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  • 'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस

    'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस


    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के उपयोग और उत्पादों पर किए जा रहे कथित भ्रामक दावों को लेकर कई प्रमुख पेय पदार्थ ब्रांड्स को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    नियामक के अनुसार, मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित नियमों में ‘एनर्जी ड्रिंक’ श्रेणी के लिए कोई अलग मानक निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में किसी उत्पाद को इस नाम से प्रस्तुत करना या उसकी पैकेजिंग एवं प्रचार सामग्री में ऐसे शब्दों का उपयोग करना नियामकीय जांच के दायरे में आता है। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उत्पादों की ब्रांडिंग और लेबलिंग के दौरान ऐसे दावों से बचना आवश्यक है, जिनसे यह संकेत मिले कि संबंधित पेय शरीर या मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाता है, ऊर्जा स्तर में वृद्धि करता है, ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है या सामान्य कमजोरी दूर करने जैसे चिकित्सीय अथवा कार्यात्मक लाभ प्रदान करता है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इस प्रकार के दावों को स्वीकृति प्राप्त नहीं है।

    खाद्य नियामक का कहना है कि उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रचार सामग्री उपभोक्ताओं को स्पष्ट, तथ्यात्मक और नियमों के अनुरूप जानकारी उपलब्ध कराए। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जाते हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो उन्हें भ्रामक माना जा सकता है। इसी कारण संबंधित कंपनियों से जवाब तलब किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य एवं पेय उद्योग में ब्रांडिंग और मार्केटिंग के दौरान किए जाने वाले दावों की पारदर्शिता उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसी भी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसके संभावित प्रभावों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध होना उपभोक्ताओं के सूचित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    हाल के समय में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, प्रचार और गुणवत्ता को लेकर नियामकीय निगरानी लगातार बढ़ी है। इससे पहले भी विभिन्न खाद्य कारोबार संचालकों को उत्पादों के दावों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और उपभोक्ता शिकायतों से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। साथ ही उन्हें निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए थे।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य एवं पेय उत्पाद निर्धारित कानूनी मानकों और लेबलिंग नियमों का पूरी तरह पालन करें। इससे भविष्य में उत्पादों की प्रस्तुति और विपणन के तौर-तरीकों में भी अधिक जवाबदेही देखने को मिल सकती है।

  • क्राइम सीन पर अब तुरंत फॉरेंसिक जांच, गुजरात की 47 हाईटेक मोबाइल वैन से मजबूत होगी जांच और दोषसिद्धि की प्रक्रिया

    क्राइम सीन पर अब तुरंत फॉरेंसिक जांच, गुजरात की 47 हाईटेक मोबाइल वैन से मजबूत होगी जांच और दोषसिद्धि की प्रक्रिया

    गांधीनगर । गुजरात में अपराध जांच को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में 47 मोबाइल फॉरेंसिक वैन सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन अत्याधुनिक वाहनों की मदद से पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक परीक्षण, साक्ष्यों के संरक्षण और शुरुआती फॉरेंसिक विश्लेषण की सुविधा मिल रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण साक्ष्य समय रहते सुरक्षित किए जा सकें और उनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या दूषित होने की संभावना न्यूनतम रहे।

    राज्य में फॉरेंसिक विज्ञान के विस्तार के लिए पिछले वर्षों में विशेष प्रयास किए गए हैं। इसी दिशा में फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए स्थापित संस्थान को अब केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिल चुका है। इसके साथ ही अपराध जांच में वैज्ञानिक तरीकों के अधिकतम उपयोग पर लगातार जोर दिया गया है, जिससे पुलिस जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    नई आपराधिक व्यवस्था लागू होने के बाद वैज्ञानिक जांच की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाए जाने के बाद घटनास्थल पर तत्काल विशेषज्ञ सहायता की आवश्यकता बढ़ी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मोबाइल फॉरेंसिक वैन की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

    पिछले दो वर्षों के दौरान ये मोबाइल फॉरेंसिक वैन राज्यभर में हजारों अपराध स्थलों पर पहुंचकर जांच एजेंसियों की सहायता कर चुकी हैं। हत्या, यौन अपराध, पॉक्सो, लूट, चोरी, आगजनी, मादक पदार्थों से जुड़े मामलों और अन्य गंभीर अपराधों में घटनास्थल पर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने का कार्य किया गया। इसके अलावा संदिग्ध मौत, हिरासत में मृत्यु, दुर्घटनाओं और अन्य संवेदनशील मामलों में भी इन वैनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    इन विशेष वाहनों में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और परीक्षण किटों की व्यापक व्यवस्था की गई है। इनमें डीएनए और जैविक नमूनों की जांच, यौन अपराधों से जुड़े साक्ष्यों का संग्रह, मादक पदार्थों और विस्फोटक पदार्थों की प्रारंभिक पहचान, आगजनी से संबंधित विश्लेषण तथा गन शॉट अवशेषों की जांच के लिए आवश्यक किट उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पैरों और टायर के निशानों के संरक्षण तथा अन्य सूक्ष्म साक्ष्यों के संग्रह की भी सुविधा मौजूद है।

    मोबाइल फॉरेंसिक वैन में उच्च क्षमता वाले कैमरे, स्टीरियो माइक्रोस्कोप, जीपीएस आधारित बॉडी कैमरा, लैपटॉप, प्रिंटर, मिनी रेफ्रिजरेटर, एलईडी डिस्प्ले, उच्च तीव्रता वाली फॉरेंसिक लाइट और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इनकी सहायता से घटनास्थल पर रक्त के धब्बों, फिंगरप्रिंट, बाल, फाइबर, मिट्टी, कांच के टुकड़ों, जैविक नमूनों और अन्य सूक्ष्म साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच और सुरक्षित संग्रहण किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फॉरेंसिक वैन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अपराध स्थल पर तुरंत वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध हो जाती है, जिससे महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने या दूषित होने की आशंका काफी कम हो जाती है। विशेषकर यौन अपराध और पॉक्सो जैसे मामलों में समय पर जैविक साक्ष्य एकत्र करना जांच की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के व्यापक उपयोग से गुजरात में अपराध जांच की कार्यप्रणाली अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बन रही है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

  • 5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    नई दिल्ली । पांच से बारह वर्ष की आयु बच्चों के संपूर्ण विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। इसी उम्र में शरीर तेजी से बढ़ता है, मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं तथा मस्तिष्क नई चीजों को सीखने और समझने की क्षमता विकसित करता है। ऐसे में संतुलित और पोषणयुक्त आहार बच्चों के वर्तमान स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य की सेहत की भी मजबूत नींव तैयार करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की दैनिक डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल होना चाहिए। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों के विकास और ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दाल, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया, चना और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ नियमित रूप से देने से बच्चों की शारीरिक वृद्धि बेहतर होती है और उनकी ताकत भी बढ़ती है।

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी भी बेहद आवश्यक हैं। बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास तेज गति से होता है, इसलिए दूध, दही, पनीर, रागी और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से कुछ समय धूप में बिताने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं।

    फल और हरी सब्जियां बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें मौजूद विटामिन, खनिज और फाइबर शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। रंग-बिरंगे फल और विभिन्न प्रकार की सब्जियां खाने वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है और उनका मानसिक विकास भी बेहतर माना जाता है।

    ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के लिए साबुत अनाज को भोजन में शामिल करना लाभदायक होता है। गेहूं, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे बच्चे लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं और पढ़ाई या अन्य गतिविधियों के दौरान उनकी एकाग्रता बनी रहती है। इसके विपरीत अत्यधिक रिफाइंड आटे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    दिमाग के स्वस्थ विकास के लिए हेल्दी फैट भी जरूरी है। बादाम, अखरोट, मूंगफली और विभिन्न बीजों में मौजूद पोषक तत्व याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में नियमित रूप से आहार में शामिल किया जा सकता है।

    पर्याप्त पानी पीना भी बच्चों के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने, पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। वहीं अत्यधिक मीठे पेय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि इनके अधिक उपयोग से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचपन से ही बच्चों में संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जाएं तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। यही आदतें आगे चलकर उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

  • HDFC बैंक डेबिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी राहत, स्मार्ट इस्तेमाल से हर महीने हजारों रुपये तक की बचत का मौका

    HDFC बैंक डेबिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी राहत, स्मार्ट इस्तेमाल से हर महीने हजारों रुपये तक की बचत का मौका

    नई दिल्ली । डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में डेबिट कार्ड केवल नकदी निकालने का साधन नहीं रह गया है। यदि ग्राहक उपलब्ध सुविधाओं और ऑफर्स का सही तरीके से उपयोग करें तो रोजमर्रा के खर्चों में उल्लेखनीय बचत की जा सकती है। एचडीएफसी बैंक अपने डेबिट कार्ड धारकों के लिए कई ऐसे लाभ उपलब्ध कराता है, जिनकी मदद से ऑनलाइन खरीदारी, यात्रा बुकिंग और नियमित बिल भुगतान पर अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

    बैंक की डिजिटल भुगतान सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए विशेष कैशबैक और रिवॉर्ड ऑफर्स उपलब्ध हैं। डेबिट कार्ड को डिजिटल वॉलेट से लिंक कर भुगतान करने पर पात्र ग्राहकों को निर्धारित शर्तों के अनुसार कैशबैक का लाभ मिल सकता है। इससे डिजिटल ट्रांजैक्शन न केवल आसान बनते हैं, बल्कि खर्च का कुछ हिस्सा भी वापस मिलने की संभावना रहती है।

    यात्रा और ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के लिए भी कई आकर्षक ऑफर्स उपलब्ध हैं। फ्लाइट, होटल और बस टिकट की बुकिंग के साथ-साथ प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करने पर भी कैशबैक या अन्य लाभ मिल सकते हैं। ऐसे ऑफर्स का लाभ उठाकर ग्राहक अपने मासिक बजट पर पड़ने वाले खर्च को कम कर सकते हैं।

    कॉन्टैक्टलेस डेबिट कार्ड सुविधा भी ग्राहकों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। ‘टैप टू पे’ तकनीक के जरिए बिना कार्ड स्वाइप किए तेज और सुरक्षित भुगतान किया जा सकता है। पात्र लेनदेन पर कैशबैक जैसे लाभ भी उपलब्ध हो सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से किराना, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप और अन्य दैनिक भुगतान के दौरान समय बचाने के साथ अतिरिक्त बचत का अवसर भी देती है।

    नियमित बिलों के लिए ऑटो-पेमेंट सुविधा अपनाने वाले ग्राहकों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। बिजली, मोबाइल, गैस, इंटरनेट और अन्य आवश्यक सेवाओं के बिल समय पर स्वतः जमा होने से लेट फीस से बचाव होता है। इसके साथ पात्र ग्राहकों को कैशबैक या अन्य प्रोत्साहन का लाभ भी मिल सकता है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग उत्पादों के साथ मिलने वाले ऑफर्स का लाभ तभी अधिक मिलता है, जब ग्राहक उनकी शर्तों और पात्रता को समझकर उनका उपयोग करें। अनावश्यक खर्च करने के बजाय आवश्यक खरीदारी और नियमित भुगतान में इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने से मासिक बजट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

    ग्राहकों को किसी भी ऑफर का लाभ लेने से पहले उसकी वैधता, न्यूनतम लेनदेन राशि, पात्रता और अन्य नियमों की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। समय-समय पर बैंक विभिन्न ऑफर्स में बदलाव भी करते हैं, इसलिए अपडेट जानकारी के आधार पर ही ट्रांजैक्शन करना बेहतर माना जाता है। सही योजना और समझदारी के साथ डेबिट कार्ड का उपयोग करने पर डिजिटल भुगतान अधिक सुविधाजनक होने के साथ बचत का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है।

  • 'गेम बदलने' के दावे के साथ मैदान में उतरे ओवैसी, मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस से सपा-कांग्रेस की बढ़ी चिंता, बीजेपी भी रख रही पैनी नजर

    'गेम बदलने' के दावे के साथ मैदान में उतरे ओवैसी, मुस्लिम बहुल सीटों पर फोकस से सपा-कांग्रेस की बढ़ी चिंता, बीजेपी भी रख रही पैनी नजर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में विभिन्न जिलों के दौरों और लगातार जनसभाओं के जरिए उन्होंने यह संकेत दिया है कि उनकी पार्टी इस बार पहले की तुलना में अधिक संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में उनके ‘गेम बदलने’ वाले दावे ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

    ओवैसी ने मुस्लिम बहुल और सामाजिक रूप से प्रभावशाली मानी जाने वाली विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस करने की रणनीति बनाई है। पार्टी का कहना है कि वह प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में संगठन को मजबूत कर रही है और स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। चुनावी सभाओं के माध्यम से एआईएमआईएम खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है।

    हालांकि उत्तर प्रदेश में अब तक पार्टी को विधानसभा चुनावों में कोई सीट हासिल नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई सीटों पर सीमित वोटों का अंतर भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में यदि एआईएमआईएम कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय वोट हासिल करती है तो इसका असर उन दलों पर पड़ सकता है, जिनका पारंपरिक समर्थन आधार अल्पसंख्यक मतदाता रहे हैं।

    प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टियां लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं के बड़े हिस्से को अपने साथ बनाए रखने का प्रयास करती रही हैं। ऐसे में एआईएमआईएम की सक्रियता विपक्षी दलों के लिए नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है। कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्षी मतों का बिखराव होता है तो इसका सीधा असर कई करीबी मुकाबलों वाली सीटों पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर, एआईएमआईएम का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी दल को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करना और उन वर्गों की आवाज को मजबूती देना है, जिन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह प्रदेश की राजनीति में दीर्घकालिक भूमिका निभाने के इरादे से चुनाव लड़ रही है।

    चुनावी तैयारियों के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधनों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल की संभावनाओं पर समय-समय पर अटकलें लगती रही हैं, हालांकि फिलहाल किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार चुनाव नजदीक आने पर नए समीकरण बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल सीटों की संख्या का मुकाबला नहीं होता, बल्कि सामाजिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और मतों के ध्रुवीकरण जैसे कई कारक परिणाम तय करते हैं। ऐसे में एआईएमआईएम का प्रदर्शन भले सीटों में न बदले, लेकिन कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसका प्रभाव चुनावी तस्वीर को प्रभावित कर सकता है।

    आने वाले महीनों में जैसे-जैसे चुनावी गतिविधियां तेज होंगी, विभिन्न दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देंगे। ऐसे माहौल में ओवैसी की सक्रियता और उनकी पार्टी की चुनावी योजना उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनावी मैदान में यह रणनीति वास्तविक जनसमर्थन में कितनी बदल पाती है और प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर इसका कितना असर पड़ता है।

  • किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    किशोर कुमार के बेटे से लेकर अपनी अलग पहचान तक, अमित कुमार ने सुरों से रचा सुनहरा इतिहास; जन्मदिन पर खास कहानी

    नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में अमित कुमार का नाम उन चुनिंदा गायकों में लिया जाता है, जिन्होंने पारिवारिक विरासत से आगे बढ़कर अपनी अलग पहचान बनाई। अपनी मधुर आवाज, सहज गायकी और भावपूर्ण प्रस्तुति के दम पर उन्होंने 1980 के दशक में एक ऐसी जगह बनाई, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच विशेष महत्व रखती है। 3 जुलाई 1952 को कोलकाता में जन्मे अमित कुमार का जीवन संगीत, अभिनय और रचनात्मकता से भरपूर रहा।

    अमित कुमार के पिता महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार तथा मां प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका रूमा गुहा ठाकुरता थीं। ऐसे संगीतपूर्ण वातावरण में पले-बढ़े अमित का रुझान बचपन से ही गायन और अभिनय की ओर था। कोलकाता में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुति को काफी सराहना मिली और उनकी प्रतिभा धीरे-धीरे फिल्म जगत का ध्यान आकर्षित करने लगी।

    फिल्मी दुनिया में उनका शुरुआती सफर अभिनय से शुरू हुआ। कम उम्र में उन्होंने अपने पिता के निर्देशन वाली फिल्म में अभिनय किया और इसके बाद बाल कलाकार के रूप में अपना पहला गीत भी रिकॉर्ड किया। हालांकि पार्श्वगायक के रूप में पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था। शुरुआती वर्षों में उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपनी गायकी को निखारने पर पूरा ध्यान दिया।

    उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें संगीतकार आरडी बर्मन के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उस समय वह बेहद घबराए हुए थे, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यही अवसर आगे चलकर उनके संगीत सफर की मजबूत नींव बना और उन्हें बड़े संगीतकारों के साथ काम करने का अवसर मिला।

    साल 1981 में एक लोकप्रिय फिल्म के गीत ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई। इसके बाद उनकी आवाज कई युवा अभिनेताओं की पहचान बन गई। रोमांटिक, भावनात्मक और ऊर्जावान गीतों में उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब पसंद किया। 1980 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीत गाकर खुद को उस दौर के सबसे लोकप्रिय पार्श्वगायकों में स्थापित कर लिया।

    उनके करियर का एक ऐतिहासिक क्षण वह भी रहा जब प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक की दौड़ में उनका मुकाबला अपने ही पिता किशोर कुमार से हुआ। पुरस्कार मिलने के बाद पिता और पुत्र का वह भावनात्मक पल भारतीय फिल्म संगीत के सबसे यादगार क्षणों में गिना जाता है। यह उपलब्धि अमित कुमार के स्वतंत्र और सफल करियर की बड़ी पहचान बन गई।

    पिता किशोर कुमार के निधन के बाद उन्होंने उनकी अधूरी फिल्म को पूरा करने की जिम्मेदारी निभाई। बाद में अपने मार्गदर्शक आरडी बर्मन के निधन के पश्चात उन्होंने धीरे-धीरे पार्श्वगायन से दूरी बनाई और स्वतंत्र संगीत, लाइव कॉन्सर्ट तथा अपने संगीत प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित किया। आज भी अमित कुमार की आवाज और उनके गीत भारतीय फिल्म संगीत की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि विरासत प्रेरणा दे सकती है, लेकिन स्थायी पहचान केवल प्रतिभा, मेहनत और समर्पण से ही बनती है।

  • कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में कारोबार को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए निष्पादन बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कोयला ब्लॉक आवंटियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करना और खनन परियोजनाओं के विकास की प्रक्रिया को गति देना है।

    नए प्रावधान के तहत कोयला ब्लॉक आवंटी अब अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी अनिवार्यता पूरी करने के लिए बैंक गारंटी या बीमा श्योरिटी बॉन्ड, दोनों में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकेंगे। यह सुविधा केवल नए आवंटियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहले से आवंटित कोयला ब्लॉकों पर भी लागू होगी। ऐसे आवंटी निर्धारित नियमों के अनुसार पहले से जमा बैंक गारंटी को बीमा श्योरिटी बॉन्ड से प्रतिस्थापित कर सकेंगे।

    सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े वित्तीय दबाव में कमी आएगी। अब कंपनियों को बड़ी राशि बैंक गारंटी के रूप में लंबे समय तक रोककर नहीं रखनी पड़ेगी। इससे उनके पास उपलब्ध पूंजी का उपयोग खदानों के विकास, आधारभूत ढांचे के निर्माण, मशीनरी की खरीद और परिचालन गतिविधियों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

    नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य निवेशकों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना भी है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड के विकल्प से कंपनियों के लिए पूंजी प्रबंधन आसान होगा और उन्हें अन्य वित्तीय आवश्यकताओं के लिए संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस व्यवस्था के बावजूद निष्पादन सुरक्षा से जुड़े सभी सरकारी हित पूरी तरह सुरक्षित बने रहेंगे।

    प्रारंभिक चरण में यह सुविधा उन कोयला ब्लॉकों के लिए लागू की जाएगी जिनका आवंटन खान एवं खनिज संबंधी प्रावधानों के तहत किया गया है। इसके बाद सरकार इस व्यवस्था का विस्तार अन्य संबंधित कानूनों के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों तक भी करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ताकि पूरे क्षेत्र में समान और आधुनिक वित्तीय ढांचा विकसित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार से कोयला क्षेत्र में निवेश का माहौल और बेहतर होगा। परियोजनाओं के समयबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा नई खदानों के संचालन में आने वाली वित्तीय बाधाएं कम होंगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।

    सरकार पिछले कुछ वर्षों से खनन क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भविष्य में कोयला क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी, आधुनिक और निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकेगा, जबकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी अपेक्षित गति आने की उम्मीद है।

  • विंबलडन 2026: नोवाक जोकोविच ने बनाई तीसरे राउंड में जगह, सिटसिपास को सीधे सेटों में हराया

    विंबलडन 2026: नोवाक जोकोविच ने बनाई तीसरे राउंड में जगह, सिटसिपास को सीधे सेटों में हराया


    नई दिल्ली । सात बार के विंबलडन चैंपियन नोवाक जोकोविच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गुरुवार को ग्रीस के स्टेफानोस सिटसिपास को सीधे सेटों में हराकर तीसरे दौर में जगह बना ली है। जोकोविच ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सिटसिपास को 6-3, 6-4, 6-2 से हराया।

    जोकोविच को सिटसिपास से पार पाने में सिर्फ 98 मिनट लगे और उन्होंने पूरे मुकाबले में शानदार खेल दिखाया। टूर्नामेंट के अपने पहले मैच में चार सेट तक मुकाबले में जीत दर्ज करने वाले जोकोविच इस मैच में पूरी तरह लय में नजर आए। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और सिटसिपास को ज्यादा मौके नहीं दिए। पहला सेट उन्होंने केवल 27 मिनट में 6-3 से अपने नाम किया।

    दूसरे सेट में सिटसिपास ने वापसी की कोशिश की। उन्होंने बेहतर सर्विस की और जोकोविच को कड़ी चुनौती दी। कुछ समय तक मुकाबला बराबरी का रहा, लेकिन अहम मौकों पर जोकोविच ने अपना अनुभव दिखाया। लंबे रैलियों में उन्होंने धैर्य बनाए रखा और सही समय पर ब्रेक हासिल कर सेट को 6-4 से जीत लिया।
    दूसरे सेट में सिटसिपास ने वापसी की कोशिश की। उन्होंने बेहतर सर्विस की और जोकोविच को कड़ी चुनौती दी। कुछ समय तक मुकाबला बराबरी का रहा, लेकिन अहम मौकों पर जोकोविच ने अपना अनुभव दिखाया। लंबे रैलियों में उन्होंने धैर्य बनाए रखा और सही समय पर ब्रेक हासिल कर सेट को 6-4 से जीत लिया।

    तीसरे सेट में जोकोविच पूरी तरह हावी रहे। उन्होंने 3-2 की बढ़त के बाद सिटसिपास की सर्विस तोड़ी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार शानदार शॉट्स लगाते हुए उन्होंने सेट को 6-2 से अपने नाम करते हुए शानदार जीत हासिल की। मैच के दौरान जोकोविच ने 33 विनर्स लगाए और सिर्फ सात अनफोर्स्ड एरर्स किए, जो उनके बेहतरीन खेल का सबूत रहे। इस जीत के साथ उन्होंने 20वीं बार विंबलडन के तीसरे दौर में जगह बनाई है।

    जोकोविच और सिटसिपास के बीच यह 14वीं भिड़ंत थी। इसमें जोकोविच ने 12वीं जीत दर्ज की। खास बात यह है कि सिटसिपास के खिलाफ जोकोविच ने पिछले 11 मुकाबलों में लगातार जीत हासिल की है। जीत के बाद जोकोविच ने कहा कि जब कोर्ट पर इस तरह का खेल निकलता है तो बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है।

    उन्होंने कहा कि एक बार लय मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। उन्होंने खास तौर पर उस गेम का जिक्र किया, जिसमें वह 5-2 से आगे थे। जोकोविच के मुताबिक, वह हाल के समय में उनके सबसे बेहतरीन रिटर्न गेम्स में से एक था। उन्होंने कहा कि उस समय वह पूरी तरह रिलेक्स थे और बिना किसी दबाव के अपने शॉट्स खेल रहे थे।

  • जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर

    जब गोविंदा की गिफ्ट की शर्ट को राजकुमार ने बना दिया रूमाल, बेबाक अंदाज का यह किस्सा आज भी फिल्मी दुनिया में है मशहूर


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राजकुमार केवल अपनी दमदार संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेबाक स्वभाव और अलग अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं। उनके व्यक्तित्व से जुड़े अनेक किस्से आज भी फिल्म जगत में चर्चा का विषय बने रहते हैं। इन्हीं चर्चित घटनाओं में अभिनेता गोविंदा द्वारा उपहार में दी गई शर्ट से जुड़ा एक किस्सा भी शामिल है, जिसे लोग आज भी बड़े दिलचस्प अंदाज में याद करते हैं।

    बताया जाता है कि फिल्म ‘जंगबाज’ की शूटिंग के दौरान गोविंदा ने सम्मान स्वरूप राजकुमार को एक आकर्षक शर्ट भेंट की थी। उन्हें उम्मीद थी कि वरिष्ठ अभिनेता इस उपहार को पहनेंगे। हालांकि कुछ समय बाद जब गोविंदा दोबारा सेट पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि वही शर्ट अब अपने मूल रूप में नहीं थी। राजकुमार ने उसे कटवाकर रूमाल बनवा लिया था। यह देखकर गोविंदा आश्चर्यचकित रह गए। यह घटना बाद में राजकुमार के अनोखे और बेपरवाह व्यक्तित्व का चर्चित उदाहरण बन गई।

    राजकुमार का जन्म 8 अक्टूबर 1926 को तत्कालीन बलूचिस्तान में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनका वास्तविक नाम कुलभूषण पंडित था। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मुंबई पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा दी। अपने कर्तव्यनिष्ठ और अनुशासित स्वभाव के कारण उनकी पहचान एक सख्त पुलिस अधिकारी के रूप में थी। हालांकि अभिनय के प्रति उनका झुकाव उन्हें अंततः फिल्मी दुनिया की ओर ले आया।

    फिल्मी सफर की शुरुआत एक संयोग से हुई। एक निर्माता से मुलाकात के बाद उन्हें अभिनय का अवसर मिला और उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर सिनेमा को अपना करियर बना लिया। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। धीरे-धीरे उनकी अभिनय क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की श्रेणी में स्थापित कर दिया।

    अपने लंबे करियर में उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी दमदार आवाज, संवाद बोलने की विशिष्ट शैली और स्क्रीन पर प्रभावशाली उपस्थिति उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई। यही कारण रहा कि उनके कई संवाद और अंदाज आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    राजकुमार को अपने अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले। उन्होंने गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के माध्यम से यह साबित किया कि मजबूत अभिनय किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हो सकता है। उनके योगदान को हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।

    जीवन के अंतिम वर्षों में वह गले के कैंसर से पीड़ित रहे, जिसका असर उनकी आवाज पर भी पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने अपनी गरिमा और आत्मविश्वास बनाए रखा। 3 जुलाई 1996 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्मों, संवादों और उनसे जुड़े अनोखे किस्सों के कारण वह आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार कलाकारों में गिने जाते हैं।

  • मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती

    मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती


    भोपाल । राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर पोषण प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 2,548 पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की जा रही हैं।

    स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता

    भर्ती में स्थानीय पात्रताधारियों को प्राथमिकता मिलेगी। कुल रिक्तियों में से 781 पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए और 1,767 पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन पदों पर चयन के लिए पारदर्शिता और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नियमों के मुताबिक, आवेदिका का उसी राजस्व ग्राम या शहरी वार्ड का निवासी होना अनिवार्य है, जहां का पद रिक्त है। किसी अन्य ग्राम या वार्ड की महिला इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी। इससे स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से मैदानी स्तर पर सेवाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित हो सकेगा।

    ऑनलाइन आवेदन केवल 13 जुलाई तक स्वीकार होंगे

    भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी। इसमें एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक महिला अभ्यर्थी चयन पोर्टल (https://chayan.mponline.gov.in) पर जाकर 1 जुलाई 2026 से अपने आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए फॉर्म में किसी भी प्रकार के त्रुटि सुधार के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया जाएगा। विभाग द्वारा स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी स्तर के कार्यालय में ऑफलाइन भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

    न्यूनतम योग्यता हायर सेकण्डरी, आयु सीमा 18-35 वर्ष तय

    शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मापदंडों के अनुसार, दोनों ही पदों के लिए आवेदिकाओं का हायर सेकेंडरी अर्थात 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य राज्यों या अशासकीय बोर्डों की अंकसूचियों को तभी मान्यता दी जाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल हों। साथ ही 1 जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है, जिसकी पुष्टि के लिए 10वीं बोर्ड की अंकसूची संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करने होंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क 100 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है।

    रिक्त पदों की जिलेवार स्थिति

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के अनुसार जिलेवार स्थिति इस प्रकार है। आलीराजपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा आंगनवाड़ी सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। इंदौर जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 43 पद रिक्त हैं। खंडवा जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। खरगोन जिले में कार्यकर्ता के 34 एवं सहायिका के 40 पद रिक्त हैं। झाबुआ जिले में कार्यकर्ता के 21 तथा सहायिका के 23 पद रिक्त हैं। धार जिले में कार्यकर्ता के 30 एवं सहायिका के 82 पद रिक्त हैं। बड़वानी जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 44 पद रिक्त हैं। बुरहानपुर जिले में कार्यकर्ता के 7 एवं सहायिका के 25 पद रिक्त हैं।

    आगर मालवा जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 6 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। उज्जैन जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 45 पद रिक्त हैं। देवास जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 35 पद रिक्त हैं। नीमच जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। मंदसौर जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। रतलाम जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 62 पद रिक्त हैं। शाजापुर जिले में कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 22 पद रिक्त हैं।

    अशोकनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 5 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। गुना जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। ग्वालियर जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 39 पद रिक्त हैं। दतिया जिले में कार्यकर्ता के 16 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। शिवपुरी जिले में कार्यकर्ता के 23 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं।

    भिंड जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। मुरैना जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 18 पद रिक्त हैं। श्योपुर जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं।

    कटनी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। छिंदवाड़ा जिले में कार्यकर्ता के 38 एवं सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। जबलपुर जिले में कार्यकर्ता के 12 तथा सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। डिंडौरी जिले में कार्यकर्ता के 14 एवं सहायिका के 42 पद रिक्त हैं। नरसिंहपुर जिले में कार्यकर्ता के 18 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। पांढुर्णा जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 10 पद रिक्त हैं। बालाघाट जिले में कार्यकर्ता के 24 तथा सहायिका के 51 पद रिक्त हैं। मंडला जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। सिवनी जिले में कार्यकर्ता के 20 तथा सहायिका के 48 पद रिक्त हैं।

    नर्मदापुरम जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 21 पद रिक्त हैं। बैतूल जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 71 पद रिक्त हैं। हरदा जिले में कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं।

    भोपाल जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। राजगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 70 पद रिक्त हैं। रायसेन जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 73 पद रिक्त हैं। सीहोर जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं।

    मैहर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 14 पद रिक्त हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता का कोई पद रिक्त नहीं है, जबकि सहायिका के 4 पद रिक्त हैं। रीवा जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 31 पद रिक्त हैं। सतना जिले में कार्यकर्ता के 11 एवं सहायिका के 30 पद रिक्त हैं। सिंगरौली जिले में कार्यकर्ता के 2 तथा सहायिका के 8 पद रिक्त हैं। सीधी जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 12 पद रिक्त हैं।

    अनूपपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 19 पद रिक्त हैं। उमरिया जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। शहडोल जिले में कार्यकर्ता के 11 तथा सहायिका के 27 पद रिक्त हैं।

    छतरपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। टीकमगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 15 एवं सहायिका के 11 पद रिक्त हैं। दमोह जिले में कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 41 पद रिक्त हैं। निवाड़ी जिले में कार्यकर्ता के 6 एवं सहायिका के 6 पद रिक्त हैं। पन्ना जिले में कार्यकर्ता के 4 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं। सागर जिले में कार्यकर्ता के 25 एवं सहायिका के 47 पद रिक्त हैं।