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  • ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार को अपना वीकेंड प्रवास बीच में छोड़कर व्हाइट हाउस लौट आए। वह मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड से रविवार को वापस आने वाले थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही वॉशिंगटन पहुंच गए। ट्रंप की अचानक वापसी के पीछे प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।

    ट्रंप की वापसी ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान की ओर से कहा गया है कि इन शर्तों को मध्यस्थ कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जा चुका है।

    ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। ईरान की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि उसकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो वह निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

    ईरान की ओर से रखी गई शर्तों और चेतावनी के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर अमेरिका ने भी सतर्कता बढ़ाई है। अमेरिकी राजनयिक मिशनों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को बदलती परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    सऊदी अरब और हूती समूह के बीच जारी सैन्य गतिविधियों ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है। हूती समूह ईरान समर्थित है और सऊदी अरब के खिलाफ पहले भी सैन्य कार्रवाई कर चुका है। इनमें नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाली घटनाएं भी शामिल रही हैं।

    अमेरिकी सुरक्षा चेतावनी में कहा गया है कि ईरान और उसके समर्थक समूह मध्य पूर्व के बाहर भी अमेरिकी हितों या अमेरिका और उसके नागरिकों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं। इस वजह से अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी चेतावनी में यात्रा को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। क्षेत्र से आने-जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डों और एयरलाइंस के संचालन से संबंधित जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। सुरक्षा स्थिति में बदलाव होने पर उड़ानों और यात्रा कार्यक्रमों में भी असर पड़ सकता है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का कैंप डेविड से निर्धारित समय से एक दिन पहले व्हाइट हाउस लौटना महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उनकी वापसी का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ईरान की ओर से एक तरफ बातचीत के लिए शर्तें सामने रखी गई हैं, जबकि दूसरी तरफ मांगें पूरी नहीं होने पर निर्णायक युद्ध की चेतावनी दी गई है। ऐसे में अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया और ईरान के रुख पर क्षेत्रीय हालात की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

    फिलहाल पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां, अमेरिकी सुरक्षा अलर्ट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा और यात्रा संबंधी सावधानियां बढ़ा दी गई हैं।

  • मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    मुंबई कोस्टल रोड पर BMW हादसे में तीन की मौत, 200 किमी प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की बात सामने आई

    नई दिल्ली । मुंबई के कोस्टल रोड पर रविवार तड़के एक तेज रफ्तार BMW कार के ब्रिज से नीचे गिरने से बड़ा सड़क हादसा हो गया। दुर्घटना में कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है। घायल का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

    जानकारी के मुताबिक काले रंग की BMW कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी। सुबह करीब 5:20 बजे कार अचानक अनियंत्रित हो गई। इसके बाद वाहन ने ब्रिज की बाउंड्री वॉल और रेलिंग को टक्कर मारी और उसे तोड़ते हुए नीचे जा गिरा।

    हादसा इतना भीषण था कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना के बाद वाहन के कई हिस्से टूट गए। घटनास्थल की तस्वीरों में कार की स्थिति से टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बताया गया है कि कार में कुल चार लोग सवार थे। हादसे के बाद तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक करीब 20 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे उपचार के लिए नायर अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती कराया गया है।

    मृतकों में 21 वर्षीय शनाय गज्जल और 17 वर्षीय धैर्य सेठ की पहचान हुई है। तीसरे मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। करीब 25 वर्षीय इस युवक को अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद मृत घोषित किया गया।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव का काम किया गया। दुर्घटनाग्रस्त BMW को हटाने और मौके पर मौजूद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए संबंधित टीमों ने कार्रवाई की। गंभीर रूप से घायल युवक का अस्पताल में इलाज जारी है।

    प्रारंभिक पुलिस रिपोर्ट में BMW की रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की बात सामने आई है। बताया गया है कि तेज गति के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। हालांकि हादसे की परिस्थितियों और वाहन की वास्तविक गति से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार अनियंत्रित होने के बाद कार पहले सड़क के डिवाइडर से टकराई। इसके बाद यह कोस्टल रोड के किनारे लगे बिजली के खंभे से टकराई और फिर ब्रिज की संरचना को नुकसान पहुंचाते हुए नीचे जा गिरी।

    हादसे के कारण कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाहन किस परिस्थिति में अनियंत्रित हुआ और हादसे से पहले सड़क पर उसकी गति कितनी थी।

    मुंबई कोस्टल रोड शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है और यहां वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में तेज गति से वाहन चलाने की स्थिति में नियंत्रण खोने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

    रविवार सुबह हुए इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया और दुर्घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच आगे जारी है।

  • बंगाल में SIR से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, तेजी से निपटारे के लिए 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की मांग

    बंगाल में SIR से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, तेजी से निपटारे के लिए 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की मांग

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बाद सामने आई अपीलों के निपटारे को लेकर लंबित मामलों की संख्या लगातार बड़ी बनी हुई है। राज्य में SIR से संबंधित कुल 38,20,683 अपीलें दाखिल की गई थीं। इनमें से अब तक करीब 1.02 लाख मामलों का ही निपटारा हो सका है, जबकि 37 लाख से अधिक अपीलें अभी लंबित हैं।

    लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए इनके निपटारे की गति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मौजूदा रफ्तार बनी रहने पर सभी लंबित अपीलों के निपटारे में लंबा समय लगने का अनुमान सामने आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

    वर्तमान में पश्चिम बंगाल में इन अपीलों की सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाकर 42 किए जाने की जरूरत बताई गई है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों की सुनवाई को तेज करना और बड़ी संख्या में जमा अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करना है।

    लंबित अपीलों में बड़ी संख्या उन मामलों की है, जिनमें SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 22 लाख से अधिक अपीलें ऐसे मतदाताओं की ओर से दाखिल की गई हैं, जिनके नाम सूची से हटा दिए गए थे। इसके अलावा करीब 16 लाख अपीलें ऐसी हैं, जिनमें SIR के बाद मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है।

    आंकड़ों के मुताबिक ट्रिब्यूनल के सामने पहुंची करीब 38 लाख अपीलों में 57 प्रतिशत से अधिक मामले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े हैं। इससे स्पष्ट है कि लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा मतदाता सूची में नाम हटने से संबंधित विवादों से जुड़ा हुआ है।

    ट्रिब्यूनल की संख्या 42 करने के प्रस्ताव के पीछे एक प्रमुख आधार राज्य के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी है। पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोकसभा क्षेत्र हैं। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के अनुरूप एक ट्रिब्यूनल होने से मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।

    SIR के बाद मतदाता सूची में नामों को लेकर दाखिल हुई अपीलों का निपटारा चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण सुनवाई की प्रक्रिया पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रिब्यूनल गठित करने का प्रस्ताव लंबित अपीलों के बोझ को कम करने और सुनवाई की गति बढ़ाने से जुड़ा है।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही SIR संबंधी कार्यवाही के संदर्भ में सामने आया है। लंबित अपीलों की संख्या, मौजूदा ट्रिब्यूनलों की क्षमता और मामलों के निपटारे की गति को देखते हुए संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। अब इस दिशा में आगे की प्रक्रिया और अदालत के समक्ष प्रस्ताव पर होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

  • CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    CBDT ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में किए बदलाव, वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के लिए नए फॉर्म जारी

    नई दिल्ली । केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इनकम टैक्स रूल्स 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में वैल्यूअर और अधिकृत इनकम टैक्स प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन और टैक्स रिकवरी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। संशोधित नियमों के कुछ प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने गए हैं, जबकि अन्य बदलाव 17 सितंबर 2026 से लागू किए गए हैं।

    इनकम टैक्स अधिनियम, 2026 में चौथे संशोधन के तहत वैल्यूअर और टैक्स प्रैक्टिशनर के रजिस्ट्रेशन से संबंधित प्रक्रियाओं को संशोधित किया गया है। इसके तहत मौजूदा फॉर्म में भी जरूरी सुधार किए गए हैं, ताकि रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जा सके।

    नए प्रावधानों के तहत वैल्यूअर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने वाले व्यक्ति को Form-169 में अपनी शैक्षणिक योग्यता, पिछली नौकरी और संबंधित पेशेवर अनुभव की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों के दौरान किए गए वैल्यूएशन का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।

    इस बदलाव का उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति की योग्यता और अनुभव से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट रूप से दर्ज करना है। इससे वैल्यूअर के पेशेवर रिकॉर्ड और उनके द्वारा किए गए वैल्यूएशन से संबंधित विवरण प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।

    इसी तरह टैक्स प्रैक्टिशनर्स के लिए Form-171 पेश किया गया है। इस फॉर्म में आवेदक को अपनी शैक्षणिक योग्यता और जरूरी प्रमाणपत्रों से संबंधित जानकारी देनी होगी। इसके अलावा यदि आवेदक से जुड़ी कोई अयोग्यता या डिस्क्वालिफिकेशन है, तो उसका विवरण भी देना आवश्यक होगा।

    इनकम टैक्स नियमों में किए गए बदलावों का एक प्रमुख हिस्सा टैक्स कंप्लायंस प्रक्रिया से जुड़ा है। नए प्रावधानों के तहत प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। कंप्लायंस से संबंधित समयसीमा में विस्तार से संबंधित करदाताओं और टैक्स प्रोफेशनल्स को अपनी जरूरी जानकारी दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

    समयसीमा बढ़ाए जाने से चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉरपोरेट्स और अन्य संबंधित टैक्सपेयर्स को अंतिम समय में होने वाली जल्दबाजी से राहत मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण होने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

    CBDT ने टैक्स रिकवरी से जुड़े नियम 225 में भी संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के तहत इस नियम से जुड़े कई प्रावधानों को हटा दिया गया है। इनमें गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

    संशोधन के तहत एक महत्वपूर्ण बदलाव प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर किया गया है। पहले जिन प्रक्रियाओं को 30 सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, उनकी समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।

    इन बदलावों के साथ इनकम टैक्स नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन, अनुपालन और टैक्स रिकवरी से जुड़ी प्रक्रियाओं में संशोधन किया गया है। नए फॉर्म और विस्तारित समयसीमा का सीधा संबंध संबंधित पेशेवरों और करदाताओं की प्रक्रियात्मक

  • अलसी सिर्फ सेहत के लिए नहीं त्वचा के लिए भी है खास जानिए ग्लोइंग स्किन के लिए कैसे करें इस्तेमाल

    अलसी सिर्फ सेहत के लिए नहीं त्वचा के लिए भी है खास जानिए ग्लोइंग स्किन के लिए कैसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली।अलसी को आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जाता है। अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा को मॉइस्चराइज रखने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि आजकल होम स्किन केयर में अलसी से बने जेल और फेस पैक का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय हो रहा है। अगर आप भी अपनी त्वचा को नेचुरल तरीके से निखारने और मुलायम बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं तो अलसी को अपनी स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।

    अलसी से जेल तैयार करना इसका सबसे आसान तरीका माना जाता है। इसके लिए एक से दो चम्मच अलसी को पानी में डालकर धीमी आंच पर कुछ देर उबालें। जब पानी थोड़ा गाढ़ा होने लगे तो गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दें। इसके बाद साफ कपड़े या छन्नी की मदद से जेल को अलग कर लें। तैयार जेल को साफ डिब्बे में रखकर थोड़ी मात्रा में चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसे कुछ देर त्वचा पर रखने के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें।

    अलसी का जेल त्वचा को नमी देने वाली घरेलू देखभाल का हिस्सा बन सकता है। खासकर रूखी त्वचा वाले लोगों को इससे त्वचा में मुलायमपन महसूस हो सकता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    अलसी से फेस पैक भी बनाया जा सकता है। इसके लिए अलसी के जेल में थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट बाद धो लें। अगर त्वचा पर जलन खुजली या लालिमा महसूस हो तो तुरंत इसे धो दें और दोबारा इस्तेमाल न करें। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    कुछ लोग अलसी के पाउडर को दही या अन्य घरेलू सामग्री के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। लेकिन किसी भी मिश्रण को चेहरे पर लगाने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसमें शामिल सभी सामग्री आपकी त्वचा के अनुकूल हैं या नहीं। नींबू जैसी तेज अम्लीय सामग्री को सीधे चेहरे पर लगाने से बचना बेहतर है क्योंकि इससे कुछ लोगों की त्वचा में जलन या संवेदनशीलता बढ़ सकती है।

    स्किन केयर में अलसी का इस्तेमाल करते समय स्वच्छता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। घर पर तैयार किया गया अलसी का जेल लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रहता इसलिए इसे कम मात्रा में बनाना बेहतर है। इसे साफ और बंद डिब्बे में रखें तथा खराब गंध या रंग में बदलाव दिखाई देने पर इस्तेमाल न करें। आंखों के आसपास या किसी कटे हुए हिस्से पर इसे लगाने से बचें।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना अच्छी नींद लेना और धूप से त्वचा की सुरक्षा करना भी जरूरी है। अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे खुजली दाने या जलन जैसी समस्या रहती है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। अलसी को स्किन केयर में शामिल करने का उद्देश्य त्वचा को अतिरिक्त घरेलू देखभाल देना है न कि किसी त्वचा संबंधी समस्या का इलाज करना।

  • नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, हिमंत सरमा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर सियासत तेज, हिमंत सरमा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कांग्रेस नेता ने प्रत्याशी की गिरफ्तारी को लोकतंत्र की हत्या बताया था।

    हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी का बचाव करते हुए कहा कि पुलिस ने अपना कर्तव्य निभाया है। उन्होंने दावा किया कि मिलन प्रधान के खिलाफ करीब 19 साल पुराने मामले लंबित थे और इन्हीं मामलों में पुलिस ने कार्रवाई की है।

    असम के मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनके बयानों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया है, उसके खिलाफ पुराने आपराधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2007 में मिलन प्रधान के खिलाफ हत्या से जुड़े दो या तीन मामले दर्ज किए गए थे।

    हिमंत सरमा ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी वारंट लंबित हैं, तो पुलिस के लिए कार्रवाई करना उसके कर्तव्य का हिस्सा है। उन्होंने इसी आधार पर नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी को उचित ठहराया।

    राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए हिमंत सरमा ने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने राहुल गांधी को पागल व्यक्ति बताया और उनके अलग-अलग सार्वजनिक रूपों का जिक्र करते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा कि कभी राहुल गांधी दाढ़ी के साथ दिखाई देते हैं, कभी बिना दाढ़ी के और कभी विदेश में तो कभी भारत में नजर आते हैं।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद हुई। राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देखा था। इसके बाद हिमंत सरमा ने राहुल गांधी के बयान का जवाब देते हुए गिरफ्तारी के पीछे लंबित मामलों और पुलिस की कार्रवाई का उल्लेख किया।

    पश्चिम बंगाल पुलिस के अनुसार, मिलन प्रधान को चार लंबित मामलों में जारी गिरफ्तारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक ये वारंट गैर-जमानती मामलों में कथित संलिप्तता से जुड़े हैं। इन मामलों का संबंध वर्ष 2007 में नंदीग्राम में हुए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज घटनाओं से बताया गया है।

    पुलिस के अनुसार, लंबित मामलों में दंगा, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आपराधिक धमकी जैसे आरोपों से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच पुलिस ने इन्हीं लंबित मामलों और वारंट को कार्रवाई का आधार बताया है।

    नंदीग्राम उपचुनाव के मद्देनजर मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर कांग्रेस की तरफ से गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर हिमंत सरमा ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है। फिलहाल विवाद का केंद्र प्रत्याशी की गिरफ्तारी, पुराने मामलों में जारी वारंट और इस कार्रवाई को लेकर सामने आए राजनीतिक बयानों पर बना हुआ है।

  • ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे ऊर्जा खरीदार देशों पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

    ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे ऊर्जा खरीदार देशों पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े एचआर 5334 विधेयक पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया। इस कानून में रूस पर प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों को लागू करने तथा उनका दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे जारी रखने की व्यवस्था भी की गई है।

    ट्रंप के इस फैसले पर भारत में कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि किसी धौंस जमाने वाले का मुकाबला करने का एक ही तरीका है और वह है मजबूती से उसका प्रतिरोध करना।

    नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसमें रूस के ऊर्जा कारोबार और उससे जुड़े प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था है। रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।

    कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध नीति का प्रभाव बढ़ सकता है। हालांकि कानून पर हस्ताक्षर होने के साथ भारत पर तत्काल कोई नया टैरिफ लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है।

    विधेयक में रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और रक्षा कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के प्रावधान भी शामिल हैं। रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने वाले देशों और संस्थाओं पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य रूस के आर्थिक और रणनीतिक नेटवर्क पर प्रतिबंधों का प्रभाव मजबूत करना है।

    कानून में रूस के ऊर्जा निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर भी ध्यान दिया गया है। इसके जरिए प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई का रास्ता तैयार किया गया है। रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ और अन्य प्रतिबंधों का इस्तेमाल किए जाने की व्यवस्था की गई है।

    ईरान को लेकर भी कानून में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। इसमें ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इस तरह रूस के साथ ईरान को लेकर भी अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था को कानूनी आधार मिला है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इस विधेयक को 16 सितंबर 2026 को मंजूरी दी थी। इसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया। 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया।

    भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस के साथ उसका ऊर्जा कारोबार लंबे समय से जारी है। रूस भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भारत के आर्थिक और ऊर्जा हितों से जुड़ता है।

    जयराम रमेश की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा भारत की राजनीतिक बहस में भी सामने आया है। नए कानून के तहत भारत पर तत्काल कोई नया शुल्क लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि आगे अमेरिकी प्रशासन इस कानून के प्रावधानों का किस तरह इस्तेमाल करता है, इससे भारत समेत रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर संभावित प्रभाव स्पष्ट होगा।

  • 2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख

    2027 चुनाव के बाद क्या होगी योगी आदित्यनाथ की भूमिका, PM पद की अटकलों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया रुख


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भविष्य की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि 2027 के चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ की भूमिका क्या होगी और क्या वह राष्ट्रीय राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। प्रधानमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की है।

    एक इंटरव्यू में योगी आदित्यनाथ से पूछा गया कि 2027 के बाद वह खुद को राष्ट्रीय राजनीति में कहां देखते हैं और क्या प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके लिए जिम्मेदारी और देशहित सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी है, जिसे वह बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने पर है। उन्होंने राज्य के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक विकास को अपनी प्राथमिकता बताया। उनके जवाब में प्रधानमंत्री पद के लिए किसी तरह की दावेदारी सामने नहीं आई। मुख्यमंत्री ने अपनी मौजूदा जिम्मेदारी को ही केंद्र में रखते हुए उत्तर प्रदेश की सेवा और बेहतर शासन पर जोर दिया।

    2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे पर भी उनसे सवाल किया गया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का फैसला संगठन से जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी जिम्मेदारी सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का फायदा समाज के हर वर्ग, जिले और परिवार तक पहुंचना जरूरी है। उनके अनुसार प्रदेश के प्रत्येक वर्ग का विकास होना चाहिए और लोग राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकें, यह भी महत्वपूर्ण है।

    इंटरव्यू के दौरान अयोध्या के बाद काशी और मथुरा पर ध्यान केंद्रित किए जाने को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या, काशी और मथुरा उत्तर प्रदेश की विरासत का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक विरासत का संरक्षण और विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ धाम का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2021 में इसके उद्घाटन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचे। उनके अनुसार इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला। नाव चलाने वालों, दुकानदारों, पुजारियों, ऑटो चालकों, होटल संचालकों और होम स्टे से जुड़े लोगों को इससे काम मिलने की बात उन्होंने कही।

    योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक स्थलों के विकास को केवल आस्था से जोड़कर नहीं देखा, बल्कि स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि विरासत को संरक्षित करने के साथ विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    2027 के चुनाव से पहले योगी की भूमिका को लेकर अलग-अलग राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने भविष्य की किसी भूमिका का दावा नहीं किया। उन्होंने फिलहाल उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी, विकास और शासन व्यवस्था को ही अपनी प्राथमिकता बताया।

    इस तरह 2027 के बाद उनकी भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच योगी आदित्यनाथ का मौजूदा रुख उत्तर प्रदेश की सेवा और राज्य को आर्थिक, सामाजिक तथा प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

  • DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद ABVP के खाते में गए, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। परिणाम सामने आने के बाद छात्र राजनीति के साथ-साथ राजनीतिक दलों के बीच भी इस चुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत दर्ज की। उन्हें 24,576 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस तरह डबास ने 2,053 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी विजयी रहीं, जबकि संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की।

    उपाध्यक्ष पद का परिणाम हालांकि बाकी तीन पदों से अलग रहा। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। ABVP के ईशु मौर्या को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट प्राप्त हुए। शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं और इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

    चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 40.46 रहा। चार केंद्रीय पदों के लिए हुए मुकाबले में ABVP ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि NSUI किसी भी केंद्रीय पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। वर्ष 2015 के बाद यह पहली बार है जब NSUI चार प्रमुख पदों में से कोई भी पद हासिल नहीं कर पाई है।

    नतीजों के बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने चुनाव को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष से जुड़े छात्र संगठनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। उनके अनुसार, अगर ये संगठन एक साथ चुनाव मैदान में उतरते तो परिणाम अलग हो सकता था और इंडिया गठबंधन से जुड़े पक्ष को अधिक सफलता मिल सकती थी।

    राजीव शुक्ला की प्रतिक्रिया के बाद DUSU चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक चर्चा का एक और पहलू सामने आया। उनके बयान का आधार यह था कि अलग-अलग उम्मीदवारों के मैदान में होने से संबंधित वोटों का बंटवारा हुआ और इसका चुनावी परिणाम पर असर पड़ा।

    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्वविद्यालय के केंद्रीय पैनल के चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों के लिए मुकाबला होता है। इन चुनावों में छात्र मुद्दों के साथ विभिन्न छात्र संगठनों की राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई देती है।

    इस बार चुनाव के दौरान छात्रों से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे। इनमें हॉस्टल, पीजी व्यवस्था और सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। चुनाव परिणामों ने एक ओर ABVP को तीन केंद्रीय पद दिए, वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने अलग तस्वीर पेश की।

    इस परिणाम के बाद छात्र संगठनों के बीच रणनीति और चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शन और वोटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक नेताओं की व्याख्या उनके अपने आकलन पर आधारित है। DUSU के ताजा परिणामों ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अलग-अलग संगठनों की स्थिति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • MP में सितंबर के आखिरी सप्ताह में तेज बारिश के आसार, 45 जिलों में बरसे बदरा; भोपाल के बांधों के गेट खोले गए

    MP में सितंबर के आखिरी सप्ताह में तेज बारिश के आसार, 45 जिलों में बरसे बदरा; भोपाल के बांधों के गेट खोले गए


    भोपाल । मध्य प्रदेश में दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई का दौर शुरू होने के बावजूद बारिश का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेश के कई हिस्सों में एक बार फिर तेज बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर अंडमान सागर में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय होने की स्थिति में है जिसका असर मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है। इसके चलते अगले चार दिनों में भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर ग्वालियर समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। हालांकि 23 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार नए सिस्टम की ताकत और उसकी दिशा आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति तय करेगी। सिस्टम यदि मजबूत होता है तो प्रदेश के कई इलाकों में बारिश का दौर और बढ़ सकता है। मौसम की गतिविधियों में बदलाव के साथ पूर्वानुमान भी बदलने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में प्रदेश के लोगों को आने वाले दिनों में मौसम पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

    इससे पहले शनिवार को प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। भोपाल में लगातार बारिश के बाद भदभदा और कलियासोत डैम में पानी की आवक बढ़ गई। इसके चलते भदभदा का एक और कलियासोत डैम के दो गेट खोलने पड़े। कलियासोत नदी में भी लगातार पानी पहुंच रहा है। वहीं कई इलाकों में बारिश के कारण नदी नाले उफान पर आ गए।

    ब्यावरा में लगातार बारिश के कारण अजनार नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा और इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए। आगर मालवा जिले के नलखेड़ा समेत कई क्षेत्रों में भी भारी बारिश हुई। रिपोर्ट के अनुसार नलखेड़ा में एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई जिसमें आठ लोगों की मौत की सूचना है। शहडोल में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं ने बारिश के दौरान नदी नालों और जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

    शनिवार को मध्य प्रदेश के करीब 45 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। इनमें शिवपुरी गुना अशोकनगर दतिया रीवा सीधी सिंगरौली सतना जबलपुर कटनी नरसिंहपुर छिंदवाड़ा सिवनी मंडला बालाघाट डिंडौरी भोपाल राजगढ़ सीहोर विदिशा रायसेन शहडोल उज्जैन देवास रतलाम इंदौर धार झाबुआ बड़वानी खंडवा नर्मदापुरम बैतूल हरदा समेत कई जिले शामिल रहे।

    बारिश के आंकड़ों में विदिशा के लटेरी में सबसे ज्यादा 4.2 इंच बारिश दर्ज की गई। गुना के कुंभराज में चार इंच जबकि आगर मालवा के नलखेड़ा में 92 मिलीमीटर यानी करीब 3.7 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। आगर के बड़ौद में 2.9 इंच और गुना के राघौगढ़ में 2.8 इंच बारिश हुई।

    मानसून सीजन की बात करें तो प्रदेश के कई जिलों में बारिश सामान्य से कम भी रही है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में कमी दर्ज की गई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में सुधार हुआ है और कई क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात भी बने हैं। अब नए मौसम सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना के बीच सितंबर के आखिरी दिनों में प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।