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  • श्रीलंका दौरे से पहले भारतीय टेस्ट टीम के प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों ने बढ़ाई चयनकर्ताओं की चिंताएं

    श्रीलंका दौरे से पहले भारतीय टेस्ट टीम के प्रमुख खिलाड़ियों की चोटों ने बढ़ाई चयनकर्ताओं की चिंताएं


    नई दिल्ली ।
    अगस्त माह से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट श्रृंखला से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट टीम की चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। आगामी दौरे के लिए टीम की घोषणा से पूर्व कई महत्वपूर्ण खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पांच प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने या पूरी तरह से फिट न होने के कारण टीम प्रबंधन और कप्तान के सामने सही संयोजन तैयार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेज गेंदबाज हर्षित राणा और उभरते हुए ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी चोट के कारण श्रीलंका दौरे के लिए चयन प्रक्रिया से बाहर हो चुके हैं। इन दोनों युवा खिलाड़ियों की अनुपस्थिति टीम के संतुलन के लिहाज से एक बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि दोनों ने ही हालिया समय में अपने हरफनमौला प्रदर्शन से प्रभावित किया था। इनके बाहर होने से तेज गेंदबाजी और ऑलराउंडर विभाग में नए विकल्पों की तलाश बढ़ गई है।

    इसके अतिरिक्त, स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और मध्यक्रम के बल्लेबाज साई सुदर्शन के खेलने पर भी संशय बना हुआ है। दोनों खिलाड़ी इस समय अपनी रिकवरी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और उन्हें अपनी फिटनेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने की सलाह दी गई है। राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में चिकित्सा परीक्षण पास करने के बाद ही उनके चयन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि ये खिलाड़ी पूरी तरह से फिट घोषित नहीं होते हैं, तो उन्हें भी इस दौरे से आराम दिया जा सकता है।

    ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर भी पूरी तरह फिट न होने के कारण गाले में आयोजित होने वाले पहले टेस्ट मैच से बाहर रह सकते हैं। हालांकि, दूसरे टेस्ट तक उनकी वापसी की उम्मीद जताई जा रही है, जो उनकी अंतिम फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। दूसरी ओर, टीम के लिए राहत की बात यह है कि अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा की टीम में वापसी लगभग तय मानी जा रही है, जिससे स्पिन विभाग को मजबूती मिलेगी।

    खिलाड़ियों के एक साथ चोटिल होने के कारण चयनकर्ताओं को अब नए और युवा चेहरों को मौका देने पर विचार करना पड़ सकता है। आगामी दिनों में होने वाले वार्म-अप मैच और फिटनेस रिपोर्ट के आधार पर ही श्रृंखला के लिए अंतिम भारतीय दल की तस्वीर साफ हो पाएगी।

  • इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप

    इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप


    इंदौर । नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर में प्रस्तावित न्याय यात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेताओं ने रिहाई के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि उन्हें प्रशासन ने डीसीपी से चर्चा कराने का भरोसा देकर बुलाया लेकिन बातचीत कराने के बजाय सीधे थाने ले जाकर धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। छात्रों का कहना है कि पूरी कार्रवाई के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के सदस्य राधे जाट ने बताया कि 23 जुलाई को प्रस्तावित न्याय यात्रा के संबंध में पुलिस प्रशासन से पहले ही संपर्क किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यात्रा की पूरी जानकारी एक दिन पहले पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दी गई थी और अनुमति भी मांगी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें यह कहकर बुलाया कि डीसीपी से चर्चा कराई जाएगी। छात्रों ने पुलिस पर भरोसा किया और उनके साथ चले गए लेकिन रास्ते में उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए। इसके बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल चौकी और फिर चंदन नगर थाने ले जाया गया।

    छात्र नेताओं का कहना है कि अगले दिन मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें एसीपी के सामने पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की गई। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

    रिहा हुए छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और मानसिक रूप से परेशान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र सुरेंद्र यादव के साथ भी कथित रूप से अपशब्द कहे गए। इस मामले में विजय चौधरी चंद्रशेखर गुर्जर गौरव परिहार और हरिप्रपन्न गोस्वामी को भी गिरफ्तार किया गया था। सभी का कहना है कि उन्हें अपराधियों की तरह पेश किया गया जबकि उनका उद्देश्य केवल छात्रों की आवाज उठाना था।

    छात्र नेताओं का यह भी आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद चार दिनों तक उनके परिवारों को यह तक नहीं बताया गया कि उन्हें कहां रखा गया है। इससे परिजन लगातार परेशान रहे और उन्हें अपने बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिल सकी। रिहाई के समय उनसे बॉन्ड ओवर भी भरवाया गया। छात्रों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने एमपीपीएससी पटवारी भर्ती घोटाले और अन्य छात्र आंदोलनों में भी हिस्सा लिया था लेकिन कभी इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा।

    रिहाई के बाद छात्र नेताओं ने इंदौर में लागू कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के इस्तेमाल की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि गिरफ्तारी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेता ने उनकी सुध नहीं ली। अब यह मामला छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच नए विवाद का कारण बनता दिखाई दे रहा है जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं।

  • सांपों के शारीरिक क्रमिक विकास और बिना पैरों के रेंगने की अद्भुत क्षमता पर वैज्ञानिक विश्लेषण…

    सांपों के शारीरिक क्रमिक विकास और बिना पैरों के रेंगने की अद्भुत क्षमता पर वैज्ञानिक विश्लेषण…

    नई दिल्ली । प्रकृति और जीव जगत में विविध जीवों की शारीरिक संरचना हमेशा से कौतूहल का विषय रही है। बिना पैरों के बेहद तेजी से सरकने और शिकार करने की क्षमता रखने वाला सांप भी एक ऐसा ही जीव है, जिसकी शारीरिक बनावट को लेकर सदियों से अध्ययन होते रहे हैं। जीव विज्ञान और जीवाश्म विज्ञान के क्षेत्र में हुए शोधों से यह तथ्य स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया है कि सांप हमेशा से बिना पैर वाले जीव नहीं थे, बल्कि क्रमिक विकास यानी इवोल्यूशन की लंबी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपने पैरों को खो दिया था।

    वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, लगभग चौदह से आठ करोड़ वर्ष पूर्व क्रेटेशियस काल में सांपों के पूर्वजों में शारीरिक बदलाव की शुरुआत हुई थी। वैज्ञानिकों के बीच इसके मुख्य कारणों को लेकर दो प्रमुख सिद्धांत प्रचलित हैं। पहली अवधारणा के अनुसार सांपों के शुरुआती पूर्वज जमीन के भीतर तंग बिलों और मिट्टी के अंदर रहकर जीवन व्यतीत करते थे। संकीर्ण स्थानों में आने-जाना सुगम बनाने के लिए पैर एक प्रकार की रुकावट बनते थे, जिसके चलते समय के साथ उनका उपयोग समाप्त होता गया और प्रकृति के नियमानुसार उनके अंग धीरे-धीरे गायब हो गए। दूसरी थ्योरी के तहत इनकी बनावट जलचर वातावरण के अनुकूल ढलने के कारण विकसित हुई।

    जीवाश्म रिकॉर्ड इस बात की पुष्टि करते हैं कि सांपों के अंग एक झटके में नहीं बल्कि लाखों वर्षों की अवधि में विलुप्त हुए। अर्जेंटीना में पाए गए लगभग नौ करोड़ साल पुराने नजाश रियोनेग्रिना नामक सांप के जीवाश्म में छोटे पिछले पैरों के अवशेष मिले थे, जो आकार में काफी छोटे थे। वहीं बिना पैरों वाले सबसे पुराने जीवाश्म डिनिलिसिया पैटागोनिका के अवशेष लगभग साढ़े आठ करोड़ वर्ष पुराने पाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उस काल तक आते-आते सांपों का ढांचा पूरी तरह से बिना पैरों वाला हो चुका था और कंधे या कूल्हे की हड्डियां भी समाप्त हो चुकी थीं।

    बिना पैरों के चलने और रेंगने के लिए सांपों का शरीर अत्यंत विशिष्ट मांसपेशियों और पेट की निचली त्वचा पर स्थित चौड़ी पट्टियों यानी स्केल्स पर निर्भर करता है। ये पट्टियां जमीन या सतह पर मजबूत पकड़ बनाती हैं, जिससे सांप अपनी रीढ़ की हड्डी को लहरदार तरीके से मोड़ते हुए आगे बढ़ने में सक्षम होते हैं। इस विशेष शारीरिक संरचना के कारण ही वे तंग दरारों, घनी झाड़ियों और बिलों में बेहद सुगमता से प्रवेश कर पाते हैं।

    वैज्ञानिक शोध निष्कर्ष निकालते हैं कि प्राकृतिक चयन की इस प्रक्रिया ने सांपों को बिना पैरों के भी अत्यधिक कुशल और सफल शिकारी बनाया है। अपने परिवेश में जीवित रहने और बेहतर अनुकूलन के लिए उनका लंबा, लचीला और बिना अंग वाला शरीर उनके लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ, जिससे वे आज दुनिया भर के विविध क्षेत्रों में आसानी से फल-फूल रहे हैं।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का डबल अटैक कहीं बिजली गिरने से मौतें तो कहीं बारिश के लिए शिवलिंग जल में विराजमान

    मध्य प्रदेश में मौसम का डबल अटैक कहीं बिजली गिरने से मौतें तो कहीं बारिश के लिए शिवलिंग जल में विराजमान


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और इसके साथ ही कई इलाकों में तेज बारिश तथा आकाशीय बिजली की घटनाएं सामने आने लगी हैं। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में अगले चार दिनों तक भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसी बीच शहडोल जिले में रविवार को आकाशीय बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए। मृतकों में एक 11 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। सभी हादसे खेतों और खुले स्थानों पर हुए जहां लोग बारिश के दौरान काम कर रहे थे।

    मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में उमरिया शहडोल अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही निम्न दाब क्षेत्र और डिप्रेशन भी सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 27 से 30 जुलाई के बीच कई क्षेत्रों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है।

    शहडोल जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम झींक में पहली घटना उस समय हुई जब खेत में धान की रोपाई का काम चल रहा था। अचानक आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना में दो अन्य लोग भी घायल हुए जिनका उपचार जारी है। जिले के अन्य हिस्सों में भी बिजली गिरने की अलग अलग घटनाओं में दो और लोगों की जान चली गई जबकि कई लोग घायल हुए। पुलिस ने सभी मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 15.5 इंच वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में वर्षा की कमी 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में लगभग 13 प्रतिशत दर्ज की गई है।

    उधर नर्मदापुरम जिले के इटारसी में बारिश की कमी से चिंतित किसानों और श्रद्धालुओं ने अच्छी वर्षा की कामना के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया। प्राचीन तिलक सिंदूर मंदिर में भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया गया तथा शिवलिंग को पूरी तरह जल में विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस परंपरा से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी वर्षा होती है। सुबह से मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए पहुंचे और किसानों की समृद्धि तथा अच्छी बारिश की प्रार्थना की।

    मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने सलाह दी है कि गरज चमक के समय खुले मैदानों खेतों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें तथा सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

  • कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों के लिए नए अवसर और चुनौतियां

    नई दिल्ली । भारतीय बुलियन और सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वर्ष की शुरुआत में सर्वकालिक उच्च स्तर को छूने के बाद अब सोने के दामों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। रिकॉर्ड स्तर से करीब 37 हजार रुपये प्रति दस ग्राम की गिरावट के बाद बाजार में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या यह नए निवेश का सही समय है या अभी कीमतों में और सुधार देखने को मिल सकता है।

    वैश्विक बाजार के रुझानों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों, कच्चे तेल की अनिश्चित कीमतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण सोने की वैश्विक दरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। जनवरी महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाला सोना अब घटकर करीब 4,040 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। इसी के प्रभाव से भारतीय बाजार में भी कीमतें एक लाख अस्सी हजार रुपये के पीक स्तर से गिरकर एक लाख तैंतालीस हजार रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में इस नरमी का मुख्य कारण केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां हैं। अमेरिका में महंगाई पर नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही कड़ी मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों में कटौती की संभावना न के बराबर होने के कारण निवेशक फिक्स्ड रिटर्न देने वाले अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि सोना कोई प्रत्यक्ष ब्याज या लाभांश प्रदान नहीं करता, इसलिए उच्च ब्याज दर के दौर में इसकी मांग पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है।

    बाजार के दीर्घकालिक आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि सोने ने ऐतिहासिक रूप से निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न दिया है। पिछले तीन दशकों के दौरान इस पीली धातु के मूल्यों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। यद्यपि अल्पकालिक अवधि में भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक नीतियों के कारण इसमें बड़े उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, लेकिन दीर्घकालिक नजरिए से इसे हमेशा से एक मजबूत परिसंपत्ति माना जाता रहा है।

    बाजार विश्लेषकों का सुझाव है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए एकमुश्त निवेश के बजाय व्यवस्थित तरीके से किस्तों में खरीदारी करना अधिक जोखिम-रहित रणनीति हो सकती है। आने वाले समय में वैश्विक बाजार के रुझानों और नीतिगत निर्णयों के आधार पर कीमतों में सीमित दायरे का उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • महेश्वर में दर्दनाक हादसा परिवार के सामने नर्मदा की तेज धारा में बहा इंदौर का युवक कुछ सेकेंड में हुआ लापता

    महेश्वर में दर्दनाक हादसा परिवार के सामने नर्मदा की तेज धारा में बहा इंदौर का युवक कुछ सेकेंड में हुआ लापता

    खरगोन । खरगोन जिले के महेश्वर स्थित सहस्त्रधारा घाट पर रविवार शाम एक दर्दनाक हादसे में इंदौर का 30 वर्षीय युवक नर्मदा नदी की तेज धारा में बह गया। परिवार के सामने हुए इस हादसे में युवक कुछ ही सेकेंड में तेज बहाव में ओझल हो गया। पत्नी और भाई लगातार मदद के लिए चीखते रहे लेकिन तेज बहाव और गहरे पानी के कारण कोई भी उसे बचाने के लिए नदी में उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। घटना का वीडियो भी सामने आया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार लापता युवक की पहचान इंदौर के निपानिया निवासी अर्पित हाड़ा के रूप में हुई है। वह अपने परिवार और दोस्तों के साथ महेश्वर तथा आसपास के पर्यटन स्थलों की सैर के लिए आया था। महेश्वर दर्शन के बाद सभी लोग जलकोटी स्थित सहस्त्रधारा घाट पहुंचे। शाम करीब चार से पांच बजे के बीच नर्मदा में स्नान करते समय अर्पित का पैर फिसल गया और वह तेज बहाव के साथ गहरे पानी में चला गया। देखते ही देखते वह कुछ ही पलों में लापता हो गया।

    हादसे के बाद मौके पर मौजूद पत्नी और भाई ने शोर मचाकर लोगों से मदद मांगी। आसपास मौजूद नाविक ग्रामीण और पर्यटक भी तुरंत पहुंचे लेकिन नदी का तेज बहाव पथरीला तल और गहराई इतनी अधिक थी कि कोई भी पानी में उतरकर बचाव नहीं कर सका। कुछ ही सेकेंड में युवक आंखों से ओझल हो गया।

    सूचना मिलते ही महेश्वर पुलिस होमगार्ड की रेस्क्यू टीम स्थानीय गोताखोर और बाद में एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। रविवार शाम से देर रात तक नदी के विभिन्न हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान रोकना पड़ा। सोमवार सुबह छह बजे से एक बार फिर नावों और गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान शुरू किया गया। समाचार लिखे जाने तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया था।

    लापता युवक के पिता अमर सिंह हाड़ा ने बताया कि अर्पित अपने परिवार और दोस्तों के साथ रविवार दोपहर इंदौर से निकला था। घर से निकलते समय उसने जल्द लौटने की बात कही थी। अर्पित जैविक पोषण ऑल इंडिया नाम से अपना कारोबार चलाता था। उसकी शादी को करीब पांच वर्ष हो चुके हैं और उसका तीन साल का एक बेटा भी है। परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।

    पुलिस ने बताया कि सहस्त्रधारा घाट का इलाका तेज बहाव गहरे पानी और पथरीले तल के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अनजान या गहरे पानी वाले स्थानों पर स्नान करने से बचें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

    बताया जा रहा है कि पिछले तीन महीनों में नर्मदा घाट क्षेत्र में डूबने या तेज बहाव में बहने की यह चौथी घटना है। लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में स्थायी गोताखोरों और अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती का प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने की बात कही है।

  • MP: भोपाल के बुजुर्ग से शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा देकर 3.91 करोड़ रुपये की साइबर ठगी

    MP: भोपाल के बुजुर्ग से शेयर मार्केट में मुनाफे का झांसा देकर 3.91 करोड़ रुपये की साइबर ठगी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के चूना भट्टी इलाके में रहने वाले 67 वर्षीय बुजुर्ग साइबर ठगों (Cyber ​​Fraudsters) के ऐसे जाल में फंस गए कि उन्होंने करीब 3.91 करोड़ रुपये गंवा दिए। आरोपियों ने शेयर बाजार (Stock Market) और आईपीओ (IPO) में कई गुना मुनाफे का लालच देकर पहले भरोसा कायम किया और फिर अलग-अलग बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करा ली। ठगों ने इसके लिए फेसबुक विज्ञापन, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और नकली सेबी पंजीयन प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया।


    फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ संपर्क

    पीड़ित के मुताबिक, 29 मई को फेसबुक मैसेज के जरिए एक विज्ञापन का लिंक उनके पास पहुंचा था। इसके बाद ‘अनन्या कुलकर्णी’ नाम की युवती ने उन्हें फोन किया। उसने खुद को फिनसोल सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड की अधिकारी बताया। युवती ने बुजुर्ग को ‘सारथी प्लान’ के जरिए निवेश करने की सलाह दी और कई सौ गुना तक मुनाफा होने का दावा किया। बातों पर भरोसा होने के बाद बुजुर्ग ने निवेश शुरू कर दिया। आरोपियों ने उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर निवेश और मुनाफे की जानकारी दिखाई, जिससे उन्हें लगा कि उनका पैसा तेजी से बढ़ रहा है।


    11 जून से 9 जुलाई तक ट्रांसफर किए करोड़ों

    पुलिस को दी शिकायत के अनुसार, बुजुर्ग ने 11 जून से 9 जुलाई के बीच अपने अलग-अलग बैंक खातों से आरटीजीएस और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए आरोपियों को करीब 3 करोड़ 91 लाख रुपये भेजे। ठग लगातार निवेश पर भारी रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाते रहे। ठगी का सबसे बड़ा संकेत तब मिला, जब फर्जी ऐप पर पीड़ित के निवेश खाते में 62 अरब 31 करोड़ रुपये की रकम दिखाई गई। इतनी बड़ी रकम देखकर उन्हें लगा कि उनका निवेश जबरदस्त मुनाफे में पहुंच गया है।


    रकम निकालने के लिए मांगा 20 फीसदी टैक्स

    जब बुजुर्ग ने ऐप में दिखाई जा रही रकम निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने नया बहाना बना दिया। उनसे कहा गया कि रकम निकालने से पहले कुल राशि का 20 फीसदी टैक्स या प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी। रकम निकालने में असफल रहने और लगातार अतिरिक्त पैसे मांगे जाने पर बुजुर्ग को संदेह हुआ। इसके बाद उन्हें अपने साथ हुई साइबर ठगी का पता चला। उन्होंने मामले की शिकायत साइबर पुलिस में दर्ज कराई।


    फर्जी दस्तावेजों से बनाया भरोसा

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ठगों ने बुजुर्ग का भरोसा जीतने के लिए फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के साथ नकली सेबी पंजीयन प्रमाण पत्र का भी इस्तेमाल किया। निवेश को वैध दिखाने के लिए शेयर बाजार और आईपीओ में बड़े रिटर्न का लालच दिया गया। शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। पुलिस आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और फर्जी ट्रेडिंग ऐप से जुड़े डिजिटल सुरागों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

  • राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणामों से उपजे तनाव के कारण छात्रा ने उठाया खौफनाक आत्मघाती कदम

    राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणामों से उपजे तनाव के कारण छात्रा ने उठाया खौफनाक आत्मघाती कदम

    नई दिल्ली । चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता और मानसिक दबाव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश की राजधानी में बीते एक महीने से चल रहा विरोध प्रदर्शन और अनशन भले ही सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद समाप्त हो गया हो, लेकिन परीक्षा के नतीजों और प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उपजा मानसिक तनाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। इस बीच महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के कर्जत तालुका से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां मेडिकल की पढ़ाई का सपना देख रही उन्नीस वर्षीय छात्रा ने परीक्षा में कम अंक आने से निराश होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

    घटना के संदर्भ में मिली जानकारी के अनुसार, उक्त छात्रा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के नतीजों को लेकर पिछले कुछ समय से अत्यधिक मानसिक दबाव का सामना कर रही थी। शनिवार को जब परिवार के सदस्य किसी कार्यवश घर से बाहर गए हुए थे, तब छात्रा ने घर पर अकेले रहते हुए यह अतिवादी कदम उठाया। जब परिजन वापस लौटे, तो उन्होंने स्थिति देखकर तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस दल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि छात्रा ने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाई थी, लेकिन घोषित नतीजों में उसे बेहद कम अंक प्राप्त हुए। डॉक्टर बनने के अपने सपने के टूटने और भविष्य की अनिश्चितता के डर से वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रहे हैं और परिजनों व आसपास के लोगों से पूछताछ कर घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।

    गौरतलब है कि हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्तर की इस प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और पुनरीक्षा से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण देशभर में लाखों छात्र और उनके अभिभावक भारी मानसिक दबाव से गुजर रहे थे। परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों द्वारा तनाव में आकर ऐसे खौफनाक कदम उठाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। छात्र संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

    राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों द्वारा पिछले एक महीने से लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, गड़बड़ियों की उच्च स्तरीय जांच और छात्रों के लिए बेहतर व्यवस्था की मांग उठाई थी। सरकार की ओर से उच्च स्तरीय समिति के गठन और सुधार संबंधी आश्वासन मिलने के बाद यह धरना-प्रदर्शन समाप्त किया गया था, लेकिन इस प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा अब भी गंभीर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक दबाव और असफलता का डर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और समाज को एक साथ मिलकर युवाओं को यह समझाने की आवश्यकता है कि कोई भी परीक्षा जीवन का अंतिम विकल्प नहीं होती। प्रशासनिक स्तर पर परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के लिए नियमित परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया है ताकि इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

  • इंदौर में आरोपियों के जुलूस पर उठे सवाल जेल गेट पर खुद खोले पट्टे वायरल वीडियो के बाद पुलिस जांच के घेरे में

    इंदौर में आरोपियों के जुलूस पर उठे सवाल जेल गेट पर खुद खोले पट्टे वायरल वीडियो के बाद पुलिस जांच के घेरे में


    नई दिल्ली । इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में आरोपियों का जुलूस निकालने की पुलिस कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो में जेल गेट के बाहर आरोपी अपने हाथ और पैरों पर बंधे पट्टे खोलते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो में लगाए जा रहे दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसीपी ने जांच के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला मेडिकल दुकान के बाहर कार और बाइक की टक्कर के बाद हुए विवाद से जुड़ा है। घटना के बाद हीरानगर पुलिस ने एक नाबालिग सहित चार आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। पुलिस ने शोभित साक्यवार निक्की अहिरवार ओम उर्फ देवाय और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर रविवार को इलाके में उनका जुलूस निकाला। जुलूस के दौरान आरोपियों के हाथ और पैरों पर पट्टे बांधे गए थे। इसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।

    देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें जेल गेट के बाहर आरोपी अपने हाथ और पैरों से पट्टे खोलते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने आरोप लगाए कि पट्टे केवल दिखावे के लिए बांधे गए थे। हालांकि इन दावों की किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है और न ही अब तक इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक किया गया है।

    वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई। मामले में एसीपी रूबीना मिजवानी ने कहा कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की पड़ताल कर रही है और वीडियो की सत्यता तथा घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सार्वजनिक स्थानों पर आरोपियों के जुलूस निकालने जैसी कार्रवाइयों को लेकर पहले भी बहस होती रही है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई स्थिति किस परिस्थिति में बनी और पुलिस की कार्रवाई में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता हुई या नहीं।

  • ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय भारोत्तोलकों का शानदार दबदबा, मीराबाई चानू की ऐतिहासिक स्वर्ण हैट्रिक

    नई दिल्ली । ग्लास्गो में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2026 के चौथे दिन भारतीय एथलीटों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है। खेल प्रतियोगिता के चौथे दिन भारतीय दल ने कुल तीन पदक अपने नाम किए और ये तीनों ही सफलताएं भारोत्तोलन स्पर्धा में हासिल हुईं। स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने एक बार फिर अपनी अंतरराष्ट्रीय बादशाहत साबित करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि पुरुषों के वर्ग में ऋषिकांता सिंह और आर मुथुपांडी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए देश के लिए रजत पदक जीते। इन सफलताओं के साथ ही प्रतियोगिता में भारत के कुल पदकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू ने राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीतकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर अपने वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया। शुरुआती प्रयासों में मिली असफलता से बिना विचलित हुए उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों चरणों में जबरदस्त वापसी की और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को भारी अंतर से पछाड़ते हुए रिकॉर्ड कायम किया। यह मौजूदा खेलों में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक भी साबित हुआ।

    पुरुषों के भारोत्तोलन मुकाबलों में मणिपुर के युवा भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह ने अपनी शारीरिक चोटों की परवाह न करते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। 60 किलोग्राम वर्ग में भाग लेते हुए उन्होंने स्नैच स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड की बराबरी की। हालांकि घुटने की तकलीफ के चलते क्लीन एंड जर्क के अंतिम प्रयासों में उन्हें संघर्ष करना पड़ा, इसके बावजूद उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपनी झोली में डाला। इसी स्पर्धा के एक अन्य मुकाबले में आर मुथुपांडी ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कुल 286 किलोग्राम भार उठाया और भारत के लिए एक और रजत पदक सुनिश्चित किया।

    मुक्केबाजी रिंग से भी भारतीय दल के लिए सकारात्मक खबरें सामने आईं, जहां महिला और पुरुष मुक्केबाजों ने अपने-अपने मुकाबलों में दबदबा बनाया। महिला 54 किलोग्राम वर्ग में मुक्केबाज प्रीति ने शानदार खेल दिखाते हुए विपक्षी खिलाड़ी को दूसरे ही दौर में परास्त कर दिया और क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के एक बेहद रोमांचक और एकतरफा मुकाबले में जादूमणि सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी को सर्वसम्मत फैसले से हराकर अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की की। हालांकि 65 किलोग्राम वर्ग में आदित्य प्रताप यादव को कड़े संघर्ष के बाद अंकों के आधार पर हार का सामना करना पड़ा।

    अन्य खेल स्पर्धाओं में भारत का दिन मिला-जुला रहा। तैराकी के पुरुषों की 4×200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले वर्ग में भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम दौर में कड़े मुकाबले के बीच वे छठे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। इसके अलावा लॉन बॉल्स, जिम्नास्टिक और व्हीलचेयर बास्केटबॉल की स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी ओर से कड़ी चुनौती पेश की, हालांकि वे अंतिम चरण तक पहुंचने में असफल रहे। तपन मोहंती ने आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक के फाइनल में संघर्ष किया, पर वे पदक तालिका में स्थान बनाने से थोड़ा पीछे रह गए।