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  • शराब और दवा का कॉम्बिनेशन पड़ सकता है भारी पेनकिलर से लेकर BP की दवा तक इन बातों का रखें ध्यान

    शराब और दवा का कॉम्बिनेशन पड़ सकता है भारी पेनकिलर से लेकर BP की दवा तक इन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। पार्टी या किसी सोशल गैदरिंग के बाद कई लोग सिरदर्द बदहजमी या दूसरी परेशानी होने पर तुरंत दवा ले लेते हैं। कई बार लोग यह मान लेते हैं कि सामान्य दर्द या बुखार की दवा शराब पीने के कुछ समय बाद लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन शराब और दवाओं का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता और कुछ दवाओं के साथ शराब का सेवन गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए शराब पीने के बाद अपनी मर्जी से कोई भी दवा लेना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाता।

    शराब और कई दवाओं को शरीर मुख्य रूप से लिवर की मदद से प्रोसेस करता है। ऐसे में दोनों का एक साथ शरीर में पहुंचना कुछ परिस्थितियों में दवा के असर को बदल सकता है। दवा का प्रभाव जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है या शरीर में उसके स्तर में बदलाव हो सकता है। इसके कारण चक्कर मतली उल्टी अत्यधिक नींद या दूसरी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं। कुछ दवाओं के साथ सांस लेने में परेशानी और ब्लड प्रेशर में गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    पेनकिलर को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। पैरासिटामोल जैसी दवा का इस्तेमाल आमतौर पर दर्द और बुखार के लिए किया जाता है लेकिन शराब का अधिक सेवन करने वाले लोगों में इसे बार बार या अधिक मात्रा में लेना लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी तरह कुछ मजबूत दर्द निवारक दवाएं केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं। इनके साथ शराब लेने पर अत्यधिक नींद और सांस धीमी होने जैसे गंभीर प्रभावों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी पेनकिलर को शराब के बाद अपनी मर्जी से लेने के बजाय डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

    ब्लड प्रेशर की दवाएं लेने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। शराब कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर को कम कर सकती है और जब इसके साथ ऐसी दवा ली जाती है जो रक्तचाप कम करती है तो चक्कर कमजोरी या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है। इसी तरह डायबिटीज की कुछ दवाओं के साथ शराब लेने से ब्लड शुगर कम होने का जोखिम बढ़ सकता है। बुजुर्ग लोगों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय हो सकती है।

    एंटीबायोटिक दवाओं के मामले में भी बिना जानकारी के शराब का सेवन करना उचित नहीं है। सभी एंटीबायोटिक शराब के साथ एक जैसा असर नहीं करते लेकिन कुछ विशेष दवाओं के साथ शराब लेने पर उल्टी पेट खराब होना सिरदर्द और अन्य प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति नियमित दवा ले रहा है तो शराब के बाद दवा लेने या दवा के दौरान शराब पीने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शराब पीने के बाद दवा लेने के लिए कोई एक सुरक्षित अंतराल सभी दवाओं पर लागू नहीं होता। दवा का नाम उसकी खुराक शराब की मात्रा व्यक्ति की उम्र लिवर की स्थिति और दूसरी चल रही दवाओं के आधार पर जोखिम बदल सकता है। इसलिए केवल कुछ घंटे का अंतर रखकर हर दवा को सुरक्षित मान लेना सही नहीं है।

    अगर शराब पीने के बाद दवा लेने पर अत्यधिक नींद सांस लेने में परेशानी बेहोशी लगातार उल्टी सीने में दर्द या असामान्य रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह या दवा के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

  • क्या बाबा बागेश्वर सच में सोने की खड़ाऊ पहनते हैं? बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’

    क्या बाबा बागेश्वर सच में सोने की खड़ाऊ पहनते हैं? बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करूंगा’


    छतरपुर।
    बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की खड़ाऊ इन दिनों चर्चा में है। मुकेश अंबानी के घर गणेश उत्सव के दौरान उनकी सुनहरे रंग की खड़ाऊ नजर आने के बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने का बताया जाने लगा। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी खड़ाऊ लकड़ी की हैं और उन पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है।

    अब इस विवाद पर एक बार फिर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने अपने अंदाज में कहा है कि अगर लोग सोने की खड़ाऊ की चर्चा करते रहेंगे तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे।

    बोले- ‘अगली बार डायमंड की बुक करेंगे’

    छतरपुर में कथा के दौरान खड़ाऊ को लेकर उठ रहे सवालों पर धीरेंद्र शास्त्री ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि अगर उनकी सोने की खड़ाऊ का जिक्र किया गया तो वह अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे। उन्होंने कहा कि वह ऐसे बाबा नहीं हैं जो इस तरह की बातों से डर जाएं।

    उनके इस बयान की रिपोर्ट 20 सितंबर को प्रकाशित हुई है।

    ‘हम माया-मोह छोड़ने वाले बाबा नहीं’

    धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि वह माया-मोह छोड़ने का प्रवचन नहीं देते। उनके अनुसार, उनका संदेश यह है कि व्यक्ति माया-मोह में रहते हुए खूब कमाए और उस धन का इस्तेमाल परमात्मा की ओर बढ़ने में करे।

    उन्होंने कहा कि वह ऐसी बातों में दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहते और जो बात है, उसे उसी रूप में कहेंगे।

    अंबानी के घर जाने के बाद शुरू हुई थी चर्चा

    सोने की खड़ाऊ को लेकर चर्चा उस समय शुरू हुई, जब धीरेंद्र शास्त्री को उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया में गणेश उत्सव के दौरान देखा गया। तस्वीरों और वीडियो में उनके पैरों में सुनहरे रंग की खड़ाऊ दिखाई दीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर इन्हें सोने की खड़ाऊ बताया जाने लगा।

    हालांकि, उपलब्ध तस्वीरों और अन्य रिपोर्टों में इन खड़ाऊ के लकड़ी की होने और उन पर सुनहरी फिनिश होने की जानकारी सामने आई है। इन्हें वास्तव में सोने से बना होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    पहले भी दे चुके हैं सफाई

    धीरेंद्र शास्त्री इस मामले में पहले भी सफाई दे चुके हैं। उनका कहना था कि खड़ाऊ लकड़ी की है और उस पर सुनहरे रंग का पेंट किया गया है। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई थी कि सिर्फ रंग के आधार पर इसे सोने की खड़ाऊ बताया जा रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इतना ज्ञान है कि सोना पैरों में पहनने की चीज नहीं है। बाद में इसी विवाद पर ताजा प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में डायमंड की खड़ाऊ बुक करने की बात कही।

    इस तरह फिलहाल ‘सोने की खड़ाऊ’ का दावा धीरेंद्र शास्त्री के अपने बयान के मुताबिक सही नहीं है। उनके अनुसार खड़ाऊ लकड़ी की है, जबकि सुनहरे रंग के कारण उसके सोने की होने की चर्चा शुरू हुई।

  • ईरान युद्ध पर अमेरिका का खर्च 45 अरब डॉलर के पार, हर महीने 2-3 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ

    ईरान युद्ध पर अमेरिका का खर्च 45 अरब डॉलर के पार, हर महीने 2-3 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ

    वॉशिंगटन। ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष अमेरिका के लिए लगातार महंगा साबित हो रहा है। अमेरिकी सैन्य आकलन के मुताबिक, फरवरी में शुरू हुए युद्ध पर अब तक करीब 45.1 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह राशि नेपाल की सालाना अर्थव्यवस्था के आकार के आसपास बैठती है। वहीं, अमेरिकी कांग्रेस के गैर-पक्षपाती बजट कार्यालय (CBO) ने 1 अगस्त तक युद्ध की प्रत्यक्ष लागत करीब 38 अरब डॉलर आंकी थी।

    ताजा 45.1 अरब डॉलर का आंकड़ा अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से कांग्रेस के समक्ष साझा किए गए आकलन से जुड़ा है। इसमें युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों और सैन्य उपकरणों की भरपाई समेत अन्य परिचालन खर्च शामिल हैं। हालांकि, मध्य पूर्व में क्षतिग्रस्त अमेरिकी सैन्य ठिकानों की पूरी मरम्मत का खर्च इसमें शामिल नहीं है।

    पुराने अनुमान से बढ़ी युद्ध की लागत

    CBO ने सितंबर में बताया था कि 28 फरवरी से 1 अगस्त 2026 तक ईरान युद्ध पर अमेरिका के रक्षा विभाग की लागत करीब 38 अरब डॉलर रही। एजेंसी के मुताबिक, संघर्ष जारी रहने पर इसकी लागत हर महीने लगभग 2 से 3 अरब डॉलर और बढ़ सकती है।

    वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड से जुड़े हालिया आकलन में युद्ध की लागत सितंबर की शुरुआत तक करीब 43.6 अरब डॉलर बताई गई थी। इसमें करीब 28 अरब डॉलर इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद की भरपाई तथा 4.3 अरब डॉलर से अधिक उपकरणों के नुकसान से संबंधित खर्च शामिल था। अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान की भविष्य की मरम्मत लागत इसमें शामिल नहीं थी।

    हर महीने बढ़ सकता है 2 से 3 अरब डॉलर का बोझ

    CBO का अनुमान है कि युद्ध की तीव्रता के आधार पर अमेरिका को हर महीने करीब 2 से 3 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। इसका मतलब है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर अमेरिकी रक्षा बजट पर दबाव और बढ़ सकता है। युद्ध के कारण अमेरिकी हथियार भंडार पर भी दबाव पड़ा है और इस्तेमाल किए गए कुछ हथियारों की भरपाई में कई वर्ष लगने का अनुमान सामने आया है।

    इसके अलावा, मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान की मरम्मत और उपकरणों के पुनर्निर्माण का खर्च अलग से जुड़ सकता है। इसलिए युद्ध की अंतिम लागत मौजूदा अनुमानों से अधिक होने की संभावना बनी हुई है।

    होर्मुज को लेकर ईरान का रुख सख्त

    इस बीच ईरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं करता, तब तक होर्मुज को फिर से खोलने की स्थिति नहीं बनेगी।

    गालिबाफ ने कहा कि ईरान को एक साथ सैन्य और कूटनीतिक दोनों रास्तों पर आगे बढ़ना होगा। उनके मुताबिक, ईरान सैन्य क्षमता के जरिए अपने विरोधियों का मुकाबला करेगा और उचित समय पर कूटनीति के जरिए युद्धक्षेत्र में हासिल बढ़त को मजबूत करेगा।

    कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई गईं शर्तें

    ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए सात शर्तें कतर के माध्यम से भेजे जाने की बात कही है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई के मुताबिक, तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। इन शर्तों में युद्ध समाप्त करना, नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं। ईरान ने हालांकि सभी सात शर्तों की आधिकारिक पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है।

    गालिबाफ के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं कर रहा, लेकिन वह इसे अपनी घोषित शर्तों से जोड़ रहा है।

    वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर

    ईरान-अमेरिका संघर्ष और होर्मुज में जारी बाधाओं का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। होर्मुज दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

    CBO ने भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर अमेरिकी महंगाई पर पड़ सकता है। उसके अनुमान के अनुसार, 2027 की पहली तिमाही में व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) महंगाई दर पहले के अनुमान की तुलना में करीब 0.5 प्रतिशत अंक अधिक हो सकती है।

    इस तरह ईरान युद्ध का असर केवल अमेरिकी सैन्य खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि हथियार भंडार, रक्षा बजट, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ रहा है। संघर्ष जितना लंबा चलेगा, अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसकी वित्तीय लागत उतनी ही बढ़ सकती है।

  • ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियों के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ने का काम कर रही है। गठबंधन को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के संगठन का जिक्र करते हुए कहा कि AIMIM के स्थानीय नेता लगातार लोगों के बीच काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में अलग-अलग बिरादरियों की राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था मौजूद है, लेकिन मुस्लिम समाज के लिए वैसी मजबूत राजनीतिक आवाज नहीं बन पाई है। उन्होंने लोकतंत्र में प्रत्येक समाज को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की बात कही।

    समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि अगले 10 से 12 दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने व्यापक विपक्षी एकजुटता की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सभी साथ आकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा को रोकने में मदद मिल सकती है। इस बयान के बाद यूपी में AIMIM और सपा के बीच संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    ओवैसी ने बिहार के चुनावी अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत छह सीटों की मांग की थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी रणनीति और संगठन के हिसाब से काम करना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश में AIMIM की गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ओवैसी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रहे हैं और पार्टी के संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में रहेगी और इसके लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी।

    मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर भी ओवैसी ने अपनी बात रखी। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद और पुराने कब्रिस्तान से संबंधित कार्रवाई का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने कुछ लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने और लखनऊ में परवेज नाम के व्यक्ति के साथ भीड़ द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। ये दावे ओवैसी की ओर से किए गए हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय को निशाना बनाए जाने का मुद्दा चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं महिला मतदाताओं को लेकर उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव लड़ेगी और पार्टी को सभी वर्गों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

    गठबंधन को लेकर ओवैसी ने अभी किसी दल के साथ अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की है। ताजा बयानों में उन्होंने समान सोच रखने वाले दलों के साथ मिलकर काम करने की संभावना खुली रखी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार AIMIM ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए गठबंधन से जुड़े फैसले की घोषणा 2 अक्टूबर तक करने का संकेत दिया है।

    इस बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दल अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में AIMIM का गठबंधन को लेकर रुख आने वाले दिनों में राज्य के राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।

  • IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद छात्रों का विरोध, 18 मांगों पर प्रशासन सहमत, प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला निलंबित

    IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद छात्रों का विरोध, 18 मांगों पर प्रशासन सहमत, प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला निलंबित

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन बातचीत के बाद आगे बढ़ा है। संस्थान प्रशासन ने छात्रों की ओर से रखी गई 18 मांगों के चार्टर पर सहमति जताई है। इस बीच प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला को भी निलंबित कर दिया गया है।

    साहिल वाकोडे 18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल स्थित कमरे में मृत पाए गए थे। वह एनर्जी साइंस विभाग के छात्र थे। उनकी मौत के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने संस्थान प्रशासन के सामने कई मांगें रखीं और मामले की निष्पक्ष तथा स्वतंत्र जांच की मांग की।

    रविवार देर रात आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों के साथ बैठक की। बैठक में छात्रों की 18 मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद संस्थान ने मांगों के चार्टर पर सहमति जताई। कुछ मांगों को लागू करने की दिशा में कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

    छात्रों की प्रमुख मांगों में साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच शामिल है। छात्रों ने साहिल से संबंधित एक लिंक्डइन पोस्ट को लेकर सार्वजनिक माफी की मांग भी रखी है। इसके अलावा वे जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर तक और पूरी रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक जारी किए जाने की मांग कर रहे हैं।

    छात्रों ने शिक्षकों और प्रोफेसरों के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग भी रखी है। इसके साथ ही कैंपस अस्पताल में चौबीसों घंटे मनोचिकित्सक की सुविधा उपलब्ध कराने और छात्रों के लिए काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की गई है।

    छात्रों का कहना है कि संस्थान के बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी राय को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा मांगों को एक महीने के भीतर पूरा नहीं किए जाने की स्थिति में उन्होंने निदेशक और कुछ अन्य अधिकारियों के इस्तीफे की मांग भी रखी है।

    साहिल की मौत के मामले को लेकर उनके पिता रविंद्र वाकोडे ने एक प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला पिछले करीब तीन महीने से साहिल को जाति को लेकर अपमानित कर रहे थे। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि साहिल को गलत मामले में फंसाने की धमकी दी गई थी।

    संस्थान के अनुसार 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन से नकल करते हुए पकड़ा गया था। इसके कुछ समय बाद उनके हॉस्टल के कमरे में मृत पाए जाने की जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर छात्रों में आक्रोश बढ़ा और विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।

    साहिल के पिता की शिकायत के आधार पर पवई पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।

    सूर्यनारायण डुल्ला आईआईटी बॉम्बे के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं और लंबे समय से संस्थान से जुड़े हुए हैं। छात्रों के विरोध के बीच संस्थान ने 20 सितंबर की शाम उनके निलंबन की कार्रवाई की।

    अब छात्रों की 18 मांगों को लागू करने की प्रक्रिया और मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है। संस्थान की ओर से आने वाले ओपन हाउस में मांगों पर हुई प्रगति और अन्य कदमों की जानकारी दिए जाने की संभावना है। जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की स्थिति भी और स्पष्ट हो सकेगी।

  • उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात 10 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में बड़ा फेरबदल किया है। प्रशासनिक बदलाव के तहत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी नए अधिकारियों को सौंपी गई है। इस फेरबदल में ऊर्जा, परिवहन, चिकित्सा, उच्च शिक्षा, कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद और वन एवं पर्यावरण जैसे विभाग शामिल हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ऊर्जा विभाग में किया गया है। डॉ. आशीष कुमार गोयल को ऊर्जा विभाग से हटाकर श्रम एवं सेवायोजन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह रणवीर प्रसाद को प्रमुख सचिव ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, राज्य विद्युत उत्पादन निगम और यूपीएसएलडीसी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी शिकायतों के बीच ऊर्जा विभाग में हुआ यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    परिवहन विभाग में भी नई जिम्मेदारी दी गई है। अमृत अभिजात को उनके मौजूदा विभागों के साथ परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनके पास पहले से पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य विभाग की जिम्मेदारी है। अब परिवहन विभाग भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल हो गया है।

    चिकित्सा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। अमित कुमार घोष को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग से हटाकर उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

    वी हेकाली झिमोमी को चिकित्सा शिक्षा विभाग सौंपा गया है। इससे पहले उनके पास वन एवं पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी थी। इस बदलाव के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रशासनिक दायित्व भी नए अधिकारी के पास चला गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत डॉ. एमकेएस सुंदरम को कृषि से जुड़े कई विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है।

    रविंद्र को पंचायती राज विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। वहीं अनिल कुमार को पंचायती राज विभाग से हटाकर खाद्य एवं रसद तथा उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें आयुक्त खाद्य एवं रसद का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है।

    महेंद्र प्रसाद अग्रवाल को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर वन एवं पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही अमित गुप्ता को स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के साथ प्राविधिक शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    इस फेरबदल के साथ राज्य सरकार ने कई प्रमुख विभागों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। खास तौर पर ऊर्जा और बिजली से जुड़े विभागों में हुए परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। नई जिम्मेदारियों के तहत अधिकारियों को संबंधित विभागों के कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    ऊर्जा विभाग में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति और उससे जुड़ी शिकायतों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ बिजली क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं की जिम्मेदारी मिलने से विभागीय कामकाज में उनके अधिकार क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

    वहीं परिवहन, चिकित्सा शिक्षा और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद तथा पर्यावरण से जुड़े विभागों में बदलाव के जरिए सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया है।

  • अनुपम खेर को ओहायो में मिला स्पेशल प्रोक्लेमेशन, बोले- देश से दूर सम्मान मिलना मेरे लिए बेहद भावुक पल

    अनुपम खेर को ओहायो में मिला स्पेशल प्रोक्लेमेशन, बोले- देश से दूर सम्मान मिलना मेरे लिए बेहद भावुक पल

    नई दिल्ली । दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर को अमेरिका के ओहायो राज्य में उनके चार दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर के लिए विशेष सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें ओहायो की ओर से स्पेशल प्रोक्लेमेशन प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके फिल्मों में लंबे योगदान के साथ उनके लाइव स्टेज परफॉर्मेंस ‘जाने पहचाने अनजाने’ के लिए भी दिया गया।

    कोलंबस में आयोजित लाइव शो के दौरान अनुपम खेर को यह सम्मान मिला। अभिनेता ने सम्मान से जुड़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की और इसे अपने लिए गर्व और भावुकता से भरा अवसर बताया। उन्होंने ओहायो के इस सम्मान के लिए आभार जताते हुए इसे लंबे समय तक याद रखने वाला अनुभव बताया।

    अनुपम खेर ने सम्मान की तस्वीर साझा करते हुए ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन और लेफ्टिनेंट गवर्नर जिम ट्रेसल का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि चार दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर और ‘जाने पहचाने अनजाने’ के लाइव स्टेज प्रदर्शन के लिए इस तरह का सम्मान मिलना उनके लिए बेहद खास है।

    अभिनेता ने इस सम्मान को गर्व और विनम्रता के साथ स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने इसके लिए ओहायो प्रशासन का आभार व्यक्त किया और अपने सम्मान का श्रेय भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को भी दिया। अनुपम खेर के अनुसार, भारतीय सिनेमा ने उन्हें पहचान और अपनी प्रतिभा को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर दिया।

    उन्होंने अपने लाइव स्टेज शो की पूरी टीम और कलाकारों का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया। अभिनेता ने कहा कि टीम के सदस्यों की मेहनत और जुनून के कारण हर लाइव प्रदर्शन खास बनता है। उनके लिए यह सम्मान अकेले उनके सफर का नहीं, बल्कि उन लोगों के योगदान का भी प्रतीक है जो उनके साथ लगातार काम करते रहे हैं।

    अनुपम खेर ने कहा कि अपने देश से इतनी दूर इस तरह स्वागत और सम्मान मिलना उनके लिए बेहद भावुक क्षण है। उन्होंने ओहायो का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वह इस सम्मान को लंबे समय तक याद रखेंगे।

    अनुपम खेर ने हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1984 में महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ से की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए फिल्म जगत में अपनी पहचान मजबूत की।

    अपने लंबे करियर में अनुपम खेर ‘कर्मा’, ‘तेजाब’, ‘चालबाज’, ‘विजय’, ‘राम लखन’, ‘डैडी’, ‘सौदागर’ और ‘दिल’ जैसी फिल्मों में नजर आए। उन्होंने ‘हम आपके हैं कौन’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘दुल्हन हम ले जाएंगे’ और ‘स्पेशल 26’ जैसी चर्चित फिल्मों में भी अभिनय किया।

    फिल्मों के साथ रंगमंच पर भी उनकी सक्रियता लंबे समय से बनी हुई है। ‘जाने पहचाने अनजाने’ के लाइव प्रदर्शन के लिए मिला यह सम्मान उनके अभिनय और मंचीय सफर से जुड़े योगदान को भी रेखांकित करता है। ओहायो में मिला स्पेशल प्रोक्लेमेशन उनके लिए भारतीय सिनेमा से जुड़े लंबे सफर के दौरान एक खास उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

  • रॉकेट से सैटेलाइट तक देश में बनेंगे अहम पुर्जे, इसरो ने जारी किए टेंडर; फ्लाइट सोलर पैनल भी होंगे स्वदेशी

    रॉकेट से सैटेलाइट तक देश में बनेंगे अहम पुर्जे, इसरो ने जारी किए टेंडर; फ्लाइट सोलर पैनल भी होंगे स्वदेशी

    नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन रॉकेट और सैटेलाइट में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे देश में बनाएगा। इसरो के अलग-अलग केंद्रों ने इन तकनीकी कामों के लिए टेंडर जारी किए हैं। इनमें सबसे अहम रॉड एंड बेयरिंग का स्वदेशी विकास है।

    विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने इसके लिए अलग से टेंडर जारी किया है। खास बात यह है कि इसमें विदेशी मूल के उपकरण निर्माताओं और उनके एजेंटों को बोली लगाने की अनुमति नहीं है। इससे इस तकनीकी क्षेत्र में देश के भीतर विकास और निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

    इसरो के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने वाइब्रेशन टेस्ट फिक्स्चर के लिए टेंडर जारी किया है। इसका इस्तेमाल कंपन की स्थिति में अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरणों और संरचनाओं को जांचने के लिए किया जाता है। अंतरिक्ष अभियानों के दौरान उपकरणों को विभिन्न परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनकी जांच के लिए ऐसे परीक्षण महत्वपूर्ण होते हैं।

    सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र ने एचपीएस3 एक्सियल थ्रस्ट मेजरमेंट सिस्टम के लिए टेंडर निकाला है। यह रॉकेट से जुड़े परीक्षणों में महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा अंतरिक्ष संचार केंद्र ने एक्स-बैंड सिमुलेशन अप-कन्वर्टर और एक्साइटर के लिए भी टेंडर जारी किया है। ये उपकरण अंतरिक्ष संचार से जुड़े तकनीकी कार्यों में उपयोग किए जाते हैं।

    फ्लाइट सोलर पैनल का फैब्रिकेशन और टेस्टिंग भी इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। यूआरएससी ने फ्लाइट सोलर पैनल के निर्माण और परीक्षण के लिए टेंडर मांगा है। इसमें ऐसे सौर पैनलों के निर्माण और उनकी जांच से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा, जिनका इस्तेमाल वास्तविक अंतरिक्ष मिशन में किया जाना है।

    सैटेलाइटों में सौर पैनल सूर्य की रोशनी से बिजली बनाने का मुख्य साधन होते हैं। अंतरिक्ष मिशनों में इनका उपयोग उपग्रहों के लिए आवश्यक विद्युत ऊर्जा उपलब्ध कराने में किया जाता है। इसलिए इनके निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया अंतरिक्ष अभियानों की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है।

    इसरो की ओर से अलग-अलग तकनीकी जरूरतों के लिए जारी किए गए ये टेंडर रॉकेट और सैटेलाइट से जुड़े उपकरणों के देश में विकास और निर्माण की दिशा में उठाए गए कदम हैं। रॉड एंड बेयरिंग से लेकर परीक्षण उपकरणों और संचार प्रणालियों तक कई क्षेत्रों में घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    फ्लाइट सोलर पैनल के निर्माण और परीक्षण को भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। इससे अंतरिक्ष मिशनों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण उपकरणों और प्रणालियों के लिए देश के भीतर निर्माण तथा परीक्षण क्षमता को आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई देता है।

  • विद्या बालन की ‘जेलर 2’ में दमदार एंट्री, ‘कांथा’ के किरदार में दिखा दबंग अंदाज; रजनीकांत संग नजर आएंगी अभिनेत्री

    विद्या बालन की ‘जेलर 2’ में दमदार एंट्री, ‘कांथा’ के किरदार में दिखा दबंग अंदाज; रजनीकांत संग नजर आएंगी अभिनेत्री

    नई दिल्ली ।‘जेलर 2’ के मेकर्स धीरे-धीरे उन कलाकारों के किरदारों से पर्दा उठा रहे हैं, जो इस बहुप्रतीक्षित सीक्वल में रजनीकांत के साथ नजर आएंगे। इसी कड़ी में अब विद्या बालन का नाम भी जुड़ गया है। मेकर्स ने विद्या के किरदार का पहला लुक जारी किया है। वह फिल्म में ‘कांथा’ का किरदार निभा रही हैं। इस किरदार के बारे में अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन नए वीडियो में उन्हें जबरदस्त अंदाज में पेश किया गया है।

    वीडियो में विद्या बालन नीली साड़ी और काले ब्लाउज में नजर आ रही हैं। उनके हाथ में सिगरेट है और वह सीढ़ियों से उतरकर एक कमरे में दाखिल होती हैं। वीडियो में ज्यादा कुछ नहीं दिखाया गया है, लेकिन एक बात साफ नजर आती है कि कांथा का किरदार शांत या दब्बू किस्म का नहीं है। इस सीन में विद्या का अंदाज काफी प्रभावशाली और दबंग दिखाई दे रहा है।

    मेकर्स ने अभी तक यह नहीं बताया है कि कहानी में कांथा का क्या रोल होगा। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, विद्या बालन मिथुन चक्रवर्ती की बड़ी बेटी का किरदार निभाएंगी। कहा जा रहा है कि मिथुन ‘जेलर 2’ में मुख्य विलेन यानी खलनायक की भूमिका में होंगे और रजनीकांत के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। विद्या के किरदार को लेकर भी अभी आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    ‘जेलर’ की कहानी मुथुवेल पांडियन नाम के एक रिटायर्ड जेलर के इर्द-गिर्द घूमती थी। उनका शांत जीवन उस समय पूरी तरह बदल जाता है, जब उनका बेटा लापता हो जाता है। फिल्म में इसके बाद कहानी कई घटनाओं और संघर्षों से गुजरती है।

    ‘जेलर 2’ में ओरिजिनल कास्ट के कई सदस्य भी वापसी कर रहे हैं। इनमें राम्या कृष्णन, योगी बाबू, मिर्ना और ऋत्विक शामिल हैं। वहीं, सीक्वल में कलाकारों की एक नई टीम भी नजर आएगी, जिसमें एसजे सूर्या, मिथुन चक्रवर्ती, विद्या बालन, सूरज वेंजारामूडु, अन्ना राजन और जतिन सरना जैसे नाम शामिल हैं।

    फिल्म में कई कैमियो रोल भी होने की उम्मीद है। खबरों के अनुसार मोहनलाल, शिवा राजकुमार, जैकी श्रॉफ, विजय सेतुपति और ऋतिक रोशन भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ सकते हैं। हालांकि, इन सभी नामों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    विद्या बालन के ‘कांथा’ के रूप में शामिल होने के साथ ‘जेलर 2’ की कास्ट का एक और अहम हिस्सा तय हो गया है। नेल्सन द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म 15 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

  • बालों में कब और कैसे लगाएं नारियल तेल जानिए सही तरीका और किन गलतियों से बचना जरूरी है

    बालों में कब और कैसे लगाएं नारियल तेल जानिए सही तरीका और किन गलतियों से बचना जरूरी है


    नई दिल्ली। बालों की खूबसूरती और मजबूती के लिए लोग लंबे समय से नारियल तेल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। कई घरों में बालों की मालिश के लिए नारियल तेल को पारंपरिक उपाय माना जाता है। इसकी वजह यह है कि नारियल तेल में मौजूद फैटी एसिड बालों और स्कैल्प की देखभाल में मदद कर सकते हैं। खासकर जब बाल रूखे और बेजान नजर आते हैं तब नियमित रूप से सही तरीके से तेल लगाने से बालों में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि नारियल तेल को किसी चमत्कारी इलाज की तरह देखना सही नहीं है। बालों की समस्या के कारण अलग अलग हो सकते हैं इसलिए तेल का असर भी हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

    नारियल तेल का सबसे बड़ा फायदा बालों की नमी से जुड़ा माना जाता है। बालों पर तेल लगाने से बालों की बाहरी परत को कंडीशनिंग मिल सकती है जिससे वे अपेक्षाकृत मुलायम महसूस होते हैं। खासकर ड्राई और फ्रिजी बालों में नारियल तेल लगाने से रूखापन कुछ कम महसूस हो सकता है। बालों को धोने से पहले तेल लगाने पर यह बालों में नमी के नुकसान को कम करने में भी मदद कर सकता है। यही कारण है कि हेयर केयर रूटीन में नारियल तेल को शामिल करने की सलाह लंबे समय से दी जाती रही है।

    नारियल तेल से सिर की मालिश करना भी कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है। हल्के हाथों से स्कैल्प की मालिश करने से आराम महसूस हो सकता है और बालों में तेल समान रूप से फैल जाता है। हालांकि बहुत ज्यादा जोर से मसाज करने से बचना चाहिए। स्कैल्प पर चोट या जलन होने की स्थिति में तेल लगाने से परेशानी बढ़ सकती है। इसी तरह अगर किसी व्यक्ति को डैंड्रफ या स्कैल्प से जुड़ी कोई समस्या है तो केवल तेल लगाना पर्याप्त इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

    बालों में नारियल तेल लगाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। थोड़ी मात्रा में तेल लेकर उसे हल्का गुनगुना किया जा सकता है। इसके बाद बालों की लंबाई और जरूरत के अनुसार स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। तेल लगाने के बाद कुछ समय के लिए छोड़कर सामान्य शैंपू से बाल धोए जा सकते हैं। बहुत अधिक तेल लगाने से बाल चिपचिपे हो सकते हैं और उन्हें साफ करने के लिए ज्यादा शैंपू की जरूरत पड़ सकती है।

    एक और जरूरी बात यह है कि हर व्यक्ति के बाल और स्कैल्प एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों को नारियल तेल लगाने के बाद बाल भारी या चिपचिपे महसूस हो सकते हैं। वहीं संवेदनशील स्कैल्प वाले लोगों में किसी भी नए प्रोडक्ट से जलन या खुजली हो सकती है। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ी मात्रा में लगाकर प्रतिक्रिया देखना बेहतर है। अगर लगातार खुजली लालिमा या जलन हो तो इस्तेमाल रोककर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

    अगर बाल बहुत ज्यादा झड़ रहे हैं या अचानक बालों का घनत्व कम हो रहा है तो केवल नारियल तेल पर निर्भर रहना उचित नहीं है। बाल झड़ने के पीछे पोषण की कमी हार्मोनल बदलाव तनाव आनुवंशिक कारण या स्कैल्प की समस्या जैसे कई कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में सही कारण पता करना ज्यादा जरूरी है। कुल मिलाकर नारियल तेल बालों को कंडीशन करने और रूखेपन को कम करने वाली हेयर केयर रूटीन का हिस्सा बन सकता है लेकिन इसके इस्तेमाल का सही तरीका और व्यक्ति के बालों की जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है।