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  • दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    दलाल स्ट्रीट पर फिर दिखेगा उतार चढ़ाव सेंसेक्स निफ्टी के रुख से तय होगी निवेशकों की रणनीति

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए हर कारोबारी दिन नई संभावनाओं और जोखिमों के साथ आता है। सेंसेक्स और निफ्टी में होने वाला उतार चढ़ाव केवल बाजार की मौजूदा स्थिति को नहीं दर्शाता बल्कि इसका असर निवेशकों के फैसलों और शेयरों की खरीद बिक्री पर भी पड़ता है। ऐसे समय में बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले घरेलू और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है। निवेशकों के बीच इस बात को लेकर लगातार उत्सुकता बनी रहती है कि बाजार में तेजी का सिलसिला आगे बढ़ेगा या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।

    शेयर बाजार की चाल पर सबसे पहले वैश्विक संकेतों का असर दिखाई देता है। अमेरिका समेत दुनिया के प्रमुख बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। अगर विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों में पैसा लगाते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के तिमाही नतीजे कारोबार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहते हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं उनके शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी जैसे प्रमुख सेक्टरों में होने वाली गतिविधियां भी पूरे बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी को देखना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टर के प्रदर्शन पर भी नजर रखना जरूरी है।

    बाजार में ब्याज दरें महंगाई कच्चे तेल की कीमतें और रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ा सकती है। वहीं रुपये में कमजोरी का असर आयात लागत और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। दूसरी ओर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है क्योंकि इससे कंपनियों और कारोबार के लिए कर्ज की लागत कम होने की संभावना बनती है।

    निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी या गिरावट देखकर घबराहट में बिकवाली करने से बचा जाए। शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है और किसी भी शेयर की पिछली तेजी उसके भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होती। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति मुनाफे कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं जबकि अल्पकालिक कारोबार करने वालों को बाजार की अस्थिरता और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक बाजारों की दिशा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों से जुड़ी खबरें भारतीय शेयर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए बाजार में अवसर जरूर हैं लेकिन हर अवसर के साथ जोखिम भी जुड़ा हुआ है। समझदारी इसी में है कि निवेशक भावनाओं के बजाय तथ्यों और अपनी जोखिम क्षमता के आधार पर फैसला लें।

  • गांवों और महिलाओं की बैंकिंग में बड़ी छलांग जन-धन योजना के खाते 59 करोड़ पार औसत जमा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी

    गांवों और महिलाओं की बैंकिंग में बड़ी छलांग जन-धन योजना के खाते 59 करोड़ पार औसत जमा में भी जबरदस्त बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री जन-धन योजना यानी पीएमजेडीवाई ने देश में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच को व्यापक बनाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक योजना के तहत खुले बैंक खातों की संख्या अब 59 करोड़ से अधिक हो गई है। इन खातों में जमा कुल राशि भी बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा बताता है कि जन-धन योजना केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं रही बल्कि आम लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    पीएम जन-धन योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को हुई थी और अब इसे 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था जिनके पास पहले कोई बैंक खाता नहीं था। खास बात यह है कि योजना के तहत खुले खातों में 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इससे पता चलता है कि बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार देश के छोटे शहरों और गांवों तक भी तेजी से हुआ है। वहीं कुल खातों में महिलाओं की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत है जो वित्तीय समावेशन के साथ महिला आर्थिक भागीदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    19 अगस्त 2026 तक जन-धन खातों में प्रति खाता औसत जमा राशि 5,356 रुपए दर्ज की गई। मंत्रालय के अनुसार पिछले 12 वर्षों में प्रति खाते औसत जमा राशि करीब 3.4 गुना बढ़ी है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि खाताधारक इन बैंक खातों का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं और उनके भीतर नियमित बचत की आदत भी विकसित हो रही है। यानी जन-धन खाते अब केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का माध्यम नहीं बल्कि परिवारों की रोजमर्रा की वित्तीय जरूरतों का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

    योजना की एक बड़ी खासियत इसमें मिलने वाली बैंकिंग और वित्तीय सुरक्षा सुविधाएं भी हैं। प्रत्येक पात्र खाते के साथ मुफ्त रुपे डेबिट कार्ड उपलब्ध कराया जाता है जिसमें 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है। इसके अलावा पात्र खाताधारकों को 10 हजार रुपए तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिल सकती है। यह सुविधा अचानक सामने आने वाली आर्थिक जरूरतों के समय परिवारों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमजेडीवाई का उद्देश्य प्रत्येक ऐसे वयस्क व्यक्ति को बेसिक बैंक अकाउंट उपलब्ध कराना है जिसका पहले बैंक खाता नहीं था। इस खाते के लिए न्यूनतम बैलेंस रखने की बाध्यता नहीं है और मेंटेनेंस चार्ज भी नहीं लिया जाता। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    जन-धन खातों के विस्तार का असर बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच पर भी पड़ा है। बैंक खाता होने से आम लोगों के लिए बीमा और पेंशन योजनाओं से जुड़ना आसान हुआ है। सरकार का कहना है कि देशभर में लगातार चलाए गए अभियानों के जरिए बैंकिंग पहुंच को लगभग हर वर्ग तक ले जाने और जरूरतमंद लोगों के बीच बीमा तथा पेंशन कवरेज का दायरा बढ़ाने की कोशिश जारी है। 59 करोड़ से ज्यादा खातों और 3.17 लाख करोड़ रुपए की जमा राशि का आंकड़ा इस अभियान की व्यापक पहुंच को दर्शाता है।

  • गुजरात को ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब बनाने की तैयारी सीएम बोले कई कंपनियां निवेश को लेकर उत्साहित

    गुजरात को ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब बनाने की तैयारी सीएम बोले कई कंपनियां निवेश को लेकर उत्साहित


    नई दिल्ली। गुजरात में ग्लोबल निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार की कोशिशों को अमेरिका और कनाडा के दौरे से बड़ी उम्मीद मिली है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की विदेश यात्रा पूरी होने के बाद अहमदाबाद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया गया। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी समेत कई नेताओं और अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दुनिया की बड़ी कंपनियों और निवेशकों को गुजरात में निवेश के लिए आकर्षित करना था। मुख्यमंत्री के मुताबिक अमेरिका और कनाडा में निवेशकों के साथ हुई बैठकों के दौरान गुजरात को लेकर सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

    भूपेंद्र पटेल ने कहा कि गुजरात सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि भारत में आने वाला अधिक से अधिक ग्लोबल निवेश राज्य तक पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक संबंधों और उनके प्रति दुनिया में मौजूद भरोसे को भी निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार विदेश यात्रा के दौरान यह स्पष्ट दिखाई दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक साख मजबूत हुई है और इसका सकारात्मक प्रभाव निवेशकों के रुख पर भी नजर आ रहा है। यही वजह है कि कई निवेशक गुजरात के अलग अलग क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निवेश करने को लेकर उत्सुक दिखाई दिए।

    इस दौरे में सेमीकंडक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टरों पर विशेष जोर रहा। इन क्षेत्रों से जुड़ी बड़ी कंपनियों और निवेशकों के साथ प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इसके अलावा गुजरात के महत्वाकांक्षी गिफ्ट सिटी को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र के तौर पर और मजबूत बनाने के लिए प्रमुख फाइनेंशियल कंपनियों के साथ भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठकों के दौरान मिली प्रतिक्रिया उत्साह बढ़ाने वाली रही और कई कंपनियां गुजरात में निवेश के लिए आगे बढ़ने को तैयार दिखाई दे रही हैं।

    विदेश यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य आगामी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 के लिए वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित करना भी रहा। यह समिट 10 से 12 जनवरी 2027 तक आयोजित होने वाला है। सरकार की कोशिश है कि इस आयोजन के जरिए गुजरात को निवेश सहयोग और वैश्विक साझेदारी के लिए दुनिया के प्रमुख उद्योग समूहों के सामने एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने सैन फ्रांसिस्को वॉशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में निवेशकों टेक्नोलॉजी लीडर्स युवा उद्यमियों इनोवेटर्स और गुजराती समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की।

    प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव एमके दास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी नटराजन उद्योग और खान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ममता वर्मा तथा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। अधिकारियों ने निवेश से जुड़े अवसरों और गुजरात में उपलब्ध औद्योगिक तथा वित्तीय सुविधाओं को लेकर संभावित निवेशकों के साथ चर्चा की। मुख्यमंत्री ने दौरे के बाद भरोसा जताया कि आने वाले समय में गुजरात में बड़े स्तर पर निवेश देखने को मिलेगा और राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

  • कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता

    कनाडा के निवेशकों पर भारत की नजर, सीतारमण बोलीं- नीतियां अनुकूल और टैक्स व्यवस्था में बढ़ी निश्चितता


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कनाडा के प्रमुख निवेशकों और कंपनियों को भारत में निवेश के बढ़ते अवसरों का लाभ उठाने का न्योता दिया है। टोरंटो में आयोजित हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में वित्त मंत्री ने कनाडाई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ भारत के निवेशक हितैषी नीतिगत माहौल टैक्स से जुड़ी निश्चितता और लगातार किए जा रहे आर्थिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अलग अलग सेक्टर और क्षेत्रों में निवेश के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहा है और कनाडाई कंपनियां इन संभावनाओं के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत कर सकती हैं।

    राउंडटेबल में क्लीन टेक्नोलॉजी जरूरी खनिज रेयर अर्थ्स एनर्जी स्टोरेज सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर कृषि फूड प्रोसेसिंग ऑटोमोबाइल टेक्सटाइल्स ग्रीन स्टील एयरोस्पेस स्पेस साइबर सिक्योरिटी बायोटेक्नोलॉजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एसेट मैनेजमेंट हायर एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हुए। इससे साफ है कि भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय भविष्य की तकनीकों और उभरते उद्योगों तक विस्तार देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान की प्रेसिडेंट और सीईओ जो टेलर से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में ओटीपीपी के लंबे समय से जारी भरोसे और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के साथ उसकी साझेदारी की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच पार्टनरशिप और को इन्वेस्टमेंट के जरिए भारत में ओटीपीपी के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ाने की संभावनाओं पर बातचीत हुई। ट्रांसमिशन ट्रांसपोर्ट शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों को खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया गया।

    सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों के लिए गिफ्ट आईएफएससी को एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश किया और ओटीपीपी को भारत के साथ अपने आर्थिक जुड़ाव को और मजबूत करने तथा बड़े निवेश अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही उन्होंने ओएमईआरएस के प्रेसिडेंट और सीईओ ब्लेक हचेसन से भी मुलाकात की और भारत में संस्थान के लगातार भरोसे की सराहना की। बातचीत में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय की साझेदारी को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा हुई।

    बैठक के दौरान ट्रांसपोर्टेशन ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि बढ़ते मध्यम वर्ग और तेजी से बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया गया।

    वित्त मंत्री ने कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन ग्राहम से भी मुलाकात की। उन्होंने भारत में सीपीपीआईबी के लंबे समय के भरोसे और एनआईआईएफ इंफ्रा फंड II में उसके निवेश की सराहना की। दोनों पक्षों के बीच ट्रांसमिशन रिन्यूएबल एनर्जी सड़कें बंदरगाह शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटरों में संस्थागत पूंजी के लिए नए अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री का यह दौरा भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और कनाडाई निवेशकों के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • बाढ़ और तबाही के बीच 6 कैलाश यात्री लापता, नेपाल आपदा का बिहार तक असर; परिवारों की बढ़ी चिंता

    बाढ़ और तबाही के बीच 6 कैलाश यात्री लापता, नेपाल आपदा का बिहार तक असर; परिवारों की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बिहार के कई इलाकों में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भागलपुर के नौगछिया में गंगा नदी का तटबंध टूटने के बाद बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। पानी फैलने से लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। प्रभावित परिवारों के लिए मुफ्त कम्युनिटी किचन अस्थायी मेडिकल कैंप और राहत शिविर शुरू किए गए हैं ताकि उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    बगहा में भी नेपाल में आई भारी आपदा के बाद गंडक नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को नदी का जलस्तर बढ़ने का डर सता रहा है। कई लोग संभावित खतरे को देखते हुए रातभर जागते रहे। प्रशासन की ओर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। पटना के आसपास के क्षेत्रों में भी बाढ़ का पानी कई घरों तक पहुंचने से परेशानी बढ़ गई है। कई परिवार अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं।

    बिहार के साथ उत्तर प्रदेश में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है। रायबरेली में गंगा का पानी चेतावनी के निशान से ऊपर पहुंच गया है। इसके चलते कटरा क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई है और खेतों में खड़ी धान गन्ने और अरहर की फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों को फसल बर्बाद होने के साथ आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।

    नेपाल की आपदा का असर उन भारतीय परिवारों पर भी पड़ा है जिनके परिजन वहां यात्रा पर गए हैं। जम्मू में गोरखा समुदाय के लोगों ने नेपाल त्रासदी में जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही नेपाल में लापता भारतीय और विदेशी नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भी प्रार्थना की गई।

    इसी बीच पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से नेपाल गए छह कैलाश यात्री 25 अगस्त की रात से संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक ट्रैवल ग्रुप के साथ नेपाल गए थे। यात्रियों के संपर्क में नहीं आने के बाद उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। लापता यात्रियों में अरिंदम गांगुली और मौसुमी गांगुली के नाम सामने आए हैं।

    अरिंदम की दोस्त सुजाता बनर्जी के मुताबिक यात्रियों से पहले बातचीत हुई थी लेकिन इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो सका। ट्रैवल एजेंसी से संपर्क करने पर परिवारों को बताया गया कि पिछली रात और सुबह यात्रियों से बात हुई थी लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई। इससे परिजन और अधिक चिंतित हैं।

    अब परिवारों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नेपाल में फंसे छह यात्रियों की तत्काल तलाश शुरू करने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है। एक ओर नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है तो दूसरी ओर उसके प्रभाव से बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ऐसे हालात में राहत और बचाव एजेंसियों के सामने प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ नेपाल में संपर्क से बाहर हुए भारतीय यात्रियों की जानकारी जुटाने की चुनौती भी बनी हुई है।

  • भारत-पनामा कारोबार में आएगी नई रफ्तार! 600 मिलियन डॉलर के व्यापार को 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य

    भारत-पनामा कारोबार में आएगी नई रफ्तार! 600 मिलियन डॉलर के व्यापार को 1.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। भारतीय कंपनियों के लिए पनामा आने वाले समय में सिर्फ एक निर्यात गंतव्य नहीं बल्कि लैटिन अमेरिका कैरिबियन और अमेरिका के कई बाजारों तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण बिजनेस गेटवे बन सकता है। भारत में पनामा के राजदूत अलोंसो कोरिया मिगुएल ने मुंबई में आयोजित एक हाई लेवल कारोबारी बातचीत के दौरान भारतीय उद्योग जगत के सामने पनामा की कारोबारी संभावनाओं को रखा। उन्होंने कहा कि पनामा की भौगोलिक स्थिति और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय स्तर पर अपने कारोबार का विस्तार करने में बड़ी मदद दे सकते हैं।

    राजदूत के मुताबिक पनामा नहर के कारण देश को वैश्विक समुद्री व्यापार में महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त हासिल है। इसके अलावा मजबूत समुद्री और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम स्पेशल इकोनॉमिक जोन और कोलोन फ्री ट्रेड जोन जैसी सुविधाएं भारतीय कंपनियों के लिए वेयरहाउसिंग डिस्ट्रीब्यूशन मैन्युफैक्चरिंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकती हैं। उनका कहना था कि भारतीय कंपनियां पनामा में अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी स्थापित करके आसपास के कई बाजारों को एक साथ कवर कर सकती हैं।

    खास तौर पर फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स ऑटोमोबाइल मोटरसाइकिल इंजीनियरिंग कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर में अवसरों की बड़ी संभावना बताई गई है। कंपनियां पनामा को रीजनल हेडक्वार्टर या डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर के तौर पर विकसित कर सकती हैं। इससे अलग अलग देशों में कारोबार शुरू करने के दौरान आने वाली लॉजिस्टिक्स स्थानीय नियमों डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और बाजार की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    मुंबई में हुई इस बातचीत में भारत और पनामा के बीच मौजूदा व्यापार को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। एमवीआईआरडीसी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन और ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष डॉ. विजय कलंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच फिलहाल वस्तुओं का व्यापार करीब 600 मिलियन डॉलर का है। उन्होंने कहा कि मजबूत बी2बी संपर्क बाजार की बेहतर जानकारी और संभावनाओं वाले क्षेत्रों में केंद्रित सहयोग के जरिए अगले दो वर्षों में इस व्यापार को दोगुना कर 1.2 बिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंचाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि पनामा की रणनीतिक लोकेशन और अमेरिका के साथ उसकी कनेक्टिविटी भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय विस्तार के लिए प्रभावी मंच दे सकती है। वहीं मुंबई में पनामा के कॉन्सल जनरल रॉबर्टो रोड्रिग्ज प्राडा ने भी दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधे संपर्क बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष संभावनाएं गिनाईं। उनके मुताबिक पनामा के स्पेशल इकोनॉमिक रिजीम के तहत वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन से लेकर असेंबली टेस्टिंग फिनिशिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। ऐसे में भारत और पनामा के बीच कारोबारी रिश्ते आने वाले समय में एक नए क्षेत्रीय विस्तार की नींव रख सकते हैं।

  • ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत

    ‘जो खेले वो खिले’… PM मोदी ने युवाओं में भरा जोश, कहा- हर जिले में दुनिया के नक्शे पर चमकने की ताकत


    नई दिल्ली। ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को खेलो इंडिया संवाद के दौरान देश के युवा खिलाड़ियों और एथलीटों से संवाद करते हुए भारत के खेल भविष्य को लेकर बड़ा विजन सामने रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं की शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है और भारत को खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से तैयार करना जरूरी है। पीएम मोदी ने 29 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस का जिक्र करते हुए महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को भी याद किया और कहा कि उनका जीवन देश की खेल परंपरा और प्रेरणा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने खेल को केवल पदक जीतने का माध्यम मानने के बजाय व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि जो खेले वो खिले। उनके मुताबिक मैदान पर खेलने से केवल खिलाड़ी की क्षमता नहीं बढ़ती बल्कि उसके परिवार का गौरव बढ़ता है और उसके स्कूल कॉलेज जिले तथा पूरे राज्य की पहचान मजबूत होती है।

    पीएम मोदी ने कहा कि देश को 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अभी से ऐसी प्रतिभाओं की तलाश करनी होगी जो आने वाले वर्षों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें। उन्होंने 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों के लिए बड़े टैलेंट हंट अभियान की बात कही। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बच्चों की खेल में रुचि जानना नहीं बल्कि यह पहचानना भी होगा कि कौन सा बच्चा किस खेल के लिए स्वाभाविक रूप से बेहतर है। इसके आधार पर उन्हें प्रशिक्षण देने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

    उन्होंने भारत की ओलंपिक भागीदारी को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। पीएम मोदी के अनुसार भारत कई ऐसे खेलों में हिस्सा ही नहीं लेता जिनमें दुनिया के दूसरे देश पदक जीत रहे हैं। ऐसे में देश को सर्फिंग स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग वॉटर स्पोर्ट्स और विंटर स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशनी होंगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इन खेलों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण देने की है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश में 21वीं सदी का आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए काम कर रही है। खेल विश्वविद्यालयों से लेकर प्रशिक्षण केंद्रों तक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है जिसमें प्रतिभा की पहचान से लेकर उसे शीर्ष स्तर तक पहुंचाने तक सहयोग मिले। उन्होंने खेलों को फिटनेस और बेहतर जीवनशैली से भी जोड़ा और कहा कि खेल युवाओं को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके मुताबिक खेल अब केवल शौक नहीं बल्कि करियर का भी मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

    पीएम मोदी ने पैरा एथलीटों की उपलब्धियों को भी प्रेरणा का बड़ा स्रोत बताया। उन्होंने शीतल देवी अवनी लेखरा सुमित अंतिल और नितेश कुमार जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जज्बे से देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि खेल हमें जीत के साथ हार के बाद दोबारा उठना भी सिखाता है और यही खेल भावना जीवन को मजबूत बनाती है। अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से स्क्रीन टाइम कम करने और मैदान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की अहमियत है। उनके मुताबिक खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही भारत की असली शक्ति है।

  • 5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा

    5 दशकों तक राष्ट्रसेवा में समर्पित रहे ए. बालकृष्णन का निधन, PM मोदी बोले पूर्वोत्तर के विकास में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा


    नई दिल्ली। विवेकानंद शिला स्मारक और विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष रहे ए. बालकृष्णन के निधन से देशभर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके लंबे योगदान को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि ए. बालकृष्णन ने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक समय स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने विवेकानंद केंद्र के शुरुआती जीवनव्रतियों में शामिल होकर देश के अलग अलग हिस्सों में लगातार काम किया और विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ए. बालकृष्णन के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष के रूप में सेवा देने वाले ए. बालकृष्णन के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में शिक्षा सामाजिक जागरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने विवेकानंद केंद्र परिवार उनके कार्यकर्ताओं और बालकृष्णन से जुड़े सभी प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

    ए. बालकृष्णन का जीवन स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज तक पहुंचाने और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। विवेकानंद केंद्र से जुड़े उनके कार्यकाल में शिक्षा सामाजिक गतिविधियों और संगठन निर्माण को विशेष महत्व दिया गया। पूर्वोत्तर भारत में उनकी भूमिका को खास तौर पर याद किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े प्रयासों में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि उनके निधन पर देश के अलग अलग हिस्सों से नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने श्रद्धांजलि दी।

    केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ए. बालकृष्णन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनकी निस्वार्थ सेवा और खासकर अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए काम को वहां के लोग और पूरा देश लंबे समय तक याद रखेगा। रिजिजू ने उन्हें सच्चा कर्मयोगी बताते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा भावना का प्रतीक था। उन्होंने उनके परिवार और करीबियों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी बालकृष्णन के निधन को अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन का ध्येय बनाकर बालकृष्णन ने पांच दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रकार्य समाज जागरण शिक्षा और संगठन निर्माण के लिए खुद को समर्पित रखा। उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में बालकृष्णन के योगदान को राष्ट्रसेवा की प्रेरक परंपरा बताया और उनके लिए श्रद्धांजलि अर्पित की।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी ए. बालकृष्णन को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें सच्चा कर्मयोगी और जीवनव्रती कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि बालकृष्णन ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया। कन्याकुमारी से लेकर असम और पूर्वोत्तर भारत तक विवेकानंद केंद्र के काम को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी। ए. बालकृष्णन का निधन समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में एक ऐसी कमी छोड़ गया है जिसे भरना आसान नहीं होगा। उनके जीवन और कार्यों को स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरित सेवा की लंबी यात्रा के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

  • अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख

    अरेस्ट वारंट का डर दिखाया, फर्जी जज ने सुनाया संपत्ति जब्ती का फरमान; 96 दिन में बुजुर्ग दंपती से ठगे 22 लाख


    भोपाल  भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ठगों ने करीब 96 दिनों तक दंपती को वीडियो कॉल के जरिए अपने नियंत्रण में रखा और उन्हें करोड़ों रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी। कभी खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया गया तो कभी चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर और सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर दंपती को डराया गया। आरोपियों ने गिरफ्तारी वारंट और संपत्ति सीज होने का भय दिखाकर उनसे 22 लाख रुपए ऐंठ लिए। रकम देने के बाद भी जब ठगों ने उन्हें डिजिटल निगरानी से मुक्त नहीं किया तो दंपती को शक हुआ और उन्होंने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस के अनुसार कृष्णा कॉम्प्लेक्स गणपति एन्क्लेव निवासी सुवर्णा लक्ष्मी और नरसिम्हा राव मूल रूप से आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले के रहने वाले हैं। परिवार के साथ फरवरी में शिवरात्रि मनाने के लिए वे आंध्र प्रदेश गए थे। इसी दौरान 19 मई को सुवर्णा के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी खन्ना बताया और दावा किया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्हें बताया गया कि दिल्ली केनरा बैंक से जुड़े एक खाते के जरिए नरेश गोयल के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है और उसमें उनका नाम सामने आया है।

    इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ शुरू कर दी। दंपती को निर्देश दिया गया कि वे किसी दूसरे व्यक्ति से संपर्क नहीं करेंगे और घर से बाहर भी नहीं निकलेंगे। 21 मई को एक महिला ने खुद को चीफ इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताते हुए बैंक खातों और दूसरी वित्तीय जानकारी मांगी। अगले दिन दंपती की वीडियो कॉल पर एक कथित जज से बात कराई गई। इस फर्जी जज ने उनके आधार कार्ड से जुड़ी जानकारी दिखाकर कार्रवाई का डर पैदा किया और उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे गंभीर कानूनी मामले में फंस चुके हैं।

    9 जून को कथित जज ने वीडियो कॉल पर दंपती को संपत्ति सीज करने की धमकी दी। इसके बाद निशा पटेल नाम की महिला ने उन्हें भोपाल लौटने के लिए कहा। ठगों ने मामले को खत्म करने के नाम पर एफडी और जेवर बेचने या गिरवी रखने का दबाव बनाया। डर के कारण दंपती 10 जून को आंध्र प्रदेश से भोपाल के लिए रवाना हुए और 11 जून को यहां पहुंचे। अगले ही दिन उन्होंने अपने जेवर गिरवी रखकर 22 लाख रुपए जुटाए।

    आरोपियों के निर्देश पर दंपती ने पांच अलग-अलग बार रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा की। ठगों ने संपर्क बनाए रखने के लिए सात अलग-अलग WhatsApp नंबरों का इस्तेमाल किया। इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी दंपती को राहत नहीं मिली। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया और किसी से बात नहीं करने का दबाव बनाया जाता रहा। यह सिलसिला 23 अगस्त तक चलता रहा। यानी 19 मई से 23 अगस्त तक करीब 96 दिनों तक बुजुर्ग दंपती साइबर ठगों के डर और दबाव में रहे।

    बाद में दंपती को पूरे मामले पर संदेह हुआ और उन्होंने जब संबंधित जानकारी की जांच कराई तो पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के नाम पर दिखाया गया आदेश भी फर्जी था। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल से संपर्क किया। 27 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज की गई और केस डायरी कोलार थाने भेजी गई। पुलिस अब सातों WhatsApp नंबरों पांच बैंक खातों में हुए ट्रांजैक्शन वीडियो कॉल और आरोपियों की पहचान से जुड़े डिजिटल सुरागों की जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर बताता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम पर डर पैदा कर पैसे मांगना साइबर ठगी का बड़ा तरीका बन चुका है। किसी भी जांच या गिरफ्तारी के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए पैसे मांगने वालों पर भरोसा करने के बजाय तत्काल संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना जरूरी है।