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  • नवरात्रि में व्रत क्यों है जरूरी? आयुर्वेद बताता है शरीर और मन का संतुलन

    नवरात्रि में व्रत क्यों है जरूरी? आयुर्वेद बताता है शरीर और मन का संतुलन


    नई दिल्ली। नवरात्रि में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी आयुर्वेदिक सोच भी जुड़ी हुई है। अक्सर लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ और परंपरा से जोड़कर देखते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर को अंदर से रीसेट करने और संतुलित करने का एक प्राकृतिक तरीका है।

    दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम बदल रहा होता है। यह संक्रमण काल शरीर के लिए संवेदनशील माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में व्रत रखने से शरीर को आराम मिलता है और वह खुद को संतुलित करने की प्रक्रिया शुरू करता है।

    नवरात्रि के व्रत में लोग हल्का और सात्विक भोजन जैसे फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना लेते हैं। यह भोजन पचने में आसान होता है और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव नहीं डालता। रोजमर्रा के तले-भुने और मसालेदार खाने से जो अतिरिक्त बोझ शरीर पर पड़ता है वह इस दौरान कम हो जाता है। इससे शरीर को खुद को ठीक करने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है।

    आयुर्वेद में पाचन शक्ति जिसे अग्नि कहा जाता है को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि कमजोर होती है तो शरीर में अपच और विषैले तत्व यानी टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। व्रत रखने से यह अग्नि दोबारा सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही कारण है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं।

    नवरात्रि का व्रत केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फायदेमंद होता है। इस दौरान लोग ध्यान पूजा और संयम का पालन करते हैं जिससे मानसिक शांति मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स बन जाता है जहां व्यक्ति खुद को थोड़ा धीमा करके अंदर से संतुलित करता है।

    इसके अलावा व्रत में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। ये खाद्य पदार्थ न केवल हल्के होते हैं बल्कि मौसमी बीमारियों से बचाव में भी सहायक होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नवरात्रि का व्रत शरीर और मन दोनों को संतुलित करने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है। यह परंपरा हमें न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी साबित होती है।

  • सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी

    सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी


    नई दिल्ली। Indian Railways ने आम यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए नॉन एसी कोचों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश के करोड़ों लोग कम खर्च में आरामदायक और सुलभ यात्रा कर सकें। इसी दिशा में जनरल और स्लीपर श्रेणी के कोचों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।

    रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में कुल कोचों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जनरल और स्लीपर क्लास का है जो इस बात को दर्शाता है कि रेलवे आम जनता की जरूरतों को केंद्र में रखकर काम कर रहा है। वर्ष 2024 25 में करीब 1250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025 26 में लगभग 860 और कोच जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों की भीड़ को कम करने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

    सरकार यात्रियों को राहत देने के लिए किराए पर औसतन लगभग 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। हर साल करीब 60000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि आम आदमी की यात्रा सस्ती बनी रहे। वहीं मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों में अतिरिक्त 3000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलता है।

    रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि रेलवे केवल यात्री सेवाओं में ही नहीं बल्कि माल ढुलाई में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। फ्रेट परिवहन 2013 14 के 1055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1650 मिलियन टन तक पहुंच गया है जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन चुका है।

    रेलवे के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक लगभग 47000 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है जो कुल नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही ट्रैक निर्माण में भी बड़ी वृद्धि हुई है और यह 15000 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 35000 किलोमीटर तक पहुंच गया है।

    सुरक्षा के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज की संख्या 4000 से बढ़कर 14000 हो गई है जबकि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1500 किलोमीटर से बढ़कर 4000 किलोमीटर से अधिक हो गई है। इसके अलावा एलएचबी कोचों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है जो यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।

    रेल मंत्री ने यह भी बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना में तेजी आई है और अब तक लगभग 2800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है जहां प्रतिदिन सैकड़ों मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। सरकार नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के सहयोग से परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को भी मजबूत कर रही है इस तरह भारतीय रेलवे सस्ती सुरक्षित और आधुनिक यात्रा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाएगा।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की ‘भव्य’ योजना को दी मंजूरी, बनेंगे 100 इंडस्ट्रियल पार्क

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की ‘भव्य’ योजना को दी मंजूरी, बनेंगे 100 इंडस्ट्रियल पार्क


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारत औद्योगिक विकास योजना, जिसे ‘भव्य योजना’ कहा गया है, को मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 100 प्लग-इन-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे। इन पार्कों का उद्देश्य औद्योगिक विकास को तेज करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

    विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण

    सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘भव्य’ योजना का उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। इसके जरिए देश की निर्माण क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक वृद्धि को नई गति मिलेगी। यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत विकसित स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी मॉडल की सफलता पर आधारित है और इसमें राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी शामिल होगी।

    व्यापार करने में आसानी और इंजीनियरों के लिए सुविधाएं

    ‘भव्य’ योजना में सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए से मंजूरी प्रक्रिया को आसानी से बनाया जाएगा। इंजीनियरों को पहले से तैयार जमीन, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी, जिससे कंपनियां जल्दी काम शुरू कर सकेंगी। इन इंडस्ट्रियल पार्कों का आकार 100 से 1,000 एकड़ तक होगा। सरकार प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता देगी। इसमें शामिल हैं:

    सड़क, बिजली और पानी

    ड्रेनेज और आईटी सिस्टम

    फैक्ट्री शेड और वेयरहाउस

    टेस्टिंग लैब

    साथ ही, वर्कर्स के लिए आवास और सामाजिक सुविधाएं और बाहरी समझौतों के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक समर्थन प्रदान किया जाएगा।

    चयन प्रक्रिया और भविष्य की तैयारी

    इन पार्कों का चयन चुनौती मोड के माध्यम से किया जाएगा, ताकि केवल बेहतर और निवेश के लिए तैयार प्रस्ताव चुनें जाएं। पार्कों का डिजाइन पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुरूप होगा, जिसमें मल्टीमॉडल समझौते, लॉजिस्टिक्स सुविधा और ग्रीन एनर्जी पर जोर होगा।अंडरग्राउंड यूटिलिटी सिस्टम के माध्यम से बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उद्योग बिना काम कर सकेंगे।

    रोजगार और आर्थिक विकास

    सरकार का गठन है कि ‘भावी’ योजना से बड़े स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। इसमें कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के लाखों लोग शामिल होंगे। योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, जिससे औद्योगिक विकास को समान रूप से गति मिलेगी। क्लस्टर-आधारित विकास के माध्यम से यह योजना उद्योग, सप्लायर और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक साथ लाएगी, जिससे सेवाएं मजबूत होंगी और क्षेत्रीय औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

    लाभांश

    इस योजना का सीधा लाभ:

    निर्माण इकाइयाँ

    लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME)

    स्थानीय अप्स

    वैश्विक निवेशक

    अप्रत्यक्ष लाभ:

    मजदूर

    लॉजिस्टिक्स कंपनियाँ

    सर्विस सेक्टर

    स्थानीय समुदाय

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की भव्य योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत 100 प्लगइन-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क बनेंगे। योजना से इंजीनियरों के लिए आसान सुविधाएं, बेहतर समन्वय, ग्रीन एनर्जी और रोजगार सृजन सुनिश्चित होगा। यह निर्माण, MSME, प्रदूषण और स्थानीय समुदाय के लिए लाभकारी और समावेशी औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

  • किसानों के लिए बढ़ी उम्मीद: 1,718.56 करोड़ रुपये का MSP फंड अब CCI को मंजूर

    किसानों के लिए बढ़ी उम्मीद: 1,718.56 करोड़ रुपये का MSP फंड अब CCI को मंजूर


    नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) की बैठक में कॉटन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) को 1,718.56 करोड़ रुपये का फंड दिया गया। यह राशि कॉटन सीजन 2023-24 के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लागू करने और किसानों को प्रत्यक्ष मूल्य समर्थन देने के उद्देश्य से दी जाएगी।

    2023-24 कॉटन सीजन का आंकड़ा

    इस सीजन में गेहूं की खेती का क्षेत्रफल 114.47 लाख हेक्टेयर था और उत्पादन लगभग 325.22 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। यह वैश्विक कॉटन उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। ऐसे में किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

    केंद्र सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर कॉटन के लिए MSP निर्धारित करती है। इस प्रणाली का उद्देश्य विशेष रूप से उन समयों में किसानों की सुरक्षा करना है, जब बाजार मूल्य MSP से नीचे गिर जाते हैं।

    MSP से किसानों को क्या फ़ायदा

    CCI केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में MSP ऑपरेशन सुनिश्चित करती है। बाज़ार में कीमत गिरने पर यह किसानों से सभी औसत क्वालिटी (FAQ) वाली कपास बिना किसी मात्रा सीमा के खरीदती है। इससे किसानों को सुरक्षित और लाभकारी मूल्य मिलता है।

    CCI ने तैयारियों के तहत पूरे भारत के 11 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में 152 जिलों में 508 से ज़्यादा खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। इससे किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया सरल, सुलभ और सुनिश्चित बनती है।

    कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण कपास की खेती में से एक है। यह लगभग 6 लाख किसानों की खेती का आधार है। इसके अलावा कपास प्रसंस्करण, व्यापार और वस्त्र उद्योग सहित संबंधित गतिविधियों में 400-500 लाख लोगों को रोज़गार देता है।

    MSP के ऑपरेशन से न केवल कपास की खेती को स्थिर रखा जाता है, बल्कि किसानों को मजबूरी में बिक्री रोकने और लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है। यह उपाय कृषि बाजारों में समावेशिता बढ़ाने और कपास उत्पादक समुदाय की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में CCEA ने CCI को 1,718.56 करोड़ रुपये MSP फंड दिया। इससे कपास किसानों को मूल्य सुरक्षा, लाभकारी कीमतें और बाजार स्थिरता मिलेगी। सीजन 2023-24 में गेहूं उत्पादन 325.22 लाख किसान तक पहुंचने का अनुमान है। CCI के 508 से अधिक खरीद केंद्र किसानों को सुलभ और सुनिश्चित खरीद का लाभ देंगे। यह कदम कपास उत्पादक समुदाय की आर्थिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट और तेल-एलएनजी आयात की चुनौतियां

    भारत की ऊर्जा सुरक्षा: होर्मुज स्ट्रेट और तेल-एलएनजी आयात की चुनौतियां


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। भारत अपनी सीक्रेट डिप्लोमेसी और रणनीतिक कदमों के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिशों में लगा है। हालात ऐसे हैं कि अमेरिका को नाटो देशों से अपील करनी पड़ रही है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए युद्धपोत भेजें।

    भारत ने इस चुनौती के बीच भी अपने दो तेल टैंकर शिप्स को होर्मुज स्ट्रेट से निकालकर भारतीय समुद्री तट पर पहुंचा दिया है जबकि कई अन्य शिप्स की वापसी की संभावना बनी हुई है। भारत लगभग 85-89 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और इसमें से पहले लगभग 55 फीसदी तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता था। अब यह आंकड़ा लगभग 70 फीसदी तक बढ़ गया है। भारत की दैनिक तेल खपत लगभग 55 लाख बैरल है और यह तेल लगभग 40 देशों से आयात किया जाता है।

    भारत का कच्चा तेल मुख्य रूप से रूस इराक सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आता है। इसके अलावा अमेरिका से तेल आयात बढ़ा है। खाड़ी और मिडिल ईस्ट में कुवैत कतर ओमान और मिस्र; अफ्रीका में नाइजीरिया अंगोला लीबिया और अल्जीरिया; अमेरिका महाद्वीप में कनाडा मेक्सिको और ब्राजील; मिडिल एशिया में कजाकिस्तान और अजरबैजान भारत के तेल आपूर्तिकर्ता हैं।

    प्राकृतिक गैस की बात करें तो भारत की कुल खपत लगभग 189 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है जिसमें से घरेलू उत्पादन 97.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन है। अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण लगभग 47.4 मिलियन घन मीटर की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

    रसोई गैस में भारत लगभग 60 फीसदी आयात पर निर्भर है। इस आयात का करीब 90 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। हालात प्रभावित होने के बावजूद घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 फीसदी की वृद्धि कर इसे संतुलित किया गया है। भारत मुख्य रूप से कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से एलपीजी आयात करता है जबकि अमेरिका भी इस सूची में शामिल हो गया है।

    एलएनजी में भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता कतर है जिससे कुल एलएनजी का 47-50 फीसदी आता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ओमान नाइजीरिया अंगोला ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी एलएनजी आती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट इसलिए इतना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया के तेल और गैस व्यापार का मुख्य मार्ग है। यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल व गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

    भारत ने रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय सहयोग के जरिए भारतीय समुद्री शिप्स को सुरक्षित मार्ग मुहैया कराया जा रहा है।

  • यूपी में हर घर जल का सपना होगा और मजबूत, जल जीवन मिशन 2.0 की औपचारिक शुरुआत

    यूपी में हर घर जल का सपना होगा और मजबूत, जल जीवन मिशन 2.0 की औपचारिक शुरुआत

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल की पहुंच को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़ी पहल की गई है जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं यह समझौता मिशन के अगले चरण की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है

    इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे और वर्चुअल माध्यम से इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया इस पहल का मुख्य उद्देश्य हर घर तक नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह समझौता हर घर नल से जल के लक्ष्य को तेजी से पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है इससे जलापूर्ति योजनाओं को बेहतर योजना और समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सकेगा उन्होंने यह भी कहा कि इसका सीधा लाभ ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जिन्हें सुरक्षित और शुद्ध पानी उपलब्ध होगा

    उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय को इस योजना की सफलता का प्रमुख कारण बताया और कहा कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि अंतिम व्यक्ति तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना अब तेजी से साकार हो रहा है

    प्रदेश में पहले जहां सीमित गांवों तक ही पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचता था वहीं अब हजारों गांवों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है जिन इलाकों में दूषित पानी के कारण बीमारियां आम थीं वहां अब हालात में सुधार देखने को मिल रहा है खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण में स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता की बड़ी भूमिका रही है

    सरकार अब केवल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं है बल्कि योजनाओं के लंबे समय तक संचालन और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दे रही है गांवों में जलापूर्ति के साथ-साथ अनुरक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है

    बुंदेलखंड और विंध्य जैसे क्षेत्र जो कभी पानी की कमी से जूझते थे वहां अब घर-घर नल से जल पहुंच रहा है जिससे लोगों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है

    केंद्रीय मंत्री सी आर पाटिल ने भी इस मौके पर कहा कि जल जीवन मिशन के तहत गुणवत्ता पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए उन्होंने राज्यों से अपील की कि सभी परियोजनाओं को टिकाऊ और दीर्घकालिक उपयोग को ध्यान में रखकर लागू किया जा
  • मध्य पूर्व तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा, ऑल-टाइम लो पर पहुंचा

    मध्य पूर्व तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा, ऑल-टाइम लो पर पहुंचा


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 92.50 का स्तर तोड़ते हुए 92.634 पर पहुंच गया। यह अब तक का नया ऑल टाइम लो है। इससे पहले रुपए का सुप्रीम गिरावट स्तर 92.4750 था।

    सत्र की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रुपए के 92.402 पर खुलने के साथ हुई थी, लेकिन दिन के दौरान रुपया लगातार कमजोर हुआ और अंत में नए निचले स्तर पर बंद हुआ। दिन में रुपया न्यूनतम 92.334 और सुप्रीम 92.643 को दिलाने में सफल रहा।

    रुपया कमजोर होने के प्रमुख कारण

    विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में संघर्ष और वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि है। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति टमाटर के पार जा चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे बढ़ती कीमतों का सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है।

    कच्चे तेल की कीमतों में पिछले एक महीने में 50 प्रतिशत से ज़्यादा की तेज़ी देखी गई है। अभी में ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं।

    एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि इम्पोर्ट बिल में लगातार बढ़ोतरी के दबाव के चलते रुपया 92.60 के नीचे फिसल गया। उन्होंने आगे बताया कि होर्मुज जलदमरूमध्य में माल ढुलाई पर रुकावटें और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए इम्पोर्ट लागत में लगातार बढ़ोतरी का कारण बन रही हैं।

    अमेरिकी नीतिगत फैसले पर नजर

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले डॉलर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके परिणामस्वरूप रुपए के उतार-चढ़ाव में बढ़ोतरी हो सकती है।

    निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपया 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में रहने की उम्मीद तय जा रही है। बाजार में निवेशक और व्यापारी इस पर बढ़ोतरी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव और तेल की ऊंची कीमतें रुपया दबाव में रख सकती हैं।

    बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो 92.634 पर पहुंच गया। मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें इसके मुख्य कारण हैं। विश्लेषकों का रुझान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से रुपया निकट भविष्य में 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में बने रहने की संभावना है। भारत की तेल आयात निर्भरता और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट रुपये के दबाव को और बढ़ा रहा है।

  • अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमला किया, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी तेज

    अमेरिका ने होर्मुज के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमला किया, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी तेज


    वॉशिंगटन। अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के अधिकारियों के अनुसार ये ठिकाने अंतरराष्ट्रीय जहाजों और समुद्री व्यापार के लिए खतरा बन रहे थे। यह कार्रवाई ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत की जा रही है और अब इसे और तेज कर दिया गया है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड सेंटकॉम ने बताया कि इन हमलों में भारी वजन वाले बमों का इस्तेमाल किया गया जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी नष्ट करने में सक्षम हैं। ये मिसाइल ठिकाने ईरान के तटीय इलाके में होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित थे और यहां तैनात एंटी शिप मिसाइलें गुजरने वाले जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही थीं।

    सेंटकॉम ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी नौसेना के विमानों ने सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरी हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका समुद्र से भी अपनी हवाई ताकत बनाए रखने में सक्षम है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 7,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया जा चुका है जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट एंटी शिप मिसाइल ठिकाने आईआरजीसी मुख्यालय एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार से जुड़े सिस्टम शामिल हैं।

    इसके अलावा अब तक 100 से ज्यादा ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया या नष्ट कर दिया गया है जबकि अमेरिकी सेना ने 6,500 से अधिक लड़ाकू उड़ानें पूरी कर ली हैं। इस अभियान में अमेरिका ने हवा जमीन और समुद्र तीनों मोर्चों पर अपनी ताकत का इस्तेमाल किया है। बी 1 बी 2 और बी 52 जैसे बमवर्षक एफ 22 और एफ 35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट निगरानी विमान और ड्रोन इस ऑपरेशन का हिस्सा रहे। समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत पनडुब्बियां और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं।

    जमीन पर पैट्रियट और थाड जैसे मिसाइल रक्षा सिस्टम रॉकेट आर्टिलरी और ड्रोन निवारक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे साफ है कि ऑपरेशन कई स्तरों पर एक साथ चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार विशेष रूप से एंटी शिप मिसाइल ठिकानों पर ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि यहां कोई बाधा आती है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर पड़ सकता है।

    ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरानी ठिकानों और उनके समुद्री खतरों को गंभीरता से ले रहा है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रक्षा के लिए भी अहम है।

  • सोलो घूमने के लिए भारत की ये बेस्ट जगहें, जहाँ मिलेगा सुकून

    सोलो घूमने के लिए भारत की ये बेस्ट जगहें, जहाँ मिलेगा सुकून


    नई दिल्ली। आज के समय में ज़्यादातर लोग अकेले ही घूमना पसंद करते हैं। अगर आप सोलो ट्रिप के लिए कोई प्लान बनाना चाहते हैं लेकिन आपको उसमें काफी टिकत आ रही हैं और जगह नहीं चुन पा रहे हैं? तो हम आपके लिए लाए हैं, भारत की कुछ ऐसी जगह जहाँ जाने पर आपको सुकून, नेचर की खूबसूरती और बहुत कुछ देखने को मिलेगा।आइए जानते हैं इन जगहों के बारे में।

    अकेले घूमने के लिए खास जगहें
    अगर आप पहली बार अकेले घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मन में थोड़ा डर और बहुत सारी उम्मीदें होती हैं। अकेले घूमना सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि खुद को समझना, अपनी ज़िंदगी जीने और सुकून हासिल करने का मौका देता है।

    ऋषिकेश
    हिमालय की गोद में गंगा नदी के किनारे बसा ऋषिकेश अकेले घूमने के लिए एक खास जगह है। यहां का शांत वातावरण, योग और ध्यान आपको खुद से जोड़ने का मौका देता है। अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं, तो रिवर लिफ्टिंग, नेचर वॉक और पहाड़ी ट्रेल्स आपको रोमांच से भर देंगे। ये जगह घूमने के लिए काफी खास मानी जाती है।

    गोवा
    गोवा सिर्फ पार्टी और नाइटलाइफ़ के लिए ही मशहूर नहीं है। बल्कि, साउथ गोवा के पालोलेम और अगोंडा जैसे बीच शांत माहौल और खूबसूरत सनसेट के लिए जाने जाते हैं। यहां स्कूटर पर घूमना, समुद्र किनारे तैरते आसमान में पक्षियों को उड़ता देखना बहुत सुकून देता है। गोवा का फ्रेंडली माहौल और आसान ट्रांसपोर्टेशन इसे अकेले घूमने वालों के लिए सबसे अच्छा बनाता है।

    कामला
    अगर आप समुद्र किनारे सुकून की तलाश है तो कामला आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। अरब सागर के ऊपर ऊंची चट्टानों पर बसा यह शहर सुकून भरा अनुभव देता है। वहीं क्लिफ कैफे से सनसेट देखना या योग सीखना कामला सोलो ट्रैवलिंग के लिए परफेक्ट माना जाता है। आप यहां पर आकर आप अपना खास समय घूम सकते हैं।

  • मिस इंडिया से आध्यात्मिक सफर तक: तनुश्री दत्ता के जीवन के अनसुने और चौंकाने वाले किस्से

    मिस इंडिया से आध्यात्मिक सफर तक: तनुश्री दत्ता के जीवन के अनसुने और चौंकाने वाले किस्से


    नई दिल्ली। जमशेदपुर की गलियों से निकलकर मिस इंडिया यूनिवर्स 2004 का खिताब जीतने वाली तनुश्री दत्ता का जीवन सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके जीवन में कई ऐसे पहलू हैं जो किसी रहस्यमयी कहानी से कम नहीं लगते 19 मार्च को जन्मीं तनुश्री ने बॉलीवुड में अपनी पहचान फिल्म Aashiq Banaya Aapne और Dhol जैसी फिल्मों से बनाई लेकिन उनके निजी अनुभव अक्सर ज्यादा चर्चा में रहे

    तनुश्री दत्ता ने एक पुराने इंटरव्यू में अपने बचपन से जुड़ा ऐसा दावा किया था जिसने हर किसी को चौंका दिया उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत छोटी उम्र से ही परलौकिक शक्तियों का अहसास होने लगा था उनका कहना था कि जब वह महज चार साल की थीं तब उन्हें अलग-अलग तरह की ऊर्जा दिखाई देती थीं जो कभी बच्चों के रूप में तो कभी किसी और रूप में उनके सामने आती थीं

    उन्होंने दावा किया कि ये ऊर्जा उनसे बात करती थीं उनके साथ खेलती थीं और कभी-कभी उन्हें आने वाली घटनाओं के बारे में चेतावनी भी देती थीं एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें छह महीने पहले ही आभास हो गया था कि उनके पड़ोस के एक घर में कुछ बुरा होने वाला है उस समय उन्होंने अपनी मां से भी कहा था कि उस जगह पर नहीं जाना चाहिए

    तनुश्री के मुताबिक छह महीने बाद उस घर में एक महिला की मौत हो गई जिससे उनका विश्वास और गहरा हो गया कि उन्हें मिलने वाले ये संकेत सामान्य नहीं थे उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल के दिनों में भी उन्हें ऐसी ऊर्जा बच्चों के रूप में दिखाई देती थीं और वे उनसे बातचीत करती थीं

    हालांकि इन दावों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं लेकिन तनुश्री हमेशा अपनी आध्यात्मिक सोच और अनुभवों को लेकर खुलकर बात करती रही हैं अपने करियर के पीक पर उन्होंने अचानक फिल्मों से दूरी बनाकर आत्मचिंतन और साधना का रास्ता चुना

    उन्होंने लद्दाख के मठों में समय बिताया और बाद में अमेरिका में भी अपनी आध्यात्मिक यात्रा को जारी रखा उनके इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ ग्लैमर की दुनिया तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं बल्कि जीवन के गहरे पहलुओं को समझने की तलाश में थीं

    तनुश्री दत्ता का यह सफर उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है जहां एक ओर उन्होंने फिल्मों में बोल्ड इमेज से पहचान बनाई वहीं दूसरी ओर उनका आध्यात्मिक और रहस्यमयी पक्ष लोगों के लिए आज भी जिज्ञासा का विषय बना हुआ है