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  • प्रोटीन की दौड़ में कौन सबसे आगे? चिकन, मछली और मटन की पोषण क्षमता का पूरा सच

    प्रोटीन की दौड़ में कौन सबसे आगे? चिकन, मछली और मटन की पोषण क्षमता का पूरा सच


    नई दिल्ली । स्वस्थ शरीर और संतुलित जीवनशैली के लिए प्रोटीन सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक माना जाता है। यह न केवल मांसपेशियों के निर्माण और उनकी मरम्मत में मदद करता है, बल्कि त्वचा, बाल, नाखून और शरीर की कई आवश्यक जैविक प्रक्रियाओं के लिए भी जरूरी होता है। नॉन-वेज आहार लेने वाले लोगों के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि चिकन, मछली और मटन में से कौन-सा खाद्य पदार्थ सबसे अधिक प्रोटीन प्रदान करता है और स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे बेहतर विकल्प कौन है।

    पोषण विशेषज्ञों के अनुसार 100 ग्राम पके हुए चिकन ब्रेस्ट में लगभग 30 से 31 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। यही कारण है कि चिकन को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सबसे लोकप्रिय स्रोत माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें प्रोटीन अधिक और फैट अपेक्षाकृत कम होता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले लोग, खिलाड़ी और फिटनेस प्रेमी अपनी डाइट में चिकन को प्राथमिकता देते हैं।

    मछली भी प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत मानी जाती है। सामान्य तौर पर 100 ग्राम मछली में 20 से 26 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है, हालांकि यह मात्रा मछली की प्रजाति के अनुसार बदल सकती है। मछली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पोषक तत्व हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाने और शरीर में सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसी कारण पोषण विशेषज्ञ नियमित रूप से मछली का सेवन करने की सलाह देते हैं।

    मटन भी प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों में शामिल है। 100 ग्राम मटन में लगभग 25 से 27 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसके साथ ही यह आयरन, जिंक और विटामिन बी12 जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का भी अच्छा स्रोत है। हालांकि मटन में फैट की मात्रा चिकन और अधिकांश मछलियों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।

    यदि केवल प्रोटीन की मात्रा के आधार पर तुलना की जाए तो चिकन सबसे आगे माना जाता है। इसके बाद मटन और फिर मछली का स्थान आता है। लेकिन स्वास्थ्य लाभों के व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मछली को सबसे संतुलित विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ-साथ हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभकारी ओमेगा-3 फैटी एसिड भी मौजूद होता है।

    खिलाड़ियों, बॉडीबिल्डर्स और नियमित व्यायाम करने वाले लोगों के लिए चिकन और मछली दोनों ही उत्कृष्ट विकल्प हो सकते हैं। बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए भी प्रोटीन युक्त आहार शरीर की रिकवरी में मददगार साबित होता है। वहीं आयरन और विटामिन बी12 की कमी से जूझ रहे लोगों को सीमित मात्रा में मटन का सेवन लाभ पहुंचा सकता है।

    बुजुर्गों के लिए भी पर्याप्त प्रोटीन का सेवन आवश्यक माना जाता है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की शक्ति कम होने लगती है। ऐसे में मछली और चिकन जैसे आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ का चुनाव केवल प्रोटीन की मात्रा के आधार पर नहीं, बल्कि संपूर्ण पोषण प्रोफाइल और व्यक्तिगत स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

  • मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान

    मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान

    नई दिल्ली । बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बीच एक 95 वर्षीय महिला की सूझबूझ और साहस की कहानी सामने आई है, जिसने इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जगा दी। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती राधा देवी ने समय रहते आग और धुएं की जानकारी नर्सिंग स्टाफ को देकर कई मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि उन्हें अब इस हादसे की ‘मसीहा’ के रूप में देखा जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में देर रात आग लग गई थी। आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र में धुआं फैलने लगा, जिससे वहां भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे और धुएं के कारण उनका दम घुटने लगा। इस हादसे में पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

    इसी आईसीयू में छपरा मेघ क्षेत्र की निवासी 95 वर्षीय राधा देवी भी भर्ती थीं। उम्र और बीमारी के बावजूद उन्होंने सबसे पहले स्थिति की गंभीरता को समझा। परिजनों के अनुसार, धुआं फैलते ही उन्होंने अपने चेहरे से ऑक्सीजन मास्क हटाया और स्वयं बाहर निकलकर नर्स को आग लगने की जानकारी दी। उनके इस कदम के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    राधा देवी ने स्थानीय बज्जिका बोली में घटना का वर्णन करते हुए बताया कि अचानक धुआं फैलने लगा और आसपास अंधेरा सा महसूस होने लगा। उन्होंने कहा कि आग कैसे लगी, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन धुआं देखते ही वह बाहर निकलीं और तुरंत नर्स को इसकी सूचना दी। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने स्थिति की जांच की और राहत कार्य शुरू किए।

    परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि राधा देवी समय रहते सतर्कता नहीं दिखातीं, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। रात करीब साढ़े तीन बजे आग लगने की बात सामने आई, जबकि कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रशासन और अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।

    अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के साथ-साथ अस्पताल में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। बचाव दल ने करीब 15 से 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि धुएं और आग की चपेट में आने से कई मरीज गंभीर रूप से प्रभावित हुए, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है।

    घटना के बाद अस्पताल के आईसीयू की तस्वीरों ने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया है। आग में बेड, चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन बुरी तरह जल गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

    इस दर्दनाक हादसे के बीच राधा देवी की सतर्कता और साहस ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में जागरूकता और त्वरित निर्णय कई जिंदगियों को बचा सकते हैं। उनकी भूमिका को स्थानीय लोग और प्रभावित परिवार एक असाधारण मानवीय उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जिसने एक बड़े हादसे को और भयावह होने से रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर भाजपा का राष्ट्रव्यापी अभियान, उपलब्धियों का लेखा-जोखा लेकर जनता के बीच उतरेंगे नेता

    मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर भाजपा का राष्ट्रव्यापी अभियान, उपलब्धियों का लेखा-जोखा लेकर जनता के बीच उतरेंगे नेता

    नई दिल्ली । केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने व्यापक स्तर पर जनसंपर्क और जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी पूरी कर ली है। पार्टी आगामी दिनों में देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को जनता के सामने प्रस्तुत करेगी। इस अभियान का उद्देश्य पिछले बारह वर्षों के शासनकाल के दौरान हुए प्रमुख बदलावों और नीतिगत निर्णयों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाना है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस विशेष अभियान के तहत सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत विवरण पांच अलग-अलग बुकलेट में प्रकाशित किया जाएगा। इन बुकलेटों को विभिन्न विषयों के आधार पर तैयार किया गया है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए कार्यों और उपलब्धियों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया जा सके। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत संरचना विकास, सामाजिक कल्याण, आर्थिक सुधार और जनहित से जुड़े प्रमुख फैसलों का उल्लेख किया जाएगा।

    बताया गया है कि “राष्ट्र प्रथम” शीर्षक वाली बुकलेट में उन महत्वपूर्ण निर्णयों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लागू किया गया। वहीं “राष्ट्र निर्माण” में देशभर में सड़कों, रेल, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विवरण दिया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य क्षमता से जुड़े विषयों को भी अलग श्रेणी में शामिल किया गया है, जिसमें सशस्त्र बलों की उपलब्धियों और सुरक्षा अभियानों का उल्लेख रहेगा।

    भाजपा इस पूरे अभियान को “बारह साल विश्वास के, विकास के, जन कल्याण के” थीम के साथ आयोजित करेगी। पार्टी का दावा है कि पिछले एक दशक से अधिक समय में गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और वंचित वर्गों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं, जिनका व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिला है। इसी उपलब्धि को जनता तक पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है।

    कार्यक्रमों के तहत 8 जून से 12 जून तक देशभर में मीडिया संवाद आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता इन संवादों में सरकार की नीतियों और उपलब्धियों पर विस्तार से जानकारी देंगे। इसी अवधि में विशेष बुकलेटों का भी औपचारिक विमोचन किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि इससे सरकार के कार्यों की जानकारी अधिक संगठित और प्रभावी तरीके से आम जनता तक पहुंचेगी।

    8 जून से 14 जून के बीच विशेष जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में नागरिकों से सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और स्थानीय उपलब्धियों की जानकारी साझा की जाएगी। साथ ही वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, प्रगति पथ यात्राएं और “विकसित भारत संकल्प सम्मेलन” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

    पार्टी ने प्रत्येक जिले में कम से कम 500 प्रमुख व्यक्तियों से संपर्क स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों, पेशेवर संगठनों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का संदेश पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।

    12 जून से 20 जून के बीच देशभर में जनकल्याण शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में आयुष्मान भारत, पीएम स्वनिधि, पीएम सूर्य घर और अन्य प्रमुख योजनाओं के लाभार्थियों का पंजीकरण कराया जाएगा। भाजपा संगठन को निर्देश दिया गया है कि पात्र लोगों को शिविरों तक पहुंचाने और योजनाओं से जोड़ने में सक्रिय सहयोग दिया जाए।

    अभियान के दौरान पर्यावरण दिवस पर “एक पेड़ मां के नाम” कार्यक्रम तथा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मंडल स्तर तक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह अभियान केवल उपलब्धियों के प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने का माध्यम भी बनेगा।

  • चुनावी हार के बाद बढ़ीं ममता बनर्जी की चुनौतियां, बागी विधायकों के बाद अब सांसदों के पाला बदलने की चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता

    चुनावी हार के बाद बढ़ीं ममता बनर्जी की चुनौतियां, बागी विधायकों के बाद अब सांसदों के पाला बदलने की चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद जारी सियासी उथल-पुथल अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्य में चुनावी पराजय के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और गुटबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच ऐसे दावे भी किए जा रहे हैं कि पार्टी के कुछ सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं और भविष्य में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    सूत्रों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं और वैकल्पिक राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कई सांसदों और भाजपा नेतृत्व के बीच विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। यदि भविष्य में इस तरह का कोई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और संसद में विपक्षी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

    तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक शक्ति रही है। हालांकि हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही संगठन के भीतर असंतोष की खबरें सामने आने लगी थीं। पार्टी के कुछ नेताओं और विधायकों ने नेतृत्व की कार्यशैली, संगठनात्मक निर्णयों और विभिन्न विवादों के प्रबंधन को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे।

    राज्य विधानसभा में भी राजनीतिक स्थिति तेजी से बदली है। बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा अलग रुख अपनाने और नए नेतृत्व के समर्थन की खबरों ने तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक संकट को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े चुनावी झटके के बाद दलों के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर असहमति उभरना असामान्य नहीं है, लेकिन यदि यह असंतोष लगातार बढ़ता है तो इसका असर पार्टी की भविष्य की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है।

    संसद में तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की प्रमुख पार्टियों में गिनी जाती रही है। ऐसे में सांसदों के संभावित राजनीतिक बदलाव की अटकलें विपक्षी राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संसद में किसी भी बड़े दल की संख्या में बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

    दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व संगठन को एकजुट रखने और राजनीतिक चुनौतियों से निपटने में जुटा हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाए रखना और कार्यकर्ताओं के बीच विश्वास कायम रखना होगा। इसके साथ ही पार्टी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि चुनावी हार के बाद उत्पन्न असंतोष और मतभेदों को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

    फिलहाल राजनीतिक परिदृश्य में अनिश्चितता बनी हुई है और सभी की निगाहें संभावित घटनाक्रमों पर टिकी हैं। यदि सांसदों के पाला बदलने संबंधी दावे आगे चलकर वास्तविक रूप लेते हैं तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव का कारण बन सकता है। वहीं यदि पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने में सफल रहता है तो यह संकट उसके लिए संगठनात्मक पुनर्गठन का अवसर भी साबित हो सकता है।

  • दिल्ली-एनसीआर में मौसम ने अचानक ली करवट, दिन में छाया अंधेरा; तेज आंधी और झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहत

    दिल्ली-एनसीआर में मौसम ने अचानक ली करवट, दिन में छाया अंधेरा; तेज आंधी और झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहत

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में गुरुवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। दोपहर तक जहां तेज धूप और उमस लोगों को परेशान कर रही थी, वहीं कुछ ही समय बाद आसमान में घने बादल छा गए और तेज धूल भरी आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। मौसम के इस अप्रत्याशित बदलाव ने राजधानी और आसपास के इलाकों में दिन के समय ही रात जैसा माहौल पैदा कर दिया। कई स्थानों पर दृश्यता प्रभावित हुई, जबकि तेज हवाओं और बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी और लू से बड़ी राहत दिलाई।

    दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आसपास के कई क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। दिनभर की चिलचिलाती गर्मी से परेशान लोगों ने बारिश का स्वागत किया। कई जगहों पर तेज हवाओं के कारण पेड़ों की शाखाएं झूलती नजर आईं, जबकि सड़कों पर वाहन चालकों को सावधानी बरतनी पड़ी। बारिश शुरू होते ही कई इलाकों में यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हुई।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही दिल्ली-एनसीआर के लिए गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई थी। विभाग ने 4 और 5 जून के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी गतिविधियों के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक मौसम में बदलाव बना रह सकता है।

    मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है, जबकि रात के समय भी बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे तापमान में और गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव राजधानी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी के दौर को कुछ समय के लिए कमजोर कर सकता है।

    पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार को भी दिल्ली-एनसीआर में मौसम का यही रुख बना रह सकता है। गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। इसके चलते अधिकतम तापमान में कमी बनी रह सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलती रहेगी। हालांकि मौसम विभाग ने खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास अनावश्यक रूप से खड़े न रहने की सलाह दी है।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून पूर्व गतिविधियों के कारण इस तरह के बदलाव सामान्य हैं, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए सावधानी बरतना आवश्यक है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों, खुले में काम करने वाले लोगों और किसानों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

    आने वाले दिनों में राजधानी क्षेत्र में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना है। हालांकि सप्ताहांत तक तापमान में फिर से कुछ बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल बारिश और बादलों ने लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से बड़ी राहत पहुंचाई है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकतानुसार नई चेतावनियां जारी की जा सकती हैं।

  • भारत बना वैश्विक पूंजी का सबसे भरोसेमंद ठिकाना, दीर्घकालिक निवेशकों की पहली पसंद के रूप में उभरी भारतीय अर्थव्यवस्था: पीयूष गोयल

    भारत बना वैश्विक पूंजी का सबसे भरोसेमंद ठिकाना, दीर्घकालिक निवेशकों की पहली पसंद के रूप में उभरी भारतीय अर्थव्यवस्था: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत ने खुद को दुनिया के सबसे विश्वसनीय निवेश गंतव्यों में स्थापित किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा लगातार भारत की ओर बढ़ रहा है और दुनिया भर की दीर्घकालिक पूंजी अब भारतीय अर्थव्यवस्था में नए अवसर तलाश रही है।

    मुंबई में आयोजित ‘सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026’ को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि हाल के दिनों में न्यूयॉर्क और टोरंटो के प्रमुख निवेशकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत को लेकर वैश्विक निवेशकों का दृष्टिकोण पहले से अधिक सकारात्मक हुआ है। उन्होंने कहा कि अब चर्चा इस बात पर नहीं होती कि भारत में निवेश किया जाए या नहीं, बल्कि इस बात पर केंद्रित होती है कि निवेशक भारत की विकास यात्रा में कितनी जल्दी और कितनी व्यापक भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और आने वाले वर्षों में भी यह स्थिति बरकरार रहने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन, कारोबार करने में आसानी, आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल तकनीकों के विस्तार और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय निवेश समुदाय के बीच स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    गोयल ने कहा कि भारत ने हर चुनौती को अवसर में बदलने की क्षमता दिखाई है। वैश्विक स्तर पर उत्पन्न संकटों के दौरान भी देश ने अपनी आर्थिक नीतियों और व्यावसायिक रणनीतियों को समय के अनुरूप ढालते हुए विकास की गति बनाए रखी। यही कारण है कि आज भारत व्यापार, निवेश और औद्योगिक विस्तार के लिए एक आकर्षक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

    उन्होंने अपनी हालिया कनाडा यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल उनके साथ गया था। वहां विभिन्न पेंशन फंड, बीमा कंपनियों और संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में गहरी रुचि दिखाई। साथ ही भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    न्यूयॉर्क में प्रमुख निवेश कंपनियों और लगभग 50 वैश्विक व्यवसायिक संस्थाओं के साथ हुई चर्चाओं का हवाला देते हुए गोयल ने कहा कि भारत को अब एक भरोसेमंद वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र, स्थिर कारोबारी साझेदार और सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून का शासन, निर्णायक नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और 140 करोड़ से अधिक लोगों का विशाल उपभोक्ता आधार भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं।

    भारत में सफल विदेशी निवेश के उदाहरण देते हुए मंत्री ने हुंडई और जेसीबी जैसी कंपनियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों ने उस समय भारत में निवेश किया था जब बुनियादी ढांचा और औद्योगिक क्षमताएं आज की तुलना में काफी सीमित थीं। इसके बावजूद उन्होंने यहां दीर्घकालिक निवेश से उल्लेखनीय लाभ अर्जित किया और अपने वैश्विक कारोबार का विस्तार किया।

    गोयल ने कहा कि भारत केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि नवाचार, डिजाइन, अनुसंधान और उन्नत विनिर्माण का उभरता हुआ वैश्विक केंद्र भी बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा का भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि भविष्य की तकनीकों और नए औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के लिए भारत व्यापक अवसर प्रदान कर रहा है।

  • भारत की पहली 100% एथेनॉल कार लॉन्च: मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल से स्वच्छ परिवहन को नई रफ्तार

    भारत की पहली 100% एथेनॉल कार लॉन्च: मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल से स्वच्छ परिवहन को नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल यात्री कार वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल लॉन्च कर दी है। यह वाहन E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर संचालित हो सकता है और 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने के लिए तैयार भारत का पहला यात्री वाहन माना जा रहा है।

    कंपनी की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। एथेनॉल आधारित ईंधन न केवल आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नई वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल को विशेष रूप से इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह विभिन्न स्तरों के एथेनॉल मिश्रण के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भविष्य में भारत के हरित परिवहन मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। इससे देश में जैव ईंधन उद्योग को भी नई गति मिलने की संभावना है।

    लॉन्च कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार लगातार ऐसे विकल्पों को बढ़ावा दे रही है जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करें। उन्होंने बताया कि सरकार की वैकल्पिक ईंधन रणनीति के तहत डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण को भी बढ़ावा देने की योजना है, जिससे पारंपरिक ईंधनों के उपयोग को धीरे-धीरे कम किया जा सके।

    गडकरी ने ऑटोमोबाइल उद्योग से आग्रह किया कि वे पुराने वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुरूप परिवर्तित करने की संभावनाओं पर काम करें। उनका मानना है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और देश में चल रहे वाहन स्क्रैपेज कार्यक्रम को भी समर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ ईंधन आधारित तकनीकों को अपनाने से वायु गुणवत्ता में सुधार और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने बताया कि कंपनी केवल फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि कंप्रेस्ड बायोगैस और हाइड्रोजन जैसे भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य भारतीय बाजार के लिए टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन समाधान विकसित करना है।

    कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भारत में ग्रीन मोबिलिटी को लेकर उपभोक्ताओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में बिकने वाले हरित वाहनों में मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रही, जो इस क्षेत्र में कंपनी की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बढ़ती उपलब्धता किसानों, एथेनॉल उत्पादकों और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

    वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल का लॉन्च भारत के ऊर्जा परिवर्तन अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल न केवल स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देती है, बल्कि देश को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ विकास के लक्ष्य के करीब ले जाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

  • आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल, ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर बने विकास के प्रमुख इंजन

    आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल, ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर बने विकास के प्रमुख इंजन

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और लागत संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2026 का समापन मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ किया है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, बीएसई 500 कंपनियों के संयुक्त शुद्ध मुनाफे में चौथी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारतीय कंपनियां बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भी अपनी परिचालन क्षमता और लाभप्रदता बनाए रखने में सफल रही हैं।

    एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत राजस्व वृद्धि, बेहतर नकदी प्रवाह, संतुलित बैलेंस शीट और विभिन्न क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी ने भारतीय कॉरपोरेट जगत को मजबूती प्रदान की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की आय वृद्धि की संभावनाएं और अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं।

    विशेष रूप से गैर-वित्तीय कंपनियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इन कंपनियों की कुल राजस्व वृद्धि बढ़कर 12.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 9.2 प्रतिशत थी। यह सुधार दर्शाता है कि मांग में बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार का लाभ कंपनियों को व्यापक स्तर पर मिला है। हालांकि परिचालन लाभ मार्जिन यानी ईबीआईटीडीए मार्जिन मामूली रूप से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गया, फिर भी कंपनियों की कमाई की गुणवत्ता मजबूत बनी रही।

    रिपोर्ट के अनुसार, चौथी तिमाही के दौरान लाभ वृद्धि केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर व्यापक रूप से विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दिया। बीएसई 500 की लगभग 59 प्रतिशत कंपनियों ने अपने मुनाफे में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जबकि 39 प्रतिशत कंपनियों का लाभ 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र में कमाई का सुधार व्यापक और टिकाऊ स्वरूप ले रहा है।

    कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहे। निफ्टी की लगभग 48 प्रतिशत कंपनियों ने विश्लेषकों की अपेक्षाओं से अधिक प्रदर्शन किया, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा केवल 32 प्रतिशत था। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और यह संकेत मिला है कि कंपनियों की बुनियादी स्थिति अनुमान से कहीं अधिक सुदृढ़ बनी हुई है।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्र ने सबसे प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। इस क्षेत्र की आय में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसे बेहतर उपभोक्ता मांग और खर्च में वृद्धि का समर्थन मिला। वहीं उपभोक्ता आवश्यक वस्तु क्षेत्र ने भी 15 प्रतिशत से अधिक की आय वृद्धि दर्ज कर स्थिर मांग का संकेत दिया।

    वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में चुनौतियों के बावजूद भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने 13.4 प्रतिशत की आय वृद्धि हासिल की। वित्तीय क्षेत्र ने भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए 13.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और बाजार की कुल कमाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर इस तिमाही के सबसे बड़े प्रदर्शनकर्ता बनकर उभरे। ऊर्जा क्षेत्र की आय में 23.8 प्रतिशत और मटेरियल क्षेत्र की आय में 23.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि उत्पादन और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

    कंपनियों के आकार के आधार पर देखें तो मिडकैप कंपनियों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर 34.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि लार्जकैप और स्मॉलकैप कंपनियों का लाभ क्रमशः 10.3 प्रतिशत और 10.4 प्रतिशत बढ़ा। यह प्रदर्शन बताता है कि मध्यम आकार की कंपनियां वर्तमान कारोबारी माहौल में तेजी से अवसरों का लाभ उठाने में सफल रही हैं और निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

  • रोहित शर्मा और विराट कोहली की फिटनेस पर नजर, सीरीज से पहले होगा जरूरी टेस्ट

    रोहित शर्मा और विराट कोहली की फिटनेस पर नजर, सीरीज से पहले होगा जरूरी टेस्ट


    नई दिल्ली ।  अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली की फिटनेस को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। टीम प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि दोनों खिलाड़ियों के खेलने को लेकर अंतिम फैसला फिटनेस टेस्ट और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

    भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोएशेट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे बड़े खिलाड़ियों का टीम से बाहर या अंदर होना हमेशा चर्चा का विषय रहता है। उन्होंने बताया कि मेडिकल टीम दोनों खिलाड़ियों की स्थिति की समीक्षा कर रही है और अगले कुछ दिनों में उनकी उपलब्धता पर निर्णय लिया जाएगा।

    फिटनेस रिपोर्ट के बाद ही तय होगा भविष्य
    कोच डोएशेट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में खिलाड़ियों की फिटनेस सबसे महत्वपूर्ण मानदंड है। उन्होंने कहा कि जैसे ही मेडिकल टीम अपनी रिपोर्ट देगी, उसके आधार पर आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी कि रोहित और कोहली सीरीज का हिस्सा होंगे या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि टीम प्रबंधन चाहता है कि सभी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मैचों में पूरी फिटनेस और सर्वश्रेष्ठ फॉर्म के साथ उतरें, ताकि टीम का प्रदर्शन प्रभावित न हो।

    वर्कलोड और आईपीएल को लेकर भी चर्चा
    सहायक कोच ने खिलाड़ियों के वर्कलोड और आईपीएल के दौरान चोटों के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी की स्थिति अलग होती है और इसे व्यक्तिगत रूप से देखा जाना चाहिए। डोएशेट के अनुसार, आईपीएल जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में खिलाड़ियों पर काफी दबाव रहता है, लेकिन टीम इंडिया के लिए जरूरी है कि जब खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय ड्यूटी पर आएं तो वे पूरी तरह फिट हों।

    हार्दिक पांड्या पर भी नजर, टीम संयोजन पर असर संभव
    अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए चुनी गई भारतीय टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली और हार्दिक पांड्या को शामिल किया गया है। हालांकि, फिटनेस को लेकर अनिश्चितता के कारण टीम संयोजन में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है।

  • भारत में हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों की संख्या और संपत्ति दोनों में दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि

    भारत में हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों की संख्या और संपत्ति दोनों में दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि

    नई दिल्ली । भारत में आर्थिक गतिविधियों की मजबूती और निवेश बाजारों के बेहतर प्रदर्शन का असर देश के संपन्न वर्ग पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान देश में उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों यानी हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही उनकी कुल वित्तीय संपत्ति भी नए स्तर पर पहुंच गई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती क्षमता और निवेश माहौल की मजबूती को दर्शाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत में उच्च संपत्ति वाले लोगों की संख्या सालाना आधार पर लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 3.9 लाख के करीब पहुंच गई। इसी अवधि में उनकी कुल वित्तीय संपत्ति में भी 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह आंकड़ा लगभग 1.64 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल संपत्ति मूल्य में बढ़ोतरी का परिणाम नहीं है, बल्कि देश में निवेश के बढ़ते अवसरों और आर्थिक विस्तार का भी संकेत है।

    भारतीय अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2025 में मजबूत प्रदर्शन किया। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने से उद्योग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को व्यापक समर्थन मिला। आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा और पूंजी बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रहा। इसका सीधा लाभ उन निवेशकों को मिला जिनकी बड़ी हिस्सेदारी शेयर बाजार और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों में थी।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि निवेशकों की प्राथमिकताओं में तेजी से बदलाव हो रहा है। पारंपरिक निवेश विकल्पों के साथ-साथ अब व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप निवेश समाधान, वैकल्पिक परिसंपत्तियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वेल्थ मैनेजमेंट सेवाएं लोकप्रिय हो रही हैं। वित्तीय सलाह और निवेश रणनीति में तकनीक की बढ़ती भूमिका ने संपत्ति प्रबंधन के तरीके को भी बदल दिया है।

    वैश्विक स्तर पर भी वर्ष 2025 संपन्न वर्ग के लिए काफी सकारात्मक रहा। दुनिया भर के उच्च संपत्ति वाले लोगों की कुल संपत्ति में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस वृद्धि का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जहां संपत्ति और उच्च संपत्ति वाले लोगों की संख्या दोनों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। जापान, चीन, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस क्षेत्रीय वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजारों में मजबूती, महंगाई में नरमी और तकनीकी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने वैश्विक संपत्ति निर्माण में अहम भूमिका निभाई। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों में आई तेजी ने निवेशकों को उल्लेखनीय लाभ पहुंचाया। इसका असर भारत समेत कई देशों में संपन्न वर्ग की वित्तीय स्थिति पर दिखाई दिया।

    रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों को इस वृद्धि का सबसे अधिक लाभ मिला क्योंकि उनके निवेश सार्वजनिक बाजारों और बेहतर प्रदर्शन करने वाली निजी परिसंपत्तियों में केंद्रित रहे। वहीं निवेश पोर्टफोलियो में शेयरों और निश्चित आय वाले निवेश साधनों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है, जो निवेशकों की संतुलित रणनीति को दर्शाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति बनी रहती है और पूंजी बाजारों में स्थिरता कायम रहती है, तो आने वाले वर्षों में देश में संपन्न वर्ग की संख्या और उनकी कुल संपत्ति दोनों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। यह रुझान भारत को वैश्विक संपत्ति निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।