न्यायिक हिरासत में किशन मोदी
मामले का विवरण

‘मूल्यों से समझौता नहीं’, मिस्त्री का स्पष्ट संदेश
अपनी नियुक्ति के बाद केकी मिस्त्री ने कहा कि वे यह जिम्मेदारी केवल इसलिए स्वीकार करते हैं क्योंकि यह उनके व्यक्तिगत मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप है। उन्होंने साफ कहा कि यदि यह भूमिका उनके सिद्धांतों के खिलाफ होती, तो वह इसे कभी स्वीकार नहीं करते। 71 वर्षीय मिस्त्री का यह बयान बैंकिंग जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।
तेजी से हुए फैसले, RBI का भरोसा निरंतर
मिस्त्री ने बताया कि अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद घटना काफी तेजी से आगे बढ़ी। बोर्ड की तत्काल बैठक हुई और निदेशकों ने Reserve Bank of India से बैठक की। RBI द्वारा इतनी जल्दी मंज़ूरी मिलने की बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक को एचडीएफसी बैंक की फ़ाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव स्थिति पर पूरा भरोसा है।
RBI ने भी साफ़ किया है कि बैंक के ऑपरेशन या गवर्नेंस को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है। बैंक की कैपिटल स्थिति मज़बूत है और मैनेजमेंट करने में सक्षम तरीकों से काम कर रहा है।
बाज़ार में असर: नतीजों में गिरावट
हालांकि इस वजह से बदलाव का असर शेयर बाज़ार पर देखने को मिला। HDFC Bank शेयर में गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखने जाने तक NSE पर शेयर करीब 3.77% घटकर 811.50 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि इंटर-डे में यह 8.40% से ज़्यादा गिरकर 770 रुपये तक पहुँच गया था।
त्याग के पीछे ‘नैतिक मतभेद’
अतनु चक्रवर्ती ने अपने त्याग में ‘व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मतभेदों’ को वजह बताया था। बैंक ने भी साफ़ किया कि उनके त्याग के पीछे कोई और वजह नहीं है। बोर्ड ने उनके योगदान की तारीफ़ करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।
आगे की राह: स्थिरता बनाए रखना बड़ी चुनौती
अब केकी मिस्त्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैंक की स्थिरता बनाए रखना और बैंकों का भरोसा कायम रखना होगा। तीन महीने के इस इंतज़ाम कार्यकाल में बैंक के गवर्नेंस और संचालन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

रिकॉर्ड बढ़ोतरी: एक साल में 52 गीगावाट से ज्यादा की छलांग
वित्त वर्ष 2025-26 (31 जनवरी 2026 तक) के दौरान देश की ऊर्जा क्षमता में 52.53 गीगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई, जो अब तक किसी एक वर्ष में सबसे ज्यादा है। इस बढ़ोतरी में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल बढ़ोतरी में 39.65 गीगावाट हिस्सा रिन्यूएबल सेक्टर से आया, जिसमें सोलर ऊर्जा ने 34.95 गीगावाट और पवन ऊर्जा ने 4.61 गीगावाट का योगदान दिया।
इससे पहले 2024-25 में 34.05 गीगावाट की वृद्धि दर्ज की गई थी, यानी इस साल की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज रही। यह साफ दर्शाता है कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा के साथ-साथ हरित ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
ग्लोबल मंच पर भारत: भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026
ऊर्जा क्षेत्र में इन उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए Bharat Electricity Summit 2026 का आयोजन नई दिल्ली के Yashobhoomi Convention Centre में 19 से 22 मार्च के बीच किया जा रहा है। यह सम्मेलन पावर और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञों, कंपनियों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाता है।
सिर्फ उत्पादन नहीं, ट्रांसमिशन नेटवर्क भी हुआ मजबूत
सरकार ने केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम को भी मजबूत करने पर जोर दिया है। नए सबस्टेशन, अत्याधुनिक ट्रांसफार्मर और हाई-कैपेसिटी ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए गए हैं, जिससे बिजली को उत्पादन केंद्र से उपभोक्ताओं तक तेजी और दक्षता से पहुंचाया जा सके।
भारत का नेशनल पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क अब 5 लाख सर्किट किलोमीटर (CKM) से ज्यादा का हो चुका है, जबकि ट्रांसफॉरमेशन क्षमता 1,407 गीगावोल्ट एम्पीयर (GVA) तक पहुंच गई है। इससे ग्रिड की स्थिरता बढ़ी है और अलग-अलग ऊर्जा स्रोतों का बेहतर एकीकरण संभव हुआ है।
भविष्य के लिए मजबूत नींव
ऊर्जा क्षेत्र में यह प्रगति सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर की गई है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, उद्योगों के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बढ़ते चलन को देखते हुए यह क्षमता देश को लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करेगी।

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सुरक्षा और सुविधाएं

कौन सी नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं?
जनक के अनुसार, दिशानिर्देशों का सबसे ज्यादा असर उन पदों पर पड़ेगा जो सीधे ग्राहकों से जुड़े नहीं हैं। यानी मिडिल और बैक-ऑफिस से जुड़े कार्य जैसे डेटा प्रोसेसिंग, रिपोर्टिंग और ऑपरेशनल सपोर्ट अब धीरे-धीरे मशीनों और ऑटोमेशन से बदले जा सकते हैं। बैंक यह भी विचार कर रहा है कि जिन पदों पर कर्मचारी स्वेच्छा से नौकरी छोड़ रहे हैं, क्या उन्हें दोबारा भरा जाए या नहीं।
CEO की रणनीति: कम लागत, ज़्यादा दक्षता
जॉर्जेस एल्हेडरी के नेतृत्व में बैंक ने 2024 से ही बड़े लक्ष्यों की शुरुआत कर दी है। इसमें पहले ही हज़ारों कर्मचारियों की तैनाती, कुछ बिज़नेस यूनिट्स का विलय या बंद करना और लागत कम करने के उपाय शामिल हैं। 2025 के अंत तक बैंक में करीब 2.10 लाख कर्मचारी थे, लेकिन अब टेक्नोलॉजी के सहारे इस संख्या को कम करने की रणनीति बनाई जा रही है।
ग्लोबल ट्रेंड: सिर्फ़ HSBC ही नहीं, पूरी इंडस्ट्री प्रभावित
यह बदलाव सिर्फ़ एक बैंक तक सीमित नहीं है। पूरी ग्लोबल बैंकिंग इंडस्ट्री में आधुनिकीकरण और ऑटोमेशन तेज़ी से जगह बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगले 3 से 5 सालों में वैश्विक के बैंक मिलकर करीब 2 लाख नौकरियां खत्म कर सकते हैं। तकनीकी क्षमताओं का बढ़ना है कि कुल वर्कफोर्स में औसत 3 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।
इस कड़ी में बड़ी टेक कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म भी लागत नियंत्रण और आधुनिकीकरण इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर उन्नयन की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने कर्मचारियों में 20 प्रतिशत तक कटौती कर सकती है।
कर्मचारियों के लिए चेतावनी या अवसर?
दिशानिर्देशों के इस बढ़ते प्रभाव को केवल खतरे के रूप में नहीं देखा जा सकता। दिशानिर्देशों का असर है कि जहां कुछ पारंपरिक नौकरियां खत्म होंगी, वहीं नई तकनीकी और दिशानिर्देशों आधारित भूमिकाएं भी तेजी से पैदा होंगी। ऐसे में कर्मचारियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी स्किल्स को बढ़ाएं और क्रमिक टेक्नोलॉजी के साथ खुद को ढालें।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि आज हिंदू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2083 एवं गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर नमन किया और दिनचर्या की शुरुआत की। इस नए वर्ष में हम सभी के संकल्पों की सिद्धि हो हर आंगन में खुशहाली आए और प्रदेश उन्नति के नए सोपान गढ़े यही मंगलकामना है।
अपने X अकाउंट पर उन्होंने नव संवत्सर पर यह भी लिखा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा हिंदू नव वर्ष की आप सभी को हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं! नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 आपके जीवन में नव चेतना नव ऊर्जा और असीम समृद्धि लाए। इस पुण्यभूमि पर प्रगति परिश्रम व परोपकार की त्रिवेणी सदा बहती रहे और पूरा विश्व इससे अभिसिंचित होता रहे यही कामना है। जयतु भारतम्! सीएम ने चैत्र नवरात्रि की भी शुभकामनाएं दीं और कहा कि पहले दिन यानी शैलपुत्री मां के दिन उनकी आशीर्वाद से सभी भक्तों के कष्ट दूर हों

सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, भारतीयों के डूबे लाखों करोड़
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 3.26 प्रतिशत यानी 2,496.89 अंक की भारी गिरावट के साथ 74,207.24 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 775.65 अंक यानी 3.26 प्रतिशत टूटकर 23,002.15 के स्तर पर आ गया। दिन के दौरान बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां सेंसेक्स 73,950 के निचले स्तर तक फिसल गया।
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर इक्विटी की कैपिटल पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 12 लाख करोड़ रुपये रहा। 438 लाख करोड़ से गिरकर लगभग 426 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट इक्विटी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।
हर सेक्टर लाल निशान में, ऑटो और रियल्टी सबसे ज्यादा प्रभावित
गुरुवार का कारोबार लगभग सभी सेक्टर के लिए नुकसानदायक रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में सबसे ज्यादा 4.25% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल्टी, फाइनेंस सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, आईटी और मेटल सेक्टर में भी 3% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। एफएमसीजी सेक्टर भी दबाव में रहा।
निफ्टी 50 के लगभग सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए। सिर्फ ONGC ने 1.55% की बढ़त के साथ बाजार में बढ़त दिखाई, जिसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहा।
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? समझिए कारण
बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष से वैश्विक अनिश्चितता
कच्चे तेल की हालत में तेज उछाल
फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती की धमकी
विदेशी इंजीनियरों की बिकवाली
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक परिस्थितियां स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

इससे पहले ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित किया था। हाईकोर्ट ने उन्हें 15 दिन का समय दिया था, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। बीते 9 मार्च को हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में क्रिमिनल केस छुपाने के आरोपों के चलते यह आदेश दिया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद, मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं कर पाएंगे, उन्हें मानदेय भी नहीं मिलेगा। हालांकि, वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। याचिका जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच में सुनी गई। इस निर्णय से यह मामला फिलहाल स्थगित हुआ है और 23 जुलाई की अगली सुनवाई तक मुकेश मल्होत्रा के खिलाफ हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगी रहेगी।

22वीं किस्त से 9 करोड़ से ज्यादा किसानों को राहत
इस महीने जारी की गई 22वीं किस्त के तहत 18,640 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई, जिससे 9.32 करोड़ से ज्यादा किसानों को सीधा लाभ मिला। इनमें करीब 2.15 करोड़ महिला किसान भी शामिल हैं, जो इस योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
दुनिया की सबसे बड़ी DBT योजनाओं में शामि
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार
NITI Aayog और International Food Policy Research Institute के आकलन के अनुसार, इस योजना ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी कर्ज पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाई है। समय पर मिलने वाली सहायता से किसान बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों में निवेश कर पा रहे हैं।
जमीनी स्तर पर दिख रहा असर
देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है। केरल की किसान भामिनी के मुताबिक, समय पर मिलने वाली राशि से वह अपनी खेती को बेहतर बना पा रही हैं। अंडमान-निकोबार के किसान अनिल हलदार ने इस मदद से तरबूज की खेती शुरू कर फसल विविधता बढ़ाई। वहीं जम्मू-कश्मीर के किसान दीपक सिंह नेगी इस राशि से खेती के जरूरी इनपुट खरीदकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों सुधार रहे हैं।
बजट में भी मिला बड़ा समर्थन
सरकार ने किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में इस योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे साफ है कि सरकार इस योजना को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या है पीएम-किसान योजना?
2019 में शुरू हुई इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो 2,000 रुपए की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।