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  • केरल के अनोखे मंदिर में साल के 364 दिन पानी में डूबा रहता है शिवलिंग, महाशिवरात्रि पर खुलते हैं दर्शन के द्वार..

    केरल के अनोखे मंदिर में साल के 364 दिन पानी में डूबा रहता है शिवलिंग, महाशिवरात्रि पर खुलते हैं दर्शन के द्वार..


    नई दिल्ली ।
    भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं और विशेष मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच अलग पहचान रखते हैं। केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित श्री अर्धनारीश्वर मंदिर भी ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है। इस मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित शिवलिंग है, जो साल के 364 दिन पानी में डूबा रहता है। श्रद्धालुओं को भगवान शिव के दर्शन करने का विशेष अवसर साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि के दिन मिलता है। इस दिन मंदिर परिसर से पानी निकाला जाता है और इसके बाद शिवलिंग के दर्शन कराए जाते हैं।

    यह अनोखा मंदिर केरल के मलप्पुरम जिले के अरक्कुपरम्बा क्षेत्र में स्थित है। पेरिनथलमन्ना से इसकी दूरी लगभग 17 किलोमीटर है। मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप अर्धनारीश्वर की पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर परिसर में पानी से घिरा रास्ता भी इसकी विशेष पहचान है। वर्ष के अधिकांश समय शिवलिंग पानी के भीतर रहने के कारण यहां की धार्मिक परंपरा अन्य मंदिरों से अलग मानी जाती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर पानी हटाए जाने के बाद भक्तों को शिवलिंग के प्रत्यक्ष दर्शन करने का अवसर मिलता है।

    इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और विवाह संबंधी परेशानियों से मुक्ति की कामना के लिए की जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और दांपत्य जीवन में प्रेम तथा आपसी समझ बढ़ती है। मंदिर में होने वाले प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में उमा महेश्वर पूजा शामिल है। इस पूजा के दौरान भक्त भगवान शिव और माता पार्वती से वैवाहिक जीवन में खुशहाली और परिवार में शांति बनाए रखने का आशीर्वाद मांगते हैं।

    इसके अलावा मंदिर में पट्टुम थालियुम समरप्पणम नामक विशेष अनुष्ठान भी आयोजित किया जाता है। इसमें श्रद्धालु सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। इस परंपरा के कारण मंदिर उन लोगों के लिए भी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जो विवाह संबंधी समस्याओं के समाधान और दांपत्य जीवन में खुशहाली की प्रार्थना लेकर यहां पहुंचते हैं।

    मंदिर में पूरे वर्ष अलग-अलग धार्मिक आयोजन और उत्सव होते हैं। दिसंबर या जनवरी के दौरान यहां पांच दिवसीय वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। इसकी शुरुआत ध्वजारोहण के साथ होती है और अंतिम दिन थिरु अरट्टू अनुष्ठान के साथ इसका समापन किया जाता है। इसके अलावा जून या जुलाई में भी विशेष धार्मिक आयोजन होता है। इस अवसर पर 1008 कलश जलाभिषेक किया जाता है। इस अनुष्ठान में 1,008 कलशों में रखे पवित्र जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है।

    मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सुबह और शाम का समय निर्धारित है। यहां सुबह 6 बजे से 9:30 बजे तक और शाम 4 बजे से 7 बजे तक पूजा-अर्चना और दर्शन किए जा सकते हैं। मंदिर आने वाले भक्तों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था भी उपलब्ध है। हालांकि, महाशिवरात्रि के दिन होने वाले विशेष दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धालुओं को पहले से जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।

    श्री अर्धनारीश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क, रेल और हवाई मार्ग की सुविधा उपलब्ध है। हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालु कालीकट अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच सकते हैं, जो मंदिर से लगभग 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से टैक्सी के माध्यम से मंदिर जाया जा सकता है। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए अंगडीपुरम रेलवे स्टेशन नजदीकी विकल्प है। स्टेशन से टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या बस लेकर मंदिर पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग से पेरिनथलमन्ना होते हुए स्थानीय बस और टैक्सी की मदद से भी मंदिर तक पहुंचना संभव है।

  • भाजपा युवा मोर्चा ने बदले 19 जिलों के पदाधिकारी, भोपाल और इंदौर शहर में पुराने चेहरों पर भरोसा

    भाजपा युवा मोर्चा ने बदले 19 जिलों के पदाधिकारी, भोपाल और इंदौर शहर में पुराने चेहरों पर भरोसा


    भोपाल।  मध्य प्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश के 19 जिलों में जिला अध्यक्षों और जिला महामंत्रियों की नई नियुक्तियां घोषित की गई हैं। इन नियुक्तियों के जरिए संगठन ने कई जिलों में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से नई नियुक्तियों की घोषणा की। इस बदलाव के बाद अब संबंधित जिलों में युवा मोर्चा की संगठनात्मक गतिविधियों की जिम्मेदारी नए पदाधिकारियों के हाथों में होगी।

    घोषित नियुक्तियों में जबलपुर नगर में रवींद्र तिवारी को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं मऊगंज में अभिषेक मिश्रा और श्योपुर में ईश्वर जाट को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। सागर में जसवंत राठौर को जिला अध्यक्ष की कमान दी गई है। इसके अलावा निवाड़ी मैहर उमरिया डिंडौरी और मंडला सहित कई जिलों में भी नए अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। इन बदलावों के माध्यम से संगठन ने अलग-अलग क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

    जिला अध्यक्षों के साथ जिला महामंत्रियों के नामों की भी घोषणा की गई है। बालाघाट इंदौर ग्रामीण धार नगर नीमच सिवनी छिंदवाड़ा नर्मदापुरम रायसेन अनूपपुर और मंदसौर में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस तरह कुल 19 जिलों में संगठन के पदाधिकारियों के स्तर पर बदलाव किया गया है। हालांकि भोपाल और इंदौर शहर में जिला अध्यक्षों को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन दोनों शहरों में फिलहाल पहले से जिम्मेदारी संभाल रहे पदाधिकारियों पर ही भरोसा कायम रखा गया है।

    युवा मोर्चा में इन नियुक्तियों को प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक विस्तार और युवा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है। जिला स्तर पर अध्यक्ष और महामंत्री संगठन के महत्वपूर्ण पद होते हैं। इनके जरिए सदस्यता अभियान से लेकर युवा कार्यकर्ताओं के कार्यक्रमों और पार्टी की गतिविधियों के संचालन में भूमिका निभाई जाती है। नई टीम के सामने अपने-अपने जिलों में संगठन को सक्रिय रखने और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाने की जिम्मेदारी होगी।

    मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव का यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी अपने प्रदेश संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में जुटी है। इससे पहले भाजपा के केंद्रीय संगठन की ओर से चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश का प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किया गया था। करीब आठ महीने बाद इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति हुई थी। अब युवा मोर्चा के 19 जिलों में नई नियुक्तियों के साथ जिला स्तर पर भी संगठनात्मक जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है।

    नई नियुक्तियों के बाद संबंधित जिलों में युवा मोर्चा की गतिविधियों को लेकर नए पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वहीं भोपाल और इंदौर शहर में बदलाव नहीं होने से इन दोनों इकाइयों में मौजूदा नेतृत्व ही संगठन का काम संभालता रहेगा। पार्टी की ओर से जारी सूची में जिला अध्यक्षों के साथ महामंत्रियों के नाम भी शामिल किए गए हैं।

  • सारा अली खान के केदारनाथ दौरे पर उठे सवाल, मौलाना ने शरीयत का हवाला देकर दिया बड़ा बयान, जानिए पूरा मामला

    सारा अली खान के केदारनाथ दौरे पर उठे सवाल, मौलाना ने शरीयत का हवाला देकर दिया बड़ा बयान, जानिए पूरा मामला

    नई दिल्ली । अभिनेत्री सारा अली खान एक बार फिर केदारनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा करने को लेकर विवादों में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके मंदिर में पूजा करने पर आपत्ति जताई है। मौलाना ने इस मामले में फतवा जारी करते हुए कहा कि इस्लाम और शरीयत के अनुसार किसी मुसलमान का दूसरे धर्म के धार्मिक स्थल पर जाकर वहां की परंपरा के मुताबिक पूजा करना जायज नहीं है। उन्होंने सारा से अपने इस कदम के लिए अल्लाह से माफी मांगने और तौबा करने की बात भी कही है।

    जानकारी के मुताबिक, 25 अक्टूबर को सारा अली खान को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते देखा गया था। इस दौरान वह मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की कतार में अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं। दर्शन और पूजा करने के बाद उनकी एक तस्वीर और वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह मंदिर के बाहर हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दीं। उनके इसी धार्मिक दौरे को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।

    मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने वीडियो बयान में कहा कि कई युवाओं ने उनसे यह सवाल किया था कि क्या सारा अली खान का केदारनाथ मंदिर में जाकर पूजा करना शरीयत के मुताबिक सही है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे धर्म की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार पूजा करना इस्लामिक कानून के तहत जायज नहीं माना जाता। उन्होंने इसे हराम बताते हुए अभिनेत्री से अल्लाह के सामने तौबा करने की सलाह दी। मौलाना के मुताबिक, सारा को अपने इस कदम के लिए माफी मांगनी चाहिए।

    सारा अली खान का केदारनाथ जाना कोई पहली घटना नहीं है। अभिनेत्री पिछले चार वर्षों से लगातार इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर पहुंच रही हैं। उनकी पहली फिल्म भी केदारनाथ नाम से ही रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम किया था। वर्ष 2018 में फिल्म रिलीज होने के समय भी सारा को उत्तराखंड में विरोध का सामना करना पड़ा था। उस दौरान कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने फिल्म और अभिनेत्री की धार्मिक पहचान को लेकर आपत्ति जताई थी।

    सारा अली खान अभिनेत्री अमृता सिंह और अभिनेता सैफ अली खान की बेटी हैं। वह कई मौकों पर धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए जाती रही हैं। केदारनाथ में उनकी मौजूदगी और पूजा को लेकर समय-समय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। ताजा मामला भी इसी धार्मिक यात्रा से जुड़ा है, जिसमें मौलाना की टिप्पणी के बाद विवाद ने नया रूप ले लिया है।

    इस बीच बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने गैर-हिंदू श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजा से पहले शपथ-पत्र जमा करने की व्यवस्था लागू की है। इस नियम के तहत मंदिर में पूजा करने के इच्छुक गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को पहले निर्धारित शपथ-पत्र देना अनिवार्य किया गया है।

    समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रंगार ने बताया कि सारा अली खान की टीम ने उनके केदारनाथ दौरे से पहले आवश्यक शपथ-पत्र जमा कराया था। इस तरह उनके दौरे से संबंधित औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई थी। अब मौलाना की ओर से जारी फतवे के बाद अभिनेत्री की केदारनाथ यात्रा एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।

  • सिवनी में नवजात मौतों का गंभीर मामला, 1088 बच्चों में से 80 की मौत के बाद जांच और इलाज पर उठे सवाल

    सिवनी में नवजात मौतों का गंभीर मामला, 1088 बच्चों में से 80 की मौत के बाद जांच और इलाज पर उठे सवाल


    सिवनी । मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल की सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट यानी एसएनसीयू में नवजात बच्चों की मौत के आंकड़ों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच यहां भर्ती 1088 नवजातों में से 80 बच्चों की मौत हो गई। यानी करीब 7.4 प्रतिशत बच्चों को बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस आंकड़े को सामान्य बताते रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस दलील पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के दौर में एसएनसीयू में मृत्यु दर 6 प्रतिशत से अधिक होना चिंता का विषय है।

    सिवनी जिला अस्पताल का यह मामला उस समय चर्चा में आया जब भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने 10 अक्टूबर 2026 को अस्पताल की एसएनसीयू का दौरा किया। उन्हें जानकारी मिली कि तीन महीने के भीतर 46 नवजातों की मौत हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की। सरकार ने जांच के लिए चार डॉक्टरों की टीम बनाई। जांच में सामने आया कि छह महीने में 1088 नवजात भर्ती हुए थे और इनमें से 80 की मौत हुई। इस रिपोर्ट के बाद एसएनसीयू प्रभारी डॉ. पारस पटेरिया को पद से हटा दिया गया।

    मामले की गंभीरता उन परिवारों की आपबीती से भी सामने आती है जिन्होंने अपने नवजात बच्चों को खोया। बरघाट की माधुरी पटले ने 14 अप्रैल को 2.6 किलो वजन के बेटे को जन्म दिया था। परिवार के मुताबिक बच्चे को स्वस्थ बताकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। घर पहुंचने के बाद उसे तेज बुखार आया और दोबारा अस्पताल ले जाने पर एसएनसीयू में भर्ती किया गया। पांच दिन बाद बच्चे की मौत हो गई। पिता कमलेश ने सवाल उठाया कि यदि बच्चा बीमार था तो उसे बिना पर्याप्त जांच के छुट्टी क्यों दी गई।

    एक अन्य मामले में बरघाट के राहुल और पूजा बाहेश्वर के जुड़वां बच्चों की मौत हो गई। परिवार के मुताबिक गर्भावस्था के छठे महीने में दर्द शुरू होने पर निजी डॉक्टर ने उन्हें सिवनी जिला अस्पताल भेजा। दोपहर करीब एक बजे अस्पताल पहुंचने के बाद भी उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। परिवार का आरोप है कि पूजा दर्द से परेशान होकर वॉशरूम गईं जहां एक बच्चे का जन्म हो गया। बाद में दूसरे बच्चे का जन्म लेबर रूम में हुआ। दोनों नवजातों को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया लेकिन कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई।

    जामुन टोला की प्रियंका कुसाम के मामले में आर्थिक परेशानी भी सामने आई। उन्होंने सातवें महीने में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया लेकिन दोनों को बचाया नहीं जा सका। परिवार के मुताबिक पैसों की कमी के कारण गर्भावस्था के शुरुआती छह महीनों में सोनोग्राफी नहीं हो सकी थी। आशा कार्यकर्ता ने यह भी बताया कि प्रियंका को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का पोषण भत्ता नहीं मिला था।

    दूसरी ओर अस्पताल के अधिकारियों ने मौतों के पीछे बच्चों की गंभीर स्थिति और समय से पहले जन्म को प्रमुख वजह बताया है। सिविल सर्जन डॉ. विनोद नवकर और सीएमएचओ डॉ. पंकज दुबे के मुताबिक 80 मृत बच्चों में से 58 प्रीमैच्योर थे। इनमें 18 बच्चों का वजन एक किलो से भी कम था। अधिकारियों का कहना है कि एसएनसीयू में बेहद गंभीर स्थिति वाले नवजात ही लाए जाते हैं और यहां एक हजार से अधिक बच्चों की जान भी बचाई गई है। उन्होंने करीब 8 से 10 प्रतिशत तक मृत्यु दर को सामान्य बताने वाली दलील दी है।

    हालांकि एनएचएम के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर और सेवानिवृत्त सीएमएचओ डॉ. पंकज शुक्ला ने अधिकारियों के तर्कों पर असहमति जताई है। उनके मुताबिक वर्ष 2010 में यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से तैयार एसएनसीयू दिशा-निर्देशों में भी मृत्यु दर की अधिकतम सीमा 6 प्रतिशत रखी गई थी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना प्रसाद का कहना है कि गंभीर बच्चों के भर्ती होने का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं की समीक्षा जरूरी है।

    भारत सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की 2024 की सांख्यिकीय रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में हर एक हजार जीवित जन्मों पर 35 बच्चों की मृत्यु उनके पहले जन्मदिन से पहले हो जाती है। इस मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर बताया गया है। इनमें 28 बच्चों की मौत जन्म के शुरुआती 28 दिनों के भीतर होती है। पांच वर्षों में आंकड़ों में सुधार के बावजूद राज्य राष्ट्रीय औसत से पीछे है। सिवनी अस्पताल के आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब नवजातों की सुरक्षा और सरकारी अस्पतालों में बेहतर उपचार व्यवस्था को लेकर जवाबदेही की मांग तेज हो रही है।

  • भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?

    भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?


    इंदौर ।  मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के बयानों और आपसी खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार में मंत्रियों के बीच कथित खटपट को लेकर तंज कसा है। वहीं अपनी चुनावी हार को याद करते हुए उन्होंने ऐसा बयान दिया जिस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी। दूसरी ओर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भाजपा की लगातार चुनावी जीत पर हैरानी जताते हुए कांग्रेस नेताओं को एकजुट होने की जरूरत बताई है।

    इंदौर में भाजपा की कथित गुटबाजी पर निशाना साधते हुए जीतू पटवारी ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि सरकार में प्रभारी मंत्री जो मुख्यमंत्री हैं और नगरीय प्रशासन मंत्री के बीच लात-घूंसे चल रहे हैं लेकिन दिखाई नहीं दे रहे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दोनों के बीच गाली-गलौज भी हो रही है लेकिन सिर्फ सुनाई नहीं दे रही है। पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंदौर के भाजपा विधायक उन्हें मंत्री मानने को ही तैयार नहीं हैं। पटवारी के मुताबिक आपसी अंतर्कलह में उलझी भाजपा प्रदेश का भला नहीं कर सकती क्योंकि अहंकार में डूबे नेता एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। यह पटवारी का राजनीतिक आरोप और कटाक्ष था।

    हालांकि भाजपा पर हमला करते हुए पटवारी को अपनी चुनावी हार भी याद आ गई। वे इंदौर में संगीत के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां बातचीत के दौरान उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के पुराने अंदाज का जिक्र किया। पटवारी ने कहा कि साइकिल वाला भी कैसे हारता है यह उन्होंने देखा है। उन्होंने कहा कि जब कोई उन्हें याद दिलाता है कि वे साइकिल से आते थे और भाभी-भाभी कहकर लोगों से मिलते थे फिर भी चुनाव हार गए तो उन्हें अपनी हार याद आ जाती है। इस बात को कहते हुए उन्होंने फिल्मी गाने की पंक्ति भी सुनाई कि जिंदगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है। उनके इस बयान में चुनावी हार की टीस के साथ खुद पर किया गया हल्का व्यंग्य भी नजर आया।

    इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति और भाजपा की लगातार जीत को लेकर चिंता जाहिर की। सिंगरौली में एक पत्रकार ने उनसे सड़क बिजली बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को लेकर सवाल किया था। इस पर अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में कई समस्याएं होने के बावजूद जब मतदान का समय आता है तो भाजपा के अलावा किसी दूसरी पार्टी को वोट क्यों नहीं मिलते यह समझ से परे है। उन्होंने इस स्थिति को कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बताया।

    अजय सिंह इससे पहले भी पार्टी की स्थिति को लेकर चिंता जता चुके हैं। एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा था कि वर्ष 2028 में कांग्रेस को मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे। अगर इस बार भी पार्टी सत्ता में नहीं पहुंची तो राजनीतिक रूप से उसकी स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील भी की।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जीतू पटवारी भाजपा के भीतर कथित खींचतान को लेकर हमलावर नजर आए तो दूसरी ओर अजय सिंह ने कांग्रेस के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। दोनों नेताओं के बयान प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कांग्रेस के संगठनात्मक हालात पर भी चर्चा को सामने लाते हैं।

    रिपोर्ट के अंदरूनी हिस्से में एक आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग को लेकर भी चर्चा की गई है। खबर के मुताबिक अधिकारी बड़े महानगरीय जिले में कलेक्टर बनने की उम्मीद लगाए हुए थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उन्हें एक छोटे जिले की जिम्मेदारी मिली। हालांकि अधिकारी का नाम और जिले का उल्लेख नहीं किया गया है।

  • इंदौर कांग्रेस का अनोखा विरोध, मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना

    इंदौर कांग्रेस का अनोखा विरोध, मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना


    इंदौर। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाले कांग्रेस के आंदोलन को लेकर इंदौर में पार्टी नेताओं ने विरोध का एक अलग तरीका अपनाया है। यहां कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर वाला पोस्टर-पुतला रेलवे पार्सल के जरिए दिल्ली भेजने के लिए बुक कराया है। इसके लिए मालवा एक्सप्रेस का इस्तेमाल किया गया है। नेताओं ने पोस्टर-पुतले को बाकायदा रेलवे के पार्सल गोदाम में जमा कराया और इसकी बुकिंग की रसीद भी प्राप्त की। इस तरह दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले इंदौर कांग्रेस की यह तैयारी चर्चा में आ गई है।

    जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेता विवेक खंडेलवाल गिरीश जोशी और देवेंद्र सिंह यादव रेलवे के कॉमर्शियल विभाग के पार्सल गोदाम पहुंचे थे। यहां पोस्टर-पुतले को एक बॉक्स में पैक कराया गया। इसके बाद रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया के तहत पार्सल की बुकिंग कराई गई। नेताओं ने इसकी रसीद भी ली। पार्सल पर पोस्टर चिपकाने और जावक क्रमांक दर्ज कराने जैसी औपचारिकताएं भी पूरी की गईं। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया को रेलवे के माध्यम से दस्तावेजी रूप देते हुए पोस्टर-पुतले को दिल्ली भेजने की व्यवस्था की।

    पोस्टर पर चलो दिल्ली और वोट चोर गद्दी छोड़ जैसे नारे लिखे गए हैं। इसके साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर भी लगाई गई है। कांग्रेस नेताओं का उद्देश्य इस पोस्टर-पुतले को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले आंदोलन तक पहुंचाना है। पार्टी की ओर से 1 नवंबर को आयोजित किए जा रहे इस प्रदर्शन में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया जाना है।

    इस विरोध प्रदर्शन के लिए रेलवे पार्सल का इस्तेमाल करना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पोस्टर बैनर और अन्य प्रचार सामग्री सड़क मार्ग या निजी वाहनों से भेजी जाती है। लेकिन इंदौर के कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर-पुतले को रेलवे पार्सल के जरिए भेजने का विकल्प चुना। इसके लिए उन्होंने केवल सामग्री भेजने की व्यवस्था ही नहीं की बल्कि बुकिंग की रसीद लेकर पूरी प्रक्रिया को औपचारिक रूप भी दिया।

    दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाला आंदोलन कांग्रेस की ओर से चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। इंदौर से भेजे जा रहे पोस्टर-पुतले के जरिए स्थानीय कांग्रेस नेता भी इस अभियान में अपनी भागीदारी दर्ज कराना चाहते हैं। पोस्टर पर लिखे नारे पार्टी के विरोध का संदेश दे रहे हैं। हालांकि पोस्टर-पुतले के दिल्ली पहुंचने और प्रदर्शन में इसके इस्तेमाल को लेकर आगे की स्थिति संबंधित आयोजन पर निर्भर करेगी।

    फिलहाल इंदौर कांग्रेस की यह तैयारी इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की तस्वीर वाला पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस के जरिए रेलवे पार्सल से भेजने के लिए बुक कराया गया है। 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले इस कदम ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

  • कविता से सिनेमा और दर्शन तक होगी चर्चा, इंदौर के वाणी साहित्य उत्सव में जुटेंगे दिग्गज रचनाकार

    कविता से सिनेमा और दर्शन तक होगी चर्चा, इंदौर के वाणी साहित्य उत्सव में जुटेंगे दिग्गज रचनाकार


    इंदौर । इंदौर में शुक्रवार को वाणी साहित्य उत्सव के जरिए साहित्य और कला की विविध विधाओं का संगम देखने को मिलेगा। इस आयोजन में कविता कहानी अनुवाद सिनेमा और दर्शन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। दिनभर चलने वाले अलग-अलग सत्रों में साहित्यकारों फिल्म निर्माताओं और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह कविता कुंभ और ओपन माइक से होगी जबकि शाम को मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी को समर्पित मुशायरा आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पुस्तकों का लोकार्पण भी होगा।

    उत्सव का पहला प्रमुख आयोजन सुबह 9 से 11 बजे तक वाणी कविता कुंभ और मुशायरा ओपन माइक के रूप में होगा। इसका संचालन प्रतीक शर्मा करेंगे। इस मंच पर कविता और शायरी में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद सुबह 11 से दोपहर 12 बजे तक ज्ञान के नवोन्मेष का वाणी साहित्य विषय पर संवाद होगा। इसमें शम्भूनाथ गरिमा श्रीवास्तव और राधावल्लभ त्रिपाठी शामिल होंगे। इस सत्र का संचालन प्रियंका दुबे करेंगी।

    इस आयोजन का एक खास आकर्षण फ्रांज काफ्का की प्रसिद्ध पुस्तक द ट्रायल का हिंदी अनुवाद होगा। गरिमा श्रीवास्तव ने इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया है। इसका लोकार्पण विकास दवे करेंगे। काफ्का की यह रचना विश्व साहित्य की चर्चित कृतियों में शामिल है। हिंदी पाठकों के लिए इसका नया अनुवाद उपलब्ध होना साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दोपहर 12 से 1 बजे तक बच्चों के लिए विशेष कहानी कार्यशाला आयोजित की जाएगी। वाणी त्रिपाठी टिक्कू बच्चों का मौजघर नाम से इस कार्यक्रम का संचालन करेंगी। इसका उद्देश्य बच्चों को कहानी सुनने और अपनी कल्पनाशीलता को रचनात्मक रूप देने का अवसर देना है।

    दोपहर 2 से 3 बजे तक महिला फिल्म निर्माताओं और उनकी अनकही कहानियों पर चर्चा होगी। द रिवोल्यूशनरीज वुमन क्रिएटिंग वुमन स्टोरीज अनटोल्ड नाम के इस सत्र में मोनिशा आडवाणी और मधु भोजवानी बातचीत करेंगी। इसका संचालन वाणी त्रिपाठी टिक्कू करेंगी। इसके बाद दोपहर 3 से 4 बजे तक गुलमेंहदी की झाड़ियां सम्मोहक सरोवर में सत्र आयोजित होगा। इसमें कहानीकार तरुण भटनागर की रचनाओं पर उदय प्रकाश और विवेक चतुर्वेदी के साथ चर्चा होगी। संचालन हरि भटनागर करेंगे।

    शाम 4 से 5 बजे तक रामेश्वर राय का सत्र माट सा’ब की कक्षा आयोजित होगा। इसका संचालन अदिति माहेश्वरी करेंगी। शाम 5 से 6 बजे तक बुद्ध आध्यात्मिक घटना या दुर्घटना विषय पर संवाद होगा। इसमें ओमा द अक् और कृतिका देसाई विचार साझा करेंगे।

    दिन का प्रमुख साहित्यिक आकर्षण शाम 6 से 7 बजे तक होने वाला मुशायरा रहेगा। यह शीन काफ़ निज़ाम की छाया में आयोजित होगा और रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी को समर्पित रहेगा। इसमें माधव कौशिक ओमा द अक् सतलज राहत इंदौरी और सुनील अटोलिया कालू शामिल होंगे। इसके साथ ही इश्क़ के सात पड़ाव पुस्तक का लोकार्पण भी होगा। इस सत्र में प्रिया मालिक और अदिति माहेश्वरी शामिल रहेंगी तथा संचालन सौम्या कुलश्रेष्ठ करेंगी।

    कुल मिलाकर वाणी साहित्य उत्सव में एक ही दिन के भीतर कविता कहानी अनुवाद सिनेमा और दर्शन के कई पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों और नए लेखकों के लिए रचनात्मक संवाद का मंच बनेगा।

  • इंदौर में भाजपा की पदयात्रा में साधु-संतों से लेकर किन्नर समाज तक शामिल, मांडविया ने कांग्रेस पर कसा तंज

    इंदौर में भाजपा की पदयात्रा में साधु-संतों से लेकर किन्नर समाज तक शामिल, मांडविया ने कांग्रेस पर कसा तंज


    इंदौर । इंदौर में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ पदयात्रा के दौरान राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। सुभाष नगर चौराहे से शुरू हुई यह पदयात्रा पाटनीपुरा चौराहे तक निकाली जा रही है। इसमें डॉक्टरों और वकीलों से लेकर व्यापारियों तथा साधु-संतों सहित विभिन्न समाजों और संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। यात्रा में किन्नर समाज के लोगों के साथ बुर्का पहने महिलाएं भी नजर आईं। भाजपा नेताओं ने इस आयोजन को लोकतंत्र और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जनभागीदारी का कार्यक्रम बताया।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पदयात्रा को राष्ट्रभक्तों की रैली बताया। उनके अनुसार इसमें अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल होकर अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। पदयात्रा के दौरान उस समय स्थिति चर्चा में आ गई जब समाजसेवी प्रहलाद पांडे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पांडे अपने साथ एक पोस्टर लेकर पहुंचे थे। इस पोस्टर पर 30 हजार का बल्ब और 33 हजार लीटर फिनाइल लिखा हुआ था। बताया जा रहा है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से पुलिस को पांडे को वहां से हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

    प्रहलाद पांडे इससे पहले भी कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। उस समय भी पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर गई थी। खबर के मुताबिक बाद में विजयवर्गीय ने उन्हें छुड़वाने के लिए पत्र लिखा था। इस बार पदयात्रा के दौरान उनके पोस्टर के साथ पहुंचने और पुलिस कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में रहा। पोस्टर पर लिखे संदेश का संबंध किस मुद्दे से था और इसके पीछे पांडे की क्या मांग थी इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री मांडविया भी शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस और उसके नेताओं पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी का नाम लिए बिना रॉकेट लॉन्चिंग का उदाहरण दिया। मांडविया ने कहा कि जैसे रॉकेट को ऊपर भेजने के लिए दीया सलाई लगाई जाती है वैसे ही कांग्रेस भी अपने नेताओं को बार-बार लॉन्च करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने जनता से सवाल करते हुए कहा कि कई वर्षों से ऐसी कोशिशें की जा रही हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखा गया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भी पदयात्रा में शामिल होने पहुंचे और बाद में पाटनीपुरा चौराहे पर बनाए गए मंच पर पहुंचे। यात्रा में राहुल गांधी का बैनर ओढ़कर आया एक युवक भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। आयोजन में अलग-अलग समुदायों और संगठनों की मौजूदगी के कारण पदयात्रा को व्यापक रूप देने की कोशिश दिखाई दी।

    भाजपा की इस पदयात्रा में एक ओर पार्टी नेताओं के भाषण और कांग्रेस पर राजनीतिक हमले चर्चा में रहे तो दूसरी ओर समाजसेवी प्रहलाद पांडे को हिरासत में लिए जाने का मामला भी सामने आया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने उन्हें पोस्टर लेकर पहुंचने के बाद हिरासत में लिया। इस कार्रवाई को लेकर मंत्री के निर्देश की बात भी सामने आई है। हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत के कारण और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

  • शिवपुरी में रहस्यमयी हालात में युवक की मौत, पुल के नीचे मिला शव और पास खड़ी बाइक, पिता ने जताई हत्या की आशंका

    शिवपुरी में रहस्यमयी हालात में युवक की मौत, पुल के नीचे मिला शव और पास खड़ी बाइक, पिता ने जताई हत्या की आशंका


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में शुक्रवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब गुना बायपास की थीम रोड पर एक पुल के नीचे 28 वर्षीय युवक का शव मिला। मृतक की पहचान शिवम शर्मा के रूप में हुई है। शव के पास ही उनकी बाइक भी पड़ी हुई थी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। बेटे का शव देखकर उनके पिता सुरेश शर्मा सदमे में आ गए और मौके पर ही बेहोश हो गए। परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उन्हें भर्ती कराया गया। मृतक के पिता ने आशंका जताई है कि उनके बेटे की हत्या कर शव को पुल के नीचे फेंका गया है। हालांकि अभी तक युवक की मौत की असली वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    जानकारी के मुताबिक शिवम शर्मा शिवपुरी की विवेकानंद कॉलोनी में रहते थे और एक निजी सोलर कंपनी में नौकरी करते थे। गुरुवार शाम वह अपने घर से निकले थे। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि वह कुछ देर में वापस लौट आएंगे लेकिन देर रात तक उनका कोई पता नहीं चला। परिजनों ने उनसे मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन फोन नहीं लगा। काफी देर तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिवार की चिंता बढ़ गई। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और युवक की तलाश शुरू कर दी गई।

    शुक्रवार सुबह कोतवाली पुलिस शिवम की गुमशुदगी दर्ज करने की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को गुना बायपास की थीम रोड पर श्रीराम धर्म कांटे के पास पुल के नीचे एक युवक का शव पड़े होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची। वहां युवक का शव पड़ा था और कुछ दूरी पर उसकी बाइक भी मिली। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया और पहचान की प्रक्रिया शुरू की। जांच के दौरान मृतक की पहचान शिवम शर्मा के रूप में हुई। इसके बाद परिवार को घटना की जानकारी दी गई।

    जैसे ही पिता सुरेश शर्मा घटनास्थल पर पहुंचे और बेटे का शव देखा तो वह खुद को संभाल नहीं पाए। सदमे के कारण वह बेहोश हो गए। परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज शुरू किया गया। परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद और चौंकाने वाली है। जिस बेटे के घर लौटने का इंतजार किया जा रहा था उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

    बताया गया है कि शिवम की शादी करीब तीन साल पहले हुई थी। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। ऐसे में उनकी असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिता सुरेश शर्मा पटवारी हैं। उन्होंने बेटे की मौत को सामान्य हादसा मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि किसी ने शिवम की हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया होगा। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने से पहले इस आशंका की पुष्टि नहीं हुई है।

    कोतवाली पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच से युवक की मौत के कारणों का पता चल सकेगा। पुलिस घटनास्थल की परिस्थितियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिवम की मौत सड़क हादसे में हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश है। पुलिस जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

  • दिवाली वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस की महाजंग, 'रामायण' के सामने उतरेंगी साउथ और हॉलीवुड की ये 3 बड़ी फिल्में

    दिवाली वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस की महाजंग, 'रामायण' के सामने उतरेंगी साउथ और हॉलीवुड की ये 3 बड़ी फिल्में


    नई दिल्ली। दिवाली का त्योहार इस बार सिनेमा प्रेमियों के लिए मनोरंजन का बड़ा मौका लेकर आ रहा है। नवंबर के पहले सप्ताह में सिनेमाघरों में फिल्मों की ऐसी भिड़ंत देखने को मिलेगी जिसका इंतजार दर्शक लंबे समय से कर रहे हैं। रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण पार्ट 1 पांच नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म को लेकर पहले से ही जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। लेकिन रामायण की रिलीज के ठीक अगले दिन यानी छह नवंबर को तीन और फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली हैं। ऐसे में दिवाली वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस का मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है।

    रामायण को टक्कर देने वाली फिल्मों में पहली फिल्म सीन है। इस फिल्म के जरिए निर्देशक जिथु माधवन तमिल सिनेमा में कदम रखने जा रहे हैं। जिथु माधवन इससे पहले आवेशम जैसी चर्चित फिल्म बना चुके हैं। सीन को साइकोलॉजिकल एक्शन कॉमेडी के रूप में तैयार किया गया है। इसमें सूर्या नासलन और नज्रिया नाजिम अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण सूर्या और ज्योतिका के प्रोडक्शन हाउस 2D एंटरटेनमेंट तथा झगराम स्टूडियोज ने मिलकर किया है।

    फिल्म में सूर्या डीएसपी इनबराज पांडियन आईपीएस का किरदार निभा रहे हैं। इसकी कहानी एक बर्खास्त पुलिसकर्मी के खिलाफ चल रहे मामले और उसे सुलझाने के दौरान सामने आने वाली मुश्किलों के इर्द गिर्द घूमती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक अनोखी टीम बनाई जाती है। फिल्म में एक्शन के साथ कॉमेडी और सस्पेंस का मेल देखने को मिलेगा। छह नवंबर को रिलीज होने वाली यह फिल्म दक्षिण भारतीय दर्शकों के बीच खास आकर्षण बन सकती है।

    दूसरी फिल्म मूकुथी अम्मन 2 है। नयनतारा की चर्चित फिल्म के इस सीक्वल को लेकर भी दर्शकों में उत्साह है। सुंदर सी के निर्देशन में बनी इस फैंटेसी ड्रामा फिल्म में नयनतारा एक बार फिर अहम भूमिका निभा रही हैं। कहानी में दो अलग अलग समय की घटनाओं को जोड़ा गया है और शक्तिशाली ताकतों के बीच टकराव दिखाया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक नयनतारा इसमें दोहरी भूमिका में नजर आ सकती हैं जबकि रेजिना कैसेंड्रा खलनायिका के किरदार में दिखाई देंगी। विजय उर्वशी और योगी बाबू भी फिल्म का हिस्सा हैं। फैंटेसी और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी कहानियां पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म खास हो सकती है।

    तीसरी फिल्म हॉलीवुड की एनिमेटेड मूवी द कैट इन द हैट है। यह फिल्म मशहूर लेखक डॉ. स्यूस की लोकप्रिय किताब पर आधारित है। वार्नर ब्रदर्स की इस फिल्म में मुख्य किरदार को अभिनेता बिल हैडर ने अपनी आवाज दी है। जादू मस्ती और रोमांच से भरपूर यह एनिमेटेड फिल्म खासतौर पर बच्चों और परिवारों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। ऐसे में दिवाली की छुट्टियों में परिवार के साथ फिल्म देखने की योजना बना रहे दर्शकों के लिए यह एक अलग विकल्प हो सकती है।

    अब सवाल यह है कि दिवाली वीकेंड पर बॉक्स ऑफिस का बाजीगर कौन बनेगा। रामायण को बड़े सितारों और भव्य निर्माण का फायदा मिल सकता है। वहीं सीन और मूकुथी अम्मन 2 अपने अलग विषय और दक्षिण भारतीय दर्शकों के बीच लोकप्रिय कलाकारों के दम पर दर्शकों को आकर्षित कर सकती हैं। दूसरी ओर द कैट इन द हैट बच्चों और परिवारों का ध्यान खींच सकती है। अलग अलग जॉनर की इन फिल्मों के कारण दर्शकों के पास कई विकल्प होंगे। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कौन सी फिल्म दर्शकों की पहली पसंद बनती है और दिवाली वीकेंड की कमाई में सबसे आगे निकलती है।