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  • Inter-Religious विवाह में महिलाओं की धार्मिक पहचान के मामले में SC कर रहा सुनवाई

    Inter-Religious विवाह में महिलाओं की धार्मिक पहचान के मामले में SC कर रहा सुनवाई


    नई दिल्ली।
    क्या अंतर-धार्मिक विवाह (Inter-Religious Marriage) करने पर महिलाओं को उनकी धार्मिक पहचान से वंचित किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस मामले पर सुनवाई कर रहा है। ताजा केस पारसी समुदाय से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता दीना बुढ़राजा ने नागपुर पारसी पंचायत के नियम 5(2) को चुनौती दी है। इस नियम के अनुसार, अगर कोई पारसी महिला गैर-पारसी से विवाह करती है तो उसकी धार्मिक पहचान समाप्त कर दी जाती है और उसे अगियारी जैसे धार्मिक स्थलों में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है। वहीं, पारसी पुरुषों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है।

    याचिका में दावा किया गया कि यह नियम लिंग आधारित भेदभावपूर्ण है। साथ ही, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) तथा 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई की। इसने केंद्र सरकार, नागपुर पारसी पंचायत, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और चैरिटी कमिश्नर को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने तर्क दिया कि यह नियम असंवैधानिक है क्योंकि यह केवल महिलाओं को लक्षित करता है और समुदाय की परंपराओं के नाम पर लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता है।


    कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

    अदालत ने माना कि यह मामला महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाता है और पारसी समुदाय में ऐसे मुद्दे पहले भी बार-बार अदालत में आए हैं। यह नियम नागपुर अगियारी के प्रबंधन से संबंधित है, जो पारसी धार्मिक स्थल है। यह मामला पारसी व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा है, जहां समुदाय की परंपराएं विवाह और धार्मिक पहचान को नियंत्रित करती हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अंतर-धार्मिक विवाह करने वाली महिला को उसकी जन्मजात धार्मिक पहचान से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के खिलाफ है।

    विशेष विवाह अधिनियम जैसे कानून अंतर-धार्मिक विवाह की इजाजत देते हैं, जहां दोनों पक्ष अपनी धार्मिक पहचान बनाए रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में कहा है कि विवाह से महिला की धार्मिक पहचान स्वतः पति की धर्म में विलय नहीं होती, जब तक वह स्वेच्छा से परिवर्तन न करे। इस मामले में भी समान सिद्धांत लागू हो सकता है। वर्तमान में मामला प्रारंभिक चरण में है, जहां नोटिस जारी होने के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल पारसी समुदाय बल्कि पूरे देश में अंतर-धार्मिक विवाहों और लैंगिक समानता के मुद्दे पर प्रभाव डालेगा।

  • कम उम्र में सफेद बाल? पित्त दोष हो सकता है वजह, जानें आयुर्वेदिक कारण और असरदार उपाय

    कम उम्र में सफेद बाल? पित्त दोष हो सकता है वजह, जानें आयुर्वेदिक कारण और असरदार उपाय


    नई दिल्ली:आज के समय में कम उम्र में ही बालों का सफेद होना एक आम समस्या बनती जा रही है। पहले जहां सफेद बालों को बढ़ती उम्र की निशानी माना जाता था, वहीं अब यह युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रहा है। आयुर्वेद के अनुसार इसका एक बड़ा कारण पित्त दोष का असंतुलन है, जो शरीर में कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है।

    आयुर्वेद में बताया गया है कि जब पित्त दोष बढ़ जाता है, तो इसका सीधा असर बालों के रंगद्रव्य यानी मेलानिन पर पड़ता है। इससे बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं। इसके अलावा गलत खान-पान, अत्यधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद बालों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले पित्त को संतुलित करना जरूरी है। इसके लिए खान-पान में सुधार करना बेहद अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा मसालेदार, तैलीय और खट्टे भोजन से दूरी बनानी चाहिए। चाय, कॉफी और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ भी पित्त को बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए।

    इसके साथ ही आहार में पोषक तत्वों को शामिल करना भी जरूरी है। आयुर्वेद में आंवला, चुकंदर, घी, काली मुनक्का, शतावरी और त्रिफला जैसे तत्वों को बेहद फायदेमंद माना गया है। ये न केवल शरीर को अंदर से पोषण देते हैं, बल्कि बालों की जड़ों को भी मजबूत बनाते हैं।

    बाहरी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। बालों में नियमित रूप से तेल लगाना बहुत लाभकारी होता है। खासतौर पर नारियल तेल और भृंगराज तेल से हफ्ते में दो बार मालिश करने से बालों को पोषण मिलता है और सफेद बालों की गति को धीमा किया जा सकता है। यह उपाय बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी मदद करता है।

    मानसिक तनाव भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जिससे शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। गुस्सा, चिड़चिड़ापन और लगातार तनाव बालों की सेहत को खराब कर देते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी दिनचर्या में सुधार करें, समय पर सोएं और खुद को मानसिक रूप से शांत रखने की कोशिश करें।

    योग, ध्यान और प्रकृति के बीच समय बिताना भी इस दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है। खुली हवा में टहलना और सकारात्मक सोच अपनाना न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि बालों की सेहत पर भी अच्छा असर डालता है।

    सफेद बालों की समस्या को रोकने के लिए केवल बाहरी उपाय ही नहीं, बल्कि अंदर से संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सही खान-पान, संतुलित जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर आप इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।
  • पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दिल्‍ली-हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर लगाए थे कैमरे, अब तक 22 आरोपी गिरफ्तार

    पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दिल्‍ली-हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर लगाए थे कैमरे, अब तक 22 आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली। पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक और अहम खुलासा किया है। गाजियाबाद पुलिस ने फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है, जो पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान चलाने की आड़ में जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

    पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरोह के सरगना सुहेल समेत अब तक कुल 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौशाद के अलावा मथुरा की एक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें इस नेटवर्क से सुहेल ने जोड़ा था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर WhatsApp ग्रुप के जरिए पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे।

    सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि गिरोह ने दिल्ली और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों पर गुप्त कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग का एक्सेस पाकिस्तान में बैठे लोगों को दिया गया था, जिससे वे सीधे संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहे थे।

    50 सोलर कैमरे लगाने की थी साजिश

    पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क देशभर में करीब 50 सोलर कैमरे लगाने की योजना बना रहा था। कुछ स्थानों पर कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे। दिल्ली और सोनीपत में लगाए गए कैमरों को बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

    जांच में यह भी पता चला कि नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और उसे कोलकाता से बुलाकर फरीदाबाद में दुकान खुलवाई गई थी। फिलहाल पुलिस इस जासूसी नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि इसके तार देश और विदेश में किन-किन जगहों से जुड़े हैं।

  • मार्च-अप्रैल में ट्रिप का प्लान? इन जगहों से दूरी ही बेहतर, वरना खराब हो सकता है पूरा मजा!

    मार्च-अप्रैल में ट्रिप का प्लान? इन जगहों से दूरी ही बेहतर, वरना खराब हो सकता है पूरा मजा!


    नई दिल्ली:मार्च और अप्रैल का महीना भारत में घूमने-फिरने के लिहाज से काफी लोकप्रिय माना जाता है। स्कूल-कॉलेज की परीक्षाएं खत्म होने लगती हैं और छुट्टियों का माहौल बन जाता है, ऐसे में ज्यादातर परिवार ट्रिप प्लान करने लगते हैं। लेकिन हर जगह इस मौसम में घूमने के लिए सही नहीं होती। कई डेस्टिनेशन ऐसे हैं जहां इस दौरान या तो भीषण गर्मी पड़ती है या फिर इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि आपका पूरा ट्रैवल एक्सपीरियंस खराब हो सकता है।

    सबसे पहले बात करें राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की, खासकर जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे शहरों की। मार्च की शुरुआत से ही यहां तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और दिन में पारा 35 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है। तेज धूप और गर्म हवाएं बाहर घूमना मुश्किल बना देती हैं। ऐसे में अगर आप आरामदायक ट्रिप चाहते हैं तो इन जगहों को इस समय टालना ही बेहतर रहेगा।

    दूसरा नाम आता है मसूरी का, जिसे ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ कहा जाता है। आमतौर पर यह एक बेहतरीन हिल स्टेशन है, लेकिन मार्च-अप्रैल में यहां टूरिस्ट सीजन पीक पर होता है। स्कूल की छुट्टियों के कारण यहां भारी भीड़ उमड़ती है। मॉल रोड पर चलना भी मुश्किल हो जाता है, होटल महंगे हो जाते हैं और ट्रैफिक जाम आम बात बन जाती है। अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो इस समय मसूरी जाना निराश कर सकता है।

    तीसरी जगह है आगरा, जो अपने ऐतिहासिक महत्व और ताजमहल के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन मार्च और अप्रैल में यहां की गर्मी परेशान कर सकती है। धूप इतनी तेज होती है कि दिन में घूमना मुश्किल हो जाता है, खासकर अगर आप लंबे समय तक बाहर रहना चाहते हैं। भीड़ और गर्म मौसम का कॉम्बिनेशन ट्रिप का मजा कम कर सकता है।

    इन सबके अलावा एक और बात ध्यान रखने वाली है कि इन महीनों में कई जगहों पर होटल और ट्रांसपोर्ट की कीमतें भी बढ़ जाती हैं, जिससे आपका बजट भी बिगड़ सकता है। इसलिए ट्रिप प्लान करते समय सिर्फ जगह की खूबसूरती नहीं, बल्कि मौसम, भीड़ और सुविधा को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

    अगर आप सच में इस समय एक अच्छा ट्रैवल अनुभव चाहते हैं, तो ऐसी जगहों का चुनाव करें जहां मौसम सुहावना हो, भीड़ कम हो और आप आराम से घूम सकें। सही प्लानिंग और सही डेस्टिनेशन का चुनाव ही आपकी छुट्टियों को यादगार बना सकता है।

  • परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अमेरिका को कड़ा संदेश, जाने क्‍या बोले किम जोंग उन ?

    परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अमेरिका को कड़ा संदेश, जाने क्‍या बोले किम जोंग उन ?


    प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने संसद सुप्रीम पीपुल्स असेंबली में अपने संबोधन के दौरान देश की सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि उत्तर कोरिया अब परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में स्थायी और अपरिवर्तनीय स्थिति में है और इस दिशा में उसकी नीति और सख्त की जाएगी।

    किम ने अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि उनका देश अपने परमाणु बल को लगातार मजबूत करता रहेगा। उन्होंने दक्षिण कोरिया को उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए रक्षा खर्च को वर्ष 2026 के बजट में बढ़ाकर कुल व्यय का 15.8% कर दिया है। राज्य मीडिया केसीएनए के मुताबिक, सोमवार को संसद को संबोधित करते हुए किम ने कहा कि परमाणु शक्ति बनाए रखते हुए विकास करना ही देश की सबसे सही रणनीति है।

    परमाणु हथियारों पर कोई समझौता नहीं

    किम जोंग उन ने परमाणु निरस्त्रीकरण के बदले आर्थिक सहायता या सुरक्षा गारंटी के प्रस्तावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की मौजूदगी ने युद्ध को रोका है और इससे देश को आर्थिक विकास, निर्माण कार्य और लोगों के जीवन स्तर को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला है। उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास सामरिक परमाणु संसाधन तैनात कर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। हालांकि किम ने दावा किया कि अब उत्तर कोरिया खुद को सुरक्षित महसूस करता है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है।

    दक्षिण कोरिया को बताया मुख्य दुश्मन

    किम ने दशकों पुरानी शांतिपूर्ण पुनर्मिलन की नीति से हटते हुए दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा शत्रु घोषित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश की संप्रभुता से छेड़छाड़ की गई तो बिना किसी हिचकिचाहट के कड़ा जवाब दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुख अब उत्तर कोरिया के कानून का हिस्सा बन चुका है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

    आर्थिक विकास के लिए नई योजना

    सुरक्षा के साथ-साथ किम ने नई पंचवर्षीय विकास योजना भी पेश की, जिसमें उद्योगों के आधुनिकीकरण, बिजली और कोयला उत्पादन बढ़ाने तथा देशभर में आवास निर्माण पर जोर दिया गया है। बजट में परमाणु युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसी दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की बात कही गई। केसीएनए के अनुसार, इस सत्र में संविधान संशोधन को मंजूरी दी गई और नई आर्थिक योजना को लागू करने के लिए कानून पारित किया गया।

    आर्थिक चुनौतियां बरकरार

    अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर कोरिया अभी भी दुनिया के सबसे गरीब देशों में शामिल है। भारी प्रतिबंधों और संसाधनों की कमी के कारण वहां की बड़ी आबादी सरकारी राशन और अनौपचारिक बाजारों पर निर्भर है।

  • एमपी में मौसम ने ली करवट, उत्तर में छाए बादल, तापमान में गिरावट, 26-29 मार्च को सक्रिय होंगे दो नए सिस्टम

    एमपी में मौसम ने ली करवट, उत्तर में छाए बादल, तापमान में गिरावट, 26-29 मार्च को सक्रिय होंगे दो नए सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। सोमवार को प्रदेश के उत्तरी हिस्सों उज्जैन, सागर और ग्वालियर-चंबल संभाग में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण बादल छाए रहे, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में दिन का पारा 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जबकि बाकी क्षेत्रों में गर्मी का असर बना रहा।

    26-29 मार्च के बीच फिर बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को गर्मी का असर रहेगा, लेकिन 26 और 27 मार्च को प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर शुरू हो सकता है। 26 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिसका असर ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में दो दिन तक दिखाई देगा। इसके बाद 29 मार्च को एक और सिस्टम एक्टिव होने की संभावना है, जिससे अप्रैल की शुरुआत भी आंधी-बारिश के साथ हो सकती है।

    बारिश थमी, अब बढ़ने लगी गर्मी
    पिछले दिनों प्रदेश में लगातार चार दिन तक आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसके थमते ही तापमान में तेजी आने लगी है। सोमवार को रायसेन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

    इन जिलों में दर्ज हुआ ज्यादा तापमान

    नर्मदापुरम में 37.4 डिग्री, रतलाम में 36.4 डिग्री, गुना और खरगोन में 36.2 डिग्री, खजुराहो में 36 डिग्री, नरसिंहपुर में 35.4 डिग्री, धार में 35.3 डिग्री, खंडवा में 35.1 डिग्री और उमरिया में 35 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बड़े शहरों का हाल

    पांच प्रमुख शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां पारा 35 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 34.4 डिग्री, इंदौर में 34.9 डिग्री, जबलपुर में 34.2 डिग्री और ग्वालियर में 29.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। बता दें कि हाल ही में सक्रिय मजबूत सिस्टम के कारण प्रदेश के 45 जिलों में आंधी-बारिश हुई, जिनमें 17 जिलों में ओले भी गिरे। तेज आंधी से केला, पपीता और गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचा है। धार और खरगोन समेत कई जिलों में ज्यादा असर देखने को मिला।

  • तरबूज खरीदने का सीक्रेट फॉर्मूला हर बार मिलेगा लाल मीठा और पानी से भरपूर फल

    तरबूज खरीदने का सीक्रेट फॉर्मूला हर बार मिलेगा लाल मीठा और पानी से भरपूर फल


    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में तरबूज की भरमार दिखाई देने लगती है और यह फल हर घर की पहली पसंद बन जाता है क्योंकि इसमें भरपूर पानी होता है जो शरीर को ठंडक और ताजगी देता है लेकिन अक्सर लोगों के साथ एक बड़ी समस्या होती है कि बाहर से हरा और अच्छा दिखने वाला तरबूज अंदर से फीका या कच्चा निकल जाता है जिससे पैसे और उम्मीद दोनों खराब हो जाते हैं

    अक्सर लोग दुकान पर तरबूज को कटवाकर चेक करते हैं लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता क्योंकि इससे फल जल्दी खराब हो सकता है और साफ सफाई की दृष्टि से भी यह सुरक्षित नहीं होता ऐसे में जरूरी है कि आप बिना काटे ही अच्छे तरबूज की पहचान करना सीखें ताकि हर बार मीठा और लाल फल ही घर लाएं

    तरबूज खरीदते समय सबसे पहले उसके नीचे बने पीले धब्बे पर ध्यान देना चाहिए जिसे फील्ड स्पॉट कहा जाता है यह धब्बा इस बात का संकेत होता है कि फल कितने समय तक जमीन पर पड़ा रहा और कितनी अच्छी तरह पका अगर यह धब्बा गहरा पीला या नारंगी रंग का है तो समझ लीजिए कि तरबूज पूरी तरह पका हुआ है और स्वाद में मीठा होगा वहीं अगर यह धब्बा हल्का हरा या सफेद है तो इसका मतलब है कि फल समय से पहले तोड़ा गया है और अंदर से कच्चा निकल सकता है

    इसके अलावा तरबूज को हल्के हाथ से थपथपाकर उसकी आवाज जरूर सुनें अगर उसमें से गूंजदार और खोखली आवाज आती है तो यह संकेत है कि फल अंदर से रसीला और पका हुआ है लेकिन अगर आवाज भारी या दबाव वाली लगे तो वह तरबूज कच्चा हो सकता है यह एक बहुत ही आसान और असरदार तरीका है जिसे अनुभवी लोग हमेशा अपनाते हैं

    वजन भी तरबूज की गुणवत्ता पहचानने का एक अहम तरीका है अगर आप एक जैसे आकार के दो तरबूज उठाते हैं और उनमें से एक ज्यादा भारी लगता है तो वही बेहतर होता है क्योंकि ज्यादा वजन का मतलब है उसमें पानी और रस की मात्रा अधिक है जो उसे मीठा और ताजा बनाता है

    तरबूज के बाहरी रंग और बनावट पर भी ध्यान देना चाहिए हमेशा गहरे हरे रंग और हल्के मैट फिनिश वाले तरबूज ही चुनें बहुत ज्यादा चमकदार तरबूज अक्सर कच्चे होते हैं इसके अलावा अगर तरबूज की सतह पर हल्की भूरी जाली जैसी रेखाएं दिखती हैं तो यह संकेत है कि परागण अच्छे से हुआ है और फल का स्वाद ज्यादा मीठा होगा

    अंत में तरबूज के डंठल को जरूर देखें अगर डंठल सूखा और भूरा है तो इसका मतलब है कि फल बेल पर पूरी तरह पक चुका है लेकिन अगर डंठल हरा है तो समझ लें कि उसे जल्दी तोड़ लिया गया है और उसका स्वाद उतना अच्छा नहीं होगा इन आसान लेकिन बेहद कारगर तरीकों को अपनाकर आप हर बार बाजार से सही तरबूज चुन सकते हैं और गर्मियों में ठंडक और मिठास का पूरा आनंद ले सकते हैं

  • छुट्टियों का असर, Ajmer बना पर्यटकों की पहली पसंद, हर जगह दिखा उत्साह..

    छुट्टियों का असर, Ajmer बना पर्यटकों की पहली पसंद, हर जगह दिखा उत्साह..


    नई दिल्ली:ईद के बाद वीकेंड आते ही Ajmer एक बार फिर पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार नजर आने लगा है, शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर न केवल स्थानीय लोग बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंच रहे हैं, छुट्टियों के इस अनुकूल माहौल ने लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है जिससे पूरे शहर में एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है

    सुबह से ही शहर के पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है जो देर शाम तक बनी रहती है, खासतौर पर Ana Sagar Lake और Subhash Udyan इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं, झील के किनारे बैठकर लोग सुकून के पल बिता रहे हैं तो वहीं बच्चे खेलकूद और मस्ती में व्यस्त नजर आते हैं, शाम के समय इन स्थानों का दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है

    पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सकारात्मक असर स्थानीय कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है, झील और उद्यान के आसपास लगे खाने-पीने के स्टॉल, खिलौनों की दुकानें और छोटे व्यापारियों के यहां अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है, व्यापारियों का कहना है कि ईद के बाद आई इस भीड़ ने उनके कारोबार को नई गति दी है, जिससे लंबे समय बाद बाजारों में रौनक लौटती नजर आ रही है

    इसके साथ ही शहर के होटल और अन्य पर्यटन सेवाओं में भी हलचल बढ़ी है, बाहर से आने वाले पर्यटक यहां रुककर शहर की खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व का आनंद ले रहे हैं, इससे पूरे पर्यटन तंत्र को मजबूती मिल रही है और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के बीच स्थित ये पर्यटन स्थल हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे हैं, लेकिन त्योहारों और छुट्टियों के बाद यहां की रौनक कुछ अलग ही होती है, खास बात यह भी है कि Ajmer Sharif Dargah पर जियारत के लिए आने वाले जायरीन भी इन स्थलों का रुख करते हैं, जिससे पर्यटकों की संख्या और बढ़ जाती है

    रमजान के दौरान जहां पर्यटकों की आवाजाही में थोड़ी कमी आई थी, वहीं अब ईद के बाद यह सिलसिला फिर से तेज हो गया है, शहर में हर ओर खुशहाल और जीवंत माहौल नजर आ रहा है, लोग अपने परिवार के साथ समय बिताने के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले रहे हैं
     

    अजमेर में पर्यटन गतिविधियों की यह वापसी न केवल शहर की रौनक को बढ़ा रही है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है, आने वाले दिनों में भी यदि ऐसा ही माहौल बना रहा तो पर्यटन क्षेत्र और अधिक गति पकड़ सकता है
  • लेटेंट टीबी को न करें नजरअंदाज वरना बन सकती है एक्टिव टीबी का बड़ा खतरा

    लेटेंट टीबी को न करें नजरअंदाज वरना बन सकती है एक्टिव टीबी का बड़ा खतरा


    नई दिल्ली:टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस एक संक्रामक बीमारी है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया के कारण होती है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि यह दिमाग, हड्डियों, किडनी और शरीर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। यह बीमारी हवा के जरिए फैलती है और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है

    लेकिन टीबी की एक स्थिति ऐसी भी होती है, जिसे लेटेंट टीबी कहा जाता है। इस स्थिति में टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद तो रहते हैं, लेकिन निष्क्रिय अवस्था में होते हैं। इसका मतलब यह है कि संक्रमित व्यक्ति को कोई लक्षण महसूस नहीं होते और न ही वह दूसरों में संक्रमण फैलाता है

    हर साल विश्व टीबी दिवस 24 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना है। विशेषज्ञों के अनुसार लेटेंट टीबी को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह छुपी हुई स्थिति कभी भी सक्रिय टीबी में बदल सकती हैजब लेटेंट टीबी सक्रिय हो जाती है, तब इसके लक्षण सामने आने लगते हैं। इनमें लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और थकान जैसे संकेत शामिल हैं। इसलिए अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है

    लेटेंट टीबी का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसमें एचआईवी संक्रमित, डायबिटीज के मरीज, कैंसर से पीड़ित लोग या लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं लेने वाले लोग शामिल हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी इसका जोखिम अधिक होता हैविश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी लेटेंट टीबी से प्रभावित है और भारत जैसे देशों में इसका खतरा और अधिक है। इसलिए समय रहते इसकी जांच और इलाज बेहद जरूरी है

    लेटेंट टीबी की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट या ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट किया जाता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर आमतौर पर 3 से 9 महीने तक दवाएं देते हैं, जिससे यह संक्रमण सक्रिय टीबी में बदलने से रोका जा सके

    बचाव के लिए जरूरी है कि अगर परिवार में किसी को लंबे समय तक खांसी, बुखार या अचानक वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो तुरंत जांच कराई जाए। सही समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता हैलेटेंट टीबी एक छिपा हुआ खतरा है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच और उपचार ही इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है

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    Tuberculosis, LatentTB, HealthAwareness, WHO, DiseasePrevention

  • चैत्र नवरात्रि 2026 दुर्गाष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा हर मनोकामना होगी पूर्ण

    चैत्र नवरात्रि 2026 दुर्गाष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा हर मनोकामना होगी पूर्ण


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है और इसके आठवें दिन आने वाली दुर्गाष्टमी या महाष्टमी का विशेष महत्व होता है यह दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी को समर्पित माना जाता है जो शुद्धता शांति और सौभाग्य की प्रतीक हैं इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

    दृक पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होगी और 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी उदय तिथि के अनुसार दुर्गाष्टमी 26 मार्च को मनाई जाएगी इसलिए इस दिन पूजा और कन्या पूजन का विशेष महत्व रहेगा

    दुर्गाष्टमी के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें पूजा के दौरान कुमकुम रोली अक्षत चंदन और पुष्प अर्पित करें तथा घी या कपूर का दीपक जलाएं इसके बाद पूरे श्रद्धा भाव से मां का ध्यान करते हुए उनके मूल मंत्र ॐ देवी महागौर्यै नमः का कम से कम 108 बार जाप करें साथ ही दुर्गा सप्तशती या महागौरी स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है

    मां महागौरी का स्वरूप अत्यंत शांत और दिव्य माना जाता है वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ पर विराजमान रहती हैं उनके चार हाथों में त्रिशूल और डमरू शोभा देते हैं उनकी पूजा करने से जीवन के पापों का नाश होता है मन की शुद्धि होती है और भय तथा नकारात्मकता दूर होती है

    इस दिन मां को सफेद वस्तुएं अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है जैसे खीर नारियल केले पंचामृत और अन्य सात्विक मिठाइयां भोग लगाते समय मंत्र जाप करना चाहिए और बाद में प्रसाद सभी में बांटना चाहिए इससे मां की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है

    दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी अत्यधिक महत्व है इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है उनके पैर धोकर तिलक लगाया जाता है और उन्हें चुनरी फूल मिठाई और दक्षिणा भेंट की जाती है ऐसा करने से मां दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण करती हैं

    इसके अलावा इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से भी जीवन की बाधाएं दूर होती हैं पितृ दोष या कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए चांदी के नाग नागिन की पूजा कर उन्हें नदी में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है साथ ही पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाकर सरसों के तेल का दीपक जलाने से घर में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है

    दुर्गाष्टमी का यह पावन दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और आस्था का प्रतीक है यदि इस दिन पूरी श्रद्धा और नियम के साथ मां महागौरी की पूजा की जाए तो जीवन में शांति सफलता और खुशहाली का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है