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  • पिछोर में फिर रातोंरात प्रतिमा लगाने का मामला फुटेरा में राधा-कृष्ण की मूर्ति देख सुबह उमड़े लोग प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

    पिछोर में फिर रातोंरात प्रतिमा लगाने का मामला फुटेरा में राधा-कृष्ण की मूर्ति देख सुबह उमड़े लोग प्रशासन के सामने बड़ा सवाल


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के पिछोर इलाके में सार्वजनिक स्थानों पर रातोंरात प्रतिमाएं स्थापित किए जाने का सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला धार्मिक प्रतिमा से जुड़ा है। पिछोर क्षेत्र के फुटेरा वार्ड नंबर 15 में रविवार रात अज्ञात लोगों द्वारा राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित किए जाने की जानकारी सामने आई है। सोमवार सुबह जैसे ही स्थानीय लोगों की नजर प्रतिमा पर पड़ी तो यह खबर तेजी से पूरे इलाके में फैल गई। कुछ ही समय में बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे और प्रतिमा के दर्शन के साथ पूजा-अर्चना शुरू कर दी। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर धार्मिक उत्साह का माहौल दिखाई दिया है।

    बताया जा रहा है कि फुटेरा वार्ड नंबर 15 में रविवार रात किसी अज्ञात व्यक्ति या समूह ने श्रीराधा-कृष्ण की प्रतिमा रखी। रात में प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद सुबह जब लोगों ने इसे देखा तो आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी गई। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। श्रद्धालुओं ने प्रतिमा के सामने पूजा की और दर्शन किए। अचानक सार्वजनिक स्थान पर प्रतिमा नजर आने से यह मामला स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह है कि प्रतिमा किसने स्थापित की है इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रतिमा स्थापित करने से पहले संबंधित प्रशासन से किसी तरह की अनुमति ली गई थी या नहीं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल इस संबंध में स्थिति साफ नहीं है। ऐसे में अब लोगों की नजर पुलिस और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर है।

    पिछोर विधानसभा क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर रातोंरात प्रतिमाएं स्थापित किए जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। इससे पहले अलग-अलग स्थानों पर महापुरुषों सहित अन्य लोगों की प्रतिमाएं लगाए जाने को लेकर विवाद की स्थिति बन चुकी है। कुछ मामलों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं और कई जगह चक्काजाम जैसी स्थिति तक सामने आई है। पुलिस ने पूर्व के कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई भी की थी। इसके बावजूद इस तरह रातोंरात प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की घटनाएं पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रही हैं।

    फुटेरा में राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित होने के बाद फिलहाल स्थानीय लोगों में धार्मिक उत्साह नजर आ रहा है। सुबह से ही लोग प्रतिमा के दर्शन के लिए पहुंचते रहे और पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। राधा-कृष्ण की प्रतिमा सामने आने के बाद आसपास के लोगों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर प्रतिमा की स्थापना से जुड़े तथ्य अभी स्पष्ट होना बाकी हैं।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सार्वजनिक स्थान पर किसी प्रतिमा की स्थापना के बाद उसके आसपास धार्मिक गतिविधियां शुरू हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जानना जरूरी होगा कि प्रतिमा कब किसने और किन परिस्थितियों में स्थापित की। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित स्थान पर प्रतिमा लगाने के लिए कोई अनुमति ली गई थी या नहीं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाता है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

    फुटेरा में सुबह अचानक राधा-कृष्ण की प्रतिमा मिलने से जहां श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया वहीं रातोंरात प्रतिमा स्थापित किए जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल भी खड़े हुए हैं। अब पूरे मामले की तस्वीर प्रशासनिक जांच और पुलिस की कार्रवाई के बाद ही साफ हो सकेगी।

  • शिवपुरी में दर्दनाक हादसा दोस्तों के साथ नदी में नहा रहा था किशोर तभी बढ़ा पानी 500 मीटर दूर मिला शव

    शिवपुरी में दर्दनाक हादसा दोस्तों के साथ नदी में नहा रहा था किशोर तभी बढ़ा पानी 500 मीटर दूर मिला शव


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के सुरवाया थाना क्षेत्र में सिंध नदी में डूबे 15 वर्षीय किशोर का शव करीब 24 घंटे की तलाश के बाद बरामद कर लिया गया। रविवार दोपहर दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया दिनेश अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव की चपेट में आ गया था। देखते ही देखते वह पानी में डूब गया। घटना के बाद पुलिस और रेस्क्यू टीम ने उसकी तलाश शुरू की लेकिन रविवार को उसका कोई पता नहीं चल सका। सोमवार को एसडीईआरएफ और होमगार्ड की टीम ने दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाया जिसके बाद घटनास्थल से करीब 500 मीटर दूर किशोर का शव मिला।

    ग्राम डबिया निवासी दिनेश पुत्र स्वर्गीय प्रकाश आदिवासी रविवार दोपहर करीब एक बजे अपने दोस्तों के साथ सिंध नदी में नहाने गया था। उसके तीन साथी भी कुछ दूरी पर नदी में मौजूद थे। इसी दौरान अचानक नदी का जलस्तर बढ़ गया और पानी का बहाव तेज हो गया। दिनेश तेज बहाव की चपेट में आ गया और संभल नहीं सका। साथ मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन कुछ ही देर में वह पानी में दिखाई देना बंद हो गया।

    किशोर को डूबता देखकर एक ग्रामीण ने भी उसे बचाने के लिए नदी में छलांग लगाई लेकिन तेज बहाव के कारण वह दिनेश तक नहीं पहुंच सका। हादसे की सूचना रविवार शाम करीब 5:45 बजे सुरवाया थाना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और नदी के आसपास तलाश शुरू कराई गई। स्थानीय लोगों की मदद से भी किशोर को खोजने का प्रयास किया गया लेकिन देर शाम तक कोई सफलता नहीं मिली।

    बताया गया कि ऊपरी हिस्से में हुई बारिश के कारण सिंध नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा था। इसका असर मड़ीखेड़ा स्थित अटल सागर बांध पर भी पड़ा। पानी बढ़ने के बाद बांध के चार गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। इसके चलते सिंध नदी का बहाव और तेज हो गया। इसी बढ़े हुए जलस्तर के दौरान दिनेश नदी में नहा रहा था और तेज धारा में फंस गया।

    सोमवार को एसडीईआरएफ और होमगार्ड की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर फिर से तलाश अभियान शुरू किया। टीम ने नदी के अलग-अलग हिस्सों में खोजबीन की। करीब 24 घंटे तक चले प्रयास के बाद घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर दिनेश का शव बरामद किया गया। शव मिलने की सूचना के बाद परिवार में मातम छा गया। जिस किशोर के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में परिजन नदी किनारे तलाश अभियान का इंतजार कर रहे थे वहां उसकी मौत की खबर पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया।

    रेस्क्यू अभियान में एसडीईआरएफ प्रभारी अफाक के साथ मुकेश युवंजय देवेंद्र रवि बिलवार भैय्या साहब और कप्तान सेन सहित अन्य सदस्य शामिल रहे। टीम ने काफी देर तक नदी में तलाश जारी रखी और आखिरकार किशोर का शव बरामद करने में सफलता मिली।

    घटना के बाद पुलिस ने शव बरामद कर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। सिंध नदी में अचानक बढ़े जलस्तर और तेज बहाव के बीच हुआ यह हादसा परिवार के लिए बेहद दुखद है। इस घटना ने एक बार फिर बारिश के दौरान नदियों और जलाशयों में बढ़ते जलस्तर के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।

  • शिवपुरी में काम के दौरान मौत: सीमेंट की बोरियां उतारते समय बिजली तार से छुआ हाथ करंट लगते ही नीचे गिरा युवक

    शिवपुरी में काम के दौरान मौत: सीमेंट की बोरियां उतारते समय बिजली तार से छुआ हाथ करंट लगते ही नीचे गिरा युवक


    शिवपुरी शिवपुरी जिले के खनियाधाना में सोमवार को एक दर्दनाक हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। पनिहारा तिराहा पर ट्रक से सीमेंट की बोरियां उतार रहे 26 वर्षीय मजदूर की 11 KV बिजली लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। बताया गया कि युवक ट्रक के ऊपर चढ़कर सीमेंट उतार रहा था तभी ट्रक के थोड़ा आगे बढ़ने के दौरान उसका हाथ ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। तेज करंट लगते ही युवक ट्रक से नीचे गिर पड़ा। हादसे के बाद मौके पर मौजूद साथी मजदूरों ने तुरंत परिजनों को सूचना दी।

    मृतक की पहचान वार्ड नंबर 6 राजबाड़ा मोहल्ला निवासी हेमंत रजक के रूप में हुई है। हेमंत पुत्र गोपाल रजक मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था। सोमवार को वह पनिहारा तिराहा पर कम्मा साहू के यहां खड़े ट्रक से सीमेंट की बोरियां उतारने के काम में लगा था। ट्रक का नंबर RJ09GD8725 बताया गया है। इसी दौरान ट्रक को कुछ आगे बढ़ाया गया और ऊपर मौजूद हेमंत 11 KV की बिजली लाइन के संपर्क में आ गया।

    करंट की चपेट में आते ही हेमंत बुरी तरह झुलस गया और संतुलन बिगड़ने के कारण ट्रक से नीचे गिर पड़ा। हादसे के समय उसके साथ कमल रजक फूल सिंह रजक और अवधेश रजक भी काम कर रहे थे। उन्होंने घटना को देखते ही परिजनों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही हेमंत के बड़े भाई नीरज रजक और पिता गोपाल रजक मौके पर पहुंचे। परिवार के लोग बिना देर किए उसे सरकारी अस्पताल खनियाधाना लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद हेमंत को मृत घोषित कर दिया।

    युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। जिस समय हेमंत रोज की तरह मजदूरी करने के लिए घर से निकला था उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही देर बाद परिवार को उसकी मौत की खबर मिलेगी। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों में भी शोक का माहौल बन गया। घटना ने एक बार फिर काम के दौरान बिजली लाइनों से जुड़े सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर ऐसे स्थानों पर जहां ऊंचे वाहनों पर चढ़कर सामान उतारा या लादा जाता है वहां ऊपर से गुजर रही बिजली लाइनों की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

    हादसे के बाद मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए खनियाधाना के पीएम हाउस में रखवाया गया। मृतक के भाई नीरज रजक की मौखिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बिजली लाइन और ट्रक की स्थिति समेत हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

    इस हादसे ने परिवार के सामने बड़ा दुख खड़ा कर दिया है। हेमंत की मौत से उसके परिजनों का सहारा छिन गया। वहीं घटना के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि ऐसे स्थानों पर जहां ट्रक और दूसरे ऊंचे वाहन खड़े होते हैं वहां बिजली लाइनों की ऊंचाई और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सावधानी बरती जा रही है या नहीं। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही हादसे की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर और साफ हो सकेगी।

  • कर्नाटक में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय महिला की मौत, CCTV में कैद हुआ दर्दनाक घटनाक्रम

    कर्नाटक में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय महिला की मौत, CCTV में कैद हुआ दर्दनाक घटनाक्रम

    कर्नाटक के कोप्पल जिले में बंदर के अचानक हमले से 91 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। घटना उस समय हुई, जब नजमुन्निसा बेगम अपने घर के बाहर परिसर में टहल रही थीं। इसी दौरान एक बंदर अचानक दीवार फांदकर घर के परिसर में दाखिल हुआ और तेजी से उनकी ओर बढ़ते हुए उन्हें धक्का दे दिया।

    अचानक लगे धक्के से नजमुन्निसा बेगम अपना संतुलन नहीं संभाल सकीं और कंक्रीट के फर्श पर गिर पड़ीं। गिरने के दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगी। घटना के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    बताया गया कि घटना शनिवार शाम की है। नजमुन्निसा बेगम रोज की तरह अपने घर के बाहर आंगन में टहल रही थीं। इसी दौरान बाहर से कुछ आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर वह घर से बाहर आईं। तभी अचानक बंदर दीवार के ऊपर से छलांग लगाकर परिसर में पहुंच गया।

    बंदर ने परिसर में आते ही महिला की ओर छलांग लगाई और उन्हें जोरदार धक्का दे दिया। हमले से महिला जमीन पर गिर गईं। उनकी उम्र अधिक होने के कारण गिरने से उन्हें गंभीर चोट लगी। सिर में चोट लगने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    घटना का पूरा दृश्य घर के बाहर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। फुटेज में बंदर को महिला की ओर तेजी से आते और उन्हें धक्का देते हुए देखा जा सकता है। महिला के गिरने के बाद घर के अंदर से एक अन्य महिला बाहर आती है।

    इसके बाद बंदर उस महिला की ओर भी बढ़ता है और उस पर हमला करने की कोशिश करता दिखाई देता है। इसी दौरान आसपास के लोग मौके पर पहुंच जाते हैं। लोगों को आता देख बंदर वहां से भाग जाता है। इसके बाद घायल नजमुन्निसा बेगम को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

    नजमुन्निसा बेगम क्षेत्र के प्रसिद्ध लेखक एम.एस. सवदत्ती की पत्नी थीं। बताया गया कि वह नियमित रूप से अपने घर के परिसर में टहलती थीं। इसी दौरान अचानक बंदर के पहुंचने से यह पूरी घटना कुछ ही क्षणों में घट गई।

    इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सामान्य रूप से घर के बाहर टहल रही बुजुर्ग महिला को अचानक बंदर ने धक्का दिया और वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। CCTV फुटेज में घटना का क्रम रिकॉर्ड होने से हमले के दौरान हुई गतिविधियां सामने आई हैं।

    91 वर्षीय महिला की मौत के बाद इलाके में भी इस घटना को लेकर चर्चा है। घर के परिसर में अचानक हुए इस हमले ने एक सामान्य शाम को दर्दनाक हादसे में बदल दिया। नजमुन्निसा बेगम की मौत से परिवार में शोक का माहौल है।

  • रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    रूस के संसदीय चुनाव में पुतिन की पार्टी की बड़ी जीत, यूनाइटेड रशिया ने 450 में से 355 सीटों पर दर्ज किया कब्जा

    नई दिल्ली । रूस में 2026 के संसदीय चुनाव के शुरुआती नतीजों में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में पार्टी ने 355 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस परिणाम के साथ यूनाइटेड रशिया ने संसद में अपना मजबूत बहुमत बरकरार रखा है।

    यह चुनाव फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद पहला संसदीय चुनाव था। ऐसे समय में हुए इस चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर रही। चुनाव के दौरान यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों के समर्थन का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया। यूनाइटेड रशिया ने पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अधिक सीटें हासिल की हैं।

    रूस की 450 सदस्यीय संसद में 225 सीटों के लिए पार्टी-लिस्ट प्रणाली के तहत मतदान होता है, जबकि बाकी 225 सीटों पर सीधे उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होता है। उपलब्ध नतीजों के अनुसार यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवार सिंगल-मेंबर सीटों में से 208 पर आगे रहे। पार्टी को पार्टी-लिस्ट मतदान में भी 58 प्रतिशत के आसपास वोट मिले हैं।

    2021 में हुए पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया ने स्टेट ड्यूमा की 450 में से 324 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार 355 सीटों का आंकड़ा पिछले चुनाव के मुकाबले काफी अधिक है। इससे संसद में पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है।

    चुनाव में मतदान प्रतिशत भी चर्चा में रहा। रूस में कुल मतदान करीब 57 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। मॉस्को में भी मतदान को लेकर लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। चुनाव के दौरान कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी।

    इस बार युद्ध-विरोधी याब्लोको पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी-लिस्ट चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली। हालांकि उसके कुछ नेताओं को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने का अवसर मिला। इसके अलावा कई सरकार विरोधी नेताओं और उम्मीदवारों के चुनाव में हिस्सा लेने पर भी रोक रही।

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूनाइटेड रशिया पार्टी के औपचारिक सदस्य नहीं हैं। हालांकि वह वर्ष 2008 से 2012 तक पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। उस समय भी पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए औपचारिक सदस्यता जरूरी नहीं थी। वर्ष 2012 में पुतिन ने पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ दिया था। इसके बाद दिमित्री मेदवेदेव ने पार्टी की कमान संभाली।

    चुनाव के अंतिम चरण में रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर भी दिखाई दिया। मतदान के आखिरी दिन मॉस्को और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमलों की जानकारी सामने आई। मॉस्को को निशाना बनाकर सैकड़ों ड्रोन भेजे जाने का दावा किया गया, जबकि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन की कुल संख्या 1,600 से अधिक बताई गई।

    युद्ध के बीच हुए इस संसदीय चुनाव के नतीजों में यूनाइटेड रशिया की 355 सीटों की जीत ने रूस की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में पार्टी की मजबूत स्थिति को फिर सामने ला दिया है।

  • राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले की जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने रखी गईं। जांच के दौरान मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई, जिसमें चंदा चोरी की 105 घटनाओं का पता चला है। इन घटनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

    जांच में CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। रिकॉर्डिंग का बारीकी से विश्लेषण कर घटनाओं की परिस्थितियों को समझने और संबंधित लोगों की पहचान करने की कोशिश की गई। जांच में सामने आए अलग-अलग साक्ष्यों को आपस में मिलाकर मामले की कड़ियों को जोड़ने का काम किया गया है।

    अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि मंदिर में कीमती सामान से संबंधित रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती हैं। इन रसीदों को सुरक्षित रखने के लिए SBI लॉकर में रखा जाता है। जांच के दौरान रसीदों की व्यवस्था, रिकॉर्ड और अन्य जरूरी सामग्री को भी देखा गया। CCTV में सामने आई 105 घटनाएं अब मामले की जांच का अहम हिस्सा बन गई हैं।

    जांच की मौजूदा स्थिति के मुताबिक पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। इस समयसीमा को देखते हुए मामले की जांच और आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच की स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। हालांकि अदालत ने रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले को सेशन जज से अपने पास लेने की आवश्यकता नहीं है। अगर आगे किसी अतिरिक्त जांच की जरूरत महसूस होती है, तो उस संबंध में उचित आदेश जारी किया जा सकता है।

    चंदा चोरी के मामले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। ट्रस्ट में CEO व्यवस्था लागू की गई है और पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक कामकाज को नए तरीके से संचालित करने की तैयारी की गई है।

    मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि पूरी होने की तारीख भी अहम है। बताया गया कि 25 सितंबर को यह अवधि पूरी हो रही है। यदि निर्धारित समय तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो गिरफ्तार आरोपियों को कानून के तहत स्वत: जमानत मिलने की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से समय पर आरोप पत्र दाखिल करना जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल होने और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। CCTV में सामने आई 105 घटनाओं, गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी तरुणा वर्मा ने 80 के दशक की यादें कीं साझा, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर जिंदगी को बताया खास

    विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी तरुणा वर्मा ने 80 के दशक की यादें कीं साझा, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर जिंदगी को बताया खास


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक की तस्वीरों का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग अपनी तस्वीरों को उस दौर की फैशन और फोटोग्राफी शैली में बदलकर पुरानी यादों को ताजा कर रहे हैं। इसी बीच शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी और दृष्टि आईएएस की डायरेक्टर तरुणा वर्मा ने भी 80 के दशक से जुड़ी यादों को एक तस्वीर के जरिए साझा किया है।

    तरुणा वर्मा ने अपने पति विकास दिव्यकीर्ति की तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि यह तस्वीर वास्तव में 80 के दशक की नहीं, बल्कि वर्तमान समय की है। इसके साथ उन्होंने उस दौर को याद किया, जब लोगों की जिंदगी मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी सुविधाओं से पूरी तरह दूर थी।

    उन्होंने अपने पोस्ट में उस समय के जीवन को याद करते हुए लिखा कि आज यह सोचकर हैरानी होती है कि बिना मोबाइल और सोशल मीडिया के लोग किस तरह अपनी जिंदगी बिताते थे। उस दौर में फोन पर लगातार समय बिताने की आदत नहीं थी और लोगों के पास एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ज्यादा मौके होते थे।

    तरुणा वर्मा ने बचपन के दिनों को याद करते हुए गर्मियों की दोपहर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि घरवालों के मना करने के बावजूद बच्चे छिपकर अपनी सहेलियों के साथ खेलने निकल जाते थे। तेज धूप के बावजूद खेल-कूद का उत्साह कम नहीं होता था और बच्चों का ध्यान अपनी त्वचा या धूप से होने वाले बदलावों पर नहीं रहता था।

    उन्होंने उस समय और आज के दौर के बीच अंतर को अपने अंदाज में सामने रखा। उनके मुताबिक, पहले चेहरे पर दाग-धब्बे होने जैसी बातों को लेकर इतनी चिंता नहीं होती थी। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और दोस्तों के साथ बिताए पलों में ज्यादा सहज रहते थे।

    तरुणा वर्मा ने बचपन के खेलों का जिक्र करते हुए कबड्डी और रुमाल चोर जैसी गतिविधियों को याद किया। इन खेलों में दोस्तों के बीच जीतने की होड़ होती थी, लेकिन उस प्रतिस्पर्धा का आधार सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स नहीं थे। उन्होंने पुराने समय की दोस्ती और आज की सोशल मीडिया वाली दोस्ती के बीच के अंतर को भी अपने पोस्ट में रेखांकित किया।

    उन्होंने आज के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले दिखावे की ओर भी इशारा किया। उनकी बातों में यह भाव नजर आया कि अब कई बार लोगों के बीच तुलना और लाइक्स की प्रतिस्पर्धा रिश्तों और दोस्ती के सहजपन को प्रभावित करती है।

    उन्होंने बिजली चले जाने के एक सामान्य अनुभव को भी आज के मोबाइल-केंद्रित जीवन से जोड़कर बताया। पहले बिजली जाने पर लोग एक-दूसरे के साथ बैठते थे, जबकि अब कुछ समय के लिए फोन और इंटरनेट उपलब्ध न होने पर बेचैनी महसूस होने लगती है।

    तरुणा वर्मा और विकास दिव्यकीर्ति की शादी 1998 में हुई थी। उनका एक बेटा है, जिसका नाम सात्विक है। तरुणा वर्मा वर्तमान में दृष्टि आईएएस की डायरेक्टर हैं। वह दृष्टि वेलफेयर फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं और संस्थान में अध्यापन का अनुभव रखती हैं।

  • सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश, पुराना फैसला रद्द; 29 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

    सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश, पुराना फैसला रद्द; 29 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

    नई दिल्ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से जुड़े पुराने मतदाता सूची मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के पहले के आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश में पुलिस जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज किया गया था। अब मामले को संबंधित एसीजेएम अदालत के पास वापस भेज दिया गया है, जहां शिकायत पर नए सिरे से सुनवाई होगी। अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है।

    यह मामला सोनिया गांधी का नाम 1980 की नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होने के आरोपों से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया है कि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी। ऐसे में नागरिकता हासिल करने से करीब तीन साल पहले 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज होने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए कथित तौर पर जाली या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत में 1980, 1982 और 1983 के घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया गया है कि 1980 में नाम दर्ज होने के बाद 1982 में उसे क्यों हटाया गया और 1983 में नागरिकता मिलने के बाद नाम दोबारा किस आधार पर शामिल किया गया।

    इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस से जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। हालांकि, मजिस्ट्रेट अदालत ने पहले इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उस आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की।

    विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अब निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उसमें मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था। अदालत ने पुराने आदेश को ऐसा आदेश माना जिसमें निष्कर्ष के पीछे पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे।

    अदालत ने यह भी कहा कि एफआईआर की मांग पर फैसला लेने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारी की बात सुनी जानी चाहिए थी और पुलिस थाने से स्थिति रिपोर्ट मंगाई जानी चाहिए थी। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि मजिस्ट्रेट को पहले यह देखना था कि शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध के होने का आधार बनता है या नहीं।

    विशेष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं मजिस्ट्रेट की भूमिका निभाकर सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकती। इसी कारण मामले को वापस एसीजेएम अदालत भेजा गया है। अब संबंधित अदालत शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और पुलिस के पक्ष पर नए सिरे से विचार करेगी।

    एसीजेएम अदालत को दोनों पक्षों को सुनने के बाद कारणों सहित नया आदेश पारित करना होगा। पुलिस से स्थिति रिपोर्ट और संबंधित पक्षों की दलीलों पर भी विचार किया जाएगा। इसके बाद तय होगा कि मामले में एफआईआर दर्ज करने या आगे की जांच के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं या नहीं।

    महत्वपूर्ण रूप से, ताजा अदालत के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। अदालत ने फिलहाल पुराने आदेश को रद्द कर मामले की दोबारा सुनवाई का रास्ता खोला है। अब 29 सितंबर की सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

  • कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारतीय बाजार को सहारा, सेंसेक्स 564 अंक चढ़ा, फार्मा और एफएमसीजी शेयरों में तेजी

    नई दिल्ली ।कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेजी देखने को मिली। फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,858.99 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 74,294.96 अंक के स्तर से 240.21 अंक यानी 0.32 प्रतिशत ऊपर 74,535.18 अंक पर खुला था। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,987.40 अंक का उच्चतम स्तर भी छुआ, जो पिछले बंद स्तर से 692.43 अंक यानी 0.93 प्रतिशत अधिक था।

    निफ्टी 50 में हालांकि कारोबार की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। यह पिछले बंद 23,346.40 अंक की तुलना में 16.20 अंक फिसलकर 23,330.20 अंक पर खुला। बाद में इसमें तेजी आई और यह 120.40 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,466.80 अंक के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। अंत में निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23,414.30 अंक पर बंद हुआ।

    व्यापक बाजार में दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि सोमवार के कारोबार में तेजी मुख्य रूप से बड़े शेयरों तक सीमित रही।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी फार्मा, हेल्थकेयर, रियल्टी, एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, पीएसयू बैंक और ऑटो इंडेक्स में कमजोरी रही।

    निफ्टी 50 के प्रमुख लाभ वाले शेयरों में इटरनल, एचसीएल टेक, आईटीसी, सन फार्मा, मैक्स हेल्थ, टाइटन, एचडीएफसी लाइफ और एसबीआई लाइफ शामिल रहे। दूसरी ओर भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावरग्रिड, विप्रो, ग्रासिम, इंफोसिस और टाटा स्टील में गिरावट दर्ज की गई।

    वैश्विक बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी अहम संकेत रही। सऊदी अरब से शिपमेंट में सुधार की उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.25 प्रतिशत घटकर 101.5 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर बाजार की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    भारतीय शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि में भी बदलाव देखने को मिला। लगातार सात कारोबारी सत्रों की बिकवाली के बाद शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 599 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी खरीदारी जारी रखी और सत्र के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया।

    बाजार में सकारात्मक माहौल को वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच प्रस्तावित बातचीत तथा अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं से भी समर्थन मिला। हालांकि, आने वाले समय में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।

  • FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब बिना स्टिकर बदले बदल सकेंगे बैंक; OneTag से आसान होगा पोर्टेबिलिटी का पूरा काम

    FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत, अब बिना स्टिकर बदले बदल सकेंगे बैंक; OneTag से आसान होगा पोर्टेबिलिटी का पूरा काम


    नई दिल्ली । नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने FASTag यूजर्स के लिए OneTag पोर्टेबिलिटी सुविधा शुरू की है। इसके तहत वाहन मालिक अपनी कार की विंडस्क्रीन पर लगे मौजूदा FASTag स्टिकर को हटाए बिना उससे जुड़े बैंक या इशूअर को बदल सकेंगे। इससे बैंक बदलने के लिए नया FASTag खरीदने और पुराने स्टिकर को हटाने की जरूरत नहीं रहेगी।

    अब तक अगर किसी वाहन मालिक को FASTag का बैंक बदलना होता था, तो उसे पुराने FASTag को वाहन से हटाकर नया टैग लेना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय और अतिरिक्त खर्च दोनों होते थे। OneTag सुविधा के जरिए इस परेशानी को दूर करने की कोशिश की गई है। यह प्रक्रिया मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह होगी, जिसमें नंबर वही रहता है और केवल सेवा प्रदाता बदला जाता है।

    इस सुविधा की शुरुआत मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान की गई। नई व्यवस्था में वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा मौजूदा FASTag स्टिकर ही इस्तेमाल होता रहेगा। FASTag ID में भी बदलाव नहीं होगा। इससे बार-बार नया टैग लेने की आवश्यकता कम होगी और वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलना अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

    FASTag को नए बैंक में पोर्ट करने के लिए वाहन मालिक को सबसे पहले अपने मोबाइल में राजमार्गयात्रा ऐप पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करके यह जांचना होगा कि FASTag पोर्टेबिलिटी के लिए वाहन पात्र है या नहीं।

    पात्रता की पुष्टि होने के बाद मौजूदा FASTag बैंक की ओर से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर छह अंकों का वेरिफिकेशन कोड भेजा जाएगा। इस कोड को ऐप में दर्ज करने के बाद वाहन मालिक अपनी पसंद का नया FASTag इशूअर बैंक चुन सकेगा। इसके बाद नए बैंक के साथ ग्राहक सत्यापन और वॉलेट ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रक्रिया पूरी होते ही FASTag पोर्टेबिलिटी पूरी हो जाएगी।

    हालांकि, बैंक बदलने के बाद तुरंत दोबारा पोर्टेबिलिटी की सुविधा नहीं मिलेगी। अगर कोई यूजर भविष्य में फिर किसी दूसरे बैंक में FASTag पोर्ट करना चाहता है, तो उसे छह महीने तक इंतजार करना होगा। सफल पोर्टेबिलिटी के बाद पुराना बैंक मौजूदा FASTag वॉलेट बंद करेगा और उसमें बची राशि को रिफंड करेगा। इसके बाद छह महीने का कूलिंग पीरियड लागू रहेगा।

    फिलहाल OneTag पोर्टेबिलिटी कुछ चुनिंदा बैंकों और इशूअर्स के जरिए उपलब्ध कराई गई है। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एयरटेल पेमेंट बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी यूनियन बैंक, फेडरल बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, करूर वैश्य बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं।

    इस सुविधा से FASTag व्यवस्था में भी बदलाव की उम्मीद है। नया टैग बनाने, उसकी डिलीवरी और उससे जुड़े खर्च कम होने के साथ पुराने FASTag को ही जारी रखने की सुविधा मिलेगी। इससे वाहन मालिकों के लिए बैंक बदलने की प्रक्रिया सरल होगी और FASTag के संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।