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  • रोहिणी आचार्य ने दिया बिहार में भाजपा और एनडीए को हराने का फॉर्मूला, सोशल मीडिया पर किया पोस्‍ट

    रोहिणी आचार्य ने दिया बिहार में भाजपा और एनडीए को हराने का फॉर्मूला, सोशल मीडिया पर किया पोस्‍ट


    पटना। बिहार (Bihar) में हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों के बाद नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा (BJP) और एनडीए (NDA) को हराने का नया फॉर्मूला पेश किया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर एक साथ आ जाएं, तो बिहार में भाजपा और एनडीए को शून्य पर समेटा जा सकता है।

    रोहिणी ने पोस्ट में लिखा- TJ + PK = BJP/NDA ZERO
    रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बिहार में हुए एमएलसी चुनावों ने बीजेपी/एनडीए को हराने का फॉर्मूला दे दिया है। TJ + PK = BJP/NDA ZERO. राजद और जन सुराज को मिले वोट को अगर जोड़ दिया जाए तो बीजेपी/एनडीए सभी आठ सीटों पर प्रथम चरण में ही हार जाएगी। आगे-आगे देखिए होता है क्या!”

    इस पोस्ट के जरिए रोहिणी ने तेजस्वी यादव (TJ) और प्रशांत किशोर (PK) के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल की ओर इशारा किया है। उनके संदेश का मुख्य संकेत विपक्षी वोटों का बंटवारा रोकने और उन्हें एकजुट करने की रणनीति पर है।

    MLC चुनाव के नतीजों से निकाला सियासी गणित
    हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने एक सीट पर जीत दर्ज की, जबकि लालू प्रसाद यादव की राजद को दो सीटें मिलीं। रोहिणी आचार्य का तर्क है कि दोनों दलों को मिले वोटों को जोड़ दिया जाए तो एनडीए के लिए सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

    हालांकि, अलग-अलग उम्मीदवारों, क्षेत्रों और चुनावी परिस्थितियों में मिले वोटों को जोड़कर संभावित नतीजों का अनुमान लगाना एक राजनीतिक गणित है। इससे वास्तविक चुनाव में नतीजे की पुष्टि नहीं होती।

    तेजस्वी और प्रशांत किशोर की प्रतिक्रिया का इंतजार
    रोहिणी आचार्य की इस टिप्पणी के बाद बिहार की राजनीति में राजद और जन सुराज के संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। उनके बयान को विपक्षी वोटों को एकजुट करने की जरूरत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    अब निगाहें तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर पर हैं कि वे रोहिणी आचार्य के इस सुझाव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल दोनों दलों के बीच किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

  • इजरायल चुनाव में नेतन्याहू को झटका, 53 सीटों पर सिमटा गठबंधन, बहुमत के लिए 8 सीटें कम

    इजरायल चुनाव में नेतन्याहू को झटका, 53 सीटों पर सिमटा गठबंधन, बहुमत के लिए 8 सीटें कम


    नई दिल्ली। इजरायल के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन सबसे आगे रहने के बावजूद बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सका है। सभी वोटों की गिनती के बाद नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन के खाते में 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं। 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है। ऐसे में किसी भी गठबंधन के बहुमत तक नहीं पहुंचने से नई सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

    लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी सरकार बनाना चुनौती
    चुनाव में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, गठबंधन के पास बहुमत से आठ सीटें कम हैं। इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने विशेष मतपत्रों की गिनती भी पूरी कर ली है। इन्हें डबल-एनवेलप वोट कहा जाता है। इसमें सैनिकों, कैदियों, विदेशों में तैनात राजनयिकों और अस्पतालों में भर्ती उन मतदाताओं के वोट शामिल होते हैं, जो अपने निर्धारित मतदान केंद्रों पर वोट नहीं डाल सके थे।

    अन्य दलों में गादी आइजनकोट की याशार पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। बी’याचाद ने 12 और जॉइंट लिस्ट ने 11 सीटें हासिल की हैं। डेमोक्रेट्स और राअम को आठ-आठ सीटें मिली हैं। यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म, इजरायल बेइतेनु और ओत्जमा येहुदित के खाते में सात-सात सीटें आई हैं। वहीं, शास और रिलिजियस जियोनिज्म ने छह-छह सीटें जीती हैं।

    केंद्रीय चुनाव समिति के मुताबिक, विशेष मतपत्रों की गिनती पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नतीजे बाद में जारी किए जाएंगे। मतगणना के बाद भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की सीटों के वितरण में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    चुनाव में विदेशी दखल और वोट खरीदने के आरोप
    चुनाव नतीजों के बाद इजरायल में विदेशी हस्तक्षेप और अरब मतदाताओं की भागीदारी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया है कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कथित वोट खरीदने और अवैध तरीके से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने का फायदा मिला। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को ‘चोरी’ तक करार दिया है।

    इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट उन आशंकाओं की जांच कर रही है, जिनमें कतर और तुर्की से कथित तौर पर जुड़े विदेशी फंड के जरिए अरब मतदाताओं की भागीदारी को प्रभावित करने की बात कही गई है। वहीं, इजरायल पुलिस की लाहव 433 यूनिट चुनाव में कथित रिश्वतखोरी के मामलों की अलग से जांच कर रही है।

    आरोप साबित नहीं, कतर ने भी किया इनकार
    विदेशी हस्तक्षेप और चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष नोआम सोलबर्ग ने शिन बेट से संभावित विदेशी हस्तक्षेप की जांच करने को कहा है। हालांकि, चुनाव समिति के कार्यवाहक महानिदेशक ने कहा है कि चुनाव की निष्पक्षता को व्यवस्थित तरीके से प्रभावित किए जाने के आरोपों का कोई आधार नहीं है। कतर ने भी इजरायली चुनाव में किसी तरह के हस्तक्षेप से इनकार किया है।

    इस विवाद के बीच अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इन दलों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं और सरकार गठन की प्रक्रिया में उनका समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, अरब पार्टियों के सहयोग से सरकार बनाने का विकल्प कई यहूदी नेतृत्व वाली पार्टियों के लिए राजनीतिक रूप से विवादास्पद है। विपक्षी नेताओं ने भी चेतावनी दी है कि बिना पुष्टि वाले आरोपों के आधार पर चुनाव नतीजों या अरब मतदाताओं की भागीदारी पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।

    अब कैसे बनेगी इजरायल में सरकार?
    चुनाव के बाद नेतन्याहू के गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बहुमत के लिए जरूरी आठ सीटें जुटाने की है। विपक्षी गठबंधन के पास भी केवल 48 सीटें हैं। ऐसे में उसे सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों के समर्थन या सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।

    अंतिम नतीजों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किए जाने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति सरकार गठन की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इस दौरान किसी सांसद को गठबंधन तैयार कर सरकार बनाने का प्रयास करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि कोई भी पक्ष 61 सांसदों का समर्थन जुटाने में सफल नहीं होता है, तो देश में एक बार फिर चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।

  • दिल्ली में 16 नवंबर तक तैनात रहेंगे 27 हजार पैरामिलिट्री जवान, INDIA ब्लॉक की रैली के चलते बढ़ाई गई सुरक्षा

    दिल्ली में 16 नवंबर तक तैनात रहेंगे 27 हजार पैरामिलिट्री जवान, INDIA ब्लॉक की रैली के चलते बढ़ाई गई सुरक्षा


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर 27 हजार पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली INDIA ब्लॉक की रैली और कुछ संगठनों की ओर से अचानक विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है। त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

    गृह मंत्रालय ने गुरुवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 270 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर से 16 नवंबर तक बढ़ाने का आदेश जारी किया। दिल्ली में इन जवानों की तैनाती की अवधि तीसरी बार बढ़ाई गई है। इससे पहले भी इसी महीने दो बार ऐसा निर्णय लिया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर गृह मंत्रालय ने तैनाती जारी रखने की मंजूरी दी है।

    दिल्ली पुलिस के साथ मोर्चा संभालेंगे 27 हजार जवान
    सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए 270 कंपनियों को दिल्ली पुलिस के साथ तैनात किया गया है। इन जवानों की तैनाती और उनके कामकाज में समन्वय की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को सौंपी गई है।

    इन कंपनियों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 125 कंपनियां शामिल हैं। इनमें 17 महिला यूनिट भी हैं। इसके अलावा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 20, सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 46, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 39, सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 31 और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 12 कंपनियां तैनात हैं।

    एक कंपनी में स्वीकृत संख्या 100 जवानों की होती है, लेकिन ड्यूटी के लिए सामान्यत: 70 से 72 जवान ही उपलब्ध रहते हैं। इसी आधार पर 270 कंपनियों में करीब 27 हजार जवानों की तैनाती बताई जा रही है।

    1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली
    कांग्रेस ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर INDIA ब्लॉक के बैनर तले ‘चलो दिल्ली मार्च’ का ऐलान किया है। यह मार्च 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली के साथ संपन्न होगा। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। रैली को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं।

    गृह मंत्रालय को कुछ संगठनों की ओर से अचानक विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका भी है। ऐसे में रैली के अलावा अन्य संभावित प्रदर्शनों और त्योहारों के मद्देनजर भी सुरक्षा बलों की तैनाती जारी रखने का फैसला किया गया है।

    CJP के प्रदर्शनों के बाद दिल्ली बुलाए गए थे जवान
    अक्टूबर की शुरुआत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों के बाद पैरामिलिट्री बलों को दिल्ली बुलाया गया था। 9 अक्टूबर को राजधानी के कुछ इलाकों में प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ियां हुई हैं।

    इसके बाद विपक्षी दलों ने भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किए थे। CJP ने 16 अक्टूबर को ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन किया था। इस संगठन ने INDIA ब्लॉक की रैली को समर्थन देने का भी ऐलान किया है। इन गतिविधियों और त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब दिल्ली में पैरामिलिट्री बलों की तैनाती 16 नवंबर तक जारी रहेगी।

  • MP में 2 नवंबर तक आंधी-बारिश का रहेगा दौर, आज 33 जिलों में अलर्ट, पचमढ़ी सबसे ठंडा

    MP में 2 नवंबर तक आंधी-बारिश का रहेगा दौर, आज 33 जिलों में अलर्ट, पचमढ़ी सबसे ठंडा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने 2 नवंबर तक बारिश की संभावना जताते हुए शुक्रवार को ग्वालियर-जबलपुर समेत 33 जिलों में आंधी और हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। बारिश और ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में भी 2 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे के दौरान राजगढ़, विदिशा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में मौसम खराब रह सकता है।

    दूसरी ओर भोपाल, रायसेन, सीहोर, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, शाजापुर, देवास, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में धूप निकलने की संभावना है।

    बारिश से फसलों पर असर, मंडी में भीगा मक्का
    बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पांढुर्णा की मंडी में गुरुवार को खुले में रखे मक्के के ढेर बारिश में भीग गए। इससे हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका है। छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में धान की फसल अभी खेतों में खड़ी है। ऐसे में बारिश से धान के दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

    रायसेन के दशहरा मैदान में धान लेकर पहुंचे किसानों को भी अपनी उपज बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। यहां करीब 200 ट्रॉलियों में धान रखा हुआ था। गुरुवार को भोपाल, सागर, सिंगरौली, पांढुर्णा, मैहर, दमोह, सीहोर और नर्मदापुरम सहित कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। हालांकि, इस बारिश से तुअर, कपास और संतरे की फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

    पचमढ़ी में 15.2 डिग्री रहा न्यूनतम तापमान
    आंधी और बारिश के चलते प्रदेश के कई इलाकों में दिन के समय ठंडक बढ़ गई। गुरुवार को दिन के तापमान में 2 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। रात के तापमान की बात करें तो पचमढ़ी प्रदेश में सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा नौगांव में 15.6, अमरकंटक में 16.1, खरगोन और दमोह में 17 तथा धार में 17.1 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो चुकी है। इसके बावजूद नए मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने से प्रदेश में बारिश का दौर बना हुआ है।

  • इंटरनेट दुनिया से जोड़ता है, योग स्वयं से, डिजिटल युग में मानसिक शांति और आत्म-जागरूकता के लिए संतुलन जरूरी

    इंटरनेट दुनिया से जोड़ता है, योग स्वयं से, डिजिटल युग में मानसिक शांति और आत्म-जागरूकता के लिए संतुलन जरूरी

    नई दिल्ली ।डिजिटल युग में इंटरनेट और तकनीक ने लोगों के जीवन को काफी हद तक बदल दिया है। दुनिया भर की जानकारी तक पहुंच, दूर बैठे लोगों से बातचीत और कई कामों को कम समय में पूरा करना अब आसान हो गया है। हालांकि, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मानसिक शांति और स्वयं के साथ समय बिताने का महत्व भी चर्चा में है। योग गुरु महेश अग्रवाल का विचार है कि इंटरनेट मनुष्य को दुनिया से जोड़ता है, जबकि योग उसे स्वयं से जुड़ने का अवसर देता है।

    यह विचार आधुनिक जीवन की एक अहम चुनौती की ओर ध्यान दिलाता है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से व्यक्ति लगातार बाहरी गतिविधियों से जुड़ा रहता है। समाचार, संदेश और डिजिटल सामग्री की निरंतर उपलब्धता के कारण ध्यान बार-बार भटक सकता है। यदि तकनीक का इस्तेमाल जरूरत से अधिक होने लगे, तो कुछ लोगों को मानसिक थकान, एकाग्रता में कमी और अपने लिए समय निकालने में परेशानी महसूस हो सकती है।

    तकनीक को पूरी तरह गलत मानना इस समस्या का समाधान नहीं है। इंटरनेट शिक्षा, जानकारी, संवाद और व्यक्तिगत विकास के लिए उपयोगी साधन है। इसका लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति इसका उपयोग किस उद्देश्य से और कितनी देर तक करता है। तकनीक को जीवन का सहायक बनाने और उस पर अनावश्यक निर्भरता से बचने के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

    महेश अग्रवाल के विचार में योग व्यक्ति को बाहरी गतिविधियों से ध्यान हटाकर अपने भीतर देखने का अवसर देता है। योग में आसन, प्राणायाम और ध्यान जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। नियमित अभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर, सांस और विचारों पर ध्यान केंद्रित करना सीख सकता है। इससे उसे अपनी मानसिक स्थिति को समझने और रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच कुछ समय शांत रहने में मदद मिल सकती है।

    योग का एक महत्वपूर्ण पहलू आत्म-जागरूकता भी है। दिनभर की भागदौड़ में व्यक्ति अक्सर अपनी भावनाओं, विचारों और जरूरतों पर ध्यान नहीं दे पाता। ध्यान और सांस से जुड़े अभ्यास उसे कुछ समय रुककर अपने अनुभवों को समझने का अवसर देते हैं। स्वयं के विचारों और भावनाओं के प्रति सजग होने की इस प्रक्रिया को आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक कदम माना जा सकता है।

    डिजिटल उपकरणों के लगातार इस्तेमाल से होने वाली थकान के बीच स्क्रीन से कुछ समय का विराम भी उपयोगी हो सकता है। इसके लिए हर व्यक्ति को तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाने की आवश्यकता नहीं है। दिन के कुछ हिस्सों में मोबाइल फोन को अलग रखना, सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालना व्यावहारिक उपाय हो सकते हैं।

    योग और डिजिटल वेलबीइंग के बीच संतुलन बनाने के लिए शुरुआत छोटे बदलावों से की जा सकती है। सुबह उठने के बाद कुछ समय बिना मोबाइल देखे बिताना, सहज श्वास पर ध्यान देना और अपनी क्षमता के अनुसार सरल योगासन करना दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। ध्यान के दौरान सांसों पर ध्यान केंद्रित करना भी मन को वर्तमान क्षण में लाने का एक सरल तरीका है। अभ्यास करते समय अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है और किसी परेशानी की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

    आज तकनीक से पूरी तरह अलग रहना व्यावहारिक नहीं है, लेकिन उसके इस्तेमाल की आदतों में सुधार किया जा सकता है। इंटरनेट और डिजिटल उपकरण बाहरी दुनिया से जुड़ने के अवसर देते हैं, जबकि योग स्वयं की जरूरतों और मानसिक स्थिति को समझने में सहायक हो सकता है। दोनों के बीच संतुलन बनाकर व्यक्ति तकनीक के लाभ उठाने के साथ अपने स्वास्थ्य, एकाग्रता और आंतरिक शांति के लिए भी समय निकाल सकता है।

  • भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में पर्यटन और रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देने के लिए डेला ग्रुप ने 2250 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित योजना के तहत 220 एकड़ क्षेत्र में विला, ब्रांडेड आवास और पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट विकसित करने की तैयारी है। इस परियोजना को लेकर भोपाल में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के संस्थापक और क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

    डेला ग्रुप के संस्थापक जिमी मिस्त्री ने मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी। इस बैठक में राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान प्रस्तावित ‘डेला रेसकोर्स भोपाल’ परियोजना की जानकारी सामने आई। इसका विकास मूल्य 2250 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत समय-सीमा की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    योजना के अनुसार, 220 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में 930 विला बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त 128 ब्रांडेड आवास और 300 से अधिक कमरों वाला पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट भी विकसित करने की योजना है। परियोजना में घुड़सवारी और पोलो जैसी गतिविधियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की परिकल्पना भी शामिल है। इन सुविधाओं के जरिए पर्यटन, आवास और मनोरंजन को एक ही परिसर में जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    भोपाल के आसपास पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने के लिए ‘डेला रातापानी रिजर्व टाउनशिप’ विकसित करने की योजना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। इसे आधुनिक जीवनशैली, स्वास्थ्य और वेलनेस सुविधाओं के साथ जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए मास्टर प्लानिंग, आवागमन और पर्यटकों को विशेष अनुभव देने वाली सुविधाओं पर ध्यान देने की परिकल्पना की गई है। परियोजना की योजना में भोपाल के आसपास के प्राकृतिक परिवेश और पर्यटन क्षमता को उपयोग में लाने पर जोर दिया गया है।

    क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वस्तरीय पर्यटन और आवास सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों के भोपाल तथा आसपास के क्षेत्रों में अधिक समय तक रुकने की संभावना बढ़ सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। उनके अनुसार, पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने से होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

    मीक ने यह भी कहा कि भोपाल की खूबियों को निवेश, रोजगार और स्थानीय लोगों की समृद्धि से जोड़ना जरूरी है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान का उद्देश्य राजधानी की पहचान और संभावनाओं को सामने लाना तथा उन्हें आर्थिक विकास से जोड़ना है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय विकास विभाग और जिमी मिस्त्री की पहल की सराहना की।

    हालांकि, पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण होगा। मनोज मीक ने प्राकृतिक संसाधनों और जल-संपदा को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। प्रस्तावित परियोजना में निवेश, आवास और पर्यटन से जुड़ी कई सुविधाओं की योजना सामने आई है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन निर्माण की प्रगति, पर्यावरणीय व्यवस्थाओं और स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले अवसरों के आधार पर किया जा सकेगा।

    भोपाल में प्रस्तावित यह परियोजना पर्यटन और रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना सामने लाती है। यदि योजना आगे बढ़ती है, तो इससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा विभिन्न स्थानीय कारोबारों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

  • लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    नई दिल्ली । सफलता की राह में आने वाली असफलताएं कई बार इंसान के धैर्य और संकल्प की परीक्षा लेती हैं। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी सौम्या मिश्रा की कहानी इसी बात का उदाहरण है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज में लेक्चरर के रूप में की थी, लेकिन उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में पहुंचना था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की और शुरुआती तीन प्रयासों में असफल रहने के बाद भी तैयारी जारी रखी। आखिरकार चौथे प्रयास में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 18वीं रैंक हासिल की।

    सौम्या मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की रहने वाली हैं। शिक्षा के क्षेत्र में लेक्चरर के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका सफर बताता है कि करियर की शुरुआत किसी एक क्षेत्र से होने के बावजूद व्यक्ति अपने लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ सकता है। इसके लिए निरंतर प्रयास और कठिन परिस्थितियों में भी तैयारी जारी रखना महत्वपूर्ण होता है।

    सौम्या ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की परीक्षा पास की थी। इस परीक्षा में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि उनके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव रही। हालांकि, उनका प्रयास यहीं तक सीमित नहीं रहा। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, जिसे देश की प्रमुख और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिना जाता है।

    UPSC की तैयारी के दौरान सौम्या को लगातार तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिली। किसी भी अभ्यर्थी के लिए बार-बार असफल होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब परीक्षा की तैयारी में लंबा समय और निरंतर मेहनत लगती हो। इसके बावजूद सौम्या ने अपने लक्ष्य से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने चौथे प्रयास में परीक्षा पास करते हुए ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की। इस उपलब्धि ने उन्हें प्रशासनिक सेवा तक पहुंचाया और उनकी मेहनत को एक नई पहचान मिली।

    वर्तमान में सौम्या मिश्रा मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी हैं। उनकी यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो शुरुआती नाकामी के बाद अपने लक्ष्य को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं। उनकी उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि असफलता के बाद तैयारी जारी रखना और अपने प्रयासों में सुधार करते रहना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सौम्या मिश्रा की कहानी की एक और खास बात यह है कि उनकी छोटी बहन सुमेघा मिश्रा ने भी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। सुमेघा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 253वीं रैंक प्राप्त की। दोनों बहनों की उपलब्धियां परिवार के लिए गौरव का विषय हैं। एक ओर सौम्या ने कई प्रयासों के बाद देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की, वहीं सुमेघा ने भी अपनी मेहनत से परीक्षा में स्थान बनाया।

    दोनों बहनों की सफलता यह दिखाती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए नियमित मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास का महत्व बना रहता है। सौम्या का लेक्चरर से IAS अधिकारी बनने तक का सफर खास तौर पर उन युवाओं को प्रेरित कर सकता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रयास कर रहे हैं। उनकी कहानी का मुख्य संदेश यही है कि शुरुआती असफलताओं को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

  • शिवपुरी में बालाजी बस ने बाइक को पीछे से मारी टक्कर, युवक घायल, गुस्साए लोगों ने फोड़ा शीशा

    शिवपुरी में बालाजी बस ने बाइक को पीछे से मारी टक्कर, युवक घायल, गुस्साए लोगों ने फोड़ा शीशा

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में बुधवार रात सड़क हादसे में बाइक सवार 28 वर्षीय युवक घायल हो गया। पोहरी थाना क्षेत्र में शिवपुरी की ओर से आ रही बालाजी बस ने उसकी पल्सर बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि युवक उछलकर सड़क पर दूर जा गिरा, जबकि उसकी बाइक बस के नीचे फंस गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान गुस्साए लोगों ने बस का शीशा फोड़ दिया।

    घायल युवक की पहचान परिच्छा निवासी शिवराज जाटव के रूप में हुई है। वह सरवन जाटव का पुत्र है। जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर की रात करीब 8:45 बजे शिवराज अपनी पल्सर बाइक से परिच्छा बस स्टैंड से सब्जी लेकर घर लौट रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रही बालाजी बस ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के समय बस शिवपुरी की ओर से आ रही थी।

    दुर्घटना में शिवराज बाइक से उछलकर सड़क पर जा गिरा। उसकी बाइक बस के नीचे फंस गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति देखी और बस के आसपास भीड़ एकत्रित हो गई। हादसे से नाराज कुछ लोगों ने बस का शीशा तोड़ दिया। इस घटना के कारण मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

    परिजनों के अनुसार, बस चालक वाहन तेज गति और लापरवाही से चला रहा था। उनका आरोप है कि इसी वजह से बाइक को पीछे से टक्कर लगी। हालांकि, दुर्घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद चालक बस को मौके पर छोड़कर भाग गया।

    टक्कर में शिवराज को शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई हैं। उसके सिर और चेहरे के अलावा दोनों हाथों, बाएं पैर के टखने और कमर में भी चोट लगी है। हादसे के बाद उसके शरीर से खून निकल रहा था। घायल की हालत देखकर परिजनों ने उसे जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।

    घटना की जानकारी मिलने पर शिवराज के पिता सरवन जाटव और परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल युवक को निजी वाहन से जिला अस्पताल शिवपुरी पहुंचाया। वहां उसे भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। परिजन घटना के बाद से घायल के इलाज पर ध्यान दे रहे हैं।

    मामले में शिवराज के पिता सरवन जाटव ने पोहरी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने उनकी रिपोर्ट के आधार पर बालाजी बस के चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। जांच में हादसे की परिस्थितियों और चालक की भूमिका से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।

    हादसे के बाद बस का शीशा तोड़े जाने की घटना भी सामने आई है। पुलिस की जांच में दुर्घटना से जुड़े घटनाक्रम और उसके बाद हुई गतिविधियों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल घायल शिवराज का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।

  • शिवपुरी की अमोला घाटी में गहरी खाई में गिरा ट्रॉला, ड्राइवर की मौत और हेल्पर गंभीर घायल..

    शिवपुरी की अमोला घाटी में गहरी खाई में गिरा ट्रॉला, ड्राइवर की मौत और हेल्पर गंभीर घायल..

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में अमोला घाटी के पास गुरुवार देर रात एक सड़क हादसे में ट्रॉला चालक की मौत हो गई, जबकि हेल्पर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा सुरवाया थाना क्षेत्र में वन देवी मैया मंदिर के नजदीक हुआ। ट्रॉला अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित गहरी खाई में जा गिरा। वाहन कानपुर से गुजरात के सूरत शहर की ओर जा रहा था। दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद घायल को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज शिवपुरी पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार, हादसा गुरुवार रात करीब 2:30 बजे हुआ। ट्रॉला अमोला घाटी में वन देवी मैया मंदिर के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान वाहन का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क से नीचे गहरी खाई में गिर गया। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि ट्रॉला चला रहे राम अनुज चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई। उनके साथ वाहन में मौजूद हेल्पर उमेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे की जानकारी मिलने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई की एंबुलेंस मौके पर पहुंची। राहत सहायता के बाद घायल हेल्पर को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। वहां उन्हें भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। हादसे में चालक की मौत और हेल्पर के गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की।

    मृतक चालक की पहचान राम अनुज चौधरी के रूप में हुई है। उनके पिता का नाम केशव चौधरी बताया गया है। वह उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के ग्राम कैथवालिया, पोस्ट कैथवालिया, छपिया वसई के निवासी थे। दुर्घटना के बाद उनके शव का गुरुवार को पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद पुलिस नियमानुसार आगे की प्रक्रिया में जुटी है।

    वहीं, हादसे में घायल हेल्पर उमेश कुमार उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के निवासी हैं। उनके पिता का नाम राम असीह है। उनका पता इटौरा (मुझैली), अरदौना बताया गया है। दुर्घटना के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

    ट्रॉला कानपुर से सूरत जा रहा था। इस दौरान शिवपुरी जिले की अमोला घाटी में हुए हादसे ने वाहन चालक की जान ले ली। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के समय ट्रॉला का संतुलन बिगड़ने के बाद वह खाई में गिरा था। वाहन अनियंत्रित होने की वजह और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी पुलिस की आगे की कार्रवाई से सामने आ सकती है।

    अमोला घाटी का यह हादसा रात के समय हुआ, जब ट्रॉला वन देवी मैया मंदिर के पास से गुजर रहा था। दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है। घायल हेल्पर का इलाज मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में किया जा रहा है, जबकि मृतक चालक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा चुका है। पुलिस मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई में जुटी है।

  • इंदौर के बेटमा में स्कूल की जमीन पर बाउंड्रीवॉल को लेकर बवाल, छात्राओं ने तोड़ी दीवार, करणी सेना ने उठाए सवाल

    इंदौर के बेटमा में स्कूल की जमीन पर बाउंड्रीवॉल को लेकर बवाल, छात्राओं ने तोड़ी दीवार, करणी सेना ने उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश । के इंदौर जिले के बेटमा में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की जमीन पर बाउंड्रीवॉल निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। निर्माण कार्य का विरोध करते हुए बड़ी संख्या में छात्राएं सड़क पर उतर आईं और प्रदर्शन किया। इसी दौरान आक्रोशित विद्यार्थियों ने मौके पर बनाई जा रही दीवार को तोड़ दिया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई। विवाद का मुख्य मुद्दा विद्यालय की जमीन का स्वामित्व, भूमि से संबंधित दस्तावेज और बाउंड्रीवॉल निर्माण की वैधता है।

    जानकारी के अनुसार, विद्यालय की जमीन पर बाउंड्रीवॉल बनाए जाने को लेकर छात्राओं ने आपत्ति जताई। विरोध प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने निर्माण कार्य के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। इसी बीच मौके पर बनाई जा रही दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बात का स्पष्ट विवरण नहीं है कि निर्माण कार्य किस विभाग या व्यक्ति की ओर से कराया जा रहा था और विवादित भूमि का आधिकारिक स्वामित्व किसके नाम दर्ज है।

    मामले में करणी सेना परिवार ने भी हस्तक्षेप किया है। संगठन ने देपालपुर के तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर स्कूल की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है। संगठन ने भूमि के स्वामित्व, नामांतरण की प्रक्रिया और बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति को लेकर सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    करणी सेना परिवार का आरोप है कि विद्यालय के आसपास पहले से मौजूद बाउंड्रीवॉल की जमीन पर कथित रूप से कब्जा किए जाने के बाद अब नया निर्माण कराया जा रहा है। संगठन ने इस आरोप की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, जमीन पर कब्जे से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। ऐसे में भूमि के वास्तविक स्वामित्व और निर्माण की वैधता का निर्धारण संबंधित राजस्व रिकॉर्ड तथा प्रशासनिक जांच के आधार पर ही हो सकेगा।

    संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से विवादित जमीन का सर्वे क्रमांक स्पष्ट करने की मांग की है। इसके साथ ही यह पता लगाने की बात कही गई है कि संबंधित भूमि का नामांतरण किसके पक्ष में किया गया और इसके लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। करणी सेना परिवार ने नामांतरण की प्रक्रिया और उससे जुड़े अभिलेखों की जांच कराने पर जोर दिया है, ताकि भूमि के अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

    निर्माण कार्य की आधिकारिक अनुमति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संगठन चाहता है कि प्रशासन यह स्पष्ट करे कि बाउंड्रीवॉल बनाने की अनुमति किस प्राधिकरण ने दी और निर्माण के लिए कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे। अनुमति और जमीन के स्वामित्व से संबंधित रिकॉर्ड सामने आने पर विवाद के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की जा सकेगी।

    इस मामले में विद्यालय की संपत्ति और छात्राओं की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय हैं। करणी सेना परिवार ने मांग की है कि स्कूल की जमीन से जुड़े विवाद का समाधान दस्तावेजों की जांच के आधार पर किया जाए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की जांच के निष्कर्ष, भूमि के स्वामित्व पर अंतिम निर्णय या निर्माण कार्य को लेकर किसी आधिकारिक आदेश का विवरण सामने नहीं आया है।

    बेटमा में बाउंड्रीवॉल निर्माण के विरोध में हुआ प्रदर्शन और दीवार तोड़े जाने की घटना ने विद्यालय की जमीन से जुड़े विवाद को सामने ला दिया है। अब मामले में भूमि के रिकॉर्ड, नामांतरण और निर्माण की अनुमति की जांच की मांग उठी है। प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की पड़ताल और तथ्यों की पुष्टि से ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।