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  • कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कमजोर मानसून.. भारत के सामने दोहरी चुनौती.. आम आदमी पर महंगाई की मार!

    कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कमजोर मानसून.. भारत के सामने दोहरी चुनौती.. आम आदमी पर महंगाई की मार!


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की अर्थव्यवस्था (Economy) के सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियां खड़ी हैं। पहली अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल (Crude oil) की बढ़ती कीमतें (Rising Prices) और दूसरी मानसून के कमजोर रहने से पैदा हुआ सूखे का खतरा। ये दोनों समस्याएं अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन जब एक साथ सामने आती हैं, तो इनका असर देश की अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी की रसोई तक दिखाई दे सकता है। महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल को बढ़ाता है और परिवहन से लेकर खेती तक की लागत पर दबाव डालता है। वहीं, बारिश की कमी से फसलों की पैदावार प्रभावित होने, किसानों की आमदनी घटने और खाने-पीने की चीजों के महंगे होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि भारत के लिए चिंता की बात ज्यादा क्या है? महंगा कच्चा तेल, सूखा या फिर इन दोनों का एक साथ असर? आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ होता है कि असली चुनौती इन दोनों समस्याओं के एक साथ बढ़ने से पैदा हो रही है।


    महंगे तेल ने बढ़ाया भारत का आयात बिल

    भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात बिल बढ़कर 90.6 अरब डॉलर पहुंच गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह 61.9 अरब डॉलर था। खास बात यह है कि इस दौरान कच्चे तेल के आयात की मात्रा में एक प्रतिशत से भी कम की बढ़ोतरी हुई।

    इसका मतलब है कि आयात बिल में तेज उछाल के पीछे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी भूमिका रही। आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में अब तक भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि जुलाई में यह लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल थी। इससे भारत को पहले के मुकाबले तेल खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है। इसका असर देश के व्यापार संतुलन और रुपये की विनिमय दर पर भी पड़ सकता है।


    महंगे कच्चे तेल का आम आदमी पर क्या असर होगा?

    – कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में दिखाई देता है।
    – परिवहन महंगा होने का खतरा:- ट्रक, बस और दूसरे मालवाहक वाहनों के ऑपरेशन की लागत बढ़ सकती है।
    – खाने-पीने की चीजों पर दबाव:- खेतों से मंडियों और मंडियों से दुकानों तक सामान पहुंचाने का खर्च बढ़ सकता है।
    – खेती की लागत में बढ़ोतरी:- डीजल से चलने वाले पंप, ट्रैक्टर और दूसरे कृषि उपकरणों का इस्तेमाल महंगा पड़ सकता है।
    – कंपनियों की लागत बढ़ेगी:- फैक्ट्रियों और अन्य उद्योगों को उत्पादन और माल की ढुलाई पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम तुरंत उसी अनुपात में बढ़ जाएंगे। सरकार के टैक्स, रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। अगर पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहते हैं, तब भी महंगे तेल का आर्थिक बोझ कहीं और पड़ सकता है। कंपनियां अपने मुनाफे में कटौती कर सकती हैं या धीरे-धीरे बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूल सकती हैं।


    कमजोर मानसून से खेती पर मंडराया संकट

    एक तरफ महंगा तेल भारत के खर्च को बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ कमजोर मानसून कृषि क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ा सकता है। भारत में खेती का बड़ा हिस्सा अब भी बारिश पर निर्भर है। समय पर और पर्याप्त बारिश नहीं होने से मिट्टी में नमी कम हो सकती है, जलाशयों में पानी घट सकता है और फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, जून से सितंबर 2026 के मानसून सीजन में देश में सामान्य से 12.6 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। कम बारिश का असर केवल खरीफ फसल तक सीमित नहीं रहता। अगर जलाशयों और जमीन के नीचे मौजूद पानी का स्तर गिरता है, तो किसानों के लिए अगली रबी फसल की बुवाई और सिंचाई करना भी मुश्किल हो सकता है। गेहूं, सरसों, चना और दूसरी रबी फसलों की बुवाई के समय पर्याप्त नमी और सिंचाई का पानी उपलब्ध होना जरूरी है। पानी की कमी होने पर किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है या उन्हें कम क्षेत्र में खेती करनी पड़ सकती है।


    जलाशयों में पानी की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही

    केंद्रीय जल आयोग (CWC) के 22 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, देश के 178 निगरानी वाले प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण उनकी कुल क्षमता का 66.7 प्रतिशत था। लेकिन, दक्षिण भारत के 50 निगरानी वाले जलाशयों की स्थिति अधिक चिंताजनक रही। इनमें जल भंडारण 42.34 प्रतिशत था, जबकि पिछले 10 सालों का इसी अवधि का औसत 77.94 प्रतिशत रहा है। यह अंतर बताता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पानी की उपलब्धता एक जैसी नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर जलाशयों में पर्याप्त पानी दिखाई देने के बावजूद कुछ क्षेत्रों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। जलाशयों के ये आंकड़े देश के सभी कुओं, नदियों और सिंचाई स्रोतों की स्थिति नहीं बताते। फिर भी जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है और जलाशयों में पानी घटा है, वहां खेती पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।


    महंगा तेल और सूखा एक साथ आए तो क्या होगा?

    भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता इन दोनों समस्याओं का एक साथ सामने आना है। अगर फसल की पैदावार घटती है और उसी समय डीजल महंगा होता है, तो किसानों की लागत बढ़ सकती है और बाजार तक कृषि उत्पाद पहुंचाने का खर्च भी अधिक हो सकता है। इसका असर कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है।

    पहला असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा। कम बारिश के कारण अगर फसल खराब होती है, तो किसानों के पास बेचने के लिए कम उपज होगी। ऐसे में बाजार में कुछ फसलों की कीमत बढ़ने के बावजूद किसानों की कुल कमाई घट सकती है।

    वहीं, दूसरा असर आम परिवारों के बजट पर होगा। अगर सब्जियों, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ती हैं, तो परिवारों को रोजमर्रा के खर्च के लिए अधिक पैसा खर्च करना पड़ेगा। इसके साथ ही परिवहन और दूसरी सेवाओं की लागत बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    तीसरा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर हो सकता है। खेती से आमदनी कम होने पर ग्रामीण परिवार कपड़े, वाहन, घरेलू उपकरण और अन्य सामानों पर खर्च घटा सकते हैं। इससे उन कारोबारों पर भी असर पड़ सकता है, जो ग्रामीण मांग पर निर्भर हैं। हालांकि, महंगाई पर इन दोनों कारकों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल की कीमतें कितने समय तक ऊंची रहती हैं, फसल उत्पादन कितना प्रभावित होता है और सरकार आपूर्ति को बेहतर बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है।


    महंगाई के आंकड़े क्या बता रहे हैं?

    महंगे तेल और कमजोर मानसून की चिंता ऐसे समय बढ़ रही है, जब खुदरा महंगाई में भी तेजी दर्ज की गई है। दिए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई दर भी अगस्त के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत पहुंच गई। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी का मतलब है कि आम लोगों को खाने-पीने की वस्तुओं के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि, यह मानना सही नहीं होगा कि खाद्य महंगाई में हुई पूरी बढ़ोतरी सिर्फ कमजोर मानसून के कारण है। मौसमी बदलाव, बाजार में आपूर्ति और पिछले साल की कीमतें भी इसमें भूमिका निभाती हैं। फिर भी अगर बारिश की कमी के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होता है और महंगे ईंधन से परिवहन लागत बढ़ती है, तो खाद्य महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


    RBI के सामने क्यों बढ़ेगी चुनौती?

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने की होगी। जब तेल महंगा होता है, तो कंपनियों की लागत बढ़ती है। वहीं, खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने पर आम लोगों की खरीदने की क्षमता प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों से जुड़े फैसले लेना आसान नहीं रहता। RBI ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था। उसकी मौद्रिक नीति में कमजोर बारिश, अल नीनो और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को महंगाई के लिए जोखिम के रूप में रेखांकित किया गया था।

    रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक धन उपलब्ध कराता है। इसमें बदलाव का असर समय के साथ होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। लेकिन यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। ब्याज दर बढ़ाने से बारिश नहीं बढ़ सकती और न ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सीधे कम हो सकती है। इसका उद्देश्य महंगाई के व्यापक और लंबे समय तक बने रहने वाले प्रभाव को सीमित करना है। दूसरी तरफ ब्याज दरें अधिक रहने से कर्ज लेना महंगा हो सकता है। इससे घर खरीदने, वाहन खरीदने और कारोबार में निवेश करने की गति प्रभावित हो सकती है। यानी RBI को महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाना होगा।

  • Spain में भीषण रेल हादसा…. दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत में 64 लोगों की मौत…. 80 घायल

    Spain में भीषण रेल हादसा…. दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत में 64 लोगों की मौत…. 80 घायल


    मेड्रिड।
    स्पेन (Spain) के तोलेदो प्रांत (Toledo Province) में बुधवार को दो ट्रेन के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम 64 लोगों की मौत हो गयी। इस घटना में कम से कम 80 लोग घायल हुए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं। कैस्टिला ला मांचा (Castilla-La Mancha) क्षेत्र की प्रवक्ता एस्थर पाडिला ने सरकारी प्रसारक बताया कि एक ही दिशा में जा रही दो तेज रफ्तार ट्रेन हादसे का शिकार हुईं, एक ट्रेन दूसरी ट्रेन के पिछले हिस्से से टकरा गई, जिससे उसके दो डिब्बे पटरी से उतर गये। उन्होंने कहा कि हादसे के कारण का पता लगाया जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि राजधानी मैड्रिड (Capital Madrid) से दक्षिणी-पश्चिमी शहर सेविले जा रही दोनों ट्रेन में सैकड़ों यात्री सवार थे।

    स्पेन के रेल प्रणाली संचालक ‘एडीआईएफ’ ने बताया कि बुधवार की सुबह तोलेदो प्रांत में यह हादसा हुआ जिसके बाद मैड्रिड, स्यूदाद रियल और अंदालूसिया के बीच रेल सेवा रोक दी गई। स्पेन की स्वास्थ्य मंत्री मोनिका गार्सिया ने बताया कि आपातकालीन कर्मी सबसे अधिक क्षतिग्रस्त दो रेल डिब्बों से जीवित बचे लोगों और शवों को निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घायलों को क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में भेजा जा रहा है।

    इस दुर्घटना में स्पेन की सरकारी कंपनी ‘रेनफे’ और निजी रेल कंपनी ‘इर्यो’ की ट्रेनें शामिल थीं। स्पेन की मीडिया की खबरों के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि ‘रेनफे’ की ट्रेन ने ‘इर्यो’ की ट्रेन को टक्कर मारी। पाडिला ने बताया कि ‘रेनफे’ की ट्रेन में 397 यात्री और ‘इर्यो’ की ट्रेन में 147 यात्री सवार थे। आपातकालीन सेवाओं, दमकलकर्मियों और पुलिस की मदद के लिए सेना की आपातकालीन ब्रिगेड को तैनात किया गया। एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर सेवा घटनास्थल से घायलों को ले जाने में जुटे रहे, जबकि सुरक्षित बचे यात्रियों को बसों में बैठाकर वहां से ले जाया गया।

    उर्दा के मेयर मैनुअल गैलन ने बताया कि कई यात्री घायल हुए हैं। सिविल प्रोटेक्शन अधिकारियों ने उनके टाउन हॉल से संपर्क कर यात्रियों के इलाज के लिए एक स्पोर्ट्स पवेलियन तैयार करने को कहा है। स्थानीय प्रशासन घायलों को प्राथमिक उपचार देने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल भेजने की तैयारी में जुटा है। वहीं, पास के एक और गांव लॉस येबेनेस के मेयर जेसुस पेरेज ने भी TVE से बात करते हुए कहा कि हादसा बहुत ही गंभीर है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य जारी है।

    यह हादसा स्पेन के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में दक्षिणी स्पेन में एक बड़ा हादसा हुआ था। उस समय एक ट्रेन पटरी से उतरी और सामने से आ रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई, जिसमें 46 लोगों की मौत हो गई थी। वह हादसा 2013 के हादसे के बाद स्पेन में सबसे जानलेवा था। 2013 में एक ट्रेन हादसे में 80 लोगों की जान गई थी।

  • आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब का तांडव… 5 की मौत, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद, CM ने किया राहत का ऐलान

    आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब का तांडव… 5 की मौत, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद, CM ने किया राहत का ऐलान


    विशाखापत्तनम।
    आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार तड़के राज्य के तटीय इलाकों से गुजरे इस भीषण चक्रवाती तूफान (Cyclonic storm) के कारण पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि फसलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (Chief Minister N. Chandrababu Naidu) ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए भी आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

    मुख्यमंत्री नायडू ने बुधवार शाम राज्य सचिवालय स्थित रियल टाइम गवर्नेंस सिस्टम (आरटीजीएस) केंद्र में हालात की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया कि तूफान के कारण कई जिलों में जान-माल का नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, राज्य में करीब 15 हजार बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। वहीं, हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं या उन्हें नुकसान पहुंचा है।

    अब ये तूफान ओडिशा में दस्तक दे चुका है। हालांकि पहले से इसकी तीव्रता कम हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चेतावनी दी कि आंध्र प्रदेश में तबाही मचाने के बाद, जैसे-जैसे चक्रवात ओडिशा की ओर बढ़ेगा, मलकानगिरि और अधिक प्रभावित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा, ”सरकार गंजाम, गजपति, रायगडा, कोरापुट, मलकानगिरि और नबरंगपुर जिलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।”


    कहां कितने लोगों की मौत हुई?

    मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के मुताबिक, चक्रवात के कारण पांच लोगों की जान गई है। इनमें से तीन की मौत विशाखापत्तनम जिले में बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से हुई। इसके अलावा अनाकापल्ली और भीमावरम में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। नायडू ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।


    3.45 लाख किसानों पर असर, 2.24 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित

    चक्रवात और इसके साथ हुई बारिश ने कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, शुरुआती अनुमान में करीब 3.45 लाख किसानों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। राज्य के 14 जिलों में 2,24,489 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें जलमग्न हुई हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर फसलों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कृषि और बागवानी फसलों को लगभग 70,900 हेक्टेयर क्षेत्र में नुकसान पहुंचने का अनुमान है। इनमें धान की फसल भी शामिल है। करीब 10,450 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के जलमग्न होने या क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है।


    प्रभावित किसानों को कितना मुआवजा मिलेगा?

    – राज्य सरकार ने चक्रवात से प्रभावित किसानों के लिए फसल के प्रकार और नुकसान की सीमा के आधार पर आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
    – कपास और गन्ने की फसल के लिए 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।
    – केले की खेती को नुकसान होने पर 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे।
    – टमाटर की फसल के लिए 25,000 रुपये की सहायता घोषित की गई है।
    – अन्य फसलों के किसानों को सरकार की राहत व्यवस्था के तहत संबंधित श्रेणियों के अनुसार आर्थिक मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नुकसान के ये आंकड़े शुरुआती आकलन पर आधारित हैं। फील्ड सर्वे पूरा होने के बाद इनमें बदलाव हो सकता है। सत्यापन के बाद राज्य सरकार केंद्र को नुकसान का विस्तृत ब्योरा सौंपेगी।


    180 मकान क्षतिग्रस्त, सड़कों पर गिरे 220 से ज्यादा पेड़

    चक्रवात ने बिजली व्यवस्था के साथ-साथ मकानों और सड़कों को भी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब 180 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इनमें ज्यादातर मकान कोनसीमा जिले में हैं। राज्य की सड़कों पर 220 से अधिक पेड़ गिर गए थे। इनमें से बुधवार दोपहर तक 170 से ज्यादा पेड़ों को हटाया जा चुका था। तटीय इलाकों में सड़क संबंधी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि गोदावरी डेल्टा के तटीय इलाकों में तूफान का असर खास तौर पर देखने को मिला। इनमें कोनसीमा, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, कृष्णा और अनाकापल्ली जिले शामिल हैं। विशाखापत्तनम के चार वार्डों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। पेड़ गिरने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए दमकल और आपातकालीन सेवा कर्मियों को 220 से अधिक कॉल मिलीं।


    28 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    चक्रवात के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, एहतियाती कदम के तौर पर 28 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया। मछली पकड़ने वाली सभी नौकाओं को भी वापस बंदरगाह पर बुला लिया गया।

    प्रशासन ने प्रभावित जिलों में चिकित्सा दल, एंबुलेंस, राहत सामग्री, बिजली आपूर्ति बहाल करने वाली टीमें और सड़क से मलबा हटाने वाले कर्मियों को तैनात किया है। जिला कलेक्टरों को मौके पर राहत कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार ने 14 जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 16 और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की 11 टीमों को तैनात किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से लगातार सहयोग देने की अपील की। उन्होंने नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम जल्द भेजने का भी आग्रह किया।

    नायडू ने कहा कि प्रशासन का ध्यान उन परिवारों की मदद पर रहेगा, जिन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है या जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों से खतरा पूरी तरह टलने तक राहत एवं बचाव दल तैनात रहेंगे।

    125 से 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, चक्रवात अर्नब बुधवार सुबह दो बजे से आठ बजे के बीच आंध्र प्रदेश-यानम तट से गुजरा। उस समय यह अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान था और इसकी अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे थी। सुबह करीब 8:30 बजे यह कमजोर होकर भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया। इसके बाद हवा की रफ्तार घटकर 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे रह गई।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो दिनों में तूफान के उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना थी। इसके धीरे-धीरे कमजोर होकर चक्रवाती तूफान और फिर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदलने का अनुमान जताया गया। इसके दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों से गुजरने के बाद उत्तर-पश्चिम दिशा में छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की संभावना थी।


    ओडिशा में भी अलर्ट, 30 हजार से ज्यादा लोगों को निकाला गया

    चक्रवात से प्रभावित ओडिशा में भी प्रशासन ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए। बारिश के कारण राज्य में 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि निचले इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों से लोगों को निकालने का अभियान जारी था। उन्होंने कहा कि चक्रवात का असर बढ़ने के कारण अगले 24 घंटे बेहद अहम रहने की आशंका थी।

    संवेदनशील इलाकों में कुल 313 राहत एवं बचाव दल तैनात किए गए। इनमें ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) की 60, एनडीआरएफ की नौ और दमकल एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें शामिल थीं। राज्य की सभी 19,143 मछली पकड़ने वाली नौकाएं तट पर लौट आई थीं। भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर कुछ सड़कों पर आवाजाही भी रोकी गई।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी। उन्होंने बताया कि 10 स्थानों पर पेड़ गिरने जैसी छोटी बाधाओं को समय रहते दूर कर लिया गया। भुवनेश्वर हवाई अड्डे के निदेशक प्रसन्ना प्रधान के मुताबिक, उड़ानों का परिचालन ज्यादातर सामान्य था, हालांकि एक उड़ान रद्द हुई। प्रभावित विशाखापत्तनम हवाई क्षेत्र से बचने के लिए चेन्नई और हैदराबाद से भुवनेश्वर आने वाली उड़ानों को रायपुर के ऊपर से वैकल्पिक मार्ग दिया गया।

    ओडिशा के नबरंगपुर, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरि, गजपति और गंजाम जिलों में अत्यंत भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया था। इन इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई। हालांकि, राज्य के विशेष राहत आयुक्त राजेश पी. पाटिल ने बताया कि दक्षिणी जिलों के कुछ हिस्सों में पेड़ गिरने की घटनाएं हुईं, लेकिन बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं थी।

  • टीम इंडिया के सामने अजीब उलझन….. जगह तीन और दावेदार चार….

    टीम इंडिया के सामने अजीब उलझन….. जगह तीन और दावेदार चार….


    नई दिल्ली।
    टीम इंडिया (Team India) के सामने अजीब उलझन है. जो बल्लेबाज (Batsman) रन बना रहे हैं, उन्हें बाहर बैठाना आसान नहीं और ईशान किशन (Ishan Kishan) की वापसी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में सवाल सिर्फ प्लेइंग-11 का नहीं, बल्लेबाजी क्रम और रोटेशन पॉलिसी का भी है।

    टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में ऐसा तूफान मचाया कि विरोधी गेंदबाजों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) ने 38 गेंदों में 113 रन ठोक दिए, वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने ओपनिंग में उतरकर अपने तेवर दिखाए और भारत ने 199 रनों का लक्ष्य महज 13.2 ओवरों में हासिल कर लिया. इस धमाकेदार जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त भी बना लीय़

    लेकिन इस जीत के बीच टीम इंडिया के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसका जवाब ढूंढना आसान नहीं होगा. अभिषेक शर्मा का बल्ला आग उगल रहा है, वैभव सूर्यवंशी ने ओपनिंग में अपना दावा मजबूत किया है और संजू सैमसन (Sanju Samson) भी पहले से रन बनाकर आ रहे हैं. अब ईशान किशन फिट होकर टीम में वापसी करते हैं तो आखिर किसका पत्ता कटेगा?


    शतक जड़ने वाले को बाहर बैठाएंगे या तूफानी ओपनर को?

    ईशान किशन की वापसी का इंतजार खत्म होते ही भारतीय टीम के सामने चयन की पहेली खड़ी हो सकती है. एक तरफ अभिषेक हैं, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख पलटने की ताकत रखते हैं. दूसरी तरफ वैभव हैं, जिन्हें ओपनिंग में उतारने का फैसला तीसरे टी20 में देखने को मिला. वहीं संजू सैमसन भी इस समीकरण के अहम खिलाड़ी हैं.

    अभिषेक को बाहर बैठाने का फैसला उनके हालिया प्रदर्शन के सामने मुश्किल होगा. वैभव को हटाने का मतलब होगा एक ऐसे युवा बल्लेबाज को उसकी पसंदीदा पोजिशन पर लगातार मौके देने की योजना पर सवाल उठना. संजू को बाहर करना भी आसान विकल्प नहीं है, खासकर तब जब वह अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए रन बना रहे हों.

    और ईशान को वापस लाने का सवाल भी उतना ही अहम है. जब कोई खिलाड़ी फिट होकर उपलब्ध होता है, तो टीम मैनेजमेंट को उसके चयन और बाकी खिलाड़ियों की भूमिकाओं पर फैसला करना ही पड़ता है. ऐसे में असली चुनौती सिर्फ किसी एक नाम को चुनना नहीं, बल्कि ऐसा संयोजन तैयार करना है जिसमें खिलाड़ियों की खूबियों का सही इस्तेमाल हो सके.


    वैभव ओपनिंग करेंगे तो संजू का क्या होगा?

    तीसरे टी20 में ईशान की गैरमौजूदगी के बीच वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग का मौका मिला. इससे बल्लेबाजी क्रम को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई. वैभव की सबसे बड़ी ताकत पारी की शुरुआत में गेंदबाजों पर हमला करना है. उन्हें तीसरे नंबर पर उतारने के प्रयोग पर पहले भी सवाल उठे हैं.

    लेकिन वैभव को ओपनिंग में खिलाने का मतलब यह भी है कि टीम को बाकी बल्लेबाजों के क्रम पर विचार करना होगा. न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में संजू सैमसन तीसरे नंबर पर उतरे. अब अगर वैभव को ओपनिंग में बनाए रखने की योजना है, तो संजू को अपनी भूमिका के हिसाब से ढलना पड़ सकता है.

    यहीं से सवाल और पेचीदा हो जाता है. क्या संजू को वैभव के लिए अपनी पसंदीदा पोजिशन छोड़नी होगी? क्या अभिषेक और वैभव की जोड़ी को बनाए रखने के लिए टीम मैनेजमेंट बाकी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करेगा? और ईशान की वापसी के बाद क्या संजू के लिए प्लेइंग-11 में जगह बनाना और मुश्किल हो जाएगा?

    इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल भारतीय टीम की रोटेशन पॉलिसी को लेकर है. अगस्त से दिसंबर के बीच भारत के कार्यक्रम में अफगानिस्तान के खिलाफ 3, वेस्टइंडीज के खिलाफ 5, न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 और श्रीलंका के खिलाफ 3 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले शामिल हैं. यानी कुल 16 मैचों के इस कार्यक्रम में खिलाड़ियों को अलग-अलग संयोजनों में आजमाने का अवसर था।

    ऐसे में एक विकल्प यह हो सकता था कि टीम मैनेजमेंट पहले से तय करता कि किस खिलाड़ी को कितने मैचों में मौका देना है, किसे आराम दिया जाएगा और किसकी भूमिका क्या होगी. अगर खिलाड़ियों को पहले ही स्पष्ट कर दिया जाता कि उन्हें चार या पांच मैचों के बाद आराम मिल सकता है, तो किसी खिलाड़ी को बाहर बैठाने का फैसला केवल उसके प्रदर्शन से जोड़कर नहीं देखा जाता।

  • अमेजन ने इस माह दूसरी बार किया छंटनी का ऐलान…. 250 लोगों को दिखाया बाहर का रास्ता!

    अमेजन ने इस माह दूसरी बार किया छंटनी का ऐलान…. 250 लोगों को दिखाया बाहर का रास्ता!


    सैन फ्रांसिस्को ।
    अमेजन (Amazon) ने इस महीने दूसरी बार छंटनी (Layoffs) का एलान किया है। कंपनी अपने डिवाइस और सर्विसेज यूनिट में 250 तक कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर रही है। इससे पहले इसी महीने कंपनी के मुख्य रिटेल कारोबार (Core Retail Business) में करीब 1,000 पदों पर कटौती की गई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम कंपनी की ओर से किंडल ई-रीडर और टैबलेट जैसे नए उत्पाद पेश किए जाने के कुछ सप्ताह बाद उठाया गया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस छंटनी से मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीमों के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने कहा है कि यह फैसला कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने और उत्पादों की योजनाओं के अनुरूप संगठन को तैयार करने के लिए लिया गया है।


    सुबह ईमेल और टेक्स्ट मैसेज से दी गई जानकारी

    कर्मचारियों को बुधवार सुबह ईमेल और टेक्स्ट मैसेज के जरिए इसकी जानकारी दी गई। डिवाइस और सर्विसेज यूनिट में मानव संसाधन की उपाध्यक्ष चेरी रॉबिन्सन की ओर से भेजे गए ईमेल में कहा गया कि कंपनी ने अपने संगठनात्मक ढांचे की विस्तृत समीक्षा की, जिसके बाद कुछ पदों को खत्म करने का फैसला लिया गया।


    कंपनी ने क्या कहा?

    रॉयटर्स की पूछताछ के बाद अमेजन के प्रवक्ता ने छंटनी की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हमने कम संख्या में पद खत्म करने का कठिन फैसला लिया है।” कंपनी के मुताबिक, इस कदम से कामकाज को अधिक कुशल बनाने और उत्पाद योजनाओं के साथ बेहतर तालमेल बैठाने में मदद मिलेगी। इस साल जनवरी में भी अमेजन ने करीब 16,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की थी। इससे पहले अक्तूबर 2025 में कंपनी ने लगभग 14,000 कर्मचारियों की नौकरियां खत्म की थीं।

    जनवरी में कंपनी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेथ गैलेट्टी ने कर्मचारियों को बताया था कि छंटनी का उद्देश्य प्रबंधन के स्तर कम करना, जिम्मेदारी बढ़ाना और नौकरशाही को घटाना है। उन्होंने कहा था कि कंपनी की योजना हर कुछ महीनों में बड़े पैमाने पर छंटनी करने की नई परंपरा शुरू करने की नहीं है। हालांकि, हर टीम अपने कामकाज, गति और ग्राहकों के लिए नए उत्पाद विकसित करने की क्षमता की समीक्षा करती रहेगी।


    उत्पाद योजनाओं के अनुरूप बदलाव का दावा

    कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि छंटनी का उद्देश्य अमेजन को अधिक कुशलता से काम करने में मदद करना और उसके उत्पादों की योजनाओं के अनुरूप संगठन को तैयार करना है। बुधवार को कंपनी ने एलेक्सा से लैस नई अलार्म घड़ी और फोटो फ्रेम की भी घोषणा की। कंपनी की परंपरा के अनुसार, बुधवार सुबह कर्मचारियों को टेक्स्ट मैसेज और ईमेल के जरिए छंटनी की जानकारी दी गई।

    रॉयटर्स के अनुसार, डिवाइस और सर्विसेज यूनिट में मानव संसाधन की उपाध्यक्ष चेरी रॉबिन्सन ने एक संदेश में कहा कि कंपनी ने अपने संगठनात्मक ढांचे की विस्तृत समीक्षा की थी। इसके बाद कुछ पदों को खत्म करने की जरूरत सामने आई।


    गुरुवार को तीसरी तिमाही के नतीजे

    अमेजन गुरुवार को शेयर बाजार बंद होने के बाद तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करने वाली है। इस साल जनवरी में कंपनी ने करीब 16,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी लगभग 14,000 कर्मचारियों की नौकरियां खत्म की गई थीं।

    रिपोर्टों में पहले की छंटनी के संभावित कारणों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई में कंपनी के बड़े निवेश का भी उल्लेख किया गया था। बताया गया है कि अमेजन डेटा सेंटर और बुनियादी ढांचे पर 125 अरब डॉलर निवेश कर रही है। कंपनी इस क्षेत्र में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट से प्रतिस्पर्धा कर रही है।


    माइक्रोसॉफ्ट और ड्रॉपबॉक्स में भी कटौती

    तकनीकी क्षेत्र में इस सप्ताह कर्मचारियों की संख्या घटाने वाली अमेजन अकेली कंपनी नहीं है। मंगलवार को माइक्रोसॉफ्ट ने अपने करीब 60,000 कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने का विकल्प देने की घोषणा की। कंपनी बदलती कारोबारी प्राथमिकताओं और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश के बीच अपने कार्यबल में बदलाव कर रही है।

    वहीं, बुधवार को फाइल साझा करने वाली कंपनी ड्रॉपबॉक्स ने वैश्विक स्तर पर अपने 9 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी की योजना बताई। कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य संसाधनों को उन क्षेत्रों पर केंद्रित करना है, जहां ग्राहकों को अधिक लाभ पहुंचाने और कारोबार बढ़ाने की संभावना सबसे ज्यादा है।

    2026 में टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी
    तकनीकी उद्योग में छंटनी के आंकड़े जुटाने वाली संस्था ट्रूअप के अनुसार, 2026 में अब तक 670 टेक कंपनियों ने छंटनी की घोषणा की है। इससे 1,97,123 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। यानी औसतन हर दिन 655 लोगों की नौकरी गई है। वर्ष 2025 में 783 टेक कंपनियों ने 2,45,953 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की थी। उस साल औसतन हर दिन 674 लोगों की नौकरी प्रभावित हुई थी।

  • चीन के 26 वर्षीय युवक ने बनाया उड़ने वाला स्केटबोर्ड, 10 इलेक्ट्रिक मोटरों की मदद से यांग्त्जी नदी के ऊपर भरी उड़ान

    चीन के 26 वर्षीय युवक ने बनाया उड़ने वाला स्केटबोर्ड, 10 इलेक्ट्रिक मोटरों की मदद से यांग्त्जी नदी के ऊपर भरी उड़ान


    नई दिल्ली ।चीन के 26 वर्षीय युवक सोंग शिंग्यू ने अपनी तकनीकी रचनात्मकता और लगातार प्रयोगों के दम पर उड़ने वाला स्केटबोर्ड तैयार किया है। इस बोर्ड की मदद से उन्होंने पहाड़ों के ऊपर उड़ान भरी और यांग्त्जी नदी को पार किया। उनके इस कारनामे का वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच इसकी काफी चर्चा होने लगी। सोंग ने यह उपकरण अपने हाथों से तैयार किया है। उनके इस आविष्कार की खास बात यह है कि इसमें 10 इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई हैं, जिनकी सहायता से बोर्ड हवा में उड़ान भरता है।

    हुबेई प्रांत के रहने वाले सोंग शिंग्यू सोशल मीडिया पर अमेजिंग आयू के नाम से पहचाने जाते हैं। उन्हें बचपन से ही नई चीजें बनाने और तकनीकी प्रयोग करने में दिलचस्पी रही है। वह अपने बनाए उपकरणों और उनसे जुड़े प्रयोगों के वीडियो साझा करते रहते हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर 30 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उड़ने वाला बोर्ड बनाने का विचार उन्हें स्पाइडर-मैन फिल्म में दिखाई देने वाले ग्रीन गोब्लिन के उड़ने वाले उपकरण से मिला था। इसी कल्पना को वास्तविक रूप देने के लिए उन्होंने काम शुरू किया।

    सोंग ने इस परियोजना पर करीब दो महीने तक मेहनत की। हालांकि, उनका पहला प्रयास सफल नहीं रहा। शुरुआती डिजाइन में उन्होंने पांच जेट इंजन का इस्तेमाल किया था। जब उन्होंने सभी इंजनों को एक साथ चलाकर परीक्षण किया, तो उसमें आग लगने जैसी समस्या सामने आई। इंजनों से निकलने वाली गर्म हवा जमीन से टकराकर वापस इंजन की ओर लौट रही थी। इससे उपकरण के संचालन में परेशानी पैदा हो रही थी। इस समस्या के बाद उन्होंने पुराने डिजाइन को छोड़कर बिजली से चलने वाले बोर्ड पर काम करना शुरू किया।

    नए डिजाइन में उन्होंने 10 शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर लगाईं। लगातार परीक्षण और सुधार के बाद बोर्ड उड़ान भरने के लिए तैयार हुआ। अक्टूबर 2026 में सोंग ने इससे जुड़ा वीडियो साझा किया, जिसमें वह पहाड़ों के बीच और यांग्त्जी नदी के ऊपर उड़ते दिखाई दिए। हालांकि, इस उपकरण को तैयार करने के साथ हवा में इसका संतुलन बनाए रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती थी। उड़ान के दौरान शरीर का थोड़ा-सा झुकाव भी बोर्ड का संतुलन बिगाड़ सकता था।

    इस समस्या से निपटने के लिए सोंग ने दो स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद ली। फोन बोर्ड के झुकाव और उनकी स्थिति पर नजर रखने में सहायता करते हैं। इसके बाद एआई उन्हें ईयरफोन के माध्यम से निर्देश देता है कि संतुलन बनाए रखने के लिए शरीर किस दिशा में झुकाना है और घुटनों की स्थिति कैसी रखनी है। इस तकनीक की मदद से उन्होंने उड़ान के दौरान अपने शरीर और बोर्ड के बीच संतुलन साधने का तरीका विकसित किया।

    सोंग को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने पहले जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर उड़ने का अभ्यास किया और फिर धीरे-धीरे अपने प्रयोगों का दायरा बढ़ाया। अक्टूबर में हुबेई प्रांत में उन्होंने अपने बोर्ड से उड़ान भरी। वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इसकी वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए इसे एआई से बनाया गया बताया। इसके बाद सोंग ने पत्रकारों के सामने भी उड़ान का प्रदर्शन किया, ताकि लोग उनके आविष्कार को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें।

    सोंग का मानना है कि नई चीजें बनाने के लिए केवल महंगे उपकरण ही जरूरी नहीं होते। सीखने की इच्छा, तकनीकी समझ और लगातार प्रयास से भी नए प्रयोग किए जा सकते हैं। हालांकि, इस तरह के उड़ने वाले उपकरणों का इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए पर्याप्त तकनीकी जानकारी, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक अनुमति के बिना ऐसे उपकरणों को बनाना या उड़ाना खतरनाक साबित हो सकता है।

  • भारत से लगातार तीन हार के बाद न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, चोट के कारण टी20 सीरीज से बाहर हुए लॉकी फर्ग्यूसन

    भारत से लगातार तीन हार के बाद न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, चोट के कारण टी20 सीरीज से बाहर हुए लॉकी फर्ग्यूसन

    नई दिल्ली ।भारत के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में लगातार तीन मुकाबले गंवाने के बाद न्यूजीलैंड की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। टीम के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन चोट के कारण सीरीज के बाकी मुकाबलों में नहीं खेल पाएंगे। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने 29 अक्टूबर को इसकी पुष्टि की। फर्ग्यूसन को दूसरे टी20 मुकाबले के दौरान दाएं पैर की पिंडली में दर्द हुआ था। जांच के बाद उनकी मांसपेशियों में मामूली खिंचाव का पता चला है।

    फर्ग्यूसन की चोट ऐसे समय में सामने आई है, जब न्यूजीलैंड की टीम सीरीज में वापसी की कोशिश कर रही है। भारत शुरुआती तीनों मुकाबले जीतकर सीरीज अपने नाम कर चुका है। ऐसे में मेजबान टीम के सामने अगले मैचों में अपना प्रदर्शन सुधारने की चुनौती है। दूसरी ओर, भारतीय टीम की नजर जीत का सिलसिला जारी रखने और सीरीज में क्लीन स्वीप की दिशा में आगे बढ़ने पर होगी।

    फर्ग्यूसन को पूरी तरह ठीक होने में करीब एक सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। ऐसे में उनका मुख्य लक्ष्य आगामी वनडे सीरीज से पहले फिटनेस हासिल करना है। उनकी अनुपस्थिति को देखते हुए न्यूजीलैंड ने तेज गेंदबाज मैट फिशर को टीम में शामिल किया है। फिशर अब सीरीज के बाकी दो टी20 मुकाबलों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच चौथा टी20 मुकाबला शुक्रवार, 30 अक्टूबर को ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेला जाएगा। लगातार तीन हार के बाद न्यूजीलैंड के लिए यह मैच अपनी रणनीति और प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर होगा। वहीं, भारतीय टीम जीत की लय बरकरार रखते हुए सीरीज के अंतिम चरण में भी अपना दबदबा कायम रखना चाहेगी।

    न्यूजीलैंड को तेज गेंदबाज मैट हेनरी की चोट को लेकर भी सतर्क रहना होगा। दूसरे टी20 मुकाबले के दौरान हेनरी की दाएं पैर की जांघ की मांसपेशी में चोट लगी थी। उनके ठीक होने में एक से दो सप्ताह लगने का अनुमान है। हालांकि, पहले से निर्धारित कार्यभार प्रबंधन योजना के तहत वह टी20 सीरीज के बाकी मुकाबलों में खेलने वाले नहीं थे। टीम को उम्मीद है कि हेनरी वनडे सीरीज तक फिट होकर उपलब्ध हो सकते हैं।

    मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने दोनों तेज गेंदबाजों के चोटिल होने पर निराशा जताई। उन्होंने बताया कि फर्ग्यूसन ईडन पार्क में घरेलू दर्शकों के सामने खेलने को लेकर काफी उत्साहित थे। चोट के कारण अब उनका ध्यान वनडे सीरीज के लिए समय पर फिट होने पर केंद्रित रहेगा।

    इस बीच, तेज गेंदबाज काइल जेमिसन कार्यभार प्रबंधन के तहत वेलिंगटन में रुकेंगे। वह 31 अक्टूबर को फोर्ड ट्रॉफी में कैंटरबरी की ओर से खेल सकते हैं। इसके बाद दो नवंबर को न्यूजीलैंड की राष्ट्रीय टीम से जुड़ने की योजना है। टीम प्रबंधन वनडे सीरीज से पहले अपने प्रमुख तेज गेंदबाजों की फिटनेस पर नजर बनाए हुए है।

    न्यूजीलैंड की टीम में कप्तान मिचेल सेंटनर के अलावा फिन एलन, माइकल ब्रेसवेल, मार्क चैपमैन, जोश क्लार्कसन, डेवोन कॉन्वे, जैकब डफी, मैट फिशर, जकारी फाउलकेस, बेवोन जैकब्स, एडम मिल्ने, डेरिल मिचेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम सीफर्ट, नाथन स्मिथ और ब्लेयर टिकनर शामिल हैं।

  • रावण को पूरी तरह बुरा नहीं मानतीं साई पल्लवी, रामायण पर बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    रावण को पूरी तरह बुरा नहीं मानतीं साई पल्लवी, रामायण पर बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री साई पल्लवी का रावण के व्यक्तित्व को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। फिल्म रामायण के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान उन्होंने कहा कि रावण पूरी तरह बुरा नहीं था। उनके इस कथन के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनके विचारों पर सवाल उठाए, जबकि कई लोगों ने बयान का समर्थन करते हुए रावण के व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं की ओर ध्यान दिलाया।

    27 अक्टूबर को लॉस एंजेलिस में आयोजित फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान साई पल्लवी ने भारतीय संस्कृति और महाकाव्य रामायण के महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और महाकाव्यों को समझने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह फिल्म एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकती है। उनके मुताबिक, रामायण को धर्मग्रंथ मानकर उस पर विश्वास करने वालों के लिए आत्मचिंतन करना भी जरूरी है।

    साई पल्लवी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अच्छाइयों और बुराइयों को पहचानना चाहिए। समय के साथ अपनी कमियों को समझकर उनमें सुधार करने का प्रयास करना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने रावण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पूरी तरह बुरा नहीं था। अभिनेत्री ने अपने बयान के माध्यम से इस बात पर जोर दिया कि लोगों को अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर खुद को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

    हालांकि, रावण को लेकर उनकी यह टिप्पणी सामने आने के बाद कई लोगों ने नाराजगी जताई। कुछ यूजर्स का कहना था कि रावण के कृत्यों को देखते हुए उसके बारे में इस तरह की बात करना उचित नहीं है। एक यूजर ने सवाल उठाया कि किसी अपहरण करने वाले की तारीफ कैसे की जा सकती है। कुछ लोगों ने अभिनेत्री से अपने बयान को स्पष्ट करने की भी मांग की।

    दूसरी ओर, साई पल्लवी के समर्थन में भी कई प्रतिक्रियाएं सामने आईं। समर्थकों ने कहा कि रावण के व्यक्तित्व को केवल एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। कुछ लोगों ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि देश के कई हिस्सों में दशहरे पर रावण का दहन किया जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर उसकी पूजा भी होती है। उनके अनुसार, यह अंतर रावण को लेकर प्रचलित विभिन्न मान्यताओं और विचारों को दर्शाता है।

    कुछ यूजर्स ने रावण के शिवभक्त और महान संगीतज्ञ होने का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके व्यक्तित्व में अच्छाइयां भी थीं। उनका मानना था कि साई पल्लवी की बात को संदर्भ से अलग करके विवाद का विषय बनाया जा रहा है। इस तरह अभिनेत्री के बयान पर आलोचना और समर्थन, दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

    इस विवाद के बीच फिल्म रामायण भी चर्चा में बनी हुई है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी यह फिल्म दो भागों में रिलीज होने वाली है। फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर को दिवाली के अवसर पर रिलीज होना निर्धारित है, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 के आसपास आने की योजना है।

    फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। वहीं, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म की कास्टिंग और अन्य पहलुओं के साथ अब साई पल्लवी का बयान भी चर्चा का हिस्सा बन गया है।

  • देशभर में आज करवा चौथ की धूम…. सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत

    देशभर में आज करवा चौथ की धूम…. सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत


    नई दिल्ली।
    देशभर में करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) का व्रत आज 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जा रहा है. इस दिन सुहागिन महिलाएं (Married Women) पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं. सुबह सरगी खाने के बाद व्रत शुरू होता है और रात में चंद्रमा (Moon) को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है. करवा चौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और व्रत कथा का विशेष महत्व है।

    करवा चौथ 2026 तिथि
    हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. साल 2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जा रहा है. इस दिन महिलाएं सुबह से चंद्रमा निकलने तक व्रत रखती हैं. शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है।


    करवा चौथ 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

    करवा चौथ पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाता है. दिल्ली-एनसीआर के लिए पूजा का समय इस प्रकार बताया जा रहा है:
    – करवा चौथ की तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
    – चतुर्थी तिथि शुरू: 29 अक्टूबर की रात करीब 1:06 बजे
    – चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर की रात करीब 10:09 बजे
    – पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम करीब 5:38 बजे से 6:56 बजे तक
    – दिल्ली में चंद्रोदय: रात करीब 8:17 बजे
    – गुरुग्राम में चंद्रोदय: रात करीब 8:18 बजे

    चंद्रोदय का समय शहर के हिसाब से बदल सकता है. इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय चंद्रोदय समय-सारणी से समय की पुष्टि जरूर कर लें.


    करवा चौथ पर सुबह सरगी खाने की परंपरा

    करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं. कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी देती हैं. इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे और दूसरी पौष्टिक चीजें शामिल होती हैं. सरगी खाने के बाद महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं और फिर पूरे दिन भोजन नहीं करतीं.


    परंपरा के अनुसार, कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं.

    करवा चौथ की पूजा के लिए महिलाएं पहले से ही थाली तैयार कर लेती हैं. पूजा में आमतौर पर इन चीजों की जरूरत होती है। करवा या मिट्टी का पात्र, जल से भरा लोटा, पूजा की थाली, छलनी, दीपक, घी, रुई, रोली, कुमकुम, अक्षत, हल्दी, फूल, मिठाई, फल, धूप-अगरबत्ती और भगवान शिव, माता पार्वती तथा भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा. इसके अलावा परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा में इस्तेमाल होने वाली दूसरी सामग्री भी रखी जा सकती है।


    करवा चौथ पूजा विधि: ऐसे करें पूजा

    1. सुबह व्रत का संकल्प लें: सूर्योदय से पहले सरगी खाएं और व्रत का संकल्प लें. इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पालन करें.
    2. शाम को पूजा की तैयारी करें: घर के पूजा स्थल की सफाई करें. चौकी पर कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
    3. देवी-देवताओं का पूजन करें: दीपक जलाएं और रोली, अक्षत, फूल तथा मिठाई अर्पित करें. माता पार्वती से अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कामना करें.
    4. करवा माता की पूजा करें: करवा में जल भरकर पूजा में रखें. अपने परिवार और क्षेत्र में प्रचलित रीति-रिवाजों के अनुसार करवा पूजन की रस्म पूरी करें.
    5. व्रत कथा सुनें: पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा पढ़ें या सुनें. इसके बाद आरती करें, परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
    6. चंद्रमा को अर्घ्य दें: रात में चंद्रमा दिखाई देने पर जल अर्पित करें. कई जगहों पर महिलाएं छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखती हैं.
    7. पति के हाथों खोलें व्रत: चंद्रमा की पूजा के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है. इसके बाद महिलाएं भोजन करती हैं.


    करवा चौथ व्रत कथा

    करवा चौथ पर वीरावती की कथा सुनने की परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कथा का संबंध व्रत की श्रद्धा और पति की लंबी उम्र की कामना से है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की वीरावती नाम की बेटी थी. वह अपने सात भाइयों की इकलौती बहन थी. विवाह के बाद जब वीरावती ने पहली बार करवा चौथ का व्रत रखा, तो वह सुबह से ही भूखी-प्यासी रहकर चंद्रमा निकलने की प्रतीक्षा करने लगी। दिनभर भूखे रहने के कारण वीरावती कमजोर पड़ने लगी. अपनी बहन की हालत देखकर उसके सातों भाई परेशान हो गए. वे चाहते थे कि उनकी बहन जल्द से जल्द भोजन कर ले. इसके लिए उन्होंने एक उपाय सोचा.

    कथा के अनुसार, भाइयों ने दूर एक पेड़ पर दीपक जलाकर छलनी की ओट में रख दिया. दूर से देखने पर ऐसा लगा, जैसे चंद्रमा निकल आया हो. वीरावती ने उस रोशनी को चंद्रमा समझ लिया और उसके दर्शन करने के बाद व्रत खोलने बैठ गई। लेकिन जैसे ही उसने भोजन करना शुरू किया, उसे अपने पति के बारे में अशुभ समाचार मिला. यह सुनकर वीरावती दुखी हो गई. उसे अपनी भूल का एहसास हुआ, उसने माता पार्वती की आराधना शुरू कर दी. उसने सच्चे मन से प्रार्थना की कि उसके पति को जीवनदान मिले.

    कथा के प्रचलित रूप के अनुसार, वीरावती की भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उसे आशीर्वाद दिया और उसके पति को फिर से जीवन मिल गया. इसके बाद वीरावती ने श्रद्धा और विधि-विधान के साथ व्रत पूरा किया। इसी मान्यता के चलते करवा चौथ पर महिलाएं चंद्रमा के दर्शन करने, पूजा करने और व्रत कथा सुनने के बाद ही व्रत खोलती हैं।


    करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का महत्व

    करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा के दर्शन का खास महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं जल अर्पित करती हैं. इसके बाद कई परिवारों में छलनी से चंद्रमा और पति का चेहरा देखने की रस्म निभाई जाती है. पति पत्नी को जल पिलाकर व्रत खुलवाते हैं. हालांकि, इस रस्म का तरीका अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकता है।


    करवा चौथ पर इन बातों का रखें ध्यान

    करवा चौथ के दिन पूजा की तैयारी समय से कर लें. शाम के शुभ मुहूर्त में पूजा करें, व्रत कथा सुनना न भूलें. चंद्रमा निकलने के समय की पुष्टि अपने शहर के अनुसार करें. अगर बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता, तो जल्दबाजी में किसी दूसरी रोशनी को चंद्रमा न समझें. ऐसी स्थिति में अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मार्गदर्शन का पालन करें। करवा चौथ पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और साथ निभाने के संकल्प से जुड़ा त्योहार है. इस दिन महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।

  • MP के DGP कैलाश मकवाणा 30 नवंबर को हो रहे रिटायर, अगले दावेदारों के नाम आए सामने!

    MP के DGP कैलाश मकवाणा 30 नवंबर को हो रहे रिटायर, अगले दावेदारों के नाम आए सामने!


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा (DGP Kailash Makwana) की सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मकवाणा 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त (Retired) होंगे। गृह विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। इससे अब प्रदेश के अगले पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिक गई हैं। वरुण कपूर (Varun Kapoor), उपेंद्र जैन (Upendra Jain) और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (Pragya Richa Srivastava) के नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।

    1 दिसंबर को प्रदेश के नए डीजीपी ज्वाइंन करेंगे। 1988 बैच के IPS अधिकारी मकवाणा को दिसंबर 2024 में प्रदेश का डीजीपी बनाया गया था। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, वे 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 2006 और 2018 में दिए गए फैसलों का भी उल्लेख किया गया है।


    दो साल के कार्यकाल को लेकर उठा था सवाल

    मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख तय होने से पहले पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और शासन के बीच इस विषय पर चर्चा हुई थी। बताया गया कि पीएचक्यू ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर मकवाणा का कार्यकाल दो दिसंबर 2026 तक रखने का सुझाव दिया था। इसके पीछे उनकी जॉइनिंग की तारीख और डीजीपी के लिए निर्धारित दो साल के कार्यकाल का तर्क दिया गया था। इस प्रस्ताव के बाद उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा था। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंचा। इसके बाद सरकार ने 30 नवंबर को ही सेवानिवृत्ति तय करते हुए आदेश जारी कर दिया।


    नए डीजीपी की दौड़ में तीन नामों की चर्चा ज्यादा

    मध्यप्रदेश के अगले पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए राज्य सरकार 12 आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेज चुकी है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत यूपीएससी तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद सरकार नए डीजीपी के नाम पर निर्णय लेगी। संभावित दावेदारों में जेल विभाग के महानिदेशक वरुण कपूर, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के प्रमुख उपेंद्र जैन और होमगार्ड की महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। हालांकि, अंतिम चयन यूपीएससी से आने वाले पैनल और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।


    वरुण कपूर की दावेदारी पर क्यों टिकी नजरें?

    नए डीजीपी के चयन में अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की तारीख भी अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय शेष होना चाहिए। इसी वजह से वरुण कपूर की दावेदारी को लेकर भी चर्चा चल रही थी। यदि मकवाणा की सेवानिवृत्ति दिसंबर में आगे बढ़ती, तो कपूर के पास बची सेवा अवधि के कारण उनकी पात्रता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।