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  • धनतेरस से पहले महायोग…. 01 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र, इस अबूझ मुहूर्त का अक्षय तृतीया जैसा पुण्य

    धनतेरस से पहले महायोग…. 01 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र, इस अबूझ मुहूर्त का अक्षय तृतीया जैसा पुण्य


    नई दिल्ली।
    एक नवंबर को पड़ रहा रवि पुष्य नक्षत्र (Ravi Pushya Nakshatra) का मुहूर्त अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) जितना ही बहुत खास होने वाला है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक रविवार की सुबह 10:37 से लेकर अगले दिन दो नवंबर को सुबह 9.04 बजे तक जो मर्जी, वो खरीदें, इससे घर-परिवार में लंबे समय के लिए खुशहाली आएगी। खासतौर से उनके लिए जो किसी रस्म या शादी की खरीदारी करने जा रहे हैं।

    ज्योतिषाचार्य प्रो. बिहारी लाल शर्मा बताते हैं कि रवि पुष्य (Ravi Pushya) अबूझ मुहूर्त (Auspicious Moment) है। ऐसे मुहूर्त अक्षय तृतीया और भटली नवमी भी होते हैं। इस दिन सोना-चांदी, घर, जमीन और गाड़ी खरीदना अच्छा है। स्थायी समृद्धि के लिए रवि पुष्य में खरीदारी अद्भुत लाभ देती है।

    ज्योतिषाचार्य प्रो. सुभाष पांडेय के मुताबिक एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र पर घर की साज-सज्जा और नए कपड़े खरीदने का सबसे उत्तम मुहूर्त है। इससे घर में समृद्धि और काम में स्थायित्व होगा। हालांकि चार नवंबर को आभूषण खरीदने का मुहूर्त बन रहा है। वहीं छह नवंबर को धनतेरस पर चांदी, सोना और पीतल के बर्तन खरीदने का बेहतर मुहूर्त तय किया गया है।


    अशुभ काल में खरीदने पर होता है नुकसान

    प्रो. पांडेय ने बताया कि प्रो. पांडेय के अनुसार, इंसान के जीवन में शरद ऋतु या ठंड के समय खरीद करना काफी उत्तम माना गया है। यह काल 21 अक्तूबर के बाद से ही शुरू हो चुका है जो कि दीपावली और बनारस में देव दीपावली तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र में तिथि, वार, नक्षत्र, योग से शुभ काल (मुहूर्त) तय करने की बात कही गई है। दरअसल, भौतिक या आध्यात्मिक जीवन में शुभ समय का बहुत बड़ा महत्व है। जिस तरह अनुष्ठानों में शुभ मुहूर्त की जरूरत होती है वैसे ही भौतिक वस्तुओं को शुभ मुहूर्त में खरीदने पर उसका स्थायित्व बढ़ जाता है। अशुभ काल में खरीदने पर नुकसान हो सकता है।


    सुबह 10:37 से शुरू होगा रवि पुष्य योग

    रवि पुष्य योग एक नवंबर को सुबह 10:37 से दो नवंबर को सुबह 09.04 तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग एक को सुबह 06:33 से दो को सुबह 04:30 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:42 से 12:27 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 05:36 बजे से 06:02 बजे तक रहेगा। इस नक्षत्र पर बृहस्पति, शनि और चंद्रमा का प्रभाव होता है।

  • भारत की बड़ी कामयाबी… तेजी से घटी गरीबी…12 साल में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से आए बाहर

    भारत की बड़ी कामयाबी… तेजी से घटी गरीबी…12 साल में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से आए बाहर


    नई दिल्ली।
    भारत (India) ने गरीबी के खिलाफ लड़ाई में बड़ी कामयाबी (Success) हासिल की है. विश्व बैंक (World Bank) की अक्टूबर 2026 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2011 से 2023 के बीच 12 साल में देश में अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) तेजी से घटी है. साल 2011 में जहां भारत की 27.1 फीसदी आबादी बेहद गरीब थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 2.6 फीसदी रह गया. हालांकि, प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भारत को अभी और बेहतर करने की जरूरत है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी कम होने के बावजूद 2023 में करीब 7.5 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनकी रोजाना की आमदनी 3 डॉलर से कम थी।


    12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर

    विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में गरीबी मापने के लिए दो पैमाने इस्तेमाल किए हैं. पहला है रोजाना 3 डॉलर की आय, जिसके आधार पर अत्यधिक गरीबी का आकलन किया जाता है. रोजाना तीन डॉलर आय का यह पैमाना 2021 की परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) यानी अलग-अलग देशों में चीजों की कीमतों और खरीदने की क्षमता के हिसाब से तय की गई है।

    दूसरा पैमाना रोजाना 4.20 डॉलर की आय है. विश्व बैंक इस सीमा का इस्तेमाल भारत जैसे निम्न-मध्यम आय (Lower Middle Income) वाले देशों में गरीबी मापने के लिए करता है. इस पैमाने पर भारत में गरीबी की दर 2011 में 57.7 फीसदी थी, जो 2023 में घटकर 16.1 फीसदी रह गई. इसका मतलब है कि इस दौरान करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए.


    गरीबी घटने के पीछे ये रहे बड़े कारण

    विश्व बैंक ने गरीबी घटने के पीछे तीन बड़ी वजहें बताई हैं. पहली, लोगों के घरेलू खर्च और खपत में बढ़ोतरी. दूसरी, देश में रोजगार के मौके बढ़ना और तीसरी, सरकारी योजनाओं का ज्यादा लोगों तक पहुंचना. इनमें मुफ्त राशन और अन्य तरह की सब्सिडी जैसी योजनाओं की भी अहम भूमिका रही. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2017 से 2023 के बीच करीब 13.4 करोड़ नई नौकरियां जुड़ीं. यह इस दौरान कामकाजी उम्र वाली आबादी में हुई बढ़ोतरी से लगभग दोगुना है. ज्यादा लोगों को काम मिलने से परिवारों की कमाई बढ़ी और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया।


    ग्रामीण महिलाओं ने भी बदली तस्वीर

    गरीबी घटाने में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी ने भी अहम भूमिका निभाई. बड़ी संख्या में महिलाएं पैसे कमाने वाले कामों से जुड़ीं. इससे कई परिवारों में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी और घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में गरीबी घटने की रफ्तार शहरों के मुकाबले तेज रही है. इससे गांव और शहर के बीच गरीबी का अंतर भी कम हुआ है. हालांकि, आज भी ग्रामीण भारत में गरीबी की समस्या ज्यादा है. रिपोर्ट में दिए गए साल 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में रोजाना 4.20 डॉलर की आय के पैमाने पर गांवों में 19.3 फीसदी लोग गरीब हैं, जबकि शहरों में यह आंकड़ा 8.6 फीसदी है।


    यूपी से बंगाल तक के क्षेत्र में ज्यादा गरीबी

    देश में गरीबी कम करने के मामले में बड़ी सफलता मिली है, लेकिन अब यह समस्या कुछ राज्यों और इलाकों में ज्यादा सिमट गई है. विश्व बैंक के मुताबिक, भारत के करीब 57 फीसदी गरीब उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले एक बड़े क्षेत्र में रहते हैं. इनमें बिहार, झारखंड, ओडिशा जैसे राज्य भी शामिल हैं. इसका मतलब है कि आने वाले समय में गरीबी कम करने की लड़ाई में इन राज्यों की भूमिका सबसे अहम होगी. इन इलाकों में ऐसे रोजगार पैदा करने की जरूरत है, जिनसे लोगों को सिर्फ काम ही न मिले, बल्कि उनकी कमाई भी अच्छी हो।


    गरीबी का शिक्षा से सीधा कनेक्शन: रिपोर्ट

    विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा का स्तर भी गरीबी से जुड़ा हुआ है. जिन वयस्कों ने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, उनमें 21.3 फीसदी लोग गरीब थे. वहीं, उच्च शिक्षा यानी कॉलेज या उससे आगे की पढ़ाई करने वालों में गरीबी की दर सिर्फ 7.4 फीसदी थी. बच्चों पर भी गरीबी का असर ज्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 0 से 14 साल के बच्चों में गरीबी की दर 21.8 फीसदी रही, जो सभी उम्र के समूहों में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा, देश की 29.6 फीसदी आबादी को बुनियादी स्तर की स्वच्छता सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी. वहीं, 13.8 फीसदी लोगों के घर में किसी भी वयस्क ने प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं की थी।


    रोजगार तो बढ़ा, लेकिन अच्छी कमाई चुनौती

    विश्व बैंक ने रोजगार बढ़ने को गरीबी घटने की बड़ी वजह माना है, लेकिन साथ ही नौकरियों की गुणवत्ता पर चिंता भी जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा ऐसे कामों से आया, जिनमें कम कमाई होती है और उत्पादकता भी कम रहती है. इस दौरान महंगाई के असर को हटाकर देखी जाने वाली वास्तविक कमाई (Real Earnings) में भी खास बढ़ोतरी नहीं हुई. युवाओं के लिए रोजगार की चुनौती अब भी बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी दर 14.6 फीसदी से बढ़कर 15.9 फीसदी हो गई. ग्रामीण इलाकों की युवा महिलाएं इस बढ़ोतरी से ज्यादा प्रभावित हुईं।


    देश में आर्थिक असमानता एक बड़ी चुनौती

    भारत में गरीबी भले ही तेजी से घटी है, लेकिन कमाई के मामले में अमीर और गरीब के बीच बड़ा अंतर अब भी बना हुआ है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की औसत कमाई, सबसे कम कमाने वाले 10 फीसदी कामगारों की तुलना में करीब 13 गुना थी. आसान भाषा में समझें तो अगर सबसे कम कमाने वाले वर्ग के एक कामगार की कमाई 1,000 रुपये मानी जाए, तो सबसे ज्यादा कमाने वाले वर्ग के कामगार की कमाई करीब 13,000 रुपये रही. यह दोनों समूहों की बीच कमाई (Median Earnings) में बड़ा अंतर दिखाता है. विश्व बैंक ने यह भी बताया है कि अमीर परिवारों की खपत को घरेलू सर्वे में पूरी तरह दर्ज करना मुश्किल हो सकता है. इस वजह से देश में अमीर और गरीब के बीच असमानता का वास्तविक स्तर रिपोर्ट में दिखाए गए आंकड़ों से ज्यादा हो सकता है. यानी गरीबी घटने की उपलब्धि के साथ यह चुनौती भी बनी हुई है कि देश में आर्थिक असमानता की खाई कैसे पाटी जाए और लोगों की आय कैसे बढ़ाई जाए।


    देश में 2028 तक और घट सकती है गरीबी

    विश्व बैंक का अनुमान है कि भारत में आने वाले वर्षों में भी गरीबी घटेगी, लेकिन अब इसकी रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी हो सकती है. रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, रोजाना 4.20 डॉलर की आय वाली गरीबी दर 2026 में 14.2 फीसदी से घटकर 2028 तक 12.1 फीसदी रह सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक गरीबी घटाने के मामले में भारत ने पिछले 12 साल में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अब अगली चुनौती यह है कि लोगों को ऐसे गुणवत्ता परक रोजगार मिलें, जिनसे उनकी कमाई लगातार बढ़े. इससे उनकी क्रय शक्ति में भी इजाफा होगा और जीवनस्तर भी सुधरेगा. खासकर उन राज्यों और ग्रामीण इलाकों में इस पर ध्यान देना होगा, जहां आज भी बड़ी आबादी गरीबी से जूझ रही है।

  • संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी

    संजय दत्त के साथ पर्दे पर भिड़ेंगे या देंगे साथ, खलनायक रिटर्न्स में सलमान खान की एंट्री पर सुभाष घई ने तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म खलनायक के सीक्वल खलनायक रिटर्न्स को लेकर दर्शकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। साल 1993 में रिलीज हुई इस फिल्म में संजय दत्त ने बलराम प्रसाद उर्फ बल्लू का यादगार किरदार निभाया था। अब एक बार फिर संजय दत्त इसी किरदार के साथ बड़े पर्दे पर वापसी करने की तैयारी में हैं। फिल्म को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा सलमान खान के नाम की हो रही है। खबरें हैं कि सलमान खान भी इस फिल्म का हिस्सा बन सकते हैं और उन्हें एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में दिखाया जा सकता है। हालांकि फिल्म के निर्देशक और निर्माता सुभाष घई ने अभी इन खबरों पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुभाष घई अपनी राइटिंग टीम के साथ मिलकर फिल्म की कहानी पर काम कर रहे हैं। इसी दौरान सलमान खान के लिए एक खास किरदार तैयार किए जाने की चर्चा सामने आई है। बताया जा रहा है कि सलमान फिल्म में ऐसे पुलिसवाले की भूमिका निभा सकते हैं जो संजय दत्त के किरदार बल्लू की मदद करता नजर आएगा। यह किरदार कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और फिल्म की घटनाओं को नया मोड़ दे सकता है। हालांकि अभी तक सलमान खान की कास्टिंग आधिकारिक रूप से तय नहीं हुई है।

    फिल्म से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई खबरों में दावा किया गया है कि सलमान का संभावित किरदार केवल कैमियो तक सीमित नहीं होगा बल्कि उसका कहानी पर भी असर पड़ सकता है। इस भूमिका के लिए सलमान खान को उपयुक्त बताया जा रहा है। लेकिन फिल्म की स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले अभी तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में मेकर्स पहले कहानी को अंतिम रूप देना चाहते हैं और उसके बाद ही कलाकारों की कास्टिंग को लेकर फैसला लिया जाएगा।

    सलमान खान की एंट्री को लेकर सुभाष घई ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस समय कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि फिल्म की स्क्रिप्टिंग का काम जारी है। स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिल्म किस दिशा में आगे बढ़ेगी और कौन से कलाकार इसका हिस्सा होंगे। उनके बयान से साफ है कि फिलहाल सलमान खान की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अगर सलमान खान इस फिल्म में काम करते हैं तो यह सुभाष घई के साथ उनकी दूसरी फिल्म होगी। इससे पहले दोनों साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म युवराज में साथ काम कर चुके हैं। वहीं संजय दत्त और सलमान खान की जोड़ी को पर्दे पर देखना भी दर्शकों के लिए खास अनुभव हो सकता है। दोनों कलाकारों की अपनी अलग पहचान और मजबूत फैन फॉलोइंग है।

    खलनायक की बात करें तो यह फिल्म साल 1993 में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी। सुभाष घई के निर्देशन में बनी इस फिल्म में संजय दत्त के साथ जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इसके अलावा राखी गुलजार अनुपम खेर और राम्या कृष्णन जैसे कलाकारों ने भी अहम किरदार निभाए थे। फिल्म में बल्लू का किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। अब इसके सीक्वल को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    दूसरी ओर सलमान खान की आगामी फिल्म मातृभूमि को लेकर भी चर्चा जारी है। अपूर्वा लाखिया के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में सलमान के साथ चित्रांगदा सिंह नजर आएंगी। इसकी कहानी भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। फिलहाल इसकी रिलीज डेट की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में दर्शकों की नजरें अब खलनायक रिटर्न्स की स्क्रिप्ट और सलमान खान की संभावित एंट्री पर टिकी हैं।

  • दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू

    दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू


    नई दिल्ली । दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित राजनीतिक रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच और खरीदारी पर पड़ने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने राहुल गांधी से अपील की है कि दिवाली के दौरान बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की स्थिति पैदा न हो।

    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पोस्टरों के माध्यम से राहुल गांधी तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान का संदेश है कि जिस तरह मोहब्बत और आपसी विश्वास की बात की जाती है, उसी तरह व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ भरोसे और संबंधों के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान उनके कारोबार को प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन प्रस्तावित रैली के कारण दिल्ली के करीब 300 साल पुराने बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग तरह की दुकानें हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार में चूड़ी-बिंदी की दुकानें और चांदनी चौक में लहंगों का व्यापार इसकी प्रमुख पहचान हैं।

    इसके अलावा दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग में कुल्फी की दुकानें भी स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। संगठन का कहना है कि इन दुकानों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और परिवारों को नियमित आय मिलती है।

    CTI ने रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में पोस्टर अभियान चलाने की बात कही है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, नबी करीम, पहाड़गंज, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, जनपथ, पालिका बाजार, बल्लीमारान और किनारी बाजार शामिल हैं।

    व्यापारियों की चिंता का एक प्रमुख कारण रैली में संभावित रूप से जुटने वाली बड़ी भीड़ और वाहनों की संख्या है। बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग और गाड़ियां आसपास के इलाकों में पहुंचती हैं, तो बाजारों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने और व्यापारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 100 बसों की पार्किंग तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी रैली के दौरान यातायात और पार्किंग प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस आयोजन के कारण दिल्ली का लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का त्योहारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

    CTI के मुताबिक, इस संभावित व्यवधान का असर करीब 20 लाख व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 75 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। संगठन ने धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में सामान्य कारोबार बनाए रखने की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रहना जरूरी है।

  • 27 भारतीयों वाले जहाज पर चुंबक बम से हमला…. होर्मुज में पहली बार हुआ लिंपेट माइंस का इस्तेमाल

    27 भारतीयों वाले जहाज पर चुंबक बम से हमला…. होर्मुज में पहली बार हुआ लिंपेट माइंस का इस्तेमाल


    नई दिल्ली।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में समुद्री जहाजों पर हमलों का खतरा बढ़ता जा रहा है. 30 अक्टूबर को 27 भारतीय नाविकों (27 Indian Sailors) को लेकर जा रहे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर MT LOUISE 1 पर लिंपेट माइंस (चुंबक बम) (Limpet Mines -Magnetic Bombs) से हमला किया गया. धमाके के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और टैंकर कुछ समय के लिए काम करना बंद कर गया. हालांकि, सभी 27 भारतीय क्रू मेंबर सुरक्षित हैं. केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसकी पुष्टि की है.

    जानकारी के मुताबिक, फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज में चुंबक विस्फोट के इस्तेमाल से किया गया यह पहला सफल हमला है. हमले में एक छोटी नाव टैंकर के पास पहुंची और उसके बाहरी हिस्से पर दो लिंपेट माइंस चिपकाकर वहां से निकल गई. इसके बाद जहाज में आग लग गई. क्रू मेंबर्स ने आग पर काबू पा लिया. घटना में किसी के घायल होने या समुद्र में तेल फैलने की जानकारी नहीं है. आग बुझने के बाद टैंकर ने फिर से अपना सफर शुरू कर दिया.


    एक दिन पहले दूसरे टैंकर पर भी हुआ था हमला

    केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि 29 अक्टूबर को लाइबेरिया के झंडे वाले बड़े तेल टैंकर MT ARZANAH पर भी होर्मुज में प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया था. इस जहाज पर दो भारतीय नागरिक सवार थे. इस तरह दोनों जहाजों पर कुल 29 भारतीय नागरिक मौजूद थे और सभी सुरक्षित हैं। सोनोवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सरकार हालात पर लगातार नजर रख रही है. जहाजों का प्रबंधन करने वाली कंपनियों के साथ संपर्क बनाए रखा जा रहा है, ताकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके हालात का ध्यान रखा जा सके.


    ओमान के पास हुई घटना

    ब्रिटिश नौसेना से जुड़ी एजेंसी UKMTO के मुताबिक, गुरुवार को यह घटना ओमान के खासाब शहर से करीब 25 समुद्री मील यानी लगभग 46 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई. एजेंसी ने अपनी शुरुआती एडवाइजरी में जहाज का नाम नहीं बताया था. हालांकि, समुद्री सुरक्षा से जुड़े तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि हमला MT LOUISE 1 पर हुआ और जहाज के बाहरी हिस्से पर लिंपेट माइंस लगाई गई थीं। सूत्रों के मुताबिक, सितंबर में भी इसी तरह का हमला करने की कोशिश हुई थी, लेकिन उस समय विस्फोटक नहीं फटे थे. गुरुवार के हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी साफ नहीं हो पाया है।


    क्या होती हैं लिंपेट माइंस?

    लिंपेट माइंस छोटे आकार के विस्फोटक उपकरण होते हैं, जिन्हें चुंबक की मदद से जहाज के बाहरी हिस्से पर चिपकाया जा सकता है. समुद्री सुरक्षा कंपनी Marisks के मुताबिक, इस क्षेत्र में 2017 से इनका इस्तेमाल किया जा रहा है. ये विस्फोटक अपेक्षाकृत सस्ते और आसानी से उपलब्ध होते हैं. छोटी नाव के जरिए इन्हें किसी चलते हुए जहाज पर लगाकर हमलावर आसानी से वहां से निकल सकते हैं।

  • दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7.35% रहने का अनुमान …. वित्त मंत्रालय

    दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7.35% रहने का अनुमान …. वित्त मंत्रालय


    नई दिल्ली।
    भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है. वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार चालू वित्त वर्ष (FY27) की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में देश की सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) की विकास दर 7.35% रहने का अनुमान लगाया गया है।

    यह मजबूत अनुमान ऐसे समय में आया है, जब पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था ने 7.8% की शानदार रफ्तार दर्ज की थी. वित्त मंत्रालय के नाउकास्टिंग मॉडल (Nowcasting Model) के मुताबिक देश की आर्थिक गतिविधियों में लगातार तेजी बनी हुई है। मजबूत औद्योगिक उत्पादन (Industrial Output): देश के विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार सुधार देखा जा रहा है, जिससे उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

    ऊर्जा की बढ़ती खपत (Energy Consumption): बिजली और अन्य ऊर्जा की मांग में उछाल इस बात का संकेत है कि देश में कमर्शियल और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। बेहतर माल ढुलाई और परिवहन: बंदरगाहों पर यातायात, ऑटोमोबाइल सेक्टर में बिक्री और जीएसटी कलेक्शन के आंकड़ों में लगातार मजबूती दर्ज की गई है, जो घरेलू मांग के मजबूत होने का प्रमाण है. घरेलू मोर्चे पर अर्थव्यवस्था जहां मजबूत स्थिति में है, वहीं रिपोर्ट में कुछ बाहरी और वैश्विक जोखिमों को लेकर आगाह भी किया गया है।


    पश्चिम एशिया संकट का असर

    पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और भूमध्यसागरीय मार्ग पर समुद्री माल ढुलाई में रुकावटों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे इनपुट लागत बढ़ने का खतरा है. इस बीच वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए मंत्रालय ने कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए हेडलाइन इंफ्लेशन (मुद्रास्फीति) के अनुमान को पहले के 3.7% से बढ़ाकर 4.7% कर दिया है. मौसम से जुड़े जोखिमों, खासकर अल नीनो के कारण रबी की बुआई के दौरान मिट्टी की नमी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है, जिसका असर खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।


    विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी क्षेत्र की स्थिति

    इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का बाहरी क्षेत्र काफी मजबूत स्थिति में बना हुआ है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियों और मजबूत पूंजी प्रवाह के चलते देश का विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर है. वर्तमान में यह भंडार लगभग 10.3 महीने के आयात कवर को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त है. वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय रुपये और मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई सक्रिय रूप से मौद्रिक और तरलता प्रबंधन पर काम कर रहा है. वित्त मंत्रालय के इस अनुमान से साफ है कि मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और सरकारी सुधारों के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है।

  • नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, दिवाली से गुरु नानक जयंती तक जानिए किस तारीख को कहां मिलेगी छुट्टी

    नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, दिवाली से गुरु नानक जयंती तक जानिए किस तारीख को कहां मिलेगी छुट्टी

    नई दिल्ली । नवंबर 2026 में बैंकिंग से जुड़े कामकाज की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए छुट्टियों की जानकारी महत्वपूर्ण है। इस महीने दिवाली, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और अन्य क्षेत्रीय त्योहारों के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अलावा रविवार और महीने के दूसरे तथा चौथे शनिवार को भी नियमित अवकाश रहेगा। उपलब्ध छुट्टी कैलेंडर के अनुसार नवंबर में कुल 16 दिन बैंक बंद रहने का प्रावधान है। हालांकि, इन सभी दिनों में देशभर के बैंक एक साथ बंद नहीं रहेंगे। त्योहारों की छुट्टियां संबंधित राज्यों और शहरों के आधार पर लागू होंगी।

    नवंबर में कुल सात दिन रविवार और शनिवार के नियमित अवकाश के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा नौ तारीखों पर अलग-अलग राज्यों में त्योहारों और स्थानीय आयोजनों के कारण बैंक बंद रहेंगे। इसलिए ग्राहकों को अपने शहर के अनुसार छुट्टियों की जानकारी रखना जरूरी है। खासतौर पर चेक जमा करने, बैंक ड्राफ्ट बनवाने, नकद लेनदेन और अन्य शाखा आधारित कामों के लिए पहले से योजना बनाना उपयोगी रहेगा।

    महीने की शुरुआत में 9 नवंबर को दिवाली, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और विश्वकर्मा दिवस के अवसर पर अगरतला, भोपाल, चंडीगढ़, गंगटोक, इंफाल, जयपुर, कानपुर और लखनऊ समेत कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इसके अगले दिन यानी 10 नवंबर को अहमदाबाद, बेलापुर, बेंगलुरु, देहरादून, गंगटोक, मुंबई और नागपुर में दिवाली से जुड़े आयोजनों तथा विक्रम संवत नववर्ष के कारण बैंक शाखाओं में छुट्टी रहेगी।

    11 नवंबर को भाई दूज, लक्ष्मी पूजा और चित्रगुप्त जयंती के चलते गंगटोक, इंफाल, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ और शिमला में बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 13 नवंबर को मेघालय के शिलांग में वांगला उत्सव के कारण बैंकिंग सेवाएं शाखाओं में उपलब्ध नहीं रहेंगी।

    16 नवंबर को छठ पूजा के अवसर पर बिहार की राजधानी पटना और झारखंड की राजधानी रांची में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। छठ पूजा बिहार और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पर्व है, जिसके चलते संबंधित शहरों में बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहेगा। इसके बाद 20 नवंबर को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इगास-बग्वाल के अवसर पर छुट्टी रहेगी।

    23 नवंबर को मेघालय के शिलांग में सेंग कुट स्नेम के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा और राहस पूर्णिमा के अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के विभिन्न शहरों में बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। महीने के अंतिम सप्ताह में 27 नवंबर को कर्नाटक के बेंगलुरु में कनकदास जयंती के कारण बैंक बंद रहेंगे।

    त्योहारों के अलावा नवंबर में पांच रविवार पड़ रहे हैं। ये रविवार 1, 8, 15, 22 और 29 नवंबर को होंगे। इन सभी दिनों में देशभर की बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अतिरिक्त 14 नवंबर को दूसरा शनिवार और 28 नवंबर को चौथा शनिवार होने के कारण भी नियमित बैंकिंग कामकाज नहीं होगा।

    हालांकि, बैंक शाखाओं में छुट्टी होने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों की सभी बैंकिंग सेवाएं बंद हो जाएंगी। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी सुविधाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की संभावना है। ग्राहक इन माध्यमों से पैसे ट्रांसफर करने, बैलेंस चेक करने और नकद निकालने जैसे काम कर सकेंगे।

    दूसरी ओर, चेक क्लियरेंस, बैंक दस्तावेजों से जुड़े काम और शाखा में जाकर किए जाने वाले लेनदेन छुट्टियों के कारण प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में नवंबर में किसी जरूरी वित्तीय काम की योजना बना रहे ग्राहकों को अपने शहर की छुट्टियों की सूची देखकर पहले ही बैंकिंग संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर लेनी चाहिए।

  • कभी मौसम तो कभी तकनीकी खराबी बनी हादसों की वजह, चारधाम रूट पर 17 साल में 46 लोगों की गई जान

    कभी मौसम तो कभी तकनीकी खराबी बनी हादसों की वजह, चारधाम रूट पर 17 साल में 46 लोगों की गई जान


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर हादसों का सिलसिला एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। जोशीमठ के पास हाल ही में हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने पहाड़ी इलाकों में हवाई यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्घटना के बाद हेलीकॉप्टर का मलबा टुकड़ों में बरामद किया गया और इसमें सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले 17 वर्षों में चारधाम यात्रा और आसपास के क्षेत्रों में 15 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में कुल 46 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा और उड़ान संचालन की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत बढ़ा दी है।

    चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल खासतौर पर केदारनाथ जैसे दुर्गम धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए किया जाता है। बुजुर्गों और कम समय में यात्रा पूरी करने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी मानी जाती है। लेकिन हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां हेलीकॉप्टर उड़ानों को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। यहां मौसम तेजी से बदलता है और कुछ ही मिनटों में साफ आसमान कोहरा तथा बादलों से घिर सकता है। बारिश और कम दृश्यता के कारण पायलटों को उड़ान के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

    तेज हवाओं का अचानक रुख बदलना भी हेलीकॉप्टर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा माइक्रोबर्स्ट यानी हवा का अचानक तेज गति से नीचे की ओर बहना उड़ान के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। कुछ दुर्घटनाओं में इंजन रोटर ब्लेड और टेल रोटर से जुड़ी तकनीकी खराबियां भी सामने आई हैं। ऐसे में मौसम की स्थिति और हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच दोनों ही सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

    बीते वर्षों में हुए हादसों पर नजर डालें तो 12 जून 2009 को केदारनाथ हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के पंखे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी। वर्ष 2013 में चारधाम क्षेत्र में कई बड़े हादसे हुए। 21 जून को जंगलचट्टी में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट की जान गई। 25 जून को गौरीकुंड के पास एमआई-17 हेलीकॉप्टर हादसे में 20 जवानों की मौत हुई थी। इसके तीन दिन बाद गरुड़चट्टी में एक अन्य दुर्घटना में तीन लोगों की जान चली गई।

    इसके बाद भी हादसों का सिलसिला थमा नहीं। 2016 में गुप्तकाशी के पास हवा में हेलीकॉप्टर को नुकसान पहुंचा लेकिन सभी यात्री सुरक्षित बच गए। 2018 में केदारनाथ में एमआई-17 दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें कोई जनहानि नहीं हुई। 2019 में तकनीकी खराबी के कारण आपात लैंडिंग करनी पड़ी। अक्टूबर 2022 में गरुड़चट्टी के पास पहाड़ी से टकराने के कारण सात लोगों की मौत हुई। अप्रैल 2023 में हेलीपैड पर टेल रोटर की चपेट में आने से एक अधिकारी की जान चली गई।

    वर्ष 2024 और 2025 में भी कई घटनाएं हुईं। इनमें कुछ मामलों में आपात लैंडिंग और दुर्घटना के बावजूद यात्रियों की जान बच गई जबकि 15 जून 2025 को गौरी माई खर्क के पास हुए हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। अक्टूबर 2026 में नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में तकनीकी खराबी के कारण निजी हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग हुई। इसके बाद 30 अक्टूबर को बदरीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया और छह लोगों की मौत हो गई।

    लगातार हो रही इन घटनाओं के बीच हेलीकॉप्टर संचालन में मौसम की सख्त निगरानी तकनीकी जांच और सुरक्षा नियमों के पालन को प्राथमिकता देना जरूरी है। चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा अवसर है लेकिन इस यात्रा में उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

  • न्यूजीलैंड में टीम इंडिया का विजय रथ थमा… T-20 क्रिकेट में 6 साल में 10 जीत के बाद हारा भारत

    न्यूजीलैंड में टीम इंडिया का विजय रथ थमा… T-20 क्रिकेट में 6 साल में 10 जीत के बाद हारा भारत


    ऑकलैंड।
    न्यूजीलैंड (New Zealand) ने टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले (Fourth Match T20 series) में भारत (India) को 87 रनों से हराया. यह पांच मैचों की टी20 सीरीज में कीवी टीम की पहली जीत रही. शुक्रवार (30 अक्टूबर) को ऑकलैंड (Auckland) के ईडन पार्क में मिली इस हार के साथ ही भारतीय टीम का न्यूजीलैंड की धरती पर लगातार 10 टी20 मैचों से चला आ रहा अजेय अभियान भी थम गया. ग्लेन फिलिप्स (Glenn Phillips) के तूफानी शतक और जैकब डफी (Jacob Duffy) की घातक गेंदबाजी ने मेजबान टीम की जीत की कहानी लिखी।

    भारतीय टीम ने 2020 से 2026 के बीच न्यूजीलैंड में लगातार 10 टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में हार नहीं झेली थी. शुक्रवार को यह सिलसिला टूट गया. रनों के लिहाज से यह टी20 इंटरनेशनल में भारत की दूसरी सबसे बड़ी हार भी रही. हालांकि, शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर टीम इंडिया टी20 सीरीज पहले ही अपने नाम कर चुकी है।

    एक देश में किसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ लगातार जीत (फुल मेम्बर)
    11 भारत बनाम श्रीलंका (भारत में, 2016-23)
    10 भारत बनाम न्यूजीलैंड (न्यूजीलैंड में, 2020-26)
    9 न्यूजीलैंड बनाम बांग्लादेश (न्यूजीलैंड में, 2010-22)
    9 पाकिस्तान बनाम जिम्बाब्वे (जिम्बाब्वे में, 2011-21)

    T20I में भारत की सबसे बड़ी हार (रनों के हिसाब से)
    125 रन बनाम इंग्लैंड, नॉटिंघम 2026
    87 रन बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड 2026
    80 रन बनाम न्यूजीलैंड, वेलिंगटन 2019
    76 रन बनाम साउथ अफ्रीका, अहमदाबाद 2026

    टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी चुनी, लेकिन न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने 20 ओवर में सात विकेट पर 259 रन ठोक दिए. यह टी20 इंटरनेशनल में न्यूजीलैंड का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है. ग्लेन फिलिप्स ने भारतीय गेंदबाजों पर हमला बोलते हुए 49 गेंदों पर 107 रन बनाए. उनकी पारी में छह चौके और 10 छक्के शामिल रहे. यह उनके टी20 इंटरनेशनल करियर का तीसरा शतक था. माइकल ब्रेसवेल ने भी महज 25 गेंदों पर 65 रनों की पारी खेली।

    दोनों ने पांचवें विकेट के लिए सिर्फ 41 गेंदों पर 115 रन जोड़कर मैच का रुख बदल दिया. ग्लेन फिलिप्स ने नितीश कुमार रेड्डी के 16वें ओवर में लगातार चार छक्के लगाए और इस ओवर में कुल 32 रन आए. माइकल ब्रेसवेल ने भी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी. न्यूजीलैंड ने आखिरी पांच ओवर में 85 रन बटोरकर स्कोर 259 तक पहुंचा दिया. फिन एलन ने 17 गेंदों पर 31 और डेरिल मिचेल ने नौ गेंदों पर 24 रन बनाए. भारत के लिए मयंक यादव ने तीन विकेट हासिल किए. अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव और नितीश कुमार रेड्डी को एक-एक सफलता मिली।

    डफी ने झटके चार विकेट
    260 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को जैकब डफी ने शुरुआती ओवर में ही दो बड़े झटके दिए. उन्होंने संजू सैमसन को चार रनों पर और ईशान किशन को बिना खाता खोले आउट कर दिया. इसके बाद अभिषेक शर्मा और श्रेयस अय्यर ने तेजी से रन जुटाने की कोशिश की. अभिषेक ने 15 गेंदों पर 27 रन बनाए, जबकि श्रेयस के बल्ले से 11 गेंदों पर 22 रन निकले. दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 46 रन जोड़े, लेकिन मैथ्यू फिशर ने अभिषेक को आउट कर साझेदारी तोड़ दी. इसके बाद एडम मिल्ने ने 143 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर भारतीय कप्तान श्रेयस को बोल्ड कर दिया।

    लगातार विकेट गिरने के कारण भारतीय टीम बड़े लक्ष्य के दबाव से उबर नहीं सकी और 87 रनों से मुकाबला गंवा दिया. हार के बावजूद अर्शदीप सिंह के लिए यह मुकाबला खास रहा. उन्होंने मिचेल सेंटनर को आउट कर मेन्स टी20 इंटरनेशनल में 150 विकेट पूरे किए. वह इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने।

  • शेयर बाजार में निवेश की बना रहे हैं योजना, जानिए कहां पैसा लगाने से मिल सकता है बेहतर रिटर्न

    शेयर बाजार में निवेश की बना रहे हैं योजना, जानिए कहां पैसा लगाने से मिल सकता है बेहतर रिटर्न


    नई दिल्ली। आज के समय में शेयर बाजार निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प बनता जा रहा है। बहुत से लोग अपनी बचत को बैंक खाते में रखने के बजाय ऐसी जगह निवेश करना चाहते हैं जहां लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो। हालांकि शेयर बाजार में पैसा लगाना जितना आसान दिखाई देता है उतना ही जरूरी सही जानकारी और समझ के साथ निवेश करना भी है। बिना जानकारी के किसी शेयर को खरीद लेना या दूसरों की सलाह पर पैसा लगा देना नुकसान का कारण बन सकता है। अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपके लिए कौन सा निवेश विकल्प सही रहेगा।

    नए निवेशकों के लिए निफ्टी 50 इंडेक्स फंड एक अच्छा शुरुआती विकल्प हो सकता है। इस तरह के फंड में पैसा लगाने पर निवेश निफ्टी 50 में शामिल बड़ी कंपनियों में फैल जाता है। इसका फायदा यह है कि निवेशक को अलग-अलग कंपनियों के शेयर चुनने की जरूरत नहीं पड़ती। इंडेक्स फंड का प्रदर्शन संबंधित इंडेक्स के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। इसमें भी बाजार गिरने पर निवेश की कीमत कम हो सकती है इसलिए इसे लंबे समय के नजरिए से देखना बेहतर होता है।

    इसके अलावा लार्ज कैप म्यूचुअल फंड भी निवेश का विकल्प हो सकते हैं। ये फंड मुख्य रूप से बड़ी और स्थापित कंपनियों में निवेश करते हैं। जिन लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में पैसा लगाने का अनुभव नहीं है उनके लिए म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना सुविधाजनक हो सकता है। वहीं फ्लेक्सी कैप फंड में फंड मैनेजर को बड़ी मझोली और छोटी कंपनियों में निवेश करने की सुविधा मिलती है। इससे निवेश का दायरा बढ़ता है लेकिन जोखिम भी बाजार की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति सीधे कंपनियों के शेयर खरीदना चाहता है तो उसे पहले कंपनी का कारोबार उसकी कमाई कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना चाहिए। केवल कम कीमत वाला शेयर देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं है। कई बार सस्ते दिखने वाले शेयर लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन करते हैं। निवेश से पहले कंपनी के नतीजों और उसके क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन करना जरूरी है। नए निवेशकों को शुरुआत में पेनी स्टॉक और बिना जानकारी वाले छोटे शेयरों से बचना चाहिए।

    निवेश की शुरुआत छोटी रकम से भी की जा सकती है। हर महीने एक निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिए लगाना एक व्यवस्थित तरीका हो सकता है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान नियमित निवेश होता रहता है। हालांकि एसआईपी से मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती और निवेश की वैल्यू घट भी सकती है। इसलिए निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।

    शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें। अगर आपको कुछ महीनों या एक-दो साल में पैसों की जरूरत पड़ सकती है तो उस रकम को शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले विकल्पों में लगाना उचित नहीं हो सकता। लंबी अवधि के निवेश के लिए भी आपातकालीन जरूरतों का पैसा अलग रखना चाहिए। उधार लेकर निवेश करने और फ्यूचर एंड ऑप्शन जैसे जोखिम भरे कारोबार से शुरुआत करने से बचें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर बाजार में रातोंरात अमीर बनने की सोच के बजाय अनुशासन और धैर्य के साथ निवेश करें। सही जानकारी हासिल करें और जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लें। निवेश में जोखिम हमेशा रहता है इसलिए किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले उसके नियम और खर्च जरूर समझें।