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  • हिंदू कुश हिमालय पर मंडरा रहा जलवायु संकट, कम बारिश से बढ़ सकता है बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर झील फटने का खतरा

    हिंदू कुश हिमालय पर मंडरा रहा जलवायु संकट, कम बारिश से बढ़ सकता है बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर झील फटने का खतरा


    नई दिल्ली । मानसून के आगमन के साथ देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है, लेकिन इसी बीच हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों द्वारा जारी ताजा आकलन के अनुसार इस वर्ष मानसून के दौरान इस संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। इसके साथ ही तापमान भी औसत से अधिक रह सकता है, जिससे जलवायु संबंधी कई गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

    इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टीट्यूट ऑफ एटमॉस्फेरिक फिजिक्स द्वारा जारी HKH मॉनसून आउटलुक 2026 में संकेत दिए गए हैं कि कम बारिश और बढ़ते तापमान का संयुक्त प्रभाव इस क्षेत्र में सूखे, भूस्खलन, अचानक बाढ़ और ग्लेशियर झील फटने जैसी घटनाओं के खतरे को बढ़ा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार अल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियां मानसून को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे वर्षा का वितरण असंतुलित हो सकता है।

    हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र लगभग 3,500 किलोमीटर तक फैला हुआ है और अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, चीन तथा म्यांमार जैसे देशों को जोड़ता है। यह क्षेत्र केवल पर्वतों और ग्लेशियरों के लिए ही नहीं, बल्कि एशिया की कई महत्वपूर्ण नदी प्रणालियों का उद्गम स्थल होने के कारण भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, यांग्त्जी, मेकांग, इरावदी और अमू दरिया जैसी नदियां इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं, जिन पर करोड़ों लोगों की जल, कृषि और आजीविका संबंधी जरूरतें निर्भर करती हैं।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले शीतकाल में बर्फ का टिकाव सामान्य से कम रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका अर्थ है कि क्षेत्र मानसून में अपेक्षाकृत कम जल भंडार के साथ प्रवेश कर रहा है। ऐसी स्थिति में स्थानीय समुदायों को वर्षा, भूजल और प्राकृतिक जल स्रोतों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। यदि बारिश उम्मीद से कम होती है, तो जल उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ जाएगी।

    विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कम वर्षा का मतलब यह नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं का खतरा कम हो जाएगा। कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की घटनाएं भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं। अचानक आने वाली बाढ़, पहाड़ी ढलानों का खिसकना और ग्लेशियर झीलों का फटना ऐसे खतरे हैं जो कम बारिश वाले मौसम में भी सामने आ सकते हैं।

    रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन को भी एक प्रमुख कारण बताया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार बदलते मौसम पैटर्न के कारण हिमालयी क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हो गया है। तापमान में वृद्धि और वर्षा की अनिश्चितता भविष्य में इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जल संसाधनों और स्थानीय आबादी पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन और नीति निर्माताओं को इन चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण और जलवायु अनुकूलन की रणनीतियों को मजबूत करना होगा। क्योंकि हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में होने वाले बदलाव केवल पर्वतीय इलाकों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनका असर पूरे दक्षिण एशिया और उससे जुड़े करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है।

  • फीफा विश्व कप 2026: गोल्डन बॉल की जंग में मेसी, एमबाप्पे और यमाल आमने-सामने, कौन बनेगा टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी?

    फीफा विश्व कप 2026: गोल्डन बॉल की जंग में मेसी, एमबाप्पे और यमाल आमने-सामने, कौन बनेगा टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी?


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 का आगाज होते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें सिर्फ ट्रॉफी पर ही नहीं, बल्कि टूर्नामेंट के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत सम्मान ‘गोल्डन बॉल’ पर भी टिक गई हैं। यह पुरस्कार विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाता है और इसके लिए हर बार दुनिया के सबसे बड़े सितारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। इस बार भी अनुभवी दिग्गजों और युवा प्रतिभाओं के बीच रोमांचक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है।

    गोल्डन बॉल के प्रमुख दावेदारों में सबसे चर्चित नाम अर्जेंटीना के कप्तान लियोनल मेसी का है। 39 वर्षीय मेसी पहले ही दो बार यह सम्मान जीतकर इतिहास रच चुके हैं। 2022 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर अर्जेंटीना को चैंपियन बनाने वाले मेसी अब अपने करियर के अंतिम विश्व कप में एक और यादगार उपलब्धि हासिल करने की कोशिश करेंगे। क्लब फुटबॉल में भी उनकी फॉर्म प्रभावशाली रही है, जिससे उनके समर्थकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

    स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल को इस विश्व कप का सबसे बड़ा उभरता चेहरा माना जा रहा है। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। तेज रफ्तार, बेहतरीन ड्रिब्लिंग और आक्रमण में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता उन्हें गोल्डन बॉल की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाती है। यदि स्पेन टूर्नामेंट में गहरी छाप छोड़ता है, तो यमाल इतिहास रच सकते हैं।

    फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे भी इस सूची में बेहद मजबूत दावेदार हैं। 2022 विश्व कप फाइनल में हैट्रिक लगाने वाले एमबाप्पे पहले ही विश्व कप इतिहास के सबसे खतरनाक गोल स्कोररों में गिने जाने लगे हैं। उनकी गति, तकनीक और बड़े मुकाबलों में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें हर टूर्नामेंट में खास बनाती है।

    इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन भी बेहतरीन फॉर्म में विश्व कप में उतर रहे हैं। क्लब स्तर पर लगातार गोल करने वाले केन के कंधों पर इंग्लैंड को लंबे समय बाद विश्व चैंपियन बनाने की जिम्मेदारी होगी। यदि इंग्लैंड खिताब जीतने में सफल रहता है तो केन का नाम गोल्डन बॉल की दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे सकता है।

    ब्राजील के स्टार विंगर विनीसियस जूनियर से भी काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। क्लब फुटबॉल में शानदार प्रदर्शन के बावजूद वह अभी तक विश्व मंच पर अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा सके हैं। हालांकि नए माहौल और अनुभवी मार्गदर्शन में वह ब्राजील के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

    वहीं, पुर्तगाल के महान फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 41 वर्ष की उम्र में अपने छठे विश्व कप में हिस्सा लेने जा रहे रोनाल्डो के पास इतिहास रचने का अवसर है। यदि वह पुर्तगाल को पहली बार विश्व कप खिताब दिलाने में सफल रहते हैं, तो यह फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक होगी।

    इन छह बड़े नामों के अलावा एरलिंग हालंद, केविन डी ब्रुइन, जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज, लुइस डियाज और माइकल ओलिसे जैसे खिलाड़ी भी अपने प्रदर्शन से गोल्डन बॉल की दौड़ को रोमांचक बना सकते हैं। कुल मिलाकर विश्व कप 2026 में न केवल खिताब की लड़ाई दिलचस्प होगी, बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने की प्रतिस्पर्धा भी प्रशंसकों को रोमांचित करेगी।

  • 30 साल बाद फिर साथ दिखे अक्षय, सुनील और रवीना, ‘वेलकम टू द जंगल’ ने ताजा कर दी ‘मोहरा’ की यादें

    30 साल बाद फिर साथ दिखे अक्षय, सुनील और रवीना, ‘वेलकम टू द जंगल’ ने ताजा कर दी ‘मोहरा’ की यादें


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की यादगार फिल्मों में शुमार ‘मोहरा’ को रिलीज हुए तीन दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन फिल्म की लोकप्रियता आज भी दर्शकों के दिलों में बरकरार है। अब इस फिल्म की चर्चित तिकड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ दिखाई देने जा रही है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और रवीना टंडन आगामी कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ में एक साथ नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज से पहले सामने आई कुछ खास तस्वीरों ने दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

    अभिनेत्री रवीना टंडन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ‘वेलकम टू द जंगल’ के सेट से कई बिहाइंड द सीन्स (बीटीएस) तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में फिल्म की स्टारकास्ट के साथ बिताए गए यादगार पलों की झलक देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा ध्यान उस तस्वीर ने खींचा जिसमें रवीना, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी एक साथ नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर ने फैंस को सीधे 1994 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मोहरा’ की याद दिला दी।

    ‘मोहरा’ बॉलीवुड की उन फिल्मों में गिनी जाती है जिसने एक्शन, रोमांस और संगीत के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। फिल्म का लोकप्रिय गीत ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ आज भी लोगों की पसंदीदा सूची में शामिल है। ऐसे में जब तीनों कलाकारों को एक साथ देखा गया तो सोशल मीडिया पर पुरानी यादों की चर्चा तेज हो गई।

    रवीना टंडन ने तस्वीरें साझा करते हुए पूरी टीम के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने पर अपने सह-कलाकारों और यूनिट के सदस्यों को यादगार सफर का हिस्सा बताया। उनके पोस्ट पर फैंस ने भी उत्साह दिखाया और ‘मोहरा’ की तिकड़ी को दोबारा साथ देखने की खुशी जाहिर की।

    ‘वेलकम टू द जंगल’ मशहूर ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी है। कॉमेडी, एक्शन और मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म का निर्देशन अहमद खान ने किया है, जबकि इसके निर्माता फिरोज नाडियाडवाला हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता है और अब बीटीएस तस्वीरों ने इस उत्साह को और बढ़ा दिया है।

    फिल्म की खास बात केवल अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और रवीना टंडन की वापसी नहीं है, बल्कि इसमें बॉलीवुड के कई लोकप्रिय कलाकार भी नजर आएंगे। फिल्म की स्टारकास्ट में परेश रावल, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडीज, राजपाल यादव, जॉनी लीवर, लारा दत्ता, आफताब शिवदासानी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े और दलेर मेहंदी जैसे कलाकार शामिल हैं।

    निर्माताओं के अनुसार फिल्म का ट्रेलर बड़े स्तर पर लॉन्च किया जाएगा, जिसके बाद दर्शकों को इसकी कहानी और किरदारों की अधिक झलक देखने को मिलेगी। फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

    फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने यह साबित कर दिया है कि ‘मोहरा’ की यादें आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा हैं। तीन दशक बाद अक्षय, सुनील और रवीना को एक साथ देखना फैंस के लिए किसी खास तोहफे से कम नहीं माना जा रहा है।

  • कैसे बने ‘कल्याण कुमार’ से ‘पवन कल्याण’? आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

    कैसे बने ‘कल्याण कुमार’ से ‘पवन कल्याण’? आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने सुनाया दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली । तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। फिल्मों में ‘पावर स्टार’ के नाम से प्रसिद्ध पवन कल्याण ने राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका चर्चित नाम ‘पवन कल्याण’ आखिर उन्हें कैसे मिला। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी साझा की।

    पवन कल्याण ने बताया कि उनका जन्म नाम ‘श्री कल्याण कुमार’ था। उनका नामकरण तिरुमाला देवस्थानम के भगवान योग नरसिम्हा मंदिर में हुआ था, जहां परिवार ने उनका नाम ‘श्री कल्याण कुमार’ रखा। बाद में जब उनका स्कूल में दाखिला हुआ, तो नाम से ‘श्री’ शब्द हटा दिया गया और पारिवारिक उपनाम जुड़ने के कारण उनका नाम ‘के. कल्याण कुमार’ हो गया।

    उन्होंने बताया कि युवावस्था में उन्हें मार्शल आर्ट्स का काफी शौक था और वे इसके लिए कड़ी मेहनत करते थे। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने लंबे समय तक मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान उन्होंने कई सार्वजनिक प्रदर्शनों में अपनी शारीरिक क्षमता और ताकत का प्रदर्शन भी किया।

    पवन कल्याण के अनुसार, प्रशिक्षण के दिनों में वे अपनी छाती पर भारी वजन उठाने और कठिन स्टंट करने के लिए जाने जाते थे। प्रदर्शन के दौरान उनकी छाती पर भारी पत्थर की सिल्लियां रखकर उन्हें तोड़ा जाता था। उनकी शारीरिक शक्ति और साहस को देखकर उनके मार्शल आर्ट्स शिक्षक काफी प्रभावित हुए।

    यहीं से उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। उनके शिक्षक ने उनकी तुलना भगवान हनुमान से करते हुए कहा कि उनमें ‘पवन पुत्र हनुमान’ जैसी ऊर्जा, शक्ति और साहस दिखाई देता है। इसी भावना के साथ शिक्षक ने उनके नाम के आगे ‘पवन’ शब्द जोड़ दिया। इसके बाद ‘कल्याण कुमार’ धीरे-धीरे ‘पवन कल्याण’ के नाम से पहचाने जाने लगे।

    समय के साथ यही नाम उनकी पहचान बन गया। जब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तब भी उन्होंने इसी नाम को अपनाया। देखते ही देखते पवन कल्याण तेलुगु सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हो गए। उनकी फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में एक अलग मुकाम हासिल किया।

    फिल्मों में सफलता के बाद उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी पार्टी के जरिए जनता के बीच मजबूत आधार तैयार किया। आज वे आंध्र प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री के पद पर कार्यरत हैं और राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।

    पवन कल्याण की यह कहानी केवल नाम बदलने की नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण की भी कहानी है। एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षु से सुपरस्टार और फिर उपमुख्यमंत्री तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। उनके नाम के पीछे छिपी यह रोचक कहानी आज भी उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता का विषय बनी हुई है।

  • नाइटक्लब विवाद के बीच इंग्लैंड टीम में बड़ा बदलाव, बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन दूसरे टेस्ट से बाहर

    नाइटक्लब विवाद के बीच इंग्लैंड टीम में बड़ा बदलाव, बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन दूसरे टेस्ट से बाहर


    नई दिल्ली । न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी दूसरे टेस्ट मैच से पहले इंग्लैंड क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के नियमित कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन को दूसरे टेस्ट के लिए घोषित स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है। यह निर्णय हाल ही में सामने आए कथित नाइटक्लब विवाद और उससे जुड़ी जांच के बीच लिया गया है। वहीं, अनुभवी बल्लेबाज जो रूट को टीम की अंतरिम कप्तानी सौंपी गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड की जीत के बाद हुए जश्न से जुड़ा है। बताया गया है कि खिलाड़ी पहले ड्रेसिंग रूम और बाद में लंदन के एक पब में मौजूद थे। इसके बाद कुछ खिलाड़ी चेल्सी स्थित एक नाइटक्लब पहुंचे, जहां देर रात कथित रूप से एक झड़प की घटना सामने आई। रिपोर्ट्स में बेन स्टोक्स, गस एटकिंसन, इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की सुरक्षा टीम के एक सदस्य और एक रग्बी खिलाड़ी का नाम सामने आया है।

    हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि स्टोक्स और एटकिंसन सीधे तौर पर किसी शारीरिक झड़प में शामिल नहीं थे। घटना में सुरक्षा दल का एक सदस्य घायल हुआ था, लेकिन मामले में पुलिस हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ी और फिलहाल किसी आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी नहीं जताई गई है। इसके बावजूद घटना ने इंग्लैंड क्रिकेट के भीतर अनुशासन और टीम संस्कृति को लेकर बहस छेड़ दी है।

    ईसीबी और संबंधित संस्थाएं इस मामले की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने तक स्टोक्स और एटकिंसन को दूसरे टेस्ट की टीम से बाहर रखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार एटकिंसन की अनुपस्थिति को औपचारिक निलंबन नहीं माना जा रहा, बल्कि यह कदम जांच प्रक्रिया और खिलाड़ी के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

    इस बीच जो रूट को टीम की कमान सौंपना इंग्लैंड क्रिकेट के लिए एक सुरक्षित और अनुभवी विकल्प माना जा रहा है। रूट इससे पहले 2017 से 2022 के बीच इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कप्तानी कर चुके हैं और उनके नेतृत्व में टीम ने कई महत्वपूर्ण जीत दर्ज की थीं। ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहम मुकाबले में उनकी वापसी को टीम के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

    रिपोर्टों के मुताबिक बेन स्टोक्स फिलहाल मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और उन्होंने अपनी स्थिति तथा भविष्य को लेकर विचार करने के लिए कुछ निजी समय मांगा है। दूसरी ओर क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों की नजरें ईसीबी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब इंग्लैंड क्रिकेट टीम पहले से ही अपने प्रदर्शन, अनुशासन और टीम संस्कृति को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि पहले टेस्ट से पहले मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम ने खिलाड़ियों को देर रात तक बाहर रहने और अनुशासनहीनता से बचने की सलाह दी थी। अब दूसरे टेस्ट से ठीक पहले सामने आए इस विवाद ने टीम प्रबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ द ओवल में 17 जून से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड की टीम नए नेतृत्व में मैदान पर उतरेगी। इस मुकाबले के साथ-साथ सभी की नजरें जांच के नतीजों और बेन स्टोक्स की भविष्य की भूमिका पर भी बनी रहेंगी।

  • TMC-कांग्रेस विलय की अटकलें तेज, ममता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक को महासचिव पद की पेशकश की चर्चा

    TMC-कांग्रेस विलय की अटकलें तेज, ममता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक को महासचिव पद की पेशकश की चर्चा


    नई दिल्ली । देश की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संभावित विलय की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। दिल्ली में गांधी परिवार और बनर्जी परिवार के बीच हुई हालिया मुलाकातों के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि दोनों दलों की ओर से अब तक किसी भी प्रकार के विलय या औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से सामने आ रही खबरों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।

    मीडिया रिपोर्ट्स में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि यदि भविष्य में तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय होता है, तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को कांग्रेस महासचिव पद की पेशकश किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    विलय की संभावनाओं को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में यह प्रक्रिया कितनी व्यावहारिक होगी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि टीएमसी के भीतर कुछ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। कुछ बागी नेताओं की ओर से पार्टी के भीतर असंतोष की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों पर भी पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है तो कांग्रेस और टीएमसी के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी संदर्भ में हालिया बैठकों को देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन मुलाकातों में विपक्षी एकता, INDIA गठबंधन की रणनीति और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत केवल गठबंधन तक सीमित है या भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की भी संभावना है।

    इस बीच टीएमसी के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखेगी। दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो इससे विपक्षी राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय बताई जा रही है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार फिलहाल स्थिति पूरी तरह अटकलों और सूत्रों पर आधारित है। दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से आने वाले दिनों में दिए जाने वाले बयानों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल इतना तय है कि दिल्ली में हुई मुलाकातों ने विपक्षी राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आगामी दिनों में इस विषय पर और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।

  • रोहित शर्मा रचेंगे नया इतिहास, वनडे में भारत के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनने के करीब

    रोहित शर्मा रचेंगे नया इतिहास, वनडे में भारत के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनने के करीब


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने जा रहे हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच 13 जून से शुरू हो रही तीन मैचों की वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में मैदान पर कदम रखते ही रोहित शर्मा भारत के लिए वनडे क्रिकेट खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन जाएंगे। इसके साथ ही वह 37 साल पुराना एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे।

    धर्मशाला में खेले जाने वाले पहले वनडे मुकाबले के दौरान रोहित शर्मा की उम्र 39 साल और 44 दिन होगी। इसी के साथ वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मोहिंदर अमरनाथ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे। अमरनाथ ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच वर्ष 1989 में खेला था, उस समय उनकी उम्र 39 साल और 36 दिन थी। अब लगभग चार दशक बाद यह रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम दर्ज होने जा रहा है।

    हाल ही में फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद रोहित शर्मा भारतीय टीम से जुड़े हैं और चयनकर्ताओं तथा टीम प्रबंधन का भरोसा बनाए रखने में सफल रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ समय में चोट और फिटनेस को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन रोहित ने अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से साबित किया है कि वह अभी भी भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभाने में सक्षम हैं।

    अफगानिस्तान के खिलाफ यह सीरीज भारतीय टीम के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीम के दो प्रमुख खिलाड़ी विराट कोहली और हार्दिक पांड्या चोट के कारण इस श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी टीम को मजबूती प्रदान करेगी। युवा खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम में उनका अनुभव निर्णायक साबित हो सकता है।

    रोहित शर्मा पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। अब उनका पूरा ध्यान वनडे क्रिकेट पर केंद्रित है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नजर वर्ष 2027 में होने वाले आईसीसी क्रिकेट विश्व कप पर है। रोहित की इच्छा भारत को एक और विश्व कप खिताब दिलाकर अपने शानदार करियर को यादगार तरीके से समाप्त करने की हो सकती है।

    हालांकि बढ़ती उम्र के साथ चुनौतियां भी बढ़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लगातार दबाव, फिटनेस बनाए रखने की जरूरत और युवा खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा रोहित के सामने बड़ी परीक्षा होगी। इसके बावजूद उनका अनुभव, तकनीक और बड़े मैचों में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें भारतीय टीम का महत्वपूर्ण सदस्य बनाए हुए है।

    आईपीएल 2026 में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन वनडे क्रिकेट में उन्होंने लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। यही कारण है कि टीम प्रबंधन और प्रशंसकों को उनसे आगामी मुकाबलों में भी बड़ी पारियों की उम्मीद है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में रोहित शर्मा सिर्फ रन बनाने के लिए नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए भी मैदान पर उतरेंगे। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें इस उपलब्धि पर टिकी रहेंगी।

  • ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात

    ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात


    मध्‍य प्रदेश। एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और अब एजेंसी मेडिकल, डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर विभिन्न तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर न्यायिक हिरासत में बंद ट्विशा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की।

    महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। आयोग की टीम ने गिरिबाला सिंह से भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। आयोग के अनुसार गिरिबाला सिंह ने किसी प्रकार की परेशानी या शिकायत नहीं बताई और कहा कि उन्हें जेल में कोई विशेष समस्या नहीं है।

    निरीक्षण के दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय से संबंधित एक पुस्तक पढ़ती हुई दिखाई दीं। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि बातचीत के दौरान वह शांत रहीं और आयोग को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उन्हें जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो। आयोग ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।

    दूसरी ओर सीबीआई मामले के विभिन्न पहलुओं को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी को मिली दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर अब मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में कथित रूप से प्रेग्नेंसी, मेडिकल उपचार, शरीर पर मिले चोटों के निशान तथा घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसी ने अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

    सूत्रों के अनुसार सीबीआई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो तथा डिलीट किए गए डेटा की भी जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला को समझना और उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है।

    मामले में ट्विशा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने प्रारंभिक जांच प्रक्रिया और कुछ दस्तावेजी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि घटनास्थल से जब्त सामग्री और जांच प्रक्रिया में कुछ गंभीर विसंगतियां रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंचने की आशंका की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला न्यायालय में विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिवक्ताओं द्वारा वकालतनामा प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुमति मांगी है।

    फिलहाल सीबीआई मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।

  • बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि

    बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में बुधवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार को विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और कुछ विशेष वास्तु उपाय अपनाने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है। वहीं वास्तु शास्त्र भी इस दिन को सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और घर-परिवार में खुशहाली लाने के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। माना जाता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक होता है। घर के मुख्य द्वार को साफ रखकर वहां रंगोली बनाना या हरे रंग के पौधे लगाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है, इसलिए इसे अव्यवस्थित या गंदा नहीं रखना चाहिए।

    बुधवार को हरे रंग का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि यह रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घर में हरे रंग के पौधे लगाना, हरे वस्त्र पहनना या पूजा में हरे रंग की वस्तुओं का उपयोग करना लाभकारी माना जाता है। तुलसी का पौधा विशेष रूप से शुभ माना गया है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो बुधवार को उसकी पूजा करने और दीपक जलाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार बुधवार को घर के उत्तर दिशा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उत्तर दिशा को बुध ग्रह की दिशा माना गया है। इस दिशा को साफ-सुथरा और खुला रखना शुभ फलदायी माना जाता है। यदि उत्तर दिशा में अनावश्यक सामान रखा हो तो उसे हटा देना चाहिए। ऐसा करने से धन और करियर से जुड़े अवसरों में वृद्धि होने की मान्यता है।

    भगवान गणेश की पूजा भी बुधवार के दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। सुबह स्नान के बाद गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक और हरे रंग के फूल अर्पित करने से बुद्धि, विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। व्यवसाय और नौकरी से जुड़े लोगों के लिए यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

    आर्थिक उन्नति के लिए बुधवार को हरी मूंग का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को हरी सब्जियां, हरे वस्त्र या हरी मूंग दान करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलने की संभावना बढ़ती है। इसके साथ ही पक्षियों को दाना डालना और गाय को हरा चारा खिलाना भी पुण्यदायी माना गया है।

    यदि घर में लगातार तनाव या नकारात्मकता महसूस हो रही हो तो बुधवार को कपूर और लौंग जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध फैलाना लाभकारी माना जाता है। यह उपाय वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

    कुल मिलाकर बुधवार का दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वास्तु के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से इन उपायों का पालन करने से जीवन में संतुलन और सफलता के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

  • सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

    सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

    नई दिल्ली । सोने में निवेश को लेकर निवेशकों का रुख मई महीने में बदलता दिखाई दिया है। लगातार 13 महीनों तक मजबूत निवेश आकर्षित करने वाले गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से मई 2026 में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके साथ ही एक वर्ष से अधिक समय से जारी सकारात्मक निवेश प्रवाह का सिलसिला टूट गया। वित्तीय बाजार के विशेषज्ञ इस बदलाव को निवेशकों की रणनीति में आए परिवर्तन और सोने की ऊंची कीमतों से जोड़कर देख रहे हैं।

    हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग के कारण सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी। इसी वजह से गोल्ड ईटीएफ में भी निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई थी। हालांकि मई में पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई जब निवेशकों ने इस श्रेणी से बड़ी मात्रा में धन निकालना शुरू किया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने और मुनाफा सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। जब किसी एसेट में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है, तब निवेशक अक्सर अपने निवेश का एक हिस्सा निकालकर लाभ सुरक्षित करते हैं। गोल्ड ईटीएफ में आई निकासी को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

    बाजार जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर बढ़े हैं। कई शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपने धन का कुछ हिस्सा सोने से निकालकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित करना शुरू किया है। इससे गोल्ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार स्वाभाविक रूप से धीमी हुई है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निवेशकों के लिए सोने में निवेश बनाए रखने की अवसर लागत बढ़ी है। फिक्स्ड इनकम निवेश विकल्पों पर बेहतर प्रतिफल मिलने और अन्य परिसंपत्तियों में संभावित अवसर दिखाई देने के कारण कुछ निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से दूरी बनानी शुरू की। इसके अलावा, बाजार में भविष्य के रिटर्न को लेकर अधिक संतुलित दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है।

    हालांकि मई में निकासी दर्ज की गई, लेकिन यह तस्वीर का केवल एक पक्ष है। दूसरी ओर गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट लगातार बढ़ता रहा। इसका अर्थ यह है कि सोने की कीमतों में वृद्धि का असर फंडों की कुल परिसंपत्तियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई दिया। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि निवेश की गति में अस्थायी बदलाव देखने को मिला है।

    वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि सोना अब भी निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के दौर में निवेशक इसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं। इसलिए अल्पकालिक निकासी को दीर्घकालिक रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    मई के आंकड़े यह जरूर संकेत देते हैं कि निवेशक अब अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे केवल सुरक्षित निवेश पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न परिसंपत्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में सोने की कीमतों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार के रुझानों के आधार पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश की दिशा तय होगी।