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  • वेस्टइंडीज का भारत दौरा: शाई होप संभालेंगे कमान, टी20 में नए चेहरे तो वनडे टीम में इन खिलाड़ियों की वापसी

    वेस्टइंडीज का भारत दौरा: शाई होप संभालेंगे कमान, टी20 में नए चेहरे तो वनडे टीम में इन खिलाड़ियों की वापसी

    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज ने भारत के खिलाफ इस महीने से होने वाली सीमित ओवरों की सीरीज के लिए शनिवार को टीम का एलान कर दिया है। क्रिकेट वेस्टइंडीज ने वनडे और टी20 दोनों टीमों का एलान कर दिया है। इन दोनों टीमों की कप्तानी शाई होप करेंगे। भारत ने भी इस सीरीज के लिए टीम घोषित कर दी थी। दोनों टीमों के बीच सीमित ओवरों की सीरीज 27 सितंबर से शुरू होगी।

    सीरीज का कार्यक्रम

    भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ 27 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैच की वनडे सीरीज की शुरुआत तिरुवनंतपुरम से करेगी। इसके बाद दूसरा मुकाबला 30 सितंबर को गुवाहाटी और तीसरा मैच तीन अक्तूबर को मुल्लांपुर में खेला जाएगा। इसके बाद टी20 सीरीज खेली जाएगी।

    कैंपबेल की वापसी

    हैमस्ट्रिंग चोट के कारण न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी दो वनडे मैच नहीं खेल पाने के बाद जॉन कैंपबेल टीम में लौट आए हैं। अगस्त में सर्जरी के बाद रिहैबिलिटेशन से गुजर रहे अकीम ऑगस्टे इस दौरे से बाहर हो गए हैं और उनकी जगह ज्वेल एंड्रयू को शामिल किया गया है, जो टॉप और मिडिल-ऑर्डर में बल्लेबाजी का विकल्प देंगे।

    टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में प्रतिभाशाली सलामी बल्लेबाज कामिल पूरन को पहली बार टीम में शामिल किया गया है। यह 2028 टी20 विश्व कप से पहले उभरती प्रतिभाओं को पहचानने और विकसित करने की दिशा में अपनाए गए दृष्टिकोण का हिस्सा है। दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने आठ पारियों में 159.64 के प्रभावशाली स्ट्राइक रेट से 273 रन बनाए, जबकि उनका औसत 39 रहा।

    वेस्टइंडीज की वनडे टीम में शाई होप कप्तान होंगे। उनके अलावा ज्वेल एंड्रयू, जॉन कैंपबेल, केसी कार्टी, रोस्टन चेज, मैथ्यू फोर्ड, जस्टिन ग्रीव्स, आमिर जंगू, अल्जारी जोसेफ, शमार जोसेफ, विटेल लावेस, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल, शेरफाने रदरफोर्ड और जेडन सील्स को जगह मिली है।

    वहीं, टी20 टीम की कप्तानी भी शाई होप करेंगे। टीम में ज्वेल एंड्रयू, रोस्टन चेज, मैथ्यू फोर्ड, शिमरॉन हेत्मायर, अकील हुसैन, शमारा जोसेफ, गुडाकेश मोती, कीमो पॉल, कामिल पूरन, रोवमैन पॉवेल, शेरफाने रदरफोर्ड, क्वेंटिन सैम्पसन, रोमारियो शेफर्ड और शमार स्प्रिंगर शामिल हैं।

    वनडे और टी20 टीमों में कई खिलाड़ी समान हैं, लेकिन दोनों प्रारूपों की जरूरत के अनुसार कुछ बदलाव किए गए हैं। वनडे टीम में जॉन कैंपबेल और जस्टिन ग्रीव्स जैसे खिलाड़ी शामिल हैं, जबकि टी20 टीम में शिमरॉन हेत्मायर, अकील हुसैन, कामिल पूरन, रोवमैन पॉवेल, क्वेंटिन सैम्पसन और रोमारियो शेफर्ड जैसे नाम नजर आते हैं।

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच सीमित ओवरों की सीरीज 27 सितंबर से शुरू होगी। वनडे मुकाबलों के बाद दोनों टीमें टी20 सीरीज में आमने-सामने होंगी। इस दौरे में शाई होप के नेतृत्व में वेस्टइंडीज की टीम के सामने भारतीय परिस्थितियों में दोनों प्रारूपों में अच्छा प्रदर्शन करने की चुनौती होगी।

  • महेश भट्ट का संघर्ष: मां को सहारा देने के लिए कलम उठाई, फिर सिनेमा को बनाया अपनी पहचान

    महेश भट्ट का संघर्ष: मां को सहारा देने के लिए कलम उठाई, फिर सिनेमा को बनाया अपनी पहचान

    नई दिल्ली । 20 वर्ष का एक लड़का मां को आर्थिक सहारा देने के लिए रोजगार की तलाश में निकला। कलम चलाने की प्रतिभा थी और उसी की राह पकड़ी। विज्ञापन लिखने शुरू किए। मगर, उस लड़के की जिंदगी में तमाम अनुभव थे। इमोशंस थे। उन भावनाओं को व्यक्त कर पाने का हुनर था। इसके लिए उसने सिनेमा को माध्यम बनाया। कुछ अपने निजी अनुभवों पर तो कुछ समाज के अनुभवों पर ऐसा सिनेमा रचा, जो दर्शकों के दिलों को छूने लगा। आज दुनिया उस लड़के को नामी निर्देशक महेश भट्ट के रूप में जानती है, जिनका आज जन्मदिन है।

    मां की मदद के लिए साधी थी कलम

    महेश भट्ट इंडस्ट्री के चर्चित निर्देशक, निर्माता और स्क्रीनराइटर हैं। उनका जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम नानाभाई भट्ट और मां का नाम शिरीन मोहम्मद अली है। महेश भट्ट ने अपनी स्कूली पढ़ाई डॉन बॉस्को हाई स्कूल, माटुंगा से की है। महेश शुरू से ही प्रतिभा के धनी हैं, वे ना सिर्फ एक होनहार छात्र थे, बल्कि अपनी मां के कामों में भी इन्होंने शुरू से मदद की। बहुत ही कम उम्र में वे पैसे भी कमाने लगे थे। उन्होंने स्कूल के दिनों में ही नौकरी शुरू की। वहीं, महेश भट्ट ने 20 साल की उम्र में विज्ञापनों के लिए लिखना शुरू कर दिया था। उनके मुताबिक, परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देने के लिए उन्होंने यह शुरुआत की।

    26 की उम्र में बतौर निर्देशक शुरुआत

    अपने संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए महेश भट्ट ने फिल्मी उद्योग में कदम रखा। महेश ने स्मिता पाटिल और विनोद खन्ना के सेक्रेटरी के रूप में काम किया। निर्देशन की बात करें तो महेश भट्ट ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1970 में आई डॉक्यूमेंट्री ‘संकट’ के निर्देशन से की थी। मगर, सिनेमा की दुनिया में बतौर निर्देशक महेश भट्ट ने फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। तब उनकी उम्र महज 26 साल थी।

    ‘कब्जा’ से निर्माता की कुर्सी पर बैठे

    पांच दशक से अधिक के करियर में महेश भट्ट ने कई चर्चित और हिट फिल्मों का निर्देशन किया है। कई प्रोड्यूस की हैं। वहीं, 100 से ज्यादा फिल्मों की कहानी को बतौर स्क्रिप्ट राइटर उन्होंने आकार दिया है। निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद उन्होंने 1987 में अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ विशेष फिल्म्स के बैनर तले फिल्म ‘कब्जा’ के साथ निर्माता की भूमिका निभाई। अपने अब तक के फिल्मी करियर में महेश भट्ट ने ‘अर्थ’, ‘आशिकी’, ‘सारांश’ जैसी एक से बढ़कर एक फिल्में बनाई हैं।

    महेश की फिल्म ‘सारांश’ को 14वें मॉस्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में दिखाया गया था। यह उस साल के सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार के लिए भारत की ओर से थी। 1986 की फिल्म ‘नाम’ उनकी पहली व्यावसायिक सिनेमाई फिल्म थी। वे ‘लहू के दो रंग’, ‘अभिमन्यु’, ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘आशिकी’, ‘डैडी’, ‘दिल है के मानता नहीं’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी 80 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन और प्रोडक्शन कर चुके हैं।

    छोटे पर्दे पर भी दिखाया दमखम

    फिल्मों के अलावा महेश भट्ट ने छोटे पर्दे पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने ‘स्वाभिमान’, ‘कभी कभी’ और ‘नामकरण’ जैसे कई चर्चित टीवी सीरियल्स का भी निर्देशन किया है।

    महेश भट्ट को उनकी फिल्मों के लिए काफी पुरस्कार दिए गए। सबसे पहले उन्हें 1984 में फिल्म ‘अर्थ’ के लिए फिल्मफेयर बेस्ट स्क्रीन प्ले अवार्ड दिया गया। इसके बाद 1985 में फिल्म ‘सारांश’ को बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया। 1994 में ‘हम हैं राही प्यार के’ के लिए महेश को नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया। 1999 में उनकी फिल्म ‘जख्म’ को फिल्मफेयर बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया।

    फिल्मों में दिखा निजी जिंदगी का प्रतिबिंब

    महेश भट्ट ऐसे निर्देशक हैं, जिनके विचार कई बार लोगों को चौंकाते हैं। उनकी निजी विचारधारा की तरह उनकी फिल्मों के विषय और फिल्में दर्शकों को चौंकाती रही हैं। कभी विवाद हुए तो कभी आलोचना। उतार-चढ़ावों के बीच तारीफें भी खूब मिलीं। उन्होंने 70-80 के दशक में समाज के ऐसे विषयों पर फिल्में बनाने का साहस किया, जिन पर लोग बातें भी दबी जुबान से करते हों। आलोचनाओं से बेफिक्र रहते हुए उन्होंने बोल्ड विषयों को चुना। वे अपनी फिल्मों में नए प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं।

    बेहद खुले विचारों वाले महेश भट्ट ने समाज की बंदिशों को तोड़ समाज की सोच बदलने वाली फिल्में बनाईं। उन्होंने ‘जहर’, ‘मर्डर 2’, ‘जिस्म 2’ जैसी फिल्में बनाकर अपना नाम बॉलीवुड के बोल्ड विषयों पर फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर में शामिल कर लिया। महेश भट्ट ने कई फिल्मों में अपनी निजी जिंदगी को परदे पर भी उतारा है।

    पूजा भट्ट को लेकर विवादित बयान पर हुआ था हंगामा

    विवादों से भी महेश भट्ट का नाता रहा है। महेश अपनी बेटी पूजा भट्ट को लेकर भी विवादों में रहे। पूजा भट्ट के साथ एक फोटोशूट को लेकर काफी आलोचना हुई थी। एक इंटरव्यू में महेश भट्ट ने अपनी बेटी को लेकर विवादित बयान भी दिया था। बहरहाल महेश भट्ट कितने भी विवादों में रहे हों लेकिन वो उसे गंभीरता से नहीं लेते। आज भी वो हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से राय रखते हैं।

    महेश भट्ट की निजी जिंदगी और शादी

    महेश भट्ट की निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी पहली शादी किरण भट्ट (लोरिएन ब्राइट) से हुई। किरण से महेश कॉलेज के दिनों में मिले और प्यार हो गया। महेश भट्ट और किरण भट्ट के दो बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं। हालांकि, किरण भट्ट के साथ महेश भट्ट का रिश्ता टूट गया। इसके बाद उन्होंने सोनी राजदान से शादी रचाई। सोनी राजदान के साथ महेश भट्ट की दो बेटियां आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट हैं।

    महेश भट्ट का वर्क फ्रंट

    महेश भट्ट के वर्क फ्रंट की बात करें तो वे फिल्म ‘नाम-टू लिव इज वॉर’ को लेकर चर्चा में हैं। इसमें वीर पहाड़िया अहम भूमिका में नजर आएंगे। महेश भट्ट इस फिल्म को पेश कर रहे हैं। वहीं, निर्देशन की कमान सिद्धांत सचदेव के कंधों पर है।

  • Royal Enfield को टक्कर देने वाली Triumph की दो बाइक्स सस्ती, कंपनी ने घटाई कीमतें जानिए नया प्राइस और फीचर्स

    Royal Enfield को टक्कर देने वाली Triumph की दो बाइक्स सस्ती, कंपनी ने घटाई कीमतें जानिए नया प्राइस और फीचर्स


    नई दिल्ली। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ऑटोमोबाइल बाजार में कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर रही हैं। इसी बीच प्रीमियम मोटरसाइकिल निर्माता Triumph ने अपनी 400 सीसी रेंज में शामिल दो बाइक्स की कीमतों में कटौती की है। कंपनी ने Speed 400 और Tracker 400 के दाम कम किए हैं। खास बात यह है कि इन दोनों मोटरसाइकिलों की कीमतों में करीब दो महीने पहले ही बढ़ोतरी की गई थी। अब कंपनी ने एक बार फिर कीमतों में बदलाव करते हुए ग्राहकों को राहत दी है।

    Triumph की ओर से इस साल जून के बाद कीमतों में यह तीसरा बदलाव बताया जा रहा है। अप्रैल में कंपनी ने अपनी 350 सीसी रेंज को भारतीय बाजार में पेश किया था। उस समय Speed 400 की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत 2.32 लाख रुपये थी जबकि Tracker 400 को 2.46 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ उतारा गया था। इसके बाद जुलाई में दोनों बाइक्स के दाम बढ़ाए गए थे। अब कंपनी ने बढ़ी हुई कीमतों में कटौती कर दी है।

    कीमतों में हुए नए बदलाव के बाद Triumph Speed 400 अब 2.34 लाख रुपये एक्स शोरूम कीमत में उपलब्ध होगी। इससे पहले इसकी कीमत 2.40 लाख रुपये थी। यानी कंपनी ने इस बाइक की कीमत में 6000 रुपये की कमी की है। दूसरी ओर Tracker 400 की कीमत अब 2.42 लाख रुपये हो गई है। इसकी पिछली कीमत 2.49 लाख रुपये थी। इस तरह Tracker 400 भी 7000 रुपये सस्ती हुई है। कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब त्योहारी सीजन में दोपहिया वाहनों की खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है।

    कंपनी की 400 सीसी रेंज में केवल Speed 400 और Tracker 400 की कीमत में कटौती की गई है। Speed T4 की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 2.09 लाख रुपये एक्स शोरूम की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है। इसी तरह Scrambler 400 X की कीमत 2.65 लाख रुपये और 400 X C की कीमत 2.99 लाख रुपये बनी हुई है। Thruxton 400 की कीमत भी पहले की तरह 2.75 लाख रुपये एक्स शोरूम है।

    Triumph ने Scrambler 400 X के ग्राहकों के लिए हालांकि एक नया बदलाव किया है। कंपनी ने इस बाइक को दो नए कलर ऑप्शन के साथ पेश किया है। इसमें Matte Pewter Grey और Matte Khaki Green जैसे नए रंग शामिल किए गए हैं। हालांकि इसके इंजन और फीचर्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। बाइक की कीमत भी पहले जैसी ही रखी गई है।

    Triumph की 400 सीसी रेंज में Speed T4 सबसे किफायती मॉडल है जबकि 400 X C सबसे महंगी बाइक है। Speed 400 और Tracker 400 की कीमत में हुई कमी ऐसे ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो प्रीमियम बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं। त्योहारी सीजन में कंपनियों के ऑफर और कीमतों में बदलाव के बीच आने वाले समय में इस सेगमेंट में मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है।

  • मुख्य द्वार की दिशा बदल सकती है घर का माहौल! वास्तु में इन दिशाओं को माना गया है नकारात्मक

    मुख्य द्वार की दिशा बदल सकती है घर का माहौल! वास्तु में इन दिशाओं को माना गया है नकारात्मक


    नई दिल्ली। घर का मुख्य द्वार सिर्फ घर में आने जाने का रास्ता नहीं माना जाता बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे घर की ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान बताया गया है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार की दिशा का असर घर के वातावरण और वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। इसी वजह से घर बनाते समय मुख्य द्वार की दिशा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हाल ही में सामने आई वास्तु संबंधी जानकारी में कुछ दिशाओं को मुख्य द्वार के लिए नकारात्मक बताया गया है। हालांकि ये बातें वास्तु शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार साउथ वेस्ट यानी दक्षिण पश्चिम दिशा में बना मुख्य द्वार सबसे अधिक नकारात्मक माना जाता है। इस दिशा को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां मुख्य द्वार होने से घर में रहने वाले लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में इसे आर्थिक समस्याओं और दुर्घटनाओं से भी जोड़ा गया है। वास्तु के अनुसार दक्षिण पश्चिम दिशा में बने मुख्य द्वार को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    दक्षिण पूर्व यानी साउथ ईस्ट दिशा को भी मुख्य द्वार के लिए नकारात्मक दिशाओं में शामिल किया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में मुख्य द्वार होने पर घर में आर्थिक परेशानियां और अचानक आने वाली समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे पहले भी वास्तु से जुड़ी रिपोर्टों में दक्षिण पूर्व दिशा के मुख्य द्वार को घर में सामान के खोने या चोरी जैसी घटनाओं से जोड़ा गया है। साथ ही पैसों की आवक प्रभावित होने की बात भी कही गई है।

    उत्तर पूर्व यानी नॉर्थ ईस्ट दिशा को लेकर भी कुछ विशेष मान्यताएं बताई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस दिशा में मुख्य द्वार होने पर आर्थिक परेशानी के साथ अग्नि से जुड़ी समस्याओं की आशंका बताई जाती है। वास्तु के अनुसार व्यक्ति के गलत फैसलों के कारण धन का नुकसान होने की बात भी कही गई है। वहीं उत्तर पश्चिम यानी नॉर्थ वेस्ट दिशा के मुख्य द्वार को लेकर मान्यता है कि इससे व्यक्ति के विरोधियों की संख्या बढ़ सकती है और सहयोग करने वाले लोगों की संख्या कम हो सकती है।

    वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को लेकर दिशा के साथ उसकी स्थिति और आसपास के वातावरण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए घर बनवाते समय केवल दरवाजे की खूबसूरती या सुविधा पर ध्यान देने के बजाय वास्तु मान्यताओं के अनुसार उसकी दिशा पर भी विचार करने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी भी घर में आर्थिक नुकसान या दुर्घटना जैसी वास्तविक समस्याओं का कारण केवल मुख्य द्वार की दिशा को मानना उचित नहीं है। ऐसी घटनाओं के पीछे कई व्यावहारिक और वास्तविक कारण हो सकते हैं।

    कुल मिलाकर मुख्य द्वार को लेकर वास्तु में अलग अलग दिशाओं के अलग प्रभाव बताए गए हैं। इनमें दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व दिशा को विशेष रूप से नकारात्मक माना गया है। वहीं इन दावों को वास्तु संबंधी मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए न कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर।

  • टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर विवाद… कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा ट्रस्ट

    टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर विवाद… कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा ट्रस्ट


    नई दिल्ली।
    टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (टीईडीटी) (Tata Education and Development Trust – TEDT) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) ने साफ कर दिया है कि ट्रस्ट टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच एन चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) की दोबारा नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद से जुड़े किसी भी कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा। टीईडीटी के कोष का अनुमान करीब 5,000 करोड़ रुपये बताया गया है। मेहली ने टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को ईमेल भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसकी प्रति टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा और टीईडीटी के दूसरे ट्रस्टी जेएन मिस्त्री को भी भेजी गई है।

    मेहली ने कहा कि ट्रस्टी, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहा मुकदमा पिछले 150 वर्षों में अभूतपूर्व है। उन्होंने विवाद में शामिल लोगों के अनुभव या रवैये पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए टीईडीटी के रुख को स्पष्ट किया। उनका कहना है कि टीईडीटी टाटा संस का शेयरधारक नहीं है और इसलिए इन विवादों से अलग है।


    क्या अभी टीईडीटी का पैसा इस विवाद में खर्च हो रहा है?

    मेहली मिस्त्री के ईमेल में यह नहीं कहा गया है कि टीईडीटी का पैसा फिलहाल इस विवाद से जुड़े कानूनी खर्च में इस्तेमाल किया जा रहा है। ईमेल में ऐसा भी नहीं कहा गया है कि इस तरह के खर्च का कोई प्रस्ताव सामने आया है। उनकी आपत्ति इस आशंका पर आधारित है कि टीईडीटी से भविष्य में ऐसे कानूनी खर्च उठाने को कहा जा सकता है। मेहली ने मांग की है कि उनका ईमेल 20 नवंबर 2026 को होने वाली टीईडीटी बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की अगली बैठक में रखा जाए और रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।


    चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?

    चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इसके बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) ने उनके फैसले का सम्मान करते हुए नए चेयरमैन के चयन के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। लेकिन 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड ने 4:1 के मतदान से चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी। नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।


    टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी इस विवाद में क्यों अहम?

    विवाद में टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी भी अहम है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी इक्विटी शेयर पूंजी है। दो प्रमुख ट्रस्टों में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास 27.98 फीसदी और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास 23.56 फीसदी हिस्सेदारी है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 51.54 फीसदी है। बाकी हिस्सेदारी अन्य संबद्ध टाटा ट्रस्ट्स के पास है। टीईडीटी, सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ा एक संबद्ध ट्रस्ट है, लेकिन मेहली ने स्पष्ट किया है कि टीईडीटी खुद टाटा संस का शेयरधारक नहीं है।


    क्या टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर भी अलग विवाद है?

    चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के मुद्दे के साथ टाटा संस के भविष्य के स्वामित्व को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर को कहा था कि उसने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है। ट्रस्ट्स ने कहा कि लिस्टिंग के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए और फैसला लेने से पहले सभी उपलब्ध विकल्पों की जांच और समीक्षा होनी चाहिए। ट्रस्ट्स ने टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनाए रखने की अपनी स्थिति दोहराई और उसकी धर्मार्थ बहुमत हिस्सेदारी की भूमिका का भी उल्लेख किया।

  • पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी…. समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर होगा BJP-अकाली दल का गठबंधन

    पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी…. समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर होगा BJP-अकाली दल का गठबंधन


    चंडीगढ़।
    केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में पंजाब विधानसभा चुनावों (Punjab Assembly elections) के लिए भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन होता है तो वह केवल समान सीटों के बंटवारे की शर्त पर ही होगा। अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा अब राज्य में छोटे भाई या जूनियर पार्टनर की भूमिका नहीं निभाएगी।

    हरदीप पुरी ने साफ किया कि पिछला 22-23 सीटों वाला पुराना फॉर्मूला अब नहीं चलेगा। पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से पहले भाजपा केवल 22-23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी और बाकी सीटों पर अकाली दल उम्मीदवार उतारता था।

    आपको बता दें कि अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बीच हुई मुलाकात के बाद दोनों पुराने सहयोगियों के फिर से साथ आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने 2020 में एनडीए का साथ छोड़ दिया था।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में नशे के प्रकोप को जड़ से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर युद्ध स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के शासन में पंजाब के हालात खराब हो चुके हैं। राज्य की जनता और यहां तक कि पुलिस बल भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

  • बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज

    बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज


    कोलकाता।
    ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हुए साल्बोनी जमीन घोटाले (Salboni land scam) में अब अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) और तृणमूल यूथ कांग्रेस का नाम भी शामिल हो गया है। इस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर रही सीआईडी ने कोर्ट को बताया था कि जमीन घोटाले से मिली रकम तृणमूल के खातों में जमा की गई थी। एजेंसी का दावा है कि डायमंड हार्बर से सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कहने पर ही ये पैसे टीएमसी के खाते में डाले गए। सीआईडी का दावा है कि अभिषेक के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय ने पूछताछ के दौरान यह जानकारी दी है।

    आपको बता दें कि इस मामले में सुमित को तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा और कई अन्य लोगों के साथ पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सुमित को शनिवार को मिदनापुर कोर्ट में पेश किया गया।


    बेच दी गई सरकारी जमीन

    सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी की ओर से कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों से पता चला कि पूछताछ के दौरान सुमित ने बताया कि अभिषेक के कहने पर सांसद के ट्रेजरर टी. घोष नाम के एक व्यक्ति ने उसे तृणमूल कांग्रेस पार्टी फंड में जमा करने के लिए पैसे दिए थे। सुमित ने दावा किया कि उसने वह पैसा बैंक में जमा कर दिया था। उसने कहा कि उसे जमीन घोटाले से कोई पैसा नहीं मिला। आपको बता दें कि इस मामले में फर्जी कागजात का इस्तेमाल करके सरकारी जमीन बेची गई थी।

    इस महीने की शुरुआत में, तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा के खिलाफ दायर चार्जशीट में CID ने एक पब्लिक सेक्टर बैंक अकाउंट नंबर का जिक्र किया और कोर्ट को बताया कि सुमित ने 2018 और 2021 के बीच उस खाते में किश्तों में लगभग 7 करोड़ जमा किए थे। CID ने चार्जशीट के साथ इससे जुड़े जरूरी दस्तावेज भी कोर्ट में जमा किए। जांच में पता चला कि कोलकाता की हरीश मुखर्जी रोड ब्रांच में मौजूद वह खाता पश्चिम बंगाल तृणमूल यूथ कांग्रेस के नाम पर रजिस्टर्ड था। सुमित ने उस खाते में इतनी बड़ी रकम क्यों जमा की? शनिवार को कोर्ट में इस बारे में पूछे जाने पर सुमित ने दावा किया कि उसने सांसद अभिषेक बनर्जी के कहने पर पार्टी फंड में पैसे जमा किए थे।


    अभिषेक बनर्जी से भी हो सकती है पूछताछ

    CID अधिकारियों का दावा है कि साल्बोनी में जमीन का फ्रॉड 2018 और 2021 के बीच हुआ था। चार्जशीट में CID ने अभिषेक के बॉडीगार्ड और सुजय के ड्राइवर के बयानों के आधार पर कहा है कि इन गवाहों ने सुजय और सुमित के बीच पैसों के लेन-देन को देखा था। CID का कहना है कि सुमित का अपना कोई ऑफिस नहीं है। वह अभिषेक बनर्जी के दफ्तर में ही रहता था। सुमित ने अपने बयान में सात करोड़ रुपये के लेन-देन के लिए अभिषेक बनर्जी को ही जिम्मेदार ठहराया है। CID अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर उसका बयान सही साबित होता है तो पैसे के स्रोत का पता लगाने के लिए अभिषेक बनर्जी से भी इस मामले में पूछताछ की जा सकती है।

  • अफगानिस्तान का 3-0 से सफाया अब अगली चुनौती तैयार, टीम इंडिया के सामने 3 महीने में 28 मैच और कई बड़े क्रिकेट मिशन

    अफगानिस्तान का 3-0 से सफाया अब अगली चुनौती तैयार, टीम इंडिया के सामने 3 महीने में 28 मैच और कई बड़े क्रिकेट मिशन


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया के 2026 के क्रिकेट अभियान पर विराम नहीं लगने वाला है। साल के बचे हुए करीब तीन महीने भारतीय टीम के लिए बेहद व्यस्त रहने वाले हैं। इस दौरान टीम इंडिया को जापान से लेकर एशियन गेम्स और फिर वेस्टइंडीज न्यूजीलैंड तथा श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं। हालिया कार्यक्रम के मुताबिक भारतीय टीम के सामने अलग अलग फॉर्मेट में कई बड़ी सीरीज हैं। जापान के खिलाफ 22 सितंबर को होने वाला मुकाबला भी खास है क्योंकि यह दोनों टीमों के बीच पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली भिड़ंत होगी।

    अफगानिस्तान के खिलाफ भारत ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया है। इसके बाद भारतीय टीम का अगला पड़ाव जापान होगा। 22 सितंबर को सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाला मुकाबला भारतीय क्रिकेट के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों का ध्यान एशियन गेम्स पर रहेगा जहां पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत को सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश मिला है। भारत का पहला मुकाबला 28 सितंबर को खेला जाना है।

    एशियन गेम्स के बीच भारतीय टीम का घरेलू क्रिकेट कार्यक्रम भी जारी रहेगा। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज 27 सितंबर से शुरू होगी। पहला मुकाबला तिरुवनंतपुरम में खेला जाएगा। इसके बाद 30 सितंबर को गुवाहाटी और 3 अक्टूबर को न्यू चंडीगढ़ में वनडे मुकाबला होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच पांच टी20 मैच खेले जाएंगे। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को लखनऊ में होगा जबकि आखिरी मैच 17 अक्टूबर को बेंगलुरु में खेला जाना है। भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी टीम में शामिल किया है जबकि शुभमन गिल को कप्तानी सौंपी गई है।

    वेस्टइंडीज सीरीज के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे पर जाएगी। वहां पांच टी20 मैचों के बाद पांच वनडे मुकाबले और फिर दो टेस्ट मैच प्रस्तावित हैं। टी20 सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू होकर 1 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद नवंबर में वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। दो टेस्ट मैचों की सीरीज नवंबर के दूसरे हिस्से से दिसंबर की शुरुआत तक चलेगी। टेस्ट क्रिकेट का यह चरण भारत के लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहेगा।

    साल के अंतिम चरण में श्रीलंका के खिलाफ भी भारत का कार्यक्रम है। दिसंबर में तीन वनडे और तीन टी20 मैच खेले जाने हैं। इस तरह अफगानिस्तान सीरीज के बाद भारतीय टीम के सामने लगातार क्रिकेट का लंबा दौर रहेगा। जापान के खिलाफ मुकाबले से शुरू होने वाला यह सफर एशियन गेम्स वेस्टइंडीज न्यूजीलैंड और श्रीलंका तक पहुंचेगा। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार इन मुकाबलों को जोड़ें तो भारत के सामने करीब 28 अंतरराष्ट्रीय मैचों का लंबा कार्यक्रम है। ऐसे में 2026 का आखिरी हिस्सा भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए लगातार बड़े मुकाबलों से भरा रहने वाला है।

  • ईरान में महिलाओं का साहसिक कदम…. बिना हिजाब पहने 10 किमी दौड़ में लिया हिस्सा

    ईरान में महिलाओं का साहसिक कदम…. बिना हिजाब पहने 10 किमी दौड़ में लिया हिस्सा


    तेहरान।
    ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान में महिलाओं के एक समूह ने देश के अनिवार्य हिजाब कानून का खुलेआम उल्लंघन करते हुए बिना हिजाब (Without Hijab) पहने 10 किलोमीटर की दौड़ (10 Kilometer Race) प्रतियोगिता में भाग लिया। यह साहसिक कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरानी अधिकारी पहले भी इसी तरह बिना हिजाब के दौड़ के आयोजन पर सख्त कार्रवाई कर चुके थे। यह प्रतियोगिता वेलायात पार्क में आयोजित की गई थी, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग दौड़ की व्यवस्था थी।


    10 किमी की दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया

    सोशल मीडिया पर बिना हिजाब के दौड़ती महिलाओं के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इस घटना ने ईरान के सख्त हिजाब कानून की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है।


    युद्ध के बीच ईरान का शक्ति प्रदर्शन 3,13,000 लोगों ने दिखाई ताकत

    तेहरान। ईरान में शुक्रवार को सरकार के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान में 3.13 लाख लोगों ने मार्च में हिस्सा लिया, जबकि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर जनरल हसन हसांजादेह ने दावा किया कि छह लाख से अधिक लोग सीमित सैन्य प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण करा चुके हैं और प्रशिक्षण में 10 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। तेहरान में प्रदर्शनकारियों ने ईरानी झंडे लेकर मार्च किया और देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने की तैयारी जताई। सरकार ने इस अभियान को ‘जांफदाये ईरान’ यानी ‘ईरान के लिए जान कुर्बान करने वाले’ नाम दिया है। राज्य मीडिया कई दिनों से लोगों से इसमें शामिल होने की अपील कर रहा था।

  • हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर किया बैलिस्टिक मिसाइल से हमला, राजधानी रियाद को बनाया निशाना

    हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर किया बैलिस्टिक मिसाइल से हमला, राजधानी रियाद को बनाया निशाना


    रियाद।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने पुष्टि की है कि यमन के हूती विद्रोहियों (Yemen’s Houthi rebels) ने उसकी राजधानी रियाद (Riyadh) को बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile attack) से निशाना बनाने की कोशिश की। शनिवार देर रात सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह जानकारी दी। गठबंधन यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी समर्थित बलों का नेतृत्व करता है। उसके मुताबिक, मिसाइल को हमले के प्रयास के दौरान ही रोक लिया गया था। यह रियाद को निशाना बनाकर किया गया पहला हमला था, जब से ईरान समर्थित हूतियों और सऊदी समर्थन वाले यमनी सरकारी बलों के बीच लड़ाई तेज हुई है।


    हूतियों ने सऊदी अरब में और किन जगहों को निशाना बनाने की कोशिश की?

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि हूतियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू के अलावा ताइफ, बायश और फरासन में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की भी कोशिश की। गठबंधन के मुताबिक इन प्रयासों को भी नाकाम कर दिया गया। हालांकि, बयान में इन हमलों के बारे में इससे ज्यादा जानकारी नहीं दी गई।


    हूतियों ने हमले को लेकर क्या दावा किया?

    हूतियों ने इससे पहले दावा किया था कि उन्होंने रियाद में कुछ ‘संवेदनशील ठिकानों’ और यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको को निशाना बनाया। हूतियों ने दावा किया कि इन हमलों के कारण ‘भारी आग’ लगी। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको ने टिप्पणी के लिए भेजे गए अनुरोध का जवाब नहीं दिया।


    तुर्की ने सऊदी अरब को सैन्य मदद देने का संकेत दिया

    इस बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने संकेत दिया है कि हाल ही में हुए रक्षा समझौते के तहत तुर्की सऊदी अरब को सैन्य मदद दे सकता है। एक टीवी इंटरव्यू में जब उनसे तीन देशों के उस गठबंधन (जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है) के यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की संभावना के बारे में पूछा गया, तो फिदान ने कहा कि तुर्की को किसी भी सैन्य ज़रूरत को पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘हम सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर बहुत गंभीर हमले देख रहे हैं। हमारे बीच गठबंधन का समझौता है और हम अपनी बात पर कायम हैं।

    इससे पहले भी सऊदी के तेल ढांचे पर हुआ था हमला
    रियाद पर ताजा मिसाइल हमले की कोशिश से पहले सऊदी अरब के अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला हुआ था। 11 सितंबर को हुए इस हमले के बाद पाइपलाइन का संचालन रोकना पड़ा, जिससे सऊदी के लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल निर्यात प्रभावित हुआ। इसी के चलते सऊदी अरामको ने यूरोप के कम से कम दो रिफाइनिंग ग्राहकों को अक्तूबर में दी जाने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति नहीं करने की जानकारी दी है। सऊदी और इराकी अधिकारियों ने कहा है कि ड्रोन इराक से आए थे, लेकिन हमले के पीछे वास्तव में कौन था, इसकी स्पष्ट जिम्मेदारी अभी सामने नहीं आई है।