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  • टेक्सास कोर्ट ने 46 अरब डॉलर की बॉर्डर वॉल योजना पर लगाई अस्थायी रोक, बिग बेंड में निर्माण पर फिलहाल ब्रेक

    टेक्सास कोर्ट ने 46 अरब डॉलर की बॉर्डर वॉल योजना पर लगाई अस्थायी रोक, बिग बेंड में निर्माण पर फिलहाल ब्रेक


    नई दिल्ली:
    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की 46 अरब डॉलर की बॉर्डर वॉल योजना को टेक्सास की संघीय अदालत से झटका लगा है। अदालत ने बिग बेंड इलाके में बॉर्डर वॉल और उससे जुड़ी अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण पर फिलहाल अस्थायी रोक लगा दी है। इस परियोजना के तहत अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर 30 फीट ऊंची स्टील की दीवारें बनाने के साथ वाहनों को रोकने वाले बैरियर, सड़कें और आधुनिक निगरानी तकनीक लगाए जाने की योजना है।

    यह रोक फिलहाल अस्थायी है। बिग बेंड इलाके में जमीन मालिकों और पर्यावरण समूहों के विरोध के बीच अदालत का यह आदेश आया है। निर्माण का विरोध करने वालों का कहना है कि बिग बेंड का इलाका इतना दूर-दराज और दुर्गम है कि वह अपने आप में अवैध आव्रजन को रोकने का काम करता है।

    टेक्सास की संघीय अदालत ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किया। जज कैथलीन कार्डोने ने अपने फैसले में कहा कि वादी अपने दावों में सफल होते दिखाई दे रहे हैं और यदि रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें गंभीर नुकसान हो सकता है। अदालत का आदेश ऐसे समय आया है, जब प्रशासन ने कुछ ही सप्ताह पहले बिग बेंड सेक्टर में बॉर्डर वॉल के पहले पैनल लगाए थे।

    यानी निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद ही उस पर अस्थायी रोक लगा दी गई। अदालत के आदेश के तहत ट्रंप प्रशासन को बिग बेंड क्षेत्र में बॉर्डर वॉल के साथ दूसरी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण से भी फिलहाल रोका गया है।

    इस मामले में जमीन मालिकों, कारोबारियों और पर्यावरण समूहों ने परियोजना का विरोध किया था। विरोध करने वालों का आरोप है कि प्रशासन ने नियमों को किनारे रखकर कई छूट दीं और कानून का उल्लंघन किया। इन समूहों का कहना है कि बिग बेंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वहां इस तरह की सीमा दीवार की जरूरत पर सवाल उठते हैं।

    निर्माण का विरोध करने वाले पक्षों के अनुसार, इलाके की दुर्गमता पहले से ही अवैध आव्रजन को रोकने में भूमिका निभाती है। इस मामले में जमीन मालिकों और पर्यावरण समूहों ने निर्माण कार्य के खिलाफ कानूनी कदम उठाया था, जिसके बाद अदालत ने अस्थायी रोक का आदेश दिया।

    यह मामला सेंटर ऑफ बायोलॉजिकल डायवर्सिटी की ओर से दायर किया गया था। संगठन की ओर से लाइकेन जोर्डहल ने अदालत के फैसले को पूरी जीत बताया और इसे बिग बेंड, टेक्सास तथा संविधान के लिए ऐतिहासिक दिन करार दिया।

    वहीं, अदालत के आदेश से फिलहाल 46 अरब डॉलर की व्यापक योजना के तहत बिग बेंड क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। परियोजना में सीमा पर दीवार के अलावा वाहनों को रोकने वाले बैरियर, सड़कें और निगरानी की आधुनिक तकनीक शामिल है। फिलहाल अदालत की अस्थायी रोक के कारण इस क्षेत्र में इन निर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर विराम लगा है।
  • अक्टूबर की शुरुआत में महंगाई का असर, गैस सिलेंडर से लेकर हवाई सफर तक बढ़ा खर्च

    अक्टूबर की शुरुआत में महंगाई का असर, गैस सिलेंडर से लेकर हवाई सफर तक बढ़ा खर्च

    नई दिल्ली: अक्टूबर महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई का असर बढ़ाने वाले कई बदलाव लेकर आई है। त्योहारों के सीजन में जहां लोग खरीदारी, यात्रा और अन्य जरूरी खर्चों की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ), घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पासपोर्ट सेवाओं की लागत बढ़ गई है। इन बदलावों का असर होटल, रेस्तरां, कैटरिंग, हवाई यात्रा और घरेलू खरीदारी के बजट पर पड़ सकता है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 62.50 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। इसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 2,810 रुपए और मुंबई में 2,764 रुपए हो गई है। पटना में कीमत में सबसे अधिक 71.50 रुपए की वृद्धि दर्ज की गई है।

    कमर्शियल गैस की कीमत बढ़ने से होटल, रेस्तरां, ढाबा और कैटरिंग उद्योग की लागत बढ़ सकती है। अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों तथा शादी-विवाह के कारण खाद्य सेवाओं की मांग बढ़ने के बीच कारोबारियों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव पड़ सकता है। इसका असर आगे उपभोक्ताओं तक भी पहुंचने की संभावना है। इसी तरह अक्टूबर से एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों ने हवाई ईंधन की कीमत में प्रति लीटर 16 रुपए तक का इजाफा किया है। विमानन उद्योग में ईंधन कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है, इसलिए एटीएफ महंगा होने से एयरलाइंस की लागत बढ़ेगी। दशहरा, दीपावली और छठ पूजा के दौरान यात्रियों की मांग बढ़ने पर एयरलाइंस किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं।

    त्योहारी खरीदारी के बीच घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी भी उपभोक्ताओं के बजट को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक बाजार में कॉपर, स्टील और एल्युमिनियम जैसे कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण कंपनियों ने कई उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, स्मार्ट टीवी, स्प्लिट एसी, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी वस्तुओं की कीमतों में 5 से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। इससे उत्पाद के अनुसार ग्राहकों को करीब 1,200 रुपए से 3,500 रुपए तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। त्योहारी ऑफर्स और डिस्काउंट उपलब्ध होने के बावजूद कीमतों में हुई यह वृद्धि खरीदारी के कुल बजट पर असर डाल सकती है।

    पासपोर्ट से जुड़ी सेवाओं की लागत बढ़ना भी उन लोगों के लिए अतिरिक्त खर्च का कारण बन सकता है, जो नया पासपोर्ट बनवाने या पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने की योजना बना रहे हैं। सामान्य श्रेणी के पासपोर्ट आवेदन शुल्क में वृद्धि की गई है। नई व्यवस्था के तहत पासपोर्ट बनवाने की लागत में 1,000 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर विदेश यात्रा, शिक्षा या रोजगार के लिए पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों की कुल लागत पर पड़ सकता है। अक्टूबर और नवंबर का समय त्योहारों, शादी-विवाह और यात्रा के लिहाज से व्यस्त माना जाता है, इसलिए इस दौरान बढ़ी हुई लागत का प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।

    कुल मिलाकर, अक्टूबर की शुरुआत में गैस सिलेंडर, हवाई ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और पासपोर्ट सेवाओं से जुड़े खर्च बढ़े हैं। कच्चे माल और ऊर्जा की लागत ऊंची बनी रहने पर आने वाले समय में अन्य उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की बात विशेषज्ञों ने कही है। ऐसे में त्योहारों के दौरान खरीदारी और यात्रा की योजना बना रहे लोगों को बढ़ी हुई लागत को ध्यान में रखना होगा। कारोबारियों के लिए भी ईंधन और अन्य परिचालन खर्च में बढ़ोतरी अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती है।

  • नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल के दाम, 5 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ पेट्रोल, डीजल की कीमत में भी 3 रुपये का इजाफा

    नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल के दाम, 5 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ पेट्रोल, डीजल की कीमत में भी 3 रुपये का इजाफा

    नई दिल्ली: ग्लोबल टेंशन के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। देश की बड़ी निजी ईंधन खुदरा कंपनियों में शामिल नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी की है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने शनिवार की शुरुआती घंटों से देशभर में अपने पेट्रोल पंपों पर नई कीमतें लागू कर दी हैं। नायरा एनर्जी देशभर में 7,108 पेट्रोल पंपों का संचालन करती है। कंपनी की ओर से इस संबंध में टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

    इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर डालने वाली नायरा एनर्जी पहली ईंधन खुदरा कंपनी थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन खुदरा कंपनियों ने मई में पेट्रोल पंपों पर कीमतें बढ़ाना शुरू किया था। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद नायरा ने मार्च की बढ़ोतरी वापस ले ली थी। कंपनी ने 1 जुलाई को पेट्रोल के दाम 5 रुपये और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे।

    इसी बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री की सीमा को लेकर भी चर्चा चल रही है। सरकार ने ईंधन की बिक्री पर किसी भी तरह की सीमा लगाए जाने पर ऐतराज जताया है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने हाल ही में डीजल की बिक्री सीमित किए जाने की खबरों पर कहा था कि किसी को भी पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा था कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस मामले में सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। यह बयान ऐसे समय आया, जब जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने अपने कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की खरीद सीमित कर दी थी।

    डीजल की खुदरा और थोक कीमतों के बीच अंतर बढ़ने के कारण कारखानों, दूरसंचार कंपनियों, होटल, अस्पताल और अन्य बड़े उपभोक्ता खुदरा पंपों से अपेक्षाकृत सस्ता डीजल खरीदने लगे हैं। डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में अंतर करीब 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसके चलते कुछ औद्योगिक उपभोक्ता एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीद रहे हैं। इससे कुछ पेट्रोल पंपों के भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। पेट्रोल पंपों की भंडारण क्षमता सीमित होती है और दोबारा आपूर्ति में कुछ दिन लग सकते हैं।

    इसी वजह से कुछ कंपनियों ने अपने पेट्रोल पंपों पर डीजल खरीद की सीमा तय की है। जियो-बीपी ने कुछ पंपों पर एक ग्राहक के लिए प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल खरीदने की सीमा लगाई है। वहीं नायरा एनर्जी के पेट्रोल पंपों पर यह सीमा 70 से 200 लीटर के बीच रखी गई है। ऐसे में नायरा एनर्जी की ओर से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाने के साथ ही ईंधन की बिक्री और उपलब्धता को लेकर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है।

  • ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार

    ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार


    जबलपुर । गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को देशभर में ड्राई डे रहा लेकिन जबलपुर में इस दौरान शराब बिक्री के कथित मामले सामने आने से सवाल खड़े हो गए हैं। रांझी क्षेत्र में शराब दुकान बंद होने के बाद भी अंदर से शराब बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दुकान के भीतर बनी कथित गुप्त खिड़की के जरिए ग्राहकों को शराब दिए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान शराब निर्धारित कीमत से अधिक यानी ओवररेट में बेची गई। हालांकि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामला रांझी के बड़ा पत्थर स्थित शराब दुकान से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 2 अक्टूबर को दुकान बंद रहने के बावजूद यहां दिन से लेकर देर रात तक शराब की कथित बिक्री की गई। दुकान नय्यर एंड कोहली ग्रुप की बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ड्राई डे के दौरान शराब दुकानों को बंद रखने के नियम के बावजूद यदि बिक्री हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।

    वायरल वीडियो में दुकान के अंदर से एक छोटे रास्ते या कथित गुप्त खिड़की के जरिए शराब दिए जाने का दावा किया गया है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि ग्राहकों से शराब की एमआरपी से ज्यादा रकम ली गई। हालांकि इस पूरे मामले में वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर चर्चा तेज है और लोग ड्राई डे के दौरान दुकानों की निगरानी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    इसी बीच जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्र बरगी में भी शराब बिक्री से जुड़ा एक मामला सामने आया। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष संजू लाल ने कथित तौर पर शराब बेच रहे दो युवकों को पकड़े जाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर बरगी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को शराब के साथ थाने ले जाया गया। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से लाई गई थी और किस उद्देश्य से बेची जा रही थी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगी नगर चौकी क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में ड्राई डे के दिन सामने आए इस मामले ने एक बार फिर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित दिन पर शराब बिक्री रोकने के लिए प्रशासन और आबकारी विभाग की ओर से विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद यदि शराब बिक्री के मामले सामने आते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

    फिलहाल रांझी में वायरल वीडियो और बरगी में पकड़े गए दोनों युवकों के मामले में जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं और शराब बिक्री किस स्तर पर हुई इसकी पुष्टि जांच के आधार पर होगी। इस घटना ने ड्राई डे पर शराब दुकानों की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन के सामने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

  • शव के पास पति के आंसू और पीछे छिपा था बड़ा राज, 70 लाख के बीमे के लिए पत्नी की हत्या का खुलासा

    शव के पास पति के आंसू और पीछे छिपा था बड़ा राज, 70 लाख के बीमे के लिए पत्नी की हत्या का खुलासा

    जबलपुर । जबलपुर जिले के पाटन में गर्भवती कविता चौधरी की मौत के 28 दिन बाद पुलिस ने मामले का चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिस घटना को शुरुआत में सड़क हादसा माना जा रहा था वह पुलिस जांच में सुनियोजित हत्या निकली। आरोप है कि कविता के पति प्रयास पांडे ने करीब 70 लाख रुपए की बीमा राशि हासिल करने के लिए उसकी हत्या की साजिश रची और पांच लाख रुपए में सुपारी देकर वारदात को अंजाम दिलवाया। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि कथित मास्टरमाइंड पति और उसका साथी अभी फरार बताए जा रहे हैं।

    पुलिस जांच के मुताबिक प्रयास पांडे ने वर्ष 2022 में कविता चौधरी से प्रेम विवाह किया था। दोनों की शादी अलग समाज में होने के कारण परिवार में इस रिश्ते को लेकर विरोध और विवाद की स्थिति बनी रहती थी। इसी बीच प्रयास को जानकारी हुई कि कविता के नाम करीब 70 लाख रुपए की बीमा पॉलिसी है। पुलिस के अनुसार इसके बाद उसने पत्नी से छुटकारा पाने और बीमा राशि हासिल करने की योजना बनाई। हत्या की साजिश कथित तौर पर घटना से करीब दो महीने पहले शुरू की गई थी।

    बताया गया कि प्रयास ने सबसे पहले पाटन की शराब दुकान के पास दो युवकों से संपर्क कर पत्नी की हत्या के लिए रकम की पेशकश की लेकिन दोनों ने इस काम से इनकार कर दिया। इसके बाद उसके दोस्त मान सिंह के जरिए चौधरी मोहल्ले के धनीराम रामजी और विक्रम अहिरवार से संपर्क हुआ। पुलिस के अनुसार पांच लाख रुपए में हत्या का सौदा तय हुआ और प्रयास ने एक लाख रुपए एडवांस के तौर पर दिए।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने घटना को सड़क हादसा दिखाने के लिए पहले से तैयारी की थी। इसके लिए उन्होंने तीन से चार बार घटनास्थल के आसपास जाकर पूरी योजना की प्रैक्टिस की। वारदात में इस्तेमाल करने के लिए करीब 20 हजार रुपए देकर एक पिकअप वाहन किराए पर लिया गया था। घटना वाले दिन प्रयास फोन पर कविता से लगातार बात करता रहा और उसकी लोकेशन अपने साथियों तक पहुंचाता रहा।

    4 सितंबर की रात करीब 9 बजे कविता एक्टिवा से रानीताल पुलिया के पास पहुंची। पुलिस के अनुसार इसी दौरान विक्रम ने पिकअप से पीछे से एक्टिवा को टक्कर मारी। टक्कर लगने के बाद कविता सड़क पर गिर गई और आरोप है कि उसके ऊपर वाहन चढ़ा दिया गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी पिकअप को नहर में ले जाकर धोने के बाद वापस कर आए।

    घटना के बाद प्रयास मौके पर पहुंचा और पुलिस तथा परिजनों के सामने पत्नी की मौत पर शोक जताता रहा। वह अंतिम संस्कार तक पुलिस के साथ मौजूद रहा। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे अज्ञात वाहन से हुआ सड़क हादसा माना था लेकिन बाद में एक मुखबिर से मिली सूचना ने जांच की दिशा बदल दी। पुलिस को जानकारी मिली कि प्रयास कुछ दिन पहले शराब दुकान के पास पत्नी की हत्या को लेकर बातचीत कर रहा था।

    इसके बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने हत्या की साजिश और वारदात से जुड़ी जानकारी दी। इसके आधार पर धनीराम रामजी और विक्रम अहिरवार को गिरफ्तार किया गया है। अब पुलिस फरार प्रयास पांडे और उसके साथी मान सिंह की तलाश कर रही है। मामले में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बीमा पॉलिसी से जुड़ी जानकारी और हत्या की साजिश के बीच क्या पूरा संबंध था।

  • इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा

    इंदौर के वार्डों में खुली समस्याओं की पोल, नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारियों को मौके पर घेरा


    इंदौर । इंदौर के कई वार्डों में लंबे समय से अलग अलग तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। रहवासी अपनी शिकायतों को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचते हैं लेकिन कई मामलों में समय पर समाधान नहीं हो पाता। अब इन समस्याओं की वास्तविक स्थिति जानने और उनके निराकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने जोन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत वे खुद उन वार्डों में पहुंच रही हैं जहां समस्याएं अधिक हैं। वहां वार्ड अध्यक्षों और स्थानीय लोगों से चर्चा कर मैदानी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से मुलाकात कर समस्याओं पर सीधे जवाब मांगा जा रहा है।

    अभियान की शुरुआत जोन 22 से की गई है। यहां नेता प्रतिपक्ष ने जोनल अधिकारी से मुलाकात कर वार्डों में सामने आ रही समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान ड्रेनेज लाइन पानी बिजली सड़क और नगर निगम की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी शिकायतों को सामने रखा गया। अधिकारियों से यह जानने की कोशिश की गई कि इन समस्याओं का समाधान कब तक किया जाएगा और इसके लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।

    सोनिला मिमरोट के अनुसार वार्डों में कई स्थानों पर अनियमितताएं देखने को मिल रही हैं। कुछ जगहों पर लोगों की शिकायतों के बावजूद सुनवाई नहीं होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में केवल कार्यालय में बैठकर शिकायतों की जानकारी लेने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति समझने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से जोन कार्यालयों तक पहुंचने का अभियान शुरू किया गया है।

    जोन 22 के अंतर्गत आने वाले कुछ वार्डों की स्थिति को लेकर भी अधिकारियों के सामने सवाल रखे गए। बताया गया कि इस क्षेत्र में दो वार्ड ऐसे हैं जो पहले ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं और बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल हुए। इन इलाकों में अभी भी कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। कुछ स्थानों पर ड्रेनेज लाइन का काम अधूरा है तो कहीं सड़क जैसी जरूरी सुविधाओं को लेकर लोग परेशान हैं। इन समस्याओं को बिंदुवार अधिकारियों के सामने रखा गया और इनके समाधान की समयसीमा को लेकर जवाब मांगा गया।

    नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि जोन अभियान केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। आगे भी अलग अलग वार्डों में जाकर स्थानीय लोगों और वार्ड अध्यक्षों से समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद संबंधित जोनल अधिकारियों से सीधे चर्चा कर शिकायतों के निराकरण की स्थिति जानी जाएगी। इस दौरान अधिकारियों से यह भी पूछा जाएगा कि किसी समस्या के समाधान में देरी क्यों हो रही है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

    अभियान के जरिए नगर निगम के स्तर पर वार्डों की समस्याओं को सीधे जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अब जोन 22 के बाद अन्य जोनों में भी इसी तरह का अभियान चलाने की तैयारी है। इससे स्थानीय समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आने और उनके समाधान को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • फ्लाईदुबई के को-पायलट पर पहले भी उठे थे सवाल, ट्रेनिंग के दौरान कट्टरपंथी दस्तावेज मिलने का दावा

    फ्लाईदुबई के को-पायलट पर पहले भी उठे थे सवाल, ट्रेनिंग के दौरान कट्टरपंथी दस्तावेज मिलने का दावा


    दुबई।
    दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमले के मामले में आरोपी ओमानी सह-पायलट को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ओमान एयर में काम करने के दौरान भी सवालों के घेरे में आया था। वर्ष 2024 में ट्रेनी को-पायलट रहते हुए उसके पास कथित तौर पर कट्टरपंथी और जिहादी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज मिले थे। इसके बाद उसे उड़ान संबंधी जिम्मेदारियों से हटाकर प्रशासनिक कार्यों में लगाया गया था।

    अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पहले सवालों के घेरे में आ चुका व्यक्ति फ्लाईदुबई में सह-पायलट कैसे बना। साथ ही, इजरायल जाने वाली उड़ान में उसे जिम्मेदारी दिए जाने की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी को सऊदी अरब में इलाज के बाद आगे की जांच के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को सौंप दिया गया है।

    बताया गया है कि सह-पायलट ने पहले कई मौकों पर फलस्तीनियों के समर्थन और इजरायल के विरोध में विचार व्यक्त किए थे। हालांकि, इन दावों और हमले के पीछे उसके कथित मकसद की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है।

    यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार ने की भारतीय पायलट की तारीफ

    घटना के बाद यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के सलाहकार अनवर गर्गाश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्मित ने सूझबूझ और साहस का परिचय देकर एक बड़ी संभावित त्रासदी को टालने में मदद की।

    यह घटना बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी। आरोप है कि सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया, जिससे वह घायल हो गए। गर्गाश ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि संकट के समय कैप्टन ने जिम्मेदारी और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। उन्होंने पायलट के व्यवहार को सराहनीय बताया।

    घटना में किसी देश की भूमिका मिली तो होगी कार्रवाई: नेतन्याहू

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि यदि फ्लाईदुबई की घटना के पीछे किसी देश की भूमिका सामने आती है, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी देश की संलिप्तता के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

    नेतन्याहू के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ घटना की तस्वीर स्पष्ट हो रही है। उन्होंने दावा किया कि हमलावर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था और उसका इरादा विमान में सवार यात्रियों सहित विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने का था। ये आरोप जांच के अंतिम निष्कर्षों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट होना बाकी हैं।

    शुरुआती जांच में को-पायलट के हमले की बात

    अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने बताया कि फ्लाईदुबई की उड़ान की आपात लैंडिंग से जुड़े मामले की शुरुआती जांच में सामने आया कि सह-पायलट ने कैप्टन पर हमला किया था। घटना में दोनों को चोटें आईं। शुरुआती जांच में यूएई की सुरक्षा टीम ने भी सहयोग किया था।

    इस घटना पर तुर्किये और पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। मामले को विमानन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है।

    इजरायली अधिकारी भी करेंगे पूछताछ

    मामले की जांच में इजरायली अधिकारी भी शामिल होंगे। वे यूएई के अधिकारियों के साथ समन्वय कर घटना के क्रम और संदिग्ध के कथित मकसद की पड़ताल करेंगे। आरोपी सह-पायलट को यूएई भेजे जाने के बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    फिलहाल जांच का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि कॉकपिट में हमला किन परिस्थितियों में हुआ, आरोपी की पृष्ठभूमि से जुड़े दावों में कितनी सच्चाई है और क्या इस घटना के पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका थी।

  • सरकारी अस्पतालों के पानी में E. coli का खतरा, 15 में से 5 सैंपल फेल, MYH समेत कई अस्पतालों पर उठे सवाल

    सरकारी अस्पतालों के पानी में E. coli का खतरा, 15 में से 5 सैंपल फेल, MYH समेत कई अस्पतालों पर उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर नगर निगम की जांच में चिंताजनक स्थिति सामने आई है। नगर निगम की वाटर टेस्टिंग लैब ने अलग अलग सरकारी अस्पतालों और उनके परिसरों से पानी के 15 सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट में 6 सैंपल में Coliform Bacteria और 5 सैंपल में E. coli पाए गए हैं। रिपोर्ट को नेता प्रतिपक्ष की ओर से सार्वजनिक किए जाने के बाद अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    पानी की जांच के लिए निर्धारित मानकों के मुताबिक 100 एमएल पानी में Coliform और E. coli की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में जिन सैंपल में इन बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। खासतौर पर अस्पतालों में यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पहले से बीमार मरीजों के अलावा बच्चे बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग भी इलाज के लिए आते हैं।

    जांच में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया पीसी सेठी अस्पताल के बोरवेल के पानी में पाया गया। यहां Coliform की मात्रा 118 MPN प्रति 100 एमएल और E. coli की मात्रा 24 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज की गई। इसी अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित RO यूनिट के पानी में भी दोनों बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के इस्तेमाल वाले पानी की गुणवत्ता को देखते हुए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    गोविंद बल्लभ पंत जिला अस्पताल के वाटर कूलर से लिए गए सैंपल में भी Coliform और E. coli मिला। जांच में Coliform 64 और E. coli 5 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज हुआ। वाटर कूलर का पानी मरीजों और उनके परिजन पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पानी में बैक्टीरिया की मौजूदगी स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा विषय बन जाती है।

    चाचा नेहरू अस्पताल में भी पानी के अलग अलग स्रोतों में बैक्टीरिया पाए गए। अस्पताल की बिल्डिंग में स्थित बोरवेल के पानी में Coliform 10 और E. coli 4 मिला। मुख्य गेट के पास स्थित RO यूनिट के पानी में Coliform 26 और E. coli 16 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज किया गया। इससे साफ है कि केवल बोरवेल ही नहीं बल्कि कुछ RO यूनिट के पानी के सैंपल भी जांच में मानकों के अनुरूप नहीं मिले।

    एमवाय अस्पताल के पास लिए गए बोरवेल के पानी के सैंपल में भी Coliform 9 और E. coli 7 MPN प्रति 100 एमएल पाया गया। हालांकि नर्मदा बल्क कनेक्शन और छठी मंजिल के टैप से लिए गए पानी के सैंपल में इन बैक्टीरिया की मात्रा नहीं मिली। मानसिक अस्पताल बाणगंगा के बोरिंग के पानी में भी Coliform पाया गया जबकि वहां के कुछ RO सैंपल में भी बैक्टीरिया की मौजूदगी दर्ज हुई।

    विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया शरीर में पहुंचने पर दस्त पेट दर्द उल्टी मरोड़ और पाचन तंत्र से जुड़ी दूसरी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। ज्यादा संक्रमण या पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन की स्थिति भी बन सकती है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए ऐसी समस्या अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है क्योंकि वे पहले से ही किसी बीमारी का इलाज करा रहे होते हैं।

    जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब अस्पतालों में पानी के स्रोतों की सफाई और गुणवत्ता सुधारने की जरूरत पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। खासतौर पर जिन स्थानों के सैंपल में E. coli और Coliform मिले हैं वहां पानी के स्रोतों की दोबारा जांच और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर, ट्रंप का ऐलान- रणनीतिक भंडार से जारी होगा तेल

    अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर, ट्रंप का ऐलान- रणनीतिक भंडार से जारी होगा तेल

    वाशिंगटन। अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय देश अपने भंडार से बड़ी मात्रा में डीजल जारी करने पर सहमत हो गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सात प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह जी7 ने रणनीतिक भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसकी शुरुआत बड़े पैमाने पर डीजल की आपूर्ति से होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि डीजल जारी करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी।

    अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (एएए) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 22 सितंबर को 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। शुक्रवार को यह घटकर 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। ईंधन की ऊंची कीमतों से अमेरिकी उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र पर दबाव बना हुआ है।

    फ्रांस ने तेल जारी करने की योजना की जानकारी दी

    अमेरिका स्थित फ्रांसीसी दूतावास के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ती ईंधन कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता को लेकर जी7 के अध्यक्ष एवं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से रात में बातचीत की थी। इसके बाद मैक्रों ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जी7 नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की।

    इस पहल के समन्वय की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) को दी गई है। फ्रांस ने अपने बयान में कहा कि आईईए के माध्यम से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने की प्रतिबद्धताओं को तत्काल लागू किया जाएगा। यह प्रक्रिया चार महीने तक चलेगी। इसके तहत जी7 के सदस्य और साझेदार देश शुरुआती 20 दिनों में बड़ी मात्रा में डीजल जारी करेंगे।

    इस कदम का उद्देश्य बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाना और ईंधन की कीमतों पर दबाव कम करने में मदद करना है।

    मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप पर बढ़ा दबाव

    अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई हैं। एपी-एनओआरसी के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी नागरिक बढ़ती कीमतों के लिए ट्रंप को जिम्मेदार मानते हैं। सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था के प्रबंधन को लेकर उनकी लोकप्रियता रेटिंग में भी गिरावट दर्ज की गई।

    ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर आम लोगों के खर्च और परिवहन लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार पर महंगाई को नियंत्रित करने और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कदम उठाने का दबाव बढ़ा है।

    ईरान युद्ध और व्यापारिक तनाव का असर

    ईरान युद्ध और व्यापारिक टकरावों के बीच अमेरिका में तेल सहित कई वस्तुओं की कीमतों में तेजी आई है। लंबे समय से जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है, जिसका असर अमेरिका समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर पड़ा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए युद्ध की आर्थिक कीमत स्वीकार्य है। उनका दावा है कि संघर्ष समाप्त होने के बाद ईंधन की कीमतें नीचे आ सकती हैं। हालांकि, युद्ध कब समाप्त होगा और ऊर्जा बाजार पर इसका असर कितने समय तक बना रहेगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की जी7 की पहल से बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इससे डीजल की खुदरा कीमतों में कितनी और कितनी जल्दी राहत मिलेगी, यह मांग, आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • शुक्र की वक्री चाल से 42 दिनों तक इन 5 राशियों को मिल सकता है धन लाभ, जानें सभी 12 राशियों पर प्रभाव

    शुक्र की वक्री चाल से 42 दिनों तक इन 5 राशियों को मिल सकता है धन लाभ, जानें सभी 12 राशियों पर प्रभाव


    उज्जैन।
    ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रेम, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य और भौतिक संपन्नता का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12:45 बजे शुक्र वक्री होंगे। यह स्थिति 14 नवंबर 2026 की सुबह करीब 5:57 बजे तक रहने की बात कही गई है। इस तरह शुक्र की वक्री अवस्था की अवधि लगभग 42 दिन होगी।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र की चाल में बदलाव का असर प्रेम संबंधों, पारिवारिक जीवन और आर्थिक मामलों पर पड़ सकता है। इस दौरान कुछ राशियों के लिए पुराने मामलों की समीक्षा करने और आर्थिक योजनाओं को व्यवस्थित करने का समय माना जा रहा है। हालांकि, ग्रहों की चाल के आधार पर धन लाभ या नुकसान की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों के लिए क्या संकेत बताए जा रहे हैं।

    प्रेम संबंधों में आ सकते हैं बदलाव

    शुक्र को प्रेम और आकर्षण का कारक ग्रह माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शुक्र के वक्री होने की अवधि में पुराने रिश्तों और भावनात्मक मुद्दों पर दोबारा विचार करने की स्थिति बन सकती है।

    • पुरानी गलतफहमियां: लंबे समय से चल रहे मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का अवसर मिल सकता है।
    • पुराने रिश्तों की याद: कुछ लोगों का संपर्क पुराने मित्रों या प्रेम संबंधों से दोबारा हो सकता है।
    • नए रिश्तों में सावधानी: भावनाओं में बहकर कोई बड़ा निर्णय लेने के बजाय परिस्थितियों को समझने की सलाह दी जाती है।

    वैवाहिक जीवन में समझदारी जरूरी

    इस अवधि को दांपत्य जीवन में आत्ममंथन और आपसी तालमेल बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। कुछ जोड़े अपने रिश्ते को मजबूत बनाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं, जबकि कुछ को मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है।

    ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी करने के बजाय संवाद और आपसी समझ को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    आर्थिक मामलों में बरतें सावधानी

    शुक्र का संबंध ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं से जोड़ा जाता है। इसलिए शुक्र की वक्री चाल के दौरान आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करने की सलाह दी जाती है।

    • खरीदारी से पहले बजट का आकलन करें।
    • बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश करने से बचें।
    • गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखें।
    • बड़े आर्थिक फैसले लेते समय जोखिम और संभावित लाभ का आकलन करें।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ राशियों के लिए धन संबंधी अवसरों के संकेत बताए जाते हैं, लेकिन वास्तविक आर्थिक परिणाम आय, खर्च, बाजार की परिस्थितियों और व्यक्तिगत फैसलों पर निर्भर करते हैं।

    सभी 12 राशियों पर शुक्र की वक्री चाल का प्रभाव

    1. मेष राशि

    रिश्तों और साझेदारी से जुड़े पुराने मुद्दे सामने आ सकते हैं। कारोबार या वैवाहिक जीवन में लंबित मामलों को सुलझाने पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा। महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लें।

    2. वृषभ राशि

    दैनिक दिनचर्या, कामकाज और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें और अपने काम व्यवस्थित ढंग से करें।

    3. मिथुन राशि

    प्रेम संबंधों और संतान से जुड़े मामलों में धैर्य रखना जरूरी हो सकता है। पुरानी गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश करें। विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।

    4. कर्क राशि

    घरेलू मामलों और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान देना पड़ सकता है। संपत्ति या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अपने बजट और जरूरतों की अच्छी तरह समीक्षा करनी चाहिए।

    5. सिंह राशि

    संवाद, छोटे भाई-बहनों और करीबी लोगों के साथ संबंध महत्वपूर्ण रह सकते हैं। बातचीत में संयम रखें और किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी शर्तें ध्यान से पढ़ें।

    6. कन्या राशि

    आय, बचत और पारिवारिक बातचीत से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें और विवादों को बढ़ने से रोकें।

    7. तुला राशि

    शुक्र की वक्री चाल तुला राशि में होने की ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस अवधि को आत्मविश्लेषण से जोड़कर देखा जा रहा है। व्यक्तित्व, रिश्तों और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करने का अवसर मिल सकता है। अहंकार से बचने और दूसरों की बात सुनने पर ध्यान दें।

    8. वृश्चिक राशि

    अचानक होने वाले खर्चों और यात्रा की योजनाओं पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। आर्थिक फैसले लेते समय जोखिम का आकलन करें। मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान उपयोगी हो सकते हैं।

    9. धनु राशि

    सामाजिक संपर्कों और आय के स्रोतों से जुड़े मामलों की समीक्षा करने का समय माना जा रहा है। पुराने मित्रों से संपर्क दोबारा बन सकता है। कम समय में अधिक लाभ पाने के लालच में जोखिम न लें।

    10. मकर राशि

    करियर और कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत में संयम रखें। नौकरी बदलने या नया काम शुरू करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें।

    11. कुंभ राशि

    आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ने की संभावना ज्योतिषीय मान्यताओं में बताई गई है। लंबी यात्रा की योजना बनाते समय तैयारी और जरूरी सामान पर ध्यान दें। विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई जारी रखनी चाहिए।

    12. मीन राशि

    स्वास्थ्य, साझा आर्थिक मामलों और पारिवारिक संबंधों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। ससुराल पक्ष के साथ मतभेद होने पर बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश करें। जोखिम वाले निवेश में बिना जानकारी के पैसा लगाने से बचें।

    शुक्र की वक्री चाल के दौरान क्या उपाय करें?

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कुछ सामान्य उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।

    • रिश्तों में संवाद: मतभेद होने पर खुलकर बातचीत करें और अहंकार को बीच में न आने दें।
    • भावनात्मक संतुलन: किसी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत होकर विचार करें।
    • आर्थिक अनुशासन: आय और खर्च का हिसाब रखें तथा अनावश्यक खरीदारी से बचें।
    • व्यक्तिगत कुंडली का आकलन: ज्योतिषीय दृष्टि से किसी विशेष उपाय या निर्णय के लिए योग्य ज्योतिषी से परामर्श लिया जा सकता है।

    ध्यान दें: ग्रहों की चाल और राशियों पर उनके प्रभाव से जुड़ी बातें ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। धन लाभ, करियर या रिश्तों में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक रूप से निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। आर्थिक फैसले वास्तविक परिस्थितियों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही लें।