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  • भोपाल में लगातार तीसरे दिन बम धमकी, JK अस्पताल यूनिवर्सिटी में 1:30 बजे ब्लास्ट की वार्निंग

    भोपाल में लगातार तीसरे दिन बम धमकी, JK अस्पताल यूनिवर्सिटी में 1:30 बजे ब्लास्ट की वार्निंग


    भोपाल । राजधानी भोपाल में बम धमकी का सिलसिला लगातार तीसरे दिन जारी रहा। इस बार JK हॉस्पिटल और JK यूनिवर्सिटी को उड़ाने की धमकी वाला ई मेल मिला है। धमकी में कहा गया है कि कॉलेज कैंपस बाथरूम और प्रिंसिपल के कमरे में बम रखे गए हैं जो दोपहर 1:30 बजे विस्फोट कर दिए जाएंगे।

    सूचना मिलते ही पुलिस बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंच गए। दोनों संस्थानों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और एहतियातन छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। अभी तक किसी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक का पता नहीं चला है।

    पिछले दो दिनों का पैटर्न भी चिंताजनक रहा। 17 मार्च को नापतोल विभाग को इसी तरह की धमकी मिली थी जिसमें सायनाइड गैस वाले सिलेंडरों का जिक्र था। इससे पहले एम्स भोपाल और पीपल्स यूनिवर्सिटी को भी बार बार धमकी वाले ई मेल प्राप्त हुए थे।

    पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार पिछले एक महीने में भोपाल में पांचवीं बार विभिन्न संस्थानों को बम धमकी मिली है। अब तक सभी धमकियां फर्जी साबित हुई हैं। कोई भी विस्फोटक नहीं मिला लेकिन हर बार सर्च ऑपरेशन इमारतें खाली कराना और आम जनता में दहशत फैलाना जैसी परेशानियां उत्पन्न होती हैं।

  • सोलर सेक्टर को बढ़ावा: ALMM नियमों का दायरा बढ़ा, इनगोट्स-वाफर्स भी शामिल

    सोलर सेक्टर को बढ़ावा: ALMM नियमों का दायरा बढ़ा, इनगोट्स-वाफर्स भी शामिल


    नई दिल्ली। सरकार ने सौर ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने मॉडल और मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) फ्रेमवर्क की एप्रूव्ड लिस्ट जारी की है। अब इसे सोलर इनगोट्स और वेफर्स तक बढ़ाया जा रहा है। यह नया नियम 1 जून 2028 से लागू होगा।

    क्या बदला है?

    अब तक ALMM फ्रेमवर्क मुख्य रूप से सोलर मॉड्यूल और सेल्स पर लागू था, लेकिन नए फैसले के तहत इसे पूरी वैल्यू चेन में ऊपर (अपस्ट्रीम) तक ले जाया गया है। नई ALMM सूची-III इनगोट्स और वेफर्स के लिए लागू होगी इससे घरेलू सोर्सिंग (लोकल सोर्सिंग) को और बढ़ावा मिलेगा

    सरकार का उद्देश्य क्या है?

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, इस कदम के तीन बड़े लक्ष्य हैं:

    आयात पर निर्भरता कम करना

    घरेलू कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देना

    सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाना

    उन्होंने इसे “आत्मनिर्भर सोलर इकोसिस्टम” की दिशा में ठोस कदम बताया।

    परियोजनाओं पर क्या असर पड़ेगा?

    नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस सहित सभी नई परियोजनाओं को ALMM-सूचीबद्ध वेफर्स का इस्तेमाल करना होगा

    ग्रैंडफादरिंग प्रावधान लागू होंगे, यानी पहले से चल रही परियोजनाओं को राहत दी जाएगी

    विद्युत अधिनियम 2003 के तहत नई बोलियों में ALMM-अनुरूप वेफर्स का उल्लेख जरूरी होगा

    कंस्ट्रक्शनर्स के लिए संविदा

    ALMM सूची-III में शामिल होने के लिए कंपनियों के पास वेफर्स के साथ इनगॉट निर्माण क्षमता भी होनी चाहिए प्रारंभिक सूची तब जारी होगी जब कम से कम 3 निर्माता और कुल 15 गीगावॉट क्षमता उपलब्ध हो

    2028 के बाद क्या होगा?

    जून 2028 से ALMM सूची-I (मॉड्यूल) में सिर्फ वही मॉड्यूल शामिल होंगे, जो ALMM-अनुमोदित सेल और वेफर्स से बने होंगे मौजूदा DCR (Domestic Content Requirement) नियमों पर इसका असर नहीं पड़ेगा

    क्यों है यह फैसला अहम?

    सोलर वेफर्स पूरी सोलर मैन्युफैक्चरिंग चेन का एक अहम हिस्सा हैं, और भारत अभी इस क्षेत्र में काफी हद तक इंपोर्ट पर निर्भर है।

    यह फैसला:

    घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाएगा

    रोजगार सृजन में मदद करेगा

    भारत को ग्लोबल सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में आगे ले जाएगा

  • जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन

    जयवर्धन सिंह ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, नंदी हॉल से किए दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन में बुधवार सुबह पूर्व मंत्री और राघोगढ़ के वर्तमान विधायक जयवर्धन सिंह बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने देहरी पर प्रणाम कर भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लिया और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दर्शन किया।

    इस अवसर पर कई कांग्रेस नेता भी मौजूद थे जिनमें राजेंद्र वशिष्ठ और भरत पोरवाल शामिल थे। जयवर्धन सिंह भस्म आरती के दौरान पूरी तरह से भक्ति में लीन दिखाई दिए।

    आरती के बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित भगवान वीरभद्र के दर्शन भी किए। यह धार्मिक आयोजन स्थानीय लोगों और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और जयवर्धन सिंह की उपस्थिति ने इसे और भी यादगार बना दिया।

  • इस्तीफे की अटकलों पर Tim Cook का बयान, कहा- Apple को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हूं

    इस्तीफे की अटकलों पर Tim Cook का बयान, कहा- Apple को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हूं


    नई दिल्ली। एप्पल इंक के सीईओ टिम कुक ने अपने इस्तीफे को लेकर चल रही स्टॉक्स को स्टॉक से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ये सभी खबरें सिर्फ अफवाह हैं और इनका कंपनी छोड़ने का कोई मतलब नहीं है। एबीसी न्यूज के साक्षात्कार में कुक ने कहा, “वापस छोड़े गए बयान को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है। यह पूरी तरह से अफवाह है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने काम से बेहद प्यार करती हैं और किसी कलाकार के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकती हैं।

    कुक का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब कंपनी ने अपने 50वें सालगिरह के दीक्षांत समारोह में शामिल किया है। यह खास बात यह है कि ऐपल के साथ अपने लंबे समय तक चलने वाले पोर्टफोलियो और भविष्य की परिभाषा पर भी फ्रैंक की बात। उन्होंने कहा कि उनका “स्लोडाउन” करने का कोई मतलब नहीं है और वह पूरी तरह से ऊर्जा के साथ कंपनी का नेतृत्व करेंगे। उनका यह रुख उद्यमियों और कर्मचारियों के लिए भरोसेमंद संवर्द्धन वाला माना जा रहा है।

    600 अरब डॉलर निवेश की योजना, अमेरिका में विनिर्माण विनिर्माण फोकस

    कंपनी के भविष्य को लेकर बात करते हुए टिम कुक ने एक बड़ी निवेश योजना का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अगले चार वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका में 600 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई जा रही है। इस निवेश का फोकस एलसीडी ग्लास, सेमीकंडक्टर और अन्य महत्वपूर्ण कंपनियों के घरेलू उत्पादन में वृद्धि पर रहेगा। ईसा मसीह का मकसद वैश्विट मसूद चेन पर प्रॉडक्ट को कम करना और प्रोडक्शन को और अधिक स्थिर बनाना है।

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कुक ने कहा कि कंपनी ने इस पूरी घटना पर नजर रखी है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे कदम बढ़ाया है। साथ ही, उन्होंने विधायी के साथ अपने आवेदन को लेकर उठती आलोचनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। कुक ने कहा कि उनका ध्यान राजनीति पर नहीं, बल्कि नीतिगत लक्ष्यों पर है और व्यापार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संवाद जरूरी है।

    एआई पर ऑनलाइन नजरिया, प्राइवेट पर रहेंगे जोर

    आर्टिस्टिक सासायटी (एआई) को लेकर कुक ने स्टुअर्ट स्टूडियो कहा। उन्होंने कहा कि एआई आपके अंदर सांस्कृतिक है और इसका प्रभाव इस बात पर प्रतिबंध लगाता है कि इसका उपयोग कैसे किया जाता है। ऐपल की रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी कॉम्प्लेक्स वर्क के लिए अपने निजी क्लाउड सिस्टम का इस्तेमाल करती है, लेकिन डेटा मार्केटप्लेस को ही प्राथमिकता दी जाती है, जिससे बिल्डर की निजी सुरक्षा बनी रहती है।

    अपने संदेश में कुक ने कहा, “50 साल पहले एक छोटे से लड़के ने एक बड़ा विचार पैदा किया था-तकनीक को व्यक्तिगत बनाने का।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यही सोच आज भी कंपनी को आगे बढ़ा रही है।

  • भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की नाकाम कोशिश: म्यांमार के विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहे थे विदेशी नागरिक, दिल्ली से कोलकाता तक NIA की बड़ी कार्रवा

    भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की नाकाम कोशिश: म्यांमार के विद्रोहियों को ट्रेनिंग दे रहे थे विदेशी नागरिक, दिल्ली से कोलकाता तक NIA की बड़ी कार्रवा


    नई दिल्ली। भारत की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने एक सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश किया है। एनआईए ने म्यांमार में जातीय विद्रोही समूहों को हथियारों की आपूर्ति, आतंकी सामग्री और सैन्य प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोपों में सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेन के छह नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए तीन यूक्रेनी नागरिकों को देश की राजधानी दिल्ली, तीन को लखनऊ और अमेरिकी नागरिक मैथ्यू को कोलकाता से हिरासत में लिया है।

    एनआईए द्वारा विशेष अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, ये सभी आरोपी वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन इनका असली मकसद बेहद खतरनाक था। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचे, जहाँ उन्होंने उन जातीय संघर्ष समूहों से संपर्क साधा जो भारत में सक्रिय प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने यूरोप से भारत के रास्ते ड्रोन की एक बड़ी खेप म्यांमार पहुंचाई और वहां विद्रोहियों को एके-47 राइफलों जैसे घातक हथियारों का प्रशिक्षण दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं है और प्रथम दृष्टया गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा-18 के तहत आतंकी साजिश का मामला बनता है, जिसके बाद सातों आरोपियों को 11 दिन की एनआईए रिमांड पर भेज दिया गया है।

    इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद कूटनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। यूक्रेन सरकार ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारत को आधिकारिक विरोध पत्र (Note Verbale) सौंपा है। भारत में यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर अपने नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति मांगी है। वहीं, गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक का प्रोफाइल बेहद संदिग्ध बताया जा रहा है; वह पूर्व में लीबिया, सीरिया और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों में शामिल रह चुका है। एनआईए अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी साजिश के पीछे किन अंतरराष्ट्रीय ताकतों का हाथ है और भारत की सुरक्षा को इससे कितना बड़ा खतरा हो सकता था।

  • तीसरे दिन भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स की रफ्तार के पीछे ये बड़े कारण

    तीसरे दिन भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स की रफ्तार के पीछे ये बड़े कारण


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन रैपिड का स्ट्रिप जारी है, जिससे निवेशक का भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 इस दौरान शेयर बाजार में उछाल दिखा रहे हैं। डीजेस के तीन सत्रों में 2,000 अंक के करीब भुगतान किया गया है, जबकि ड्यूस में 700 अंक से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। शनिवार दोपहर 12:47 बजे आटा 636 अंक 0.84% ​​की तेजी के साथ 76,707 पर कारोबार हो रहा था, मलेशिया 191 अंक 0.81% 23,770 पर पहुंच गया। खास बात यह है कि इस तेजी में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि बात मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर में भी बराबर की भागीदारी निभा रहे हैं, जो बाजार में व्यापक बाजार का संकेत है।

    बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में रिटर्न्स की खरीदारी है। निफ्टी आईटी करीब 4 फीसदी की तेजी के साथ टॉप जेनर बन गया है। इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां इनफॉरमेंस शॉपिंग को मिल रही हैं। इसकी एक बड़ी वैश्विक ग्लोबल ब्रोकरेज सीएलएसए की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के नए इंजीनियरिंग टूल्स से इंडस्ट्री को कोई बड़ा खतरा नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद वोडाफोन की चिंता कम हुई और सेक्टर में तेजी से पैसा लौटा।

    कच्चे तेल की गिरावट और ज्वालामुखी वोलैटिलिटी ने स्केल फ़्रॉम

    बाज़ार की सूची में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों का भी बहुत बड़ा योगदान है। कच्चे तेल की बिक्री में आई गिरावट से उपज की सेंटि बेहतर हुई है। WTI क्रूड ऑयल में करीब 3.43% की गिरावट दर्ज की गई और 92.91 डॉलर प्रति शेयर के आसपास रहा, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 2.02% बढ़कर 101.3 डॉलर के करीब रहा। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत जैसे औद्योगिक देश के लिए अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होता है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिलता है।

    इसके अलावा भारत VIX में गिरावट के लिए भी बाजार सकारात्मक संकेत है। इंडिया विक्स 4.30% ग्रुप 18.94 पर आया है, जो बताता है कि बाजार में स्थिरता कम हो रही है और स्थिरता बढ़ रही है। आम तौर पर जब अस्थिरता कम होती है, तो निवेशक अधिकांश स्वामित्व के साथ बाजार में पैसा विकल्प होते हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप स्टूडियो में भी मजबूत तेजी से देखने को मिल रही है। मैथ्यू मिडकैप 100 स्टॉल 1.77% और मैडकैप 100 स्टॉल 1.52% तक चढ़े, जिससे यह पता चलता है कि रैली व्यापक है और केवल साइंटिस्ट स्टॉक तक सीमित नहीं है।

    कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर में विश्वास की वापसी, कच्चे तेल के क्षेत्र में गिरावट और कम होने वाली बाजार अस्थिरता ने मिलकर इस तेजी को जगह दी है। अगर यही ट्रेंड जारी हो रहा है, तो आने वाले दिनों में बाजार में नए व्यापारियों को चुना जा सकता है।

  • शहडोल के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं, दो नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल

    शहडोल के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं, दो नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल


    शहडोल । शहडोल के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निपनिया की स्थिति गंभीर है। चमचमाती नई बिल्डिंग होने के बावजूद यहाँ एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। अस्पताल पूरी तरह से दो नर्सों के भरोसे चल रहा है जबकि नियमों के अनुसार कम से कम पांच डॉक्टर होने चाहिए।

    गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए दूर दराज के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ग्रामीणों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है।

    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े बड़े दावे करती है लेकिन निपनिया अस्पताल की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। अस्पताल के कर्मचारी भी इस अव्यवस्था से परेशान हैं और डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है।

    डॉ राजेश मिश्रा ने बताया कि डॉक्टरों का बॉन्ड पीरियड खत्म होने के कारण अस्पताल में खालीपन है। इसके अलावा जिले में पीजी के लिए लगभग 10 डॉक्टर अन्य कार्यों में गए हुए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए शासन से मांग की गई है और जल्द ही स्थिति सुधारी जाएगी।
    यह मामला शहडोल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाता है और दिखाता है कि चमचमाती बिल्डिंगों के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी अव्यवस्थित रह सकती है।

  • मेक इन इंडिया को बड़ी सफलता: इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर एक्सपोर्ट में 32% से ज्यादा वृद्धि

    मेक इन इंडिया को बड़ी सफलता: इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर एक्सपोर्ट में 32% से ज्यादा वृद्धि


    नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर सेक्टर तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर एक्सपोर्ट वित्त वर्ष 2024-25 में आधार पर 32.47 प्रतिशत बढ़कर 38.58 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईएससी) की रिपोर्ट में सामने आई है। इससे पहले 2023-24 में यह आंकड़ा 29.12 अरब डॉलर था, जो इस क्षेत्र में तेजी से विकास को दर्शाता है। विश्लेषकों का रुझान है कि यह उछाल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

    इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा योगदान स्मार्टफोन एक्सपोर्ट का रहा है। अकेले स्मार्टफोन एक्सपोर्ट 2023-24 के 15.57 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 24.14 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे यह पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया। यूनाइटेड स्टेट्स भारत के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा बाजार बना अकेला, जहां कुल एक्सपोर्ट का 44 प्रतिशत गया। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और इटली जैसे देशों में भी भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    वैश्विक बाजारों में बढ़ती पकड़, नए क्षेत्रों में विस्तार

    रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी अमेरिका 14.70 अरब डॉलर के साथ भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना, जबकि यूरोप 11.45 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ईएससी के डायरेक्टर वीर सागर ने बताया कि ‘इंडिया टेक’ पहल के तहत भारतीय कंपनियां अब अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, सीआईएस, आसियान और सार्क जैसे उभरे हुए बाजारों में तेजी से विस्तार कर रही हैं, साथ ही विकसित बाजारों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। वहीं, कार्यकारी निदेशक गुरमीत सिंह के अनुसार, टेलीकॉम उपकरण-खासतौर पर स्मार्टफोन-इस विकास के प्रमुख चालक बने हुए हैं।

    क्षेत्रीय स्तर पर भी भारत का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है। रूस और सीआईएस देशों को निर्यात तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 1.10 अरब डॉलर हो गया, जबकि मध्य पूर्व का योगदान 5.20 अरब डॉलर रहा। वहीं, जापान और दक्षिण कोरिया को निर्यात में 48.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 1.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

    राज्यों की भूमिका बढ़ेगी, निर्माण का फैलाव

    राज्यवार आंकड़ों में तमिलनाडु 15 अरब डॉलर के निर्यात के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली का स्थान रहा। यह खुलता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग अब पारंपरिक केंद्रों से आगे बढ़कर देश के विभिन्न हिस्सों में फैल रही है।

    कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट संकेत देती है कि भारत न सिर्फ उत्पादन बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक उपलब्धता चेन में अपनी मजबूत उपस्थिति भी दर्ज करा रहा है। आने वाले समय में यह सेक्टर रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास का बड़ा इंजन बन सकता है।

  • PSL 11 पर मंडराया युद्ध का साया? अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक के बाद विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा पर PCB ने तोड़ी चुप्पी

    PSL 11 पर मंडराया युद्ध का साया? अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक के बाद विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा पर PCB ने तोड़ी चुप्पी

    नई दिल्ली। पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) के 11वें सीजन के आगाज से ठीक पहले पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव ने टूर्नामेंट के आयोजन पर संशय के बादल मंडरा दिए हैं। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में की गई एयरस्ट्राइक, जिसमें भारी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबरें हैं, के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट गलियारों में विदेशी खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं तेज हो गई हैं। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड और वहां की सरकार द्वारा अपने खिलाड़ियों को पेशावर जैसे सीमावर्ती शहरों की यात्रा न करने की सलाह देने की खबरों ने पीसीबी (PCB) की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।

    हालाँकि, इन तमाम आशंकाओं के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पीसीबी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र और पड़ोसी देशों के साथ चल रहे संघर्ष के बावजूद, पीएसएल के आगामी सीजन में विदेशी खिलाड़ियों की संख्या में कोई कमी नहीं आएगी। बोर्ड ने दावा किया है कि इस बार ऑस्ट्रेलिया से रिकॉर्ड संख्या में खिलाड़ी पाकिस्तान पहुंच रहे हैं। पीसीबी के एक सूत्र ने पीटीआई (PTI) को बताया कि यात्रा के सभी इंतजाम और सुरक्षा प्लान तैयार हैं और खिलाड़ी अगले हफ्ते से पाकिस्तान आना शुरू कर देंगे।

    विवाद की मुख्य जड़ पेशावर में होने वाला मैच है, जो अफगानिस्तान सीमा के बेहद करीब स्थित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सुरक्षा कारणों से अपने खिलाड़ियों को इस क्षेत्र से दूर रहने की हिदायत दी है। लेकिन पीसीबी का कहना है कि बोर्ड स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और अतीत में भी ऐसी चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक किया गया है।

    गौरतलब है कि 26 मार्च से शुरू होने वाले पीएसएल के इस सीजन में स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर, एडम जैम्पा, मार्नस लाबुशेन और जैक फ्रेजर मैकगर्क जैसे बड़े ऑस्ट्रेलियाई सितारे शामिल होने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ये खिलाड़ी वर्तमान तनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान की धरती पर कदम रखते हैं या सुरक्षा चिंताओं के चलते अपना नाम वापस लेते हैं। फिलहाल, पीसीबी इस टूर्नामेंट को ऐतिहासिक बनाने के अपने दावे पर अडिग है।

  • भारत-यूएई ऊर्जा कनेक्शन मजबूत: ‘जग लाडकी’ टैंकर ने मुंद्रा पोर्ट पर किया प्रवेश

    भारत-यूएई ऊर्जा कनेक्शन मजबूत: ‘जग लाडकी’ टैंकर ने मुंद्रा पोर्ट पर किया प्रवेश


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बढ़ाने देने वाली एक बड़ी घटना बुधवार को देश पहुंची। भारतीय ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर जग लड़की से लंबी समुद्री यात्रा तय कर मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित रूप से डॉक कर गया। यह पोर्ट अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन द्वारा संचालित है और देश के सबसे व्यस्त व आधुनिक बंदरगाहों में जाता है। इस टैंकर में लगभग 80,886 पिस्टन टन कच्चा तेल लादा हुआ है, जिसे फुजैराह पोर्ट से लोड किया गया था। 274 मीटर से अधिक लंबा और 50 मीटर तक फैला यह विशाल पोत भारत की ऊर्जा इकाइयों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    फुजैराह पोर्ट की खासियत यह है कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है—वही संरा समुद्री मार्ग जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में फुजैराह से आपूर्ति भारत के लिए गेमप्ले रूप से अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। इस पृष्ठभूमि में ‘जग लड़की’ की डिलीवरी न सिर्फ एक नियमित आपूर्ति है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम भी है।

    एलपीजी शिपमेंट भी पहुंचे, गुजरात बना ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख केंद्र

    मुंद्रा पोर्ट पर इस टैंकर का आगमन यह भी खुलता है कि भारत बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात को संभालने में सक्षम हो रहा है। यह खेप एक प्रमुख रिफाइनरी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो क्षेत्र में आपूर्ति बाधाओं के बीच अपने संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए ऐसे शिपमेंट पर निर्भर करती है। बंदरगाह प्रबंधन ने टैंकर को सुरक्षित रूप से लंगर डालने और समुद्री समन्वय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इससे पहले भी ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के लिए एलपीजी से लदे जहाज शिवालिक और नंदा देवी भारत पहुंच चुके हैं। ‘शिवालिक’ ने मुंद्रा पोर्ट पर डॉक किया था, जबकि ‘नंदा देवी’ वडिनार पोर्ट पर पहुंचा, जो दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (पूर्व कांडला पोर्ट) का हिस्सा है। इन दोनों जहाजों में कुल मिलाकर करीब 92,700 टन एलपीजी थी, जिससे देश की गैस आपूर्ति को भी बढ़ोतरी मिली है।

    कुल मिलाकर, गुजरात के बंदरगाह-खासतौर पर मुंद्रा और वडीनार—भारत के ऊर्जा आयात के बड़े केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इस तरह के ग्लेशियर देश की ऊर्जा इकाइयों को सुरक्षित रखने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद अहम साबित हो रहे हैं।