Blog

  • CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से एक बार फिर अपनी मांगें दोहराई हैं। पार्टी ने कहा है कि जिन आश्वासनों के आधार पर विरोध प्रदर्शन स्थगित किए गए थे, उनका समयबद्ध पालन किया जाना चाहिए। संगठन ने विशेष रूप से छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई रोकने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

    पार्टी के अनुसार उसे अलग-अलग राज्यों से ऐसी रिपोर्टें प्राप्त हो रही हैं जिनमें प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। CJP ने विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता है। संगठन का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो संबंधित मामलों पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने बयान में कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तथा उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की मांग पहले भी उठाई गई थी। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय सरकार की ओर से मिले आश्वासनों पर विश्वास करते हुए लिया गया था। ऐसे में अब उन आश्वासनों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

    पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि देश के किसी भी हिस्से में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

    CJP ने यह भी कहा कि उसकी कानूनी टीम हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। पार्टी का दावा है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। संगठन ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की भी अपील की है।

    अपने बयान में CJP ने केंद्रीय नेतृत्व से पूर्व में दिए गए आश्वासनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार को 28 जुलाई तक इस संबंध में लिखित रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि प्रदर्शनकारियों और छात्रों के बीच उत्पन्न अनिश्चितता समाप्त हो सके। संगठन का मानना है कि स्पष्ट और औपचारिक आश्वासन से तनाव कम करने में मदद मिलेगी और संवाद का वातावरण मजबूत होगा।

    फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख और संभावित कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो स्थिति सामान्य होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों और सरकारी रुख के बीच मतभेद बने रहते हैं तो यह विषय राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

  • भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व

    भारत की मेडल झोली हुई और मजबूत, राजा मुथुपंडी के सिल्वर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गर्व


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है और देश के पदकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वेटलिफ्टिंग में भारत को एक और बड़ी सफलता तब मिली जब तमिलनाडु के प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक अपने नाम कर लिया। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

    राजा मुथुपंडी ने पूरे मुकाबले के दौरान दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 126 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 160 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में बेहद संतुलित और प्रभावशाली रहा। हालांकि स्वर्ण पदक मलेशिया के अजनील बिदिन ने जीता जिन्होंने रिकॉर्ड 299 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान हासिल किया लेकिन राजा मुथुपंडी का रजत पदक भारत के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए राजा मुथुपंडी को बधाई दी और कहा कि पुरुषों के 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग वर्ग में रजत पदक जीतकर उन्होंने पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश को उनकी उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजा मुथुपंडी की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग से भारत के लिए एक और पदक आना बेहद गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राजा की सफलता से हर भारतीय खुश है और उनका प्रदर्शन देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। प्रधानमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं में और बड़ी सफलताओं की कामना भी की।

    राजा मुथुपंडी का यह पदक भारत के लिए बेहद अहम साबित हुआ क्योंकि इससे पहले भारतीय वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीत चुके थे जबकि स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। मीराबाई ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम और मजबूत कर लिया है।

    भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि देश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में ही वेटलिफ्टिंग में मिले इन पदकों ने भारत की पदक तालिका को मजबूत किया है और अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ाया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही लय बरकरार रही तो भारत इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में अपने पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर नतीजे हासिल कर सकता है।

    भारत के खिलाड़ियों का लगातार शानदार प्रदर्शन यह साबित कर रहा है कि वर्षों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। राजा मुथुपंडी का रजत पदक भी इसी सफलता की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है जिसने देशवासियों को एक और गर्व का अवसर दिया है।

  • रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    नई दिल्ली । श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में फिल्म ‘धुरंधर’ से प्रेरित विशेष थीम वाले ‘धुरंधर बार’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर फिल्म का हिस्सा रहे अभिनेता राकेश बेदी मौजूद रहे और उन्होंने इस विशेष कॉर्नर का उद्घाटन करने के साथ-साथ उसके अंदर की सजावट का परिचय भी कराया। सुरक्षा कारणों से मेस का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इस पहल ने फिल्म और भारतीय सेना के बीच बने सांस्कृतिक जुड़ाव को नई पहचान दी है।

    राकेश बेदी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से साझा किए गए वीडियो में बताया कि उन्हें श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में आमंत्रित किया गया था, जहां सैनिक लंबे समय से ‘धुरंधर बार’ के उद्घाटन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने रिबन काटकर इस थीम आधारित बार को औपचारिक रूप से शुरू किया।

    बार के अंदर की सजावट पूरी तरह फिल्म ‘धुरंधर’ की थीम पर तैयार की गई है। प्रवेश द्वार पर ‘धुरंधर बार, स्थापना 2026’ का साइन बोर्ड लगाया गया है, जो इस स्थान की अलग पहचान बनाता है। दीवारों पर फिल्म के प्रमुख किरदारों के पोस्टर और कलात्मक चित्र लगाए गए हैं, जिनमें कई लोकप्रिय संवाद भी शामिल किए गए हैं। इन कलाकृतियों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे फिल्म के माहौल और उसके किरदारों की झलक प्रस्तुत करें।

    राकेश बेदी ने अपने वीडियो में बार का विस्तृत दौरा कराते हुए वहां मौजूद विभिन्न सजावटी तत्वों को भी दिखाया। उन्होंने बताया कि एक ओर फिल्म के कलाकार गौरव गेरा के किरदार का पोस्टर लगाया गया है, जिसमें उनका चर्चित दृश्य और संवाद दर्शाया गया है। वहीं दूसरी ओर स्वयं राकेश बेदी के किरदार से जुड़ा पोस्टर भी लगाया गया है। इसके अलावा मुख्य आकर्षण के रूप में अभिनेता रणवीर सिंह की बड़ी कलात्मक तस्वीर स्थापित की गई है, जिसे विशेष डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। सामने की दीवार पर फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभाने वाले आर. माधवन के किरदार की आर्टवर्क भी लगाई गई है।

    राकेश बेदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से वह आर्मी मेस की सटीक लोकेशन साझा नहीं कर सकते। उन्होंने सैनिकों द्वारा फिल्म के प्रति दिखाई गई सराहना और इस विशेष थीम कॉर्नर के निर्माण को सम्मानजनक पहल बताया। उनके अनुसार सेना के जवानों ने फिल्म के कई किरदारों और दृश्यों को यादगार तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे यह स्थान उनके लिए भी एक अलग आकर्षण बन गया है।

    ‘धुरंधर’ फिल्म श्रृंखला अपनी कहानी और प्रस्तुतिकरण के कारण दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। फिल्म की कथा एक भारतीय जासूस के मिशन पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान को प्रमुखता से दिखाया गया है। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी सहित कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। श्रृंखला की दोनों फिल्मों को दर्शकों का व्यापक समर्थन मिला और उन्होंने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय व्यावसायिक सफलता भी हासिल की। अब श्रीनगर के इस आर्मी मेस में फिल्म की थीम पर तैयार किया गया ‘धुरंधर बार’ उस लोकप्रियता का एक नया उदाहरण माना जा रहा है, जिसने सैनिकों और फिल्म प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना दिया है।

  • गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    गडकरी ने कहा- E20 और एथेनॉल ब्लेंडिंग से मेरा कोई संबंध नहीं, फर्जी AI वीडियो पर मेटा, एक्स और गूगल के खिलाफ करेंगे मुकदमा

    नई दिल्ली । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कथित एआई-जनित डीपफेक वीडियो से स्वयं को पूरी तरह अलग बताते हुए स्पष्ट किया है कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम और ई20 पहल से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इस नीति के क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

    इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गडकरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अनुमति दे दी है। अदालत की मंजूरी के बाद अब वह मेटा, एक्स और गूगल के विरुद्ध सिविल मुकदमा दायर कर सकते हैं। गडकरी का आरोप है कि विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित कई वीडियो में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से उनकी छवि और आवाज का उपयोग कर भ्रामक सामग्री तैयार की गई, जिससे जनता के बीच गलत संदेश फैलाने का प्रयास किया गया।

    याचिका में कहा गया है कि वायरल किए गए वीडियो में यह झूठा दावा किया गया कि गडकरी और उनका परिवार एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम तथा ई20 पहल से किसी प्रकार का आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंत्री ने इन दावों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सामग्री उनकी व्यक्तिगत और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

    मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कथित फर्जी सामग्री के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई और उसे हटाने की मांग की गई है। गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी याचिका का उद्देश्य किसी सरकारी नीति पर होने वाली सार्वजनिक बहस, आलोचना या लोकतांत्रिक चर्चा को सीमित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सरकारी नीतियों पर अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के नाम और पहचान का दुरुपयोग कर झूठी जानकारी फैलाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    हाल के समय में देश में ई20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आए हैं। विशेष रूप से वर्ष 2023 से पहले निर्मित कुछ पेट्रोल वाहनों के मालिकों ने माइलेज में कमी, रखरखाव लागत बढ़ने और इंजन के कुछ हिस्सों पर संभावित प्रभाव जैसी चिंताएं व्यक्त की हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर कई भ्रामक वीडियो और दावे भी तेजी से प्रसारित हुए, जिनमें एथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर विभिन्न प्रकार की गलत जानकारियां साझा की गईं।

    गडकरी ने अपने पक्ष में दायर याचिका में दोहराया कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से संबंधित नीति का संचालन और निर्णय केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन है। उन्होंने कहा कि उनके नाम का उपयोग कर तैयार किए गए एआई-जनित वीडियो तथ्यों से परे हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों पर फर्जी सामग्री के प्रसार से न केवल आम लोगों में भ्रम फैलता है, बल्कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डीपफेक सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और ऑनलाइन भ्रामक सूचनाओं की निगरानी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद संबंधित पक्षों का जवाब और अदालत की आगामी सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: SC ने SIT में CA और फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने के दिए निर्देश, दो हफ्ते में मांगी प्रगति रिपोर्ट


    लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जांच को लेकर अहम निर्देश जारी किए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष जांच दल (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता फिलहाल मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है। CJI ने कहा कि अभी ध्यान केवल जांच की गुणवत्ता पर है और अन्य मुद्दों पर बाद में विचार किया जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट ने विस्तारित SIT को जांच जारी रखने का निर्देश देते हुए तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा। अदालत का मानना है कि वित्तीय विशेषज्ञों के जुड़ने से चढ़ावे और उससे संबंधित लेनदेन की बारीकी से जांच हो सकेगी और यदि किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो उसके तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

    कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। साथ ही निर्देश दिया है कि तब तक SIT जांच की प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे।

  • यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे

    यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे


    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी में टिकट की दावेदारी तेज होती जा रही है। पार्टी अब तक तीन चरणों का सर्वे पूरा कर चुकी है, जिसके बाद कई विधानसभा सीटों पर नए दावेदारों के नाम सामने आने लगे हैं। खासतौर पर मुरादाबाद देहात विधानसभा सीट पर दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पार्टी का अगला यानी चौथा सर्वे अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित है।

    भाजपा ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत जनवरी, मार्च और जून में तीन सर्वे कराए थे। इन सर्वेक्षणों के आधार पर जिले की छह विधानसभा सीटों पर करीब 20 नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में रहे। नगर, देहात, कुंदरकी और ठाकुरद्वारा सीटों पर तीन-तीन, जबकि कांठ और बिलारी सीट पर चार-चार संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आए थे। इनमें मौजूदा विधायक, पूर्व पदाधिकारी और ब्लॉक प्रमुख जैसे कई नेता शामिल हैं।

    देहात सीट पर बढ़ी दावेदारों की संख्या
    तीन सर्वे में मुरादाबाद देहात सीट से डॉ. केके मिश्रा, पूर्व महानगर महामंत्री श्याम बिहारी मिश्रा और अनुसूचित मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रजनीकांत जाटव के नाम प्रमुखता से सामने आए थे। अब इनके अलावा कई अन्य नेताओं ने भी दावेदारी की चर्चा तेज कर दी है।

    नए चर्चित नामों में पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्रनाथ मिश्रा, पूर्व महानगर मंत्री शशि किरण जाटव, महानगर मंत्री सुनीता शर्मा और वनीता मेहरोत्रा समेत कई अन्य भाजपा पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

    अन्य सीटों पर भी नए चेहरे चर्चा में
    कांठ विधानसभा सीट से धर्मपाल सिंह और जयवर्द्धन सिंह, बिलारी सीट से विश्वास यादव लवली और नरेश यादव, जबकि ठाकुरद्वारा सीट से गौरव चौहान और भानु प्रताप सिंह के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल होकर चर्चा में हैं। फिलहाल मुरादाबाद नगर और कुंदरकी सीटों पर कोई नया नाम प्रमुख रूप से सामने नहीं आया है।

    तीसरे सर्वे में इन नामों की रही थी चर्चा
    मुरादाबाद नगर: विधायक रितेश गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता, महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला।
    मुरादाबाद देहात: डॉ. केके मिश्रा, श्याम बिहारी मिश्रा, रजनीकांत जाटव।
    कांठ: पूर्व विधायक राजेश कुमार सिंह चुन्नू, ब्लॉक प्रमुख पूनम चौधरी, जिला पंचायत सदस्य विनोद सैनी और राजपाल सिंह।
    ठाकुरद्वारा: पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, अजय प्रताप सिंह और पूर्व सांसद सर्वेश सिंह की पत्नी साधना सिंह।
    बिलारी: परमेश्वर लाल सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश सैनी, नगर पालिका चेयरमैन रघुराज सिंह यादव और ऋषिपाल चौधरी।
    कुंदरकी: विधायक रामवीर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह और किसान मोर्चा के क्षेत्रीय महामंत्री दिनेश ठाकुर।

    जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?
    भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल ने कहा कि पार्टी में टिकट मांगने का अधिकार सभी कार्यकर्ताओं को है। फिलहाल संगठन स्तर पर दावेदारी के लिए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों के चयन का अंतिम निर्णय प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

  • मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया

    मीराबाई चानू की ऐतिहासिक जीत पर नेताओं ने जताया गर्व, राहुल गांधी बोले- आपने दुनिया में तिरंगा ऊंचा किया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को देशभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनकी शानदार उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मीराबाई की मेहनत अनुशासन और संघर्ष करोड़ों भारतीयों विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर मीराबाई चानू की विजयी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि मीराबाई ने अपनी अटूट मेहनत दृढ़ संकल्प और अनुशासन के दम पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया है। राहुल ने लिखा कि हर भारतीय को उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व है और उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मीराबाई चानू को बधाई देते हुए उनकी उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह चनंबम को भी रजत पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं। खड़गे ने कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सम्मान बढ़ाया है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर प्रतियोगिता में अपना दबदबा कायम रखा। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया। इससे पहले वह 2018 के गोल्ड कोस्ट और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वहीं 2014 के ग्लासगो खेलों में उन्होंने रजत पदक हासिल किया था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई का यह स्वर्ण भारत का पहला गोल्ड मेडल भी बना। दूसरी ओर ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता और भारत की पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    मीराबाई चानू पिछले कई वर्षों से भारतीय वेटलिफ्टिंग की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रही हैं। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरे स्वर्ण पदक के साथ अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण के दम पर भारतीय खिलाड़ी विश्व मंच पर लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।

  • कांवड़ यात्रा के लिए ट्रैफिक प्लान तैयार, 29 जुलाई से दिल्ली-दून हाईवे पर भारी वाहनों की एंट्री बंद

    कांवड़ यात्रा के लिए ट्रैफिक प्लान तैयार, 29 जुलाई से दिल्ली-दून हाईवे पर भारी वाहनों की एंट्री बंद


    मेरठ। कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए मेरठ पुलिस ने व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 29 जुलाई की रात 12 बजे से 12 अगस्त तक दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (गाजियाबाद से मेरठ दिशा) और चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग (नहर पटरी) पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। वहीं 5 अगस्त की रात से 12 अगस्त की रात तक हरिद्वार-मुजफ्फरनगर-मेरठ दिशा में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर यातायात पूरी तरह रोका जा सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के लिए भी वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं।

    मेरठ पुलिस ने यह ट्रैफिक प्लान आसपास के जिलों और मेरठ जोन के पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद तैयार किया है। 2 अगस्त की आधी रात से एनएच-58 पर हल्के और मध्यम वाहन मेरठ से हरिद्वार की ओर बाईं लेन से दो-तरफा संचालित होंगे, जबकि दाहिनी लेन केवल हरिद्वार से लौट रहे कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी। कांवड़ियों की संख्या और हालात के अनुसार इस व्यवस्था में जरूरत पड़ने पर बदलाव भी किया जा सकेगा। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कांवड़ यात्रा गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर नहीं चलेगी, बल्कि पारंपरिक मार्गों से ही निकलेगी।

    भारी वाहनों के लिए यह रहेगा डायवर्जन
    29 जुलाई से लागू होने वाले प्लान के तहत अंबाला और यमुनानगर से उत्तराखंड जाने वाले वाहन एनएच-344 बाईपास, छुटमलपुर और मोहंड होते हुए देहरादून जाएंगे, जबकि हरिद्वार जाने वाले वाहनों को भगवानपुर और रुड़की के रास्ते भेजा जाएगा।

    राजस्थान, दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा से सहारनपुर व उत्तराखंड जाने वाले भारी वाहन डासना इंटरचेंज से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और खेकड़ा इंटरचेंज के जरिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर डायवर्ट किए जाएंगे। वहीं दिल्ली से उत्तराखंड जाने वाले वाहनों को कुंडली, सोनीपत, पानीपत, करनाल और यमुनानगर के रास्ते भेजा जाएगा।

    मुरादाबाद, अमरोहा, बागपत, शामली और करनाल की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए भी अलग-अलग वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं, ताकि कांवड़ मार्ग पर दबाव कम किया जा सके।

    हल्के और मध्यम वाहनों के लिए 2 अगस्त से नई व्यवस्था
    2 अगस्त की रात 12 बजे से हल्के और मध्यम वाहनों का भी रूट बदला जाएगा। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और राजस्थान से हरिद्वार, देहरादून, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जाने वाले वाहन डासना, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उपयोग करेंगे।

    कुछ मार्गों पर वाहनों को हापुड़, किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, बहसूमा, रामराज, मीरापुर, जानसठ, भोपा, रोहाना और देवबंद होते हुए आगे भेजा जाएगा। बिजनौर, बुलंदशहर, गढ़मुक्तेश्वर और मुरादाबाद की दिशा में जाने वाले वाहनों के लिए भी अलग डायवर्जन रूट निर्धारित किए गए हैं।

    गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों का भी बदलेगा रास्ता
    गंगा एक्सप्रेसवे से दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, हरियाणा, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरिद्वार और देहरादून की ओर जाने वाले सभी वाहनों को सिंभावली कट से उतारकर एनएच-9 और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के रास्ते भेजा जाएगा।

    वहीं मेरठ, बिजनौर और मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाले वाहनों को सिंभावली कट से हापुड़, किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, बहसूमा, रामराज और मीरापुर के रास्ते गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। बिजौली (खरखौदा) कट से उतरने वाले वाहनों के लिए भी अलग ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी।

    मेरठ पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि कांवड़ यात्रा के दौरान यात्रा शुरू करने से पहले निर्धारित रूट डायवर्जन की जानकारी अवश्य लें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कर प्रशासन का सहयोग करें।

  • पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली । नेपाल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल त्रिभुवन विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ बिजनेस स्टडीज (एमबीएस) प्रथम सेमेस्टर का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना सामने आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेपाल पुलिस ने एक शिक्षक को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

    जानकारी के अनुसार, 24 जुलाई को आयोजित एमबीएस प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद एक व्हाट्सएप समूह में साझा किया गया। अगले दिन इस घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और गोपनीयता व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र ऑनलाइन उपलब्ध था तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

    पुलिस जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र प्रसारित करने के आरोप में संदीप सिंह नामक शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह काठमांडू के दो शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं और विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय नाम से जाने जाते हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ परीक्षा गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने केवल किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त प्रश्नपत्र को संबंधित व्हाट्सएप समूह में आगे भेजा था। उसने यह भी कहा कि उसे इस घटना से कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ और वह केवल पहले से प्रसारित सामग्री को साझा कर रहा था। हालांकि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब एक छात्र ने संबंधित व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक कर दिए। जांच के दौरान सामने आए डिजिटल रिकॉर्ड में परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद प्रश्नपत्र की पीडीएफ साझा किए जाने के साथ-साथ उसके विस्तृत उत्तर भी उपलब्ध कराए जाने के संकेत मिले। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कुछ लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी गई।

    नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीर मानते हुए गृह मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। मंत्रालय का कहना है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि प्रश्नपत्र लीक की घटना किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी के बजाय एक शिक्षक से जुड़ी हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    इस घटना ने नेपाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है। हाल के वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा और युवाओं के विश्वास जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। अब छात्र संगठनों का कहना है कि केवल दोषियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार भी आवश्यक हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सरकार के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

  • ईरानी जहाज पर कथित यूक्रेनी हमले से बढ़ा तनाव, अराघची और लावरोव ने फोन पर साझा की रणनीतिक चिंता

    ईरानी जहाज पर कथित यूक्रेनी हमले से बढ़ा तनाव, अराघची और लावरोव ने फोन पर साझा की रणनीतिक चिंता

    नई दिल्ली । कैस्पियन सागर में एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हुए कथित हमले के बाद पश्चिम एशिया और यूरोपीय क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस घटनाक्रम के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने फोन पर बातचीत कर सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय तनाव और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, अराघची ने बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी संप्रभु देश के वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस घटना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है। उनका कहना था कि ऐसे हमलों को अनदेखा नहीं किया जा सकता और जिम्मेदार पक्षों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

    रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी कथित हमले की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं रूस और ईरान के बीच विकसित हो रहे व्यापारिक और समुद्री संपर्क मार्गों के लिए भी जोखिम पैदा करती हैं। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

    बातचीत के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सुरक्षा स्थिति और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भी उल्लेख किया गया। दोनों पक्षों ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत करना और तनाव को नियंत्रित करने के लिए संवाद बनाए रखना आवश्यक है।

    ईरानी विदेश मंत्री ने इससे पहले यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ भी टेलीफोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कथित हमले की निंदा करते हुए यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।

    ईरान ने इस मामले को लेकर तेहरान में यूक्रेन के प्रभारी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संबंधित अधिकारी को विरोध पत्र सौंपते हुए घटना पर ईरान की कड़ी आपत्ति से अवगत कराया गया। मंत्रालय का कहना है कि कथित हमला स्थानीय समयानुसार शनिवार तड़के हुआ, जिसमें जहाज को नुकसान पहुंचा और एक नाविक की मृत्यु हो गई।

    ईरानी विदेश मंत्री ने सार्वजनिक रूप से भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामलों पर दृढ़ रुख अपनाएगा। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर यूक्रेन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें संभावित कूटनीतिक कदमों और आगे की जांच पर टिकी हुई हैं। यह घटनाक्रम पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।