Blog

  • रीवा-शहडोल समेत 11 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, पूर्वी एमपी में फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम

    रीवा-शहडोल समेत 11 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, पूर्वी एमपी में फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में एक बार फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया है। इसके असर से रविवार को कई जिलों में तेज बारिश हुई। शहडोल के बाणसागर डैम के गेट खोलने पड़े। सिंगरौली में तेज बारिश हुई, जबकि मंडला और चित्रकूट (सतना) में पहले से आई बाढ़ के बाद हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

    हालांकि नदियों का जलस्तर अब कुछ कम हुआ है, लेकिन बाढ़ से हुई तबाही के निशान अभी भी साफ दिखाई दे रहे हैं। कई इलाकों में देर रात तक बारिश होती रही। बाढ़ प्रभावित सतना में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है।

    आज 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने सोमवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट शामिल हैं।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सतना, सिंगरौली, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    CM मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे, बाढ़ प्रभावितों से मिले

    रविवार को चित्रकूट में मंदाकिनी नदी करीब 30 फीट उफान पर रही। गोरगी बांध फूटने से कई इलाकों में पानी भर गया। तेज बहाव में रामघाट का बड़ा पुल भी बह गया। घरों और सड़कों पर मिट्टी, कचरा और कीचड़ जमा हो गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। उन्होंने आश्रय स्थल में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और राहत सामग्री बांटी। मुख्यमंत्री ने चित्रकूट में अतिक्रमण को भी बाढ़ की संभावित वजह माना।

    बाणसागर डैम के 6 गेट खोले

    शहडोल का बाणसागर डैम भी लबालब हो चुका है। यहां पानी की आवक 808.64 क्यूमेक्स से बढ़कर 12 घंटे में 2677.29 क्यूमेक्स हो गई। पिछले साल की तुलना में इस बार डैम का जलस्तर 13 सेंटीमीटर अधिक है।

    रविवार दोपहर 12 बजे डैम के 6 गेट खोल दिए गए। इसके बाद निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

    अगले 3 दिन अति भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने सितंबर के शुरुआती तीन दिनों में भी कई जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सीधी, उमरिया, मंडला, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, दमोह, नरसिंहपुर और नर्मदापुरम समेत कई जिलों में 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है।

    प्रदेश के ज्यादातर बांधों में 70% से ज्यादा पानी

    लगातार बारिश से प्रदेश के बांधों की स्थिति में सुधार हुआ है। अधिकांश बांधों में 70% तक पानी आ चुका है। कुछ बांधों के गेट भी खोले जा चुके हैं। हालांकि इंदौर और उज्जैन संभाग के बांधों की स्थिति अभी बेहतर नहीं है।

    भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट तक पहुंच गया है। अब यह फुल टैंक लेवल से सिर्फ 0.30 फीट खाली है। बड़ा तालाब फुल होने के बाद भदभदा डैम के गेट खोले जाएंगे। यहां से छोड़ा गया पानी कलियासोत डैम में पहुंचेगा, जिससे उसका जलस्तर भी बढ़ेगा।

    अब तक 27.2 इंच बारिश, सामान्य से 3.2 इंच कम

    IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 700 मिमी यानी 27.2 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य बारिश 30.4 इंच (772.3 मिमी) की तुलना में यह करीब 3.2 इंच कम है। प्रदेश में ओवरऑल बारिश 9% कम है। पूर्वी हिस्से में 5% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम बारिश हुई है।

    39 जिलों में 1% से 50% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में 1% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी औसत से 1% से 51% तक कम पानी गिरा है।

    16 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के अनुसार अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी

    रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी


    नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती नफरत पूर्वाग्रह हिंसा और सामाजिक विभाजन के बीच न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यूनिवर्सल वननेस कार्यक्रम ने इंसानियत और आपसी एकता का मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम में यहूदी ईसाई और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित विभिन्न देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और लोगों से धार्मिक तथा सांस्कृतिक सीमाओं से ऊपर उठकर संवाद करुणा और सम्मान को बढ़ावा देने की अपील की। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और कई देशों के धार्मिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद मानवता सभी को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है।

    वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलीजियस लीडर्स के संस्थापक महासचिव बाबा जैन ने 30 देशों के प्रमुख धर्मों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया कॉल टू एक्शन पेश किया। उन्होंने कहा कि धर्म के भीतर लोगों को जोड़ने और उपचार तथा मेल-मिलाप की ताकत मौजूद है लेकिन इतिहास में कई बार धर्म का इस्तेमाल लोगों को बांटने और हिंसा को उचित ठहराने के लिए भी किया गया है। उन्होंने धार्मिक नेताओं से अपने समुदायों के शब्दों शिक्षाओं संस्थाओं और परंपराओं की समीक्षा करने का आह्वान किया ताकि किसी भी प्रकार की नफरत या हिंसा को धार्मिक आधार न मिल सके।

    बाबा जैन ने कहा कि धार्मिक समुदायों को नफरत अपमान अमानवीय व्यवहार और हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि गहरी धार्मिक आस्था और दूसरे विश्वासों के प्रति सम्मान एक साथ कायम रह सकते हैं। उन्होंने धार्मिक नेताओं से संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही अलग समुदायों के बीच मजबूत रिश्ते बनाने की अपील की। युवाओं को भी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से बाहर एक दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया गया। उनका मानना था कि जब लोग एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानने लगते हैं तो नफरत के लिए जगह कम होती जाती है।

    इमाम शरीफ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इसमें शामिल लोग यहां से लौटने के बाद अपने व्यवहार और समाज में क्या बदलाव लाते हैं। उन्होंने एकता को एकरूपता से अलग बताते हुए कहा कि लोगों को एक दूसरे से जुड़े रहने के लिए एक जैसा बनने की जरूरत नहीं है। अलग-अलग धार्मिक विश्वासों के बावजूद सम्मान और संवाद कायम रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीकी प्रगति के बावजूद इंसान के भीतर मौजूद नफरत पूर्वाग्रह अहंकार और समूहों में बंटने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हुई है।

    उन्होंने कहा कि आज नफरत सीमाओं के पार और हमारी स्क्रीन के माध्यम से पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रही है। ऐसे समय में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ इंसानियत के सामने मौजूद चुनौतियों को समझना जरूरी है। रेवरेंड थॉर्न ने भी लोगों से डर और नफरत के बजाय एक दूसरे को सुनने समझने और साथ आने का रास्ता चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि पद धर्म राजनीति और देशों की सीमाओं से पहले सभी लोग इंसान हैं।

    रब्बी ब्लुमेंथल ने यहूदी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर इंसान में ईश्वरीय अंश मौजूद है और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान तथा प्रेम का हकदार है। उन्होंने समाज में बढ़ते अकेलेपन को भी कई समस्याओं की एक बड़ी वजह बताया और लोगों से जुड़ाव प्रेम तथा सम्मान के रिश्ते मजबूत करने की अपील की।

    कार्यक्रम में रक्षा बंधन और राखी बांधने की परंपरा को विशेष रूप से देखभाल सुरक्षा और आपसी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। लोगों को संदेश दिया गया कि भाई बहन के रिश्ते तक सीमित इस भावना को पड़ोसियों अजनबियों और अलग-अलग धार्मिक समुदायों तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस तरह राखी को एक ऐसे मानवीय बंधन के रूप में पेश किया गया जो सुरक्षा और जिम्मेदारी की भावना के जरिए समाज में विश्वास और एकता को मजबूत कर सकता है।

  • क्लर्क से महान साहित्यकार बनने तक का सफर: कर्ण के दर्द को शब्द देकर शिवाजी सावंत ने रचा मृत्युंजय और कहलाए मृत्युंजयकार

    क्लर्क से महान साहित्यकार बनने तक का सफर: कर्ण के दर्द को शब्द देकर शिवाजी सावंत ने रचा मृत्युंजय और कहलाए मृत्युंजयकार


    नई दिल्ली। शिवाजी गोविंदराव सावंत का नाम मराठी साहित्य में उन रचनाकारों के बीच लिया जाता है जिन्होंने इतिहास और पौराणिक पात्रों को केवल कथाओं तक सीमित नहीं रखा बल्कि उनके भीतर छिपे संघर्ष संवेदनाओं और मानवीय पक्ष को अपनी लेखनी से जीवंत कर दिया। 31 अगस्त 1940 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के आजरा गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे शिवाजी सावंत का शुरुआती जीवन आर्थिक कठिनाइयों से भरा रहा। बचपन में मां से सुनी कथा कीर्तन और पौराणिक कहानियों ने उनके भीतर साहित्य के प्रति गहरी रुचि पैदा की। युवावस्था में वे कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ी रहे और उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत अदालत में एक साधारण क्लर्क के रूप में की।

    साहित्य के प्रति बढ़ती रुचि और पुस्तकालयों के करीब रहने की इच्छा उन्हें कोल्हापुर की राजाराम प्रशाला तक ले गई जहां उन्होंने 1962 से 1974 तक शिक्षक के रूप में काम किया। इसके बाद वे पुणे पहुंचे और महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग की पत्रिका लोकशिक्षण से जुड़े। पहले उन्होंने सह संपादक और बाद में संपादक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। लेकिन उनकी असली पहचान उस रचना से बनी जिसने उन्हें मराठी साहित्य में अमर कर दिया।

    उनका उपन्यास मृत्युंजय 1967 में प्रकाशित हुआ और देखते ही देखते साहित्य जगत में चर्चा का विषय बन गया। महाभारत के महान लेकिन उपेक्षित योद्धा कर्ण के जीवन पर आधारित इस उपन्यास को पूरा करने में शिवाजी सावंत ने सात वर्षों तक अथक मेहनत की। कर्ण के व्यक्तित्व को समझने की उनकी जिज्ञासा उस समय और गहरी हुई जब एफवाईबीए की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कवि केदारनाथ मिश्र प्रभात का हिंदी खंडकाव्य कर्ण पढ़ा। इसके बाद उन्होंने कर्ण के जीवन और कुरुक्षेत्र से जुड़े संदर्भों को गहराई से खंगालना शुरू किया।

    उनकी शोध और लेखन के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने कुरुक्षेत्र की यात्रा करने का फैसला किया तब उनकी जेब में केवल 50 रुपए थे। इसके बावजूद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को आड़े नहीं आने दिया और कुरुक्षेत्र पहुंचकर वहां की भौगोलिक परिस्थितियों को करीब से समझा। उस समय कोल्हापुर की एक पुलिस चॉल में बड़े भाई विश्वासराव के साथ रहते हुए वे इस रचना को लिख रहे थे और अपने लेखन को लंबे समय तक गुप्त रखा।

    मृत्युंजय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनोखी शैली रही। सावंत ने कहानी को केवल कर्ण की नजर से नहीं देखा बल्कि कर्ण के साथ कुंती दुर्योधन वृषाली शोण और श्रीकृष्ण के दृष्टिकोण को भी शामिल किया। अलग अलग पात्रों के स्वगत कथनों के जरिए उन्होंने कर्ण के व्यक्तित्व के कई आयाम सामने रखे। इस रचना में भाग्य और स्वतंत्र इच्छा के बीच संघर्ष के साथ कर्ण की पीड़ा उसकी महत्वाकांक्षा उसकी वफादारी और उसके भीतर चलने वाला द्वंद्व बेहद प्रभावशाली तरीके से सामने आता है। इसी अद्भुत कृति ने शिवाजी सावंत को मृत्युंजयकार की उपाधि दिलाई।

    हालांकि उनकी साहित्यिक यात्रा केवल पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं रही। वर्ष 1980 में प्रकाशित छावा में उन्होंने छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन और संघर्ष को केंद्र में रखा। इस रचना ने मराठा इतिहास के एक वीर योद्धा के मानवीय पक्ष को पाठकों के सामने रखा। बाद में इसी कथा पर आधारित हिंदी फिल्म भी बनी जिसने व्यापक व्यावसायिक सफलता हासिल की। वर्ष 2000 में प्रकाशित युगंधर में उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को एक अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया और उनके व्यक्तित्व में रणनीतिक सोच के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी उभारा।

    मराठी साहित्य में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। वर्ष 1994 में उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ के प्रतिष्ठित मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया और वे यह सम्मान पाने वाले पहले मराठी लेखक बने। उनकी रचनाओं का कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ। परिवार की ओर से पत्नी मृणालिनी पुत्र अमिताभ और पुत्री कादंबिनी ने भी उनकी साहित्यिक यात्रा को मजबूती दी।

    18 सितंबर 2002 को गोवा में 76वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष पद के लिए प्रचार के दौरान हृदय गति रुकने से शिवाजी सावंत का आकस्मिक निधन हो गया। लेकिन उनकी रचनाएं आज भी पाठकों के बीच जीवित हैं। मृत्युंजय ने उन्हें केवल एक महान लेखक नहीं बनाया बल्कि कर्ण की पीड़ा और संघर्ष को पीढ़ियों तक पहुंचाने वाला वह साहित्यकार बना दिया जिसे दुनिया मृत्युंजयकार के नाम से याद करती है।

  • पुरानी गलियों से स्मार्ट रोड तक बदला लखनऊ! सीएम योगी बोले- विरासत और आधुनिकता का अनोखा संगम

    पुरानी गलियों से स्मार्ट रोड तक बदला लखनऊ! सीएम योगी बोले- विरासत और आधुनिकता का अनोखा संगम


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को विकास की नई सौगात देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ छावनी को मॉडल छावनी के रूप में विकसित करने की दिशा में 101 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सुरक्षा सुशासन और विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज प्रदेश देश के ग्रोथ इंजन के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है और लखनऊ इसका प्रमुख उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री ने लखनऊ के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि करीब दो दशक पहले रेलवे स्टेशन पर मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं का संदेश दिखाई देता था लेकिन शहर की जाम से भरी सड़कों संकरी गलियों और अव्यवस्थित हालात के कारण लोगों के लिए मुस्कुराना मुश्किल होता था। आज वही लखनऊ अपनी ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक और स्मार्ट शहर के रूप में आगे बढ़ रहा है। शहर में पुरानी गलियों के साथ स्मार्ट रोड और सीएम ग्रिड की आधुनिक सड़कें हैं तो दूसरी ओर किसान पथ जैसे बड़े आउटर रिंग रोड भी यातायात को नई दिशा दे रहे हैं।

    सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ की खासियत उसकी विरासत और आधुनिकता का अनोखा मेल है। एक ओर ऊदा देवी पासी और महाराजा बिजली पासी जैसी महान विभूतियों का इतिहास शहर की पहचान से जुड़ा है तो दूसरी ओर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों के निर्माण का केंद्र भी लखनऊ बन रहा है। उन्होंने कहा कि चिकनकारी हस्तशिल्प खानपान और सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध लखनऊ अब आधुनिक बुनियादी ढांचे के कारण भी अपनी अलग पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से लखनऊ छावनी में भी आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। छावनी परिषद में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए एआई आधारित व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके साथ ही छावनी क्षेत्र के स्कूलों में मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग जैसी पहल शुरू की जा रही है। इन प्रयासों का सीधा लाभ सैन्यकर्मियों पूर्व सैनिकों उनके परिवारों और छावनी क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों को मिलेगा।

    गोमती नदी की सफाई का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक गोमती को पूरी तरह स्वच्छ बनाने में सफलता मिलेगी। उन्होंने इस अभियान में सेंट्रल कमांड की ओर से मिल रहे सहयोग की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का संकट था और प्रदेश अभाव अराजकता तथा उपद्रव की स्थिति से गुजर रहा था लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर एक्सप्रेसवे रेलवे मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लखनऊ मेट्रो के दूसरे चरण को केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद इसके काम को भी जल्द गति दी जाएगी। प्रदेश में वर्तमान में 17 घरेलू और पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट संचालित हैं। वहीं सैनिक स्कूलों के माध्यम से युवाओं को देश की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

    सीएम योगी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में सैनिक चौबीसों घंटे डटे रहते हैं इसलिए सैनिकों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छावनी परिषदों में विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। लखनऊ छावनी को आदर्श और मॉडल छावनी बनाने के लिए सड़क स्वच्छता शिक्षा कचरा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लखनऊ आज अपनी ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है और बदलते उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

  • विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह

    विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह


    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज को पूरी दुनिया गंभीरता से सुनती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत और मजबूत होते कद का स्पष्ट प्रमाण है। लखनऊ छावनी परिषद में करीब 101 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 विकास परियोजनाओं के भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं को केवल निर्माण कार्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि ये लखनऊ छावनी के बेहतर भविष्य के लिए सरकार के 12 संकल्प हैं।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल बड़े प्रोजेक्ट बनाने और आधुनिक इमारतें खड़ी करने से पूरा नहीं होगा। वास्तविक विकास तब माना जाएगा जब प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले युवाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मानजनक सुविधाएं हासिल हों। उन्होंने कहा कि विकास की रोशनी केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि हर मोहल्ले हर बस्ती और हर परिवार तक इसका लाभ पहुंचना चाहिए।

    भारत की वैश्विक स्थिति में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि करीब 10 से 12 वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भारत अपनी बात रखता था तो उसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था जितनी भारत की क्षमता और भूमिका को मिलनी चाहिए थी। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखता है तो पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है कि भारत क्या कह रहा है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का परिणाम बताया।

    उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब यह भी है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलें। खेलकूद के क्षेत्र में आगे बढ़ने की सुविधाएं हों और दिव्यांग बच्चों को भी समाज की मुख्यधारा में बराबरी का स्थान मिले। राजनाथ सिंह ने कहा कि समय के साथ शहरों की जरूरतें बदलती हैं इसलिए विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए नियमों में भी बदलाव आवश्यक है।

    इसी दिशा में लखनऊ छावनी क्षेत्र में नए बिल्डिंग बायलॉज लागू किए गए हैं। पहले यहां जी प्लस-2 तक निर्माण की अनुमति थी जिसे बढ़ाकर जी प्लस-3 किया गया है। पार्किंग को शामिल करने पर अब पांच मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लखनऊ छावनी को उसकी ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है ताकि क्षेत्र का विकास तेज गति से हो सके।

    रक्षा मंत्री ने छावनी क्षेत्र में कई बाजारों के नाम बदले जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नामों में बदलाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि इसके पीछे नई पीढ़ी को देश के इतिहास और महान विभूतियों से जोड़ने की भावना है। रॉयल आर्टिलरी बाजार का नाम एकता बाजार ब्रिटिश कैवलरी बाजार का नाम वीरांगना ऊदा देवी बाजार और ब्रिटिश इन्फैंट्री बाजार का नाम माता दीन वाल्मीकि बाजार किया गया है। एक अन्य बाजार का नाम मंगल पांडे बाजार जबकि कैनेडी मार्केट का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मार्केट रखा गया है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि इन बदलावों के जरिए स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रसेवा और सामाजिक चेतना से जुड़े महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लखनऊ और उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर जलापूर्ति शिक्षा खेलकूद बाढ़ नियंत्रण और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि लखनऊ छावनी में सैन्यकर्मियों पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के साथ आधुनिक विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • NEET-PG 2026 परीक्षा देशभर में संपन्न! 2.65 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, जयपुर के 2445 उम्मीदवारों को फिर मिलेगा मौका

    NEET-PG 2026 परीक्षा देशभर में संपन्न! 2.65 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, जयपुर के 2445 उम्मीदवारों को फिर मिलेगा मौका


    नई दिल्ली। देशभर में रविवार को नीट-पीजी 2026 की परीक्षा निर्धारित व्यवस्था के तहत संपन्न हो गई। मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा के लिए कुल 2 लाख 73 हजार 096 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था जिनमें से 2 लाख 65 हजार 980 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। इनमें करीब 2 लाख 63 हजार 535 अभ्यर्थियों की परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हो गई। परीक्षा का आयोजन देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 339 शहरों में बनाए गए 1111 परीक्षा केंद्रों पर किया गया। हालांकि जयपुर के दो परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या के कारण 2445 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी नहीं हो सकी। इन सभी प्रभावित उम्मीदवारों के लिए अब 5 सितंबर 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी।

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक नीट-पीजी परीक्षा को निष्पक्ष सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए व्यापक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू की गई थी। देशभर के परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर लगातार रियल टाइम निगरानी रखी गई। परीक्षा संचालन की निगरानी और मूल्यांकन के लिए 2527 संकाय सदस्यों को स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता के रूप में तैनात किया गया था। इसके साथ ही डीन निदेशक चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ प्रोफेसरों सहित 700 से अधिक वरिष्ठ संकाय सदस्यों को फ्लाइंग स्क्वायड में शामिल किया गया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को तत्काल पकड़ना और परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना था।

    राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड के अनुसार जयपुर के आईऑन डिजिटल जोन आईडीजेड सीतापुरा स्थित परीक्षा केंद्र संख्या 41682 और 41683 पर आंतरिक बिजली आपूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई। बिजली व्यवस्था में आई इस परेशानी के चलते इन दोनों केंद्रों पर परीक्षा दे रहे 2445 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी नहीं हो पाई। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह समस्या परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीसीएस लिमिटेड की आंतरिक बिजली आपूर्ति व्यवस्था से संबंधित थी। प्रभावित उम्मीदवारों को किसी तरह का नुकसान न हो इसलिए बोर्ड ने उन्हें दोबारा परीक्षा देने का समान अवसर देने का फैसला किया है।

    जयपुर के दोनों प्रभावित केंद्रों के सभी 2445 अभ्यर्थियों के लिए पुनर्परीक्षा 5 सितंबर 2026 शनिवार को दोपहर 3 बजे जयपुर में आयोजित की जाएगी। पुनर्परीक्षा के केंद्र और अन्य आवश्यक दिशा निर्देश संबंधित अभ्यर्थियों को अलग से उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे प्रभावित उम्मीदवारों को अपनी परीक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा और तकनीकी समस्या के कारण उनके मेडिकल करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देशभर में 16 क्षेत्रीय कमान केंद्र सक्रिय किए गए थे। सभी परीक्षा केंद्रों को लाइव सीसीटीवी निगरानी से जोड़ा गया था जिसकी निगरानी द्वारका स्थित राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड के मुख्यालय में बनाए गए कमान केंद्र से की गई। रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए बोर्ड और टीसीएस के 190 कर्मचारियों की विशेष टीम भी तैनात रही। मुख्यालय में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और टीसीएस समेत संबंधित संस्थाओं के अधिकारी पूरे दिन परीक्षा की स्थिति पर नजर रखते रहे।

    नकल और दूसरे उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने जैसी संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए अभ्यर्थियों का आधार आधारित प्रमाणीकरण भी किया गया। विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने भी परीक्षा के सुरक्षित संचालन में सहयोग दिया। बोर्ड ने कहा कि देशभर के 1111 केंद्रों और 339 शहरों में परीक्षा का सफल आयोजन परीक्षा अधिकारियों चिकित्सा संस्थानों संकाय सदस्यों सुरक्षा एजेंसियों तकनीकी टीमों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम रहा। कुल मिलाकर नीट-पीजी 2026 की परीक्षा व्यापक सुरक्षा निगरानी और तकनीकी व्यवस्था के बीच संपन्न हुई जबकि जयपुर के प्रभावित 2445 अभ्यर्थियों को अब 5 सितंबर को परीक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा।

  • महुआ और तेंदू पत्ते बेचने से इको-टूरिज्म तक का सफर, मैथिली भुए की कहानी ने जीता पीएम मोदी का ध्यान; 50 महिलाओं को ट्रेनिंग

    महुआ और तेंदू पत्ते बेचने से इको-टूरिज्म तक का सफर, मैथिली भुए की कहानी ने जीता पीएम मोदी का ध्यान; 50 महिलाओं को ट्रेनिंग


    नई दिल्ली। ओडिशा के संबलपुर जिले के देबरीगढ़ की रहने वाली मैथिली भुए की मेहनत और हौसले को अब देशभर में पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 137वें एपिसोड में मैथिली भुए के काम का जिक्र करते हुए उनकी सराहना की। इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने जंगलों के संरक्षण में योगदान देने और स्थानीय महिलाओं को रोजगार से जोड़ने वाली मैथिली के लिए यह पल बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री की ओर से अपने काम की तारीफ किए जाने पर उन्होंने खुशी जाहिर की और इसे उनके जैसे ग्रामीण क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा बताया।

    मैथिली भुए की कहानी आसान नहीं रही है। वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आती हैं और लंबे समय तक जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर रही हैं। तेंदू के पत्ते बांस महुआ कराडी और जलाऊ लकड़ी जैसे वन उत्पादों को इकट्ठा कर उन्हें बेचकर वह अपने परिवार का गुजारा करती थीं। सीमित संसाधनों के बीच जीवन आगे बढ़ रहा था लेकिन 2023 में देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी को एक नई दिशा मिली।

    इको-टूरिज्म ने न केवल मैथिली को रोजगार का नया जरिया दिया बल्कि उन्हें अपने आसपास की दूसरी महिलाओं के लिए भी अवसर पैदा करने की प्रेरणा दी। धीरे धीरे क्षेत्र की महिलाएं इस पहल से जुड़ने लगीं और अब मैथिली करीब 40 से 50 महिलाओं को इको-टूरिज्म तथा हॉस्पिटैलिटी से जुड़े अलग अलग कामों की ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को नौकरी दिलाना नहीं बल्कि उन्हें इतना सक्षम बनाना है कि वे अपने दम पर बेहतर आजीविका हासिल कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।

    मैथिली के मार्गदर्शन में महिलाएं पर्यटकों के साथ व्यवहार करने उनकी जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर सेवाएं देने की ट्रेनिंग ले रही हैं। देबरीगढ़ में इको-टूरिज्म से जुड़े कई क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इनमें स्मारिका की दुकानें चाय की दुकानें रेस्तरां नेचर कैंप और होमस्टे जैसे काम शामिल हैं। महिलाओं को उनकी जिम्मेदारी और काम की प्रकृति के अनुसार अलग अलग प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे पर्यटकों को बेहतर अनुभव दे सकें।

    मैथिली का मानना है कि पर्यटन के साथ स्थानीय समुदाय को जोड़ना क्षेत्र के विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है। जब स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिलता है तो उन्हें बेहतर आय का अवसर मिलता है और साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना भी मजबूत होती है। खास तौर पर महिलाओं के लिए इको-टूरिज्म आत्मनिर्भर बनने का प्रभावी रास्ता साबित हो सकता है।

    मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नाम लिए जाने के बाद मैथिली की कहानी को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रयासों को पहचान मिलना बेहद खुशी की बात है। मैथिली चाहती हैं कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएं इको-टूरिज्म से जुड़ें और अपनी आजीविका का मजबूत आधार तैयार करें।

    उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि बदलाव के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। स्थानीय अवसरों की पहचान मेहनत और दूसरों को साथ लेकर आगे बढ़ने की इच्छा किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है। जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर निर्भर रहने वाली मैथिली भुए आज उसी प्राकृतिक विरासत को बचाने और उसके जरिए महिलाओं को रोजगार देने की मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं। मन की बात में मिली पहचान उनके इस सफर को नई ऊर्जा देने के साथ देबरीगढ़ के इको-टूरिज्म मॉडल को भी देश के सामने एक प्रेरक उदाहरण के रूप में पेश करती है।

  • उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी

    उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया सर्वोच्च सम्मान, भारत के साथ रिश्तों को मिला नया मुकाम; अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी


    नई दिल्ली। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों ने रविवार को एक नई ऊंचाई हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताशकंद में ऐलान किया कि दोनों देशों के बीच संबंध अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ओली दराजली दोस्तलिक से सम्मानित किए जाने के बाद यह घोषणा की गई। इस मौके पर पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की भावना की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं और अब यह साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध केवल आधुनिक कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा विरासत जुड़ी हुई है। उन्होंने उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर गर्व व्यक्त करते हुए इसे व्यक्तिगत सम्मान के बजाय भारत के 140 करोड़ लोगों का सम्मान बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोस्तलिक का अर्थ दोस्ती है और यही शब्द भारत तथा उज्बेकिस्तान के रिश्तों की वास्तविक भावना को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है।

    पीएम मोदी ने सम्मान को स्वीकार करते हुए उज्बेकिस्तान की जनता सरकार और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों की ऐतिहासिक दोस्ती और साझा विरासत को समर्पित है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।

    भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का नया स्तर दोनों देशों के लिए आर्थिक कूटनीतिक सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान की अहम भौगोलिक और रणनीतिक स्थिति है और भारत के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत संबंध लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों को नई श्रेणी मिलना भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर भारत की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी मित्रता को हमेशा मजबूत बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूती से आगे बढ़ाता रहेगा।

    पीएम मोदी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी को ग्लोबल साउथ के व्यापक हितों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बनने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों का प्रयास होगा कि ग्लोबल साउथ के लोगों के कल्याण और पूरी मानवता के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम किया जाए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सम्मान अपने साथ जिम्मेदारी लेकर आता है। उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती से उन्होंने दोनों देशों की दोस्ती को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों का व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलना इसी निरंतर सहयोग का परिणाम है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक रणनीतिक जरूरतों से जोड़ते हुए यह साझेदारी आने वाले समय में द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

  • 18 हजार की बेसिक सैलरी सीधे 72 हजार! 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर तेज हुई हलचल, जानिए किस प्रस्ताव से कितना बढ़ेगा वेतन

    18 हजार की बेसिक सैलरी सीधे 72 हजार! 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर तेज हुई हलचल, जानिए किस प्रस्ताव से कितना बढ़ेगा वेतन


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर अब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई है। आयोग के गठन के बाद जैसे जैसे परामर्श की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है वैसे वैसे कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। यही वह गुणांक है जिसके आधार पर मौजूदा मूल वेतन को संशोधित कर नया बेसिक वेतन तय किया जाता है। इस समय केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18 हजार रुपए है और अब अलग अलग कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.61 से 4 तक किए जाने की मांग सामने आई है। अगर इन प्रस्तावों में से किसी को मंजूरी मिलती है तो न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

    मौजूदा वेतन व्यवस्था को देखें तो 6वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 था जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 किया गया था। इसी बदलाव के बाद न्यूनतम मूल वेतन 7 हजार रुपए से बढ़कर 18 हजार रुपए हो गया था। अब 8वें वेतन आयोग के सामने इससे कहीं ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी गई है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखते हुए नए वेतन ढांचे में कर्मचारियों को पर्याप्त राहत दी जाए।

    सर्वे ऑफ इंडिया की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा है। यदि इस प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है तो 18 हजार रुपए की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 64 हजार 980 रुपए यानी करीब 65 हजार रुपए हो सकती है। इसका मतलब है कि मौजूदा न्यूनतम बेसिक वेतन की तुलना में कर्मचारियों को काफी बड़ा उछाल मिल सकता है। हालांकि यह केवल प्रस्ताव के आधार पर निकाला गया अनुमान है और इसे अंतिम वेतन नहीं माना जा सकता।

    वहीं नेशनल काउंसिल जेसीएम स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज की ओर से 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। इस हिसाब से 18 हजार रुपए की बेसिक सैलरी लगभग 69 हजार रुपए तक पहुंच सकती है। अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो कर्मचारियों के साथ पेंशनभोगियों को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना बन सकती है क्योंकि पेंशन और कई सेवानिवृत्ति लाभ मूल वेतन से जुड़े होते हैं।

    सबसे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ की ओर से की गई है। संगठन ने 4 फिटमेंट फैक्टर का सुझाव दिया है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो 18 हजार रुपए का न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर करीब 72 हजार रुपए हो सकता है। यानी 3.61 और 4 के फिटमेंट फैक्टर वाले प्रस्तावों के बीच न्यूनतम बेसिक सैलरी में लगभग 7 हजार 20 रुपए का अंतर बन सकता है।

    हालांकि कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि 65 हजार 69 हजार और 72 हजार रुपए के आंकड़े अभी केवल अलग अलग संगठनों की मांगों के आधार पर लगाए गए अनुमान हैं। 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश आने से पहले यह तय नहीं माना जा सकता कि कर्मचारियों का वास्तविक न्यूनतम वेतन कितना होगा। अंतिम वेतन वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर से तय नहीं होगी बल्कि नए वेतन मैट्रिक्स महंगाई भत्ते अन्य भत्तों और आयोग की व्यापक सिफारिशों का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान होगा।

    फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों की मांगों और सुझावों पर विचार का दौर जारी है। आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति सेवानिवृत्त रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं और उसे अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अभी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करना होगा। आयोग की सिफारिशें सामने आने और सरकार की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में वास्तव में कितना इजाफा होता है।

  • भारत-चिली की आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान, साल के अंत तक व्यापार समझौता पूरा करने का लक्ष्य; कई सेक्टरों में बढ़ेंगे अवसर

    भारत-चिली की आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई उड़ान, साल के अंत तक व्यापार समझौता पूरा करने का लक्ष्य; कई सेक्टरों में बढ़ेंगे अवसर


    नई दिल्ली। भारत और चिली के बीच आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में बातचीत तेज हो गई है। दोनों देश व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी सीईपीए को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और सरकार को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इस अहम व्यापार समझौते को पूरा किया जा सकता है। प्रस्तावित समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाना तथा कारोबारियों के लिए बाजार तक पहुंच को आसान बनाना है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के मुताबिक भारत और चिली के बीच आर्थिक सहयोग को विस्तार देने के लिए उच्च स्तर पर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष एक संतुलित तथा आपसी फायदे वाले समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इसी सिलसिले में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 26 अगस्त को चिली की राजधानी सैंटियागो में चिली की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की उपाध्यक्ष पाउला एस्टेवेज वेनस्टीन से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों ने सीईपीए वार्ता को तेजी से आगे बढ़ाने और ऐसा समझौता तैयार करने पर जोर दिया जिससे दोनों देशों के कारोबारियों और आम लोगों को वास्तविक आर्थिक लाभ मिल सके। भारत ने बातचीत के दौरान खुले लगातार और संतुलित दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों देश ग्लोबल साउथ का हिस्सा होने के कारण कई साझा आर्थिक और रणनीतिक हित रखते हैं और इन्हीं समानताओं को द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    प्रस्तावित समझौते के जरिए भारत और चिली के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने के साथ निवेश के नए रास्ते खोलने की उम्मीद है। खास तौर पर हेल्थकेयर फार्मास्यूटिकल्स ऊर्जा खनिज कृषि मशीनरी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं। इन क्षेत्रों में दोनों देशों की जरूरतों और क्षमताओं को जोड़कर कारोबार का दायरा बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा तकनीक टैलेंट और मजबूत सप्लाई चेन के निर्माण में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है।

    भारत की कोशिश है कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित न रहे बल्कि दोनों देशों के उद्योगों के लिए व्यावसायिक रूप से सार्थक अवसर भी तैयार करे। बेहतर बाजार पहुंच मिलने से भारतीय कंपनियों को चिली में अपने उत्पाद और सेवाएं विस्तार देने का मौका मिल सकता है जबकि चिली की कंपनियों के लिए भी भारत जैसे बड़े बाजार में संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे निवेश के साथ साथ दोनों देशों के बीच कारोबारी संबंधों को भी नई गति मिल सकती है।

    सरकार का मानना है कि सीईपीए के सफल समापन से भारत और चिली के बीच पहले से बढ़ रहे आर्थिक रिश्तों को और मजबूत आधार मिलेगा। वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में लगातार बदलाव के बीच दोनों देशों के लिए नए कारोबारी साझेदार और भरोसेमंद आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण हो गए हैं। ऐसे में प्रस्तावित समझौता व्यापारिक अवसरों के साथ रणनीतिक महत्व भी रखता है।

    भारत ने 2026 तक सीईपीए वार्ता पूरी करने का लक्ष्य रखा है। अब दोनों पक्षों की कोशिश बातचीत के शेष मुद्दों को तेजी से सुलझाकर एक ऐसा संतुलित समझौता तैयार करने की है जिससे दोनों देशों के कारोबारियों को समान और ठोस लाभ मिल सके। यदि वार्ता तय समयसीमा के भीतर पूरी होती है तो भारत और चिली के आर्थिक संबंधों में यह समझौता एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है और आने वाले वर्षों में व्यापार निवेश तथा तकनीकी सहयोग के लिए नए दरवाजे खोल सकता है।