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  • मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती

    मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती


    भोपाल । राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर पोषण प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 2,548 पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की जा रही हैं।

    स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता

    भर्ती में स्थानीय पात्रताधारियों को प्राथमिकता मिलेगी। कुल रिक्तियों में से 781 पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए और 1,767 पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन पदों पर चयन के लिए पारदर्शिता और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नियमों के मुताबिक, आवेदिका का उसी राजस्व ग्राम या शहरी वार्ड का निवासी होना अनिवार्य है, जहां का पद रिक्त है। किसी अन्य ग्राम या वार्ड की महिला इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी। इससे स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से मैदानी स्तर पर सेवाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित हो सकेगा।

    ऑनलाइन आवेदन केवल 13 जुलाई तक स्वीकार होंगे

    भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी। इसमें एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक महिला अभ्यर्थी चयन पोर्टल (https://chayan.mponline.gov.in) पर जाकर 1 जुलाई 2026 से अपने आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए फॉर्म में किसी भी प्रकार के त्रुटि सुधार के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया जाएगा। विभाग द्वारा स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी स्तर के कार्यालय में ऑफलाइन भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

    न्यूनतम योग्यता हायर सेकण्डरी, आयु सीमा 18-35 वर्ष तय

    शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मापदंडों के अनुसार, दोनों ही पदों के लिए आवेदिकाओं का हायर सेकेंडरी अर्थात 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य राज्यों या अशासकीय बोर्डों की अंकसूचियों को तभी मान्यता दी जाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल हों। साथ ही 1 जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है, जिसकी पुष्टि के लिए 10वीं बोर्ड की अंकसूची संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करने होंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क 100 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है।

    रिक्त पदों की जिलेवार स्थिति

    आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के अनुसार जिलेवार स्थिति इस प्रकार है। आलीराजपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा आंगनवाड़ी सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। इंदौर जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 43 पद रिक्त हैं। खंडवा जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। खरगोन जिले में कार्यकर्ता के 34 एवं सहायिका के 40 पद रिक्त हैं। झाबुआ जिले में कार्यकर्ता के 21 तथा सहायिका के 23 पद रिक्त हैं। धार जिले में कार्यकर्ता के 30 एवं सहायिका के 82 पद रिक्त हैं। बड़वानी जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 44 पद रिक्त हैं। बुरहानपुर जिले में कार्यकर्ता के 7 एवं सहायिका के 25 पद रिक्त हैं।

    आगर मालवा जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 6 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। उज्जैन जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 45 पद रिक्त हैं। देवास जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 35 पद रिक्त हैं। नीमच जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। मंदसौर जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। रतलाम जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 62 पद रिक्त हैं। शाजापुर जिले में कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 22 पद रिक्त हैं।

    अशोकनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 5 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। गुना जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। ग्वालियर जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 39 पद रिक्त हैं। दतिया जिले में कार्यकर्ता के 16 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। शिवपुरी जिले में कार्यकर्ता के 23 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं।

    भिंड जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। मुरैना जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 18 पद रिक्त हैं। श्योपुर जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं।

    कटनी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। छिंदवाड़ा जिले में कार्यकर्ता के 38 एवं सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। जबलपुर जिले में कार्यकर्ता के 12 तथा सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। डिंडौरी जिले में कार्यकर्ता के 14 एवं सहायिका के 42 पद रिक्त हैं। नरसिंहपुर जिले में कार्यकर्ता के 18 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। पांढुर्णा जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 10 पद रिक्त हैं। बालाघाट जिले में कार्यकर्ता के 24 तथा सहायिका के 51 पद रिक्त हैं। मंडला जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। सिवनी जिले में कार्यकर्ता के 20 तथा सहायिका के 48 पद रिक्त हैं।

    नर्मदापुरम जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 21 पद रिक्त हैं। बैतूल जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 71 पद रिक्त हैं। हरदा जिले में कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं।

    भोपाल जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। राजगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 70 पद रिक्त हैं। रायसेन जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 73 पद रिक्त हैं। सीहोर जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं।

    मैहर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 14 पद रिक्त हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता का कोई पद रिक्त नहीं है, जबकि सहायिका के 4 पद रिक्त हैं। रीवा जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 31 पद रिक्त हैं। सतना जिले में कार्यकर्ता के 11 एवं सहायिका के 30 पद रिक्त हैं। सिंगरौली जिले में कार्यकर्ता के 2 तथा सहायिका के 8 पद रिक्त हैं। सीधी जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 12 पद रिक्त हैं।

    अनूपपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 19 पद रिक्त हैं। उमरिया जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। शहडोल जिले में कार्यकर्ता के 11 तथा सहायिका के 27 पद रिक्त हैं।

    छतरपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। टीकमगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 15 एवं सहायिका के 11 पद रिक्त हैं। दमोह जिले में कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 41 पद रिक्त हैं। निवाड़ी जिले में कार्यकर्ता के 6 एवं सहायिका के 6 पद रिक्त हैं। पन्ना जिले में कार्यकर्ता के 4 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं। सागर जिले में कार्यकर्ता के 25 एवं सहायिका के 47 पद रिक्त हैं।

  • मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    मुझे राजनीति से दूर रहने दो', जंतर-मंतर प्रदर्शन पर दिलजीत दोसांझ की दोटूक प्रतिक्रिया, बोले- मैं कलाकार हूं, नेता नहीं

    नई दिल्ली। पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। सोशल मीडिया पर लाइव बातचीत के दौरान जब उनसे इस प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं।

    दिलजीत हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से जुड़े थे। इस दौरान उन्होंने अपने आगामी प्रोजेक्ट्स, संगीत और फिल्मों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। बातचीत के बीच जब एक दर्शक ने उनसे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है और वह किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहते।

    उन्होंने बातचीत में कहा कि उन्हें ऐसे मामलों से दूर ही रखा जाए क्योंकि वह किसी राजनीतिक भूमिका में नहीं हैं। उनका कहना था कि वह एक कलाकार हैं और उनका काम लोगों का मनोरंजन करना है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है और जीवन में सभी परिस्थितियां कभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकतीं।

    दिलजीत ने अपने अंदाज में यह भी कहा कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भी अपनी बात रखने का अधिकार रखते हैं और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उनका भी अपना पक्ष हो सकता है। उन्होंने किसी भी पक्ष का समर्थन या विरोध करने से बचते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के किसी मुद्दे पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इसी कारण उन्होंने पूरे विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया।

    उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने उनके इस रुख को एक कलाकार की पेशेवर सोच बताया, जबकि कुछ लोगों ने सार्वजनिक जीवन से जुड़े चर्चित चेहरों की सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भूमिका को लेकर अलग-अलग राय भी व्यक्त की। हालांकि दिलजीत ने अपने बयान में किसी संगठन, व्यक्ति या प्रदर्शन की प्रकृति पर कोई टिप्पणी नहीं की और केवल राजनीति से दूरी बनाए रखने की बात दोहराई।

    दिलजीत दोसांझ पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कॉन्सर्ट्स और संगीत परियोजनाओं को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। देश और विदेश में उनकी बड़ी प्रशंसक संख्या है और सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रहती है। ऐसे में उनके किसी भी बयान पर लोगों की नजर रहती है।

    फिलहाल उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता कला और मनोरंजन है तथा वह राजनीतिक या विवादित विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना पसंद करते हैं। इसी वजह से उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

  • दो देशों और पांच प्रमुख शहरों से गुजरेगा अली खामेनेई का अंतिम सफर, 9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार

    दो देशों और पांच प्रमुख शहरों से गुजरेगा अली खामेनेई का अंतिम सफर, 9 जुलाई को होगा अंतिम संस्कार

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की राजकीय अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होगी और 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के साथ संपन्न होगी। अंतिम यात्रा का कार्यक्रम धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ईरान और इराक के कई प्रमुख शिया धार्मिक केंद्रों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    राजधानी तेहरान से अंतिम यात्रा की शुरुआत होगी, जहां आम लोगों के अंतिम दर्शन और राजकीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तेहरान को देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां से अंतिम यात्रा की शुरुआत को राष्ट्रीय सम्मान और नेतृत्व की निरंतरता का प्रतीक माना जा रहा है। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से मजबूत रखी जाएगी।

    तेहरान के बाद अंतिम यात्रा पवित्र शहर कोम पहुंचेगी, जिसे शिया धार्मिक शिक्षा और विद्वता का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में धर्मगुरु, छात्र और श्रद्धालु अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। कोम लंबे समय से शिया धार्मिक परंपरा और वैचारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, इसलिए इस शहर को अंतिम यात्रा के प्रमुख पड़ावों में शामिल किया गया है।

    इसके बाद पार्थिव शरीर को इराक ले जाया जाएगा, जहां कर्बला और नजफ में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होंगे। कर्बला शिया समुदाय के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है, जबकि नजफ धार्मिक शिक्षा और शिया परंपरा का महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। इन दोनों शहरों में अंतिम यात्रा का पहुंचना व्यापक शिया समुदाय के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। इन स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    अंतिम चरण में पार्थिव शरीर को ईरान के मशहद लाया जाएगा, जहां 9 जुलाई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मशहद अयातुल्लाह अली खामेनेई का जन्मस्थान भी है और शिया समुदाय के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में इसकी विशेष पहचान है। इसी कारण अंतिम संस्कार के लिए इस शहर का चयन किया गया है।

    अंतिम यात्रा को लेकर ईरान में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। देश-विदेश से बड़ी संख्या में धार्मिक प्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अंतिम यात्रा केवल एक राजकीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति, धार्मिक नेतृत्व और शिया समुदाय की एकजुटता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक होगी।

  • न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, चोटिल बेन सियर्स वनडे सीरीज से बाहर, वेस्टइंडीज दौरे पर बदली टीम की रणनीति

    न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, चोटिल बेन सियर्स वनडे सीरीज से बाहर, वेस्टइंडीज दौरे पर बदली टीम की रणनीति


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज शुरू होने से पहले न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। टीम के तेज गेंदबाज बेन सियर्स टखने की चोट के कारण पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह अनुभवी तेज गेंदबाज बेन लिस्टर को 16 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है। लगातार बढ़ती चोटों ने न्यूजीलैंड की तेज गेंदबाजी इकाई की चिंता और बढ़ा दी है।

    न्यूजीलैंड क्रिकेट के अनुसार बेन सियर्स पिछले कुछ समय से टखने की समस्या से जूझ रहे थे। मई में आयरलैंड के खिलाफ चार दिवसीय मुकाबले के बाद उनके टखने में दर्द बना हुआ था। इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टेस्ट के अंतिम दिन यह परेशानी और बढ़ गई। मेडिकल टीम की सलाह पर उन्हें आगे जोखिम से बचाने के लिए स्वदेश भेजने का फैसला लिया गया ताकि उनका इलाज और पुनर्वास समय पर किया जा सके।

    सियर्स की गैरमौजूदगी में टीम प्रबंधन ने बेन लिस्टर पर भरोसा जताया है। 30 वर्षीय बाएं हाथ के तेज गेंदबाज लिस्टर आने वाले दिनों में गुयाना में टीम के साथ जुड़ेंगे। उन्होंने वर्ष 2023 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची में अपना वनडे पदार्पण किया था। अब तक वह न्यूजीलैंड के लिए चार वनडे और 13 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेल चुके हैं और कुल 17 विकेट अपने नाम कर चुके हैं। हाल ही में वह बांग्लादेश के खिलाफ वनडे सीरीज में भी टीम का हिस्सा थे और घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

    न्यूजीलैंड के लिए चिंता की बात सिर्फ सियर्स की चोट नहीं है। टीम पहले से ही कई प्रमुख तेज गेंदबाजों की अनुपस्थिति का सामना कर रही है। ब्लेयर टिकनर टखने की सर्जरी के कारण पहले ही टीम से बाहर हो चुके हैं। जैकब डफी पारिवारिक कारणों से हाल के इंग्लैंड दौरे पर उपलब्ध नहीं थे जबकि काइल जैमीसन मैट हेनरी और विल ओरूर्के को कार्यभार प्रबंधन के तहत इस सीरीज से आराम दिया गया है। ऐसे में गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी नए और अपेक्षाकृत कम अनुभवी खिलाड़ियों पर होगी।

    वनडे सीरीज की शुरुआत 11 जुलाई से गुयाना में होगी। पहले तीन मुकाबले 11 13 और 16 जुलाई को खेले जाएंगे। इसके बाद सीरीज के अंतिम दो मैच 19 और 21 जुलाई को बारबाडोस के ब्रिजटाउन में होंगे। कप्तान मिचेल सैंटनर के नेतृत्व में न्यूजीलैंड की टीम इस चुनौतीपूर्ण दौरे पर संतुलित प्रदर्शन की उम्मीद करेगी।

    बल्लेबाजी में टॉम लैथम डेरिल मिशेल मार्क चैपमैन और विल यंग जैसे अनुभवी खिलाड़ियों पर बड़ी जिम्मेदारी होगी जबकि गेंदबाजी में बेन लिस्टर और अन्य युवा तेज गेंदबाजों को अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा। वेस्टइंडीज अपनी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेगा इसलिए यह सीरीज दोनों टीमों के लिए काफी अहम मानी जा रही है।

  • वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा और आर्थिक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में व्यवधान, व्यापारिक अनिश्चितता और मांग में कमी जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है और लगातार सुधारों के जरिए निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार किया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन कठिन परिस्थितियां ही किसी देश की वास्तविक क्षमता की परीक्षा लेती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ने ऐसे समय में अपनी आर्थिक मजबूती साबित की है और आने वाले वर्षों में भी विकास की गति बनाए रखने की पूरी क्षमता रखता है।

    उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 7.7 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर्ज की, जो वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की मजबूत आर्थिक नींव का संकेत है। उनके अनुसार पिछले बारह वर्षों में सरकार ने निरंतर सुधार की नीति अपनाते हुए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किए हैं। लगातार सुधार और बेहतर नीतियों के माध्यम से देश के आर्थिक ढांचे को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाया गया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में कर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कारोबार सुगमता से जुड़े नई पीढ़ी के सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों के लिए अनावश्यक बाधाओं को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्योगों को अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रही है और अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निवेश के लिए खोल दिया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को नीति स्थिरता, बेहतर बुनियादी ढांचा और तेज निर्णय प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए, जिससे भारत वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सके।

    प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में शामिल रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और आपसी विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने जापानी निवेशकों से भारत में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का आग्रह किया।

    इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से विशेष ‘जापान बिजनेस वीक’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल के तहत वरिष्ठ अधिकारी जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे तथा कारोबार सुगमता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से भारत को वैश्विक उद्योग एवं निवेश का और अधिक आकर्षक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये का निवेश बना सकता है करोड़पति, जानिए तीन निवेश विकल्पों का पूरा गणित

    हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये का निवेश बना सकता है करोड़पति, जानिए तीन निवेश विकल्पों का पूरा गणित


    नई दिल्‍ली । हर व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य का सपना देखता है और करोड़पति बनने की इच्छा भी रखता है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए शुरुआत में बड़ी पूंजी होना जरूरी नहीं है। यदि निवेश की शुरुआत समय रहते की जाए और हर महीने नियमित रूप से छोटी राशि निवेश की जाए, तो चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत लंबे समय में बड़ा फंड तैयार कर सकती है।

    अगर कोई व्यक्ति हर महीने 5,000 रुपये निवेश करता है, तो अलग-अलग निवेश विकल्पों और उनके अनुमानित रिटर्न के आधार पर करीब 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का फंड तैयार किया जा सकता है।

    सोने में निवेश से तैयार हो सकता है 1 करोड़ से ज्यादा का फंड
    लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से सोना भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। यदि हर महीने 5,000 रुपये का निवेश किया जाए और औसतन 10 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिले, तो करीब 29 साल में 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा सकती है।

    मासिक निवेश: 5,000 रुपये
    निवेश अवधि: 29 वर्ष
    अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 10%
    कुल निवेश: 17.40 लाख रुपये
    अनुमानित रिटर्न: 85,19,021 रुपये
    कुल फंड वैल्यू: करीब 1,02,59,021 रुपये

    म्यूचुअल फंड SIP से 25.5 साल में बन सकता है करोड़ का फंड
    लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना के कारण म्यूचुअल फंड SIP निवेशकों के बीच लोकप्रिय विकल्प है। हालांकि इसमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती, लेकिन अनुमानित 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न के आधार पर 5,000 रुपये की मासिक SIP से करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    निवेश का माध्यम: म्यूचुअल फंड SIP
    हर महीने निवेश: 5,000 रुपये
    निवेश अवधि: करीब 25.5 वर्ष
    अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
    कुल निवेश: 15.30 लाख रुपये
    अनुमानित रिटर्न: 85,72,957 रुपये
    कुल फंड: करीब 1,01,02,957 रुपये

    कम जोखिम वालों के लिए PPF भी है विकल्प
    जो निवेशक सुरक्षित और कम जोखिम वाला विकल्प चाहते हैं, उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) बेहतर माना जाता है। हालांकि इसमें ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होने के कारण 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार करने में अधिक समय लगता है।

    सालाना निवेश: 60,000 रुपये
    अनुमानित ब्याज दर: 7.1%
    निवेश अवधि: करीब 37 वर्ष
    कुल निवेश: 22.20 लाख रुपये
    ब्याज से कमाई: 83.27 लाख रुपये
    मैच्योरिटी राशि: करीब 1.05 करोड़ रुपये

    नियमित निवेश, लंबी अवधि और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलकर छोटी बचत को भी बड़ी संपत्ति में बदल सकते हैं। इसलिए निवेश की शुरुआत जितनी जल्दी की जाए, भविष्य में बड़ा फंड तैयार करने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

  • ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ

    ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ


    नई दिल्ली ।
    भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर चर्चा शेष है। उनका कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए संतुलित और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

    पीयूष गोयल ने बातचीत के दौरान सामने आई सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूरी वार्ता के दौरान सबसे अधिक परेशानी दोनों देशों के बीच समय के अंतर के कारण हुई। दिल्ली और वॉशिंगटन के अलग-अलग टाइम ज़ोन के चलते कई दौर की बैठकें देर रात तक चलीं, जिससे अधिकारियों और वार्ता टीमों को अपने कार्य समय में लगातार बदलाव करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इसे तकनीकी चुनौती बताया और कहा कि इससे बातचीत की सकारात्मक गति प्रभावित नहीं हुई।

    उन्होंने कहा कि दोनों देशों की वार्ता टीमों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग का माहौल रहा। बातचीत के दौरान किसी बड़े मतभेद के बजाय अधिकांश मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा हुई और समाधान निकालने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार दोनों पक्षों ने समझौते को व्यावहारिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उनका कहना है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। इससे कई क्षेत्रों के उद्योगों को लाभ मिलने की संभावना है और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा। उनके अनुसार भारत को ऐसे कई क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है, जहां अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के साथ मुकाबला अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है। इससे निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार से जुड़े विभिन्न विषयों पर लगातार बातचीत जारी है। इस दौरान बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक सहयोग जैसे अनेक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई है। अब अधिकांश विषयों पर सहमति बनने के बाद अंतिम चरण की बातचीत पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समय के अनुसार अंतिम रूप लेता है, तो इससे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी विकसित होंगे। फिलहाल दोनों पक्ष शेष बिंदुओं पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और जल्द ही समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

  • इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर, अरब सागर में रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच शुरू

    इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर, अरब सागर में रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच शुरू

    नई दिल्ली। अरब सागर में अमेरिकी नौसेना का एक MH-60S सी हॉक हेलीकॉप्टर इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के समय हेलीकॉप्टर में चार क्रू सदस्य सवार थे। इनमें से तीन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि एक सदस्य अब भी लापता है। घटना के बाद समुद्री क्षेत्र में व्यापक खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है तथा दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    अमेरिकी नौसेना के अनुसार यह हादसा नियमित सैन्य अभियान के दौरान हुआ। हेलीकॉप्टर को तकनीकी या परिचालन संबंधी कारणों से आपात स्थिति में समुद्र में उतरना पड़ा, लेकिन लैंडिंग प्रक्रिया के दौरान वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस घटना का किसी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई या बाहरी हमले से कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक मिले तथ्यों के आधार पर इसे परिचालन दुर्घटना के रूप में देखा जा रहा है।

    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद नौसैनिक संसाधनों और बचाव दलों को सक्रिय किया गया। बचाव अभियान के दौरान तीन घायल क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। चौथे सदस्य की तलाश के लिए समुद्र और आसपास के क्षेत्र में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। खोज अभियान में नौसैनिक जहाजों, हेलीकॉप्टरों और विशेष बचाव टीमों को लगाया गया है, ताकि लापता सदस्य का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।

    दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत पर तैनात था और नियमित परिचालन जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा था। नौसेना ने घटना की जांच के आदेश देते हुए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की है, जो तकनीकी रिकॉर्ड, उड़ान संबंधी आंकड़ों और परिचालन परिस्थितियों का विश्लेषण करेगी। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि इमरजेंसी लैंडिंग की आवश्यकता क्यों पड़ी और दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

    MH-60S सी हॉक अमेरिकी नौसेना के बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टरों में शामिल है। इसका उपयोग समुद्री खोज एवं बचाव अभियान, विशेष सैन्य अभियानों, रसद आपूर्ति, कार्गो परिवहन, चिकित्सा निकासी तथा विभिन्न नौसैनिक परिचालन कार्यों में किया जाता है। दो इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर को कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी प्रभावी संचालन के लिए विकसित किया गया है और यह लंबे समय से अमेरिकी नौसेना की परिचालन क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

    इस घटना के बीच अमेरिका अपनी विमानन तकनीक के आधुनिकीकरण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। देश में सुपरसोनिक विमानों के संचालन से जुड़े नियमों में बदलाव की प्रक्रिया जारी है और नई तकनीकों के अनुरूप नियामकीय ढांचा तैयार करने पर काम किया जा रहा है। हालांकि अरब सागर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे का इस पहल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, लेकिन यह घटना सैन्य विमानन सुरक्षा, परिचालन जोखिम और तकनीकी विश्वसनीयता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करती है। फिलहाल सभी की निगाहें लापता क्रू सदस्य की तलाश और दुर्घटना जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

  • ओडिशा में एल्युमीनियम क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक पहल, अदाणी ग्रुप और आईएचसी का 1.08 लाख करोड़ रुपये निवेश; हजारों रोजगार और वैश्विक विनिर्माण क्षमता को मिलेगा नया आधार

    ओडिशा में एल्युमीनियम क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक पहल, अदाणी ग्रुप और आईएचसी का 1.08 लाख करोड़ रुपये निवेश; हजारों रोजगार और वैश्विक विनिर्माण क्षमता को मिलेगा नया आधार

    नई दिल्ली । भारत के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली एक बड़ी पहल के तहत अदाणी ग्रुप ने अबु धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) के साथ मिलकर ओडिशा में अत्याधुनिक एल्युमीनियम परियोजना स्थापित करने की घोषणा की है। करीब 11.5 अरब डॉलर यानी लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली यह परियोजना देश के धातु उद्योग के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक पहलों में शामिल मानी जा रही है। इसके माध्यम से भारत की एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    भुवनेश्वर में आयोजित समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान कंपनी की ओर से बताया गया कि यह परियोजना केवल एक औद्योगिक इकाई तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पूरी एल्युमीनियम वैल्यू चेन को एकीकृत रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखेगी। इसके तहत कच्चे माल के प्रसंस्करण से लेकर तैयार उत्पादों के निर्माण तक की सभी प्रमुख गतिविधियां एक ही औद्योगिक परिसर में संचालित की जाएंगी। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक प्रभावी बन सकेगी।

    प्रस्तावित परियोजना में प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख टन क्षमता वाली एल्युमिना रिफाइनरी स्थापित की जाएगी, जबकि करीब 20 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला एल्युमीनियम स्मेल्टर भी विकसित होगा। इसके अलावा लगभग 10 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम पार्क तैयार किया जाएगा, जहां विभिन्न औद्योगिक और उपभोक्ता क्षेत्रों के लिए मूल्यवर्धित एल्युमीनियम उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे देश में आयात पर निर्भरता कम होने और निर्यात क्षमता बढ़ने की संभावना है।

    परियोजना के सुचारु संचालन के लिए लगभग 4,000 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव पावर सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही करीब 400 मेगावाट हरित ऊर्जा का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पादन प्रक्रिया में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी। यह पहल उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इस निवेश का सबसे बड़ा प्रभाव रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। निर्माण चरण के दौरान करीब 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। वहीं परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद लगभग 18,500 स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त परिवहन, लॉजिस्टिक्स, लघु उद्योग, सेवा क्षेत्र और स्थानीय कारोबार से जुड़े हजारों लोगों को भी आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिलने की संभावना है।

    कंपनी का मानना है कि इस परियोजना के माध्यम से केवल एक औद्योगिक संयंत्र का निर्माण नहीं होगा, बल्कि ओडिशा में व्यापक आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र विकसित होगा। इससे स्थानीय उद्यमों को नए बाजार, युवाओं को कौशल आधारित रोजगार और छोटे व्यवसायों को दीर्घकालिक अवसर प्राप्त होंगे। परियोजना के आसपास सहायक उद्योगों के विकसित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी उल्लेखनीय गति मिलने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की बढ़ती मांग को देखते हुए यह निवेश भारत के धातु उद्योग को नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है। एकीकृत उत्पादन मॉडल, आधुनिक तकनीक, ऊर्जा दक्षता और बड़े पैमाने की विनिर्माण क्षमता के कारण यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत को एल्युमीनियम क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही यह औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने के क्षेत्र में ओडिशा के लिए भी एक नई पहचान बनाने का आधार बनेगी।

  • डेकेयर सेंटर में बच्चों से कथित दुर्व्यवहार का मामला, कैपजेमिनी ने उठाया बड़ा कदम, पांच केयरगिवर्स पर केस दर्ज

    डेकेयर सेंटर में बच्चों से कथित दुर्व्यवहार का मामला, कैपजेमिनी ने उठाया बड़ा कदम, पांच केयरगिवर्स पर केस दर्ज

    नई दिल्ली। बेंगलुरु स्थित एक कॉर्पोरेट डेकेयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप सामने आने के बाद आईटी क्षेत्र में गंभीर चिंता का माहौल बन गया है। मामले के सामने आने के बाद कैपजेमिनी ने अपने कैंपस में संचालित डेकेयर सुविधा को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी का कहना है कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा तथा बच्चों की भलाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग कर रही है।

    बताया गया है कि यह डेकेयर सेंटर बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड क्षेत्र स्थित कंपनी के कैंपस में संचालित किया जा रहा था। मामले ने तब तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार के दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया। वीडियो सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की।

    जिला बाल संरक्षण इकाई की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान डेकेयर सेंटर में कार्यरत पांच महिला केयरगिवर्स के खिलाफ किशोर न्याय कानून की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस अब उपलब्ध वीडियो, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि डेकेयर सेंटर में दो से तीन वर्ष की आयु के बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता था। आरोपों के अनुसार बच्चों के रोने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता था, उनके साथ मारपीट की जाती थी और कई बार उनके साथ अमानवीय व्यवहार भी किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ बच्चों को बाथरूम में बंद करने, उनके साथ अनुचित शारीरिक व्यवहार करने और उन्हें भयभीत करने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल जांच के बाद ही हो सकेगी।

    कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है और संबंधित एजेंसियों को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। साथ ही, जांच पूरी होने तक डेकेयर सुविधा को बंद रखने का निर्णय एहतियाती कदम के रूप में लिया गया है। कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कॉर्पोरेट परिसरों में संचालित डेकेयर केंद्रों की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। बच्चों की देखभाल से जुड़ी संस्थाओं में नियमित निरीक्षण, पारदर्शी निगरानी प्रणाली और शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना ने अभिभावकों के बीच भी बच्चों की सुरक्षा और डेकेयर केंद्रों की कार्यप्रणाली को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।