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  • सोनाक्षी सिन्हा के बाद अब मोहनलाल भी पहुंचे अदालत; डिजिटल युग में सितारों की साख बचाने के लिए हाईकोर्ट ने कसी कमर!

    सोनाक्षी सिन्हा के बाद अब मोहनलाल भी पहुंचे अदालत; डिजिटल युग में सितारों की साख बचाने के लिए हाईकोर्ट ने कसी कमर!

    नई दिल्ली:  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के बढ़ते दुरुपयोग और डीपफेक तकनीक के खतरों के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा की गरिमा और उनके व्यक्तित्व अधिकारों Personality Rights की सुरक्षा के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सोनाक्षी सिन्हा की अनुमति के बिना उनके नाम, आवाज, चेहरे या उनके व्यक्तित्व से जुड़े किसी भी गुण का व्यावसायिक या किसी अन्य उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यह फैसला उन एआई प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन वेबसाइटों के लिए एक कड़ी चेतावनी है, जो बिना सहमति के मशहूर हस्तियों की छवि का इस्तेमाल कर रहे थे।

    जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए पाया कि कुछ अराजक तत्व एआई टूल्स का दुरुपयोग कर अभिनेत्री की अश्लील और आपत्तिजनक तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर रहे हैं। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि इस तरह के कंटेंट से न केवल अभिनेत्री की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है, बल्कि यह उनकी निजता का भी गंभीर उल्लंघन है। इसी के मद्देनजर, कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि अभिनेत्री से जुड़े ऐसे सभी पहचाने गए आपत्तिजनक यूआरएल URLs को आदेश मिलने के मात्र 36 घंटों के भीतर इंटरनेट से पूरी तरह हटा दिया जाए।

    सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी याचिका में कई प्रतिवादियों को नामित किया था, जिनमें अमेरिका स्थित एआई चैटबॉट प्लेटफॉर्म और विभिन्न ई-कॉमर्स वेबसाइटें शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि ये संस्थाएं ‘जॉन डो’ अज्ञात संस्थाओं के साथ मिलकर अभिनेत्री की आवाज और रूप का गलत तरीके से शोषण कर अनुचित व्यावसायिक लाभ कमा रही हैं। कोर्ट ने माना कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है और उसकी सहमति के बिना इसका उपयोग करना गैर-कानूनी है।

    दिलचस्प बात यह है कि सोनाक्षी सिन्हा का यह मामला फिल्म जगत में एक बड़ी मुहिम की शुरुआत माना जा रहा है। इसी कड़ी में, दिग्गज मलयालम अभिनेता मोहनलाल ने भी अपने पहचान अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने भी अपनी अर्जी में मांग की है कि उनकी फोटो और आवाज का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना कमाई के लिए न किया जाए। इस मामले पर भी जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ मंगलवार को सुनवाई कर सकती है। डिजिटल दौर में कलाकारों की सुरक्षा के लिहाज से ये कानूनी कदम मील का पत्थर साबित होंगे।

  • सच्ची घटनाओं पर आधारित वो 10 फिल्में, जिन्होंने जासूसी की दुनिया का असली चेहरा दिखाया; 'टिंकर टेलर सोल्जर स्पाई' ने तोड़े सारे रिकॉर्ड!

    सच्ची घटनाओं पर आधारित वो 10 फिल्में, जिन्होंने जासूसी की दुनिया का असली चेहरा दिखाया; 'टिंकर टेलर सोल्जर स्पाई' ने तोड़े सारे रिकॉर्ड!


    नई दिल्ली:  आजकल बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर-2’ को लेकर जो दीवानगी देखी जा रही है, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दर्शक अब केवल हवाई एक्शन नहीं, बल्कि कहानी में सच्चाई और ऑथेन्टिसिटी तलाश रहे हैं। भारत में ‘पठान’ और ‘टाइगर’ जैसी फिल्मों ने एक माहौल जरूर बनाया, लेकिन ‘धुरंधर’ की सीरीज ने जासूसी के उस पहलू को छुआ है जिसे लोग हकीकत के करीब मान रहे हैं। इसी कड़ी में, अगर हम विश्व सिनेमा पर नजर डालें, तो कुछ ऐसी फिल्में हैं जिन्होंने जासूसी की दुनिया को इतनी बारीकी से दिखाया है कि खुद रिटायर्ड जासूसों ने भी उनकी सराहना की है। आइए जानते हैं दुनिया की उन 10 फिल्मों के बारे में जो जासूसी के रोमांच और उसकी पेचीदगियों को बेहतरीन ढंग से पेश करती हैं।

    इस लिस्ट की शुरुआत होती है ‘आर्गो’ से, जो 1979 के ईरान संकट के दौरान छह अमेरिकियों को बचाने की एक अविश्वसनीय लेकिन सच्ची सीआईए कहानी है। वहीं, रॉबर्ट डी नीरो की ‘द गुड शेफर्ड’ सीआईए के शुरुआती दिनों के संघर्ष को एक व्यक्ति के नजरिए से बेहद संजीदगी के साथ दिखाती है। जासूसी के मानवीय और राजनीतिक बोझ को समझना हो, तो 2006 की जर्मन फिल्म ‘द लाइव्स ऑफ अदर्स’ से बेहतर कुछ नहीं हो सकता, जहाँ एक एजेंट की निगरानी में एक लेखक की पूरी जिंदगी बदल जाती है।

    आज की ग्लोबल पॉलिटिक्स और तेल के खेल को समझने के लिए ‘सीरियाना’ एक अनिवार्य फिल्म है, जो दिखाती है कि कैसे खुफिया विभाग की एक छोटी सी हरकत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला सकती है। वहीं, ‘ब्रीच’ फिल्म एफबीआई के भीतर छिपे एक गद्दार और उसे पकड़ने के लिए चल रही साइकोलॉजिकल जंग की सच्ची दास्तां है। क्लासिक सिनेमा की बात करें, तो ‘आर्मी ऑफ शैडोज’ नाजी कब्जे के दौरान जासूसों द्वारा झेले गए टॉर्चर और उनके बलिदान की रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर पेश करती है।

    अगर आपको ‘धुरंधर’ का यथार्थ पसंद आया है, तो ‘द स्पाई हू केम इन फ्रॉम द कोल्ड’ और टॉम हैंक्स की ‘ब्रिज ऑफ स्पाइज’ आपको जरूर देखनी चाहिए। ये फिल्में दिखाती हैं कि जासूसी केवल बंदूक चलाना नहीं, बल्कि वकीलों और एजेंटों के बीच होने वाली शतरंज की चालें भी हैं। ‘ए मोस्ट वांटेड मैन’ अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और धीमी रफ्तार के सस्पेंस का बेहतरीन मेल है।

    लेकिन, इस सूची में सबसे ऊपर जिस फिल्म का नाम आता है, वह है ‘टिंकर टेलर सोल्जर स्पाई’। इस फिल्म में कोई फालतू का मसाला या गैर-जरूरी एक्शन नहीं है। यह पूरी तरह से खुफिया एजेंसी के भीतर छिपे एक ‘मोहरे’ सोवियत जासूस को ढूंढने की दिमागी कसरत है। इसकी बारीकियों और जासूसी के सटीक चित्रण की वजह से खुद असली जासूसों ने इसे हकीकत के सबसे करीब बताया है। यह फिल्म जासूसी के उस बोरियत भरे लेकिन बेहद तनावपूर्ण हिस्से को दिखाती है, जो आम तौर पर फिल्मों में नहीं दिखता।

  • बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?

    बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) संसद (Parliament) के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण (Women’s Reservation) को लागू करने के लिए कम से कम दो विधेयक (Bills) (संविधान संशोधन सहित) पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अगले लोकसभा (Lok Sabha) और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएंगी। इस कदम से देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदलने की उम्मीद है।


    लोकसभा की सीटों में 50% का इजाफा

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की योजना के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। यानी 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से अधिकांश महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे संसद में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 409 हो जाएगा।

    यह वृद्धि पिछले पांच दशकों में पहली बार होगी। इससे मौजूदा पुरुष सांसदों की राजनीतिक स्थिति पर कोई खतरा नहीं मंडराएगा। राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों की सदस्य संख्या पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।


    परिसीमन और 2011 की जनगणना का इस्तेमाल

    2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महिला आरक्षण को नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। अब सरकार इस प्रावधान को अलग कर रही है। नई जनगणना के आंकड़ों में समय लग सकता है, इसलिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने पर विचार कर रही है ताकि 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में यह कोटा लागू किया जा सके।


    राज्यों और SC/ST सीटों पर असर

    दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता थी कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण संसद में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर राज्य की सीटों में 50% की वृद्धि होगी, जिससे उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा।
    उत्तर प्रदेश: सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
    बिहार: सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी।
    केरल: सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी।

    इसी अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) की सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 47 से बढ़कर 70 हो जाने का अनुमान है। छोटे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (जहां केवल 1 या 2 सीटें हैं) में हर तीसरे चुनाव में महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर सीट आरक्षित की जाएगी।


    राजनीतिक सरगर्मी और आगे की राह

    सरकार 4 अप्रैल को समाप्त हो रहे बजट सत्र में ही इन विधेयकों को पारित कराने की इच्छुक है। यदि सहमति बनाने में कुछ और दिन लगते हैं, तो बजट सत्र को बढ़ाया जा सकता है या महिलाओं के कोटे के लिए एक विशेष छोटा सत्र भी बुलाया जा सकता है।


    अमित शाह की बैठकें

    संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो NDA के पास अकेले नहीं है। इसलिए गृह मंत्री अमित शाह समर्थन जुटाने के लिए बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने NDA के सहयोगियों के साथ-साथ सपा, शिवसेना (UBT), बीजेडी और YSR कांग्रेस जैसे विपक्षी और गैर-गठबंधन दलों के साथ भी चर्चा की है।

    कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अमित शाह की बैठक से किनारा कर लिया। वहीं, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां महिला कोटे के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से आरक्षण की मांग कर रही हैं।

  • PAK: PM शहबाज शरीफ ने की ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात… पश्चिम एशिया तनाव पर जताई चिंता

    PAK: PM शहबाज शरीफ ने की ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात… पश्चिम एशिया तनाव पर जताई चिंता


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shahbaz Sharif) ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ मसूद पेजेशकियान (Iran’s President Dr. Masoud Pezeshkian) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए तत्काल सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शहबाज शरीफ ने खाड़ी क्षेत्र में जारी खतरनाक शत्रुता को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर सभी पड़ोसी देशों को मतभेद सुलझाने, तनाव कम करने और संवाद व कूटनीति की राह अपनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

    बयान में आगे कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने उम्माह (मुस्लिम समुदाय) में एकता के अत्यधिक महत्व पर बल दिया, जो इस समय पहले से कहीं अधिक जरूरी है। शरीफ ने ईरानी नेतृत्व को आश्वस्त किया कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा। एक पड़ोसी और मित्र राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान ने बहादुर ईरानी जनता के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने ईरानी राष्ट्रपति और ईरान की जनता को ईद-उल-फितर तथा नवरोज की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। वहीं सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में शहबाज शरीफ ने दोहराया कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने में सक्रिय और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस बीच, ईरानी आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से तेहरान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि कुछ मित्र देशों से संदेश मिले हैं, जो अमेरिका से युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत शुरू करने के अनुरोध का संकेत देते हैं। पाकिस्तान को मिस्र और कतर के साथ-साथ संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। शरीफ की पोस्ट के तुरंत बाद पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरगची से अलग बातचीत की और हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की।

    विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र तथा उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए संवाद व कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। दोनों ने बदलती स्थिति पर निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।

    इससे पहले अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर सैन्य हमले की योजना को पांच दिनों के लिए टाल दिया है और कहा है कि वह इस शत्रुता को सुलझाने के लिए ईरान के एक शीर्ष व्यक्ति से बात कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में शत्रुता को सुलझाने की कोशिश करने के लिए ईरान की सरकार के एक शीर्ष व्यक्ति के साथ बातचीत कर रहा है। अमेरिका और ईरान हाल की बातचीत में समझौते के प्रमुख बिंदुओं पर पहुंच गए हैं। अगर हमलों में मौजूदा पांच-दिन का विराम ठीक से चलता है, तो इससे पश्चिम एशिया चल रहे संघर्ष का समाधान निकल सकता है।

  • MP: अगले साल भोपाल में होगा राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह का भव्य आयोजन

    MP: अगले साल भोपाल में होगा राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह का भव्य आयोजन


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के इतिहास में 15 जनवरी 2027 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी (General Upendra Dwivedi) के साथ बैठक के बाद ऐलान किया कि 2027 का राष्ट्रीय सेना दिवस समारोह भोपाल में आयोजित किया जाएगा।

    दरअसल, सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है. यह दिन 1949 में जनरल सर एफआरआर बुचर से सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ के तौर पर केएम करिअप्पा के पदभार संभालने की याद में मनाया जाता है।

    CM यादव ने कहा कि यह भव्य समारोह राज्य के नागरिकों को देश की समृद्ध सैन्य विरासत से परिचित कराएगा और युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा।

    यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना ने हर मौके पर अदम्य साहस, वीरता और शक्ति का प्रदर्शन किया है. राज्य के नागरिकों को सेना की समृद्ध सैन्य विरासत से परिचित कराने और राज्य के युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 15 जनवरी 2027 को भोपाल में एक विशेष परेड आयोजित की जाएगी.”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में इन सेना दिवस कार्यक्रमों में शामिल होने का अनुभव 26 जनवरी को नई दिल्ली में होने वाले गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों जैसा ही होगा. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार इन कार्यक्रमों के लिए सेना को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी.

    सीएम यादव ने कहा, “इस अवसर पर सेना ‘शौर्य संध्या’ का आयोजन करेगी. इसमें सेना के हथियारों, संसाधनों और उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी, साथ ही सैन्य अभ्यासों का प्रदर्शन भी किया जाएगा. इस मौके पर रिटायर्ड सैनिकों को भी सम्मानित किया जाएगा. सभी गतिविधियां उसी भव्यता और गरिमा के साथ आयोजित की जाएंगी, जैसी 26 जनवरी को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान देखने को मिलती हैं.”

    मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इन समारोहों में हिस्सा लेंगे. इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनता को सैन्य परेड से जोड़ना है, साथ ही सेना और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल और आपसी विश्वास को बढ़ावा देना भी है.


    1 नवंबर से ही शुरू हो जाएगा उत्सव

    15 जनवरी को होने वाले मुख्य समारोह से जुड़ी कुछ गतिविधियां 1 नवंबर से ही शुरू हो जाएंगी. 1 नवंबर को मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया जाता है.
    मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर ‘मेरी माटी’ अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से मिट्टी लाई जाएगी. भोपाल स्थित ‘शौर्य स्मारक’ में एक ‘संकल्प वृक्ष’ लगाया जाएगा.”


    क्यों मनाया जाता है सेना दिवस?

    बता दें कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों को विकेंद्रीकृत करने की पहल 2023 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन को मबूत करना और भारतीय सेना में देशव्यापी जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना था, साथ ही सेना और नागरिकों के बीच संबंधों को भी मजबूत करना था.

    उन्होंने बताया कि इसके तहत, आर्मी डे 2023 में बेंगलुरु, 2024 में लखनऊ, 2025 में पुणे और 2026 में जयपुर में आयोजित किया गया.

  • अल्लू अर्जुन और एटली के महा-प्रोजेक्ट में अनुष्का शर्मा की एंट्री? 8 साल बाद पर्दे पर 'चकदे' फट्टे करने को तैयार एक्ट्रेस!

    अल्लू अर्जुन और एटली के महा-प्रोजेक्ट में अनुष्का शर्मा की एंट्री? 8 साल बाद पर्दे पर 'चकदे' फट्टे करने को तैयार एक्ट्रेस!


    नई दिल्ली : भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों ‘पुष्पा’ फेम सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जवान’ के निर्देशक एटली की अपकमिंग फिल्म ‘AA22xA6’ को लेकर जबरदस्त चर्चा है। इस फिल्म से जुड़ी हर नई अपडेट फैंस के उत्साह को दोगुना कर रही है। हाल ही में आई खबरों ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है, जिसके मुताबिक बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री अनुष्का शर्मा इस बड़े बजट के साइंस-फिक्शन प्रोजेक्ट के साथ पर्दे पर वापसी कर सकती हैं। यदि ये खबरें सच साबित होती हैं, तो अनुष्का पूरे 8 साल के लंबे अंतराल के बाद एक लीड रोल में नजर आएंगी। दिलचस्प बात यह है कि यह न केवल उनका कमबैक होगा, बल्कि तेलुगू सिनेमा में उनका भव्य डेब्यू भी माना जा रहा है।

    डेक्कन क्रॉनिकल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अनुष्का शर्मा और फिल्म के मेकर्स के बीच बातचीत अंतिम दौर में है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अनुष्का का नाम जुड़ते ही इस फिल्म की स्टार कास्ट और भी ज्यादा “पावर-पैक” नजर आने लगी है। आपको बता दें कि अनुष्का को आखिरी बार साल 2018 में आई फिल्म ‘जीरो’ में शाहरुख खान और कैटरीना कैफ के साथ देखा गया था। उसके बाद उन्होंने बतौर निर्माता कई सफल प्रोजेक्ट्स दिए, लेकिन एक्टिंग से उन्होंने दूरी बनाए रखी। बीच में उनकी फिल्म ‘चकदा एक्सप्रेस’ की चर्चा जरूर हुई थी, जो भारतीय क्रिकेटर झूलन गोस्वामी की बायोपिक है, लेकिन इसके रिलीज में हो रही देरी और प्रोजेक्ट के बंद होने की अफवाहों के बीच फैंस अनुष्का को बड़े पर्दे पर देखने के लिए बेताब हैं।

    एटली की इस फिल्म ‘AA22xA6’ की खासियत केवल अनुष्का या अल्लू अर्जुन नहीं हैं, बल्कि फिल्म की बाकी स्टार कास्ट भी इसे साल की सबसे बड़ी फिल्म बनाने की ओर इशारा कर रही है। खबरों की मानें तो इस फिल्म में दीपिका पादुकोण के शामिल होने की चर्चा पहले ही जोरों पर थी। वहीं, अब मृणाल ठाकुर, जाह्नवी कपूर और रश्मिका मंदाना के नाम भी इस मेगा प्रोजेक्ट से जुड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि रश्मिका मंदाना इस बार एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आएंगी और फिल्म में एक नकारात्मक (नेगेटिव) भूमिका निभा सकती हैं।

    फिल्म की कहानी को लेकर फिलहाल अधिक जानकारी तो सामने नहीं आई है, लेकिन इसे एक हाई-ऑक्टेन साइंस-फिक्शन ड्रामा बताया जा रहा है। खबरें यह भी हैं कि सुपरस्टार अल्लू अर्जुन इस फिल्म में एक नहीं, बल्कि कई अलग-अलग किरदारों को निभाते हुए नजर आ सकते हैं। वर्तमान में अनुष्का शर्मा अपने पति विराट कोहली और बच्चों के साथ लंदन में समय बिता रही हैं, ऐसे में उनका वापस शूटिंग सेट पर लौटना उनके प्रशंसकों के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं होगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कब मेकर्स इस खबर पर आधिकारिक मुहर लगाते हैं और अनुष्का-अल्लू अर्जुन की इस नई जोड़ी को बड़े पर्दे पर देखना कितना रोमांचक होगा।

  • UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात

    UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के शिखर सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार (UPA Government) ने देश की चिंता नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने की फिक्र में रहकर गलत फैसले लिए। पीएम मोदी ने विशेष रूप से यूपीए काल में जारी किए गए तेल बांडों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने अपने पत्ते खोले और साफ-साफ बताया कि वे किसके साथ हैं।


    कांग्रेस पर जमकर बरसे

    प्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2010 के बीच कांग्रेस सरकार ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किए थे। उन्होंने कहा कि उस समय पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें संकट में थीं, लेकिन कांग्रेस देश की नहीं, अपनी सत्ता की चिंता कर रही थी। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हवाले से कहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह फैसला गलत था और इससे आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ पड़ेगा।

    पीएम मोदी ने ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार चलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूर से सरकार चला रहे थे, उन्होंने सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय लिया, क्योंकि उस समय कोई जवाबदेही नहीं थी। उन्होंने खुलासा किया कि इन बांडों का भुगतान 2020 के बाद शुरू हुआ और ब्याज सहित कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस के इस ‘पाप’ को धोने का काम किया है, जिसकी कीमत कम नहीं रही।


    कई गुटों में बंटी है दुनिया

    वैश्विक परिदृश्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया कई गुटों में बंटी हुई है, लेकिन भारत ने मजबूत और व्यापक साझेदारियां बनाई हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच भारत ने खाड़ी देशों से लेकर वैश्विक पश्चिम और दक्षिण तक सभी के साथ विश्वसनीय साझेदारी कायम की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि हम किसके साथ हैं? मेरा जवाब है- हम भारत के साथ हैं। हम भारत के हितों, शांति और संवाद के साथ हैं।

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लड़खड़ा रही है, लेकिन भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है। ऊर्जा, उर्वरक और आवश्यक वस्तुओं के मामले में सरकार ने नागरिकों को न्यूनतम परेशानी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। कोरोना महामारी के बाद से लगातार चुनौतियां आईं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के एकजुट प्रयास से देश हर विपदा से पार पा रहा है।

    उन्होंने हाल की 23 दिनों की उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में भी भारत ने अपनी कूटनीति, निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन की ताकत दिखाई है। दुनिया भारत की नीति और रणनीति से आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत प्रगति, विकास और विश्वास के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

  • भारत के LPG और कच्चे तेल के टैंकरों ने पार किया होर्मुज… जल्द पहुंचेंगे बंदरगाह

    भारत के LPG और कच्चे तेल के टैंकरों ने पार किया होर्मुज… जल्द पहुंचेंगे बंदरगाह


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध (US-Israel and Iran War) की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) बंद होने से भारत सहित कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच अब भारत (India) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक UAE से दो LPG कैरियर और सऊदी अरब से एक कच्चे तेल का कैरियर भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके। वहीं नौसेना प्रमुख दिनेश त्रिपाठी ने बढ़ते हुए शिपिंग संकट के चलते ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के अपने आधिकारिक दौरे को रद्द कर दिया है।

    जानकारी के मुताबिक भारतीय झंडे वाले जहाज पाइन गैस और जग वसंत लगभग एक साथ ही चल रहे थे। दोनों जहाज सोमवार सुबह 6 बजे UAE के बंदरगाहों से भारत के लिए रवाना हुए। ईरान ने इन दोनों LPG जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मंजूरी भी दे दी है। वहीं ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन LPG जहाजों को 24 घंटे तक सुरक्षा दे रहे हैं।

    जहाज में कितना LPG?
    बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेस में बताया कि दोनों जहाज पर लगभग 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने कहा, ”यात्रा शुरू हो चुकी है।’’ शिपिंग मंत्रालय के अनुसार जग वसंत के 26 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है, जबकि पाइन गैस 28 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंच सकता है। इन जहाजों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक भी सवार हैं।

    सऊदी से आ रहा तेल टैंकर
    इसके अलावा, MT Kallista नाम का एक कच्चे तेल का कैरियर सऊदी अरब के यान्बू बंदरगाह पर तेल भर रहा है और मंगलवार को जेद्दा बंदरगाह होते हुए भारत के पारादीप बंदरगाह के लिए रवाना होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के समन्वय से, पनामा के झंडे वाले यह जहाज भी अदन की खाड़ी से गुजरेगा और भारतीय नौसेना इसकी हिफाजत करेगी।

    भारतीय टैंकरों ने ईरान को दी फीस?
    भले ही रिपोर्ट्स में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा मोटी फीस लिए जाने की खबरें थीं, लेकिन भारत ने अपने LPG टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने के लिए ईरान को कोई पैसा नहीं दिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोमवार को ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया है।

    इस बीच केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना से कहा है कि वह भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास अपने कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जहाजों को तैनात करे। वहीं भारतीय झंडे वाले सभी जहाज़ों के कप्तानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि उन्हें बताया जा सके कि भारत संकट के समय उनके साथ खड़ा है।

    कितने टैंकर फंसे?
    बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध कुल मिलाकर लगभग 500 टैंकर जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान संभवत: सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति दे सकता है।

  • बंगाल के भवानीपुर-नंदीग्राम में हुमायूं की एंट्री ने बढ़ाई राजनीतिक गर्माहट, वोट बिखराव से सियासी खेल होगा जटिल

    बंगाल के भवानीपुर-नंदीग्राम में हुमायूं की एंट्री ने बढ़ाई राजनीतिक गर्माहट, वोट बिखराव से सियासी खेल होगा जटिल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में भवानीपुर और नंदीग्राम सीटों पर हुमायूं कबीर की एंट्री ने मुकाबले को और जटिल बना दिया है। आम जनता उन्नयन पार्टी एजेयूपी के उम्मीदवार इन दोनों हाईप्रोफाइल सीटों पर चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना रहे हैं, जिससे वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ गई है।

    नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी की सभा के बाद तृणमूल कांग्रेस के पवित्र कर के घर के बाहर ‘चोरचोर’ के नारे लगने से सियासी तापमान और बढ़ गया है। वहीं, मतदाता सूची संशोधन एसआईआर की सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने से पहले लाखों नामों के जोड़-घटाव को लेकर चुनाव आयोग अलर्ट मोड पर है। इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि जमीनी तनाव, वोटिंग गणित और प्रशासनिक सतर्कता के बीच तय होगा।

    हाईवोल्टेज सीटें: भवानीपुर और नंदीग्राम

    भवानीपुर और नंदीग्राम हमेशा से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रत्यक्ष मुकाबले की सीट रही हैं। अब हुमायूं कबीर ने भवानीपुर में पूनम बेगम और नंदीग्राम में शाहिदुल हक को उतारकर इन सीटों को त्रिकोणीय संघर्ष का मैदान बना दिया है।

    भवानीपुर में मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोट निर्णायक

    भवानीपुर में ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस सीट पर मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है, जो अब तक तृणमूल के साथ रहा है। एजेयूपी की एंट्री से इस वोट बैंक में सेंध लग सकती है। यदि हुमायूं का प्रभाव स्थानीय स्तर पर मजबूत नहीं रहा, तो तृणमूल को बड़ा नुकसान नहीं होगा, लेकिन मामूली वोट कटाव भी करीबी मुकाबले में भाजपा के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

    नंदीग्राम में बहुकोणीय मुकाबला

    नंदीग्राम में पहले से शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच सीधी टक्कर रही है। अब एजेयूपी की एंट्री विपक्षी वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ा रही है। मुस्लिम और ग्रामीण वोट बैंक पहले ही विभाजित है, और हुमायूं का उम्मीदवार इसे और जटिल बना सकता है, जिससे भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, खासकर तब जब तृणमूल विरोधी वोट एकजुट न हों।

    विश्लेषकों का कहना है कि छोटी पार्टियों का प्रभाव सीधे जीत पर कम होता है, लेकिन 2-5% वोट शेयर के जरिए वे चुनाव के नतीजों की दिशा बदल सकते हैं। भवानीपुर में यह तृणमूल के लिए चुनौती और नंदीग्राम में भाजपा के लिए अप्रत्यक्ष लाभ साबित हो सकता है।

  • विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध

    विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने भारत और रूस के संबंधों (India-Russia relations) को लेकर सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘आज की बदलती परिस्थितियों में हमारी भागीदारी और गहरी होती जा रही है।’ जयशंकर ने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। एस जयशंकर ने कहा कि विकसित हो रही बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए भारत और रूस के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है, जिसमें ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), जी20 और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत, रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान करने के लिए तत्पर है।


    भारत-रूस के मजबूत होते रिश्ते

    जयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। दशकों से हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है।’ विदेश मंत्री ने पिछले वर्ष दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से निकले नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष वर्तमान वार्षिक व्यापार को 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक संतुलित और सतत तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

    विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमें भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और गैर-टैरिफ बाधाओं व विनियामक अड़चनों को दूर करने की जरूरत है। साथ ही, कुशल भारतीय कार्यबल का उपयोग करने के प्रयासों को जारी रखना चाहिए।’ पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां अहम हैं। दिसंबर में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और रूस ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने व 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए 5 वर्षीय खाका शामिल है।


    रूस की ओर से क्या कहा गया

    जयशंकर ने रूस को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत का सर्वोत्तम भागीदार बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाना है, मुझे विश्वास है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए रूस में उसे एक विश्वसनीय भागीदार मिलेगा।’ लावरोव ने कहा कि रूस-भारत की समय-परीक्षित मित्रता आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित अंतरदेशीय संबंधों का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में अपनी राह के तहत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और राष्ट्रीय हितों को लगातार प्राथमिकता देने के लिए भारत अत्यंत सम्मान का पात्र है। रूस और भारत की सदियों पुरानी मित्रता इस बात का आदर्श उदाहरण है कि समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए अंतरराज्यीय संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए।’