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  • राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    राम जन्मभूमि फैसले पर स्वरा भास्कर का पुराना बयान फिर चर्चा में, कहा था- मुस्लिम दोस्तों से माफी मांगी थी

    नई दिल्ली ।स्वरा भास्कर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर दोबारा चर्चा में है। वीडियो में वह अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देती नजर आ रही हैं। अपने बयान में स्वरा ने कहा था कि वह फैसले से काफी दुखी और निराश हुई थीं। उन्होंने यह भी बताया था कि फैसले के बाद उन्होंने अपने परिचित मुस्लिम दोस्तों को संदेश भेजकर माफी मांगी थी।

    वीडियो में स्वरा भास्कर ने कहा था कि राम जन्मभूमि मामले में फैसला आने के बाद उन्हें लगा था कि यह फैसला उचित नहीं था। उन्होंने कहा था कि उस समय वह काफी नाराज थीं और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि देश में ऐसा फैसला कैसे आया। उन्होंने बताया था कि उनके फोन में मौजूद कई मुस्लिम परिचितों को उन्होंने संदेश भेजे थे।

    स्वरा के अनुसार, इन लोगों में शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान और फहाद अहमद समेत कई लोग शामिल थे। उन्होंने कहा था कि एक हिंदू होने के नाते वह अपने मुस्लिम परिचितों को यह बताना चाहती थीं कि फैसले को लेकर उन्हें खेद है और वह इससे सहमत नहीं हैं। उनके इस पुराने बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने स्वरा के बयान की आलोचना की और उनके पुराने रुख को लेकर सवाल उठाए। कई लोगों ने धार्मिक नारे और टिप्पणियां भी कीं। दूसरी ओर, कुछ समर्थकों ने उनके विचार व्यक्त करने के अधिकार का समर्थन किया। उनका तर्क रहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी नागरिक को न्यायिक फैसले पर अपनी व्यक्तिगत राय या असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।

    राम जन्मभूमि विवाद पर स्वरा भास्कर पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जता चुकी थीं। 2019 में फैसले के बाद उनके बयानों को लेकर विवाद हुआ था। एक वकील की ओर से उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, उस समय अटॉर्नी जनरल ने इस कार्रवाई की मांग से असहमति जताई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर मंदिर निर्माण के लिए अधिकार देने का फैसला किया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

    फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 1949 में विवादित परिसर में मूर्तियां रखे जाने और 1992 में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराए जाने को कानून का उल्लंघन बताया था। अदालत ने विवादित भूमि पर रामलला के अधिकार से संबंधित निष्कर्ष भी दर्ज किए थे। फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ।

    अब स्वरा भास्कर के पुराने बयान का वीडियो फिर सामने आने से उनके 2019 के रुख पर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। बयान को लेकर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

  • जयपुर की खूबसूरती सिर्फ हवामहल तक नहीं इन शानदार जगहों पर पहुंचे बिना अधूरी रहेगी आपकी राजस्थान यात्रा

    जयपुर की खूबसूरती सिर्फ हवामहल तक नहीं इन शानदार जगहों पर पहुंचे बिना अधूरी रहेगी आपकी राजस्थान यात्रा


    नई दिल्ली। राजस्थान की यात्रा की बात हो और जयपुर का नाम न आए ऐसा बहुत कम ही होता है। गुलाबी शहर के नाम से मशहूर जयपुर अपनी ऐतिहासिक इमारतों शाही महलों किलों रंगीन बाजारों और राजस्थानी संस्कृति के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां की खासियत यह है कि शहर में घूमते हुए आपको इतिहास वास्तुकला खानपान और स्थानीय संस्कृति का ऐसा मेल देखने को मिलता है जो यात्रा को खास बना देता है। अगर आप जयपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो कुछ जगहों को अपनी यात्रा में जरूर शामिल करना चाहिए।

    जयपुर की पहचान बनने वाली सबसे प्रसिद्ध जगहों में हवामहल का नाम सबसे ऊपर आता है। गुलाबी रंग की इस ऐतिहासिक इमारत की खिड़कियों और झरोखों की खूबसूरत बनावट पर्यटकों को आकर्षित करती है। सुबह या शाम के समय हवामहल के आसपास का इलाका घूमने और तस्वीरें लेने के लिए भी काफी लोकप्रिय है। इसके बाद आप सिटी पैलेस का रुख कर सकते हैं। यहां राजघराने से जुड़े महल संग्रहालय और ऐतिहासिक वस्तुओं के जरिए जयपुर के शाही अतीत की झलक मिलती है।

    अगर आपको किले और पहाड़ों का नजारा पसंद है तो आमेर किला आपकी यात्रा का अहम हिस्सा हो सकता है। जयपुर शहर से कुछ दूरी पर स्थित यह विशाल किला अपनी भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। किले की ऊंचाई से आसपास का दृश्य भी बेहद आकर्षक नजर आता है। आमेर के साथ जयगढ़ किला और नाहरगढ़ किला भी घूमने के विकल्पों में शामिल किए जा सकते हैं। नाहरगढ़ से जयपुर शहर का विस्तृत दृश्य देखने का अनुभव खास हो सकता है।

    जयपुर में जंतर मंतर भी एक महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल है। यहां मौजूद प्राचीन खगोलीय यंत्र भारत की वैज्ञानिक और स्थापत्य परंपरा की जानकारी देते हैं। इतिहास और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह खास हो सकती है। इसके अलावा जलमहल भी जयपुर की खूबसूरत पहचान में शामिल है। मानसागर झील के बीच दिखाई देने वाला यह महल दूर से बेहद आकर्षक नजर आता है और इसके आसपास का वातावरण पर्यटकों को तस्वीरें लेने के लिए आकर्षित करता है।

    जयपुर की यात्रा बाजारों के बिना भी अधूरी मानी जा सकती है। जौहरी बाजार और बापू बाजार में राजस्थानी कपड़े आभूषण हस्तशिल्प और पारंपरिक सामानों की कई दुकानें मिलती हैं। यहां घूमते हुए आप स्थानीय संस्कृति को करीब से महसूस कर सकते हैं। खरीदारी के साथ जयपुर के पारंपरिक भोजन का स्वाद लेना भी यात्रा का अहम हिस्सा हो सकता है। दाल बाटी चूरमा कचौरी और दूसरे राजस्थानी व्यंजन यहां के खानपान की खास पहचान हैं।

    जयपुर घूमने के लिए मौसम का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्मियों में दिन के समय तापमान काफी बढ़ सकता है इसलिए आरामदायक कपड़े पानी और धूप से बचाव का सामान साथ रखना बेहतर रहता है। सर्दियों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है और घूमने के लिए सुबह से शाम तक समय का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आप पहली बार जयपुर जा रहे हैं तो कम से कम दो से तीन दिन का समय रखकर प्रमुख किले महल बाजार और ऐतिहासिक स्थल आराम से देख सकते हैं।

    जयपुर की खासियत यही है कि यहां हर मोड़ पर राजस्थान के इतिहास और संस्कृति की एक नई तस्वीर दिखाई देती है। शाही इमारतों से लेकर पुराने बाजारों तक यह शहर उन यात्रियों के लिए खास अनुभव देता है जो घूमने के साथ किसी जगह की विरासत को भी समझना चाहते हैं।

  • एन. चंद्रशेखरन 2032 तक संभालेंगे टाटा संस की कमान, बोर्ड ने पांच साल बढ़ाया कार्यकाल

    एन. चंद्रशेखरन 2032 तक संभालेंगे टाटा संस की कमान, बोर्ड ने पांच साल बढ़ाया कार्यकाल


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस की कमान संभालते हुए अभी और पांच साल हो गए हैं। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को उनके कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दे दी। इसके साथ ही चंद्रशेखरन फरवरी 2032 तक समूह के चेयरमैन बने रहेंगे। उनका मौजूदा दूसरा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था।

    चंद्रशेखरन के कार्यकाल में विस्तार का फैसला ऐसे समय में आया है, जब टाटा समूह ने पारंपरिक कारोबारों के साथ-साथ विमानन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे नए क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। बोर्ड के फैसले के बाद अब अगले पांच वर्षों के लिए समूह के नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।

    65 साल की उम्र में रिटायरमेंट की नीति, 70 तक जारी रह सकता है कार्यकाल

    टाटा समूह की आंतरिक नीति के अनुसार, कार्यकारी पदों पर नियुक्त अधिकारियों के लिए आमतौर पर 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति का प्रावधान है। हालांकि, गैर-कार्यकारी भूमिका में अधिकारी 70 वर्ष की उम्र तक पद पर बने रह सकते हैं।

    एन. चंद्रशेखरन की उम्र फिलहाल 63 वर्ष बताई गई है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा होना था, जब वे 65 वर्ष के हो जाएंगे। अब पांच साल का नया कार्यकाल मिलने के बाद वे फरवरी 2032 तक टाटा संस के चेयरमैन बने रह सकते हैं। उस समय उनकी उम्र 70 वर्ष होगी।

    चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, नए कार्यकाल के दौरान समूह की रणनीति और कारोबार के विस्तार को लेकर आगे के फैसले बोर्ड और प्रबंधन की योजनाओं के अनुसार होंगे।

    अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे

    एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह से जुड़ाव काफी पुराना है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में इंटर्न के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने कंपनी में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं और आगे चलकर समूह के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे।

    अक्टूबर 2016 में वे पहली बार टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके करीब चार महीने बाद जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। तब से वे समूह के रणनीतिक फैसलों और कारोबार के विस्तार में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

    चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने पारंपरिक उद्योगों के साथ नए कारोबारी क्षेत्रों में निवेश और विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए। विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और डिजिटल कारोबार को समूह की आगे की विकास रणनीति का हिस्सा बनाया गया।

    नौ साल में समूह का कारोबार और मुनाफा बढ़ा

    एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 के बीच समूह के राजस्व और मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

    राजस्व में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी

    वित्त वर्ष 2020 में टाटा समूह का राजस्व 7.89 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस तरह छह वित्त वर्षों के दौरान समूह के राजस्व में काफी विस्तार हुआ।

    मुनाफा 32 हजार करोड़ से बढ़कर 1.71 लाख करोड़

    समूह के मुनाफे में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2020 में टाटा समूह का मुनाफा करीब 32 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह वृद्धि समूह के विभिन्न कारोबारों के प्रदर्शन और विस्तार से जुड़ी हुई है।


    सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण बढ़ा

    टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भी वृद्धि हुई। वर्ष 2020 में इन कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 9.31 लाख करोड़ रुपये था। वर्ष 2026 में यह बढ़कर 24.39 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

    इन आंकड़ों के अनुसार, चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह के कारोबार का आकार, मुनाफा और सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार मूल्य बढ़ा है। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार परिस्थितियों का प्रभाव इन आंकड़ों पर पड़ता है।

    टाटा समूह ने नए क्षेत्रों में बढ़ाया दायरा

    एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने अपने कारोबार को पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। विमानन क्षेत्र में समूह की गतिविधियों का विस्तार हुआ। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में भी समूह ने कदम बढ़ाए।

    टाटा समूह के लिए इन नए क्षेत्रों में प्रवेश का उद्देश्य भविष्य की औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप कारोबार का विस्तार करना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में विनिर्माण क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया है।

    समूह की प्रमुख कंपनियों में टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया शामिल हैं। इन कंपनियों के अलग-अलग कारोबार हैं, लेकिन टाटा संस समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    टाटा समूह, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में क्या अंतर है?

    टाटा समूह से जुड़े तीन नाम अक्सर चर्चा में रहते हैं—टाटा समूह, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स। इन तीनों की भूमिकाएं अलग-अलग हैं।


    टाटा समूह

    टाटा समूह उन अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का समूह है, जो टाटा नाम के तहत संचालित होते हैं। इसमें टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एयर इंडिया जैसी कंपनियां शामिल हैं। समूह के कारोबार आईटी, वाहन, इस्पात, ऊर्जा, विमानन और अन्य क्षेत्रों में फैले हुए हैं।

    टाटा संस

    टाटा संस टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। यह समूह की प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और समूह के बड़े कारोबारी फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन समूह के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा हैं।

    टाटा ट्रस्ट्स

    टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी कार्यों से जुड़े ट्रस्टों का समूह है। ये शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और अन्य जनहितकारी गतिविधियों में योगदान करते हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई जाती है।

    इस तरह टाटा समूह कारोबारों का व्यापक नेटवर्क है, टाटा संस उसकी प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक एवं परोपकारी गतिविधियों से जुड़े ट्रस्टों का समूह है।

    आगे भी समूह की रणनीति पर रहेगी नजर

    टाटा संस के बोर्ड द्वारा एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाए जाने के बाद अब वे फरवरी 2032 तक चेयरमैन बने रहेंगे। उनके नेतृत्व में समूह ने पिछले वर्षों में कारोबार के विस्तार और नए क्षेत्रों में प्रवेश पर जोर दिया है।

    आने वाले वर्षों में टाटा समूह की रणनीति में विमानन, तकनीक, विनिर्माण, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है। बोर्ड के फैसले से समूह के शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता बनी रहेगी और आगे की कारोबारी योजनाओं को उसी दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा।

  • अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत का रुख स्पष्ट, ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं, जरूरत के मुताबिक तेल-गैस खरीद जारी

    अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच भारत का रुख स्पष्ट, ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं, जरूरत के मुताबिक तेल-गैस खरीद जारी

    नई दिल्ली ।अमेरिकी संसद में रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक के पारित होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा नीति को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और करीब 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल और गैस की खरीद जारी रखी जाएगी। सरकार के मुताबिक ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले बदलती बाजार परिस्थितियों और उपलब्ध विकल्पों के आधार पर लिए जाएंगे।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 262 के मुकाबले 159 वोट से पारित किया। इससे पहले यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजा गया है। विधेयक राष्ट्रपति को रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर 100 प्रतिशत शुल्क अपने आप लागू हो गया है। इसके लिए आगे राष्ट्रपति स्तर पर निर्णय और कानून में दिए गए प्रावधानों के तहत कार्रवाई जरूरी होगी।

    भारत ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल और गैस खरीदता रहेगा। सरकार का जोर ऊर्जा आपूर्ति में विविधता बनाए रखने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने पर है। इस रुख का उद्देश्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त और किफायती ऊर्जा उपलब्धता बनाए रखना है।

    भारत सरकार ने यह भी कहा कि हाल के महीनों में इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत कराया है और कहा है कि प्रतिबंधों तथा संभावित टैरिफ का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार संबंधों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र के अलावा उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान शामिल हैं। इसका एक प्रमुख हिस्सा उन देशों को निशाना बनाने से जुड़ा है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन ऐसे प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए विधेयक के प्रावधानों को लेकर दोनों देशों पर विशेष ध्यान है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में विधेयक पारित होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण राष्ट्रपति की मंजूरी है। राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर किए जाने के बाद ही विधेयक कानून का रूप लेगा। इसके बाद इसमें दिए गए टैरिफ संबंधी अधिकारों के इस्तेमाल का रास्ता खुलेगा। कानून के तहत कुछ परिस्थितियों में छूट या अन्य प्रावधानों की भी गुंजाइश रखी गई है।

    भारत ने अपने रुख में यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। संभावित प्रभावों से निपटने के लिए सरकार व्यापार और उद्योग जगत के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रखेगी। फिलहाल भारत का मुख्य जोर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने और अलग-अलग स्रोतों से खरीद के विकल्प बनाए रखने पर है।

  • खांसी बुखार और शरीर में दर्द को सामान्य समझने की न करें भूल स्वाइन फ्लू के इन संकेतों पर रहें सतर्क

    खांसी बुखार और शरीर में दर्द को सामान्य समझने की न करें भूल स्वाइन फ्लू के इन संकेतों पर रहें सतर्क

    नई दिल्ली। बदलते मौसम के साथ वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है और इसी दौरान स्वाइन फ्लू को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होती है। स्वाइन फ्लू को एच1एन1 इन्फ्लुएंजा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक तरह का श्वसन संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने के दौरान निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर लंबे समय तक रहने और संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब संपर्क में आने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। यही वजह है कि मौसम बदलने के दौरान स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सी सावधानी भी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।

    स्वाइन फ्लू के लक्षण कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसमें बुखार के साथ खांसी गले में खराश नाक बहना शरीर में दर्द सिरदर्द और थकान जैसी समस्या हो सकती है। कुछ लोगों में ठंड लगने और कमजोरी की शिकायत भी देखने को मिल सकती है। बच्चों और कुछ अन्य लोगों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में केवल शुरुआती लक्षण देखकर खुद से बीमारी तय करना सही नहीं माना जाता है। अगर लक्षण ज्यादा समय तक बने रहें या तेजी से बढ़ें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    स्वाइन फ्लू का खतरा हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। बुजुर्ग छोटे बच्चे गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को श्वसन संक्रमण होने पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है। ऐसे लोगों में बुखार या सांस से जुड़ी परेशानी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द अत्यधिक कमजोरी या हालत तेजी से बिगड़ने जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

    संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण है। खांसते और छींकते समय मुंह और नाक को ढकना चाहिए। हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोना चाहिए और बार बार आंख नाक या मुंह को छूने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण हैं तो दूसरों से अनावश्यक नजदीकी संपर्क कम करना संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    एक जरूरी बात यह भी है कि स्वाइन फ्लू जैसे संक्रमण में खुद से दवा लेना उचित नहीं है। खासतौर पर एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण का सीधा इलाज नहीं करतीं। डॉक्टर लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर जांच और उपचार की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर एंटीवायरल दवा देने का निर्णय भी ले सकते हैं।

    स्वाइन फ्लू से बचाव का सबसे अहम तरीका जागरूकता और समय पर चिकित्सा सलाह है। हर बुखार स्वाइन फ्लू नहीं होता लेकिन लगातार बने रहने वाले या गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। साफ सफाई का ध्यान रखना संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

  • 20 रुपये के लेज पैक से रणबीर कपूर से मिलने का मौका, कंपनी ने लॉन्च किया नया कैंपेन

    20 रुपये के लेज पैक से रणबीर कपूर से मिलने का मौका, कंपनी ने लॉन्च किया नया कैंपेन

    नई दिल्ली। पोटैटो चिप्स ब्रांड लेज ने अपने ग्राहकों के लिए एक नया कैंपेन शुरू किया है। ‘लेज खोलो, रणबीर से मिलो’ नाम के इस अभियान में 20 रुपये वाले पात्र लेज पैक के जरिये ग्राहकों को कई आकर्षक इनाम जीतने का मौका मिलेगा। इस फैन-जर्नी का सबसे बड़ा आकर्षण ब्रांड एंबेसडर और अभिनेता रणबीर कपूर से मिलने का अवसर है। कंपनी के अनुसार, छह सप्ताह तक चलने वाले इस कॉन्टेस्ट में कुल 2 करोड़ रुपये तक के इनाम जीतने का मौका मिलेगा।

    लेज लंबे समय से अपने ब्रांड को खुशी, मस्ती और रोजमर्रा के यादगार पलों से जोड़कर प्रस्तुत करता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ने के लिए कई अभियान चलाए हैं। हाल ही में रणबीर कपूर के साथ ‘लेज के लिए कुछ भी’ कॉन्टेस्ट के जरिये फैंस के उत्साह को सामने लाया गया था। अब नए अभियान के माध्यम से कंपनी ग्राहकों के इस जुड़ाव को एक खास अनुभव में बदलने की कोशिश कर रही है।

    20 रुपये का पैक बनेगा इनाम की यात्रा का पहला कदम

    ‘लेज खोलो, रणबीर से मिलो’ अभियान के तहत 20 रुपये वाले पात्र लेज पैक को फैन-जर्नी की शुरुआत बनाया गया है। ग्राहकों को पात्र पैक खरीदने के बाद उसकी तस्वीर लेकर अभियान में भाग लेने का अवसर मिलेगा। कंपनी के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान पैक का सत्यापन किया जाएगा और प्रतिभागी आगे बढ़कर अलग-अलग इनाम जीतने के मौके हासिल कर सकेंगे।

    इस अभियान की खास बात यह है कि ग्राहकों को किसी बड़े खर्च के बजाय 20 रुपये वाले पैक से शुरुआत करने का अवसर दिया गया है। कंपनी ने इसे अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने और रोजमर्रा के चिप्स पैक को एक रोमांचक अनुभव में बदलने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया है।

    पैक बढ़ने के साथ बड़े होते जाएंगे इनाम

    छह सप्ताह तक चलने वाले इस कॉन्टेस्ट में प्रतिभागियों को सत्यापित पैकों की संख्या के आधार पर अलग-अलग इनाम जीतने के मौके मिलेंगे। कंपनी द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, अभियान में आगे बढ़ने के लिए निम्न चरण रखे गए हैं—

    • तीन सत्यापित पैक: गेमिंग कंसोल जीतने का मौका।
    • पांच सत्यापित पैक: प्रीमियम स्मार्टफोन जीतने का अवसर।
    • 10 सत्यापित पैक: अंतरराष्ट्रीय अवकाश यात्रा जीतने का मौका।
    • 20 सत्यापित पैक: रणबीर कपूर से मिलने का अवसर।

    इन इनामों के अलावा अभियान में कुल 2 करोड़ रुपये तक के पुरस्कार जीतने का मौका दिया जा रहा है। कंपनी ने इसे अपने ग्राहकों के लिए स्वाद, मनोरंजन और खास अनुभव को एक साथ जोड़ने वाली पहल बताया है।

    वाट्सऐप से पूरी होगी कॉन्टेस्ट की प्रक्रिया

    कंपनी ने ग्राहकों के लिए अभियान में शामिल होने की प्रक्रिया को आसान रखने पर जोर दिया है। इसके लिए वाट्सऐप के माध्यम से पैक अपलोड और सत्यापन की सुविधा दी गई है। पात्र पैक खरीदने के बाद ग्राहक अभियान का क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं या उपलब्ध डिजिटल लिंक का इस्तेमाल कर वाट्सऐप जर्नी में शामिल हो सकते हैं।

    इसके बाद प्रतिभागियों को अपने पैक की तस्वीर लेकर कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा। सत्यापित पैकों की संख्या बढ़ने के साथ वे अलग-अलग इनामों के लिए आगे बढ़ सकेंगे। अभियान में शामिल होने से पहले ग्राहकों को पात्रता, सत्यापन और अन्य लागू नियमों की जानकारी देखनी होगी।

    किराना दुकानों को अभियान का अहम हिस्सा बनाया

    लेज ने इस अभियान के लिए देशभर की नजदीकी किराना दुकानों को भी केंद्र में रखा है। ग्राहक अभियान से जुड़े स्टोर से 20 रुपये वाला पात्र लेज पैक खरीद सकते हैं। इसके बाद पैक पर दिए गए क्यूआर कोड या डिजिटल लिंक के माध्यम से वाट्सऐप जर्नी में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    कंपनी का कहना है कि इस व्यवस्था के जरिये अभियान को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। स्थानीय दुकानों के माध्यम से ग्राहकों को अभियान की जानकारी मिलने के साथ-साथ पैक खरीदने और कॉन्टेस्ट में भाग लेने का अवसर भी मिलेगा।

    पेप्सिको इंडिया ने बताया ग्राहकों के प्यार का जश्न

    पेप्सिको इंडिया की पोटैटो चिप्स कैटेगरी की मार्केटिंग डायरेक्टर आस्था भसीन ने अभियान के बारे में कहा कि लेज हमेशा से जिंदगी में खुशियों के पल बनाने पर ध्यान देता रहा है और उसके हर कदम के केंद्र में ग्राहक होते हैं।

    उन्होंने कहा कि ‘लेज खोलो, रणबीर से मिलो’ कॉन्टेस्ट के जरिये ग्राहकों के साथ जुड़ाव को एक कदम आगे ले जाने की कोशिश की गई है। चिप्स का पैकेट खोलने जैसी सामान्य गतिविधि को यादगार अनुभव में बदलने का प्रयास किया गया है। उनके अनुसार, बेहतरीन स्वाद, खुशी, इनाम और रणबीर कपूर से मिलने का अवसर इस अभियान की खास बातें हैं।

    आस्था भसीन ने कहा कि यह पहल लेज के प्रति ग्राहकों के लगातार प्यार का जश्न मनाने का तरीका है। साथ ही, हर पात्र पैक को कुछ खास पाने के अवसर में बदलने का प्रयास किया गया है।

    रणबीर कपूर बोले—फैंस के लिए खास है यह अभियान

    लेज के ब्रांड एंबेसडर रणबीर कपूर ने भी नए कॉन्टेस्ट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लेज के साथ उनका अनुभव बहुत मजेदार रहा है और यह अभियान इसलिए खास है क्योंकि यह सीधे फैंस के लिए है।

    रणबीर कपूर के अनुसार, प्रशंसकों ने उन्हें हमेशा बहुत प्यार दिया है। ऐसे में यह विचार अच्छा लगता है कि 20 रुपये का एक छोटा सा पैक उन्हें अपने प्रशंसकों से मिलने का अवसर दे सकता है। उन्होंने अभियान में शानदार इनामों का भी उल्लेख किया और कहा कि वे विजेताओं से मिलने तथा उनके साथ लेज का पैक साझा करने का इंतजार कर रहे हैं।

    रिटेल से लेकर डिजिटल माध्यमों तक प्रचार

    कंपनी ने इस अभियान को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए कई माध्यमों का सहारा लेने की योजना बनाई है। इसके तहत रिटेल, डिजिटल, क्रिएटर्स और सोशल मीडिया के जरिये अभियान का प्रचार किया जाएगा।

    इसका उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ-साथ आसपास की दुकानों के माध्यम से भी ग्राहकों को अभियान की जानकारी देना है। कंपनी का कहना है कि पहले पैक से लेकर अंतिम इनाम तक, इस फैन-जर्नी का मकसद ग्राहकों के लेज अनुभव को और खास बनाना है।

    लेज का ग्राहकों से जुड़ाव बढ़ाने पर जोर

    नए अभियान के माध्यम से लेज ने अपने प्रशंसकों को स्वाद के साथ मनोरंजन और इनाम का अनुभव देने की कोशिश की है। 20 रुपये वाले पात्र पैक से शुरू होने वाली यह पहल छह सप्ताह तक चलेगी और इसमें सत्यापित पैकों की संख्या के आधार पर अलग-अलग इनाम जीतने के अवसर मिलेंगे।

    रणबीर कपूर से मिलने का मौका इस अभियान का सबसे खास आकर्षण है। कंपनी के अनुसार, अभियान के जरिये ग्राहकों के साथ अपने जुड़ाव को मजबूत करने और देशभर में ब्रांड के प्रति उत्साह बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • दिशा सालियान मामले में पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख से 500 करोड़ रुपये हर्जाना मांगा

    दिशा सालियान मामले में पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख से 500 करोड़ रुपये हर्जाना मांगा

    नई दिल्ली । दिशा सालियन मामले में उनके पिता सतीश सालियन की ओर से शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे और एनसीपी नेता अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये के हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। नोटिस में दोनों नेताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की गई है। यह मामला दिशा सालियन की मौत से जुड़ा है, जिनकी 8 जून 2020 को मुंबई में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। दिशा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं।

    सतीश सालियन ने नोटिस में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की मौत की सच्चाई जानने और न्याय की मांग को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, उनके बारे में ऐसी बातें कही गईं जिनसे उनकी छवि प्रभावित हुई और उनके इरादों पर सवाल उठे। उन्होंने इन बातों को गलत और बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि उनकी मांग का उद्देश्य केवल अपनी बेटी की मौत की सच्चाई सामने लाना है और इसे किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

    नोटिस में आदित्य ठाकरे पर भी सतीश सालियन के न्याय के लिए चल रहे संघर्ष को राजनीति से जोड़कर पेश करने का आरोप लगाया गया है। नोटिस के मुताबिक, इस तरह उनके संघर्ष और उनकी ईमानदारी पर सवाल खड़े हुए। सतीश सालियन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग की है और उनकी इस लड़ाई को राजनीतिक गतिविधि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    कानूनी नोटिस में दिशा सालियन मामले की सीबीआई जांच को लेकर दिए गए एक बयान का भी उल्लेख किया गया है। इसमें आदित्य ठाकरे के उस कथित बयान का जिक्र है, जिसमें कहा गया था कि सीबीआई ने मामले की जांच की और उन्हें क्लीन चिट दी। नोटिस भेजने वाले पक्ष ने इस दावे को गलत बताया है। इसी क्रम में अनिल देशमुख के 23 मार्च 2025 के कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें दिशा सालियन मामले को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया गया था।

    सतीश सालियन ने 500 करोड़ रुपये के हर्जाने के अलावा दोनों नेताओं से बिना शर्त सार्वजनिक माफी की मांग की है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि माफी सार्वजनिक रूप से दी जाए और उसे टीवी, अखबार तथा डिजिटल मीडिया में प्रसारित किया जाए। इसके साथ ही वीडियो के माध्यम से माफी देने और उसे दोनों नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी करने की मांग भी रखी गई है।

    इस बीच आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियन से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह दिशा से कभी नहीं मिले और उन्हें जानते भी नहीं थे। उनके मुताबिक, करीब छह वर्षों से कुछ लोग उनका नाम इस मामले से जोड़ रहे हैं। उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया और कहा कि मामले की आधिकारिक दोबारा जांच को राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।

    मामले में सोमवार को सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसमें हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। दिशा सालियन की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड में एक ऊंची रिहायशी इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत को लेकर पहले भी अलग-अलग दावे और आरोप सामने आते रहे हैं।

  • ट्रॉय की खोज: जहां इतिहास, प्रेम और युद्ध की सदियों पुरानी कहानियां आज भी जिंदा हैं

    ट्रॉय की खोज: जहां इतिहास, प्रेम और युद्ध की सदियों पुरानी कहानियां आज भी जिंदा हैं


    इंदौर!
    दुनिया के इतिहास में कुछ शहर ऐसे हैं, जिनकी पहचान सिर्फ उनके खंडहरों से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी कहानियों से होती है। तुर्किये का प्राचीन शहर ट्रॉय भी ऐसा ही एक ऐतिहासिक स्थल है। होमर के महाकाव्य इलियड और ओडिसी से लेकर आधुनिक सिनेमा और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों तक, ट्रॉय की कहानी आज भी लोगों की कल्पना को आकर्षित करती है। उत्तरी एजियन क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन नगरी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

    ट्रॉय की विरासत को दुनिया के सामने नए रूप में प्रस्तुत करने के लिए हाल के वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इनमें रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम में शुरू हुई पुरातात्विक प्रदर्शनी विशेष महत्व रखती है। यह आयोजन ट्रॉय के इतिहास, कला और संस्कृति को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का एक बड़ा माध्यम बना है।

    रोम के कोलोसियम में सजी ट्रॉय की ऐतिहासिक धरोहर

    11 जून को रोम के कोलोसियम में ट्रॉय की पुरातात्विक विरासत पर आधारित एक भव्य प्रदर्शनी शुरू हुई। इस प्रदर्शनी में तुर्किये के 19 संग्रहालयों से चुनी गईं 221 ऐतिहासिक कलाकृतियां शामिल की गई हैं। इनमें चानक्कले स्थित ट्रॉय संग्रहालय की महत्वपूर्ण वस्तुएं भी रखी गई हैं।

    प्रदर्शनी की खास बात यह है कि इसमें शामिल 50 कलाकृतियां पहली बार इटली में प्रदर्शित की जा रही हैं। इसके अलावा इतालवी संग्रहालयों के संग्रह से 80 अन्य कलाकृतियां भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं। इस तरह यह आयोजन ट्रॉय की पुरातात्विक संपदा को एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।

    रोम जैसे ऐतिहासिक शहर में ट्रॉय की धरोहर का प्रदर्शन केवल पुरानी वस्तुओं को देखने का अवसर नहीं है। यह उस सभ्यता की कहानी को समझने का माध्यम भी है, जिसने साहित्य, कला और इतिहास पर गहरा प्रभाव छोड़ा। प्रदर्शनी के जरिए ट्रॉय की पहचान को वैश्विक सांस्कृतिक विरासत के रूप में और मजबूती मिल रही है।

    दुनिया के अलग-अलग देशों में ट्रॉय की कहानी

    ट्रॉय की विरासत को लेकर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक और अकादमिक कार्यक्रमों की श्रृंखला भी जारी है। न्यूयॉर्क स्थित तुर्किश हाउस में सम्मेलन और फोटोग्राफी प्रदर्शनी के बाद नीदरलैंड्स में भी ट्रॉय से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    28 जून को एम्स्टर्डम स्थित यूनुस एमरे इंस्टीट्यूट में ट्रॉय पर विशेष फोटोग्राफी प्रदर्शनी शुरू होने की जानकारी दी गई है। इसके अगले दिन 29 जून को लीडेन यूनिवर्सिटी में ट्रॉय उत्खनन के प्रमुख पुरातत्वविद् प्रोफेसर रुस्तेम असलान सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

    इन आयोजनों का उद्देश्य ट्रॉय के इतिहास और पुरातात्विक महत्व को नए दर्शकों तक पहुंचाना है। हालांकि, किसी प्रदर्शनी या सम्मेलन में ट्रॉय की कहानी जानना एक बात है और स्वयं उस प्राचीन शहर की गलियों में घूमकर उसकी परतों को महसूस करना दूसरी।

    इसीलिए तुर्किये यात्रियों को ट्रॉय की वास्तविक यात्रा का निमंत्रण देता है। यह प्राचीन शहर चानक्कले के केंद्र से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

    चानक्कले: समुद्र, पहाड़ और इतिहास का संगम

    ट्रॉय की यात्रा को यादगार बनाने के लिए चानक्कले क्षेत्र अपने आप में कई अनुभव समेटे हुए है। उत्तरी एजियन सागर के प्रवेश द्वार पर बसा चानक्कले, डार्डानेल्स जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित है। यह इलाका प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।

    यहां आने वाले पर्यटकों को समुद्र तटों, जल क्रीड़ाओं, कैंपिंग स्थलों और साइकिलिंग मार्गों का आनंद लेने का अवसर मिलता है। क्षेत्र में बुटीक वाइन रूट्स भी यात्रियों को आकर्षित करते हैं।

    इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए चानक्कले प्रथम विश्व युद्ध के गैलीपोली या डार्डानेल्स अभियान से जुड़े स्थलों की यात्रा का अवसर देता है। समुद्र की गहराइयों में युद्धकालीन जहाजों के मलबे को देखने के लिए डाइविंग गतिविधियां भी उपलब्ध हैं।

    प्रकृति प्रेमी माउंट इडा की हरी-भरी ढलानों का आनंद ले सकते हैं। वहीं असोस के साफ पानी और बोज़जाआडा तथा गोक्चेआडा द्वीपों की खूबसूरती इस यात्रा को और खास बना देती है।

    लेकिन इन तमाम आकर्षणों के बीच चानक्कले की यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र ट्रॉय ही है। शहर के मध्य में खड़ा विशाल लकड़ी का घोड़ा पर्यटकों को उस प्राचीन नगरी की याद दिलाता है, जिसकी कहानी सदियों से लोगों के बीच सुनाई जाती रही है।

    ट्रॉय की जमीन में छिपी हैं सभ्यताओं की कई परतें

    तेवफिकिये गांव में स्थित ट्रॉय को आमतौर पर होमर के महाकाव्य इलियड से जोड़ा जाता है। ट्रोजन युद्ध की कथा ने इस शहर को दुनिया भर में प्रसिद्ध किया। लेकिन ट्रॉय का इतिहास केवल युद्ध और पौराणिक पात्रों तक सीमित नहीं है।

    यहां करीब 5,000 वर्षों से मानव बसावट के प्रमाण मिलते हैं। प्राचीन शहर में प्रारंभिक कांस्य युग से लेकर पूर्वी रोमन काल तक की दस और उससे अधिक विशिष्ट सभ्यतागत परतें मौजूद हैं।

    इसका अर्थ है कि ट्रॉय में अलग-अलग समय में विभिन्न संस्कृतियों ने निवास किया और अपने पीछे स्थापत्य, किलेबंदी तथा जीवनशैली के निशान छोड़े। आज जब पर्यटक इन अवशेषों के बीच चलते हैं, तो उन्हें एक ही शहर में इतिहास के कई दौर दिखाई देते हैं।

    ट्रॉय के प्रवेश द्वार पर बना विशाल लकड़ी का ट्रोजन हॉर्स पर्यटकों का स्वागत करता है। इसके बाद यात्रा प्राचीन पत्थर की दीवारों और गलियों के बीच आगे बढ़ती है। कभी इन रास्तों पर जिन लोगों का जीवन बसा होगा, उनके निशान आज खंडहरों के रूप में दिखाई देते हैं।

    एनीयस की कथा से रोम तक जुड़ा ट्रॉय

    ट्रॉय की कहानी का संबंध केवल यूनानी महाकाव्यों से नहीं है। रोमन साहित्य में भी इस प्राचीन शहर का उल्लेख महत्वपूर्ण रूप से मिलता है।

    वर्जिल की प्रसिद्ध रचना एनीड के अनुसार, ट्रॉय के पतन के बाद राजकुमार एनीयस ने एक नए ट्रॉय की तलाश में लंबी यात्रा शुरू की। माना जाता है कि उनकी यात्रा आगे चलकर इटली के लैटियम क्षेत्र तक पहुंची।

    एनीयस से जुड़ा यह मार्ग आज एनीयस रूट के नाम से जाना जाता है। यूरोप की परिषद ने भी इसे सांस्कृतिक मार्ग के रूप में मान्यता दी है। रोमन परंपरा के अनुसार, एनीयस के वंशजों ने आगे चलकर 753 ईसा पूर्व में रोम की स्थापना की।

    हालांकि यह कथा पौराणिक और साहित्यिक परंपराओं का हिस्सा है, लेकिन इससे यह स्पष्ट होता है कि ट्रॉय की कहानी का प्रभाव अनातोलिया से निकलकर यूरोप की सांस्कृतिक स्मृति तक पहुंचा।

    खंडहरों से आगे ट्रॉय संग्रहालय का अनुभव

    ट्रॉय की यात्रा सिर्फ खुले पुरातात्विक स्थल तक सीमित नहीं रहती। यहां स्थित ट्रॉय संग्रहालय पर्यटकों को प्राचीन शहर की धरोहर को आधुनिक तरीके से समझने का अवसर देता है।

    पुरस्कार विजेता ट्रॉय संग्रहालय अपनी सादगीपूर्ण और प्रभावशाली वास्तुकला के लिए जाना जाता है। संग्रहालय में ट्रॉय से प्राप्त पुरातात्विक सामग्री को तीन स्तरों पर प्रस्तुत किया गया है।

    यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन शहर के इतिहास, वहां रहने वाली सभ्यताओं और खुदाई में मिली वस्तुओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संग्रहालय का उद्देश्य केवल कलाकृतियां दिखाना नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपी सभ्यता और जीवन की कहानी को समझाना भी है।

    प्राचीन अवशेषों और आधुनिक संग्रहालय का यह मेल ट्रॉय को एक अलग अनुभव प्रदान करता है। यहां इतिहास को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसके प्रमाणों के साथ समझने का अवसर मिलता है।

    इतिहास से जुड़ने का निमंत्रण

    ट्रॉय की कहानी ने साहित्य, कला, सिनेमा और अकादमिक शोध को लंबे समय से प्रेरित किया है। रोम में आयोजित प्रदर्शनी और विभिन्न देशों में होने वाले सम्मेलन इस विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।

    लेकिन ट्रॉय की असली पहचान उसके खंडहरों, प्राचीन दीवारों, सभ्यताओं की परतों और संग्रहालय में सुरक्षित धरोहरों के बीच जाकर महसूस की जा सकती है। चानक्कले की प्राकृतिक सुंदरता के साथ ट्रॉय की यात्रा इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए एक खास अनुभव बन सकती है।

    तुर्किये का यह प्राचीन शहर आज भी एक सवाल की तरह सामने खड़ा है—कितनी सभ्यताएं यहां बसीं, कितनी कहानियां यहां जन्मीं और कितनी पीढ़ियां इस धरती से होकर गुजरीं? शायद यही ट्रॉय का सबसे बड़ा आकर्षण है कि इसके खंडहर अतीत की कहानी सुनाते हुए आज के यात्रियों को भी अपने करीब बुलाते हैं।

  • उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका

    उधमपुर में सुरक्षाबलों का बड़ा ऑपरेशन, दो आतंकियों का एनकाउंटर, पाकिस्तानी होने और आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका


    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों को आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जिले के ब्रत्तल इलाके में 16 और 17 सितंबर की दरम्यानी रात चलाए गए अभियान के दौरान दो आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने लक्षित अभियान शुरू किया था। ऑपरेशन के दौरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई, जिसमें दोनों आतंकी मारे गए।

    यह कार्रवाई मजालता क्षेत्र में की गई। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को खराब मौसम, कम विजिबिलिटी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। रात के समय इलाके में तलाशी और अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सुरक्षा बलों ने परिस्थितियों के बीच ऑपरेशन जारी रखा। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान भी चलाया गया, जिसमें हथियार और गोला-बारूद बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    मारे गए दोनों आतंकियों की पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। शुरुआती आशंका है कि दोनों पाकिस्तान के नागरिक हो सकते हैं। इसके साथ ही उनके कश्मीर टाइगर्स या जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई है। हालांकि, उनकी पहचान और किसी आतंकी संगठन से उनके संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां बरामद हथियारों और अन्य सुरागों के आधार पर दोनों की पहचान तथा उनके नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    उधमपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। सुरक्षाबलों की ओर से अभियान के दौरान सामने आए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। खासतौर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दोनों आतंकी इलाके में कब पहुंचे थे और क्या उनके साथ कोई अन्य सहयोगी या स्थानीय संपर्क भी मौजूद था।

    इससे पहले 15 सितंबर को राजौरी में भी सुरक्षाबलों ने आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। पीर पंजाल क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क का खुलासा करते हुए जाकिर हुसैन, मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुश्ताक को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई को क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उसके सहयोगी तंत्र के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा माना गया।

    जम्मू-कश्मीर में इस साल अब तक 15 आतंकी घटनाओं की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं में 15 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई है, जबकि दो सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। इसके अलावा तीन नागरिकों की भी मौत हुई है। उधमपुर जिले में इस वर्ष सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच दो बार मुठभेड़ हो चुकी है। ताजा ऑपरेशन में दो आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी और तलाशी गतिविधियां जारी रखी हैं।

  • सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी

    सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए नई चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने सऊदी अरब के लिए लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से वहां की यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा है। इस चेतावनी में क्षेत्र में संभावित हमलों, आतंकवाद और सुरक्षा जोखिमों को प्रमुख कारण बताया गया है।

    सऊदी अरब के लिए जारी लेवल-3 चेतावनी का अर्थ है कि अमेरिकी नागरिकों को वहां जाने से पहले सुरक्षा परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पश्चिम एशिया में लगातार बने तनाव के बीच अमेरिकी हितों और नागरिकों को संभावित खतरे की आशंका भी जताई गई है। विशेष रूप से ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को सुरक्षा चिंता का प्रमुख कारण बताया गया है।

    यमन से लगे सऊदी अरब के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लिए इससे भी सख्त लेवल-4 ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। इस स्तर की चेतावनी के तहत इन क्षेत्रों की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है। यमन सीमा के आसपास सुरक्षा स्थिति को अधिक संवेदनशील माना गया है, जहां सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और हमलों के कारण खतरा बढ़ने की बात कही गई है।

    चेतावनी में ड्रोन और मिसाइल हमलों के अलावा हवा में नष्ट किए गए हथियारों के मलबे से होने वाले नुकसान की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। किसी हमले को रोकने के दौरान गिरने वाला मलबा भी लोगों और संपत्ति के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में यमन सीमा के आसपास रहने या यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

    सऊदी अरब में सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे के आसपास के क्षेत्रों को भी संवेदनशील माना गया है। अमेरिकी नागरिकों के लिए इन इलाकों में सुरक्षा जोखिम अधिक होने की बात सामने आई है। क्षेत्रीय तनाव के चलते सऊदी अरब में अमेरिकी हितों को निशाना बनाए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

    यमन से लगी सीमा के अलावा उड़ानों पर पड़ने वाले असर को भी सुरक्षा स्थिति से जोड़ा गया है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाओं में रुकावट की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी कर्मचारियों की आवाजाही से संबंधित कुछ प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं, जिससे वहां की सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर चिंता का स्तर स्पष्ट होता है।

    अमेरिकी चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। सऊदी अरब को लेकर जारी सलाह में आम इलाकों और विशेष रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच अलग-अलग स्तर की चेतावनी दी गई है। जहां पूरे सऊदी अरब के लिए यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा गया है, वहीं यमन सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों के लिए यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी नागरिकों को सऊदी अरब की यात्रा की योजना बनाने से पहले मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों पर ध्यान देने और संभावित जोखिमों को समझने की सलाह दी गई है। सैन्य गतिविधियों, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा क्षेत्रीय तनाव के बीच जारी यह चेतावनी सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश के रूप में सामने आई है।