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  • गोरखपुर में सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बवाल: पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़, बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद

    गोरखपुर में सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बवाल: पूर्व जिलाध्यक्ष को जड़ा थप्पड़, बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद


    गोरखपुर।
    समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुक्रवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब नेताओं के बीच बैठने की जगह को लेकर शुरू हुई कहासुनी हाथापाई में बदल गई। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में चल रही प्रेस वार्ता के दौरान सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ मारपीट और थप्पड़ मारने की घटना हुई। विवाद के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में ही रोकना पड़ा।

    घटना के दौरान मौके पर मौजूद पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची, हालांकि घटना को लेकर किसी पक्ष की ओर से पुलिस को अभी तहरीर नहीं दी गई है।

    बैठने की जगह को लेकर शुरू हुआ विवाद
    दरअसल, लोकतंत्र बचाओ सप्ताह और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का आयोजन सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम की ओर से किया गया था।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा महानगर अध्यक्ष सबीर कुरैशी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव, काजल निषाद, संजय पहलवान, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री डॉ. मोहसिन, जय प्रकाश यादव और रणजीत पासवान समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे।

    इसी दौरान सपा नेता अंशुमान सिंह के पुत्र कमलेश प्रेस क्लब पहुंचे। उन्होंने काजल निषाद के पास बैठने की कोशिश की, लेकिन वहां जगह नहीं थी। इसके बाद उनकी पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से बातचीत हुई। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

    कहासुनी के बाद हाथापाई, नगीना साहनी को थप्पड़
    मामूली विवाद देखते ही देखते बढ़ गया और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। आरोप है कि इस दौरान नगीना साहनी के साथ मारपीट की गई और उन्हें थप्पड़ भी मारा गया। घटना के दौरान अभद्र भाषा के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    मौके पर मौजूद पार्टी के अन्य नेताओं ने दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। हंगामे के चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस को बीच में ही रोकना पड़ा।

    जिस समय सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम मीडिया के सामने लोकतंत्र और वोट बचाने के मुद्दे पर पार्टी की बात रख रहे थे, उसी दौरान पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ हुई मारपीट से कार्यक्रम का पूरा माहौल बदल गया। राजनीतिक मुद्दों की जगह प्रेस क्लब में हुए विवाद और थप्पड़ कांड की चर्चा होने लगी।

    जिलाध्यक्ष बोले- निंदनीय घटना, राष्ट्रीय अध्यक्ष को देंगे जानकारी
    घटना पर सपा जिलाध्यक्ष ब्रिजेश कुमार गौतम ने इसे निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी जाएगी और इस तरह की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के किसी कार्यक्रम में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि मामले की जानकारी पार्टी नेतृत्व को देकर उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी।

    सूचना पर पहुंची पुलिस, नहीं मिली तहरीर
    प्रेस क्लब में विवाद की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से पुलिस को लिखित शिकायत या तहरीर नहीं दी गई है।

    वहीं, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रेस क्लब के भीतर नेताओं के बीच विवाद और हाथापाई का घटनाक्रम दिखाई दे रहा है। घटना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के भीतर सामने आए विवाद को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

  • एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    एलआईसी निवेश फ्रॉड केस में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

    नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एलआईसी निवेश फ्रॉड मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। जांच एजेंसी ने मुंबई स्थित विशेष सीबीआई अदालत के सामने रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस एडीए ग्रुप के ग्रुप एमडी अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वास जोशी और एलआईसी के तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर पी. वेणुगोपाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी के अनुसार चारों आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़े प्रावधानों के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

    मामला एलआईसी की ओर से वर्ष 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 1,500 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर की खरीद से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार ये डिबेंचर गंभीर रूप से गलत जानकारी के आधार पर जारी किए गए थे। एलआईसी की ओर से की गई शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 1 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया था। जांच के दौरान एजेंसी ने आरोप लगाया कि डिबेंचर की सदस्यता से प्राप्त धनराशि बाद में एडीए ग्रुप की कंपनियों में भेजी गई। जांच एजेंसी के मुताबिक इससे एलआईसी को कथित तौर पर गलत तरीके से नुकसान हुआ और संबंधित आरोपियों तथा संस्थाओं को अनुचित लाभ मिला।

    जांच एजेंसी के अनुसार इस मामले में एलआईसी को हुआ कुल कथित नुकसान 3,750 करोड़ रुपये है। सीबीआई ने कहा है कि मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने और दूसरे आरोपों की जांच के लिए आगे की कार्रवाई जारी है। चार्जशीट में शामिल आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और दर्ज मामले के आधार पर हैं। मामले में आगे की जांच के साथ अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी देखी जा रही है।

    इसके अलावा सीबीआई की बीएसएफबी, दिल्ली शाखा ने कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, एलआईसी और ईपीएफओ से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड और रिलायंस एडीए ग्रुप की अन्य संस्थाओं के खिलाफ नौ एफआईआर दर्ज की हैं। ये मामले अलग-अलग शिकायतों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े हैं। एजेंसी इन मामलों में भी जांच आगे बढ़ा रही है।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़े मामलों में इससे पहले सात चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं। मौजूदा चार्जशीट इन मामलों में आठवीं चार्जशीट है। एजेंसी ने बताया कि अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एलआईसी निवेश मामले में दाखिल मौजूदा चार्जशीट के बाद जांच का दायरा आगे भी जारी है और अन्य आरोपियों की भूमिका तथा अतिरिक्त आरोपों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

  • रिटायर्ड शिक्षक की एक आवाज पर उमड़ पड़ते हैं 1000 तक कौवे 8 साल से रोज मिल रहा दाना पानी श्राद्ध पक्ष में बढ़ी इनकी अहमियत

    रिटायर्ड शिक्षक की एक आवाज पर उमड़ पड़ते हैं 1000 तक कौवे 8 साल से रोज मिल रहा दाना पानी श्राद्ध पक्ष में बढ़ी इनकी अहमियत


    उज्जैन । उज्जैन में श्राद्ध पक्ष के दौरान जहां श्रद्धालु पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के बाद कौवे को भोजन कराने के लिए तलाशते नजर आते हैं वहीं शहर के इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स में रोज शाम एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। यहां रिटायर्ड शिक्षक अशोक कुमार दुबे की आवाज सुनते ही सैकड़ों कौवे एक जगह जमा हो जाते हैं। कई दिनों में इनकी संख्या करीब 1000 तक पहुंच जाती है। पिछले आठ वर्षों से चल रही दाना पानी की यह सेवा अब कौवों के लिए नियमित भोजन का भरोसेमंद ठिकाना बन चुकी है।

    नवोदय विद्यालय से रिटायर्ड लेक्चरर अशोक कुमार दुबे ने वर्ष 2018 में पक्षियों को दाना खिलाने की शुरुआत की थी। उस समय उनके घर के आसपास केवल पांच से सात चिड़ियां भोजन के लिए आती थीं। धीरे धीरे इस सिलसिले में कौवे भी जुड़ते गए। शुरुआत में उनकी संख्या बेहद कम थी लेकिन समय के साथ यह संख्या बढ़ती चली गई। 10 से 20 और फिर 50 कौवों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब सैकड़ों तक पहुंच चुका है। मौसम के अनुसार संख्या में उतार चढ़ाव जरूर होता है लेकिन जुलाई अगस्त और सितंबर के दौरान कौवों की मौजूदगी काफी बढ़ जाती है।

    अशोक दुबे के घर शाम करीब छह बजे जैसे ही भोजन रखने का समय होता है आसपास उड़ते कौवे उनकी आवाज पहचानकर पहुंचने लगते हैं। देखते ही देखते घर के आसपास कौवों का बड़ा झुंड दिखाई देने लगता है। दाना और पानी लेने के बाद ये पक्षी अंधेरा होने से पहले अपने ठिकानों की ओर लौट जाते हैं। फिलहाल रोज करीब 500 से 700 कौवे यहां पहुंच रहे हैं और कुछ दिनों में यह संख्या 1000 के आसपास भी पहुंच जाती है।

    इतने बड़े झुंड के भोजन का इंतजाम भी कम नहीं है। रोज करीब 10 किलो चावल और दो किलो परमल कौवों के लिए रखा जाता है। इस सेवा पर प्रतिदिन करीब 800 से 1000 रुपये तक खर्च होने की बात बताई गई है। सालभर में यह खर्च करीब दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। हालांकि अब कॉलोनी के कुछ लोग भी इस पहल से जुड़ चुके हैं। शंकर राव जांगड़े और जयसिंह सहित अन्य लोग कौवों के लिए पानी की व्यवस्था में सहयोग करते हैं। इस तरह दाना और पानी की यह सेवा केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी न रहकर सामूहिक प्रयास का रूप ले चुकी है।

    श्राद्ध पक्ष में कौवों के लिए भोजन का स्वरूप भी बदल जाता है। इन दिनों उन्हें खीर पूड़ी भजिए और मीठी नुक्ती खिलाई जाती है। अशोक दुबे के अनुसार खीर और पूड़ी देखते ही कौवे तेजी से पहुंचते हैं और भोजन कुछ ही समय में खत्म हो जाता है। ज्यादा से ज्यादा कौवों तक भोजन पहुंच सके इसके लिए पूड़ी को छोटे टुकड़ों में बांटकर खिलाया जाता है।

    हिंदू परंपराओं में श्राद्ध के दौरान कौवे को भोजन कराने की विशेष मान्यता बताई जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार कौवे को दिया गया भोजन पितरों तक पहुंचने से जोड़ा जाता है। पंचबलि की परंपरा में भी कौवे को भोजन अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। उज्जैन जैसे धार्मिक शहर में सिद्धवट और रामघाट समेत विभिन्न स्थानों पर श्राद्ध कर्म के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह परंपरा खास महत्व रखती है।

    अशोक दुबे के लिए हालांकि यह सेवा केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक लगातार दाना पानी मिलने के कारण कौवों को इस जगह पर भरोसा हो गया है। आठ साल पहले शुरू हुई छोटी सी पहल आज सैकड़ों पक्षियों के लिए रोज के भोजन का सहारा बन गई है। त्रिवेणी हिल्स में शाम होते ही कौवों का यह जमावड़ा बताता है कि नियमित दाना पानी और सुरक्षित माहौल मिलने पर पक्षी भी किसी जगह को अपने भरोसेमंद ठिकाने के रूप में अपना सकते हैं।

  • भोपाल में अमित शाह के बड़े ऐलान से MP में हलचल, 2029 तक नशामुक्ति का लक्ष्य, उज्जैन को मिला 255 करोड़ का डेयरी प्लांट

    भोपाल में अमित शाह के बड़े ऐलान से MP में हलचल, 2029 तक नशामुक्ति का लक्ष्य, उज्जैन को मिला 255 करोड़ का डेयरी प्लांट


    भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा। भेल दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने के लिए बारीक स्तर पर योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और गृह विभाग के साथ इस विषय पर चर्चा कर रणनीति बनाई जानी थी। हालांकि अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक बाद में रद्द हो गई क्योंकि शाह एक जरूरी बैठक में वर्चुअली जुड़ गए। शाह ने अभिभावकों और विशेष रूप से माताओं से भी युवाओं को नशे से दूर रखने में सहयोग की अपील की।

    भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन में करीब 35 हजार गोपालकों और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े लोगों की भागीदारी रही। कार्यक्रम में शाह ने गोशालाओं के लिए 101 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता देने की बात कही। साथ ही उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे दूध प्रसंस्करण संयंत्र का डिजिटल भूमिपूजन किया गया। केंद्र और राज्य स्तर पर डेयरी क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया। सरकारी जानकारी के मुताबिक उज्जैन के प्लांट की क्षमता प्रतिदिन तीन लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी।

    शाह ने अपने संबोधन में देश में दूध उत्पादन से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाला देश बन चुका है। उन्होंने 2014-15 के मुकाबले प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। शाह ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना से डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सहकारी व्यवस्था के जरिए दूध उत्पादकों को बेहतर कीमत दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की डेयरी अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आय बढ़ाने से जुड़े विषय भी सामने आए। सरकारी योजना के तहत गोपालक दीदियों के सम्मान और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों को लाभ पहुंचाने की पहल भी कार्यक्रम का हिस्सा रही। भोपाल में 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी उत्पाद संयंत्र और राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला से जुड़ी परियोजनाएं भी कार्यक्रम में शामिल थीं। शिवपुरी के मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण का काम भी शुरू किया गया।

    अमित शाह के भोपाल दौरे में केवल डेयरी और नशामुक्ति का मुद्दा ही शामिल नहीं रहा। उन्होंने नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। इसके बाद भौंरी स्थित IISER परिसर में अत्रि परिसर का शिलान्यास और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम भी उनके दौरे का हिस्सा रहा। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक भी हुई।

    नशे के खिलाफ लक्ष्य की बात करें तो केंद्र सरकार पहले भी वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लिए तीन वर्षीय रोडमैप की बात कर चुकी है। गृह मंत्रालय के अनुसार इस रणनीति में खुफिया और प्रवर्तन कार्रवाई के साथ सिंथेटिक ड्रग्स और उनके रॉ मटेरियल पर नियंत्रण मांग में कमी और नुकसान कम करने के उपाय तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे पहलू शामिल हैं।

    इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कार्यक्रम और सरकार के कामकाज को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए। उन्होंने सांची डेयरी और ग्रामीण समितियों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए प्रदेश की आर्थिक स्थिति तथा सरकार के कामकाज पर भी सवाल किए। इस तरह भोपाल का यह दौरा डेयरी विकास नशामुक्ति नए आपराधिक कानून और केंद्र राज्य से जुड़े मुद्दों को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाओं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का केंद्र रहा।

  • उज्जैन में LPG सिलेंडर ब्लास्ट से मचा हड़कंप, सिगरेट जलाने की कोशिश बनी हादसे की वजह, 24 साल का युवक 70 फीसदी झुलसा

    उज्जैन में LPG सिलेंडर ब्लास्ट से मचा हड़कंप, सिगरेट जलाने की कोशिश बनी हादसे की वजह, 24 साल का युवक 70 फीसदी झुलसा



    उज्जैन । उज्जैन के कानिपुरा स्थित तिरुपति धाम कॉलोनी में शनिवार सुबह LPG सिलेंडर ब्लास्ट की घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। किराए के कमरे में अचानक हुए जोरदार धमाके में 24 वर्षीय युवक संदीप बुरी तरह झुलस गया। डॉक्टरों के अनुसार वह करीब 70 प्रतिशत तक झुलसा है और उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया है। धमाका इतना तेज था कि कमरे की एक तरफ की दीवार क्षतिग्रस्त होकर नीचे गिर गई जबकि खिड़की और दरवाजे भी टूट गए। हादसे के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भी अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक कमरे में रातभर LPG गैस लीक होने की आशंका है। माना जा रहा है कि लगातार गैस रिसने के कारण कमरे के अंदर गैस जमा होती गई। सुबह संदीप ने सिगरेट पीने के लिए माचिस की तीली जलाई तो कमरे में पहले से जमा गैस ने आग पकड़ ली। इसके बाद अचानक जोरदार धमाका हुआ और संदीप आग की चपेट में आ गया। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमरे की दीवार तक गिर गई और घर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा।

    हादसे के समय संदीप के साथ कमरे में उसका साथी देवीलाल भी मौजूद था। बताया गया है कि धमाका होने के समय देवीलाल बाथरूम में था। इसी वजह से वह सीधे आग और धमाके की चपेट में आने से बच गया। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और घटनास्थल की ओर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने घायल संदीप को कमरे से बाहर निकालने में मदद की और उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया।

    संदीप मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला बताया गया है। वह करीब 20 दिन पहले ही काम के सिलसिले में उज्जैन आया था और तिरुपति धाम कॉलोनी में किराए का कमरा लेकर रह रहा था। वह शहर की शिप्रा गैस एजेंसी में सिलेंडर डिलीवरी और फिटिंग का काम करता था। LPG सिलेंडर से जुड़े काम से जुड़े होने के बावजूद कमरे में गैस रिसाव की स्थिति कैसे बनी और रिसाव का समय पर पता क्यों नहीं चल सका इसे लेकर भी जांच की जा रही है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने कमरे में हुए नुकसान और ब्लास्ट से जुड़े हालात की जानकारी जुटाई है। फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और गैस रिसाव के कारणों को लेकर जांच जारी है। गंभीर रूप से घायल संदीप को जिला अस्पताल से इंदौर रेफर किया गया है जहां उसका उपचार किया जा रहा है।

    यह हादसा घरेलू LPG गैस के इस्तेमाल के दौरान छोटी सी चिंगारी के संभावित खतरे की ओर भी ध्यान दिलाता है। यदि कमरे में गैस की गंध महसूस हो तो किसी भी हालत में माचिस या लाइटर नहीं जलाना चाहिए और बिजली के स्विच को भी चालू या बंद करने से बचना चाहिए। दरवाजे और खिड़कियां खोलकर सुरक्षित तरीके से जगह को हवादार करना तथा जरूरत पड़ने पर गैस आपूर्ति बंद कर संबंधित एजेंसी या आपातकालीन सेवा से संपर्क करना जरूरी है।

  • राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से अन्याय और अधिकारों से जुड़े संघर्ष की कहानी भेजने की अपील

    राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से अन्याय और अधिकारों से जुड़े संघर्ष की कहानी भेजने की अपील

    नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देशभर में अपने अधिकारों और अलग-अलग मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों की आवाज को एक मंच पर लाने के लिए ‘सत्याग्रह’ नाम से डिजिटल पहल शुरू की है। उन्होंने शनिवार को लोगों से अपील की कि जो भी व्यक्ति किसी अन्याय के खिलाफ लड़ रहा है, वह अपनी कहानी साझा करे। इस पहल के तहत लोगों के संघर्ष और आंदोलनों की जानकारी एक डिजिटल नक्शे पर दिखाई जाएगी, जिससे समान मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे अन्य लोगों और समूहों के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी। राहुल गांधी ने कहा कि नेता विपक्ष के तौर पर वह संसद से लेकर सड़क तक जरूरत पड़ने पर लोगों के साथ खड़े रहेंगे।

    राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं और अक्सर उनकी लड़ाई अकेले रह जाती है। उन्होंने जेन-जी, छात्रों, किसानों, आदिवासियों, दलितों और महिलाओं के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर संघर्ष की अपनी कहानी है, लेकिन अकेले उठने वाली आवाज अक्सर दब जाती है। उनके अनुसार, ‘सत्याग्रह’ का उद्देश्य इन आवाजों को एक साथ लाना है। उन्होंने महात्मा गांधी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्य एक बड़ा हथियार है और सत्य के साथ एकजुट होकर खड़ा होना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपनी कहानी साझा करने को कहा और बताया कि इसमें करीब दो मिनट लगेंगे।

    इस पहल का नाम महात्मा गांधी के सत्याग्रह से जुड़ा है। गांधी हेरिटेज पोर्टल महात्मा गांधी के जीवन, लेखन, सत्याग्रह और अन्य गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों का डिजिटल संग्रह उपलब्ध कराता है। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में गांधीजी के लेखन और पत्राचार का व्यापक संग्रह दर्ज है। हालांकि, दी गई खबर में गांधीजी को भेजे गए 8,500 से अधिक पत्रों का जो विशेष आंकड़ा बताया गया है, उसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से स्पष्ट रूप से नहीं हो सकी। आधिकारिक अभिलेखों में गांधीजी से संबंधित पत्रों का बड़ा संग्रह दर्ज होने की जानकारी उपलब्ध है।

    राहुल गांधी की इस पहल के साथ देश में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अन्य समूहों की ओर से प्रदर्शन किए गए हैं। 2 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। इसी बीच विपक्षी सांसदों के 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करने की योजना भी घोषित की गई थी।

    मतदाता सूची से जुड़े विवाद के बीच फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटा तक राज्यों की पहुंच, पश्चिम बंगाल में अपीलों और गोवा के 97 मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर में बदलावों की समीक्षा शुरू की है और एक समिति को इसकी जांच की जिम्मेदारी दी है। राहुल गांधी की ‘सत्याग्रह’ पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब देशभर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलनों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवाद सार्वजनिक चर्चा में हैं।

  • यूपी कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, आराधना मिश्रा मोना प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

    यूपी कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, आराधना मिश्रा मोना प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बदलाव किया है। आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष, इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और देवेंद्र निषाद तथा आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। नई टीम में ब्राह्मण, महिला, मुस्लिम, ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व को जगह दी गई है। कांग्रेस के इस संगठनात्मक बदलाव को अलग-अलग सामाजिक समूहों को साथ जोड़ने और प्रदेश में अपने सामाजिक आधार के विस्तार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    आराधना मिश्रा मोना प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुकी हैं और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वह 2019 से उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता थीं। उनकी नियुक्ति के साथ करीब डेढ़ दशक बाद प्रदेश संगठन की कमान किसी महिला को सौंपी गई है। इससे पहले रीता बहुगुणा जोशी 2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष रही थीं। मोना की नियुक्ति का एक पहलू समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के संबंधों से भी जुड़ा है। दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की राजनीति के रास्ते पर हैं, लेकिन सीट बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर आगे बातचीत महत्वपूर्ण होगी।

    इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन पर भी जोर दिया गया है। सहारनपुर से सांसद मसूद कांग्रेस के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में शामिल हैं। वहीं देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए जाने से संगठन के शीर्ष स्तर पर ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व सामने आया है। राजेंद्र पाल गौतम को पहले ही उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव बनाया जा चुका है। इस तरह नई संगठनात्मक संरचना में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ब्राह्मण और महिला नेतृत्व को आगे किया गया है, जबकि इमरान मसूद, देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद के जरिए अन्य सामाजिक समूहों को भी संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस के लिए ब्राह्मण समुदाय कभी पारंपरिक सामाजिक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ पार्टी ने इस वर्ग को संगठन के शीर्ष स्तर पर प्रतिनिधित्व दिया है। वहीं महिला नेतृत्व के जरिए आधी आबादी तक पहुंच बनाने की कोशिश भी दिखाई देती है। प्रमोद तिवारी का रामपुर खास क्षेत्र में लंबे समय से राजनीतिक आधार रहा है। वह इस सीट से नौ बार विधायक रह चुके हैं और आराधना मिश्रा भी इसी सीट से लगातार तीन चुनाव जीत चुकी हैं। विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस की नई टीम को केवल संगठनात्मक बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी एक तरफ गठबंधन में अपनी भूमिका बनाए रखने और दूसरी तरफ अपना स्वतंत्र सामाजिक और राजनीतिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रही है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे का अंतिम स्वरूप अभी तय होना बाकी है।

    कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने संगठनात्मक बदलाव का स्वागत करते हुए कहा कि आराधना मिश्रा अनुभवी नेता हैं और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि महिला होने के नाते वह आधी आबादी से जुड़े मुद्दों को बेहतर ढंग से समझती हैं और उनके नेतृत्व में प्रदेश संगठन को नई गति मिलेगी। अवस्थी के मुताबिक, नई टीम के साथ कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज करेगी और पार्टी प्रदेश में सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगी। वहीं, संगठन के सामने सामाजिक प्रतिनिधित्व को जमीनी राजनीतिक समर्थन में बदलने, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के साथ पारंपरिक मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती भी रहेगी।

  • बेंगलुरु में LPG गैस लीक से किराए के मकान में लगी आग, चार बच्चों समेत परिवार के 6 लोग झुलसे

    बेंगलुरु में LPG गैस लीक से किराए के मकान में लगी आग, चार बच्चों समेत परिवार के 6 लोग झुलसे


    नई दिल्ली:
    कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के विनायक लेआउट इलाके में शनिवार सुबह LPG गैस लीक होने के बाद किराए के मकान में आग लग गई। हादसे में एक ही परिवार के छह लोग झुलस गए, जिनमें चार छोटे बच्चे शामिल हैं। घटना के समय परिवार के सदस्य घर में खाना बना रहे थे। आग अचानक भड़कने के बाद परिवार के सभी छह सदस्य इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल सभी की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ परिवार मूल रूप से रायचूर का रहने वाला है और बेंगलुरु के विनायक लेआउट इलाके में किराए के मकान में रह रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह परिवार खाना बना रहा था। इसी दौरान LPG सिलिंडर से गैस लीक होने की आशंका है। गैस के लीक होने के बाद अचानक आग भड़क गई और देखते ही देखते घर में मौजूद परिवार के छह सदस्य झुलस गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

    हादसे में 40 वर्षीय करिलिंगप्पा, उनकी 42 वर्षीय पत्नी लक्ष्मम्मा और उनके चार बच्चे झुलस गए। घायलों में 11 वर्षीय चैत्र, 9 वर्षीय बसवा और तीन वर्षीय जुड़वां बच्चे गीता और गिरिजा शामिल हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद चंद्र लेआउट पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने तत्काल सभी छह घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।

    डॉक्टरों ने सभी छह घायलों की स्थिति को फिलहाल खतरे से बाहर बताया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आग लगने के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में LPG गैस लीक होने की आशंका सामने आई है, लेकिन हादसे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। फिलहाल परिवार के सभी घायल सदस्य अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है।

  • तिरुपति की दवा फैक्ट्री में बॉयलर फटा, पांच कर्मचारियों की मौत, 10 से अधिक घायल; राहत-बचाव के साथ जांच शुरू

    तिरुपति की दवा फैक्ट्री में बॉयलर फटा, पांच कर्मचारियों की मौत, 10 से अधिक घायल; राहत-बचाव के साथ जांच शुरू


    नई दिल्ली:
    आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में शनिवार तड़के एक दवा बनाने वाली फैक्ट्री में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया। सत्यवेडु मंडल स्थित श्री सिटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) में संचालित टिल हेल्थकेयर की फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में नाइट शिफ्ट के दौरान अचानक बॉयलर जोरदार धमाके के साथ फट गया। विस्फोट के बाद फैक्ट्री परिसर में आग फैल गई। इस हादसे में पांच कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया और उनका इलाज कराया जा रहा है। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    टिल हेल्थकेयर की यह यूनिट टैबलेट बनाने का काम करती है। शनिवार तड़के जब कर्मचारी नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे, उसी दौरान यूनिट के अंदर लगे बॉयलर में विस्फोट हुआ। धमाका इतना तेज था कि इसके बाद पूरी इकाई में भीषण आग फैल गई। हादसे में पांच कर्मचारियों की मौके पर ही मौत होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, 10 से अधिक कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद घायलों को फैक्ट्री से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस, आपातकालीन सेवाएं और राहत दल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने फैक्ट्री परिसर में पहुंचकर स्थिति को संभाला और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। राहत दलों ने आग पर काबू पाने के साथ ही परिसर में मौजूद कर्मचारियों की मदद की। एसईजेड के अधिकारियों के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बॉयलर में विस्फोट किस वजह से हुआ। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। जांच में तकनीकी खराबी, सुरक्षा प्रणाली की विफलता और संचालन में किसी तरह की चूक समेत संभावित पहलुओं को देखा जा रहा है।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और संबंधित अधिकारी राहत एवं बचाव कार्य के साथ घायलों के इलाज पर भी नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने प्रभावित कर्मचारियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। घटना के बाद फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच भी चिंता का माहौल है। हादसे के कारणों की जांच पूरी होने के बाद ही बॉयलर विस्फोट की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल राहत और बचाव कार्य के साथ मामले की जांच जारी है और घायलों के उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है।

    आंध्र प्रदेश के शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मंत्री ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी घायलों का बेहतर से बेहतर इलाज तत्काल सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राज्य सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है। प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर स्थिति की निगरानी कर रही हैं और हादसे के कारणों से जुड़े सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।

  • Flydubai को-पायलट पर विमान क्रैश कराने की साजिश का आरोप, UAE ने आतंकी हमले के प्रयास के तौर पर शुरू की जांच

    Flydubai को-पायलट पर विमान क्रैश कराने की साजिश का आरोप, UAE ने आतंकी हमले के प्रयास के तौर पर शुरू की जांच

    नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही Flydubai की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय मूल के कैप्टन Smit Machchhar पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट हमाम-अल-हम्मामी की पहचान सामने आई है। UAE के अटॉर्नी जनरल ने इस मामले को कथित तौर पर आतंकवादी हमले के प्रयास के तौर पर जांच के दायरे में रखा है। जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान हमाम-अल-हम्मामी ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह विमान को क्रैश करना चाहता था। मामले में को-पायलट द्वारा कैप्टन पर किए गए हमले और विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने की कथित साजिश की जांच जारी है।

    फ्लाइट जब हवा में थी, उसी दौरान ओमानी को-पायलट ने कैप्टन Smit Machchhar पर अचानक चाकू या किसी अन्य धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले के बाद विमान की स्थिति अचानक गंभीर हो गई और वह हजारों फीट नीचे की ओर जाने लगा। इस घटना के बाद विमान को सुरक्षित रखने और स्थिति को नियंत्रित करने की कार्रवाई की गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमाम-अल-हम्मामी ने कथित तौर पर विमान को क्रैश कराने की कोशिश क्यों की और इस घटना के पीछे उसकी क्या मंशा थी। UAE के प्रॉसिक्यूटर जनरल के अनुसार, पूछताछ में को-पायलट ने इस घटना को आतंकवादी हमले के तौर पर अंजाम देने की कोशिश किए जाने की बात स्वीकार की है।

    जांच के दौरान हमाम-अल-हम्मामी के पुराने रिकॉर्ड और गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले साल ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन Oman Air ने कथित तौर पर उसके कट्टरपंथी विचारों के कारण उसे प्रशिक्षण से जुड़ी भूमिका से हटा दिया था। जांच अधिकारियों को उसके निजी सामान से ‘फ्री फिलिस्तीन’ से जुड़े पर्चे और फिलिस्तीन समर्थक दस्तावेज मिलने की बात भी सामने आई है। बताया गया है कि वह सार्वजनिक और निजी तौर पर लगातार फिलिस्तीन के समर्थन तथा इजरायल के विरोध में बातें करता रहा था। इन तथ्यों की जांच मौजूदा मामले के संदर्भ में की जा रही है।

    रिपोर्टों के अनुसार, हमाम-अल-हम्मामी के पुराने सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की गई है। इनमें अल-कायदा से जुड़े लोगों की तस्वीरें और अन्य संदिग्ध सामग्री मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसियां इस सामग्री और उसके कथित विचारों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि विमान को नुकसान पहुंचाने की कथित कोशिश केवल उसकी व्यक्तिगत कार्रवाई थी या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति, संगठन या नेटवर्क की भूमिका थी। मामले में संभावित संपर्कों और निर्देशों की भी जांच जारी है।

    इस घटना को लेकर UAE में जांच का दायरा अब को-पायलट की कार्रवाई से आगे बढ़कर कथित साजिश और संभावित नेटवर्क तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या हमाम-अल-हम्मामी को किसी अन्य व्यक्ति से निर्देश मिले थे या किसी बड़े नेटवर्क से उसका संबंध था। फिलहाल जांच में सामने आए उसके कथित कबूलनामे, निजी सामान, पुराने सोशल मीडिया अकाउंट्स और पूर्व गतिविधियों को अलग-अलग पहलुओं से देखा जा रहा है। विमान में कैप्टन Smit Machchhar पर हमला और फ्लाइट को कथित तौर पर क्रैश कराने की कोशिश इस जांच का मुख्य केंद्र बनी हुई है।