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  • उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन में चल रहे विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने नीलगंगा रोड क्षेत्र में पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को देखते हुए शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर आवागमन को सुगम बनाना और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान इन कार्यों की प्रगति और उनकी गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को देखा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन शहर के मध्य स्थित बाबा महाकाल के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण शहर के विकास और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस मार्ग के चौड़ीकरण से स्थानीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ आने वाले समय में श्रद्धालुओं के आवागमन को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में प्रमुख मार्गों का विकास और उनका बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। चौड़े और व्यवस्थित मार्ग श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाने में मदद करेंगे और उज्जैन आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने में भी भूमिका निभाएंगे।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों से संबंधित अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि काम केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए लगातार निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण और अन्य अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाने की दिशा में कई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इनका उद्देश्य आयोजन के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना है।

    मुख्यमंत्री ने मार्ग चौड़ीकरण के लिए प्रशासन के साथ स्वेच्छा से सहयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने सहयोग करने वाले लोगों का हृदय से अभिनंदन करते हुए कहा कि विकास कार्यों में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। शहर के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में नागरिक सहयोग की भूमिका को उन्होंने सराहा।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित नजर रखने और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार काम पूरा कराने पर जोर दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण कार्यों के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

    सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन में अधोसंरचना विकास पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सड़क, मार्ग चौड़ीकरण और अन्य सुविधाओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण का उद्देश्य भी चल रहे कार्यों की स्थिति जानना और उन्हें तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ाना रहा।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों के सामने निर्माण कार्यों को समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है। उज्जैन में जारी विकास कार्यों से आने वाले समय में शहर की यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    मध्यप्रदेश: में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे शिक्षा, तकनीक, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को केवल शिक्षा प्राप्त करने तक सीमित अवसर नहीं मिलेंगे, बल्कि उन्हें रोजगार और कौशल विकास से जुड़े नए विकल्प भी उपलब्ध होंगे। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ युवाओं को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जा रहा है। IT क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों का उद्देश्य रोजगारपरक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और युवाओं को आधुनिक तकनीकी अवसरों से जोड़ना है। इससे शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने इंदौर और भोपाल के विकास को लेकर भी सरकार की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों शहरों को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इंदौर और भोपाल को बड़े शहरी और आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने का असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन शहरों में नई तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही प्रदेश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    प्रदेश में तकनीकी और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ IT क्षेत्र को भी महत्व दिया जा रहा है। तकनीकी बुनियादी ढांचे और रोजगारपरक कौशल को बढ़ाने से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े अवसरों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।

    सरकार का जोर विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति को गति देने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास और प्रगति के लिए सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी क्रम में उद्योग, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए काम कर रही है। साथ ही आगामी सिंहस्थ की तैयारियों को भी गति दी जा रही है और उससे जुड़े आवश्यक विकास कार्यों को तेजी से किए जाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इन पहलों के जरिए सरकार का लक्ष्य युवाओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। IT पार्क, इंजीनियरिंग कैंपस, औद्योगिक गतिविधियों और मेट्रोपॉलिटन शहरों के विकास को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़कर आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

  • सिर्फ 250 रुपये से शुरू करें बच्चे के भविष्य की तैयारी, एनपीएस वात्सल्य में बढ़ी अभिभावकों की दिलचस्पी

    सिर्फ 250 रुपये से शुरू करें बच्चे के भविष्य की तैयारी, एनपीएस वात्सल्य में बढ़ी अभिभावकों की दिलचस्पी

    नई दिल्ली । बच्चों के भविष्य के लिए कम उम्र से निवेश शुरू करने की सोच रखने वाले अभिभावकों के बीच एनपीएस वात्सल्य योजना की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। अगस्त 2026 तक इस योजना से जुड़े खातों की संख्या चार लाख का आंकड़ा पार कर गई है। बढ़ते आंकड़े संकेत देते हैं कि माता-पिता अब बच्चों के लिए शुरुआती उम्र से ही लंबी अवधि का वित्तीय फंड तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं।

    आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक एनपीएस वात्सल्य से जुड़े बच्चों की संख्या करीब 2.15 लाख थी। मार्च 2025 में यह संख्या लगभग 1.07 लाख थी। यानी एक वर्ष के दौरान योजना से जुड़ने वाले खातों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    एनपीएस वात्सल्य के तहत माता-पिता या अभिभावक नाबालिग बच्चे के नाम पर खाता खोल सकते हैं। योजना में निवेश की शुरुआत केवल 250 रुपये से की जा सकती है, जबकि अधिकतम निवेश की कोई निर्धारित सीमा नहीं है। बच्चे के खाते में माता-पिता के अलावा रिश्तेदार और मित्र भी राशि जमा कर सकते हैं।

    इस योजना का उद्देश्य कम उम्र से बच्चों के लिए लंबी अवधि का निवेश कोष तैयार करना और उनमें वित्तीय अनुशासन की आदत विकसित करना है। उम्र बढ़ने के साथ लंबे समय तक निवेश जारी रहने से फंड तैयार करने की संभावना बढ़ती है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो एनपीएस वात्सल्य में 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। इस वर्ग के बच्चे कुल खाताधारकों का करीब 36.9 प्रतिशत हैं। इसके बाद 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 31.6 प्रतिशत है।

    वहीं 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत और 0 से 4 वर्ष के बच्चों की हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत है। इस तरह 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कुल खाताधारकों में लगभग 68.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों की शुरुआती उम्र से ही निवेश शुरू कर रहे हैं।

    एनपीएस वात्सल्य बाजार से जुड़ी निवेश योजना है। इसमें जमा राशि को विभिन्न निवेश साधनों में लगाया जाता है और अलग-अलग पेंशन फंड अपनी निवेश रणनीति के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराते हैं। चुने गए विकल्प के आधार पर इक्विटी में निवेश की हिस्सेदारी काफी अधिक हो सकती है।

    बाजार आधारित निवेश होने के कारण इसमें लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है, लेकिन निवेश का प्रदर्शन बाजार की स्थिति और चुनी गई निवेश रणनीति पर निर्भर करता है। इसलिए इसे निश्चित रिटर्न वाली बचत योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    योजना में कुछ परिस्थितियों में आंशिक निकासी की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के तीन वर्ष पूरे होने के बाद जमा मूल राशि का 25 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है। इसका उपयोग शिक्षा, चिकित्सा उपचार और निर्धारित विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है। इस सीमा में निवेश से मिलने वाला रिटर्न शामिल नहीं होता।

    बच्चे के 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी खाते को निर्धारित नियमों के तहत आगे जारी रखा जा सकता है और इसे 21 वर्ष की आयु तक बनाए रखने का प्रावधान है। इसके बाद खाते को सामान्य एनपीएस खाते में बदलने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    एनपीएस वात्सल्य को अन्य बचत और निवेश विकल्पों के साथ समझना जरूरी है। पीपीएफ अपेक्षाकृत सुरक्षित और सरकार समर्थित बचत विकल्प है, जबकि म्यूचुअल फंड में निवेश और निकासी को लेकर अलग सुविधाएं होती हैं। एनपीएस वात्सल्य का मुख्य जोर लंबी अवधि के निवेश और भविष्य के लिए वित्तीय अनुशासन पर है।

    कम शुरुआती निवेश, लंबी अवधि और बाजार आधारित वृद्धि की संभावना के कारण एनपीएस वात्सल्य बच्चों के लिए वित्तीय योजना बनाने वाले अभिभावकों के बीच एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है। हालांकि निवेश से पहले जोखिम, अवधि, निकासी नियम और उपलब्ध विकल्पों को समझना जरूरी है।

  • रीवा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, ससुराल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर पति पर हत्या का आरोप..

    रीवा में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, ससुराल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर पति पर हत्या का आरोप..

    मध्य प्रदेश के रीवा में एक नवविवाहिता की गंभीर चोटों के चलते उपचार के दौरान मौत हो गई। महिला को गंभीर हालत में संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उसके शरीर पर कई जगह धारदार हथियार से किए गए वार के निशान मिले हैं। मृतका की मां ने अपने दामाद पर बेटी की हत्या करने का आरोप लगाया है।

    मृतका की पहचान काजल साकेत के रूप में हुई है। उसका मायका मझगवां में बताया गया है। परिजनों के अनुसार काजल का विवाह 18 अप्रैल 2025 को मैहर जिले के मिरगौती निवासी राजेंद्र साकेत के साथ हुआ था। शनिवार सुबह करीब 11 बजे काजल को उसके मिरगौती स्थित ससुराल पहुंचाया गया था।

    परिजनों का कहना है कि ससुराल पहुंचने के कुछ ही समय बाद काजल का मोबाइल फोन बंद हो गया। इससे मायके पक्ष को चिंता हुई और उन्हें किसी अनहोनी की आशंका होने लगी। कुछ समय बाद एक अन्य व्यक्ति के माध्यम से परिजनों को जानकारी मिली कि काजल के साथ गंभीर मारपीट हुई है और उसे इलाज के लिए रीवा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    जानकारी मिलने के बाद काजल की मां अनूपा साकेत अस्पताल पहुंचीं। वहां उन्होंने बेटी को गंभीर हालत में देखा। परिजनों के अनुसार काजल के सिर पर गंभीर चोट थी। इसके अलावा नाक, दोनों हाथों, पैरों, कंधे और पेट सहित शरीर के कई हिस्सों पर धारदार हथियार से वार के निशान मिले।

    गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण काजल की हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी। अस्पताल में चिकित्सकीय उपचार के दौरान कुछ ही घंटों बाद उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में भी लोगों की भीड़ जुट गई।

    मृतका की मां ने आरोप लगाया है कि उसके पति राजेंद्र साकेत ने विवाद के बाद धारदार हथियार से काजल पर हमला किया। मायके पक्ष का कहना है कि घटना के बाद ससुराल पक्ष ने उन्हें तत्काल जानकारी नहीं दी और उन्हें दूसरे व्यक्ति के माध्यम से बेटी के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिली।

    घटना की सूचना मिलने के बाद अस्पताल चौकी पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और मर्ग कायम किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवाया गया। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने और घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।

    चूंकि घटना मैहर जिले के मिरगौती क्षेत्र से संबंधित बताई जा रही है, इसलिए मामले की जांच में संबंधित थाना पुलिस के साथ समन्वय किया जा रहा है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस की जांच में मृतका के मायके पक्ष के बयान, चोटों की प्रकृति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल हत्या के आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। मामले में आरोपी पति समेत संबंधित लोगों से पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।

  • प्रयागराज से तिरुचानूर के बीच चलेगी नई स्पेशल ट्रेन, जबलपुर समेत कई शहरों को सीधी कनेक्टिविटी

    प्रयागराज से तिरुचानूर के बीच चलेगी नई स्पेशल ट्रेन, जबलपुर समेत कई शहरों को सीधी कनेक्टिविटी

    मध्य प्रदेश : के मंदसौर जिले में शनिवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में महिला और छह साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए। दुर्घटना दलौदा थाना क्षेत्र के लखमा खेड़ी गांव के पास फोरलेन हाईवे पर हुई, जहां मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी।

    टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। वाहन में सवार मजदूर उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार सभी मजदूर रतलाम जिले के रावटी क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। ये मजदूर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण से जुड़े काम में मजदूरी करने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से उज्जैन लौट रहे थे। इसी दौरान लखमा खेड़ी गांव के पास पीछे से आए ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी।

    दुर्घटना की सूचना मिलते ही दलौदा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव कार्य शुरू किया। ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला गया और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

    हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान बसंती बाई के रूप में हुई है, जबकि मृत बच्ची छह वर्षीय प्रियंका थी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया।

    दुर्घटना में कुल 19 लोग घायल हुए हैं। इनमें छह घायलों की हालत बेहद नाजुक बताई गई है। सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे में घायल लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। एडीएम एकता जायसवाल ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और चिकित्सकों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों के परिजनों को घटना की जानकारी दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ट्रक की रफ्तार, चालक की लापरवाही और टक्कर के कारणों सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर काम पूरा करने के बाद वापस लौट रहे थे। अचानक पीछे से हुई टक्कर के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना देने के साथ राहत कार्य में भी मदद की।

    फिलहाल घायलों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। छह लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उनके इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और दुर्घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है।

  • मंदसौर में मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रक ने मारी टक्कर, महिला और छह साल की बच्ची की मौत

    मंदसौर में मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रक ने मारी टक्कर, महिला और छह साल की बच्ची की मौत

    मध्य प्रदेश : के मंदसौर जिले में शनिवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में महिला और छह साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए। दुर्घटना दलौदा थाना क्षेत्र के लखमा खेड़ी गांव के पास फोरलेन हाईवे पर हुई, जहां मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी।

    टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। वाहन में सवार मजदूर उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार सभी मजदूर रतलाम जिले के रावटी क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। ये मजदूर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण से जुड़े काम में मजदूरी करने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से उज्जैन लौट रहे थे। इसी दौरान लखमा खेड़ी गांव के पास पीछे से आए ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी।

    दुर्घटना की सूचना मिलते ही दलौदा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव कार्य शुरू किया। ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला गया और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

    हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान बसंती बाई के रूप में हुई है, जबकि मृत बच्ची छह वर्षीय प्रियंका थी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया।

    दुर्घटना में कुल 19 लोग घायल हुए हैं। इनमें छह घायलों की हालत बेहद नाजुक बताई गई है। सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे में घायल लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। एडीएम एकता जायसवाल ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और चिकित्सकों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों के परिजनों को घटना की जानकारी दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ट्रक की रफ्तार, चालक की लापरवाही और टक्कर के कारणों सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर काम पूरा करने के बाद वापस लौट रहे थे। अचानक पीछे से हुई टक्कर के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना देने के साथ राहत कार्य में भी मदद की।

    फिलहाल घायलों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। छह लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उनके इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और दुर्घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है।

  • इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर सियासी घमासान, मंच पर बुलाए गए छात्रों की पृष्ठभूमि पर भाजपा ने उठाए सवाल

    इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर सियासी घमासान, मंच पर बुलाए गए छात्रों की पृष्ठभूमि पर भाजपा ने उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में शनिवार को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान कुछ छात्रों को मंच पर बुलाकर उनकी समस्याएं और रोजगार से जुड़े मुद्दे सामने रखने का अवसर दिया गया। अब मंच पर पहुंचे कुछ युवाओं की कथित राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं।

    भाजपा का आरोप है कि कार्यक्रम में सामान्य छात्रों के रूप में जिन युवाओं को मंच पर संवाद के लिए बुलाया गया, उनमें कुछ कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी या कार्यकर्ता रहे हैं। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर कुछ पुराने दस्तावेजों और तस्वीरों का हवाला देते हुए दावा किया कि मंच पर मौजूद युवाओं की राजनीतिक संबद्धता पहले से सामने रही है। पार्टी ने इसे कार्यक्रम की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है।

    कार्यक्रम में तीन नाम विशेष रूप से चर्चा में आए हैं। इनमें तनय शर्मा, राधा मालवीय और रणजीत किसानवंशी शामिल हैं। भाजपा की ओर से दावा किया गया है कि तनय शर्मा कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई के प्रवक्ता हैं। पार्टी नेताओं ने उनके राजनीतिक पद से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करते हुए सवाल उठाया कि यदि वे कांग्रेस की छात्र राजनीति से जुड़े हैं तो उन्हें सामान्य परीक्षार्थी के तौर पर मंच पर क्यों बुलाया गया।

    इसी तरह भाजपा ने राधा मालवीय को लेकर भी दावा किया है कि वह निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य होने के साथ युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। भाजपा नेताओं ने उनकी राजनीतिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी और मंच पर संवाद को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    तीसरे नाम के तौर पर रणजीत किसानवंशी का उल्लेख किया गया है। भाजपा ने उन्हें कांग्रेस का सक्रिय कार्यकर्ता बताया है। इसके समर्थन में पार्टी नेताओं ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी के साथ उनकी पुरानी तस्वीरों का हवाला दिया है। भाजपा का कहना है कि इन तस्वीरों और राजनीतिक गतिविधियों से उनकी कांग्रेस से संबद्धता का संकेत मिलता है।

    भाजपा नेताओं ने पूरे मामले को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला किया। उनका आरोप है कि युवाओं की समस्याओं पर सीधे संवाद के लिए आयोजित कार्यक्रम में पार्टी से जुड़े लोगों को छात्रों के रूप में मंच पर प्रस्तुत किया गया और उनसे पहले से तय तरीके से बातचीत कराई गई।

    भाजपा प्रवक्ताओं ने आरोपों के आधार पर कार्यक्रम की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि मंच पर मौजूद लोगों की राजनीतिक पहचान पहले से कांग्रेस से जुड़ी थी, तो कार्यक्रम में उन्हें सामान्य छात्रों के रूप में प्रस्तुत करने का उद्देश्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।

    हालांकि, इन आरोपों पर खबर लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया था। ऐसे में मंच पर आए तीनों युवाओं की भूमिका और कार्यक्रम में उनके चयन को लेकर लगाए गए राजनीतिक दावों पर कांग्रेस का पक्ष सामने आना बाकी है। विवाद के बाद इंदौर के इस आयोजन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

  • जीतू पटवारी का मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तंज, बोले- 800 दिन बचे हैं, अब सस्ती शिक्षा और छात्रों के मुद्दों पर काम करें

    जीतू पटवारी का मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तंज, बोले- 800 दिन बचे हैं, अब सस्ती शिक्षा और छात्रों के मुद्दों पर काम करें

    मध्य प्रदेश: कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधा। पटवारी ने मुख्यमंत्री से सस्ती और सुलभ शिक्षा सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के अब करीब 800 दिन बचे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय का इस्तेमाल जनता और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर काम करने के लिए किया जाना चाहिए।

    पटवारी ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को बिना समय गंवाए शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में काम करना चाहिए। उनके मुताबिक सत्ता और पद पर रहने का समय तेजी से गुजरता है, इसलिए सरकार को शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने बयान में मुख्यमंत्री के राजनीतिक हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास अब सीमित समय बचा है और उन्हें इस अवधि में जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। पटवारी ने शिक्षा को छात्रों के भविष्य से सीधे जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से इस दिशा में ठोस काम करने की अपील की।

    इसी दौरान जीतू पटवारी ने प्रदेशभर में ‘छात्रों की गूंज’ अभियान चलाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश के हर जिले में इस नाम से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के जरिए छात्रों और उनके अभिभावकों को सीधे तौर पर जोड़े जाने की बात कही गई है।

    पटवारी ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ किसी राजनीतिक दल या कांग्रेस के बैनर तले आयोजित नहीं किया जाएगा। इसमें छात्रों और उनके अभिभावकों की भागीदारी होगी। अभियान का उद्देश्य शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को सामने लाना तथा उनके भविष्य से संबंधित विषयों पर चर्चा करना बताया गया है।

    उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर अब काम शुरू किया जाना चाहिए। पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के हित और उनके भविष्य से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को प्रदेश के सभी जिलों तक ले जाने की घोषणा के साथ पटवारी ने छात्रों और अभिभावकों की सीधी भागीदारी पर जोर दिया। उनके अनुसार यह कार्यक्रम शिक्षा से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का माध्यम बनेगा और विद्यार्थियों की समस्याओं पर चर्चा की जाएगी।

    इंदौर में हुई पत्रकार वार्ता के दौरान पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने सस्ती शिक्षा का मुद्दा प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने बचे हुए कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए और छात्रों के भविष्य से जुड़े विषयों पर प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

    इस पूरे अभियान के जरिए छात्रों और अभिभावकों को शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जोड़ने की योजना बताई गई है। पटवारी ने कहा कि सरकार को जनहित के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और छात्रों के भविष्य से संबंधित समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।

  • विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से निकासी का रुख, सितंबर में आउटफ्लो 23,676 करोड़ रुपये

    विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से निकासी का रुख, सितंबर में आउटफ्लो 23,676 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली ।
    विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई की भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली सितंबर में अब तक 23,676 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। 1 से 19 सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों ने सेकेंडरी मार्केट से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली। इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए थे।

    सितंबर में विदेशी निवेशकों का रुख पूरी तरह नकारात्मक नहीं रहा है। सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली के बावजूद एफपीआई प्राइमरी मार्केट में लगातार निवेश कर रहे हैं। सितंबर में अब तक प्राइमरी बाजार में करीब 2,703 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।

    इसके साथ ही वर्ष 2026 में एफपीआई का कुल निवेश करीब 48,550 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में दिलचस्पी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में मौजूदा परिस्थितियों के कारण उनका रुख सतर्क बना हुआ है।

    बाजार रणनीतिकारों के अनुसार, सेकेंडरी मार्केट के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बीच प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी को एफपीआई निवेश से भी जोड़कर देखा जा सकता है। नए इश्यू और प्राथमिक बाजार से जुड़े अवसरों में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है।

    पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। ऊर्जा कीमतों में तेजी से महंगाई पर संभावित असर और आर्थिक विकास की रफ्तार को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं।

    सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,294.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 अंक पर रहा। कई सप्ताह तक बेहतर प्रदर्शन करने के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी उतार-चढ़ाव वाले सप्ताह के दौरान कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला।

    बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड शामिल रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी के बाद वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ी है।

    आने वाले समय में एफपीआई निवेश की दिशा पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का भी असर पड़ सकता है। इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर भारतीय शेयर बाजार के लिए दबाव पैदा करने वाला कारक माना जा रहा है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत के स्तर पर रहने से विदेशी निवेशकों के लिए वैश्विक निवेश विकल्पों का संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।

    हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों की कमाई में सुधार की उम्मीद बाजार के लिए सकारात्मक पहलू बने हुए हैं। ऐसे में एफपीआई के मौजूदा रुख के बावजूद घरेलू आर्थिक मजबूती और बेहतर आय संभावनाएं आगे बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।

  • ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के बीच घरेलू आंकड़े तय करेंगे अगले हफ्ते बाजार की दिशा

    ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के बीच घरेलू आंकड़े तय करेंगे अगले हफ्ते बाजार की दिशा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए 22 सितंबर से शुरू होने वाला अगला कारोबारी सप्ताह कई वैश्विक और घरेलू घटनाक्रमों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। निवेशकों की नजर मध्यपूर्व में ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी टैरिफ से जुड़े फैसलों, बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन संकेतकों में होने वाले बदलाव का असर बाजार के उतार-चढ़ाव पर दिखाई दे सकता है।

    मध्यपूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बाजार के लिए प्रमुख वैश्विक जोखिमों में बना हुआ है। इस क्षेत्र से जुड़ी किसी भी नई खबर का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बदलाव का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अमेरिकी टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम भी भारतीय बाजार के लिए अहम रहेंगे। अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित एक विधेयक को प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद इस पर नजर बनी हुई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

    इस तरह के किसी कदम का प्रभाव भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातकों पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समीकरण प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी। इसलिए निवेशक अमेरिकी व्यापार नीति और उससे जुड़े अगले कदमों को करीब से देखेंगे।

    कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगी। तेल की लागत में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और इससे आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं। बीते सप्ताह बाजार की धारणा पर ऊर्जा लागत को लेकर ऐसी ही चिंताओं का असर दिखाई दिया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 18 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय नकद बाजार में शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 599.54 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 1,019.69 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।

    रुपये और अमेरिकी डॉलर की चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कंपनियों की लागत, आयात और विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी वैश्विक निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाला प्रमुख संकेतक बना रहेगा।

    घरेलू मोर्चे पर पीएमआई और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़े अगले सप्ताह जारी होने हैं। इन आंकड़ों से देश की आर्थिक गतिविधियों की स्थिति का संकेत मिलेगा। निवेशक इन आंकड़ों को आर्थिक वृद्धि की गति और कारोबारी माहौल के आकलन के लिए देख सकते हैं।

    भारतीय शेयर बाजार ने पिछला सप्ताह कमजोर स्तर पर समाप्त किया। सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,294.46 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22 प्रतिशत फिसलकर 23,346.40 अंक पर रहा। ऐसे में अगले सप्ताह वैश्विक तनाव, तेल की कीमत, टैरिफ और घरेलू आंकड़ों के बीच बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।