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  • विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क

    विसर्जन के बड़े जुलूसों से पहले घाटों के रास्ते बदहाल: कहीं गड्ढे तो कहीं उखड़ी गिट्टी बारिश ने रोका पक्का पैचवर्क


    भोपाल। भोपाल में गणपति विसर्जन का दौर शुरू होने वाला है लेकिन विसर्जन घाटों तक पहुंचने वाले कई प्रमुख रास्ते अभी भी बदहाल हैं। 22 सितंबर से गणपति विसर्जन शुरू होगा जबकि 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के मौके पर बड़े चल समारोह निकलेंगे। 26 सितंबर तक विसर्जन का सिलसिला जारी रहेगा। ऐसे में बड़ी झांकियों ट्रकों और जुलूसों की आवाजाही के दौरान सड़कों पर मौजूद गड्ढे और उखड़ी गिट्टी परेशानी बढ़ा सकती है। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों के मेंटेनेंस के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन तय की है लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण स्थायी पैचवर्क का काम प्रभावित हो रहा है।

    भोपाल में पीडब्ल्यूडी की करीब 174 किलोमीटर सड़कों का मेंटेनेंस परफॉर्मेंस गारंटी के तहत संबंधित ठेकेदारों को करना है। फिलहाल बड़े गड्ढों में गिट्टी और छोटे गड्ढों में कोल्ड मिक्स डालकर अस्थायी सुधार किया जा रहा है। हालांकि बारिश और लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण यह सामग्री ज्यादा समय तक टिक नहीं पा रही है। स्थायी पैचवर्क के लिए हॉट मिक्स प्लांट से काम कराने की जरूरत है जिसके लिए करीब एक सप्ताह तक मौसम साफ रहना जरूरी बताया जा रहा है।

    पुराने शहर से कमलापति घाट की ओर जाने वाले मार्ग पर भी कई जगह सड़क की हालत खराब है। जिंसी से मोती मस्जिद के बीच करीब 3 किलोमीटर के हिस्से में दर्जनों बड़े गड्ढे बताए जा रहे हैं। वहीं प्रोफेसर कॉलोनी से गायत्री मंदिर तक करीब 6.50 किलोमीटर के रास्ते पर भी सड़क सुधार का काम बाकी है। भदभदा घाट की ओर जाने वाले लिंक रोड 3 मुख्य मार्ग 2 नेहरू नगर तुलसी नगर और भदभदा नीलबड़ सीहोर मार्ग पर कई जगह गिट्टी उखड़ चुकी है।

    शाहपुरा और कलियासोत क्षेत्र के विसर्जन रूट पर भी अरेरा हिल्स गुलमोहर इकोसिटी दानिशकुंज बावड़ियाकलां और कलियासोत से चेतक ब्रिज तक सड़क सुधार की जरूरत है। अयोध्या बायपास करोंद पलासी बंगरसिया और बावड़ियाकलां मार्ग पर फिलहाल गड्ढों में गिट्टी डाली जा रही है।

    इधर प्रेमपुरा घाट के विसर्जन मार्ग पर मेट्रो निर्माण की बैरिकेडिंग भी चुनौती बनी हुई है। सड़क के एक हिस्से में बैरिकेडिंग होने के कारण करीब 4.5 मीटर चौड़ा रास्ता ही बचा है। गुरुवार शाम एसीपी ट्रैफिक अजय बाजपेयी ने डिपो से भदभदा चौराहे के बीच सड़क की चौड़ाई इंचीटेप से नापी। बड़ी झांकियों और ट्रकों की आवाजाही के लिए दोनों तरफ करीब 6-6 मीटर जगह की जरूरत बताई गई है। इसके बाद मेट्रो से बैरिकेड्स पीछे करने के निर्देश दिए गए।

    बारिश ने समस्या और बढ़ा दी है। गुरुवार शाम हुई बारिश के बाद बैरागढ़ मेन रोड स्थित विसर्जन घाट के पहुंच मार्ग पर पानी और कीचड़ जमा हो गया। ऐसे में प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विसर्जन से पहले प्रमुख रास्तों को सुरक्षित और सुगम बनाने की है। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के अनुसार मेंटेनेंस का काम शुरू है और प्रमुख सड़कों के गड्ढे भरे जा रहे हैं। हालांकि स्थायी सुधार के लिए मौसम साफ होना जरूरी है।

  • वास्तु के इन नियमों का रखें ध्यान: घर में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा धन और खुशहाली के लिए अपनाएं ये टिप्स

    वास्तु के इन नियमों का रखें ध्यान: घर में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा धन और खुशहाली के लिए अपनाएं ये टिप्स


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी चीजों की व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि घर में वस्तुओं को सही दिशा और उचित स्थान पर रखने से सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि बहुत से लोग घर बनाते समय वास्तु के नियमों का ध्यान रखते हैं। अगर आप भी अपने घर में सुख शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान वास्तु उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर का मुख्य द्वार बेहद महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसे हमेशा साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। मुख्य दरवाजे के आसपास कूड़ा या बेकार सामान जमा करने से बचें। सुबह घर की सफाई करने के बाद मुख्य द्वार पर साफ पानी का छिड़काव करना भी कई परिवारों की पारंपरिक दिनचर्या का हिस्सा है। मान्यता है कि स्वच्छ और रोशन प्रवेश द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।

    घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का पर्याप्त प्रवेश भी जरूरी माना जाता है। दिन के समय खिड़कियां और दरवाजे कुछ देर के लिए खोलने से घर में हवा का प्रवाह बेहतर हो सकता है। वास्तु परंपरा में पूर्व दिशा को सूर्य और प्रकाश से जोड़ा जाता है इसलिए इस दिशा में अनावश्यक सामान जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है। घर को खुला और व्यवस्थित रखना वास्तु के साथ साथ रोजमर्रा की सुविधा के लिए भी अच्छा माना जा सकता है।

    वास्तु के अनुसार रसोई घर की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए। गैस चूल्हे और पानी के स्थान को लेकर वास्तु में अलग अलग मान्यताएं हैं। सामान्य रूप से रसोई को साफ रखना और इस्तेमाल के बाद गैस चूल्हे तथा प्लेटफॉर्म की सफाई करना जरूरी है। सिंक में लंबे समय तक गंदे बर्तन जमा न रहने दें। साफ रसोई घर को सकारात्मक और स्वस्थ वातावरण से जोड़कर देखा जाता है।

    सोने के कमरे में भी कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। कमरे में बहुत अधिक सामान भरने से बचना चाहिए। बिस्तर के आसपास साफ सफाई और पर्याप्त जगह रखना बेहतर होता है। टूटे हुए सामान और लंबे समय से इस्तेमाल में न आने वाली चीजों को कमरे में जमा करके रखने से बचना चाहिए।

    घर के पूजा स्थान को भी साफ और व्यवस्थित रखना जरूरी माना जाता है। पूजा स्थल पर रोजाना दीपक जलाने और प्रार्थना करने की परंपरा कई घरों में होती है। पूजा स्थान के आसपास अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। देवी देवताओं की तस्वीरों और प्रतिमाओं को सम्मानपूर्वक तथा साफ स्थान पर रखना चाहिए।

    वास्तु मान्यताओं में घर में पौधे रखने को भी सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है। तुलसी जैसे पौधों को भारतीय परंपरा में विशेष महत्व दिया गया है। पौधों को उचित रोशनी और हवा वाली जगह पर रखना चाहिए तथा सूखे और खराब पत्तों को समय समय पर हटा देना चाहिए। घर में सूखे पौधे या लंबे समय से खराब पड़ी वस्तुएं रखने से बचना बेहतर है।

    घर में टूटे हुए शीशे खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान बेकार बर्तन या ऐसी चीजें जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है उन्हें जमा करके रखने की आदत छोड़नी चाहिए। इससे घर में अव्यवस्था बढ़ती है। समय समय पर अनावश्यक सामान हटाकर घर को व्यवस्थित करने से जगह खुली रहती है और रोजमर्रा के काम भी आसानी से हो जाते हैं।

    वास्तु शास्त्र की ये बातें पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इनके प्रभाव का वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी नहीं है। इसलिए इन्हें आस्था और घरेलू व्यवस्था के नजरिए से अपनाया जा सकता है। घर में साफ सफाई पर्याप्त रोशनी अच्छा वेंटिलेशन और व्यवस्थित सामान रखना व्यावहारिक रूप से भी उपयोगी है। सकारात्मक माहौल के लिए घर की व्यवस्था के साथ परिवार के सदस्यों के बीच अच्छा संवाद और आपसी सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

  • महावर-सिंदूर वाला लाल पानी कुत्तों को रखता है दूर? भोपाल में वायरल देसी नुस्खे का हुआ रियलिटी चेक

    महावर-सिंदूर वाला लाल पानी कुत्तों को रखता है दूर? भोपाल में वायरल देसी नुस्खे का हुआ रियलिटी चेक


    भोपाल। भोपाल की कई गलियों में इन दिनों घरों के बाहर लाल पानी से भरी प्लास्टिक की बोतलें टंगी नजर आ रही हैं। लोगों के बीच मान्यता है कि इन बोतलों को गेट के बाहर लटकाने से आवारा कुत्ते घर के आसपास नहीं आते और गंदगी से भी राहत मिलती है। कुछ लोग इसे पुराना देसी नुस्खा बताते हैं तो कुछ इसे बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखते हैं। हालांकि इस दावे के पीछे कोई ठोस वैज्ञानिक आधार सामने नहीं आया है।

    नेहरू नगर में रहने वाली अमाया यादव बताती हैं कि उन्होंने बचपन से ही कई घरों के बाहर लाल पानी की बोतलें टंगी देखी हैं। इसी वजह से वह भी अपने घर के बाहर ऐसी बोतल लगाती हैं। उनके मुताबिक पानी में महावर सिंदूर या लाल रंग मिलाकर बोतल तैयार की जाती है और फिर इसे घर के गेट के बाहर टांग दिया जाता है। लोगों का मानना है कि इससे आवारा कुत्ते घर के आसपास आने से बचते हैं।

    भोपाल के कई इलाकों में यह तरीका देखने को मिल रहा है। अयोध्या बायपास से लेकर अवधपुरी नेहरू नगर रचना नगर गौतम नगर इंद्रपुरी बावड़ियाकलां कोलार कटारा और लालघाटी तक कई घरों के बाहर लाल पानी वाली बोतलें नजर आ रही हैं। खास बात यह है कि कई लोग इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं जानते। उन्हें बस इतना पता है कि आसपास के दूसरे घरों में ऐसी बोतलें लगी हैं और इसलिए उन्होंने भी अपने घर के बाहर इसे लगा लिया।

    निशि पटेल के मुताबिक लोगों में यह धारणा है कि कुत्तों को लाल रंग इंसानों की तरह साफ दिखाई नहीं देता। उनका मानना है कि हवा में हिलती हुई बोतल और उसमें दिखाई देने वाला प्रतिबिंब कुत्तों को असहज करता है और वे घर से दूर चले जाते हैं। कुछ बुजुर्ग इस परंपरा को बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव से भी जोड़ते रहे हैं।

    दीपांशी पटेल भी बताती हैं कि कई लोगों को इस नुस्खे की असली वजह मालूम नहीं है। उनका कहना है कि एक घर के बाहर बोतल देखकर दूसरे लोग भी इसे अपनाने लगते हैं और धीरे धीरे यह पूरे मोहल्ले में आम हो जाता है। कुछ लोगों को लगता है कि लाल पानी और रोशनी के प्रतिबिंब के कारण कुत्ते डर सकते हैं।

    लेकिन वेटरनरी स्पेशलिस्ट डॉ. ब्रजेश गुप्ता इस दावे को वैज्ञानिक आधार वाला नहीं मानते। उनका कहना है कि कुत्ते इंसानों की तरह सभी रंगों को अलग अलग तरीके से नहीं देख पाते। उनके अनुसार कुत्तों की रंग पहचान सीमित होती है और वे नीले तथा पीले रंग को अपेक्षाकृत बेहतर देख सकते हैं। ऐसे में सिर्फ लाल रंग की बोतल देखकर कुत्तों के भागने का कोई पुख्ता वैज्ञानिक तर्क नहीं है।

    इस दावे की हकीकत जानने के लिए भोपाल में रियलिटी चेक भी किया गया। रिपोर्टर ने कुछ इलाकों में कुत्तों के सामने लाल पानी से भरी बोतल रखकर देखा। इस दौरान कुत्तों पर इसका कोई खास असर नजर नहीं आया। न तो वे बोतल देखकर वहां से भागे और न ही उन्होंने पानी रखे जाने पर किसी तरह की आक्रामक प्रतिक्रिया दी। इससे साफ है कि लाल पानी की बोतल को कुत्तों को दूर रखने का पक्का वैज्ञानिक उपाय मानने से पहले उसके दावे और वास्तविक असर में फर्क समझना जरूरी है।

  • उम्र बढ़ने पर पैरों की कमजोरी से बचने के लिए कुर्सी पर बैठकर उठने की एक्सरसाइज बताई फिजियोथेरेपिस्ट ने

    उम्र बढ़ने पर पैरों की कमजोरी से बचने के लिए कुर्सी पर बैठकर उठने की एक्सरसाइज बताई फिजियोथेरेपिस्ट ने


    नई दिल्ली ।उम्र बढ़ने के साथ शरीर की मोबिलिटी कम होने लगती है। चलना, बैठना, खड़े होना और रोजमर्रा के दूसरे कामों के लिए शरीर के जोड़ों और पैरों की मजबूती जरूरी होती है। पैरों में कमजोरी आने पर सीढ़ियां चढ़ने, कुर्सी से उठने या बिना सहारे चलने जैसे सामान्य काम भी मुश्किल हो सकते हैं। ऐसे में फिटनेस के लिए नियमित वॉक करने के साथ ऐसी एक्सरसाइज पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है, जिसमें पैरों और घुटनों की ज्यादा मूवमेंट हो।

    वॉकिंग को उम्र बढ़ने के साथ फिट रहने के लिए उपयोगी गतिविधि माना जाता है। हालांकि, केवल चलने से पैरों और घुटनों की वह मजबूती हासिल नहीं होती, जिसकी जरूरत रोजमर्रा की कई गतिविधियों में पड़ती है। फिजियोथेरेपिस्ट जॉन थॉमसन ने बुजुर्ग लोगों के साथ काम करने के अनुभव के आधार पर बताया कि लंबे समय से वॉक करने वाले कुछ लोगों को भी सीढ़ियां चढ़ने और कुर्सी से उठने में परेशानी होती है।

    इसके पीछे एक कारण वॉकिंग के दौरान घुटनों और जोड़ों की सीमित मूवमेंट बताई गई है। चलते समय घुटने बहुत ज्यादा नहीं मुड़ते, जबकि दैनिक जीवन में कई काम ऐसे हैं जिनमें घुटनों को अधिक मोड़ने की आवश्यकता होती है। टॉयलेट जाने, बैठने और फिर खड़े होने जैसी गतिविधियों में पैरों और घुटनों पर अलग तरह का दबाव पड़ता है। इसलिए केवल वॉकिंग के बजाय ऐसी एक्सरसाइज को भी दिनचर्या में शामिल करने की जरूरत बताई गई है, जिसमें जोड़ों को अधिक मूवमेंट मिले।

    फिजियोथेरेपिस्ट के अनुसार इसके लिए एक सरल एक्सरसाइज की जा सकती है, जिसे करने में करीब एक मिनट का समय लगता है। इस एक्सरसाइज में पैरों और घुटनों को अधिक मोड़ना पड़ता है, जिससे जोड़ों को उनकी सामान्य गतिविधियों के अनुरूप मूवमेंट मिलता है। इसे पैरों की मजबूती और मोबिलिटी से जोड़कर बताया गया है।

    यह एक्सरसाइज सिटअप के रूप में बताई गई है, जिसमें कुर्सी पर बैठकर दोबारा खड़ा होना होता है। इसे करने के लिए पहले कुर्सी पर बैठना है और फिर खड़ा होना है। इसके बाद दोबारा बैठना और खड़ा होना जारी रखना है। इस प्रक्रिया को कुल 30 बार करने की बात कही गई है।

    यह गतिविधि स्क्वाट्स की तरह काम करती है और इसमें पैरों तथा घुटनों को बार-बार मोड़ना और सीधा करना पड़ता है। बुजुर्ग लोगों के लिए इसे पैरों की मजबूती बढ़ाने वाली एक्सरसाइज के रूप में बताया गया है। नियमित वॉक के साथ ऐसी गतिविधि करने से रोजमर्रा के कामों में जरूरी पैरों की ताकत और मोबिलिटी पर काम किया जा सकता है।

    पैरों की कमजोरी उम्र बढ़ने के साथ दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक वॉक करने के बावजूद अगर कुर्सी से उठने, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य गतिविधियों में परेशानी होती है, तो पैरों की ताकत और जोड़ों की मूवमेंट पर भी ध्यान देना जरूरी बताया गया है। सिटअप एक्सरसाइज को इसी उद्देश्य से कम समय में की जाने वाली गतिविधि के तौर पर बताया गया है।

  • बालाघाट के बैगा गांवों में बीमारी का खौफ: 32 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई जांच 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग

    बालाघाट के बैगा गांवों में बीमारी का खौफ: 32 बच्चों की मौत के बाद तेज हुई जांच 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग


    बालाघाट । मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की बीमारी और मौतों का मामला गंभीर बना हुआ है। बीते तीन महीने में 32 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़े से ज्यादा हो सकती है। प्रभावित गांवों में बीमारी का डर इस कदर है कि छोटे बच्चों की तबीयत ठीक होने के बाद भी परिवार चिंतित हैं। कई जगह अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों को दोबारा तेज बुखार आने की शिकायत सामने आई है। जांच में मीजल्स और मलेरिया के पॉजिटिव केस भी मिले हैं।

    बालाघाट के जंगलों में बसे अड़ोरी कुंडेकसा बोंदारी और आसपास के गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने जांच और उपचार के लिए अस्थायी कैंप लगाए हैं। कुंडेकसा के स्कूल में बने स्वास्थ्य केंद्र में रोज बड़ी संख्या में बच्चे पहुंच रहे हैं। कई बच्चों के शरीर पर दाने और फफोले दिखाई दिए। रजिस्टर के मुताबिक एक दिन में 26 और अगले दिन सुबह तक 15 बच्चों के नाम दर्ज किए गए। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार अलग-अलग केंद्रों पर रोज करीब 60 प्रभावित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग भी कर रही हैं। बिरसा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के अनुसार रोज 100 से 150 घरों में पहुंचकर बच्चों की जांच की जा रही है। प्रभावित क्षेत्र में करीब 18 से 20 गांवों को प्रमुख रूप से चिन्हित किया गया है। कुंडेकसा के अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में दो बेड और चार गद्दों की व्यवस्था है। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बच्चों का इलाज जमीन पर गद्दे बिछाकर किया जा रहा है। कुछ बच्चों को खिड़की से सलाइन की बोतलें लटकाकर उपचार दिया जा रहा है।

    बीमारी के साथ इन गांवों में बुनियादी सुविधाओं का संकट भी सामने आया है। कई बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र आधार और समग्र आईडी तक नहीं बनी थी। अब प्रशासन ने स्वास्थ्य कैंप के साथ दस्तावेज बनाने की व्यवस्था भी शुरू की है। ग्रामीण महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान पोषण आहार नहीं मिलने और बच्चों के टीकाकरण में कमी की शिकायत की है। बोंदारी गांव में आज भी कुछ परिवार नाले का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के मुताबिक घरों तक पर्याप्त साफ पानी नहीं पहुंचता।

    मृत बच्चों के परिजनों ने भी स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। एक पिता ने बताया कि उनके पांच साल के बेटे की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुधार नहीं होने पर गोंदिया के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। एक अन्य बच्चे को 10 सितंबर को अस्पताल से स्वस्थ बताकर डिस्चार्ज किया गया लेकिन घर लौटने के बाद उसे फिर तेज बुखार आने लगा।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 37 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और करीब साढ़े चार हजार लोगों का उपचार किया गया है। 56 स्वास्थ्य टीमें करीब 200 कर्मचारियों और 40 डॉक्टरों के साथ काम कर रही हैं। 490 बच्चों को उपचार के बाद घर भेजा जा चुका है जबकि 57 बच्चे अभी भर्ती बताए गए हैं।

    जांच में 101 मीजल्स सैंपल में 32 पॉजिटिव मिले हैं। मलेरिया के लिए भेजे गए 64 सैंपल में 50 पॉजिटिव पाए गए। डेंगू के 28 सैंपल में दो और चिकनगुनिया का एक सैंपल पॉजिटिव मिला। पानी के 14 सैंपल में पांच के परिणाम पॉजिटिव आए और अधिकारियों के मुताबिक नाले के पानी में एडिनोवायरस मिला है। प्रशासन का कहना है कि मौतों को किसी एक बीमारी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। मलेरिया उल्टी-दस्त और कुपोषण जैसे कई कारक भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

    फिलहाल प्रभावित मुख्य क्षेत्र में मीजल्स टीकाकरण रोककर आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर प्रभावित क्षेत्र में भी टीकाकरण शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर ग्रामीणों की शिकायतें यह सवाल जरूर खड़ा कर रही हैं कि बीमारी के साथ स्वास्थ्य पोषण पानी और टीकाकरण जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने हालात को कितना प्रभावित किया है।

  • MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान

    MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बार बड़े राजनीतिक बयान से ज्यादा छोटे घटनाक्रम चर्चा में आ जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सिंगरौली में भाजपा विधायक से नारेबाजी के दौरान हुई चूक हो या इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के मैदान का बढ़ा किराया या फिर गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने किसान की खाद को लेकर नाराजगी इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में अलग तरह की चर्चा पैदा कर दी है।

    सिंगरौली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम कार्यकर्ताओं से नारे लगवा रहे थे। उत्साह में उन्होंने नरेंद्र मोदी अमर रहे का नारा लगा दिया। लेकिन कार्यकर्ताओं की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद किसी ने नरेंद्र मोदी जिंदाबाद का नारा लगाया तो विधायक को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने भी तुरंत जिंदाबाद के नारे लगाए और अपनी चूक पर मुस्कुराते नजर आए। कार्यक्रम में हुआ यह छोटा सा वाकया बाद में चर्चा का विषय बन गया।

    दूसरी ओर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों से जुड़े कार्यक्रम को लेकर मैदान के किराए का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से पहले 10 लाख रुपए किराया लिया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उस समय कहा था कि कार्यक्रम के लिए 10 लाख क्या 10 करोड़ रुपए भी मांगे जाते तो कांग्रेस उसे जुटाकर देती। अब आईडीए की ओर से मैदान के किराए के तौर पर चार लाख रुपए अतिरिक्त लिए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने इसे सरकार की ओर से की जा रही वसूली और दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने बयान का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे विवाद में मैदान का किराया राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है।

    गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क के दौरान किसानों ने खाद की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। एक किसान ने सिंधिया से सीधे कहा कि माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई लेकिन खाद नहीं मिल रहा है। किसान की शिकायत सुनने के बाद सिंधिया ने मौके पर मौजूद कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से किसानों के नाम और मोबाइल नंबर नोट करने को कहा। कलेक्टर ने जब ठीक है कहा तो सिंधिया ने दोबारा उन्हें निर्देश दिया कि सिर्फ ठीक है कहने के बजाय नाम और नंबर लिखे जाएं। उन्होंने पेन और पैड निकालकर जानकारी नोट करने को कहा। इसके बाद किसानों की जानकारी दर्ज की गई।

    इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भी एक अधिकारी की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर चल रहे सेवा संकल्प अभियान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी लगाई गई है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय में तैनात एक अधिकारी की ड्यूटी राजधानी के नजदीकी जिले में लगाई गई थी लेकिन वे अभियान से जुड़े काम के बजाय मंत्रालय में बैठक में व्यस्त रहे। हालांकि इस संबंध में अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    इस तरह एक ही दिन में सिंगरौली से इंदौर और गुना तक सामने आए अलग-अलग घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। कहीं नारेबाजी में हुई चूक सुर्खियां बनी तो कहीं कार्यक्रम के खर्च और किसानों की खाद समस्या ने राजनीतिक बहस को हवा दी।

  • मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को ऐसे करें व्रत और पूजा जानिए नियम और जरूरी बातें

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को ऐसे करें व्रत और पूजा जानिए नियम और जरूरी बातें


    नई दिल्ली। 
    शुक्रवार का दिन हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। शुक्रवार का व्रत विशेष रूप से मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। कुछ लोग वैभव लक्ष्मी व्रत भी रखते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार मां लक्ष्मी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया व्रत व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा देता है और परिवार में सुखद वातावरण बनाए रखने में मदद करता है।

    शुक्रवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें। घर के पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा के लिए लाल या गुलाबी रंग के कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और धूप या अगरबत्ती अर्पित करें। पूजा शुरू करने से पहले मन में व्रत का संकल्प लेना शुभ माना जाता है।

    मां लक्ष्मी की पूजा में कमल का फूल विशेष माना जाता है। यदि कमल का फूल उपलब्ध न हो तो अपनी श्रद्धा के अनुसार कोई अन्य सुगंधित पुष्प भी अर्पित किया जा सकता है। इसके साथ मां लक्ष्मी को अक्षत यानी चावल रोली हल्दी फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें और लक्ष्मी माता की आरती करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा में मन की एकाग्रता और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया जाता है।

    शुक्रवार के व्रत में खानपान के नियम व्यक्ति की परंपरा और संकल्प के अनुसार अलग हो सकते हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने और तामसिक पदार्थों से दूर रहने की परंपरा है। भोजन में फल दूध मखाने या अन्य फलाहारी चीजों का सेवन किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहता है।

    शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा के साथ जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार भोजन वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि दान और सेवा से मन में सकारात्मक भाव पैदा होते हैं। घर में साफ सफाई बनाए रखना भी शुक्रवार की पूजा से जुड़ी प्रमुख मान्यताओं में शामिल है। धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी को स्वच्छता और व्यवस्थित वातावरण से जोड़ा गया है।

    यदि कोई व्यक्ति लगातार शुक्रवार का व्रत रख रहा है तो व्रत की संख्या अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार तय कर सकता है। कई लोग निर्धारित संख्या में व्रत पूरा करने के बाद विधिपूर्वक उद्यापन करते हैं। उद्यापन के दौरान मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है। जरूरतमंदों को भोजन कराने या दान देने की परंपरा भी निभाई जाती है।

    शुक्रवार व्रत का मुख्य उद्देश्य केवल आर्थिक समृद्धि की कामना करना नहीं बल्कि श्रद्धा संयम और सकारात्मक सोच के साथ मां लक्ष्मी का स्मरण करना भी माना जाता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए परिवार की सुख शांति और सभी के कल्याण की प्रार्थना करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं इसलिए व्रत और पूजा अपनी श्रद्धा तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना उचित माना जाता है।

  • शराब टेंडर में मिलीभगत की जांच जारी रख सकेगा CCI: हाईकोर्ट ने डिस्टिलरीज की याचिकाएं खारिज कर अंतरिम रोक हटाई

    शराब टेंडर में मिलीभगत की जांच जारी रख सकेगा CCI: हाईकोर्ट ने डिस्टिलरीज की याचिकाएं खारिज कर अंतरिम रोक हटाई


    भोपाल। मध्य प्रदेश में देशी शराब की थोक सप्लाई के टेंडरों में डिस्टिलरीज के बीच कथित मिलीभगत और टेंडर फिक्सिंग से जुड़े मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी CCI की जांच अब आगे जारी रह सकेगी। जबलपुर हाईकोर्ट ने एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड बेवरेजेस लिमिटेड समेत अन्य डिस्टिलरीज की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही CCI की जांच पर लगी अंतरिम रोक भी हटा दी गई है। हालांकि कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि कंपनियों को टेंडर में मिलीभगत का दोषी घोषित कर दिया गया है। फिलहाल अदालत ने केवल CCI के जांच करने के अधिकार को बरकरार रखा है।

    मामला वर्ष 2012-13 से 2016-17 के बीच हुए देशी शराब के सरकारी टेंडरों से जुड़ा है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की वर्ष 2016-17 की ऑडिट रिपोर्ट में अलग-अलग डिस्टिलरीज की बोलियों के बीच बेहद कम अंतर होने पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद CCI ने वर्ष 2020 में मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान आबकारी विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए और संबंधित डिस्टिलरीज के परिसरों की तलाशी भी ली गई।

    जांच में एमपी डिस्टिलर्स एसोसिएशन नाम के WhatsApp ग्रुप से जुड़े रिकॉर्ड ईमेल और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई। महानिदेशक स्तर पर की गई जांच के बाद 1200 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट CCI को सौंपी गई। इसके बाद एसोसिएटेड अल्कोहल्स ग्रेट गैलियन ओएसिस डिस्टिलरीज समेत कुछ कंपनियों ने CCI की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    कंपनियों की ओर से दलील दी गई कि शराब का पूरा कारोबार राज्य सरकार और आबकारी विभाग के नियंत्रण में है। लाइसेंस उत्पादन आपूर्ति कीमत और कोटा जैसी व्यवस्थाएं सरकार निर्धारित करती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा कानून के तहत CCI को इस मामले की जांच करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। आबकारी विभाग की ओर से भी इसी तरह का पक्ष रखा गया और बताया गया कि डिस्टिलरीज का मुनाफा भी निर्धारित सीमा में रहता है।

    हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि आबकारी कानून के तहत शराब कारोबार पर सरकारी नियंत्रण होने से CCI के अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। आबकारी विभाग की भूमिका नियामकीय व्यवस्था तक है जबकि कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों की जांच का सवाल अलग है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि CAG की रिपोर्ट को अंतिम सबूत नहीं माना गया है। रिपोर्ट केवल जांच शुरू करने का आधार बनी और इसके बाद CCI के महानिदेशक ने स्वतंत्र रूप से दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच की।

    कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि कंपनियों ने CCI के शुरुआती आदेश को उसी समय चुनौती नहीं दी थी और जांच प्रक्रिया में सहयोग करती रहीं। महानिदेशक की रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया गया। अब CCI जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजी व डिजिटल सामग्री के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिलेगा।

    मामले में अंतिम निर्णय आने के बाद यदि कोई पक्ष CCI के आदेश से असहमत होता है तो उसके पास NCLAT में अपील करने का कानूनी विकल्प रहेगा। इस तरह हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश के देशी शराब टेंडरों में कथित मिलीभगत से जुड़े मामले की जांच का रास्ता साफ हो गया है।

  • 2 घंटे में 118KM भागे लुटेरे लेकिन मुरैना में ट्रक बना रोड़ा: हादसे के बाद कार से निकले 41 लाख और हथियार

    2 घंटे में 118KM भागे लुटेरे लेकिन मुरैना में ट्रक बना रोड़ा: हादसे के बाद कार से निकले 41 लाख और हथियार


    भोपाल। फिरोजाबाद में पशु व्यापारियों से हुई 41 लाख रुपए की लूट का राज एक सड़क हादसे के बाद खुल गया। वारदात को अंजाम देने के बाद चार बदमाश तेज रफ्तार कार से मध्य प्रदेश की ओर भाग रहे थे लेकिन मुरैना में उनकी कार ट्रक से टकरा गई। हादसे में चारों बदमाश घायल होकर कार में फंस गए। इसी दौरान मौके पर पहुंचे एक भाजपा नेता को बदमाशों ने कार से बैग निकालने के लिए कहा। बैग को उठाने पर उसका वजन और सख्ती देखकर उन्हें शक हुआ। पुलिस ने तलाशी ली तो बैग से 41 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई। इसके साथ ही कार से पिस्टल चाकू और काले रंग के मास्क भी मिले।

    पुलिस के मुताबिक इस पूरी वारदात की शुरुआत करीब 10 दिन पहले हुई थी। भोपाल का रहने वाला राज फिरोजाबाद में अपने रिश्तेदारों के यहां आया था। इसी दौरान उसने पशु व्यापारियों की गतिविधियों पर नजर रखी। उसे पता चला कि व्यापारी सुबह की हाट में जाने के लिए रात करीब दो बजे बड़ी रकम लेकर घर से निकलते हैं। राज ने यह जानकारी भोपाल के चार बदमाशों रिहान खालिद अरसव और आबिद को दी। इसके बाद चारों को फिरोजाबाद बुलाया गया। पुलिस के अनुसार इनमें अरसव और आबिद निगरानीशुदा बदमाश हैं।

    14 सितंबर की रात पशु व्यापारी जान मोहम्मद रहीश और अनीश कार से बाजार जाने के लिए निकले थे। घर से करीब 20 मीटर आगे पहुंचने के बाद एक व्यापारी को याद आया कि उसका मोबाइल घर पर छूट गया है। कार वापस लौटाई गई और वह मोबाइल लेने घर चला गया। इसी दौरान दो अन्य व्यापारी कुछ दूरी पर बाथरूम के लिए चले गए। बदमाशों ने इसी मौके का फायदा उठाया और कार में रखे नकदी से भरे दो बैग लेकर फरार हो गए। दोनों बैग में कुल 41 लाख रुपए थे।

    लूट के बाद आरोपी कार से टूंडला पार करते हुए मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ गए। पुलिस की घेराबंदी से बचते हुए उन्होंने करीब 118 किलोमीटर का सफर लगभग दो घंटे में पूरा किया। 15 सितंबर की सुबह करीब चार बजे मुरैना के कोतवाली थाना क्षेत्र के फ्लाईओवर पर ओवरटेक करने के दौरान उनकी कार आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में चारों घायल हो गए और कार में फंस गए।

    इसी दौरान वहां से गुजर रही पुलिस टीम ने घायलों को बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की। कुछ देर बाद भाजपा नेता अर्जुन तोमर भी मौके पर पहुंचे। घायलों ने उनसे कार से बैग निकालने को कहा और बताया कि उनमें कपड़े हैं। एक बैग उठाने पर उन्हें वह असामान्य रूप से सख्त और भारी लगा। शक होने पर उन्होंने दोनों बैग पुलिस को सौंप दिए। तलाशी में नोटों की गड्डियां बरामद हुईं।

    इसके बाद पुलिस ने घायलों से पूछताछ की तो फिरोजाबाद की लूट की पूरी कड़ी सामने आ गई। आरोपियों के मोबाइल और कॉल डिटेल की जांच शुरू की गई। पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपियों के कुछ रिश्तेदार हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुरैना पहुंचने वाले थे। फिरोजाबाद पुलिस की टीम भी मुरैना पहुंची और आरोपियों से पूछताछ की।

    जांच में आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आ रहे हैं। पुलिस खालिद के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों के साथ आबिद के ATM क्लोनिंग से जुड़े मामलों की भी पड़ताल कर रही है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 41 लाख की इस लूट के पीछे सिर्फ चार बदमाश थे या कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से शुरू हुई वारदात की कड़ियां भोपाल और मुरैना तक पहुंचने के बाद पुलिस दोनों राज्यों में आरोपियों के संपर्क और गतिविधियों की जांच कर रही है।

  • 8 घंटे की नींद के बाद भी सुबह थकान रहती है तो इन स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज न करें, जानें प्रमुख कारण

    8 घंटे की नींद के बाद भी सुबह थकान रहती है तो इन स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज न करें, जानें प्रमुख कारण

    नई दिल्ली ।सुबह आंख खुलने के बाद शरीर भारी महसूस होना, बिस्तर से उठने का मन न करना और रातभर सोने के बावजूद तरोताजा महसूस न होना कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। आमतौर पर पर्याप्त नींद के बाद शरीर को आराम और ऊर्जा महसूस होनी चाहिए, लेकिन अगर हर दिन सुबह उठने के बाद थकान बनी रहती है तो इसके कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।

    कभी-कभार देर रात तक जागने, पर्याप्त नींद न लेने या तनाव के कारण सुबह कमजोरी और सुस्ती महसूस हो सकती है। खान-पान में गड़बड़ी और नियमित व्यायाम की कमी भी शरीर की ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है। लेकिन पर्याप्त समय सोने के बाद भी लगातार थकान रहना केवल नींद की कमी का परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।

    शरीर में आयरन की कमी या एनीमिया सुबह की थकान का एक कारण हो सकता है। एनीमिया की स्थिति में शरीर की ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके कारण व्यक्ति को कमजोरी और लगातार थकान के साथ सांस फूलने या दिल की धड़कन तेज महसूस होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यदि सामान्य काम करने पर भी जल्दी थकान होने लगे तो इस समस्या पर ध्यान देना जरूरी है।

    थायरॉइड से जुड़ी समस्या भी लगातार थकान और ऊर्जा की कमी का कारण बन सकती है। हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम होने से शरीर की कई सामान्य प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसके साथ वजन बढ़ना, सामान्य से अधिक ठंड लगना, कब्ज और ध्यान लगाने में परेशानी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

    डायबिटीज में भी लंबे समय तक थकान बनी रह सकती है। इसलिए अगर सुबह की कमजोरी लगातार बनी हुई है और इसके साथ अन्य असामान्य बदलाव भी महसूस हो रहे हैं तो इसे केवल उम्र, ज्यादा काम या नींद की कमी से जोड़कर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    नींद की गुणवत्ता भी सुबह की थकान का महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। कुछ लोगों को पर्याप्त घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद गहरी और लगातार नींद नहीं मिल पाती। स्लीप एपनिया जैसी स्थिति में सोते समय सांस लेने में रुकावट आ सकती है। इसके कारण नींद बार-बार टूट सकती है और व्यक्ति को सुबह उठने के बाद भी ऐसा लग सकता है कि रातभर पर्याप्त आराम नहीं मिला।

    तनाव और मानसिक दबाव भी नींद और ऊर्जा के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। इसी तरह असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी से भी दिनभर सुस्ती और थकान महसूस हो सकती है। इसलिए लगातार बनी रहने वाली थकान के पीछे केवल एक कारण मान लेना उचित नहीं है।

    अगर सुबह उठने के बाद नियमित रूप से थकान रहती है तो इसके साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए। बार-बार पेशाब आना, वजन में बदलाव, अत्यधिक ठंड लगना, सांस फूलना, कमजोरी या नींद के दौरान घुटन और हांफने जैसी समस्या किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थिति की ओर संकेत कर सकती है।

    कभी-कभार होने वाली थकान सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। डॉक्टर लक्षणों और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर आवश्यक जांच की सलाह दे सकते हैं। एनीमिया, थायरॉइड और अन्य संभावित कारणों की पहचान होने पर समस्या के अनुसार उपचार और जीवनशैली में बदलाव किए जा सकते हैं।

    सुबह की थकान को लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय नींद की गुणवत्ता, खान-पान, तनाव और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना भी जरूरी है। पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार ऊर्जा की कमी बनी रहे तो इसके पीछे छिपे स्वास्थ्य कारणों की जांच कराना समस्या को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।