Blog

  • महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया

    महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नागपुर में आदिवासी छात्राओं ने छात्रावासों से जुड़ी कई समस्याएं सामने रखीं। अभिजीत दीपके के साथ हुई बातचीत के दौरान छात्राओं ने हॉस्टल में रहने की परिस्थितियों, बुनियादी सुविधाओं, छात्रवृत्ति, वॉशरूम और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। कुछ छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित यौन शोषण और प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।

    बातचीत में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र से आई कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए। छात्राओं का कहना था कि आदिवासी आवासीय स्कूलों और हॉस्टलों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी निजता और सुविधा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।

    भंडारा के एक आदिवासी हॉस्टल का मुद्दा भी बातचीत के दौरान सामने आया। एक छात्रा ने बताया कि वहां करीब 15 लड़कियों को एक ही कमरे में रखा जाता है। छात्राओं ने हॉस्टल में जगह की कमी के अलावा वॉशरूम से जुड़ी परेशानियों की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित तौर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि कुछ छात्राओं को ऐसी जांच से गुजरना पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर छात्राओं ने अपनी नाराजगी और असहजता व्यक्त की। हालांकि, सामने रखे गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।

    छात्राओं ने कथित यौन शोषण से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय के बच्चों को ही आरोपी बनाया जा रहा है। छात्राओं ने ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

    हॉस्टल की समस्याओं में केवल सुरक्षा और जांच से जुड़े मुद्दे ही शामिल नहीं थे। छात्राओं ने छात्रवृत्ति, वॉशरूम और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत भी की। उनका कहना था कि सरकारी आदिवासी स्कूलों और आवासीय संस्थानों में विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि पढ़ाई और रहने के दौरान उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    इन शिकायतों के बीच अभिजीत दीपके ने आदिवासी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। नागपुर स्थित आदिवासी विकास भवन में छात्र अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों से उनकी परेशानियों और हॉस्टल की स्थिति से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा गया है। इसके लिए आपसी संपर्क और जानकारी जुटाने की व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई।

    अभिजीत दीपके ने 17 सितंबर से ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से करने की बात कही गई है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में संचालित स्कूलों और आवासीय विद्यालयों की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं और स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।

    आदिवासी छात्राओं की ओर से सामने आई शिकायतों के बाद हॉस्टल की व्यवस्थाओं, बुनियादी सुविधाओं, छात्राओं की सुरक्षा और कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट से जुड़े आरोपों पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इन आरोपों की जांच और संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • UPI के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की सिफारिश वाली संसदीय रिपोर्ट पर कांग्रेस के पांच सांसदों की मौजूदगी फिर चर्चा में

    UPI के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की सिफारिश वाली संसदीय रिपोर्ट पर कांग्रेस के पांच सांसदों की मौजूदगी फिर चर्चा में

    नई दिल्ली ।UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट भुगतान पर लागू होने वाले 0.4 प्रतिशत MDR को ‘मोदी टैक्स’ बताते हुए इसका विरोध किया है। इसी बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 12 अगस्त को पेश रिपोर्ट चर्चा में आ गई है। इस रिपोर्ट में UPI के लिए टिकाऊ और स्तर आधारित राजस्व व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी।

    समिति में कांग्रेस के पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। रिपोर्ट को भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनाया था। प्रकाशित कार्यवाही में रिपोर्ट को लेकर किसी तरह की असहमति दर्ज नहीं की गई थी। समिति ने UPI के लिए टियर आधारित MDR या राजस्व व्यवस्था को जल्द अधिसूचित कर लागू करने की जरूरत बताई थी।

    रिपोर्ट में UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता का मुद्दा उठाया गया था। समिति के अनुसार, डिजिटल भुगतान का विस्तार होने के साथ उसके बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और तकनीकी व्यवस्था पर खर्च भी बढ़ता है। ऐसे में केवल सरकारी प्रोत्साहन राशि के सहारे लंबे समय तक UPI व्यवस्था को संचालित करना वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी वजह से एक व्यवहारिक और टिकाऊ राजस्व मॉडल की जरूरत बताई गई थी।

    समिति ने 2026-27 के बजट में UPI और RuPay पर जीरो-MDR नीति से जुड़ी लागत की भरपाई के लिए 2,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का भी उल्लेख किया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि UPI पर लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ रही है और बड़ी संख्या में नए उपयोगकर्ता डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़ रहे हैं। इसके बावजूद मौजूदा सरकारी प्रोत्साहन राशि उद्योग की वास्तविक लागत का सीमित हिस्सा ही पूरा करती है।

    वर्तमान विवाद प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR को लेकर है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर लागू होनी है। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन भी पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले लेनदेन पर भी शुल्क नहीं लगेगा।

    MDR को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसे सरकार की ओर से लगाया गया टैक्स नहीं माना गया है। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच निर्धारित ढांचे के तहत लागू होने वाला शुल्क है। इससे प्राप्त राशि बैंकों और भुगतान सेवा से जुड़े अन्य हिस्सेदारों के बीच वितरित की जाएगी।

    राहुल गांधी ने नए MDR ढांचे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे ‘मोदी टैक्स’ बताते हुए व्यवस्था वापस लेने की मांग की। उन्होंने सरकार पर बाहरी दबाव में निर्णय लेने का आरोप भी लगाया। दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया है कि MDR को टैक्स के रूप में देखना सही नहीं है और नई व्यवस्था UPI भुगतान इकोसिस्टम की वित्तीय जरूरतों से जुड़ी है।

    ऐसे में वर्तमान राजनीतिक बहस में एक तरफ प्रस्तावित MDR का विरोध है, जबकि दूसरी तरफ UPI के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरूरत से जुड़ा तर्क है। वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में इसी तरह के राजस्व मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। UPI शुल्क व्यवस्था में बदलाव के बाद डिजिटल भुगतान की लागत, कारोबारियों पर प्रभाव और भुगतान व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को लेकर चर्चा जारी है।

  • मद्रास हाईकोर्ट ने मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव पर रोक से किया इनकार, इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने पर उठाए सवाल

    मद्रास हाईकोर्ट ने मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव पर रोक से किया इनकार, इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव जीतने के कुछ समय बाद विधायक पद से इस्तीफा देकर उसी सीट से दूसरी पार्टी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने की स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की।

    न्यायालय ने ऐसी स्थिति को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के जनादेश से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। अदालत ने कहा कि निर्वाचित विधायक का जल्द इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी के टिकट पर उसी सीट से फिर चुनाव लड़ना मतदाताओं के दिए जनादेश का अनादर है।

    चेन्नई के अधिवक्ता के सुथन की ओर से दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति के गोविंदराजन की पीठ ने बुधवार को सुनवाई की। याचिका में मांग की गई थी कि जिन नेताओं ने दल बदलकर दोबारा चुनाव लड़ने के लिए अपनी विधायक सीट छोड़ी है, उनसे उपचुनाव कराने का खर्च वसूला जाए।

    पीठ ने चुनाव आयोग से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि इस्तीफा देकर ऐसी स्थिति पैदा करने वाले विधायकों पर उपचुनाव के वित्तीय बोझ को डालने की व्यवस्था पर विचार होना चाहिए।

    याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि एस जयकुमार, मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा, इसाक्की सुबैया, सी विजयभास्कर और एमआर विजय भास्कर ने इस्तीफा देकर तमिझगा वेत्री कषगम यानी टीवीके का रुख किया था। इनमें से मदुरंतकम और धारापुरम सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की गई है, जबकि बाकी पांच सीटों पर कानूनी याचिकाएं लंबित होने के कारण चुनाव नहीं कराया गया है।

    याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मरगथम कुमारवेल और पी सत्यभामा को टीवीके ने उन्हीं सीटों से दोबारा उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर खाली किया था। याचिका में आशंका जताई गई कि यदि ऐसी स्थिति के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई गई तो भविष्य में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो सकते हैं और इसका अतिरिक्त वित्तीय भार सरकारी खजाने पर पड़ेगा।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा कि किसी विधायक को इस्तीफा देने से रोका नहीं जा सकता। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है, जब इस्तीफा देने वाला वही व्यक्ति अपनी छोड़ी हुई सीट से फिर चुनाव लड़ता है। अदालत ने कहा कि इस असाधारण स्थिति के समाधान के लिए संसद या चुनाव आयोग को व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    महाधिवक्ता विजय नारायण ने अदालत को बताया कि मौजूदा कानून पूर्व विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ने से नहीं रोकता। इसलिए उपचुनाव रोकने की मांग वाली याचिका स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि छह विधायकों के इस्तीफे की स्वीकृति से संबंधित याचिका पर पहली पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा है। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी।

    याचिका 12 सितंबर को दायर की गई थी। इसमें मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनावों पर रोक लगाने के साथ दोनों टीवीके उम्मीदवारों के नामांकन रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने असामयिक इस्तीफों से चुनाव आयोग और सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ का मुद्दा भी उठाया था।

    मूल मामले के अनुसार, अन्नाद्रमुक के बागी विधायक मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा ने 13 मई को विधानसभा में टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद दोनों ने अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे दिया और सीटें रिक्त घोषित की गईं। बाद में टीवीके ने उन्हें अपने गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में इन्हीं सीटों से मैदान में उतारा।

    मदुरंतकम और धारापुरम सीटों के लिए द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने भी उम्मीदवार घोषित किए हैं। नाम तमिलर काची और वामपंथी दलों के चुनाव मैदान में उतरने के कारण इन सीटों पर कई दलों के बीच मुकाबला होने की स्थिति बनी है।

  • कूनो में बदली चीतों की तस्वीर 4 साल पहले 8 से शुरू हुआ सफर अब भारत में 52 चीते

    कूनो में बदली चीतों की तस्वीर 4 साल पहले 8 से शुरू हुआ सफर अब भारत में 52 चीते


    नई दिल्ली।चार साल पहले जब नामीबिया से आठ चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया था तब भारत में इस प्रजाति की वापसी को लेकर कई सवाल थे। करीब सात दशक तक देश में चीते नहीं थे और ऐसे में अफ्रीका से लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों में बसाना बड़ी चुनौती माना जा रहा था। शुरुआती दौर में कई चीतों और शावकों की मौत ने चिंता बढ़ाई लेकिन इसके बाद चीतों के प्रजनन और उनके नए इलाकों में पहुंचने से तस्वीर धीरे धीरे बदलती गई। अब भारत में चीतों की संख्या 52 बताई जा रही है जिनमें 32 का जन्म भारत में ही हुआ है।

    17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को बाड़े में छोड़ा था। इसके साथ भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की औपचारिक शुरुआत हुई। परियोजना के पहले साल में ही कई चुनौतियां सामने आईं। 2022-23 के दौरान कुल नौ चीतों की मौत हुई। इनमें वयस्क चीते और शावक दोनों शामिल थे। गर्मी और डिहाइड्रेशन जैसी परिस्थितियों को कुछ मौतों से जोड़कर देखा गया। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के दौरान अफ्रीका से आए चीतों के लिए भारतीय मौसम के साथ तालमेल बनाना बड़ी चुनौती रहा।

    पहले साल की मुश्किलों के बाद दूसरे साल तस्वीर में बदलाव दिखाई दिया। 2023-24 के दौरान चीतों के प्रजनन से उम्मीद बढ़ी। इस अवधि में जन्मे कई शावक जीवित रहे और 13 शावकों ने एक साल की उम्र पूरी की। इसी दौरान अफ्रीका से आए वयस्क चीतों के भारतीय परिस्थितियों के साथ अनुकूलन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।

    तीसरे साल परियोजना का फोकस केवल कूनो तक सीमित नहीं रहा। चीतों को खुले जंगल में छोड़ा गया और कुछ चीते कूनो की सीमा से बाहर निकलकर राजस्थान के जंगलों तक पहुंचे। इसके बाद आसपास के इलाकों में उनकी निगरानी बढ़ाई गई। स्थानीय लोगों को चीतों के व्यवहार और उनसे जुड़ी सावधानियों की जानकारी देने के लिए चीता मित्रों को भी अभियान से जोड़ा गया। इसी क्रम में तीन चीतों को मंदसौर के गांधी सागर क्षेत्र में शिफ्ट किया गया।

    अब परियोजना चौथे साल में नए चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। कूनो के बाद नौरादेही नेशनल पार्क को भी चीतों के लिए संभावित नए घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। वन विभाग के मुताबिक कूनो में मौजूद चीतों में बड़ी संख्या ऐसे जानवरों की है जिनका जन्म भारत में हुआ है। खुले जंगल में मौजूद चीते प्राकृतिक तरीके से शिकार कर रहे हैं और प्रजनन भी कर रहे हैं।

    चीतों की निगरानी के लिए तकनीक और ग्राउंड टीम दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। कई चीतों के गले में सैटेलाइट कॉलर लगाए गए हैं जिनसे उनकी लोकेशन और मूवमेंट की जानकारी मिलती रहती है। इसके अलावा वन विभाग की टीमें लगातार जमीन पर निगरानी करती हैं। यदि कोई चीता कूनो की सीमा से बाहर निकलता है तो उसकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती है।

    भारत में चीता पुनर्वास की कोशिश हालांकि नई नहीं है। 1970 के दशक में देश में चीते दोबारा बसाने की योजना पर विचार शुरू हुआ था। बाद में कई स्तरों पर प्रयास हुए लेकिन अलग अलग कारणों से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अफ्रीकी चीतों को भारत लाने की अनुमति के रास्ते को आगे बढ़ाया। इसके बाद नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

    कूनो की मौजूदा तस्वीर इस लंबे प्रयास के एक नए चरण को दिखाती है। शुरुआत में आठ चीतों से शुरू हुआ सफर अब 52 तक पहुंच चुका है। इनमें भारत में जन्मे चीतों की संख्या 32 है। आने वाले समय में चीतों को कूनो के अलावा दूसरे उपयुक्त क्षेत्रों में बसाने की योजना परियोजना के विस्तार का अहम हिस्सा होगी।

  • अमेरिका के बाल्टिमोर में रात करीब नौ बजे गोलीबारी, पांच लोगों को लगी गोली; पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की

    अमेरिका के बाल्टिमोर में रात करीब नौ बजे गोलीबारी, पांच लोगों को लगी गोली; पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की

    नई दिल्ली ।अमेरिका के मैरीलैंड राज्य के बाल्टिमोर शहर में बुधवार रात गोलीबारी की घटना सामने आई, जिसमें पांच लोगों को गोली लगने की जानकारी है। घटना पूर्वी बाल्टिमोर के 1400 ब्लॉक ईस्ट फायेट स्ट्रीट में हुई। सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी में घायलों की उम्र, उनकी चोटों की गंभीरता और उन्हें किन अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    पुलिस के मुताबिक अधिकारियों को रात करीब नौ बजे गोलीबारी की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और आसपास के इलाके को सुरक्षित किया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद स्थिति का जायजा लेने के साथ गोलीबारी से जुड़े साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।

    बाल्टिमोर मेयर कार्यालय के एक प्रवक्ता के अनुसार इस घटना में पांच लोगों को गोली लगी है। हालांकि शुरुआती जानकारी में घायलों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। पुलिस ने भी घटना में कई लोगों के घायल होने की पुष्टि की है, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों में पीड़ितों की स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी सामने नहीं आई थी।

    गोलीबारी के बाद पुलिस ने ईस्ट फायेट स्ट्रीट और कैरोलिन स्ट्रीट को बंद कर दिया। इन सड़कों पर आवाजाही रोककर घटनास्थल को सुरक्षित किया गया। पुलिस अधिकारी इलाके में मौजूद रहे और घटना से जुड़े सबूत जुटाने के साथ पूरे मामले की परिस्थितियों की जांच करते रहे।

    जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि गोलीबारी किस वजह से हुई और घटना में कितने लोग शामिल थे। शुरुआती जानकारी के आधार पर किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी। गोलीबारी के पीछे की वजह के बारे में भी पुलिस की ओर से तत्काल कोई विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई।

    घटना के बाद इलाके में पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई। अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित रखते हुए जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई। फिलहाल मामले से जुड़ी शुरुआती जानकारी ही सामने आई है और घायलों की स्थिति तथा घटना के अन्य पहलुओं से संबंधित जानकारी बाद में स्पष्ट होने की संभावना है।

    बाल्टिमोर में हुई इस गोलीबारी की घटना के संबंध में पुलिस की जांच जारी है। अधिकारियों की ओर से घटना की परिस्थितियों, संभावित संदिग्धों और गोलीबारी के कारण का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पांच लोगों को गोली लगी है, जबकि उनकी चोटों की गंभीरता और इलाज से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना के बाद पुलिस ने संबंधित सड़कों को बंद कर दिया और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी में यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि गोलीबारी में कितने लोग शामिल थे। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में घायलों की स्थिति और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • रात में चोरों ने बनाया निर्माणाधीन मकान को निशाना: मोटर-केबल समेत 2 क्विंटल सरिया ले गए

    रात में चोरों ने बनाया निर्माणाधीन मकान को निशाना: मोटर-केबल समेत 2 क्विंटल सरिया ले गए


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस में निर्माणाधीन मकान को चोरों ने निशाना बनाते हुए मोटर केबल और भारी मात्रा में लोहे का सरिया चोरी कर लिया। घटना लोधी मोहल्ला जगतपुर की है जहां चोर मुख्य दरवाजे के पास लगी ईंटों को तोड़कर मकान के अंदर दाखिल हुए और वहां रखा निर्माण सामग्री से जुड़ा सामान लेकर फरार हो गए। चोरी की घटना 14 से 16 सितंबर के बीच की बताई जा रही है। मकान मालिक ने मामले की शिकायत 17 सितंबर को कोलारस थाने में दर्ज कराई है।

    जानकारी के अनुसार ग्राम राछी निवासी इंदरसेन धाकड़ कोलारस के लोधी मोहल्ला जगतपुर में अपना मकान बनवा रहे हैं। मकान का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। इसी का फायदा उठाकर चोरों ने निर्माणाधीन भवन को निशाना बनाया। बताया गया है कि चोर मकान के मुख्य दरवाजे के पास लगी कुछ ईंटों को तोड़कर अंदर घुसे। इसके बाद उन्होंने वहां रखा कीमती सामान समेट लिया और बिना किसी को भनक लगे मौके से निकल गए।

    मकान मालिक के मुताबिक चोर बोरवेल में लगी मोटर के साथ एक टिल्लू मोटर भी निकालकर ले गए। इसके अलावा करीब 300 फीट लंबी केबल भी चोरी कर ली गई। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाला लगभग दो क्विंटल लोहे का सरिया भी चोरों ने नहीं छोड़ा। चोरी हुए सामान का पता उस समय चला जब मकान मालिक निर्माणाधीन भवन पर पहुंचे और सामान गायब मिला।

    मकान में सामान अस्त व्यस्त मिलने और प्रवेश के स्थान पर ईंटें टूटी देखकर उन्हें चोरी की आशंका हुई। इसके बाद इंदरसेन धाकड़ ने आसपास रहने वाले लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की। उन्होंने स्थानीय लोगों से यह पता लगाने का प्रयास किया कि 14 से 16 सितंबर के बीच किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन को इलाके में देखा गया था या नहीं। हालांकि आसपास के लोगों से चोरों के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।

    इसके बाद मकान मालिक ने मामले की सूचना पुलिस को दी और 17 सितंबर को कोलारस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने और चोरी गया सामान बरामद कराने की मांग की गई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस अब आसपास के क्षेत्र में पूछताछ करने के साथ ही चोरी की घटना से जुड़े संभावित सुराग जुटा रही है। निर्माणाधीन मकान में आमतौर पर सुरक्षा व्यवस्था कम होने के कारण वहां रखा सरिया केबल मोटर और अन्य निर्माण सामग्री चोरों के निशाने पर रहती है। इस घटना में भी चोरों ने ऐसी ही सामग्री को चुना जिसे आसानी से निकालकर ले जाया जा सकता था और जिसकी कीमत भी अच्छी होती है।

    मकान मालिक की शिकायत के बाद अब पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि चोरी में कितने लोग शामिल थे और चोरी का सामान किस वाहन से ले जाया गया। आसपास के इलाकों में पूछताछ और उपलब्ध सुरागों के आधार पर पुलिस चोरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

  • मिर्जापुर में गंगा में कूदी महिला 14 घंटे बाद 35 किलोमीटर दूर चुनार घाट पर मछुआरों को जीवित मिली

    मिर्जापुर में गंगा में कूदी महिला 14 घंटे बाद 35 किलोमीटर दूर चुनार घाट पर मछुआरों को जीवित मिली

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में गंगा में कूदी एक महिला को करीब 14 घंटे बाद जीवित बरामद कर लिया गया। महिला मंगलवार शाम शास्त्री पुल से गंगा में कूदी थी। पूरी रात तेज धारा में बहने के बाद वह शास्त्री पुल से करीब 35 किलोमीटर दूर चुनार घाट के पास पहुंच गई। बुधवार सुबह गंगा में मछली पकड़ रहे मछुआरों की नजर महिला पर पड़ी। उन्होंने उसे पानी से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। महिला की हालत खराब होने पर चिकित्सकीय उपचार कराया गया। बाद में पुलिस ने उसका बयान दर्ज करने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया।

    पुलिस के अनुसार कछवां के बरैनी गांव निवासी 38 वर्षीय सुनीता साहनी की शादी करीब 18 वर्ष पहले कटरा के छोटी बसही मोहल्ला निवासी सूर्यबली से हुई थी। सूर्यबली गुजरात के जामनगर में काम करता है। बताया गया कि सुनीता किसी बात को लेकर नाराज थी और मंगलवार शाम उसने शास्त्री पुल से गंगा में छलांग लगा दी। घटना की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश की गई, लेकिन तत्काल उसका पता नहीं चल सका।

    इसके बाद गंगा की तेज धारा महिला को बहाकर चुनार की ओर ले गई। बुधवार सुबह करीब सात बजे चुनार घाट पर गणेश साहनी, रामबाबू साहनी और रंजीत साहनी गंगा में मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पानी में एक महिला को बहते हुए देखा। मछुआरों ने उसे बाहर निकाला और पुलिस को घटना की सूचना दी।

    नदी से निकाले जाने के बाद महिला की हालत खराब थी। उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टर को बुलाकर उपचार कराया गया। उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। होश में आने पर महिला ने पुलिस को घटना के संबंध में जानकारी दी और बताया कि वह पति की एक बात से आहत होकर घर से निकली थी।

    महिला के अनुसार मंगलवार शाम करीब चार बजे उसने अपने पति को फोन कर दवा खरीदने के लिए पैसे भेजने को कहा था। उसके मुताबिक पति ने पैसे भेजने से इनकार कर दिया और उससे कहा, “मेरा तुमसे कोई मतलब नहीं, जाकर मर जाओ।” महिला ने बताया कि पति की इस बात से आहत होकर वह घर से निकल गई और शास्त्री पुल पर पहुंचकर गंगा में छलांग लगा दी।

    पुलिस की पूछताछ में महिला का अपनी सास के साथ विवाद होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार महिला ने अपने बयान में पति की बात से आहत होकर गंगा में छलांग लगाने की जानकारी दी है। महिला के जीवित मिलने के बाद पुलिस और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली।

    चुनार कोतवाल विजयशंकर सिंह के अनुसार मंगलवार शाम एक महिला के शास्त्री पुल से गंगा में कूदने की सूचना मिली थी। महिला अगले दिन चुनार घाट के पास मिली। उपचार के बाद उसकी हालत ठीक बताई गई और उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। महिला के शास्त्री पुल से चुनार तक पहुंचने की दूरी करीब 35 किलोमीटर बताई गई है। गंगा की तेज धारा में कई घंटे बहने के बाद महिला का जीवित मिलना इस घटना का प्रमुख पहलू रहा।

  • UPSC अनुभव साझा करने वाले वीडियो पर आपत्ति के बाद IPS बुशरा बानो को SAP चौथी बटालियन में मिली नई जिम्मेदारी

    UPSC अनुभव साझा करने वाले वीडियो पर आपत्ति के बाद IPS बुशरा बानो को SAP चौथी बटालियन में मिली नई जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में एक मुस्लिम IPS अधिकारी द्वारा अपने यूट्यूब वीडियो में ‘अस्सलामु अलैकुम’ और ‘इंशाल्लाह’ जैसे शब्दों का प्रयोग करने के बाद उनके खिलाफ एक्शन हो गया है। खबर है कि राज्य की भाजपा की सरकार ने IPS अधिकारी डॉ. बुशरा बानो का ट्रांसफर कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वीडियो पर कुछ दक्षिणपंथी समूहों की आपत्ति जताई थी और कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने पब्लिक ऑर्डर का हवाला देते हुए अधिकारी का तबादला कर दिया।

    मामला सामने आने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

    किस वीडियो पर हुआ एक्शन?

    रिपोर्ट के मुताबिक खड़गपुर की एडिशनल एसपी के पद पर तैनात डॉ बुशरा बानो ने यूट्यूब पर एक वीडियो डालकर अभ्यर्थियों के साथ यूपीएससी की तैयारी का अनुभव शेयर किया था। उन्होंने वीडियो में बताया कि सऊदी अरब से लौटने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की ‘रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी’ और वहां की लाइब्रेरी से उन्हें तैयारी में काफी मदद मिली। वो दूसरे अभ्यर्थियों को मोटिवेट भी करती नजर आ रही हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।

    क्या हुई आपत्ति?

    इस वीडियो पर ‘हिंदू लीगल फंड’ नामक संगठन ने आपत्ति जताते हुए राज्य की गृह सचिव संघमित्रा घोष को शिकायत भेजी। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि अधिकारी ने वीडियो की शुरुआत ‘अस्सलामु अलैकुम’ से की और ‘इंशाल्लाह’ और ‘जज़ाकल्लाह’ जैसे शब्द भी कहे। शिकायत की गई कि अधिकारी ने एक बार भी ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम’ नहीं बोला। संगठन ने लिखा कि एक ऑन-ड्यूटी अधिकारी को सार्वजनिक तौर पर शब्दों का इस्तेमाल करते समय निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।

    शिकायत के बाद अब बुशरा बानो का ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्हें पश्चिम मेदिनीपुर जिले के खड़गपुर की एडिशनल एसपी पद से हटाकर उन्हें अब स्टेट आर्म्ड पुलिस (SAP) की चौथी बटालियन में ‘डिप्टी कमांडेंट’ बनाया गया है। वहीं चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट के एडिशनल डीसी पार्थ घोष को खड़गपुर में बुशरा बानो की जगह नया एडिशनल एसपी तैनात किया गया है।

    भड़क गईं महुआ मोइत्रा

    IPS अधिकारी के ट्रांसफर की खबर आते ही टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा कि देश नफरत और कट्टरता से भरता जा रहा है। महुआ मोइत्रा ने लिखा, “जिस देश के प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन का उद्घाटन सेंगोल और साधुओं के साथ किया था, उस देश में एक मुस्लिम आईपीएस अधिकारी का सिर्फ ‘अस्सलामु अलैकुम’ और ‘इंशाअल्लाह’ कहने पर तबादला कर देना हास्यास्पद है।” उन्होंने आगे कहा, “हम एक ऐसे देश में बदलते जा रहे हैं, जो नफरत और कट्टरता से भरा हुआ है। भगवान ही भारत को बचाए।”

  • बड़े सितारों और भारी बजट के बावजूद 2026 में कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नहीं पाया दम

    बड़े सितारों और भारी बजट के बावजूद 2026 में कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में नहीं पाया दम

    नई दिल्ली । साल 2026 का नौवां महीना भी जल्द खत्म होने वाला है। इन नौ महीनों में सिनेमाघरों में कई फिल्में आईं, जिनमें से कुछ हिट हुईं तो कुछ फ्लॉप हुईं। इस खबर में जानिए उन फिल्मों के बारे में, जो इस साल थिएटर तक दर्शकों को खींचने में असफल रहीं।

    2026 की फ्लॉप फिल्में

    भारतीय सिनेमा के लिए साल 2026 उम्मीदों से भरा हुआ था। बड़े सितारे, भारी-भरकम बजट, शानदार स्टारकास्ट और चर्चित फ्रेंचाइजी फिल्मों ने दर्शकों के बीच उत्साह पैदा किया। लेकिन जैसे-जैसे साल आगे बढ़ा, बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों की चमक फीकी पड़ती नजर आई।

    जनवरी से सितंबर तक रिलीज हुई कई चर्चित फिल्मों ने निर्माताओं और सितारों की उम्मीदों को झटका दिया। खास बात यह रही कि इनमें सिर्फ नए कलाकारों की फिल्में नहीं, बल्कि सुपरस्टार्स और बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्में भी शामिल रहीं।

    ऐसे में सवाल उठने लगा कि क्या दर्शकों का टेस्ट तेजी से बदल रहा है या फिर बड़े बजट की फिल्मों में पुराना फॉर्मूला अब काम नहीं कर रहा? आइए जानते हैं जनवरी से सितंबर तक की उन फिल्मों के बारे में, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया।

    द राजा साब (208 करोड़ रुपये)

    साल की शुरुआत यानी जनवरी में प्रभास की फिल्म ‘द राजा साब’ आई। फिल्म को लेकर दर्शकों में काफी उत्सुकता थी, क्योंकि इसमें प्रभास एक अलग तरह के अवतार में नजर आए। बड़े बजट और स्टार पावर के बावजूद फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।

    350 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड सिर्फ 208 करोड़ रुपये का ही बिजनेस किया और साल की पहली फ्लॉप साबित हुई।

    ओ रोमियो (72.99 करोड़ रुपये)

    फरवरी में विशाल भारद्वाज की ‘ओ रोमियो’ रिलीज हुई। फिल्म में शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की जोड़ी नजर आई। विशाल भारद्वाज जैसे निर्देशक और मजबूत स्टारकास्ट के कारण फिल्म को लेकर काफी चर्चा थी। फिल्म की कहानी, माहौल को लेकर दर्शकों की उम्मीदें ऊंची थीं। हालांकि, रिलीज के बाद इसे मिली जुली प्रतिक्रियाएं मिलीं और बॉक्स ऑफिस पर भी यह उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    100 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने सिर्फ 72.99 करोड़ रुपये का बिजनेस किया।

    उस्ताद भगत सिंह (96.2 करोड़ रुपये)

    मार्च में पवन कल्याण स्टारर ‘उस्ताद भगत सिंह’ सिनेमाघरों में आई। फिल्म को लेकर साउथ इंडियन सिनेमा के फैंस में खासा उत्साह था। पवन कल्याण की लोकप्रियता और एक्शन फिल्मों की मजबूत फैन फॉलोइंग के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी। यह फिल्म उन फिल्मों में शामिल रही, जो इस साल डिजास्टर साबित हुईं हैं।

    फिल्म की कहानी ने यह भी दिखाया कि आज के दर्शक सिर्फ बड़े स्टार या बड़े एक्शन सीक्वेंस के आधार पर फिल्म देखने का फैसला नहीं करते। कहानी, स्क्रीनप्ले और भावनात्मक जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण हो चुका है।

    150 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में सिर्फ 96.2 करोड़ रुपये का ही बिजनेस किया था।

    डकैत – एक प्रेम कथा (56.14 करोड़ रुपये)

    अप्रैल में ‘डकैत – एक प्रेम कथा’ रिलीज हुई। आदिवी शेष और मृणाल ठाकुर स्टारर इस फिल्म को एक अलग तरह की एक्शन-रोमांटिक कहानी के रूप में पेश किया गया था। फिल्म की कहानी और कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद इसे बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं मिली।

    फिल्म की असफलता से यह साफ हुआ कि आज के दौर में सिर्फ कहानी का आइडिया काफी नहीं है, बल्कि उसकी प्रेजेंटेशन और मार्केटिंग भी सफलता में अहम भूमिका निभाती है।

    लगभग 70 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने सिर्फ 56.14 करोड़ रुपये का ही बिजनेस किया।

    एक दिन (5.50 करोड़ रुपये)

    मई में आमिर खान के लाडले जुनैद खान और साई पल्लवी की फिल्म ‘एक दिन’ आई। ऐसे में दर्शकों को थोड़ी उम्मीद थी कि उन्हें इसमें कुछ नया देखने को मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ना तो बॉलीवुड सुपरस्टार के बेटे दर्शकों को खींचने में सफल रहे और ना ही साउथ की स्टार एक्ट्रेस।

    लगभग 18 से 20 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में सिर्फ 5.50 करोड़ का ही बिजनेस किया और यह भी डिजास्टर साबित हुई।

    है जवानी तो इश्क होना है (51 करोड़ रुपये)

    जून में वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े अभिनीत फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ रिलीज हुई। 5 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस फिल्म से सभी को बहुत उम्मीदें थी पर यह फ्लॉप साबित हुई। भले ही इसने देशभर में 51 करोड़ रुपये कमाए पर इसकी स्टारकास्ट और लागत से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी।

    करीबन 60 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने देशभर में 51 करोड़ का बिजनेस किया।

    अल्फा (98.9 करोड़ रुपये)

    जुलाई में ‘अल्फा’ जैसी बहुप्रतीक्षित फिल्म से दर्शकों और इंडस्ट्री को काफी उम्मीदें थीं। स्पाई यूनिवर्स से जुड़े होने के चलते इस फिल्म का नाम पहले ही बड़े प्रोजेक्ट्स की सूची में शामिल था लेकिन बड़े फ्रेंचाइजी नामों के बावजूद किसी फिल्म की सफलता सुनिश्चित नहीं होती।

    130 करोड़ रुपये के बजट में बनी आलिया-शरवरी और बॉबी अभिनीत इस फिल्म ने दुनियाभर में सिर्फ 98.9 करोड़ का ही बिजनेस किया।

    टॉक्सिक (312 करोड़ रुपये*)

    अगस्त में यश स्टारर ‘टॉक्सिक’ को लेकर जबरदस्त चर्चा रही। ‘केजीएफ’ के बाद यश की लोकप्रियता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी है और ऐसे में ‘टॉक्सिक’ से काफी बड़ी उम्मीदें थीं। फिल्म का स्केल, एक्शन और विजुअल प्रेजेंटेशन इसकी सबसे बड़ी खासियतों में गिने जा रहे थे। लेकिन बड़े स्टार की फिल्म होने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर आते ही फ्लॉप हो गई थी। पहले दिन 100 करोड़ कमाने वाली इस फिल्म ने अब तक वर्ल्डवाइड 312 करोड़ का कारोबार किया।

  • सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े इस आयोजन का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ रखी गई है। आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी और कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को संबोधित किया।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में भारत के साथ 52 अन्य देशों की कंपनियां भी भाग ले रही हैं। आयोजन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा निवेशक, वैज्ञानिक, स्टार्टअप, छात्र और सरकारी अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े काम और कारोबार को आगे बढ़ाने से संबंधित विषयों पर चर्चा के लिए विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाना है।

    इस आयोजन में 600 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल हुए हैं। इनमें करीब 300 विदेशी कंपनियां हैं। प्रदर्शकों के लिए 15 हजार वर्ग मीटर का प्रदर्शनी क्षेत्र तैयार किया गया है। कार्यक्रम में 150 से ज्यादा विशेषज्ञ और वक्ता भी हिस्सा ले रहे हैं। वे सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े नए काम, उपलब्ध अवसर और क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में छह देशों के विशेष पवेलियन भी बनाए गए हैं। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन शामिल हैं। इनके अलावा 12 राज्य सरकारों के पवेलियन भी प्रदर्शनी में मौजूद हैं। इससे विभिन्न देशों और राज्यों की ओर से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े प्रयासों तथा गतिविधियों को सामने रखने का अवसर मिल रहा है।

    कार्यक्रम में स्टार्टअप और छात्रों के लिए भी विशेष स्थान रखा गया है। करीब 40 स्टार्टअप अपने प्रोजेक्ट और नए विचारों को प्रदर्शित कर रहे हैं। इस तरह आयोजन में उद्योग से जुड़े बड़े संस्थानों के साथ नई तकनीक और नए विचारों पर काम कर रहे स्टार्टअप और छात्रों को भी भागीदारी का अवसर मिला है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकॉन इंडिया में मौजूद सभी लोगों का स्वागत किया और विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन की शक्ति के प्रतीक के रूप में बताते हुए कहा कि संयोग है कि इसी दिन से सेमीकॉन इंडिया की शुरुआत हो रही है।

    प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक एक प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण में जुटा है। उन्होंने बीते 15 दिनों के दौरान भारत में हुए विभिन्न घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए देश की विकास यात्रा की दिशा और गति पर बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने सितंबर में मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उल्लेख किया, जहां एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के माध्यम से समावेशी वित्त पर चर्चा हुई। उन्होंने इसी अवधि में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने सितंबर में जारी भारत की तिमाही जीडीपी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी सामने रखी।