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  • कृति सेनन बनीं जुनूनी निक्की और वरुण धवन दिखे डरे हुए, 'ऑब्सेशन' का रेस्टोरेंट सीन देखकर कांप उठेंगे आप

    कृति सेनन बनीं जुनूनी निक्की और वरुण धवन दिखे डरे हुए, 'ऑब्सेशन' का रेस्टोरेंट सीन देखकर कांप उठेंगे आप


    नई दिल्ली। हॉरर फिल्मों के शौकीनों के बीच इन दिनों फिल्म ऑब्सेशन को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इस फिल्म के हिंदी संस्करण को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ गई है क्योंकि बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन और कृति सेनन इसके मुख्य किरदारों को अपनी आवाज दे रहे हैं। फिल्म के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने से ठीक पहले दोनों सितारों ने निर्देशक अमर कौशिक के साथ मिलकर इसके एक बेहद चर्चित रेस्टोरेंट सीन को दोबारा फिल्माया है। इस वीडियो में कृति और वरुण का अंदाज इतना प्रभावशाली नजर आया कि सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    जियोहॉटस्टार ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस खास वीडियो को साझा किया है। इसमें वरुण धवन और कृति सेनन एक रेस्टोरेंट में आमने सामने बैठे दिखाई देते हैं। शुरुआत में माहौल सामान्य लगता है लेकिन धीरे धीरे दृश्य में डर और बेचैनी का एहसास बढ़ने लगता है। वरुण के चेहरे पर घबराहट साफ दिखाई देती है जबकि कृति अपने किरदार निक्की के परेशान करने वाले और डरावने अंदाज को पेश करती नजर आती हैं। दोनों कलाकारों ने इस दृश्य को हिंदी में नए अंदाज के साथ निभाया है। निर्देशक अमर कौशिक भी इस रीक्रिएशन का हिस्सा बने।

    दरअसल वरुण धवन फिल्म में बेयर और कृति सेनन निक्की के किरदार को हिंदी आवाज दे रहे हैं। मूल फिल्म में इन भूमिकाओं को माइकल जॉनस्टन और इंडे नवारेटे ने निभाया है। हिंदी दर्शकों तक फिल्म का डर और रोमांच उसी प्रभाव के साथ पहुंचाने के लिए दोनों बॉलीवुड सितारों को चुना गया है। रेस्टोरेंट सीन का यह रीक्रिएशन फिल्म के प्रचार का हिस्सा है और इसे हिंदी संस्करण के आने से पहले जारी किया गया है।

    ऑब्सेशन की कहानी बेयर बेली नाम के एक युवक के इर्द गिर्द घूमती है। बेयर स्वभाव से शांत है और एक म्यूजिक स्टोर में काम करता है। वह अपनी सहकर्मी निक्की को पसंद करता है लेकिन अपने मन की बात कहने का साहस नहीं जुटा पाता। निक्की आत्मविश्वासी और मिलनसार है। बेयर की जिंदगी में तब बदलाव आता है जब उसे एक क्रिस्टल की दुकान में वन विश विलो नाम का रहस्यमयी खिलौना मिलता है। दुकान का कैशियर उसे चेतावनी देता है कि इस खिलौने का इस्तेमाल करने वालों के जीवन में मुसीबतें आई हैं।

    लेकिन प्यार में डूबा बेयर चेतावनी को नजरअंदाज कर देता है। वह विलो की टहनी तोड़कर इच्छा जाहिर करता है कि निक्की उससे दुनिया में किसी भी चीज से ज्यादा प्यार करे। शुरुआत में उसकी यह इच्छा पूरी होती दिखाई देती है। निक्की उसके करीब आने लगती है और उसे वैसा ही प्यार देने लगती है जिसकी बेयर लंबे समय से उम्मीद कर रहा था।

    हालांकि जल्द ही यह प्यार एक डरावने अनुभव में बदल जाता है। निक्की का लगाव जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगता है और उसका व्यवहार परेशान करने वाला तथा हिंसक होता जाता है। बेयर को समझ आने लगता है कि उसकी इच्छा पूरी होने की कीमत बेहद खतरनाक है। अब वह इस स्थिति से बाहर निकलने और अपनी इच्छा को पलटने का रास्ता तलाशता है।

    फिल्म का यही अनोखा विचार इसे सामान्य प्रेम कहानी से अलग बनाता है। वरुण और कृति के रीक्रिएट किए गए रेस्टोरेंट सीन ने हिंदी दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि दोनों सितारों की आवाज और अभिनय का यह नया मेल दर्शकों को कितना पसंद आता है।

  • नसीरुद्दीन शाह और पुनीत इस्सर के बीच वैचारिक टकराव, JNU और सरकार के मुद्दे पर अभिनेता ने उठाए तीखे सवाल

    नसीरुद्दीन शाह और पुनीत इस्सर के बीच वैचारिक टकराव, JNU और सरकार के मुद्दे पर अभिनेता ने उठाए तीखे सवाल


    नई दिल्ली। बॉलीवुड और टेलीविजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में दुर्योधन की भूमिका निभाकर घर घर में पहचान बनाने वाले पुनीत इस्सर ने दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के हालिया बयानों पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह उनके सीनियर ही नहीं बल्कि शिक्षक भी रहे हैं और एक बेहतरीन कलाकार हैं। इसके बावजूद देश से जुड़े मुद्दों पर उनके बयान देने के तरीके से वह सहमत नहीं हैं। पुनीत का आरोप है कि नसीरुद्दीन शाह कई अहम विषयों पर चुप रहते हैं और कुछ चुनिंदा मुद्दों पर ही अपनी राय सामने रखते हैं।

    एक समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान पुनीत इस्सर ने कहा कि नसीरुद्दीन शाह का सम्मान अपनी जगह है लेकिन जब कोई सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखता है तो उसे सभी पक्षों को ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक देश और दुनिया में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिन पर कलाकारों और बुद्धिजीवियों को अपनी बात रखनी चाहिए। पुनीत ने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह का नजरिया एकतरफा दिखाई देता है और वह वामपंथी तथा नक्सल समर्थक विचारों से जुड़े मुद्दों पर ही अधिक बोलते हैं। उन्होंने इसे चुनिंदा मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति बताया।

    पुनीत इस्सर ने अपनी बातचीत में जेएनयू के छात्रों और कथित टुकड़े टुकड़े गैंग का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में दोषी अपराधियों और जेल में बंद आतंकवादियों से जुड़े मामले सामने आते हैं तो कुछ लोग उनके समर्थन में आवाज उठाते हैं। पुनीत के अनुसार ऐसे मामलों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के प्रति जिम्मेदारी केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े विषयों पर भी स्पष्ट रुख सामने आना चाहिए। ये सभी पुनीत इस्सर के निजी विचार हैं।

    अभिनेता ने यह भी साफ किया कि उन्हें नसीरुद्दीन शाह के विचार रखने या सरकार की आलोचना करने के अधिकार से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात कहने और सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार है। लेकिन यदि किसी को मौजूदा सरकार की नीतियां पसंद नहीं हैं तो उसे राजनीतिक रास्ता भी अपनाना चाहिए। पुनीत ने कहा कि ऐसे लोगों को चुनावी मैदान में उतरना चाहिए जनता के बीच जाना चाहिए और चुनाव जीतकर सरकार को बदलने की कोशिश करनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार को जनता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना है। इसलिए केवल असहमति जताने के बजाय राजनीतिक विकल्प के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहिए। उनके इस बयान को नसीरुद्दीन शाह की हालिया टिप्पणियों पर सीधी प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    दरअसल नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया था। छात्र अपनी छात्र यूनियन को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में खुद को दिमागी नक्सल बताया था। नसीरुद्दीन शाह ने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं का हौसला तोड़ने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया था।

    इन्हीं बयानों के बाद पुनीत इस्सर की प्रतिक्रिया सामने आई है। दोनों अभिनेता अपने अपने विचारों को लेकर चर्चा में हैं। इस पूरे मामले ने एक बार फिर फिल्मी दुनिया के कलाकारों की राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर राय को लेकर बहस तेज कर दी है।

  • जुकरबर्ग और काइली जेनर के गुप्त ठिकानों की चर्चा, 12 गुना बढ़ी बंकरों की मांग, आखिर किस खतरे से डर रहे अमीर?

    जुकरबर्ग और काइली जेनर के गुप्त ठिकानों की चर्चा, 12 गुना बढ़ी बंकरों की मांग, आखिर किस खतरे से डर रहे अमीर?


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर और प्रभावशाली लोग अब केवल आलीशान महलों और महंगी संपत्तियों तक सीमित नहीं रहना चाहते। संभावित युद्ध परमाणु हमले प्राकृतिक आपदाओं और वैश्विक अस्थिरता जैसी आशंकाओं के बीच कई अरबपति जमीन के नीचे सुरक्षित ठिकाने तैयार करवा रहे हैं। इन ठिकानों को आधुनिक बंकर का नाम दिया जा रहा है लेकिन इनकी बनावट किसी साधारण भूमिगत शरणस्थल जैसी नहीं है। इनमें आराम और विलासिता की ऐसी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं जो किसी पांच सितारा होटल या आलीशान रिसॉर्ट को भी टक्कर दे सकती हैं। इस बढ़ते चलन ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुनिया के अमीरों को किसी बड़ी तबाही का अंदेशा है या वे केवल भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने की तैयारी कर रहे हैं।

    इस चर्चा में फेसबुक की मूल कंपनी मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक हवाई में उनके विशाल परिसर के भीतर करीब 5000 वर्ग फीट का भूमिगत बंकर बनाए जाने की चर्चा है। इसे संभावित आपात स्थिति में सुरक्षित ठिकाने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस तरह की परियोजनाओं से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इसी तरह रियलिटी टीवी स्टार और कारोबारी काइली जेनर के लॉस एंजिल्स स्थित घर में भी भूमिगत सुरक्षित ठिकाना तैयार कराने की खबरें सामने आई हैं।

    इन बंकरों की खास बात यह है कि इन्हें केवल जान बचाने के लिए बनाए जाने वाले बंद कमरों की तरह नहीं देखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक और आलीशान सुविधाओं के साथ इन्हें लंबे समय तक रहने लायक बनाया जा रहा है। इनमें स्विमिंग पूल जिम आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और आरामदायक रहने की व्यवस्था जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। यानी किसी बड़ी आपदा या संकट की स्थिति में भी इनके मालिकों को रोजमर्रा की सुविधाओं और आराम से समझौता न करना पड़े।

    इस कारोबार में बढ़ती दिलचस्पी का अंदाजा एक वास्तुकला फर्म के दावे से लगाया जा सकता है। फर्म के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में भूमिगत बंकरों को लेकर पूछताछ में करीब 12 गुना वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि सुरक्षित भूमिगत ठिकानों की मांग अब केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। आर्थिक रूप से सक्षम लोग भविष्य के संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए ऐसी परियोजनाओं में रुचि दिखा रहे हैं।

    आखिर इन बंकरों की मांग इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है। इसके पीछे कई संभावित कारण माने जा रहे हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव युद्ध की आशंकाएं परमाणु हथियारों का खतरा और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी प्राकृतिक आपदाएं लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। इसके अलावा महामारी और तकनीकी व्यवस्था में बड़े व्यवधान जैसी परिस्थितियों ने भी आपातकालीन तैयारी के महत्व को चर्चा में ला दिया है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि बंकर बनवाने वाले सभी लोग किसी निश्चित प्रलय या विनाश की आशंका से ऐसा कर रहे हैं।

    दरअसल अरबपतियों के लिए संपत्ति की सुरक्षा के साथ अपनी और परिवार की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। जमीन के नीचे तैयार किए जा रहे ये ठिकाने इसी सोच का हिस्सा हो सकते हैं। दूसरी ओर इनकी बढ़ती मांग ने सुरक्षा और विलासिता के नए बाजार को भी जन्म दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बंकर बनाने का यह चलन केवल अमीरों तक सीमित रहता है या आम लोगों के बीच भी आपातकालीन सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाता है। फिलहाल इतना साफ है कि दुनिया के कुछ सबसे संपन्न लोग भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए जमीन के नीचे अपनी अलग दुनिया तैयार करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

  • ईरान के पास पहुंचा जेडी वेंस का शांति संदेश, तेहरान की चुप्पी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, क्या खत्म होगा अमेरिका से युद्ध?

    ईरान के पास पहुंचा जेडी वेंस का शांति संदेश, तेहरान की चुप्पी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, क्या खत्म होगा अमेरिका से युद्ध?


    नई दिल्ली। अमेरिका (America)और ईरान (Iran)के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने की कोशिशों के बीच कूटनीतिक हलचल (Diplomatic activity)एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump)के निर्देश पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा है। इस पत्र के जरिए दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने और सैन्य टकराव रोकने की संभावनाएं तलाशने की कोशिश की गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार तेहरान को यह पत्र मिल चुका है लेकिन अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया है। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें अब ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

    समाचार एजेंसी तस्नीम ने एक सूत्र के हवाले से बताया है कि ईरान को अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पत्र प्राप्त हो गया है। हालांकि तेहरान ने फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक जेडी वेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर यह संदेश भेजा है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खोलना और अमेरिका की ओर से संभावित नए सैन्य हमलों को रोकने की संभावनाओं पर चर्चा करना है। फिलहाल यह पहल किसी अंतिम शांति समझौते की शर्तें तय करने के बजाय बातचीत की रूपरेखा तैयार करने पर केंद्रित बताई जा रही है।

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। उस दिन अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस्राइल और पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। धीरे-धीरे यह संघर्ष व्यापक रूप लेता गया और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता चला गया।

    युद्ध का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर देखने को मिला। ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही पर सख्त पाबंदियां लगा दीं। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल खपत का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईरान ने इस समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि इस संबंध में मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है। तेहरान की प्रमुख मांगों में पूरे क्षेत्र में युद्धविराम लागू करना और विदेशों में जमा ईरानी संपत्तियों पर लगी रोक हटाना शामिल है। इसके अलावा ईरान अपने तेल उद्योग पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध खत्म करने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तत्काल हटाने की मांग भी कर रहा है।

    ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसकी ओर से तय किए गए सख्त ढांचे को कमजोर करने वाली किसी भी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे साफ है कि तेहरान बातचीत के लिए तैयार होने के बावजूद अपनी शर्तों पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर अमेरिका की पहल से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद जरूर जगी है लेकिन ईरान की चुप्पी ने स्थिति को अनिश्चित बना दिया है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान अमेरिकी प्रस्ताव पर सकारात्मक जवाब देगा या दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ेगा। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे तो समझौते की राह मुश्किल हो सकती है। फिलहाल दुनिया को तेहरान के जवाब और वाशिंगटन के अगले कदम का इंतजार है।

  • हनी ट्रैप का जाल या चीन की जासूसी चाल, Nvidia CEO जेन्सेन हुआंग को लेकर अमेरिकी एजेंसियों का बड़ा शक

    हनी ट्रैप का जाल या चीन की जासूसी चाल, Nvidia CEO जेन्सेन हुआंग को लेकर अमेरिकी एजेंसियों का बड़ा शक


    नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग को लेकर अमेरिका में एक बड़ा जासूसी विवाद सामने आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के हवाले से आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी मूल की एक महिला ने हुआंग के साथ करीबी संबंध बनाकर कंपनी से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां चीन तक पहुंचाने की कोशिश की। इस पूरे मामले को हनी ट्रैप और आर्थिक जासूसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले में किसी आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में ऐलिस हुआंग नाम की महिला का जिक्र किया गया है। बताया गया है कि वह सिंगापुर की क्लाउड डेटा सेंटर कंपनी मेगास्पीड में शीर्ष कार्यकारी पद पर काम कर रही थी। अमेरिकी अधिकारियों को पहले से ही इस कंपनी की गतिविधियों पर संदेह था। जांच एजेंसियों को आशंका थी कि मेगास्पीड अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर एनवीडिया के उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI चिप्स चीन तक पहुंचाने में भूमिका निभा रही है। इसी संदेह के आधार पर अमेरिकी वाणिज्य विभाग कंपनी की गतिविधियों की जांच कर रहा था।

    बताया गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने जब ऐलिस हुआंग की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई तो उसके कथित चीनी खुफिया संपर्कों को लेकर संदेह गहराया। इसी दौरान जांच में यह दावा सामने आया कि महिला ने एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग के साथ करीबी संबंध स्थापित किए थे। अमेरिकी एजेंसियों को आशंका थी कि इन संबंधों का इस्तेमाल कंपनी से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यावसायिक और तकनीकी जानकारियां हासिल करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में कौन सी गोपनीय जानकारी हासिल की गई और क्या कोई जानकारी चीन तक पहुंचाई भी गई थी।

    इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप को करीब एक साल पहले ही इस खुफिया जानकारी से अवगत करा दिया गया था। इसके बावजूद मामले में तत्काल कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। बताया गया है कि अमेरिकी प्रशासन को आशंका थी कि एनवीडिया के कारोबार पर किसी तरह की सख्ती का असर शेयर बाजार और अमेरिकी टेक्नोलॉजी उद्योग पर पड़ सकता है। इसके अलावा चीन के साथ पहले से संवेदनशील संबंधों में और तनाव बढ़ने की संभावना भी एक चिंता थी।

    दरअसल एनवीडिया के AI चिप्स इस समय वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा के केंद्र में हैं। इन चिप्स का इस्तेमाल सुपर कंप्यूटर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल और बड़े डेटा सेंटर तक में किया जाता है। अमेरिका चीन को उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक की आपूर्ति सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी सरकार की चिंता है कि अत्याधुनिक चिप्स चीन की तकनीकी और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में इस्तेमाल हो सकते हैं। ऐसे में किसी तीसरी कंपनी के माध्यम से इन चिप्स की आपूर्ति होने का संदेह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बन जाता है।

    इस मामले ने एक बार फिर वैश्विक तकनीकी कंपनियों की सुरक्षा और कॉर्पोरेट जासूसी के खतरे को चर्चा में ला दिया है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो इसका असर अमेरिका और चीन के तकनीकी संबंधों के साथ सेमीकंडक्टर कारोबार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल इस पूरे प्रकरण में सामने आए दावों और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

  • लखनऊ ट्रिपल मर्डर का खौफनाक वीडियो वायरल, पहले बेटे को मारी गोली फिर पिता और चाचा पर बरसाईं गोलियां, दो बार लोड की पिस्टल

    लखनऊ ट्रिपल मर्डर का खौफनाक वीडियो वायरल, पहले बेटे को मारी गोली फिर पिता और चाचा पर बरसाईं गोलियां, दो बार लोड की पिस्टल


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर मामले ने पूरे इलाके को दहला दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े नेता शिवा तिवारी उनके बेटे सुयश और भाई शिवेंद्र की हत्या का खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब दो मिनट 56 सेकेंड के इस वीडियो में आरोपी ऋषभ शुक्ला की पूरी वारदात कैमरे में कैद दिखाई दे रही है। वीडियो में आरोपी जिस तरह बेखौफ होकर एक के बाद एक गोलियां चलाता नजर आ रहा है उससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस हत्याकांड के सामने आने के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

    वायरल वीडियो के मुताबिक वारदात की शुरुआत पड़ोसियों के बीच हुए विवाद से हुई थी। शिवा तिवारी और उनके पड़ोसी ऋषभ शुक्ला के बीच पेड़ के चबूतरे के निर्माण और वहां कार खड़ी करने को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी बात को लेकर पहले ऋषभ और शिवा के बेटे सुयश के बीच कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। इसी दौरान ऋषभ ने पिस्टल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। वीडियो में दिखाई देता है कि उसने सबसे पहले सुयश को गोली मारी। गोली लगने के बाद सुयश जमीन पर गिर पड़ा।

    बेटे को गोली लगते देख शिवा तिवारी उसे बचाने के लिए दौड़े लेकिन आरोपी ने उन पर भी फायरिंग कर दी। शिवा के सिर में गोली लगी और वे जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुका और उन पर दोबारा गोलियां चलाईं। घटनास्थल पर मौजूद परिवार की महिलाओं की चीख पुकार के बीच आरोपी लगातार आक्रामक बना रहा। वीडियो में उसकी हरकतों से साफ दिखाई देता है कि वह किसी को भी अपने सामने आने देने के लिए तैयार नहीं था।

    इसी बीच शिवा तिवारी के भाई शिवेंद्र भी मौके पर पहुंचे। आरोपी ने उन्हें भी निशाना बनाया और उन पर कई गोलियां चलाईं। इस दौरान शिवेंद्र की बेटी सुमेधा अपने पिता को बचाने के लिए आरोपी के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही। वह लगातार रहम की गुहार लगाती रही लेकिन आरोपी ने उसकी बात नहीं मानी। वीडियो में परिवार के लोगों की बेबसी और आसपास मौजूद महिलाओं की चीखें सुनाई देती हैं। यह दृश्य पूरे घटनाक्रम को और भी भयावह बना देता है।

    वीडियो में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। फायरिंग के दौरान आरोपी की पिस्टल की मैगजीन खाली हो गई थी। इसके बाद उसने दोबारा मैगजीन लोड की और फिर से गोलियां चलानी शुरू कर दीं। तीन लोगों पर हमला करने के बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ। आसपास के कुछ लोग जब घायलों की मदद के लिए आगे बढ़े तो आरोपी ने उन्हें भी पिस्टल दिखाकर पीछे हटने की धमकी दी। गोलियों की आवाज सुनते ही मोहल्ले में अफरा तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे।

    घटना का एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है जिसमें पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचकर आरोपी ऋषभ को पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और उसके परिवार के कुछ सदस्यों को भी पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। इस हत्याकांड के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

    एक मामूली पड़ोसी विवाद का इस तरह तीन लोगों की हत्या में बदल जाना कई सवाल खड़े करता है। पेड़ के चबूतरे और कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिर इतना हिंसक कैसे हो गया इसकी जांच की जा रही है। वायरल वीडियो ने इस घटना की भयावहता को सामने ला दिया है और अब सभी की नजर पुलिस की जांच तथा आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

  • सुपर अल नीनो से भारत की आर्थिक विकास दर को खतरा, फसल उत्पादन घटेगा और महंगाई बढ़ेगीः IMF

    सुपर अल नीनो से भारत की आर्थिक विकास दर को खतरा, फसल उत्पादन घटेगा और महंगाई बढ़ेगीः IMF


    न्यूयार्क।
    भारत (India) की आर्थिक विकास दर (Economic Growth Rate) को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने सुपर अल नीनो (Super El Niño) के संभावित खतरे के प्रति आगाह किया है। IMF के मुताबिक, मौसम में होने वाले इस बदलाव से फसलों का उत्पादन घट सकता है, खाद्य महंगाई बढ़ सकती है और आम लोगों की खरीदारी करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।


    जनवरी में भारत की ग्रोथ का दोबारा आकलन करेगा IMF

    IMF की कम्युनिकेशन डायरेक्टर जूली कोजैक ने गुरुवार को कहा कि भारत के सामने सुपर अल नीनो से जुड़े कुछ खतरे हैं, लेकिन अभी तक ये हकीकत में सामने नहीं आए हैं।

    जूली कोजैक ने कहा, “IMF जनवरी में जारी होने वाले अपने अगले वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) अपडेट में भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान की दोबारा समीक्षा करेगा। यह समीक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि मौसम से जुड़े जोखिम किस तरह सामने आते हैं।”


    भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने का अनुमान

    बता दें IMF ने इसी महीने वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया था। इससे पहले जुलाई में IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.4% और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 6.7% ग्रोथ का अनुमान लगाया था।

    IMF के मुताबिक, भारत में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और सर्विस सेक्टर में भी अच्छी गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। यही वजह है कि मौसम से जुड़े संभावित खतरों के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान मजबूत बना हुआ है।


    क्या है सुपर अल नीनो और भारत को इससे क्या खतरा है?

    अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने से जुड़ी जलवायु संबंधी घटना है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ सकता है और भारत में मानसून की बारिश भी प्रभावित हो सकती है। अगर अल नीनो की स्थिति ज्यादा मजबूत होती है और बारिश में कमी आती है, तो इसका असर खेती और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।


    इसके तीन बड़े संभावित असर हैं

    1. फसल उत्पादन में गिरावट: बारिश कम होने से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
    2. खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी: अनाज, दालों और दूसरी खाने-पीने की चीजों की सप्लाई घटने पर कीमतें बढ़ सकती हैं।
    3. आम लोगों के बजट पर दबाव: खाने-पीने की चीजें महंगी होने से परिवारों की खरीदारी करने की क्षमता कम हो सकती है।

    हालांकि, इन आशंकाओं का मतलब यह नहीं है कि महंगाई या आर्थिक विकास पर असर पड़ना तय है। वास्तविक प्रभाव मौसम की स्थिति और कृषि उत्पादन में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।


    भारत की अर्थव्यवस्था पर रहेगी नजर

    IMF ने फिलहाल भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमान में सुपर अल नीनो के संभावित असर को शामिल करके कोई नई कटौती नहीं की है। संगठन का कहना है कि घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर की मजबूती से भारत की आर्थिक विकास दर को समर्थन मिल रहा है।

  • अजमतुल्लाह उमरजई ने T20 क्रिकेट में रचा इतिहास, नंबर-6 पर उतरकर ठोका 116 रन का तूफानी शतक, फुल मेंबर टीमों में ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बने

    अजमतुल्लाह उमरजई ने T20 क्रिकेट में रचा इतिहास, नंबर-6 पर उतरकर ठोका 116 रन का तूफानी शतक, फुल मेंबर टीमों में ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बने


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान के स्टार ऑलराउंडर अजमतुल्लाह उमरजई ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए ऐतिहासिक शतक जड़ा। उनकी तूफानी पारी की बदौलत अफगानिस्तान ने न केवल मुकाबले में दमदार वापसी की बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। उमरजई ने नंबर छह पर बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 116 रन बनाए और अपनी टीम को ऐसी स्थिति से बाहर निकाला जहां हार लगभग तय मानी जा रही थी।

    मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी अफगानिस्तान की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने महज पांच रन के स्कोर पर अपने चार अहम विकेट गंवा दिए। शुरुआती झटकों से टीम उबर भी नहीं पाई थी कि 38 रन के स्कोर तक उसके पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। लगातार गिरते विकेटों ने अफगानिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी थीं और ऐसा लग रहा था कि टीम बहुत कम स्कोर पर सिमट जाएगी। इसी नाजुक मोड़ पर अजमतुल्लाह उमरजई ने मोर्चा संभाला और जिम्बाब्वे के गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी शुरू कर दी।

    उमरजई ने अपनी पारी में पांच चौके और 12 गगनचुंबी छक्के लगाए। उन्होंने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट खेलते हुए गेंदबाजों पर दबाव बनाया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ बेहतरीन नियंत्रण भी देखने को मिला। उन्होंने तेजी से रन बनाकर अफगानिस्तान के स्कोर को आगे बढ़ाया और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। उनकी 116 रनों की पारी के दम पर अफगानिस्तान ने निर्धारित 20 ओवर में छह विकेट के नुकसान पर 222 रन बनाए और जिम्बाब्वे के सामने 223 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा।

    इस ऐतिहासिक पारी के साथ उमरजई ने फुल मेंबर अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच टी20 क्रिकेट में नंबर छह या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अफगानिस्तान के ही मोहम्मद नबी के नाम था जिन्होंने 2017 में आयरलैंड के खिलाफ 89 रन बनाए थे। उमरजई ने इस उपलब्धि को पीछे छोड़ते हुए 116 रन की शानदार पारी खेली। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित किया कि वह केवल गेंदबाजी में ही नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।

    223 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने भी हार नहीं मानी। कप्तान सिकंदर रजा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 56 गेंदों में 106 रन बनाए। उनकी पारी में पांच चौके और नौ छक्के शामिल रहे। रजा ने अकेले दम पर अफगानिस्तान के गेंदबाजों को चुनौती दी और टीम को जीत के करीब पहुंचाने की कोशिश की। हालांकि दूसरे छोर से उन्हें पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका। जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट खोकर 202 रन ही बना सकी।

    इस तरह अफगानिस्तान ने यह मुकाबला 19 रन से जीत लिया। उमरजई की ऐतिहासिक पारी टीम की जीत का सबसे बड़ा आधार बनी। इस जीत के साथ अफगानिस्तान ने मुकाबले के अलावा टी20 सीरीज भी अपने नाम कर ली। शुरुआती पांच विकेट जल्दी गंवाने के बाद जिस तरह उमरजई ने पारी को संभाला वह क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार प्रदर्शन बन गया। उनका यह शतक अफगानिस्तान की टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजी की ताकत और मुश्किल परिस्थितियों में वापसी करने की क्षमता का शानदार उदाहरण है।

  • 100 फीसदी एथनॉल वाले ईंधन को मंजूरी देने पर SC ने सरकार से पूछा-कैसे करेंगे सप्लाई?

    100 फीसदी एथनॉल वाले ईंधन को मंजूरी देने पर SC ने सरकार से पूछा-कैसे करेंगे सप्लाई?


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को सरकार (Government) से पूछा कि अगर 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों (ई-100) को अनुमति दी गई है, तो ईधन (100% Ethanol Fuel) की सप्लाई कैसे की जाएगी। ‘एथनॉल सप्लाई ईयर’ (ईएसवाई) 2025-26 (‘Ethanol Supply Year’ (ESY) 2025-26) के लिए एथेनॉल आवंटन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मुद्दे पर हाल ही में आई मीडिया रिपोर्टों का जिक्र किया।

    इस दौरान जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने कहा कि हाल ही में हमने कुछ अखबारों की रिपोर्ट देखीं, जिनमें कहा गया है कि 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दी गई है। पीठ ने पूछा कि हम बस यह जानना चाहते हैं कि अगर 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दी गई है, तो आप इनकी सप्लाई कैसे करेंगे?


    ई-100 को मिली है मंजूरी

    इस पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने होंगे। गौरतलब है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किया था। इसके तहत ई100 यानी लगभग शुद्ध एथनॉल से चलने वाले वाहनों को भी नियमों में शामिल किया गया है। इससे पहले ई-85 जैसे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन से चलने वाले वाहनों का प्रावधान था।


    क्या कह रही सरकार?

    हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सरकार की पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण मौजूदा 20 प्रतिशत से तत्काल आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने किसानों को सशक्त बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि इस मुद्दे को व्यापक जनहित और पर्यावरण के नजरिये से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी, खासकर गांवों में रहने वाले किसानों के हितों पर भी ध्यान देना होगा।


    किसानों से की जाएगी बात

    जस्टिस सुंदरेश ने कहा, ”देश की बड़ी आबादी के नजरिये से तीसरा पहलू, जो मुझे सबसे महत्वपूर्ण लगता है, वह किसान हैं। हमें इस पहलू पर ध्यान देना होगा कि किसानों को किस तरह सशक्त बनाया जाए। इस पर कोई भी बात नहीं कर रहा है।” इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह मामले में अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दे पर भी बात करेंगे। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए टाल दी गई। बता दें कि उच्चतम न्यायालय 2025-26 के एथनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए आवंटन बढ़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है।

  • UP: अमेठी में एक मेले में कचौरी-टिक्की खाने से बीमार हुए 102 लोग, दो गिरफ्तार

    UP: अमेठी में एक मेले में कचौरी-टिक्की खाने से बीमार हुए 102 लोग, दो गिरफ्तार


    अमेठी।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अमेठी जिले (Amethi district) के कोटवा गांव में आयोजित एक मेले के दौरान स्नैक्स (Snacks) खाने से 102 लोग अचानक बीमार पड़ गए. बताया जा रहा है कि मेले में लगे एक स्टॉल से कचौरी और टिक्की खाने (Kachoris and Tikkis Eating) के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है और इस मामले में दो लोगों को अरेस्ट कर लिया है।

    पुलिस अधीक्षक (SP) सरवणन टी ने बताया कि पुलिस ने मेले में फूड स्टॉल लगाने वाले राजकुमार और कुकिंग ऑयल इस्तेमाल करने वाले शिव कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया है। फूड सेफ्टी ऑफिसर मिथुन की शिकायत पर दर्ज की गई एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 275 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के रिलेवेंट प्रोविजन्स लगाए गए हैं।

    एसपी के मुताबिक मोहनगंज थाना एरिया के मटरवा गांव के रहने वाले दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूछताछ की जा रही है.

    चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंशुमन सिंह ने बताया कि ग्राम प्रधान ने अधिकारियों को सूचना दी थी कि मेले में स्नैक्स खाने के बाद बच्चों और बड़ों को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई है. इसके तुरंत बाद एक मेडिकल टीम गांव पहुंची, 39 बच्चों और 63 वयस्कों समेत कुल 102 लोगों की जांच और इलाज शुरू किया गया।

    वहीं, गंभीर रूप से बीमार 10 बच्चों और सात वयस्कों समेत कुल 17 लोगों को इलाज के लिए तिलोई के मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। CMO ने कहा कि सभी मरीज खतरे से बाहर हैं और सिचुएशन पर नजर रखने के लिए एक हेल्थ टीम गांव में तैनात है।