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  • केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक

    केन्द्रीय मंत्रियों को दिल्ली में रहने का आदेश…. अगले हफ्ते PM मोदी करेंगे दो दिनी चिंतन बैठक


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले हफ्ते केंद्रीय मंत्रियों (Union Ministers) के साथ दो दिवसीय ‘चिंतन बैठक’ करेंगे। 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में सरकार के कामकाज, नीतियों और सुधारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन होगा। सूत्रों के मुताबिक, सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों को अगले हफ्ते दिल्ली में मौजूद रहने को कहा गया है। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री शामिल होंगे या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है।


    सुधारों पर मंत्रियों की होगी प्रेजेंटेशन

    बैठक में कुछ मंत्री अपने-अपने मंत्रालयों में किए गए काम और अलग-अलग क्षेत्रों में सुधारों को लेकर उठाए गए कदमों पर प्रेजेंटेशन दे सकते हैं। इस दौरान यह चर्चा भी हो सकती है कि सरकारी नीतियों को ज्यादा असरदार कैसे बनाया जाए और उनका फायदा आम लोगों तक तेजी से कैसे पहुंचाया जाए। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी मंत्रियों से कह चुके हैं कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और उनका जीवन आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।


    योजनाओं की प्रगति से लेकर सरकारी सेवाओं तक पर नजर

    ‘चिंतन बैठक’ में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति और उनके जमीन पर क्रियान्वयन की भी समीक्षा हो सकती है। चर्चा इस बात पर होगी कि योजनाओं का लाभ लोगों तक किस तरह और बेहतर तरीके से पहुंचाया जाए। इसके अलावा सरकारी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने और अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के तरीकों पर भी मंथन होने की संभावना है।


    आगे की रणनीति और सरकार के रोडमैप पर भी फोकस

    दो दिन चलने वाली इस बैठक में समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच समन्वय और नीतियां बनाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने जैसे मुद्दे भी उठ सकते हैं। अब तक किए गए काम की समीक्षा के साथ आगे की प्राथमिकताओं और सरकार के अगले रोडमैप पर भी चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक का बड़ा फोकस शासन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, सुधारों को गति देने और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक बेहतर तरीके से पहुंचाने पर रहेगा।


    पिछले हफ्ते राज्य मंत्रियों के साथ हुई थी लंबी बैठक

    बता दें कि पीएम मोदी ने अपनी सरकार के राज्य मंत्रियों के साथ भी लंबी बैठक की थी। इस दौरान मंत्रालयों के कामकाज और अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई थी। इससे पहले हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में भी अलग-अलग मंत्रालयों की उपलब्धियों पर चर्चा हुई थी। काम की रफ्तार, फाइलों के निपटारे और अदालतों में लंबित सरकारी मामलों जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालयों की रैंकिंग भी की गई थी। यह ‘चिंतन बैठक’ ऐसे वक्त हो रही है, जब मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज हैं। इसके अलावा मोदी सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

  • उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं

    उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं


    जबलपुर । मध्य प्रदेश के परिवहन और स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से जुड़े राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने परिवाद खारिज कर दिया है। जबलपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट के सामने यह प्रमाण नहीं आया कि जिस वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था वह मंत्री का वाहन था या तिरंगा मंत्री के निर्देश पर वहां लगाया गया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इसी आधार पर अदालत ने मामले में आगे कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

    यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने इस संबंध में अदालत में परिवाद दायर किया था। परिवादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्री एक खुली जीप में सवार थे और वाहन के बोनट पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था। आरोप था कि झंडा इस तरह लगा हुआ था कि वह मंत्री के पैरों को स्पर्श कर रहा था।

    परिवादी ने इस घटना को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के प्रावधानों से जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। मामले में यह तर्क भी रखा गया था कि वाहन के बोनट या किसी अन्य हिस्से पर राष्ट्रीय ध्वज को इस तरह रखना जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो कानून के प्रावधानों के विपरीत है। मार्च 2026 में इसी परिवाद पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत में यह सवाल भी उठा था कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए।

    परिवादी पक्ष ने अदालत में घटना से संबंधित तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया था। उनका कहना था कि घटना की शिकायत पहले गाडरवारा थाने में की गई लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायतें भेजे जाने का दावा किया गया था। परिवादी ने इसी आधार पर अदालत का रुख किया था। इन दावों का उल्लेख पहले की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्टों में भी किया गया था।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पाया कि पेश की गई तस्वीर में वाहन का नंबर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। साथ ही यह स्थापित करने वाला पर्याप्त प्रमाण भी सामने नहीं आया कि जिस वाहन पर तिरंगा लगाया गया था वह सरकारी वाहन या मंत्री का निजी वाहन था। इसके अलावा यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज को मंत्री के निर्देश पर वाहन पर लगाया गया था।

    इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए अदालत ने परिवाद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसका अर्थ यह है कि इस परिवाद के आधार पर मंत्री के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई का रास्ता इस स्तर पर बंद हो गया है।

    इस मामले की शुरुआत में अदालत की ओर से जारी नोटिस और अब परिवाद खारिज किए जाने के बीच कई महीनों तक सुनवाई चली। मार्च में सामने आई रिपोर्टों में मंत्री से जवाब मांगे जाने की जानकारी थी जबकि अब उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने की बात सामने आई है।

    फिलहाल अदालत के फैसले के बाद राव उदय प्रताप सिंह को इस परिवाद में राहत मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों और परिवादी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं पाया और इसी वजह से आगे की कार्रवाई के लिए परिवाद को स्वीकार नहीं किया।

  • PM मोदी आज मना रहे अपना 76वां जन्मदिन, जानिए उनकी उपलब्धियां और कीर्तिमान…

    PM मोदी आज मना रहे अपना 76वां जन्मदिन, जानिए उनकी उपलब्धियां और कीर्तिमान…


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज अपना 76वां जन्मदिन (76th Birthday) मना रहे हैं। केंद्र की सत्ता में रहते हुए यह उनका 13वां जन्मदिन है। गुरुवार सुबह से ही उन्हें देश-विदेश से बधाई मिलने का सिलसिला जारी है। अगर मोदी के पीएम के तौर पर कार्यकाल को देखा जाए तो बीते 12 वर्षों के अपने शासन में प्रधानमंत्री (Prime Minister) के तौर पर उन्होंने कई उपलब्धियां (Achievements) हासिल की हैं। फिर चाहे देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की बात हो या इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने का विषय। इन पहलुओं के साथ पीएम मोदी ने निजी तौर पर भी कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

    उनके कीर्तिमानों मे सबसे लंबे समय तक अलग-अलग स्तरों पर सरकार चलाने वाले नेता के साथ-साथ सबसे लंबे समय तक गैर-कांग्रेसी पीएम रहने तक की उपलब्धि शामिल है। इसी साल पीएम मोदी ने भारत पर लगातार सबसे लंबा शासन करने वाले प्रधानमंत्री बनने का कीर्तिमान भी अपने नाम किया। वे लगातार शासन के मामले में पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के लगातार 4398 दिन शासन (चुने हुए प्रधानमंत्री के तौर पर) करने के रिकॉर्ड को जून में तोड़ चुके हैं।

    हालांकि, यह सिर्फ कुछ रिकॉर्ड हैं, जिन्हें पीएम मोदी ने छुआ है। अभी कई और कीर्तिमान उनकी झोली में गिरना बाकी है। वहीं, कुछ और रिकॉर्ड ऐसे भी हैं, जो फिलहाल उनकी पहुंच से दूर हैं और उन्हें पार करने के लिए मोदी को कम से कम एक और कार्यकाल के लिए पीएम बनना होगा।

    ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से अब तक कौन-कौन से रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं? इनके जरिए उन्होंने किन नेताओं के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा? अब वे कौन सा रिकॉर्ड तोड़ने के बेहद करीब आ चुके हैं? इसके अलावा वे कौन से और किन नेताओं के रिकॉर्ड हैं, जो फिलहाल पीएम मोदी की पहुंच से दूर हैं और इन्हें हासिल करने में कितना समय लग सकता है?

    पीएम मोदी ने अब तक कौन-कौन से रिकॉर्ड तोड़े?
    1. भारत में सरकार के प्रमुख के रूप में सबसे लंबा कार्यकाल (राज्य और केंद्र मिलाकर)
    22 मार्च 2026 को पीएम मोदी राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों को मिलाकर भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गए थे। लगातार कार्यकारी पद पर बने रहने के मामले में उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

    पीएम मोदी के लिए यह पूरी उपलब्धि सिर्फ किसी एक सरकार का नेतृत्व करते हुए नहीं आई है। बल्कि उनकी इस उपलब्धि में 15 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड और अब लगातार करीब 12 साल से प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड शामिल है।

    गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 12 वर्ष से अधिक (अक्तूबर 2001 – मई 2014)
    भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्ष से अधिक (मई 2014 – वर्तमान)


    2. सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री

    पीएम मोदी कांग्रेस पार्टी से बाहर के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने इस मामले में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को काफी पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा, वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने संसद में लगातार दो बार पूर्ण बहुमत (2014 और 2019 दोनों में) की सरकार बनाई। इनमें जहां भाजपा अपनी दम पर बहुमत के आंकड़े- 272 के पार थी, वहीं एनडीए का आंकड़ा 300 के पार ही था।


    3. लगातार तीन आम चुनाव में जीत

    2024 के आम चुनावों के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले इतिहास के दूसरे भारतीय नेता बने। उनसे पहले यह उपलब्धि केवल जवाहरलाल नेहरू के नाम थी।


    4. अजेय कार्यकारी सफर

    अक्तूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार नियुक्त होने के बाद से, वह सत्ता में रहते हुए कभी कोई चुनाव नहीं हारे हैं और उन्होंने एक भी दिन निर्वाचित कार्यकारी पद से बाहर नहीं बिताया है।

    पीएम मोदी ने अब कौन सा रिकॉर्ड तोड़ा?
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले चुने हुए लोकतांत्रिक प्रधानमंत्री बन गए। वह देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के लगातार कार्यकाल वाले 64 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, आजादी के बाद देश के पहले आम चुनावों के बाद गठित पहली लोकसभा का गठन 17 अप्रैल 1952 को हुआ था। उसकी पहली बैठक 13 मई 1952 को हुई थी और इसी दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस लिहाज से देखा जाए तो जहां नेहरू पहला चुनाव जीतने के बाद लगातार 4398 दिन (12 साल 15 दिन) तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। वहीं, पीएम मोदी ने आज (बुधवार) को कुल 4399 दिन लगातार पीएम रहने का गौरव हासिल कर लिया। यानी वे लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री होने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं।

    इस रिकॉर्ड की बारीक समझ भी हासिल करना जरूरी है। दरअसल, जवाहरलाल नेहरू का प्रधानमंत्री के रूप में कुल कार्यकाल कुल 6,131 दिन का था। इसकी वजह यह है कि उन्होंने भारत की कमान 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद ही संभाल ली थी। तब पीएम पद के लिए कोई चुनाव नहीं हुआ था। देश में पहली बार आम चुनाव 1952 में ही हुए। यानी 1947 से 1952 तक नेहरू पीएम तो रहे, लेकिन उनकी सरकार चुनाव के जरिए नहीं आई थी यानी निर्वाचित नहीं थी। इस लिहाज से आम चुनाव के बाद लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित होकर लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने की अवधि को देखा जाए, तो पीएम मोदी अब नेहरू के रिकॉर्ड को पार कर चुके हैं।


    अभी कौन से रिकॉर्ड पीएम मोदी की पहुंच से दूर?
    1. प्रधानमंत्री के रूप में कुल सबसे लंबा कार्यकाल

    भले ही पीएम मोदी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित होकर लगातार सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद पर कुल दिनों के मामले में जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड अभी भी सबसे ऊपर है। जवाहरलाल नेहरू का कुल कार्यकाल (1947-1964) 16 वर्ष और 286 दिन का रहा है यानी कुल 6,131 दिन। इसी तरह इंदिरा गांधी ने भी अलग-अलग कार्यकालों में देश पर 15 साल से ज्यादा शासन किया है।

    पीएम मोदी की स्थिति: मई 2014 से अब तक उनका कार्यकाल लगभग 12 वर्ष का हुआ है। नेहरू के इस कुल कार्यकाल के रिकॉर्ड को पार करने के लिए पीएम मोदी को साल 2030 के अंत तक देश का प्रधानमंत्री बने रहना होगा। यानी भाजपा का अगला लोकसभा चुनाव जीतना जरूरी होगा। साथ ही पीएम मोदी का 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद अगले करीब दो साल तक लगातार प्रधानमंत्री बना रहना भी अनिवार्य होगा। तभी नेहरू का यह रिकॉर्ड टूटना संभव हो सकता है।


    2. सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड

    पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में 12 साल से अधिक (4,610 दिन) का समय बिताया, जो एक बड़ा रिकॉर्ड है, लेकिन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सर्वकालिक इतिहास में उनसे आगे कई नेता हैं। सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग (24 वर्ष, 165 दिन) और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (24 वर्ष, 99 दिन) के नाम भारत में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है। चूंकि पीएम मोदी अब पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में हैं, इसलिए मुख्यमंत्री के इस व्यक्तिगत रिकॉर्ड में अब बदलाव होने की संभावना कम ही है।


    3. लोकसभा चुनाव में किसी एक पार्टी द्वारा सर्वाधिक सीटें जीतने का रिकॉर्ड

    चुनावी सफलता के मामले में भाजपा ने पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014 (282 सीटें) और 2019 (303 सीटें) में पूर्ण बहुमत हासिल किया, लेकिन भारत के संसदीय इतिहास में एक पार्टी द्वारा सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड अभी भी कांग्रेस के नाम है। यह जीत राजीव गांधी के समय में कांग्रेस को मिली थी। तब पार्टी ने 414 सीट जीत कर इतिहास रच दिया था। यह अब तक का रिकॉर्ड है, जिसे कोई भी दल या यहां तक कि गठबंधन भी नहीं तोड़ पाया है।


    4. चार या अधिक कार्यकाल का रिकॉर्ड

    पीएम मोदी इस समय अपने तीसरे कार्यकाल में हैं, जिससे उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के लगातार तीन बार प्रधानमंत्री चुने जाने के रिकॉर्ड की बराबरी की है। अगर वह 2029 में चौथे कार्यकाल के लिए निर्वाचित होते हैं, तो वह भारत के इतिहास में चार बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बनकर एक नया रिकॉर्ड कायम करेंगे और चार बार चुने जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे।

  • RDVV के छात्रों का परीक्षा से बहिष्कार चार घंटे तक कुलगुरु निवास पर प्रदर्शन प्रशासन ने कहा जांच जारी

    RDVV के छात्रों का परीक्षा से बहिष्कार चार घंटे तक कुलगुरु निवास पर प्रदर्शन प्रशासन ने कहा जांच जारी


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में गुरुवार को बीए एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की हिंदी लैंग्वेज परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे गए हैं। प्रश्नपत्र हाथ में आने के बाद कई विद्यार्थी असमंजस में पड़ गए। छात्रों का कहना था कि उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षा की तैयारी की थी लेकिन प्रश्नपत्र में ऐसी विषयवस्तु से सवाल पूछे गए जो उनके सिलेबस का हिस्सा नहीं थी।

    परीक्षा के दौरान छात्रों ने इस संबंध में पर्यवेक्षकों से जानकारी लेने की कोशिश की। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद कई छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। परीक्षा केंद्र पर स्थिति बिगड़ने के बाद छात्र एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

    मामला यहीं नहीं रुका। नाराज छात्र एनएसयूआई के समर्थन के साथ कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा के निवास पर पहुंच गए। वहां छात्रों ने धरना शुरू कर दिया और प्रश्नपत्र को लेकर जांच कराने की मांग रखी। छात्रों का कहना था कि परीक्षा में अगर निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग सवाल पूछे गए हैं तो इससे विद्यार्थियों के प्रदर्शन और परीक्षा परिणाम पर असर पड़ सकता है। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। विद्यार्थियों का आरोप था कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय पाठ्यक्रम का उचित तरीके से मिलान नहीं किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विद्यार्थियों के हित में उचित कदम उठाने की मांग की।

    एनएसयूआई आरडीवीवी प्रभारी अंचलनाथ ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि विद्यार्थी लंबे समय तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा में सिलेबस से बाहर के सवाल आ जाएं तो छात्रों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि छात्र कई घंटे से कुलगुरु निवास के बाहर बैठे हैं और अपनी समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।

    छात्रों के प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव और सिविल लाइन थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्रों की शिकायत को सुना और मामले की जानकारी ली। इस दौरान छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र की जांच कराने और परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों के हित में फैसला लेने की मांग दोहराई गई।

    मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुनील दुबे ने बताया कि छात्रों की ओर से प्रश्नपत्र में सिलेबस से बाहर के सवाल पूछे जाने की जानकारी दी गई है। विश्वविद्यालय स्तर पर इस मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और इसके आधार पर नियमानुसार आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

    फिलहाल छात्रों की शिकायत पर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच जारी है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र में वास्तव में निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल शामिल थे या नहीं। इसके बाद परीक्षा को लेकर आगे की प्रक्रिया और छात्रों की मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फैसला लिया जाएगा।

  • UPI से भुगतान पर 0.4% एमडीआर का विरोध शुरू…. सरकार बोली- वापस नहीं होगा फैसला

    UPI से भुगतान पर 0.4% एमडीआर का विरोध शुरू…. सरकार बोली- वापस नहीं होगा फैसला


    नई दिल्ली।
    यूपीआई (UPI ) के जरिये 2000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (0.4% Merchant Discount Rate- MDR) लगाने का चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। कारोबारी संगठनों ने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि फैसला वापस नहीं होगा।

    वहीं, बुधवार को टैक्स विशेषज्ञों ने यह खुलासा भी किया कि व्यापारियों को 0.4 फीसदी एमडीआर पर 18 फीसदी जीएसटी भी देना होगा। हालांकि, इसके बदले वे इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर पाएंगे जिससे उनका कुल टैक्स बोझ कम हो जाएगा। एनपीसीआई ने मंगलवार को यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क की घोषणा की थी जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये है। यह 15 अक्तूबर से लागू होगा।


    एमडीआर को वापस नहीं लेगी केंद्र सरकार

    सरकारी सूत्रों ने कहा, एमडीआर को वापस नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या सरकार एमडीआर को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने कहा, फैसला लिया जा चुका है और इसे पलटने का सवाल नहीं है। अधिकारी ने कहा, संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने 32वीं रिपोर्ट में चेतावनी दी कि शून्य एमडीआर व्यवस्था सरकारी खजाने पर दबाव डालती है और इन्फ्रा में निवेश की क्षमता को सीमित करती है। इसलिए एक टिकाऊ राजस्व व्यवस्था बनाना जरूरी है।


    इन श्रेणियों में 5 रुपये एमडीआर

    रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस व फ्यूल जैसी खास श्रेणियों के कारोबारियों के लिए 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर भी सिर्फ 5 रुपये का रियायती एमडीआर रेट लागू होगा। स्कूल फीस भुगतान भी 2000 से ज्यादा होने पर सिर्फ 5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन एमडीआर लागू होगा।


    एमडीआर लागू करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    यूपीआई से 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर एमडीआर लगाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दाखिल की है। उन्होंने कोर्ट से कहा कि नई व्यवस्था मनमानी व भेदभावपूर्ण है और इससे देश में कारोबारियों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।

    पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने वित्त मंत्रालय को भेजा पत्र
    एमडीआर के खिलाफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले से पेट्रोल पंपों को बाहर रखने की मांग की है। यह स्थिति तब है जबकि पेट्रोप पंपों पर 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रति ट्रांजेक्शन सिर्फ 5 रुपये शुल्क लगाए जाने का फैसला लिया गया है।


    मधुमक्खियों की तरह टैक्स जुटाए सरकार : लाहिड़ी

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने चाणक्य का जिक्र करते हुए कहा, नागरिकों से टैक्स वैसे ही वसूलना चाहिए जैसे मधुमक्खी फूल से शहद इकट्ठा करती है- धीरे-धीरे और बिना फूल की पंखुड़ियों को नुकसान पहुंचाए या तोड़े।


    फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहीं : वित्त मंत्रालय

    वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा, यूपीआई लेन-देन पर 0.4% एमडीआर के फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहीं है। मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट में कहा, कुछ दावों में कहा गया है कि यह बदलाव विदेशी असर की वजह से हुआ है। यह बात गलत है। भारत के नीतिगत फैसले आजादी से लिए जाते हैं।

  • करीना की दायरा ने सिद्धार्थ की द वन को पछाड़ा IMDb की लिस्ट में किस फिल्म को मिली बढ़त

    करीना की दायरा ने सिद्धार्थ की द वन को पछाड़ा IMDb की लिस्ट में किस फिल्म को मिली बढ़त


    नई दिल्ली। सितंबर का महीना बॉलीवुड दर्शकों के लिए काफी खास रहने वाला है। इस महीने करीना कपूर की क्राइम थ्रिलर दायरा और सिद्धार्थ मल्होत्रा की सस्पेंस थ्रिलर द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही हैं। दोनों फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच पहले से चर्चा बनी हुई है। IMDb की मोस्ट एंटीसिपेटेड फिल्मों की सूची में भी दोनों फिल्मों ने जगह बनाई है। इस सूची में दायरा दूसरे स्थान पर जबकि द वन तीसरे स्थान पर बताई गई है।

    IMDb की यह सूची फिल्मों के टाइटल पेज पर आने वाले रियल टाइम व्यूज के आधार पर तैयार की जाती है। ऐसे में यह दर्शकों की ऑनलाइन दिलचस्पी को दिखाती है। उपलब्ध सूची के मुताबिक करीना कपूर की दायरा को सिद्धार्थ मल्होत्रा की द वन के मुकाबले ज्यादा व्यूज मिले हैं। हालांकि यह आंकड़ा बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन या फिल्म की सफलता का परिणाम नहीं है बल्कि रिलीज से पहले लोगों की ऑनलाइन रुचि को दर्शाता है।

    करीना कपूर की दायरा 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म में उनके साथ पृथ्विराज सुकुमारन मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। यह फिल्म एक क्राइम थ्रिलर है जिसकी कहानी पुलिस एनकाउंटर और उसके बाद सामने आने वाली सच्चाई के इर्द गिर्द घूमती है। फिल्म में करीना कपूर SIT हेड अजोनी की भूमिका निभा रही हैं जबकि पृथ्विराज सुकुमारन एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के किरदार में दिखाई देंगे।

    दायरा में दोनों मुख्य किरदारों के काम करने का तरीका अलग बताया गया है। यही अंतर कहानी में तनाव और टकराव पैदा करता है। फिल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है। इससे पहले वह राजी छपाक तलवार और सैम बहादुर जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुकी हैं। करीना और पृथ्विराज की जोड़ी को एक अलग तरह की कहानी में देखना दर्शकों के लिए दिलचस्प हो सकता है।

    वहीं सिद्धार्थ मल्होत्रा की द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में उनके साथ तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिका में हैं। यह एक सस्पेंस थ्रिलर है जिसकी कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द गिर्द घूमती है जो अपने गांव लौटने से बचता रहता है। लेकिन भाई के कहने पर उसे वापस गांव जाना पड़ता है। वहां पहुंचने के बाद उसे वन देवी मंदिर और उससे जुड़ी लोककथाओं के बारे में पता चलता है।

    कहानी में सिद्धार्थ का किरदार इन लोककथाओं पर विश्वास नहीं करता और उन्हें चुनौती देता है। इसके बाद कहानी में रहस्य और रोमांच का सिलसिला आगे बढ़ता है। तमन्ना भाटिया फिल्म में सिद्धार्थ के किरदार की लव इंटरेस्ट की भूमिका में हैं। फिल्म में मनीष पॉल सुनील ग्रोवर अनूप सोनी श्वेता त्रिपाठी और दुर्गेश कुमार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

    द वन को लेकर फिल्म से ज्यादा इसके गाने छठी मैया की भी चर्चा हुई है। यह गाना बिहार के महापर्व छठ की पृष्ठभूमि पर फिल्माया गया है। गाने में तमन्ना भाटिया पारंपरिक लाल साड़ी और सिंदूर वाले लुक में नजर आती हैं। गाना रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।

    फिलहाल रिलीज से पहले IMDb की सूची में दायरा और द वन की स्थिति दर्शकों की ऑनलाइन दिलचस्पी की तस्वीर पेश करती है। अब दोनों फिल्मों की वास्तविक परीक्षा सिनेमाघरों में रिलीज के बाद होगी। दायरा 18 सितंबर को और द वन 25 सितंबर को दर्शकों के सामने आएगी।

  • US: महंगाई को काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व का बड़ा फैसला…. ब्याज दरों में किया इजाफा

    US: महंगाई को काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व का बड़ा फैसला…. ब्याज दरों में किया इजाफा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में जिद्दी बनी महंगाई (Inflation) पर लगाम कसने के लिए केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ (Central Bank ‘Federal Reserve’) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। व्हाइट हाउस (White House) के लगातार दबाव को दरकिनार करते हुए फेडरल रिजर्व ने बुधवार को बेंचमार्क ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। वर्ष 2023 के बाद से यह पहला मौका है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में इजाफा किया है। इस फैसले से न केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) की कम ब्याज दरों की मांग को झटका लगा है, बल्कि इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है।


    महंगाई पर लगाम लगाने के लिए उठाया सख्त कदम

    फेडरल रिजर्व ने मुख्य ब्याज दर (बेंचमार्क रेट) में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 फीसदी) की बढ़ोतरी की है। इस फैसले के बाद अमरीका में मुख्य ब्याज दर बढ़कर लगभग 3.9 फीसदी हो गई है। बैंक के इस कदम का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, जिससे समय के साथ होम लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरें महंगी हो जाएंगी। त्रैमासिक अनुमानों को जारी करते हुए फेड की दर-निर्धारण समिति (एफओएमसी) ने संकेत दिया है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए इस साल के अंत तक ब्याज दरों को एक बार फिर बढ़ाकर 4.1 फीसदी तक किया जा सकता है।

    केंद्रीय बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया, ‘आज की नीतिगत कार्रवाई मुद्रास्फीति (महंगाई) को केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य पर समयबद्ध तरीके से वापस लाने में मदद करेगी।’


    चुनाव से ठीक पहले आम जनता पर दोहरा बोझ?

    फेड का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी जनता पहले से ही खाद्य पदार्थों, पेट्रोल-डीजल और आवास की बढ़ती कीमतों से जूझ रही है। अमेरिका में महज सात हफ्ते बाद मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, और ऐसे में बढ़ती महंगाई चुनावी अभियानों का सबसे मुख्य मुद्दा बन चुका है। ब्याज दरों के बढ़ने से आम उपभोक्ताओं के लिए कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा।


    चेयरपर्सन केविन वॉश का क्या रुख?

    यह फैसला फेडरल रिजर्व के नए चेयरपर्सन केविन वॉश के रुख में आए एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नियुक्त किए गए केविन वॉश ने इसी साल मई में फेड अध्यक्ष का पद संभाला था। पिछले साल जब ट्रंप इस पद के लिए उनके नाम पर विचार कर रहे थे, तब वॉश ने कई बार संकेत दिए थे कि फेड ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। उन्होंने कम ब्याज दरों की राष्ट्रपति ट्रंप की मांग का समर्थन भी किया था। हालांकि, पद संभालने और लगातार ऊंची बनी महंगाई के आंकड़ों के बीच वॉश ने राजनीतिक दबाव के बजाय केंद्रीय बैंक की नीतिगत स्वायत्तता और महंगाई नियंत्रण को प्राथमिकता दी है।

    अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने जनवरी 2026 से यूएस फेड रेट्स को स्थिर रखा है। बैंक ने एनर्जी की कीमतों में अचानक आए उछाल के असर को समझने और कीमतों पर टैरिफ के असर को पूरी इकॉनमी में फैलने देने के लिए इंतजार करने का फैसला किया था। हालांकि, पिछली यूएस फेड मीटिंग में वोटिंग करने वाले सदस्यों में से एक-चौथाई ने तुरंत यूएस फेड रेट बढ़ाने की मांग की, जो बाकी नौ वोटिंग सदस्यों की राय से अलग थी।

    अमरीका के केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ ने लगातार बनी हुई महंगाई पर रोक लगाने के उद्देश्य से 2023 के बाद पहली बार अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 0.25% की बढ़ोतरी की है। इससे ब्याज दरें बढ़कर 3.9% हो गई हैं, जिससे होम लोन, कार लोन और क्रेडिट कार्ड महंगे होंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दरें घटाने के दबाव को दरकिनार करते हुए फेड ने इस साल के अंत तक दरों को 4.1% तक ले जाने का संकेत दिया है।

  • मुख्यमंत्री बनने के बाद भी बेटे की फिल्म से दूर रहेंगे विजय जेसन बोले- मैं ओवरलैप नहीं चाहता

    मुख्यमंत्री बनने के बाद भी बेटे की फिल्म से दूर रहेंगे विजय जेसन बोले- मैं ओवरलैप नहीं चाहता


    नई दिल्ली। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय के बेटे जेसन संजय अब बतौर निर्देशक फिल्मी दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। उनकी डेब्यू फिल्म सिग्मा को लेकर चर्चा तेज है। फिल्म के प्रमोशन के दौरान जेसन ने अपने पिता विजय को लेकर कई बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि विजय उनकी फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं लेकिन वह सिग्मा का प्रमोशन नहीं करेंगे। जेसन के मुताबिक इसकी वजह यह है कि वह अपनी फिल्म के प्रचार को अपने पिता के मौजूदा सार्वजनिक दायित्वों से अलग रखना चाहते हैं।

    हैदराबाद में सिग्मा के प्रमोशन के दौरान जेसन से पूछा गया कि उन्हें अपने पिता विजय से कौन सी खास खूबी मिली है। इस सवाल पर उन्होंने पंक्चुअलिटी यानी समय की पाबंदी का जिक्र किया। जेसन के इस जवाब से यह भी साफ नजर आया कि वह अपने पिता के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके को काफी करीब से देखते रहे हैं।

    जेसन से जब पूछा गया कि डेब्यू से पहले उनके पिता ने उन्हें कुछ दिया है या नहीं तो उन्होंने वहां मौजूद लोगों की तरफ इशारा करते हुए मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि इन सबको। उनके इस जवाब ने प्रमोशनल इवेंट में माहौल को हल्का कर दिया। जेसन को लेकर इससे पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि उन्होंने सिग्मा के लिए अपने नाम में पिता के नाम से जुड़ा वी हटाकर अपनी मां के नाम का एस इस्तेमाल किया है।

    विजय के मुख्यमंत्री बनने को लेकर भी जेसन से सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि वह काफी खुश हैं। उन्होंने इसे अपने लिए और विजय के आसपास मौजूद लोगों के लिए खुशी का मौका बताया। जेसन के बयान से यह भी सामने आया कि वह अपने पिता की नई भूमिका को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं।

    हालांकि जब जेसन से पूछा गया कि क्या विजय सिग्मा के लिए किसी तरह योगदान करेंगे या फिल्म का प्रमोशन करेंगे तो उन्होंने साफ किया कि उनके पिता फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं। जेसन ने कहा कि वह सिर्फ अपनी फिल्म का प्रमोशन चाहते हैं और दोनों चीजों को आपस में नहीं मिलाना चाहते। उन्होंने यह भी बताया कि विजय अब मुख्यमंत्री हैं और उनके पास कई जिम्मेदारियां हैं। इसलिए वह नहीं चाहते कि फिल्म के प्रमोशन में उनके पिता की राजनीतिक भूमिका का असर आए।

    जेसन ने कहा कि उनके पिता यह देखने के लिए उत्साहित हैं कि उन्होंने फिल्म में क्या काम किया है। इस तरह विजय पर्दे के पीछे से बेटे के काम को लेकर उत्सुक जरूर हैं लेकिन सिग्मा के प्रचार अभियान में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे।

    सिग्मा जेसन संजय की बतौर निर्देशक पहली फिल्म है। इसे लायका प्रोडक्शन्स ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म की कहानी हाइस्ट कॉमेडी के इर्द गिर्द बुनी गई है। फिल्म में संदीप किशन फरिया अब्दुल्लाह सम्पथ राज शिव पंडित योग जापी शीला राजकुमार और राजू सुंदरम जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी थमन एस ने संभाली है।

    फिल्म की रिलीज डेट में भी बदलाव हुआ है। सिग्मा पहले 31 जुलाई को रिलीज होने वाली थी लेकिन बाद में इसकी रिलीज टाल दी गई। अब यह फिल्म 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फिल्म तमिल और तेलुगु भाषाओं में रिलीज की जाएगी। जेसन के निर्देशन में बनी इस फिल्म को लेकर अब दर्शकों की नजर उनकी पहली कोशिश पर टिकी है।

  • टीम इंडिया में बड़े बदलाव 5 खिलाड़ियों की वापसी ध्रुव जुरेल को मौका पंत का इंतजार फिर बढ़ा

    टीम इंडिया में बड़े बदलाव 5 खिलाड़ियों की वापसी ध्रुव जुरेल को मौका पंत का इंतजार फिर बढ़ा


    नई दिल्ली। वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली वनडे और टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान हो गया है। चयन समिति ने दोनों फॉर्मेट के लिए टीम में कई अहम बदलाव किए हैं। वनडे टीम में पांच ऐसे खिलाड़ियों की वापसी हुई है जो इंग्लैंड के खिलाफ पिछली वनडे सीरीज का हिस्सा नहीं थे। वहीं विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को एक बार फिर वनडे टीम में जगह नहीं मिली है। इस फैसले के बाद उनकी वनडे टीम में वापसी का इंतजार और बढ़ गया है।

    वनडे टीम में रवींद्र जडेजा मोहम्मद सिराज यशस्वी जायसवाल ऋतुराज गायकवाड़ और नीतीश कुमार रेड्डी की वापसी हुई है। इन खिलाड़ियों के आने से भारतीय टीम को बल्लेबाजी गेंदबाजी और ऑलराउंड विकल्पों में मजबूती मिलेगी। जडेजा के पास बाएं हाथ की स्पिन के साथ उपयोगी बल्लेबाजी का विकल्प रहेगा जबकि मोहम्मद सिराज तेज गेंदबाजी आक्रमण को अनुभव देंगे। यशस्वी जायसवाल को रिजर्व ओपनर के तौर पर टीम में शामिल किया गया है।

    वनडे टीम में कुछ नए चेहरों को भी मौका मिला है। तेज गेंदबाज आकिब नबी विकेटकीपर ध्रुव जुरेल और बल्लेबाज नमन धीर पहली बार वनडे टीम में शामिल किए गए हैं। इन तीनों खिलाड़ियों को वेस्टइंडीज के खिलाफ मौका मिलने पर भारत के लिए वनडे डेब्यू करने का अवसर मिल सकता है। ध्रुव जुरेल को विकेटकीपिंग के दूसरे विकल्प के तौर पर चुना गया है। इसके साथ ही केएल राहुल टीम में विकेटकीपर की भूमिका भी निभाएंगे।

    ऋषभ पंत की गैरमौजूदगी इस चयन की सबसे चर्चित बातों में से एक है। पंत को इस साल न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम में चुना गया था लेकिन चोट के कारण वह सीरीज से बाहर हो गए थे। इसके बाद वह वनडे टीम में वापसी नहीं कर पाए। अब ध्रुव जुरेल को उनसे आगे चुना गया है। पंत को अगले महीने होने वाले ईरानी कप के लिए रेस्ट ऑफ इंडिया की कप्तानी सौंपी गई है।

    वनडे टीम की कप्तानी शुभमन गिल करेंगे जबकि केएल राहुल उपकप्तान बनाए गए हैं। रोहित शर्मा और विराट कोहली को भी टीम में बरकरार रखा गया है। रोहित ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे वनडे में शानदार शतक लगाया था। श्रेयस अय्यर की गैरमौजूदगी में ऋतुराज गायकवाड़ को मध्यक्रम में नंबर चार की भूमिका के लिए देखा जा रहा है।

    नीतीश कुमार रेड्डी को एशियन गेम्स की टीम से वापस बुलाकर वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में शामिल किया गया है। वहीं चोटिल वरुण चक्रवर्ती एशियन गेम्स की टीम से बाहर हो गए हैं और उनकी जगह विप्रज निगम को शामिल किया गया है। चयन के इस बदलाव से साफ है कि टीम मैनेजमेंट नीतीश को वनडे क्रिकेट में ज्यादा मैच समय देना चाहता है।

    टी20 टीम की कप्तानी श्रेयस अय्यर को सौंपी गई है। टीम में मयंक यादव और प्रिंस यादव की वापसी हुई है। 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को भी टीम में बरकरार रखा गया है। उनके अलावा अभिषेक शर्मा ईशान किशन संजू सैमसन तिलक वर्मा शिवम दुबे अक्षर पटेल वॉशिंगटन सुंदर और रवि बिश्नोई जैसे खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं। अर्शदीप सिंह तेज गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई करेंगे।

    स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या अभी पूरी तरह फिट नहीं हैं और इसी वजह से उन्हें दोनों टीमों में जगह नहीं मिली। हर्ष दुबे सूर्यांश शेडगे और हर्षित राणा भी चोट के कारण चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे।

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 27 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में होगा। इसके बाद 30 सितंबर को गुवाहाटी और 3 अक्टूबर को मुल्लांपुर में मुकाबला खेला जाएगा। पांच मैचों की टी20 सीरीज 6 अक्टूबर से शुरू होगी। इसके मुकाबले लखनऊ रांची इंदौर हैदराबाद और बेंगलुरु में खेले जाएंगे। इस सीरीज में भारतीय टीम के कई युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी।

  • रणबीर कपूर के पुराने वीडियो ने छेड़ी नई बहस प्रसाद ठुकराने पर यूजर्स बोले इनको राम बना दिया

    रणबीर कपूर के पुराने वीडियो ने छेड़ी नई बहस प्रसाद ठुकराने पर यूजर्स बोले इनको राम बना दिया


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर इन दिनों एक पुराने वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। गणपति बप्पा के दर्शन से जुड़ा उनका यह वीडियो साल 2023 का बताया जा रहा है लेकिन गणेश चतुर्थी के मौजूदा माहौल के बीच एक बार फिर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में रणबीर कपूर गणपति दर्शन करने के बाद वहां मौजूद लोगों और पैपराजी से बातचीत करते नजर आते हैं। इसी दौरान एक पैपराजी उन्हें प्रसाद देने की कोशिश करता है लेकिन रणबीर उसे लेने से इनकार कर देते हैं। अभिनेता इसकी वजह बताते हुए कहते हैं कि वह डाइट पर हैं और प्रसाद किसी दूसरे व्यक्ति को खाने के लिए कह देते हैं।

    रणबीर कपूर का इतना कहना ही सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ यूजर्स ने अभिनेता के इस फैसले पर सवाल उठाए। कई लोगों ने कहा कि गणपति के प्रसाद के रूप में मिठाई का एक छोटा सा टुकड़ा लेने से उनकी डाइट पर कोई खास असर नहीं पड़ता। वहीं कुछ लोगों ने इस घटना को रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म रामायण में भगवान राम की भूमिका से जोड़कर भी टिप्पणी की।

    सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने रणबीर कपूर को ट्रोल करते हुए कहा कि उन्हें प्रसाद स्वीकार कर लेना चाहिए था। कुछ टिप्पणियों में अभिनेता के खानपान से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया गया। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनकी राम की भूमिका पर भी सवाल उठाए और टिप्पणी की कि जब अभिनेता पर्दे पर भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं तो उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। हालांकि सोशल मीडिया पर की गई इन टिप्पणियों में कई तरह के दावे और व्यक्तिगत राय शामिल हैं जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस वीडियो से नहीं होती।

    इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरल हो रहा वीडियो नया नहीं है। यह साल 2023 का पुराना वीडियो है और इसका 2026 के गणेश चतुर्थी समारोह से सीधा संबंध नहीं है। मौजूदा समय में रणबीर कपूर अपनी पत्नी और अभिनेत्री आलिया भट्ट के साथ गणेश चतुर्थी समारोह में शामिल होने को लेकर भी चर्चा में हैं। इसी वजह से उनका पुराना वीडियो दोबारा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    रणबीर कपूर की मौजूदा चर्चा उनकी फिल्म रामायण को लेकर भी काफी ज्यादा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे दो हिस्सों में रिलीज किए जाने की बात सामने आई है। फिल्म में यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे जबकि साई पल्लवी सीता और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। सनी देओल फिल्म में हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं।

    रामायण में कई चर्चित कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। अरुण गोविल दशरथ की भूमिका में दिखाई देंगे जबकि लारा दत्ता कैकेयी का किरदार निभा रही हैं। शीबा चड्ढा मंथरा और रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा की भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है और रणबीर के राम के रूप को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

    रणबीर कपूर के पास रामायण के अलावा भी कई बड़े प्रोजेक्ट हैं। वह एनिमल पार्क में नजर आएंगे जो उनकी चर्चित फिल्म एनिमल का सीक्वल है। इसके साथ ही वह आलिया भट्ट और विक्की कौशल के साथ संजय लीला भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर में भी दिखाई देंगे। ऐसे में गणपति के पुराने वीडियो के वायरल होने के साथ रणबीर एक बार फिर सोशल मीडिया की चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।