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  • रिश्ता टूटने के बाद सहमति से बने संबंध रेप नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर स्पष्ट किया कानून

    रिश्ता टूटने के बाद सहमति से बने संबंध रेप नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर स्पष्ट किया कानून

    नई दिल्ली ।लिव-इन रिलेशनशिप और शादी के वादे के आधार पर बने शारीरिक संबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दो बालिग व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध केवल इस वजह से दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आ सकते कि बाद में उनका रिश्ता टूट गया। हालांकि, यदि शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं था और झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाए गए, तो कानूनी स्थिति अलग होगी। ऐसे मामलों में आरोपी की शुरुआती मंशा और सहमति हासिल करने की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होंगी।

    यह टिप्पणी जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने शादी का झूठा वादा करके दुष्कर्म करने के आरोप से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने संबंधित मामले में आरोपी को आरोपों से मुक्त कर दिया। पीठ ने सुनवाई के दौरान सहमति से बने रिश्तों और उनके बाद समाप्त होने की परिस्थितियों के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट किया।

    अदालत के अनुसार, किसी रिश्ते का समाप्त हो जाना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि शुरुआत से ही शादी का वादा धोखे से किया गया था। दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बना संबंध यदि बाद में किसी कारण से समाप्त हो जाता है, तो उसे केवल इसी आधार पर आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह देखना आवश्यक है कि संबंध बनाते समय दोनों पक्षों की सहमति किन परिस्थितियों में बनी थी।

    पीठ ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें आपसी सहमति से बने रिश्ते के खत्म होने के बाद आपराधिक कानून का सहारा लिया जाता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि संबंध टूटने और शुरुआत से धोखाधड़ी करने के इरादे के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति का बाद में शादी करने से इनकार करना और शुरुआत से ही शादी का झूठा आश्वासन देना, दोनों परिस्थितियां कानूनी रूप से एक जैसी नहीं हैं।

    शादी के झूठे वादे से जुड़े मामलों में आरोपी की मंशा का आकलन संबंध की शुरुआत के समय से किया जाना चाहिए। यदि यह साबित होता है कि व्यक्ति ने शुरू से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था और केवल शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से झूठा वादा किया था, तो इसे सहमति से जुड़ा सामान्य मामला नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पहलू पर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा से रिश्ता समाप्त करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। यदि संबंध खत्म करने के डर से किसी व्यक्ति को उसे जारी रखने के लिए मजबूर महसूस करना पड़े, तो इससे उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होगी। अदालत के मुताबिक, किसी रिश्ते को जारी रखना या समाप्त करना व्यक्तिगत निर्णय का विषय है। केवल अलग होने के फैसले को धोखाधड़ी या दुष्कर्म का आधार नहीं बनाया जा सकता।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों की गंभीरता को भी रेखांकित किया। अदालत ने माना कि यौन हिंसा, दबाव या धोखे के माध्यम से सहमति प्राप्त करने के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी है। सामाजिक बदनामी और अन्य कारणों से कई महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से पीछे रह जाती हैं। इसलिए ऐसी शिकायतों को संवेदनशीलता और गंभीरता से देखना आवश्यक है।

    अदालत की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि सहमति से बने रिश्ते का टूटना और शुरुआत से शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाना अलग-अलग कानूनी परिस्थितियां हैं। किसी मामले में अपराध तय करने के लिए केवल रिश्ते के अंत को आधार नहीं बनाया जा सकता, बल्कि शुरुआत से आरोपी की मंशा, सहमति की प्रकृति और उपलब्ध तथ्यों की जांच जरूरी है।

  • बिछिया किसने दी? इसी सवाल पर भड़का पति, करवाचौथ के अगले दिन पत्नी की हत्या कर खुद पुलिस को बुलाया

    बिछिया किसने दी? इसी सवाल पर भड़का पति, करवाचौथ के अगले दिन पत्नी की हत्या कर खुद पुलिस को बुलाया


    ग्वालियर । ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में करवाचौथ के दिन एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। त्यागी नगर में रहने वाले आनंद श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी मधु श्रीवास्तव की हत्या कर दी। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे पत्नी के चरित्र पर शक था। करवाचौथ पर मधु को किसी ने बिछिया उपहार में दी थी। आनंद को संदेह था कि ये बिछिया उसके बड़े भाई ने दी हैं। इसी बात को लेकर पति पत्नी के बीच विवाद हुआ था। गुरुवार सुबह पत्नी के सिरहाने बिछिया देखकर उसका गुस्सा फिर भड़क गया। आरोप है कि इसके बाद उसने बिस्तर पर लेटी मधु के सिर और चेहरे पर मूसल से 17 बार वार किए। घटना के बाद आरोपी ने खुद पुलिस हेल्पलाइन 112 पर फोन कर हत्या की जानकारी दी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

    पुलिस के मुताबिक आनंद और मधु ने वर्ष 2010 में प्रेम विवाह किया था। दोनों के एक बेटा और एक बेटी हैं। परिवार में करवाचौथ की तैयारियां चल रही थीं। घटना से एक रात पहले मधु ने अपने पति के नाम की मेहंदी लगाई थी और देर रात तक जागती रही थी। सुबह उठने के बाद उसने घर की सफाई की। बेटे के अनुसार मां ने कहा था कि आज उसका उपवास है और काम करने से प्यास लगेगी इसलिए वह फिलहाल काम नहीं करेगी। इसके बाद आनंद ने पोहा बनाया और खुद खाने के साथ बेटे को भी खिलाया। कुछ समय बाद घर में हुई घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।

    बेटे ने पुलिस को बताया कि सुबह करीब 10 बजे घर में शोर सुनकर उसकी नींद खुली। बाहर पुलिसकर्मी मौजूद थे। जब वह कमरे में पहुंचा तो मां का शव कंबल से ढका हुआ था। बेटे ने बताया कि उसे जानकारी नहीं है कि रात या सुबह माता पिता के बीच कोई झगड़ा हुआ था या नहीं। घटना के बाद दोनों बच्चे गहरे सदमे में हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी इस घटना से टूट गए हैं।

    पुलिस पूछताछ में आनंद ने बिछिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उसके मुताबिक करवाचौथ की शाम मधु नई बिछिया लेकर आई थी। उसने पत्नी से कई बार पूछा कि बिछिया किसने दी हैं लेकिन मधु ने केवल इतना बताया कि किसी ने उपहार में दी हैं। आनंद को शक था कि ये बिछिया उसके बड़े भाई ने दी हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी को यह संदेह भी था कि पत्नी परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ मिलकर संपत्ति हड़पने की योजना बना रही है। उसे पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने पर भी शक था। हालांकि परिजनों ने बताया कि मधु के पास मोबाइल फोन तक नहीं था। इन आरोपों और संदेहों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    मधु की बेटी ने भी पिता के व्यवहार को लेकर गंभीर बातें बताई हैं। उसके मुताबिक पिता उसे पीटते थे और पढ़ाई करने से रोकते थे। इसी वजह से वह पिता के पास जाने से बचती थी और अपने ताऊ ताई के साथ रहती थी। घटना के बाद परिवार के दोनों बच्चे अपने बुजुर्ग दादा को संभालते दिखाई दिए। घर में पसरे मातम के बीच बच्चों को भी इस दुखद घटना का सामना करना पड़ रहा है।

    सिटी एसपी संदीप बांगरे के मुताबिक पुलिस को सुबह 112 पर कॉल मिला था। फोन करने वाले आनंद श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी की हत्या करने की जानकारी दी थी। सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया मूसल भी जब्त किया है। आरोपी ने पूछताछ में पत्नी के प्रति नफरत होने की बात कही और हत्या पर पछतावा नहीं होने का दावा किया।

    पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात भी सामने आई है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के जरिए मौत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस अब पारिवारिक विवाद और घटना की परिस्थितियों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।

  • पत्नी की मौत के बाद घर से निकला पति, सुबह पेड़ पर मिला शव, प्रेम विवाह करने वाले दंपती की मौत की जांच

    पत्नी की मौत के बाद घर से निकला पति, सुबह पेड़ पर मिला शव, प्रेम विवाह करने वाले दंपती की मौत की जांच


    भोपाल । भोपाल के बरखेड़ा बोंदर इलाके में करवा चौथ के बाद पति पत्नी की मौत का मामला सामने आया है। 22 वर्षीय शिवानी और उसके 26 वर्षीय पति सूरज अहिरवार की मौत से परिवार में मातम छा गया। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात पहले शिवानी का शव घर के बेडरूम में फंदे से लटका मिला। इसके कुछ घंटे बाद सूरज का शव घर से करीब 100 मीटर दूर एक पेड़ पर लटका हुआ मिला। दोनों ने वर्ष 2021 में प्रेम विवाह किया था। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक शिवानी ने करवा चौथ पर अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा था। रात में दोनों ने साथ बैठकर व्रत खोला और भोजन किया। इसके बाद सूरज रात करीब 11:30 बजे पत्नी को बिना बताए घर से बाहर चला गया। बताया जा रहा है कि शिवानी चाहती थी कि करवा चौथ के दिन उसका पति उसके साथ समय बिताए। सूरज के अचानक घर से चले जाने के कारण वह नाराज थी। हालांकि इस घटनाक्रम और दोनों की मौत के बीच संबंध को लेकर पुलिस जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार रात करीब 2:30 बजे सूरज घर लौटा तो बेडरूम का दरवाजा अंदर से बंद मिला। उसने कई बार आवाज लगाई लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर उसने एक छेद से कमरे के अंदर झांककर देखा। वहां शिवानी का शव फंदे से लटका हुआ था। पत्नी को इस हालत में देखकर सूरज ने घर में मौजूद अपनी दादी को जानकारी दी। इसके बाद परिजनों की मदद से कमरे का दरवाजा खोला गया और शिवानी को नीचे उतारा गया। घटना की सूचना मिलने पर परिवार के अन्य सदस्य और ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए।

    शिवानी की मौत के बाद सूरज भी किसी को कुछ बताए बिना घर से निकल गया। परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन तत्काल उसका पता नहीं चल सका। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे घर से लगभग 100 मीटर दूर एक पेड़ पर सूरज का शव फंदे से लटका मिला। एक ही रात में पति और पत्नी की मौत की खबर से परिवार के लोग सदमे में आ गए। पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद दोनों घटनाओं की जांच शुरू की गई।

    प्रारंभिक पूछताछ में परिजनों ने बताया कि शिवानी की मौत के बाद सूरज बेहद दुखी था। यह भी बताया गया कि घर से निकलते समय उसने कथित तौर पर शिवानी नहीं तो मैं भी नहीं जैसी बात कही थी। हालांकि पुलिस को दोनों के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। इसलिए मौत के पीछे की वास्तविक वजह और घटनाओं के बीच संबंध की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    जानकारी के मुताबिक सूरज गांव में खेती किसानी के साथ मजदूरी भी करता था। शिवानी और सूरज की शादी को करीब पांच साल हो चुके थे और उनकी कोई संतान नहीं थी। खबरों में यह भी बताया गया है कि संतान नहीं होने को लेकर शिवानी परेशान रहती थी। पुलिस इस पहलू समेत पारिवारिक परिस्थितियों और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।

    खजूरी थाना पुलिस ने दोनों मौतों के मामलों में मर्ग कायम किया है। पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। घटनास्थल की परिस्थितियों और सामने आए बयानों के आधार पर जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल दोनों की मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है और किसी एक वजह को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं माना गया है।

  • इजरायल चुनाव में नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा, गाजा और ईरान युद्ध के बीच विपक्ष ने बढ़ाई सत्ता की चुनौती..

    इजरायल चुनाव में नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा, गाजा और ईरान युद्ध के बीच विपक्ष ने बढ़ाई सत्ता की चुनौती..

    नई दिल्ली ।इजरायल में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान कराया गया। इस चुनाव को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2023 में हमास के हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए सैन्य अभियान के साथ ईरान के साथ संघर्ष को संभालने के तरीके को लेकर नेतन्याहू की सरकार की आलोचना होती रही है। ऐसे में चुनाव के परिणाम देश की राजनीति और आने वाली सरकार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    इस चुनाव में करीब 73 लाख मतदाता मतदान के पात्र थे। नेतन्याहू के सामने पूर्व सैन्य प्रमुख और मध्यमार्गी नेता गादी आइजेनकोट प्रमुख चुनौती के रूप में मैदान में हैं। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट भी उनके राजनीतिक गठबंधन को चुनौती दे रहे हैं। चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षणों में दोनों पक्षों के बीच कड़ी टक्कर के संकेत मिले थे। हालांकि, इजरायल की गठबंधन आधारित राजनीतिक व्यवस्था के कारण किसी एक दल या गठबंधन के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

    77 वर्षीय बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। उनके समर्थक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के मुद्दों पर उनके नेतृत्व को महत्वपूर्ण मानते हैं। वहीं, आलोचक 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले को रोकने में हुई विफलताओं, युद्ध से जुड़े फैसलों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उनकी सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं। चुनाव में इन मुद्दों का असर राजनीतिक दलों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

    गादी आइजेनकोट इजरायल डिफेंस फोर्सेज के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। वह याशर पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और खुद को नेतन्याहू के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट भी विपक्षी खेमे में सक्रिय हैं। उनके नेतृत्व वाले बी’याचद गठबंधन में पूर्व प्रधानमंत्री यायर लैपिड की येश अतीद पार्टी भी शामिल है। इस तरह नेतन्याहू के सामने अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं का संयुक्त मुकाबला है।

    चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के समर्थन में बयान दिया था। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू ने कठिन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के रूप में अच्छा काम किया है। नेतन्याहू ने भी अमेरिका और इजरायल के संबंधों को लेकर ट्रंप की प्रशंसा की थी। उन्होंने दोनों देशों के नेताओं के बीच असाधारण मित्रता होने की बात कही। चुनाव के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति का यह समर्थन भी राजनीतिक चर्चा का विषय रहा।

    इजरायल में संसदीय चुनाव की प्रक्रिया भारत से अलग है। यहां आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर मतदान होता है। पूरे देश को एक ही चुनाव क्षेत्र माना जाता है। मतदाता किसी व्यक्तिगत उम्मीदवार के बजाय राजनीतिक दल की सूची के पक्ष में वोट डालते हैं। इसी प्रक्रिया के जरिए संसद यानी नेसेट के 120 सदस्यों का चयन किया जाता है।

    संसद में प्रतिनिधित्व हासिल करने के लिए किसी राजनीतिक दल को कम से कम 3.25 प्रतिशत वैध मत प्राप्त करना जरूरी है। इस व्यवस्था के कारण कई छोटे दल भी चुनाव में हिस्सा लेते हैं और संसद में उनकी मौजूदगी सरकार गठन के दौरान महत्वपूर्ण हो सकती है।

    इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाला दल अपने आप सरकार नहीं बना सकता। चुनाव के बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करते हैं और उस सांसद को सरकार बनाने का अवसर देते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की संभावना होती है।

    इसके बाद राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन बनाने को लेकर बातचीत होती है। यदि कोई दल या गठबंधन 61 सांसदों का समर्थन हासिल नहीं कर पाता, तो सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। ऐसी स्थिति में छोटे दलों और गठबंधन सहयोगियों की भूमिका निर्णायक बन जाती है।

    इस चुनाव के परिणामों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी। नई सरकार की संरचना का असर इजरायल की सुरक्षा नीति, गाजा और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्षों तथा अमेरिका सहित अन्य देशों के साथ उसके संबंधों पर पड़ सकता है। अंतिम राजनीतिक तस्वीर मतदान के परिणाम और उसके बाद होने वाली गठबंधन वार्ताओं से स्पष्ट होगी।

  • आर्मेनिया की संसद में बहस के दौरान भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसद, लात-घूंसे चले और कुर्सियां तक फेंकी गईं

    आर्मेनिया की संसद में बहस के दौरान भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसद, लात-घूंसे चले और कुर्सियां तक फेंकी गईं

    नई दिल्ली ।आर्मेनिया की संसद में 29 अक्टूबर को एक बहस के दौरान ऐसा हंगामा हुआ कि सदन की कार्यवाही हिंसक झड़प में बदल गई। सत्ताधारी सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी और विपक्षी स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया गुट के सांसदों के बीच पहले तीखी बहस हुई और फिर मामला हाथापाई तक पहुंच गया। सदन के भीतर सांसद एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाते और धक्का-मुक्की करते नजर आए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि संसद का मुख्य हॉल ही नहीं, बल्कि गलियारा भी झगड़े का मैदान बन गया। इस पूरी घटना का सीधा प्रसारण हो रहा था, जिसके कारण देशभर के लोगों ने सांसदों के बीच हुई मारपीट के दृश्य देखे।

    बताया गया कि विवाद की शुरुआत ऑडिट चैंबर के एक सदस्य की नियुक्ति को लेकर हो रही चर्चा के दौरान हुई। उस समय सत्ताधारी दल के सांसद तारोन चाखोयान अपनी बात रख रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्षी नेता नारेक करापेत्यान के एक रिश्तेदार से जुड़ी पुरानी विवादित टिप्पणी का उल्लेख किया। चाखोयान के अनुसार, करापेत्यान के चचेरे भाई ने पहले विपक्ष के सत्ता में आने की स्थिति में महिलाओं को संतुष्ट करने के लिए अलग मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति ने इस बयान के लिए अब तक माफी नहीं मांगी है।

    चाखोयान की इस टिप्पणी पर नारेक करापेत्यान ने अपनी सीट से ही विरोध जताना शुरू कर दिया। उन्होंने बयान को आपत्तिजनक बताया। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज हो गई। इसके बाद करापेत्यान अपनी सीट से उठकर मंच की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद भी अपनी जगह से उठकर एक-दूसरे की तरफ बढ़े और देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई।

    शुरुआत में सांसदों के बीच धक्का-मुक्की हुई, लेकिन जल्द ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। दोनों पक्षों के सदस्य एक-दूसरे को पकड़कर नीचे गिराने लगे। इस दौरान लात और घूंसे भी चले। संसद के उपाध्यक्ष वहागन अलेक्सान्यान को भी विपक्षी सांसदों की तरफ कुर्सी फेंकते हुए देखा गया। घटनास्थल के वीडियो में कई सांसदों को कुर्सियां उठाते और एक-दूसरे पर हमला करते देखा जा सकता है।

    सदन के भीतर शुरू हुआ विवाद कुछ समय बाद संसद भवन के गलियारे तक पहुंच गया। वहां भी दोनों पक्षों के सांसदों के बीच धक्का-मुक्की और कहासुनी जारी रही। सुरक्षाकर्मियों तथा अन्य सदस्यों ने कई बार हस्तक्षेप कर दोनों गुटों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ। इस दौरान कुछ सांसदों के कपड़े फट गए और कई लोगों को चोटें आईं।

    घटना के बाद संसद भवन में एम्बुलेंस बुलाई गई। विपक्षी गुट स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया के सांसद एंड्रानिक गेवोरग्यान की नाक से खून बहता दिखाई दिया, जबकि उनके साथी सांसद रूबेन मखितारयान के कपड़े फटे हुए थे। अन्य कुछ सांसदों को भी मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई। दोबारा टकराव की आशंका को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने संसद के गलियारे में दोनों पक्षों के बीच अवरोध लगाया, ताकि सदस्य फिर आमने-सामने न आ सकें।

    संसद के स्पीकर रूबेन रुबिनयान ने घटना के बाद नारेक करापेत्यान को झड़प के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ब्रेक के दौरान हुई बातचीत का वीडियो देखा था और उनके अनुसार तारोन चाखोयान के भाषण में ऐसी कोई बात नहीं थी, जिसे आपत्तिजनक माना जाए। स्पीकर ने आरोप लगाया कि करापेत्यान ने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रखा और सीट से विरोध जताने के बाद उठकर चाखोयान पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी सांसद गार्निक दावत्यान ने भी चाखोयान पर हमला किया था।

    रुबिनयान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जानबूझकर संसद की लाइव स्ट्रीमिंग बंद नहीं कराई, ताकि आम लोग सदन के भीतर चल रही घटनाओं को देख सकें। इससे पहले अक्टूबर महीने में भी सिविल कॉन्ट्रैक्ट और विपक्षी सांसदों के बीच विवाद हो चुका था। उस समय स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया के सांसद एडगर गाजरियन ने स्पीकर पर सांसदों को बोनस देने के लिए सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उस मामले में भी दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और तनाव देखने को मिला था।

  • रामायण के बाद महाभारत बनाएंगे नमित मल्होत्रा? एसएस राजामौली के साथ काम करने के सवाल पर दिया दिलचस्प जवाब

    रामायण के बाद महाभारत बनाएंगे नमित मल्होत्रा? एसएस राजामौली के साथ काम करने के सवाल पर दिया दिलचस्प जवाब

    नई दिल्ली । फिल्म ‘रामायण’ के निर्माता नमित मल्होत्रा से एक बार फिर भारतीय महाकाव्य ‘महाभारत’ को बड़े पर्दे पर बनाने को लेकर सवाल पूछा गया है। अमेरिका के लॉस एंजेलिस में आयोजित ‘रामायण’ के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान एक समीक्षक ने उनसे पूछा कि क्या वह एसएस राजामौली के साथ मिलकर ‘महाभारत’ बनाने की योजना बना रहे हैं। इस सवाल पर नमित पहले मुस्कुराए और फिर उन्होंने राजामौली की तारीफ करते हुए भारतीय सिनेमा की सफलता की कामना की। उनका जवाब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

    लॉस एंजेलिस स्थित एकेडमी म्यूजियम ऑफ मोशन पिक्चर्स में ‘रामायण’ का वर्ल्ड प्रीमियर आयोजित किया गया। इस अवसर पर फिल्म की अंग्रेजी डबिंग प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम में निर्माता नमित मल्होत्रा भी मौजूद थे। इसी दौरान उनसे भारतीय सिनेमा की एक और बड़ी पौराणिक परियोजना ‘महाभारत’ को लेकर सवाल किया गया। समीक्षक ने विशेष रूप से एसएस राजामौली के साथ इस महागाथा पर काम करने की संभावना के बारे में पूछा।

    सवाल सुनकर नमित मल्होत्रा पहले हंस पड़े। इसके बाद उन्होंने कहा कि एसएस राजामौली एक महान निर्देशक हैं और वह उनके लिए बहुत सफलता की कामना करते हैं। जब उनसे राजामौली के साथ काम करने की बात कही गई, तो उन्होंने जवाब दिया कि अब समय आ गया है कि पूरा भारतीय सिनेमा सफल हो। नमित के इस बयान को भारतीय फिल्म उद्योग की व्यापक सफलता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने ‘महाभारत’ बनाने की किसी योजना या राजामौली के साथ संभावित सहयोग की आधिकारिक घोषणा नहीं की।

    नमित के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने उनसे ‘रामायण’ के बाद ‘महाभारत’ पर भी फिल्म बनाने की अपील की। कुछ लोगों ने कहा कि भारतीय दर्शक लंबे समय से इस तरह की भव्य पौराणिक फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, कुछ यूजर्स का मानना था कि एसएस राजामौली अपनी टीम के साथ अलग से ‘महाभारत’ बनाने की योजना पर काम कर सकते हैं। हालांकि, ये प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया यूजर्स की व्यक्तिगत राय हैं और इनसे किसी फिल्म की आधिकारिक योजना की पुष्टि नहीं होती।

    इस बीच ‘रामायण’ को लेकर भी दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म में कई जाने-माने कलाकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीशियन जुड़े हैं। अभिनेता अनुपम खेर इस फिल्म में जटायु के किरदार को अपनी आवाज देंगे। उन्होंने भी फिल्म के अंतरराष्ट्रीय प्रीमियर पर खुशी जताई है और इसे भारतीय कहानी को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया है।

    अनुपम खेर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए संदेश में कहा कि भारत की महान कहानी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दुनिया की बेहतरीन फिल्मों के स्तर पर प्रस्तुत होते देखना गर्व की बात है। उन्होंने निर्माता नमित मल्होत्रा, निर्देशक नितेश तिवारी, संगीतकार हंस जिमर और एआर रहमान के साथ पूरी कलाकार एवं तकनीकी टीम की सराहना की। उनके मुताबिक, इस बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अनेक लोगों ने मेहनत और अपनी प्रतिभा का योगदान दिया है।

    ‘रामायण’ के वर्ल्ड प्रीमियर और नमित मल्होत्रा के बयान के बाद अब दर्शकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि भविष्य में भारतीय महाकाव्यों पर और कौन-सी बड़ी फिल्में बनाई जा सकती हैं। फिलहाल नमित ने ‘महाभारत’ को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं की है। उनका जवाब भारतीय सिनेमा की सामूहिक प्रगति की उम्मीद तक ही सीमित रहा।

  • रकुल प्रीत सिंह बोलीं- रामायण में शूर्पणखा का किरदार बेहद जटिल, उसकी वजह से ही शुरू हुआ था युद्ध

    रकुल प्रीत सिंह बोलीं- रामायण में शूर्पणखा का किरदार बेहद जटिल, उसकी वजह से ही शुरू हुआ था युद्ध

    नई दिल्ली । फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। फिल्म का पहला ट्रेलर सामने आने के बाद इसमें नजर आने वाले प्रमुख कलाकारों के लुक की काफी चर्चा हुई। रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। हालांकि, ट्रेलर में अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह की शूर्पणखा के रूप में झलक ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। अब रकुल ने इस किरदार को निभाने के अपने अनुभव और इसके महत्व को लेकर विचार साझा किए हैं।

    रकुल प्रीत सिंह ने शूर्पणखा की भूमिका को अपने लिए बेहद दिलचस्प बताया। उनका कहना है कि इस किरदार को लेकर लोगों के बीच कई गलतफहमियां हैं और इसकी कहानी में कई अलग-अलग पहलू मौजूद हैं। अभिनेत्री के मुताबिक, शूर्पणखा को अक्सर एक सीमित घटना के संदर्भ में याद किया जाता है, जबकि उसके चरित्र को समझने के लिए उसके दूसरे पक्षों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    रकुल ने बताया कि इस भूमिका को स्वीकार करने के पीछे इसकी जटिलता एक बड़ी वजह रही। उनके अनुसार, शूर्पणखा की वजह से ही रामायण में युद्ध की शुरुआत हुई थी। ऐसे किरदार को पर्दे पर निभाना उनके लिए रोमांचक अनुभव रहा, जिसमें कई तरह के भाव और व्यक्तित्व के अलग-अलग रंग दिखाने का अवसर मिलता है।

    अभिनेत्री ने फिल्म को भारत की कहानी और इतिहास को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाला एक बड़ा माध्यम भी बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की फिल्म के जरिए भारतीय संस्कृति और इतिहास को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। रकुल के मुताबिक, ‘रामायण’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय महाकाव्य को बड़े स्तर पर दुनिया के सामने पेश करने का प्रयास है।

    इससे पहले रकुल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक प्रशंसक के पत्र को साझा करते हुए भी शूर्पणखा के किरदार पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि इस भूमिका के लिए हामी भरने की एक वजह यह थी कि यह चरित्र काफी जटिल है। इतिहास में शूर्पणखा को अक्सर केवल एक घटना के जरिए याद किया गया है, जबकि उसकी कहानी में इससे कहीं अधिक कुछ है।

    रकुल ने यह भी उम्मीद जताई कि फिल्म रिलीज होने के बाद दर्शक शूर्पणखा के चरित्र को खुले दिमाग से समझने की कोशिश करेंगे। उनके अनुसार, एक कलाकार के तौर पर ऐसे किरदार अधिक आकर्षित करते हैं, जो दर्शकों की पहले से बनी धारणाओं को चुनौती देते हैं। शूर्पणखा की भूमिका भी इसी तरह की है, क्योंकि इसके कई पक्ष हैं और इसे एक अलग नजरिये से प्रस्तुत करने की गुंजाइश मौजूद है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म को दो भागों में तैयार किया जा रहा है। इसे हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज करने की योजना है। दर्शक इसे आईमैक्स फॉर्मेट में भी देख सकेंगे।

    फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 के दौरान दर्शकों के सामने आएगा। फिल्म में प्रमुख पात्रों की भूमिका निभा रहे कलाकारों के लुक और कहानी को बड़े स्तर पर प्रस्तुत किए जाने को लेकर पहले से ही चर्चा जारी है। ऐसे में शूर्पणखा के किरदार को लेकर रकुल के बयान ने फिल्म के इस अहम पात्र के प्रति दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है।

  • नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नंबर-3 से नंबर-5 पर आते ही बदला तिलक वर्मा का अंदाज, अब पहली गेंद से बाउंड्री लगाने की रहती है कोशिश

    नई दिल्ली । भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव के साथ अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। पहले तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले तिलक अब पांचवें या छठे नंबर पर उतर रहे हैं। इस नई भूमिका में उनका लक्ष्य शुरुआत से ही तेजी से रन बनाना है। हालांकि, वह परिस्थितियों को समझकर ही आक्रामक शॉट खेलने का फैसला करते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 मुकाबले से पहले उन्होंने अपने बदले हुए बल्लेबाजी अंदाज और रन चेज के दौरान अपनाई जाने वाली रणनीति के बारे में बताया।

    तिलक के मुताबिक, उनके पास पहले से ही बड़े शॉट खेलने की क्षमता थी और उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए भी खूब रन बनाए हैं। लेकिन अब पांचवें या छठे नंबर पर आने के बाद उनकी सोच में थोड़ा बदलाव आया है। इस क्रम पर बल्लेबाजी करते हुए वह पहली ही गेंद से बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते हैं। हालांकि, इसके लिए गेंद का उनके अनुकूल होना जरूरी है। यदि पहली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने का सही अवसर नहीं मिलता, तो वह जल्दबाजी करने के बजाय पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान देते हैं।

    तिलक ने बताया कि ऐसी स्थिति में वह शुरुआत में सिंगल और डबल लेकर स्कोर आगे बढ़ाते हैं। साथ ही मैदान में खाली जगह तलाशकर चौके लगाने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते समय केवल आक्रामक होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैच की परिस्थिति के अनुसार जोखिम लेना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर वह क्रीज पर समय बिताते हैं और मुकाबले को अंतिम ओवरों तक ले जाने की कोशिश करते हैं।
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    तिलक की यह रणनीति न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में देखने को मिली थी। क्राइस्टचर्च में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम 181 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी। ऐसे समय में तिलक ने नीतीश रेड्डी के साथ मिलकर पारी को संभाला। उन्होंने 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए और टीम को चार विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच सातवें विकेट के लिए 69 रन की नाबाद साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को उस मुकाबले में जीत तक पहुंचाया।

    तिलक ने बताया कि उस समय उन्होंने नीतीश रेड्डी से कहा था कि अगर दोनों बल्लेबाज मिलकर यहां से मैच जिता देते हैं तो यह बेहद खास होगा। उन्होंने साथी खिलाड़ी को क्रीज पर टिके रहने, मुकाबले को आगे तक ले जाने और फिर परिस्थितियों के अनुसार खेलने की सलाह दी थी। तिलक के अनुसार, रन चेज में धैर्य बनाए रखना और सही समय पर तेजी से रन बनाना काफी महत्वपूर्ण होता है।

    आखिरी ओवरों में गेंदबाजों पर दबाव बनाने को लेकर भी तिलक की सोच स्पष्ट है। उनका मानना है कि डेथ ओवर्स में बल्लेबाज के मुकाबले गेंदबाज अधिक दबाव में होता है। वह इसी सकारात्मक सोच के साथ बल्लेबाजी करते हैं कि गेंदबाज पर दबाव होने के कारण उससे रन देने की गलती हो सकती है। इस मानसिकता से उन्हें मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते समय आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद मिलती है।

    न्यूजीलैंड दौरे पर पहुंचने से पहले भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज खेली थी। लगातार व्यस्त कार्यक्रम के कारण नए माहौल और समय क्षेत्र के अनुसार खुद को ढालना आसान नहीं था। तिलक ने माना कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली टीम इस वजह से बहाने नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन से युवा क्रिकेटरों के लिए उदाहरण पेश करना चाहिए। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी टीम बैठकों में स्पष्ट किया है कि टी20 टीम का प्रदर्शन पूरे दौरे के लिए अच्छा माहौल तैयार कर सकता है।

    भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। अब टीम की नजर बाकी दोनों मैच जीतकर सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप करने पर है। तिलक ने इसे भारतीय टीम और दर्शकों के लिए अच्छा अवसर बताया। चौथा टी20 मुकाबला 30 अक्टूबर को ऑकलैंड में खेला जाना है।

  • IPL 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़ा फेरबदल, लसिथ मलिंगा समेत तीन दिग्गज कोचों की हुई विदाई

    IPL 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़ा फेरबदल, लसिथ मलिंगा समेत तीन दिग्गज कोचों की हुई विदाई

    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 से पहले पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस ने अपने कोचिंग स्टाफ में बड़ा बदलाव किया है। फ्रेंचाइजी ने श्रीलंका के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा, पारस म्हाम्ब्रे और फील्डिंग कोच कार्ल हॉपकिंसन के साथ अपना नाता खत्म कर लिया है। इन तीनों कोचों की विदाई के साथ टीम के सपोर्ट स्टाफ में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहा है। मुंबई इंडियंस ने तीनों के योगदान और लंबे समय तक टीम के साथ उनके जुड़ाव की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

    इस फैसले को आईपीएल के आगामी सीजन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुंबई इंडियंस पिछले कुछ समय से अपने कोचिंग ढांचे में बदलाव कर रही है। इससे पहले टीम ने मुख्य कोच महेला जयवर्धने की जगह वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान कीरोन पोलार्ड को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। अब गेंदबाजी और फील्डिंग विभाग से जुड़े तीन अनुभवी कोचों के जाने से टीम के कोचिंग सेटअप में नए चेहरों के लिए रास्ता खुल गया है।

    लसिथ मलिंगा का मुंबई इंडियंस के साथ काफी पुराना और सफल रिश्ता रहा है। वह फ्रेंचाइजी के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने मुंबई की गेंदबाजी को मजबूती देने के साथ कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी तेज गति, सटीक यॉर्कर और डेथ ओवरों में गेंदबाजी करने की क्षमता टीम की सबसे बड़ी ताकतों में गिनी जाती रही है। मलिंगा मुंबई इंडियंस की चार आईपीएल खिताबी जीत का हिस्सा रहे। इसके अलावा 2011 में चैंपियंस लीग टी20 का खिताब जीतने वाली टीम में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

    खिलाड़ी के रूप में अपना सफर समाप्त करने के बाद मलिंगा ने मुंबई इंडियंस के साथ मेंटर और कोच की भूमिका में भी काम किया। वर्ष 2018 में वह टीम के मेंटर बने और बाद में गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी संभाली। उनके अनुभव का फायदा टीम के गेंदबाजों को मिलता रहा। फ्रेंचाइजी के साथ उनका जुड़ाव एक दशक से अधिक समय तक बना रहा।

    पारस म्हाम्ब्रे का भी मुंबई इंडियंस के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। उन्होंने पहली बार 2010 से 2017 तक टीम के कोचिंग सेटअप में काम किया था। इसके बाद वर्ष 2024 में वह दोबारा फ्रेंचाइजी से जुड़े। गेंदबाजी प्रतिभाओं को निखारने और युवा खिलाड़ियों को बेहतर बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। भारतीय क्रिकेट में भी वह कोच के रूप में काम कर चुके हैं। उनके अनुभव और टीम की कार्यप्रणाली की समझ को मुंबई इंडियंस के लिए उपयोगी माना जाता रहा है।

    वहीं, कार्ल हॉपकिंसन आईपीएल 2025 से पहले मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ में शामिल हुए थे। उन्हें टीम के फील्डिंग विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले वह इंग्लैंड की पुरुष क्रिकेट टीम के साथ भी काम कर चुके थे। उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों की फील्डिंग सुधारने का अनुभव था। मुंबई इंडियंस ने उनके पेशेवर रवैये और फील्डिंग के स्तर को बेहतर बनाने में दिए गए योगदान की सराहना की है।

    तीनों कोचों की विदाई के बाद अब मुंबई इंडियंस का ध्यान आईपीएल 2027 के लिए नई रणनीति और मजबूत कोचिंग टीम तैयार करने पर होगा। आगामी सीजन में टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है, यह काफी हद तक नए कोचिंग ढांचे और खिलाड़ियों के तालमेल पर निर्भर करेगा।

    इसके बाद 30 अक्टूबर को मुंबई इंडियंस ने नए कोचिंग स्टाफ की भी घोषणा की। कीरोन पोलार्ड मुख्य कोच की भूमिका में बने रहेंगे। रॉबिन उथप्पा को बल्लेबाजी कोच, मिचेल मैक्लेनाघन को गेंदबाजी कोच, टी. दिलीप को फील्डिंग कोच और धवल कुलकर्णी को डेवलपमेंट बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया है। नई टीम के साथ फ्रेंचाइजी आगामी आईपीएल सीजन में बेहतर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।

  • हैलोवीन पर ओरी का खौफनाक अवतार, 'तुम्बाड' के हस्तर बनकर पहुंचे, लाल रंग और डरावने मेकअप से मचाई हलचल

    हैलोवीन पर ओरी का खौफनाक अवतार, 'तुम्बाड' के हस्तर बनकर पहुंचे, लाल रंग और डरावने मेकअप से मचाई हलचल

    नई दिल्ली । हैलोवीन के मौके पर बॉलीवुड की दुनिया में अपने अलग अंदाज और फैशन के लिए पहचाने जाने वाले ओरहान अवात्रामणि उर्फ ओरी ने इस बार ऐसा रूप धारण किया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए। आमतौर पर स्टाइलिश कपड़ों और अनोखे फैशन सेंस के लिए चर्चा में रहने वाले ओरी ने हैलोवीन पार्टी के लिए भारतीय हॉरर फिल्म ‘तुम्बाड’ के खौफनाक किरदार हस्तर को चुना। उनका यह रूप इतना अलग और डरावना था कि कैमरे के सामने आते ही वहां मौजूद लोगों और फोटोग्राफरों का ध्यान उनकी ओर चला गया।

    ओरी ने अपने इस लुक को तैयार करने में काफी बारीकी दिखाई। उन्होंने हस्तर के मूल किरदार की पहचान से जुड़ी कई विशेषताओं को अपने पहनावे और मेकअप में शामिल किया। उनके पूरे शरीर पर लाल रंग का लेप लगाया गया था। चेहरे पर डरावना मेकअप किया गया और आंखों के आसपास काला घेरा बनाया गया था। इसके साथ सिर पर प्राचीन शैली का मुकुट पहनकर उन्होंने फिल्म के रहस्यमयी किरदार जैसा रूप तैयार किया।

    उनके पहनावे में भी हस्तर के लुक की झलक साफ दिखाई दी। ओरी ने कमर पर पुराना और फटा हुआ भूरे रंग का कपड़ा लपेट रखा था। उनके हाथों और पैरों की उंगलियों को लंबा और नुकीला दिखाया गया था, जिससे उनका पूरा गेटअप और ज्यादा डरावना नजर आ रहा था। इसके अलावा उन्होंने बाजुओं में बाजूबंद और पैरों में कड़े पहने हुए थे। इन सभी चीजों ने उनके हैलोवीन लुक को फिल्म के किरदार के काफी करीब बना दिया।

    ओरी के इस पूरे गेटअप में एक दिलचस्प चीज उनका मोबाइल फोन भी रहा। जहां उनका पहनावा और मेकअप पूरी तरह डरावने अंदाज में तैयार किया गया था, वहीं हाथ में पकड़ा मोबाइल फोन और उसका कवर इस रूप के बीच बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा था। इस छोटे से अंतर ने उनके लुक को एक अलग अंदाज दिया। उनका यह प्रयोग पारंपरिक डरावने गेटअप से कुछ अलग नजर आया।

    जब ओरी इस रूप में अपने घर के बाहर कैमरों के सामने पहुंचे, तो वहां मौजूद लोग और पैपराजी उन्हें देखकर चौंक गए। उनकी तस्वीरों में लाल रंग से रंगा शरीर, काली आंखें, मुकुट और नुकीली उंगलियां खास तौर पर दिखाई दीं। उनके इस अवतार को देखकर फिल्म ‘तुम्बाड’ के हस्तर किरदार की याद ताजा हो गई। ओरी ने किसी विदेशी भूत या लोकप्रिय हॉरर किरदार के बजाय भारतीय सिनेमा के एक चर्चित पात्र को अपने हैलोवीन लुक के लिए चुना।

    फिल्म ‘तुम्बाड’ में हस्तर एक रहस्यमयी और भयावह किरदार के रूप में दिखाया गया है। फिल्म की कहानी और उसके डरावने वातावरण के कारण यह पात्र दर्शकों के बीच खास पहचान रखता है। ओरी ने इसी किरदार की शारीरिक बनावट और पहनावे से प्रेरणा लेकर अपना रूप तैयार किया। उनके गेटअप में इस्तेमाल किए गए लाल रंग, प्राचीन मुकुट और खास मेकअप ने इस किरदार की पहचान को उभारने का काम किया।

    हैलोवीन पर हर साल लोग अलग-अलग डरावने और रचनात्मक परिधानों में नजर आते हैं। इस बार ओरी ने भारतीय फिल्म के चर्चित हॉरर पात्र को चुनकर अपने अंदाज में इस त्योहार को खास बनाया। उनका यह लुक उनके सामान्य फैशन अंदाज से बिल्कुल अलग रहा और इसी वजह से उनकी तस्वीरों ने लोगों का ध्यान खींचा।