Blog

  • नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले के संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में पहल की गई है। शिवपुरी-गुना क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन करने, यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क बनाने और इसे प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ने के प्रस्ताव पर कार्रवाई की अनुशंसा की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी और मध्य प्रदेश की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर को अर्धशासकीय पत्र भेजे हैं। यह पहल भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी और नगर परिषद अध्यक्ष पद्मा संदीप माहेश्वरी की ओर से उठाई गई मांगों के बाद सामने आई है।

    नरवर का किला अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण क्षेत्र की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है। इससे राजा नल और रानी दमयंती की कथाएं, प्राचीन राजवंशों का इतिहास और ढोला-मारू की प्रेमकथा जैसी लोकपरंपराएं जुड़ी हुई हैं। किले को लेकर प्रचलित मान्यताओं में इसे राजा नल की राजधानी नलपुर से भी जोड़ा जाता है। यहां पसरा देवी और लोढ़ी माता से संबंधित धार्मिक आस्थाएं भी स्थानीय परंपरा का हिस्सा हैं। इन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं के चलते किले के संरक्षण और व्यवस्थित पर्यटन विकास की मांग लंबे समय से उठती रही है।

    नरवर किले का इतिहास अलग-अलग राजवंशों और शासकों से जुड़ा रहा है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र पर नाग राजाओं का शासन होने के उल्लेख मिलते हैं। बाद के दौर में कछवाह राजपूतों ने किले का पुनर्निर्माण कराया। इसके बाद यहां परिहार और तोमर राजपूतों का अधिकार रहा। 16वीं शताब्दी की शुरुआत में सिकंदर लोदी ने किले पर कब्जा किया। आगे चलकर मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में यह मालवा सूबे के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बना। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में मराठा सिंधिया राजवंश ने इस पर अधिकार कर लिया। किले के ऐतिहासिक भवनों में कचहरी महल भी शामिल है, जिसके जीर्णोद्धार का उल्लेख वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के समय से जुड़ा है।

    किला विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। कस्बे से इसकी खड़ी ऊंचाई लगभग 500 फीट बताई जाती है, जबकि समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 1,600 फीट है। इसकी भौगोलिक स्थिति और प्राचीन संरचना इसे विशेष पहचान देती है, लेकिन ऊंचाई पर स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए पहुंच आसान बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर पहुंच मार्ग, नियमित रखरखाव और आवश्यक पर्यटक सुविधाओं की कमी लंबे समय से स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय रही है। किले तक सड़क बनाने के लिए वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के समन्वय की जरूरत भी उठाई जाती रही है।

    किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन करने का प्रस्ताव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक संरचनाओं का व्यवस्थित रखरखाव करना और पुरातात्विक महत्व के अनुरूप उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, प्रस्ताव पर संबंधित विभागों की नियमानुसार कार्रवाई और निर्णय के बाद ही इसके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।

    पर्यटन विकास के लिए रणथंभौर, कूनो, शिवपुरी, नरवर, ओरछा और खजुराहो को जोड़कर एक सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इन स्थलों को एक मार्ग से जोड़ने पर पर्यटकों को वन्यजीव पर्यटन, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक स्थलों को एक ही यात्रा में देखने का अवसर मिल सकता है। इससे नरवर को भी व्यापक पर्यटन मानचित्र पर पहचान मिलने की संभावना है।

    पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच सकता है। गाइड सेवा, होटल, होम-स्टे, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन सुविधाओं से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। फिलहाल, किले के संरक्षण, पहुंच मार्ग और पर्यटन सर्किट से जोड़ने के प्रस्तावों पर संबंधित स्तरों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    शिवपुरी में बीआरसीसी और एपीसी की नियुक्तियों पर फिर लगी रोक, राज्य शिक्षा केंद्र ने जारी किए नए निर्देश

    मध्य प्रदेश । के शिवपुरी जिले में बीआरसीसी और एपीसी पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में प्रस्तावित काउंसलिंग के जरिए 12 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, लेकिन राज्य शिक्षा केंद्र से मिले नए निर्देशों के बाद फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लग गई है। निर्देशों के अनुसार, संबंधित न्यायालयीन प्रकरणों का निराकरण होने तक नियुक्ति की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को फिलहाल इंतजार करना पड़ेगा।

    जिला परियोजना समन्वयक दफेदार सिंह सिकरवार के अनुसार, शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। निर्धारित कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर को जिला पंचायत सभागार में काउंसलिंग होनी थी। इसके बाद परीक्षा के परिणाम के आधार पर रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। हालांकि, राज्य स्तर से मिले नए दिशा-निर्देशों के कारण तय कार्यक्रम को रोकना पड़ा है।

    यह मामला सहायक परियोजना समन्वयक यानी एपीसी और बीआरसीसी पदों पर नियोजन से जुड़ा है। राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने न्यायालय के निर्णय और उसके अनुपालन को लेकर कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें उच्च प्रभार और कूलिंग पीरियड से संबंधित प्रावधानों के तहत आवेदकों को परीक्षा में शामिल करने के न्यायालयीन निर्देशों का उल्लेख किया गया है।

    इन निर्देशों के अनुपालन में शिवपुरी जिले में 16 याचिकाकर्ताओं को परीक्षा में शामिल किया गया था। योजना के अनुसार, परीक्षा परिणाम के आधार पर 30 अक्टूबर को होने वाली काउंसलिंग के बाद नियुक्ति से संबंधित अगली प्रक्रिया पूरी की जानी थी। लेकिन नियुक्तियों से जुड़े न्यायालयीन मामलों के चलते अब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि काउंसलिंग की अगली तारीख कब निर्धारित की जाएगी।

    राज्य शिक्षा केंद्र ने अपने नए निर्देशों में न्यायालयीन प्रकरणों से निपटने के लिए जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को कहा है। जिन जिलों में नियुक्ति से जुड़े मामले न्यायालय में लंबित हैं, वहां संबंधित याचिका के अनुसार एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया जाना है। इस अधिकारी को प्रकरण से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर न्यायालय में जवाबदावा प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जवाबदावा तत्काल प्रस्तुत किया जाए और न्यायालय से मामले की शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया जाए। इसका उद्देश्य लंबित प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष संबंधित पक्ष का जवाब समय पर प्रस्तुत करना है। राज्य शिक्षा केंद्र ने उन जिलों के लिए भी स्थिति स्पष्ट की है, जहां इस प्रकार के न्यायालयीन प्रकरण नहीं हैं। ऐसे जिलों में 2 सितंबर 2026 को जारी पूर्व पत्र के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जानी है।

    ये निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह की ओर से 29 अक्टूबर को जारी किए गए। इसके बाद शिवपुरी में नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय न्यायालयीन मामलों से संबंधित निर्देशों के पालन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    दफेदार सिंह सिकरवार ने बताया कि नए आदेश के बाद नियुक्ति प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी, इसका पता आगे की स्थिति स्पष्ट होने पर ही चलेगा। फिलहाल जिला स्तर पर प्रभारी अधिकारी नियुक्त करने और निर्देशों के अनुपालन की तैयारी की जा रही है। ऐसे में 12 पदों पर चयन की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को काउंसलिंग और नियुक्ति के लिए नई तारीख घोषित होने तक इंतजार करना होगा।

  • मक्का पैक्ट से बदल सकते हैं मध्य पूर्व के समीकरण, IMEC को लेकर भारत के सामने उभरी नई रणनीतिक चुनौती

    मक्का पैक्ट से बदल सकते हैं मध्य पूर्व के समीकरण, IMEC को लेकर भारत के सामने उभरी नई रणनीतिक चुनौती

    नई दिल्ली ।मध्य पूर्व में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच उभर रहा मक्का पैक्ट अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। इस समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग की नई व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, इसके साथ भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे यानी IMEC की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मक्का पैक्ट और IMEC के पीछे क्षेत्रीय प्रभाव तथा संपर्क मार्गों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण काम कर रहे हैं। हालांकि, इसे सीधे तौर पर IMEC को रोकने के लिए बनाया गया गठबंधन मानने के पर्याप्त आधार अभी स्पष्ट नहीं हैं।

    IMEC में भारत के साथ संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजरायल और यूरोपीय देशों की भागीदारी की परिकल्पना है। इस आर्थिक गलियारे का उद्देश्य भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ना है। इसके तहत समुद्री और रेल संपर्क के माध्यम से व्यापार तथा परिवहन को बेहतर बनाने की योजना है। दूसरी ओर, मक्का पैक्ट से जुड़े क्षेत्रीय संपर्क और सुरक्षा सहयोग को लेकर अलग तरह की रणनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम में तुर्की की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। IMEC की प्रस्तावित रूपरेखा में तुर्की को शामिल नहीं किया गया है। इस कारण क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था में उसकी स्थिति को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की क्षेत्रीय नीतियों और मध्य पूर्व में प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों को भी इस संदर्भ में देखा जा रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के कुछ विशेषज्ञों ने मक्का पैक्ट और IMEC के बीच संभावित प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण किया है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में बन रही नई व्यवस्था को केवल आर्थिक गलियारों या रक्षा सहयोग तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे क्षेत्रीय नेतृत्व, व्यापारिक संपर्क और राजनीतिक प्रभाव जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं।

    मक्का रक्षा समझौते के तहत तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा और सैन्य सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई है। समझौते की एक प्रमुख शर्त के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला बाकी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। इसमें खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, रक्षा उद्योग में सहयोग, संयुक्त हथियार निर्माण और सैन्य तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषय भी शामिल हैं। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक भूमिका और प्रभाव को लेकर आगे के घटनाक्रम महत्वपूर्ण होंगे।

    इस रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम 15 अक्टूबर को अजरबैजान की राजधानी बाकू में देखने को मिला। एक क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने संबोधन शुरू किया तो तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान कार्यक्रम से बाहर चले गए। उनके साथ ईरान, पाकिस्तान, कुवैत, सऊदी अरब और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के कुछ अधिकारी भी बाहर निकल गए। हालांकि, अजरबैजान के अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    इस घटनाक्रम में मध्य एशिया के पांच देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उनके प्रतिनिधि सम्मेलन में मौजूद रहे और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने इजरायली राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की। इससे संकेत मिला कि मध्य एशिया के देश तुर्की की क्षेत्रीय प्राथमिकताओं से अलग अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी महत्व दे रहे हैं।

    मध्य पूर्व में अमेरिका की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय देश अब अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक स्वतंत्र विकल्प तलाश रहे हैं। ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन से जुड़ी एसली आयदिनताशबाश ने मक्का पैक्ट को अमेरिका के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक शुरुआती प्रयोग के रूप में देखा है। वहीं, सोनार कागाप्टे ने समझौते में शामिल नहीं किए गए देशों के आधार पर इसके रणनीतिक उद्देश्य समझने की बात कही है।

    इस चर्चा में भारत, ईरान और इजरायल को तीन महत्वपूर्ण देशों के रूप में देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि इन देशों को नई क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था से बाहर रखने की रणनीति हो सकती है। हालांकि, यह सभी विशेषज्ञों की एक समान राय नहीं है। मक्का पैक्ट को लेकर अलग-अलग आकलन मौजूद हैं और इसके वास्तविक प्रभाव का पता आगे के फैसलों तथा सदस्य देशों के आपसी सहयोग से ही चलेगा।

    भारत के लिए इस पूरे घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी है क्योंकि IMEC में सऊदी अरब शामिल है, जबकि मक्का पैक्ट में भी उसकी प्रमुख भूमिका है। ऐसे में रियाद के सामने सुरक्षा सहयोग और आर्थिक संपर्क परियोजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती हो सकती है। फिलहाल दोनों व्यवस्थाओं के बीच सीधा टकराव तय नहीं है। आने वाले समय में मध्य एशिया, दक्षिण काकेशस और खाड़ी क्षेत्र के देशों के फैसले यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा का नया ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच कई देशों में आपातकालीन तैयारी पर जोर, नागरिकों को जरूरी सामान जुटाने की सलाह

    तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच कई देशों में आपातकालीन तैयारी पर जोर, नागरिकों को जरूरी सामान जुटाने की सलाह


    नई दिल्ली ।
    दुनिया के कई देशों में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए नागरिकों को पहले से तैयार रहने की सलाह दी जा रही है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और यूरोप के कई देशों ने लोगों से घरों में पर्याप्त भोजन, पीने का पानी, जरूरी दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं रखने पर जोर दिया है। इन तैयारियों का उद्देश्य किसी संकट के दौरान सामान्य आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने पर लोगों को शुरुआती दिनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    जर्मनी, नॉर्वे, फिनलैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, स्वीडन, चेकिया और लिथुआनिया सहित कई देशों में आपातकालीन तैयारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। यूरोपीय संघ भी संकट प्रबंधन और नागरिकों की तैयारी को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। सरकारों की इन सलाहों में प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ साइबर हमले, बिजली संकट और संभावित सैन्य संघर्ष जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।

    अलग-अलग देशों में जरूरी सामान जमा रखने की अवधि को लेकर अलग-अलग सुझाव दिए गए हैं। कुछ देशों में कम से कम तीन दिन की जरूरतों के लिए तैयारी करने को कहा गया है, जबकि अन्य जगहों पर सात से दस दिनों तक का भोजन, पानी और दवाएं उपलब्ध रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि किसी आपात स्थिति में बाजार, परिवहन या अन्य आपूर्ति सेवाएं प्रभावित होने पर परिवारों को तत्काल परेशानी का सामना न करना पड़े।

    अमेरिका में भी आपातकालीन तैयारियों को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, सैन्य ठिकानों को 90 दिनों तक बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता कम रखते हुए काम करने में सक्षम बनाने की योजना का उल्लेख नागरिकों के लिए 90 दिनों का राशन जमा करने के निर्देश के रूप में नहीं किया जा सकता। सैन्य प्रतिष्ठानों की यह तैयारी रक्षा व्यवस्था से संबंधित है और इसे आम नागरिकों के लिए जारी किसी समान निर्देश से अलग समझना जरूरी है।

    ब्रिटेन ने अपने ‘बी रेडी’ अभियान के माध्यम से नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए जरूरी सामान तैयार रखने की सलाह दी है। इस तैयारी में पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, आवश्यक दवाएं, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां, रेडियो, पावर बैंक और कुछ नकदी शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह है कि बिजली, संचार या अन्य सार्वजनिक सेवाएं बाधित होने की स्थिति में लोग कुछ समय तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी कर सकें।

    जापान में भी आपदा प्रबंधन और नागरिकों की तैयारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। भूकंप की आशंका और उसके बाद बिजली, पानी तथा परिवहन सेवाओं में संभावित रुकावट को ध्यान में रखते हुए लोगों को कम से कम तीन दिन और संभव हो तो एक सप्ताह तक के जरूरी सामान का इंतजाम रखने की सलाह दी जाती है। जापान में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए ऐसी तैयारियों को नागरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    इन देशों में बढ़ती सतर्कता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तीसरे विश्व युद्ध को लेकर दिए गए बयान ने भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चर्चाओं को ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, विभिन्न देशों की ओर से जारी आपातकालीन तैयारियों की सलाह को सीधे तौर पर विश्व युद्ध की शुरुआत या किसी निश्चित सैन्य टकराव का संकेत नहीं माना जा सकता। इन निर्देशों का दायरा प्राकृतिक आपदाओं से लेकर तकनीकी और सुरक्षा संबंधी संकटों तक फैला हुआ है।

    सरकारों की चिंता केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। बाढ़, भीषण मौसम, भूकंप, लंबे समय तक बिजली गुल रहने, इंटरनेट सेवाओं में रुकावट और साइबर हमलों जैसी घटनाएं भी जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति, पेयजल उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। पहले से जरूरी सामान रखने से परिवारों को संकट के शुरुआती दौर में राहत मिल सकती है।

    आपातकालीन तैयारी को लेकर अलग-अलग देशों के निर्देशों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अंतर है। इसलिए नागरिकों को अपने देश और क्षेत्र में जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक तैयारी करने की सलाह दी जाती है। कुल मिलाकर, कई देशों में नागरिक सुरक्षा को लेकर बढ़ता जोर इस बात को दर्शाता है कि सरकारें अब केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय लोगों को पहले से तैयार करने पर भी ध्यान दे रही हैं।

  • IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने पर राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण आमने-सामने, 52,878 करोड़ के सौदे पर बढ़ा विवाद

    IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने पर राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण आमने-सामने, 52,878 करोड़ के सौदे पर बढ़ा विवाद

    नई दिल्ली । IDBI बैंक की बहुलांश हिस्सेदारी बेचने के केंद्र सरकार के फैसले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी Fairfax Financial Holdings की सहयोगी इकाई को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेचने की तैयारी है। इस फैसले को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आमने-सामने हैं। राहुल गांधी ने बैंक के निजीकरण और कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल उठाए हैं, जबकि वित्त मंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल में बैंकों पर कथित राजनीतिक दबाव और खराब कर्ज व्यवस्था को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार सार्वजनिक संस्थानों को निजी हाथों में सौंप रही है। उन्होंने IDBI बैंक के कर्मचारियों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि बैंक की स्थापना देश के औद्योगिक विकास को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। उनके मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक केवल व्यावसायिक संपत्ति नहीं, बल्कि देश के विकास और आम जनता की आर्थिक जरूरतों से जुड़े संस्थान हैं।

    राहुल ने कर्मचारियों के नाम एक खुला पत्र भी साझा किया। इसमें उन्होंने बैंक के वित्तीय प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सात साल पहले IDBI बैंक घाटे में था, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उसने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय बैंक कर्मचारियों की मेहनत को दिया। साथ ही सवाल उठाया कि जब बैंक मुनाफे में है तो उसे निजी हाथों में सौंपने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कर्मचारियों की नौकरी, सेवा शर्तों और आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई।

    राहुल गांधी के आरोपों पर निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए कांग्रेस के शासनकाल की बैंकिंग व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस दौर में प्रभावशाली लोगों के लिए फोनबुक और आम नागरिकों के लिए रूलबुक जैसी व्यवस्था थी। वित्त मंत्री के अनुसार, राजनीतिक संपर्क और फोन कॉल के जरिए कर्ज दिलाने का दबाव बैंक अधिकारियों पर बनाया जाता था। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान व्यवस्था में इस तरह के हस्तक्षेप को समाप्त किया गया है।

    सीतारमण ने अपने जवाब में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कई पुराने मामलों का उल्लेख किया। इनमें 1957 का हरिदास मूंदड़ा-एलआईसी प्रकरण, 1976 में SBI के तत्कालीन चेयरमैन आरके तलवार को पद से हटाया जाना और संजय गांधी से जुड़े मारुति लोन मामले का जिक्र शामिल था। उन्होंने यूपीए शासनकाल में पवन कुमार बंसल से जुड़े कारोबार को केनरा बैंक से कर्ज दिलाने के आरोपों का भी उल्लेख किया।

    वित्त मंत्री ने IDBI बैंक की पुरानी वित्तीय स्थिति पर बात करते हुए वीडियोकॉन, विनसम, ABG शिपयार्ड और किंगफिशर जैसी कंपनियों को दिए गए कर्ज का हवाला दिया। उनके अनुसार, इन कंपनियों को दिए गए कई बड़े कर्ज बाद में फंस गए, जिससे बैंक को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि NDA सरकार ने बैंक को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी उपलब्ध कराई।

    प्रस्तावित सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। इस तरह कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी का हस्तांतरण होगा। सौदा पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास 15 प्रतिशत और LIC के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बची रहेगी। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी।

    सरकार ने 14 अक्टूबर को Fairfax की सहयोगी कंपनी 10955230 Canada Inc. को खरीदार के रूप में मंजूरी दी थी। वित्त मंत्रालय के अनुसार, दो स्वतंत्र एजेंसियों ने बैंक का मूल्यांकन किया था। उनका औसत उचित मूल्य 75.99 रुपये प्रति शेयर निकला, जबकि Fairfax ने 81 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाई। सरकार का कहना है कि बोली मूल्यांकन से अधिक थी और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई है।

    हालांकि, सौदे की कीमत, बैंक के निजीकरण और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर विपक्ष तथा बैंक कर्मचारियों की चिंताएं बनी हुई हैं। अब इस प्रस्तावित विनिवेश पर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • जोशीमठ-बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसा, पायलट समेत छह लोग सवार, यात्रियों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी…

    जोशीमठ-बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसा, पायलट समेत छह लोग सवार, यात्रियों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी…

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ और बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसे की सूचना से हड़कंप मच गया। चाई गांव के पास हेलिकॉप्टर क्रैश होने की जानकारी सामने आई है। इसमें पायलट समेत कुल छह लोग सवार बताए गए हैं। हादसे की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और सेना की टीमों को घटनास्थल के आसपास भेजा गया है। यात्रियों की स्थिति और हादसे में किसी के हताहत होने को लेकर शुरुआती जानकारी के बाद भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेलिकॉप्टर हादसे की जानकारी देते हुए बताया कि जोशीमठ के निकट चाई गांव के पास दुर्घटना की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की बात कही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल एयरलिफ्ट करके बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने हेलिकॉप्टर में सवार सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की कामना भी की।

    उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर बद्रीनाथ से देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर जोशीमठ घाटी के नजदीक पहुंचा, जिसके बाद उसकी लोकेशन मिलनी बंद हो गई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और संभावित दुर्घटनास्थल की तलाश शुरू की गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलिकॉप्टर में कैप्टन हिमांशु पायलट के रूप में मौजूद थे। उनके अलावा पांच यात्री सवार थे। यात्रियों की पहचान प्रतापा, अरुण, शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराज के रूप में बताई गई है। हालांकि, इन सभी की वर्तमान स्थिति को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रशासन की ओर से घटनास्थल तक पहुंचने और यात्रियों के बारे में पुष्टि करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और सेना की एक टुकड़ी को संभावित घटनास्थल के आसपास रवाना किया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव दलों के सामने चुनौती बनी हुई है। हेलिकॉप्टर की आखिरी लोकेशन के आधार पर तलाश की जा रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता विमान का सटीक स्थान पता लगाना और उसमें सवार लोगों तक पहुंचना है।

    हादसे के बाद ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने सभी हेलिकॉप्टरों की उड़ानें रोक दी हैं। कंपनी के पूरे बेड़े का संचालन अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों की जानकारी मिलने तक आगे की उड़ानों को रोकना है।

    उत्तराखंड में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं का पिछला रिकॉर्ड भी चिंता बढ़ाने वाला रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 से जुलाई 2025 के बीच राज्य में सात हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं हुई थीं। इन हादसों में कुल 21 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, वर्ष 2023 से 2025 के बीच छह हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि, राज्य में अब तक कितने हेलिकॉप्टर लापता हुए हैं, इसका अलग से कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

    जोशीमठ-बद्रीनाथ मार्ग पर हुई इस घटना के बाद अब सबकी नजरें राहत एवं बचाव अभियान पर टिकी हैं। हेलिकॉप्टर में सवार छह लोगों की वास्तविक स्थिति, दुर्घटना के कारण और घटनास्थल से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    नई दिल्ली ।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों का एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय रहने का आह्वान किया। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे।

    डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस बैठक में अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार मजबूत स्थिति में है और उसे कोई ताकत सत्ता से हटा नहीं सकती। उन्होंने पार्टी की स्थिति को अंगद के पैर से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अर्जुन की तरह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और 2027 के चुनाव की तैयारियों में जुटने को कहा।

    शाह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता को लेकर पार्टी की आगामी योजना भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि 2027 में जनता के समर्थन से भाजपा की तीसरी बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में UCC लागू की जाएगी। इस घोषणा के साथ उन्होंने इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के प्रमुख मुद्दों में शामिल कर दिया। हालांकि, बैठक में इसके लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, समयसीमा और प्रस्तावित प्रावधानों का विवरण सामने नहीं आया।

    अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में हुई गोलीबारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन निहत्थे रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। शाह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले दल अब किस आधार पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं।

    उन्होंने राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी, जबकि दूसरी ओर भाजपा ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम को देश की जनता याद रखेगी। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक अंतर को सामने रखने की कोशिश की।

    बैठक में वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी अमित शाह ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों की तुलना मैच हारने के बाद अंपायर पर सवाल उठाने से की। शाह ने कहा कि यदि विपक्ष को मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है, तो वह संसद में चर्चा करे।

    गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर सरकार की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के सवालों का बिंदुवार जवाब देने के लिए तैयार है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

    अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में कठोर और पारदर्शी शासन के कारण माफिया गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई हुई है और उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त हुआ है। उन्होंने योगी सरकार के कामकाज को भाजपा की राजनीतिक उपलब्धियों से जोड़ते हुए उसकी सराहना की।

    गृहमंत्री ने वर्ष 2014 से पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा की कमजोर संगठनात्मक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने संगठन को मजबूत किया और जनता का विश्वास हासिल किया। इसी आधार पर भाजपा ने राज्य में बड़ी चुनावी सफलता प्राप्त की। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। बैठक के जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य स्पष्ट करते हुए संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया।

  • एमपी के रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर, 6 महीने में ट्रांसफर भत्ते और HRA की नीति बनाएगी सरकार

    एमपी के रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर, 6 महीने में ट्रांसफर भत्ते और HRA की नीति बनाएगी सरकार


    जबलपुर । मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में काम करने वाले करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने उनके तबादले से जुड़े आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार यदि किसी ग्राम रोजगार सहायक का तबादला करती है तो उसे नियमानुसार अनिवार्य यात्रा भत्ता सहित यात्रा भत्ता और घरेलू भत्ता देना होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रोजगार सहायकों के लिए छह महीने के भीतर भत्तों से संबंधित नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से प्रदेशभर के रोजगार सहायकों को भविष्य में आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    पांच रोजगार सहायकों ने दायर की थी याचिका

    इस मामले में सिंगरौली के अमित कुमार मिश्रा और शहडोल के शिवाकांत मिश्रा व राजेश कुमार सहित सागर के रानू राजपूत तथा टीकमगढ़ के अभिषेक पटेरिया ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पांचों याचिकाकर्ताओं ने 18 जुलाई 2025 को याचिका दायर कर तबादले से जुड़ी समस्याओं और आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया था। मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ में हुई। अदालत ने 14 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इस पर आदेश जारी कर दिया गया है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गोपेश यश तिवारी ने पक्ष रखा। मामले में रोजगार सहायकों के वेतन और तबादले के बाद होने वाले अतिरिक्त खर्च का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले रोजगार सहायकों को सीमित वेतन में अपने परिवार और दूसरी जरूरतों का खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को मौजूदा कार्यस्थल से काफी दूर भेज दिया जाता है तो उसके सामने आवागमन और रहने की व्यवस्था से जुड़ी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

    18 हजार रुपये वेतन में दूर तबादला बन सकता है परेशानी

    याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के अनुसार ग्राम रोजगार सहायकों को लगभग 18 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। ऐसी स्थिति में यदि किसी कर्मचारी का तबादला 100 किलोमीटर दूर कर दिया जाता है तो उसे आने जाने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सीमित आय के कारण यह खर्च कर्मचारी के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

    इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को यात्रा भत्ते और हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए से संबंधित नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर इस संबंध में नीति तैयार करनी होगी। नीति तैयार होने से यह तय करने में मदद मिलेगी कि तबादले की स्थिति में रोजगार सहायकों को किस प्रकार के भत्ते और आर्थिक सुविधाएं दी जाएंगी।

    तबादले पर रोक नहीं लेकिन भत्तों पर बनानी होगी नीति

    हाईकोर्ट के आदेश में यह भी महत्वपूर्ण है कि रोजगार सहायकों की तबादले नहीं किए जाने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार रोजगार सहायकों का तबादला कर सकेगी। हालांकि तबादले के कारण कर्मचारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को देखते हुए भत्तों के संबंध में नीति तैयार करनी होगी।

    प्रदेश में करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायक ग्राम पंचायतों में विभिन्न कार्यों से जुड़े हैं। ऐसे में इस फैसले का असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और राज्य रोजगार गारंटी परिषद की ओर से तैयार की जाने वाली नीति पर रहेगी। छह महीने की समयसीमा में बनने वाली यह नीति तय करेगी कि तबादले की स्थिति में कर्मचारियों को किन शर्तों पर आर्थिक लाभ मिलेगा।

  • तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां

    तकनीक और आस्था का अद्भुत संगम, मैग्नेटिक रामायण में छूते ही सुनाई देती हैं रामचरितमानस की चौपाइयां


    ग्वालियर । ग्वालियर के स्वदेशी मेले में इस बार धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मेले में रखी गई मैग्नेटिक रामायण लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस खास पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लिखी रामचरितमानस की चौपाइयों और श्रीमद्भागवत के श्लोकों को छूते ही उनका पाठ सुनाई देने लगता है। इससे श्रद्धालुओं को धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने के साथ साथ सुनने का अवसर भी मिल रहा है। पारंपरिक धार्मिक साहित्य को तकनीक की मदद से लोगों तक पहुंचाने का यह प्रयास खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

    छूते ही सुनाई देने लगता है चौपाइयों का पाठ

    बोलने वाली रामायण की खासियत के बारे में वंदना भदौरिया ने बताया कि इसमें रामचरितमानस की चौपाइयां और श्रीमद्भागवत के श्लोक मुद्रित हैं। पुस्तक में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके माध्यम से पाठक किसी चौपाई या श्लोक को छूते हैं तो उससे संबंधित पाठ सुनाई देने लगता है। इस सुविधा के कारण लोगों को धार्मिक ग्रंथों का पाठ सुनने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। वे अपनी पसंद की चौपाई या श्लोक चुनकर उसका पाठ सुन सकते हैं।

    धार्मिक ग्रंथों में कई बार शब्दों के सही उच्चारण और उनके भाव को समझना लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। पाठ सुनने से लोगों को शब्दों का उच्चारण समझने और धार्मिक साहित्य से जुड़ने में मदद मिलती है। जो लोग नियमित रूप से रामचरितमानस या श्रीमद्भागवत का पाठ करना चाहते हैं उनके लिए भी यह पुस्तक एक अलग अनुभव प्रदान करती है।

    बच्चों और बुजुर्गों के लिए खास सुविधा

    मैग्नेटिक रामायण की यह तकनीक अलग अलग उम्र के लोगों के लिए उपयोगी है। छोटे बच्चों को धार्मिक चौपाइयों और श्लोकों से परिचित कराने में यह तरीका मददगार हो सकता है। बच्चे पुस्तक में लिखे पाठ को देखकर और उसे सुनकर धार्मिक साहित्य के प्रति रुचि विकसित कर सकते हैं। वहीं बुजुर्गों और उन लोगों के लिए भी यह सुविधा लाभकारी है जिन्हें धार्मिक ग्रंथ पढ़ने में कठिनाई होती है।

    पुस्तक को छूकर पाठ सुनने की सुविधा धार्मिक साहित्य को अधिक सहज और सरल बनाती है। इसमें पाठक अपनी पसंद के हिस्से को सुन सकते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार समय दे सकते हैं। इस तरह पढ़ने और सुनने का मेल धार्मिक ग्रंथों को समझने का एक नया तरीका प्रस्तुत करता है।

    परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास

    आमतौर पर धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन पढ़कर या किसी व्यक्ति से पाठ सुनकर किया जाता है। लेकिन मैग्नेटिक रामायण इस अनुभव को तकनीक के माध्यम से अलग रूप देती है। इसमें धार्मिक ग्रंथों की पारंपरिक सामग्री के साथ ऐसी सुविधा जोड़ी गई है जिससे पाठक सीधे चौपाइयों और श्लोकों का पाठ सुन सकते हैं।

    स्वदेशी मेले में इस पुस्तक को देखने और इसकी कार्यप्रणाली समझने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। यह पहल दिखाती है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। मैग्नेटिक रामायण केवल एक पुस्तक के रूप में ही नहीं बल्कि पढ़ने और सुनने को जोड़ने वाले माध्यम के रूप में भी लोगों का ध्यान खींच रही है।

  • पति की मौत के बाद महिला को फिर करने लगा परेशान, अश्लील तस्वीरें भेजने और वायरल करने की धमकी का केस दर्ज

    पति की मौत के बाद महिला को फिर करने लगा परेशान, अश्लील तस्वीरें भेजने और वायरल करने की धमकी का केस दर्ज


    ग्वालियर । ग्वालियर में तीन बच्चों की परवरिश कर रही एक महिला को परेशान करने और उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने का मामला सामने आया है। आरोप है कि महिला के इनकार करने पर उसका पुराना परिचित उसे अश्लील मैसेज और आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने लगा। इतना ही नहीं उसने तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल कर महिला को बदनाम करने की धमकी भी दी। लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर महिला ने पुलिस से शिकायत की। माधौगंज थाना पुलिस ने गुरुवार रात आरोपी बलदेव शर्मा उर्फ गोलू के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के मुताबिक पीड़िता 36 वर्षीय महिला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा की रहने वाली है। वह ग्वालियर के माधौगंज इलाके में किराए के मकान में अपने तीन बच्चों के साथ रहती है। महिला ने पुलिस को बताया कि कुछ साल पहले एक शादी समारोह के दौरान उसकी पहचान बलदेव शर्मा उर्फ गोलू से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी। धीरे धीरे परिचय बढ़ा और बातचीत का सिलसिला जारी रहा। हालांकि जब महिला के पति को इस दोस्ती के बारे में पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद महिला ने आरोपी से दूरी बना ली और बातचीत बंद कर दी।

    महिला के पति का 18 जनवरी 2025 को बीमारी के कारण निधन हो गया था। पति की मौत के बाद तीनों बच्चों की जिम्मेदारी महिला के कंधों पर आ गई। वह अपने बच्चों की परवरिश और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में जुटी थी। शिकायत के मुताबिक 28 जून 2026 से आरोपी ने एक बार फिर महिला से संपर्क करना शुरू कर दिया। वह फोन करके बातचीत करने और अकेले मिलने का दबाव बनाने लगा। महिला का आरोप है कि आरोपी उस पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए भी दबाव डाल रहा था।

    महिला ने जब उसकी मांगों को मानने से इनकार कर दिया तो आरोपी का व्यवहार और परेशान करने वाला हो गया। शिकायत के अनुसार वह महिला को अश्लील संदेश और आपत्तिजनक तस्वीरें भेजने लगा। महिला ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने और उसे समाज में बदनाम करने की धमकी दी। इस तरह की धमकियों से महिला परेशान हो गई और उसने पुलिस की मदद लेने का फैसला किया।

    पीड़िता माधौगंज थाने पहुंची और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बलदेव शर्मा उर्फ गोलू के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब महिला के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। डिजिटल संदेशों और तस्वीरों से संबंधित तथ्यों की पड़ताल भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।

    माधौगंज थाना प्रभारी दिव्या तिवारी के मुताबिक महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही पूरे घटनाक्रम के सभी पहलू स्पष्ट हो सकेंगे।