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  • मंदसौर में दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत: पलवई फंटे पर देर रात हादसा, 2 लोग गंभीर घायल

    मंदसौर में दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत: पलवई फंटे पर देर रात हादसा, 2 लोग गंभीर घायल


    मंदसौर। जिले के पलवई फंटे पर मंगलवार देर रात करीब 11:30 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जब दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर परिजन मौके पर पहुंचे और घायलों को निजी वाहनों की मदद से तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

    दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल
    हादसे में घायल पहले बाइक सवार की पहचान हेमंत शर्मा (50 वर्ष), पिता रामगोपाल शर्मा, निवासी गुर्जरबर्डिया के रूप में हुई है। वह अपने गांव से बासाखेड़ी की ओर जा रहे थे। वहीं दूसरी बाइक को सुनील दमामी (40 वर्ष), पिता मांगीलाल, निवासी नेतावली चला रहे थे, जो गुर्जरबर्डिया की ओर जा रहे थे। पलवई फंटे के मोड़ पर दोनों बाइकों की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई।

    टक्कर के बाद सड़क पर गिरे सवार, मचा हड़कंप
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक सवार हवा में उछलकर सड़क पर गिर पड़े। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और तुरंत राहत कार्य शुरू किया गया। दोनों घायलों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सर्जिकल वार्ड में भर्ती कर लिया है।

    सिर में गंभीर चोटें, कई टांके लगाए गए
    डॉक्टरों के अनुसार दोनों घायलों के सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। सिर में गहरे घाव होने के कारण कई टांके लगाने पड़े हैं। फिलहाल दोनों की हालत पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।

    स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल
    इस हादसे के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पलवई फंटे पर रात के समय अक्सर अंधेरा और मोड़ के कारण दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने की जरूरत है।

  • समान नागरिक संहिता पर जनमत संग्रह की तैयारी, रतलाम में समिति करेगी संवाद

    समान नागरिक संहिता पर जनमत संग्रह की तैयारी, रतलाम में समिति करेगी संवाद


    रतलाम। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति गुरुवार को रतलाम पहुंचेगी। समिति का उद्देश्य आम जनता, विशेषज्ञों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से राय एवं सुझाव प्राप्त करना है, जिन्हें आगे राज्य सरकार को भेजा जाएगा। यह महत्वपूर्ण बैठक 4 जून को शासकीय डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में सुबह 11 बजे से आयोजित की जाएगी।

    विभिन्न वर्गों से मांगे जाएंगे सुझाव
    इस बैठक में समिति के सदस्य उज्जैन के प्रोफेसर डॉ. गोपाल शर्मा और इंदौर की शोभा पैठनकर शामिल होंगे। बैठक में जिले के सांसद, विधायक, मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, शांति समिति के सदस्य, रेडक्रॉस सोसायटी के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता संघ के सदस्य तथा राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र के प्रोफेसर सहित विभिन्न वर्गों के नागरिक शामिल होंगे। समिति सभी प्रतिभागियों से समान नागरिक संहिता से जुड़े मुद्दों पर विचार और सुझाव एकत्र करेगी, ताकि एक व्यापक दृष्टिकोण तैयार किया जा सके।

    सुझाव सीधे राज्य सरकार को भेजे जाएंगे
    बैठक में प्राप्त सभी सुझावों को संकलित कर राज्य शासन को भेजा जाएगा। इसके आधार पर आगे की नीति निर्माण प्रक्रिया में सहायता मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया पारदर्शी और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

    प्रशासन ने की तैयारियां तेज
    बैठक की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ने बैठक स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान बैठक व्यवस्था, पार्किंग, सुरक्षा, पेयजल, विद्युत व्यवस्था सहित सभी जरूरी सुविधाओं की समीक्षा की गई। इस अवसर पर शहर एसडीएम आर्ची हरित, नगर निगम आयुक्त अनिल भाना और तहसीलदार शहर ऋषभ ठाकुर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

  • मेंस अंडर-18 एशिया कप: आशीष की हैट्रिक, चीनी ताइपे को 13-1 से हराकर भारत सेमीफाइनल में

    मेंस अंडर-18 एशिया कप: आशीष की हैट्रिक, चीनी ताइपे को 13-1 से हराकर भारत सेमीफाइनल में


    नई दिल्ली। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एक बार फिर अपने आक्रामक खेल से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धमाल मचा दिया है। मेंस अंडर-18 एशिया कप 2026 के अपने आखिरी पूल ए मुकाबले में भारत ने चीनी ताइपे को 13-1 के बड़े अंतर से हराकर सेमीफाइनल में शानदार एंट्री कर ली। इस एकतरफा मुकाबले में भारतीय टीम पूरी तरह हावी रही और शुरुआत से ही गोलों की बारिश कर दी।
    भारत की इस धमाकेदार जीत के हीरो रहे आशीष तानी पूर्ति, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने सामूहिक प्रदर्शन करते हुए विपक्षी टीम को कोई मौका नहीं दिया।

     शुरुआत से ही भारत का दबदबा, पहले ही क्वार्टर में बढ़त
    मैच की शुरुआत से ही भारत ने आक्रामक रुख अपनाया। 7वें मिनट में करण गौतम ने पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर खाता खोला। इसके बाद प्रेमचंद सोय (11’) ने फील्ड गोल दागकर बढ़त दोगुनी कर दी। कप्तान केतन कुशवाहा (13’) ने तीसरा गोल दागकर पहले क्वार्टर में ही भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।

     दूसरे क्वार्टर में भी गोलों की रफ्तार जारी
    दूसरे क्वार्टर में भी भारतीय टीम का दबदबा कायम रहा। राहुल यादव (20’) ने चौथा गोल किया, जबकि आशीष तानी पूर्ति (27’) ने पेनाल्टी कॉर्नर पर गोल करके स्कोर 5-0 कर दिया। इसके बाद सिद्धार्थ बेन (30’) ने शानदार फील्ड गोल दागकर बढ़त और मजबूत कर दी। हालांकि हाफ टाइम से पहले चीनी ताइपे ने एक गोल जरूर किया, लेकिन भारत पहले ही भारी बढ़त ले चुका था।

     तीसरे क्वार्टर में आशीष की हैट्रिक, भारत का दबदबा चरम पर
    ब्रेक के बाद भी भारतीय टीम ने आक्रामक खेल जारी रखा। 35वें मिनट में आशीष ने अपना दूसरा गोल दागा और फिर 42वें मिनट में पेनाल्टी कॉर्नर से हैट्रिक पूरी की। इसी बीच गाजी खान (40’ और 44’) ने भी दो गोल कर भारत की बढ़त को और विशाल बना दिया।

     आखिरी क्वार्टर में भी नहीं रुका गोलों का सिलसिला
    चौथे क्वार्टर में भी भारत ने गति कम नहीं की। वरिंदर सिंह (50’) ने पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में बदला। सिद्धार्थ बेन (52’) और राहुल यादव (54’) ने अपने-अपने दूसरे गोल दागकर भारत की 13-1 की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित कर दी।

     पूल स्टेज में शानदार प्रदर्शन, सेमीफाइनल में मजबूत दावेदारी
    भारत ने पूल स्टेज में कजाकिस्तान, कोरिया और चीनी ताइपे के खिलाफ जीत दर्ज की, जबकि मेजबान जापान के खिलाफ उसे हार का सामना करना पड़ा। कुल 9 अंकों के साथ भारत ने सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली है।

    भारतीय अंडर-18 हॉकी टीम का यह प्रदर्शन न सिर्फ उसकी आक्रामक क्षमता को दिखाता है, बल्कि भविष्य की मजबूत टीम का संकेत भी देता है। 13-1 की यह जीत भारत के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगी, खासकर सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले से पहले।

  • दुनिया भर में मिली लोकप्रियता पर बोले राम चरण, कहा- सबसे बड़ी ताकत अपने देश और दर्शकों का समर्थन

    दुनिया भर में मिली लोकप्रियता पर बोले राम चरण, कहा- सबसे बड़ी ताकत अपने देश और दर्शकों का समर्थन

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में शामिल राम चरण का मानना है कि किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ा सम्मान और पहचान अपने देश तथा अपने लोगों से मिलती है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता और प्रशंसा हासिल करना निश्चित रूप से गर्व की बात है, लेकिन उसकी वास्तविक शुरुआत अपने दर्शकों के विश्वास और समर्थन से होती है। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि उनके लिए वैश्विक सफलता से पहले अपने घर और अपने लोगों का प्यार सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

    हाल ही में एक बातचीत के दौरान राम चरण ने अपनी वैश्विक पहचान, भारतीय सिनेमा की बढ़ती पहुंच और दर्शकों से मिलने वाले समर्थन को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के करियर की बुनियाद उसके अपने समाज और देश में बनती है। यदि अपने लोग किसी कलाकार के काम को स्वीकार करते हैं और उसे लगातार प्रोत्साहन देते हैं, तभी वह आगे बढ़कर दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंच सकता है।

    राम चरण ने कहा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से लेकर आज तक दर्शकों से जो प्यार और समर्थन प्राप्त किया है, वही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उनके अनुसार, किसी भी उपलब्धि का वास्तविक मूल्य तभी होता है जब उसे अपने लोगों का आशीर्वाद और स्वीकार्यता प्राप्त हो। उन्होंने यह भी कहा कि वह हमेशा उसी स्नेह और विश्वास के साथ जुड़े रहना चाहते हैं, जिसने उन्हें एक अभिनेता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अभिनेता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फिल्मों को मिल रही लोकप्रियता पर भी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब दूसरे देशों के दर्शक भारतीय फिल्मों और कलाकारों के काम की सराहना करते हैं, तो यह पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के लिए गर्व का विषय होता है। विभिन्न देशों में भारतीय फिल्मों को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि भारतीय कहानियां और संस्कृति अब वैश्विक दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं।

    राम चरण का मानना है कि भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक पहचान देश के फिल्म उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। आज भारतीय फिल्में केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों में भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इससे भारतीय कलाकारों और तकनीशियनों को अपनी प्रतिभा को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है।

    इन दिनों राम चरण अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर चर्चा में हैं। यह एक स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा फिल्म है, जिसमें वह एक ऐसे खिलाड़ी की भूमिका निभा रहे हैं जो विभिन्न खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करता है। फिल्म में खेल, संघर्ष, मेहनत और सफलता की कहानी को प्रमुखता से दिखाया गया है। दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है और इसके प्रदर्शन को लेकर उद्योग जगत में भी सकारात्मक उम्मीदें जताई जा रही हैं।

    फिल्म में कई अनुभवी और चर्चित कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। निर्माता और निर्देशक को उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को मनोरंजन के साथ प्रेरणा भी देगी। राम चरण ने भी फिल्म को अपने करियर की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक बताया है। उनका कहना है कि किसी भी कलाकार के लिए नई चुनौतियों को स्वीकार करना और अलग-अलग तरह के किरदार निभाना बेहद जरूरी होता है।

    अभिनेता के इस बयान ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक सफलता और लोकप्रियता के बावजूद वह अपने दर्शकों और अपनी जड़ों से जुड़े रहने को सबसे अधिक महत्व देते हैं। उनके अनुसार, दुनिया की किसी भी उपलब्धि से पहले अपने लोगों का विश्वास और प्यार ही किसी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत होती है।

  • डिजिटल इंडिया को मिलेगी नई रफ्तार, पब्लिक वाई-फाई बन सकता है देश के ब्रॉडबैंड नेटवर्क का मजबूत सहारा

    डिजिटल इंडिया को मिलेगी नई रफ्तार, पब्लिक वाई-फाई बन सकता है देश के ब्रॉडबैंड नेटवर्क का मजबूत सहारा

    नई दिल्ली । भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क को देश के ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की मांग तेज हो रही है। दूरसंचार और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मोबाइल नेटवर्क के भरोसे देश की भविष्य की डिजिटल आवश्यकताओं को पूरा करना आसान नहीं होगा। ऐसे में पब्लिक वाई-फाई व्यवस्था इंटरनेट पहुंच को अधिक किफायती, व्यापक और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसी दिशा में उद्योग जगत ने सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के विस्तार को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में शामिल हो चुका है और आने वाले वर्षों में डेटा की खपत और भी तेजी से बढ़ने वाली है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण इंटरनेट की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क मोबाइल ब्रॉडबैंड का पूरक बनकर बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकता है। इससे मोबाइल नेटवर्क पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और उपयोगकर्ताओं को अधिक स्थिर इंटरनेट अनुभव मिल सकेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पब्लिक वाई-फाई विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है जहां मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता सीमित है या इनडोर कनेक्टिविटी अपेक्षाकृत कमजोर रहती है। सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में वाई-फाई हॉटस्पॉट का विस्तार लाखों लोगों को सस्ती इंटरनेट सुविधा उपलब्ध करा सकता है। इससे डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी और डिजिटल विभाजन को कम करने में भी मदद मिलेगी।

    इस दिशा में सुझाव दिया गया है कि सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क को देश में पहले से विकसित हो रहे डिजिटल और फाइबर नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ा जाए। यदि विभिन्न सार्वजनिक डिजिटल परियोजनाओं, फाइबर नेटवर्क और स्मार्ट सिटी पहलों के साथ वाई-फाई हॉटस्पॉट्स का एकीकरण किया जाता है तो देशभर में इंटरनेट पहुंच का दायरा काफी तेजी से बढ़ सकता है। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना आसान होगा।

    तकनीकी विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पब्लिक वाई-फाई के सफल विस्तार के लिए केवल तकनीकी ढांचा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है। बड़ी संख्या में उपभोक्ता अभी भी सार्वजनिक वाई-फाई सेवाओं की उपयोगिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। इसलिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इसके लाभों के बारे में जानकारी देना जरूरी माना जा रहा है। इससे छोटे व्यवसायों, स्थानीय उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    भविष्य की तकनीकों को ध्यान में रखते हुए वाई-फाई 6ई और वाई-फाई 7 जैसी अगली पीढ़ी की प्रणालियों के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर रोडमैप तैयार करने की जरूरत बताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज गति, कम विलंबता और अधिक क्षमता वाली ये तकनीकें आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके लिए सस्ते उपकरणों की उपलब्धता, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा और आधुनिक डिजिटल ढांचे का विकास भी आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक वाई-फाई केवल इंटरनेट सुविधा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह डिजिटल समावेशन और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण उपकरण भी बन सकता है। दूरदराज और कम विकसित क्षेत्रों में इसकी पहुंच बढ़ाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाओं और रोजगार के अवसरों को मजबूत किया जा सकता है। यदि केंद्र, राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय, दूरसंचार कंपनियां और निजी क्षेत्र मिलकर इस दिशा में काम करते हैं तो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है और देश की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को मजबूत आधार प्राप्त हो सकता है।

  • सरकारी डेटा लीक हुआ तो किससे करें शिकायत? जानिए आपके अधिकार

    सरकारी डेटा लीक हुआ तो किससे करें शिकायत? जानिए आपके अधिकार


    नई दिल्ली ।  सीबीएसई के लाखों छात्रों के लिए शुरू किया गया री-इवैल्यूएशन पोर्टल इन दिनों चर्चा में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पोर्टल के पेमेंट सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी और कथित साइबर हमले के कारण कुछ छात्रों को सिस्टम पर अनधिकृत पहुंच मिल गई थी। इसके चलते कई मामलों में री-इवैल्यूएशन फीस की राशि सामान्य शुल्क की जगह 1 रुपये से लेकर 67-68 हजार रुपये तक दिखाई देने लगी। मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय, तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने सरकारी पोर्टलों पर डेटा सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    डेटा लीक होने पर नागरिकों के क्या हैं अधिकार?
    सरकारी पोर्टल या किसी संस्था से डेटा लीक होने की स्थिति में नागरिकों के अधिकार क्या हैं, इसे लेकर लोगों में कई सवाल हैं। भारत में अब डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए विशेष कानून लागू है, जो नागरिकों को कई महत्वपूर्ण अधिकार देता है।

    क्या है डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023?
    भारत सरकार ने डिजिटल डेटा की सुरक्षा के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 लागू किया है। यह देश का पहला व्यापक डेटा संरक्षण कानून है। इस कानून का उद्देश्य नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्था उनकी अनुमति के बिना उनके डेटा का गलत इस्तेमाल न कर सके।

    इस कानून के दायरे में आने वाली जानकारी में शामिल हैं

    मोबाइल नंबर
    आधार नंबर
    बैंकिंग जानकारी
    ईमेल आईडी
    ऑनलाइन रिकॉर्ड
    अन्य डिजिटल व्यक्तिगत जानकारी
    डेटा लीक होने पर मिलते हैं ये अधिकार

    DPDP एक्ट के तहत नागरिकों को अपने डेटा पर कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं।

    डेटा की जानकारी मांगने का अधिकार
    कोई भी व्यक्ति यह जान सकता है कि उसका डेटा किस उद्देश्य से एकत्र किया गया है और उसका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।

    डेटा में सुधार करवाने का अधिकार
    अगर किसी व्यक्ति की जानकारी गलत है तो वह उसे अपडेट या सही करवाने की मांग कर सकता है।

    डेटा हटाने का अधिकार
    जरूरत पड़ने पर व्यक्ति अपने व्यक्तिगत डेटा को हटाने की मांग भी कर सकता है।

    डेटा लीक की सूचना पाने का अधिकार
    यदि किसी संस्था से डेटा लीक होता है तो प्रभावित व्यक्ति को इसकी जानकारी देना संस्था की जिम्मेदारी होती है।

    डेटा लीक होने पर संस्था को क्या करना होगा?
    कानून के अनुसार डेटा उल्लंघन होने पर संबंधित संस्था को बिना अनावश्यक देरी के प्रभावित लोगों को सूचना देनी होगी। इस सूचना में यह बताना जरूरी होगा डेटा लीक कैसे हुआ, इससे क्या नुकसान हो सकता है समस्या को ठीक करने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।

    किन संस्थाओं पर लागू होता है यह कानून?
    यह कानून उन सभी संस्थाओं पर लागू होता है जो भारतीय नागरिकों का डिजिटल डेटा एकत्र करती हैं या उसका उपयोग करती हैं। इनमें शामिल हैं सरकारी विभाग, बैंक, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप, निजी कंपनियां, भारत के बाहर मौजूद वे संगठन भी इस कानून के दायरे में आ सकते हैं, जो भारतीय नागरिकों को सेवाएं देते हैं और उनका डेटा प्रोसेस करते हैं।

    डेटा लीक होने पर कितना लग सकता है जुर्माना?
    डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं।

    250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
    यदि कोई संस्था पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू करने में विफल रहती है और इसके कारण डेटा लीक होता है, तो उस पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    200 करोड़ रुपये तक की सजा
    यदि कोई संस्था डेटा उल्लंघन की जानकारी समय पर नहीं देती या बच्चों के डेटा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करती है, तो उस पर 200 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। डिजिटल युग में डेटा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। CBSE पोर्टल से जुड़ी हालिया घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सरकारी और निजी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। वहीं नागरिकों को भी अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि किसी भी डेटा लीक की स्थिति में वे उचित कार्रवाई कर सकें।

  • पुष्पा झुकेगा नहीं’ लिखी पिकअप से सागौन तस्करी: खंडवा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

    पुष्पा झुकेगा नहीं’ लिखी पिकअप से सागौन तस्करी: खंडवा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई


    खंडवा। जिले के कालीभीत वन क्षेत्र में सागौन तस्करी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां फिल्मी अंदाज में ‘पुष्पा झुकेगा नहीं साला’ जैसे डायलॉग लिखी पिकअप गाड़ी से अवैध लकड़ी की तस्करी का खुलासा हुआ। वन विभाग की टीम ने मंगलवार देर रात घेराबंदी कर वाहन को पकड़ लिया, हालांकि अंधेरे का फायदा उठाकर तस्कर मौके से फरार हो गए। जांच में वाहन से करीब 3 घनमीटर सागौन लकड़ी बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग पौने दो लाख रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद पूरा मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

    जंगल में रोशनी देखकर बढ़ा शक, फिर शुरू हुई कार्रवाई
    मामला पश्चिम कालीभीत वन परिक्षेत्र के सिरालिया सब रेंज के भुरकुला जंगल क्षेत्र का है। नियमित गश्त के दौरान वनकर्मियों को जंगल के अंदर संदिग्ध वाहन की रोशनी दिखाई दी। देर रात जंगल में वाहन की मौजूदगी संदिग्ध लगने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने इलाके की घेराबंदी कर वाहन को रोका। जैसे ही टीम नजदीक पहुंची, तस्करों ने वन विभाग की गाड़ियों की रोशनी देख वाहन छोड़कर जंगल में भागने में सफलता पा ली।

    गाड़ी से मिला सागौन का बड़ा जखीरा
    घेराबंदी के बाद जब वाहन की जांच की गई तो वह लॉक मिला। वन विभाग ने लॉक तोड़कर जब तलाशी ली तो अंदर सागौन के करीब 20 लट्ठे भरे हुए पाए गए। इसके बाद वाहन और लकड़ी दोनों को जब्त कर लिया गया। वन विभाग की कार्रवाई के बाद पिकअप पर लिखे फिल्मी डायलॉग भी सुर्खियों में आ गए हैं, जिससे यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

    पहले से संदिग्ध थी गाड़ी की गतिविधियां
    वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रम सिंह भदौरिया ने बताया कि यह वाहन पहले भी कई बार रात के समय जंगल क्षेत्र में संदिग्ध रूप से घूमता देखा गया था। हालांकि तब पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण कार्रवाई संभव नहीं हो सकी थी। इस बार वाहन को सागौन लकड़ी के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया है, जिससे तस्करी की पुष्टि हो गई है। अब विभाग इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गया है।

    तस्करी नेटवर्क की जांच तेज, मालिक से पूछताछ की तैयारी
    प्रारंभिक जांच में यह पिकअप वाहन वनग्राम कोटवारिया निवासी रामकिशन पाटिल के नाम पर दर्ज बताया जा रहा है। वन विभाग अब वाहन मालिक सहित अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर तस्करी के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश कर रहा है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

  • खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी

    खंडवा को केंद्र सरकार से मिली 4 सड़कें: PMGSY के तहत 14 करोड़ की परियोजना को मंजूरी


    खंडवा। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी विकास सौगात दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत खंडवा जिले की चार महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 13.74 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा, जिसके तहत 14.44 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

    इस स्वीकृति के बाद लंबे समय से लंबित ग्रामीण इलाकों की सड़क सुविधा से जुड़ी मांगों को राहत मिलने की उम्मीद है। नई सड़कों के बनने से न सिर्फ गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और आवागमन व्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

    ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार
    इन सड़कों के निर्माण से किसानों को अपनी फसल मंडियों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए भी आवागमन सुगम हो जाएगा। बरसात के मौसम में जिन इलाकों में संपर्क टूट जाता था, वहां अब स्थायी सड़क सुविधा से राहत मिलेगी। केंद्र सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है, ताकि विकास का लाभ सीधे गांवों तक पहुंच सके।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी मंजूरी
    इन परियोजनाओं को केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंजूरी प्रदान की गई है। खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि स्वीकृति पत्र उन्हें सौंपा गया है और यह निर्णय क्षेत्र की वर्षों पुरानी जरूरतों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी को मजबूत करने का काम तेजी से किया जा रहा है और खंडवा जिले को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

    कौन-कौन से मार्ग बनेंगे
    स्वीकृत परियोजनाओं में कुल चार सड़क मार्ग शामिल हैं:
    बरमलाय से कुकडाल मार्ग – 7.64 किमी, लागत 7.18 करोड़ रुपये
    बरमलाय से सुकलतालाई-4 मार्ग – 3.20 किमी, लागत 3.13 करोड़ रुपये
    लहाड़पुर से पारवाड़ी मार्ग – 2.24 किमी, लागत 2.06 करोड़ रुपये
    मालूद रोड से खेड़ी रैयत मार्ग – 1.36 किमी, लागत 1.35 करोड़ रुपये
    इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर ग्रामीण क्षेत्रों की आवाजाही व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

    ग्रामीणों में खुशी का माहौल
    सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से खराब और कच्चे रास्तों के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब स्थायी सड़क बनने से उनकी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।

  • खरगोन में 1.05 लाख हेक्टेयर में कपास की बोवनी: सरकारी खरीदी से बढ़ा रकबा, प्रदेश में सबसे बड़ा लक्ष्य

    खरगोन में 1.05 लाख हेक्टेयर में कपास की बोवनी: सरकारी खरीदी से बढ़ा रकबा, प्रदेश में सबसे बड़ा लक्ष्य


    खरगोन। जिले में कपास की खेती इस बार तेज रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। प्री-मानसून गतिविधियों और अनुकूल मौसम के चलते अब तक 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है, जो कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 51 प्रतिशत है। नर्मदा क्षेत्र के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह इलाकों में सबसे अधिक बुवाई दर्ज की गई है, जहां किसान तेजी से खेतों में काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में कपास उत्पादन के प्रमुख जिलों में शामिल खरगोन इस बार भी अग्रणी बना हुआ है। इस वर्ष जिले के लिए 2.09 लाख हेक्टेयर (209800 हेक्टेयर) का बुवाई लक्ष्य तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के लगभग समान है। हालांकि, पिछले साल हुई अच्छी सरकारी खरीदी के कारण इस बार कपास के रकबे में हल्की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।

    सरकारी खरीदी का असर, किसानों का बढ़ा रुझान
    कृषि विभाग के अनुसार पिछले वर्ष कपास की मजबूत सरकारी खरीदी ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका सीधा असर इस साल की बुवाई पर दिख रहा है। अनुमान है कि इस बार कपास का रकबा करीब 300 हेक्टेयर तक बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि बेहतर समर्थन मूल्य और खरीद व्यवस्था के चलते कपास की खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है, जिससे वे अन्य फसलों की तुलना में कपास को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    प्री-मानसून बारिश से मिला फायदा
    जिले में हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश ने खेती के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। तापमान 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जो कपास की बुवाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। मौसम में नमी और हल्की बारिश के कारण खेतों में नमी बनी हुई है, जिससे बुवाई कार्य में तेजी आई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा तो आने वाले दिनों में बुवाई का आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है।

    नर्मदा क्षेत्र में सबसे ज्यादा बुवाई
    जिले के कसरावद, महेश्वर और बड़वाह क्षेत्रों में कपास की बुवाई सबसे अधिक दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में सिंचाई के बेहतर साधन उपलब्ध होने के कारण किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं। सहायक संचालक कृषि प्रकाश ठाकुर ने बताया कि जिले में लू का असर कम हो गया है और यह समय कपास की बुवाई के लिए पूरी तरह अनुकूल है। उन्होंने पुष्टि की कि इस वर्ष का लक्ष्य 2.09 लाख हेक्टेयर तय किया गया है और विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    आने वाले दिनों में और बढ़ेगा रकबा
    कृषि विभाग का अनुमान है कि जैसे-जैसे मानसून करीब आएगा, वैसे-वैसे कपास की बुवाई में और तेजी आएगी। फिलहाल किसान अनुकूल मौसम का पूरा फायदा उठा रहे हैं और खेतों में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

  • केरल हाईकोर्ट का फैसला: ‘वायरल गर्ल’ को बालिग माना, पति को एमपी में जमानत के लिए ट्रांजिट बेल

    केरल हाईकोर्ट का फैसला: ‘वायरल गर्ल’ को बालिग माना, पति को एमपी में जमानत के लिए ट्रांजिट बेल


    नई दिल्ली । केरल हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ‘वायरल गर्ल’ को प्रथम दृष्टया बालिग मानते हुए उसके पति को एक महीने की ट्रांजिट बेल प्रदान कर दी है। इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश पुलिस अब अगले एक महीने तक आरोपी पति को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इस अवधि में उसे मध्य प्रदेश की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई है। यह मामला लगातार विवादों में घिरा हुआ है, जिसमें उम्र, शादी की वैधता और POCSO एक्ट के तहत दर्ज केस जैसे कई गंभीर पहलू शामिल हैं।

    कोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र और दस्तावेजों को माना आधार
    केरल हाईकोर्ट के जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद जन्म प्रमाण पत्र, वोटर आईडी और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि युवती बालिग है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि युवती स्वयं भी अपनी उम्र बालिग होने का दावा कर रही है और उसने विवाह को लेकर शपथपत्र भी दिया है। हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि जन्म प्रमाण पत्र फर्जी है और असल में युवती नाबालिग है। लेकिन कोर्ट ने फिलहाल इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

    पति को मिली राहत, गिरफ्तारी पर रोक
    अदालत ने आदेश दिया कि पति 3 जून से एक महीने के भीतर मध्य प्रदेश की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। इस अवधि के दौरान उसे पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इस फैसले को मामले में बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि मध्य प्रदेश पुलिस उस पर POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही थी।

    शादी की वैधता और धर्म आधारित दलीलें भी बनीं विवाद का हिस्सा
    याचिका में दंपती ने दावा किया कि यदि वे मध्य प्रदेश जाते हैं तो उन्हें अलग-अलग धर्मों के कारण संभावित खतरा हो सकता है और ‘ऑनर किलिंग’ की आशंका जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा के वे यात्रा या कानूनी प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते।

    वहीं सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं और मंदिर में हुई शादी की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

    फिल्म शूटिंग से शुरू हुई थी कहानी

    जानकारी के अनुसार, दोनों की मुलाकात केरल में एक फिल्म शूटिंग के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे संबंध बढ़े और मार्च 2026 में दोनों ने शादी कर ली। इसके बाद मामला विवादों में तब आया जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उम्र को लेकर आपत्ति जताई।

    POCSO केस और जांच में बढ़ा विवाद
    आयोग का दावा है कि शादी के समय युवती की उम्र 16 वर्ष थी और दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद मध्य प्रदेश के खरगोन में पति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं जांच में जन्म प्रमाण पत्रों में विसंगतियां सामने आने और मेडिकल रिकॉर्ड में अलग जन्मतिथि दर्ज होने के बाद मामला और जटिल हो गया।

    डायरेक्टर पर भी आरोप, अलग FIR दर्ज
    इसी प्रकरण में युवती ने फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ भी POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई है। आरोप है कि शूटिंग के दौरान उसका शोषण किया गया और फिल्म में अवसर देने के नाम पर उसे प्रभावित किया गया। निर्देशक ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और साजिश बताया है।

    यह मामला अब कानूनी, सामाजिक और दस्तावेजी विवादों के बीच उलझता जा रहा है। एक ओर कोर्ट ने फिलहाल युवती को बालिग मानते हुए पति को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियां दस्तावेजों और उम्र की सत्यता को लेकर जांच में जुटी हैं।