Blog

  • चंद्रशेखर के चुनावी दांव से बदले सियासी समीकरण, मेरठ की तीन सीटों पर ASP ने बढ़ाई हलचल

    चंद्रशेखर के चुनावी दांव से बदले सियासी समीकरण, मेरठ की तीन सीटों पर ASP ने बढ़ाई हलचल

    मेरठ। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने 45 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। मेरठ जिले की मेरठ शहर, किठौर और मेरठ कैंट सीटों पर घोषित प्रभारियों को लेकर स्थानीय राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासतौर पर मेरठ शहर और किठौर सीट पर इस फैसले को समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    आसपा प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अहम सीटों पर सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मजबूत चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने किठौर से बाबर चौहान खरदौनी, मेरठ शहर से बदर अली और मेरठ कैंट से संजीव पाल को विधानसभा प्रभारी बनाया है। आमतौर पर पार्टी बाद में इन्हीं प्रभारियों को उम्मीदवार घोषित करती है।

    2027 चुनाव की रणनीति के संकेत
    तीनों सीटों पर अलग-अलग सामाजिक समीकरणों के आधार पर प्रभारियों की नियुक्ति यह संकेत देती है कि आजाद समाज पार्टी इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिर्फ औपचारिक मौजूदगी दर्ज कराने नहीं, बल्कि मजबूत चुनावी मुकाबला करने की तैयारी में है। मेरठ की अन्य चार सीटों—सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और मेरठ दक्षिण—पर भी जल्द प्रभारियों की घोषणा होने की संभावना है।

    हस्तिनापुर से चंद्रशेखर के चुनाव लड़ने की चर्चा
    राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद 2027 का विधानसभा चुनाव हस्तिनापुर (सुरक्षित) सीट से लड़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो मेरठ ही नहीं, पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है। इस सीट से भाजपा के दिनेश खटीक लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से भी कई दावेदार सक्रिय हैं।

    मेरठ शहर में बदर अली पर दांव
    मेरठ शहर सीट पर आसपा ने मुस्लिम समुदाय से आने वाले बदर अली को प्रभारी बनाया है। इस सीट पर मुस्लिम, ब्राह्मण, वैश्य, जैन, पंजाबी और दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्तमान में यहां से समाजवादी पार्टी के रफीक अंसारी विधायक हैं, जिन्होंने 2017 और 2022 में भाजपा प्रत्याशियों को हराकर जीत दर्ज की थी।

    बदर अली पहले युवा सेवा समिति के जरिए सक्रिय राजनीति में आए थे। वर्ष 2023 के नगर निगम चुनाव में उनकी संस्था के पांच पार्षद निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2025 में चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें आजाद समाज पार्टी में शामिल कराया था। माना जा रहा है कि उनके मैदान में आने से विपक्षी वोटों का समीकरण बदल सकता है।

    किठौर में बाबर चौहान से बढ़ी सियासी चुनौती
    किठौर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम, दलित, त्यागी और गुर्जर मतदाता प्रभावशाली हैं। यहां पार्टी ने बाबर चौहान खरदौनी को प्रभारी बनाया है। बाबर पहले समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन स्थानीय राजनीतिक मतभेदों के बाद उन्होंने आसपा का दामन थाम लिया। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार शाहिद मंजूर ने भाजपा के सत्यवीर त्यागी को करीब 2,100 मतों के अंतर से हराया था। ऐसे में बाबर की सक्रियता इस सीट पर मुकाबले को और रोचक बना सकती है।

    मेरठ कैंट में नए सामाजिक समीकरण की कोशिश
    भाजपा के मजबूत गढ़ मानी जाने वाली मेरठ कैंट सीट पर आसपा ने संजीव पाल को जिम्मेदारी सौंपी है। इस सीट पर पंजाबी, वैश्य, ब्राह्मण, क्षत्रिय और दलित मतदाताओं का प्रभाव है। संजीव पाल को आगे कर पार्टी ने दलित-मुस्लिम समीकरण से आगे बढ़ते हुए व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने का संकेत दिया है।

  • पद्मश्री प्रख्यात साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत पंचतत्व में विलीन, भोपाल के भदभदा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

    पद्मश्री प्रख्यात साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत पंचतत्व में विलीन, भोपाल के भदभदा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार


    भोपाल। हिंदी साहित्य जगत के वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और कैलाश चंद्र पंत का शनिवार को पूरे राजकीय सम्मान और श्रद्धा के साथ भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनका शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को भोपाल स्थित निवास पर हृदय गति रुकने से निधन हो गया था। वे 90 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे।

    परिवार की ओर से उनके छोटे भाई चंद्रशेखर पंत ने उनके निधन की जानकारी देते हुए बताया कि कैलाश चंद्र पंत ‘दादा’ ने अंतिम सांस अपने भोपाल स्थित निवास पर ली। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार शनिवार को भदभदा विश्राम घाट पर संपन्न हुआ।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पंत के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति सहित अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य की उल्लेखनीय सेवा की। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

    उत्तराखंड से था पैतृक संबंध
    कैलाश चंद्र पंत का पैतृक गांव उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का खंतोली था। उनका जन्म 26 अप्रैल 1936 को मध्य प्रदेश के महू (इंदौर) में हुआ था। उनके पिता लीलाधर पंत और माता हरिप्रिया पंत रोजगार के सिलसिले में मध्य प्रदेश में आकर बस गए थे।

    उन्होंने अपने शैक्षणिक और साहित्यिक जीवन में इंदौर स्थित यूनियन थियोलॉजिकल सेमिनरी में व्याख्याता तथा भोपाल के पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र में प्राचार्य के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा वे ‘शिक्षा प्रदीप’, ‘जनधर्म’ और ‘दूरगामी आह्वान’ जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन से भी जुड़े रहे।

    इसी वर्ष मिला था पद्मश्री सम्मान
    हिंदी साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वे हिंदी भवन, भोपाल के संचालक रहे और भारत कृषक समाज, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति तथा मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

    उनकी चर्चित कृतियों में ‘कौन किसका आदमी’, ‘धुंध के आर-पार’, ‘शब्द का विचार-पथ’ और ‘शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा’ शामिल हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें साहित्य भूषण सम्मान, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि सम्मान और संस्कृति गौरव सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

  • अमेरिका ने बढ़ाया रक्षा खर्च का दांव, 1.5 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक डिफेंस बजट की तैयारी

    अमेरिका ने बढ़ाया रक्षा खर्च का दांव, 1.5 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक डिफेंस बजट की तैयारी


    वाशिंगटन: अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम कर रहा है। यह प्रस्ताव मंजूर होने पर अमेरिका के इतिहास के सबसे बड़े रक्षा बजटों में से एक होगा और इसका उद्देश्य सेना का आधुनिकीकरण, रक्षा उत्पादन क्षमता में विस्तार तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करना है।

    कैंप डेविड में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैबिनेट बैठक के दौरान हेगसेथ ने कहा कि सरकार केवल रक्षा बजट बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि पेंटागन की कार्यप्रणाली, खरीद प्रक्रिया और सैन्य ढांचे में भी व्यापक सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि रक्षा विभाग को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    रक्षा सचिव ने बताया कि प्रशासन रक्षा कंपनियों को केवल सरकारी फंडिंग पर निर्भर रहने के बजाय निजी निवेश के जरिए अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। उनके अनुसार, अब तक रक्षा उद्योग में लगभग 75 अरब डॉलर का निजी निवेश हो चुका है। इस निवेश का उपयोग नए उत्पादन संयंत्र, आधुनिक उपकरण और नई असेंबली लाइनों की स्थापना में किया जा रहा है, जिससे भविष्य के हथियारों का निर्माण पहले की तुलना में अधिक तेजी से किया जा सकेगा।

    हेगसेथ का कहना है कि इस मॉडल से सरकारी खर्च का बोझ कम होगा और रक्षा कंपनियां अपनी क्षमता बढ़ाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उन्होंने इसे अमेरिकी रक्षा उद्योग को आत्मनिर्भर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उन्होंने सेना में भर्ती को लेकर भी सकारात्मक तस्वीर पेश की। उनके अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिकी सशस्त्र बलों में भर्ती का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन द्वारा योग्यता आधारित व्यवस्था पर जोर देने और सैन्य नेतृत्व को अधिक अधिकार देने के कारण युवाओं का सेना की ओर आकर्षण बढ़ा है।

    हेगसेथ ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में सेना के कई महत्वपूर्ण अभियान संचालित किए गए हैं। इनमें यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई, ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने वाले सैन्य अभियान तथा अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल के खिलाफ अभियान शामिल हैं। उन्होंने इन अभियानों को राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अगले वर्ष 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट की उम्मीद कर रहा है और इसका बड़ा हिस्सा देश में निर्मित सैन्य उपकरणों पर खर्च किया जाएगा। ट्रंप के अनुसार, रक्षा निर्माण से जुड़ी कंपनियां पूरे अमेरिका में नए उत्पादन संयंत्र स्थापित कर रही हैं ताकि सैन्य जरूरतों को तेजी से पूरा किया जा सके।

    व्हाइट हाउस का मानना है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, आधुनिक युद्ध तकनीकों और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अमेरिकी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत करना आवश्यक है। प्रशासन का कहना है कि बढ़ा हुआ रक्षा बजट सैन्य आधुनिकीकरण, घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।

    हालांकि, प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। रक्षा खर्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस में व्यापक चर्चा होने की संभावना है, क्योंकि इसका सीधा असर संघीय बजट और अन्य सरकारी खर्चों पर भी पड़ सकता है।

  • दक्षिणी लेबनान में गहराया जल संकट, 7 लाख से अधिक लोग स्वच्छ पेयजल से वंचित; UN ने जताई गंभीर चिंता

    दक्षिणी लेबनान में गहराया जल संकट, 7 लाख से अधिक लोग स्वच्छ पेयजल से वंचित; UN ने जताई गंभीर चिंता


    नई दिल्ली। दक्षिणी लेबनान में संघर्ष के कारण बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि जल आपूर्ति प्रणाली के क्षतिग्रस्त होने से लाखों लोगों के सामने स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। संघर्ष प्रभावित इलाकों में लौट रहे विस्थापित परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
    दक्षिणी लेबनान में संघर्ष के कारण बुनियादी ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि जल आपूर्ति प्रणाली के क्षतिग्रस्त होने से लाखों लोगों के सामने स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। संघर्ष प्रभावित इलाकों में लौट रहे विस्थापित परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) के अनुसार, दक्षिण लेबनान जल प्राधिकरण द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन में सामने आया है कि दक्षिण और नबातियेह गवर्नरेट्स में जल आपूर्ति प्रणाली को हुए व्यापक नुकसान के कारण 7 लाख से अधिक लोगों की सुरक्षित पेयजल तक पहुंच बाधित हो गई है।

    यूएन का कहना है कि तालाबों, पंपिंग स्टेशनों, बोरहोल और अन्य जल सुविधाओं को हुए नुकसान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इसके कारण न केवल पीने के पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ गया है। कृषि गतिविधियां बाधित होने से हजारों परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

    संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, संघर्ष के बाद अब तक 8.21 लाख से अधिक लोग अपने घरों और समुदायों में लौट चुके हैं, लेकिन करीब 3.60 लाख लोग अब भी विस्थापित हैं। इनमें लगभग 27 हजार लोग सामूहिक राहत शिविरों में रह रहे हैं और उन्हें भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है।

    मानवीय एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि लोगों का अपने घर लौट आना इस बात का संकेत नहीं है कि उनकी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। बड़ी संख्या में घर क्षतिग्रस्त हैं, जल और बिजली जैसी बुनियादी सेवाएं पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी हैं और कई क्षेत्रों में आजीविका के साधन भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे में राहत और पुनर्वास कार्यों में निरंतर निवेश की आवश्यकता है, ताकि प्रभावित समुदाय सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

    इस बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने भी लेबनान में आम नागरिकों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बेरूत में अपने दौरे के समापन पर कहा कि संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं और इनमें से कुछ मामलों को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

    टर्क के अनुसार, घनी आबादी वाले इलाकों में लगातार हवाई हमलों, गोलाबारी और विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हुई है, हजारों लोग घायल हुए हैं और व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि एक स्वतंत्र आकलन मिशन कथित उल्लंघनों से जुड़े साक्ष्य और जानकारियां एकत्र कर रहा है।

    लेबनानी अधिकारियों के हवाले से संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि 2 मार्च से शुरू हुए संघर्ष में 4,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मृतकों में 135 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी तथा कई पत्रकार और मीडिया कर्मी भी शामिल हैं।

    संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता, जल आपूर्ति व्यवस्था की बहाली और पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि लाखों लोगों को सुरक्षित पेयजल और आवश्यक सेवाएं दोबारा उपलब्ध कराई जा सकें।

  • कैलिफोर्निया में क्रैश हुआ अमेरिका का एफ-35बी स्टील्थ फाइटर जेट, पायलट सुरक्षित; हादसे की जांच शुरू

    कैलिफोर्निया में क्रैश हुआ अमेरिका का एफ-35बी स्टील्थ फाइटर जेट, पायलट सुरक्षित; हादसे की जांच शुरू


    नई दिल्ली। अमेरिका के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल एफ-35बी स्टील्थ फाइटर जेट कैलिफोर्निया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स अधिकारियों ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि यह दुर्घटना सैन डिएगो स्थित मरीन कॉर्प्स एयर स्टेशन मिरामार के पास हुई। राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा और पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 10 बजे हुआ। विमान में मौजूद पायलट ने खतरा भांपते हुए समय रहते इजेक्ट कर लिया, जिसके कारण उसकी जान बच गई। प्राथमिक उपचार के बाद उसे चिकित्सकीय जांच के लिए मेडिकल सुविधा में भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि पायलट की स्थिति सुरक्षित है।

    मरीन कॉर्प्स एयर स्टेशन मिरामार के प्रवक्ता ने कहा कि एफ-35बी लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि की गई है। उन्होंने बताया कि पायलट ने सफलतापूर्वक इजेक्शन किया और बचाव दल ने उसे सुरक्षित निकाल लिया। फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त विमान थर्ड मरीन एयरक्राफ्ट विंग के मरीन एयरक्राफ्ट ग्रुप-11 को आवंटित था। यह विमान नियमित सैन्य गतिविधियों के तहत उड़ान पर था। शुरुआती जानकारी में किसी तकनीकी खराबी या अन्य कारण की पुष्टि नहीं की गई है।

    एफ-35बी दुनिया के सबसे आधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग क्षमता है। यही कारण है कि अमेरिकी मरीन कॉर्प्स इसका इस्तेमाल उन इलाकों में भी कर सकती है, जहां सामान्य लड़ाकू विमान आसानी से संचालन नहीं कर सकते। स्टील्थ तकनीक से लैस यह विमान दुश्मन के रडार से बचने, आधुनिक सेंसर और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के कारण अमेरिका की सैन्य ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    मरीन कॉर्प्स एयर स्टेशन मिरामार अमेरिका के प्रमुख सैन्य एयरबेस में से एक है। यहां अमेरिकी सेना की विभिन्न शाखाओं के लगभग 15 हजार सैन्यकर्मी तैनात रहते हैं और यह बेस कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों तथा प्रशिक्षण गतिविधियों का केंद्र है।

    हाल के महीनों में अमेरिका में सैन्य विमानों से जुड़े कई हादसे सामने आए हैं। जून की शुरुआत में वाशिंगटन राज्य में एक सैन्य लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिससे जंगल में आग लग गई थी। उस हादसे में भी पायलट समय रहते विमान से बाहर निकलने में सफल रहा था और उसे केवल मामूली चोटें आई थीं।

    इसी तरह मई में पश्चिमी अलबामा के फेयेट काउंटी में अमेरिकी वायुसेना का टी-38 टैलोन-2 प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस घटना में भी दोनों पायलट सुरक्षित बच गए थे। हादसे के बाद एयर फोर्स सेफ्टी इन्वेस्टिगेशन बोर्ड ने जांच शुरू की थी।

    एफ-35बी के ताजा हादसे ने एक बार फिर अमेरिका के उन्नत सैन्य विमानों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

  • ITR Filing 2026: आखिरी दिन उमड़ी करदाताओं की भीड़, एक दिन में 40 लाख से ज्यादा रिटर्न जमा

    ITR Filing 2026: आखिरी दिन उमड़ी करदाताओं की भीड़, एक दिन में 40 लाख से ज्यादा रिटर्न जमा


    नई दिल्ली। आयकर रिटर्न दाखिल करने को लेकर इस साल करदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। आयकर विभाग के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 जुलाई की अंतिम समय सीमा तक देशभर में 5.9 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किए गए हैं। विभाग ने समय पर रिटर्न दाखिल करने वाले सभी करदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि समय पर किया गया कर अनुपालन देश की आर्थिक प्रगति में अहम योगदान देता है।

    आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल हुए हैं। विभाग ने करदाताओं के विश्वास और समय पर अनुपालन को भारत की विकास यात्रा को गति देने वाला कदम बताया।

    आंकड़ों के मुताबिक, आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तारीख यानी 31 जुलाई को ही 40 लाख से ज्यादा रिटर्न जमा किए गए। यह तारीख उन व्यक्तिगत करदाताओं और ऐसी संस्थाओं के लिए निर्धारित थी, जिन्हें अपने खातों का अनिवार्य ऑडिट नहीं कराना होता है।

    अंतिम दिनों में तेजी से बढ़ी रिटर्न फाइलिंग की रफ्तार

    इस साल आईटीआर दाखिल करने की रफ्तार अंतिम कुछ हफ्तों में काफी तेज रही। आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 11 जुलाई तक 1.7 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल हो चुके थे। इसके बाद 22 जुलाई तक यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ के पार पहुंच गई।

    27 जुलाई तक 4 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए गए, जबकि 31 जुलाई को यह आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए 5 करोड़ के पार पहुंच गया। दिन खत्म होने से पहले रिटर्न की संख्या 5.5 करोड़ से ज्यादा हो गई और आखिरकार यह आंकड़ा 5.9 करोड़ के स्तर को पार कर गया।

    करदाताओं से पहले ही रिटर्न दाखिल करने की अपील

    आयकर विभाग लगातार करदाताओं से अपील करता रहा कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और समय रहते अपना रिटर्न दाखिल कर दें। विभाग का कहना था कि आखिरी समय में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक के कारण तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से करदाताओं को जुर्माने और अन्य परेशानियों से बचने में मदद मिलती है। साथ ही, टैक्स व्यवस्था भी अधिक सुचारू रूप से संचालित होती है।

    आईटीआर फॉर्म में किए गए बदलाव

    आकलन वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने संशोधित आईटीआर फॉर्म जारी किए थे। इनमें दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ, शेयर बायबैक से होने वाले नुकसान, कुछ ट्रेडिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय जानकारियों के खुलासे से जुड़े नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

    इन बदलावों का उद्देश्य टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और करदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाना है। नए प्रावधानों के जरिए आय और निवेश से जुड़ी जानकारियों को अधिक स्पष्ट तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।

    पिछले साल भी बढ़ा था टैक्स अनुपालन

    पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिला था। उस दौरान 9 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना आईटीआर दाखिल किया था। इसी अवधि में आयकर विभाग ने 4.35 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का टैक्स रिफंड जारी किया था। यह आंकड़ा देश में प्रत्यक्ष कर व्यवस्था के बढ़ते विस्तार और आयकर विभाग की कार्यक्षमता को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती आईटीआर फाइलिंग से देश में टैक्स अनुपालन की संस्कृति मजबूत हो रही है। डिजिटल माध्यम से आसान हुई प्रक्रिया और आयकर विभाग की ऑनलाइन सेवाओं ने भी करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

  • जुलाई में शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़े करीब 2 फीसदी; आईटी शेयरों का दबदबा

    जुलाई में शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़े करीब 2 फीसदी; आईटी शेयरों का दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने जुलाई 2026 में मजबूती का प्रदर्शन किया। घरेलू और वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव के बीच प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया। जुलाई महीने में दोनों बेंचमार्क इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। महीने के आखिरी कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,094.64 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.27 प्रतिशत बढ़कर 24,383.60 अंक के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    जुलाई में निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स ने 2.53 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.81 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि निवेशकों का भरोसा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी।

    आईटी सेक्टर ने मारी बाजी

    जुलाई महीने में सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी सेक्टर सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 16.77 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई और यह महीने का सबसे बड़ा गेनर बना। विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े वैश्विक रुझानों के बीच आईटी कंपनियों में दोबारा खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा पहली तिमाही के बेहतर नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

    आईटी के अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 9.96 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 9.49 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 8.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 8.55 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। वहीं निफ्टी फार्मा में 4.77 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज में 2.50 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 1.60 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    इन सेक्टरों में रही कमजोरी

    जहां कई सेक्टरों ने शानदार प्रदर्शन किया, वहीं कुछ क्षेत्रों में दबाव भी देखने को मिला। जुलाई में निफ्टी एनर्जी इंडेक्स 2.54 प्रतिशत गिरावट के साथ सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.98 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.48 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.46 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    इन शेयरों ने निवेशकों को दिया बड़ा फायदा

    जुलाई में कई कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। कल्याण ज्वैलर्स इंडिया के शेयर में 60 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया। इसके अलावा ई-क्लार्क्स सर्विसेज, सीई इन्फो सिस्टम्स, लोढ़ा डेवलपर्स, एचईजी, इन्फो एज (इंडिया), एटीएम, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसे शेयरों में भी करीब 50 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।

    हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट भी देखने को मिली। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, बंधन बैंक, थर्मैक्स, तेजस नेटवर्क्स, सुजलॉन एनर्जी, जीई वर्नोवा टीएंडडी इंडिया, सीमेंस एनर्जी इंडिया और गुजरात एनर्जी जैसी कंपनियों के बाजार मूल्य में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    आगे बाजार की दिशा पर नजर

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई में चुनिंदा शेयरों में तेजी के पीछे कंपनियों के तिमाही नतीजे और आईटी सेक्टर में बढ़ी खरीदारी प्रमुख कारण रहे। वैश्विक स्तर पर एआई से जुड़े शेयरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के तिमाही परिणाम, वैश्विक बाजारों की चाल, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेगा।

  • August Financial Rules: अगस्त में लागू होंगे कई बड़े बदलाव, टैक्स से लेकर बैंकिंग तक बदलेंगे नियम

    August Financial Rules: अगस्त में लागू होंगे कई बड़े बदलाव, टैक्स से लेकर बैंकिंग तक बदलेंगे नियम


    नई दिल्ली। अगस्त 2026 की शुरुआत आम लोगों और टैक्सपेयर्स के लिए कई महत्वपूर्ण वित्तीय बदलाव लेकर आई है। इस महीने आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तारीख से लेकर बैंकिंग नियमों, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों, रेलवे टिकट व्यवस्था और क्रेडिट-डेबिट कार्ड शुल्क में कई बदलाव लागू किए गए हैं। ऐसे में इन नए नियमों की जानकारी रखना जरूरी है, ताकि किसी तरह के जुर्माने या अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके।

    अगस्त का सबसे बड़ा वित्तीय अपडेट आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख को लेकर है। जिन करदाताओं को आईटीआर-3 या आईटीआर-4 दाखिल करना है और जिन पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं होता, उनके लिए 31 अगस्त 2026 तक रिटर्न जमा करना जरूरी है। इसमें छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर, स्वरोजगार करने वाले पेशेवर और धारा 44एडी व 44एडीए के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्स स्कीम चुनने वाले लोग शामिल हैं।

    यदि करदाता तय समय सीमा तक अपना आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं तो आयकर कानून की धारा 234एफ के तहत अधिकतम 5 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, यदि कोई टैक्स बकाया है तो देरी की स्थिति में धारा 234ए के तहत ब्याज भी देना पड़ सकता है।

    आरबीआई की बैठक पर रहेंगी सबकी नजरें

    अगस्त में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक भी होने वाली है। यह बैठक 3 अगस्त से 5 अगस्त तक चलेगी और 5 अगस्त को नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी। हालांकि तत्काल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, लेकिन रेपो रेट और ब्याज दरों को लेकर आरबीआई का रुख आने वाले समय में होम लोन की ईएमआई, बैंक लोन और फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों को प्रभावित कर सकता है।

    रेलवे में तत्काल टिकट बुकिंग का नया नियम

    भारतीय रेलवे ने 1 अगस्त से रिजर्वेशन काउंटरों पर तत्काल टिकट बुकिंग के लिए टोकन सिस्टम लागू कर दिया है। इसका उद्देश्य टिकट काउंटरों पर भीड़ को नियंत्रित करना और बुकिंग प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है।

    इसके अलावा रेलवे ने यात्रियों के लिए एक नई डिजिटल सुविधा भी शुरू की है। अब यात्री टिकट बुक करते समय ही अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान कर सकेंगे। इससे यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने से पहले अलग से पार्सल कार्यालय जाने की परेशानी नहीं होगी।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता

    तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की है। अगस्त से दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 202 रुपए और कोलकाता में 209 रुपए तक सस्ता हो गया है। हालांकि घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    क्रेडिट और डेबिट कार्ड नियमों में बदलाव

    अगस्त से कई बैंकों ने अपने क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़े शुल्क और सुविधाओं में बदलाव किए हैं। एक्सिस बैंक ने अपने प्रीमियम बर्गंडी मैग्नस क्रेडिट कार्ड के नियमों में संशोधन किया है। 28 अगस्त से डायनेमिक करेंसी कन्वर्जन (डीसीसी) शुल्क 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया जाएगा। इसके अलावा टोल भुगतान और गिफ्ट कार्ड खरीद पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स बंद किए जाएंगे। घरेलू एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के नियमों में भी बदलाव किया गया है।

    एक्सिस बैंक के प्रेस्टिज डेबिट कार्ड पर मिलने वाले बीमा लाभ के लिए अब ग्राहकों को बीमा घटना से 30 दिन पहले कम से कम एक पात्र डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन करना होगा। पहले यह अवधि 90 दिन थी। वहीं डेबिट कार्ड पर डीसीसी शुल्क 1.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत किया जाएगा।

    कोटक महिंद्रा बैंक ने भी डेबिट कार्ड पर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए डीसीसी शुल्क बढ़ा दिया है। अब ग्राहकों को विदेशों में होने वाले लेनदेन पर 3.5 प्रतिशत प्लस जीएसटी शुल्क देना होगा, जबकि पहले यह शुल्क 1 प्रतिशत प्लस जीएसटी था।

    बैंकिंग सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव

    अगस्त से कुछ बैंकों ने एसएमएस अलर्ट और अन्य सेवाओं के शुल्क में भी संशोधन किया है। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने एसएमएस अलर्ट शुल्क को बदलते हुए प्रति संदेश 30 पैसे कर दिया है। हालांकि इसके लिए मासिक सीमा भी तय की गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अगस्त में लागू हुए ये बदलाव टैक्स, बैंकिंग खर्च, यात्रा और रोजमर्रा के वित्तीय फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों और टैक्सपेयर्स को अपने बैंक और वित्तीय संस्थानों से नए नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए, ताकि अतिरिक्त शुल्क और असुविधा से बचा जा सके।

  • UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार

    UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कुल 23.66 अरब यानी 2366 करोड़ से ज्यादा यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। वहीं, इन डिजिटल लेनदेन का कुल मूल्य 19 प्रतिशत बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में हर दिन औसतन 76.3 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन किए गए। वहीं, प्रतिदिन औसतन 96,383 करोड़ रुपए का डिजिटल भुगतान यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में लोग तेजी से नकदी आधारित भुगतान से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं।

    इससे पहले जून 2026 में भी यूपीआई ने शानदार प्रदर्शन किया था। जून में यूपीआई के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जो पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक थे। इस दौरान कुल लेनदेन राशि 28.92 लाख करोड़ रुपए रही थी। जून में रोजाना औसतन 75.7 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे।

    सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई के जरिए 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपए था। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में लेनदेन की संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ और कुल मूल्य 139.15 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।

    वित्त वर्ष 2023-24 में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 13,112.95 करोड़ रही, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 199.95 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यूपीआई के जरिए 18,586.60 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनका कुल मूल्य बढ़कर 260.56 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    डिजिटल भुगतान के इस विस्तार को भारत की वित्तीय समावेशन नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यूपीआई ने छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े कारोबारियों तक भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाया है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में होने वाले भुगतान ने देश में डिजिटल लेनदेन की संस्कृति को तेजी से बढ़ावा दिया है।

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में लोकसभा में बताया था कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक को दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। एनआईपीएल कई देशों के साथ साझेदारी कर भारतीय भुगतान प्रणाली के वैश्विक विस्तार को बढ़ावा दे रही है।

    इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के चलते भारतीय नागरिक विदेशों में भी यूपीआई आधारित भुगतान कर पा रहे हैं। साथ ही, अन्य देशों को भी रियल टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करने में मदद मिल रही है। वर्तमान में यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है।

    तेजी से बढ़ते यूपीआई उपयोग से साफ है कि भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है। आने वाले समय में यूपीआई के और अधिक देशों तक विस्तार की संभावना है, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • अब समुद्र से निकलेगी ऊर्जा की नई ताकत, 'समुद्र मंथन' योजना से आयात बिल घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की तैया

    अब समुद्र से निकलेगी ऊर्जा की नई ताकत, 'समुद्र मंथन' योजना से आयात बिल घटाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की तैया


    नई दिल्ली। भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नई समुद्र मंथन योजना का उद्देश्य देश में गहरे समुद्री क्षेत्रों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को नई रफ्तार देना है। सरकार का मानना है कि इस महत्वाकांक्षी योजना से आने वाले वर्षों में भारत की विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत बनेगी।

    भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। हर साल देश को कच्चे तेल के आयात पर करीब 144 अरब डॉलर यानी लगभग 13 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल आयात आधारित व्यवस्था पर लंबे समय तक निर्भर रहना देश के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं हो सकता। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने पर फोकस किया है।

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 84084 करोड़ रुपए की लागत वाली राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना समुद्र मंथन को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी और इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा ऑफशोर तेल एवं गैस अन्वेषण अभियान माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल नए भंडार तलाशना नहीं बल्कि ऐसा मजबूत तंत्र तैयार करना है जो भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की नींव रख सके।

    योजना के तहत बेहतर भू वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा ताकि संभावित तेल और गैस क्षेत्रों की सटीक पहचान हो सके। साथ ही जोखिम साझा करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अधिक निवेश के लिए आगे आएं। साझा बुनियादी ढांचे और घरेलू विनिर्माण क्षमता को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि अन्वेषण और उत्पादन की लागत कम हो तथा परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज हो सके।

    सरकार का कहना है कि वर्ष 2014 के बाद से हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए गए हैं। पहले जिन क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज की अनुमति नहीं थी उनमें से 99 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रों को खोल दिया गया है। इससे भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र के 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक हिस्से में पहली बार अन्वेषण का रास्ता साफ हुआ है। इसके अलावा प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट की जगह रेवेन्यू शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट लागू कर प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है।

    सरकार ने ऑयलफील्ड्स रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट संशोधन अधिनियम 2025 और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम 2025 जैसे सुधारों के जरिए कानूनी और नियामकीय ढांचे को भी आधुनिक बनाया है। कारोबार करने में आसानी बढ़ाने विवाद समाधान को मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। वहीं ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के प्रदर्शन मूल्यांकन में भी अब तेल और गैस खोज गतिविधियों को अधिक महत्व दिया जाएगा।

    सरकार का विश्वास है कि समुद्र मंथन योजना केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी विदेशी मुद्रा की बचत होगी आयात बिल में कमी आएगी और देश आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर अधिक तेजी से आगे बढ़ सकेगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह योजना भारत के ऊर्जा भविष्य को मजबूत बनाने वाली एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल साबित हो सकती है।