Blog

  • टॉप कंपनियों की दौलत में बड़ी सेंध एक हफ्ते में 1.13 लाख करोड़ का मार्केटकैप साफ एयरटेल को सबसे ज्यादा नुकसान

    टॉप कंपनियों की दौलत में बड़ी सेंध एक हफ्ते में 1.13 लाख करोड़ का मार्केटकैप साफ एयरटेल को सबसे ज्यादा नुकसान


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह आई गिरावट का असर देश की दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण पर भी साफ दिखाई दिया। देश की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से सात कंपनियों का संयुक्त मार्केटकैप करीब 1.13 लाख करोड़ रुपए घट गया। बाजार में कमजोर सेंटीमेंट और प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बीच भारती एयरटेल सबसे बड़ी नुकसान उठाने वाली कंपनी रही। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज एचडीएफसी बैंक बजाज फाइनेंस लार्सन एंड टुब्रो एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार मूल्यांकन में भी कमी दर्ज की गई।

    साप्ताहिक आधार पर भारती एयरटेल के मार्केटकैप में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। कंपनी का बाजार मूल्यांकन 40,500.85 करोड़ रुपए घटकर 11,74,462.30 करोड़ रुपए रह गया। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज को बड़ा झटका लगा। रिलायंस का मार्केटकैप 40,056.32 करोड़ रुपए कम होकर 17,38,119.27 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। हालांकि इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है।

    निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप भी 11,558.35 करोड़ रुपए घटा और यह 11,09,600.70 करोड़ रुपए रह गया। बजाज फाइनेंस के बाजार मूल्यांकन में 10,086.05 करोड़ रुपए की कमी आई और इसका मार्केटकैप 6,70,535.57 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। एलएंडटी का बाजार मूल्यांकन 6,473.45 करोड़ रुपए घटकर 5,55,987.49 करोड़ रुपए रहा। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी के मार्केटकैप में 3,162.50 करोड़ रुपए की कमी आई और यह 5,32,817.81 करोड़ रुपए रह गया।

    एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड भी गिरावट से अछूती नहीं रही। कंपनी का बाजार मूल्यांकन 1,550.73 करोड़ रुपए घटकर 4,72,361.83 करोड़ रुपए रह गया। इस तरह टॉप 10 कंपनियों में सात कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में एक सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई।

    हालांकि सभी बड़ी कंपनियों के लिए सप्ताह कमजोर नहीं रहा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के मार्केटकैप में 16,643.20 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई और यह 8,48,079.71 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। आईसीआईसीआई बैंक का बाजार मूल्यांकन 4,475.28 करोड़ रुपए बढ़कर 10,22,805.73 करोड़ रुपए हो गया। वहीं भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई के मार्केटकैप में भी 599.99 करोड़ रुपए की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 9,65,568.75 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

    मार्केटकैप के लिहाज से कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर बनी हुई है। भारती एयरटेल दूसरे स्थान पर है जबकि एचडीएफसी बैंक तीसरे पायदान पर है। इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक एसबीआई टीसीएस बजाज फाइनेंस एलएंडटी एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान है।

    इस गिरावट की पृष्ठभूमि में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक भी दबाव में रहे। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 276.32 अंक यानी 0.35 प्रतिशत गिरकर 77,264 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 76.35 अंक यानी 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,175 के स्तर पर रहा। हालांकि व्यापक बाजार में तस्वीर कुछ अलग रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.51 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.52 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    इस तरह पिछले सप्ताह जहां बाजार के प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी रही वहीं कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती देखने को मिली। बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में आई गिरावट यह बताती है कि बाजार में उतार चढ़ाव का सीधा असर देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की कुल संपत्ति पर भी पड़ता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर बाजार की दिशा और इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन पर बनी रहेगी।

  • 2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन

    2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यह लक्ष्य अब मुश्किल से 20 वर्ष दूर रह गया है। ऐसे में भारत को आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों की रफ्तार को और तेज करने के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी। अमेरिका के शिकागो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिभाशाली और व्यापक अनुभव रखने वाले लोगों के साथ ऐसे लोगों का सहयोग भी जरूरी है जो नई सोच और नए विचारों के साथ भारत की विकास यात्रा को मजबूती दे सकें। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पूंजी को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि किसी देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी आवश्यक होती है।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक नीतियों और राजकोषीय अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज का स्तर उनकी जीडीपी के 200 प्रतिशत से भी अधिक है लेकिन भारत ने अपने लिए राजकोषीय अनुशासन का स्पष्ट रास्ता चुना है। वित्त मंत्री के अनुसार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों की दिशा में भी सरकार ने निर्धारित प्रगति हासिल की है।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो रहा है और यह सुधार किसी नियम को दरकिनार करके हासिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों को रोककर भी आर्थिक मजबूती हासिल नहीं की जा रही है बल्कि अर्थव्यवस्था का उचित और संतुलित प्रबंधन इसकी मुख्य वजह है। उनके मुताबिक भारत ने आर्थिक विकास के साथ सामाजिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।

    सीतारमण ने वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के दौर में कच्चे तेल एलपीजी और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति में मुश्किलें सामने आईं। इन वस्तुओं को भारत तक पहुंचाने वाले जहाजों को पर्याप्त बीमा कवर मिलने में भी दिक्कतें आईं और जोखिम प्रीमियम काफी बढ़ गया। ऐसी परिस्थितियों में आयात और आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था।

    उन्होंने बताया कि सरकार ने बजट में एक घोषणा के जरिए ऐसा फंड उपलब्ध कराया जिससे जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियों को चुकाने पड़ने वाले अतिरिक्त प्रीमियम में सहायता दी जा सके। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय किसानों परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर न पड़े। वित्त मंत्री के अनुसार इस कदम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली और भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने की कोशिश की गई।

    उर्वरक की उपलब्धता का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी के बावजूद भारत में उर्वरक की कमी महसूस नहीं होने दी गई। सरकार ने बाजारों को लगातार यह जानकारी उपलब्ध कराई कि देश को कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति की योजना बनाने और जरूरत के मुताबिक संसाधन जुटाने में मदद मिली।

    वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं प्रभावित हुईं लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने की कोशिश की। उनके बयान का व्यापक संदेश यही रहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में आर्थिक अनुशासन निवेश सुधार नवाचार और वैश्विक भारतीय समुदाय के सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। अब जब लक्ष्य लगभग दो दशक की दूरी पर है तब सुधारों की गति और उनके प्रभाव को बढ़ाना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

  • महज 15 साल की उम्र में कप्तानी का मौका ईशान किशन के चोटिल होते ही वैभव सूर्यवंशी बने ईस्ट जोन के कार्यवाहक कप्तान

    महज 15 साल की उम्र में कप्तानी का मौका ईशान किशन के चोटिल होते ही वैभव सूर्यवंशी बने ईस्ट जोन के कार्यवाहक कप्तान


    नई दिल्ली। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल मुकाबले में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेले जा रहे मुकाबले में सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला। ईस्ट जोन के नियमित कप्तान ईशान किशन चोटिल होने के कारण मैदान से बाहर चले गए जिसके बाद टीम के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी ने कुछ समय के लिए कार्यवाहक कप्तान की भूमिका निभाई। इतनी कम उम्र में सीनियर क्रिकेट में कप्तानी की जिम्मेदारी मिलना सूर्यवंशी के लगातार बढ़ते कद को दर्शाता है।

    दरअसल सेंट्रल जोन की बल्लेबाजी के दौरान विकेटकीपिंग कर रहे ईशान किशन के दाहिने अंगूठे में चोट लग गई। चोट के कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी कुमार कुशाग्र ने संभाली जबकि ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यवंशी को टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई। यह सूर्यवंशी का सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी का पहला अनुभव रहा। इससे पहले वह अपनी बल्लेबाजी और कभी कभी गेंदबाजी को लेकर सुर्खियां बटोर चुके हैं।

    दलीप ट्रॉफी में सूर्यवंशी का प्रदर्शन पहले से ही चर्चा में रहा है। नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उनके बल्ले से केवल आठ रन निकले थे लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने शानदार योगदान दिया। उन्होंने महज 11 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि सूर्यवंशी केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर गेंद से भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

    सूर्यवंशी ने खुद अपनी गेंदबाजी को लेकर दिलचस्प बात साझा की थी। उनका कहना था कि बल्लेबाजों को अक्सर गेंदबाजी करने में मजा आता है और गेंदबाजों को बल्लेबाजी करने में। ईस्ट जोन के पिछले मुकाबले में जब विरोधी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे तब उन्हें दो तीन ओवर गेंदबाजी करने के लिए कहा गया था। सूर्यवंशी ने खुद को विकेट लेने वाला खिलाड़ी बताते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि ईशान किशन को शायद पता नहीं था कि वह विकेट लेने वाले खिलाड़ी हैं।

    ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के सेमीफाइनल में टॉस जीतकर ईस्ट जोन ने रजत पाटीदार की कप्तानी वाली सेंट्रल जोन टीम को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। सेंट्रल जोन की टीम में सारांश जैन की भी वापसी हुई है। सारांश ने इसी महीने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया था।

    पहले दिन के शुरुआती सत्र में ईस्ट जोन के गेंदबाजों ने सेंट्रल जोन पर दबाव बनाए रखा। 32 ओवर के बाद सेंट्रल जोन का स्कोर 81 रन पर तीन विकेट था। अभिजीत के सरकार और मुकेश कुमार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए विकेट हासिल किए। अभिजीत ने पहले घंटे में अमन मोखाडे और कुणाल चंदेला को पवेलियन भेजा जबकि भारतीय तेज गेंदबाज मुकेश कुमार ने दूसरे घंटे के अंत में कप्तान रजत पाटीदार को 12 रन के निजी स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया।

    वैभव सूर्यवंशी के लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह बेहद कम उम्र में लगातार बड़े मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से चर्चा में आए सूर्यवंशी अब कप्तानी और गेंदबाजी जैसे पहलुओं में भी अनुभव हासिल कर रहे हैं। ईशान किशन की चोट से पैदा हुई स्थिति ने उन्हें अचानक नेतृत्व की भूमिका में ला खड़ा किया लेकिन यह मौका उनके क्रिकेटिंग सफर में एक अहम पड़ाव साबित हो सकता है। आने वाले समय में उनके खेल के साथ नेतृत्व क्षमता पर भी सभी की नजर रहेगी।

  • 60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर

    60 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर को बनाया रणजी चैंपियन अब इंग्लैंड में आजमाएंगे किस्मत! आकिब नबी पर टीम इंडिया की नजर


    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी के लिए भारतीय क्रिकेट में एक और बड़ा मौका दस्तक दे रहा है। रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी घातक गेंदबाजी से तहलका मचाने वाले नबी अब इंग्लैंड की काउंटी चैंपियनशिप में सरे की टीम के लिए खेलते नजर आ सकते हैं। उन्हें मौजूदा डिवीजन वन सीजन के कुछ मुकाबलों के लिए सरे के साथ जोड़े जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि वह 2 सितंबर से द ओवल में यॉर्कशायर के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इसके बाद ससेक्स और ग्लैमॉर्गन के खिलाफ होने वाले मुकाबलों में भी उनके खेलने की संभावना जताई जा रही है।

    आकिब नबी ने रणजी ट्रॉफी के पिछले सीजन में अपनी गेंदबाजी से जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था। उन्होंने महज 12.56 की औसत से 60 विकेट हासिल किए और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। उनकी शानदार गेंदबाजी के दम पर जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। घरेलू क्रिकेट में इस प्रदर्शन के बाद नबी को भारतीय टीम के भविष्य के तेज गेंदबाजों में एक महत्वपूर्ण नाम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड का संभावित काउंटी कार्यकाल नबी के लिए सिर्फ विदेशी क्रिकेट खेलने का मौका नहीं होगा बल्कि भारतीय टीम के नजरिए से भी इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। टीम मैनेजमेंट और राष्ट्रीय चयनकर्ता न्यूजीलैंड के आगामी टेस्ट दौरे को ध्यान में रखते हुए नबी को तेज गेंदबाजों के अनुकूल परिस्थितियों में खेलने का अनुभव दिलाना चाहते हैं। इंग्लैंड में रेड कूकाबुरा गेंद से गेंदबाजी करते हुए नबी की स्विंग और परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने की क्षमता को परखा जा सकता है। न्यूजीलैंड में टेस्ट क्रिकेट के दौरान भी तेज गेंदबाजों को अनुकूल परिस्थितियां मिलने की उम्मीद रहती है ऐसे में यह अनुभव उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

    नबी श्रीलंका के खिलाफ भारत की हालिया टेस्ट सीरीज का भी हिस्सा रहे थे। भारत ने यह सीरीज 1-0 से अपने नाम की लेकिन नबी को प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी। अब इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलने का मौका उन्हें विदेशी परिस्थितियों में खुद को साबित करने का अवसर देगा। खास बात यह है कि इंग्लैंड में कई भारतीय खिलाड़ी पहले से काउंटी क्रिकेट में सक्रिय हैं जिससे नबी को वहां के माहौल और परिस्थितियों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

    इंग्लैंड में भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी की बात करें तो बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार वार्विकशायर के साथ फिर जुड़ने वाले हैं। कुलदीप यादव भी यॉर्कशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेलने लौटेंगे। सरे की टीम में भारतीय लेग स्पिनर राहुल चाहर और अनकैप्ड बल्लेबाजी ऑलराउंडर महिपाल लोमरोर भी शामिल हैं। ऐसे में नबी को विदेशी परिस्थितियों में भारतीय खिलाड़ियों के साथ खेलने और अनुभव साझा करने का मौका मिल सकता है।

    काउंटी चैंपियनशिप में अपना संभावित कार्यकाल पूरा करने के बाद नबी के इंडिया ए टीम से जुड़ने की उम्मीद है। 22 सितंबर से पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले दो रेड बॉल मुकाबलों में उनके खेलने की संभावना है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर की टीम के साथ उनके जुड़ने को लेकर भी स्थिति पर नजर रहेगी क्योंकि 1 से 5 अक्टूबर तक श्रीनगर में रेस्ट ऑफ इंडिया के खिलाफ ईरानी कप मुकाबला होना है।

    इस बीच भारतीय तेज गेंदबाजी के अनुभवी चेहरे मोहम्मद शमी और मुकेश कुमार के भी काउंटी चैंपियनशिप के बाद के चरणों में खेलने की संभावना जताई गई है। दोनों फिलहाल दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेल रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय तेज गेंदबाजों के लिए विदेशी परिस्थितियों में खुद को परखने के कई अहम मौके सामने आ सकते हैं। आकिब नबी के लिए सरे का संभावित काउंटी कार्यकाल इसी दिशा में उनके करियर का बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है।

  • 154.5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मचाई सनसनी 4 विश्व कप खेले 315 विकेट झटके ऐसी रही मैसूर एक्सप्रेस की क्रिकेट यात्रा

    154.5 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मचाई सनसनी 4 विश्व कप खेले 315 विकेट झटके ऐसी रही मैसूर एक्सप्रेस की क्रिकेट यात्रा


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब तेज गेंदबाजों की बात होती है तो जवागल श्रीनाथ का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। मैसूर एक्सप्रेस के नाम से मशहूर श्रीनाथ ने अपनी गति स्विंग और गेंद को अलग अलग अंदाज में इस्तेमाल करने की क्षमता से लंबे समय तक बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। 31 अगस्त 1969 को कर्नाटक के मैसूर में जन्मे दाएं हाथ के तेज गेंदबाज श्रीनाथ ने उस दौर में भारतीय तेज गेंदबाजी को नई पहचान दी जब टीम में तेज गति के गेंदबाजों की संख्या सीमित हुआ करती थी। कपिल देव के बाद श्रीनाथ भारतीय तेज गेंदबाजी का सबसे प्रमुख चेहरा बने और कपिल के संन्यास के बाद उन्होंने भारतीय आक्रमण की जिम्मेदारी संभाली।

    श्रीनाथ ने 1991 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती दौर में उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी तेज गति थी लेकिन करियर के दौरान उन्होंने अपनी गेंदबाजी में स्विंग और धीमी गेंद जैसे हथियार भी जोड़े। 1997 में चोट ने उनके करियर को बड़ा झटका दिया और उन्हें लगभग पूरा साल क्रिकेट से बाहर रहना पड़ा। उस समय उनकी वापसी को लेकर सवाल उठने लगे थे लेकिन श्रीनाथ ने हार नहीं मानी। वापसी के बाद उन्होंने अपनी गेंदबाजी में बदलाव किया और 1998 उनके करियर के सबसे शानदार वर्षों में शामिल हो गया। चोट के बाद उनकी गति कुछ प्रभावित हुई लेकिन विकेट लेने की क्षमता और गेंदबाजी की समझ और मजबूत होती गई।

    1999 वनडे विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ श्रीनाथ ने 154.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर अपनी गति का जबरदस्त प्रदर्शन किया। लंबे समय तक यह वनडे क्रिकेट में किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा फेंकी गई सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड रहा। बाद में 2023 में उमरान मलिक ने श्रीलंका के खिलाफ 156 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालकर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इसके बावजूद श्रीनाथ की तेज गेंदबाजी भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक खास मुकाम रखती है।

    श्रीनाथ ने भारत की ओर से चार वनडे विश्व कप खेले। 1992 1996 1999 और 2003 में वह भारतीय टीम का हिस्सा रहे। 2003 विश्व कप से पहले उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया था लेकिन तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें वापसी के लिए तैयार किया। श्रीनाथ ने भी कप्तान के भरोसे को सही साबित किया और 2003 विश्व कप में शानदार गेंदबाजी करते हुए 11 मैचों में 16 विकेट हासिल किए। इस प्रदर्शन ने भारत को फाइनल तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका निभाई।

    2002 में भी श्रीनाथ उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने श्रीलंका के साथ संयुक्त रूप से आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। इसके बाद 2003 विश्व कप के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उनके आंकड़े उनकी महानता की गवाही देते हैं। श्रीनाथ ने भारत के लिए 229 वनडे मैचों में 315 विकेट हासिल किए और वह वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज हैं। कुल भारतीय गेंदबाजों में केवल अनिल कुंबले उनसे आगे हैं। वह 300 से ज्यादा वनडे विकेट लेने वाले भारत के एकमात्र तेज गेंदबाज भी रहे हैं।

    टेस्ट क्रिकेट में भी श्रीनाथ का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने 67 टेस्ट मैचों में 236 विकेट अपने नाम किए। करीब 12 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने भारतीय तेज गेंदबाजी को लगातार मजबूती दी और कई मुश्किल विदेशी दौरों पर टीम की गेंदबाजी की अगुआई की।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद श्रीनाथ ने कमेंट्री या कोचिंग को अपना मुख्य पेशा बनाने के बजाय मैच रेफरी के रूप में नई पारी शुरू की। वह आईसीसी के प्रतिष्ठित मैच रेफरी के रूप में लंबे समय से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। क्रिकेट में उनके योगदान के लिए 1999 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। तेज गति स्विंग अनुभव और लगातार प्रदर्शन की बदौलत जवागल श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट में उस दौर के प्रतीक बन गए जब एक अकेला तेज गेंदबाज पूरी गेंदबाजी इकाई की पहचान बन सकता था।

  • साइकिल चलाओ फिट रहो देश को मजबूत बनाओ मांडविया और गंभीर ने युवाओं को दिया फिटनेस मंत्र

    साइकिल चलाओ फिट रहो देश को मजबूत बनाओ मांडविया और गंभीर ने युवाओं को दिया फिटनेस मंत्र


    नई दिल्लीनई दिल्ली में रविवार को आयोजित फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल इवेंट में फिटनेस और खेलों को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज और मौजूदा मुख्य कोच गौतम गंभीर भी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को नियमित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करना और फिटनेस को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने के प्रति जागरूकता पैदा करना रहा। बड़ी संख्या में बच्चों युवाओं और अलग अलग उम्र के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया और साइकिलिंग के साथ कई अन्य खेल गतिविधियों में भी भागीदारी की।

    केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने इस दौरान युवाओं को खास तौर पर मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से दूरी बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संडे ऑन साइकिल का यह 88वां संस्करण है और देशभर में अब तक 25 हजार से ज्यादा स्थानों पर इसका आयोजन किया जा चुका है। उनके मुताबिक साइकिल चलाने को लेकर देश में लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है और यह अभियान धीरे धीरे एक जुनून और पैशन का रूप ले रहा है। उन्होंने साइकिलिंग को व्यायाम का बेहतरीन माध्यम बताते हुए कहा कि इससे व्यक्ति खुद को फिट रखने के साथ पर्यावरण और यातायात से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में भी योगदान दे सकता है।

    मांडविया ने युवाओं से अपील की कि वे रोजाना कम से कम एक घंटे मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन से दूर रहने की कोशिश करें। इस समय को साइकिल चलाने या किसी अन्य खेल गतिविधि में लगाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। उनका संदेश खास तौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बच्चों और युवाओं के बीच स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ रहा है और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय कम होता जा रहा है।

    कार्यक्रम में गौतम गंभीर ने भी फिटनेस को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने फिट इंडिया अभियान को सरकार की एक बेहतरीन पहल बताते हुए कहा कि जिस तरह देश के लोग स्वस्थ होंगे उसी तरह देश मजबूत और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। गंभीर ने फिटनेस को किसी एक दिन या आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापक अभियान के रूप में देखने की जरूरत बताई। उन्होंने युवाओं और इस अभियान से जुड़े लोगों से अपील की कि वे फिटनेस का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

    गंभीर ने इस बात पर जोर दिया कि स्वस्थ नागरिक किसी भी मजबूत देश की नींव होते हैं। उनके अनुसार फिटनेस को केवल खेल खेलने या व्यायाम करने तक सीमित नहीं समझना चाहिए बल्कि इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। नियमित खेल गतिविधियां व्यक्ति को सक्रिय रखने के साथ अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करती हैं।

    जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हुए इस आयोजन में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। आयोजकों ने कार्यक्रम में शामिल प्रतिनिधियों और अतिथियों का सम्मान किया। मुख्य अतिथि गौतम गंभीर के अलावा पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह तथा अभिनेत्री मुधरिमा तुली भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। अतिथियों का फूल और बुके देकर स्वागत किया गया।

    साइकिलिंग के अलावा कार्यक्रम में कई अन्य खेल गतिविधियां भी आयोजित की गईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक अलग अलग आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी ने इसे सामूहिक फिटनेस उत्सव का रूप दिया। आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि फिट रहना केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं बल्कि स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण से भी जुड़ा विषय है। मांडविया और गंभीर की अपील ने युवाओं को खेल और नियमित शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने के अभियान को नई ऊर्जा दी।

  • भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार

    भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। भोपाल के बुधवारा चौराहे पर आजादी के पखवाड़े के समापन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की यूसीसी नीति पर जमकर हमला बोला। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। इसी मंच से उमंग सिंघार ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि यदि आने वाले समय में कांग्रेस की सरकार बनती है तो यूसीसी को खत्म किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने विधानसभा में बहुमत के बल पर इस कानून को पारित कराया है।

    विधायक आरिफ मसूद की ओर से आयोजित जंग ए आजादी में उलमा की कुर्बानी कार्यक्रम के समापन समारोह में यूसीसी को लेकर कांग्रेस का रुख खुलकर सामने आया। उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा इस कानून को गांव गांव तक लागू करने की है। उन्होंने इसे काला कानून बताते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने बहुमत का इस्तेमाल करके इसे पास करा लिया है लेकिन सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस इसे खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगी। उनके इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की सियासत में यूसीसी को लेकर नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है।

    कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक आरिफ मसूद की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज में नफरत का माहौल होने की बात कही जा रही है तब आजादी का पखवाड़ा आयोजित कर उन्होंने राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान के विचार को आगे बढ़ाने का काम किया है। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

    मध्यप्रदेश में यूसीसी के प्रावधानों को लेकर सरकार की ओर से समान नागरिक व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके तहत विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रावधान है। बहुविवाह पर रोक के साथ विवाह और विवाह विच्छेद के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा लिव इन रिलेशनशिप को लेकर भी पंजीकरण और सूचना से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। समर्थकों का तर्क है कि इन प्रावधानों से वैवाहिक अधिकारों में समानता आएगी और महिलाओं तथा बच्चों के कानूनी अधिकार मजबूत होंगे।

    उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में भी समान अधिकार का प्रावधान यूसीसी की प्रमुख विशेषताओं में बताया गया है। बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बच्चों के अधिकारों और भरण पोषण से जुड़े प्रावधानों को भी अधिक समान बनाने की कोशिश की गई है। कानून में विवाह और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी कुछ पारंपरिक प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि इन प्रावधानों को लेकर अलग अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों की राय अलग रही है।

    यूसीसी के दायरे को लेकर जनजातीय समाज को विशेष छूट का प्रावधान भी चर्चा में रहा है। अनुसूचित जनजातियों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उन्हें कानून के कुछ प्रावधानों से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है। सरकार इसे सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण से जोड़ती है जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसके कई प्रावधानों और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।

    भोपाल के इस कार्यक्रम के बाद यूसीसी एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। उमंग सिंघार के सरकार बनने पर कानून खत्म करने वाले बयान ने आगामी राजनीतिक बहस को और धार दे दी है। अब यह मुद्दा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित न रहकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का नया आधार बन सकता है।

  • MP में शिक्षक भर्ती के बाद अब पदस्थापना की बारी! 7 हजार वर्ग-3 शिक्षकों को मिलेगा स्कूल, वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग भी शुरू

    MP में शिक्षक भर्ती के बाद अब पदस्थापना की बारी! 7 हजार वर्ग-3 शिक्षकों को मिलेगा स्कूल, वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग भी शुरू


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षक पदस्थापना का इंतजार कर रहे वर्ग-3 के करीब 7 हजार चयनित शिक्षकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। लोक शिक्षण विभाग सोमवार से इन शिक्षकों की शाला आवंटन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। लंबे समय से पदस्थापना स्थल को लेकर बनी स्थिति और म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया के कारण इसमें देरी हुई थी लेकिन अब विभाग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। शाला आवंटन के बाद चयनित शिक्षकों को संबंधित स्कूल में जॉइनिंग के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। विभाग को उम्मीद है कि इन शिक्षकों की पदस्थापना से सरकारी स्कूलों में लंबे समय से बनी शिक्षकों की कमी को काफी हद तक दूर करने में मदद मिलेगी।

    दरअसल वर्ग-3 के चयनित शिक्षकों की पदस्थापना पहले 15 अगस्त तक पूरी करने की तैयारी थी। लेकिन चयनित अभ्यर्थियों के सामने पदस्थापना स्थल को लेकर कई तरह की दिक्कतें सामने आईं। खासतौर पर कुछ शिक्षकों को आवंटित होने वाले स्कूलों और उनकी पसंद के स्थान के बीच दूरी को लेकर स्थिति बनी। इसी दौरान विभाग ने पहली बार चयनित शिक्षकों को म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प उपलब्ध कराया। इस सुविधा के तहत इच्छुक शिक्षक आपस में संपर्क कर स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते थे। करीब 400 चयनित शिक्षकों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। इसी प्रक्रिया के चलते शाला आवंटन में कुछ समय की देरी हुई लेकिन अब विभाग ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

    लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के मुताबिक वर्ग-3 में करीब 7 हजार चयनित शिक्षकों की पदस्थापना की जानी है। स्कूलों का आवंटन होने के बाद शिक्षकों को संबंधित संस्था में कार्यभार ग्रहण करना होगा। इसके लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। यानी शाला आवंटन के बाद चयनित शिक्षकों के सामने अब जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी होगी। विभाग की कोशिश है कि पदस्थापना की प्रक्रिया जल्द पूरी हो ताकि स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।

    इसी दिन वर्ग-2 के चयनित शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग वर्ग-2 की वेटिंग काउंसलिंग के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार से करेगा। इसमें प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों के आधार पर स्कूल आवंटित किए जाएंगे। इससे उन उम्मीदवारों को भी मौका मिलने की उम्मीद है जो मुख्य चयन प्रक्रिया में स्थान नहीं पा सके थे लेकिन प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं।

    विभाग की योजना वर्ग-3 के चयनित शिक्षकों की जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसी श्रेणी में वेटिंग काउंसलिंग शुरू करने की भी है। इससे रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया और आगे बढ़ेगी। यानी आने वाले समय में वर्ग-3 के चयनित अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा सूची से भी नियुक्ति के अवसर खुल सकते हैं।

    वहीं वर्ग-1 के चयनित शिक्षकों की पदस्थापना का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के अनुसार इस मामले में सितंबर के पहले सप्ताह में फैसला आने की संभावना है। कोर्ट के निर्णय के बाद वर्ग-1 के चयनित शिक्षकों की रुकी हुई पदस्थापना प्रक्रिया को भी तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। ऐसे में सोमवार से शुरू होने वाली वर्ग-3 की शाला आवंटन प्रक्रिया हजारों चयनित शिक्षकों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत लेकर आने वाली है।

  • भोपाल में बदमाश का पीछा कर रही पुलिस बाइक ने 8 साल की बच्ची को मारी टक्कर! सिर में चोट के बाद सिविल ड्रेस वाले जवानों को भीड़ ने घेरा

    भोपाल में बदमाश का पीछा कर रही पुलिस बाइक ने 8 साल की बच्ची को मारी टक्कर! सिर में चोट के बाद सिविल ड्रेस वाले जवानों को भीड़ ने घेरा


    भोपाल । भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र में शनिवार शाम बदमाश का पीछा कर रहे दो पुलिसकर्मियों की बाइक की चपेट में आने से आठ साल की बच्ची घायल हो गई। हादसा 11 नंबर इलाके में हुआ जहां गुंडा स्क्वाड के पुलिसकर्मी एक फरार आरोपी का पीछा कर रहे थे। टक्कर के बाद बच्ची सड़क पर गिर गई और उसके सिर में चोट लगने से खून निकलने लगा। बच्ची को घायल देखकर मौके पर मौजूद लोग आक्रोशित हो गए और सिविल ड्रेस में मौजूद दोनों पुलिसकर्मियों को घेर लिया। कुछ देर तक मौके पर झूमाझटकी की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान बताकर आईडी कार्ड दिखाया जिसके बाद लोगों को पता चला कि वे पुलिसकर्मी हैं और मामला शांत हुआ।

    पुलिस के मुताबिक कमला नगर थाने में संपत्ति हड़पने के मामले में एक आरोपी फरार चल रहा है। उसकी तलाश में गुंडा स्क्वाड की टीम लगातार जुटी हुई है। शनिवार शाम करीब छह बजे पुलिसकर्मी दीपक कटियार और बलराम बाइक से 11 नंबर इलाके में आरोपी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान आरोपी भी बाइक से भाग रहा था और दोनों पुलिसकर्मी उसका पीछा कर रहे थे। पीछा करने के दौरान अचानक आठ साल की बच्ची पुलिस बाइक के सामने आ गई। पुलिसकर्मी संभल पाते उससे पहले बाइक बच्ची से टकरा गई।

    हादसे में बच्ची सड़क पर गिर गई और उसके सिर में गंभीर चोट लगने से खून निकलने लगा। टक्कर के बाद जिस आरोपी का पुलिस पीछा कर रही थी वह मौके का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिसकर्मियों ने आरोपी का पीछा जारी रखने के बजाय तुरंत घायल बच्ची को संभाला। उन्होंने बच्ची की स्थिति देखी और आसपास के लोगों की मदद से उसे संभालने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलने के बाद डायल 112 की टीम भी मौके पर पहुंच गई। बच्ची को इलाज के लिए हजेला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार जारी है।

    हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि बाइक सवार दोनों व्यक्ति पुलिसकर्मी हैं। दोनों सिविल ड्रेस में थे और उनके पास पुलिस की वर्दी नहीं थी। बच्ची के घायल होने के बाद लोगों का गुस्सा दोनों पर फूट पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी अखिलेश गिनारे के मुताबिक लोगों ने दोनों को घेर लिया और उनके साथ झूमाझटकी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिसकर्मियों ने अपना परिचय दिया और पहचान पत्र दिखाया। इसके बाद लोगों को उनकी वास्तविक पहचान के बारे में जानकारी हुई और मौके पर तनाव कम हुआ।

    घटना में दोनों पुलिसकर्मियों को चोट नहीं आई है। वहीं घायल बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है। हबीबगंज थाना प्रभारी संजीव चौकसे के मुताबिक फिलहाल बच्ची के परिजनों की ओर से पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और परिजनों की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस के सामने एक तरफ फरार आरोपी को पकड़ने की चुनौती है तो दूसरी तरफ हादसे में घायल बच्ची की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि सिविल ड्रेस में किसी आरोपी का पीछा करते समय पुलिसकर्मियों को सड़क पर सुरक्षा और आम लोगों की मौजूदगी का कितना ध्यान रखना चाहिए। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट और पूरे घटनाक्रम के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

  • पसंद की शादी करना चाहती थी 17 साल की आयुषी, मां और मामा पर हत्या का आरोप! दुपट्टे से गला घोंटने का दावा

    पसंद की शादी करना चाहती थी 17 साल की आयुषी, मां और मामा पर हत्या का आरोप! दुपट्टे से गला घोंटने का दावा


    भोपाल । भोपाल के पिपलानी इलाके में 17 साल की नाबालिग आयुषी की संदिग्ध मौत के मामले ने सनसनी फैला दी है। पुलिस ने अब इस मामले में हत्या का केस दर्ज करते हुए मृतका की मां कमला और मामा विजय राय को गिरफ्तार किया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आयुषी अपनी पसंद के युवक से शादी करना चाहती थी जबकि उसकी मां बेटी की शादी अपनी पसंद के युवक से करवाना चाहती थी। शादी को लेकर मां और बेटी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद को पुलिस हत्या की संभावित वजह मानकर जांच कर रही है और मामले में ऑनर किलिंग के एंगल को भी खंगाला जा रहा है।

    पुलिस के मुताबिक आयुषी अपनी मां के साथ घरों में काम करती थी। परिवार में उसकी शादी को लेकर बातचीत चल रही थी लेकिन मां और बेटी की पसंद अलग थी। आयुषी अपनी पसंद के युवक से शादी करना चाहती थी जबकि उसकी मां चाहती थी कि बेटी उसकी पसंद के युवक से विवाह करे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच लगातार तनाव बना हुआ था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद किस तरह बढ़ा और घटना वाले दिन घर में वास्तव में क्या हुआ था।

    जांच के अनुसार 26 अगस्त को शादी की बात को लेकर घर में फिर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान कमला और उसके भाई विजय राय ने आयुषी का दुपट्टे से गला घोंट दिया। इसके बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस अभी घटना के पूरे क्रम और दोनों आरोपियों की वास्तविक भूमिका को लेकर विस्तृत जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में और कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं।

    आयुषी की मौत के बाद परिजन कथित तौर पर बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसके बाद मामले में अहम मोड़ 29 अगस्त की शाम आया जब पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हुई। रिपोर्ट में गला घोंटने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या की दिशा में आगे बढ़ाया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पिपलानी पुलिस ने रविवार तड़के आयुषी की मां कमला और मामा विजय राय के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। खासतौर पर शादी को लेकर चल रहे विवाद घटना से पहले की परिस्थितियों और अंतिम संस्कार की तैयारी के पीछे की वजहों को समझने की कोशिश की जा रही है।

    पुलिस की शुरुआती जांच में पसंद की शादी को लेकर परिवार में चल रहा विवाद हत्या की संभावित वजह के तौर पर सामने आया है। इसी कारण मामले में ऑनर किलिंग की आशंका को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हत्या की वास्तविक वजह और आरोपियों की भूमिका को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल नाबालिग की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पुलिस घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है।