Blog

  • मध्य प्रदेश में 12 IPS अधिकारियों के तबादले, पांच जिलों को मिले नए SP, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में भी बदलाव

    मध्य प्रदेश में 12 IPS अधिकारियों के तबादले, पांच जिलों को मिले नए SP, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में भी बदलाव

    मध्य प्रदेश : में पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर की देर रात भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 12 अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए। इस बदलाव में पांच जिलों के पुलिस अधीक्षकों की जिम्मेदारी बदली गई है। नर्मदापुरम, बैतूल, पन्ना, हरदा और अलीराजपुर को नए पुलिस अधीक्षक मिले हैं। इसके अलावा भोपाल पुलिस मुख्यालय, नगरीय पुलिस और विशेष सशस्त्र बल की विभिन्न इकाइयों में भी अधिकारियों की नई पदस्थापना की गई है।

    नर्मदापुरम जिले में दीपक कुमार शुक्ला को नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले उज्जैन में विशेष सशस्त्र बल की 32वीं वाहिनी के सेनापति के रूप में कार्यरत थे। नर्मदापुरम के पूर्व पुलिस अधीक्षक साईंकृष्ण एस. थोठा को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव के तहत जिले की पुलिस व्यवस्था की कमान नए अधिकारी को सौंपी गई है।

    बैतूल जिले में भी पुलिस अधीक्षक बदल दिया गया है। यहां अमित सक्सेना को नया एसपी नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे। बैतूल के पूर्व एसपी वीरेंद्र जैन को भोपाल नगरीय पुलिस में यातायात से संबंधित जिम्मेदारी दी गई है। उनकी नई नियुक्ति के तहत वह भोपाल में पुलिस उपायुक्त के रूप में यातायात व्यवस्था संभालेंगे।

    पन्ना जिले में सव्यसाची सराफ को नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वह इससे पहले इंदौर में साइबर पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। पन्ना की पूर्व एसपी निवेदिता नायडू को सागर स्थित विशेष सशस्त्र बल की 10वीं वाहिनी का सेनापति नियुक्त किया गया है। इस बदलाव से पन्ना में जिला पुलिस का नेतृत्व नए अधिकारी के हाथों में आ गया है।

    हरदा जिले में अंकित जायसवाल को पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह इससे पहले भोपाल रेल पुलिस में एसपी के पद पर तैनात थे। हरदा के पूर्व एसपी शशांक को पुलिस मुख्यालय भोपाल में सहायक पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, अलीराजपुर जिले में समर वर्मा को नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वह उज्जैन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे। अलीराजपुर के पूर्व एसपी रघुवंश कुमार सिंह को भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) की जिम्मेदारी दी गई है।

    जिला पुलिस में बदलाव के साथ विशेष सशस्त्र बल की वाहिनियों में भी नई तैनाती की गई है। इंदौर में प्रथम वाहिनी के सेनापति अभिषेक आनंद को 15वीं वाहिनी का सेनापति बनाया गया है। उन्हें पुलिस प्रशिक्षण केंद्र (PTC), इंदौर के पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इसी तरह श्रुतकीर्ति सोमवंशी को ग्वालियर में विशेष सशस्त्र बल की दूसरी वाहिनी का सेनापति नियुक्त किया गया है। उन्हें 14वीं वाहिनी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।

    इस प्रशासनिक बदलाव के तहत जिला पुलिस, पुलिस मुख्यालय और विशेष सशस्त्र बल में अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। पांच जिलों में नए पुलिस अधीक्षकों की नियुक्ति के साथ कई अधिकारियों को मुख्यालय और अन्य इकाइयों में नई भूमिका मिली है। इन आदेशों के बाद संबंधित अधिकारियों को अपनी नई पदस्थापना के अनुसार जिम्मेदारी संभालनी होगी।

  • एशियन पेंट्स का मुनाफा 7.5% बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये, निवेशकों को मिलेगा 5.75 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड

    एशियन पेंट्स का मुनाफा 7.5% बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये, निवेशकों को मिलेगा 5.75 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड

    नई दिल्ली ।देश की सबसे बड़ी पेंट निर्माता कंपनियों में शामिल एशियन पेंट्स ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.5 प्रतिशत बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। नतीजों के साथ कंपनी ने शेयरधारकों के लिए अंतरिम डिविडेंड का भी एलान किया है।

    एशियन पेंट्स का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 1,539 करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले दूसरी तिमाही में मुनाफा करीब 30 प्रतिशत घटकर 1,067.6 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि के बावजूद तिमाही-दर-तिमाही प्रदर्शन में दबाव दिखाई दिया। कंपनी के कारोबार पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ा।

    कंपनी की बिक्री से होने वाली आय में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में एशियन पेंट्स का रेवेन्यू 9,954 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 8,514 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर राजस्व में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 10,521 करोड़ रुपये के मुकाबले दूसरी तिमाही का रेवेन्यू करीब पांच प्रतिशत कम रहा।

    कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण लागत से जुड़ा दबाव बना रहा। भू-राजनीतिक तनावों के चलते आपूर्ति व्यवस्था में आई रुकावटों ने भी कच्चे माल की उपलब्धता को प्रभावित किया। कंपनी ने बताया कि इन परिस्थितियों का असर जुलाई से सितंबर के दौरान उसके कामकाज पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। लागत में बढ़ोतरी के बीच कारोबार की वृद्धि और मुनाफे के प्रदर्शन पर दबाव एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

    डिविडेंड की घोषणा इस तिमाही के नतीजों का एक प्रमुख हिस्सा है। एशियन पेंट्स ने एक रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 5.75 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देने का फैसला किया है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर 2026 तय की गई है। पात्र शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान 13 नवंबर 2026 को या उसके बाद किया जाएगा। इस घोषणा से उन निवेशकों को लाभ मिलेगा, जो निर्धारित रिकॉर्ड डेट के अनुसार डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।

    घरेलू कारोबार में कंपनी के डेकोरेटिव पेंट्स खंड ने वृद्धि दर्ज की। दूसरी तिमाही में घरेलू डेकोरेटिव पेंट्स कारोबार का वॉल्यूम 6.4 प्रतिशत और वैल्यू 14.5 प्रतिशत बढ़ी। कुल घरेलू कोटिंग्स कारोबार में वैल्यू के आधार पर 16.4 प्रतिशत और वॉल्यूम के आधार पर 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस प्रदर्शन में इंडस्ट्रियल कोटिंग्स कारोबार का भी योगदान रहा, जहां वैल्यू के लिहाज से 31.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी बिक्री बढ़ी, लेकिन मुनाफे पर दबाव बना रहा। इस खंड से शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 846 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,095.6 करोड़ रुपये हो गई, जो 29.5 प्रतिशत की वृद्धि है। स्थिर मुद्रा के आधार पर राजस्व में 23.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय कारोबार का कर-पूर्व मुनाफा 31 प्रतिशत घटकर 52.7 करोड़ रुपये रह गया। इससे स्पष्ट है कि बिक्री में बढ़ोतरी के साथ लागत और लाभप्रदता कंपनी के प्रदर्शन के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।

  • MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    मध्य प्रदेश: के बालाघाट जिले में लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे 100 गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। राज्य सरकार की इस पहल के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीणों की जरूरतों को समझकर ऐसे विकास कार्यों की योजना बनाना है, जिनसे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिल सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को अपने निर्धारित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे बातचीत करने, समस्याओं की जानकारी जुटाने और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया 14 दिनों के भीतर पूरी की जानी है। इसके बाद गांवों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

    अभियान के लिए बालाघाट जिले के 100 गांवों को चार क्लस्टर में विभाजित किया गया है। इनमें बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंड के गांव शामिल हैं। अलग-अलग विभागों की टीमें अपने निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थानीय परिस्थितियों और विकास की संभावनाओं का आकलन कर रही हैं। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि किन सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है और किन कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    26 अक्टूबर को अधिकारियों की टीमों ने विभिन्न गांवों का दौरा कर लोगों से चर्चा की। लांजी क्षेत्र में कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों में ग्रामीणों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली गई। बैहर क्षेत्र की टीम दड़ेकसा, बिलालकसा, सोनगुड्डा, लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठरी सहित कई गांवों में पहुंची। वहीं, किरनापुर क्षेत्र के सीतापार और बोरवन गांवों में भी स्थानीय लोगों से बातचीत कर विकास की जरूरतों का पता लगाया गया।

    28 अक्टूबर को कलेक्टर आदित्य सिंह ने लांजी विकासखंड की देवरबेली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बरगुड़-सतोना, केराडीह, सायर और संदूका गांवों का भ्रमण किया। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अन्य विभागों की टीमों ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। इसके अतिरिक्त जनजातीय कार्य, पशु चिकित्सा, मत्स्यपालन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी अपने क्षेत्रों में सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाई।

    अभियान में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, सिंचाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, छात्रावासों और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता का भी आकलन किया जा रहा है। जहां सुविधाओं की कमी सामने आएगी, वहां जरूरत के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। पात्र ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करना भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसके लिए कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसे अवसरों की पहचान करना चाहता है, जिनसे ग्रामीण अपने क्षेत्र में ही आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले बालाघाट जिले के 100 पिछड़े गांवों में विकास कार्यों के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। अब जारी सर्वेक्षण और ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर योजनाओं की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर भ्रमण और रिपोर्ट तैयार करने का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान का लक्ष्य गांवों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार करना और स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका के बेहतर अवसर विकसित करना है।

  • माधव टाइगर रिजर्व में शिकारियों का खतरा बढ़ा, एक साल से लापता बाघिन एमटी-1 का सुराग नहीं, 11 बाघों की सुरक्षा चुनौती

    माधव टाइगर रिजर्व में शिकारियों का खतरा बढ़ा, एक साल से लापता बाघिन एमटी-1 का सुराग नहीं, 11 बाघों की सुरक्षा चुनौती


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। जंगल में बाघ, तेंदुए और अन्य वन्यजीव शिकारियों के निशाने पर होने की आशंका है। खास चिंता बाघिन एमटी-1 को लेकर है, जो करीब एक साल से लापता है। उसका कॉलर आईडी सिग्नल नहीं मिल रहा है और पार्क प्रबंधन भी अब तक उसकी लोकेशन का पता नहीं लगा पाया है। वन विभाग उसकी तलाश जारी रखे हुए है।

    माधव टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़कर 11 हो चुका है। इनमें चार शावक भी शामिल हैं। वहीं, शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं की संख्या 95 से अधिक बताई गई है। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या क्षेत्र के लिए अहम है, लेकिन इतने बड़े कुनबे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन के लिए बड़ी जिम्मेदारी भी है। हाल ही में कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में 19 महीने के एक चीता शावक की गोली लगने से मौत की घटना के बाद माधव टाइगर रिजर्व में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कूनो की सीमा के नजदीक स्थित इस रिजर्व में बाघों और दूसरे वन्यजीवों को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    बाघिन एमटी-1 की गुमशुदगी इस चिंता को और गंभीर बनाती है। करीब एक साल से उसकी गतिविधियों का पता नहीं चल पाया है। न तो उसके कॉलर आईडी से कोई सिग्नल मिल रहा है और न ही पार्क प्रबंधन उसे अपने निगरानी तंत्र के जरिए ट्रेस कर पा रहा है। हालांकि, बाघिन के लापता होने की वजह को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उसकी स्थिति का पता लगाने के लिए तलाश जारी है।

    वन्यजीवों के शिकार से जुड़ी घटनाएं भी चिंता का कारण हैं। जुलाई में आगरा वन प्रबंधन टीम ने 10 तेंदुओं की खाल के साथ चार शिकारियों को पकड़ा था। इस मामले में पकड़े गए एक व्यक्ति भोगीराम आदिवासी का संबंध शिवपुरी से होने की बात सामने आई थी। हालांकि, शिवपुरी के वन विभाग के अधिकारियों ने जिले से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था। इस प्रकरण ने वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनकी खाल के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    वन विभाग ने माधव टाइगर रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की तैयारी की है। पार्क प्रबंधन पैदल गश्त बढ़ाने के साथ जंगल में प्रवेश के प्रमुख रास्तों पर निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य बाहरी लोगों की आवाजाही की जानकारी समय पर हासिल करना है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। रिजर्व क्षेत्र में लगाए गए कैमरों के जरिए भी वन्यजीवों और जंगल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

    बाघों की मौजूदगी केवल जंगल के अंदरूनी हिस्सों तक सीमित नहीं रहती। कई बार वे सड़क किनारे और पहाड़ी इलाकों में भी दिखाई देते हैं, जबकि तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है। शिकारियों द्वारा जाल बिछाने या विस्फोटक का इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी वन विभाग के लिए चुनौती है।

    माधव टाइगर रिजर्व के बाघों से जुड़े मानव-संघर्ष के मामले भी सामने आ चुके हैं। अप्रैल 2026 में शिवपुरी के ऐरावन गांव के पास बाघिन एमटी-6 के हमले में 50 वर्षीय आदिवासी सरवन की मौत हो गई थी। डोगरपुर गांव में भी बाघों के हमले से कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इन घटनाओं के बीच वन्यजीवों की निगरानी और लोगों की सुरक्षा, दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।

    टाइगर रिजर्व के उप संचालक हरिओम के अनुसार, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पैदल गश्त को और मजबूत किया जाएगा। विभाग की टीमें जंगल के अलग-अलग हिस्सों में तैनात हैं और निगरानी लगातार की जा रही है। अब चुनौती बाघिन एमटी-1 का पता लगाने के साथ बढ़ते वन्यजीव कुनबे को शिकारियों से सुरक्षित रखने की है।

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों के लिए गठित कीं सात विशेष पीठें, 6 नवंबर तक चलेगी सुनवाई


    मध्य प्रदेश:
    हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने जमानत अर्जियों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए सात विशेष पीठों का गठन किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबित जमानत मामलों पर सुनवाई करना और उनके जल्द निराकरण की प्रक्रिया को गति देना है। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, ये विशेष पीठें 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक नियमित न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से सुनवाई करेंगी।

    नई व्यवस्था उन वकीलों और पक्षकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी जमानत अर्जियां निर्धारित अवधि के दौरान सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। संबंधित मामलों में अब विशेष पीठों के तय कार्यक्रम के अनुसार कार्यवाही होगी। इस पहल से लंबित अर्जियों को सुनवाई के लिए अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी मामले में जमानत मिलने या उसके अंतिम निराकरण का निर्णय संबंधित पीठ सुनवाई के दौरान उपलब्ध तथ्यों, दलीलों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर करेगी।

    जमानत अर्जियों की सुनवाई के लिए गठित सात एकल पीठों में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति आनंद पाठक, न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा, न्यायमूर्ति दीपक खोट, न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा के नाम शामिल हैं। जारी जानकारी में इन विशेष सुनवाई सत्रों के लिए न्यायाधीशों को जिम्मेदारी सौंपे जाने का उल्लेख है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सातों पीठों के गठन के बावजूद छह न्यायाधीशों के नाम ही स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

    विशेष पीठों के गठन के पीछे लंबित जमानत अर्जियों पर समयबद्ध सुनवाई की आवश्यकता प्रमुख मानी जा रही है। अदालतों में विभिन्न प्रकार के मामलों के बीच जमानत अर्जियों के लिए अलग समय निर्धारित होने से संबंधित प्रकरणों को सुनने की प्रक्रिया व्यवस्थित हो सकती है। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित अवधि में सूचीबद्ध अर्जियों पर सुनवाई की जाएगी। पक्षकारों और उनके अधिवक्ताओं को अपने मामले की सूची और निर्धारित समय के संबंध में हाईकोर्ट की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना होगा।

    जमानत अर्जियों के अलावा विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है। इसके तहत न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की एकल पीठ गठित की गई है, जो निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विविध अपीलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इस तरह हाईकोर्ट प्रशासन ने जमानत मामलों के साथ विविध अपीलों की सुनवाई के लिए भी न्यायिक कार्यवाही को व्यवस्थित करने का कदम उठाया है।

    विशेष पीठों की यह व्यवस्था 6 नवंबर तक निर्धारित है। इस दौरान नियमित न्यायिक कार्यवाही समाप्त होने के बाद दोपहर 2:30 बजे से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी। जिन पक्षकारों की अर्जियां इस अवधि में सूचीबद्ध हैं, उनके लिए सुनवाई की तारीख और पीठ की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। वकीलों को भी निर्धारित सूची के अनुसार तैयारी करनी होगी, ताकि अदालत के सामने आवश्यक दस्तावेज और दलीलें प्रस्तुत की जा सकें।

    हाईकोर्ट प्रशासन की इस पहल से लंबित जमानत अर्जियों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित अवधि में कितने मामलों की सुनवाई पूरी होती है और उनमें क्या आदेश पारित किए जाते हैं। फिलहाल, जबलपुर मुख्य पीठ में 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक चलने वाले विशेष सुनवाई कार्यक्रम पर संबंधित पक्षकारों और अधिवक्ताओं की नजर रहेगी।

  • शिवपुरी में दो बहनों और चार बच्चों की कुएं में डूबने से मौत, परिवारों में पसरा मातम..

    शिवपुरी में दो बहनों और चार बच्चों की कुएं में डूबने से मौत, परिवारों में पसरा मातम..


    शिवपुरी जिले:
    में बुधवार को हुई दो अलग-अलग घटनाओं में दो बहनों और चार बच्चों की मौत हो गई। पहली घटना बैराड़ थाना क्षेत्र के गूंगरगांव में हुई, जहां आठ माह की गर्भवती अंजलि रावत ने अपने छह वर्षीय बेटे के साथ कुएं में छलांग लगा दी। दूसरी घटना कोलारस थाना क्षेत्र के सेसई गांव से जुड़ी है, जहां अंजलि की बड़ी बहन सीता रावत अपने तीन बच्चों के साथ कुएं में मृत पाई गई। दोनों घटनाओं में कुल छह लोगों की जान चली गई। पुलिस ने दोनों मामलों की अलग-अलग जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, अंजलि रावत की उम्र 35 वर्ष थी और वह आठ माह की गर्भवती थी। उसके पति धर्मवीर सिंह रावत की करीब डेढ़ महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद से अंजलि मानसिक तनाव में बताई जा रही थी। बुधवार दोपहर करीब एक बजे उसने अपने छह वर्षीय बेटे प्रशांत के साथ कुएं में छलांग लगा दी। इस घटना में मां और बेटे की मौत हो गई।

    घटना के समय अंजलि की तीन बेटियां भी उसके साथ मौजूद थीं। उसकी बड़ी बेटी मोनिका ने अपनी और अपनी दोनों छोटी बहनों की जान बचा ली। इसके बाद वह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद परिवार में चिंता और शोक का माहौल बन गया। अंजलि की मौत के बाद उसके परिवार के सामने पहले से मौजूद दुख और गहरा गया।

    इसी दिन कुछ घंटे बाद अंजलि की बड़ी बहन सीता रावत से जुड़ी दूसरी घटना सामने आई। 40 वर्षीय सीता कोलारस थाना क्षेत्र के सेसई गांव की निवासी थी। बुधवार को वह अपनी बेटी राखी, उम्र 14 वर्ष, बेटी प्रियंका, उम्र 11 वर्ष और बेटे श्लोक, उम्र छह वर्ष के साथ खोंकर गांव स्थित खेत पर गई थी। शाम करीब छह बजे तक जब वे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी।

    खेत पर पहुंचने के बाद परिजनों को कुएं के पास चप्पलें दिखाई दीं। कुएं में देखने पर एक बच्चे का शव नजर आया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। कोलारस पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की। बुधवार रात करीब 11 बजे तक सीता और उसके तीनों बच्चों के शव कुएं से बाहर निकाल लिए गए। इस घटना में सीता, राखी, प्रियंका और श्लोक की मौत हुई।

    परिवार के सदस्य हाकम सिंह के मुताबिक, दोनों बहनों के बीच गहरा लगाव था और वे अक्सर फोन पर बातचीत करती थीं। परिजनों ने सीता की मौत को छोटी बहन अंजलि की मृत्यु से जुड़े सदमे से जोड़कर देखा है। हालांकि, सीता ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस की जांच महत्वपूर्ण होगी।

    बैराड़ थाना प्रभारी रवि चौहान के अनुसार, अंजलि और उसके बेटे के शव शिवपुरी जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाए गए थे। वहीं, कोलारस थाना प्रभारी जितेंद्र चंदेलिया ने बताया कि सीता और उसके तीनों बच्चों के शव बुधवार रात तक कुएं से निकाल लिए गए थे। दोनों घटनाओं में पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जानी थी। पुलिस अलग-अलग प्रकरणों की जांच कर रही है, ताकि घटनाओं से जुड़े हालात और कारणों का पता लगाया जा सके।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ‘जनता का महाभियोग’ की तैयारी, खड़गे के आवास पर जुटे इंडिया गठबंधन के नेता

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ‘जनता का महाभियोग’ की तैयारी, खड़गे के आवास पर जुटे इंडिया गठबंधन के नेता


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडिया गठबंधन ने ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम की तैयारी तेज कर दी है। इसी सिलसिले में गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित गठबंधन के कई नेता शामिल हुए। बैठक में आगामी विरोध कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर चर्चा की गई। विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।

    कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मांग के तहत विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली स्थित 10 राजाजी मार्ग पर ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। यह स्थान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आवास है। कार्यक्रम के जरिए विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच उठाने और चुनावी व्यवस्था से जुड़े अपने आरोपों को सामने रखने की तैयारी कर रहा है। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली प्रस्तावित है। बैठक को इस रैली से पहले विपक्षी दलों की रणनीति तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने प्रस्तावित कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए इसके सफल होने की उम्मीद जताई। उनके मुताबिक, इसमें सांसदों, राजनीतिक दलों के नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, बुद्धिजीवियों और उन मतदाताओं की भागीदारी हो सकती है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित लोग अपने विचार रखेंगे और यह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का माध्यम बनेगा।

    दिल्ली के व्यापारियों की ओर से गठबंधन की रैली को लेकर जताई जा रही चिंता पर भी महुआ माजी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें कार्यक्रम को लोकतंत्र की रक्षा और लोगों की आवाज उठाने के उद्देश्य से आयोजित बताया गया है। महुआ माजी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग स्वीकार कर लेती है, तो उनके अनुसार विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है। यह उनकी ओर से दिया गया राजनीतिक बयान है।

    बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ गौरव गोगोई ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गौरव गोगोई ने भाजपा पर कथित अनियमितताओं से जुड़ी सच्चाई सामने आने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के सामने यह मुद्दा रखना चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां किस तरह हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर संविधान की भावना का उल्लंघन करने और चुनावी लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं। फिलहाल, 30 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली पर राजनीतिक गतिविधियां केंद्रित हैं। इन आयोजनों के जरिए विपक्ष एसआईआर, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

  • धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ पर ली चुटकी, बोले- एक दिन व्रत रखती हैं पत्नियां और 364 दिन सुनाती हैं ताने

    धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ पर ली चुटकी, बोले- एक दिन व्रत रखती हैं पत्नियां और 364 दिन सुनाती हैं ताने

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले के करैरा में चल रही रामकथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की एक टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। कथा के बीच उन्होंने करवा चौथ के व्रत को लेकर अपने चुटीले अंदाज में ऐसी बात कही, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस दौरान उन्होंने करवा चौथ को मजाकिया लहजे में ‘खसम पूजन दिवस’ कहा और पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर हास्यपूर्ण टिप्पणी की।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने प्रवचनों के दौरान धार्मिक विषयों के साथ-साथ अपनी खास बोलने की शैली के लिए भी जाने जाते हैं। करैरा में आयोजित रामकथा के दौरान भी उनका यही अंदाज देखने को मिला। कथा के बीच करवा चौथ का जिक्र करते हुए उन्होंने विवाहित महिलाओं के व्रत और पति-पत्नी के बीच होने वाली नोकझोंक पर चुटकी ली। उनकी इस टिप्पणी का वीडियो सामने आने के बाद यह प्रसंग लोगों के बीच चर्चा में आ गया।

    धीरेंद्र शास्त्री ने करवा चौथ को ‘खसम पूजन दिवस’ बताते हुए कहा कि पत्नियां साल में एक दिन अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि बाकी 364 दिन उन्हें ताने मारती रहती हैं। उनकी यह बात हास्यपूर्ण अंदाज में कही गई थी। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने वैवाहिक जीवन में होने वाली सामान्य नोकझोंक को अपने प्रवचन की शैली में पेश किया।

    करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद अपना उपवास खोलती हैं। कई परिवारों में इस अवसर पर पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक रस्में भी निभाई जाती हैं। ऐसे में इस पर्व का उल्लेख करते हुए की गई धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी ने लोगों का ध्यान खींचा है।

    करैरा में चल रही रामकथा के दौरान दिया गया यह बयान अब सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। वीडियो में उनकी टिप्पणी को लेकर लोगों की दिलचस्पी दिखाई दे रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस बयान पर किसी औपचारिक विवाद या विरोध की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इस प्रसंग को उनके हास्यपूर्ण संबोधन और वायरल वीडियो के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रवचनों में धार्मिक कथाओं के साथ स्थानीय संदर्भों और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े उदाहरणों का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है। करवा चौथ पर उनकी यह टिप्पणी भी उसी शैली का हिस्सा रही। उनके कथन में पति-पत्नी के रिश्ते की नोकझोंक को हास्य के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसने कथा के इस हिस्से को चर्चा में ला दिया।

    शिवपुरी जिले के करैरा में जारी रामकथा के बीच सामने आए इस वीडियो ने एक बार फिर धीरेंद्र शास्त्री के बोलने के अंदाज को सुर्खियों में ला दिया है। उनकी टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है। हालांकि, इस बयान पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इतना स्पष्ट है कि करवा चौथ को लेकर कही गई उनकी चुटीली बात ही इस वीडियो के चर्चा में आने की प्रमुख वजह बनी है।

  • PNB की ग्रेटर नोएडा शाखा में 35 करोड़ की कथित गड़बड़ी, जानिए बैंक खाते और जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के तरीके

    PNB की ग्रेटर नोएडा शाखा में 35 करोड़ की कथित गड़बड़ी, जानिए बैंक खाते और जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के तरीके


    नई दिल्ली ।
    बैंक में जमा अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे, यह हर खाताधारक की सबसे बड़ी चिंता होती है। लेकिन पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा शाखा से जुड़ी करीब 35 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी ने ग्राहकों की जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में 25 ग्राहकों की शिकायतें सामने आने, कई बैंक कर्मचारियों को निलंबित किए जाने और प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी है। हालांकि, रकम किस तरह गायब हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    मामले में ग्रेटर नोएडा के एक गांव में रहने वाले 60 वर्षीय संतोष ने आरोप लगाया कि उनके बैंक खाते में जमा रकम में गड़बड़ी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी करीब 1.18 करोड़ रुपये की राशि गायब होने का दावा किया गया है। संतोष का कहना है कि उन्होंने जमीन और जेवर से जुड़े लेनदेन के बाद यह पैसा बैंक में जमा किया था। अन्य ग्राहकों ने भी अपने खातों से बड़ी रकम गायब होने की शिकायत की है। प्रभावित लोगों में ऐसे ग्राहक भी बताए गए हैं, जिन्होंने बेटी की शादी, इलाज और परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए बचत की थी।

    इस तरह के मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बैंक खाते में गड़बड़ी का पता कैसे लगाया जाए। अनधिकृत लेनदेन, जाली दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर और डिजिटल माध्यम से धोखाधड़ी अलग-अलग परिस्थितियों में वित्तीय नुकसान का कारण बन सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं को पीएनबी के मौजूदा मामले का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगी।

    खाताधारकों को अपनी पासबुक, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल पर मिलने वाले लेनदेन संदेशों की नियमित जांच करनी चाहिए। खाते में दर्ज जमा और निकासी का मिलान करने से किसी संदिग्ध गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यदि बैंक रिकॉर्ड में दिखाई देने वाली राशि और वास्तविक बैलेंस के बीच अंतर नजर आए, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए।

    बैंकिंग धोखाधड़ी में बाहरी साइबर अपराधियों के साथ-साथ आंतरिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग की आशंका भी अलग-अलग मामलों में सामने आती रही है। साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और खाते को सुरक्षित रखने, केवाईसी अपडेट करने या किसी समस्या को ठीक करने के नाम पर गोपनीय जानकारी मांगते हैं। ऐसे में ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड और कार्ड की संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान लिंक खोलने या किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने से भी बचना जरूरी है।

    बैंक में जमा रकम की सुरक्षा के लिए भारत में जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम यानी डीआईसीजीसी की व्यवस्था है। इसके तहत पात्र बैंक जमाओं पर निर्धारित शर्तों के अनुसार एक जमाकर्ता को एक बैंक में समान अधिकार और क्षमता के तहत मूलधन तथा ब्याज मिलाकर अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा मिलती है। यह सीमा हर खाते पर अलग-अलग लागू नहीं होती। एक ही बैंक में संबंधित जमाकर्ता की पात्र जमाओं को जोड़कर इसकी गणना की जाती है। इसलिए किसी बैंक में गड़बड़ी की शिकायत सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक की पूरी जमा राशि स्वतः बीमित है।

    यदि खाते से बिना अनुमति पैसे निकलने का पता चले, तो सबसे पहले संबंधित बैंक की शाखा या आधिकारिक ग्राहक सेवा के माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शिकायत संख्या, बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन से जुड़े संदेशों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस से भी संपर्क करना चाहिए। बैंक से निर्धारित प्रक्रिया के तहत समाधान नहीं मिलने पर पात्रता के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक की शिकायत व्यवस्था का सहारा लिया जा सकता है।

    पीएनबी की ग्रेटर नोएडा शाखा से जुड़ा मामला ग्राहकों के लिए बैंक खातों की नियमित निगरानी का महत्व सामने लाता है। किसी भी संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत कार्रवाई करना, गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना और बैंक से लिखित शिकायत करना नुकसान को सीमित करने में मददगार हो सकता है। वहीं, बैंकिंग संस्थानों के लिए आंतरिक नियंत्रण मजबूत रखना और शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना जरूरी है।

  • सिंगरौली के बसौड़ा गांव में सड़क का अभाव, बीमार आदिवासी को कुर्सी पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर परिजन

    सिंगरौली के बसौड़ा गांव में सड़क का अभाव, बीमार आदिवासी को कुर्सी पर बैठाकर अस्पताल पहुंचाने को मजबूर परिजन

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव का मामला सामने आया है। देवसर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जोगियानी के बसौड़ा गांव में रहने वाले 25 आदिवासी परिवारों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। हाल ही में एक ग्रामीण की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को उन्हें कुर्सी पर बैठाकर सड़क तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद गांव में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    जानकारी के मुताबिक, बसौड़ा गांव के निवासी ईश्वर सिंह गोंड की तबीयत रात के समय अचानक बिगड़ गई। उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उनकी हालत गंभीर हो गई। ऐसे में परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की थी। गांव में सड़क नहीं होने के कारण सामान्य वाहन से घर तक पहुंचना संभव नहीं था। मजबूरी में परिजनों ने उन्हें कुर्सी पर बैठाया और उठाकर सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

    इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने के लिए सड़क की अहमियत को सामने रखा है। सड़क उपलब्ध नहीं होने पर एंबुलेंस और दूसरे वाहनों का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाने में अतिरिक्त समय और मेहनत लगती है। आपातकाल में यह परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि मरीज को जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है।

    बसौड़ा गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके लिए विधायक से लेकर जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों तक आवेदन दिए गए हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और पंचायत स्तर पर भी अपनी समस्या पहुंचाने की बात कही है। उनके अनुसार, सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भी भेजे गए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

    गांव के 25 आदिवासी परिवारों के लिए सड़क का अभाव केवल आवागमन की परेशानी नहीं है, बल्कि इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर संबंधित अधिकारी ध्यान देंगे और गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गांव तक सड़क नहीं होने की समस्या का समाधान कब होगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांग अधिकारियों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है। बीमार व्यक्ति को कुर्सी पर बैठाकर सड़क तक ले जाने की घटना ने उनकी परेशानी को उजागर किया है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से लोगों को अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में मदद मिलती है। बसौड़ा में सामने आई स्थिति बताती है कि सड़क निर्माण की मांग स्थानीय लोगों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सड़क निर्माण की स्वीकृति, बजट या काम शुरू होने की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

    फिलहाल, बसौड़ा के ग्रामीणों को सड़क बनने का इंतजार है। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन उनकी मांग पर कब कार्रवाई करता है और गांव के परिवारों को इस समस्या से राहत मिल पाती है या नहीं।