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  • आरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया पर विवाद तेज बैतूल में जयस ने दर्ज कराई आपत्ति

    आरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया पर विवाद तेज बैतूल में जयस ने दर्ज कराई आपत्ति


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में राजस्व भूमि को आरक्षित वन घोषित किए जाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है यह मामला अब प्रशासन और आदिवासी संगठनों के बीच टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है जय आदिवासी युवा शक्ति जिसे आमतौर पर जयस के नाम से जाना जाता है ने इस पूरे मामले में गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए राजस्व और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं

    जयस का आरोप है कि जिले में बड़े पैमाने पर राजस्व भूमि को आरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया में वैधानिक नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है संगठन का कहना है कि जिन जमीनों को आरक्षित वन में शामिल किया जा रहा है वे सार्वजनिक उपयोग की भूमि हैं और इन पर स्थानीय समुदायों विशेष रूप से आदिवासी समाज का पारंपरिक अधिकार रहा है ऐसे में बिना उचित प्रक्रिया और स्थानीय लोगों की सहमति के इन जमीनों को वन क्षेत्र में शामिल करना न्यायसंगत नहीं है

    संगठन ने इस मामले को गंभीर मानते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम कलेक्टर बैतूल को ज्ञापन सौंपा है जिसमें 456 वनखण्डों पर विधिक आपत्ति दर्ज कराई गई है ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि इस प्रक्रिया को तत्काल नहीं रोका गया तो इससे व्यापक स्तर पर सामाजिक और प्रशासनिक विवाद उत्पन्न हो सकता है

    जयस के प्रतिनिधियों का कहना है कि वन अधिकार कानून और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में इन अधिकारों की अनदेखी की जा रही है जिससे आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ रहा है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और प्रभावित लोगों को पर्याप्त जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है

    इस मुद्दे के सामने आने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है हालांकि अभी तक संबंधित विभागों की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन माना जा रहा है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच या पुनर्विचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना बेहद जरूरी होता है क्योंकि यह सीधे तौर पर स्थानीय समुदायों के अधिकारों और आजीविका से जुड़ा होता है यदि प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित नहीं की जाती है तो इससे विवाद और अधिक गहरा सकता है

    कुल मिलाकर बैतूल में 456 वनखण्डों को लेकर उठा यह विवाद आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है यदि प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा समय रहते संतुलित और संवेदनशील समाधान नहीं निकाला गया तो यह मुद्दा व्यापक आंदोलन का रूप भी ले सकता है ऐसे में सभी पक्षों के बीच संवाद और कानूनी प्रक्रिया का पालन ही इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है

  • विधानसभा चुनाव बाद पास होगा महिला आरक्षण पर संशोधन बिल? क्यों सरकार ने बदली रणनीति

    विधानसभा चुनाव बाद पास होगा महिला आरक्षण पर संशोधन बिल? क्यों सरकार ने बदली रणनीति


    नई दिल्ली। महिला आरक्षण अधिनियम पर संशोधन बिल लाने पर विराम लगता दिख रहा है। अब खबरें आ रही हैं कि केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 816 करने के लिए तत्काल विधेयक लाने की संभावना नहीं है, क्योंकि संसद का मौजूदा सत्र निर्धारित अवधि से पहले ही स्थगित हो सकता है, लेकिन सत्रावसान नहीं किया जाएगा ताकि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद इसे फिर से बुलाये जाने का विकल्प खुला रहे। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

    बता दें कि लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करना है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि सरकार द्वारा अगले कुछ दिनों में संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की संभावना बहुत कम है, जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के रूप में जाना जाता है, में बदलाव करेगा। ऐसी जानकारी मिली है कि मंगलवार शाम तक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष विधेयक का मसौदा पेश करने का कोई प्रस्ताव नहीं था। मंत्रिमंडल की बैठक बुधवार को होनी है।

    सभी दलों से विचार-विमर्श जरूरी
    घटनाक्रम से अवगत एक सूत्र ने बताया, ”महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए कार्यक्रम तय करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ और विचार-विमर्श करने की आवश्यकता है।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राजग के कुछ घटक दलों तथा कुछ विपक्षी दलों के नेताओं के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की थी। लेकिन प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस और एक अन्य प्रमुख दल तृणमूल कांग्रेस के साथ परामर्श किया जाना बाकी है।

    निर्धारित समय सीमा से पहले संसद सत्र स्थगित होने की संभावना
    बजट सत्र को संक्षिप्त करने की चर्चा के बीच, सूत्रों ने संकेत दिया है कि 2 अप्रैल की निर्धारित समय सीमा से पहले संसद सत्र स्थगित किये जाने की संभावना है, लेकिन सत्रावसान नहीं किया जाएगा, ताकि उसी सत्र को पुनः बुलाया जा सके। यह भी जानकारी मिली है कि सरकार अगले महीने पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के बाद सत्र को पुनः बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। चुनावों के परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

  • जनगणना 2027 को डिजिटल बनाने की दिशा में बैतूल आगे जिला स्तर पर ट्रेनिंग अभियान शुरू

    जनगणना 2027 को डिजिटल बनाने की दिशा में बैतूल आगे जिला स्तर पर ट्रेनिंग अभियान शुरू

    बैतूल । बैतूल जिले में भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में संपन्न कराने की दिशा में तैयारियां अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी हैं इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसके तहत फील्ड ट्रेनर्स को तकनीकी और प्रक्रियात्मक रूप से सक्षम बनाया जा रहा है

    इसी क्रम में जिले में 64 फील्ड ट्रेनर्स का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है यह प्रशिक्षण न केवल जनगणना कार्य की मूलभूत समझ विकसित करने के लिए है बल्कि इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ट्रेनर आगे प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को सटीक और स्पष्ट मार्गदर्शन दे सके

    प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है पहले चरण का आयोजन 24 मार्च से 26 मार्च तक किया जा रहा है जबकि दूसरा चरण 1 अप्रैल से 3 अप्रैल 2026 तक आयोजित होगा यह प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 9 30 बजे से शाम 6 बजे तक पीएम श्री एम एल बी विद्यालय बैतूल में संचालित किया जा रहा है जहां प्रतिभागियों को गहन अभ्यास और व्यवहारिक जानकारी दी जा रही है

    यह पूरा कार्यक्रम जनगणना कार्य निदेशालय मध्यप्रदेश भोपाल से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार संचालित किया जा रहा है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि पूरे राज्य में एक समान गुणवत्ता और प्रक्रिया का पालन हो प्रशासन इस प्रशिक्षण को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है क्योंकि यह आने वाली जनगणना की सफलता का आधार तैयार करेगा

    प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन प्रमुख जिला जनगणना अधिकारी और कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है वहीं अपर कलेक्टर और जिला जनगणना अधिकारी वंदना जाट भी इस पूरे अभियान की निगरानी कर रही हैं उनके निर्देशन में प्रशिक्षण को सुव्यवस्थित और परिणाममुखी बनाया गया है

    राज्य स्तर से मास्टर ट्रेनर अनामिका जैन और जिले के मास्टर ट्रेनर विनोद कुमार अडलक प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं वे ट्रेनर्स को डिजिटल उपकरणों के उपयोग डेटा संग्रहण की आधुनिक तकनीकों कानूनी प्रावधानों और जनगणना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं

    प्रशिक्षण के दौरान विशेष रूप से जनगणना 2027 की रूपरेखा पर जोर दिया जा रहा है जिसमें डिजिटल डेटा एंट्री मोबाइल आधारित एप्लीकेशन का उपयोग और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे विषय शामिल हैं इसके साथ ही प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट रूप से समझाया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर कार्य में किसी प्रकार की त्रुटि न हो

    यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी बल्कि जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तेज और सटीक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी बैतूल में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आने वाले समय में डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा

  • मोहम्मद कैफ का बड़ा बयान-आंद्रे रसेल की कमी नहीं भर सकते कैमरून ग्रीन

    मोहम्मद कैफ का बड़ा बयान-आंद्रे रसेल की कमी नहीं भर सकते कैमरून ग्रीन


    नई दिल्ली। पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने इंडियन प्रीमियर लीग 2026 से पहले कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनकी गिनती है कि टीम के दिग्गज ऑलराउंडर आंद्रे रसेल की कमी को कैमरून ग्रीन पूरा नहीं कर पाएंगे। कैफ के अनुसार, रसेल जैसा प्रभाव डालना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं है।

    रसेल जैसा प्रभाव डालना मुश्किल

    कैफ ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि भले ही कैमरून ग्रीन एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन रसेल की तुलना में वह अभी काफी पीछे हैं। उन्होंने कहा कि रसेल सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि गेंदबाजी में भी मैच जिताने की क्षमता रखते थे। जब भी उन्हें गेंद दी जाती थी, वह विकेट निकालने में सफल रहते थे। यही वजह है कि केकेआर में उनका योगदान बेहद अहम रहा है।

    ग्रीन के बचे हुए प्रदर्शन पर सवाल

    कैफ ने ग्रीन के बचे हुए प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एशेज और टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में ग्रीन का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ऐसे में आईपीएल 2026 में उनकी भूमिका और प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी। केकेआर को उनसे बड़ी उम्मीदें जरूर होंगी, लेकिन क्या वह उन पर खरे उतर पाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

    पॉवेल भी नहीं भर पाएंगे जगह

    कैफ ने वेस्टइंडीज के रोवमैन पॉवेल को भी रसेल का विकल्प मिलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि टीम शायद क्रिस गेल जैसी गलती दोहराना नहीं चाहती थी, इसलिए बाद में रणनीति बदली गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम मैनेजमेंट और खासकर शाहरुख खान की भूमिका में अहम रही, जो रसेल को टीम से जोड़े रखने में दिलचस्पी दिखाई।

    कोच की नई भूमिका में रसेल

    गौरतलब है कि आंद्रे रसेल ने आईपीएल 2026 से पहले संन्यास ले लिया है और अब वह केकेआर के साथ ‘पावर कोच’ के रूप में जुड़े हुए हैं। टीम अपना पहला मुकाबला 29 मार्च को मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेलेगी, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि रसेल की गैरमौजूदगी में टीम कैसा प्रदर्शन करती है।

  • सीरीज पर न्यूजीलैंड का कब्जा! New Zealand national cricket team ने 4-1 से जीती T20 सीरीज

    सीरीज पर न्यूजीलैंड का कब्जा! New Zealand national cricket team ने 4-1 से जीती T20 सीरीज


    नई दिल्ली।न्यूजीलैंड महिला क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका को आखिरी टी20 में 92 रन से हराकर सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली। इस जीत में सबसे बड़े हीरो कैप्टन अमेलिया केर, मोट फिगर और बॉल दोनों को शानदार दिखाया गया है। क्राइस्टचर्च ने इस स्कॉटलैंड में खेलते हुए पहले बल्लेबाजी करते हुए 194 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया और फिर दक्षिण अफ्रीका को 102 रन पर रोक दिया।

    अमेलिया केर का तूफानी शतक

    टोस्ट हारकर ने पहले फ्लॉप करने के लिए न्यूजीलैंड की शुरुआत संभली हुई रही, लेकिन रियल धमाका कैप्टन एमेलिया केर ने किया। उन्होंने 55 गेंदों पर 105 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 19 बल्लेबाज और 1 छक्का शामिल रहे। उनके अलावा जॉर्जिया प्लिमर ने 27 और ब्रुक हॉलिडे ने 26 रन का योगदान दिया। दक्षिण अफ्रीका की ओर से अयाबोंगा खाका और तुमी सेखुखुने ने 3-3 विकेट लेकर टीम में वापसी की कोशिश की, लेकिन बड़ी टीम स्कोर में सफल नहीं हो सकी।

    लक्ष्य का पीछा करते हुए ही बखरी दक्षिण अफ्रीका

    195 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम की शुरुआत ही दबाव में नजर आई। टीम ने अपने अंदर चार विकेट पर 40 रन बनाए, जिससे वह कभी एक भी रन नहीं बना पाई। पूरी टीम 20 ओवर में 102 रन ही बना सकी और 92 रन के बड़े अंतर से मैच हार गई। न्यूजीलैंड की ओर से बेहद भरोसेमंद रही, जिसमें ली ताहुहु ने 3 विकेट, सोफी डिवाइन और एमेलिया केर ने 2-2 विकेट लेकर जीत सुनिश्चित की।

    ऑलराउंड से चमकदार कैप्टन

    एमेलिया केर ने इस गोदाम में सिर्फ फ़्लोटिंग ही नहीं, बल्कि योगदान भी दिया। उन्होंने 3 ओवर में सिर्फ 6 रन देकर 2 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच रहे। पूरी सीरीज में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया। उन्होंने पांच मैचों में 276 रन के साथ 5 विकेट भी हासिल किये, जो उनकी ऑलराउंड क्षमता में शामिल है।

  • पैन कार्ड बनवाने और अपडेट करने के नियम बदले 1 अप्रैल से लागू होंगे नए कड़े प्रावधान

    पैन कार्ड बनवाने और अपडेट करने के नियम बदले 1 अप्रैल से लागू होंगे नए कड़े प्रावधान


    नई दिल्ली । देश में वित्तीय लेनदेन और पहचान से जुड़े सबसे अहम दस्तावेजों में से एक पैन कार्ड अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। 1 अप्रैल 2026 से पैन कार्ड बनवाने और उसे अपडेट कराने के नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन लागू होने जा रहे हैं जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। अब तक जहां पैन कार्ड बनवाना काफी आसान प्रक्रिया मानी जाती थी वहीं आने वाले समय में यह प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और दस्तावेज आधारित हो जाएगी।

    मौजूदा व्यवस्था के तहत आधार कार्ड के जरिए पैन कार्ड बनवाना बेहद सरल था। कई लोग सिर्फ आधार नंबर के आधार पर ही अपना पैन कार्ड बनवा लेते थे लेकिन नए नियम लागू होने के बाद यह सुविधा सीमित हो जाएगी। अब केवल आधार कार्ड के भरोसे पैन कार्ड बनवाना संभव नहीं होगा और आवेदकों को अपनी पहचान और जन्म से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण देने होंगे।

    नए नियमों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 के बाद अगर कोई व्यक्ति पैन कार्ड के लिए आवेदन करता है तो उसे आधार कार्ड के अलावा अन्य जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे। इनमें वोटर आईडी कार्ड जन्म प्रमाण पत्र ड्राइविंग लाइसेंस पासपोर्ट और हाई स्कूल यानी 10वीं कक्षा की मार्कशीट या सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है ताकि किसी भी तरह की गलत जानकारी या फर्जीवाड़े की संभावना को कम किया जा सके।

    इतना ही नहीं नाम से जुड़े नियमों में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नए प्रावधान के अनुसार पैन कार्ड पर वही नाम प्रिंट होगा जो आधार कार्ड में दर्ज होगा। यानी अगर आपके आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग गलत है या नाम में कोई त्रुटि है तो उसे पहले ठीक करवाना जरूरी होगा। अन्यथा वही गलती आपके पैन कार्ड में भी दिखाई देगी जिससे भविष्य में वित्तीय लेनदेन या दस्तावेज सत्यापन के दौरान परेशानी हो सकती है।

    फॉर्म से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अभी तक जिन फॉर्म्स के जरिए पैन कार्ड बनवाया या अपडेट किया जाता है वे 1 अप्रैल 2026 से अमान्य हो जाएंगे। उनकी जगह नए फॉर्म जारी किए जाएंगे जिनके जरिए ही आवेदन या अपडेट की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इसका मतलब यह है कि अगर आप पुराने फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं तो आपका आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    ऐसे में यदि आप पैन कार्ड बनवाने की सोच रहे हैं या उसमें किसी तरह का सुधार करवाना चाहते हैं तो यह सही समय है कि आप 1 अप्रैल से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें। इससे आप नई सख्त नियमावली से बच सकते हैं और बिना अतिरिक्त जटिलताओं के अपना काम आसानी से पूरा कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर सरकार का यह कदम पैन कार्ड प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है। हालांकि इससे प्रक्रिया थोड़ी जटिल जरूर होगी लेकिन लंबे समय में यह बदलाव पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकता है।

  • मियामी ओपन में Coco Gauff की शानदार जीत, सेमीफाइनल में मुचोवा से भिड़ंत

    मियामी ओपन में Coco Gauff की शानदार जीत, सेमीफाइनल में मुचोवा से भिड़ंत


    नई दिल्ली अमेरिकी टेनिस स्टार कोको गॉफ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मियामी ओपन में पहली बार ली जगह बनाई है। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने गठबंधन की बेलिंडा बेनकिक को संघर्षपूर्ण मुकाबले में 6-3, 1-6, 6-3 से हराया। दो घंटे 15 मिनट तक चले इस क्लॉक में गॉफ ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पहले सेट में पूरी तरह से नियंत्रण बनाए रखा। सबसे मजबूत और बेहतरीन शॉट सेलेक्शन के दम पर उन्होंने पहला सेट आसानी से अपने नाम कर लिया।

    बेनकिक की वापसी, लेकिन गॉफ़ ने दम दिखाया

    दूसरे सेट में बेनकिक ने शानदार वापसी करते हुए अपना प्रदर्शन कम किया और आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने तेजी से दूसरे सेट लैपटॉप यूनिट को अंतिम रूप दिया। हालांकि गॉफ ने प्रेशर में पुराने सेट में शानदार प्रदर्शन किया। एक अहम ब्रेक प्वाइंट के बाद उन्होंने मैच का रुख अपने पक्ष में मोड़ लिया। 3-3 के आधार पर गॉफ ने लगातार बेहतर खेल दिखाया और अपने नाम से मैच के जरिए मजबूत सर्व व ड्रॉप शॉट लिए।

    बेस्ट इन मुचोवा से होगी पार्ट

    इस जीत के साथ गॉफ का सामना अब चेक रिपब्लिक की करोलिना मुचोवा से होगा। दोनों खिलाड़ियों के बीच हेड टू हेड्स रिकॉर्ड गोफ के पक्ष में है, दोनों खिलाड़ियों के बीच अब तक सभी 5 गुटों के समूह खेले हैं। ऐसे में एक गॉफ का पलड़ा भारी माना जा रहा है।

    मुचोवा भी शानदार फॉर्म में

    दूसरी ओर, मुचोवा ने भी अपने क्वार्टर फाइनल में दमदार प्रदर्शन करते हुए सीधे सेटों में जीत दर्ज की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को 7-5, 7-6(5) से हराया और इस सीजन में अपना शानदार रिकॉर्ड 18-3 से अपने नाम किया। उनका सामान भी काफी ऊंचा है, बाकी सभी मुकाबले बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।

  • सुनील ग्रोवर बने कॉमेडी की धड़कन हर किरदार में ढलने वाला बेमिसाल हुनर

    सुनील ग्रोवर बने कॉमेडी की धड़कन हर किरदार में ढलने वाला बेमिसाल हुनर


    नई दिल्ली । छोटे पर्दे की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो सिर्फ अभिनय नहीं करते बल्कि अपने हुनर से पूरी इंडस्ट्री का स्तर ही बदल देते हैं और सुनील ग्रोवर उन्हीं में से एक हैं। हाल के समय में जहां एक ओर फिल्म धुरंधर द रिवेंज और उसके लीड स्टार रणवीर सिंह की चर्चा हर तरफ सुनाई दे रही है वहीं दूसरी ओर सुनील ग्रोवर अपने जबरदस्त टैलेंट के दम पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। अगर बड़े पर्दे पर किसी को गिरगिट कहा जाए तो छोटे पर्दे पर यह खिताब बिना किसी हिचक के सुनील ग्रोवर को दिया जा सकता है क्योंकि वह हर किरदार में इस तरह ढल जाते हैं कि असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है।

    कॉमेडी की दुनिया में सुनील ग्रोवर का सफर आसान नहीं रहा लेकिन उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दम पर एक अलग मुकाम हासिल किया। कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में गुत्थी डॉक्टर मशहूर गुलाटी और रिंकू भाभी जैसे किरदारों ने उन्हें घर घर में पहचान दिलाई। इन किरदारों के जरिए उन्होंने यह साबित कर दिया कि कॉमेडी केवल हंसी तक सीमित नहीं होती बल्कि यह एक कला है जो दर्शकों के दिल में जगह बना लेती है।

    समय के साथ जब कपिल शर्मा का शो नए प्लेटफॉर्म पर पहुंचा और द ग्रेट इंडियन कपिल शो के रूप में सामने आया तो शुरुआत में दर्शकों की प्रतिक्रिया उतनी मजबूत नहीं रही लेकिन जैसे ही सुनील ग्रोवर की एंट्री हुई शो की पूरी तस्वीर बदल गई। उनकी मौजूदगी ने शो में नई जान फूंक दी और दर्शकों को फिर से वही पुराना जादू महसूस होने लगा। आज हालात यह हैं कि दर्शक शो देखने के लिए खास तौर पर सुनील ग्रोवर का इंतजार करते हैं।

    उनकी सबसे बड़ी खासियत उनकी मिमिक्री है। चाहे वह किसी मशहूर शख्सियत का अंदाज हो या किसी काल्पनिक किरदार का रूप सुनील उसे पूरी शिद्दत से निभाते हैं। उन्होंने कई बड़े कलाकारों की नकल इतनी सटीक तरीके से की है कि खुद असली कलाकार भी हैरान रह जाते हैं। मंच पर उनकी मौजूदगी दर्शकों को बांधे रखती है और हर परफॉर्मेंस एक नया अनुभव बन जाती है।

    सिर्फ कॉमेडी ही नहीं बल्कि सुनील ग्रोवर की सादगी भी उन्हें खास बनाती है। कैमरे के सामने जहां वह ऊर्जा और हास्य से भरपूर नजर आते हैं वहीं निजी जिंदगी में वह बेहद साधारण और जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें सिर्फ एक कलाकार नहीं बल्कि एक प्रेरणा के रूप में भी देखते हैं।

    आज के दौर में जब कंटेंट तेजी से बदल रहा है और दर्शकों की पसंद भी लगातार विकसित हो रही है ऐसे समय में सुनील ग्रोवर जैसे कलाकार का लगातार प्रासंगिक बने रहना उनकी काबिलियत का सबसे बड़ा सबूत है। वह न सिर्फ लोगों को हंसाते हैं बल्कि अपने अभिनय से उन्हें भावनात्मक रूप से भी जोड़ते हैं। सच कहा जाए तो सुनील ग्रोवर का टैलेंट अनुभव करना अपने आप में एक खास एहसास है और यही उन्हें टीवी का सच्चा लेजेंड बनाता है।

  • सऊदी प्रिंस सलमान को ईरान जंग से क्या फायदा: ट्रंप से कहा- युद्ध जारी रखें, अमेरिका फंस गया लंबी लड़ाई में?

    सऊदी प्रिंस सलमान को ईरान जंग से क्या फायदा: ट्रंप से कहा- युद्ध जारी रखें, अमेरिका फंस गया लंबी लड़ाई में?

    वॉशिंगटन । सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने हालिया बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने का आग्रह किया है। सूत्रों के अनुसार, युवराज का मानना है कि यह अमेरिका-इस्राइल के सैन्य अभियान के माध्यम से पश्चिम एशिया को फिर से आकार देने का एक ऐतिहासिक अवसर है।
    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध जारी रखने पर जोर पिछले सप्ताह हुई कई वार्ताओं में युवराज मोहम्मद ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट रूप से बताया है कि ईरान की कट्टरपंथी सरकार को समाप्त करने के लिए दबाव बनाना आवश्यक है। बातचीत से जुड़े लोगों का कहना है कि युवराज का तर्क है कि ईरान खाड़ी क्षेत्र के लिए एक दीर्घकालिक खतरा है, जिसे केवल वहां की वर्तमान सरकार को हटाकर ही समाप्त किया जा सकता है।

    इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान को एक गंभीर खतरे के रूप में देखते हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस्राइल शायद एक ऐसे ईरान को पसंद करेगा जो आंतरिक कलह में इतना उलझा हो कि वह इस्राइल के लिए खतरा न बने। वहीं, सऊदी अरब एक असफल ईरानी राज्य को अपने लिए एक गंभीर और सीधा सुरक्षा खतरा मानता है।

    सऊदी अरब को किस बात का डर?
    विश्लेषकों का कहना है कि “भले ही युवराज मोहम्मद युद्ध से बचना चाहते हों, लेकिन उन्हें चिंता है कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप अब पीछे हटते हैं, तो सऊदी अरब और शेष पश्चिम एशिया को एक उग्र और क्रोधित ईरान का अकेले सामना करना पड़ेगा।

    ऐसी स्थिति में ईरान जलडमरूमध्य को समय-समय पर बंद करने की शक्ति भी हासिल कर सकता है। हालांकि सऊदी अरब जलडमरूमध्य के बंद होने से निपटने के लिए अन्य खाड़ी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, लेकिन यदि जलमार्ग जल्द ही नहीं खोला गया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    अमेरिका फंस गया लंबी लड़ाई में?
    सऊदी और अमेरिकी सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ईरान सऊदी तेल प्रतिष्ठानों पर और भी विनाशकारी हमले कर सकता है। साथ ही, संयुक्त राज्य अमेरिका एक कभी न खत्म होने वाले युद्ध में फंस सकता है।

    बदल रहा ट्रंप का रुख?
    राष्ट्रपति ट्रंप का रुख सार्वजनिक तौर पर युद्ध को लेकर बदलता रहा है। कभी वे युद्ध के जल्द खत्म होने का संकेत देते हैं, तो कभी इसे और भड़कता हुआ बताते हैं। हाल ही में राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनके प्रशासन और ईरान के बीच हमारे दुश्मनी के पूर्ण और अंतिम समाधान के संबंध में उत्पादक बातचीत हुई है, हालांकि ईरान ने बातचीत की किसी भी संभावना को खारिज कर दिया है।

    तेल बाजार में भारी संकट
    ईरान के साथ युद्ध के सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिका-इस्राइल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पहले ही तेल बाजार में भारी व्यवधान पैदा कर दिया है। युवराज मोहम्मद के साथ बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने तेल की कीमतों और अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में चिंता जताई है। अमेरिकी अधिकारियों को सूचित किए गए लोगों के अनुसार, सऊदी नेता ने उन्हें आश्वासन दिया है कि यह केवल अस्थायी है।

    सऊदी सरकार का खंडन
    सऊदी अधिकारियों ने इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया है कि युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने युद्ध को लंबा खींचने का दबाव डाला है। सरकार के एक बयान में कहा गया है “सऊदी अरब का साम्राज्य हमेशा से इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है, इससे पहले कि यह शुरू भी हुआ हो। हमारे अधिकारी ट्रंप प्रशासन के साथ निकट संपर्क में हैं और हमारी प्रतिबद्धता अपरिवर्तित है।”

    बयान में यह भी कहा गया है “आज हमारी मुख्य चिंता अपने लोगों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे दैनिक हमलों से खुद को बचाना है। ईरान ने गंभीर कूटनीतिक समाधानों के बजाय खतरनाक टकराव का रास्ता चुना है। इससे हर हितधारक को नुकसान होता है, लेकिन ईरान को सबसे ज्यादा।”

  • ईरान के दुश्मन बढ़े! युद्ध में उतर सकते हैं खाड़ी के ताकतवर देश; इस बात का सता रहा डर

    ईरान के दुश्मन बढ़े! युद्ध में उतर सकते हैं खाड़ी के ताकतवर देश; इस बात का सता रहा डर

    तेहरान। खाड़ी अरब देश ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। यदि तेहरान उनके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला करता है, तो उन्हें इसमें कूदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले कई लोगों के हवाले से ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
    सऊदी यूएई धैर्य खो रहे

    नाम न छापने की शर्त पर इन लोगों ने बताया कि खाड़ी के सबसे शक्तिशाली देश, विशेष रूप से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ईरानी हमलों से अपना धैर्य खो रहे हैं।

    ईरान ने इन देशों में पहले ही बंदरगाहों, ऊर्जा सुविधाओं और हवाई अड्डों को निशाना बनाया है। हालांकि, उन्होंने जोड़ा कि वे युद्ध में तभी शामिल होंगे जब तेहरान खाड़ी के महत्वपूर्ण बिजली और पानी के बुनियादी ढांचे पर हमला करने की अपनी धमकियों को हकीकत में बदल देगा।
    अधिकांश खाड़ी देश युद्ध में शामिल होने के पक्ष में

    सूत्रों के अनुसार, ओमान जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर अधिकांश खाड़ी देश इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। फिर भी, वे युद्ध में शामिल होने से कतरा रहे हैं क्योंकि ईरान उन पर हमले तेज कर सकता है। एक यूरोपीय राजनयिक ने कहा कि वे ऐसी स्थिति में भी नहीं फंसना चाहते जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के साथ कोई समझौता कर लें और उन्हें एक घायल व गुस्से से भरे ईरानी शासन के साथ अकेले निपटना पड़े।
    खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले

    पिछले 24 घंटों में बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई सभी ने ईरान द्वारा दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को बीच में ही मार गिराया है। ईरान का दावा है कि खाड़ी देश वैध लक्ष्य हैं क्योंकि अमेरिका उनके हवाई क्षेत्र और क्षेत्रों का उपयोग उस पर हमला करने के लिए करता है।

    सूत्रों ने कहा कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद में पिछले सप्ताह हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में सैन्य कार्रवाई का विकल्प मेज पर था।

    इस बैठक में मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देश भी शामिल थे।

    मंगलवार को कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि खाड़ी देशों को ईरान के साथ मिल-जुलकर रहने के तरीके खोजने होंगे। उन्होंने कहा, यह युद्ध के बाद ईरानियों पर निर्भर करेगा कि वे विश्वास को फिर से कैसे बहाल करते हैं।
    खार्ग द्वीप पर खतरा

    सुरक्षा तंत्र के करीबी एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार, यदि ट्रंप खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की अपनी धमकी पर आगे बढ़ते हैं तो इससे पूरे क्षेत्र में तेहरान की ओर से और भी बड़ी जवाबी कार्रवाई होगी।

    ईरानी अधिकारी ने कहा कि इस मिशन के लिए आवश्यक अमेरिकी सैनिकों को संभवतः यूएई से भेजा जाएगा, जहां अल धफरा एयर बेस स्थित है। अधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि अमीरात ने इसकी अनुमति दी, तो ईरान इस खाड़ी देश पर भीषण हमला करेगा। अधिकारी ने यह भी जोड़ा कि यदि अमेरिका द्वीप पर कब्जा कर लेता है, तो ईरान इसे बम से उड़ाने में संकोच नहीं करेगा और जलडमरूमध्य व फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछा देगा।

    दुबई पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर के निदेशक मोहम्मद बहारून ने कहा, यह हमारा युद्ध नहीं है, लेकिन ईरान इसे हमारा बना रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ईरान यही रवैया जारी रखता है, तो क्षेत्रीय देशों को तेहरान के राज्य प्रायोजित आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक गठबंधन बनाना पड़ सकता है, जैसा कि ‘इस्लामिक स्टेट’ के खिलाफ बनाया गया था।
    5 हजार मिसाइलें दागी

    युद्ध की शुरुआत से अब तक ईरान ने खाड़ी देशों पर लगभग 5000 मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। इसमें तेल-गैस सुविधाओं, अमेरिकी ठिकानों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया है, जिसमें यूएई ने सबसे ज्यादा मार झेली है। खाड़ी अरब देशों में अब तक कम से कम 20 लोग मारे जा चुके हैं।