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  • दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47 लाख नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR पर 21 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

    दिल्ली की वोटर लिस्ट से 47 लाख नाम हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR पर 21 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

    नई दिल्ली ।दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में दायर याचिका पर 21 सितंबर को सुनवाई होगी। याचिका में दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों और इस प्रक्रिया के तहत जारी किए गए नोटिस को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    31 अगस्त को SIR के तहत दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसमें कुल करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47 लाख नाम हटा दिए गए। नामों को हटाने के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 43.32 लाख से अधिक मतदाता ऐसे पाए गए जो या तो स्थानांतरित हो चुके थे या अपने दर्ज पते पर मौजूद नहीं मिले।

    इसके अलावा करीब 2.82 लाख मतदाताओं को मृत पाया गया, जबकि 1.41 लाख से अधिक मतदाता एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। इन आंकड़ों के आधार पर बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए। इस प्रक्रिया को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

    मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत के समक्ष दावा किया कि दिल्ली में करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से करीब 33 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।

    याचिका में नोटिस से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नोटिस पाने वाले लोगों के नाम और मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इस वजह से प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

    मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष होगी। अदालत ने इस मामले से संबंधित सुनवाई के लिए 21 सितंबर की तारीख तय की है। पीठ ने यह भी कहा कि अगले सप्ताह इस विषय से जुड़े कई मामले सूचीबद्ध हैं।

    SIR के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट सूची में नाम शामिल नहीं होने से जुड़े मामलों पर आगे की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। ड्राफ्ट सूची अंतिम मतदाता सूची नहीं होती और इसमें नाम से संबंधित आपत्ति या दावा दर्ज कराने की प्रक्रिया का प्रावधान रहता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से प्रभावित मतदाता अपना पक्ष रख सकते हैं।

    दिल्ली की मतदाता सूची में SIR के तहत हुए इस पुनरीक्षण के बाद सामने आए आंकड़ों ने बड़ी संख्या में नामों के ड्राफ्ट सूची से बाहर होने का मुद्दा सामने रखा है। एक तरफ नाम हटाए जाने के लिए स्थानांतरण, पते पर मौजूद नहीं होना, मृत्यु और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण जैसे कारण बताए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ याचिका में नोटिस पाने वाले लोगों और नाम हटाने के आधार को सार्वजनिक करने से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।

    अब 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में इस मामले से जुड़े पक्षों की दलीलें सामने आएंगी। सुनवाई के दौरान दिल्ली की SIR प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों और नोटिस से जुड़े मुद्दों पर अदालत के समक्ष पक्ष रखा जाएगा।

  • सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा मिला

    सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा मिला

    नई दिल्ली ।सीआईआई अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए उनके नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा मिला है। मुकुंदन ने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने पर भी उन्हें बधाई दी।

    मुकुंदन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनके अनुसार, औपचारिकीकरण, समावेशन और डिजिटलाइजेशन प्रधानमंत्री के कार्यकाल की उपलब्धियों के तीन प्रमुख स्तंभ रहे हैं। उन्होंने इन तीनों क्षेत्रों में उठाए गए कदमों को अर्थव्यवस्था में बदलाव से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

    अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण की चर्चा करते हुए मुकुंदन ने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, जीएसटी ने अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे आर्थिक व्यवस्था में बदलाव लाने वाले प्रमुख कदमों में शामिल किया।

    वित्तीय समावेशन के संदर्भ में उन्होंने जन धन-आधार-मोबाइल यानी जेएएम ढांचे का उल्लेख किया। मुकुंदन के मुताबिक, जेएएम ढांचा वित्तीय समावेशन का एक प्रमुख माध्यम रहा है। इसके जरिए वित्तीय व्यवस्था से जुड़ाव बढ़ाने की दिशा में काम हुआ है।

    डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में मुकुंदन ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यूपीआई को भारत के डिजिटलाइजेशन अभियान का एक अहम हिस्सा बताया और इसे डिजिटल आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर देखा।

    मुकुंदन ने आगे कहा कि अब देश में ध्यान केवल कारोबार करने में आसानी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, फोकस आम नागरिक के लिए जीवन जीने में आसानी, जीवन-यापन की लागत और जीवन की गति को बेहतर बनाने पर होना चाहिए। उन्होंने इसे भविष्य के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में सामने रखा।

    उन्होंने कहा कि अब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से आगे बढ़कर ‘ईज ऑफ लिविंग’, ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग’ और ‘स्पीड ऑफ लिविंग’ पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आर्थिक विकास का असर आम नागरिक के जीवन में भी दिखाई देना चाहिए और नीतिगत प्राथमिकताओं में लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े पहलुओं को महत्व मिलना चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए मुकुंदन ने कहा कि उन्हें देश और उसके लोगों के लिए ऊंची आकांक्षाएं तय करना जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक नेता के रूप में प्रधानमंत्री को पूरे देश और समाज से ऊंची आकांक्षाएं रखने की जरूरत है।

    मुकुंदन के अनुसार, ऐसी आकांक्षाएं भारत को अपने लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश में विकास के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है। ऐसे समय में ऊंचे लक्ष्य तय करना और उन्हें हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।

    मुकुंदन ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व और आर्थिक बदलावों का उल्लेख करते हुए औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने भविष्य की प्राथमिकताओं में आम नागरिक के जीवन से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश में तैयार होने वाली चिप्स आने वाले समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेंगी। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास दर और तकनीकी क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उनके अनुसार, वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने पिछले कुछ समय में देश में हुए कई महत्वपूर्ण आयोजनों और विकास से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

    इस दौरान उन्होंने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का जिक्र किया। यहां एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए वित्तीय सेवाओं को अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री ने इन तकनीकी क्षेत्रों को देश के डिजिटल और वित्तीय ढांचे से जोड़ते हुए भारत में हो रहे बदलावों का उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने देश में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर से देशभर में माल की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर होगी और विनिर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी। इससे उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने भारत की बढ़ती क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की चिप इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है और भारत में तैयार होने वाली चिप्स दुनिया भर में जाएंगी। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन इसी व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रेटिंग में सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत है। भारत की मेजबानी में हाल ही में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने आम सहमति से नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाए जाने को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रति भरोसे का एक संकेत बताया।

    केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके छह प्रमुख स्तंभों में चिप डिजाइन, मशीन और मटेरियल, फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट शामिल हैं।

    उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के पहले चरण में 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इनमें करीब 20 स्टार्टअप्स ने लगभग 800 करोड़ रुपये की वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की। सेमीकॉन 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है।

    अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत ने 10 वर्षों में 85,000 डिजाइन इंजीनियर तैयार करने का शुरुआती लक्ष्य रखा था, लेकिन चार वर्षों में ही 70,000 इंजीनियर तैयार किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि देशभर की 400 से अधिक यूनिवर्सिटीज में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, शोध और प्रतिभा विकास से जुड़े प्रयासों को एक व्यापक ढांचे में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • पीएमईजीपी योजना से धमतरी के शाकिर खान ने शुरू किया होटल, अब 6 से 7 युवाओं को दे रहे रोजगार

    पीएमईजीपी योजना से धमतरी के शाकिर खान ने शुरू किया होटल, अब 6 से 7 युवाओं को दे रहे रोजगार

    नई दिल्ली ।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के रहने वाले शाकिर खान ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी पीएमईजीपी योजना का लाभ लेकर अपना कारोबार शुरू किया है। कभी खुद का व्यवसाय शुरू करना उनके लिए एक सपना था, लेकिन बैंक ऋण और सरकारी सब्सिडी की मदद से उन्होंने होटल स्थापित किया। अब वह अपने कारोबार के जरिए खुद रोजगार पाने के साथ 6 से 7 युवाओं को रोजगार भी दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर केंद्र सरकार की पीएमईजीपी योजना को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़कर देखा जा रहा है। योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को अपना कारोबार शुरू करने में मदद करना है, जो रोजगार की तलाश में हैं और अपना व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं। इसके तहत बैंक ऋण के साथ सरकारी सब्सिडी का लाभ उपलब्ध कराया जाता है।

    शाकिर खान के लिए इस योजना का लाभ उनके कारोबारी सफर में महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने बताया कि पहले खुद का व्यवसाय शुरू करना केवल एक सपना था। कारोबार शुरू करने के लिए आवश्यक आर्थिक संसाधन जुटाना उनके लिए आसान नहीं था। पीएमईजीपी योजना के तहत बैंक से ऋण मिलने और सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद उनके लिए होटल शुरू करना संभव हो सका।

    होटल शुरू होने के बाद उनका कारोबार आगे बढ़ा और अब वह अपने काम को संचालित कर रहे हैं। शाकिर के मुताबिक, इस योजना ने उनके उद्यमी बनने के सपने को पूरा करने में मदद की। उनका कहना है कि यदि उन्हें पीएमईजीपी योजना का सहयोग नहीं मिलता तो अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना अधूरा रह सकता था।

    शाकिर खान का उदाहरण इस बात से जुड़ा है कि सरकारी वित्तीय सहायता का इस्तेमाल करके कोई व्यक्ति अपना रोजगार स्थापित करने के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर तैयार कर सकता है। होटल में फिलहाल 6 से 7 युवा काम कर रहे हैं। इस तरह उनका कारोबार उनके लिए आय का साधन बनने के साथ दूसरे युवाओं के रोजगार से भी जुड़ा है।

    पीएमईजीपी योजना का उद्देश्य युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार करना है। इसके माध्यम से उद्योग, सेवा और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। योजना के तहत कारोबार शुरू करने के इच्छुक लोगों को बैंक वित्तपोषण के माध्यम से अपना उद्यम स्थापित करने का अवसर मिलता है।

    शाकिर खान ने योजना को युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने और आर्थिक रूप से मजबूत होने में मददगार बताया। उनके अनुसार, कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक सहयोग मिलने से उन लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, जिनके पास अपना व्यवसाय शुरू करने की इच्छा तो होती है, लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं होते।

    पीएमईजीपी के जरिए शाकिर ने धमतरी में अपना होटल शुरू किया और अब वह स्वयं उद्यमी के रूप में काम कर रहे हैं। उनके कारोबार से जुड़े 6 से 7 युवाओं को भी रोजगार मिला है। इस तरह उनकी व्यक्तिगत कारोबारी शुरुआत अब अन्य लोगों की आजीविका से भी जुड़ गई है।

    शाकिर की कहानी स्वरोजगार के उस पहलू को सामने रखती है, जिसमें सरकारी योजना के जरिए व्यवसाय शुरू करने वाले व्यक्ति आगे चलकर दूसरे लोगों के लिए भी काम के अवसर तैयार कर सकते हैं। पीएमईजीपी के तहत मिलने वाले ऋण और सब्सिडी के सहारे उन्होंने अपने सपने को कारोबार में बदला और रोजगार देने वाले उद्यमी के रूप में आगे बढ़े।

  • झड़ते बालों से हैं परेशान तो ऐसे करें नारियल तेल का इस्तेमाल जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    झड़ते बालों से हैं परेशान तो ऐसे करें नारियल तेल का इस्तेमाल जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली तनाव खानपान में पोषक तत्वों की कमी नींद पूरी न होना और बालों की सही देखभाल नहीं करना इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए बाजार में कई तरह के उत्पाद मौजूद हैं लेकिन घरेलू स्तर पर नारियल तेल का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। नारियल तेल बालों को कंडीशन करने और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि बालों का झड़ना लगातार बढ़ रहा हो तो केवल घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय कारण की पहचान करना जरूरी है।

    नारियल तेल को बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल करने का एक आसान तरीका है इसे हल्का गुनगुना करके सिर की त्वचा पर लगाना। तेल को बहुत गर्म नहीं करना चाहिए। हल्के हाथों से उंगलियों की मदद से सिर की त्वचा पर मसाज की जा सकती है। इससे बालों में तेल अच्छी तरह फैलता है और सिर की त्वचा की मालिश करने से आराम भी महसूस हो सकता है। मसाज करते समय नाखूनों का इस्तेमाल करने के बजाय उंगलियों के पोरों से धीरे धीरे मालिश करना बेहतर रहता है।

    अगर बाल बहुत ज्यादा रूखे हैं तो नारियल तेल को बालों की लंबाई पर भी लगाया जा सकता है। खासतौर पर बालों के सिरों पर थोड़ी मात्रा में तेल लगाने से रूखापन और उलझने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। तेल लगाने के बाद कुछ समय के लिए बालों को छोड़ दें और फिर हल्के शैंपू से धो लें। बहुत अधिक तेल लगाने से बाल चिपचिपे हो सकते हैं और उन्हें साफ करने में ज्यादा शैंपू की जरूरत पड़ सकती है।

    नारियल तेल में कुछ लोग एलोवेरा जेल या मेथी जैसी चीजें मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे घरेलू मिश्रणों का इस्तेमाल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि किसी चीज से एलर्जी या सिर की त्वचा में जलन तो नहीं होती। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोग थोड़ी मात्रा को त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर प्रतिक्रिया देख सकते हैं। जलन खुजली लालिमा या किसी तरह की परेशानी होने पर इसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए।

    बालों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल तेल लगाना पर्याप्त नहीं है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना भी महत्वपूर्ण है। दालें अंडे दूध दही हरी सब्जियां फल और मेवे जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना भी बालों की सामान्य सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है।

    बालों को धोने के बाद बहुत जोर से रगड़ने या लगातार गर्म उपकरणों का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। गीले बाल अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं इसलिए उन्हें धीरे से सुखाना बेहतर रहता है। बहुत कसकर बाल बांधने की आदत भी बालों पर खिंचाव बढ़ा सकती है।

    ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में बाल झड़ने का कारण अलग हो सकता है। अगर बाल अचानक बहुत तेजी से झड़ने लगें सिर की त्वचा पर खुजली या घाव हों या बालों में स्पष्ट रूप से खाली जगह दिखाई देने लगे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। नारियल तेल बालों की देखभाल का एक सामान्य घरेलू तरीका हो सकता है लेकिन यह हर तरह के बाल झड़ने का इलाज नहीं है।

  • हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम

    हाईवे पर गौवंश बना जानलेवा खतरा बाइक सवार युवक की मौत उसी हादसे में बैल ने भी तोड़ा दम


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी लगातार हादसों की वजह बन रही है। बुधवार रात सुभाषपुरा थाना क्षेत्र में मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां सड़क पर बैठे बैल से बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार 38 वर्षीय विकास भार्गव गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में बैल की भी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हाईवे पर कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक खेड़ापति कॉलोनी शिवपुरी निवासी विकास भार्गव बुधवार को किसी काम से बाइक लेकर ग्वालियर गए थे। रात करीब 8 बजे वह ग्वालियर से शिवपुरी वापस लौट रहे थे। इसी दौरान मुड़खेड़ा टोल प्लाजा के पास सड़क पर एक बैल बैठा हुआ था। अंधेरा होने के कारण बाइक सवार को सड़क पर बैठे बैल का अंदाजा नहीं हो सका और बाइक सीधे उससे जा टकराई। प्रत्यक्ष तौर पर टक्कर बेहद तेज बताई जा रही है।

    हादसे के बाद विकास सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हाईवे एंबुलेंस की मदद से घायल विकास भार्गव को मेडिकल कॉलेज शिवपुरी ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने विकास को मृत घोषित कर दिया। गुरुवार को पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में भी मातम पसर गया।

    यह हादसा ऐसे समय हुआ जब इसी दिन शिवपुरी जिले में गौवंश से जुड़ा एक और गंभीर सड़क हादसा सामने आया था। सतनबाड़ा थाना क्षेत्र में एनएच-46 पर सुबह एक कार सड़क पर मौजूद गौवंश से टकरा गई थी। बताया गया कि कार में उत्तर प्रदेश के दो लोग सवार थे। हादसे के दौरान सड़क पर मौजूद आठ गौवंश में से छह की मौत हो गई जबकि दो घायल हो गए। टक्कर के बाद कार में सवार दोनों लोग वाहन के भीतर फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।

    बुधवार सुबह हुए इस हादसे के कुछ घंटे बाद रात में सुभाषपुरा इलाके में बैल से बाइक की टक्कर ने एक और जान ले ली। एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने हाईवे पर आवारा गौवंश की मौजूदगी और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रात के समय हाईवे पर बैठे या अचानक सड़क पर आ जाने वाले गौवंश वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

    प्रशासन की ओर से सड़कों पर बैठे गौवंश को हटाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद हाईवे और प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश नजर आने की बात सामने आ रही है। लगातार हो रहे हादसों में कई गौवंश की भी मौत हो चुकी है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार ऐसी घटनाओं में अब तक करीब आधा सैकड़ा गौवंश की मौत होने की बात कही जा रही है। विकास भार्गव की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर बैठे गौवंश को हटाने के लिए जारी आदेशों का प्रभावी तरीके से पालन कब होगा।

  • उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    नई दिल्ली ।हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं के अलावा उंगलियों की बनावट और उनके बीच दिखाई देने वाले अंतर को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि जब हथेली की सभी उंगलियों को एक साथ मिलाने के बाद भी उनके बीच गैप दिखाई देता है, तो इससे व्यक्ति के स्वभाव और आर्थिक स्थिति से जुड़े कुछ संकेत मिल सकते हैं। अलग-अलग उंगलियों के बीच बने गैप का अलग अर्थ बताया गया है।

    तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच गैप को हस्तरेखा शास्त्र में स्वतंत्र विचारों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर दिखाई देता है, वे किसी के दबाव में रहकर काम करना पसंद नहीं करते। वे अपने तरीके से निर्णय लेना और स्वतंत्र होकर काम करना पसंद कर सकते हैं।

    ऐसे लोगों को मेहनती भी माना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, ये लोग अपनी मेहनत के दम पर धन और मान-सम्मान हासिल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, कमाई के साथ खर्च करने की प्रवृत्ति भी अधिक हो सकती है। इसलिए इन्हें आर्थिक मामलों में अनुशासन और खर्च पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, यदि ऐसे लोग अपनी योजनाओं और खर्च को व्यवस्थित तरीके से संभालें, तो जीवन में अच्छी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

    मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच गैप को आर्थिक स्थिति और करियर से जोड़कर देखा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र की मान्यता के अनुसार, ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती वर्षों में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर 25 वर्ष की उम्र तक आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने की बात कही जाती है। करियर में भी स्थिरता आने में समय लग सकता है।

    इसके बावजूद ऐसे लोगों के स्वभाव को उदार माना जाता है। मान्यता है कि इनके पास धन सीमित होने के बावजूद ये दूसरों की मदद करने की कोशिश करते हैं। भविष्य को लेकर ज्यादा चिंता न करने के कारण ये लोग कई बार आर्थिक योजना और बजट बनाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। इससे उन्हें वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सही योजना और बजट के साथ जीवन आगे बढ़ाने पर परिस्थितियों में सुधार की संभावना मानी जाती है।

    अनामिका और कनिष्ठा यानी छोटी उंगली के बीच दिखाई देने वाले गैप को हस्तरेखा शास्त्र में व्यक्ति की वृद्धावस्था की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार, यदि इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर हो तो बुढ़ापे में आर्थिक परेशानी की स्थिति बन सकती है। ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती चरण से ही भविष्य के लिए आर्थिक योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

    वहीं, अगर अनामिका और कनिष्ठा के बीच गैप नहीं होता है, तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे वृद्धावस्था में बेहतर आर्थिक स्थिति का संकेत माना जाता है। इस तरह उंगलियों के बीच का अंतर व्यक्ति के स्वभाव, खर्च करने की आदत, आर्थिक योजना और जीवन के अलग-अलग चरणों से जुड़ी मान्यताओं के आधार पर देखा जाता है।

    हालांकि, ये सभी बातें हस्तरेखा शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी या आर्थिक स्थिति का निश्चित आकलन नहीं माना जाना चाहिए। उंगलियों की बनावट और उनके बीच का अंतर व्यक्ति की शारीरिक संरचना से भी संबंधित हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को केवल पारंपरिक हस्तरेखा मान्यताओं के संदर्भ में ही देखना उचित है।

  • दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    नई दिल्ली ।बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। कैल्शियम शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण मिनरल है, जो हड्डियों और दांतों की संरचना को मजबूत बनाए रखने के साथ मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। आमतौर पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए दूध और डेयरी उत्पादों को प्रमुख स्रोत माना जाता है, लेकिन कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जिन्हें डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति दूध कम पीता है या कैल्शियम के लिए दूसरे विकल्प तलाश रहा है, तो पौधों से मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम का सेवन ही पर्याप्त नहीं माना जाता। शरीर में कैल्शियम के बेहतर इस्तेमाल के लिए विटामिन डी, पर्याप्त प्रोटीन, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

    रागी कैल्शियम से भरपूर अनाजों में शामिल है। इसमें कैल्शियम के साथ प्रोटीन और फाइबर भी पाया जाता है। इसे रोटी, दलिया या रागी डोसा के रूप में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। रागी के 100 ग्राम आटे में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है। इसकी मात्रा भोजन की तैयारी और इस्तेमाल किए गए उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है।

    तिल भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। सफेद और काले दोनों तरह के तिल भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल तिल की चटनी, सब्जी या सलाद में किया जा सकता है। तिल से लड्डू भी बनाए जाते हैं, लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। तिल में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है, फिर भी रोजाना सेवन की मात्रा सामान्यतः कम रहती है, इसलिए इसे पूरी डाइट का एक हिस्सा माना जाना चाहिए।

    टोफू उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो दूध से बने खाद्य पदार्थों के अलावा कैल्शियम का स्रोत तलाशते हैं। कैल्शियम-सेट टोफू में प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी मिलता है। हालांकि, सभी टोफू उत्पादों में कैल्शियम की मात्रा समान नहीं होती। इसलिए टोफू खरीदते समय उसके पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।

    हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कैल्शियम पाया जाता है। सहजन के पत्ते, चौलाई और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों को दाल, सब्जी या साग के रूप में भोजन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, पालक में मौजूद ऑक्सलेट कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल पालक पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए निर्भर रहना उचित नहीं है।

    बादाम भी कैल्शियम देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। इनमें मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स भी पाए जाते हैं। थोड़ी मात्रा में बादाम को नाश्ते या स्नैक के रूप में लिया जा सकता है। हालांकि, बादाम में कैल्शियम की मात्रा तिल या कैल्शियम-सेट टोफू से अलग होती है, इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना चाहिए।

    उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों के साथ मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। इसलिए डाइट में कैल्शियम वाले अलग-अलग खाद्य पदार्थों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त विटामिन डी, प्रोटीन और वजन सहने वाली नियमित शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

  • 50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री

    50 लाख संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का महाअभियान किसे मिलेगा लाभ और किन मामलों में अटक सकती है रजिस्ट्री


    भोपाल। मध्य प्रदेश में गांवों में वर्षों से अपने घर और आबादी की जमीन पर रह रहे लाखों परिवारों के लिए 17 सितंबर से एक बड़ा अभियान शुरू हो रहा है। स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा चयनित संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि जिन लोगों के नाम स्वामित्व योजना के रिकॉर्ड में पहले से दर्ज हैं उन्हें अब संपत्ति का पंजीकृत कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराया जाए। सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया में हितग्राहियों से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    इस योजना को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि स्वामित्व योजना में प्रॉपर्टी कार्ड और रजिस्ट्री एक जैसी चीज नहीं हैं। ग्रामीण आबादी की जमीन का सर्वे कर तैयार किए गए अधिकार अभिलेख में संपत्ति पर संबंधित व्यक्ति के अधिकार का रिकॉर्ड दर्ज होता है। अब सरकार इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए चयनित संपत्तियों का पंजीयन कराने जा रही है। यानी पहले से तैयार रिकॉर्ड को पंजीकृत दस्तावेज का रूप दिया जाएगा।

    सरकार ने इसके लिए अलग से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक व्यवस्था की है। पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाने की योजना है ताकि लोगों को रजिस्ट्री कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कुछ अधिकारियों को उप-पंजीयक की शक्तियां भी दी गई हैं। सरकार का लक्ष्य इस अभियान के दौरान बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन कम समय में पूरा करना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अभियान एक महीने तक चलाया जाएगा और पंजीयन के बाद दस्तावेज डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

    इसका फायदा हर व्यक्ति को अपने आप नहीं मिलेगा। अभियान में वही संपत्तियां शामिल हैं जिनके अधिकार अभिलेख स्वामित्व योजना के तहत पहले से तैयार और मंजूर हैं। इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम अभी स्वामित्व योजना के तैयार रिकॉर्ड में शामिल नहीं है तो केवल इस अभियान के दौरान आवेदन करके तुरंत मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सुविधा नहीं होगी। पहले उसका रिकॉर्ड योजना की प्रक्रिया के तहत तैयार होना जरूरी होगा।

    रजिस्ट्री होने के बाद संपत्ति के मालिक के पास उसका पंजीकृत दस्तावेज होगा। इससे संपत्ति से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को और मजबूत आधार मिल सकता है। सरकार का कहना है कि पंजीकृत दस्तावेज के आधार पर पात्रता और बैंक की अन्य शर्तें पूरी होने पर संपत्ति के बदले ऋण लेने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा संपत्ति को कारोबार या स्वरोजगार के लिए इस्तेमाल करने के रास्ते भी आसान हो सकते हैं।

    हालांकि जमीन विवादित होने पर स्थिति अलग हो सकती है। सिर्फ रजिस्ट्री हो जाने से किसी पुराने मालिकाना विवाद का अपने आप अंत नहीं माना जा सकता। यदि किसी संपत्ति पर किसी दूसरे व्यक्ति का दावा है या मामला राजस्व अथवा सिविल कोर्ट में चल रहा है तो उसका कानूनी निपटारा अलग प्रक्रिया से ही होगा। इसलिए रजिस्ट्री को हर तरह के भूमि विवाद का अंतिम समाधान मानना सही नहीं होगा।

    इस अभियान के बीच पटवारियों की आपत्ति भी सामने आई है। पटवारी संघों की चिंता अतिरिक्त जिम्मेदारी और रिकॉर्ड में भविष्य में सामने आने वाली किसी गलती की जवाबदेही को लेकर बताई गई है। उनका सवाल है कि यदि खसरे नक्शे या सर्वे रिकॉर्ड में कोई त्रुटि निकलती है और उसके आधार पर विवाद खड़ा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी। कुछ पटवारी संगठनों ने इस तरह की जिम्मेदारी के साथ अधिकार भी स्पष्ट करने की मांग की है।

    यह मुद्दा सरकार के स्तर पर भी उठा है। रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को पटवारियों की आशंकाएं दूर करने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से यह कहा गया है कि रजिस्ट्री का काम शासन स्तर से कराया जा रहा है और प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक चिंता की जरूरत नहीं है।

    यानी स्वामित्व योजना के तहत शुरू हो रहा यह अभियान उन ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी संपत्ति पहले से योजना के रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन किसी नए दावे या पुराने विवाद को केवल मुफ्त रजिस्ट्री के जरिए खत्म नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित राजस्व या न्यायिक प्रक्रिया ही लागू होगी। अब अभियान शुरू होने के साथ यह देखना अहम होगा कि चयनित 50 लाख से ज्यादा संपत्तियों का पंजीयन तय समय में किस तरह पूरा होता है।

  • सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात

    सर क्रीक-सिंध सीमा पर पाकिस्तान ने बढ़ाई युद्धक क्षमता, विशेष होवरक्राफ्ट किए तैनात


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) गुजरात (Gujarat) से सटे सर क्रीक और सिंध (Sir Creek and Sindh) के तटीय इलाकों में अपनी सैन्य तैयारियों को चुपचाप धार दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में इस इलाके में पाकिस्तान (Pakistan) ने अपनी एम्फीबियस (जल और थल) युद्धक क्षमताओं को तेजी से मजबूत किया है। दलदली पानी में चलने वाले विशेष होवरक्राफ्ट की तैनाती, नए ड्रोन प्रोजेक्ट और तीनों सेनाओं के बड़े युद्धाभ्यास यह बताते हैं कि पाकिस्तान इस जलीय और दुर्गम इलाके को भारत के खिलाफ एक नए मोर्चे के रूप में विकसित करने की जुगत में है।

    पाकिस्तान ने सर क्रीक के आसपास के बैकवाटर में कई तटीय सुरक्षा अभ्यास चलाए हैं। पिछले साल अगस्त में तुर्की की स्पेशल फोर्सेज और फरवरी में सऊदी अरब की नौसेना के साथ कराची/सिंध तट पर क्लोज-क्वार्टर कॉम्बैट अभियानों का अभ्यास किया गया। पिछले साल जून व अगस्त में पोर्ट कासिम और कराची बंदरगाहों पर गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने के लिए पोर्ट सिक्योरिटी और हार्बर डिफेंस अभ्यास भी आयोजित किए।


    पाकिस्तान की हालिया तैयारियां

    पाकिस्तान नौसेना ने इसी महीने उत्तरी अरब सागर में सी-स्पार्क युद्धाभ्यास की शुरुआत की है। इस अभ्यास में युद्धपोत, पनडुब्बियां, विमान और मानव रहित (ड्रोन) प्रणालियां शामिल हैं। अभ्यास का मुख्य फोकस पारंपरिक नौसैनिक युद्ध के साथ-साथ हवाई, जमीनी और साइबर समेत मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स की क्षमता मजबूत करना है, जिसमें पाकिस्तानी सेना और वायुसेना भी भाग ले रही हैं।

    पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद अक्तूबर में पाकिस्तान नौसेना प्रमुख एडमिरल नावेद अशरफ क्रीक के दौरे पर गए। इस दौरान तीन नए 2400 टीडी होवरक्राफ्ट मरीन बेड़े में शामिल किए गए। इस साल जुलाई में पाकिस्तानी नौसेना ने अबाबील नाम से एक एम्फीबियस और ड्रोन एकीकरण प्रशिक्षण चलाया। इसमें मरीन कमांडोज, यूएवी और समुद्र से तट पर उतरने वाले अभ्यासों को आपस में जोड़ा गया।


    पाकिस्तान की मंशा

    सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान की इस बहुआयामी तैयारी के पीछे कई सामरिक कारण हैं। पारंपरिक रूप से भारत-पाकिस्तान संघर्ष का केंद्र कश्मीर और पंजाब सीमा रही है। पाकिस्तान गुजरात के कच्छ और सर क्रीक मोर्चे को एक वैकल्पिक या आक्रामक मोर्चे के रूप में विकसित कर रहा है, ताकि भारतीय सेना को कई दिशाओं में उलझाया जा सके। सर क्रीक का इलाका बेहद जटिल, दलदली और जलीय है। जहां भारी टैंक या सेना के पारंपरिक वाहन काम नहीं करते। पाकिस्तान इन भौगोलिक बाधाओं का लाभ उठाकर तेजी से घुसपैठ या हमले की क्षमता परख रहा है। गुजरात सीमा पर हमले के पीछे मनोवैज्ञानिक पहलू भी जुड़े हैं। पाकिस्तान का आकलन है कि इस क्षेत्र में किसी तरह की सफलता भारत के राष्ट्रीय मनोबल को कमजोर कर सकती है।


    भारत की जवाबी तैयारी

    पिछले साल मई में भारत-पाक सैन्य टकराव के दौरान गुजरात मोर्चे पर पाकिस्तानी ड्रोनों की गतिविधियों को भारत ने नाकाम किया था। इसके बाद जून में सेना, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने इस क्षेत्र में एक बड़ा संयुक्त अभ्यास किया, जिसमें दलदली क्षेत्र में स्पीड बोट्स, ड्रोन-विरोधी प्रणालियों और अंडरवाटर ऑपरेशन्स का परीक्षण किया गया।


    पाक का हवाई मार्ग भारत के लिए 24 अक्तूबर तक बंद

    पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए हवाई क्षेत्र पर लगी रोक को एक और महीने के लिए बढ़ा दिया। पाकिस्तान के विमानपत्तन प्राधिकरण (पीएए) के मुताबिक, अब यह पाबंदी 24 अक्तूबर तक बढ़ाई गई है। यह रोक बुधवार सुबह 10:45 बजे से लागू हुई और 24 अक्तूबर 2026 सुबह 04:59 बजे तक जारी रहेगी। रोक की पिछली समय-सीमा 24 सितंबर को खत्म हो रही है।