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  • केतन हत्याकांड में 'माही' की फर्जी पहचान से खुला बड़ा राज, आरोपियों ने AI से लेकर ऑनलाइन खोज तक रची थी पूरी साजिश

    केतन हत्याकांड में 'माही' की फर्जी पहचान से खुला बड़ा राज, आरोपियों ने AI से लेकर ऑनलाइन खोज तक रची थी पूरी साजिश


    नई दिल्ली । किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की पटकथा को भी पीछे छोड़ दे, ऐसी खौफनाक साजिश रचकर केतन अग्रवाल की हत्या करने के मामले में पुणे ग्रामीण पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में 5,053 पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इस विस्तृत चार्जशीट में पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया, उसके प्रेमी चेतन चौधरी और उनके दोस्त रितेश हांगे की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है। इस पूरे मर्डर केस की सबसे बड़ी और अहम कड़ी ‘माही’ नाम का वह फेक अकाउंट बना, जिसके जरिए केतन को सिया के जन्मदिन का सरप्राइज देने के बहाने लोहागढ़ किले पर बुलाया गया और फिर वहां उसे मौत के घाट उतार दिया गया।

    केतन को ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट से मैसेज में क्या?

    चार्जशीट में किए गए खुलासे के मुताबिक, जब हत्या की पिछली तमाम कोशिशें नाकाम हो गईं, तब सिया और चेतन के दोस्त रितेश हांगे ने केतन को फंसाने के लिए एक नया डिजिटल जाल बिछाया। आरोपियों ने अपनी एक परिचित लड़की की तस्वीर का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर ‘माही’ नाम से एक फर्जी अकाउंट बनाया। इसके बाद 18 जून को इसी ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट से केतन के मोबाइल पर एक मैसेज भेजा गया। मैसेज में लिखा था, “मैं सिया की खास दोस्त माही बोल रही हूं। हमें लोहागढ़ किले पर सिया का जन्मदिन मनाना है और उसे एक बहुत बड़ा सरप्राइज देना है। तुम सिया को लेकर चुपचाप किले पर आ जाओ।”

    बेहद सीधे और भोले-भाले स्वभाव का केतन इस फेक अकाउंट और सरप्राइज पार्टी के मैसेज को पूरी तरह सच मान बैठा। वह बिना किसी शक-शुब्हे के बेहद खुशी-खुशी सिया को साथ लेकर लोहागढ़ किले की ओर निकल पड़ा। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस सरप्राइज पार्टी के नाम पर उसे बुलाया जा रहा है, वह दरअसल उसकी हत्या का तयशुदा डेथ-ट्रैप है।

    पुणे में हत्या, आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा

    पूर्व नियोजित प्लान के तहत आरोपी चेतन चौधरी पहले से ही किले के एग्जिट रूट से होकर ऊपर पहुंच चुका था और किले के मंदिर में घात लगाकर केतन के आने का इंतजार कर रहा था। जैसे ही केतन और सिया वहां पहुंचे, सिया ने आंखों ही आंखों में चेतन को इशारा कर दिया। इसके बाद जब केतन बेखबर होकर गहरी खाई के ठीक किनारे खड़ा था, तभी पीछे से सिया ने उसके कंधे पर और चेतन ने उसके पैर पर पूरी ताकत से धक्का दे दिया। केतन संभल पाता या खुद को संभाल पाता, उससे पहले ही चेतन ने उसे लात मारकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में धकेल दिया। इस हादसे में मौके पर ही केतन की मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने उस ‘माही’ नाम के फेक अकाउंट को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया।

    पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की 18 जून को हत्या हुई थी। पुलिस ने मंगेतर सिया, कथित प्रेमी चेतन और एक अन्य शख्स रितेश हांगे को गिरफ्तार किया है। केतन को लोहागढ़ किले से धक्का देकर मौत के घाट उतारा गया। ‘माही’ नाम से बनाए गए एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट का इस्तेमाल हुआ, वारदात के बाद अकाउंट डिलीट किया।

    महाराष्ट्र की वडगांव मावल अदालत में दायर आरोपपत्र में संदेशों, तस्वीरों, मोबाइल फोन डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और तकनीकी विश्लेषण प्रमाण पत्र, पांच प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सहित कई ठोस सबूत हैं। हत्याकांड को अंजाम देने से पहले सिया ने पिछले साल मार्च में लोहागढ़ में हुई ऐसी एक अन्य घटना के बारे में ऑनलाइन जानकारी भी जुटाई। आरोपियों ने केतन की हत्या से पहले मर्डर से संबंधित फिल्में देखीं, ऑनलाइन खोजबीन के लिए एआई टूल चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया। पुलिस से बचने के तरीकों पर पॉडकास्ट भी सुने।

    सुपारी किलरों से भी संपर्क

    पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि केतन को रास्ते से हटाने की साजिश मार्च 2026 से ही रची जा रही थी। शुरुआत में तीनों आरोपियों ने तय किया था कि केतन की हत्या नहीं करनी है, बल्कि उसे जिंदगी भर के लिए ‘अपाहिज’ बना देना है। इसके लिए उन्होंने दूसरे राज्यों के कुछ सुपारी किलरों से भी संपर्क साधा था। हालांकि, बाद में आरोपियों को डर लगा कि अगर बाहर का कोई अपराधी पकड़ा गया तो उनका भांडा फोड़ हो जाएगा। खास बात यह है कि आरोपियों ने जिन लोगों से संपर्क किया था, उनमें से एक व्यक्ति अब इस केस में पुलिस का मुख्य गवाह बन गया है।

    एआई का इस्तेमाल और हत्या के लिए ठिकाने की तलाश

    जब बाहर से सुपारी देने का प्लान फेल हो गया, तो मई के महीने में सिया, चेतन और रितेश ने फैसला किया कि वे खुद ही इस कांटे को रास्ते से निकालेंगे। पुलिस के चंगुल से कैसे बचना है और सबूतों को कैसे मिटाना है, इसके लिए आरोपियों ने चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया, क्राइम पॉडकास्ट सुने, कई मर्डर फिल्में देखीं और मेघालय के चर्चित ‘सोनम केस’ का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद उन्होंने लोनावला के टाइगर पॉइंट समेत कई पहाड़ी इलाकों की बाकायदा रेकी की। उन्होंने देखा कि टाइगर पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इसलिए आखिरकार उन्होंने ‘लोहागढ़’ किले को चुना। दरअसल, मार्च 2025 में लोहागढ़ किले पर एक युवती की गिरकर मौत हो चुकी थी। आरोपियों का हिसाब था कि वे पुलिस और लोगों के सामने यह झूठी कहानी गढ़ देंगे कि ‘सेल्फी लेते वक्त केतन का पैर फिसल गया और वह खाई में गिर गया।’

    केतन की बाली ट्रिप कैसे रद्द हुई?

    6 जून को केतन और सिया प्री-वेडिंग शूट के लिए सीधे ‘बाली’ जाने वाले थे। लेकिन वहां जाने से ठीक पहले 4 जून को भी सिया ने केतन को लोहागढ़ ले जाकर ठिकाने लगाने की कोशिश की थी, हालांकि वह प्रयास नाकाम रहा। इसके बाद 6 जून को जब वे मुंबई के लिए निकले, तो रास्ते में खालापुर के एक कैफे के वॉशरूम में सिया ने चुपके से केतन का पासपोर्ट फाड़कर फ्लश कर दिया। पासपोर्ट नष्ट होने के कारण केतन की बाली ट्रिप रद्द हो गई और आरोपियों के लिए लोहागढ़ में मर्डर करने का रास्ता एक बार फिर साफ हो गया।

  • सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर एमपी में 85 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी तेज

    सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर एमपी में 85 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी तेज


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के सरकारी विभागों में खाली पड़े करीब 85 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार ने इन पदों को भरने के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद खाली होने वाले पदों को भी भर्ती के दायरे में शामिल करने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक कर्मचारी चयन मंडल ESB और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग MPPSC के माध्यम से वर्ष 2026 में रिक्त पदों के विज्ञापन जारी करने और भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने का काम आगे बढ़ रहा है।

    सरकारी विभागों में लंबे समय से कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी के कारण कामकाज प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए दिसंबर 2025 से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया था। सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से अलग अलग विभागों से रिक्त पदों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने करीब एक लाख पदों पर भर्ती के निर्देश दिए थे। अब विभागवार रिक्तियों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    सरकार की भर्ती प्रक्रिया में ESB और MPPSC के अलावा एमपी ऑनलाइन के माध्यम से होने वाली भर्तियां भी शामिल हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सहायिका के पदों पर भर्ती की कार्रवाई इसका एक उदाहरण है। विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के 781 पद और आंगनबाड़ी सहायिका के 1767 पद यानी कुल 2548 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।

    सरकार की योजना केवल मौजूदा रिक्त पदों तक सीमित नहीं है। राज्य में करीब दस साल से रुकी अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया भी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार पहले दौर की विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी के बाद करीब एक लाख अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई है। इसके बाद विभागों में पदोन्नति के कारण जो पद खाली हुए हैं उनकी भी गणना कराई जा रही है।

    पदोन्नति के बाद खाली होने वाले पदों की जानकारी जुटने के बाद संबंधित विभागों को उन पदों पर भर्ती के लिए निर्देश दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सरकारी विभागों में वर्तमान रिक्तियों के साथ पदोन्नति के कारण खाली होने वाले पदों पर भी भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इससे अलग अलग विभागों में कर्मचारियों की कमी दूर करने की दिशा में सरकार की भर्ती योजना का दायरा बढ़ेगा।

    कर्मचारी संगठनों ने भी रिक्त पदों पर भर्ती की जरूरत पर जोर दिया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रांतीय महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया केवल एक बार की कवायद नहीं होनी चाहिए बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि घोषणाओं के बाद कई बार विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी होती है इसलिए भर्ती और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं पर लगातार प्रक्रिया चलना जरूरी है।

    फिलहाल ESB और MPPSC के जरिए होने वाली भर्तियों पर युवाओं की नजर रहेगी। सरकार की ओर से वर्ष 2026 में रिक्त पदों के विज्ञापन जारी करने और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में अलग अलग विभागों के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी होने के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को नए अवसर मिल सकते हैं।

  • रविवार को नहीं होगी शेयर बाजार में खरीद बिक्री जानिए NSE BSE बंद रहने की वजह और अगले सत्र की तैयारी

    रविवार को नहीं होगी शेयर बाजार में खरीद बिक्री जानिए NSE BSE बंद रहने की वजह और अगले सत्र की तैयारी


    नई दिल्ली। रविवार का दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सामान्य कारोबारी दिनों से अलग होता है। भारत में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर रविवार को नियमित इक्विटी ट्रेडिंग नहीं होती है। ऐसे में शेयर खरीदने और बेचने की योजना बना रहे निवेशकों को बाजार के अगले कारोबारी सत्र का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि रविवार को बाजार की छुट्टी होने के बावजूद निवेशकों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसी दौरान वे पिछले सप्ताह के कारोबार की समीक्षा करते हैं और आने वाले सप्ताह की रणनीति पर नजर डालते हैं।

    शेयर बाजार में सोमवार से शुक्रवार तक सामान्य कारोबारी गतिविधियां होती हैं जबकि शनिवार और रविवार को नियमित कारोबार बंद रहता है। इसका मतलब यह है कि रविवार को सामान्य तरीके से शेयरों की खरीद बिक्री नहीं की जा सकती। निवेशक अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर तैयार कर सकते हैं लेकिन उसकी वास्तविक प्रक्रिया बाजार खुलने के बाद ही संबंधित नियमों के अनुसार आगे बढ़ती है। इसलिए किसी भी ऑर्डर को लगाने से पहले उसके प्रकार और निष्पादन की स्थिति को समझना जरूरी है।

    रविवार को बाजार बंद रहने के दौरान निवेशकों के पास अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का अच्छा समय होता है। इस दौरान यह देखा जा सकता है कि सप्ताह के दौरान किन शेयरों में तेजी या गिरावट रही और उसके पीछे कौन से कारोबारी या आर्थिक कारण रहे। कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रबंधन से जुड़ी घोषणाएं सेक्टर से संबंधित खबरें और वैश्विक बाजारों के संकेत भी अगले कारोबारी सत्र के लिए बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    वैश्विक बाजारों पर नजर रखना भी सप्ताहांत में उपयोगी हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंकों के फैसले कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और भू राजनीतिक घटनाक्रम भारतीय बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि किसी एक खबर के आधार पर अगले कारोबारी सत्र में बाजार किस दिशा में जाएगा इसका निश्चित अनुमान लगाना उचित नहीं है। बाजार में अचानक उतार चढ़ाव हो सकता है और अलग अलग शेयरों पर उसका असर भी अलग हो सकता है।

    रविवार को निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति पर भी विचार करना चाहिए। केवल बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार उसकी वित्तीय स्थिति और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और जोखिम निवेश के प्रकार तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।

    सप्ताहांत में निवेशक अपनी वॉचलिस्ट भी तैयार कर सकते हैं। जिन कंपनियों पर लंबे समय से नजर है उनके प्रदर्शन की तुलना की जा सकती है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि किसी शेयर की कीमत में बदलाव कंपनी के मूल कारोबार में आए बदलाव से जुड़ा है या केवल बाजार की सामान्य हलचल का हिस्सा है। इस तरह की तैयारी अगले कारोबारी सत्र में भावनाओं के बजाय जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

    शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए रविवार भले ही ट्रेडिंग का दिन नहीं है लेकिन यह तैयारी और समीक्षा का दिन जरूर हो सकता है। बाजार बंद होने के दौरान सही जानकारी जुटाना अपने जोखिम को समझना और निवेश के उद्देश्य को स्पष्ट रखना लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अगले कारोबारी दिन बाजार खुलने पर निवेशकों को अपने फैसले लेते समय ताजा बाजार संकेतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।

  • भोपाल में आज दिखेगा संघ का विराट स्वरूप 30 हजार स्वयंसेवक होंगे एकजुट दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता

    भोपाल में आज दिखेगा संघ का विराट स्वरूप 30 हजार स्वयंसेवक होंगे एकजुट दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता


    नई दिल्ली। भोपाल में रविवार 20 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत बड़ा स्वयंसेवक एकत्रीकरण आयोजित किया जा रहा है। लाल परेड ग्राउंड में होने वाले इस कार्यक्रम में भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवकों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम संघ की नियमित शाखाओं के व्यापक स्वरूप को समाज के सामने प्रस्तुत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    संघ की ओर से आयोजित इस एकत्रीकरण में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम के माध्यम से संघ की शाखाओं में होने वाली नियमित गतिविधियों के साथ सामाजिक कार्यों और आगामी संकल्पों का संदेश भी दिया जाएगा। आयोजन को लेकर स्वयंसेवकों के बीच तैयारियां की गई हैं और भोपाल विभाग के विभिन्न जिलों से स्वयंसेवकों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का औपचारिक शुभारंभ विजयादशमी 2025 से हुआ था। इसके बाद वर्षभर अलग अलग कार्यक्रमों के जरिए संघ की 100 वर्षों की यात्रा और समाज जीवन में किए गए कार्यों को लोगों के सामने रखने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में गृह संपर्क अभियान हिंदू सम्मेलन और प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियों जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन गतिविधियों के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संपर्क और संवाद पर जोर दिया गया है।

    शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में संघ की ओर से पंच परिवर्तन के संदेश को भी प्रमुखता दी जा रही है। इसके तहत सामाजिक समरसता कुटुंब प्रबोधन पर्यावरण संरक्षण स्वबोध और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों को समाज जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। संघ के कार्यक्रमों में इन विषयों को लेकर स्वयंसेवकों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद किया जा रहा है।

    भोपाल में रविवार को होने वाला स्वयंसेवक एकत्रीकरण इसी शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की कड़ी है। कार्यक्रम के जरिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सामूहिक सहभागिता दिखाई जाएगी। आयोजन से पहले सुबह 10 बजे समाज सेवा न्यास में केंद्रीय संस्थानों के युवाओं के साथ संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया है। यह कार्यक्रम प्रेस के लिए नहीं होगा। इसके बाद शाम को लाल परेड ग्राउंड में मुख्य स्वयंसेवक एकत्रीकरण आयोजित किया जाएगा।

    संघ के अनुसार इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन की शाखाओं के व्यापक स्वरूप को समाज के सामने रखना और शताब्दी वर्ष के दौरान तय किए गए सामाजिक संदेशों को आगे बढ़ाना है। भोपाल में होने वाले इस आयोजन में पांच जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवकों की मौजूदगी इसे बड़े स्तर का कार्यक्रम बनाएगी। दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम में संघ की शताब्दी यात्रा सामाजिक कार्यों और पंच परिवर्तन से जुड़े संदेशों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है

  • इंग्लैंड फिर बना नंबर-1, भारत से छीना ICC T20I रैंकिंग का ताज, दोनों के बराबर 269 रेटिंग

    इंग्लैंड फिर बना नंबर-1, भारत से छीना ICC T20I रैंकिंग का ताज, दोनों के बराबर 269 रेटिंग


    नई दिल्ली। इंग्लैंड ने श्रीलंका के खिलाफ तीसरे टी20 में 8 विकेट से शानदार जीत दर्ज कर सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ ही इंग्लैंड ने ICC T20I टीम रैंकिंग में भी भारत को पीछे छोड़ते हुए नंबर-1 की कुर्सी हासिल कर ली। हालांकि भारत और इंग्लैंड दोनों के खाते में 269-269 रेटिंग हैं, लेकिन ताजा रैंकिंग में इंग्लैंड पहले और भारत दूसरे स्थान पर है। खास बात यह है कि इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक ने दो दिन पहले ही नंबर-1 बनने की इच्छा जताई थी और श्रीलंका के खिलाफ जीत के साथ उनकी टीम ने यह उपलब्धि हासिल कर ली।

    कुछ महीनों में दूसरी बार भारत से छीना पहला स्थान

    इंग्लैंड ने पिछले कुछ महीनों में दूसरी बार ICC T20I रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है। भारतीय टीम के यूके दौरे के दौरान उसे आयरलैंड के खिलाफ 0-2 और इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था। लगातार छह मुकाबलों में मिली इन हार का असर टीम इंडिया की रैंकिंग पर भी पड़ा और इंग्लैंड ने भारत को सीरीज में क्लीन स्वीप करने के बाद पहली बार नंबर-1 की पोजिशन हासिल की थी।

    इसके बाद भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे का दौरा किया और वहां प्रदर्शन के दम पर दोबारा रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। अब श्रीलंका के खिलाफ इंग्लैंड की 3-0 से सीरीज जीत ने एक बार फिर समीकरण बदल दिया है और भारत को दूसरे स्थान पर जाना पड़ा है।

    भारत के पास फिर नंबर-1 बनने का मौका

    टीम इंडिया के पास जल्द ही रैंकिंग में वापसी का मौका होगा। भारत का अगला टी20 मुकाबला 22 सितंबर को जापान के खिलाफ होना है। इस मैच में जीत के साथ भारतीय टीम एक बार फिर नंबर-1 की स्थिति हासिल करने की कोशिश करेगी।

    इसके अलावा टीम इंडिया को एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेना है। श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली भारतीय टीम की नजरें इस टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतने के साथ अपनी T20I रैंकिंग की स्थिति मजबूत करने पर भी रहेंगी।

    श्रीलंका को 124 रन पर समेटा

    तीसरे टी20 में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंका की टीम इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी। पूरी टीम 18.5 ओवर में 124 रन पर ऑलआउट हो गई। पथुम निसंका ने 36 और कमिंदु मेंडिस ने 35 रन बनाए। इनके अलावा श्रीलंकाई कप्तान चरिथ असलंका ही 15 रन का आंकड़ा पार कर सके।

    इंग्लैंड की ओर से जोफ्रा आर्चर, सोनी बेकर और विल जैक्स ने 2-2 विकेट चटकाए। इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण के सामने श्रीलंकाई बल्लेबाज लगातार दबाव में रहे और टीम 20 ओवर भी पूरा नहीं खेल सकी।

    बटलर ने 32 गेंदों में ठोके 62 रन

    125 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने मुकाबले को एकतरफा बना दिया। जोस बटलर ने सिर्फ 32 गेंदों पर 7 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 62 रन की तूफानी पारी खेली। कप्तान हैरी ब्रूक ने 33 रन बनाकर उनका अच्छा साथ दिया।

    इंग्लैंड ने महज 9.4 ओवर में 2 विकेट खोकर 125 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ उसने श्रीलंका के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया और इसके साथ ही ICC T20I टीम रैंकिंग में भी भारत को पीछे छोड़कर नंबर-1 स्थान पर कब्जा कर लिया।

  • सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका क्या है जानिए पूजा विधि मंत्र और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

    सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका क्या है जानिए पूजा विधि मंत्र और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सूर्य देव की नियमित पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है। सूर्य को ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि सनातन परंपरा में सुबह के समय सूर्य देव को जल अर्पित करने की विशेष महत्ता बताई गई है। मान्यता के अनुसार नियमित रूप से सूर्य की उपासना करने से व्यक्ति को अपने जीवन में अनुशासन बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

    सूर्य देव की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत की जा सकती है। इसके बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें। धार्मिक परंपरा के अनुसार इसमें लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय सूर्य की ओर सीधे देखने के बजाय जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करने की परंपरा भी बताई जाती है।

    अर्घ्य देते समय श्रद्धालु सूर्य देव का स्मरण कर सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। सूर्य देव का सरल मंत्र ॐ सूर्याय नमः का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी सूर्य उपासना में महत्वपूर्ण माना गया है। जिन लोगों के पास अधिक समय नहीं है वे कुछ मिनट शांत मन से सूर्य देव का ध्यान करके भी पूजा कर सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं में सूर्य देव को पिता और आत्मबल का कारक भी माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य का संबंध आत्मविश्वास नेतृत्व सम्मान पिता और सरकारी क्षेत्र से जोड़ा जाता है। इसी कारण कई लोग सूर्य की उपासना को अपने जीवन में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ाने से जोड़कर देखते हैं। हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    सूर्य देव को अर्घ्य देते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखना चाहिए और किसी तरह का दिखावा करने से बचना चाहिए। जल अर्पित करने के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल करने की परंपरा है। सूर्य को जल चढ़ाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना गया है।

    रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दिया जा सकता है। कुछ श्रद्धालु रविवार को व्रत भी रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं। लाल रंग के फूल अर्पित करना और गुड़ का दान करना भी सूर्य पूजा की परंपराओं में शामिल है।

    सूर्य देव की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश नियमितता और अनुशासन से जुड़ा है। सुबह सूर्योदय के समय कुछ देर प्रकृति के साथ समय बिताना और दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करना मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। धार्मिक आस्था के साथ यदि सूर्य उपासना को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो इससे व्यक्ति को मानसिक रूप से अनुशासित रहने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा मिल सकती है।

  • DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- ‘मुंह पर करारा तमाचा’

    DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- ‘मुंह पर करारा तमाचा’


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। ABVP के यश डबास अध्यक्ष, रिया छाबड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर पूर्व NSUI सदस्य और निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। कांग्रेस से संबद्ध NSUI केंद्रीय पैनल की चारों सीटों में से कोई भी नहीं जीत सकी।

    चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति पर निशाना साधने का आधार बनाया। भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने कहा कि डूसू का परिणाम राहुल गांधी के लिए ‘मुंह पर करारा तमाचा’ है। उन्होंने दावा किया कि नतीजों ने राहुल गांधी की ‘झूठ और नकारात्मक प्रचार’ की राजनीति को खारिज कर दिया है।

    ‘युवा राष्ट्रवादी विचारों से दूर जा रहे हैं’ वाला नैरेटिव खारिज हुआ : भाजपा

    भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे कि देश के युवा राष्ट्रवादी विचारों से दूर जा रहे हैं और नई पीढ़ी झूठ एवं साजिश की राजनीति को पसंद कर रही है। यादव ने कहा कि डूसू चुनाव के नतीजे इस विमर्श को खारिज करते हैं।

    उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, वाम दल और उनके पूरे तंत्र की ओर से जिस राजनीतिक विमर्श को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी, डूसू के परिणामों ने उसे ध्वस्त कर दिया है। यादव ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं, इसलिए यहां का चुनाव व्यापक युवा रुझानों को भी दर्शाता है।

    ‘डूसू का नतीजा राहुल के खिलाफ Gen Z का जनादेश’

    सिद्धार्थ यादव ने डूसू चुनाव परिणाम को राहुल गांधी के खिलाफ ‘Gen Z का जनादेश’ बताया। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति को ‘झूठ और नकारात्मक प्रचार’ की राजनीति बताते हुए कहा कि छात्र मतदाताओं ने इसे खारिज किया है।

    यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कई जगहों पर ‘झूठ की गूंज’ सुनाने का काम कर रहे हैं और पूछा कि क्या उन्हें छात्रों की ओर से उठ रही ‘सच की हुंकार’ की आवाज सुनाई दे रही है।

    अमित शाह बोले- युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला न बनाया जाए

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ABVP की जीत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के हर हिस्से से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं और यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। शाह ने ABVP की जीत को उन ताकतों के लिए संदेश बताया, जो युवाओं को अपने एजेंडे के लिए ‘प्रयोगशाला’ में बदलना चाहती हैं।

    शाह ने कहा कि देश का युवा ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा के साथ खड़ा है। उन्होंने ABVP की जीत का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे संगठन के कार्यकर्ताओं को छात्र हित और राष्ट्र निर्माण से जुड़े काम आगे बढ़ाने की ऊर्जा मिलेगी।

    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी ABVP की जीत को सकारात्मक छात्र राजनीति में युवाओं के भरोसे से जोड़ते हुए इसका स्वागत किया।

    अध्यक्ष पद पर यश डबास ने 2,053 वोट से जीत दर्ज की

    अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास को 24,576 वोट मिले। उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों के अंतर से हराया। मीणा को 22,523 वोट मिले।

    उपाध्यक्ष पद पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार भी निर्दलीय दीपांशु शौकीन रहे। उन्हें 30,615 वोट मिले। शौकीन पहले NSUI से जुड़े थे और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने ABVP के इशू मौर्य को हराया, जिन्हें 16,910 वोट मिले। NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट मिले।

    सचिव पद पर रिया छाबड़ी, संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह विजयी

    सचिव पद पर ABVP की रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। वहीं संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए और समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव को 15,778 वोट मिले।

    इस तरह ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद अपने नाम किए, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया। इस बार के चुनाव में NSUI केंद्रीय पैनल की किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी।

    पिछले साल के चुनाव में भी ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि उपाध्यक्ष पद NSUI के खाते में गया था। इस बार उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने ABVP के तीन पदों की बढ़त के बीच चुनाव परिणाम को अलग राजनीतिक तस्वीर दी है।

  • महाराष्ट्र के BJP मंत्री की भतीजी नीला विखे पाटिल बनीं स्वीडन की सांसद, स्टॉकहोम सिटी से जीता चुनाव

    महाराष्ट्र के BJP मंत्री की भतीजी नीला विखे पाटिल बनीं स्वीडन की सांसद, स्टॉकहोम सिटी से जीता चुनाव


    स्टॉकहोम सिटी। महाराष्ट्र के BJP मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की भतीजी नीला विखे पाटिल ने स्वीडन की राजनीति में अहम मुकाम हासिल किया है। ग्रीन पार्टी की नेता नीला ने स्टॉकहोम सिटी से चुनाव जीतकर 349 सदस्यीय स्वीडिश संसद में जगह बनाई है। चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने अपने परिवार, खासकर अपने दादा और पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल से जुड़ी यादें साझा कीं।

    अहमदनगर में बीता बचपन, महाराष्ट्र से आज भी गहरा जुड़ाव

    नीला का जन्म स्वीडन में हुआ, लेकिन उनके बचपन के शुरुआती साल महाराष्ट्र के अहमदनगर में बीते। बाद में वह स्वीडन लौट गईं और वहीं से उन्होंने राजनीति में अपना सफर आगे बढ़ाया। महाराष्ट्र से उनका पारिवारिक रिश्ता कई पीढ़ियों पुराना है। उनके दादा बालासाहेब विखे पाटिल पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं, जबकि पिता अशोक विखे पाटिल शिक्षाविद हैं। उनके चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं।

    चुनाव जीतने के बाद नीला ने अपने दादा को याद करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बालासाहेब विखे पाटिल को उन पर गर्व होता। उन्होंने बताया कि जब वह 15 साल की थीं, तब उनके दादा उन्हें महाराष्ट्र का बजट पढ़ने के लिए दिया करते थे। नीला ने अपने दादा के साथ बिताए आखिरी वर्षों की याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि उस दौरान उनके दादा लगभग हर सप्ताह उन्हें फोन करते थे और अब उन्हें उनकी बहुत याद आती है।

    प्रधानमंत्री कार्यालय में भी कर चुकी हैं काम

    नीला विखे पाटिल कई वर्षों से स्वीडन की राजनीति में सक्रिय रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार के तौर पर काम किया। इस दौरान वित्त, टैक्स और आवास से जुड़े विषयों पर उनकी जिम्मेदारी रही।

    इसके बाद वह स्टॉकहोम सिटी काउंसिल के लिए चुनी गईं। उन्होंने ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति में भी काम किया। इसके अलावा वह स्वीडिश यंग ग्रीन्स और ग्रीन पार्टी की अन्य इकाइयों से जुड़ी रहीं।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी नीला की पृष्ठभूमि विविध रही है। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने MBA की डिग्री हासिल की और मैड्रिड की कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी में भी अध्ययन किया है।

    बच्चों के कल्याण और पर्यावरण पर रहेगा फोकस

    सांसद बनने के बाद नीला ने बच्चों के कल्याण और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही है। उनका कहना है कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जो खुद वोट नहीं दे सकते। साथ ही वह स्टॉकहोम और पूरे स्वीडन के लिए योगदान देना चाहती हैं।

    भारत के साथ अपने रिश्ते पर भी नीला ने बात की। उन्होंने कहा कि वह भारत से बहुत प्यार करती हैं और देश से उनका गहरा जुड़ाव है। उनके कई करीबी दोस्त भी भारतीय हैं।

    सहकारिता आंदोलन से भी जुड़ा है विखे पाटिल परिवार

    नीला के परिवार का महाराष्ट्र की राजनीति और शिक्षा के साथ-साथ सहकारिता आंदोलन से भी पुराना संबंध रहा है। उनके परदादा विठ्ठलराव विखे पाटिल ने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी। इसी वजह से परिवार की सामाजिक और सहकारी क्षेत्र में भी अलग पहचान रही है।

    स्वीडन में विपक्ष को तीन सीटों का बहुमत

    स्वीडन के चुनाव में वामपंथी विचारों वाली चार विपक्षी पार्टियों ने कुल 176 सीटें हासिल की हैं, जबकि मौजूदा रूढ़िवादी सरकार का समर्थन करने वाली पार्टियों को 173 सीटें मिली हैं। इस तरह विपक्षी दलों को तीन सीटों का अंतर मिला है।

    नतीजे सामने आने के बाद प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डालेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। ऐसे में नई सरकार बनाने के लिए एंडरसन को अलग-अलग दलों के साथ बातचीत करनी होगी।

  • शुक्र 3 अक्टूबर से होंगे वक्री, 42 दिन बदलेंगे रिश्तों और आर्थिक फैसलों के समीकरण, जानें सभी 12 राशियों पर असर

    शुक्र 3 अक्टूबर से होंगे वक्री, 42 दिन बदलेंगे रिश्तों और आर्थिक फैसलों के समीकरण, जानें सभी 12 राशियों पर असर


    नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार सुख, समृद्धि, प्रेम और वैवाहिक जीवन से जुड़े ग्रह शुक्र 3 अक्टूबर 2026 को वक्री होने जा रहे हैं। पंचांग के मुताबिक दोपहर करीब 12:45 बजे शुरू होने वाली शुक्र की वक्री चाल 14 नवंबर 2026 की सुबह करीब 5:57 बजे तक रहेगी। यानी करीब 42 दिनों तक शुक्र की चाल उल्टी दिशा में रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस अवधि को प्रेम संबंधों, दांपत्य जीवन और आर्थिक मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    शुक्र के वक्री होने के दौरान पुराने रिश्ते और पहले से चल रहे विवाद एक बार फिर चर्चा में आ सकते हैं। वहीं, पैसों से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने और खर्च पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं इस अवधि में किस राशि पर किस तरह का प्रभाव बताया गया है।

    प्रेम संबंधों में पुराने मामले फिर आ सकते हैं सामने

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक शुक्र की वक्री चाल का असर प्रेम संबंधों पर विशेष रूप से देखा जाता है। लंबे समय से चल रही गलतफहमियों और दूरियों को बातचीत के जरिए कम करने का मौका मिल सकता है। वहीं, पुराने प्रेम संबंध या पूर्व साथी से दोबारा संपर्क होने की संभावना भी बताई जाती है।

    हालांकि इस दौरान नए रिश्ते की शुरुआत या पुराने संबंध को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने में जल्दबाजी न करने की सलाह दी जाती है। भावनाओं में लिया गया निर्णय बाद में उलझन बढ़ा सकता है।

    दांपत्य जीवन में बातचीत और संयम जरूरी

    विवाहित लोगों के लिए भी यह अवधि आत्ममंथन वाली मानी जा रही है। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे अनसुलझे मुद्दे बातचीत के जरिए सामने आ सकते हैं। कुछ दंपती अपने रिश्ते को नए स्तर पर ले जाने का फैसला कर सकते हैं, जबकि कुछ को आपसी तालमेल बनाए रखने में चुनौती महसूस हो सकती है।

    ऐसे में भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य और संवाद बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    धन और खर्च के मामले में सावधानी

    शुक्र को ज्योतिष में धन, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इसकी वक्री चाल के दौरान आर्थिक फैसलों पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। महंगी वस्तुओं की खरीदारी, निवेश या बड़े खर्च से पहले अपनी आर्थिक स्थिति की समीक्षा करना बेहतर माना जाता है।

    बिना योजना के किया गया खर्च बजट बिगाड़ सकता है। इसलिए 42 दिनों की इस अवधि में फिजूलखर्ची से बचने और बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है।

    सभी 12 राशियों पर शुक्र वक्री का प्रभाव

    मेष: रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों में बदलाव आ सकते हैं। कारोबार या वैवाहिक जीवन के पुराने मुद्दों को सुलझाने का अवसर मिलेगा, लेकिन फैसले जल्दबाजी में न लेने की सलाह है।

    वृषभ: सेहत और रोजमर्रा की कार्यशैली पर ध्यान देना होगा। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें और मौसमी बीमारियों तथा विरोधियों से सतर्क रहें।

    मिथुन: प्रेम संबंधों और संतान पक्ष को लेकर सावधानी जरूरी रहेगी। पुरानी गलतफहमियां फिर उभर सकती हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ानी होगी।

    कर्क: घरेलू जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है। माता की सेहत चिंता का कारण बन सकती है। संपत्ति या वाहन खरीदने का फैसला फिलहाल टालना बेहतर माना गया है।

    सिंह: संवाद और पराक्रम से जुड़े मामलों में बदलाव देखने को मिल सकता है। भाई-बहनों के साथ मतभेद से बचें। किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी पूरी जानकारी जांच लें।

    कन्या: धन और वाणी से जुड़े मामलों में विशेष सावधानी की जरूरत होगी। अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। परिवार में तीखी बहस से बचना बेहतर रहेगा।

    तुला: शुक्र के वक्री होने के कारण यह समय आत्मविश्लेषण का माना जा रहा है। व्यक्तित्व और रिश्तों में सुधार के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा।

    वृश्चिक: अचानक खर्च बढ़ सकते हैं। दूर की यात्राओं में बाधा आने की आशंका बताई गई है। मानसिक शांति के लिए योग और ध्यान को उपयोगी माना गया है।

    धनु: आय के स्रोतों और सामाजिक दायरे में बदलाव आ सकता है। पुराने मित्रों से दोबारा संपर्क हो सकता है। आर्थिक मामलों में किसी शॉर्टकट से बचने की सलाह है।

    मकर: करियर और कार्यक्षेत्र में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से वैचारिक मतभेद से बचें। नौकरी बदलने का फैसला सोच-समझकर करें।

    कुंभ: आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रुझान बढ़ सकता है। लंबी यात्रा के योग बन सकते हैं, लेकिन सामान और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी होगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर अधिक फोकस करना होगा।

    मीन: स्वास्थ्य और अचानक होने वाले धन लाभ या हानि के लिहाज से यह अवधि महत्वपूर्ण मानी गई है। ससुराल पक्ष से मतभेद हो सकते हैं। जोखिम वाले निवेश से दूर रहने की सलाह है।

    रिश्तों और फैसलों में इन बातों का रखें ध्यान

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र की वक्री चाल के दौरान रिश्तों में अहंकार को हावी नहीं होने देना चाहिए। किसी विवाद पर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत होकर बातचीत करना बेहतर माना जाता है। आर्थिक मामलों में भी भावनाओं के बजाय अपनी वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    हर व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति अलग होती है। इसलिए शुक्र की वक्री चाल का प्रभाव भी व्यक्ति-विशेष की कुंडली के अनुसार अलग माना जाता है। बड़े व्यक्तिगत, वैवाहिक या आर्थिक निर्णय लेने से पहले योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

  • हूती हमलों के बीच सऊदी के साथ तुर्की, बोला- जरूरत पड़ी तो सैन्य और तकनीकी मदद देंगे

    हूती हमलों के बीच सऊदी के साथ तुर्की, बोला- जरूरत पड़ी तो सैन्य और तकनीकी मदद देंगे


    नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच तुर्की ने रियाद के समर्थन में बड़ा बयान दिया है। तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने कहा कि सऊदी अरब को अगर सैन्य मदद की जरूरत पड़ती है तो अंकारा सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने खास तौर पर तकनीकी सैन्य जरूरतों को पूरा करने की बात कही। यह बयान तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बीच आया है।

    फिदान ने कहा कि सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर गंभीर हमले हो रहे हैं और इस मुद्दे पर तुर्की पूरी मजबूती के साथ रियाद के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि तीनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते में गठबंधन का प्रावधान है। ऐसे में सऊदी अरब को किसी भी तरह की सैन्य जरूरत, विशेष रूप से तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है तो तुर्की उसे पूरा करने में पीछे नहीं हटेगा।

    क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

    तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच अगस्त में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। इसी समझौते को मौजूदा हूती हमलों के बीच पहली बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, समझौते के बावजूद अभी तक तुर्की या पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा नहीं की है। पाकिस्तान ने कहा है कि मक्का समझौते के तहत हूती हमलों के जवाब में तत्काल सैन्य कार्रवाई को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है, लेकिन जरूरत के मुताबिक वह आगे कदम उठाएगा।

    ईरान-अमेरिका संघर्ष में सऊदी को घसीटना स्वीकार्य नहीं: फिदान

    तुर्की के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि सऊदी अरब को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे व्यापक संघर्ष का हिस्सा बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है। उनके मुताबिक रियाद की इस युद्ध में शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है।

    फिदान ने कहा कि तुर्की ने संघर्ष खत्म करने के उद्देश्य से सभी संबंधित पक्षों के सामने कई प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने कहा कि कई पहल की गई हैं, लेकिन अब संबंधित पक्षों को उन्हें स्वीकार करना होगा। उन्होंने नए प्रस्तावों की भी जानकारी देते हुए उम्मीद जताई कि सभी पक्ष उन्हें मानेंगे।

    हूतियों का रियाद पर मिसाइल-ड्रोन हमले का दावा

    इस बीच शनिवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में संवेदनशील ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। यह दावा रियाद के मुख्य एयरपोर्ट के पास आग और धुएं का गुबार दिखाई देने के कुछ घंटे बाद किया गया।

    सऊदी अरब के अधिकारियों के मुताबिक, उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने रियाद की ओर आ रही एक मिसाइल को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने रातभर संभावित हवाई हमले को लेकर लोगों को अलर्ट पर रखा। शनिवार सुबह स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी गई।

    पाकिस्तान ने भी सऊदी की सुरक्षा को लेकर जताई प्रतिबद्धता

    हूती हमलों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है। इस्लामाबाद ने सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन अभी तक मक्का समझौते के तहत किसी संयुक्त सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि उचित समय आने पर वह समझौते के तहत अपनी भूमिका निभाएगा।

    हूती हमलों के बढ़ने के साथ मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की व्यावहारिक भूमिका भी चर्चा में आ गई है। फिलहाल तुर्की ने सऊदी की सैन्य जरूरतों को पूरा करने की तैयारी जताई है, जबकि सीधे युद्ध में उतरने की घोषणा नहीं की है।