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  • ओटीटी के बाद थिएटर में मचेगा मिर्जापुर का भौकाल! सेंसर बोर्ड ने लगाई A मुहर, 3 घंटे 17 मिनट चलेगी फिल्म

    ओटीटी के बाद थिएटर में मचेगा मिर्जापुर का भौकाल! सेंसर बोर्ड ने लगाई A मुहर, 3 घंटे 17 मिनट चलेगी फिल्म


    नई दिल्ली । ओटीटी की दुनिया में अपनी अलग पहचान और जबरदस्त फैन फॉलोइंग बना चुकी मिर्जापुर अब बड़े पर्दे पर अपना भौकाल दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। मिर्जापुर द मूवी की रिलीज का इंतजार कर रहे दर्शकों के लिए अब एक बड़ी खबर सामने आई है। फिल्म सेंसर बोर्ड की परीक्षा पास कर चुकी है और इसे A सर्टिफिकेट दिया गया है। इसके साथ ही फिल्म के रनटाइम की जानकारी भी सामने आ गई है। फिल्म आगामी 4 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है और इसकी लंबी अवधि को देखते हुए साफ है कि मेकर्स ने कहानी को बड़े पर्दे के हिसाब से काफी विस्तार दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक 29 अगस्त को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी CBFC ने मिर्जापुर द मूवी को सर्टिफिकेट जारी किया। सेंसर बोर्ड की आधिकारिक जानकारी के अनुसार फिल्म की कुल अवधि 197.19 मिनट है। यानी दर्शकों को सिनेमाघरों में लगभग 3 घंटे 17 मिनट 19 सेकंड तक मिर्जापुर की दुनिया में डूबे रहने का मौका मिलेगा। इतनी लंबी अवधि की वजह से फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। खास बात यह है कि फिल्म को A सर्टिफिकेट मिला है जिसका मतलब है कि इसे केवल वयस्क दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकेंगे।

    मिर्जापुर की पहचान ही इसकी बेबाक भाषा हिंसक घटनाओं और दमदार किरदारों के कारण बनी है। वेब सीरीज के पिछले सीजनों में दर्शकों ने कालीन भैया गुड्डू पंडित और दूसरे किरदारों के बीच सत्ता संघर्ष बदले और खूनखराबे की कहानी देखी है। ऐसे में फिल्म को A सर्टिफिकेट मिलना बहुत ज्यादा चौंकाने वाला नहीं है। सेंसर बोर्ड के इस सर्टिफिकेशन के बाद यह संकेत भी मिल रहा है कि फिल्म में मिर्जापुर की वही पुरानी तीखी भाषा और जबरदस्त हिंसक अंदाज देखने को मिल सकता है जिसके लिए यह फ्रेंचाइजी जानी जाती है।

    मिर्जापुर द मूवी को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच जबरदस्त बज बना हुआ है। वेब सीरीज की लोकप्रियता ने फिल्म के लिए मजबूत आधार तैयार कर दिया है और अब इसकी थिएटर रिलीज को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बड़े पर्दे पर मिर्जापुर की कहानी किस मोड़ पर पहुंचेगी और दर्शकों को कौन सा नया ट्विस्ट देखने को मिलेगा। लंबे रनटाइम के साथ फिल्म में कहानी को विस्तार देने की पूरी गुंजाइश नजर आ रही है।

    मिर्जापुर के प्रशंसकों के लिए 4 सितंबर का दिन खास होने वाला है। ओटीटी पर धमाल मचाने के बाद अब यही किरदार बड़े पर्दे पर अपनी ताकत दिखाने पहुंचेंगे। A सर्टिफिकेट और 3 घंटे 17 मिनट से ज्यादा की अवधि ने फिल्म को रिलीज से पहले ही चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मिर्जापुर द मूवी सिनेमाघरों में दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है और बॉक्स ऑफिस पर कितना बड़ा भौकाल कायम करती है।

  • हरतालिका तीज पर सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत…. भूलकर भी न करें ये गलतियां

    हरतालिका तीज पर सुहागिनें रखेंगी निर्जला व्रत…. भूलकर भी न करें ये गलतियां


    नई दिल्ली। ह
    रतालिका तीज (Hartalika Teej 2026) का व्रत सुहागिन महिलाओं (Married women) के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं और माता पार्वती (Mother Parvati) तथा भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करती हैं। कई महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं, जिसके कारण पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहना पड़ सकता है। ऐसे में पूजा-पाठ के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

    तीज व्रत को लेकर घर-परिवार में कई तरह की परंपराएं होती हैं। कोई पूरे दिन निर्जला रहती हैं, तो कुछ महिलाएं अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार करती हैं। समस्या तब हो सकती है जब व्रत रखने के उत्साह में महिलाएं शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर दें या व्रत खोलते समय अचानक बहुत ज्यादा खाना खा लें।

    इसके अलावा सुबह की तैयारी में बिना कुछ खाए ज्यादा मेहनत करना, पर्याप्त आराम न लेना, पहले से पानी कम पीना और व्रत खत्म होते ही भारी भोजन करना ऐसी आदतें हैं, जिनसे परेशानी हो सकती है तो इस तीज व्रत रखते समय किन आम गलतियों से बचना चाहिए? निर्जला व्रत में किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए और व्रत खोलते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए? आइए जानते हैं।


    व्रत से पहले अचानक पानी पीना बंद न करें

    अगर आप निर्जला व्रत रखने वाली हैं तो एक दिन पहले से ही पानी या तरल पदार्थ लेना कम कर देना सही तरीका नहीं है। शरीर को सामान्य रूप से हाइड्रेट रखना जरूरी है। दिनभर की गर्मी, उमस और आपकी गतिविधि के अनुसार पर्याप्त तरल लेने पर अगले दिन व्रत के दौरान शरीर पर अचानक दबाव कम हो सकता है। हालांकि पानी की कितनी मात्रा आपके लिए उचित है, यह मौसम, उम्र, गतिविधि और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। किसी बीमारी या डॉक्टर की विशेष सलाह होने पर उसी को प्राथमिकता दें।

    व्रत के नाम पर शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

    तीज का व्रत धार्मिक आस्था से जुड़ा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि तबीयत खराब होने के बावजूद किसी भी कीमत पर व्रत जारी रखा जाए। बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होना, भ्रम, अत्यधिक प्यास या असामान्य कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।


    सुबह से ही बहुत ज्यादा काम करने की गलती

    तीज के दिन पूजा, सजावट, मेहंदी, तैयारियां और घर के कामों के बीच महिलाएं अक्सर खुद के लिए आराम का समय नहीं निकाल पातीं। निर्जला व्रत के दौरान लगातार खड़े रहना या बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करना थकान बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि पूजा की जरूरी तैयारी पहले ही पूरी कर लें। भारी काम परिवार के दूसरे सदस्यों को सौंपें और दिन में बीच-बीच में आराम करें।


    धूप और गर्मी में ज्यादा देर रहने से बचें

    अगर तीज का व्रत निर्जला है तो गर्म मौसम में लंबे समय तक धूप में रहने से परेशानी बढ़ सकती है। शरीर में पानी की कमी का जोखिम बढ़ सकता है और कमजोरी या चक्कर जैसी समस्या हो सकती है। पूजा या किसी धार्मिक कार्यक्रम के लिए बाहर जाना हो तो मौसम को ध्यान में रखें और संभव हो तो ठंडी या छायादार जगह में रहें।


    व्रत खोलते ही भारी खाना न खाएं

    दिनभर के व्रत के बाद सबसे आम गलती होती है कि पूजा खत्म होते ही लोग बहुत ज्यादा खाना खा लेते हैं। लंबे समय तक खाली पेट रहने के बाद अचानक बहुत तला-भुना या भारी भोजन करने से पेट में असहजता हो सकती है। व्रत खोलते समय धीरे-धीरे और सीमित मात्रा में भोजन लेना बेहतर है। फल, हल्का भोजन या आसानी से पचने वाली चीजों से शुरुआत की जा सकती है। इसके बाद जरूरत के अनुसार सामान्य भोजन लिया जा सकता है।


    सिर्फ चाय-कॉफी के भरोसे न रहें

    जो महिलाएं निर्जला व्रत नहीं रखतीं, उनके लिए भी दिनभर केवल चाय या कॉफी लेते रहना अच्छा विकल्प नहीं है। व्रत में फलाहार करने वाली महिलाएं अपने लिए पौष्टिक और संतुलित विकल्प चुन सकती हैं। फल, दूध या दही जैसे खाद्य पदार्थ और घर में प्रचलित फलाहारी भोजन अपनी जरूरत के अनुसार लिया जा सकता है। अत्यधिक मीठे या बहुत तले हुए फलाहारी स्नैक्स को ही पूरे दिन का भोजन बना लेना संतुलित विकल्प नहीं है।


    दवाइयों को लेकर लापरवाही न करें

    अगर आप रोजाना कोई जरूरी दवा लेती हैं तो व्रत के कारण उसे अपने मन से बंद या समय में बदलाव न करें। कुछ दवाओं का भोजन या पानी के साथ लेना जरूरी हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से बात करें और दवा के समय या व्रत की पद्धति को लेकर उचित सलाह लें। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारी को नजरअंदाज करना सही नहीं है।


    इस तीज रखें आस्था के साथ सेहत का भी ध्यान

    तीज के दिन सजना-संवरना, पूजा करना और परिवार के साथ त्योहार मनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि आप स्वस्थ रहें। व्रत से पहले शरीर को सामान्य रूप से हाइड्रेट रखें, जरूरत से ज्यादा मेहनत से बचें। तबीयत खराब होने पर लक्षणों को नजरअंदाज न करें और व्रत खोलते समय भोजन धीरे-धीरे लें। आस्था के साथ सावधानी भी जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ रहकर ही त्योहार की खुशी पूरी तरह महसूस की जा सकती है।

  • Delhi-NCR में तेजी से फैल रहा H1N1 वायरस…. गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है ये संक्रमण

    Delhi-NCR में तेजी से फैल रहा H1N1 वायरस…. गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है ये संक्रमण


    नई दिल्ली।
    एच1एन1 (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू (Swine Flu), इन दिनों खूब चर्चा में है। दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सहित देश के कई राज्य इस संक्रमण से गंभीर रूप से प्रभावित देखे जा रहे हैं। दिल्ली में इस साल अब तक 2700 से ज्यादा लोग संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी-जुकाम और सांस की समस्याओं के शिकार मरीजों को संख्या भी बढ़ती देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इन दिनों श्वसन रोगों से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। कुछ लोगों में ये संक्रमण गंभीर और जानलेवा समस्याओं का कारण भी बन सकता है।

    हालिया जानकारियों के मुताबिक बॉलीवुड एक्टर इमरान हाशमी भी स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 से संक्रमित हो गए हैं। उनका स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में शूटिंग के सिलसिले में लगातार यात्रा करने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

    डॉक्टर कहते हैं, पहले से ही कमजोर इम्युनिटी वालों और कोमोरबिडिटी (व्यक्ति में एक ही समय पर दो या दो से अधिक बीमारियां) के शिकार लोगों में स्वाइन फ्लू से निमोनिया होने का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि इसकी पहचान कैसे की जा सकती है?

    डॉक्टर कहते हैं, एच1एन1 फ्लू के खतरों को देखते हुए इन दिनों अगर आपको तेज बुखार के साथ सिर और मांसपेशियों में दर्द हो या सांस लेने में दिक्कत हो तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। फ्लू कुछ लोगों में गंभीर रूप ले सकता है और फेफड़ों तक संक्रमण पहुंचने पर निमोनिया जैसी जटिलता पैदा हो सकती है।

    अच्छी बात यह है कि वैसे तो ज्यादातर लोग फ्लू से करीब एक सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। लेकिन हर व्यक्ति में बीमारी का असर एक जैसा नहीं होता। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में जटिलताओं का खतरा ज्यादा रहता है। फ्लू के दौरान सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द हो, हालत तेजी से बिगड़ रही हो या ठीक होने के बाद फिर तेज बुखार शुरू हो जाए, तो इसे चेतावनी का संकेत मानना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क जरूरी है।


    कैसे पहचानें कि फ्लू गंभीर हो रहा है?

    डॉक्टर कहते हैं, सिर्फ बुखार या खांसी देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि फ्लू गंभीर है या नहीं? अगर आपके लक्षण लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सांस से जुड़ी परेशानी हो रही है तो इसे अनदेखा न करें। सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, सीने में दर्द या दबाव, चक्कर या भ्रम की स्थिति हो तो तुरंत डॉक्टरी सहायता लेनी चाहिए।

    संक्रमण बढ़ने पर बच्चों में तेज सांस लेने, होंठ या त्वचा का नीला पड़ने, सुस्ती या ठीक से प्रतिक्रिया न देने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ये गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। इसमें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना जरूरी माना जाता है।


    स्वाइन फ्लू से निमोनिया का खतरा

    स्वाइन फ्लू का संक्रमण निमोनिया का कारण बन सकता है, जो गंभीर स्थिति मानी जाती है। निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक संक्रमण है इसमें फेफड़ों में मौजूद छोटी-छोटी हवा की थैलियां (एल्वियोली) में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या मवाद भर सकता है। निमोनिया में खांसी और सांस की परेशानी बढ़ जाती है। मरीज को सीने में दर्द, थकान, सांस लेने में दिक्कत होने के साथ बुखार और ठंड लगने की समस्या भी हो सकती है। अगर फ्लू के मरीज में निमोनिया का संदेह हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। वायरल फ्लू के लिए एंटीवायरल दवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। समय रहते उपचार हो जाए तो इससे जान जाने को खतरा कम किया जा सकता है।

    डॉक्टर कहते हैं, गंभीर फ्लू या निमोनिया के लक्षण होने पर घर पर केवल बुखार की दवा लेकर इंतजार नहीं करना चाहिए। समय रहते डॉक्टरी सलाह और उपचार जरूरी हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गंभीर लक्षणों या हाई-रिस्क लोगों में एंटीवायरल दवा जल्द शुरू करना जरूरी है। इंफ्लूएंजा वायरस या किसी बैक्टीरिया के कारण होने वाली निमोनिया जैसी गंभीर समस्या से बचे रहने के लिए विशेषज्ञ सभी लोगों को सालाना फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं। इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

  • सिक्किम से रेल नेटवर्क से जुड़ेगा भूटान… तेजी से चल रहा काम, बढ़ सकती है चीन की टेंशन

    सिक्किम से रेल नेटवर्क से जुड़ेगा भूटान… तेजी से चल रहा काम, बढ़ सकती है चीन की टेंशन


    नई दिल्ली।
    पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम (Northeastern State Sikkim) और पड़ोसी देश भूटान (Bhutan) जल्द भारतीय रेल (Indian Railways) के आधिकारिक मानचित्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। भारत-चीन (India-China) और भारत-भूटान सीमा (India-Bhutan border) पर रणनीतिक पहुंच और कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए रेल और रक्षा मंत्रालय ने इन परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। सरकार ने सिक्किम के लिए 2027 और भूटान के लिए 2029 तक ट्रेन सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा है। भारत सरकार का यह कदम चीन के लिए टेंशन बन सकता है। चिकन नेक पर नजर रखने वाले चीन के लिए यह बड़ा झटका होगा।


    भूटान के लिए 69 किमी की रेल लाइन

    रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत-भूटान को जोड़ने के लिए 69 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय रेललाइन पर केंद्र सरकार 3500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सरकार ने कोकराझार-गेलेफू रेललाइन को आधिकारिक तौर पर विशेष रेल परियोजना का दर्जा दिया है। ऐसा प्रशासनिक अड़चनें दूर कर भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी के लिए किया गया है। यह रेल कनेक्टिवटी न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार को नई मजबूती देगा, बल्कि भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी मास्टर प्लान को भी सीधे भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगा।


    सीमा सुरक्षा मजबूत होगी, पर्यटन को भी उड़ान

    इन दोनों परियोजनाओं से न केवल पूर्वोत्तर के दुर्गम क्षेत्रों में आम लोगों, पर्यटकों और व्यापारियों की आवाजाही सुगम और सस्ती होगी, बल्कि सीमा पर भारत का सामरिक और भौगोलिक शक्ति-संतुलन भी पूरी तरह बदल जाएगा। सीमा सुरक्षा और सैन्य रसद (लॉजिस्टिक्स) में रणनीतिक मजबूती आएगी। चीन और भूटान की सीमाओं पर स्थित इन बेहद संवेदनशील मोर्चों पर वर्तमान में मौसम खराब या भूस्खलन के कारण सेना की आवाजाही बाधित हो जाती है। नई रेल लाइन शुरू होने से वहां सैन्य साजो-सामान, हथियार और टुकड़ियों को पहुंचाने में लगने वाला समय 50 फीसदी से अधिक घट जाएगा। विशेषकर तीस्ता के नीचे बन रहे भूमिगत स्टेशन और सुरंगों से गुजरने वाला यह मार्ग हर मौसम में सुरक्षित कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

    सिक्किम को ब्रॉडगेज रेल सेवा से जोड़ने के लिए सेवक-रंगपो रेल परियोजना पर काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। 44.96 किलोमीटर लंबी इस चुनौतीपूर्ण रेललाइन का लगभग 86-90 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। परियोजना का सबसे मुख्य आकर्षण तीस्ता नदी के नीचे तैयार किया जा रहा तीस्ता बाजार रेलवे स्टेशन है। यह देश का पहला पूरी तरह अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन होगा। 12450 करोड़ की लागत से बनाई जा रही रेल लाइन पर सेफ्टी ट्रायल रन और ट्रेन परिचालन दिसंबर 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है।

  • ईरान युद्ध के बीच मिली धमकी से डरे डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे बैरन, घर से निकलना छोड़ा

    ईरान युद्ध के बीच मिली धमकी से डरे डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे बैरन, घर से निकलना छोड़ा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) इन दिनों ईरान (Iran) के साथ युद्ध में उलझे हुए हैं। इस युद्ध की वजह से उनके परिवार पर भी खतरा मंडरा रहा है। पिछले दो सालों में ट्रंप के ऊपर भी तीन जानलेवा हमले हो चुके हैं। वहीं, हाल ही में उनके छोटे बेटे बैरन ट्रंप (Younger son Barron Trump) को लेकर भी ईरान की तरफ से धमकी दी गई थी। अब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि दुनिया में सबसे शक्तिशाली माने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के बेटे ने डर के मारे घर से निकलना छोड़ दिया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की तरफ से धमकी आने के बाद बैरन की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। हालांकि, इसके बाद भी सुरक्षा दृष्टि से 20 साल के बैरन ने ज्यादातर समय अपने घर पर रहना ही शुरू कर दिया है। पिछली गर्मियां उन्होंने अपने पिता के न्यूजर्सी स्थित गोल्फ क्लब में ही गुजारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के करीबी एक शख्स ने की बैरन पिछले काफी समय से बहुत कम ही घर से बाहर जाते हैं। सूत्रों ने कहा, “वह बाहर नहीं जाते हैं। उन्हें एकांत पसंद है। वह ज्यादा किसी से मिलना-जुलना भी पसंद नहीं करते हैं।”


    चार्ली क्रिक की हत्या के बाद परेशान बैरन ट्रंप?

    सूत्रों के मुताबिक, बैरन अमेरिकी इन्फ्लुएंसर और ट्रंप के कट्टर समर्थक माने जाने वाले चार्ली क्रिक की हत्या के बाद से ही बाहर जाना कम कर चुके थे। लेकिन हाल ही में ईरान से आई धमकी ने उन्हें और भी ज्यादा एकांत प्रिय बना दिया है। खबर के मुताबिक क्रिक की हत्या की जानकारी मिलने के बाद बैरन ने अपने पिता डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया और कहा, “यही होता है, जब आप अपने घर से बाहर जाते हैं।”


    ईरान ने दी थी बैरन की हत्या की धमकी

    ईरान के साथ युद्ध में उलझे डोनाल्ड ट्रंप के परिवार को कई बार हत्या की धमकी मिल चुकी हैं। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के बेटे को भी इसी तरह की धमकी मिली थीं। ईरान के सरकारी मीडिया चैनल से इस बात का ऐलान किया गया था कि जो कोई भी बैरन तक पहुंचेगा उसे 10 मिलियन डॉलर का इनाम दिया जाएगा। इसके बाद आईआरजीसी की तरफ से भी एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसका शीर्षक था ‘व्हेयर टू किल बैरन ट्रंप’ इसमें कहा गया था कि ईरान के पास इस बात की पूरी जानकारी है कि बैरन ट्रंप कब, कहां और क्या करते हैं।


    ट्रंप पर भी हो चुके हैं हमले

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी कई बार निशाना बनाया जा चुका है। सबसे पहले चुनावी प्रचार के दौरान उनके ऊपर हमला किया गया था। इसमें गोली सीधा उनके कान को छूती हुई निकल गई थी। इस हमले के बाद ट्रंप की पॉपुलैरिटी भी तेजी के साथ बढ़ी थी। इस हमले के कुछ समय के बाद ही ट्रंप के गोल्फ कोर्स के बाहर गोलीबारी हुई थी। इसमें संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बाद एक होटल के कार्यक्रम के दौरान भी एक संदिग्ध ने घुसने की कोशिश की थी। इसमें भी ट्रंप बाल-बाल बचे थे।

  • छोटे बीज, बड़े फायदे! अलसी में छिपा फाइबर और ओमेगा-3, वजन से लेकर कोलेस्ट्रॉल तक रख सकता है कंट्रोल में

    छोटे बीज, बड़े फायदे! अलसी में छिपा फाइबर और ओमेगा-3, वजन से लेकर कोलेस्ट्रॉल तक रख सकता है कंट्रोल में


    नई दिल्ली । आजकल बदलती जीवनशैली और खानपान की वजह से वजन बढ़ना कोलेस्ट्रॉल की समस्या और शरीर में सूजन जैसी परेशानियां आम होती जा रही हैं। ऐसे में संतुलित आहार को स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक रोज की डाइट में हरी सब्जियों फल प्रोटीन और फाइबर के साथ नट्स और सीड्स को भी शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। इन्हीं पोषक तत्वों से भरपूर बीजों में अलसी यानी फ्लैक्स सीड्स का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आकार में बेहद छोटे दिखने वाले अलसी के बीज पोषण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनमें कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

    अलसी में फाइबर प्रोटीन थायमिन और पौधों से मिलने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड अल्फा लिनोलेनिक एसिड यानी एएलए पाया जाता है। एएलए शरीर के लिए जरूरी वसा का एक प्रकार है और यह शरीर में सूजन से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से अलसी को एंटी इंफ्लामेटरी गुणों वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अलसी किसी बीमारी का इलाज है बल्कि इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाकर संभावित स्वास्थ्य लाभ लिए जा सकते हैं।

    जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी अलसी उपयोगी हो सकती है। गठिया जैसी स्थितियों में शरीर में सूजन की भूमिका रहती है और अलसी में मौजूद एएलए सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर असर डाल सकता है। कुछ अध्ययनों में अलसी के सेवन से सूजन से जुड़े संकेतकों में सुधार की संभावना सामने आई है। लेकिन लगातार जोड़ों में दर्द सूजन या अकड़न रहने पर केवल अलसी पर निर्भर रहना सही नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच और उचित उपचार जरूरी है।

    अलसी को दिल की सेहत के लिए भी उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड के साथ घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह का फाइबर पाया जाता है। पर्याप्त फाइबर वाली डाइट रक्त में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। कुछ शोधों में अलसी के सेवन को ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे हृदय रोग के जोखिम कारकों में संभावित सुधार से जोड़ा गया है। हालांकि इसका असर व्यक्ति की पूरी डाइट शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

    वजन को नियंत्रित रखने में भी अलसी मददगार हो सकती है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन प्रक्रिया को धीमा करने और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में सहायता कर सकता है। इससे बार बार खाने की इच्छा कम हो सकती है और कुल कैलोरी सेवन को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि वजन प्रबंधन करने वाले लोगों की संतुलित डाइट में अलसी को शामिल किया जाता है।

    हालांकि अलसी को किसी बीमारी का इलाज या वजन घटाने का अकेला उपाय नहीं समझना चाहिए। इसे सीमित और संतुलित मात्रा में आहार का हिस्सा बनाना बेहतर है। किसी विशेष बीमारी से पीड़ित व्यक्ति या नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को अपनी डाइट में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेनी चाहिए। कुल मिलाकर अलसी एक छोटा लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है जिसे संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ डाइट में शामिल किया जा सकता है।

  • नेपाल में फंसे MP के 7 लोगों में से अनूपपुर की दो बहनें सुरक्षित मिली…. 5 की तलाश जारी

    नेपाल में फंसे MP के 7 लोगों में से अनूपपुर की दो बहनें सुरक्षित मिली…. 5 की तलाश जारी


    भोपाल/विदिशा/अनूपपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक परिवार ने राहत की सांस ली जब बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल (Nepal floods) में फंसी दो बहनों (Two sisters) का पता चल गया, जबकि राज्य के पांच अन्य परिवार शनिवार को भी अपने प्रियजनों की खबर का बेसब्री और बेचैनी से इंतजार करते रहे. मध्य प्रदेश के कम से कम सात लोग नेपाल में लापता हैं या फंसे हुए हैं, जिनमें अनूपपुर की बहनें पलक और पल्लवी मांझी और रायसेन के भाई विकास और हिमांशु राजपूत शामिल हैं।

    लापता लोगों में टोरंटो में रहने वाली इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी शामिल हैं, जो ईशा फाउंडेशन की 77 सदस्यों वाली तीर्थयात्रा के दौरान नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लापता हो गईं. इसके कारण विदिशा में उनके परिवार को लगातार चार दिनों तक बिना जवाब वाले फ़ोन कॉल्स का सामना करना पड़ा।

    अनूपपुर की पलक और पल्लवी मिलीं सुरक्षित, पोखरा में हैं दोनों बहनें
    परिवार ने बताया कि अनूपपुर जिले की रहने वाली और ग्वालियर में पढ़ाई व नौकरी करने वाली बहनें पलक और पल्लवी मांझी छुट्टी मनाने के दौरान इस आपदा में फंस गई थीं और दो दिनों तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया था. कोटमा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज रत्नाम्बर शुक्ला ने बताया कि शुक्रवार को परिवार को खबर मिली कि दोनों बहनें पोखरा में सुरक्षित हैं और रविवार को उनके घर लौटने की उम्मीद है।

    रायसेन, देवास और इंदौर के 4 अन्य लोगों का भी सुराग नहीं
    परिवार ने बताया कि पता चलने के बाद उनके पिता ने भी उनसे फोन पर बात की. जहां मांझी परिवार ने उनके सुरक्षित मिलने का जश्न मनाया, वहीं पांच अन्य लापता लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने राज्य की इमरजेंसी हेल्पलाइन से संपर्क किया है। रायसेन में, हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में काम करने वाले भाई विकास और हिमांशु राजपूत का परिवार उनकी जानकारी का इंतजार करते हुए परेशान रहा।

    देवास के शाहजहां अंसारी और इंदौर के शिबा प्रसाद मुखर्जी के रिश्तेदारों ने भी दिल्ली कंट्रोल रूम से संपर्क किया है, जिसे नेपाल में लापता या फंसे मध्य प्रदेश के लोगों की मदद के लिए बनाया गया था।

    कनाडा की इंजीनियर स्वाति बागरेचा 4 दिन से लापता
    विदिशा में 50 वर्षीय स्वाति बागरेचा का परिवार चार दिनों से बेचैनी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि उनका मोबाइल फोन बजता तो है लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता. टोरंटो में रहने वाली इंजीनियर स्वाति, 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यों वाले ग्रुप के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दिल्ली से निकली थीं. उनके भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया कि परिवार ने उनसे आखिरी बार 26 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे बात की थी, जब वह इमिग्रेशन की औपचारिकताओं के लिए नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर पहुंच गई थीं।

    उन्होंने बताया, “उनका मोबाइल अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल का जवाब नहीं दे रही हैं. हम उनकी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं.” परिवार के अनुसार, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का मुंबई में अपनी बड़ी बहन के साथ रुकी हुई थी। प्रशांत ने बताया कि लोकेशन लॉग से पता चला कि स्वाति का मोबाइल फोन चीनी बॉर्डर के पास कहीं एक्टिव था, लेकिन उसे ट्रेस करना मुश्किल हो रहा था क्योंकि नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड था. उन्होंने कहा कि परिवार ने नेपाल में कनाडाई और भारतीय दूतावासों से संपर्क किया है और उन्हें खोजने में मदद मांगी है।

    परिवार ने बताया कि स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के दखल के बाद, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी परिवार से बात की और स्वाति को खोजने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के प्रयास शुरू किए।

    26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से अचानक बाढ़ आ गई थी; बाढ़ का पानी बाद में त्रिशूली और गंडक नदी प्रणालियों में बह गया और निचले इलाकों को प्रभावित किया। जो परिवार अभी भी इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए बिना जवाब वाली हर कॉल ने डर और इस उम्मीद को और गहरा कर दिया है कि उनके अपने सुरक्षित हैं और जल्द ही घर लौट आएंगे।

  • उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर

    उज्बेकिस्तान दौरे पर PM मोदी, व्यापार-निवेश से लेकर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर


    ताशकंद।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की उज्बेकिस्तान (Uzbekistan Visit) की दो दिवसीय यात्रा के दौरान दोनों देशों का जोर आपसी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ व्यापार एवं निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर रहेगा। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव (President Shavkat Mirziyoyev) के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के वीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी।

    इससे पहले शनिवार को ताशकंद (Tashkent ) पहुंचने पर पीएम मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ वार्ता के बाद द्विपक्षीय समझौतों के पैकेज पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना भी है। प्रधानमंत्री ताशकंद पहुंचने के बाद यांगी उज्बेकिस्तान पार्क पहुंचकर आजादी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिसे देश की आजादी की 30वीं वर्षगांठ पर बनाया गया था। पीएम शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी गए।


    किर्गिस्तान दौरे पर पीएम मोदी के कार्यक्रमों में खास क्या?

    प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को 26वें एससीओ समिट में शामिल होने के लिए बिश्केक जाएंगे। यह एससीओ की 25वीं वर्षगांठ है। इस साल की थीम है ‘एससीओ के 25 साल: टिकाऊ शांति, विकास और समृद्धि की ओर साथ-साथ’। बिश्केक में होने वाले एससीओ लीडरशिप समिट के कार्यक्रमों में 31 अगस्त को वेलकम डिनर और अगले दिन समिट की मुख्य बैठक शामिल है। यहां प्रधानमंत्री मोदी भाषण भी देंगे। बिश्केक में समिट के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें भी प्रस्तावित हैं।


    उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात कब हुई थी?
    पीएम मोदी और मिर्जियोयेव की मुलाकात 2023 में दुबई में सीओपी28 सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी। पिछली मुलाकात 2025 में चीन के तियानजिन में एससीओ समिट के दौरान हुई थी।

    2026 की मुलाकात को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक संबंध हैं। इस दौरे के बाद द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में इंडोलॉजिस्ट (भारतीय संस्कृति के जानकार) और अन्य विद्वानों से भी बातचीत करेंगे।


    कनेक्टिविटी की बाधा दूर करेंगे भारत और उज्बेकिस्तान

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक उज्बेकिस्तान संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत को अहम खनिजों की जरूरत है। ऐसे में दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सप्लाई की सुदृढ़ व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हो सकती है। राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक भारत और उज्बेकिस्तान एक-दूसरे के लिए स्वाभाविक बाजार हैं। हम निश्चित रूप से ज्यादा आयात कर सकते हैं। बहुत ज्यादा निर्यात भी कर सकते हैं। लेकिन कनेक्टिविटी (संपर्क) एक बड़ी बाधा रही है। इसलिए, व्यापारिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कनेक्टिविटी की इस बाधा को कैसे दूर किया जाए, इस मुद्दे पर भी दोनों पक्ष चर्चा करेंगे।


    फार्मा, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे दोनों देश

    उज्बेकिस्तान में भारत की राजदूत स्मिता पंत के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे का एजेंडा बहुत व्यापक है। 2015 में उनके पिछले द्विपक्षीय दौरे के बाद दोनों देशों का व्यापार 300% बढ़ा है। उज्बेकिस्तान में निवेश 700% से अधिक बढ़ा है। संस्कृति, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, स्वास्थ्य, पारंपरिक दवाओं, कृषि और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी बात होगी। कई एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।


    पीएम मोदी से मिलने का उत्साह, कलाकारों और प्रवासियों में दिखी खुशी

    उज्बेकिस्तान के ताशकंद पहुंचे पीएम मोदी के स्वागत में बच्चों, युवतियों और युवाओं की एक टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया। कार्यक्रम के दौरान एक छोटे बच्चे को पीएम मोदी से मिलने के लिए खास तौर पर उत्साहित देखा गया। प्रस्तुति के बाद स्थानीय लोगों को इस जेस्चर की सराहना करते देखा जा सकता है।


    ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत: पीएम मोदी

    पीएम मोदी ने ताशकंद के अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा भी किया। उन्होंने लिखा कि वह ताशकंद में भारतीय समुदाय के स्नेह और आत्मीयता से अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रवासी समुदाय भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक जीवंत सेतु की तरह है, जो दोनों देशों के बीच मित्रता के संबंधों को लगातार मजबूत बना रहा है। स्वागत कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय की ओर से प्रस्तुत कथक और अंदिजान पोल्का नृत्य देखा। उज्बेकिस्तान के छोटे बच्चों ने प्रसिद्ध भारतीय गीत उड़े जब जब जुल्फें तेरी पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम ने तबले और पारंपरिक उज्बेक वाद्यों (दोइरा और चांग) की मनमोहक जुगलबंदी का भी आनंद लिया।


    राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक की योजना

    विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी ब्यौरे के मुताबिक ताशकंद दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। दोनों के बीच व्यापार और निवेश, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों देश संबंधों की समीक्षा के अलावा भविष्य की कार्ययोजना भी तय करेंगे। जनता के बीच जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने के मकसद से समुदाय के बीच संबंधों की गर्मजोशी बनाए रखने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।

  • Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला

    Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला


    दुबई।
    विमेंस एशिया कप 2026 (Womens Asia Cup 2026) का आगाज हो गया है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी यूएई (UAE) कर रहा है। अभी तक खेले गए दो मुकाबलों में थाइलैंड (Thailand) और श्रीलंका (Sri Lanka) ने जीत दर्ज की है। थाइलैंड ने अपने पहले मुकाबले में हॉन्ग-कॉन्ग को हराया था, जबकि श्रीलंका ने मेजबान यूएई को 9 विकेट से धूल चटाई। यह श्रीलंका विमेंस टीम (Sri Lanka Women’s Team) की टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत है। यूएई के खिलाफ उन्होंने मुकाबले महज 7.5 ओवर में ही खत्म कर दिया। उन्हें जीत के लिए 80 रनों का मामूली टारगेट मिला था, जिसे कप्तान चमारी अट्टापट्टू की 48 रनों की तूफानी पारी के दम पर उन्होंने आसानी से हासिल कर लिया। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया अपने अभियान का आगाज थाइलैंड के खिलाफ करने जा रही है। भारत इस टूर्नामेंट में बतौर फेवरेट उतरेगी।

    बता दें, विमेंस एशिया कप में इस बार कुल 8 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं, जिन्हें 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है।
    ग्रुप-ए- भारत, पाकिस्तान, थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग जैसी टीमें हैं।
    ग्रुप-बी- श्रीलंका, बांग्लादेश, यूएई और इंडोशनेशिया है।

    ग्रुप स्टेज में टॉप-2 में रहने वाली टीमों को सेमीफाइनल का टिकट मिलेगा। सेमीफाइनल 10 और 11 सितंबर को दुबई में खेले जाएंगे, जबकि खिताबी मुकाबला इसी मैदान पर 13 सितंबर को आयोजित होगा।

    वुमेंस एशिया कप का 10वां एडिशन है। पिछली बार इस टूर्नामेंट को श्रीलंका ने अपने घर पर जीता था। फाइनल में उन्होंने 7 बार की चैंपियन टीम इंडिया को हराया था। भारत इस टूर्नामेंट में जरूरत उनसे बदला लेना चाहेगा।

    ग्रुप-ए का पहला मैच थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग के बीच खेला गया था। इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए थाइलैंड की टीम ने 120 रन बोर्ड पर लगाए थे, जिसके जवाब में हॉन्ग-कॉन्ग की विमेंस टीम 114 रन बना पाई थी। थाइलैंड ने यह मैच 6 रनों के अंतर से जीता। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया थाइलैंड के खिलाफ अपने अभियान का आगाज करेगी। भारत-पाकिस्तान बहुप्रतीक्षित मैच 5 सितंबर को खेला जाएगा।

    श्रीलंका ने यूएई के खिलाफ गेंदों के मामले में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए विमेंस एशिया कप का आगाज किया। श्रीलंका ने अपना पहला मैच 73 गेंदें शेष रहते जीता। यूएई ने पहले बैटिंग करते 79 रन ही बोर्ड पर लगाए, उनकी पूरी टीम 19.5 ओवर में सिमट गई। श्रीलंका ने इस टारगेट को 7.5 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर आसानी से चेज कर लिया। चमीरा अट्टापट्टू ने 48 रनों की तूफानी पारी खेली।

  • UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल

    UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल


    वाराणसी।
    वाराणसी (Varanasi) में प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल (International Cruise Terminal) बनाया जाएगा। आईडब्ल्यूएआई की ओर से निर्माण कराया जाएगा। नगर निगम सामनेघाट में 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगा। इस क्रूज टर्मिनल (Cruise Terminal) पर दुनिया भर से बड़े जहाजों और मालवाहकों का ठहराव होगा। पर्यटन के साथ जल परिवहन के जरिये हल्दिया तक की यात्रा होगी। रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। निर्माण में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    आईडब्ल्यूएआई के निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सामनेघाट में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल में एक समय में 10,000 यात्रियों की क्षमता होगी। इमिग्रेशन काउंटर, कस्टम्स काउंटर, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, सुरक्षा जांच काउंटर, सीसीटीवी निगरानी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम होगा।

    यात्रियों के लिए पैसेंजर लाउंज, बैगेज ट्रॉली, इलेक्ट्रिक बग्गी, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट होंगे। इसके अलावा कैफेटेरिया और ड्यूटी-फ्री शॉपिंग के लिए व्यावसायिक जगह भी होगी। वाहन पार्किंग और प्रीपेड टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। टर्मिनल को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जाएगा। अभी मुख्यालय में डीपीआर तैयार की जा रही है।


    कोच्चि से 3.6 गुना बड़ा होगा क्रूज टर्मिनल

    कोच्चि के सागरिका में 2,253 वर्गमीटर क्रूज टर्मिनल बनाया गया है। कोच्चि टर्मिनल में 48 इमिग्रेशन काउंटर, 10-12 कस्टम काउंटर, बैगेज स्कैनर, लाउंज, ड्यूटी-फ्री शॉप और पार्किंग जैसी सुविधाएं हैं। इसके मुकाबले वाराणसी में सामनेघाट पर दो एकड़ यानी 8,094 वर्गमीटर में टर्मिनल का निर्माण होगा। ऐसे में वाराणसी का प्रस्तावित टर्मिनल क्षेत्रफल के लिहाज से कोच्चि से करीब 3.6 गुना बड़ा होगा।


    रोजगार और व्यापार के बढ़ेंगे अवसर

    टर्मिनल के निर्माण के बाद वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजनाओं के एक बेड़े में एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी। टर्मिनल बन जाने से देश विदेश से व्यापार बढ़ जाएगा। अभी तक जो व्यापार पानी के रास्ते नहीं हो पा रहा था वो आने वाले समय में संभव होगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।