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  • एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट क्यों? अश्विन ने पंत के रवैये पर उठाए सवाल, ‘जेनरेशन के खिलाड़ी’ का टैग भी नकारा

    एक खिलाड़ी को खास ट्रीटमेंट क्यों? अश्विन ने पंत के रवैये पर उठाए सवाल, ‘जेनरेशन के खिलाड़ी’ का टैग भी नकारा


    नई दिल्ली। पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के हालिया प्रदर्शन और उनकी शॉट सिलेक्शन को लेकर सवाल उठाए हैं। अश्विन के मुताबिक पंत ने अभी तक उन उम्मीदों को पूरी तरह पूरा नहीं किया है, जो उनसे की जाती हैं। श्रीलंका के खिलाफ हालिया दो टेस्ट की सीरीज में पंत ने 168 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल रहे। हालांकि, उनके आक्रामक अंदाज और कुछ शॉट्स के चयन को लेकर बहस जारी है।

    ‘पंत से मेरी उम्मीदें अभी तक पूरी नहीं हुईं’

    अपने यूट्यूब चैनल ‘एश की बात’ पर अश्विन ने कहा कि पंत से उनकी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में किसी बल्लेबाज के स्वाभाविक अंदाज को ही हर परिस्थिति में सही नहीं माना जा सकता। खिलाड़ी को यह भी देखना चाहिए कि उस वक्त टीम की जरूरत क्या है।

    अश्विन ने कहा, ‘ऋषभ पंत से मेरी उम्मीदें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। जब खेल आपके हाथ में हो, तब ये कहना कि ऋषभ इसी तरह खेलता है सही नहीं है। सवाल यह है कि उस समय आपकी टीम को क्या चाहिए।’

    एक गलती पूरे टेस्ट का रुख बदल सकती है

    अश्विन ने पंत के आक्रामक क्रिकेट के समर्थन में दिए जाने वाले तर्कों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि टेस्ट मैच जीतने के लिए पूरी टीम के 11 खिलाड़ियों का योगदान जरूरी होता है, लेकिन एक गलत फैसला हार की वजह बन सकता है।

    उन्होंने सिडनी और ब्रिस्बेन में पंत की पारियों की तारीफ की, लेकिन साथ ही वॉशिंगटन सुंदर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों के योगदान को भी अहम बताया।

    अश्विन के मुताबिक, ‘एक टेस्ट मैच बनाने और आखिरी सेशन में जीतने के लिए 11 क्रिकेटरों की जरूरत होती है, लेकिन टेस्ट हारने के लिए सिर्फ एक पल की मूर्खतापूर्ण गलती काफी होती है।’

    सहवाग-गिलक्रिस्ट से तुलना भी मंजूर नहीं

    अश्विन ने पंत की तुलना वीरेंद्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट से किए जाने पर भी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ी बेहद आक्रामक क्रिकेट खेलते थे, लेकिन मैच की परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज करके जोखिम नहीं लेते थे।

    उनका कहना है कि टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को यह समझना जरूरी है कि कब आक्रमण करना है और कब स्थिति के मुताबिक संयम बरतना है। अश्विन ने साफ किया कि वह पंत को बतौर खिलाड़ी पसंद करते हैं, लेकिन परिस्थितियों के हिसाब से फैसले लेने की क्षमता में अभी सुधार की जरूरत है।

    ‘किसी एक खिलाड़ी को विशेष ट्रीटमेंट मत दीजिए’

    अश्विन ने पंत को ‘एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी’ बताकर उन्हें अतिरिक्त समर्थन देने की दलील को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगर पंत जैसे खिलाड़ी को विशेष समर्थन दिया जाता है तो यशस्वी जायसवाल जैसे युवा खिलाड़ियों को भी वैसा ही भरोसा मिलना चाहिए।

    उन्होंने कहा, ‘किसी एक खिलाड़ी को विशेष ट्रीटमेंट मत दीजिए। अगर एक पीढ़ी में आने वाले खिलाड़ी को इतना समर्थन देना है, तो यह समर्थन सभी को मिलना चाहिए। यशस्वी जायसवाल भी ऐसा ही खिलाड़ी है।’

    50 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके हैं, अब जिम्मेदारी जरूरी

    अश्विन ने पंत के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि अब उन्हें युवा या अनुभवहीन खिलाड़ी नहीं माना जा सकता। वह 50 से ज्यादा टेस्ट खेल चुके हैं और इसलिए उनसे जिम्मेदारी के साथ खेलने की उम्मीद की जाती है।

    अश्विन ने कहा, ‘ऋषभ अनुभवी हैं। वह 50 टेस्ट खेल चुके हैं। अब उन्हें जिम्मेदारी लेनी होगी। एक पीढ़ी में आने वाला खिलाड़ी वाली दलील मत दीजिए। उनकी निर्णय लेने की क्षमता की वजह से ही वह बाकी दो फॉर्मेट नहीं खेल रहे हैं।’

    हालांकि, अश्विन ने यह भी कहा कि अगर पंत को उनकी गलतियों के बारे में सही तरीके से बताया जाए और वह अपनी निर्णय लेने की क्षमता पर काम करें, तो वह भविष्य में भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में खेलने वाले खिलाड़ी बन सकते हैं।

    प्रतिभा पर नहीं, फैसलों पर सवाल

    अश्विन ने स्पष्ट किया कि पंत की प्रतिभा पर उन्हें कोई संदेह नहीं है। उनकी आपत्ति मुख्य रूप से टेस्ट क्रिकेट में जोखिम लेने के तरीके और समय को लेकर है। पंत को अपने स्वाभाविक आक्रामक अंदाज और टीम की जरूरत के बीच बेहतर तालमेल बैठाना होगा।

    अश्विन ने कहा, ‘मुझे ऋषभ पंत खिलाड़ी के तौर पर बहुत पसंद हैं।’ साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बेहतर निर्णय लेने की क्षमता ही पंत को टेस्ट क्रिकेट में और प्रभावी बना सकती है।

  • वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील

    वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक ऐसा समझौता किया है, जिसके तहत करीब 65 अरब बैरल तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस समझौते की जानकारी दी और इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील बताया।

    ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला देश के साथ एक समझौता किया है- जो दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है!”

    मादुरो की गिरफ्तारी के बीच हुआ ऐलान

    अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था। इसके बाद मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी से जुड़े संघीय आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी।

    इस बीच अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान में करीब छह महीने से युद्ध जारी है और फिलहाल इसके खत्म होने के संकेत नहीं हैं। ऐसे हालात में अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल किया है। अगस्त की शुरुआत तक इस भंडार में 30 करोड़ बैरल से भी कम तेल बचा था।

    मादुरो को हटाने के बाद वेनेजुएला पर बढ़ा फोकस

    जनवरी में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को दोबारा वेनेजुएला भेजने और वहां मौजूद तेल भंडार का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

    ट्रंप का आरोप रहा है कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था। उनका तर्क था कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने दशकों पहले सैकड़ों विदेशी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था, जिनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थीं।

    303 अरब बैरल का भंडार, फिर भी उत्पादन सिर्फ 1%

    वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। अनुमान के मुताबिक देश की जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17% है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कई हिस्सों में बिना इस्तेमाल हुए तेल की खोज अभी भी जारी रहती है, जबकि वेनेजुएला के भूमिगत तेल भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही चिन्हित किया जा चुका है और उसके बारे में जानकारी उपलब्ध है।

    हालांकि, कमजोर बुनियादी ढांचे और अन्य समस्याओं के कारण इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला दुनिया के कुल तेल उत्पादन का सिर्फ 1% ही उत्पादन कर पाता है।

  • नेपाल में मौत के मुंह से बचा 8 साल का मासूम, पेड़ों पर चढ़कर बचाई जान, बाढ़ के बाद मां से हुआ मिलन

    नेपाल में मौत के मुंह से बचा 8 साल का मासूम, पेड़ों पर चढ़कर बचाई जान, बाढ़ के बाद मां से हुआ मिलन


    नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच जंगल की ओर भागकर पेड़ों पर चढ़ने वाले 8 साल के जोयल घाले को आखिरकार शुक्रवार को उसकी मां से मिला दिया गया। हादसे के बाद उसकी मां को आशंका थी कि उनके दोनों बेटे स्कूल में ही बाढ़ की चपेट में आ गए होंगे।

    एक दिन पहले जोयल को उत्तरी जिले रसुवा से अकेले एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया था। उसके पैर में फ्रैक्चर और चेहरे पर चोट के निशान बताए गए हैं। वहीं, 28 वर्षीय उसकी मां तमांग अपने दोनों लापता बेटों की तलाश में परेशान थीं।

    तेज आवाज सुनकर स्कूल की ओर दौड़ी मां

    बुधवार सुबह दोनों बच्चे स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे। उस समय तमांग घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। वह तुरंत बेटों के स्कूल की ओर निकल पड़ीं।

    स्कूल उनके घर से सामान्य तौर पर 15 से 20 मिनट की ड्राइव की दूरी पर था, लेकिन वहां पहुंचने पर पूरा इलाका बदला हुआ नजर आया। स्कूल की इमारत तबाह हो चुकी थी और आसपास का मंजर पहचानना मुश्किल था।

    पेड़ों पर चढ़कर बचाई जान

    बाढ़ और मलबे के बीच जोयल किसी तरह जंगल की तरफ भाग गया और पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। बाद में उसे अकेले एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मां से फोन पर बात कराई गई। रॉयटर्स के मुताबिक, मां ने फोन पर अपने बेटे से रोते हुए बात की।

    जोयल और उसकी मां उन खुशकिस्मत लोगों में शामिल हैं, जो इस भीषण आपदा के बीच एक-दूसरे से दोबारा मिल सके।

    587 लोगों की मौत, 1900 से ज्यादा लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद हुई भारी तबाही में अब तक 587 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1900 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा के बाद 290 भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है और उनकी तलाश जारी है।

  • ‘दिमागी नक्सल’ पर BJP का सोशल मीडिया वार, राज्यों के हैंडल्स ने मिलकर शुरू किया मीम कैंपेन

    ‘दिमागी नक्सल’ पर BJP का सोशल मीडिया वार, राज्यों के हैंडल्स ने मिलकर शुरू किया मीम कैंपेन


    नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के सक्रिय होने के साथ पार्टी का सोशल मीडिया तंत्र भी नए अंदाज में काम करता नजर आ रहा है। भाजपा सोशल मीडिया कन्वीनर दीपक म्हस्के की टीम ने पिछले तीन दिनों में अलग-अलग राज्यों के पार्टी हैंडल्स को आपस में जोड़कर एक साथ राजनीतिक संदेश देने की रणनीति शुरू की है। इसके तहत मीम्स, बॉलीवुड-हॉलीवुड फिल्मों के चर्चित सीन और क्रिएटिव वीडियो का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    इस अभियान में राज्यों के भाजपा हैंडल्स एक-दूसरे की पोस्ट को कोट और रिट्वीट करने के साथ टैग और कोलैबोरेशन कर रहे हैं। इसका मकसद कंटेंट की पहुंच बढ़ाने के साथ राजनीतिक व्यंग्य के जरिए विपक्ष पर निशाना साधना भी है।

    जम्मू-कश्मीर BJP के पोस्ट से शुरू हुआ सिलसिला

    इस नए सोशल मीडिया प्रयोग की शुरुआत जम्मू-कश्मीर भाजपा के X हैंडल से हुई। हैंडल ने सलमान खान, संजय दत्त और जैकी श्रॉफ का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें तीनों अभिनेता एक साथ रियलिटी शो के मंच पर दिखाई दे रहे हैं।

    भाजपा ने इस वीडियो को राजनीतिक रंग देते हुए संजय दत्त को कर्नाटक भाजपा, सलमान खान को जम्मू-कश्मीर भाजपा और जैकी श्रॉफ को गोवा भाजपा के रूप में पेश किया। पोस्ट में लिखा गया—“तीन भाई, तीनों तबाही ?? The worst nightmare for the Dimagi Naxal ecosystem!”

    पोस्ट के ट्रेंड करने के बाद भाजपा IT सेल और सोशल मीडिया टीम ने इसे आगे बढ़ाया। इसके बाद दूसरे राज्यों के भाजपा हैंडल्स भी इस अभियान से जुड़ते चले गए।

    MP BJP ने जोड़े ‘तीन’ में ‘चार भाई’

    जम्मू-कश्मीर भाजपा की पोस्ट को मध्य प्रदेश भाजपा ने कोट करते हुए लिखा—“Hold up… Madhya Pradesh is entering the chat?? तीन भाई? Make it चार, अब तबाही होगी आर-पार!”

    इसके बाद यह सिलसिला और आगे बढ़ा। दिल्ली भाजपा ने अभिनेता पंकज त्रिपाठी के एक वीडियो के साथ पोस्ट किया—“भूल तो नहीं गए हमें?” इसके बाद अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स ने इसी अंदाज में मीम्स और वीडियो पोस्ट करना शुरू कर दिया।

    दो-तीन राज्यों तक पहुंचाने की रणनीति

    भाजपा IT सेल के एक अधिकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर भाजपा के वीडियो के बाद यह रणनीति बनाई गई कि देशभर के भाजपा राज्यों के सोशल मीडिया हैंडल्स को एक साथ जोड़ा जाए। इसके तहत हैंडल्स एक-दूसरे की पोस्ट को कोट, टैग और जरूरत के अनुसार कोलैबोरेट करेंगे।

    अधिकारी का कहना है कि अलग-अलग राज्यों के पार्टी हैंडल्स के फॉलोअर्स काफी ज्यादा हैं। ऐसे में एक राज्य का हैंडल जब दूसरे राज्य के हैंडल को कोट या टैग करता है तो पोस्ट की पहुंच कई गुना बढ़ जाती है।

    पार्टी के मुताबिक, दिल्ली भाजपा की एक पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि जिस तरह दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को सत्ता से बाहर किया, उसी तरह पंजाब में भी AAP को सबक मिल सकता है।

    भाजपा का दावा है कि इस रणनीति से राजनीतिक कंटेंट केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दूसरे राज्यों में भी पहुंचता है। पार्टी अब ऐसे कंटेंट पर जोर दे रही है, जिसका असर एक साथ दो-तीन राज्यों की राजनीति पर पड़े।

    ‘दिमागी नक्सल’ के मुद्दे को बनाया सोशल मीडिया हथियार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से “दिमागी नक्सल” शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हुई है। अब भाजपा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसी कथित “दिमागी नक्सल” मानसिकता को निशाना बनाते हुए मीम्स और फनी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं।

    इसके लिए बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के लोकप्रिय दृश्यों को एडिट किया जा रहा है। इनके जरिए राजनीतिक संदेश के साथ विपक्ष पर व्यंग्य भी किया जा रहा है।

    भाजपा के एक नेता का कहना है कि अभी यह सिर्फ “करवट” है। उनके मुताबिक, तीन दिनों में सोशल मीडिया पर जिस तरह का नैरेटिव तैयार हुआ है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरी ताकत से अभियान चलने पर इसका असर कितना बड़ा हो सकता है।

    Twitter के बाद Instagram पर भी तैयारी

    भाजपा नेता का आरोप है कि कांग्रेस का नैरेटिव झूठ पर आधारित है और पार्टी को “झूठ की राजनीति” का जवाब देना जरूरी है। इसी रणनीति के तहत अब Twitter के बाद Instagram पर भी क्रिएटिव वीडियो और तस्वीरों के जरिए अभियान चलाने की तैयारी है।

    भाजपा सूत्रों के मुताबिक, Twitter पर राजनीतिक मुद्दों में रुचि रखने वाले लोगों की संख्या अधिक है, इसलिए वहां अभियान शुरू किया गया है। अब इसी रणनीति को Instagram पर भी लागू किया जाएगा।

    आने वाले दिनों में अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स से मीम्स, फनी वीडियो और क्रिएटिव पोस्ट लगातार सामने आने की संभावना है। पार्टी ने अपने Instagram और Twitter अकाउंट पर टीजर के तौर पर “Shall we begin” संदेश भी पोस्ट किया है और देशभर के अलग-अलग राज्यों के भाजपा हैंडल्स को टैग किया है।

    यानी भाजपा की नई सोशल मीडिया टीम ने साफ संकेत दे दिया है कि मौजूदा अभियान महज शुरुआत है। आने वाले दिनों में सोशल मीडिया पर पार्टी का राजनीतिक कैंपेन और ज्यादा आक्रामक और क्रिएटिव नजर आ सकता है।

  • न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल

    न्यूयॉर्क में आज मोहन भागवत देंगे संबोधन, भारत से अमेरिका तक सियासत तेज, अखिलेश ने पूछे RSS से 21 सवाल


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत अमेरिका दौरे पर हैं और शुक्रवार, 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस ‘ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम’ में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम की थीम ‘वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता का उत्सव’ रखी गई है।

    भागवत के संबोधन से पहले ही इस कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से लेकर भारत तक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि भागवत अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बात करेंगे और अमेरिका में संघ की भूमिका को किस तरह पेश करेंगे।

    संतों और प्रमुख हस्तियों ने किया समर्थन

    भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी समेत कई हस्तियों का समर्थन मिला है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके अमेरिकी दौरे और कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    X अकाउंट सस्पेंड होने पर अखिलेश का तंज

    कार्यक्रम के आयोजक ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट कुछ समय के लिए सस्पेंड होने के बाद अखिलेश यादव ने इस पर तंज किया। उन्होंने कहा, ‘विदेशों में जब Unregistered-Underground लोग उभरकर आएंगे तो उनके एक्स अकाउंट तो सस्पेंड किए ही जाएंगे।’

    इसके बाद अखिलेश ने RSS से 21 सवाल पूछे। उन्होंने स्वदेशी का नारा देने वाले संगठन के प्रमुख के विदेश दौरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भागवत वहां सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने गए हैं या फिर भविष्य में राजनीतिक प्रश्रय तलाशने की कोशिश की जा रही है।

    हालांकि, कुछ समय बाद ‘अहेड फोरम’ का X अकाउंट बहाल हो गया। संस्था ने दावा किया कि विरोधियों के बॉट अटैक के कारण एल्गोरिदम प्रभावित हुआ था और इसी वजह से हैंडल अस्थायी रूप से ब्लॉक हो गया था।

    कर्नाटक में RSS मार्च पर दो सरकारी शिक्षक सस्पेंड

    इधर कर्नाटक में RSS के मार्च में शामिल होने को लेकर भी विवाद सामने आया है। राज्य में दो सरकारी शिक्षकों अन्ना साहेब देशमुख और गुरुराज जोशी को मार्च में शामिल होने पर सस्पेंड किया गया है।

    कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि किसी गैर-रजिस्टर्ड संगठन के कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी नियमों के खिलाफ है। वहीं विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष सी. नारायणस्वामी ने सरकार की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताया। उनका कहना था कि RSS कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और देश का कोई भी देशभक्त किसी देशभक्त संगठन से जुड़ सकता है।

    न्यूयॉर्क के मेयर ने भी जताया विरोध

    मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में भी विरोध की आवाज उठी है। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते।

    हालांकि, प्रदर्शन या कार्यक्रम रद्द किए जाने से जुड़े सवाल पर ममदानी ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है। इसलिए इसे रद्द करने का अधिकार या क्षेत्राधिकार संभवतः सिटी अथॉरिटी के पास नहीं है।

    अब निगाहें भागवत के संबोधन पर

    एक तरफ कार्यक्रम को वैश्विक सौहार्द और सार्वभौमिक एकता से जोड़कर पेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर भारत और अमेरिका दोनों जगह राजनीतिक बहस शुरू हो चुकी है। ऐसे में अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन से मोहन भागवत अपने संबोधन में संघ, भारत और वैश्विक समाज को लेकर क्या संदेश देते हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ ने तीसरे हफ्ते में मचाया धमाल, कमाए 12 करोड़, प्रेमानंद की सलाह मानी, 8 भंडारों से किया प्रमोशन

    ‘हनुमान अंश’ ने तीसरे हफ्ते में मचाया धमाल, कमाए 12 करोड़, प्रेमानंद की सलाह मानी, 8 भंडारों से किया प्रमोशन


    नई दिल्ली। बड़े बजट और चर्चित सितारों वाली फिल्मों के बीच महज करीब 2 करोड़ रुपये में बनी ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। 31 जुलाई को रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआती दो हफ्तों में करीब 1.5 करोड़ रुपये ही कमाए थे, लेकिन तीसरे हफ्ते में इसकी कमाई ने अचानक रफ्तार पकड़ ली। फिल्म ने अकेले तीसरे हफ्ते में 10.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म की कुल कमाई करीब 12 करोड़ रुपये पहुंच गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म का निर्माण करीब 1.8 से 2 करोड़ रुपये के बजट में हुआ है। इस लिहाज से फिल्म ने अपने बताए गए प्रोडक्शन बजट की तुलना में 500 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा कमाया है। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

    10 लाख की ओपनिंग, फिर तीसरे हफ्ते में बदली तस्वीर

    ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ ने पहले दिन सिर्फ 10 लाख रुपये कमाए थे। पहले हफ्ते में फिल्म का कलेक्शन 1.08 करोड़ रुपये रहा। दूसरे सप्ताह में कमाई घटकर करीब 40 लाख रुपये रह गई। इस तरह दो हफ्तों के बाद फिल्म करीब 1.5 करोड़ रुपये ही जुटा सकी थी।

    तीसरे सप्ताह में फिल्म की कमाई में अचानक बड़ा उछाल आया। इस दौरान 10.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ, जिसने फिल्म को कम बजट की सरप्राइज हिट के तौर पर चर्चा में ला दिया।

    रिलीज से पहले प्रेमानंद जी महाराज से ली थी सलाह

    फिल्म की कमाई के साथ उसकी रिलीज से पहले की कहानी भी सुर्खियों में है। डायरेक्टर और राइटर विशाल चतुर्वेदी ने आज तक से बातचीत में बताया कि शूटिंग पूरी होने के बाद फिल्म के एक प्रोड्यूसर प्रेमानंद जी महाराज के पास सलाह लेने पहुंचे थे।

    विशाल के मुताबिक, महाराज जी ने फिल्म के मुख्य किरदार को लाइफस्टाइल को लेकर सावधानी बरतने और शाकाहारी भोजन करने की सलाह दी थी। मेकर्स ने इस सलाह को गंभीरता से लिया और मुख्य कलाकार को भी इन बातों का ध्यान रखने के लिए कहा गया।

    शूटिंग सेट पर भी लागू किए गए नियम

    मेकर्स ने शूटिंग के दौरान भी कई नियम तय किए थे। सेट पर गाली-गलौज, लड़ाई या बहस की मनाही थी। सभी के लिए केवल शाकाहारी भोजन रखा जाता था और फिल्म से जुड़े किसी भी व्यक्ति को शराब पीने की अनुमति नहीं थी।

    शूटिंग की शुरुआत हनुमान चालीसा के पाठ से होती थी और दिन का समापन भी इसी के साथ किया जाता था। नीम करोली बाबा का किरदार निभाने वाले अभिनेता शोभिनाव सत्य ने भी सेट के अनुभव साझा किए। उनके मुताबिक, शूटिंग में परेशानी आने पर पूरी टीम हनुमान चालीसा का पाठ करती थी।

    कैमरा रुकता तो टीम करती थी हनुमान चालीसा

    विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि कई बार शूटिंग सुबह 7 बजे शुरू होनी होती थी, लेकिन तकनीकी या अन्य कारणों से कैमरा 10 बजे तक शुरू नहीं हो पाता था। ऐसे में वह टीम से हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए कहते थे।

    उनका कहना था कि खाली बैठने से बेहतर है कि इस समय कुछ सकारात्मक किया जाए। डायरेक्टर के अनुसार, कई मौकों पर हनुमान चालीसा पूरी होने तक शूटिंग में आई समस्या का समाधान भी निकल आया।

    प्रमोशन का बजट नहीं था, 8 भंडारों को बनाया कैंपेन

    फिल्म के प्रमोशन के लिए भी मेकर्स ने पारंपरिक तरीके से अलग रास्ता अपनाया। विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, प्रमोशनल कैंपेन शुरू करते समय उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्होंने तय किया कि प्रचार के जरिए नीम करोली बाबा का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

    मेकर्स ने इसके लिए 8 भंडारों का आयोजन किया। इन्हीं भंडारों को फिल्म के प्रमोशन का माध्यम बनाया गया। विशाल ने यह भी बताया कि तमाम चुनौतियों के बावजूद CBFC ने फिल्म को बिना किसी परेशानी के U सर्टिफिकेट दे दिया।

    आध्यात्मिक फिल्मों के लिए बढ़ती उम्मीद

    ‘हनुमान अंश’ का प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब कम बजट और आध्यात्मिक विषयों पर बनी फिल्मों को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म के मेकर्स में रागिनी एस, नम्रता जी सिंह, अनुप्रिया ए नगर और विशाल चतुर्वेदी शामिल हैं।

    बिना बड़े सितारों और भारी-भरकम बजट के दर्शकों तक पहुंच बनाने वाली फिल्मों में अब ‘हनुमान अंश’ का नाम भी जुड़ गया है। पिछले करीब छह महीनों में ‘लालो’ और ‘देऊल बंद 2’ जैसी फिल्मों ने भी आध्यात्मिक विषयों के जरिए दर्शकों का ध्यान खींचा है।

    ऐसे में ‘हनुमान अंश’ की तीसरे सप्ताह की कमाई यह संकेत देती है कि कम बजट, आध्यात्मिक कहानी और बिना बड़े स्टार्स के भी कोई फिल्म दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बना सकती है।

  • मंगल बदलेंगे नक्षत्र, इन 5 राशियों को करियर-धन से जुड़े मामलों में मिलेगा लाभ

    मंगल बदलेंगे नक्षत्र, इन 5 राशियों को करियर-धन से जुड़े मामलों में मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली। सितंबर की शुरुआत में मंगल की चाल में बदलाव होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों के राशि परिवर्तन के साथ नक्षत्र परिवर्तन का भी राशियों पर प्रभाव पड़ता है। मंगल 2 सितंबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाले पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 24 सितंबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। मंगल और गुरु की यह स्थिति कुछ राशियों के लिए शुभ मानी जा रही है। इस अवधि में करियर, कारोबार, धन और संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने के योग बन सकते हैं।

    मेष राशि

    मंगल का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के लोगों के लिए आर्थिक लिहाज से फायदेमंद रह सकता है। अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं। कारोबारियों को काम के विस्तार का मौका मिल सकता है, जबकि नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना है। परिवार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। लंबे समय से किसी काम के लिए किए जा रहे प्रयास भी सफल हो सकते हैं।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए मंगल का यह बदलाव परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में राहत ला सकता है। पुरानी पारिवारिक परेशानियों का समाधान निकलने की उम्मीद है। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ हो सकता है। मकान, जमीन या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। करियर में किसी प्रभावशाली व्यक्ति का सहयोग भी मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कार्यक्षेत्र में नए अवसर लेकर आ सकता है। काम में आ रही बाधाएं कम हो सकती हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या पद मिलने के योग बन सकते हैं। अधिकारियों की ओर से आपके काम की तारीफ हो सकती है। साथ ही आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि के लोगों के लिए यह अवधि नई शुरुआत के लिहाज से बेहतर साबित हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम में सफलता मिलने की संभावना है। जीवनसाथी और परिवार का साथ मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और निवेश के नए अवसर सामने आ सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने से भी राहत मिल सकती है।

    मीन राशि

    मीन राशि के जातकों के लिए मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में जाना सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जा रहा है। कारोबार बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं। कामकाज की बाधाएं दूर होने से तनाव कम हो सकता है। नौकरी और रोजगार से जुड़े मामलों में तरक्की के योग बन सकते हैं। इस दौरान किसी खास व्यक्ति से मुलाकात भी भविष्य में लाभ दे सकती है।

    मंगल के नक्षत्र परिवर्तन को क्यों माना जा रहा खास?

    ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगल को साहस, ऊर्जा, पराक्रम, भूमि और संपत्ति का कारक माना गया है। वहीं पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। ऐसे में मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए नई शुरुआत, प्रगति और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

  • एमपी के पूर्वी हिस्से में 4 दिन रहेगा बारिश का दौर, 7 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी

    एमपी के पूर्वी हिस्से में 4 दिन रहेगा बारिश का दौर, 7 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बारिश का दौर फिलहाल पूर्वी हिस्से तक सीमित रहने के आसार हैं। शनिवार को रीवा, सीधी, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में तेज बारिश हो सकती है। राजधानी भोपाल में रिमझिम बारिश होने की संभावना है, जबकि इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज बारिश के आसार कम हैं।

    जबलपुर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। इन इलाकों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    लो प्रेशर एरिया और मानसून ट्रफ एक्टिव

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार प्रदेश के ऊपर लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और मानसून ट्रफ सक्रिय हैं। हालांकि इन सिस्टम का प्रभाव पूरे मध्य प्रदेश में नहीं है। इसी कारण सभी जिलों में एक समान बारिश होने की संभावना नहीं है। पूर्वी हिस्से में अगले चार दिन बारिश का दौर बने रहने के आसार हैं।

    सामान्य से 2.6 इंच कम बारिश

    प्रदेश में अब तक 683.9 मिमी यानी 26.9 इंच बारिश दर्ज की गई है। यह इस अवधि की सामान्य बारिश 750.9 मिमी यानी 29.5 इंच से 2.6 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 9% कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बारिश 6% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम रही है।

    37 जिलों में 1 से 49% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी और निवाड़ी में 1% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 4% से 50% तक कम पानी गिरा है।

    18 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग

    रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग


    उज्जैन। रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल के दरबार से हुई। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुई भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को 2 फीट लंबी विशेष राखी अर्पित की। इसके साथ ही भगवान को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इसे देश में सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करने की परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल को रक्षासूत्र बांधकर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि सनातन परंपरा के प्रमुख पर्वों का शुभारंभ राजाधिराज महाकाल के आंगन से होता है।

    राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद 2 फीट लंबी विशेष राखी भगवान के स्वरूप पर समर्पित की गई। पूरे सावन व्रत रखने वाली महिलाओं ने महाकाल का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोला और बाद में भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।

    सवा लाख लड्डुओं का लगाया भोग

    रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बाबा महाकाल को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन उपवास रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा पर महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रत पूर्ण करते हैं। भक्तों में प्रसाद वितरण के लिए मंदिर समिति और पुजारियों की ओर से बड़े पैमाने पर लड्डू तैयार कराए गए।

    एक सप्ताह में तैयार हुई विशेष राखी

    पुजारी आकाश गुरु के मुताबिक, करीब 2 फीट लंबी यह विशेष राखी पुजारी परिवार की महिलाओं ने लगभग एक सप्ताह की मेहनत से तैयार की। राखी बनाते समय महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं।

    राखी को रेशमी वस्त्र, रेशमी धागों, कांच वर्क और आभूषणों से सजाया गया। इसमें भगवान महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ‘ॐ’, त्रिपुंड और रुद्राक्ष को शामिल किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता के प्रतीक चिन्ह भी राखी में लगाए गए।

  • नेपाल विदेश मंत्री बोले- दोनों जरूरी, ‘बाप की जगह मां नहीं ले सकती’

    नेपाल विदेश मंत्री बोले- दोनों जरूरी, ‘बाप की जगह मां नहीं ले सकती’


    काठमांडू।
    नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच भारत की ओर से राहत और बचाव के लिए लगातार मदद पहुंचाई जा रही है। इसी दौरान नेपाल की विदेश नीति और भारत-चीन संबंधों को लेकर विदेश मंत्री शिसिर खनाल का बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि नेपाल भारत और चीन में से किसी एक को चुनकर दूसरे को नजरअंदाज नहीं कर सकता। दोनों देश नेपाल के लिए महत्वपूर्ण पड़ोसी हैं और काठमांडू अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर दोनों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है।

    एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में भारत और चीन के बीच नेपाल के झुकाव को लेकर सवाल पूछे जाने पर खनाल ने बेहद दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए दोनों देशों की अपनी-अपनी अहमियत है और कोई एक दूसरे की जगह नहीं ले सकता।

    उन्होंने कहा, “जैसे कोई अपने पिता से यह नहीं कह सकता कि वह उन्हें मां से बदल देगा या मां से यह नहीं कह सकता कि वह उन्हें पिता से बदल देगा।” उनके मुताबिक, नेपाल के भारत और चीन दोनों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं और वह इन्हें आगे भी बनाए रखना चाहता है।

    ‘विदेश नीति राष्ट्रीय हित के आधार पर’

    विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल एक संवेदनशील समाज है, लेकिन विदेश नीति के मामलों में उसे तार्किक दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाल किसी तीसरे देश के दबाव में अपनी विदेश नीति तय नहीं करता, बल्कि उसके फैसलों का आधार राष्ट्रीय हित है।

    खनाल ने भारतीय मीडिया में चल रही उन चर्चाओं को भी खारिज किया, जिनमें नेपाल के चीन के प्रभाव में आने की बात कही जा रही थी। उन्होंने कहा कि चीन के साथ नेपाल के पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नेपाल किसी एक देश के नियंत्रण में है।

    नेपाल के व्यापार में भारत की बड़ी हिस्सेदारी

    नेपाल के आर्थिक रिश्तों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत उसके लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। उनके मुताबिक, नेपाल के कुल व्यापार का करीब दो-तिहाई हिस्सा भारत के साथ होता है।

    उन्होंने कहा कि अगर चीन की कंपनियां नेपाल में अपनी आर्थिक गतिविधियां बढ़ा रही हैं तो नेपाल भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाना चाहता है। उन्होंने भारतीय निवेशकों को नेपाल में कारोबार और निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि सरकार उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

    BRI को लेकर क्या बोले खनाल?

    चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर भी नेपाली विदेश मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि नेपाल ने वर्ष 2017 में BRI फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन इसके बाद करीब एक दशक में नेपाल को BRI परियोजनाओं के तहत शून्य डॉलर की वित्तीय सहायता मिली है।

    उनके इस बयान को चीन के साथ नेपाल के आर्थिक संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय निवेशकों को नेपाल का न्योता

    शिसिर खनाल ने कहा कि नेपाल भारत के साथ आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच नेपाल से 10,000 मेगावाट बिजली निर्यात को लेकर ढांचागत समझौता हो चुका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल से हाल के वर्षों में करीब एक अरब डॉलर की आईटी और टेक सेवाओं का निर्यात हुआ है। ऐसे में तकनीक और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं।

    विदेश मंत्री के मुताबिक, नेपाल को हवाई और सड़क संपर्क बेहतर करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है और इस क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के लिए भी पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।

    भारत-चीन के बीच संतुलन की नीति

    नेपाल भौगोलिक रूप से भारत और चीन के बीच स्थित है। ऐसे में काठमांडू के लिए दोनों पड़ोसियों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखना हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। खनाल के ताजा बयान से भी यही संकेत मिलता है कि नेपाल किसी एक खेमे में जाने के बजाय भारत और चीन दोनों के साथ अपने हितों के अनुरूप रिश्ते बनाए रखने की नीति पर जोर दे रहा है।