंदाज भी युवाओं के बीच चर्चा का हिस्सा रहे हैं। इन सबके बीच उनके शरीर पर बने टैटू उनकी पहचान का एक ऐसा हिस्सा हैं, जो मैदान से बाहर कोहली के व्यक्तित्व की बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं।

    कोहली के दोनों हाथों पर कई टैटू हैं। पहली नजर में ये डिजाइन किसी रॉकस्टार की तरह बहुत ज्यादा शोर मचाने वाले नहीं लगते, लेकिन इनके पीछे की कहानियां काफी व्यक्तिगत हैं। कहीं परिवार है, कहीं आध्यात्मिकता, कहीं अनुशासन और कहीं जिंदगी को देखने का नजरिया। यही वजह है कि कोहली के लिए टैटू महज शरीर पर बना डिजाइन नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की डायरी जैसा है।

    कोहली के टैटू में क्या-क्या छिपा है?

    विराट कोहली के टैटू कलेक्शन को देखें तो इसमें कई अलग-अलग प्रतीक दिखाई देते हैं। इनमें ऑल-सीइंग आई शामिल है, जिसे कोहली ने इस सोच से जोड़ा है कि इंसान जो कुछ करता है, उसे कोई न कोई देख रहा है और उसके कर्मों का हिसाब रखा जा रहा है। जापानी समुराई का टैटू भी उनके शरीर पर है, जिससे कोहली ताकत, वफादारी, आत्म-अनुशासन और नैतिक व्यवहार जैसे मूल्यों को जोड़ते हैं।

    इसके अलावा उनकी वनडे और टेस्ट कैप के नंबर, उनके पिता और मां के नाम, भगवान शिव का टैटू, जिसमें शिव को कैलाश पर्वत पर ध्यान करते हुए दिखाया गया है, और एक मठ की तस्वीर भी उनके टैटू में शामिल हैं। स्कॉर्पियो, ओम और ट्राइबल डिजाइन भी उनके शरीर पर मौजूद हैं। इन सभी टैटू को एक साथ देखें तो कोहली की मैदान वाली आक्रामक छवि के पीछे एक शांत, आध्यात्मिक और आत्मचिंतन करने वाला पक्ष भी नजर आता है।

    बाएं हाथ की स्लीव अभी भी पूरी क्यों नहीं हुई?

    कोहली के टैटू की खास बात यह भी है कि उनका बायां हाथ अभी पूरी तरह ‘पूरा’ नहीं हुआ है। यह अधूरापन जानबूझकर रखा गया है। इसके पीछे एक दिलचस्प सोच है। कोहली की जिंदगी लगातार बदलती रही है। क्रिकेट करियर में नई उपलब्धियां आईं, निजी जिंदगी में बदलाव हुए और सोच भी समय के साथ विकसित हुई। ऐसे में उनका टैटू भी किसी एक दौर की स्थिर तस्वीर नहीं है। वह लगातार आगे बढ़ रही कहानी की तरह है।

    उनके साथ काम करने वाले कलाकारों के मुताबिक, पिछले तीन साल से ज्यादा समय से कोहली के टैटू पर काम चल रहा है और अभी भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। बाएं हाथ के डिजाइन का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन दाहिने हिस्से पर अभी काम बाकी है। हाल में उनके टैटू कलेक्शन में एक और डिजाइन जुड़ा, जो पानी की सतह पर एक बूंद गिरने के बाद बनने वाली लहरों जैसा दिखाई देता है। यानी एक छोटी सी चीज का असर लगातार दूर तक फैलता जाता है।

    क्या कोहली खुद तय करते हैं कि शरीर पर क्या बनेगा?

    कोहली के टैटू को खास बनाने वाली एक और बात यह है कि वह डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया में खुद बेहद सक्रिय रहते हैं। उनके साथ काम करने वाले टैटू आर्टिस्ट बताते हैं कि कोहली सिर्फ कलाकार के सामने बैठकर यह इंतजार नहीं करते कि कलाकार उनके लिए कुछ बना दे। वह हर चीज को समझना चाहते हैं। टैटू आर्टिस्ट के मुताबिक, कोहली टैटू डिजाइन की तकनीकी प्रक्रिया को भी समझने की कोशिश करते हैं। वह डिजाइन की प्रक्रिया में शुरुआत से अंत तक सक्रिय रूप से शामिल रहते हैं।

    क्या टैटूज में हैं कोहली की जिंदगी की कहानी?

    एक बाहरी व्यक्ति के तौर पर, ये डिजाइन बहुत बोल्ड नहीं लगते और इनके तत्व शांत दिखाई देते हैं। लेकिन विराट के लिए ये सभी तत्व बोल्ड हैं, क्योंकि ये खुद उनका प्रतिबिंब हैं। उनका टैटू उनके भीतर की भावनाओं और एहसासों की अभिव्यक्ति है। यही उनकी खूबसूरती है। वह जीवन, अपने करियर और हर चीज के बारे में जो मानते हैं, जो महसूस करते हैं और उनकी जो सोच है, उनका डिजाइन उसी को दर्शाता है। कोहली टैटू की सुंदरता से ज्यादा उसके पीछे की कहानी को महत्व देते हैं।

    किसी क्रिकेटर का टैटू बनाना कितना अलग होता है?

    क्या किसी आम व्यक्ति और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए टैटू बनाने की प्रक्रिया अलग होती है? इसका जवाब है, डिजाइन बनाने की मूल प्रक्रिया लगभग एक जैसी रहती है, लेकिन टैटू का टॉपिक अलग हो सकता है। कोई अपने साथी का नाम चाहता है, कोई किसी उपलब्धि को याद रखना चाहता है, तो किसी के लिए कोई धार्मिक विश्वास महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसके बाद कलाकार गहराई में जाकर उस विचार के पीछे की असली भावना तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। यहीं से टैटू सिर्फ शरीर पर बनाया जाने वाला डिजाइन नहीं रह जाता। वह व्यक्ति के अनुभव का हिस्सा बनने लगता है।

    मैच से पहले टैटू? खिलाड़ियों की रिकवरी कैसे होती है?

    पेशेवर क्रिकेटरों के मामले में टैटू बनवाने के साथ एक और सवाल जुड़ा होता है- अगर कुछ दिन बाद मैच हो तो शरीर पर टैटू का असर क्या होगा? टैटू आर्टिस्ट के मुताबिक, कलाकार खिलाड़ियों को अपनी सलाह देते हैं, लेकिन विराट कोहली और हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ी अपने शरीर और रिकवरी को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। ऐसा भी हुआ है कि विराट ने मैच से कुछ दिन पहले टैटू बनवाया और इसके बाद भी मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया। हार्दिक के साथ भी कुछ ऐसा ही है। हालांकि, आम व्यक्ति के लिए इसे सीधे अपनाना सही नहीं माना जाना चाहिए। एक पेशेवर खिलाड़ी की ट्रेनिंग, खान-पान, चिकित्सकीय निगरानी और रिकवरी व्यवस्था आम व्यक्ति से अलग हो सकती है।

    विराट ही नहीं, पूरी क्रिकेट पीढ़ी ने भी अपनाया यह अंदाज?

    भारत में टैटू हमेशा से मौजूद रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक इसे लेकर कई तरह की धारणाएं थीं। टैटू को विद्रोह, अलग तरह के व्यक्तित्व या सिर्फ फैशन से जोड़कर देखा जाता था। पुरानी पीढ़ी के कई बड़े क्रिकेटरों की सार्वजनिक पहचान में टैटू का हिस्सा बहुत कम दिखाई देता था। सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ियों की छवि टैटू के बजाय उनके खेल और सादगी से जुड़ी रही। मौजूदा पीढ़ी में तस्वीर काफी अलग है। विराट कोहली, हार्दिक पांड्या और दूसरे खिलाड़ियों ने टैटू को अपनी व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बनाया है।

    और कौन-कौन से भारतीय क्रिकेटर्स ने बनवाए टैटू?

    टैटू अब सिर्फ विराट कोहली की पहचान नहीं हैं। भारतीय क्रिकेट के कई मौजूदा सितारों ने अपनी जिंदगी की अलग-अलग कहानियों को शरीर पर जगह दी है। हार्दिक पांड्या ने अपने रिश्ते से जुड़ी भावना को टैटू के जरिए याद किया है। तिलक वर्मा ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और माता-पिता के प्रति प्रेम को टैटू के जरिए जाहिर किया है। स्मृति मंधाना ने महिला विश्व कप जीत की याद को अपने दाहिने हाथ पर बने टैटू से जोड़ा। वहीं, अर्शदीप सिंह ने भी अपनी गर्लफ्रेंड समरीन कौर के साथ टैटू बनवाकर इस बढ़ती सूची में अपना नाम जोड़ा है। इसके अलावा केएल राहुल और शिखर धवन जैसे क्रिकेटर्स ने भी काफी टैटू बनवाए हैं। यानी भारतीय क्रिकेटरों के लिए टैटू अब केवल फैशन का हिस्सा नहीं रह गया है। यह निजी रिश्तों, उपलब्धियों, आस्था और जिंदगी के महत्वपूर्ण पलों को याद रखने का तरीका भी बनता जा रहा है।

    आखिर खिलाड़ी बार-बार टैटू क्यों बनवाते हैं?

    यही इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। अगर टैटू बनवाना सिर्फ फैशन है तो खिलाड़ी बार-बार इसके लिए क्यों लौटते हैं? टैटू को लेकर लोगों की सोच में बदलाव सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। टैटू कलाकारों के पेशे को लेकर नजरिया भी बदला है। टैटू सिर्फ स्टाइल और फैशन के बारे में नहीं हैं। यह भावनाओं का प्रतिबिंब है।

    विराट के लिए टैटू अभी खत्म हुई कहानी नहीं?

    शायद यही वजह है कि विराट कोहली का टैटू कलेक्शन आज भी बढ़ रहा है। उनके लिए यह किसी एक उपलब्धि की याद में बनवाया गया स्थिर चित्र नहीं है। यह उनकी जिंदगी के साथ आगे बढ़ता हुआ एक सफर है। एक माता-पिता की याद हो सकती है। कोई रिश्ता हो सकता है। बचपन की कोई भावना, कोई विश्वास, भगवान के प्रति आस्था, क्रिकेट की कोई उपलब्धि या जिंदगी का कोई बड़ा बदलाव, हर नया अध्याय शरीर पर जगह पा सकता है।

    विराट ने कुछ साल पहले टैटू और अपनी जिंदगी के रिश्ते को बेहद खास तरीके से समझाया था। उन्होंने कहा, ‘मुझे यह समझने के लिए कहीं और देखने की जरूरत नहीं है कि मैं कहां था और अब कहां पहुंच गया हूं। मैं अपने दोनों हाथों को देखकर यह समझ सकता हूं।’ विराट कोहली की क्रिकेट कहानी रन, रिकॉर्ड, शतक और ट्रॉफियों से लिखी गई है, लेकिन उनकी जिंदगी की एक दूसरी डायरी भी है, जिसे हर कोई मैदान के बाहर देख सकता है। वह डायरी उनके दोनों हाथों पर लिखी हुई है।

  • गणेश चतुर्थी पर ‘रामायण’ का बड़ा तोहफा, रणबीर कपूर और साई पल्लवी के ‘सिया राम’ लुक ने जीता फैंस का दिल

    गणेश चतुर्थी पर ‘रामायण’ का बड़ा तोहफा, रणबीर कपूर और साई पल्लवी के ‘सिया राम’ लुक ने जीता फैंस का दिल

    नई दिल्ली । आज गणेश चतुर्थी का पावन त्योहार है. हर तरफ गणपति बाप्पा के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं और बाप्पा के जयकारों से माहौल गूंज रहा है. इस पावन दिन पर सिनेमा प्रेमियों को भी एक बड़ा सरप्राइज मिला है. गणेश चतुर्थी के खास मौके पर हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित माइथोलॉजिकल फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ का नया ‘सिया राम’ पोस्टर जारी कर दिया गया है.

    रामायण का पोस्टर हुआ जारी

    बाप्पा के आगमन पर मेकर्स ने भगवान राम और माता सीता के इस पोस्टर को रिलीज करके फैंस को बड़ा तोहफा दिया है. पोस्टर में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के रूप में देखे जा सकते हैं. पोस्टर सामने आते ही सोशल मीडिया पर छा गया है और फैंस इसे लेकर बहुत ज्यादा एक्साइटेड नजर आ रहे हैं. शुभ अवसर पर सिया-राम के इस रूप को देखना लोगों के लिए बेहद खास है.

    साई पल्लवी के मुरीद हुए फैंस

    बता दें कि फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद साई पल्लवी और रणबीर कपूर की कास्टिंग पर सवाल उठे थे. कई लोगों को माता सीता के रूप में साई पल्लवी पसंद नहीं आई थीं. लेकिन पोस्टर देखने फैंस साई के मुरीद हो गए हैं. माता सीता के रूप में साई के लुक को फैंस डिवाइन बता रहे हैं. उनकी सादगी फैंस के दिलों को जीत रही है. भगवान राम के रूप में अब रणबीर को भी प्यार मिल रहा है.

  • लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर

    लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पात्र हितग्राहियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले शुरू हुई इस योजना में जहां शुरुआत में बड़ी संख्या में महिलाओं को शामिल किया गया था वहीं अब पात्रता की शर्तों और अन्य कारणों के चलते हजारों महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच करीब 21 हजार 150 महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इसके साथ ही योजना शुरू होने के बाद तीन साल में करीब 6 लाख 26 हजार महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं।

    विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 को लाड़ली बहना योजना में 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं पात्र हितग्राही थीं। सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 रह गई। यानी करीब आठ महीने की अवधि में ही 21 हजार से ज्यादा नाम कम हो गए। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं चल रही है। ऐसे में एक तरफ नए हितग्राही नहीं जुड़ रहे हैं और दूसरी तरफ पात्रता पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।

    योजना की शुरुआत में अक्टूबर 2023 में करीब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 महिलाएं योजना में शामिल थीं। इसके बाद आपत्तियों और पात्रता की जांच के दौरान 2 लाख 18 हजार 858 नाम हटाए गए। इसके बाद पात्र हितग्राहियों की संख्या करीब 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। समय के साथ यह संख्या और कम होती चली गई।

    अधिकारियों के मुताबिक लाड़ली बहना योजना में पात्रता के लिए अधिकतम उम्र 60 वर्ष निर्धारित है। जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो जाती है उनके नाम योजना की सूची से हटा दिए जाते हैं। इसके अलावा किसी हितग्राही की मृत्यु होने या अन्य पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने की स्थिति में भी नाम बाहर किया जाता है। इसी वजह से योजना के आंकड़ों में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

    दूसरी ओर नए नाम नहीं जुड़ने के कारण योजना में शामिल महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है। योजना की शुरुआत जून 2023 में 1000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता के साथ हुई थी। सरकार ने इसे पांच साल में बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया था। शुरुआत के करीब चार महीने बाद मासिक राशि बढ़ाकर 1250 रुपए कर दी गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 से इसमें 250 रुपए की और बढ़ोतरी की गई और वर्तमान में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।

    विभाग की ओर से पात्रता के आधार पर हितग्राहियों की समीक्षा लगातार जारी है। ऐसे में दिसंबर 2026 के अंत तक योजना में शामिल महिलाओं की संख्या और घट सकती है। खासकर उम्र की सीमा पूरी करने वाली महिलाओं और अन्य कारणों से अपात्र पाए जाने वाले हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से मौजूदा संख्या में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

  • भोपाल में आधी रात सड़क पर हंगामा वकील की कार के आगे थार लगाकर की अभद्रता

    भोपाल में आधी रात सड़क पर हंगामा वकील की कार के आगे थार लगाकर की अभद्रता


    भोपाल।  भोपाल के कोहेफिजा थाना क्षेत्र में रविवार रात रैश ड्राइविंग को लेकर हुआ विवाद उस समय गंभीर हो गया जब थार सवार युवकों ने एक वकील की कार रोककर उसके साथ अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। घटना दाता कॉलोनी के पास रात करीब 11:45 बजे की बताई जा रही है। एडवोकेट शादाब खान का आरोप है कि थार सवार करीब 7 से 8 युवकों ने उनकी कार के आगे अपनी गाड़ी खड़ी कर रास्ता रोक दिया। इसके बाद युवकों ने उन्हें और उनके भाइयों को घेर लिया और विवाद करने लगे।

    शादाब खान के मुताबिक 13 सितंबर की रात वे अपने भाइयों के साथ ढाबे पर खाना खाने के बाद कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उन्हें कुछ युवक थार से तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए नजर आए। उन्होंने युवकों को रैश ड्राइविंग नहीं करने की समझाइश दी। आरोप है कि उनकी यह बात युवकों को नागवार गुजरी और उन्होंने दाता कॉलोनी के पास आगे जाकर उनकी कार रोक ली।

    वकील का कहना है कि थार सवार युवकों ने उनकी कार के आगे अपनी गाड़ी लगा दी जिसके बाद करीब 7 से 8 युवक कार को घेरकर खड़े हो गए। उन्होंने शादाब और उनके भाइयों के साथ कथित तौर पर अभद्रता शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर कुछ युवक बेसबॉल बैट लेकर भी पहुंचे। शादाब ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इसी बीच दूसरे वाहन से पहुंचे एक व्यक्ति पर पिस्टल दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।

    घटना के दौरान शादाब खान ने अपने मोबाइल फोन से पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। विवाद के बाद वे कोहेफिजा थाने पहुंचे और पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। हालांकि पुलिस के मुताबिक सामने आए वीडियो में किसी युवक के हाथ में पिस्टल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में पुलिस वीडियो फुटेज और दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है।

    घटना के कुछ समय बाद दूसरा पक्ष भी कोहेफिजा थाने पहुंचा। दूसरे पक्ष की ओर से भी शादाब खान और उनके साथियों के खिलाफ अभद्रता और धमकी देने के आरोप लगाए गए। इस तरह मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पुलिस के सामने आई है।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत प्राप्त कर ली है लेकिन फिलहाल किसी भी पक्ष की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े वीडियो और दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर रही है। जांच के बाद आरोपों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल इस घटना ने भोपाल में सड़क पर मामूली विवाद के बढ़कर गंभीर स्थिति तक पहुंचने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैश ड्राइविंग को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते कार रोकने और धमकी देने तक पहुंच गया।

  • अब तेजी से होगी 50 लाख हितग्राहियों की रजिस्ट्री एक अधिकारी को रोज 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य

    अब तेजी से होगी 50 लाख हितग्राहियों की रजिस्ट्री एक अधिकारी को रोज 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी की जमीन और मकान पर मालिकाना हक पाने का इंतजार कर रहे लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा हितग्राहियों को जमीन और आवास का कानूनी मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू होने जा रही है। खास बात यह है कि हितग्राहियों को रजिस्ट्री के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से मुफ्त रजिस्ट्री का अभियान शुरू किया जाएगा। सरकार ने इस काम को तेजी से पूरा करने के लिए अब रजिस्ट्री कराने वाले अधिकारियों की संख्या भी बढ़ा दी है।

    स्वामित्व योजना के तहत पहले करीब 48.80 लाख हितग्राहियों का चयन किया गया था लेकिन अब यह संख्या 50 लाख से अधिक हो गई है। प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले ही इन हितग्राहियों को मुफ्त रजिस्ट्री की सुविधा देने के फैसले को मंजूरी दी थी। अब इसके क्रियान्वयन की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से आबादी की जमीन पर रह रहे लोगों को उनके घर और जमीन का वैध मालिकाना हक उपलब्ध कराना है।

    रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक के साथ पंचायत समन्वय अधिकारी तथा सहायक विकास विस्तार अधिकारी को भी सब रजिस्ट्रार के अधिकार दे दिए हैं। नए नोटिफिकेशन के मुताबिक राजस्व निरीक्षक और प्रभारी राजस्व निरीक्षक को रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत उप पंजीयक की शक्तियां दी गई हैं। वे अपने निर्धारित जिले और क्षेत्र में स्वामित्व योजना के पात्र हितग्राहियों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कर सकेंगे।

    इसी तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पंचायत समन्वय अधिकारी और सहायक विकास विस्तार अधिकारी को उनके पदस्थ जिले के जनपद क्षेत्र में उप पंजीयक के रूप में रजिस्ट्री करने का अधिकार दिया गया है। इससे अलग अलग क्षेत्रों में एक साथ रजिस्ट्री का काम शुरू किया जा सकेगा और लोगों को रजिस्ट्री के लिए लंबी प्रक्रिया या इंतजार से राहत मिलने की उम्मीद है।

    सरकार ने रजिस्ट्री की रफ्तार बढ़ाने के लिए अधिकारियों के सामने लक्ष्य भी तय किया है। अधिकार प्राप्त प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को रोजाना कम से कम 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य दिया गया है। रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में संबंधित क्षेत्र के हल्का पटवारी का नाम दर्ज रहेगा। इससे बड़ी संख्या में हितग्राहियों की रजिस्ट्री कम समय में पूरी करने की योजना है।

    इससे पहले प्रदेश के सभी तहसीलदारों को भी स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री के लिए सब रजिस्ट्रार के अधिकार दिए जा चुके हैं। अब राजस्व और पंचायत विभाग के अन्य अधिकारियों को अधिकार मिलने से रजिस्ट्री कराने वाले अधिकारियों का दायरा और बढ़ गया है।

    हालांकि योजना के इस प्रावधान को लेकर पटवारियों में नाराजगी भी है। प्रदेश के पटवारी इस बात का विरोध कर रहे हैं कि रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी के तौर पर उनका नाम दर्ज किया जा रहा है। उनका कहना है कि भविष्य में रजिस्ट्री से संबंधित कोई कानूनी विवाद सामने आता है तो उनके बचाव की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। ऐसे में उन्हें अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया में उलझना पड़ सकता है। सरकार के सामने अब एक ओर जहां लाखों लोगों को जल्द मालिकाना हक देने की चुनौती है वहीं दूसरी ओर रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की आशंकाओं का समाधान करना भी अहम होगा।