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  • फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट

    फर्जी पासपोर्ट रैकेट में 5वीं गिरफ्तारी: एजेंट नसीम धराया, कच्छ-नागपुर के मठों के पते पर भोपाल से बने 30 तक पासपोर्ट


    भोपाल। भोपाल और ग्वालियर से जुड़े फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच में अब एजेंट नेटवर्क की कड़ियां सामने आने लगी हैं। बांग्लादेशी नागरिकों के कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट हासिल करने के मामले में एसटीएफ ने पांचवीं गिरफ्तारी की है। भोपाल से पासपोर्ट एजेंट नसीम अख्तर को पकड़ा गया है। पूछताछ में सामने आया है कि वह 20 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में शामिल रहा। जांच के दौरान कच्छ और नागपुर के मठों के पतों का इस्तेमाल कर भोपाल से करीब 25 से 30 पासपोर्ट बनवाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    एसटीएफ के मुताबिक इस नेटवर्क में पासपोर्ट बनवाने के लिए लोगों से करीब 20 हजार रुपए तक लिए जाते थे। पुलिस वेरिफिकेशन को छोड़कर आवेदन से लेकर पासपोर्ट तैयार होने तक की ज्यादातर प्रक्रिया एजेंट संभालता था। इसी कड़ी में नसीम अख्तर की भूमिका सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसी उन सभी पासपोर्ट और उनमें इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है जिनमें नसीम की भूमिका बताई गई है।

    पूछताछ में नसीम ने बताया कि वह वर्ष 2016 से भोपाल के एमपी नगर इलाके में टूर एंड ट्रैवल्स का काम करता था। इसी कारोबार के दौरान वह पासपोर्ट संबंधी काम से जुड़ गया और बाद में पासपोर्ट एजेंट के तौर पर काम करने लगा। इसी दौरान भोपाल पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उसकी मुलाकात मित्यानंद भिक्षु उर्फ रेयाल चौधरी भिक्षु से हुई। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और कथित तौर पर पासपोर्ट बनवाने का काम शुरू हुआ।

    जांच के अनुसार मित्यानंद भिक्षु नसीम को पासपोर्ट बनवाने वाले लोगों के नाम और दस्तावेज उपलब्ध कराता था। नसीम उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन करता था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों की उत्पत्ति कहां से हुई और आवेदन में दर्ज पहचान तथा वास्तविक पहचान के बीच कितना अंतर था।

    नसीम के खिलाफ नागपुर में पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। एसटीएफ इस पुराने मामले और वर्तमान नेटवर्क के बीच किसी संभावित कड़ी की भी पड़ताल कर रही है।

    एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक इस मामले में नसीम से पहले प्रियान चौधरी जय चौधरी रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब नसीम पांचवां गिरफ्तार आरोपी है। जांच के लिए एसटीएफ की छह टीमें कई राज्यों में दबिश और पूछताछ कर रही हैं। करीब 25 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि अब तक 150 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि रियाल करीब 10 साल पहले भारत आया था। आरोप है कि उसने 2021-22 के आसपास बौद्ध भिक्षुओं के नाम पर नेटवर्क तैयार करना शुरू किया। इसके बाद साथियों के भारतीय नाम से दस्तावेज तैयार कराए गए और उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाए गए।

    मामले की जांच में कई ऐसे पासपोर्ट धारकों की जानकारी सामने आई है जिनके वास्तविक नाम और पासपोर्ट में दर्ज नाम अलग पाए गए हैं। यानी दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर पहचान बदलकर पासपोर्ट हासिल किए गए। एसटीएफ अब इन पासपोर्ट धारकों के विदेश यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का खुलासा होने की संभावना है।

  • पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक

    पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) बचाने के लिए कई फैसले लागू किए हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में अब सभी दुकानें बाज़ार, किराना स्टोर, ग्रोसरी और जनरल स्टोर, शॉपिंग मॉल पूरे हफ़्ते रात 9 बजे बंद हो जाएंगे. शादी हॉल और मैरिज टेंट रात 10 बजे तक बंद हो जाने चाहिए. रेस्टोरेंट और खाने-पीने की जगहें रात 11 बजे तक बंद हो जानी चाहिए. यही नहीं शादी समारोहों (Wedding Ceremonies) में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जा सकेगी. पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है।

    पाकिस्तान ईरान जंग की वजह से भीषण ईंधन संकट से गुजर रहा है. किफ़ायत के ये नए उपाय फ़िलहाल इस्लामाबाद तक ही सीमित हैं, लेकिन पाकिस्तान की फेडरल सरकार ने राज्यों को कहा है कि वे भी इस उपाय को अपनाएं। यही नहीं पाकिस्तान में अपनाए गए नए उपायों में सरकारी गाड़ियां खरीदने पर पूरी तरह रोक, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन आवंटन में 50% की कटौती शामिल है।

    खर्चा बचाने के लिए पाकिस्तान ने फ़ेडरल सरकार के कर्मचारियों के विदेश यात्रा करने पर तीन महीने की रोक लगा दी है. अगर मंत्री विदेश यात्रा पर जाएंगे तो उन्हें इकोनॉमी क्लास में ट्रेवल करने को कहा गया है. बता दें कि ईरान युद्ध, इकोनॉमी की खस्ताहालत और कर्जों ने पाकिस्तान को बुरा हाल कर रखा है. इसलिए पाकिस्तान सरकार को ये फैसले लेने पड़े हैं।

    पाकिस्तान ने मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इसी तरह के खर्च में कटौती के उपाय लागू किए थे. उन उपायों के तहत इस्लामाबाद ने दो हफ़्ते के लिए स्कूल बंद कर दिए थे, सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन की खपत कम कर दी थी, और ईंधन बचाने व सरकारी खर्च घटाने के मकसद से ऑफ़िस कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा था. अब पाकिस्तान एक बार फिर से ऐसे ही उपायों को अपना रहा है।

    पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीज़न ने गुरुवार को इस बारे में नोटिफ़िकेशन जारी किया और ये उपाय तुरंत लागू हो गए. ईंधन की खपत में कटौती और फ़ेडरल अधिकारियों के विदेश यात्रा पर प्रतिबंध समेत कुछ पाबंदियां कम से कम तीन महीने तक लागू रहेंगी।

    PAK के एक अखबार के अनुसार आम लोगों पर असर डालने वाले उपायों में पाकिस्तान सरकार ने निर्देश दिया है कि शादी से जुड़े सभी कार्यक्रमों और आयोजनों में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जाए. सरकार ने कहा है कि कमर्शियल जगहों के लिए जल्दी बंद होने का समय भी तय किया गया है. दुकानों, बाज़ारों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल और ग्रोसरी स्टोर को रात 9 बजे तक बंद करना होगा।

    शादी-ब्याह के हॉल, टेंट और दूसरे कमर्शियल वेन्यू जहां जश्न वाले कार्यक्रम होते हैं, उन्हें रात 10 बजे तक बंद करना होगा, जबकि रेस्टोरेंट, कैफ़े, खाने-पीने की जगहों और फ़ूड आउटलेट को रात 11 बजे तक बंद करना होगा. टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को इस पाबंदी से छूट दी गई है।


    सरकारी खर्च में 5% की कटौती

    – पाकिस्तान ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान कर्मचारियों से जुड़े खर्चों को छोड़कर अन्य खर्चों (Non-ERE) में हर महीने 5% की कटौती की जाएगी.
    – यह नियम पाकिस्तान के विदेशी मिशनों और विदेशों में तैनात अधिकारियों पर भी लागू होगा. विकास परियोजनाओं को खर्च में कटौती के दायरे से बाहर रखा गया है.
    – सरकार ने तीन महीने के लिए विदेश दौरों और यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगाने की भी घोषणा की है, जिसमें अनिवार्य दौरे भी शामिल हैं.
    – जिन मामलों में विदेश यात्रा ज़रूरी है वहां सरकारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों को इकॉनमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है.
    – एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये पाबंदियां मंत्रियों, सलाहकारों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के विशेष सहायकों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों पर लागू होती हैं.


    सरकारी डिनर और सेमिनार पर भी रोक

    – पाकिस्तान ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है, लेकिन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े कार्यक्रमों में इसमें छूट दी गई है. पाकिस्तान ने अपने सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के भीतर होने वाली बैठकों को छोड़कर, ज़्यादातर टेलीकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए बैठकें करें. सरकार के फ़ंड से होने वाले सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ़्रेंस पर भी रोक लगा दी गई है. अगर ऐसे कार्यक्रम करना ज़रूरी हो, तो विभागों से कहा गया है कि वे बाहरी जगहों पर पैसे खर्च करने के बजाय सरकारी सुविधाओं, जैसे ऑडिटोरियम और कमिटी रूम का इस्तेमाल करें।

  • 5 मिनट की गूगल मीट में अमेरिकी कंपनी ने 80 लोगों की पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से हटाया

    5 मिनट की गूगल मीट में अमेरिकी कंपनी ने 80 लोगों की पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से हटाया


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनी (American Financial Technology Company) ब्लू वाइन (BlueVine) ने महज पांच मिनट की गूगल मीट कॉल (Google Meet call) में 80 लोगों की अपनी पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम (Indian Customer Service Team) को ही निकाल बाहर किया है। आर/इंडिया वर्कप्लेस कम्युनिटी में एक प्रभावित कर्मचारी ने अपना दर्द साझा करते हुए घटना की पूरी जानकारी दी है। कर्मी ने बताया कि छंटनी वाले दिन मैनेजमेंट ने सभी 80 कर्मचारियों को ऑपरेशनल कारणों (कामकाजी वजहों) का हवाला देकर ऑफिस आने के बजाय घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा था।

    कर्मचारी अपनी शाम 6:30 बजे की सामान्य शिफ्ट कर रहे थे। शिफ्ट शुरू होने के ठीक 3 घंटे बाद, रात 9:30 बजे अचानक पूरी टीम को एक गूगल मीट लिंक के जरिये वर्चुअल मीटिंग में शामिल होने को कहा गया। मीटिंग शुरू होते ही सीनियर मैनेजमेंट ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या नोटिस के सीधे तौर पर कह दिया कि पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जा रहा है। यह पूरी बातचीत महज 5 मिनट में खत्म हो गई।

    प्रबंधन ने कथित तौर पर प्रदर्शन से जुड़ी समस्याओं (परफॉरमेंस इश्यू) और अपेक्षाओं के अनुरूप आउटपुट न मिलने का हवाला दिया है। प्रभावित कर्मचारियों ने इन आरोपों को नकारा है और सोशल मीडिया पर अपनी निराशा व्यक्त की है।


    डिजिटल बैंक और वित्तीय सेवा प्रदाता है कंपनी

    अमेरिकी कंपनी डिजिटल बैंक और वित्तीय सेवा प्रदाता है। यह अमेरिका में छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायों को बैंकिंग, लोन और पेमेंट जैसी वित्तीय सेवाएं देती है। इस कंपनी का मुख्यालय न्यू जर्सी में है। कंपनी में वैश्विक स्तर पर करीब 1,000 कर्मचारी है। भारत में काम कर रही इसकी पूरी कस्टमर सपोर्ट यूनिट में 80 कर्मचारी थे, जिन्हें एक साथ इस कॉल के जरिये निकाला गया।


    एक्सेस तुरंत ब्लॉक किया :

    जैसे ही 5 मिनट की गूगल मीट खत्म हुई, कर्मचारियों के ऑफिशियल ईमेल, स्लैक और कंपनी के अन्य सभी सिस्टम के एक्सेस तुरंत बंद कर दिए गए। उन्हें अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिला।


    एआई बना छंटनी की वजह :

    कंपनी ने हाल ही में कॉल और ईमेल सपोर्ट के लिए एआई टूल्स को लागू किया था, जिसके बाद इंसानी कॉल्स के वॉल्यूम में 30% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। बचे हुए काम को संभालने के लिए कंपनी ने किसी बाहरी थर्ड-पार्टी वेंडर को काम सौंप दिया है, जिससे उन्हें इन पक्के कर्मचारियों की जरूरत नहीं रही। प्रभावित कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में लिखा, सभी 80 कर्मचारी। सब चले गए… सिर्फ एक 5 मिनट की कॉल से 80 परिवार प्रभावित हुए हैं। हम इन कॉरपोरेट्स के लिए दिन-रात इतनी मेहनत करते हैं जो हमें कभी भी उठाकर अपनी कंपनी से बाहर फेंक सकते हैं।


    नए भर्ती कर्मियों को कोई हर्जाना नहीं मिलेगा

    प्रभावित टीम में अलग-अलग समय से काम कर रहे लोग शामिल थे। कुछ पुराने अनुभवी कर्मचारी थे, जबकि कुछ नए लोग भी थे जिन्होंने हाल ही में कंपनी जॉइन की थी। रेडिट पोस्ट और रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के इस अचानक फैसले में नए भर्ती हुए कर्मचारियों को कोई भी हर्जाना नहीं दिया गया है, जिसने कर्मचारियों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। जिन नए कर्मचारियों को हाल ही में भर्ती किया गया था, उन्हें बिना किसी नोटिस पीरियड और बिना किसी हर्जाने के तुरंत निकाल दिया गया है।

    कंपनी की पॉलिसी के अनुसार कुछ योग्य या पुराने कर्मचारियों को ही केवल उनके कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक नोटिस पीरियड का भुगतान मिलने की बात कही गई है, लेकिन किसी भी प्रकार के अतिरिक्त 15 दिन के वेतन या मुआवजे का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

    कर्मचारी की पोस्ट पर कई रेड्डिट यूजर्स की प्रतिक्रिया भी आई है। सभी लोग कंपनी की क्रूरता को लेकर प्रबंधन की आलोचना कर रहे हैं। कई लोग उन कर्मचारियों कों सांत्वना दे रहे हैं जिनकी ऐसे अचानक से नौकरी चली गई।

  • नाम या सामान भूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार-बार रास्ता भूलना और फैसलों में परेशानी खतरे का संकेत

    नाम या सामान भूलना सामान्य हो सकता है, लेकिन बार-बार रास्ता भूलना और फैसलों में परेशानी खतरे का संकेत

    नई दिल्ली ।उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में कुछ बदलाव आना सामान्य माना जा सकता है। किसी व्यक्ति का नाम तुरंत याद न आना, सामान रखने के बाद उसकी जगह भूल जाना या किसी तारीख को याद करने में थोड़ा अधिक समय लगना उम्र से जुड़ी सामान्य भूल का हिस्सा हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति आमतौर पर अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां खुद करने में सक्षम रहता है।

    हालांकि, हर तरह की भूल को उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। बढ़ती उम्र में डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी स्थितियों का खतरा भी बढ़ सकता है। डिमेंशिया में केवल याददाश्त ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि सोचने-समझने, निर्णय लेने, ध्यान केंद्रित करने और भाषा से जुड़ी क्षमताओं में भी बदलाव आ सकता है। इसका असर धीरे-धीरे व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन पर दिखाई देने लगता है।

    सामान्य उम्र से जुड़ी भूल और डिमेंशिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि डिमेंशिया की स्थिति में व्यक्ति की स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार एक ही सवाल पूछ रहा है, परिचित जगह पर जाने के बावजूद रास्ता भूल जाता है या सामान्य बातचीत के दौरान जरूरी शब्द याद नहीं कर पाता, तो इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।

    पैसों और जरूरी दस्तावेजों को संभालने में अचानक परेशानी होना भी एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। बिलों का हिसाब रखने, रोजमर्रा के कामों की योजना बनाने या पहले आसानी से किए जाने वाले फैसले लेने में लगातार कठिनाई होने लगे तो इसे केवल उम्र का असर मानना सही नहीं है।

    कुछ मामलों में व्यक्ति के व्यवहार और व्यक्तित्व में भी बदलाव दिखाई दे सकता है। पहले की तुलना में बातचीत करने, ध्यान लगाने या सामान्य परिस्थितियों को समझने में परेशानी बढ़ सकती है। यदि ऐसे बदलाव लगातार दिखाई दे रहे हैं और उनकी वजह से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी हो सकता है।

    दूसरी ओर, याददाश्त कमजोर होने का अर्थ हमेशा डिमेंशिया नहीं होता। इसके पीछे कई ऐसे कारण भी हो सकते हैं जिनकी पहचान और उपचार संभव है। नींद की समस्या, लंबे समय तक बना तनाव, डिप्रेशन, थायरॉइड से जुड़ी परेशानी और विटामिन बी12 जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी याददाश्त और ध्यान को प्रभावित कर सकती है।

    इसलिए बुजुर्ग व्यक्ति में अचानक या तेजी से बढ़ती याददाश्त की समस्या को खुद से डिमेंशिया का संकेत मान लेना उचित नहीं है। समस्या के पीछे वास्तविक कारण जानने के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी होता है। लक्षणों की अवधि, उनकी गंभीरता और रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाता है।

    परिवार के सदस्यों की भूमिका भी इस दौरान महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी बुजुर्ग व्यक्ति में बार-बार भूलने के साथ व्यवहार, भाषा, निर्णय लेने या रोजमर्रा के काम करने की क्षमता में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच से समस्या के कारण को समझने और आवश्यक कदम तय करने में मदद मिल सकती है।

  • फिजी में तेजी से बढ़ रहे एचआईवी के मामले, नेशनल इमरजेंसी घोषित

    फिजी में तेजी से बढ़ रहे एचआईवी के मामले, नेशनल इमरजेंसी घोषित


    सुवा।
    दक्षिण प्रशांत महासागर (South Pacific Ocean) के मेलानेशिया देश फिजी (Fiji) में एचआईवी (HIV) के मामले बेकाबू होने के बाद राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) घोषित कर दिया गया है। स्थिति यह है कि हर 60 में से एक वयस्क संक्रमित है, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 167 में एक था।

    देश में मुफ्त टेस्टिंग, इलाज और रोकथाम के उपाय युद्ध स्तर पर शुरू किए गए हैं। एचआईवी से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मरने वाले बच्चों की संख्या भी बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्री एंटोनियो लालाबालावु ने कहा कि मैं औपचारिक रूप से फिजी में राष्ट्रीय एचआईवी आपातकाल की घोषणा कर रहा हूं। यह निर्णय इस महामारी की गंभीरता को देखते हुए लिया गया है। फिलहाल इसकी हमारे देश को सख्त आवश्यकता है।


    भारत कर रहा मदद

    संकट से निबटने के लिए फिजी को भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, द ग्लोबल फंड और संयुक्त राष्ट्र से सहायता मिल रही है। अभी करीब 9100 फिजीवासी एचआईवी के साथ जी रहे हैं। यूएनएड्स के अनुसार फिजी में नए संक्रमणों में दुनिया की सबसे तेज़ी से होने वाली बढ़ोतरी देखी जा रही है। देश की आबादी करीब 9 लाख है।


    इस क्षेत्र में ड्रग्स का जाल

    फिजी सहित प्रशांत द्वीप, लैटिन अमेरिका और एशिया से ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड में भेजी जाने वाली नशीली दवाओं के लिए ट्रांजिट हब रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान आई कमी के बाद मेथमफेटामाइन और कोकीन जैसी लत लगाने वाले ड्रग्स की सप्लाई तेजी से बढ़ी है। यह ड्रग्स अब स्थानीय बाजारों में फैल रही है।


    सर्वाधिक प्रभावित देश

    इस्वातिनी, दक्षिण अफ्रीका, लोसेटो, बोत्सवाना, मोजांबिक, जिम्बावे दुनिया में एचआईवी से सबसे प्रभावित देश हैं।


    भारत में एचआईवी संक्रमण की स्थिति

    – देश में 26 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित
    – देश में वयस्कों में एचआईवी का प्रसार 0.2 प्रतिशत है
    – 2010 से अब तक नये वार्षिक एचआईवी संक्रमणों में 44 प्रतिशत की कमी आई
    – भारत में सभी गर्भवती महिलाओं का एचआईवी परीक्षण कराया जाता है
    – प्रतिवर्ष तीन करोड़ निःशुल्क एचआईवी जांच होती है

  • मुख्यमंत्री जी, 'दीये जलाने से फुर्सत मिल गई हो तो जमीनी हालत भी देखिए- इंदौर आने से पहले राहुल गांधी का तंज

    मुख्यमंत्री जी, 'दीये जलाने से फुर्सत मिल गई हो तो जमीनी हालत भी देखिए- इंदौर आने से पहले राहुल गांधी का तंज


    इंदौर।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के 76वें जन्मदिन पर देशभर में ‘आशीर्वाद के दीये’ (‘Lamps of Blessing’) जलाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) द्वारा दीये जलाने पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने तंज भरे लहजे में लिखा- ‘मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए।’ इसके बाद उन्होंने लिखा- ‘मैं इंदौर आ रहा हूं।’


    आखिर किस बात पर भड़के राहुल गांधी

    दरअसल, राहुल गांधी ने बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मौत पर सीएम मोहन यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने सीएम पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए एक्स पर लिखा- ‘बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।’


    दीये जलाने पर राहुल गांधी का तंज

    इसके बाद सीएम पर तंज भरे लहजे में लिखा- ‘मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो जरा राज्य की जमीनी हालत भी देखिए।’ राहुल गांधी ने याद दिलाते हुए लिखा- ‘बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है। मिलावटी दवाइयां और जहरीली अवैध शराब सैकड़ों परिवारों को तबाह कर रही हैं।’


    राहुल गांधी बोले- मैं इंदौर आ रहा हूं…

    राहुल गांधी ने अपने इंदौर आने की बात भी लिखी। उन्होंने लिखा- ‘मैं इंदौर आ रहा हूं। सामने आ रही भयावह घटनाएं बता रही हैं कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज देश भर में सबसे ज़्यादा बर्बाद है। छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं – हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं। मध्य प्रदेश सरकार आज भारत की सबसे भ्रष्ट और सबसे कुशासित सरकार है – यही सच्चाई है।’

    बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही।


    19 सितंबर को इसलिए इंदौर आ रहे राहुल गांधी

    आपको बताते चलें कि राहुल गांधी के इंदौर आने की वजह आ 19 सितंबर को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल होना है। इस दौरान प्रदेश के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। इसी सिलसिले में राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के अंत में मध्य प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोप भी लगाए।

  • US में ब्याज दरें बढ़ने का भारत में भी दिखेगा असर… रुपया, सोना और शेयर बाजार होगा प्रभावित

    US में ब्याज दरें बढ़ने का भारत में भी दिखेगा असर… रुपया, सोना और शेयर बाजार होगा प्रभावित


    नई दिल्ली।
    करीब तीन साल के अंतराल के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (American Central bank Federal Reserve) ने ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे ब्याज दरें (Interest rates) 3.75 से 4% तक पहुंच गई हैं। फेडरल रिजर्व के इस रुख के बाद दुनियाभर के बाजारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसका सबसे तगड़ा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं, खासकर भारत (India) पर बिल्कुल साफ दिखेगा।

    अमेरिकी दरें बढ़ने से डॉलर इंडेक्स मजबूत होकर एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इसके दबाव में रुपया कमजोर होकर 95 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। रुपये की इस कमजोरी से आयातित महंगाई बढ़ने का खतरा है।


    विदेशी निवेशकों की निकासी

    अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से वैश्विक निवेशक सुरक्षित अमेरिकी संपत्तियों की तरफ रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली और तेज हो सकती है। इस साल अब तक एफपीआई भारतीय बाजार से 2.41 लाख करोड़ रुपये से अधिक निकाल चुके हैं। इस फैसले से सोने की चमक पर भी अल्पकालिक दबाव के आसार हैं। 


    आपकी जेब पर क्या होगा असर?

    बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाएगा, जिसके चलते वे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे। जिन लोगों के लोन फ्लोटिंग रेट पर हैं, उनकी मासिक ईएमआई बढ़ जाएगी, जिससे आम जनता के पास खर्च करने योग्य आय कम हो जाएगी। कर्ज लेने वालों के लिए जहां यह बुरी खबर होगी, वहीं बचत करने वाले सीनियर सिटीजन और निवेशकों को बैंक एफडी पर पहले से बेहतर ब्याज मिलना शुरू हो जाएगा।


    क्या आरबीआई बढ़ाएगा ब्याज दरें?

    जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी नीतिगत दरों में बदलाव करता है, तो आरबीआई ब्याज दर के अंतर, पूंजी प्रवाह और मुद्रा बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव पर करीब से नजर रखता है। हालांकि, आरबीआई के नीतिगत फैसले घरेलू महंगाई, विकास और अन्य आर्थिक स्थितियों से भी तय होते हैं। घरेलू मुद्रास्फीति का दबाव बना हुआ है, ऐसे में आरबीआई को पूंजी की निकासी और मुद्रा की स्थिरता को लेकर अतिरिक्त बातों पर विचार करना पड़ सकता है।

    एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेस का मानना है कि देश में महंगाई के दबाव को देखते हुए अक्तूबर में होने वाली समीक्षा बैठक में आरबीआई 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। एचडीएफसी बैंक का मानना है कि आरबीआई दिसंबर तक इंतजार कर सकता है ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि महंगाई का दबाव कितना व्यापक और टिकाऊ है।

  • MP: उज्जैन में शिप्रा और महाकाल महालोक में एकसाथ जले 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

    MP: उज्जैन में शिप्रा और महाकाल महालोक में एकसाथ जले 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में गुरुवार शाम शिप्रा नदी (Shipra River) के घाटों से लेकर महाकाल महालोक (Mahakal Mahalok) तक ऐसा दीपोत्सव हुआ, जिसमें एक साथ लाखों दीये प्रज्ज्वलित किए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिप्रा तट और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये एक साथ जलाए गए.

    आयोजकों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर एक साथ दीप प्रज्ज्वलित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. यह आयोजन ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत के तौर पर किया गया. उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह मौजूद रहे. सभी ने उज्जैनवासियों के साथ मिलकर दीप प्रज्ज्वलित किए।

    कार्यक्रम के लिए शाम 7 बजे का समय तय किया गया था. सायरन बजते ही शिप्रा नदी के अलग-अलग घाटों और महाकाल महालोक में एक साथ दीप प्रज्ज्वलन शुरू हुआ. इस दौरान 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स के साथ श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए. कुछ ही देर में शिप्रा के घाटों पर दूर तक दीयों की कतारें दिखाई देने लगीं. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट समेत अलग-अलग स्थान रोशनी से जगमगा उठे. महाकाल महालोक में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए. दीयों की रोशनी के बीच शिप्रा तट का नजारा काफी आकर्षक नजर आया. बड़ी संख्या में लोग इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन का हिस्सा बने. आयोजन में शामिल लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।


    रामघाट पर मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

    उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया. उनके साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह भी मौजूद रहे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य अतिथियों ने शिप्रा आरती में हिस्सा लिया. मां शिप्रा की आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की गई. आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, दीप प्रज्ज्वलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के दौरान राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र सेवा से जोड़कर देखा गया. इसी भाव के साथ उज्जैन में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    उज्जैन में शिप्रा के विभिन्न घाटों और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन को आयोजकों ने विश्व रिकॉर्ड बताया है. इससे पहले कार्यक्रम के लिए 25 लाख से ज्यादा दीये जलाने की तैयारी की गई थी, लेकिन अंतिम आयोजन में यह संख्या 33.27 लाख तक पहुंची. दीप प्रज्ज्वलन के दौरान बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स की भूमिका रही. घाटों पर पहले से दीयों को व्यवस्थित किया गया था. सायरन बजने के बाद सभी ने एक साथ दीप जलाना शुरू किया, जिससे कुछ ही समय में पूरा आयोजन क्षेत्र रोशनी से भर गया।

    यह दीपोत्सव सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं रहा. आयोजन के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों और 845 आइकॉनिक प्लेस पर भी एक साथ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. आयोजकों के अनुसार, पूरे प्रदेश में कुल 3 करोड़ 55 लाख दीये जलाए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में प्रदेशभर के अलग-अलग स्थानों को दीपों से सजाया गया. उज्जैन इसका मुख्य केंद्र रहा, जहां शिप्रा तट और महाकाल महालोक में एक साथ 33 लाख 27 हजार दीये जलाए गए।


    घाटों से महाकाल महालोक तक रोशनी

    शाम होते ही उज्जैन के प्रमुख घाटों का दृश्य बदल गया. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट पर दीयों की कतारें नजर आईं. दूसरी तरफ महाकाल महालोक भी दीपों की रोशनी से जगमगा उठा. हजारों श्रद्धालुओं और नागरिकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने का दृश्य लोगों के लिए खास आकर्षण रहा. 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स ने इस आयोजन में हिस्सा लिया. उज्जैन में हुए इस दीपोत्सव के साथ आयोजकों के अनुसार विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. वहीं पूरे मध्य प्रदेश में 845 आइकॉनिक प्लेस समेत अलग-अलग स्थानों पर 3.55 करोड़ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के जरिए प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया गया।

  • शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

    शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

    18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

    रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

    कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

    सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

    18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब

    MP: लाड़ली बहना योजना पर हर माह 1,900 करोड़ रुपये खर्च… HC ने सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) को लेकर अब हाईकोर्ट (High Court) में सवाल उठाए गए हैं. योजना की उपयोगिता, सरकारी खजाने पर पड़ रहे आर्थिक भार और महिलाओं को दी जा रही राशि के इस्तेमाल को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच (High Court Gwalior Bench) ने मामले में प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. ग्वालियर की सुधा दुबे की ओर से दायर इस जनहित याचिका में योजना से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कोर्ट में पक्ष रखा. हाईकोर्ट ने सरकार से योजना के लाभार्थियों, उन्हें दी जा रही राशि और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से योजना के तहत खर्च होने वाली सरकारी राशि के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया है. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा का कहना है कि महिलाओं के कल्याण के नाम पर खर्च हो रहे सरकारी पैसे का इस्तेमाल रोजगार और स्थायी आर्थिक अवसर पैदा करने में किया जा सकता था. उनका तर्क है कि अगर महिलाओं के हित में पैसा खर्च करना था तो इससे उद्योग-धंधे या रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते थे. उनका कहना है कि रोजगार के जरिए पैसा आर्थिक गतिविधियों में बना रह सकता है और महिलाओं को लंबे समय तक इसका फायदा मिल सकता है. अनिल मिश्रा ने सवाल उठाया कि सरकार इस पैसे से क्या फायदा हासिल कर रही है, यह स्पष्ट होना चाहिए. उनके मुताबिक, सीधे राशि देने की बजाय अगर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो उससे आर्थिक गतिविधियों का एक चक्र बन सकता है।

    सरकारी खजाने पर पड़ रहे बोझ को लेकर उठे सवाल

    वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने योजना के खर्च को लेकर दावा किया कि हर महीने करीब 1,900 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने सरकारी खजाने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर कर्ज लेकर पैसा बांटा जाएगा तो बेरोजगारी और बढ़ सकती है. उनके मुताबिक, जनता के टैक्स से आने वाले पैसे का इस्तेमाल डेवलपमेंट, एजुकेशन और रोजगार जैसे क्षेत्रों में किया जाना चाहिए. वकील ने यह भी दावा किया कि मध्य प्रदेश पर करीब 3.08 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. हालांकि यह आंकड़ा और इससे जुड़े आर्थिक प्रभाव याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलीलों का हिस्सा हैं. इन दावों पर राज्य सरकार का जवाब अभी सामने आना बाकी है।

    याचिकाकर्ता की ओर से लाड़ली बहना योजना के लागू होने के समय को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. अनिल मिश्रा ने कहा कि योजना मार्च 2023 में लागू की गई थी और उस समय चुनाव का माहौल था. उन्होंने योजना को चुनाव के समय तोहफे बांटने जैसी स्थिति बताते हुए इस पर सवाल उठाया. यह याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलील है. इस मामले में सरकार का पक्ष अभी आना बाकी है।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है. कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी है कि योजना के कितने लाभार्थी हैं और उनके लिए कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है. सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करना है. सरकारी वेबसाइट पर वर्तमान में करीब 1 करोड़ 25 लाख पात्र आवेदक दर्ज हैं. याचिकाकर्ता की ओर से इसी योजना के वित्तीय असर और इसके उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कहा कि सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किए हैं, ताकि सरकार इन सवालों पर अपना जवाब दे सके. अब सरकार को योजना से जुड़े आंकड़े और रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने हैं।


    रोजगार और स्वरोजगार के जरिए महिलाओं को मजबूत किया जाए

    लाड़ली बहना योजना को लेकर हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बावजूद फिलहाल योजना को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है. कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले की आगे की कार्रवाई सरकार के जवाब के बाद होगी. याचिकाकर्ता की मुख्य दलील है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सीधे भुगतान के बजाय रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर पैदा करने पर सरकारी धन खर्च किया जाना चाहिए. अब इस मामले में सरकार के जवाब पर नजर रहेगी. सरकार को यह बताना होगा कि योजना का उद्देश्य क्या है, इसके तहत कितने लाभार्थी हैं, कितनी राशि वितरित की जा रही है और योजना से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड क्या हैं. इसके बाद हाईकोर्ट में मामले की आगे सुनवाई होगी।