Blog

  • बारिश ने पलट दिया एशियन गेम्स का पूरा समीकरण, भारत-पाकिस्तान फाइनल पर सस्पेंस, अब बांग्लादेश पर टिकी नजरें

    बारिश ने पलट दिया एशियन गेम्स का पूरा समीकरण, भारत-पाकिस्तान फाइनल पर सस्पेंस, अब बांग्लादेश पर टिकी नजरें


    नई दिल्ली। आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता का रोमांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान के बीच गोल्ड मेडल मुकाबले की संभावना बनने लगी है लेकिन फाइनल की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। दोनों टीमों ने अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले बारिश की वजह से खेले बिना ही सेमीफाइनल में जगह बना ली है। अब दोनों के सामने सेमीफाइनल की चुनौती है और अगर भारत तथा पाकिस्तान अपनी-अपनी भिड़ंत में जीत दर्ज करते हैं तो 3 अक्टूबर को गोल्ड मेडल मैच में दोनों चिर प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने नजर आ सकते हैं।

    एशियन गेम्स की पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत पाकिस्तान श्रीलंका और बांग्लादेश को उनकी बेहतर रैंकिंग के आधार पर सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश मिला था। दूसरी ओर जापान नेपाल अफगानिस्तान हॉन्ग कॉन्ग मलेशिया और ओमान को ग्रुप चरण में मुकाबले खेलने पड़े। ग्रुप ए से नेपाल और अफगानिस्तान ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई जबकि ग्रुप बी से मलेशिया और हॉन्ग कॉन्ग अंतिम आठ में पहुंचे।

    क्वार्टर फाइनल मुकाबलों में बारिश ने पूरा समीकरण बदल दिया। पाकिस्तान और हॉन्ग कॉन्ग के बीच मुकाबला एक भी गेंद फेंके बिना रद्द हो गया। इसके बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच मुकाबला भी बारिश और गीली आउटफील्ड की वजह से शुरू नहीं हो सका। प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में बेहतर रैंकिंग वाली टीम को अगले दौर में प्रवेश मिलता है। इसी नियम के तहत पाकिस्तान और भारत दोनों सेमीफाइनल में पहुंच गए।

    भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास था क्योंकि क्रिकेट फैंस को 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के एशियन गेम्स में मैदान पर उतरने का इंतजार था। आईपीएल 2026 में शानदार बल्लेबाजी के बाद वैभव ने काफी सुर्खियां बटोरी हैं। हालांकि बारिश के कारण टॉस तक नहीं हो सका और भारतीय टीम को बिना खेले ही सेमीफाइनल का टिकट मिल गया। भारत आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर एक टीम है जबकि अफगानिस्तान की रैंकिंग दसवें स्थान पर है।

    अब भारत का सेमीफाइनल श्रीलंका के खिलाफ 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे होगा। श्रीलंका और नेपाल के बीच क्वार्टर फाइनल भी बारिश की भेंट चढ़ गया था। वहीं पाकिस्तान का सामना उसी दिन सुबह 5:30 बजे बांग्लादेश से होगा। यहीं से भारत पाकिस्तान फाइनल की संभावित कहानी में नया मोड़ आता है। पाकिस्तान को फाइनल में पहुंचने के लिए बांग्लादेश को हराना होगा जबकि भारत के सामने श्रीलंका की चुनौती होगी।

    अगर दोनों टीमें अपने सेमीफाइनल जीत लेती हैं तो 3 अक्टूबर को सुबह 10 बजे गोल्ड मेडल मुकाबले में भारत और पाकिस्तान की टक्कर देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल इसे सिर्फ संभावित समीकरण माना जा सकता है क्योंकि दोनों टीमों को पहले सेमीफाइनल जीतना जरूरी है। बांग्लादेश पाकिस्तान की राह में बड़ी चुनौती बन सकता है और श्रीलंका भी भारत के फाइनल के रास्ते में खड़ा है। ऐसे में एशियन गेम्स 2026 में अगले दो मुकाबले क्रिकेट फैंस के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।

  • 2 अक्टूबर को बुध-मंगल का केंद्र दृष्टि योग, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्‍मत, मिलेंगे सकारात्मक परिणाम

    2 अक्टूबर को बुध-मंगल का केंद्र दृष्टि योग, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्‍मत, मिलेंगे सकारात्मक परिणाम


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति और उनके बीच बनने वाले संबंधों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांगीय गणना के अनुसार, 2 अक्टूबर 2026 को बुध और मंगल एक-दूसरे से 90 डिग्री के कोण पर स्थित होंगे। ज्योतिष में इसे केंद्र दृष्टि योग (Square Aspect) कहा जाता है। मान्यता है कि बुध की बुद्धि और मंगल की ऊर्जा का यह मेल कुछ राशियों के लिए करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम ला सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से चतुर्थ और दशम भाव की दूरी पर होते हैं तो केंद्र दृष्टि योग बनता है। बुध को बुद्धि, संवाद और व्यापार का कारक माना जाता है, जबकि मंगल साहस, ऊर्जा और पराक्रम से जुड़े हैं। ऐसे में दोनों ग्रहों का यह संबंध निर्णय क्षमता, रणनीतिक सोच और कार्यकुशलता को प्रभावित कर सकता है। वैसे इसका असर सभी 12 राशियों पर माना जाता है, लेकिन मिथुन, कन्या और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए इसे विशेष रूप से शुभ बताया जा रहा है।

    मिथुन राशि: कारोबार और कमाई में बढ़ सकते हैं मौके

    मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं। इसलिए बुध-मंगल का यह संबंध इस राशि के जातकों के करियर और आर्थिक मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर मार्केटिंग, मीडिया, सेल्स, आईटी और लेखन से जुड़े लोगों को अपनी संवाद क्षमता और तार्किक सोच का फायदा मिल सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, कारोबार करने वाले जातकों के लिए नए क्लाइंट जुड़ने और मुनाफा बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। योजनाओं को सही दिशा मिलने से पहले से अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना भी जताई गई है।

    कन्या राशि: जिम्मेदारी बढ़ेगी, काम की सराहना संभव

    कन्या राशि पर भी बुध का आधिपत्य माना जाता है। 2 अक्टूबर को बनने वाला केंद्र दृष्टि योग इस राशि के जातकों के कार्यक्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

    नौकरी करने वाले लोगों को कार्यस्थल पर कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। किसी टीम की कमान संभालने का अवसर भी मिलने की संभावना जताई गई है। अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ तालमेल बेहतर होने से काम की सराहना मिल सकती है।

    संपत्ति, जमीन या वाहन से जुड़े पुराने मामलों में भी राहत मिलने की ज्योतिषीय संभावना बताई गई है। हालांकि, ऐसे मामलों में वास्तविक परिणाम संबंधित परिस्थितियों और कानूनी स्थिति पर निर्भर करेंगे।

    वृश्चिक राशि: साहस के साथ सही रणनीति का मिल सकता है लाभ

    वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल माने जाते हैं। ऐसे में मंगल और बुध का संबंध इस राशि के लिए विशेष प्रभाव वाला माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, मंगल की ऊर्जा के साथ बुध की तार्किक क्षमता जुड़ने से जातक अधिक रणनीतिक तरीके से फैसले ले सकते हैं।

    नए निवेश या साहसिक फैसलों से आर्थिक लाभ की संभावना जताई गई है। प्रतियोगी परीक्षा या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों को भी सकारात्मक समाचार मिलने के योग बताए गए हैं। विरोधियों से जुड़े मामलों में बुद्धिमानी और आत्मविश्वास से स्थिति अपने पक्ष में करने की संभावना मानी जा रही है।

    शुभ प्रभाव के लिए बताए गए उपाय

    ज्योतिष में ग्रहों के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए कुछ उपाय भी बताए जाते हैं। 2 अक्टूबर को बुध से संबंधित शुभता के लिए भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करने और मोदक या लड्डू का भोग लगाने की सलाह दी गई है।

    मंगल की सकारात्मक ऊर्जा के लिए हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की बात कही गई है। इसके अलावा किसी जरूरतमंद व्यक्ति को हरी मूंग की दाल या हरे कपड़े का दान करना भी शुभ माना गया है।

  • DUSU में NSUI का खाता नहीं खुला, राहुल गांधी ने मांगा जवाब, कन्हैया-विनोद से किए सवाल

    DUSU में NSUI का खाता नहीं खुला, राहुल गांधी ने मांगा जवाब, कन्हैया-विनोद से किए सवाल


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के केंद्रीय पैनल में एक भी सीट नहीं जीत पाने के बाद पार्टी के भीतर समीक्षा शुरू हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार और राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के साथ बैठक कर चुनावी नतीजों, उम्मीदवारों के चयन और प्रचार रणनीति पर चर्चा की। बैठक में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद रहे।

    राष्ट्रपति पद पर भी मुकाबला रहा करीबी

    रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में राहुल गांधी ने खास तौर पर राष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मुकाबला करीबी होने के बावजूद अंतिम नतीजा NSUI के पक्ष में नहीं गया। उन्होंने चुनाव के दौरान अपनाई गई रणनीति और संगठन की तैयारियों को लेकर कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ से जवाब मांगा।

    DUSU के चार केंद्रीय पदों में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद जीते, जबकि उपाध्यक्ष पद पर NSUI से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। NSUI का आधिकारिक पैनल कोई केंद्रीय सीट नहीं जीत सका।

    टिकट वितरण पर भी उठे सवाल

    बैठक में उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण को लेकर भी चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, दीपांशु शौकीन को आधिकारिक टिकट नहीं देने के फैसले पर सवाल उठाया गया। शौकीन बाद में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे और उपाध्यक्ष पद जीत लिया।

    इसके अलावा कुछ अन्य उम्मीदवारों के टिकट को लेकर भी संगठन के भीतर असहमति की बात सामने आई है। रिपोर्टों में दावा किया गया कि उम्मीदवारों के चयन से जुड़े फैसलों ने NSUI के वोटों को प्रभावित किया और संगठन के आधिकारिक उम्मीदवारों के सामने बगावत की स्थिति बनी।

    वेणुगोपाल ने भी मांगी रिपोर्ट

    DUSU नतीजों के बाद कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की थी। रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने उनसे चुनाव परिणाम और हार के कारणों पर विस्तृत जानकारी लेने को कहा था। इसके बाद NSUI की रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों को लेकर बैठक हुई।

    बैठक में प्रचार अभियान, उम्मीदवारों के चयन, जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता और छात्रों के बीच पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से आगे की छात्र राजनीति के लिए संगठन को मजबूत करने और युवाओं से जुड़ाव बढ़ाने पर भी जोर दिए जाने की रिपोर्ट है।

    युवा मुद्दों से जुड़ाव पर भी चर्चा

    DUSU चुनाव के नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब कांग्रेस की ओर से युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय चुनाव में NSUI का प्रदर्शन पार्टी के लिए समीक्षा का विषय बना है। राहुल गांधी की बैठक में संगठन की कैंपस स्तर की गतिविधियों और छात्रों के बीच संपर्क को लेकर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।

    फिलहाल कांग्रेस की ओर से बैठक में राहुल गांधी द्वारा कही गई हर बात का आधिकारिक ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए उनके कथित सवालों और फटकार से जुड़ी जानकारियां मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से सामने आई हैं। चुनाव परिणाम के बाद पार्टी के भीतर अब टिकट वितरण से लेकर चुनावी रणनीति तक की समीक्षा का दौर जारी है।

  • MP में 4 दिन बारिश का ब्रेक, तेज धूप के आसार, उज्जैन-ग्वालियर से मानसून की विदाई शुरू

    MP में 4 दिन बारिश का ब्रेक, तेज धूप के आसार, उज्जैन-ग्वालियर से मानसून की विदाई शुरू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 4 दिन प्रदेश में कोई मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं रहेगा, जिससे कई हिस्सों में तेज धूप निकलने का अनुमान है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग में इसका असर ज्यादा देखने को मिलेगा।

    इधर, बुधवार-गुरुवार से प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के आसार हैं। राजस्थान और पंजाब के कई जिलों से मानसून लौट चुका है, जबकि इसकी वापसी की रेखा मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से तक पहुंच गई है। ऐसे में सबसे पहले उज्जैन और ग्वालियर संभाग से मानसून विदा होने के संकेत हैं।

    आज 4 जिलों में तेज धूप, बाकी जगह बादल-बूंदाबांदी

    मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में तेज धूप खिल सकती है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में बादल छाए रहने और कहीं-कहीं बूंदाबांदी होने के आसार हैं।

    बुधवार से मौसम में और बदलाव देखने को मिलेगा। प्रदेश के करीब आधे हिस्से में तीखी धूप रहने का अनुमान है। 2 अक्टूबर तक अधिकांश हिस्सों में धूप खिलने की संभावना है। बारिश का दौर कमजोर पड़ने के साथ दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    मानसून की सामान्य अवधि खत्म होने में 2 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य अवधि 1 जून से 30 सितंबर तक रहती है। यानी प्रदेश में मानसून की सामान्य अवधि पूरी होने में अब दो दिन बाकी हैं। इसके बाद अलग-अलग हिस्सों से मानसून की वापसी का सिलसिला तेज होने लगेगा।

    राजस्थान और पंजाब के कई हिस्सों से मानसून की विदाई हो चुकी है। मानसून की वापसी की रेखा मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से तक पहुंचने के कारण अब प्रदेश में भी इसके लौटने के संकेत मिलने लगे हैं।

    पूर्वी MP में औसत से 4% ज्यादा बारिश

    इस मानसून सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा औसत से 4% ज्यादा है। अधिकांश जिलों में सामान्य कोटे के आसपास या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    हालांकि, कुछ जिलों में अभी भी बारिश औसत से कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में 2% से 20% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा औसत से नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इसके चलते मानसून सीजन के अंत तक प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से नीचे रहने की संभावना बनी हुई है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    सामान्य बारिश का आंकड़ा छूना मुश्किल

    मानसून की विदाई का समय नजदीक आने के साथ अब प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 100% तक पहुंचने की संभावना कम नजर आ रही है। अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं रहने के कारण बारिश की गतिविधियां सीमित रहने का अनुमान है। ऐसे में अब मौसम का रुख मानसून की वापसी और धूप बढ़ने की ओर रहने की संभावना है।

  • India's industrial production rose by 8 percent in August; manufacturing and capital goods sectors showed strong momentum.

    India's industrial production rose by 8 percent in August; manufacturing and capital goods sectors showed strong momentum.

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। भारत के औद्योगिक उत्पादन में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि को गति दी। अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर 9 प्रतिशत रही और यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब इस क्षेत्र ने 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 ने अगस्त के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें मोटर वाहनों का विनिर्माण प्रमुख रहा, जिसमें उत्पादन 25.2 प्रतिशत बढ़ा। इलेक्ट्रिकल उपकरणों के विनिर्माण में 30.9 प्रतिशत और मशीनरी एवं उपकरणों के विनिर्माण में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक गतिविधियों में व्यापक मजबूती दिखाई दी।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में लगातार उत्पादन बढ़ने से आगे रोजगार और आय से जुड़े अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। औद्योगिक उत्पादन में आई तेजी को इसी व्यापक आर्थिक गतिविधि के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    औद्योगिक उत्पादन के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी अगस्त के दौरान वृद्धि दर्ज की गई। बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में उत्पादन 12.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, खनन क्षेत्र का प्रदर्शन इसके विपरीत रहा और अगस्त में इसमें 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

    उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों में कैपिटल गुड्स के उत्पादन में भी मजबूत तेजी दिखाई दी। कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों यानी कैपिटल गुड्स के उत्पादन में अगस्त के दौरान 16.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस श्रेणी को अर्थव्यवस्था में वास्तविक निवेश से जुड़ी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। मशीनरी के उत्पादन में बढ़ोतरी से आगे औद्योगिक क्षमता, रोजगार और आय के अवसरों पर असर पड़ सकता है।

    अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी वस्तुओं के उत्पादन में तेजी उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से जुड़ी रही। वहीं साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसी कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स वस्तुओं के उत्पादन में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

    इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में अगस्त के दौरान 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हाईवे, बंदरगाह और रेलवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश से इस क्षेत्र को गति मिली। इन परियोजनाओं से निर्माण गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर पैदा होने और व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना रहती है। कुल मिलाकर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि प्रमुख रूप से सामने आई।

  • भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और एसएएफ सहयोग की संभावनाएं बढ़ीं, 2030 तक ईंधन मिश्रण लक्ष्य पर जोर

    भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और एसएएफ सहयोग की संभावनाएं बढ़ीं, 2030 तक ईंधन मिश्रण लक्ष्य पर जोर


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और सतत विमानन ईंधन यानी एसएएफ के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। भारत में ओमान के राजदूत इस्सा सालेह अब्दुल्ला अल शिबानी ने कहा कि दोनों देश पड़ोसी हैं और उनके बीच एयरस्पेस भी साझा होता है। ऐसे में ऊर्जा और विमानन क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ओमान के राजदूत ने यह बात राजधानी नई दिल्ली में आयोजित दूसरे इंडिया एसएएफ कॉन्क्लेव और अवार्ड 2026 के दौरान कही। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, सस्टेनेबल एयर फ्यूल और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। उनके मुताबिक, दोनों देश मिलकर इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

    उन्होंने दोनों देशों के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों का भी उल्लेख किया। ओमान ने वर्ष 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है, जबकि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजदूत ने कहा कि दोनों देश इस दिशा में अपनी क्षमता विकसित करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

    एसएएफ को लेकर विशेषज्ञों ने भारत के लिए अलग रणनीति अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। एसएएफ एसोसिएशन के अध्यक्ष और जेडआर2 ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जिमी ओल्सन ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा, बायोमास, ऊर्जा उपलब्धता और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षमता विकसित की है। इसी आधार पर देश को एसएएफ के लिए अपनी जरूरतों के अनुरूप रास्ता तैयार करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि एसएएफ क्षेत्र में सरकार की ओर से वायबिलिटी फंडिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यह क्षेत्र काफी पूंजी निवेश वाला है और बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद ही इसकी लागत को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    भारत में विमानन ईंधन में एसएएफ की हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर भी लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। एसएएफ एसोसिएशन ने विमानन ईंधन में 5 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का लक्ष्य रखा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रस्तावित मिश्रण व्यवस्था के तहत वर्ष 2027 में 1 प्रतिशत, 2028 में 2 प्रतिशत और वर्ष 2030 तक 5 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का अनुमान है।

    इस लक्ष्य के साथ एसएएफ की मांग में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना है। अनुमान के मुताबिक मांग वर्ष 2027 में करीब 46 हजार टन से बढ़कर 2030 तक लगभग 2.50 लाख टन हो सकती है। मौजूदा उत्पादन क्षमता वर्ष 2027 और 2028 की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बताई गई है।

    हालांकि, वर्ष 2030 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में नई परियोजनाओं का समय पर शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया गया कि 2028 से 2030 के बीच प्रस्तावित एचईएफए और एटीजे परियोजनाओं के शुरू नहीं होने की स्थिति में 2030 के एसएएफ मिश्रण लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

    एसएएफ उत्पादन के लिए लगातार और पर्याप्त मात्रा में फीडस्टॉक की जरूरत होगी। ऐसे में किसानों और कच्चे माल के संग्रह से जुड़े नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मजबूत सप्लाई चेन के बिना बड़े स्तर पर एसएएफ उत्पादन को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    भारत और ओमान के बीच ऊर्जा सहयोग के साथ विमानन क्षेत्र में सतत ईंधन को लेकर बढ़ती संभावनाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब वैश्विक विमानन उद्योग कार्बन उत्सर्जन कम करने के विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है। एसएएफ को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    नई दिल्ली 28 सितंबर। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों में दबाव के कारण सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।

    बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,771.72 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,780.25 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान दोनों सूचकांकों में लगातार दबाव बना रहा।सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,734.83 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत तक टूटकर 72,716.23 के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    इसी तरह निफ्टी 50 अपने पिछले बंद स्तर 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत नीचे 23,064.90 पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें गिरावट बढ़ी और यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत टूटकर 22,762.20 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में जारी तनाव प्रमुख कारणों में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आया। इससे निवेशकों की धारणा पर दबाव बढ़ा और शेयर बाजारों में बिकवाली तेज हुई।व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक में भी दबाव रहा, जबकि निफ्टी आईटी में तुलनात्मक रूप से सबसे कम गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में शामिल ज्यादातर शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर अन्य शेयरों में कमजोरी रही। टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली।

    बाजार में तेज गिरावट का असर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।वैश्विक स्तर पर भी शेयर बाजारों पर दबाव रहा। ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और लड़ाई समाप्त करने से संबंधित ईरानी प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद बाजारों में चिंता बढ़ी। ईरान ने संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीति को ही रास्ता बताया है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक शेयर, तेल और बॉन्ड बाजारों पर दिखाई दिया।

    एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का सूचकांक करीब 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत नीचे रहा। चीन के बाजारों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।पश्चिम एशिया संकट के समाधान में देरी के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

    ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी और मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली फिर से शुरू हुई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा।

  • बोइंग 737 मैक्स में सॉफ्टवेयर खामी से सुरक्षा पर असर नहीं, अकासा एयर ने यात्रियों को लेकर स्थिति साफ की

    बोइंग 737 मैक्स में सॉफ्टवेयर खामी से सुरक्षा पर असर नहीं, अकासा एयर ने यात्रियों को लेकर स्थिति साफ की

    नई दिल्ली। बोइंग 737 मैक्स विमानों में सामने आई सॉफ्टवेयर समस्या को लेकर अकासा एयर ने स्पष्ट किया है कि इससे उसके परिचालन की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है। एयरलाइन ने कहा कि वह इस मामले को लेकर बोइंग के साथ लगातार संपर्क में है और उसके विमान सभी निर्धारित प्रक्रियाओं तथा लागू नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार सुरक्षित तरीके से उड़ान भर रहे हैं।

    यह मामला बोइंग की ओर से 737 मैक्स विमान संचालकों को दी गई जानकारी के बाद सामने आया है। विमान निर्माता ने एक ऐसी स्थिति की पहचान की है, जिसमें लैंडिंग के एक विशेष चरण के दौरान सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या के कारण पायलट ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

    बोइंग ने इस संबंध में दुनिया भर में 737 मैक्स विमानों का संचालन करने वाले ऑपरेटरों को पहले ही जानकारी उपलब्ध करा दी है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा पायलट प्रक्रियाएं ऐसी स्थिति से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। साथ ही समस्या का स्थायी समाधान तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट पर काम किया जा रहा है।

    अकासा एयर ने इस मुद्दे पर यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके विमान सुरक्षित रूप से परिचालित हो रहे हैं। एयरलाइन के मुताबिक, बोइंग के साथ मिलकर इस मामले पर काम किया जा रहा है और मौजूदा समस्या का उसके परिचालन की सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

    एयरलाइन ने यह भी कहा कि उसके विमानों का संचालन निर्धारित प्रक्रियाओं और लागू नियमों के अनुरूप किया जा रहा है। यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा को उसने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।

    हालांकि, अकासा एयर ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके बेड़े में शामिल किसी विशेष विमान पर इस सॉफ्टवेयर समस्या का सीधा प्रभाव पड़ा है या नहीं। ऐसे में फिलहाल एयरलाइन की ओर से यह जानकारी दी गई है कि उसके परिचालन में सुरक्षा संबंधी कोई जोखिम नहीं है।

    बोइंग के अनुसार, कंपनी ने पिछले महीने ही सभी 737 ऑपरेटरों को इस समस्या की जानकारी दे दी थी। कंपनी ने लैंडिंग के दौरान सामने आ सकने वाली उस विशेष परिस्थिति की पहचान की है, जिसमें पायलटों को ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस उपलब्ध नहीं हो सकता है।

    विमान निर्माता ने कहा है कि स्थायी तकनीकी समाधान उपलब्ध होने तक पायलटों के लिए मौजूदा प्रक्रियाएं ऐसी परिस्थितियों को सुरक्षित ढंग से संभालने में सक्षम हैं। इसके साथ ही ऑपरेटरों के साथ जरूरी जानकारी साझा की गई है, ताकि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा सके।

    बोइंग के इंजीनियर इस समस्या को स्थायी रूप से दूर करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट विकसित कर रहे हैं। अपडेट लागू होने के बाद तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान उपलब्ध होने की उम्मीद है।

    अकासा एयर के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एयरलाइन अपनी विस्तार योजना के तहत बोइंग 737 मैक्स विमानों का बेड़ा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की योजना 200 से अधिक अतिरिक्त 737 मैक्स विमानों का ऑर्डर देने की है।

    फिलहाल एयरलाइन ने अपने मौजूदा परिचालन को सुरक्षित बताया है, जबकि बोइंग की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट तैयार किया जा रहा है। इससे विमान संचालन में पायलट प्रक्रियाओं और तकनीकी सुधार दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  • दिल्ली में त्योहारों से पहले महंगी हो सकती है शराब, नई आबकारी नीति में टैक्स और रिटेल मार्जिन बदलने की तैयारी

    दिल्ली में त्योहारों से पहले महंगी हो सकती है शराब, नई आबकारी नीति में टैक्स और रिटेल मार्जिन बदलने की तैयारी

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। राजधानी दिल्ली में आने वाले त्योहारों के दौरान शराब खरीदने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नीति के लागू होने के बाद शराब की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

    नई आबकारी नीति का अंतिम मसौदा तैयार होने की जानकारी सामने आई है। आबकारी विभाग में नए कमिश्नर की नियुक्ति के बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए दिल्ली कैबिनेट और उपराज्यपाल के पास भेजा जाना है। सरकार की कोशिश है कि अक्टूबर में त्योहारों का सीजन तेज होने से पहले नई नीति लागू कर दी जाए।

    नई व्यवस्था में शराब की कीमतों पर असर डालने वाले कई बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे प्रमुख शराब पर लगने वाली आबकारी ड्यूटी में बढ़ोतरी से जुड़ा है। फिलहाल दिल्ली में शराब की अलग-अलग कैटेगरी और व्होलसेल प्राइस स्लैब के आधार पर 30 प्रतिशत से 300 प्रतिशत तक आबकारी ड्यूटी लगती है।

    अगर ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो उसका असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा रिटेल विक्रेताओं के लिए मौजूदा निश्चित मार्जिन व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव भी सामने आया है। वर्तमान व्यवस्था में भारतीय निर्मित विदेशी शराब यानी IMFL पर 50 रुपये और विदेशी शराब पर 100 रुपये का निश्चित मार्जिन मिलता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था में इस फिक्स मार्जिन को खत्म करने या बदलने की तैयारी है। इसका उद्देश्य शराब के खुदरा कारोबार में कीमत और उपलब्धता से जुड़े मौजूदा ढांचे में बदलाव करना बताया जा रहा है।

    नई आबकारी नीति में प्रीमियम शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में प्रीमियम स्टोर सीमित संख्या में हैं। इनकी संख्या बढ़ने से महंगी और प्रीमियम श्रेणी की शराब के लिए ग्राहकों को दिल्ली में ही अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा सकती है।

    होटल, क्लब और रेस्तरां में शराब परोसने के समय को लेकर भी बदलाव की संभावना है। नई नीति में सर्विंग टाइम से जुड़े मौजूदा नियमों में परिवर्तन का प्रस्ताव बताया गया है। हालांकि इन बदलावों का अंतिम स्वरूप नीति को मंजूरी मिलने के बाद स्पष्ट होगा।

    फिक्स रिटेल मार्जिन में बदलाव के पीछे एक प्रमुख कारण महंगी शराब की उपलब्धता से जुड़ी समस्या बताई गई है। मौजूदा व्यवस्था में 1,000 रुपये से अधिक कीमत वाली विदेशी और प्रीमियम शराब रखने में कुछ विक्रेताओं की रुचि कम रहती है। कम मार्जिन के कारण प्रीमियम उत्पादों का स्टॉक सीमित रहने की स्थिति सामने आती है।

    इसका असर यह भी बताया गया है कि दिल्ली के कुछ ग्राहक प्रीमियम शराब खरीदने के लिए आसपास के शहरों का रुख करते हैं। नई व्यवस्था में प्रीमियम स्टोर बढ़ाने और मार्जिन ढांचे में बदलाव के जरिए इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया जा सकता है।

    नई आबकारी नीति का एक उद्देश्य दिल्ली के राजस्व को बढ़ाना और शराब बिक्री की मौजूदा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करना भी बताया जा रहा है। फिलहाल राजधानी में सरकारी निगमों द्वारा 700 से अधिक शराब की दुकानें संचालित की जा रही हैं।

    नई व्यवस्था में निजी कंपनियों को शराब की खुदरा दुकानों के संचालन में शामिल करने के बजाय सरकारी निगमों के माध्यम से ही दुकानों का संचालन जारी रखने का प्रस्ताव है। इस तरह सरकार मौजूदा सरकारी खुदरा ढांचे को बनाए रखते हुए उसमें आवश्यक बदलाव करने की तैयारी में है।

    दिल्ली की पिछली विवादित आबकारी नीति को जांच के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद राजधानी में शराब की खुदरा बिक्री सरकारी निगमों के माध्यम से संचालित व्यवस्था के तहत जारी है। अब प्रस्तावित नई नीति के जरिए कीमत, मार्जिन, प्रीमियम स्टोर और सर्विंग टाइम से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाने की तैयारी है।

  • MP में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग पर भोपाल में बढ़ा तनाव

    MP में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग पर भोपाल में बढ़ा तनाव


    मध्य प्रदेश: में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन सोमवार को राजधानी भोपाल में तेज हो गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने अरेरा हिल्स स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

    प्रदर्शन को देखते हुए भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। चुनाव आयोग के कार्यालय तक प्रदर्शनकारियों को पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस नेताओं ने पार्टी कार्यालय के सामने सभा भी की। इसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ कई विधायक और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता शामिल हुए।

    कांग्रेस का यह आंदोलन SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि मध्य प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से 34 लाख 25 हजार 78 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। कांग्रेस इन बदलावों को लेकर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रही है।

    विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है। हाल में सामने आई जानकारी के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मामलों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े विषय शामिल थे।

    इन घटनाक्रमों के बाद विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाए गए और उनके इस्तीफे की मांग तेज हुई। कांग्रेस ने भी इसी मुद्दे को लेकर भोपाल में अपना प्रदर्शन आयोजित किया और स्वतंत्र जांच की मांग सामने रखी।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि चुनाव आयुक्तों द्वारा किसी विषय पर व्यक्तिगत टिप्पणी, सुझाव या आपत्ति दर्ज करना निर्णय में असहमति के समान नहीं है। आयोग के मुताबिक SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

    इस पूरे विवाद पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट, लोकतंत्र और चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री ने संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के आरोप संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

    भोपाल में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने SIR से जुड़े अपने सवालों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    इस बीच चुनाव आयोग की ओर से SIR और अन्य फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में मध्य प्रदेश में SIR को लेकर कांग्रेस के आरोप और सरकार का जवाब आमने-सामने हैं, जबकि भोपाल में हुआ प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद के और तेज होने का संकेत देता है।