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  • ‘अरे! कम से कम एक साल का समय दीजिए’; TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का तंज

    ‘अरे! कम से कम एक साल का समय दीजिए’; TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का तंज


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को समयसीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया है। इस आदेश पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने तंज कसा है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने व्यंग्य करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में कम से कम एक साल का समय दिया जाना चाहिए था।

    दरअसल, TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए।

    सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में दलीलें पूरी करने को कहा

    सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। इसके बाद चुनाव आयोग को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के तीन महीने के भीतर विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी तौर पर करीब चार महीने की समयसीमा तय हुई है।

    पीठ ने कहा कि दोनों पक्ष चार सप्ताह के भीतर अपने हलफनामे, अतिरिक्त हलफनामे और अन्य जरूरी सामग्री रिकॉर्ड पर रखें। इसके बाद चुनाव आयोग मामले पर निर्णय लेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई असाधारण कठिनाई सामने आती है तो आयोग दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।

    चुनाव आयोग ने मांगा था छह महीने का समय

    सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि ऐसे विवादों में बड़ी संख्या में दस्तावेज और हलफनामे जमा होते हैं, जिनकी जांच में समय लगता है। आयोग की ओर से मामले का फैसला करने के लिए छह महीने का समय मांगा गया था।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने की मांग स्वीकार नहीं की। पीठ ने तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना।

    क्या है पूरा विवाद?

    TMC में संगठनात्मक विवाद के बाद दो गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने विवाद का अंतिम निपटारा होने तक दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न के इस्तेमाल से रोकते हुए अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और प्रतीक दिए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश इसी विवाद के अंतिम निपटारे की समयसीमा से जुड़ा है। अब दोनों पक्षों को चार सप्ताह में चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष पूरा करना होगा और उसके बाद आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा।

  • 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आमने सामने होंगी दो बिल्कुल अलग फिल्में ‘दृश्यम 3’ के सामने रिलीज होगी ‘प्रेम कीटाणु’

    2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आमने सामने होंगी दो बिल्कुल अलग फिल्में ‘दृश्यम 3’ के सामने रिलीज होगी ‘प्रेम कीटाणु’


    नई दिल्ली। 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के मौके पर सिनेमाघरों में दर्शकों को दो बिल्कुल अलग तरह की फिल्मों का सामना होने वाला है। एक तरफ अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ रिलीज होने जा रही है तो दूसरी ओर ‘प्रेम कीटाणु’ दर्शकों को रोमांस और कॉमेडी का हल्का फुल्का अनुभव देने के लिए तैयार है। दोनों फिल्मों की कहानी और जॉनर एक दूसरे से काफी अलग हैं। ऐसे में लंबे वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस पर इनकी रिलीज को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    ‘दृश्यम 3’ की बात करें तो यह ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी है और कहानी को एक अहम पड़ाव तक ले जाने वाली फिल्म के तौर पर पेश की जा रही है। फिल्म में एक बार फिर विजय सालगांवकर का किरदार केंद्र में है। विजय का किरदार अपनी चालाकी और परिस्थितियों से निकलने की क्षमता के लिए जाना जाता है। पिछली फिल्मों में दिखाई गई घटनाओं के बाद अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि कहानी आखिर किस मोड़ पर पहुंचेगी और विजय के सामने इस बार कौन सी नई चुनौती खड़ी होगी।

    फिल्म में सस्पेंस के साथ फैमिली ड्रामा भी देखने को मिलेगा। ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की पिछली फिल्मों से जुड़े दर्शकों के लिए यह फिल्म इसलिए भी खास है क्योंकि इसे कहानी के अंतिम पड़ाव से जोड़कर देखा जा रहा है। अजय देवगन के अलावा फिल्म में फ्रेंचाइजी से जुड़े कई अहम कलाकार नजर आएंगे। यही वजह है कि फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है।

    वहीं ‘प्रेम कीटाणु’ पूरी तरह अलग माहौल वाली फिल्म है। यह एक रोमांटिक कॉमेडी है जिसकी कहानी उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर खासकर गुड़गांव के माहौल में आगे बढ़ती है। फिल्म में प्यार दोस्ती कॉलेज लाइफ और युवाओं की जिंदगी में आने वाली उलझनों को हल्के फुल्के अंदाज में दिखाने की कोशिश की गई है। फिल्म में वीर पहाड़िया आफिया सईद अपारशक्ति खुराना राकेश बेदी और निखिल विजय अहम भूमिकाओं में हैं।

    ‘प्रेम कीटाणु’ का निर्देशन अपूर्व सिंह कार्की ने किया है। इससे पहले वह ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ जैसी फिल्म का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म की कहानी और ट्रीटमेंट को देखते हुए इसका फोकस खासतौर पर युवा दर्शकों और रोमांटिक कॉमेडी पसंद करने वाले लोगों पर नजर आता है।

    दोनों फिल्मों के दर्शक वर्ग में बड़ा अंतर है। ‘दृश्यम 3’ जहां क्राइम थ्रिलर सस्पेंस और फैमिली ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों को आकर्षित कर सकती है वहीं ‘प्रेम कीटाणु’ का झुकाव युवाओं कॉलेज स्टूडेंट्स और हल्की फुल्की प्रेम कहानी पसंद करने वाले दर्शकों की ओर है।

    बॉक्स ऑफिस पर किस फिल्म को दर्शकों से कैसी प्रतिक्रिया मिलती है यह रिलीज के बाद सामने आएगा। शुरुआती प्रदर्शन के साथ दर्शकों की प्रतिक्रिया और समीक्षाओं का असर आगे की कमाई पर पड़ सकता है। फिलहाल 2 अक्टूबर का दिन फिल्म प्रेमियों के लिए खास होने वाला है क्योंकि एक ही दिन सस्पेंस और रोमांटिक कॉमेडी के दो अलग रंग सिनेमाघरों में देखने को मिलेंगे।

  • ट्रंप प्रशासन की चुनावी शर्तों पर कोर्ट की रोक, एंटी-टेरर फंडिंग को चुनावी बदलावों से जोड़ने पर फटकार

    ट्रंप प्रशासन की चुनावी शर्तों पर कोर्ट की रोक, एंटी-टेरर फंडिंग को चुनावी बदलावों से जोड़ने पर फटकार


    वाशिंगटन। अमेरिका में चुनावी नियमों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। वॉशिंगटन डीसी के अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमीर एच. अली ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर रोक लगा दी, जिसके तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को मिलने वाली आतंकवाद-रोधी (एंटी-टेरर) फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव से जोड़ा गया था। 28 सितंबर को दिए गए 24 पेज के फैसले में अदालत ने कहा कि संघीय एजेंसियों के पास कांग्रेस से मिली ऐसी शर्तें लगाने की वैधानिक अनुमति नहीं थी।

    यह मामला करीब 1.1 अरब डॉलर के Homeland Security Grant Program से जुड़ा है। इस कार्यक्रम के तहत राज्यों और स्थानीय सरकारों को आतंकवादी हमलों और अन्य सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए फंड दिया जाता है। ट्रंप प्रशासन ने फंडिंग की शर्तों में चुनाव संबंधी कई बदलाव शामिल किए थे। इनमें कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को हाथ से चिह्नित पेपर बैलेट से बदलना, चुनाव परिणामों के मैनुअल ऑडिट और मतदाता सूची में नागरिकता की जांच जैसी शर्तें शामिल थीं।

    20 फीसदी फंड रोकने की थी शर्त

    FEMA की ओर से जारी फंडिंग नियमों में कहा गया था कि तय चुनावी शर्तों को पूरा नहीं करने वाले राज्यों और शहरी क्षेत्रों की करीब 20 फीसदी ग्रांट राशि रोकी जा सकती है। शर्तों में मतदाताओं और चुनावकर्मियों की नागरिकता की जांच के लिए संघीय डेटाबेस के इस्तेमाल तथा मतदान प्रणाली और चुनावी ऑडिट में बदलाव जैसी आवश्यकताएं शामिल थीं।

    प्रशासन का तर्क था कि इन बदलावों का उद्देश्य चुनावों को विदेशी हस्तक्षेप और साइबर हमलों से सुरक्षित करना है। हालांकि, स्थानीय सरकारों ने अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि FEMA को आतंकवाद-रोधी फंड के बदले चुनावी व्यवस्था में बदलाव कराने का अधिकार नहीं है।

    जज बोले- FEMA को चुनावी नियम तय करने का अधिकार नहीं

    जज अमीर अली ने अपने फैसले में कहा कि कांग्रेस ने FEMA को आतंकवाद और अन्य सुरक्षा खतरों से महत्वपूर्ण ढांचे की रक्षा के लिए अनुदान देने का अधिकार दिया है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल चुनाव प्रशासन के नियम तय करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, चुनावी बदलावों की शर्तें उस ग्रांट के मूल उद्देश्य से पर्याप्त रूप से जुड़ी हुई नहीं थीं।

    अदालत ने इस तरह FEMA को एंटी-टेरर ग्रांट के जरिए राज्यों और स्थानीय निकायों पर चुनावी बदलाव लागू कराने से रोक दिया।

    ओहायो, टेनेसी और टेक्सास के स्थानीय निकायों ने की थी चुनौती

    यह मुकदमा ओहायो के कोलंबस, टेनेसी के नैशविल और डेविडसन काउंटी तथा टेक्सास की हैरिस, एल पासो, ट्रैविस और डलास काउंटी समेत स्थानीय सरकारों की ओर से दायर किया गया था। उनका आरोप था कि DHS और FEMA ने कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों से आगे जाकर चुनाव प्रशासन को प्रभावित करने की कोशिश की।

    अदालत का फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों को लेकर संघीय सरकार और राज्यों के बीच कई कानूनी विवाद चल रहे हैं। इस मामले में अदालत ने फिलहाल यह स्पष्ट कर दिया है कि एंटी-टेररिज्म फंडिंग को चुनावी नियमों में बदलाव की शर्त से जोड़ने के लिए FEMA को कांग्रेस की ओर से पर्याप्त वैधानिक अधिकार नहीं मिला था।

  • ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी टूट, 100 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल, उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

    ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी टूट, 100 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल, उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए उपचुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मालदा के महीष बाथानी क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े 100 से अधिक नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। इनमें 13 पंचायत सदस्य, एक पंचायत समिति सदस्य, पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष, ब्लॉक उपाध्यक्ष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं।

    यह दल-बदल ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। महीष बाथानी क्षेत्र में रविवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में तृणमूल समर्थकों ने कांग्रेस का दामन थामा। इस दौरान कांग्रेस के जिला और प्रदेश स्तर के नेता तथा एक पूर्व विधायक भी मौजूद रहे।

    महीष बाथानी क्षेत्र को पहले कांग्रेस का मजबूत इलाका माना जाता था। हालांकि, ममता बनर्जी के राजनीतिक प्रभाव के बढ़ने के बाद यहां तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव मजबूत हुआ। अब बड़ी संख्या में तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में जाने से क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    तृणमूल कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले शराफत अली ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए कांग्रेस के साथ आना जरूरी है। उन्होंने क्षेत्रीय दल के तौर पर तृणमूल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ संघर्ष करने की बात कही।

    पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर उपचुनाव होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई है। दूसरी ओर रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर के नौदा सीट बरकरार रखने के कारण खाली हुई। रेजीनगर से उनके बेटे चुनाव मैदान में हैं।

    ममता बनर्जी के गुट ने रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, नंदीग्राम को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रही हैं। ममता बनर्जी के गुट की ओर से यह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने की पेशकश किए जाने की बात सामने आई थी, जबकि रेजीनगर में समर्थन मांगे जाने का भी जिक्र हुआ। कांग्रेस ने दोनों सीटों पर समर्थन देने की मांग को स्वीकार नहीं किया।

    नंदीग्राम सीट पर ममता गुट के उम्मीदवार के तौर पर नामित संचिता प्रधान डे ने नाम वापस ले लिया है। इसके चलते इस सीट पर ममता गुट के पास फिलहाल कोई उम्मीदवार नहीं है।

    इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी मामला चल रहा है। चुनाव आयोग ने तृणमूल नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को फ्रीज किया हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को अंतिम फैसला लेने के लिए समयसीमा तय की है।

    अदालत ने संबंधित पक्षों को हलफनामे और अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर फैसला लेने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से समय लगने की दलील दी गई, जिस पर अदालत ने निर्धारित अवधि में फैसला लेने को कहा। अदालत ने इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद लेने का सुझाव भी दिया है।

  • नदी किनारे हो रही रहस्यमयी मौतों ने बढ़ाया खौफ 7 एपिसोड की इस सीरीज में हर मोड़ पर मिलेगा नया ट्विस्ट

    नदी किनारे हो रही रहस्यमयी मौतों ने बढ़ाया खौफ 7 एपिसोड की इस सीरीज में हर मोड़ पर मिलेगा नया ट्विस्ट


    नई दिल्ली।अगर आपको क्राइम थ्रिलर और साइकोलॉजिकल सस्पेंस से भरपूर कहानियां पसंद हैं तो ओटीटी पर मौजूद एक ऐसी सीरीज आपका ध्यान खींच सकती है जिसमें रहस्यमयी मौतों के साथ लोककथाओं और जंगली मगरमच्छों का खौफ भी देखने को मिलता है। इस सीरीज का नाम राक्षसा है। कहानी नॉर्थ कर्नाटक की पृष्ठभूमि में बुनी गई है जहां मालाप्रभा नदी के आसपास कुछ रहस्यमयी मौतें होने लगती हैं। इन घटनाओं के बाद इलाके के लोगों में डर का माहौल बन जाता है और गांव वाले इन मौतों को पुरानी लोककथाओं तथा मगरमच्छों के हमलों से जोड़कर देखने लगते हैं।

    कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा पुलिस जांच और स्थानीय मान्यताओं के बीच पैदा होने वाला टकराव है। सीरीज में विजय राघवेंद्र सब इंस्पेक्टर हनमप्पा की भूमिका निभा रहे हैं। यह उनका ओटीटी डेब्यू बताया गया है। हनमप्पा अंधविश्वास और श्राप जैसी बातों पर आसानी से विश्वास नहीं करता। वह हर घटना को तर्क और सबूतों के आधार पर समझने की कोशिश करता है। उसका जोर घटनाओं की सही टाइमलाइन और उपलब्ध सबूतों पर रहता है।

    जैसे जैसे हनमप्पा इस रहस्यमयी मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश करता है वैसे वैसे कहानी में कई नए सवाल खड़े होने लगते हैं। एक तरफ उसके सामने लगातार सामने आ रही मौतों की गुत्थी है तो दूसरी तरफ उसकी निजी जिंदगी भी कई जिम्मेदारियां लेकर खड़ी है। उसकी पत्नी प्रेग्नेंट है और ऐसे समय में उसे अपने परिवार के साथ साथ अपने पुलिस के काम पर भी पूरा ध्यान देना पड़ता है। यही दोहरी जिम्मेदारी उसके किरदार को और दिलचस्प बनाती है।

    राक्षसा की खासियत इसका छोटा और तेज रफ्तार फॉर्मेट भी है। सीरीज में कुल 7 एपिसोड हैं और हर एपिसोड लगभग 20 से 22 मिनट का है। कम समय में कहानी को आगे बढ़ाने के कारण दर्शकों को लगातार नए घटनाक्रम देखने को मिलते हैं। एक रहस्य सामने आने के बाद दूसरा सवाल खड़ा हो जाता है और यही सिलसिला दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है।

    यह सीरीज जी5 पर देखी जा सकती है। इसकी आईएमडीबी रेटिंग 7.2 बताई गई है। सीरीज का निर्देशन सुहान प्रदास ने किया है। इसमें विजय राघवेंद्र के साथ अविनाश और मयूरी क्यातरी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। इसे थरुन सुधीर ने प्रोड्यूस किया है जबकि कहानी और लेखन की जिम्मेदारी सुहान प्रसाद ने अपूर्वा कुमार के साथ संभाली है।

    राक्षसा को तमिल वेब सीरीज विलंगू का कन्नड़ अडैप्शन बताया गया है। हालांकि इसे हूबहू कॉपी करने के बजाय कन्नड़ दर्शकों और स्थानीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यही वजह है कि कहानी में स्थानीय माहौल और लोकविश्वासों की झलक भी दिखाई देती है। अगर आपको रहस्यमयी मौतें पुलिस जांच सस्पेंस और लगातार आने वाले ट्विस्ट पसंद हैं तो राक्षसा आपके लिए एक दिलचस्प क्राइम थ्रिलर साबित हो सकती है।

  • केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, अडानी को ‘भाई’ और जय शाह को ‘भतीजा’ बताते हुए लगाए कई गंभीर आरोप

    केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, अडानी को ‘भाई’ और जय शाह को ‘भतीजा’ बताते हुए लगाए कई गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि नई सरकार के आने के बाद भाई-भतीजावाद खत्म होगा और देश में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केजरीवाल ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भाई-भतीजावाद का सबसे बड़ा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद हैं।

    केजरीवाल ने कहा कि मोदी का एक ‘भाई’ है, जिसका नाम अडानी है। उनके मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में अगर किसी एक व्यक्ति ने सबसे ज्यादा आर्थिक तरक्की की है तो वह अडानी हैं। इसी तरह उन्होंने जय शाह को प्रधानमंत्री का ‘भतीजा’ बताते हुए कहा कि इस अवधि में किसी युवा ने सबसे ज्यादा तरक्की की है तो वह जय शाह हैं। केजरीवाल ने इन उदाहरणों के आधार पर मोदी सरकार पर भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

    उन्होंने कहा कि 12 साल के शासन के बाद जनता को यह देखना चाहिए कि उसे क्या हासिल हुआ। केजरीवाल ने दावा किया कि इस दौरान मीडिया और चुनाव व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। उन्होंने राजनीतिक दल बदलने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले विधायक या नेता के पार्टी बदलने को अनैतिक माना जाता था, लेकिन अब बड़े पैमाने पर दल-बदल और सरकारें गिराने की घटनाओं को राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश किया जाता है।

    केजरीवाल ने कहा कि विधायकों और सांसदों के दल बदलने तथा सरकारों को गिराने की घटनाओं को ‘चाणक्य नीति’ बताना गलत है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई और इसके लिए पैसे तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों को रणनीति नहीं बल्कि देश के साथ विश्वासघात के रूप में देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त की नौकरी छोड़कर झुग्गियों में काम किया और करीब 10 साल वहां लोगों के बीच बिताए। केजरीवाल ने कहा कि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि देश में बदलाव लाना था। उन्होंने कहा कि अगर लोकपाल आंदोलन के समय ही लोकपाल कानून बना दिया जाता तो राजनीतिक दल बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    एसआईआर और मतदाता सूची के मुद्दे पर भी केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में बैठे अधिकारी पूरे देश की मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की शक्ति रखते हैं और बिना पर्याप्त जांच के किसी मतदाता का नाम हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    केजरीवाल ने कहा कि 12 साल किसी भी देश के इतिहास में कम अवधि नहीं होती। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली सीटों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने लंबे समय में देश को विकास के अलग स्तर पर पहुंचाया जा सकता था। उन्होंने अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, रेलवे और विमानन क्षेत्र को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और दावा किया कि कई क्षेत्रों की स्थिति खराब हुई है।

    अंत में केजरीवाल ने कहा कि देश के सामने मौजूद मुद्दों पर जनता को सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षित काम नहीं किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी नुकसान पहुंचा है।

  • ओम शांति ओम के सेट पर मिथुन दा ने मचाया ऐसा जलवा, बेकाबू हुई भीड़, शाहरुख-सलमान की मौजूदगी भी पड़ गई फीकी

    ओम शांति ओम के सेट पर मिथुन दा ने मचाया ऐसा जलवा, बेकाबू हुई भीड़, शाहरुख-सलमान की मौजूदगी भी पड़ गई फीकी


    नई दिल्ली। गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चाएं चल रही हैं। दोनों के रिश्ते में आई कथित दूरी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की बातें सामने आ रही हैं। इसी बीच गोविंदा की कोमल रानी स्वर्णकार के साथ सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने चर्चाओं को और बढ़ा दिया। हाल ही में दोनों को लालबागचा राजा के दर्शन करते हुए देखा गया था जिसके बाद सोशल मीडिया पर गोविंदा और कोमल के रिश्ते को लेकर सवाल उठने लगे। अब इन चर्चाओं के बीच सुनीता आहूजा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान जब सुनीता से गोविंदा और उनकी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के रिश्ते को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इस मामले पर ज्यादा विस्तार से बात करने से इनकार कर दिया। सुनीता ने कहा कि वह गोविंदा या उनकी को-स्टार के बारे में कुछ नहीं कहना चाहतीं। उन्होंने यह भी कहा कि वह गोविंदा को खुश देखना चाहती हैं और भगवान से उनके लिए आशीर्वाद की प्रार्थना करती हैं। सुनीता के इस बयान के बाद एक बार फिर उनके और गोविंदा के रिश्ते को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    सुनीता ने साफ शब्दों में कहा कि गोविंदा को जैसी जिंदगी जीनी है वह वैसे ही जिएं। उन्होंने कहा कि वह जहां भी हैं और जिसके साथ भी हैं भगवान उन्हें खुश रखें। सुनीता के इस बयान से यह संकेत जरूर मिला कि वह फिलहाल इस पूरे मामले पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने पर ध्यान दे रही हैं।

    सुनीता ने यह भी स्पष्ट किया कि इन दिनों उनका मुख्य फोकस काम पर है। उन्होंने कहा कि वह बार बार किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहतीं। सुनीता ने लोगों से भी अपील की कि वे अपनी खुशी और अपनी जिंदगी पर ध्यान दें और इस मामले में अपना समय बर्बाद न करें। उनके इस बयान को गोविंदा से जुड़ी लगातार चल रही चर्चाओं के बीच उनकी ओर से दिया गया एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

    वहीं दूसरी तरफ कोमल रानी स्वर्णकार के कुछ पुराने बयान भी चर्चा में हैं। कोमल ने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए सुनीता पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक पोस्ट में पति को परेशान करने और घर में तनाव पैदा करने जैसी बातें लिखी थीं। हालांकि इन बयानों में उन्होंने सीधे तौर पर सुनीता का नाम नहीं लिया था लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे गोविंदा और सुनीता के विवाद से जोड़कर देखा।

    कोमल ने यह भी लिखा था कि वह उस महिला के दर्द को समझती हैं लेकिन उनके मुताबिक उस दर्द को सार्वजनिक रूप से जाहिर करने के बजाय उससे बाहर निकलने की कोशिश होनी चाहिए। उनके इन बयानों के बाद मामला और चर्चा में आ गया था।

    फिलहाल गोविंदा और कोमल के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं लेकिन सुनीता आहूजा ने अपने हालिया बयान में इस विवाद पर विस्तार से प्रतिक्रिया देने के बजाय खुद को इससे दूर रखने की बात कही है। उन्होंने साफ किया है कि उनका ध्यान अब अपने काम पर है और वह बार बार किसी कॉन्ट्रोवर्सी में नहीं फंसना चाहतीं।

  • एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा। इसके साथ ही मिशन के दौरान 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी कक्षा में तैनात किए गए। यह उपलब्धि पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    यह उड़ान 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 6:16 बजे शुरू हुई। यह स्टारशिप का 14वां परीक्षण था। मिशन का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष यान को कक्षा तक पहुंचाना नहीं था, बल्कि इसके विभिन्न सिस्टम और भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण करना भी था।

    हालांकि उड़ान के दौरान एक तकनीकी चुनौती भी सामने आई। वाहन के छह रैप्टर वैक्यूम यानी आरवी इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया। इससे मिशन के दौरान कुछ समय के लिए चुनौती की स्थिति बनी। इसके बावजूद बाकी इंजनों के प्रदर्शन और उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद मिशन को जारी रखा गया और स्टारशिप कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा।

    स्टारशिप को करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने के लिए तैयार किया गया था। मिशन की शुरुआती योजना करीब 10 घंटे की थी। इसके बाद अंतरिक्ष यान को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी तट के पास स्प्लैशडाउन करना था।

    इस मिशन की सबसे अहम उपलब्धियों में 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट की तैनाती भी शामिल रही। ये सैटेलाइट नई पीढ़ी के स्टारलिंक नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन्हें अधिक डेटा क्षमता, ज्यादा पावर और बेहतर नेटवर्क क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है। उपलब्ध मिशन विवरण के अनुसार प्रत्येक सैटेलाइट करीब 1 Tbps डाउनलिंक क्षमता जोड़ सकता है।

    स्टारशिप-सुपर हेवी की ऊंचाई करीब 124.4 मीटर यानी 407 फीट है। इसके दो प्रमुख हिस्से हैं—सुपर हेवी बूस्टर और स्टारशिप का ऊपरी चरण। दोनों को भविष्य में तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

    मिशन में सुपर हेवी बूस्टर की चढ़ाई, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और लैंडिंग बर्न भी महत्वपूर्ण परीक्षणों का हिस्सा थे। पिछले परीक्षणों में सामने आई समस्याओं को देखते हुए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव किए गए थे।

    स्टारशिप के ऊपरी चरण ने ऑर्बिटल इंसर्शन मैनूवर के साथ 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट तैनात किए। इसके बाद रैप्टर इंजन की मदद से डीऑर्बिट बर्न और नियंत्रित पुनः प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने की योजना थी। तीन स्टारलिंक V3 सैटेलाइटों में अतिरिक्त कैमरे भी लगाए गए, जिनका इस्तेमाल स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें लेने के लिए किया जाना था।

    कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट अपने एंटीना और सोलर एरे तैनात करेंगे। इसके बाद रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड सिस्टम तथा मौजूदा नेटवर्क से संपर्क स्थापित किया जाएगा। ऑर्बिट में जरूरी जांच पूरी होने के बाद कुछ हफ्तों में इनके ग्राहकों को सेवा देने की उम्मीद है।

    स्टारशिप की यह उड़ान भविष्य में पृथ्वी की कक्षा से आगे चांद और मंगल तक इंसानों तथा कार्गो को पहुंचाने की क्षमता विकसित करने के लक्ष्य की दिशा में एक अहम परीक्षण है।

  • ओम शांति ओम के सेट पर मचा था जबरदस्त हंगामा, शाहरुख-सलमान भी पड़े फीके, मिथुन दा को देखते ही बेकाबू हुई भीड़

    ओम शांति ओम के सेट पर मचा था जबरदस्त हंगामा, शाहरुख-सलमान भी पड़े फीके, मिथुन दा को देखते ही बेकाबू हुई भीड़


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की कुछ फिल्में और उनके गाने ऐसे होते हैं जो सालों बाद भी दर्शकों की यादों में बने रहते हैं। फराह खान की फिल्म ओम शांति ओम भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। फिल्म का गाना दीवानगी दीवानगी आज भी अपने शानदार स्टारकास्ट और खास अंदाज के लिए याद किया जाता है। इस गाने में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे एक साथ नजर आए थे। शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण के अलावा सलमान खान सैफ अली खान संजय दत्त धर्मेंद्र जीतेंद्र काजोल रानी मुखर्जी प्रियंका चोपड़ा रेखा तब्बू करिश्मा कपूर और जूही चावला जैसे सितारों ने इस गाने में हिस्सा लिया था। करीब 32 सितारों से सजे इस गाने की शूटिंग अपने आप में किसी बड़े इवेंट से कम नहीं थी लेकिन इसी दौरान एक ऐसा किस्सा हुआ जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    फराह खान ने अपने यूट्यूब व्लॉग में इस पुराने किस्से को याद करते हुए बताया कि गाने की शूटिंग के दौरान बड़े-बड़े सितारे लगातार सेट पर पहुंच रहे थे। माहौल पहले से ही बेहद खास था लेकिन जैसे ही मिथुन चक्रवर्ती यानी मिथुन दा सेट पर पहुंचे पूरा नजारा बदल गया। फराह के मुताबिक मिथुन दा को देखते ही सेट पर मौजूद लोग उनके पास पहुंचने लगे। यहां तक कि शूटिंग में व्यस्त लाइटमैन भी अपनी जगह छोड़कर उनसे मिलने के लिए पहुंच गए। फराह और शाहरुख खान दोनों यह देखकर हैरान रह गए कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि पूरा सेट एक ही स्टार के इर्द-गिर्द जमा हो गया।

    फराह ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी का असर इतना जबरदस्त था कि एक महिला उन्हें देखकर बेहोश तक हो गई थी। इसी वास्तविक घटना को बाद में दीवानगी दीवानगी के एक सीन में भी इस्तेमाल किया गया। यानी गाने में दिखाया गया महिला के बेहोश होने वाला दृश्य पूरी तरह काल्पनिक नहीं था बल्कि शूटिंग के दौरान हुई वास्तविक घटना से प्रेरित था। इस किस्से ने मिथुन दा की लोकप्रियता और उनके स्टारडम की एक अलग झलक सामने रख दी।

    मिथुन दा और शाहरुख खान से जुड़ा एक और मजेदार किस्सा भी फराह ने साझा किया। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान उन्होंने शाहरुख से मिथुन चक्रवर्ती के डांस स्टेप्स फॉलो करने को कहा था। हालांकि शाहरुख उन स्टेप्स को ठीक से नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद मिथुन दा ने मजाकिया अंदाज में शाहरुख के सिर पर टपली मारनी शुरू कर दी। खास बात यह रही कि कैमरे के पीछे हुआ यह मजेदार पल इतना स्वाभाविक था कि इसे फिल्म के गाने में भी जगह मिल गई।

    दीवानगी दीवानगी में बॉलीवुड के अलग-अलग दौर के सितारों को एक साथ लाने का आइडिया उस समय काफी खास माना गया था। एक ही गाने में इतने बड़े कलाकारों की मौजूदगी ने इसे यादगार बना दिया। हालांकि फराह खान के खुलासे के बाद इस गाने से जुड़ा मिथुन दा वाला किस्सा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पर्दे पर जहां सितारों की दीवानगी दिखाई देती है वहीं कैमरे के पीछे हुई यह घटना बताती है कि मिथुन चक्रवर्ती का स्टारडम अपने दौर में कितना जबरदस्त था। शाहरुख और सलमान जैसे बड़े नामों की मौजूदगी के बावजूद सेट पर मिथुन दा को लेकर मची हलचल ने इस शूटिंग को बॉलीवुड के यादगार किस्सों में शामिल कर दिया।

  • रक्षा उत्पादन में बड़ा बदलाव, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट से एचएएल बाहर, निजी कंपनियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

    रक्षा उत्पादन में बड़ा बदलाव, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट से एचएएल बाहर, निजी कंपनियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली। देश में स्वदेशी लड़ाकू विमान और रक्षा उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान तैयार करने वाली एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए परियोजना से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को बाहर कर दिया गया है। यह पहली बार होगा जब किसी स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना में एचएएल की भागीदारी नहीं होगी।

    एएमसीए को देश की उन्नत लड़ाकू विमान परियोजनाओं में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का विकास करना है। एचएएल लंबे समय से देश के लड़ाकू विमान निर्माण कार्यक्रमों का प्रमुख हिस्सा रही है, लेकिन इस बार परियोजना की अगली प्रक्रिया में उसे शामिल नहीं किया गया है।

    रक्षा सचिव आरके सिंह के मुताबिक, एचएएल को कुछ जरूरी तकनीकी शर्तें पूरी नहीं कर पाने के कारण परियोजना से बाहर किया गया। एचएएल इस समय तेजस-एमके2 लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रही है। ऐसे में एएमसीए परियोजना से उसका बाहर होना रक्षा विमान निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

    एचएएल के बाहर होने के बाद अब एएमसीए के प्रोटोटाइप तैयार करने की दौड़ में तीन दावेदार बचे हैं। इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम, एलएंडटी-बेल-डायनामैटिक कंसोर्टियम और भारत फोर्ज-बीईएमएल-डाटा पैटर्न्स का कंसोर्टियम शामिल है।

    इस बदलाव के साथ पहली बार किसी लड़ाकू विमान परियोजना के प्रोटोटाइप निर्माण की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कंपनियों के हाथों में जाने जा रही है। इससे देश के निजी रक्षा उद्योग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब चयनित कंपनी को एएमसीए परियोजना के तहत निर्धारित तकनीकी और निर्माण संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा।

    एएमसीए परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। चुनी जाने वाली कंपनी को कुल पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप तैयार करने होंगे। इसके अलावा एक ऐसा विमान भी बनाना होगा, जिसका इस्तेमाल जमीन पर तकनीकी परीक्षण के लिए किया जा सके।

    परियोजना की समयसीमा के अनुसार एएमसीए का पहला प्रोटोटाइप सितंबर 2028 में पहली उड़ान भर सकता है। इसके बाद बाकी प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे और उनकी अलग-अलग स्तर पर टेस्टिंग की जाएगी। इस परीक्षण प्रक्रिया के जरिए विमान की तकनीकी क्षमताओं और परियोजना से जुड़ी आवश्यकताओं को परखा जाएगा।

    एएमसीए परियोजना से एचएएल के बाहर होने के बाद अब निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच प्रोटोटाइप निर्माण के लिए प्रतिस्पर्धा होगी। परियोजना में चयनित कंपनी को विमान के विकास और प्रोटोटाइप निर्माण से जुड़ी निर्धारित जिम्मेदारियां निभानी होंगी। इस तरह पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में पहली बार निजी क्षेत्र को बड़ी भूमिका मिलने जा रही है।