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  • बाजार में बढ़ी खरीदारी का असर, जुलाई में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन से सरकार को बड़ी राहत

    बाजार में बढ़ी खरीदारी का असर, जुलाई में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन से सरकार को बड़ी राहत


    नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूती और उपभोग में बढ़ोतरी का असर अब सरकार के राजस्व पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जुलाई 2026 में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी संग्रह 15.4 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ 2.11 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया। यह पिछले 14 महीनों की सबसे तेज वृद्धि है और चालू वित्त वर्ष 2026-27 में दूसरी बार ऐसा हुआ है जब मासिक जीएसटी कलेक्शन दो लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार करने में सफल रहा है। यह आंकड़ा देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों मजबूत खपत और बेहतर टैक्स अनुपालन का संकेत माना जा रहा है।

    सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई के दौरान घरेलू जीएसटी राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपए हो गया जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1.31 लाख करोड़ रुपए था। वहीं आयात पर मिलने वाले जीएसटी राजस्व में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई और इसमें 28.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आयात से प्राप्त जीएसटी संग्रह बढ़कर 66 हजार 511 करोड़ रुपए पहुंच गया। घरेलू और आयात दोनों स्रोतों से मजबूत राजस्व मिलने के कारण कुल सकल जीएसटी संग्रह 2.11 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया।

    सरकार ने बताया कि जुलाई के दौरान जीएसटी रिफंड में भी वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में रिफंड 13.1 प्रतिशत बढ़कर 29 हजार 968 करोड़ रुपए रहा। रिफंड समायोजित करने के बाद सरकार का शुद्ध जीएसटी राजस्व 1.81 लाख करोड़ रुपए रहा जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.8 प्रतिशत अधिक है। घरेलू शुद्ध राजस्व 10.5 प्रतिशत बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया जबकि सीमा शुल्क से प्राप्त शुद्ध जीएसटी राजस्व में 30.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई और यह 54 हजार 223 करोड़ रुपए हो गया।

    चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान भी सरकार का कर संग्रह लगातार मजबूत बना हुआ है। इस अवधि में कुल सकल जीएसटी संग्रह 10.1 प्रतिशत बढ़कर 8.43 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 7.66 लाख करोड़ रुपए था। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार लगातार बनी हुई है और कर संग्रह में भी इसका सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।

    इससे पहले जून 2026 में भी जीएसटी संग्रह 13.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.94 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया था। उस समय भी आयात से मिलने वाले राजस्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लगातार दो महीनों से मजबूत कर संग्रह यह संकेत देता है कि देश में उत्पादन व्यापार और उपभोग की गतिविधियां गति पकड़ रही हैं।

    एसबीआई रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार यदि जीएसटी संग्रह और बेसिक एक्साइज ड्यूटी में राज्यों की हिस्सेदारी को एक साथ देखा जाए तो वित्त वर्ष 2026-27 में राज्यों को पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि आने वाले महीनों में जीएसटी संग्रह और मजबूत हो सकता है तथा पूरे वित्त वर्ष के दौरान इसमें 8 से 9 प्रतिशत की वृद्धि बनी रहने की संभावना है।

    रिपोर्ट के मुताबिक हाल के महीनों में जीएसटी संग्रह की रफ्तार में जो हल्की नरमी देखने को मिली थी उसका प्रमुख कारण जीएसटी दरों का युक्तिकरण था जिसकी पहले से संभावना जताई जा रही थी। अब आर्थिक गतिविधियों में तेजी और कर संग्रह में लगातार सुधार से यह उम्मीद बढ़ गई है कि वित्त वर्ष के शेष महीनों में भी सरकार का राजस्व मजबूत रहेगा और इससे केंद्र तथा राज्यों दोनों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी।

  • आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक पर नजर, रेपो रेट स्थिर रह सकता है; GDP ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद

    आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक पर नजर, रेपो रेट स्थिर रह सकता है; GDP ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की अगस्त 2026 में होने वाली मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर पूरे वित्तीय बाजार की नजर टिकी हुई है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस बार रेपो रेट में किसी बदलाव की संभावना बेहद कम है। रिपोर्ट का मानना है कि खुदरा महंगाई अगले दो तिमाहियों तक पांच प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है जबकि देश की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। ऐसे में आरबीआई के लिए फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखना सबसे संतुलित विकल्प माना जा रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर सात प्रतिशत से अधिक रह सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो यह पहले लगाए गए अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाएगा। मजबूत आर्थिक गतिविधियां और स्थिर मांग ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से केंद्रीय बैंक फिलहाल नीतिगत दरों में बदलाव करने से बच सकता है।

    एसबीआई रिसर्च ने बताया कि जुलाई के दौरान देश में लगभग 35 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया। इसके परिणामस्वरूप 24 जुलाई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.5 अरब डॉलर बढ़ गया। इसके साथ ही जून के अंत तक तीन महीने की अवधि वाले फॉरवर्ड पोजीशन में 13 अरब डॉलर की कमी आई जिससे विदेशी मुद्रा बाजार पर दबाव कम हुआ और रुपये की स्थिति को भी सहारा मिला।

    हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि वैश्विक परिस्थितियां अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव पश्चिम एशिया की भू राजनीतिक स्थिति और वैश्विक पूंजी प्रवाह को लेकर बनी अनिश्चितता ऐसे कारक हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि आरबीआई फिलहाल अत्यधिक नरम रुख अपनाने के बजाय सतर्क रणनीति जारी रख सकता है।

    आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति समिति की बैठक तीन से पांच अगस्त तक आयोजित होगी जबकि पांच अगस्त को नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी। वित्तीय बाजार और उद्योग जगत इस बैठक से ब्याज दरों के साथ साथ महंगाई आर्थिक वृद्धि और भविष्य की मौद्रिक नीति के संकेतों पर भी नजर रखे हुए हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी भी दबाव में है। कई देशों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी हुई है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान अपेक्षा से अधिक सुस्ती देखने को मिली। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है।

    एसबीआई रिसर्च ने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों में मानसून की स्थिति में सुधार हुआ है। जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण देश में वर्षा की कमी घटकर केवल 13 प्रतिशत रह गई है। जलाशयों का जलस्तर लगभग सामान्य है और खरीफ फसलों की बुवाई भी पिछले वर्ष की तुलना में मामूली कम रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता मांग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें कहा गया है कि तकनीकी क्षेत्र में एआई को लेकर तेजी से बढ़ते निवेश और अत्यधिक उम्मीदों के कारण भविष्य में एआई बबल बनने का खतरा पैदा हो सकता है। कई कंपनियां आवश्यकता से अधिक निवेश कर रही हैं जो आगे चलकर जोखिम का कारण बन सकता है।

    कुल मिलाकर एसबीआई रिसर्च का आकलन है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार बेहतर मानसून और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और मौद्रिक नीति में स्थिरता बनाए रखने को प्राथमिकता देगा।

  • सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन

    सेबी का बड़ा एक्शन, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर एक साल का बैन


    नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर उल्लंघनों के मामले में जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और उसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। सेबी ने कंपनी के प्रबंध निदेशक पुनीत गोयनका और एस्सेल समूह के प्रमुख सुभाष चंद्रा को एक वर्ष के लिए प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड पर भी दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है। नियामक ने तीनों पक्षों पर कुल 1.48 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है।

    सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी की हैदराबाद स्थित मूल्यवान जमीन को आवश्यक कॉरपोरेट मंजूरियों के बिना एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के बदले गिरवी रखा गया था। नियामक ने इसे कॉरपोरेट गवर्नेंस और लिस्टिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन माना। अंतिम आदेश में कहा गया कि इस प्रक्रिया में नियामकीय प्रावधानों का पालन नहीं किया गया और आवश्यक स्वीकृतियां भी नहीं ली गईं।

    सेबी के आदेश के अनुसार जी एंटरटेनमेंट पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है जबकि पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपए और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपए का दंड लगाया गया है। नियामक ने सभी संबंधित पक्षों को 45 दिनों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी माना कि लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस 2015 और प्रोहिबिशन ऑफ फ्रॉडुलेंट एंड अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेज रेगुलेशंस 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

    मामले की शुरुआत वित्त वर्ष 2018-19 के वैधानिक ऑडिट के दौरान हुई थी। ऑडिट में कंपनी की कुछ अचल संपत्तियों के मूल स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई थी। इसके बाद सेबी ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में पता चला कि दिसंबर 2016 में एस्सेल समूह की चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से 726 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। इन कंपनियों पर पुनीत गोयनका सुभाष चंद्रा और उनके परिवार का प्रभावी नियंत्रण था।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जब कर्ज लेने वाली कंपनियां आवश्यक सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहीं तब नवंबर 2018 में अतिरिक्त संपार्श्विक उपलब्ध कराने के लिए नोटिस जारी किया गया। इसके बाद दिसंबर 2018 में जी एंटरटेनमेंट की हैदराबाद स्थित जमीन के मूल दस्तावेज कर्ज के लिए अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में जमा कराए गए ताकि उस संपत्ति पर प्रथम श्रेणी का बंधक बनाया जा सके।

    हालांकि कंपनी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की गई थीं लेकिन सेबी की जांच में ऑडिट समिति निदेशक मंडल या शेयरधारकों की ओर से ऐसी किसी पूर्व स्वीकृति का कोई प्रमाण नहीं मिला। बाद में कंपनी ने स्वयं नियामक को बताया कि प्रबंधन और निदेशक मंडल इस बंधक की प्रक्रिया से अनभिज्ञ थे और उन्होंने इस लेनदेन को मंजूरी नहीं दी थी।

    सेबी ने अपने आदेश में कहा कि यह संबंधित पक्षों के बीच हुआ लेनदेन था जिसके लिए नियमानुसार पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक था। वित्तीय विवरणों में भी इस संबंध में आवश्यक खुलासे और स्वीकृतियों का पालन नहीं किया गया। नियामक ने स्पष्ट किया कि सूचीबद्ध कंपनियों में निवेशकों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

  • एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    एफएसएसएआई का स्विट्ज फूड्स पर बड़ा एक्शन, फूड सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड

    नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए स्विट्ज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एफएसएसएआई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक कंपनी सभी कमियों को दूर कर खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित नहीं करती तब तक वह किसी भी प्रकार की खाद्य उत्पादन या व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं कर सकेगी। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    एफएसएसएआई के अनुसार कंपनी के विनिर्माण संयंत्र के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि खाद्य पदार्थों का निर्माण पैकेजिंग और भंडारण बेहद अस्वच्छ परिस्थितियों में किया जा रहा था जिससे खाद्य सामग्री के दूषित होने का गंभीर खतरा बना हुआ था। फैक्ट्री परिसर में साफ सफाई और सैनिटेशन की स्थिति भी बेहद खराब मिली। विशेष रूप से क्रेट वॉशिंग एरिया नॉन वेज रिसीविंग एरिया और गाजर काटने वाली मशीन के आसपास अत्यधिक गंदगी पाई गई।

    निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों ट्रॉलियों ट्रे मोल्ड एचडीपीई क्रेट और अन्य उपकरणों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं किया जा रहा था। उत्पाद भंडारण क्षेत्र के ऊपर से एयर कंडीशनिंग पाइपलाइन का पानी रिस रहा था जबकि क्रेट साफ करने वाली मशीन भी खराब स्थिति में मिली। इन कमियों को खाद्य सुरक्षा मानकों के लिए गंभीर खतरा माना गया।

    एफएसएसएआई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उपकरणों वेंटिलेशन सिस्टम और भोजन के संपर्क में आने वाले कई बर्तनों पर जंग और क्षरण पाया गया। एग्जॉस्ट फैन पर कीट रोकने वाली जालियां नहीं लगी थीं जिससे मक्खियों और अन्य कीड़ों के प्रवेश का खतरा बना हुआ था। निरीक्षण के दौरान परिसर में मक्खियां मच्छर फ्रूट फ्लाई मकड़ी के जाले और अन्य कीटों का भारी प्रकोप भी पाया गया।

    जांच में दीवारों पर सीलन उखड़ता पेंट टूटी हुई फर्श की टाइलें और कई स्थानों पर तेल तथा ग्रीस की मोटी परत भी देखी गई। अर्धनिर्मित और तैयार खाद्य उत्पादों को अलग अलग रखने के नियमों का पालन नहीं किया गया था। इसी तरह शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार अलग नहीं रखा गया। कई कच्चे और अर्धनिर्मित उत्पादों पर निर्माण तिथि या उपयोग की अंतिम तिथि का उल्लेख भी नहीं था। तैयार खाद्य पदार्थ गंदी ट्रे में बिना किसी सुरक्षात्मक लाइनर के रखे गए थे जबकि कोल्ड स्टोरेज में खाद्य सामग्री के साथ कबाड़ भी रखा मिला।

    एफएसएसएआई ने यह भी पाया कि कटे हुए चिकन को सामान्य कमरे के तापमान पर डीफ्रॉस्ट किया जा रहा था जो खाद्य सुरक्षा मानकों का स्पष्ट उल्लंघन है। तापमान नियंत्रण की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी और निरीक्षण के दौरान एक तैयार चिकन सैंडविच बिना अनिवार्य लेबलिंग के पाया गया।

    इन सभी गंभीर कमियों को देखते हुए प्राधिकरण ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया और निर्देश दिया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के सभी प्रावधानों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित होने तक कोई भी खाद्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं की जाएगी। एफएसएसएआई ने दोहराया है कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

  • विदेशी निवेश आकर्षित करने में RBI की बड़ी कामयाबी, फॉरेक्स स्वैप योजना से जुटे 40.82 अरब डॉलर

    विदेशी निवेश आकर्षित करने में RBI की बड़ी कामयाबी, फॉरेक्स स्वैप योजना से जुटे 40.82 अरब डॉलर


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने की विशेष पहल को बाजार से शानदार समर्थन मिला है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा के माध्यम से कुल 40.82 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा निवेश भारत में आया है। इस योजना में सबसे बड़ा योगदान फॉरेन करेंसी नॉन रेजिडेंट बैंक यानी एफसीएनआर बी जमा का रहा है जिसने कुल निवेश का बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह उपलब्धि भारतीय अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

    आरबीआई ने यह विशेष स्वैप सुविधा विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की थी। इसके तहत विदेशी निवेशकों और प्रवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए बैंकों को विशेष रियायतें दी गईं ताकि वे अधिक विदेशी मुद्रा जुटा सकें। योजना 8 जून 2026 से लागू की गई थी और तब से इसमें लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    केंद्रीय बैंक के मुताबिक 31 जुलाई तक जुटाए गए कुल 40.82 अरब डॉलर में से 36.73 अरब डॉलर केवल एफसीएनआर बी जमा के माध्यम से आए हैं। यह कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का सबसे बड़ा हिस्सा है और इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रवासी भारतीयों ने इस योजना पर भरोसा जताया है। इसके अलावा ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स यानी ओएफसीबी के जरिए 2.58 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स यानी ईसीबी के माध्यम से 1.52 अरब डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ है।

    आरबीआई ने पांच जून 2026 को इस योजना की घोषणा करते हुए कहा था कि वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूत करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से एफसीएनआर बी जमा ओएफसीबी और ईसीबी के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने की विशेष व्यवस्था की गई। अब शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि यह रणनीति प्रभावी साबित हो रही है और देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई एफसीएनआर बी जमा के लिए रियायती स्वैप सुविधा 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। वहीं ओएफसीबी और ईसीबी के तहत यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी। इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में विदेशी मुद्रा प्रवाह का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी अर्थव्यवस्था की वित्तीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे आयात भुगतान आसान होता है विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वैश्विक बाजार में मुद्रा की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही रुपये पर दबाव कम करने और बाहरी आर्थिक झटकों का सामना करने की क्षमता भी मजबूत होती है।

    वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई की यह पहल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती आने से न केवल वित्तीय स्थिरता को बल मिलेगा बल्कि निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा। यही वजह है कि फॉरेक्स स्वैप योजना को भारतीय वित्तीय प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण और सफल कदम माना जा रहा है।

  • सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में

    सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में


    भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं शनिवार को चर्चा का केंद्र बनी रहीं। एक ओर संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उसके विरोध प्रदर्शन को सड़क छाप राजनीति करार दिया तो दूसरी ओर भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। इसी बीच अनूपपुर जिले से सामने आया एक वीडियो सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत बयां करता नजर आया जिसमें एक नर्स मोबाइल नेटवर्क की तलाश में पेड़ पर चढ़कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करती दिखाई दी।

    राज्यसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सभापति की ओर से अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में लोकतंत्र की मर्यादा को तार तार किया जा रहा है और विपक्ष केवल अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और सदन में नारेबाजी होती रही।

    इधर दिल्ली में भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटने के बाद फिलहाल वे सांसद के रूप में सक्रिय हैं लेकिन अमित शाह से मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

    राजनीति के साथ साथ प्रशासनिक व्यवस्था की एक तस्वीर अनूपपुर जिले से सामने आई जिसने सभी का ध्यान खींचा। पुष्पराजगढ़ के गन्नागोडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक नर्स ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए पेड़ पर चढ़ गई। स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उसे मजबूरी में यह तरीका अपनाना पड़ा। वायरल वीडियो में नर्स यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लग जाएगी तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। यह घटना ग्रामीण इलाकों में डिजिटल व्यवस्था और नेटवर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

    उधर दतिया उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दल अपने अपने दावे कर रहे हैं। इसी बीच यह चर्चा भी सामने आई कि मतदान से पहले एक होटल में हुई रणनीतिक बैठक में विरोधी दल के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्हें राजनीतिक तौर पर दूसरे खेमे के करीबी माना जाता है। बताया जा रहा है कि बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए होटल के सीसीटीवी कैमरे तक बंद करा दिए गए थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चुनावी नतीजों से पहले इस तरह की चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

    संसद की तल्ख बहस हो या संगठन की गतिविधियां अथवा सरकारी व्यवस्था की चुनौतियां मध्य प्रदेश से जुड़ी ये घटनाएं फिलहाल राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा पर सवाल भी खड़े कर रही हैं और चर्चा भी बटोर रही हैं। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है।

  • जुलाई की झमाझम भी नहीं भर सकी कमी, मध्य प्रदेश के 42 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश

    जुलाई की झमाझम भी नहीं भर सकी कमी, मध्य प्रदेश के 42 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून ने जुलाई के आखिरी दिन राहत जरूर दी लेकिन तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। पूरे महीने के दौरान दो लंबे ब्रेक आने के बावजूद जुलाई का बारिश कोटा पूरा हो गया। इसके बावजूद जून में कमजोर मानसून का असर अब भी प्रदेश पर दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अब तक पूरे प्रदेश में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 55 में से 42 जिले अभी भी औसत से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। मौसम विभाग का मानना है कि अगस्त के दौरान अच्छी बारिश होने पर यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल अगले चार दिनों तक प्रदेश में कहीं भी व्यापक स्तर पर भारी बारिश की संभावना नहीं जताई गई है।

    बीते दो दिनों में सक्रिय रहे तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्य प्रदेश में देखने को मिला। खरगोन जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 2.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। झिरनिया में सबसे ज्यादा 3.8 इंच वर्षा हुई जबकि गोगांवा में 3.5 इंच कसरावद में 3.1 इंच महेश्वर में 2.6 इंच और सेगांव में करीब 1.9 इंच बारिश दर्ज की गई। भीकनगांव सनावद बड़वाह और खरगोन शहर में भी अच्छी बारिश हुई जिससे नदियों और जलप्रपातों का जलस्तर बढ़ गया। लगातार दो दिन हुई तेज बारिश के कारण प्रसिद्ध कुंदा जलप्रपात उफान पर पहुंच गया और सुरक्षा को देखते हुए सिरवेल महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर रोक लगा दी गई।

    रतलाम जिले में भी शनिवार सुबह से रुक रुककर बारिश जारी रही। जिले में अब तक 13 इंच से अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है जिससे शहर का हनुमान ताल पूरी तरह भर गया और जुलाई महीने का वर्षा लक्ष्य भी पूरा हो गया। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अब तक लगभग 9 इंच कम बारिश हुई है। पिछले साल इसी अवधि तक जिले में करीब 22 इंच पानी गिर चुका था जबकि इस बार आंकड़ा 13 इंच के आसपास ही है।

    भोपाल मंदसौर सहित कई जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल सक्रिय मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ रही हैं इसलिए अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि यदि बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नया सिस्टम विकसित होता है तो मौसम अचानक बदल सकता है और कुछ इलाकों में फिर से भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 15.4 इंच यानी 390.3 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि सामान्य स्थिति में इस समय तक 17.6 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में करीब 2.3 इंच यानी 13 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    स्थिति यह है कि अनूपपुर बालाघाट छतरपुर जबलपुर सागर सतना भोपाल ग्वालियर उज्जैन विदिशा रतलाम मंदसौर रायसेन शिवपुरी सहित कुल 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं मऊगंज उमरिया शहडोल खंडवा बड़वानी खरगोन इंदौर देवास राजगढ़ सीहोर सहित 13 जिलों में औसत से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगस्त का महीना प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। यदि मानसून सक्रिय बना रहा और लगातार अच्छे सिस्टम बनते रहे तो न केवल बारिश की मौजूदा कमी पूरी हो सकती है बल्कि खरीफ फसलों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। फिलहाल किसानों और आम लोगों की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हुई हैं।

  • सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा

    सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा


    भोपाल। पिछले वर्ष दिसंबर में मध्य प्रदेश में महज 48 घंटे के भीतर हुए दो ट्रेनी विमान हादसों की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार दोनों दुर्घटनाएं अलग-अलग तकनीकी कारणों से हुईं। एक हादसा सिवनी में इंजन की शक्ति कम होने के कारण हुआ, जबकि दूसरा सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर गो-अराउंड प्रक्रिया के दौरान विमान के अनियंत्रित होने से हुआ। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और प्रशिक्षु पायलट तथा प्रशिक्षक सुरक्षित बच गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक पहला हादसा 8 दिसंबर को सिवनी जिले के सुकतारा एयरफील्ड के पास हुआ था। रेडबर्ड एविएशन अकादमी का टेकनम पी-मेंटर प्रशिक्षण विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी अचानक इंजन के आरपीएम में गिरावट दर्ज की गई। प्रशिक्षक के निर्देश पर थ्रॉटल बढ़ाने के बावजूद इंजन से अपेक्षित शक्ति नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए प्रशिक्षक ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान विमान बिजली के तारों से टकरा गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

    इसके ठीक दो दिन बाद 10 दिसंबर को सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर चाइम्स एविएशन अकादमी का सेसना-172एस प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में निर्धारित टचडाउन क्षेत्र से आगे तक हवा में तैरता रहा। जब रनवे समाप्त होने की स्थिति बनी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया। जैसे ही ट्रेनी पायलट ने थ्रॉटल बढ़ाया, विमान अचानक तेजी से ऊपर उठा और बाईं ओर झुकते हुए नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वह रनवे से बाहर कच्चे क्षेत्र में गिर गया।

    AAIB की शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों विमानों के रखरखाव में कोई गंभीर कमी नहीं मिली। उड़ान से पहले दोनों विमानों की नियमित तकनीकी जांच पूरी की गई थी और किसी प्रकार की खराबी दर्ज नहीं थी। दोनों प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों का ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण भी सामान्य पाया गया, जिससे किसी प्रकार के नशे या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका से इनकार किया गया है।

    हालांकि जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण जारी रखा है। दोनों विमानों के डिजिटल डिस्प्ले से प्राप्त मेमोरी कार्ड, इंजन कंट्रोल यूनिट, सीसीटीवी फुटेज और ईंधन के नमूनों को विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाओं के अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।

    चूंकि दोनों विमान विदेशी निर्माताओं के थे, इसलिए अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और जर्मनी की बुंडेसस्टेले फ्यूर फ्लुगउनफालउनटर्सुखुंग (BFU) को भी जांच की जानकारी भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर इन एजेंसियों से तकनीकी सहयोग भी लिया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में इन दोनों मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट देश की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियों के लिए महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है। इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने तथा प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर MP में सियासी हलचल, भोपाल में विहिप और बजरंग दल का प्रदर्शन आज


    मध्य प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए राजनीतिक विवाद की गूंज अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शनिवार को इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि संसद परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा साधु वेश धारण कर किया गया सांकेतिक प्रदर्शन भगवान श्रीराम, संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था का अपमान है। इसी के विरोध में भोपाल में बड़ा मार्च निकाला जाएगा।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अनुसार प्रदर्शन दोपहर में व्यापम चौराहे से शुरू होगा और कांग्रेस कार्यालय तक जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, साधु-संत और सनातन धर्म से जुड़े लोग शामिल होंगे। प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा सकता है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराना है।

    पूरा विवाद संसद के मानसून सत्र के दौरान उस समय शुरू हुआ जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र और साधु वेश में संसद परिसर पहुंचे। उनके साथ विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के उपयोग को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    हालांकि इस प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक परंपराओं और संत समाज का अपमान बताया। संगठनों का कहना है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु वेश धारण कर इस तरह का प्रदर्शन करना करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उनका आरोप है कि इस प्रकार के प्रदर्शन से धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया गया है।

    दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर था। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि सार्वजनिक दान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और इसी मुद्दे को उठाने के लिए सांकेतिक प्रदर्शन किया गया।

    भोपाल में होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी सतर्क है। मार्च के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    विश्व हिंदू परिषद ने सभी सनातन धर्मावलंबियों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। ऐसे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जाएगा। भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन अब प्रदेश की राजनीति और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

  • मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर

    मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम घटे, अब भोपाल में ₹2743 और इंदौर में ₹2846 में मिलेगा सिलेंडर


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। एक अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। कीमतों में आई इस गिरावट से व्यापारियों की संचालन लागत कम होने की उम्मीद है और आने वाले समय में ग्राहकों को भी खाने-पीने की सेवाओं में राहत मिल सकती है।

    नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में अब 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 2743 रुपए में उपलब्ध होगा। वहीं इंदौर में इसकी कीमत घटकर 2846 रुपए रह गई है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2991.50 रुपए का मिलेगा। इसके अलावा सिंगरौली और नरसिंहपुर में इसकी कीमत 2989.50 रुपए तथा सतना में 2989 रुपए निर्धारित की गई है। दूसरी ओर शाजापुर प्रदेश का सबसे सस्ता शहर बन गया है, जहां यह सिलेंडर 2749.50 रुपए में मिलेगा।

    होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ने से उनकी लागत काफी बढ़ गई थी। गैस महंगी होने के कारण कई प्रतिष्ठानों को अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी थी। अब गैस सस्ती होने से कारोबारियों को राहत मिलेगी और यदि कीमतें स्थिर रहीं तो आने वाले समय में ग्राहकों को भी इसका फायदा मिल सकता है।

    कैटरिंग व्यवसाय पर भी गैस की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पड़ा था। कारोबारियों के अनुसार लगभग 500 लोगों के भोजन वाले एक आयोजन की लागत में 45 से 50 हजार रुपए तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो गई थी। इसके चलते कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट चार्ज बढ़ा दिए थे। अब कमर्शियल एलपीजी सस्ती होने के बाद आयोजन की लागत में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ा था। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई दिया और कई शहरों में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3300 रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले यही सिलेंडर लगभग 1800 से 2000 रुपए के बीच उपलब्ध था। अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में कुछ राहत मिलने के बाद कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।

    इस बीच घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए गैस कंपनियों ने महत्वपूर्ण सूचना भी जारी की है। कंपनियां उपभोक्ताओं को एसएमएस भेजकर आधार आधारित बायोमेट्रिक ई-केवाईसी कराने की अपील कर रही हैं। निर्धारित समय सीमा तक ई-केवाईसी पूरी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दर पर एलपीजी सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रही हैं।

    कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आई यह कमी फिलहाल होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग उद्योग के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। यदि आने वाले महीनों में कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।