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  • मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारे से जुड़ी है मधुबाला की अनकही कहानी, जानिए हर साल उनके नाम पर क्यों होती है विशेष अरदास

    मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारे से जुड़ी है मधुबाला की अनकही कहानी, जानिए हर साल उनके नाम पर क्यों होती है विशेष अरदास

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शुमार दिवंगत मधुबाला का जीवन आज भी कई अनसुने किस्सों से भरा हुआ है। अपने अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाली इस अदाकारा की व्यक्तिगत जिंदगी भले ही तमाम उतार-चढ़ावों से भरी रही, लेकिन उनकी आध्यात्मिक आस्था से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प पहलू सामने आया है जो बहुत कम लोग जानते हैं। मुंबई के अंधेरी स्थित एक प्रसिद्ध गुरुद्वारे में आज भी हर साल गुरु नानक देव जी के जन्मोत्सव पर मधुबाला के नाम से विशेष अरदास की जाती है।

    एक मुस्लिम परिवार में जन्मी मुमताज जहां देहलवी यानी मधुबाला की गुरु नानक देव जी के प्रति अटूट और अगाध श्रद्धा थी। यह आस्था उनके जीवन के उस दौर में शुरू हुई जब वे व्यक्तिगत जीवन की परेशानियों से काफी विचलित थीं। एक परिचित के सुझाव पर जब वे अंधेरी गुरुद्वारे पहुंचीं, तो वहां के ग्रंथि ने उन्हें नियमित रूप से जपजी साहिब का पाठ करने की सलाह दी। गुरमुखी लिपि न आने के कारण उन्होंने फारसी भाषा में छपी जपजी साहिब की प्रति मंगवाई और जीवन के अंतिम समय तक उसका नित्य पाठ करती रहीं।

    संगीत जगत के पुराने दिग्गजों के अनुसार, मधुबाला शूटिंग के दौरान भी खाली समय मिलते ही अपना सिर ढककर इस पवित्र पाठ का अध्ययन किया करती थीं। उनका मानना था कि इस पाठ को करने से उन्हें आंतरिक शांति और संबल मिलता है। गुरु नानक देव जी के प्रति उनकी दीवानगी का आलम यह था कि वे किसी भी फिल्म को साइन करने से पहले निर्माताओं के साथ होने वाले अनुबंध में यह शर्त स्पष्ट रूप से शामिल करवाती थीं कि गुरुपर्व के दिन वे मुंबई के अंधेरी गुरुद्वारे में उपस्थित रहेंगी।

    वर्ष 1969 में अपने निधन से कुछ वर्ष पूर्व मधुबाला ने गुरु पर्व पर लंगर सेवा का संपूर्ण खर्च उठाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने गुरुद्वारा समिति को इसके लिए आवश्यक सहयोग राशि प्रदान की थी। उनके निधन के बाद भी कई वर्षों तक उनके परिवार ने इस परंपरा को जारी रखा। बाद में गुरुद्वारा प्रबंध समिति और श्रद्धालुओं ने फैसला किया कि भले ही अभिनेत्री अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी अटूट श्रद्धा का सम्मान करते हुए हर साल गुरुपर्व पर लंगर सेवा के दौरान उनके नाम की अरदास की जाएगी।

    मध्य प्रदेश और देश भर के सिनेमा प्रेमी मधुबाला को न केवल उनकी अमर फिल्मों और अभिनय के लिए याद करते हैं, बल्कि उनकी इस अनूठी भक्ति भावना की भी सराहना करते हैं। अंधेरी गुरुद्वारे में आज भी हर गुरुपर्व पर अरदास के दौरान यह पंक्तियां दोहराई जाती हैं कि ईश्वर अपनी इस समर्पित बेटी की ओर से लंगर-प्रसाद की सेवा स्वीकार करे और उसे अपने चरणों में स्थान दे।

  • बॉलीवुड के 'सिंघम' अजय देवगन टेलीविजन पर कर सकते हैं धमाकेदार वापसी, क्राइम शो की मेजबानी करने की चर्चा तेज

    बॉलीवुड के 'सिंघम' अजय देवगन टेलीविजन पर कर सकते हैं धमाकेदार वापसी, क्राइम शो की मेजबानी करने की चर्चा तेज

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता अजय देवगन के प्रशंसकों के लिए टेलीविजन जगत से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बड़े पर्दे पर अपने अभिनय और दमदार संवाद अदायगी से दर्शकों का दिल जीतने वाले अजय देवगन जल्द ही छोटे पर्दे पर एक नए अवतार में नजर आ सकते हैं। मीडिया गलियारों में चल रही खबरों के अनुसार, अभिनेता एक नए क्राइम शो के जरिए मेजबान यानी होस्ट की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं।

    मनोरंजन उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, टेलीविजन चैनल और निर्माताओं ने इस विशेष प्रोजेक्ट के लिए अभिनेता से संपर्क किया है। बताया जा रहा है कि प्राथमिक बातचीत सकारात्मक रही है और यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो वह जल्द ही इस नए शो की शूटिंग शुरू करेंगे। यह शो पूरी तरह से वास्तविक जीवन में घटित अपराध की सच्ची घटनाओं और उनकी जांच प्रक्रिया पर आधारित होगा।

    हिंदी सिनेमा में इससे पहले भी कई शीर्ष अभिनेताओं ने टेलीविजन शोज की मेजबानी कर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है। यदि यह प्रोजेक्ट अंतिम रूप लेता है, तो अजय देवगन का नाम भी उन कलाकारों की सूची में शामिल हो जाएगा जो बड़े पर्दे के साथ-साथ छोटे पर्दे पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। फिलहाल इस प्रोजेक्ट से जुड़ी विस्तृत जानकारियों को गोपनीय रखा गया है।

    मध्य प्रदेश और देश भर में अजय देवगन की फिल्मों को काफी पसंद किया जाता है। हाल के दिनों में उनकी बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फ्रेंचाइजी की नई फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी, जिसे दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं। इसके अलावा, अभिनेता के पास आने वाले समय में कई बड़ी फिल्में पाइपलाइन में हैं, जिनमें सस्पेंस थ्रिलर और एक्शन शैली की बहुचर्चित सीक्वल फिल्में शामिल हैं।

    टेलीविजन पर क्राइम शोज का अपना एक बड़ा दर्शक वर्ग रहा है, जहां सच्ची घटनाओं को नाटकीय रूपांतरण के साथ पेश किया जाता है। ऐसे में अजय देवगन जैसी मजबूत छवि वाले अभिनेता का इस तरह के शो से जुड़ना दर्शकों के लिए बेहद आकर्षक हो सकता है। फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही शो के प्रसारण और समय से जुड़ी अन्य जानकारियां स्पष्ट हो सकेंगी।

  • सस्पेंस थ्रिलर से लेकर देशभक्ति के जज्बे तक, जानें इस हफ्ते आपके पसंदीदा प्लेटफॉर्म पर क्या रहेगा खास

    सस्पेंस थ्रिलर से लेकर देशभक्ति के जज्बे तक, जानें इस हफ्ते आपके पसंदीदा प्लेटफॉर्म पर क्या रहेगा खास

    नई दिल्ली । अगस्त महीने के पहले सप्ताह में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों के लिए मनोरंजन का बड़ा खजाना खुलने जा रहा है। सिनेमाघरों के बजाय घर पर ही अपने स्मार्ट टीवी और उपकरणों पर फिल्में तथा सीरीज देखने के शौकीन दर्शकों के लिए यह हफ्ता बेहद रोमांचक रहने वाला है। विभिन्न प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हर उम्र और वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए सस्पेंस थ्रिलर, स्पोर्ट्स कॉमेडी, रोमांटिक ड्रामा और एक्शन से भरपूर सामग्री प्रस्तुत की जा रही है।

    सप्ताह की शुरुआत में रहस्य और रोमांच से भरपूर एक चर्चित दक्षिण भारतीय फिल्म डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक देने जा रही है। इस फिल्म का कथानक एक प्रोबेशनरी पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसे एक अज्ञात महिला की रहस्यमयी मौत का मामला सौंपा जाता है। शुरुआत में बेहद साधारण लगने वाली यह जांच धीरे-धीरे कई उलझे हुए और अप्रत्याशित मोड़ों से गुजरती है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने का वादा करती है।

    खेल और हास्य के अनोखे संगम को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक प्रसिद्ध स्पोर्ट्स कॉमेडी सीरीज का अगला संस्करण भी इस सप्ताह स्ट्रीम होने जा रहा है। इस नए सीजन में मुख्य किरदार के सामने एक बिल्कुल नई और कठिन चुनौती होगी, जहां उसे निचले स्तर की महिला फुटबॉल टीम को प्रशिक्षित करना होगा। मजेदार घटनाक्रमों और जीवन से जुड़ी सीख के साथ यह शो मनोरंजन की पूरी खुराक देने वाला है।

    रिश्तों की उलझन और भावनात्मक ताने-बाने पर आधारित एक लोकप्रिय ड्रामा शो का नया सीजन भी इस हफ्ते डिजिटल दर्शकों के बीच आ रहा है। दस किस्तों में पेश की जाने वाली यह कहानी युवाओं के बीच खासी लोकप्रिय रही है और इसके नए भाग से भी काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं। इसके अलावा, इतिहास और पराक्रम में रुचि रखने वालों के लिए 1999 के कारगिल युद्ध की वास्तविक घटना पर आधारित एक बहुप्रतीक्षित फिल्म मुख्य आकर्षण रहेगी। भारतीय वायु सेना के साहसिक मिशन को दर्शाती यह कहानी देशभक्ति का जज्बा जगाने का काम करेगी।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमा प्रेमी जो घर बैठे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सामग्री देखना पसंद करते हैं, उनके लिए यह सप्ताह बेहद व्यस्त रहने वाला है। भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बनी एक भावुक प्रेम कहानी, जिसने पहले सिनेमाघरों में सफलता हासिल की थी, अब डिजिटल दर्शकों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही जासूसी और एक्शन शोज के शौकीनों के लिए एक प्रसिद्ध हॉलीवुड सीरीज का तीसरा भाग भी इसी हफ्ते स्ट्रीम होने जा रहा है।

  • दिवंगत अभिनेता ओम पुरी संग अपने असफल रिश्ते पर छलका सीमा कपूर का दर्द, साझा कीं जिंदगी से जुड़ी कड़वी यादें

    दिवंगत अभिनेता ओम पुरी संग अपने असफल रिश्ते पर छलका सीमा कपूर का दर्द, साझा कीं जिंदगी से जुड़ी कड़वी यादें

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत के जाने-माने दिवंगत अभिनेता ओम पुरी का निजी जीवन एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। उनकी पहली पत्नी और अभिनेत्री सीमा कपूर ने हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में अपने वैवाहिक जीवन और अलगाव से जुड़े कई कड़वे अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि किस तरह शादी की शुरुआत से ही उन्हें कई मानसिक और भावनात्मक उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा था।

    साक्षात्कार के दौरान सीमा कपूर ने बताया कि विवाह से ठीक एक दिन पहले उन्हें अपने होने वाले पति के निजी जीवन से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी मिली थी, जिससे वे काफी स्तब्ध रह गई थीं। हालांकि, उस समय पारिवारिक प्रतिष्ठा, सामाजिक दबाव और विवाह की तमाम तैयारियों के पूरा हो जाने के कारण अंतिम समय में शादी का फैसला वापस लेना उनके लिए संभव नहीं हो सका।

    विवाह के पश्चात भी दोनों के रिश्तों में दूरियां बनी रहीं और समय के साथ परिस्थितियां अधिक जटिल होती चली गईं। सीमा कपूर के अनुसार, पारिवारिक जीवन में आए गंभीर तनाव और मानसिक आघात का असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा। उन्होंने खुलासा किया कि अलगाव के बेहद कठिन दौर से गुजरते समय और अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण उन्होंने अपनी गर्भावस्था के दौरान संतान को भी खो दिया था।

    दोनों के बीच बढ़ते मतभेदों के चलते अंततः कानूनी रूप से अलग होने का निर्णय लिया गया। तलाक की प्रक्रिया के दौरान सहायता राशि और व्यावहारिक बातचीत से जुड़े घटनाक्रमों ने दोनों के बीच के कड़वाहट को और बढ़ा दिया। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में ओम पुरी की बहुमुखी अदाकारी के प्रशंसक आज भी मौजूद हैं, लेकिन यह साक्षात्कार उनके निजी जीवन के जटिल पहलुओं को सामने लाता है।

    गौरतलब है कि सीमा कपूर से अलग होने के बाद अभिनेता ने दूसरा विवाह किया था, हालांकि उनका वह रिश्ता भी बाद के वर्षों में अलगाव पर समाप्त हुआ। जनवरी 2017 में 66 वर्ष की आयु में ओम पुरी का निधन हो गया था। उनके निधन के वर्षों बाद भी उनके निजी रिश्तों से जुड़ी यह आपबीती मनोरंजन जगत और प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारतीय एथलीटों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और उत्कृष्ट खेल भावना का लोहा मनवाया है। ग्लास्गो में 11 दिनों तक चले वैश्विक खेल आयोजन के समापन के साथ ही पदक तालिका की अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। मुख्य प्रतियोगिताओं और पारंपरिक विषयों की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय दल ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

    इस बार प्रतियोगिता का दायरा कुछ सीमित रखा गया था, जिसके तहत वे खेल शामिल नहीं थे जिनमें भारत आमतौर पर सर्वाधिक पदक जीतता रहा है। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाया। भारत के 38 खिलाड़ियों ने सामूहिक प्रयासों के बल पर 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक देश की झोली में डाले, जो विपरीत परिस्थितियों में भी खिलाड़ियों की मानसिक सुदृढ़ता को दर्शाता है।

    वैश्विक पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अपनी सर्वोच्चता सिद्ध की। ऑस्ट्रेलियाई दल ने 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य सहित कुल 171 पदकों पर अपना कब्जा जमाया। वहीं 29 स्वर्ण के साथ कुल 110 पदक जीतकर इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कनाडा ने 19 स्वर्ण और कुल 62 पदकों के साथ तालिका में तीसरा स्थान हासिल किया।

    मेजबान देश और भारत के बीच अंतिम रैंकिंग को लेकर बेहद रोचक स्थिति देखने को मिली। भारत और स्कॉटलैंड दोनों ही देशों ने कुल 39-39 पदक अपने नाम किए और दोनों के पास 13-13 स्वर्ण पदक भी थे। हालांकि भारत द्वारा जीते गए 17 रजत पदकों की संख्या स्कॉटलैंड के 9 रजत पदकों से अधिक थी, जिसके आधार पर भारत को तालिका में चौथा और मेजबान स्कॉटलैंड को पांचवां स्थान प्रदान किया गया।

    भारतीय अभियान की सफलता में मुक्केबाजी प्रतियोगिता का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा। मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल 10 पदक हासिल किए। इसके अतिरिक्त भारोत्तोलन, एथलेटिक्स, जूडो और पैरा खेल स्पर्धाओं में भी एथलीटों ने अपनी छाप छोड़ी। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा खिलाड़ियों के योगदान ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं के विस्तार को रेखांकित किया है।

    निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेलों को इस बार आयोजन से बाहर रखा गया था। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये खेल प्रतियोगिता का हिस्सा होते, तो भारत की पदक तालिका और अधिक भव्य हो सकती थी। इसके बावजूद उपलब्ध स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारतीय खेल प्रणाली अब बहुआयामी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

    प्रतियोगिता के दौरान कुछ प्रशासनिक और नियम संबंधी चुनौतियां भी सामने आईं, जब जूडो वर्ग में एक एथलीट को प्रक्रियात्मक चूक के कारण अंतिम समय में प्रतिस्पर्धा से बाहर होना पड़ा। इस प्रकार के घटनाक्रमों के बावजूद भारतीय दल ने अपने ध्यान को केंद्रित रखा और अंतिम दिन तक पदकों की दौड़ में बने रहकर देश का गौरव बढ़ाया।

    ग्लास्गो में मिली इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब पूरे खेल जगत की निगाहें 2030 में आयोजित होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं। भारत के अहमदाबाद शहर में इन खेलों का आयोजन प्रस्तावित है, जिसे लेकर अभी से रणनीतिक तैयारियां और ढांचागत विकास की योजनाएं तैयार की जाने लगी हैं।

  • सावन में इन 5 छिपे हुए पावन शिव धामों में सुकून से होते हैं दर्शन… यहां नहीं मिलती लंबी कतारें…

    सावन में इन 5 छिपे हुए पावन शिव धामों में सुकून से होते हैं दर्शन… यहां नहीं मिलती लंबी कतारें…


    नई दिल्ली।
    सावन (Sawan) का महीना आते ही देशभर के मशहूर शिव मंदिरों (Famous Shiva temples) में भक्तों का तांता लग जाता है. महाकाल, काशी विश्वनाथ और देवघर जैसे धामों में घंटों लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है. कई बार बुजुर्गों और बच्चों के लिए इतनी भारी भीड़ में दर्शन करना काफी मुश्किल हो जाता है।

    अगर आप भी इस सावन में शांति से भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करना चाहते हैं, तो देश में कई ऐसे पावन और खूबसूरत शिव मंदिर हैं जहां भारी भीड़ नहीं मिलती. इन जगहों पर आप परिवार के साथ सुकून से बैठकर भोलेनाथ का ध्यान लगा सकते हैं।


    तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड

    उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है. यह मंदिर पंच केदार में से एक है और हिमालय की गोद में बसा है. यहां पहुंचने के लिए चोपता से करीब चार किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

    शांत वादियों, ठंडी हवाओं और घने जंगलों के बीच यहां का माहौल बहुत आध्यात्मिक लगता है. यहां आने वाले भक्तों को शिव भक्ति के साथ साथ प्रकृति का एक अद्भुत नजारा भी देखने को मिलता है।


    नीलकंठ महादेव मंदिर, ऋषिकेश

    ऋषिकेश के पास मणिकूट पर्वत पर बसा नीलकंठ महादेव मंदिर एक बेहद पवित्र और शांत धाम है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विष को पीने के बाद भगवान शिव ने इसी स्थान पर विश्राम किया था।

    चारों ओर ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों से घिरे इस मंदिर में बहुत सुकून मिलता है. सावन के मुख्य दिनों को छोड़ दें, तो यहां आम दिनों में आप बहुत आराम से जल चढ़ा सकते हैं और दर्शन कर सकते हैं।


    भूतनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश

    हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर को छोटी काशी भी कहा जाता है. मंडी के बीचों बीच स्थित भूतनाथ मंदिर सदियों पुराना और ऐतिहासिक स्थल है. यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां सावन के दौरान स्थानीय भक्त तो आते हैं, लेकिन बड़े ज्योतिर्लिंगों जैसी दम घोटने वाली भीड़ नहीं होती. यहां आप बिना किसी भागदौड़ के मंदिर प्रांगण में बैठकर भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।


    कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक

    दक्षिण भारत के कर्नाटक में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर अपनी तरह का एक अनोखा और भव्य शिव धाम है. इस मंदिर परिसर में कोटि यानी करोड़ों की संख्या में छोटे बड़े शिवलिंग स्थापित हैं। इसके साथ ही यहां 108 फीट ऊंचा एक विशाल शिवलिंग भी बना हुआ है, जो देखते ही बनता है. इतने विशाल परिसर में फैला होने की वजह से यहां भीड़ महसूस नहीं होती और भक्त आराम से एक एक शिवलिंग के दर्शन कर सकते हैं।


    यात्रा की योजना और जरूरी सुझाव

    सावन के दौरान इन शांत शिव मंदिरों की यात्रा पर जाने से पहले थोड़ी तैयारी जरूर कर लें. पहाड़ी इलाकों में जाते समय मौसम का हाल पहले ही चेक कर लें और साथ में जरूरी दवाएं जरूर रखें। मंदिरों में दर्शन के समय स्थानीय नियमों और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें. सुबह सुबह या दोपहर की आरती के समय जाने से दर्शन आसानी से हो जाते हैं. इन पावन धामों में बिताया समय आपकी आत्मा को एक नई ऊर्जा और असीम शांति देगा।

  • राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त

    राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में दान चोरी की घटना के बाद से मची उथल-पुथल थम नहीं रही है। चंपतराय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और गोपाल राव (Gopal Rao) के हटने के बाद अब संगठन संरक्षक के तौर पर राम मंदिर के पालक नियुक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी (Bhaiyaji Joshi) भी दायित्व से मुक्त कर दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो पालक की जिम्मेदारी के लिए दूसरे बड़े और कद्दावर चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है। इसमें दिल्ली के वरिष्ठ प्रचारक का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

    संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतर्द्वंद्व में फंसा है। इस विषय पर संघ का थिंक टैंक दो खेमों में बंट गया है। एक खेमा राम मंदिर मामलों से संघ को दूर रखने का हिमायती है तो दूसरा वकालत कर रहा है कि मंदिर पर संगठन का अंकुश जरूरी है। इसके पीछे दोनों खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। इस कारण पालक का नाम घोषित करने में देरी हो रही है।


    ट्रस्ट की बैठकों में हमेशा शामिल होते रहे

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और जमीन खरीद फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह पद से स्वास्थ्य कारणों से सेवामुक्त हुए भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक नियुक्त कर उनका केंद्र लखनऊ तय किया था। इसके कारण वह प्रायः ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते थे।


    चंपत राय के लेटर बम से चिंतित था नेतृत्व

    चढ़ावा चोरी की घटना के दौरान भी मंदिर पालक का नाम चर्चा में आया, लेकिन उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। फिर भी 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में वह शामिल रहे। इसके पहले छह जून को चढ़ावा चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराने गए चंपतराय को रोकने में उनका हाथ होने की आशंका जताई गई मगर यह पुष्ट नहीं हो सका। अब पालक के पद से मुक्ति को उसी घटना से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह भी है कि एफआईआर न कराने की वजह ही चंपत राय के त्यागपत्र का सबसे प्रमुख कारण थी।

    छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के ऐलान के बाद सात जुलाई को चंपतराय ने लेटर बम फोड़ा था। इस लेटर के जरिए चंपतराय ने चढ़ावा गिनती के अनुबंध से सम्बन्धित जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने उस पत्र में कहा था कि फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। उनके इस ऐलान से शीर्ष नेतृत्व चिंतित था कि कहीं कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाए, इसीलिए उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं। संतों को भी उनके समर्थन में कर उन्हें दिलासा दी गई।

  • केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….

    केंद्र सरकार आज लोकसभा में पेश करेगी 3 विधेयक…. राम मंदिर चढ़ावा मामले में हंगामे के आसार….


    नई दिल्ली
    । संसद (Parliament) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में केंद्र सरकार (Central government) ने लोकसभा (Lok Sabha) में तीन विधेयकों को सूचीबद्ध किया है। सरकार की कोशिश बिलों को पारित कराने की होगी। वहीं, विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी समेत अन्य मुद्दों पर हमलावर रहेगा। केंद्र सरकार (Central government) जिन विधेयकों को पेश करेगा उनमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने संबंधी विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा, सरकार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) के लिए व्यापक वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराने तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास अधिनियम में संशोधन से जुड़े विधेयक भी संसद में पेश करने की तैयारी में है।


    चढ़ावा चोरी को मुद्दा बना रहा विपक्ष

    दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देना शुरू कर दिया है। विपक्ष चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है। मानसून सत्र के पहले दो सप्ताह विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़े। नीट मुद्दे पर आंदोलन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में चल रहे हंगामे के बीच कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को धार देनी शुरू कर दी है। इससे पहले विपक्ष संसद भवन परिसर में चंदा चोरी का सांकेतिक नाट्य रुपांतरण कर प्रदर्शन कर चुका है।


    शिला पूजन से ही होने लगी चोरी- कांग्रेस

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा का हर नेता चंदा चोर नहीं है, पर सभी चंदा चोर सत्ताधारी दल में ही हैं। पार्टी ने दावा किया कि राम मंदिर में चोरी सिर्फ चढ़ावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इस चोरी की शुरुआत शिला पूजन के वक्त से हो गई थी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावे की चोरी नहीं हुई, बल्कि शिला पूजन से चोरी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि वह खुद अवध के रहने वाले हैं। 1985 से 90 के बीच पर्यटन मंत्री रहे हैं और उन्होंने पूरे आंदोलन को करीब से देखा है।

    तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक लाभ के लिए लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर चाहते थे। इसलिए उन्होंने एक अधूरे मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह कर दिया, जो कि एक अशुभ कार्य था। वहीं, इस समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शंकराचार्यों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूरी प्रक्रिया की कमान खुद संभाली और मंदिर ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य की नियुक्ति उनकी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर की गई। ऐसे में पीएम ने इसका श्रेय लिया है, तो उनकी पसंद से नियुक्त किए गए लोगों की चोरी से वह खुद को अलग नहीं कर सकते। क्योंकि, उन्होंने ही जिम्मेदारी सौंपी थी।

    भाजपा बोली- राहुल गांधी और पप्पू यादव माफी मांगें
    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर संसद परिसर में किए गए एक व्यंग्य-नाटक को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने रविवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पर हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की।

    भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि इस प्रदर्शन से करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से हिंदू आस्था पर हमला है। चुघ ने कहा कि राहुल गांधी और इस प्रदर्शन में शामिल सभी नेताओं को देश और दुनिया भर के हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने राम जन्मभूमि आंदोलन का विरोध किया था और राम मंदिर के निर्माण का बहिष्कार किया था, वे अब मंदिर से जुड़े प्रतीकों का मजाक उड़ा रहे हैं।

    भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की राजनीति अब केवल सनातन का विरोध करने तक सीमित रह गई है। चुघ ने कहा कि पहले सनातन को ‘डेंगू’ और ‘वायरस’ कहा गया और अब राम मंदिर से जुड़े आस्था के प्रतीकों का मजाक उड़ाया जा रहा है। वीएचपी नेता सुरेंद्र गुप्ता ने भी प्रदर्शन को अशोभनीय बताते हुए कहा कि इससे सनातन धर्म और संत समाज का अपमान हुआ है। उन्होंने विपक्ष से राजनीतिक विरोध के नाम पर भारत की संस्कृति, हिंदुओं, संतों और मंदिरों का अपमान बंद करने की अपील की। वहीं, पप्पू यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन सनातन और करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा के लिए था। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्राथमिकी या कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।

  • नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग

    नेपाल में हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग हुई तेज…. सड़कों पर उतरे लोग


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) को हिन्दू राष्ट्र (Hindu Nation) घोषित करने की मांग तेज हो रही है। यह मुद्दा केवल संगठनों और प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोग अपने जनप्रतिनिधियों से भी सीधे जवाब मांग रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सांसदों का घेराव कर उनसे हिन्दू समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों के पक्ष में खुलकर बोलने की मांग की जा रही है।


    सांसद के सामने विरोध

    सिरहा जिले (Siraha District) में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद बबलू गुप्ता (MP Bablu Gupta) को लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि उन्होंने परिवर्तन और नेपाल को पुन: हिन्दू राष्ट्र बनाने की उम्मीद के साथ अपने जनप्रतिनिधियों का समर्थन किया था, लेकिन अब उनकी अपेक्षाओं की अनदेखी की जा रही है।


    ठंडी हुई सांप्रदायिक हिंसा की आंच

    नेपाल में 26 जुलाई की रात से शुरू हुई हिंसा की आंच अब मंद पड़ चुकी है। कई जिलों में बने तनाव के हालात अब काबू में हैं। हालांकि, इस घटना के बाद अब हिंदूवादी संगठनों ने सरकार को 15 सूत्री मांगपत्र सौंपते हुए नेपाल को पुन: हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने समेत कई बड़े फैसले लेने की मांग की है।

    मांगपत्र में सुनसरी जिले के देवानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच, घटना के दोषियों एवं साजिशकर्ताओं की शीघ्र गिरफ्तारी तथा जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है। साथ ही गोली चलाने का आदेश देने वाले अधिकारियों की पहचान उजागर कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग रखी गई है। प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

    मांगपत्र में घटना में जान गंवाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिजनों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराने तथा घायलों का निशुल्क और प्रभावी इलाज सुनिश्चित करने की भी मांगें शामिल हैं। साथ ही नेपाल को बौद्ध एवं किरात परंपराओं के सम्मान के साथ ‘वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र’ के रूप में पुन:स्थापित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की मांग की गई है। संगठनों ने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करने, सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा वर्ष 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई है।


    क्या बोले पीएम बालेन शाह

    पीएम बालेन शाह का कहना है कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के साथ राजशाही का मुद्दाभी जुड़ता है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा कोई भी फैसला लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार फेडरल व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है और मजबूती से इसका पालन करेगी। उनका कहना है कि हिंदू राष्ट्र घोषित कर देने से संघीय व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।

  • PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ

    PM मोदी को गाली देने वाली नाबालिग लड़की पर नहीं होगी FIR… दिल्ली पुलिस ने किया माफ


    नई दिल्ली।
    दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने पिछले महीने जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) (‘Cockroach Janata Party’ – CJP) के विरोध प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को गंदी-गंदी गालियां देने की आरोपी नाबालिग लड़की पर कोई केस दर्ज नहीं करने का फैसला किया है। इस लड़की का वीडियो सोशल मीडिया में खूब तेजी से वायरल हुआ था। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस सूत्रों ने रविवार को इस बारे में जानकारी दी।

    नोएडा पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्द कहने की आरोपी नाबालिग लड़की के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कर दिल्ली पुलिस को भेज दी थी। एफआईआर में उसकी उम्र 25 साल बताई गई थी। हालांकि उस लड़की ने बाद में एक वीडियो में माफी मांगते हुए बताया था कि वह अभी 15 साल की है और उसने विरोध प्रदर्शन में शामिल दूसरे लोगों के बहकावे में आकर ये टिप्पणियां की थीं।


    ‘खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही, मुझे माफ कर दीजिए’

    हाल ही में उसने एक वीडियो में कहा था, “मैं सिर्फ 15 साल की हूं। मैंने जो कुछ भी किया, वो माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत-सी गलत बातें कही हैं। यह मेरी पहली और आखीरी गलती है। मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मुझे बहुत शर्म आ रही है। मैं खुद से नजर भी नहीं मिला पा रही हूं। प्लीज, मुझे माफ कर दीजिए।”


    पीएम मोदी ने प्रदर्शन में शामिल बच्चों को किया माफ

    प्रदर्शनकारियों पर नरमी बरतने की अपीलों के बीच इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले शुक्रवार को एक इंस्टाग्राम वीडियो मैसेज के माध्यम से कहा कि उन्होंने उन सभी भटके हुए बच्चों को माफ कर दिया है जिन्होंने उन्हें गालियां दीं और अपशब्द कहे थे।

    पीएम मोदी में कहा कि उन्हें सजा देने, अदालतों के चक्कर लगवाने और परेशान करने से हालात नहीं बदलेंगे। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं। मैं समाज से भी गुजारिश करता हूं कि वे मेरी बात को स्वीकार करें।


    लड़की की मां ने PM से की थी ये अपील

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बच्चों को माफ करने संबंधी वीडियो जारी किए जाने के बाद आरोपी नाबालिग लड़की की मां ने उनसे अपील की थी कि वे अधिकारियों को उनकी बेटी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का निर्देश दें। मां ने कहा कि पीएम ने देश की एक बेटी को माफ करके बड़प्पन दिखाया है, जिसने बहुत ही गंदे शब्दों का इस्तेमाल किया था। मैं हाथ जोड़कर उनका धन्यवाद करती हूं। आज उसका नया जन्म हुआ है। प्रधानमंत्री ने उसे जीवनदान दिया है। उन्होंने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुजारिश करती हूं कि कृपया उसके खिलाफ गलत नाम और उम्र के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करा दें, अब वह आपकी शरण में है।