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  • नेपाल आपदा से बचकर 21 भारतीयों की हुई सुरक्षित वापसी…, 320 अब भी लापता

    नेपाल आपदा से बचकर 21 भारतीयों की हुई सुरक्षित वापसी…, 320 अब भी लापता


    नई दिल्ली।
    नेपाल त्रासदी (Nepal Tragedy) से बचाए गए 21 भारतीय नागरिक शुक्रवार को दिल्ली लौट आए, जबकि 320 अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल आपदा के बाद से करीब 320 भारतीय नागरिकों (320 Indian citizens) से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, भारतीय मूल के 100 लोगों का भी अब तक पता नहीं चल सका है।


    मानसरोवर यात्रा पर थे ये लोग

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने बताया कि नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के रहने वाले 21 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। गुरुवार को काठमांडू पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास की मदद से उन्हें इंडिगो की उड़ान से भारत लाया गया। दिल्ली हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने इन लोगों से मुलाकात की। जैसवाल ने बताया, त्रिशूली बिजली परियोजना में कार्यरत 63 लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस परियोजना में बड़ी संख्या में भारतीय कार्य कर रहे थे, जो प्रभावित हुए हैं।


    तिब्बत-चीन में 400 भारतीय सुरक्षित

    जैसवाल ने बताया कि बाढ़ प्रभावित तिब्बत और चीन की तरफ 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। हालांकि, सभी सुरक्षित हैं और परिजनों के संपर्क में हैं। मार्ग बाधित होने से उनकी वापसी में दिक्कत है। बता दें कि अब तक 96 भारतीयों को वहां से निकालकर नेपाल लाया गया है।


    स्थिति पर नजर

    मंत्रालय ने बताया कि दिल्ली और काठमांडू में बनाए गए नियंत्रण कक्ष लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भारतीय दूतावास राहत-बचाव और तलाशी अभियान में जुटी स्थानीय एजेंसियों के संपर्क में है।


    भारत ने मदद की तीसरी खेप भेजी

    जैसवाल ने बताया कि भारत ने अब तक नेपाल को 57 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी है। 26 अगस्त को 10 टन मदद लेकर पहला विमान भेजा था। 27 अगस्त को नेपाल सरकार के अनुरोध पर 37.5 टन सहायता लेकर दूसरा विमान भेजा गया। शुक्रवार को तीसरा विमान 12-13 टन सामान लेकर रवाना हुआ। इसमें पोर्टेबल जनरेटर सेट, महिलाओं के लिए जरूरी सामान, खाने के पैकेट और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं।

    गुजरात के 26 लोग लापता हैं, जिनमें कुछ एनआरआई भी शामिल हैं। राज्य के मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के साथ तालमेल बिठा रही है। सीएम भूपेंद्र पटेल के निर्देश पर सभी जिलों में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। नेपाल में फंसे गुजरातवासियों की जानकारी के लिए उनके परिवार हेल्पलाइन नंबर 1070 के अलावा कंट्रोल रूम के नंबर (079)232-51900 या 9978405304 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

    उधर, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कोलकाता मूल के एक ब्रिटिश जोड़े का नेपाल में बाढ़ के बाद पिछले चार दिनों से कोई पता नहीं चल पाया है। उधर, कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल और तिब्बत में कर्नाटक के 28 लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। चार लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।


    चंपारण के छह लोग भी रसुवा में गायब

    भीषण बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के चनपटिया थाने के तुरहापट्टी वार्ड-1 के तीन बढ़ई लापता हो गए हैं। लापता युवकों की पहचान समीर अंसारी, मोख्तार मियां और अरमान आलम के रूप में हुई है। उधर, पूर्वी चंपारण के केसरिया के प्रखंड क्षेत्र जगीरहां पंचायत के निवासी तीन युवक नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बाद से लापता हैं।


    पलामू के युवक का पता नहीं

    नेपाल के बाणेश्वर स्थित हाइड्रो पावर प्लांट निर्माण कार्य में लगे पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड के बरवाडीह गांव निवासी 50 वर्षीय महेंद्र विश्वकर्मा पिछले कई दिनों से लापता हैं। उनका मोबाइल फोन लगातार बंद मिलने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है।


    हरदोई के दो लोग गुम

    हरदोई के पिहानी थाना क्षेत्र के अहेमी ग्राम सभा के दो युवकों का परिवार से सम्पर्क टूट गया है। तीन दिन से कोई जानकारी न मिलने से परिजन परेशान हैं। वे लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।

  • SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा

    SC की फटकार के बाद FSSAI का बड़ा कदम… खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर लिखी होगी चीनी-नमक की मात्रा


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने पैक फूड (Packaged food) पर शिंकजे की तैयारी शुरू कर दी है। जिन खाद्य पदार्थों में चीनी (Sugar), फैट और नमक की मात्रा तय मानक से अधिक होगी, उनके पैकेट या डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर हाई शुगर, हाई फैट और हाई सॉल्ट के रूप में चेतावनी लाल रंग में अंकित करना अनिवार्य किया जा सकता है।

    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) (Food Safety and Standards Authority of India – FSSAI) ने जस्टिस जेबी पारदीवाला की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ के समक्ष दाखिल छह पन्नों के हलफनामे में यह जानकारी दी। कोर्ट को बताया गया कि इससे जुड़ा प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। एफएसएसएआई ने कहा कि यह चेतावनी तस्वीर (षट्भुजाकार) के रूप में अंकित होगी, ताकि ग्राहक आसानी से पहचान सकें कि किन खाद्य पदार्थ में नमक या चीनी जैसे पदार्थ अधिक ‌मात्रा में हैं। इसका फॉन्ट साइज पैकेट के पीछे न्यूट्रिशन की जानकारी देने वाली टेबल में इस्तेमाल होने वाले फॉन्ट साइज से एक पॉइंट बड़ा होगा।


    जनहित याचिका पर सुनवाई

    एफएसएसएआई ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में लगाई गई फटकार के बाद दाखिल किया है। कोर्ट गैर सरकारी संस्था ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रहा है।


    दो चरणों में लागू होगा

    प्रस्तावित नियम दो चरण में लागू किए जाएंगे, ताकि इंडस्ट्री को उत्पाद दोबारा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले। पहले चरण में उन उत्पादों पर नियम लागू होंगे, जिनमें दो या अधिक विशिष्ट पोषक तत्व एडेड फैट, एडेड शुगर या नमक अधिक मात्रा में हों। दूसरे चरण में वे उत्पाद शामिल होंगे, जिनमें एक पोषक तत्व अधिक मात्रा में हो।


    इन उत्पादों को छूट मिलेगी

    हलफनामे में एफएसएसएआई ने कहा है कि सिंगल-इंग्रीडिएंट यानी एक ही चीज से बने खाद्य पदार्थों और उन चीजों को प्रस्तावित नियम से छूट दी जाएगी, जिनमें प्राकृतिक रूप से वसा, चीनी या नमक अधिक होता है। जैसे घी, खाद्य तेल, गुड़ और शहद आदि। हालांकि, खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग के बाकी नियमों से छूट नहीं मिलेगी।

  • MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक

    MP: .ग्वालियर में बारिश से सड़कों पर भरा घुटनों तक पानी… उसी में धरने पर बैठे विधायक


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) के शंकरपुर में बारिश के बाद घुटनों तक पानी भर गया। जलभराव के विरोध में कांग्रेस विधायक साहब सिंह गुर्जर (Congress MLA Sahib Singh Gurjar) पानी से भरी सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने नगर निगम पर नालियों की सफाई और जल निकासी में लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थायी समाधान की मांग की।

    दरअसल, ग्वालियर शहर में झमाझम बारिश ने एक बार फिर नगर निगम के जल निकासी के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। बारिश के बाद वार्ड क्रमांक 64 के शंकरपुर इलाके में हालात ऐसे हो गए कि सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गईं। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश के बीच जलभराव की समस्या का विरोध करने के लिए कांग्रेस के ग्रामीण विधायक साहब सिंह गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी से लबालब सड़क पर ही धरना शुरू कर दिया। विधायक के धरने में स्थानीय नागरिक भी शामिल हो गए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    विधायक साहब सिंह गुर्जर ने मौके से फेसबुक लाइव किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शंकरपुर में जलभराव की समस्या आज की नहीं है, बल्कि पिछले दो साल से लगातार बनी हुई है। इस समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया। विधायक का आरोप है कि इलाके में नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश होते ही सड़कें पानी में डूब जाती हैं। स्थानीय लोगों को हर बार इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    बारिश के बीच विधायक के धरने के दौरान लोगों ने ‘नगर निगम होश में आओ’ के नारे लगाए। जलभराव के बीच किया गया यह विरोध प्रदर्शन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क पर इतना पानी भर जाता है कि लोगों के लिए घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति बारिश के बाद सामने आ जाती है।

    विधायक और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शंकरपुर की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि जब तक इलाके में बेहतर जल निकासी व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तब तक हर बारिश में लोगों को इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ेगी। बारिश थमी तो पानी भी धीरे-धीरे उतर गया, लेकिन शंकरपुर में जलभराव को लेकर नगर निगम की तैयारियों और दावों पर सवाल जरूर खड़े हो गए।

  • निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क

    निजी यात्रा पर गए इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लापता… नेपाल बाढ़ के बाद से नहीं हो रहा संपर्क


    नई दिल्ली।
    इंफोसिस (Infosys) ने शुक्रवार को बताया कि उसकी सहायक कंपनी इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज (Infosys Public Services) के प्रमुख लैक्स गोपीसेट्टी (Lax Gopisetty) नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से संपर्क में नहीं हैं। इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज, सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी इंफोसिस की सहायक कंपनी है। यह कंपनी मुख्य रूप से अमेरिका और कनाडा के सरकारी क्षेत्र के लिए काम करती है।

    इंफोसिस ने बताया कि गोपीसेट्टी निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे। कंपनी ने कहा कि इस समय उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता उनकी सुरक्षा और सेहत सुनिश्चित करना है। इंफोसिस ने एक बयान में कहा, हम पुष्टि कर सकते हैं कि हमारे सहयोगी लैक्स गोपिसेट्टी फिलहाल संपर्क में नहीं हैं, जो निजी यात्रा पर इस इलाके में गए थे।

    कंपनी ने आगे कहा कि वह संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर जानकारी जुटा रही है। साथ ही गोपीसेट्टी से संपर्क करने की कोशिश भी की जा रही है। इंफोसिस ने यह भी कहा कि वह गोपीसेट्टी के परिवार के लगातार संपर्क में है। कंपनी इस मुश्किल समय में परिवार को हर जरूरी मदद दे रही है।

    इंफोसिस ने कहा, हम परिवार के लगातार संपर्क में हैं और इस मुश्किल समय में हर जरूरी मदद दे रहे हैं। हमारी संवेदनाएं लैक्स और इस त्रासदी से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं। कंपनी ने कहा कि नेपाल में आई भयानक बाढ़ और इसमें हुई लोगों की मौत से उसे बहुत दुख हुआ है।


    फंसे हुए भारतीयों को लेकर एमईए ने क्या कहा?

    विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। वहीं, 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को इस स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मदद देने के लिए तैयार है।

    एमईए ने बताया कि चीन की तरफ फंसे 153 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।


    गोपीसेट्टी क्या काम करते हैं?

    इंफोसिस की वेबसाइट पर दी गई उनकी प्रोफाइल के मुताबिक, गोपीसेट्टी सरकारी क्षेत्र के संगठनों को रणनीति, तकनीक, कामकाज और बदलाव से जुड़े मामलों में सलाह देते हैं। इसका मकसद सरकारी एजेंसियों के काम और लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करना है। वह कंपनी की रणनीति और उसे लागू करने के काम की भी देखरेख करते हैं, ताकि तय उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।

    इस पद पर आने से पहले गोपीसेट्टी इंफोसिस में ग्लोबल वाइस प्रेसिडेंट थे। वह बिजनेस एप्लीकेशंस और डिजिटल वर्कस्पेस सर्विस के प्रमुख भी थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशिया में इस काम का विस्तार किया।

    इंफोसिस में शामिल होने से पहले गोपिसेट्टी एक्सेंचर में प्रबंध निदेशक थे। वहां उन्होंने उत्तर अमेरिका में कंपनी के हेल्थ एंड पब्लिक सर्विसेज कारोबार के एक हिस्से का नेतृत्व किया। इंफोसिस की वेबसाइट के मुताबिक, गोपीसेट्टी ने बियरिंगपॉइंट, आईबीएम, पीडब्ल्यूसी और एचसीएल में भी तेजी से बढ़ते कारोबार और सेवाओं को खड़ा किया है।

  • NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार

    NTA की व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी….. पूरी प्रक्रिया की समीक्षा में जुटी सरकार


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) (National Testing Agency -NTA) की मौजूदा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए परीक्षाओं के आयोजन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, परिणाम तैयार करने और शिकायतों के निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा (Review) की जा रही है।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी (Pralhad Joshi) लगातार विशेषज्ञों के साथ बैठकें कर रहे हैं। मंत्रालय का जोर एनटीए के पूरे परीक्षा तंत्र को अधिक मजबूत, विश्वसनीय, तकनीक-सक्षम और पारदर्शी बनाने पर है। इसके लिए देश और दुनिया में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं यानी ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ का अध्ययन किया जा रहा है। कई महत्वपूर्ण बदलावों की तैयारी है। इनमें परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षित संचालन, परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही, तकनीकी सुरक्षा, मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया को और मजबूत करना शामिल है।


    बेस्ट प्रैक्टिसेज होंगी साझा

    एनटीए में सुधार के लिए विभिन्न संस्थानों, परीक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी विशेषज्ञों से बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने को कहा जा रहा है। उद्देश्य विश्वसनीयता कायम रखना है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में एक संयुक्त सचिव, तीन निदेशक और एक संयुक्त निदेशक की नियुक्ति की है।

    कार्मिक मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश के मुताबिक, 2005 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) अधिकारी अंशुमान शर्मा को पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए एनटीए में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। मंत्रालय की ओर से 27 अगस्त को जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार, भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के अधिकारी सत्या एस., भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रवि कुमार सिंह और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी. को निदेशक नियुक्त किया गया है। वहीं, 2016 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (सीमा शुल्क एवं अप्रत्यक्ष कर) के अधिकारी अमित समदरिया को संयुक्त निदेशक नियुक्त किया गया है।

    मंत्रालय के सर्कुलर के अनुसार, नियुक्त अधिकारियों को आदेश जारी होने के तीन सप्ताह के भीतर अपना नया पद संभालना होगा। हाल ही में सरकार ने एनटीए की परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलावों की घोषणा की थी।


    कौन से बदलाव संभावित

    – प्रश्नपत्र सुरक्षा : प्रश्नपत्रों की डिजिटल एन्क्रिप्शन, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा शुरू होने तक बहु-स्तरीय एक्सेस कंट्रोल।
    – अभ्यर्थी की पहचान : आधार/डिजिटल आईडी के साथ बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन जैसी बहु-स्तरीय पहचान व्यवस्था।
    – परीक्षा केंद्रों की निगरानी : सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग, एआई आधारित संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और केंद्रों की रियल टाइम निगरानी।
    – परीक्षा केंद्रों का चयन : केंद्रों की रैंकिंग और जोखिम के आधार पर उनकी नियमित ऑडिटिंग, ताकि संदिग्ध या कमजोर केंद्रों को हटाया जा सके।
    – चार-स्तरीय जांच : प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर प्रिंटिंग, वितरण और परीक्षा संचालन तक अलग-अलग स्तरों पर स्वतंत्र सत्यापन।
    – तकनीकी सुरक्षा : सर्वर, परीक्षा सॉफ्टवेयर और डेटा के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑडिट, लॉग मॉनिटरिंग और बैकअप व्यवस्था।

  • तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट

    तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और झील फटने से बढ़ा खतरा, बिहार के इन क्षेत्रों में हाई अलर्ट


    पटना।
    कुदरत के कहर से जूझ रहे नेपाल (Nepal) पर शुक्रवार को खतरा तब और बढ़ गया, जब तिब्बत-नेपाल सीमा (Tibet-Nepal border) पर बनी एक और झील फट गई। संभावित खतरे से निबटने के लिए बिहार के सभी तटबंधों की चौकसी बढ़ा दी गई है। सरकार के आदेश पर वाल्मीकिनगर एवं कोसी बराज (Kosi Barrage) पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषकर गंडक नदी के जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव और भारी मात्रा में मलबा के आगमन को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने सारण तटबंध सहित सभी महत्वपूर्ण तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी का आदेश दिया गया है।


    पड़ोसी देश में जलप्रलय के बाद कोसी बराज पर बढ़ी सतर्कता

    नेपाल में आई बाढ़ से भारी तबाही के बाद वीरपुर बराज पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं। सभी स्पर, स्टड एवं अन्य संरचनाओं की स्थिति सामान्य है। कंट्रोल रूम के अनुसार शुक्रवार सुबह आठ बजे कोसी बराज से घटते क्रम में 1,42,360 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसी समय बराह क्षेत्र में 90,800 क्यूसेक दर्ज किया गया। दोपहर 12 बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज 1,34,225 क्यूसेक दर्ज हुआ, जबकि बराह में बढ़कर 99,500 क्यूसेक रहा। शाम छह बजे कोसी बराज का डिस्चार्ज बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक पहुंच गया। बराह में डिस्चार्ज 99,500 क्यूसेक रहा। विभाग अलर्ट है। नेपाल के भोटे कोशी से 10 हजार क्यूसेक तक अतिरिक्त पानी आने की संभावना है, जिसका कोसी के प्रवाह पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।


    दिन रात काम कर रही इंजीनियरों की टीम

    संभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दे दिया गया है, ताकि बाढ़ आने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी जाए। जल संसाधन विभाग ने संबंधित जिलों के पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने को कहा है। संबंधित जिले के जिलाधिकारी अपने अधीन तटबंधों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग के मुख्यालय स्तर पर हर आधे घंटे पर गंडक नदी के डिस्चार्ज की जानकारी ली जा रही है। इंजीनियरों की टीम चौबीसो घंटे काम कर रही है।


    क्या बोले डिप्टी सीएम विजय चौधरी?

    उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि ग्लेशियर फटने से नेपाल में बाढ़ की तबाही हुई है। लेकिन बिहार के वाल्मिकीनगर अवस्थित गंडक बराज से नेपाल के उस केंद्रबिंदु की दूरी लगभग 250-300 किलोमीटर है। इस कारण नेपाल से आने वाले पानी का प्रवाह-प्रभाव नीचे आते-आते कम हो गया है। इसका लाभ बिहार को हुआ। इसके अलावा गंडक के पूरे प्रवाह में पहले से भी सामान्य से कम पानी था। खतरे के निशान से नदी बह रही थी। इसलिए जो भी पानी आया, उससे बहुत भयावह स्थिति नहीं बनी। शुक्रवार को गंडक में वाल्मीकिनगर बराज के समीप लगभग एक लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होता रहा।


    नेपाल की दो दर्जन नदियों से उत्तर बिहार को खतरा

    नेपाल की पहाड़ियों से आने वाली गंडक समेत दो दर्जन से अधिक पहाड़ी नदियों से पश्चिम चंपारण जिले समेत उत्तर बिहार को खतरा है। नेपाल की त्रिशूली नदी जैसा हादसा सीमावर्ती क्षेत्रों में होने पर पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार में गंडक व सिकरहना तबाही मचा सकती हैं। नेपाल से आने वाली नारायणी नदी ही भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। इसमें काली गंडक, मर्स्यांगदी, माड़ी और सेती नदियां आकर मिलती हैं। नेपाल के देवघाट के पास नारायणी में त्रिशूली नदी मिलती है।

    नेपाल डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के समन्वयक डॉ. विवास बहादुर बस्न्यात व नवलपरासी जिले के वरिष्ठ जल विज्ञानी बिनोद पराजुली बताते हैं कि त्रिशूली नदी तिब्बत के क्यिरोंग जिले की पेखु कांगरी पर्वतमाला से निकलती है। त्रिशूली नदी अपने साथ भोटेकोशी, ल्हेन्दे खोला, मैलमंग खोला, चिलीमे खोला, आंखू खोला और बूढ़ी गंडक नदी को लेकर नारायणी में मिलती है। ऊंची पहाड़ियों से निकलने के कारण यह नदी बेहद खतरनाक मानी जाती है। त्रिशूली नदी में ही बाढ़ के कारण नेपाल में भारी तबाही मची है। दोबारा झील टूटने से इसका असर भारतीय क्षेत्र पर भी पड़ सकता है।


    तिब्बत के नाले से निकली गंडक, नाम जुगूं खोला था

    नदियों के विशेषज्ञ देवी लाल यादव ने बताया कि गंडक तिब्बत के कागबेनी के नाले से निकलती है। यहां उसका नाम जुगूं खोला है। अन्नपूर्णा के पास यह काली गंडकी के नाम से जानी जाती है। इसमें ठाकुर जी मिलती हैं। आगे बढ़ने पर कृष्णा गंडकी और देवघाट में नारायणी के नाम से जानी जाती है। बराज से पूर्व यह गंडक हो जाती है। नेपाल में 123 लेक आउट हैं। इन झीलों पर अवरोधक बने हुए हैं। कभी भी इनमें बर्स्ट आउट हो सकता है। इससे भारी तबाही मच सकती है।

    सिकरहना लाई थी तबाही
    रामनगर और गौनाहा से आने वाली डेढ़ दर्जन पहाड़ी नदियां लौरिया, चनपटिया व सिकटा में आकर सिकरहना से मिलती हैं। 2017 में सिकरहना में बाढ़ आने पर चंपारण, मुजफ्फरपुर समेत बेगूसराय में तबाही मची थी।

    बताते चलें कि 26 अगस्त को नेपाल में प्रलयंकारी बाढ़ आ गई थी। पानी गंडक में प्रवाह होने से गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ आने की संभावना जताई गई थी। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज पर मुख्यालय स्तर से अधीक्षण अभियंता के नेतृत्व में एक तकनीकी दल को तैनात कर दिया है। गंडक बराज के सभी 36 गेटों को खोल दिया है, ताकि नेपाल से आने वाला बाढ़ का पानी निकल सके।

  • इस साल जन्माष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस …. पंचांग में देखें सही तारीख और मुहूर्त

    इस साल जन्माष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस …. पंचांग में देखें सही तारीख और मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    भगवान श्रीकृष्ण (Lord Sri Krishna) का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (Krishna Paksha Ashtami) तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस वजह से हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Shri Krishna Janmashtami) इस तिथि को ही मनाते हैं और कोशिश करते हैं कि उस दिन तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र भी हो. लेकिन ऐसा हर बार हो, यह संभव नहीं है. इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को है या फिर 5 सितंबर को? इस पर कन्फ्यूजन दूर करने के लिए पंचांग से जानते हैं जन्माष्टमी की सही तारीख और मुहूर्त के बारे में.

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के लिए भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 4 सितंबर को 2:25 एएम पर शुरू हो रही है और 5 सितंबर को 12:13 एएम तक विद्यमान रहेगी. उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो जन्माष्टमी की तिथि 4 सितंबर को पूरे दिन है, वहीं रोहिणी नक्षत्र में रात 11 बजकर 04 मिनट तक है।

    भगवान श्रीकृष्ण जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, तो 4 और 5 सितंबर की रात वह समय भी प्राप्त होगा. इस आधार पर इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सिंतबर शुक्रवार को मनाना उत्तम रहेगा. भाद्रपद में और भी कई व्रत-त्योहार हैं।


    वज्र योग और मृगशिरा नक्षत्र में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

    4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के समय मृगशिरा नक्षत्र और वज्र योग होगा. बाल गोपाल भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मध्य रात्रि में मनाते हैं. उस दिन हर्षण योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 03:44 पी एम तक रहेगा. उसके बाद से वज्र योग प्रारंभ होगा, जो 5 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. वहीं रोहिणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 11:04 पी एम तक है, उसके बाद से मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ है।


    जन्माष्टमी मुहूर्त 2026

    इस साल जन्माष्टमी का मुहूर्त रात में 11:57 बजे से लेकर देर रात 12:43 बजे तक है. इसमें भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा और उत्सव मनाया जाएगा. जन्माष्टमी का ब्रह्म मुहूर्त 04:30 ए एम से 05:15 ए एम तक रहेगा. इस समय में स्नान करके व्रत का संकल्प कर लें. अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:55 बजे से लेकर दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा. अमृत काल रात में 08:03 पी एम से लेकर 09:33 पी एम तक है.


    जन्माष्टमी व्रत का पारण समय

    जो लोग जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे, वे देर रात 12:43 बजे के बाद पारण करके व्रत को पूरा करेंगे. जिनके यहां उदयाति​थि यानि सूर्योदय के बाद पारण होता है, वे 5 सितंबर को सूर्योदय बाद पारण करेंगे.

    जन्माष्टमी पर राहुकाल कब है?
    जन्माष्टमी के दिन राहुकल सुबह में 10 बजकर 45 मिनट पर प्रारंभ होगा और दोपहर में 12 बजकर 20 मिनट पर खत्म होगा. उस दिन आपको कोई शुभ काम करना है तो राहुकाल का ध्यान रखें. उसमें न करें।

  • नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी

    नेपाल त्रासदी पर चीन की चुप्पी पर सवाल: सिर्फ 5 मौतों की जानकारी, तिब्बत में पीड़ितों से बात करने पर भी पाबंदी


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 579 हो गई है, जबकि करीब 2 हजार लोग अब भी लापता हैं। भारत के भी सैकड़ों नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा का असर चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ा है, लेकिन चीन की ओर से अब तक सिर्फ 5 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। इससे चीन की ओर से वास्तविक नुकसान और जनहानि की जानकारी छिपाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन में तबाही, लेकिन जानकारी बेहद सीमित

    द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का सरकारी मीडिया भी इस आपदा को लेकर व्यापक रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है। कुछ पत्रकार प्रभावित इलाकों में पहुंचते हैं, लेकिन वहां पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के बजाय रिपोर्टिंग मुख्य रूप से सरकारी राहत एवं बचाव प्रयासों तक सीमित रहती है। रिपोर्टों में चीन की ओर से किए जा रहे राहत कार्यों को प्रमुखता दी जाती है, जबकि आम लोगों की स्थिति सामने नहीं आ रही है।

    नेपाल में बाढ़ के प्रभाव को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीन के प्रभावित हिस्सों में भी नुकसान व्यापक हो सकता है। इसके बावजूद चीन की ओर से जनहानि और तबाही का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    तिब्बत में पत्रकारों और स्थानीय लोगों पर पाबंदियों का आरोप

    चीन तिब्बत पर अपना दावा करता है, जबकि तिब्बत की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की मांग लंबे समय से उठती रही है। रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों की पहुंच पर कड़े प्रतिबंध हैं। स्थानीय लोगों के पत्रकारों से बातचीत करने पर भी कार्रवाई का खतरा रहता है।

    तिब्बत में भाषा और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को लेकर भी चीन की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है। ऐसे में मौजूदा आपदा के दौरान भी स्थानीय लोगों की आवाज और जमीनी हालात के सामने न आने पर सवाल उठ रहे हैं।

    चीन ने भेजी राहत टीम, शी जिनपिंग ने की बैठक

    जानकारी के मुताबिक, चीन ने प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव दल भेजे हैं। हालांकि, इन टीमों ने मौके पर किस स्तर पर और क्या काम किया, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    चीनी मीडिया ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की। वहीं, प्रीमियर ली कियांग ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया।

    दो और ग्लेशियरों पर नजर

    नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारियों ने अब दो और ग्लेशियरों पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। ये दोनों ग्लेशियर उस ग्लेशियर के आसपास स्थित हैं, जिसके टूटने के बाद बुधवार को विनाशकारी बाढ़ आई थी। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आगे किसी और आपदा की आशंका को लेकर निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

    4 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया

    नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा अपडेट के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक करीब 4,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। हालांकि लापता लोगों की संख्या अभी भी बढ़ रही है और ताजा आंकड़े के अनुसार 1,924 लोग लापता हैं।

    बचाव अभियान को तेज करने के लिए नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 15,000 से ज्यादा जवानों को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है।

    लापता विदेशियों के आंकड़े अलग-अलग

    लापता विदेशी नागरिकों की संख्या को लेकर अलग-अलग सरकारी आंकड़े सामने आए हैं। एक सरकारी रिपोर्ट में 517 विदेशी नागरिकों और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के लापता होने की बात कही गई है।

    वहीं, नेपाल पुलिस के पहले जारी आंकड़ों में लापता विदेशी नागरिकों की संख्या 575 बताई गई थी। इनमें 36 देशों के नागरिक शामिल हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशियों में 65 अमेरिकी, 62 यूक्रेनी और 33 ब्रिटिश नागरिक भी हैं।

    इसके अलावा प्रभावित इलाकों से 149 नेपाली पर्यटक और 1,407 स्थानीय नागरिक भी लापता बताए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खोज, राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं।

  • ‘आपने 200 साल में किया, हमसे कुछ दशकों में बदलाव की उम्‍मीद क्यों?’ CJI सूर्यकांत ने विकसित देशों से पूछा सवाल

    ‘आपने 200 साल में किया, हमसे कुछ दशकों में बदलाव की उम्‍मीद क्यों?’ CJI सूर्यकांत ने विकसित देशों से पूछा सवाल


    नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विकसित देशों से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की उनकी अपेक्षाओं पर सवाल उठाते हुए जलवायु न्याय और साझा जिम्मेदारी की जरूरत बताई। लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सचिवालय में 56 देशों के साझा मंच पर ‘जलवायु न्याय पर नीति संवाद’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिन औद्योगिक देशों को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ने में करीब दो सदियां लगीं, वे अब विकासशील देशों से कुछ ही दशकों में उसी बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।

    विकासशील देशों पर तेजी से बदलाव का दबाव

    CJI ने कहा कि जो देश अभी औद्योगीकरण के दौर से गुजर रहे हैं, उनसे तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने की अपेक्षा की जाती है। ऐसा न कर पाने पर उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ता है। दूसरी ओर, जिन विकसित देशों की ओर से यह बदलाव जल्द करने की मांग की जा रही है, उन्होंने अपनी अर्थव्यवस्था और औद्योगिक ताकत खड़ी करने में करीब दो सदियां कोयले और तेल पर निर्भर रहकर बिताईं।

    उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस बदलाव की रफ्तार तय करते समय विकासशील देशों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।

    कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम से जुड़ी नई चुनौती

    CJI सूर्यकांत ने कहा कि कॉमनवेल्थ देशों के स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण कॉपर, कोबाल्ट और लिथियम जैसे खनिजों पर भी निर्भर करता है। इन खनिजों के खनन का पर्यावरण और समाज दोनों पर असर पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि विकासशील देश अपनी भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पहले से कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में उन्हें अवास्तविक गति से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए मजबूर करना नई समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए ऊर्जा परिवर्तन की तात्कालिकता को निष्पक्षता और साझा जिम्मेदारी के साथ संतुलित करना जरूरी है।

    पर्यावरण बनाम विकास नहीं, संतुलन का रास्ता जरूरी

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर्यावरण, पारिस्थितिकी और लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने जाम्बिया हाईकोर्ट के एक मामले का भी उदाहरण दिया, जिसमें पानी को प्रदूषित करने वाली कॉपर खनन कंपनी को जिम्मेदार ठहराया गया था।

    उनके मुताबिक, कॉमनवेल्थ के देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को बेहतर तरीके से लागू कर सकते हैं, ताकि इसकी भारी कीमत आम लोगों को न चुकानी पड़े।

    CJI ने कहा कि जलवायु से जुड़े मामलों में हर देश की अदालत को नए सिरे से अलग कानूनी शब्दावली गढ़ने की जरूरत नहीं है। अदालतें कॉमनवेल्थ के दूसरे देशों में प्रभावी रहे विचारों और समाधानों से सीख सकती हैं। हालांकि, इन्हें अपने देश के संवैधानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय हालात के मुताबिक ढालना होगा।

    घायल जवानों के लिए सड़क चौड़ीकरण का दिया उदाहरण

    CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि घायल अर्धसैनिक बलों के जवानों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए सड़क चौड़ी करने के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया था।

    उन्होंने कहा कि अदालत के सामने दुविधा यह थी कि न तो पेड़ काटने वाले अधिकारियों को पुरस्कृत किया जा सकता था और न ही घायल जवानों के लिए एंबुलेंस के रास्ते को रोका जा सकता था।

    ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण पर रोक लगाने के बजाय बड़े पैमाने पर क्षतिपूरक वनीकरण का आदेश दिया। CJI ने बताया कि इस वनीकरण की निगरानी अब भी की जा रही है।

    ‘कई बार तीसरा रास्ता तलाशना पड़ता है’

    CJI ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को हमेशा एक-दूसरे के विरोधी पक्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कई परिस्थितियों में अदालतों को ऐसा समाधान तलाशना होता है, जिससे पर्यावरण की सुरक्षा के साथ विकास की जायज जरूरतें भी पूरी हो सकें।

    उनके मुताबिक, न्यायिक रचनात्मकता का उद्देश्य कई बार ऐसा तीसरा रास्ता तलाशना होता है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश हो।

  • बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर

    बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर


    काठमांडो। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाने के बाद अब राजधानी काठमांडो की आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। देश के प्रमुख सप्लाई रूट पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाईवे को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा, इसकी अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

    पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो की सप्लाई क्यों प्रभावित?

    काठमांडो के लिए नागढुंगा से भरतपुर तक पृथ्वी हाईवे का करीब 180 किलोमीटर हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग के जरिए राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचती हैं।

    बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं त्रिशूली कॉरिडोर और आसपास के राजमार्गों पर करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने बताया कि अधिकारी रास्ता बहाल करने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा सामान

    सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के मुताबिक शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से में बारी-बारी से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया था। वहीं गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

    हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को दोबारा बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन के बाद सड़कों पर जमा मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है और शाम पांच बजे तक अर्थमूवर मशीनों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी काठमांडो में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

    कालिमाटी बाजार में सब्जियों की आवक घटी

    पृथ्वी हाईवे बंद होने का असर काठमांडो के प्रमुख कालिमाटी फल एवं सब्जी बाजार में भी दिखाई दिया है। मंगलवार को यहां 775 टन सब्जियां, फल और मछली पहुंची थी। बुधवार को आवक 771 टन रही, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 477 टन रह गई।

    बाजार विकास बोर्ड के सूचना अधिकारी बिनय श्रेष्ठ के अनुसार पृथ्वी हाईवे से आने वाला सामान रास्ते में फंसा हुआ है। इस मार्ग से सब्जियों की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, हालांकि अन्य रास्तों से कुछ सामान बाजार तक पहुंच रहा है।

    चार-पांच दिन का ईंधन स्टॉक

    हाईवे बंद होने के कारण पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने फिलहाल लोगों को राहत दी है। निगम के मुताबिक थानकोट डिपो में मौजूद पेट्रोलियम उत्पाद चार से पांच दिन तक चलने के लिए पर्याप्त हैं।

    निगम के उप निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि इस अवधि के भीतर पृथ्वी हाईवे के खुलने की उम्मीद है। इसलिए लोगों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार भी जरूरी वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    कालाबाजारी पर सरकार की नजर

    आपदा के बीच सरकार को इस बात की भी चिंता है कि कहीं कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर सामान महंगा न कर दें। वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने लोगों से बाजार में कालाबाजारी या कृत्रिम कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है।

    विभाग और स्थानीय प्रशासन बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम तथा आपदा प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक समन्वय इकाई बनाई है। संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी इसी तरह की इकाइयां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रसुवा से धादिंग तक भारी तबाही

    बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता और प्रभावित लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

    बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इसे हाल के वर्षों की बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत अभियान के साथ-साथ राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    उपभोक्ता संगठनों ने मांगी सख्ती

    उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से वैकल्पिक मार्गों के जरिए जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने और संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

    उपभोक्ता अधिकार संरक्षण-नेपाल मंच के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिल्सिना ने कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और मनमाने तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि संकट के समय लोगों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि सरकार उनके साथ है और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी