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  • MP के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अब तक 26.5 इंच बरसा पानी, 37 जिले अब भी बारिश में पिछड़े

    MP के 7 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, अब तक 26.5 इंच बरसा पानी, 37 जिले अब भी बारिश में पिछड़े


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून का दौर जारी है। शुक्रवार को जबलपुर और सागर संभाग के 7 जिलों—टीकमगढ़, छतरपुर, कटनी, सीधी, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान ढाई से 4 इंच तक बारिश हो सकती है। भोपाल में हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    इसके अलावा प्रदेश के अधिकांश जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने के आसार हैं। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह और निवाड़ी शामिल हैं।

    28 से 30 अगस्त तक गरज-चमक के आसार

    IMD भोपाल के अनुसार, 28 से 30 अगस्त तक प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। हालांकि, इस दौरान कुछ चुनिंदा जिलों में ही तेज बारिश होगी। 29 अगस्त को शहडोल, अनूपपुर, सिवनी और बालाघाट, जबकि 31 अगस्त को मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश का अलर्ट है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, सिस्टम के कमजोर होने से प्रदेश में तेज बारिश का दौर कुछ समय के लिए थम सकता है और कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने की संभावना है।

    अब तक 26.5 इंच बारिश, कोटे की 71%

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 674.6 मिमी यानी 26.5 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 742.3 मिमी यानी 29.2 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 2.7 इंच यानी करीब 9% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 6% और पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश दर्ज की गई है।

    37 जिलों में कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम हुई है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़ और डिंडौरी समेत कई जिलों में सामान्य से 1 से 49% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 4 से 50% तक कम पानी गिरा है।

    18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक अनूपपुर, डिंडौरी, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • कल का राशिफल: 28 अगस्त को ग्रहों की बदलेगी चाल 3 राशियों को मिलेगा धन लाभ नौकरी और कारोबार में बनेंगे नए अवसर

    कल का राशिफल: 28 अगस्त को ग्रहों की बदलेगी चाल 3 राशियों को मिलेगा धन लाभ नौकरी और कारोबार में बनेंगे नए अवसर


    नई दिल्ली। कल यानी 28 अगस्त का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में अलग अलग रूपों में दिखाई दे सकता है। किसी राशि के जातकों को लंबे समय से अटके काम में सफलता मिलने के संकेत हैं तो किसी के लिए आर्थिक मामलों में राहत के योग बन सकते हैं। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण अवसर मिल सकता है जबकि व्यापार से जुड़े जातकों के लिए भी दिन लाभकारी साबित हो सकता है। हालांकि हर राशि के लिए दिन का प्रभाव अलग रहेगा इसलिए जरूरी है कि किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी से बचें और परिस्थितियों को समझकर आगे बढ़ें।

    मेष राशि वालों के लिए कल का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और सक्रियता का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से कोई महत्वपूर्ण काम आगे बढ़ सकता है। आर्थिक स्थिति सामान्य से बेहतर रहने की संभावना है लेकिन अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। परिवार में किसी सदस्य की उपलब्धि से खुशी का माहौल बन सकता है।

    वृषभ राशि के जातकों को कल अपने काम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी। कारोबार में नए संपर्क भविष्य में फायदा पहुंचा सकते हैं। किसी पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं लेकिन इसके साथ आपकी स्थिति भी मजबूत होगी। रिश्तों के मामले में बातचीत के जरिए गलतफहमी दूर करने की कोशिश करें।

    मिथुन राशि के लिए कल का दिन नई योजनाओं को आगे बढ़ाने का हो सकता है। नौकरी बदलने या किसी नए प्रोजेक्ट से जुड़ने की सोच रहे हैं तो सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ेगी। धन से जुड़े मामलों में सावधानी बरतें और बिना पूरी जानकारी के निवेश करने से बचें।

    कर्क राशि वालों के लिए परिवार और निजी जीवन महत्वपूर्ण रहेगा। घर के किसी सदस्य के साथ चल रही परेशानी बातचीत से सुलझ सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारी बढ़ सकती है और इसका भविष्य में फायदा मिलने की संभावना है। आर्थिक रूप से दिन संतुलित रहेगा लेकिन अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए कल आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का दिन रह सकता है। किसी महत्वपूर्ण काम में आपकी राय को प्राथमिकता मिल सकती है। कारोबारियों को नई डील या ग्राहक से लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि सफलता के साथ अहंकार से बचना जरूरी होगा। प्रेम संबंधों में साथी के साथ समय बिताने का अवसर मिल सकता है।

    कन्या राशि वालों को कल योजनाबद्ध तरीके से काम करने का लाभ मिलेगा। नौकरी में रुका हुआ काम पूरा हो सकता है और वरिष्ठ अधिकारी आपके प्रदर्शन से प्रभावित हो सकते हैं। धन के मामले में स्थिति मजबूत हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और काम के बीच पर्याप्त आराम लें।

    तुला राशि के लिए कल का दिन रिश्तों और करियर दोनों के लिहाज से अहम रह सकता है। साझेदारी के काम में फायदा मिल सकता है लेकिन किसी भी समझौते को ध्यान से पढ़कर ही आगे बढ़ें। प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

    वृश्चिक राशि वालों को कल किसी पुराने प्रयास का परिणाम मिल सकता है। आर्थिक लाभ के अवसर बनेंगे लेकिन जोखिम भरे फैसलों से बचना बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र में विरोध करने वालों से दूरी बनाए रखें और अपनी रणनीति पर ध्यान दें। परिवार में किसी शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो सकता है।

    धनु राशि के जातकों के लिए कल भाग्य का साथ मिलने के संकेत हैं। नौकरी कारोबार या शिक्षा से जुड़े मामलों में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। यात्रा का योग भी बन सकता है। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह भविष्य के लिए उपयोगी साबित होगी। निवेश से जुड़े फैसलों में सोच समझकर कदम उठाएं।

    मकर राशि वालों को मेहनत का फल मिलने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी जिम्मेदारी और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। आर्थिक मामलों में पुराने विवाद या अटकी रकम को लेकर राहत मिल सकती है। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक तनाव कम होगा।

    कुंभ राशि के लिए कल का दिन नए विचार और नई शुरुआत लेकर आ सकता है। नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी का अवसर मिल सकता है। कारोबार में तकनीक और नए संपर्कों का लाभ होगा। हालांकि जल्दबाजी में कोई बड़ा वित्तीय फैसला लेने से बचें।

    मीन राशि वालों के लिए कल का दिन मिलाजुला रह सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार के अवसर मिलेंगे लेकिन खर्च भी बढ़ सकता है। प्रेम और पारिवारिक संबंधों में भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात या बातचीत मन को प्रसन्न कर सकती है।

    कुल मिलाकर 28 अगस्त का दिन कई राशियों के लिए अवसरों से भरा रह सकता है। ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार मेहनत सही दिशा में हो तो सफलता की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है और इसे निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लेना चाहिए। अपने निर्णय परिस्थितियों और व्यक्तिगत विवेक के आधार पर लेना बेहतर रहेगा।

  • हिमालय बनने से भी करोड़ों साल पहले यहां था जीवन! तड़ागताल झील में मिले 100-150 करोड़ साल पुराने सबूत

    हिमालय बनने से भी करोड़ों साल पहले यहां था जीवन! तड़ागताल झील में मिले 100-150 करोड़ साल पुराने सबूत

    अल्मोड़ा। उत्तराखंड के चौखुटिया क्षेत्र की तड़ागताल झील से मिले प्राचीन जीवाश्मों ने इस इलाके के भूगर्भीय इतिहास को लेकर वैज्ञानिकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के सर्वे के दौरान यहां स्ट्रोमैटोलाइट्स के अवशेष मिले हैं। वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार, ये अवशेष करीब 100 से 150 करोड़ वर्ष पुराने हो सकते हैं।

    स्ट्रोमैटोलाइट्स को शुरुआती सूक्ष्मजीवन के महत्वपूर्ण प्रमाणों में गिना जाता है। ऐसे में इनका तड़ागताल क्षेत्र में मिलना इस बात का संकेत देता है कि यहां आज से अरबों वर्ष पहले सूक्ष्मजीवों का अस्तित्व रहा होगा।

    झील के विकास के लिए हो रहा था सर्वे

    तड़ागताल झील को पर्यटन और जलस्रोत के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को लेकर लगातार सर्वे किए जा रहे हैं। इसी भूगर्भीय अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को झील के आसपास स्ट्रोमैटोलाइट्स की चट्टानें मिलीं।

    वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत कुमार गहलौत के मुताबिक, इन अवशेषों के अध्ययन से उनकी उम्र लगभग 100 से 150 करोड़ वर्ष आंकी गई है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोमैटोलाइट्स सूक्ष्मजीवों से जुड़े जीवाश्म हैं और इनका मिलना इस क्षेत्र में प्राचीन सूक्ष्मजीवन की मौजूदगी का संकेत देता है।

    क्या होते हैं स्ट्रोमैटोलाइट्स?

    स्ट्रोमैटोलाइट्स को पृथ्वी पर शुरुआती जीवन के महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक प्रमाणों में माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, शुरुआती दौर में समुद्रों में साइनोबैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीव बड़ी संख्या में मौजूद थे। ये सूक्ष्मजीव चिपचिपी परतें बनाते थे। लंबे भूगर्भीय समय में इन परतों के जमा होने से परतदार चट्टानों जैसी संरचनाएं बन गईं, जिन्हें स्ट्रोमैटोलाइट्स कहा जाता है।

    तड़ागताल में इन संरचनाओं का मिलना इसलिए अहम है क्योंकि इनकी उम्र हिमालय के निर्माण से बहुत पहले की बताई जा रही है।

    हिमालय से पहले कैसा था यह इलाका?

    भूवैज्ञानिक इतिहास के मुताबिक हिमालय का निर्माण करीब 5 से 5.5 करोड़ वर्ष पहले भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर के बाद हुआ। इस टक्कर ने धरती की परतों में बड़े बदलाव किए और हिमालयी पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ।

    हिमालय के निर्माण से पहले इस क्षेत्र में टेथिस सागर मौजूद था। टेथिस सागर के बनने की प्रक्रिया लगभग 25 करोड़ वर्ष पहले शुरू हुई मानी जाती है। लेकिन तड़ागताल से मिले स्ट्रोमैटोलाइट्स की अनुमानित उम्र इससे भी कहीं ज्यादा पुरानी है। यानी इन चट्टानों में दर्ज जीवन उस दौर का हो सकता है जब टेथिस सागर भी अस्तित्व में नहीं आया था।

    कुमाऊं की बड़ी झीलों में शामिल है तड़ागताल

    तड़ागताल कुमाऊं क्षेत्र की प्रमुख और बड़ी झीलों में गिनी जाती है। मानसून के दौरान यह पानी से भर जाती है, जबकि सर्दियों में इसका पानी प्राकृतिक रूप से बाहर निकल जाता है। झील के तल में बने पांच प्राकृतिक छिद्रों से पानी रिसकर बाहर निकलता है। पानी निकलने के बाद स्थानीय ग्रामीण झील के तल में गेहूं की खेती भी करते हैं।

    चारों ओर पहाड़ियों से घिरी तड़ागताल प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जानी जाती है। स्थानीय लोग और ताल झील समिति लंबे समय से इसे व्यवस्थित झील और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे हैं।

    हिमालय के इतिहास के लिए क्यों अहम है खोज?

    तड़ागताल में मिले स्ट्रोमैटोलाइट्स सिर्फ प्राचीन जीवन की कहानी नहीं बताते, बल्कि इस इलाके के भूगर्भीय अतीत की एक नई कड़ी भी सामने रखते हैं। अगर इन अवशेषों की उम्र और भूगर्भीय संदर्भ आगे के वैज्ञानिक अध्ययनों में भी पुष्ट होते हैं, तो यह खोज हिमालयी क्षेत्र के निर्माण से पहले यहां मौजूद परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

  • रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं? जानिए राखी से जुड़ी पौराणिक कहानियां

    रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं? जानिए राखी से जुड़ी पौराणिक कहानियां


    उज्जैन।
    रक्षाबंधन भारत के उन त्योहारों में शामिल है, जिनका अर्थ केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है। सावन की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। समय के साथ राखी की परंपरा ने भी अलग-अलग रूप लिए और इसका अर्थ पारिवारिक रिश्ते से आगे बढ़कर सामाजिक एकता और भाईचारे तक पहुंचा।

    रक्षाबंधन का मतलब क्या है?

    ‘रक्षाबंधन’ शब्द संस्कृत के ‘रक्षा’ और ‘बंधन’ से मिलकर बना है, जिसका सामान्य अर्थ रक्षा का बंधन माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, तिलक करती हैं, आरती उतारती हैं और उसके सुख-स्वास्थ्य की कामना करती हैं। भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।

    हालांकि आज यह परंपरा सिर्फ सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है। कई जगह चचेरे-ममेरे भाई-बहन, मित्र और सामाजिक रूप से जुड़े लोग भी एक-दूसरे को राखी बांधते हैं।

    कृष्ण और द्रौपदी की कहानी

    रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे चर्चित पौराणिक कथाओं में भगवान कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग शामिल है। महाभारत की प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार कृष्ण की उंगली में चोट लगने पर खून निकल आया। द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया।

    मान्यता है कि कृष्ण ने इस स्नेह और अपनत्व को याद रखा। इसी प्रसंग को बाद में रक्षा के भाव से जोड़कर देखा गया और इसे राखी की परंपरा से संबंधित लोकप्रिय कथाओं में जगह मिली।

    राजा बलि और माता लक्ष्मी का प्रसंग

    रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि की है। प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर उनके राज्य की रक्षा के लिए वहां रहने लगे थे।

    माता लक्ष्मी विष्णु से अलग नहीं रहना चाहती थीं। कथा के अनुसार उन्होंने श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई माना। इसके बाद बलि ने भगवान विष्णु को उनके साथ वैकुंठ लौटने की अनुमति दे दी। इस कहानी को श्रावण पूर्णिमा पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा से जोड़ा जाता है।

    यमराज और यमुना की कहानी

    एक अन्य लोकप्रिय कथा मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार यमुना ने यमराज की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना की थी।

    इसी प्रसंग के आधार पर रक्षाबंधन को भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़कर देखा जाता है।

    इंद्र की कलाई पर शुचि ने बांधा रक्षा सूत्र

    रक्षा सूत्र की शक्ति से जुड़ी एक और पौराणिक कथा देवताओं और असुरों के युद्ध की है। कहा जाता है कि युद्ध में इंद्र कमजोर पड़ रहे थे। तब उनकी पत्नी शुचि ने गुरु बृहस्पति की सलाह पर इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा।

    इसके बाद इंद्र ने युद्ध में विजय हासिल की। इस कथा में रक्षा सूत्र को सुरक्षा, शक्ति और आत्मविश्वास के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।

    सिकंदर की पत्नी और राजा पुरु की कहानी कितनी प्रसिद्ध है?

    राखी से जुड़ी एक लोकप्रिय ऐतिहासिक कथा सिकंदर और भारतीय शासक राजा पुरु से संबंधित है। कहा जाता है कि सिकंदर की पत्नी ने राजा पुरु को राखी भेजकर उन्हें अपना भाई बनाया था। बाद में सिकंदर और पुरु के बीच युद्ध हुआ और प्रचलित कथा के अनुसार पुरु ने राखी के रिश्ते का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया।

    हालांकि इस प्रसंग को लेकर इतिहासकारों के बीच मतभेद हैं और इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना की बजाय लोकप्रिय कथा के रूप में देखना अधिक उचित माना जाता है।


    रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी

    रक्षाबंधन से जुड़ी सबसे चर्चित ऐतिहासिक कहानियों में मेवाड़ की रानी कर्णावती और मुगल शासक हुमायूं का प्रसंग भी है। लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, संकट के समय रानी कर्णावती ने हुमायूं को राखी भेजकर मदद मांगी थी।

    कहा जाता है कि हुमायूं ने इस रिश्ते का सम्मान किया और रानी की सहायता के लिए आगे बढ़ा। हालांकि इस कहानी के ऐतिहासिक प्रमाणों और घटनाक्रम को लेकर भी इतिहासकारों में बहस है।

    जब राखी बनी हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक

    रक्षाबंधन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बंगाल विभाजन के विरोध से जुड़ा है। 1905 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल विभाजन की घोषणा के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने राखी को सामाजिक एकता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया।

    टैगोर ने लोगों से एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर एकता का संदेश देने की अपील की। इस तरह राखी का अर्थ केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव और एकजुटता का प्रतीक भी बनी।

    रक्षाबंधन पर कैसे होती है पूजा और रस्म?

    रक्षाबंधन के दिन बहनें पूजा की थाली तैयार करती हैं। इसमें आमतौर पर राखी, कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई रखी जाती है। भाई को तिलक लगाने और आरती करने के बाद उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके बाद मिठाई खिलाई जाती है और भाई बहन को उपहार देता है।

    आजकल राखियों के स्वरूप में भी काफी बदलाव आया है। पारंपरिक धागे वाली राखियों के साथ चांदी, सोने, रुद्राक्ष, मोती और कई तरह की डिजाइन वाली राखियां बाजार में उपलब्ध होती हैं।

    देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग परंपराएं

    श्रावण पूर्णिमा का महत्व भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में दिखाई देता है।

    • नारली पूर्णिमा: महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र में मछुआरा समुदाय समुद्र देवता वरुण की पूजा करता है और समुद्र में नारियल अर्पित करता है।
    • अवनि अवित्तम: दक्षिण भारत में कई ब्राह्मण समुदायों में इस दिन यज्ञोपवीत बदलने की परंपरा है। इसे उपाकर्म भी कहा जाता है।
    • कजरी पूर्णिमा: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में कजरी गीत, पूजा और अच्छी फसल की कामना से जुड़ी परंपराएं हैं।
    • झूलन पूर्णिमा: पश्चिम बंगाल और ओडिशा में राधा-कृष्ण को झूले पर विराजमान कर इस पर्व को मनाने की परंपरा है।

    समय के साथ बदल गया राखी का अर्थ

    रक्षाबंधन की सबसे खास बात यह है कि इसका मूल भाव रिश्ते में सुरक्षा और विश्वास है, लेकिन समय के साथ इसकी व्याख्या बदलती रही है। कभी यह भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रहा, तो कभी सामाजिक एकता और भाईचारे का माध्यम बना।

    आज राखी को केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा के वादे के रूप में देखने के बजाय एक-दूसरे के साथ खड़े रहने और रिश्ते की जिम्मेदारी निभाने के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। यही बदलता अर्थ रक्षाबंधन को हर दौर में प्रासंगिक बनाए रखता है।

  • भोपाल में एलएपीपी के नए विस्तार का उद्घाटन, बना दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण संयंत्र

    भोपाल में एलएपीपी के नए विस्तार का उद्घाटन, बना दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण संयंत्र

    भोपाल। केबल एवं कनेक्टिविटी समाधान के क्षेत्र में कार्यरत वैश्विक कंपनी एलएपीपी ने मध्य प्रदेश की राजधानी
    भोपाल स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र के विस्तारित परिसर का उद्घाटन किया। विस्तार के बाद भोपाल संयंत्र कंपनी के विश्वभर में संचालित सभी विनिर्माण संयंत्रों में सबसे बड़ा बन गया है। नई सुविधा में पावर लो-वोल्टेज केबल के निर्माण की व्यवस्था की गई है।

    कंपनी के अनुसार, नई इकाई में तैयार होने वाली लो-वोल्टेज केबल का उपयोग कारखानों, व्यावसायिक भवनों, परिवहन प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, उपयोगिता परियोजनाओं सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इस सुविधा का निर्माण वर्ष 2025 में शुरू किया गया था और अब यह पूरी तरह परिचालन में आ गई है।

    कंपनी ने यह विस्तार ऐसे समय में किया है, जब देश में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही पावर लो-वोल्टेज केबल की मांग में भी वृद्धि हो रही है। अनुमान के मुताबिक भारत में वर्तमान और आगामी वित्त वर्ष के दौरान बुनियादी ढांचा क्षेत्र में करीब 24 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में प्रत्येक वर्ष लगभग 50 से 55 गीगावाट की वृद्धि होने की संभावना है।

    भारत कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार

    एलएपीपी समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने कहा कि भोपाल में किया गया निवेश ग्राहकों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ‘भारत में भारत के लिए’ रणनीति के तहत देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले कनेक्टिविटी समाधान तैयार किए जा रहे हैं। भारत एलएपीपी के लिए एशिया का महत्वपूर्ण बाजार है, जबकि मध्य प्रदेश कंपनी के लिए एक अहम विनिर्माण केंद्र बन चुका है।

    एलएपीपी ने वर्ष 2012 में भोपाल में अपना विनिर्माण संयंत्र शुरू किया था। शुरुआती दौर में यहां एकल-कोर केबल का उत्पादन किया जाता था। समय के साथ कंपनी ने संयंत्र में बहु-कोर केबल, सौर केबल, कंपाउंडिंग और ई-बीम तकनीक जैसी नई क्षमताएं जोड़ीं।

    200 से अधिक लोगों को रोजगार

    वर्तमान में भोपाल संयंत्र में 200 से अधिक लोग कार्यरत हैं। कंपनी के विश्वभर के संयंत्रों में सबसे बड़ा होने के साथ ही यह केंद्र कई आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां उन्नत पॉलिमर सामग्री का निर्माण भी कंपनी स्वयं करती है। इससे केबल की गुणवत्ता और प्रदर्शन पर बेहतर नियंत्रण संभव होता है।

    ई-बीम तकनीक के उपयोग से केबल को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने के साथ उनकी ताप सहने की क्षमता भी बढ़ाई जाती है। कंपनी के मुताबिक भोपाल संयंत्र का विस्तार एलएपीपी इंडिया के 30वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर हुआ है।

    जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार

    एलएपीपी के लिए जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार है और कंपनी इसे प्रमुख विकास बाजार के रूप में देखती है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा है। समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने बचपन में अपने परिवार के साथ भारत की यात्राएं की थीं। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रियास लैप वर्ष 2000 से जर्मनी के दो राज्यों में भारत के मानद वाणिज्यदूत के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।

  • बाजार की तेजी पर फिर लगा ब्रेक सेंसेक्स 76,934 के करीब निफ्टी 0.48 प्रतिशत नीचे निवेशकों की नजर अब ग्लोबल संकेतों पर

    बाजार की तेजी पर फिर लगा ब्रेक सेंसेक्स 76,934 के करीब निफ्टी 0.48 प्रतिशत नीचे निवेशकों की नजर अब ग्लोबल संकेतों पर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली और कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला। इसके अलावा मेटल पीएसयू बैंक और सीमेंट कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव भी बाजार की कमजोरी की बड़ी वजह बना। कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 539.35 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,933.59 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 116.90 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और यह 24,090.85 के स्तर पर बंद हुआ।

    व्यापक बाजार की बात करें तो यहां भी कारोबारी धारणा पूरी तरह मजबूत नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 में 0.10 प्रतिशत जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.13 प्रतिशत की गिरावट रही। हालांकि बड़ी कंपनियों के मुकाबले व्यापक बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का एक वर्ग अभी भी घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के अवसर तलाश रहा है।

    सेक्टरवार कारोबार में सीमेंट कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। निफ्टी सीमेंट इंडेक्स 1.33 प्रतिशत टूट गया। इसके बाद निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.94 प्रतिशत निफ्टी मेटल में 0.86 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मीडिया सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा हेल्थकेयर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और प्राइवेट बैंक इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की गिरावट के बीच कुछ सहारा दिया।

    निफ्टी 50 के शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज कोटक महिंद्रा बैंक अदाणी पोर्ट्स सिप्ला और बीईएल प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके विपरीत हिंडाल्को एचडीएफसी बैंक महिंद्रा एंड महिंद्रा श्रीराम फाइनेंस ग्रासिम इंडस्ट्रीज एचसीएल टेक भारती एयरटेल और रिलायंस जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को और बढ़ाया।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक एक्सपायरी से जुड़ी उठापटक और मिडिल ईस्ट में किसी बड़ी कूटनीतिक सफलता का अभाव फिलहाल बाजार को एक सीमित दायरे में रख रहा है। हालांकि कंपनियों की कमाई के अनुमानों में ऊर्जा की ऊंची कीमतों के असर को काफी हद तक शामिल किया जा चुका है। हाल में कच्चे तेल की कीमतों और लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड में आई नरमी से महंगाई के मोर्चे पर कुछ राहत की उम्मीद भी बनी हुई है। अगर ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आती है तो इसका असर कंपनियों की लागत और भविष्य की कमाई पर सकारात्मक पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों का निवेश और कंपनियों की कमाई में बनी मजबूती भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। खासकर मिडकैप कंपनियों के कई सेक्टर वैश्विक अनिश्चितताओं से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हैं और घरेलू मांग का फायदा उठा रहे हैं। यही वजह है कि बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल सम्मेलन में होने वाले भाषण पर भी रहेगी। निवेशक उनके भाषण से महंगाई ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर संकेत तलाशेंगे। इन संकेतों का असर वैश्विक जोखिम धारणा और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम भी दलाल स्ट्रीट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • एचडीएफसी बैंक के खिलाफ अमेरिका में निवेशकों की कानूनी जंग ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च दिखाने का आरोप

    एचडीएफसी बैंक के खिलाफ अमेरिका में निवेशकों की कानूनी जंग ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च दिखाने का आरोप


    नई दिल्ली। एचडीएफसी बैंक के खिलाफ न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में क्लास एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। शिकायत में एक राज्य सरकार की एजेंसी को कथित अतिरिक्त ब्याज भुगतान को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाने और निवेशकों को गलत जानकारी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बैंक ने मुकदमे को निराधार बताते हुए मजबूती से बचाव करने की बात कही है। गुरुवार को बैंक के शेयर 1.75 प्रतिशत गिरकर 714.45 रुपए पर बंद हुए।

    देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक के सामने अमेरिका में दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे के बाद नई कानूनी चुनौती खड़ी हो गई है। न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की अमेरिकी जिला अदालत में निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी की ओर से यह मुकदमा दायर किया गया है। मामले में बैंक के साथ उसके सीईओ शशिधर जगदीशन और सीएफओ श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी प्रतिवादी बनाया गया है। मुकदमा उन निवेशकों की ओर से दायर किया गया है जिन्होंने 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच एचडीएफसी बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी शेयर खरीदे थे।

    शिकायत में बैंक पर आरोप लगाया गया है कि महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी एमएसआरडीसी से बड़े जमा हासिल करने के लिए उसे सामान्य दर से अधिक ब्याज देने का कथित इंतजाम किया गया। आरोप के मुताबिक एजेंसी को 6.01 प्रतिशत ब्याज देने का वादा किया गया था जबकि आम ग्राहकों के लिए मानक बचत दर 3.5 प्रतिशत थी। शिकायत में दावा किया गया है कि यह व्यवस्था बैंकिंग नियमों के विपरीत थी और इसी वजह से कथित तौर पर भुगतान को दूसरे तरीके से दिखाने का रास्ता अपनाया गया।

    मुकदमे के अनुसार 2023 से 2025 के बीच करीब 45 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ब्याज राज्य की एजेंसी को दिया गया। आरोप है कि इस रकम को सीधे ब्याज भुगतान के रूप में दर्ज करने के बजाय मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया गया और सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान की स्पॉन्सरशिप के माध्यम से भुगतान किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि भुगतान तीसरे पक्ष के विक्रेताओं के जरिए किया गया। हालांकि ये सभी आरोप फिलहाल मुकदमे में लगाए गए दावे हैं और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है।

    मामले में बैंक की कथित आंतरिक सतर्कता जांच का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार जांच में इस तरीके को आरबीआई के मास्टर निर्देशों और बैंक की आंतरिक एंटी ब्राइबरी नीतियों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद वादियों ने आरोप लगाया कि बैंक ने अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग के समक्ष दाखिल अपनी रिपोर्टों में निवेशकों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी। वित्त वर्ष 2024 और 2025 की फॉर्म 20 एफ रिपोर्टों में बैंक प्रबंधन ने वित्तीय रिपोर्टिंग से जुड़े आंतरिक नियंत्रणों को प्रभावी बताया था।

    मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित अतिरिक्त भुगतान को मार्केटिंग बजट में दिखाए जाने से बैंक के परिचालन खर्च और शुद्ध ब्याज आय से जुड़े आंकड़ों की वास्तविक तस्वीर प्रभावित हुई। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि इससे निवेशकों को बैंक की वित्तीय और परिचालन स्थिति का सही आकलन करने में परेशानी हुई और शेयर की कीमत पर भी असर पड़ा।

    मामला उस समय और चर्चा में आया जब 18 मार्च 2026 को एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया। उनके इस्तीफे से जुड़ी वजहों में बैंक के भीतर कुछ ऐसी घटनाओं और प्रथाओं का उल्लेख किया गया था जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। इसके बाद अमेरिकी बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। 27 मई 2026 को एमएसआरडीसी को किए गए कथित भुगतानों से जुड़ी आंतरिक जांच की खबर सामने आने के बाद भी शेयरों पर दबाव बढ़ा।

    शिकायतकर्ता ने अमेरिकी सिक्योरिटी एक्सचेंज एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही क्लास एक्शन के रूप में मामले को प्रमाणित करने मुआवजे और जूरी ट्रायल की मांग भी की गई है। दूसरी ओर एचडीएफसी बैंक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका में शेयर कीमतों में गिरावट के बाद इस तरह के मुकदमे आम हैं। बैंक ने मामले को निराधार बताते हुए अदालत में मजबूती से अपना बचाव करने की बात कही है। इस कानूनी विवाद के बीच गुरुवार को एचडीएफसी बैंक के शेयर 1.75 प्रतिशत गिरकर 714.45 रुपए पर बंद हुए।

  • ममदानी की राजनीति पर भड़कीं मैरी मिलबेन बोलीं भारत और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर उनका रुख गलत दिशा में

    ममदानी की राजनीति पर भड़कीं मैरी मिलबेन बोलीं भारत और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर उनका रुख गलत दिशा में


    नई दिल्ली। अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी को लेकर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में मिलबेन ने ममदानी को कट्टरपंथी बताते हुए कहा कि वह फिलहाल गलत राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने ममदानी के डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका यानी डीएसए से जुड़ाव को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक विचार अमेरिकी लोकतांत्रिक आदर्शों के अनुरूप नहीं हैं।

    मिलबेन की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। मोहन भागवत 29 अगस्त को एक कार्यक्रम में एकात्मता और एकता जैसे विषयों पर संबोधित करने वाले हैं। इसी संदर्भ में ममदानी की टिप्पणियों से जुड़े सवाल पर मिलबेन ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूरे विवाद को केवल किसी एक व्यक्ति या एक कार्यक्रम के संदर्भ में नहीं बल्कि ममदानी की राजनीतिक संबद्धताओं और उनके विचारों के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    मिलबेन ने दावा किया कि ममदानी का डीएसए से जुड़ाव उनके राजनीतिक रुख को समझने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी में उनके कई मित्र और निर्वाचित प्रतिनिधि हैं लेकिन वे समाजवादी आंदोलन या उसके एजेंडे का समर्थन नहीं करते। उनके मुताबिक ममदानी ने खुद को डेमोक्रेटिक पार्टी के एक ऐसे धड़े से जोड़ लिया है जिसका राजनीतिक एजेंडा उन्हें चिंताजनक लगता है।

    अमेरिकी गायिका ने ममदानी की टिप्पणियों को भारत और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे से भी जोड़ते हुए कहा कि उनका निशाना केवल आरएसएस प्रमुख तक सीमित नहीं था। मिलबेन के अनुसार इन टिप्पणियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के संदर्भ में धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े विचारों को लेकर भी विरोध का भाव दिखाई देता है। उन्होंने इस तरह के राजनीतिक रुख को अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए सही नहीं बताया।

    हालांकि ममदानी की आलोचना करते हुए मिलबेन ने उनके राजनीतिक कौशल और व्यक्तिगत प्रतिभा की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि ममदानी एक प्रतिभाशाली युवा नेता हैं और अगर उन्हें सही मार्गदर्शन मिलता तथा वह अपनी राजनीतिक दिशा पर पुनर्विचार करते तो उनका भविष्य काफी बेहतर हो सकता था। मिलबेन ने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना का मतलब यह नहीं है कि वह ममदानी की क्षमताओं को नकारती हैं बल्कि उन्हें लगता है कि वह गलत राजनीतिक प्रभावों के बीच आगे बढ़ रहे हैं।

    मिलबेन ने कहा कि वह चाहती हैं कि अमेरिका के युवा नेता और निर्वाचित प्रतिनिधि देश के लोकतांत्रिक आदर्शों को मजबूत करते हुए आगे बढ़ें। उनके अनुसार राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं लेकिन नेताओं की भाषा और जिन विचारधाराओं से वे खुद को जोड़ते हैं उनका प्रभाव समाज पर पड़ता है। इसी वजह से उन्होंने ममदानी से अपने हालिया भाषणों और राजनीतिक संबद्धताओं पर दोबारा विचार करने की अपील की।

    मिलबेन ने उम्मीद जताई कि ममदानी भविष्य में अपनी राजनीतिक दिशा को लेकर पुनर्विचार करेंगे। उन्होंने उन्हें पूरी तरह खारिज करने के बजाय बदलाव की संभावना पर जोर दिया और कहा कि प्रतिभाशाली युवा नेता के रूप में उनके सामने आगे बढ़ने के कई अवसर हैं। मैरी मिलबेन भारतीय दर्शकों के बीच जन गण मन और ॐ जय जगदीश हरे की प्रस्तुतियों के कारण भी लोकप्रिय हैं। वह भारत और भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े कई कार्यक्रमों में नजर आती रही हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर चुकी हैं।

  • दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए हर कारोबारी दिन नई संभावनाओं और जोखिमों के साथ आता है। सेंसेक्स और निफ्टी में होने वाला उतार चढ़ाव केवल बाजार की मौजूदा स्थिति को नहीं दर्शाता बल्कि इसका असर निवेशकों के फैसलों और शेयरों की खरीद बिक्री पर भी पड़ता है। ऐसे समय में बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले घरेलू और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर लगातार उत्सुकता बनी रहती है कि बाजार में तेजी का सिलसिला आगे बढ़ेगा या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।

    शेयर बाजार की चाल पर सबसे पहले वैश्विक संकेतों का असर दिखाई देता है। अमेरिका समेत दुनिया के प्रमुख बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। अगर विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों में पैसा लगाते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के तिमाही नतीजे कारोबार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहते हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं उनके शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों में होने वाली गतिविधियां भी पूरे बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी को देखना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टर के प्रदर्शन पर भी नजर रखना जरूरी है।

    बाजार में ब्याज दरें महंगाई कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा सकती है। वहीं रुपये में कमजोरी का असर आयात लागत और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। दूसरी ओर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है क्योंकि इससे कंपनियों और कारोबार के लिए कर्ज की लागत कम होने की संभावना बनती है।

    निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी या गिरावट देखकर घबराहट में बिकवाली करने से बचा जाए। शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और किसी भी शेयर की पिछली तेजी उसके भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होती। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति मुनाफे कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं जबकि अल्पकालिक कारोबार करने वालों को बाजार की अस्थिरता और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों से जुड़ी खबरें भारतीय शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार में अवसर जरूर हैं लेकिन हर अवसर के साथ जोखिम भी जुड़ा हुआ है। समझदारी इसी में है कि निवेशक भावनाओं के बजाय तथ्यों और अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला लें।

  • गांवों और महिलाओं की बैंकिंग में बड़ी छलांग जन-धन योजना के खाते 59 करोड़ पार औसत जमा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी

    गांवों और महिलाओं की बैंकिंग में बड़ी छलांग जन-धन योजना के खाते 59 करोड़ पार औसत जमा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन-धन योजना यानी पीएमजेडीवाई ने देश में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच को व्यापक बनाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक योजना के तहत खुले बैंक खातों की संख्या अब 59 करोड़ से अधिक हो गई है। इन खातों में जमा कुल राशि भी बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा बताता है कि जन-धन योजना केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं रही बल्कि आम लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    पीएम जन-धन योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी और अब इसे 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था जिनके पास पहले कोई बैंक खाता नहीं था। खास बात यह है कि योजना के तहत खुले खातों में 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इससे पता चलता है कि बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार देश के छोटे शहरों और गांवों तक भी तेजी से हुआ है। वहीं कुल खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत है जो वित्तीय समावेशन के साथ महिला आर्थिक भागीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    19 अगस्त 2026 तक जन-धन खातों में प्रति खाता औसत जमा राशि 5,356 रुपए दर्ज की गई। मंत्रालय के अनुसार पिछले 12 वर्षों में प्रति खाते औसत जमा राशि करीब 3.4 गुना बढ़ी है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि खाताधारक इन बैंक खातों का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके भीतर नियमित बचत की आदत भी विकसित हो रही है। यानी जन-धन खाते अब केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का माध्यम नहीं बल्कि परिवारों की रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

    योजना की एक बड़ी खासियत इसमें मिलने वाली बैंकिंग और वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं भी हैं। प्रत्येक पात्र खाते के साथ मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड उपलब्ध कराया जाता है जिसमें 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है। इसके अलावा पात्र खाताधारकों को 10 हजार रुपए तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिल सकती है। यह सुविधा अचानक सामने आने वाली आर्थिक जरूरतों के समय परिवारों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमजेडीवाई का उद्देश्य प्रत्येक ऐसे वयस्क व्यक्ति को बेसिक बैंक अकाउंट उपलब्ध कराना है जिसका पहले बैंक खाता नहीं था। इस खाते के लिए न्यूनतम बैलेंस रखने की बाध्यता नहीं है और मेंटेनेंस चार्ज भी नहीं लिया जाता। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    जन-धन खातों के विस्तार का असर बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच पर भी पड़ा है। बैंक खाता होने से आम लोगों के लिए बीमा और पेंशन योजनाओं से जुड़ना आसान हुआ है। सरकार का कहना है कि देशभर में लगातार चलाए गए अभियानों के जरिए बैंकिंग पहुंच को लगभग हर वर्ग तक ले जाने और जरूरतमंद लोगों के बीच बीमा तथा पेंशन कवरेज का दायरा बढ़ाने की कोशिश जारी है। 59 करोड़ से ज्यादा खातों और 3.17 लाख करोड़ रुपए की जमा राशि का आंकड़ा इस अभियान की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।