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  • दिल्ली ट्रैवल टिप्स: पहली बार राजधानी जा रहे हैं तो इन जगहों और जरूरी बातों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    दिल्ली ट्रैवल टिप्स: पहली बार राजधानी जा रहे हैं तो इन जगहों और जरूरी बातों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली । दिल्ली भारत की राजधानी होने के साथ साथ इतिहास संस्कृति आधुनिकता और खानपान का अनोखा संगम है। हर साल देश और विदेश से लाखों पर्यटक यहां घूमने आते हैं। अगर आप भी दिल्ली यात्रा की योजना बना रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों की जानकारी पहले से होना आपके सफर को आसान और यादगार बना सकता है। सही प्लानिंग के साथ आप कम बजट में भी दिल्ली की बेहतरीन जगहों का आनंद ले सकते हैं।

    दिल्ली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आपको ऐतिहासिक धरोहरों से लेकर आधुनिक इमारतों तक सब कुछ देखने को मिलता है। लाल किला कुतुब मीनार इंडिया गेट हुमायूं का मकबरा राष्ट्रपति भवन लोटस टेंपल अक्षरधाम मंदिर और जामा मस्जिद जैसी जगहें हर पर्यटक की पहली पसंद होती हैं। अगर आपको इतिहास और संस्कृति में रुचि है तो राष्ट्रीय संग्रहालय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और गांधी स्मृति भी जरूर देखें।

    दिल्ली में घूमने का सबसे आसान और किफायती साधन दिल्ली मेट्रो है। यह शहर के लगभग हर हिस्से को जोड़ती है और ट्रैफिक की परेशानी से भी बचाती है। मेट्रो कार्ड बनवाकर आप आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा ई रिक्शा ऑटो कैब और बस की सुविधा भी पूरे शहर में उपलब्ध रहती है।

    दिल्ली आएं और यहां का मशहूर स्ट्रीट फूड न खाएं तो यात्रा अधूरी मानी जाती है। चांदनी चौक के पराठे चाट दही भल्ले जलेबी और नानखटाई लोगों को खूब पसंद आते हैं। वहीं कनॉट प्लेस खान मार्केट और सरोजिनी नगर जैसे इलाके शॉपिंग और खाने पीने के लिए बेहतरीन माने जाते हैं। अगर आपको पारंपरिक भारतीय भोजन पसंद है तो पुरानी दिल्ली की गलियों का स्वाद जरूर लें।

    खरीदारी के शौकीनों के लिए दिल्ली किसी स्वर्ग से कम नहीं है। सरोजिनी नगर जनपथ करोल बाग लाजपत नगर और चांदनी चौक में कपड़े जूते इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान उचित कीमत पर मिल जाते हैं। मोलभाव करना यहां की खरीदारी का एक अहम हिस्सा माना जाता है इसलिए खरीदारी करते समय कीमत जरूर तय करें।

    यात्रा के दौरान सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपने मोबाइल पर्स और अन्य जरूरी सामान को सुरक्षित रखें। रात में सुनसान जगहों पर अकेले जाने से बचें और केवल अधिकृत टैक्सी या कैब सेवा का ही उपयोग करें। किसी भी आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन और महिला सुरक्षा हेल्पलाइन की जानकारी अपने पास रखें।

    दिल्ली घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और अधिकांश पर्यटन स्थलों का आराम से आनंद लिया जा सकता है। गर्मियों में तापमान काफी अधिक रहता है जबकि मानसून में कई बार बारिश यात्रा की योजना प्रभावित कर सकती है।

    अगर आप पहले से होटल की बुकिंग कर लें यात्रा का बजट तय कर लें और घूमने की जगहों की सूची बना लें तो आपका समय और पैसा दोनों बच सकते हैं। दिल्ली केवल एक शहर नहीं बल्कि इतिहास संस्कृति आधुनिक जीवनशैली और स्वाद का ऐसा संगम है जो हर यात्री को एक नया अनुभव देता है। सही योजना और थोड़ी सी तैयारी के साथ आपकी दिल्ली यात्रा जीवनभर की यादगार बन सकती है।

  • गूंगी गुड़िया' विवाद पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति, सुनेत्रा पवार का पलटवार और कांग्रेस पर सत्तापक्ष का हमला

    गूंगी गुड़िया' विवाद पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति, सुनेत्रा पवार का पलटवार और कांग्रेस पर सत्तापक्ष का हमला


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस की एक टिप्पणी ने नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर की गई ‘गूंगी गुड़िया’ टिप्पणी पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए हैं। इस बयान के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है जबकि खुद सुनेत्रा पवार ने भी संयमित लेकिन सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उचित समय आने पर इसका करारा जवाब दिया जाएगा।

    पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में बीड़ जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े सवाल पर पत्रकारों ने सुनेत्रा पवार से प्रतिक्रिया जाननी चाही लेकिन उनके स्थान पर मंत्री धनंजय मुंडे जवाब देते नजर आए। इस पर कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए सवाल उठाया कि आखिर सुनेत्रा पवार कब तक गूंगी गुड़िया बनी रहेंगी। इस टिप्पणी के सामने आते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी केवल सुर्खियां बटोरने के लिए बेहद निचले स्तर की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति में इस तरह की व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणियों की कोई जगह नहीं है। उनके मुताबिक जनता ऐसे बयानों को पसंद नहीं करती और कांग्रेस केवल प्रचार पाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रही है।

    उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी इस पूरे विवाद पर पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राजनीति में हर आरोप का जवाब तुरंत देना जरूरी नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सही समय आने पर अपने काम और अपने जवाब से सभी सवालों का उत्तर देंगी। उनके इस बयान को सधे हुए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कांग्रेस की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि किसी महिला जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल केवल एक नेता का नहीं बल्कि पूरे राज्य की महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी मांगने की भी बात कही।

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कहा कि कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि कभी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इसी तरह के तंज का सामना करना पड़ा था लेकिन उन्होंने अपने नेतृत्व और कार्यों से आलोचकों को जवाब दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के सम्मान की बात करती है लेकिन व्यवहार में दोहरे मापदंड अपनाती है।

    वहीं मंत्री धनंजय मुंडे ने दावा किया कि कांग्रेस सुनेत्रा पवार के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव से घबराई हुई है और इसी वजह से इस तरह की टिप्पणियां कर रही है। दूसरी ओर महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि यह कोई असंसदीय शब्द नहीं है और उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक सवाल उठाना था। एनसीपी शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार ने भी कहा कि यह टिप्पणी केवल उस घटना के संदर्भ में की गई थी जहां पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है क्योंकि सत्तापक्ष इसे महिला सम्मान का मुद्दा बना रहा है जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक जवाबदेही से जोड़कर देख रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सुनेत्रा पवार अपने कहे अनुसार उचित समय पर किस तरह का राजनीतिक जवाब देती हैं।

  • स्किन केयर का नेचुरल सुपरफूड है खीरा दाग धब्बों से लेकर ग्लो तक हर समस्या का आसान उपाय

    स्किन केयर का नेचुरल सुपरफूड है खीरा दाग धब्बों से लेकर ग्लो तक हर समस्या का आसान उपाय


    नई दिल्ली । अगर आप बिना ज्यादा पैसे खर्च किए अपनी त्वचा को स्वस्थ चमकदार और ताजगी से भरपूर बनाना चाहते हैं तो खीरा आपके लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है। खीरे में लगभग 95 प्रतिशत पानी होता है जो त्वचा को अंदर से हाइड्रेट रखने में मदद करता है। इसके साथ ही इसमें विटामिन सी विटामिन के पोटैशियम और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो त्वचा को पोषण देने के साथ उसे लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं। यही कारण है कि खीरे का इस्तेमाल वर्षों से घरेलू स्किन केयर का अहम हिस्सा माना जाता है।

    गर्मी के मौसम में धूप धूल और प्रदूषण के कारण त्वचा अपनी नमी खोने लगती है। ऐसे में खीरा त्वचा को ठंडक पहुंचाने के साथ उसकी प्राकृतिक नमी बनाए रखने का काम करता है। यदि चेहरा बार बार रूखा महसूस होता है तो खीरे का रस लगाना काफी फायदेमंद माना जाता है। यह त्वचा को तरोताजा बनाता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने में मदद करता है।

    आंखों के नीचे सूजन या डार्क सर्कल की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी खीरा बेहद लाभकारी माना जाता है। ठंडे खीरे के पतले स्लाइस कुछ मिनट तक आंखों पर रखने से आंखों को आराम मिलता है और सूजन कम होने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसान घरेलू उपाय काफी राहत देने वाला साबित होता है।

    अगर चेहरे पर धूप की वजह से टैनिंग हो गई है तो खीरा त्वचा को ठंडक देकर उसे आराम पहुंचाने में मदद करता है। खीरे का रस गुलाब जल या एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर लगाने से त्वचा को ताजगी मिलती है और सनबर्न से होने वाली जलन भी कम हो सकती है। नियमित उपयोग से त्वचा अधिक साफ और मुलायम महसूस होने लगती है।

    तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए भी खीरा किसी वरदान से कम नहीं है। यह अतिरिक्त तेल को संतुलित करने में मदद करता है जिससे मुंहासों की संभावना कम हो सकती है। खीरे के रस में थोड़ा सा मुल्तानी मिट्टी मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाने के बाद सूखने पर सामान्य पानी से धो लें। इससे त्वचा साफ और फ्रेश महसूस होती है।

    खीरे का उपयोग फेस टोनर के रूप में भी किया जा सकता है। ताजा खीरे का रस निकालकर फ्रिज में रख लें और कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा को ताजगी मिलती है और रोमछिद्र साफ रखने में मदद मिलती है। यदि त्वचा संवेदनशील है तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें ताकि किसी प्रकार की एलर्जी की संभावना से बचा जा सके।

    स्वस्थ त्वचा के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि सही खानपान भी जरूरी है। खीरे को सलाद के रूप में अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और इसका सकारात्मक असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। पर्याप्त पानी पीना अच्छी नींद लेना और संतुलित आहार अपनाना भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    प्राकृतिक उपायों का असर धीरे धीरे दिखाई देता है लेकिन नियमित देखभाल और सही दिनचर्या अपनाकर लंबे समय तक त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। खीरा एक आसान सस्ता और सुरक्षित विकल्प है जिसे अपनी रोजमर्रा की स्किन केयर रूटीन में शामिल करके त्वचा की खूबसूरती को प्राकृतिक रूप से निखारा जा सकता है।

  • डिस्को किंग बप्पी लहरी की मौत का सच, अस्पताल से घर लौटने के बाद कैसे बिगड़ी तबीयत और क्या है स्लीप एपनिया

    डिस्को किंग बप्पी लहरी की मौत का सच, अस्पताल से घर लौटने के बाद कैसे बिगड़ी तबीयत और क्या है स्लीप एपनिया


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में डिस्को संगीत को नई पहचान देने वाले मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लहरी आज भी अपने सदाबहार गीतों की वजह से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। वर्ष 2022 में उनका निधन संगीत प्रेमियों के लिए बड़ा झटका था। अस्पताल से घर लौटने के कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और फिर उन्हें दोबारा अस्पताल ले जाना पड़ा जहां डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। उनकी मौत के बाद ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया नाम की बीमारी एक बार फिर चर्चा में आई।

    बप्पी लहरी का जन्म 27 नवंबर 1952 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हुआ था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था। बचपन से ही उन्होंने तबला बजाना सीख लिया और युवावस्था में संगीत की दुनिया में कदम रखा। सत्तर और अस्सी के दशक में उन्होंने बॉलीवुड को डिस्को संगीत का नया दौर दिया। डिस्को डांसर, शराबी, डांस डांस और नमक हलाल जैसी फिल्मों के गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

    अपने जीवन के अंतिम वर्षों में बप्पी लहरी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनका वजन अधिक था और इसी वजह से उन्हें ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या थी। इसके अलावा उन्हें सीने में संक्रमण भी हो गया था जिसके कारण जनवरी 2022 में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। करीब तीन सप्ताह तक इलाज चलने के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और 14 फरवरी 2022 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    घर लौटने के बाद उन्होंने लंबे समय बाद परिवार के साथ समय बिताया। अगले दिन 15 फरवरी को दिनभर परिवार उनके साथ रहा। रात में उन्होंने परिवार के साथ भोजन किया लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें गंभीर हृदय संबंधी जटिलता हुई है। तमाम कोशिशों के बावजूद रात लगभग 11 बजकर 44 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार उनकी पहले से मौजूद ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या और अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं उनकी स्थिति को गंभीर बनाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल थीं।

    ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं और सांस लेने का रास्ता बार बार बंद होने लगता है। इससे व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए रुक सकती है और फिर दोबारा शुरू होती है। पूरी रात यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जा सकती है जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। लगातार खर्राटे आना, नींद के दौरान सांस रुकना, सुबह सिरदर्द होना, दिनभर थकान महसूस होना और अत्यधिक नींद आना इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा, मोटी गर्दन, बढ़ती उम्र और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं इस बीमारी का जोखिम बढ़ा सकती हैं। समय पर इलाज न होने पर हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, स्ट्रोक, अनियमित धड़कन और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक तेज खर्राटे, सांस रुकने या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

    बप्पी लहरी ने अपने संगीत से भारतीय सिनेमा को अनगिनत यादगार गीत दिए। उनकी जिंदगी यह भी याद दिलाती है कि गंभीर बीमारियों के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • रामायण ट्रेलर पर कॉस्ट्यूम विवाद तेज, सुरभि दास बोलीं ब्लाउज पहनाते तब भी सवाल होते और नहीं पहनाते तब भी

    रामायण ट्रेलर पर कॉस्ट्यूम विवाद तेज, सुरभि दास बोलीं ब्लाउज पहनाते तब भी सवाल होते और नहीं पहनाते तब भी


    नई दिल्ली। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। जहां एक ओर ट्रेलर के विजुअल्स और भव्य प्रस्तुति की सराहना हो रही है वहीं दूसरी ओर फिल्म के कुछ किरदारों के कॉस्ट्यूम को लेकर बहस भी छिड़ गई है। खास तौर पर माता सीता का किरदार निभा रहीं साई पल्लवी और कैकेयी की भूमिका में नजर आ रहीं लारा दत्ता के पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अब इस विवाद पर फिल्म में श्रुतकीर्ति की भूमिका निभा रहीं अभिनेत्री सुरभि दास ने अपनी बात रखी है।

    सुरभि दास ने कहा कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के साथ अलग अलग तरह की राय सामने आना स्वाभाविक है और हर व्यक्ति को संतुष्ट करना संभव नहीं होता। उनके अनुसार दर्शकों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी फिल्म का इंतजार करना चाहिए क्योंकि ट्रेलर के कुछ दृश्यों के आधार पर पूरी फिल्म का आकलन करना उचित नहीं है।

    सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि फिल्म में सीता और कैकेयी के कॉस्ट्यूम आधुनिक शैली के दिखाई दे रहे हैं और वे त्रेता युग की पृष्ठभूमि से मेल नहीं खाते। इसी आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरभि दास ने कहा कि अगर किरदारों को ब्लाउज नहीं पहनाया जाता तो भी लोग सवाल उठाते और अब जब पहनाया गया है तब भी आपत्ति जताई जा रही है। उनके मुताबिक लोगों की अलग अलग सोच होती है और हर किसी की अपेक्षाओं पर खरा उतरना संभव नहीं है।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि रामायण बेहद बड़े स्तर पर बनाई जा रही फिल्म है और इसकी कहानी, अभिनय तथा प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली होगी कि दर्शकों का ध्यान केवल कॉस्ट्यूम जैसी छोटी बातों पर नहीं रहेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सिनेमाघरों में फिल्म देखने के बाद दर्शकों की राय अधिक संतुलित होगी।

    सुरभि दास ने यह भी याद दिलाया कि रामायण पर पहले भी कई फिल्में और धारावाहिक बन चुके हैं और हर बार किसी न किसी पहलू को लेकर चर्चा या आलोचना हुई है। ऐसे में किसी भी नई प्रस्तुति को लेकर मतभेद होना असामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दर्शकों को फिल्म की पूरी कहानी देखने के बाद ही उसके बारे में राय बनानी चाहिए।

    इससे पहले फिल्म के कॉस्ट्यूम डिजाइनर रिम्पल और हरप्रीत नरूला भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उनका कहना था कि कॉस्ट्यूम तैयार करते समय कहानी, पात्रों और फिल्म की समग्र दृश्य शैली को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने भी दर्शकों से अपील की थी कि वे ट्रेलर के सीमित दृश्यों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पूरी फिल्म देखने के बाद अपनी राय रखें।

    रामायण का ट्रेलर रिलीज होने के साथ ही फिल्म को लेकर उत्सुकता काफी बढ़ गई है। जहां एक ओर इसकी भव्यता और स्टारकास्ट चर्चा का विषय बनी हुई है वहीं कॉस्ट्यूम विवाद ने भी इसे सुर्खियों में ला दिया है। अब सभी की नजर फिल्म की रिलीज पर टिकी है क्योंकि तभी यह साफ होगा कि मेकर्स की रचनात्मक सोच और प्रस्तुति दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • SC का प्रस्ताव- वाहन का बीमा नहीं तो तेल नहीं…, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की तैयारी

    SC का प्रस्ताव- वाहन का बीमा नहीं तो तेल नहीं…, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की तैयारी


    नई दिल्ली
    । देश में बिना बीमा (Uninsured) के सड़कों पर फर्राटे भर रहे वाहनों (Vehicles) पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने प्रस्ताव दिया है. इसमें ‘वाहन का बीमा नहीं तो तेल नहीं’ अभियान (‘No vehicle insurance, no fuel’ campaign ) को पायलट प्रोजेक्ट (Pilot project) के रूप में लागू करने का प्रपोजल दिया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें जिसके तहत पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से पहले वाहन के वैध इंश्योरेंस की जांच की जा सके और बीमा न होने पर तेल देने से मना किया जा सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और बीमा नियमों को सख्त करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय और IRDAI को पेट्रोल पंपों पर ईंधन, ANPR कैमरे, और नई गाड़ियों के बीमा को लेकर बड़े आदेश दिए हैं.कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय और IRDAI को एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है, जिसके तहत पेट्रोल पंपों पर वैध वाहन बीमा न होने पर गाड़ियों को ईंधन यानी पेट्रोल डीजल देने पर रोक लगाई जा सके।

    हाईवे और सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को ‘वाहन VAHAN’ पोर्टल और बीमा डेटाबेस से जोड़ा जाएगा. इससे बिना बीमा वाली गाड़ियों के अपने आप ई-चालान कट सकेंगे.नई गाड़ियों के लिए बीमा अवधि बढ़ाते हुए कोर्ट ने नई प्राइवेट कारों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दी।

    जबकि नए दोपहिया वाहनों के लिए इसे 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया है.पुलिस के लिए मोबाइल ऐप भी होगा. सड़क पर चेकिंग के लिए ट्रैफिक पुलिस को ऐसे मोबाइल ऐप या हैंडहेल्ड डिवाइस दिए जाएंगे, जिससे वे पलभर में गाड़ी के बीमा की जांच कर सकें।

  • ट्रेन में RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब मिलेगा पूरा बेडरोल किट, रेलवे ने जारी किए निर्देश

    ट्रेन में RAC टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब मिलेगा पूरा बेडरोल किट, रेलवे ने जारी किए निर्देश


    प्रयागराज।
    एसी (AC) श्रेणी में आधी सीट यानी रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (आरएसी) (Reservation Against Cancellation -RAC) टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को अब पूरा बेडरोल किट (Bedroll kit.) उपलब्ध कराया जाएगा। रेलवे बोर्ड (Railway Board) ने इस संबंध में चार अगस्त 2026 को एनसीआर समेत सभी जोनल रेलवे को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि एसी चेयर कार को छोड़कर अन्य सभी वातानुकूलित श्रेणियों में प्रत्येक आरएसी यात्री को अलग से संपूर्ण बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाए। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है।

    रेलवे बोर्ड को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई ट्रेनों में आरएसी यात्रियों को पूरा बेडरोल नहीं दिया जा रहा है या दो यात्रियों के बीच एक ही किट साझा कराई जा रही है। यात्रियों को अलग-अलग कंबल न मिलने पर वे परेशान होते थे। कभी कंबल तो कभी तकिया न मिलने की हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत की जा रही थी। लेकिन इसके बाद भी परेशानियां बंद नहीं हुईं।

    इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने दोबारा स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक आरएसी सीट पर सफर करने वालों को अन्य यात्रियों की तरह अलग से चादर, कंबल और बेडरोल की पूरी सुविधा दी जाए। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस आदेश के बाद प्रयागराज होकर गुजरने वाली सभी संबंधित एसी ट्रेनों में भी आरएसी यात्रियों को पूरा बेडरोल उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इससे यात्रियों को यात्रा के दौरान बेहतर सुविधा मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही शिकायतों पर भी रोक लगेगी।

    रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि इस आदेश की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों तक तत्काल पहुंचाई जाए तथा इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही आईआरसीटीसी सहित संबंधित विभागों को भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के लागू होने से देशभर में एसी कोचों में आरएसी टिकट पर यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को राहत मिलेगी। अब उन्हें बेडरोल के लिए शिकायत करने की आवश्यकता नहीं होगी और यात्रा के दौरान अन्य यात्रियों के समान सुविधाएं मिल सकेंगी।

    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि एसी चेयर कार को छोड़कर सभी एसी श्रेणियों में यात्रा करने वाले प्रत्येक आरएसी यात्री को पूर्ण बेडरोल किट उपलब्ध कराई जाए। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा और उन्हें अन्य वैध यात्रियों के समान सुविधा मिलेगी। इसमें परेशानी आने पर यात्री हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं। इसके लिए रेलवे की ओर से जानकारी साझा की जाएगी।

  • फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल

    फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) सिस्टम पर व्यापारियों से शुल्क वसूलने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। मंगलवार को संसद (Parliament) में भुगतान कानूनों में प्रस्तावित बदलाव पेश किए गए, जिससे यह संभावना और बढ़ गई है। हालांकि यह शुल्क व्यापारियों पर लगेगा, ग्राहकों पर नहीं, फिर भी यह बदलाव डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) को प्रभावित कर सकता है।

    जानकारी के मुताबिक नीति निर्माता दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला विकल्प है कि एक निश्चित राशि से अधिक के लेनदेन पर MDR लगाया जाए। दूसरा विकल्प है कि व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जाए। सूत्रों के अनुसार, एक प्रस्ताव के तहत केवल बड़े व्यापारियों से शुल्क लिया जाएगा, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।


    कितना लग सकता है चार्ज

    सरकारी सूत्र के अनुसार, एक प्रस्ताव में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% MDR लगाने की बात कही गई है। जेफरीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन व्यापारियों की कुल लेनदेन संख्या का केवल 4% हैं, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 67% इन्हीं से आता है।


    संशोधन विधेयक पेश

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन विधेयक पेश किया। उद्योग और नियामक सूत्रों के अनुसार, इस संशोधन से डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी आधार बनेगा।

    हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि शुल्क कितना होगा और यह किन लेनदेन पर लागू होगा। सरकारी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और राष्ट्रीय भुगतान निगम ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।


    UPI का बाजार में दबदबा

    UPI दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्कों में से एक है। जुलाई में इसके जरिए 23.6 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये वॉलमार्ट की फोनपे और गूगल की गूगल पे इस सिस्टम पर हावी हैं।


    फ्री UPI पर क्यों लगने जा रहा लगाम

    रॉयटर्स के मुताबिक उद्योग के अधिकारियों का लंबे समय से कहना है कि डिजिटल पेमेंट में ग्रोथ को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि UPI ट्रांजैक्शन पर पेमेंट कंपनियों को कोई शुल्क नहीं मिलता। इससे उनकी निवेश करने की क्षमता सीमित हो जाती है।


    MDR क्या होता है?

    MDR वह शुल्क है, जो व्यापारी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के लिए देते हैं। भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का शुल्क होता है, लेकिन UPI लेनदेन पर अभी व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

  • एक्टर प्रदीप रावत का 74 की उम्र में निधन, अश्वत्थामा से 'गजनी' तक… संघर्षों से भरी रही जिंदगी

    एक्टर प्रदीप रावत का 74 की उम्र में निधन, अश्वत्थामा से 'गजनी' तक… संघर्षों से भरी रही जिंदगी


    मुम्बई।
    बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्मों ‘गजनी’ और ‘लगान’ (‘Ghajini’ and ‘Lagaan’) में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले दिग्गज एक्टर प्रदीप रावत (Veteran actor Pradeep Rawat) का 74 की उम्र में निधन हो गया है. उनके जाने की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और फैंस दोनों गहरे सदमे में हैं. प्रदीप रावत के निधन के बाद सोशल मीडिया (Social Media) पर शोक की लहर दौड़ गई है. कई फिल्मी सितारों ने उन्हें भावुक अंदाज में श्रद्धांजलि दी है।


    ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे

    प्रदीप रावत के बिजनेस मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी (Siddharth Tiwari) ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि एक्टर पिछले पांच साल से ब्लड कैंसर से जूझ रहे थे. इलाज के बाद उनकी तबीयत में सुधार भी हुआ था, लेकिन कुछ महीने पहले कैंसर दोबारा लौट आया. पिछले दो महीनों से वह अस्पताल में भर्ती थे और बीते कुछ दिनों में उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई. आखिरकार मंगलवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली. परिवार के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार बुधवार को किए जाने की संभावना है।

    एक्टर सोनू सूद ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रदीप रावत की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- प्रदीप रावत भाई, आपकी कमी हमेशा महसूस होगी. इसके साथ उन्होंने टूटे दिल और हाथ जोड़ने वाली इमोजी भी लगाई.

    टीवी एक्टर आयुषपाल शर्मा ने भी इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रदीप रावत को याद करते हुए लिखा- यानी उन्होंने प्रदीप रावत को ‘गजनी’ के गजनी और ‘लगान’ के देवा के रूप में याद किया।


    विलेन के रोल से बनाई अलग पहचान

    प्रदीप रावत हिंदी ही नहीं, बल्कि तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी दमदार मौजूदगी के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने करियर में कई यादगार निगेटिव किरदार निभाए और पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाई। आमिर खान की ‘गजनी’ में उनका किरदार आज भी दर्शकों को याद है. वहीं ‘लगान’ में भी उन्होंने अपने अभिनय से गहरी छाप छोड़ी थी।


    फैंस भी हुए भावुक

    प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं. कई लोग उनकी फिल्मों के यादगार सीन और डायलॉग शेयर कर रहे हैं और उन्हें भारतीय सिनेमा का बेहतरीन कलाकार बता रहे हैं. उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और अभिनय को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

    फिल्मों में कुछ विलेन ऐसे होते हैं, जिनका चेहरा और अंदाज सालों तक दर्शकों के दिलों-दिमाग में बस जाता है. प्रदीप रावत उन्हीं कलाकारों में से एक थे. उनके चेहरे का खौफ, भारी आवाज और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन्स में शामिल कर दिया। पांच साल तक ब्लड कैंसर से लड़ने के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन उनका सफर सिर्फ एक सफल विलेन बनने की कहानी नहीं था, बल्कि संघर्ष, धैर्य और कभी हार न मानने वाले एक कलाकार की मिसाल भी था।


    जबलपुर से शुरू हुआ सपनों का सफर

    मध्य प्रदेश के जबलपुर में जन्मे प्रदीप रावत के लिए फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचना बिल्कुल आसान नहीं था. मुंबई आने के बाद उन्हें लगातार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. लंबे-चौड़े शरीर और तेज-तर्रार चेहरे की वजह से उन्हें अक्सर एक जैसे किरदार ऑफर होते थे, लेकिन बड़ा मौका मिलने का इंतजार लंबा था. इसी दौरान उनकी पर्सनैलिटी पर दिग्गज फिल्ममेकर बीआर चोपड़ा की नजर पड़ी और उनकी जिंदगी बदल गई।


    ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा ने बदल दी किस्मत

    साल 1988 में बीआर चोपड़ा के ऐतिहासिक टीवी शो ‘महाभारत’ में प्रदीप रावत को अश्वत्थामा का किरदार मिला. यह उनका पहला बड़ा ब्रेक था. उस दौर में ‘महाभारत’ देश के लगभग हर घर में देखा जाता था और अश्वत्थामा के किरदार ने उन्हें पहचान दिला दी. यहीं से फिल्मों के दरवाजे खुलने लगे.


    फिल्मों में शुरुआत हुई, लेकिन पहचान नहीं मिली

    प्रदीप रावत ने फिल्मों में 1985 की ‘मेरी जंग’ से कदम रखा था. इसके बाद वह कोयला, बागी, मेजर साब, सरफरोश, अग्निपथ, लगान जैसी कई बड़ी फिल्मों में नजर आए. हालांकि, इन फिल्मों में उन्हें ज्यादातर छोटे या सहायक किरदार ही मिले. बड़े बैनर की फिल्मों का हिस्सा बनने के बावजूद उन्हें वह पहचान नहीं मिल रही थी, जिसके वह हकदार थे. कई बार ऐसा दौर भी आया जब करियर चलाने के लिए उन्हें छोटे रोल स्वीकार करने पड़े।


    ‘स्ये’ ने रातों-रात बना दिया साउथ का सबसे बड़ा विलेन

    साल 2004 में आई एस.एस. राजामौली की तेलुगु फिल्म ‘Sye’ प्रदीप रावत के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. उन्होंने फिल्म में भिक्षु यादव का किरदार निभाया. उनकी खतरनाक मुस्कान, दमदार डायलॉग और रौबदार स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को ऐसा प्रभावित किया कि आज भी भिक्षु यादव को तेलुगु सिनेमा के सबसे आइकॉनिक विलेन्स में गिना जाता है। फिल्म की सफलता के बाद प्रदीप रावत साउथ इंडस्ट्री के सबसे डिमांड वाले विलेन बन गए. इसके बाद उन्होंने भद्रा, अंदरीवाडु, छत्रपति, लक्ष्मी जैसी सुपरहिट फिल्मों में लगातार यादगार किरदार निभाए. ‘छत्रपति’ में उनका रास बिहारी वाला रोल आज भी फैंस का पसंदीदा माना जाता है।


    फिर आया ‘गजनी’… जिसने इतिहास बदल दिया

    साल 2005 में ए.आर. मुरुगदॉस की तमिल फिल्म ‘गजनी’ में प्रदीप रावत ने मुख्य विलेन का किरदार निभाया. फिल्म इतनी सफल रही कि बाद में इसका हिंदी रीमेक बना, जिसमें आमिर खान लीड रोल में नजर आए और प्रदीप रावत ने एक बार फिर गजनी का वही किरदार निभाया. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का नाम ही उनके किरदार ‘गजनी’ पर रखा गया था।

    साल 2008 में रिलीज हुई हिंदी ‘गजनी’ बॉलीवुड की पहली 100 करोड़ रुपये कमाने वाली फिल्म बनी. आमिर खान के ट्रांसफॉर्मेशन के साथ-साथ प्रदीप रावत के खूंखार विलेन को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. आज भी ‘गजनी’ का जिक्र होते ही उनका चेहरा लोगों के सामने आ जाता है।


    विलेन ही नहीं, कॉमेडी में भी दिखाया दम

    ज्यादातर लोग उन्हें सिर्फ खतरनाक विलेन के रूप में याद करते हैं, लेकिन प्रदीप रावत ने कई फिल्मों में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग भी दिखाई. ‘ओए’, ‘पूलारंगाडु’, ‘नेनु शैलजा’ और ‘सर्रैनोडु’ जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ डराना ही नहीं, बल्कि दर्शकों को हंसाना भी जानते हैं।


    धीरे-धीरे पर्दे से दूर हो गए

    एक समय ऐसा था जब तेलुगु सिनेमा की बड़ी एक्शन फिल्मों में प्रदीप रावत लगभग तय माने जाते थे. लेकिन समय के साथ उन्होंने धीरे-धीरे हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों से दूरी बना ली. नए कलाकार आए, इंडस्ट्री बदली और प्रदीप रावत भी लाइमलाइट से दूर होते चले गए. फिर भी फैंस का मानना रहा कि उन्हें उनके टैलेंट के मुकाबले कभी वह सम्मान और बड़े किरदार नहीं मिले, जिसके वह हकदार थे।


    एक ऐसा विलेन… जिसे भुलाया नहीं जा सकेगा

    प्रदीप रावत ने कभी सुपरस्टार बनने का दावा नहीं किया, लेकिन उन्होंने यह जरूर साबित किया कि एक मजबूत कलाकार बिना हीरो बने भी इतिहास रच सकता है. अश्वत्थामा, भिक्षु यादव, गजनी और रास बिहारी जैसे किरदार सिर्फ फिल्मी रोल नहीं हैं, बल्कि भारतीय सिनेमा की यादगार विरासत का हिस्सा हैं। उनके निधन से परिवार गमगीन है. वो अपने पीछे पत्नी और दो बेटों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन जब भी भारतीय सिनेमा के सबसे दमदार विलेन्स की बात होगी, प्रदीप रावत का नाम हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा।

  • फ्रांस के जंगल में लगी भीषण आग के बाद मिले वर्ल्ड वॉर-2 के 400 से ज्यादा गोले और अन्य विस्फोट

    फ्रांस के जंगल में लगी भीषण आग के बाद मिले वर्ल्ड वॉर-2 के 400 से ज्यादा गोले और अन्य विस्फोट


    पेरिस
    । फ्रांस (France) के दक्षिण-पश्चिम (South-west) में बसे ले पोर्ज (Le Porge) गांव में जंगल की भीषण आग के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ है. यहां 400 से ज्यादा वर्ल्ड वॉर 2 (World War II) के गोले और दूसरे विस्फोटक मिले हैं. जुलाई में लगी आग के दौरान गांव के करीब 3,500 लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे. आग शांत होने के बाद जब अधिकारी इलाके की जांच कर रहे थे, तब जमीन के नीचे दबा यह गोला-बारूद मिला. अधिकारियों का कहना है कि आग की तेज गर्मी की वजह से कुछ गोले फट गए और तभी उनके बारे में पता चला।

    आग लगने के दौरान गांव के पास कई धमाकों की आवाज भी सुनाई दी थी. इसके बाद बम निरोधक टीम मौके पर पहुंची. पहले एक खेत से 75 गोले मिले. फिर पूरे इलाके की जांच की गई, जिसमें 400 से ज्यादा गोले और दूसरे विस्फोटक बरामद हुए. लोगों की सुरक्षा को देखते हुए कुछ समय के लिए इस इलाके में आने-जाने पर रोक लगा दी गई।


    आग की गर्मी से मिला सुराग

    अधिकारियों के मुताबिक, मिले गोलों में फ्रांस और जर्मनी दोनों के मोर्टार शेल शामिल हैं. माना जा रहा है कि ये वर्ल्ड वॉर 2 के समय के हैं. ये गोले कई सालों से जमीन के नीचे दबे थे. जंगल की आग के दौरान जमीन बहुत ज्यादा गर्म हो गई. इसी गर्मी की वजह से कुछ गोले फट गए और अधिकारियों को उनका पता चल गया।

    अधिकारियों ने कहा कि इन पुराने गोलों में अब भी धमाका होने का खतरा था. अगर इनमें विस्फोट होता, तो इनके टुकड़े काफी दूर तक जा सकते थे और लोगों को नुकसान पहुंचा सकते थे. इसलिए पहले पूरे इलाके को सुरक्षित किया गया. इसके बाद बम निरोधक टीम ने सभी गोले और दूसरे विस्फोटकों को हटाया। जांच पूरी होने के बाद लोगों को अपने घर लौटने की इजाजत दे दी गई।


    इस साल फ्रांस में रिकॉर्ड जंगल की आग

    इस साल फ्रांस में जंगल की आग ने 1.6 लाख हेक्टेयर (160,000 हेक्टेयर) से ज्यादा जमीन जला दी है. यह देश में अब तक की सबसे बड़ी जंगल की आग मानी जा रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से यूरोप में जंगल की आग पहले से ज्यादा बड़ी और तेजी से फैल रही है. बढ़ती गर्मी, लंबे समय तक सूखा और तेज हवाएं ऐसी आग को और खतरनाक बना रही हैं।

    वर्ल्ड वॉर 2 खत्म हुए 80 साल से ज्यादा हो चुके हैं. इसके बाद भी यूरोप के कई इलाकों में आज भी पुराने बम और गोले जमीन के नीचे दबे मिल जाते हैं. कई बार निर्माण का काम, सूखा या जंगल की आग जैसी घटनाओं के बाद ये सामने आ जाते हैं. हाल ही में हंगरी में डेन्यूबे नदी का पानी कम होने पर भी वर्ल्ड वॉर 2 के कई बम दिखाई दिए थे।